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हवस ( रिश्तों में गंदगी ) complete

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रज़िया और शाहिद आराम से बैठ कर बियर का मज़ा ले रहे थे।

रज़िया- यार शाहिद अब कितना तड़पाएगा.. बता भी दे क्या बात है कौन है ये शबनम?

शाहिद- देख रज़िया मैं तुझपे भरोसा करता हूँ इसलिए बता रहा हूँ.. मगर उन कमीनों को मत बताना समझी!

रज़िया- अरे यार तू जानता है.. मैं तेरी दीवानी हूँ। वो सब को तो तेरी वजह से झेलती हूँ.. तेरी कसम मैं किसी को नहीं बताऊंगी।

शाहिद- अच्छा तो सुन तू तो जानती है मैं अपने मॉम डैड का एक ही बेटा हूँ।

रज़िया- हाँ यार मुझे पता है।

शाहिद- सुन तो ले यार.. मेरे चाचा की बेटी फिरोजा को भी तू जानती है ना!

रज़िया- हाँ जानती हूँ.. तू क्या अपनी फैमिली के बारे में बता रहा है? यार शबनम के बारे में बता ना मुझे।

शाहिद- अबे साली.. वही बता रहा हूँ ये बातें बताऊंगा तब तेरे भेजे में सब बात घुसेंगी.. अब चुपचाप आगे सुन।

शाहिद के गुस्सा होने से रज़िया सहम गई उसने बस ‘हाँ’ में गर्दन हिलाई और अपने दोनों हाथ गाल पर रख कर बैठ गई।

शाहिद- गुड ऐसे ही सुन तू.. अब देख मेरी कोई बहन तो थी नहीं.. तो मैं बचपन से फिरोजा को अपनी बहन मानता था.. उसे मैं सग़ी से भी ज़्यादा मानता था।

‘ओके..’

‘फिरोजा मुझसे 10 साल बड़ी थी वो एकदम छोटे भाई की तरह मेरा ख्याल रखती थी। यहाँ तक की जब उसकी शादी हुई, मैं इतना रोया कि क्या बताऊं तुझे!’

रज़िया- हूँउऊ.. ये बातें नहीं पता थी मुझे.. फिर आगे क्या हुआ?

शाहिद- होना क्या था.. उसकी शादी एक अच्छे लड़के से हुई, वो यहीं बंबई में ही एक बैंक में जॉब करता था। धीमे-धीमे टाइम गुज़रता रहा। फिरोजा अम्मी बनी.. उसको एक लड़की हुई। छोटी गुड़िया के आने से मैं बहुत खुश था। जैसे-जैसे वो बड़ी हुई.. मैं उसके साथ खूब खेलता था। फिर आपा को एक बेटा हुआ.. मेरी ख़ुशी और बढ़ गई। अब तो सारा दिन आपा के घर आना-जाना लगा रहता था। दोनों बच्चे मुझसे इतने घुल गए कि क्या बताऊं, सारा दिन ‘मामू मामू..’ कहते मुझसे चिपके रहते थे।

रज़िया- वाउ यार तू तो किसी फिल्म की कहानी जैसे बता रहा है.. फिर क्या हुआ?

शाहिद- फिर जीजू की बैंक ने उनका ट्रान्सफर बंगलोर कर दिया.. पूरे 5 साल बाद आपा और जीजू वापस बंबई आए हैं क्योंकि आपा की तबीयत ठीक नहीं रहती इसलिए जीजू ने वापस अपना ट्रान्सफर बंबई करवा लिया। इत्तफ़ाक़ की बात ये है हमारे घर के सामने ही दोनों को घर मिल गया है।

रज़िया- इट्स गुड यार.. ये तो बहुत ख़ुशी की बात है.. मुझे भी आपा से मिलवाना, आज तक उनके बारे में बस सुना है.. उन्हें देखा नहीं है।

शाहिद- हाँ ज़रूर मिलवा दूँगा तुझे..

रज़िया- यार बुरा मत मानना.. कहानी का हैप्पी एंड हो गया मगर शबनम नहीं आई, ये कन्फ्यूजन दूर करो.. मेरा इस कहानी का शबनम से क्या सम्बन्ध है?

शाहिद- अबे साली तेरी समझ में नहीं आया क्या शबनम मेरी आपा की बेटी है और सुजान उसका छोटा भाई है?

रज़िया- ओ माय गॉड… मगर कन्फ्यूजन फिर भी वैसा का वैसा है.. शबनम तो बच्ची है और तेरी हालत तो ऐसी थी जैसे कोई गजब का माल देखा हो।

शाहिद- यार रज़िया तू समझ नहीं रही है वो लोग जब बंगलोर गए थे शबनम बच्ची ही थी.. आज जब उसको देखा तब भी मेरी नजर में बच्ची ही लगी, लेकिन वो अब बड़ी हो चुकी है, पूरे 18 की! और दोपहर से शाम तक जो हुआ, पूछ मत यार मेरी क्या हालत हुई है!

रज़िया- ओह गॉड अब समझी कुछ ना कुछ गड़बड़ तो हुई है.. यार बता जल्दी नहीं तो मेरा दिमाग़ सोच-सोच कर फट जाएगा।

शाहिद- यार तेरा क्या मेरा खुद का दिमाग़ घूमा हुआ है।

रज़िया- प्लीज़ यार बता ना?

शाहिद- अच्छा सुन.. वैसे तो वो लोग रात को शिफ्ट हो गए थे, मगर मेरी मुलाकात उनसे सुबह हुई।

रज़िया को अभी भी शाहिद की बात समझ नहीं आ रही थी मगर उसने सोचा दोबारा पूछेगी तो शाहिद गुस्सा होगा इसलिए वो चुपचाप बैठी थी।

शाहिद- सुबह हमने साथ नाश्ता किया फिर गप्पें लड़ाईं और दोपहर लंच तक सब कुछ ठीक था। उसके बाद मैं अपने कमरे में आराम करने चला गया बाकी सब नीचे बैठे बातें कर रहे थे।

रज़िया- अच्छा फिर क्या हुआ?

शाहिद- फिर क्या होना था.. रोज की तरह मैंने अपने सारे कपड़े निकाले सिर्फ़ एक पतला सा बरमूडा पहना और लेट गया।

रज़िया- सारे कपड़े मतलब.. अंडरवियर भी छी कितने गंदे हो तुम.. सिर्फ़ बरमूडा में सोते हो हा हा हा हा हा..

शाहिद- अबे साली, लड़के ऐसे ही सोते हैं.. अंडरवियर सारा दिन पहने रहेंगे, तो लंड को आराम कैसे मिलेगा?

रज़िया- पता है मेरे जानू.. मैं तो बस ऐसे ही मज़ाक कर रही थी।

शाहिद- तुझे मज़ाक सूझ रहा है मेरी टेंशन से हालत खराब है।

रज़िया- यार तू बुरा मत मानना मगर तेरी कहानी मेरे समझ के बाहर है। शबनम से तू मिला, बातें की, फिर सो गया तो शाम को ऐसा क्या हुआ जो तू इतना पागल हो गया?

शाहिद- ऐसे तेरी समझ में कुछ नहीं आएगा.. मैं तुझे पूरी बात बताता हूँ, जिसकी वजह से ये सब हुआ ओके!

शाहिद रज़िया को बताने लगा

 
फ्लेशबॅक………………………

शाहिद अपने बिस्तर पर आराम से लेटा हुआ था तभी शबनम कमरे में आती है और सीधा शाहिद के पेट पर आकर बैठ जाती है।

शबनम देखने में एकदम स्वीट सी है, उसने पिंक टी-शर्ट और ब्लैक स्कर्ट पहना हुआ था।

शबनम बहुत खूबसूरत लड़की है.. छोटे-छोटे गहरे काले बाल, एकदम बड़ी-बड़ी आँखें और आँखों का कलर नीला.. जैसे कोई लेंस लगाया हुआ हो, चाँदी जैसा चमकता रंग, सीना तो ज़्यादा नहीं मगर संतरे एकदम ठोस हैं और हाँ इसकी जांघें मोटी-मोटी और गांड बाहर को निकली हुई है, वो बहुत मस्त लग रही थी। ।

शाहिद- अरे ये क्या है शबनम ऐसे कोई करता है क्या.. चलो नीचे उतरो।

शबनम- क्यों उठूँ मैं.. हाँ पहले भी ऐसे ही बैठती थी ना.. अब भी ऐसे ही बैठूंगी। आप मेरे प्यारे मामू हो ना।

शाहिद- अरे उस टाइम तू छोटी थी अब मोटी हो गई है हा हा हा हा..

शबनम- अच्छा मुझे मोटी कहा हाँ.. अभी रूको आपको बताती हूँ।

इतना कहकर शबनम ने शाहिद के हाथ पकड़ लिए और उसके ऊपर लेट गई और अपने दांतों से उसकी गर्दन पर काटने लगी।

फ्रेंड्स, गड़बड़ यहीं से शुरू हुई। इसी खेल-खेल में शबनम की फुददी शाहिद के लंड पर सैट हो गई थी और मस्ती की वजह से फुददी धीमे-धीमे लंड पर घिस रही थी। उसके छोटे-छोटे संतरे शाहिद के सीने से सटे हुए थे। अब ऐसी पोज़िशन में आदमी का ध्यान भले ना जाए मगर ये कम्बखत लंड जो है ना.. ये खड़ा होकर अच्छे ख़ासे इंसान को सोचने पे मजबूर कर देता है।

वही हाल शाहिद का हुआ.. उसका लंड एकदम तन गया। अब उसको शबनम कच्ची कली नज़र आने लगी।

शाहिद- ओफ क्या कर रही हो शबनम आह.. हटो ना अफ..

शबनम- क्यों मज़ा आया ना.. अब बोलो मोटी हा हा हा हा..

शाहिद ने अपने हाथ छुड़ाए और शबनम को नीचे पटक कर उसके ऊपर आ गया और उसको गुदगुदी करने लगा।

गुदगुदी करते हुए शाहिद के हाथ उसके संतरों से भी टकरा गए.. क्या कड़क मम्मे थे और एक बार उसकी स्कर्ट भी पूरी ऊपर को हो गई तो उसकी सफ़ेद पेंटी में छुपी उसकी फूली हुई फुददी भी उसको दिखी। बस दोस्तों शैतान दिमाग़ में आने के लिए ये बहुत था।

अब शाहिद गुदगुदी के बहाने उसके जिस्म से खेलने लगा.. उसकी फुददी पे लंड सैट करके आगे-पीछे झटके देने लगा।

शबनम- आह.. मामू छोड़ो ना.. उफ़ क्या कर रहे हो आह.. प्लीज़ आह.. नीचे कुछ चुभ रहा है।

शाहिद- बदमाश मुझे काटा था, तब मुझे भी दर्द हुआ था.. अब बोल दोबारा ऐसा करेगी?

शबनम- नहीं मामू सॉरी.. अब ऐसा नहीं करूँगी प्लीज़ छोड़ दो।

दोस्तों शाहिद का लंड एकदम लोहे जैसा सख़्त हो गया था.. इस वक्त उसने अंडरवियर भी नहीं पहना था तो बरमूडा तन के तंबू बन गया।

शाहिद को पता था उसका लंड बेकाबू हो गया है.. वो इस तरह उठा कि शबनम को तंबू ना दिखे, वो करवट लेकर अलग हो गया।

शबनम- मामू आप कितने अच्छे हो।

ये कहकर शबनम ने शाहिद के गाल पर एक किस कर दी। अब ये तो आग में घी डालने वाली बात थी। बेचारा शाहिद सोच में पड़ गया कि क्या करे.. एक बार सोचा कि नहीं ये ग़लत है, तो दूसरी आवाज़ आई कि कुछ ग़लत नहीं ये तो नादान है.. मगर तू तो पक्का खिलाड़ी है, थोड़े मज़े लेने में क्या जाता है।

शाहिद- अच्छा एक बात बता.. तू ऊपर कैसे आई बाकी सब कहाँ हैं?

शबनम- मॉम और अब्बू घर चले गए.. वो उनको सामान वगैरह सैट करना बाकी है ना.. तो यहाँ से भी चाचा खाला और काम वाली बाई सब साथ गए हैं। मैंने कहा मुझे मामू के साथ खेलना है तो मैं यहीं रुक गई।

शाहिद- और सुजान नहीं रुका ऐसे तो वो मुझसे बहुत चिपकता है?

शबनम- उसने तो बहुत ज़िद की मगर उसको बुखार है ना.. तो मॉम ने उसको मना किया और अपने साथ ले गईं।

शबनम की बात सुनकर शाहिद के दिमाग़ में शैतानी प्लान आ गया.. वो जान गया था कि घर में कोई नहीं है, अब वो खुलकर शबनम के मज़े ले सकता था।

शाहिद- अच्छा ये बात है चल तुझे झुला देता हूँ.. जैसे पहले झुला देता था।

शबनम- वाउ मामू.. बहुत मज़ा आएगा।

शाहिद बेड से उठा और पहले उसने दरवाजे को लॉक किया.. फिर खिड़की भी बंद कर दी और कमरे की लाइट भी बुझा दी। उसके बाद सामने आराम चेयर पर जाकर बैठ गया।

शाहिद- आ जाओ शबनम मेरी गोदी में बैठ जाओ.. फिर मैं हिलूँगा तो मज़ा आएगा।

फ्रेंड्स, पहले भी शाहिद ऐसे ही शबनम को आराम चेयर पर बैठा झूला झुला देता था मगर आज तो उसका मंसूबा कुछ और ही था।

शबनम- मामू ये क्या.. आपने तो अंधेरा कर दिया, कुछ दिख नहीं रहा।

शाहिद- अरे पगली दोपहर का टाइम है लाइट की क्या ज़रूरत है और अंधेरे में ज़्यादा मज़ा आएगा.. तू आ तो सही।

शबनम ख़ुशी से चेयर के पास आई और जब वो बैठने लगी तो शाहिद ने चालाकी से उसका स्कर्ट ऊपर को कर दिया।

अब शबनम शाहिद के खड़े लंड पर बैठी थी बीच में बस पतला सा बरमूडा और पेंटी आ रही थी।

शबनम- ऑउच मामू मुझे नीचे कुछ चुभ रहा है।

शाहिद- अच्छा ऐसी बात है.. तू खड़ी हो एक बार फिर नहीं चुभेगा।

शबनम खड़ी हुई तो उसकी पीठ शाहिद की तरफ थी उसने जल्दी से बरमूडा नीचे किया और अपना लंड बाहर निकाल लिया और शबनम को धीमे से बैठने को कहा।

जैसे ही शबनम बैठी शाहिद ने दोबारा उसका स्कर्ट ऊपर कर दिया। अब लंड शबनम की जाँघों से होता हुआ सीधा उसकी फुददी से जा सटा था और कमरे में अंधेरा होने से शबनम ये सब देख भी नहीं पाई।

शाहिद अब चेयर को हिला रहा था और धीमे-धीमे लंड फुददी पर घिस रहा था।

शाहिद- क्यों शबनम मज़ा आ रहा है ना।

शबनम- आह.. हाँ मामू बहुत मज़ा आ रहा है उफ़ लेकिन नीचे कुछ गीला-गीला अजीब सा लग रहा है।

शाहिद- अरे मेरी नादान शबनम, तुम ज़्यादा ध्यान मत दो बस मज़ा लो।

शाहिद बातों में उलझा कर उम्म्ह… अहह… हय… याह… अब शबनम के संतरे भी सहला रहा था।

शबनम को समझ आ रहा था या नहीं ये तो पता नहीं मगर मज़े से उसकी आँखें बंद हो गई थीं.. और उसके मुँह से मादक सिसकियाँ निकलनी शुरू हो गई थीं।

शबनम- आह.. ससस्स मामू ऐसा झूला आह.. अपने पहले कभी नहीं दिया आह.. कितना मज़ा आ रहा है।

शाहिद- तू पहले छोटी थी ना.. तो तुझे पता नहीं था। अब तू बड़ी हो गई है तब मज़ा आ रहा है और जोर से करूँ तो और मज़ा आएगा तुझे।

शबनम- आह.. हाँ मामू मैं भी इसस्स.. यही कहने वाली थी.. उफ़फ्फ़ जोर से करो ना.. आह..

शाहिद को अब अहसास हो गया था कि शबनम की फुददी रिसने लगी है और उसका पानी वो अपने लंड पर महसूस कर रहा था। उसको भी कच्ची फुददी पर लंड रगड़ने का अलग ही मज़ा मिल रहा था।

अब शाहिद जोर-जोर से चेयर हिला रहा था जिससे फुददी की घिसाई और तेज हो गई थी। अब बेचारी नन्हीं सी जान कब तक इस हमले से बच पाती, उसको पता भी नहीं चला और वो स्खलन के करीब पहुँच गई।

शबनम- आह.. आ मामू आह.. रोको आह.. प्लीज़ उफ़फ्फ़ मेरा आह.. जोर से सूसू निकल रहा है आह.. प्लीज़ आह.. नहीं..

शाहिद तो खिलाड़ी थी.. उसको पता था यह इस कच्ची कली का पहला मौका है, जब वो झड़ रही है, उसने उसको कस के पकड़ लिया और तेजी से उसकी फुददी पे लंड घिसने लगा।

शबनम अनजानी कामुकता से सिसकती रही और शाहिद लंड घिसने में लगा रहा क्योंकि शबनम की फुददी बहुत गर्म थी, उसने शाहिद के पॉवरफुल लंड को भी झड़ने के लिए मजबूर कर दिया.. उसकी साँसें तेज हो गईं- आह.. आह मामू जोर से आह.. आ रही है.. उफ़ अब नहीं रुकेगी आह.. नहीं आ..
 
शाहिद- आह.. शबनम तू कितनी अच्छी है ले आह.. उफ़ ले और तेज ले आह.. ऐसा झूला फिर नहीं मिलेगा आह.. आ..

शबनम अगर चाहती तो उठ कर भाग बाथरूम की तरफ सकती थी मगर ये सूसू नहीं उसका फुददी रस आने वाला था और आप जानते हो ये मज़ा ऐसा होता है इसमें इंसान बेबस हो जाता है। वो चाहकर भी नहीं उठ पा रही थी और अब इतने करीब आकर तो सवाल ही पैदा नहीं होता था कि वो उठ जाए।

शबनम ने कस कर शाहिद की जाँघ पकड़ लीं और अपने दाँत भींच लिए उसकी फुददी से गर्म लावा बहने लगा था।

शबनम- आह ससस्स उफ़फ्फ़ मामू आह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ये क्या किया आह मेरी आह.. सूसू निकल गई उफ़फ्फ़ आ..

शाहिद के लंड पे जब गर्म पानी का अहसास हुआ, वो भी अपना कंट्रोल नहीं रख पाया उसके लंड से भी फव्वारा निकल गया, जो शबनम के पेट और जाँघ पर बहने लगा।

पानी निकल जाने के बाद शाहिद को अहसास हुआ कि उसने ये क्या कर दिया। तब उसके शैतानी दिमाग़ ने फिर नई स्कीम बनाई।

शाहिद- ओह शिट शबनम ये क्या किया तुमने.. उठो देखो तो क्या हो गया।

जैसे ही शबनम खड़ी हुई शाहिद ने फ़ौरन अपना बरमूडा पहन लिया।

शबनम- सॉरी मामू मैंने तो आपको कितना कहा मेरा सूसू आ रहा है मगर आप सुने ही नहीं और मैं रोक नहीं पाई। शबनम बहुत डर गई थी और उसकी आँखों से आँसू भी आने लगे थे। शाहिद ने लाइट ऑन की और शबनम को अपने गले से लगा लिया।

शाहिद- अरे अरे पागल रोती क्यों है मैंने डांटा थोड़े ही है.. बस ऐसे ही मज़ाक से कहा और बचपन में तो कितनी बार हे तूने मेरी गोदी में सूसू किया है।

शबनम- आई एम सॉरी मामू..

शाहिद- अरे पागल कुछ नहीं हुआ, देख मैं एकदम सूखा हूँ.. ज़रा सा निकल गया होगा।

शबनम- नहीं मामू ज़्यादा निकाला, मेरी चड्डी पूरी खराब हो गई और पेट पे भी गीला-गीला हो गया।

शाहिद- अरे कुछ नहीं हुआ आ इधर आ मुझे दिखा।

शाहिद ने पास से अपनी टी-शर्ट उठाई और शबनम की टी-शर्ट को ऊपर करके उसके पेट और जाँघ से अपना वीर्य साफ किया। फिर उसकी नज़र पैंटी पे गई जो आगे से गीली हो रही थी।

शाहिद- अरे अरे ये चड्डी तो गीली हो गई.. ला उतार इसको.. मैं साफ कर देता हूँ।

शबनम बेचारी इतना डर गई थी, उसको कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। उसने साइड होकर अपनी पेंटी उतार कर शाहिद को दे दी।

शाहिद- तू जा बाथरूम में.. अपने आप को साफ कर ले और सुन कपड़े पूरे उतार कर अच्छे से साफ करना.. नहीं तो सूसू के दाग कपड़ों पर लग जाएंगे।

शबनम- ठीक है मामू ये टी-शर्ट भी देखो गीली हो गई अब मॉम गुस्सा करेगी।

शाहिद- तू एक काम कर ये टी-शर्ट भी उतार कर मुझे दे दे.. मैं इसको साफ करके अभी सुखा दूँगा। तब तक तू बाथरूम होके आ जा हाँ..!

शबनम ने बिना कुछ सोचे अपनी टी-शर्ट वहीं शाहिद के सामने निकाल कर रख दी।

शबनम ने अन्दर बच्चों वाली ब्रा जो एक बेल्ट टाइप की होती है, वो पहनी हुई थी जिसमें उसके संतरे जैसे गोल-गोल मम्मे साफ दिख रहे थे।

शबनम के जाने के बाद शाहिद ने उसकी पेंटी को सूँघा.. कुँवारी फुददी की महक ही अलग होती है। वो पागल हो गया उसने पेंटी पर लगे शबनम के रस को जीभ से चाट कर साफ किया। उसका लंड फिर से खड़ा हो गया।

शाहिद अपने लंड से बोलने लगा- अबे साले मरवाएगा क्या, अभी तो कांड किया है.. अब तो बैठ जा।

फिर उसको ख्याल आया कि घर वाले कभी भी आ सकते हैं तो उसने टी-शर्ट पर लगा अपना वीर्य साफ किया, उस जगह को पानी से अच्छी तरह साफ करके प्रेस से उसको सुखा दिया, तब तक शबनम भी बाहर आ गई थी।

शबनम- ओह मामू आप कितने अच्छे हो अपने टी-शर्ट को सुखा दिया।

शाहिद- चल जल्दी से तू इसको पहन ले।

शबनम ने टी-शर्ट पहन ली.. शाहिद उसको कुछ कहने वाला था, तभी वो बोल पड़ी- मामू प्लीज़ ये बात आप मॉम को या किसी को मत बताना कि मैंने आपके ऊपर सूसू किया.. नहीं तो मॉम गुस्सा करेगी।

शाहिद- अरे पगली मैं क्यों कहूँगा किसी को, बल्कि मैं तो खुद तुझे मना करने वाला था। ग़लती से भी यहाँ जो हुआ किसी को मत बताना.. नहीं सब तेरा मज़ाक उड़ाएंगे समझी ना तू!

शबनम भाग कर शाहिद के पास आई और उससे लिपट गई।

शबनम- ओह मेरे प्यारे मामू.. आप सच में बहुत अच्छे हो आई लव यू मामू।

शाहिद का लंड तो पहले ही कड़क था। अब तो वो फुंफकार मारने लगा और सीधा शबनम के पेट में चुभने लगा।

शाहिद- आई लव यू टू बेबी तू बहुत स्वीट है सच में।

शबनम- उफ़ मामू ये क्या है.. फिर से पेट में चुभने लगा है।

शाहिद ने उसको अलग किया और बिस्तर पे अपने पास बिठाया।

शाहिद- कुछ नहीं शबनम तू इस पर अभी ध्यान मत दे और ये बता झूला कैसा था?

शबनम बेचारी नादान-कली थी, उसको क्या पता कि जो उसको चुभा है वो लंड था और शाहिद के सवाल ने उसको उस पल को याद करवा दिया जब वो झड़ी थी।

शबनम- ओह मामू क्या बताऊं, सच्ची आज मुझे बहुत मज़ा आया और पता नहीं मुझे क्या हुआ कि मेरा सूसू निकाल गया। मगर मामू एक बात कहूँ मैं रोज सूसू करती हूँ तब कुछ नहीं होता मगर आज तो मेरे पूरे बदन में चींटियां जैसी रेंगने लगीं और नीचे सूसू की जगह बहुत जोर की खुजली हुई, फिर सूसू निकली.. तब भी बहुत मज़ा आया।

शाहिद कुछ कहता तभी उसको नीचे से किसी के ऊपर आने की आवाज़ आई।

शाहिद- ओह चुप कोई आ रहा है, ये बातें अब बंद कर और हाँ याद रखना किसी को कुछ नहीं बताना है। चल मैं डोर का लॉक खोल कर आता हूँ। तू बेड पर जाकर बैठ जा।

शबनम ने कुछ नहीं कहा और बेड पर चुपचाप बैठ गई। उधर शाहिद ने जल्दी से लॉक खोला और खुद चेयर पर आकर बैठ गया।

शाहिद- अच्छा शबनम तूने बताया नहीं तू अब कौन सी क्लास में आ गई है।

तभी दरवाजा खुला और शाहिद की मॉम अन्दर आ गईं।

 
ज़ुबैदा- अच्छा तुम दोनों यहाँ बैठे गप्पें लड़ा रहे हो। शबनम जाओ तुम्हारी मॉम बुला रही है तुमको और शाहिद बेटा तुम ये लिस्ट लेकर बाजार से आपा के लिए सामान लाकर दो।

शाहिद- आप चलो मॉम.. मैं बस 5 मिनट में आया।

मॉम के जाने के बाद शबनम बोली- मामू आपको मालूम तो है कि मैं किस क्लास में हूँ।

शबनम की बात सुनकर शाहिद को हँसी आ गई.. उसने तो सिचुयेशन संभालने के लिए ऐसे ही पूछा था

और शबनम समझ नहीं पाई- क्या हुआ मामू आप हंस क्यों रहे हो.. मैंने अब क्या किया?

शाहिद- कुछ नहीं मेरी प्यारी शबनम ऐसे ही हँसी आ गई। चल अब तू घर जा ओके।

शबनम- मामू वो मेरी चड्डी कहाँ है.. वो दे दो मुझे।

शाहिद- अरे वो गीली है.. अभी तू ऐसे ही चली जा और चुपके से दूसरी पहन लेना, किसी को बताना मत ओके.. मैं कल तुझे तेरी चड्डी सुखा कर दे दूँगा ठीक है ना!

शबनम ने एक बार फिर शाहिद को हग किया और भागती हुई वहाँ से चली गई।

शाहिद ने उसकी पेंटी को अपनी अलमारी में रखा और खुद भी रेडी होकर निकल गया।

अब वर्तमान में……………………

ये सब रज़िया बड़े ध्यान से सुन रही थी।

शाहिद- अबे साली पहले तो बहुत चपर-चपर कर रही थी.. अब क्यों चुप बैठी है क्या हो गया तुझे?

शाहिद की आवाज़ सुनकर रज़िया का ध्यान टूटा ही नहीं, वो तो उसी कमरे में पहुँच गई थी.. जहाँ ये सब कुछ हुआ था।

रज़िया- ओ माय गॉड शाहिद यार तेरी बातें सुनकर मेरा जिस्म जलने लगा है। अगर पीरियड्स ना होते कसम से मैं अभी तेरा लंड फुददी में घुसा लेती।

शाहिद- साली हालत तो मेरी भी खराब है मगर क्या करूँ, अब तू ही बता मैंने जो किया वो सही था या ग़लत?

रज़िया- देख शाहिद जो उम्र शबनम की है वो अब बच्ची नहीं रही है.. वो पूरा लंड ले सकती है.. मगर वो थोड़ी नादान है इन सब बातों से अनजान है, तो उस हिसाब से बच्ची ही है और रही बात सही ग़लत की, तो तुम मर्द जात हो ही ऐसे.. बस मौका मिलना चाहिए फिर नहीं देखते कि सामने कौन की फुददी है।

शाहिद- क्या बात कर रही है साली पूरा लंड ले सकती है.. तुझे कैसे पता? और ये मर्द जात वाली क्या बात है मेरे लंड को उसी ने खड़ा किया था।

रज़िया- यार इससे भी एक साल छोटी थी मेरी फ्रेंड.. जब उसके चाचा ने उसको चोद दिया था। शबनम तो नादान थी साले तुम्हारे ही दिमाग़ में खुराफात आई।

शाहिद- चल चल ये ज्ञान बंद कर और ये बता कौन सी फ्रेंड थी जिसने इतनी छोटी उम्र में लंड ले लिया था?

रज़िया- अरे तू नहीं जानता यार.. थी एक चल अब देर हो रही है, मुझे घर भी जाना है।

शाहिद- अच्छा मत बता, जाने दे मगर ये तो बता अब इस शबनम का क्या करूँ?

रज़िया- हा हा हा साला पक्का रांड़बाज है तू.. अरे वो ज्ञान तो ऐसे ही था, असल बात ये है कि जहाँ फुददी मिले ठोक दो साली को, बना दो उसको कली से फूल मगर प्यार से हाँ.. कहीं बेचारी की फुददी फाड़ मत देना हा हा हा हा..

शाहिद- ये हुई ना बात.. वैसे तू भी नहीं भी कहती तो भी मैं उसको चोद ही देता… हा हा हा हा हा..

दोनों ठहाका मार के हंसने लगे, फिर शाहिद ने सोचा अभी रज़िया को घर छोड़ आता हूँ.. कल शबनम के लिए कोई प्लान तैयार करूँगा और वो दोनों वहाँ से निकल गए।

 
फ्रेंड्स, मज़ा आ रहा है ना.. आप सोच रहे होंगे कि शाहिद के घर किसी का इंट्रो नहीं दिया। अब ये रज़िया इतनी रात को बाहर है इसके घर वाले नहीं है क्या.. या फिर ये किसके मकान में दोनों मज़े ले रहे हैं। ऐसे बहुत से सवाल होंगे ।

फ्रेंड शाहिद के घर में उनकी मॉम हैं.. मगर उनका कहानी में कोई खास रोल नहीं है, इसी लिए इंट्रो नहीं दिया। वैसे ही और भी बहुत लोग कहानी में आएँगे मगर कुछ देर के लिए.. तो उनके लिए टाइम वेस्ट करने से कोई फायदा नहीं। आप खुद समझदार हो

रज़िया के अब्बू बहुत पहले गुजर गए थे, अब वो अपनी अम्मी और एक छोटे भाई के साथ रहती है, उसकी अम्मी बेचारी बीमार रहती है तो जल्दी सो जाती है और रज़िया जैसी फास्ट लड़की के लिए रात को घर से निकलना क्या मुश्किल है.. ये आप समझ ही गए होंगे।

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फ्रेंड्स, इतनी ज़बरदस्त चुदाई के बाद राबिया को बहुत अच्छी नींद आ गई.. कोई एक घंटा बाद चाचा जब वापस आए तो राबिया करवट लिए नंगी ही सोई पड़ी थी।

चाचा- हाय राबिया रानी कितनी प्यारी है रे.. तू सोई हुई तो और अच्छी लग रही है। अब इस लंड का क्या करूँ ये कमीना मानता ही नहीं.. चल एक बार और तेरी मस्त ठुकाई कर देता हूँ, फिर मैं भी सो जाऊंगा।

ऐसे ही बड़बड़ाते हुए चाचा राबिया के पास गए और अपने लंड को राबिया के होंठों पर फिराने लगे।

राबिया नींद में थी.. मगर लंड का अहसास उसको हो रहा था, उसने हल्के से होंठ खोल दिए, जिससे चाचा का लंड उसके मुँह में घुस गया। अब चाचा धीमे-धीमे राबिया के मुँह को चोदने लगे। थोड़ी देर ऐसा करने के बाद चाचा का लंड एकदम कड़क हो गया.. तब वो राबिया के पैरों के पास आए और उसकी टांगें फैला कर एक ही झटके में पूरा लंड राबिया की फुददी में पेल दिया।

दर्द के मारे राबिया की नींद हवा हो गई और वो सिसकते हुए बोली- ईईससस्स चाचा आह.. मार डाला रे आह.. कैसा तगड़ा लंड है, जब भी अन्दर जाता है आह.. मेरी तो जान ही निकाल देता है उफ़ आह..

चाचा- तेरी फुददी भी तो ऐसी ही है, जितना भी चोदो.. ऐसा लगता है पहली बार चोद रहा हूँ। ले रानी अब संभाल उह उह..

चाचा पूरी ताक़त से झटके मारने लगे और राबिया भी गांड उछाल-उछाल कर उनका साथ देने में लग गई।

चाचा ने कई मिनट तक अलग-अलग पोज़ बना कर राबिया की चुदाई की। वो ना जाने कितनी बार झड़ी होगी तब कहीं जाकर चाचा के लंड का लावा फूटा।

उसके बाद चाचा ने उससे कहा- अब आराम से सोजा.. कल तेरी गांड भी मारनी है।

राबिया- आह.. आ चाचा… सच्ची आप ना होते तो मेरी ये प्यास कभी ना बुझती! उफ़… फुददी का चबूतरा बना दिया आज अपने अब आप भी सो जाओ और अल्लाह के लिए सो ही जाना.. वापस मत चढ़ जाना.. अब मेरी बिल्कुल भी चुदवाने की हिम्मत नहीं है।

चाचा- हा हा हा हा… नहीं आऊंगा रानी तू अब आराम से सो जा!

चाचा के जाने के बाद राबिया ने कपड़े पहने और सुकून की नींद सो गई।

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सुबह शाजिया के घर में वही रोज का माहौल था। शाजिया ने आज रेड एंड वाइट कॉम्बिनेशन पहना था और बाल भी खुले रखे हुए थे। आज वो किसी परी से कम नहीं लग रही थी।

अब्दुल- अरे वाह.. क्या बात है मेरी गुड़िया तो आज बहुत प्यारी लग रही है।

शाजिया- थैंक्स अब्बू, आप भी स्मार्ट लग रहे हो… हा हा हा हा..

अब्दुल- चल हट बदमाश कहीं की, अपने अब्बू से शरारत करती है.. अब चल जल्दी कर तुझे कॉलेज नहीं जाना क्या?

शाजिया- सॉरी अब्बू आपको बताना भूल गई। मेरी फ्रेंड रज़िया यहीं पास में रहती है.. आज मैं उसके साथ जाऊंगी, आप जाओ।

कल रज़िया ने जाते टाइम शाजिया को बता दिया था कि वो उसके पास ही रहने आ गई है और कल से कॉलेज साथ ही जाएगी।

अब्दुल- ठीक है भाई.. ये अच्छा हुआ अब सीधा अपनी शॉप पर चला जाऊंगा।

अब्दुल जी के जाने के बाद शाजिया भी घर से निकल गई। आज उसकी गली के लड़के उसको बहुत घूर कर ऐसे देख रहे थे जैसे भोसड़ी के दूर से ही लंड फेंक कर उसकी फुददी में डाल देंगे।

उधर शाजिया तो अपनी मस्ती में चली जा रही थी। एक लंबी गली पार करके बाहर मेन रोड से दायीं ओर रज़िया का घर था। शाजिया सीधे उसके घर के पास पहुँच गई और डोरबेल बजाई तो रज़िया की मॉम बाहर आ गईं।

शाजिया- सलाम खाला।

सुरैया- अरे आ गई बेटी.. रज़िया तेरी ही बात कर रही थी अभी.. आजा अन्दर आजा..!

शाजिया उनके पीछे घर में चली गई। घर में कुछ खास साजो-सामान नहीं था.. बस नॉर्मल सा घर था। सुरैया के कहने पर शाजिया सामने के कमरे में चली गई।

रज़िया- अरे आओ मेरी प्यारी गुड़िया.. आज क्या बात है बहुत ब्यूटीफुल लग रही हो।

शाजिया- थैंक्स आपा.. आप भी बहुत सुंदर लग रही हो।

रज़िया- काहे की सुंदर यार.. आज तो नहाई भी नहीं हूँ.. साले ये पीरियड्स को भी अभी आना था।

शाजिया- हे राम आपा, धीमे बोलिए, खाला सुन लेंगी।

रज़िया- हा हा हा हा तू भी ना एकदम आइटम है यार.. ये तो सब को आते है इसमें शर्माना कैसा? अब तू हमारे ग्रुप की हो गई है.. पता है ना शाहिद ने क्या कहा था.. बदल जा अब तू.. ओके!

शाजिया- ओके आपा.. जैसा आप कहो अब चलें.. देर हो रही है?

रज़िया- अरे रुक मेरी जान तुझे यहाँ ऐसे ही थोड़े बुलाया मैंने.. तू पहले अपना अभी का टास्क तो पूरा कर ले।

शाजिया- इस टाइम कैसा टास्क..? हम लेट हो जाएंगे आपा।

रज़िया- अरे तू फिर ‘ना’ बोली? चल तू जाने दे, तुझसे कुछ नहीं होगा। अब शाहिद को मैं साफ-साफ मना कर देती हूँ ओके।

शाजिया- सॉरी आपा.. मेरा वो मतलब नहीं था हम शाम को कर लेंगे ना!

रज़िया- शाम का टास्क दूसरा है.. समझी अब करना है या जाना है?

शाजिया- करना है आपा.. जल्दी कहो क्या करूँ?

रज़िया- ये हुई ना बात.. रुक बताती हूँ तुझे क्या करना है?

रज़िया ने रूम बंद किया और अपनी अलमारी से एक 7″ का डिल्डो (नकली लंड) निकाला और शाजिया के सामने कर दिया।

शाजिया की तो आँखें फटी की फटी रह गईं.. उसने अपने हाथ मुँह पे रख लिए।

शाजिया- हे राम आपा ये क्या है.. और आप के पास ये कहाँ से आया?

रज़िया- अच्छा, तुझे नहीं पता ये क्या है?

शाजिया- नहीं आपा सच में मुझे नहीं पता ये क्या है.. मगर ये तो आदमी के..

रज़िया- अरे चुप क्यों हो गई बोल बोल.. यही तो तेरा टास्क है.. जल्दी कर लेट अब तू कर रही है।

शाजिया- आपा मुझे शर्म आ रही है।

रज़िया- तुम फिर वही राग अलापने लगीं.. जल्दी बोलो.. अभी और भी काम बाकी है?

शाजिया- ये वो आदमी के ल्ल..ल्लिंग जैसा लग रहा है आपा।

रज़िया- गुड अच्छा वैसे तो तू बहुत नादान बनती है.. फिर तुझे इसका कैसे पता लगा?

शाजिया- क्या आपा आप भी ये तो 9वीं क्लास में ही साइन्स की किताब में था.. इसका पिक था और इसके बारे में लिखा भी था, तब से पता है।

रज़िया- धत तेरी की.. जानकारी भी ली तो किताबों से.. अरे पगली इसको लिंग नहीं लंड कहते हैं लंड.. समझी!

शाजिया- छी आपा, ये तो सब गाली है।

रज़िया- अरे सच्ची इसका यही नाम है.. अच्छा वो सब जाने दे.. इसको हाथ में लेकर देख तुझे कैसा महसूस होता है?

शाजिया ने डरते-डरते नकली लंड को ऐसे पकड़ा जैसे वो कोई साँप हो।

शाजिया- आपा ये तो रबड़ का है.. कितना डरावना है ना ये!

रज़िया- वाह भाई वाह.. कोई तो इसको देख के कहता है.. वाउ सो बिग और तुम हो कि इसे डरावना बता रही हो।

शाजिया- मुझे जैसा फील हुआ मैंने आपको बता दिया मगर एक बात समझ नहीं आई कि ये लिंग का मॉडल आपके पास कहाँ से आया.. ये तो किसी डॉक्टर के पास या प्रयोगशाला में होना चाहिए?

रज़िया- अरे मेरी नादान शाजिया, कौन सी दुनिया में है तू.. ये मॉडल नहीं डिल्डो है.. इससे लड़कियां फुददी की खुजली मिटाती हैं।

शाजिया- आपा आप कितने गंदे शब्दों का यूज करती हो.. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा.. आप सिंपल भाषा में समझाओ ना।

रज़िया- ओह गॉड.. ये लड़की भी ना.. अच्छा छोड़.. ये बता तुम फिंगरिंग करती हो या किसी से सुना होगा.. करना तो तुम्हारे बस का कहाँ है?

शाजिया- नहीं आपा वो क्या होती है.. मुझे नहीं पता!

रज़िया- ओ माय गॉड, तू सच में पक्की आइटम है.. चल कॉलेज चल देर हो रही है.. ये डिल्डो वाला टास्क शाम को ही करना।

शाजिया बेचारी कस्मकस में पड़ गई, वो कुछ बोल भी नहीं पाई और चुपचाप रज़िया के साथ कॉलेज चली गई।

फ्रेंड्स, आप में से कुछ लोग जरूर कहेंगे ये बकवास है.. आज के जमाने में ऐसा नहीं हो सकता कि किसी को ये भी पता ना हो तो आपको बता दूँ आप की तरह सभी इतने फास्ट नहीं है और ना ही सब नेट पर ये सब देखते हैं। मेरी खुद की जानकारी में ऐसी कई लड़कियां हैं जिनको फिंगरिंग का पता ही नहीं है। लड़की जाने दो.. कुछ लड़के भी हैं जिन्होंने आज तक मुठ नहीं मारी। भाई ये दुनिया बहुत बड़ी है.. इसमें हर किस्म के इंसान मौजूद हैं।

अब आगे चलो यहाँ क्या ज्ञान ले रहे हो आप लोग.. हा हा हा हा हा हा..

 
ये दोनों कॉलेज पहुँचें.. इससे पहले हम वहीं चलते हैं।

फैजान- यार शाहिद किसी की फुददी देखे हुए बहुत दिन हो गए.. लंड की खाज मिटाने के लिए किसी पुरानी लौंडिया को तू ही बुला सकता है।

आज़म- हाँ यार शाहिद, किसी को जाने दे.. आज तो साली रज़िया को तैयार कर ले, मेरा भी बड़ा मन मचल रहा है।

अमन- अबे रज़िया तो तैयार है कोई ढंग की जगह भी होनी चाहिए ना.. साला हम उसको होटल भी नहीं ले जा सकते। मेरे अब्बू पुलिस में हैं साला उनको इस बारे में कोई भी खबर दे सकता है।

सलमान- तेरे अब्बू खुद भी तो ऐसे ही हैं.. ना जाने शहर में उनके कितने खबरी घूम रहे हैं?

आज़म- यार मेरे घर जा सकते हैं अभी तो मेरी फैमिली भी नहीं है.. मगर वो साली रेहाना खाला का डर है.. हरामजादी एक नंबर की चुगलखोर है।

शाहिद- अबे सालों घर का इंतजाम हो गया है.. कल ही अब्बू ने हमारे पुराने घर की चाभी मुझे दी और कहा है कि उसकी सफ़ाई करवा दूँ, उसका मेंटीनेंस करवा कर वो उसको माल का गोदाम बनाएँगे।

आज़म- वाउ यार.. अब तो मज़े हो गए।

शाहिद- अबे सुन तो.. सुबह को मैंने वहाँ सफ़ाई करवा दी थी और रात को रज़िया को वहाँ बुलाया था.. मगर साली ने रेड सिग्नल दिखा दिया, अब कुछ दिन उसको भूल जाओ।

फैजान- ले भाई इसे कहते हैं केएलपीडी.. वैसे घर कब तक अपने अंडर में है?

शाहिद- जब तक सारा काम नहीं निपट जाता तब तक तो है.. अब इसमें कितने दिन लगें.. ये पता नहीं?

अमन- चलो जो भी हो.. घर तो है अब किसी और कन्या को फँसाना पड़ेगा।

सलमान- अरे वो देख, कोई नई लड़की लगती है।

आज़म- क्या यार.. ये साली कौन आ गई.. ऊपर से नीचे तक कयामत है यार.. उफ्फ इसे देख कर तो लंड टाइट हो गया।

सामने से एक 21 साल की बहुत ब्यूटीफुल लड़की आ रही थी, उसने रेड टी-शर्ट और ब्लेक जींस पहनी हुई थी आँखों पर काला चश्मा.. खुले बाल हाईट भी अच्छी ख़ासी.. दूर से ऐसा लग रहा था जैसे साना जावेद हो। उसके तने हुए मम्मे भी 36″ के होंगे.. पतली कमर और गांड ऐसी, जैसे रोज दिन में 2 घंटा कोई उसको ठोकता हो.. 36″ की एकदम बाहर को निकली हुई। उसकी मतवाली चाल भी एकदम किसी मॉडल जैसी थी।

आज़म- हैलो सीधे कहाँ जा रही हो.. अपने सीनियर्स की कोई रेस्पेक्ट नहीं है क्या?

रूबी- हे, आपने मुझसे कुछ कहा?

आज़म- यस तुमसे ही कहा.. नया एड्मिशन है तुम्हारा?

रूबी- यस आई एम न्यू हियर!

अमन- ओह अँग्रेजी.. मेम हिन्दी में अपना इंट्रो दो.. ये शाहिद सर हैं.. सबके बॉस हैं, इनको अपने बारे में पूरा बताओ।

रूबी- ओह ओके.. ओके.. हैलो सर मेरा नाम रूबी जेम्स है.. मैं गोवा से हूँ, अब यहाँ बंबई शिफ्ट हो गए हैं, सो मैंने यहाँ एड्मिशन ले लिया।

सलमान- फर्स्ट ईयर हो?

रूबी- नो 3र्ड ईयर.. मैंने पहले बताया था ना.. गोवा यूनिवर्सिटी में 2 साल रही फिर किसी वजह से यहाँ आ गई तो यहाँ एड्मिशन ले लिया ओके!

शाहिद- मेरा नाम शाहिद है और ये आज़म सलमान फैजान अमन और रज़िया अभी आई नहीं है, वो भी ग्रुप में है।

रूबी- हैलो एवेरीबडी!

सबने एक साथ ‘हैलो..’ कहा।

सलमान की नज़रें बस उसके चुचों पर थीं, जो टी-शर्ट फाड़ कर बाहर आने को बेताब थे।

फैजान- कॉलेज के नियम पता है ना.. नए स्टूडेंट्स की रेंगिंग होती है।

रूबी- याह आई नो.. बट मैं फर्स्ट ईयर नहीं हूँ।

शाहिद- उससे कोई फर्क नहीं पड़ता.. इस कॉलेज में तो नई हो ना.. सीधे सीधे रेंगिंग दो, नहीं तो पूरा साल परेशान रहो।

रूबी- हे कूल गाइस.. ओके आई एम रेडी.. टेल मी क्या करूँ मैं?

शाहिद- सबसे पहले तो तू ये इंग्लिश बंद कर समझी.. उसके बाद हमारे कुछ सवालों के जबाव दे।

रूबी- ओके पूछिए क्या पूछना है?

फैजान- तुम्हारा फिगर क्या है?

रूबी- 36-28-36″

फैजान- वाउ सो सेक्सी यार..

रूबी- थैंक्स..

सलमान- कोई बॉयफ्रेंड है तुम्हारा?

रूबी- यहाँ तो मैं नई हूँ.. हाँ गोवा में एक था.. मगर ज़्यादा टाइम नहीं रहा और हमारा ब्रेकअप हो गया था।

सलमान- कोई और नहीं मिला.. तुम तो इतनी ब्यूटीफुल हो, लड़के तो तुम्हारे आगे-पीछे लाइन लगा के रहते होंगे।

रूबी- हाँ बट मुझे कोई पसंद नहीं आया।

आज़म- कभी सेक्स किया है?

रूबी- वॉट डू यू मीन.. मैं मॉर्डन हूँ.. इसका मतलब ये नहीं कि मैं अपनी लिमिट्स क्रॉस करूँ ओके?

शाहिद- भड़क मत.. जो पूछें.. उसका जबाव दे बस!

रूबी- ओके सॉरी बट रियली मैं ऐसी नहीं हूँ.. हाँ थोड़ी मॉर्डन हूँ, मगर मैंने कभी ऐसा-वैसा कुछ नहीं किया।

अमन- अच्छा अच्छा जाने दे ये सवाल हो गए.. अब तुम्हें 3 टास्क देते हैं। उसमें से एक जो पसंद आए वो कर.. और अपनी क्लास में जा।

शाहिद- हम में से किसी एक को किस कर या वो सामने प्रिंसीपल मैम आ रही हैं तो उनको जोरदार थप्पड़ मार… अगर ये दोनों तेरे बस के नहीं तो तीसरा और लास्ट टास्क बहुत आसान है, रात को हम पार्टी करेंगे, उसमें शामिल हो जाओ! सिम्पल !

रूबी ने थोड़ी देर सोचा फिर रज़िया के बारे में पूछा कि पार्टी में वो भी आएगी क्या?

शाहिद- हाँ वो भी आएगी, डर मत सिंपल पार्टी होगी।

रूबी- ओके, मैं पार्टी में आऊंगी.. कब और कहाँ आना है वो आप बता दो।

शाहिद- अभी तू जा.. कॉलेज के बाद तुझे बता देंगे ओके!

रूबी ने एक सेक्सी स्माइल सबको दी और बाइ कहकर गांड मटकाते हुए चली गई।

सलमान- अम्मी कसम यार, साली क्या बिंदास लड़की है.. कैसे अपना फिगर आराम से बता दिया और साली सेक्स के नाम पे ऐसे भड़की.. जैसे किसी ने उसको अधूरा चोद दिया हो।

फैजान- साली को देख कर साफ पता लगता है कि बंदी खेली खाई है.. वैसे यार शाहिद ये पार्टी का क्या नया फंडा है?

शाहिद- कुछ नहीं, तुम लोगों के लिए फुददी का इंतजाम हो गया समझो.. मगर सालों कंट्रोल में रहना कोई जल्दबाजी नहीं करना.. ये साली खुद कहेगी मुझे चोदो।

आज़म- वाह यार.. ऐसा होगा तो क्या मज़े होंगे.. साली क्या मस्त आइटम है।

फैजान- कोई प्लान भी है शाहिद.. या ऐसे ही हवा में तीर मार रहे हो?

अमन- अबे गान्डू तेरे को पता है ना शाहिद बिना प्लान के कोई बात नहीं कहता।

सलमान- अरे अब्बू रे, वो देखो अपनी कली क्या मस्त लग रही है आज.. ही ही… शाहिद इसकी फुददी कब दिलाओगे?

सामने से शाजिया और रज़िया आ रही थीं.. जिसे देख कर सबके लंड खड़े हो गए। सच में आज खुले बालों में शाजिया का लुक बड़ा सेक्सी आ रहा था।

वो दोनों पास आईं.. सबको हैलो कहा और वहीं बैठ गईं।

शाहिद- वाउ शाजिया.. आज तो मस्त लग रही हो और बताओ तुम्हारे अन्दर कुछ फ़र्क पड़ा या वैसी ही हो?

शाजिया- आपके ग्रुप के लायक बनने की कोशिश कर रही हूँ।

शाहिद- गुड और हाँ जो भी करो दिल से करो.. समझी, चलो अब क्लास में जाओ देर हो रही है और हैलो तुम सब भी चलो.. कुछ पढ़ाई कर लिया करो।

सब उठे और चले गए।

तब शाहिद ने रज़िया को एक साइड में लेकर शाजिया के आज के टास्क के बारे में पूछा।

रज़िया ने सुबह की सारी बातें बताईं.. तो शाहिद हंसने लगा और उसको कुछ टिप्स दिए कि अब ऐसा करना तब वो साली समझ सकेगी।

ना ना अभी बता दूँगी तो बाद में मज़ा कैसे आएगा, ये तो तभी देखना और दोस्तों ये रूबी की एंट्री जबरदस्ती नहीं डाली है.. ये भी आगे चलकर बड़ा धमाका करेगी, बस देखते जाओ और मज़ा लेते रहो।

दोपहर तक कुछ खास नहीं हुआ, बस शाहिद ने रूबी को रज़िया से मिलवाया और शाम को अपने पुराने घर पे एक छोटी पार्टी का बताया। रूबी को एड्रेस समझा कर वो घर को निकल गया।

जब वो घर गया उसको शबनम वहीं मिली, जिसे देखते ही उसका लंड टन-टन करने लगा।

ज़ुबैदा जी- अरे बेटा, इसका यहाँ नया एड्मिशन हुआ है.. अब वहाँ से यहाँ आई है तो इसकी पढ़ाई का काफ़ी नुकसान हो गया है। अब इसके इस साल बोर्ड के एग्जाम भी होंगे तो इसी लिए तेरी आपा ने कहा है कि तू इसको थोड़ा पढ़ा दिया कर!

शाहिद- अरे अभी तो कॉलेज से आया हूँ.. लंच भी नहीं किया और आप हैं कि..

वो आगे कुछ बोलता.. इससे पहले शबनम बोल पड़ी- क्या मामू.. मैं कौन सा अभी पढ़ाने को बोल रही हूँ.. आप लंच कर लो फिर थोड़ा रेस्ट भी कर लो, उसके बाद आपका मन करे, तब पढ़ा देना, इतनी देर में अपना होमवर्क कर लूँगी।

ज़ुबैदा- देखो कितनी समझदार है ये.. चलो खाना लगा देती हूँ.. तुम खा लो।

शाहिद- अच्छा ठीक है.. शबनम तुम ऊपर मेरे कमरे में जाकर अपना होमवर्क करो.. मैं आता हूँ ओके।

शबनम ख़ुशी से भागती हुई ऊपर चली गई। आज उसने वाइट टॉप और ब्लैक स्कर्ट पहना हुआ था। वो भाग कर गई तो उसकी उछलती हुई गांड देख के शाहिद की ‘आह..’ निकल गई। उसने मन में सोचा कि आज इससे कुछ ज़्यादा मज़ा लूँगा।

आधा घंटा बाद शाहिद अपने कमरे में गया, तो शबनम बैठी हुई अपना होमवर्क कर रही थी। शाहिद ने उसको डिस्टर्ब नहीं किया और सीधा बाथरूम में जाकर अपने कपड़े चेंज किए और बस वही बरमूडा पहन कर बाहर आ गया।

शबनम- अरे मामू आ गए आप.. ये देखो मेरा होमवर्क भी पूरा हो गया।

शाहिद- बहुत अच्छी बात है अब क्या करोगी?

शबनम- कुछ नहीं आप थोड़ा रेस्ट कर लो बाद में मुझे पढ़ा देना।

शाहिद- नहीं पहले तुझे पढ़ाऊंगा.. बाद में हम दोनों साथ में रेस्ट करेंगे।

शबनम खुश हो गई और शाहिद उसको सच्चे मन से पढ़ाने लगा। उसने सोचा अभी कोई बुरा ख्याल नहीं.. बस पढ़ाई, बाद में खुलकर मज़ा करूँगा।

कोई 45 मिनट तक शबनम को पढ़ाने के बाद शाहिद ने कहा- तू रुक.. मैं नीचे जाकर आता हूँ।

शाहिद नीचे चैक करने गया था कि उसकी मॉम सोई या नहीं और उसके अब्बू तो अपने काम के चक्कर में रात को ही आते हैं और एक काम वाली है, जो शायद आज आई नहीं, तो शाहिद की लाइन क्लियर थी। उसकी मॉम खर्राटे मार रही थीं.. उसने सब देखा फिर वापस ऊपर आ गया।

शाहिद को देख कर शबनम ने हल्की सी मुस्कान दी- क्या हुआ.. क्यों मुस्कुरा रही है?

शबनम- मामू अब पढ़ाई बहुत हो गई.. अब हम थोड़ा रेस्ट करेंगे ना?

शाहिद- हाँ तो कर लो किसने रोका है।

शबनम- मामू आप कल की तरह वहाँ चेयर पर रेस्ट करो ना.. साथ में मुझे भी झूला झुला देना।

शाहिद ने मन में कहा कि साली इत्ती सी है.. मगर इसको मज़ा पूरा चाहिए.. इसको नहीं मालूम कि जब मेरा लंड घुसेगा.. ये मज़ा इसकी सज़ा बन जाएगी।

शबनम- क्या सोचने लगे आप आओ ना।

शाहिद ने दरवाजा बंद किया और कल की तरह लाइट ऑफ कर दी।

शबनम- वाउ मामू आप ग्रेट हो.. आज भी आप कल की तरह मज़ा दोगे ना?

शाहिद- हाँ मेरी जान.. आज तुझे उससे भी अच्छा मज़ा दूँगा आ जा जल्दी से!

शबनम- मगर मामू आज भी अगर सूसू आया तो मुझे छोड़ देना.. मैं भाग कर बाथरूम में चली जाऊंगी।

शाहिद- नहीं शबनम वो सूसू नहीं होता है वो मस्ती रस होता है.. तुम सोचो अगर सूसू होता तो मेरे भी सारे कपड़े गंदे हो जाते ना कल!

शबनम- हाँ मामू.. मैंने कल सोचा कि वो इतना ज़्यादा भी नहीं आया था.. ये मस्ती रस क्या होता है मामू?

शाहिद- ये तुझे बाद में समझा दूँगा.. अभी तो आ जा.. झूले का मज़ा ले ले और हाँ.. आज तू अपनी चड्डी निकाल कर बैठना.. नहीं तो कल की तरह फिर गंदी हो जाएगी।

शबनम- हाँ मामू सही है.. मगर चड्डी नहीं होगी तो आपके कपड़े गंदे होंगे ना?

शाहिद- अरे मेरे होंगे तो होने दे.. मैं तो यहीं रहता हूँ, तुझे घर जाना होगा.. तेरी मॉम को पता लगेगा तो गुस्सा करेगी।

शबनम- हाँ सही है मामू.. वैसे मेरी कल वाली चड्डी कहाँ है मामू?
 


शबनम की बात सुनकर शाहिद को रात की बात याद आ गई.. जब वो रज़िया को चोद कर वापस घर आया था। उसका लंड फिर खड़ा हो गया था तब उसने शबनम की चड्डी पर मुठ मारी थी, तब कहीं उसको सुकून आया था।

शबनम- मामू बताओ ना.. आप बार-बार कहाँ खो जाते हो?

शाहिद- अरे वो मैंने धोकर सुखा दी है.. तू जाते टाइम ले जाना।

शबनम- ठीक है मामू.. चलो अब बैठ जाओ, मैं भी चड्डी निकाल कर आती हूँ।

शाहिद चेयर पर बैठ गया, उसने बरमूडा नीचे कर लिया और शबनम को उल्टा ही पास आने को कहा ताकि उसको लंड दिखाई ना दे।

वैसे तो लाइट बंद थी.. मगर दिन की रोशनी अलग ही होती है ना, कितना भी लाइट बुझाओ थोड़ा बहुत तो दिख ही जाता है।

जैसा शाहिद ने कहा.. शबनम उल्टे पाँव उसके पास आ गई। जब वो बैठने लगी शाहिद ने उसका स्कर्ट ऊपर कर दिया और उसको कल की तरह बैठा लिया। अब लंड सीधे फुददी से टकराया तो शबनम सिहर उठी।

शबनम- इससस्स उफ़फ्फ़ मामू आपकी गोद में आज ये गर्म-गर्म क्यों लगा?

शाहिद- तूने चड्डी नहीं पहनी ना इसलिए.. अब बोल मत बस मज़ा ले।

शाहिद का लंड भी कुँवारी फुददी की गर्मी महसूस कर रहा था। अब वो धीमे-धीमे चेयर हिलाने लगा और लंड को फुददी पर घिसने लगा था।

शबनम- सस्स आह.. मामू आज तो आह.. कल से भी ज़्यादा मज़ा आ रहा है उम्म्ह… अहह… हय… याह… उफ़ जोर-जोर से हिलाओ ना आह.. मज़ा आ रहा है।

शाहिद को खुद बहुत मज़ा आ रहा था वो और तेज चेयर हिलाने लगा।

शबनम मज़े से सिसकियां ले रही थी.. अब तो शाहिद का लंड भी बहुत गर्म हो गया था.. उसमें से बूंदें यानि प्रीकम बाहर आने लगा था। यही हाल शबनम का था उसकी फुददी भी पानी छोड़ने लगी थी।

शबनम- आह.. उफ़फ्फ़ ससस्स मामू आह.. बहुत मज़ा आ रहा है आह.. सस्स..

शाहिद धीमे से बोला- रानी अभी ये मज़ा ले ले.. फिर तुझे चोद कर असली मज़ा दूँगा।

मज़ा लेते हुए शबनम को जाँघों पर चिपचिपा सा लगा तो उसने आगे हाथ डाल कर चैक किया और जैसे ही उसने नीचे हाथ दिया.. शाहिद का लंड उसके हाथ में आ गया, जोकि लोहे जैसा सख़्त और गर्म था। लंड का स्पर्श पाते ही वो घबरा गई और जल्दी से उठ गई।

शाहिद को कुछ करने का मौका भी नहीं मिला.. अब तक शबनम पलट गई थी और उसने लंड महाराज के दर्शन कर लिए।

शबनम- ऊऊ अब्बू रे.. मामू अपने भी चड्डी निकाली हुई है और आपकी फुन्नी कितनी बड़ी है।

शाहिद इस हमले से बौखला गया मगर फ़ौरन उसने अपने आपको संभाल लिया।

शाहिद- अरे तू उठ क्यों गई.. ऐसे मैंने चड्डी इसलिए निकाली कि तेरे मस्ती रस से ये खराब ना हो।

शबनम- वो तो ठीक है मामू मगर आपकी फुन्नी सुजान से कितनी बड़ी और मोटी है!

शाहिद- तूने कब देखी सुजान की फुन्नी?

शबनम- मॉम उसको नहलाती हैं.. तब मैंने कई बार देखी।

शाहिद- अरे वो छोटा है ना.. इसलिए उसकी छोटी है और मैं बड़ा हो गया हूँ इसलिए मेरी बड़ी है, चल अब आजा बैठ जा।

शबनम- मामू कल आपकी फुन्नी मुझे चुभ रही थी ना और ये इतनी गर्म क्यों है?

शाहिद- अरे पगली कल भी यही थी और ये तो गर्म ही रहती है.. तेरी फुन्नी भी तो गर्म है.. हाथ लगा के देख!

शबनम ने अपनी फुददी पर हाथ लगा कर देखा वो भी कामवासना में जल रही थी।

शबनम- हाँ मामू, मेरी फुन्नी भी गरम हो रही है मगर ये ऐसे गर्म क्यों है?

शाहिद- अरे नादान गुड़िया जब मेरी फुन्नी और तेरी फुन्नी आपस में मिलती हैं ना.. तब ये गर्म होती हैं और तभी फुददी रस एम्म.. मेरा मतलब है मस्ती रस बाहर आता है। अब तू सवाल ही करती रहेगी या मज़ा भी लेगी!

शबनम- मामू आपकी फुन्नी और मेरी फुन्नी मिलती है तब मज़ा भी बहुत आता है इसी लिए मस्ती रस निकलता है।

शाहिद- हाँ अब सुन तुझे और ज़्यादा मज़ा लेना है क्या?

शबनम- हाँ मामू मुझे बहुत.. बहुत सारा मज़ा लेना है।

शाहिद- अच्छा फिर चेयर को जाने दे तू बिस्तर पर सीधी लेट जा, मैं मेरी फुन्नी को तेरी फुन्नी से अच्छे से मिलाऊंगा तब बहुत ज़्यादा मज़ा आएगा।

शबनम बेचारी मज़े की मारी शाहिद की बातों में आ गई। अब शाहिद के मज़े थे वो खुल कर मज़ा ले सकता था।

शाहिद ने शबनम के पैर फैलाए और लंड को हाथ से पकड़ कर फुददी पर घिसने लगा।

शबनम- आह आह मामू सच्ची आह.. अब ज़्यादा मज़ा आ रहा है.. ससस्स उफ़फ्फ़ गुदगुदी हो रही है आह.. मेरा बदन भी आह.. मामू गर्म हो रहा है।

शाहिद- आह.. मेरी शबनम आह.. तेरी फुददी कितनी गर्म है आह.. बाहर लंड रगड़ रहा हूँ तो आह.. ये हाल है अन्दर जाएगा तो पता नहीं आह.. उफ़फ्फ़ जल ही जाएगा।

शाहिद धीमे से बोला था और जोर से भी बोलता तो भी शायद शबनम ध्यान नहीं देती, वो तो अपने मज़े में आँखें बंद करके आहें भर रही थी।

शाहिद- आह.. आ शबनम तू बहुत प्यारी है उफ़ तेरी जैसी लड़की मेरे नसीब में आई आह.. शायद मैंने आह.. कोई अच्छे कर्म किए होंगे आह.. ले आह.. मज़ा आ रहा है ना!

शबनम- ससस्स आह मामू बहुत मजा आ रहा है उफ़.. कल जैसे ही आह.. आज भी सूसू जैसा लग रहा है आह.. आह..

शाहिद के मन में ख्याल आया कि कच्ची कली का फुददी रस कैसा होगा.. उसको तो टेस्ट करना चाहिए। ये सोच कर उसने लंड से घिसाई बंद कर दी।

शबनम- उफ़ क्या हुआ मामू रुक क्यों गए आह.. कितना मज़ा आ रहा था।

शाहिद- मेरी जान क्या तुझे इससे भी ज़्यादा मज़ा लेना है?

शबनम- हाँ, मामू लेना है।

शाहिद- तो मेरी बात सुन अपनी आँखें बंद कर ले और कुछ भी हो जाए.. जब तक मैं ना कहूँ खोलना मत।

शबनम- ठीक है मामू मैं नहीं खोलूँगी आप बस मुझको मज़ा दो।

शाहिद- तो ठीक है अब देख ऐसा मज़ा दूँगा तू याद करेगी अपने मामू को।

शबनम ने कस कर आँखें बंद कर लीं और शाहिद कुत्ते की तरह अपनी जीभ से उसकी फुददी को चाटने लगा। वैसे तो वो किसी सील बंद तिजोरी की तरह थी, जीभ की नोक भी अन्दर नहीं जा पा रही थी.. मगर शाहिद नोक से उसको कुरेद रहा था और पूरी फुददी को होंठों में दबा कर चूस रहा था।

शबनम को तो जैसे दुनिया का सबसे हसीन तोहफा मिल गया था। वो हवा में उड़ने लगी थी और उसका जिस्म आग की तरह तपने लगा।

शबनम- आह आह आह सस्स मामू उफ़फ्फ़ ये क्या आह.. इतना मज़ा आह.. मेरी आह.. फुन्नी आह.. पता नहीं आह.. मामू उफ़फ्फ़..

मज़े और वासना के चलते शबनम कुछ बोल भी नहीं पा रही थी और शाहिद तो पक्का खिलाड़ी था। उसने ऐसी ज़बरदस्त फुददी की चुसाई की कि बेचारी शबनम 3 मिनट भी नहीं टिक पाई।

शबनम- आह.. आईईइ मामू आह.. मैं आ गई आह.. मेरा आह.. जोर से करो आह.. जोर से करो आह.. मेरा मस्ती रस आह.. निकलने वाला है उफ़ अफ आह.. एयाया आआ आह..

शबनम कमर को जोर-जोर से हिलाने लगी शाहिद ने उसकी टांगें कस के पकड़ी हुई थीं और वो अपनी बहन की बेटी की फुददी के रस की एक बूँद भी वेस्ट नहीं करना चाहता था। उसने बड़े स्वाद से फुददी को पूरा चाट कर साफ किया, फिर शबनम से कहा- अब आँखें खोलो।

शबनम के जिस्म से तो जैसे किसी ने सारा खून निचोड़ लिया हो.. वो एकदम बेजान सी हो गई थी।

शबनम- उफ़ मामू सच्ची आज तो बहुत मज़ा आया आह.. ओह मामू आई लव यू।

शाहिद- आई लव यू टू बेबी मेरे साथ रहोगी तो ऐसे ही मज़ा देता रहूँगा।

शबनम को ना जाने क्या याद आया.. उसने नीचे देखा और अपनी फुददी को भी हाथ लगा कर चैक किया।

उधर शाहिद का लंड तो लोहे जैसा सख़्त हो रहा था। वो सोच रहा था कि अब इसे कैसे शांत करूँ, तभी उसकी मुश्किल शबनम ने आसान कर दी।

शबनम- मामू अपने तो मेरी फुन्नी को चाट के साफ कर दिया और सारा मस्ती रस भी पी गए.. आपको घिन नहीं आई फुन्नी चाटने से?

शाहिद- तुझे कैसे पता मैंने चाटा है?

शबनम- मामू मेरी आँखें बंद थीं.. मगर इतना तो फील हुआ कि आप चाट रहे हो.. सच्ची बहुत मज़ा आ रहा था।

शाहिद- शबनम फुन्नी से कैसी घिन.. कोई सूसू थोड़े था जो घिन आती, वो तो मस्ती रस था उसमें बड़ा स्वाद होता है।

शबनम- सच्ची ओह मामू आप सारा अकेले पी गए.. मुझे भी टेस्ट करना है।

इतना सुनना था कि शाहिद की बांछें खिल गईं उसको अगला कदम साफ़ दिखने लगा था।

शाहिद के चेहरे पे एक शैतानी मुस्कान आ गई- अरे ये कौन सी बड़ी बात है, ये देख मेरी फुन्नी रस से भरी हुई है, तू इसको चूस के सारा मस्ती रस निकाल ले।

शबनम- ओह वाउ क्या मस्त आइडिया है.. आपने मेरा रस पिया, अब मैं आपका पी लूँगी.. हिसाब बराबर हो जाएगा।

शाहिद बेड पर टेक लगा कर बैठ गया और उसने लंड सहलाते हुए शबनम से कहा- जैसे तू आइसक्रीम को चाटती और चूसती है ना.. ठीक वैसे ही चूसना.. तब मस्ती रस बाहर आएगा।

शबनम अब घुटनों के बल बैठ गई और सुपारे को जीभ से चाटने लगी। धीमे-धीमे वो मुँह को पूरा खोल कर टोपा मुँह में भर के चूसने लगी। वैसे तो उसके छोटे से मुँह में शाहिद का विशाल लंड जाना मुश्किल था.. मगर वो कोशिश पूरी कर रही थी कि ज़्यादा से ज्यादा लंड अन्दर ले सके।

शाहिद के लंड से हल्का पानी रिसने लगा था जिसका स्वाद शबनम को थोड़ा अजीब लगा। एक बार तो उसने लंड मुँह से निकाल भी दिया।

शाहिद- आह.. क्या हुआ शबनम.. चूसो ना..!

शबनम- मामू थोड़ा-थोड़ा रस आ रहा है मगर ये नमकीन सा है.. कुछ अजीब सा लग रहा है।

शाहिद- अरे ये तो शुरूआत है.. असली क्रीम तो बाद में आएगी.. तू बस चूसती रह।

शबनम फिर शुरू हो गई.. लंड की चुसाई करने लगी। वो अपने हाथ से लंड को पकड़ कर दबाने लगी और होंठ दबा कर लंड से रस खींचने लगी। शबनम के नर्म होंठ और उसकी गर्मी शाहिद को बहुत सुकून दे रही थी, वो अब धीमे-धीमे कमर को हिलाने लगा था।

शाहिद- आह.. आ शबनम चूस उफ़ तू बहुत अच्छा चूसती है आह.. निकाल दे आह.. सारा रस उफ़ मेरी जान आह.. ऐसे ही उफ़ आह..

दस मिनट तक शबनम दिलोजान से लंड को चूसती रही। शाहिद तो पहले ही बहुत गरम था, ऊपर से शबनम के टाइट होंठ की चुसाई.. उसको चरम पे ले आई।

शाहिद- आह.. आह शबनम जोर से कर आह.. रस आने वाला है आह.. फास्ट फास्ट मेरी जान उफ..

शबनम भी जोश में आकर लंड चूसने लगी। एक तेज धार लंड से निकली.. और सीधी उसके गले में चली गई.. फिर ना जाने कितनी धारें और निकलीं.. जिसे शबनम ने गटक लिया। जब उसने मुँह हटाया तो थोड़ा वीर्य और निकला, जिसे देख कर शबनम ने अपनी उंगली पे ले लिया।

शबनम- ओह मामू आपका ये रस कितना वाइट और गाढ़ा है।

शाहिद- हाँ ये ऐसा ही होता है.. चाट ले इसको और लंड को भी चाट कर साफ कर दे।

शबनम- लंड क्या होता है मामू?

शाहिद- अरे ये फुन्नी जब बड़ी होती है इसको लंड कहते हैं.. अब देर मत कर नहीं तो ये सूख जाएगा, फिर मज़ा नहीं आएगा।

शबनम ने झट से उंगली मुँह में ली और चाट ली, फिर लंड को जीभ से चाट कर साफ कर दिया।

शाहिद- गुडगर्ल.. ये हुई ना बात अब बोल तुझे मज़ा आया कि नहीं?

शबनम- मामू ऐसा मज़ा आया कि मैं बता नहीं सकती आपको.. प्लीज़ आप रोज मुझे ऐसा मज़ा दोगे ना.. अपनी फुन्नी से रस भी पिलाओगे ना मुझे?

शाहिद- हाँ ज़रूर मेरी जान.. अब सुन इसको फुन्नी नहीं लंड या लौड़ा कहा कर समझी और तेरी ये जो है इसको फुददी बोला कर.. फुन्नी छोटे बच्चों की होती है। अब तू बड़ी हो गई है मगर किसी और के सामने नहीं बोलना, बस मेरे सामने ही.. समझ गई ना?

शबनम- समझ गई मामू.. मगर आप रोज मज़ा दोगे वादा करो।

शाहिद- अरे हाँ शबनम.. ये तो अभी कुछ भी नहीं है.. मैं तुझे रोज अलग-अलग तरह से मज़ा दूँगा। चल अब चड्डी पहन ले, तेरी मॉम उठने वाली है और ध्यान रखना ये बात किसी को मत बताना.. नहीं तो दोबारा कभी मज़ा नहीं मिलेगा और सब डांटेंगे भी।

शबनम- मैं समझ गई मामू ये जो हमने किया, ये ग़लत है ना.. मगर आप टेंशन मत लो, मैं किसी को नहीं बताऊंगी।

शाहिद- तू लगती है नादान.. मगर समझदार बहुत है, चल तू घर जा और हाँ वो सामने अलमारी से तेरी चड्डी निकाल के बैग में डाल कर ले जाना.. कल तुझे मैं एक अलग मज़ा दूँगा।

शबनम बहुत खुश थी.. वो किसी तितली की तरह उड़ती हुई वहाँ से चली गई और शाहिद लंबी आहें भरता हुआ लेट गया।

 
उधर कॉलेज से रज़िया और शाजिया साथ ही आईं। रज़िया ने शाजिया को कहा कि वो उसके घर चले तो शाजिया ने मना कर दिया कि उसकी मॉम गुस्सा करेगी। तब रज़िया ने कहा कि अच्छा वो चेंज करके उसके पास आ जाएगी।

रज़िया बेड पर उसके पास बैठ गई और उसके गालों को सहलाती हुई बोली- मेरी जान.. सुबह का टास्क अधूरा रह गया था ना, वही पूरा करने आई हूँ और आज तुझे थोड़ा ज्ञान भी देना है।

शाजिया- ओह अच्छा वो टास्क.. और ज्ञान कैसा आपा.. मैं कुछ समझी नहीं?

रज़िया- सब्र कर जानेजिगर बताती हूँ, पहले मेरे कुछ सवालों के जबाव तो दे।

शाजिया- ओके आपा आप पूछो ना?

रज़िया- सबसे पहले ये बता.. तू स्कूल लाइफ से कॉलेज लाइफ तक आ गई.. कभी तूने बॉय फ्रेंड नहीं बनाया ऐसा क्यों?

शाजिया- वो आपा बात ये है कि मैं बचपन से सीधी साधी हूँ.. और मेरे अब्बू को भी स्टाइल्स पसंद नहीं है.. बस यही वजह है।

रज़िया- अरे तू एकदम पटाखा आइटम है.. किसी लड़के ने तुझे प्रपोज तो किया होगा?

शाजिया- हाँ आपा.. 10 से 12 क्लास तक बहुत लड़कों ने मुझ पर ये सब ट्राइ किया मगर मैंने उनकी शिकायत हर बार की, कभी प्रिन्सिपल से, कभी मेरे अब्बू से.. बस इससे ये हुआ कि किसी की ज़्यादा कुछ करने की हिम्मत ही नहीं हुई।

रज़िया- अच्छा तेरी कोई सहेली तो होगी उनके तो ब्वॉयफ्रेंड होंगे?

शाजिया- आपा जिनके ब्वॉयफ्रेंड थे.. मैं उनसे दूर रहती थी और जो ऐसी वैसी बातें करती.. मैं उनकी भी शिकायत प्रिन्सिपल से कर देती थी, इसलिए मेरी कोई सहेली नहीं बनती थी। बस एक ही लड़की थी जो शुरू से 12 वीं तक मेरी बेस्ट फ्रेंड रही और अब वो भी मुझसे दूर हो गई। उसका एड्मिशन हमारे कॉलेज में 12 वीं में नो काम आने से नहीं हो पाया।

रज़िया- अच्छा कौन थी वो.. नाम क्या था उसका?

शाजिया- उसका नाम नगमा था आपा।

रज़िया- अच्छा अब ये बता तुझे पीरियड्स आए तो कैसे हैण्डल किया तूने.. और तुम अपने बाल तो साफ करती हो या नहीं?

शाजिया- पीरियड्स मतलब मासिक धर्म… शुरू में जब आए मैं बहुत डर गई थी। फिर अम्मी ने मुझे समझाया और उन्होंने कहा कि जब पेट में दर्द हो तब ये आते हैं.. ये सब नॉर्मल है।

रज़िया- अच्छी बात है और बाल सफाई?

शाजिया- ये मुझे पहले नहीं पता था.. एक दिन नगमा ने बताया कि नीचे के बाल साफ करते रहना चाहिए.. नहीं तो खुजली हो जाती है और उससे बीमारी आती है। उसने मुझे एक क्रीम भी बताई और तरीका भी बताया था।

रज़िया- गुड यानि नगमा समझदार थी तो उसने तुझसे कभी सेक्स के बारे में बात नहीं की कि सेक्स का तो पता है ना या नहीं?

शाजिया- क्या आपा आप भी अब इतनी बच्ची भी नहीं हूँ.. ये सब मुझे पता है।

रज़िया- ओह रियली तो ज़रा एक्सप्लनेशन दोगी?

शाजिया- वो जब लड़का और लड़की शादी के बाद एक साथ सोते है और चिपकते हैं उसको सेक्स कहते हैं।

रज़िया- हा हा हा हा हा तू तो हा हा हा कसम से दुनिया का आठवाँ अजूबा है।

शाजिया- क्या हुआ आपा.. आप ऐसे हंस क्यों रही हो? मैंने कुछ ग़लत कहा क्या?

रज़िया हंस-हंस के पागल हो रही थी, उसका पेट दर्द करने लगा था। काफ़ी देर बाद उसने अपने आपको संभाला।

रज़िया- मुझे पता था तू ऐसा ही कुछ बताएगी.. अरे जिसे डिल्डो का नहीं पता.. लंड का नहीं पता.. यहाँ तक कि फिंगरिंग का भी नहीं पता, वो सेक्स के बारे में क्या खाक बताएगी।

शाजिया- अच्छा आपा सॉरी.. मुझे तो यही पता था। अब आप बता दो क्या होता है?

रज़िया- अच्छा जब तू नहाती है.. अपनी फुददी पर हाथ लगाती है या बाल साफ करती है, तब तुझे कुछ अजीब सा महसूस नहीं होता?

शाजिया- आपा आप ये फुददी क्यों बोलती हो.. मुझे अच्छा नहीं लगता, ये गाली है ना?

रज़िया- अरे मेरी अम्मी.. इसका यही नाम है तू किताबी नाम के पीछे पड़ी है। अब किताबों की दुनिया से बाहर आ जा.. और आज से इनके असली नाम ही लेना समझी.. वरना मैं तेरे से कभी भी बात नहीं करूँगी।

शाजिया- ओके आपा ठीक है.. अब मैं आपकी तरह ही इनके नाम बोलूँगी।

रज़िया- अच्छा तो मैंने जो पूछा वो बता?

शाजिया- शुरू मैं जब मैंने बाल साफ किए तो ये.. नहीं फुददी में अजीब सी बेचैनी हुई.. खुजली सी होने लगी, ऐसा लगा बस उसको रगड़ती रहूँ, मगर मुझे ये अच्छा नहीं लगा तो मैंने जल्दी से नहा लिया। उसके बाद बहुत बार वैसी बेचैनी महसूस करती हूँ, मगर ध्यान हटा कर रिलेक्स हो जाती हूँ।

रज़िया- ओह पगली.. तेरी फुददी का लावा बाहर आने को बेताब है और तू है कि उसको रोके हुए है। चल आज तुझे ठंडा कर देती हूँ।

शाजिया- आपा आपसे एक बात पूछनी थी?

रज़िया- हाँ पूछ एक क्यों.. दो पूछ?

शाजिया- हमारे बीच जो ये सब बातें होती हैं.. ये आप शाहिद जी को बताती हो क्या?

रज़िया- अरे नहीं पागल.. उसको क्यों बताऊंगी, ये हमारे बीच की बात है।

शाजिया- मगर आप तो वो बुक के हिसाब से मुझे टास्क देती हो.. जो शाहिद ने लिखी है।

रज़िया- ऐसा नहीं है.. शाहिद ने तो ऐसे ही बोल दिया था तुझे, असल बात ये है कि उसने मुझसे कहा कि तुझे फास्ट बनाऊं.. आजकल की लड़की की तरह और उसके लिए तू अपने हिसाब से उसको टास्क देना। अगर मना करे तब मुझे बताना, मैं उसे देख लूँगा।

फ्रेंड्स, अब आगे शाजिया की फुददी की चुदाई की कहानी तैयार होने लगी है।

रज़िया की बात सुनकर शाजिया खुश हो गई और रज़िया से चिपक गई।

रज़िया- अरे क्या हुआ इतनी खुश क्यों है?

शाजिया- वो आपा, कब से मेरे दिमाग़ में ये चल रहा था कि इतने गंदे टास्क के बारे में शाहिद जी को पता होगा तो वो मुझे किस नज़र से देखते होंगे इसलिए मुझे उनसे मिलते समय बड़ी शर्म आती थी।

रज़िया- अच्छा ये बात है.. अब तो तू खुलकर टास्क करेगी ना.. अब शुरू करें!

शाजिया- हाँ आपा.. अब आप जो भी कहोगी, मैं रेडी हूँ.. आप बस बोलो क्या करना है।

रज़िया- देख.. जब तक तुझे सेक्स क्या है, ये बात समझ में नहीं आती.. ये डिल्डो वाला टास्क बेकार है। आज तुझे सेक्स वीडियोज दिखाती हूँ, चुपचाप देखना.. बीच में कुछ समझ ना आए तो पूछ लेना।

शाजिया ने ‘हाँ’ में गर्दन हिलाई और रज़िया ने अपने मोबाइल में एक हिंदी सेक्सी वीडियो चालू कर दिया, जिसे देख कर शाजिया की आँखें फटी रह गईं और उसने जल्दी से मुँह घुमा लिया।

रज़िया- अरे क्या हुआ देख ना!

शाजिया- छी छी.. आपा ये क्या है.. ये आदमी कैसे इस लड़की के सारे कपड़े निकाल रहा है। मुझे बड़ी शर्म आ रही है और ये खुद नंगा है.. इसका लिंग.. ओह सॉरी लंड कितना बड़ा है.. कैसे लटक रहा है।

रज़िया- अरे पागल ये शुरू में गंदा लगेगा लेकिन जब तुझे सब समझ आ जाएगा तो फिर बहुत मज़ा आएगा। अब गौर से देख.. ये आदमी इसके साथ सेक्स करेगा। अब तूने अगर बीच में कोई नाटक किया, तो मैं चली जाऊंगी ओके!

शाजिया ने बेमन से ‘हाँ’ कही और वीडियो फिर शुरू हो गया।

उस आदमी ने लड़की के पूरे कपड़े निकाल दिए और उसको बिस्तर पर लेटा कर उसके चुचों को चूसना शुरू किया। वो बड़े मज़े से उसको किस करता, उसके मम्मे चूसता रहा। धीमे-धीमे वो उसकी फुददी के पास गया फिर फुददी को मज़े से चूसने लगा। ये सब देख के शाजिया को घिन आ रही थी मगर एक अजीब सा मज़ा भी मिल रहा था। वो बस आँखें फाड़े उसको देख रही थी। थोड़ी देर बाद वो आदमी बैठ गया और वो लड़की लंड को चूसने लगी।

शाजिया- सॉरी आपा.. एक मिनट रोको एक बात पूछनी है.. ये क्या हो रहा है मेरी समझ में नहीं आ रहा।

रज़िया- ठीक है पूछो क्या है।

शाजिया- ये क्या कर रहे हैं.. पहले उस आदमी ने उसकी फुददी को चाटा.. अब ये लड़की इसके लिंग को सॉरी लंड को चाट रही है। ये बहुत गंदा है.. क्या यही सेक्स है?

रज़िया- देखो शाजिया.. मैंने कहा ना शुरू में सब गंदा लगता है, मगर बाद में बहुत मज़ा आता है। इसे सेक्स नहीं फोरप्ले कहते हैं.. यानि सेक्स के पहले एक-दूसरे को उत्तेजित करना, इसके बाद ये आदमी इसकी फुददी में लंड डालेगा, उसको चुदाई यानि सेक्स कहते हैं। तो पूरा वीडियो देख सब समझ में आ जाएगा।

शाजिया- समझ गई आपा.. आप चालू करो।

वीडियो दोबारा शुरू हो गया.. अब चुदाई का सीन देख कर शाजिया की फुददी भी गीली होने लगी थी। उसके निप्पल एकदम हार्ड हो गए.. उसको कुछ पता नहीं था, मगर वो जो देख रही थी उसका जवान जिस्म उसको अच्छी तरह समझ रहा था। वो काफ़ी उत्तेजित हो गई थी उसके होंठ सूख गए और वो बस आँखें फाड़े वीडियो देखती रही।

जब वीडियो ख़त्म हुआ तो रज़िया ने उससे पूछा- कुछ समझ आया?

शाजिया- उफ़ आपा.. अब सब समझ आ गया.. इसे कहते हैं सेक्स.. और आपा इसको देख के पूरे जिस्म में चींटियाँ रेंग रही हों.. मुझे ऐसा महसूस हो रहा था।

रज़िया- हा हा हा इसका मतलब तू गर्म हो गई और तेरी फुददी भी गीली हो गई ना!

शाजिया ने शर्माते हुए ‘हाँ’ कहा।

रज़िया- बस अब तेरी सोई हुई कामवासना जाग गई है.. अब तुझे दूसरा वीडियो दिखाती हूँ.. जिसमें ये डिल्डो का राज भी तेरी समझ में आ जाएगा।

फिर रज़िया ने एक और वीडियो दिखाया.. जिसमें लड़की डिल्डो के साथ मज़े करती है और फिर एक वर्जिन लड़की का वीडियो दिखाया, जिसमें एक लड़की बस उंगली से अपनी फुददी को रगड़-रगड़ के शांत होती है।

ये सब देख कर शाजिया की हालत पतली हो गई.. उसकी फुददी से लगातार पानी निकलने लगा, उसका जिस्म आग की तरह जलने लगा।

रज़िया- हाँ तो शाजिया रानी अब ये दो वीडियो से क्या सीखी तुम?

शाजिया- सब समझ गई आपा.. अगर आदमी ना हो तो भी लड़की इस नकली लंड के साथ सेक्स कर सकती है और ये भी ना हो तो उंगली से भी सेक्स कर सकती है। इसे ही आप फिंगरिंग बोल रही थी ना!

रज़िया- शाबाश शाजिया बहुत जल्दी समझ गई तुम.. अब तुम्हें टास्क देती हूँ अब तू मज़े से कर पाएगी।

रज़िया ने शाजिया के हाथ में डिल्डो दिया और कहा- अब इसको चूसो और फील करो कि ये असली है इसको फुददी पे रगड़ो।

शाजिया ने डिल्डो को लिया और चूसने लगी.. शुरू में तो वो थोड़ी झिझकी मगर बाद में मज़े से चूसने लगी। अब उसकी वासना जाग गई थी। वो उसको कपड़े के ऊपर से ही फुददी पर रगड़ने लगी और उसको बहुत मज़ा आने लगा।

रज़िया उसके पास बैठ गई और हल्के-हल्के उसके चुचों को सहलाने लगी।

शाजिया- आह आपा स्शह.. मेरी फुददी आह.. पता नहीं.. उफ़ बहुत गर्म हो रही है आह.. खुजली भी बहुत हो रही है आह..

रज़िया- रुकना मत.. बस करती रह आज तेरा पानी निकल जाने दे.. जोर से रगड़।

शाजिया अब वासना के भंवर में फँस चुकी थी, वो डिल्डो को जोर से फुददी पे रगड़ रही थी। इधर रज़िया उसके चुचों को सहला रही थी। बहुत जल्द शाजिया अपने चरम पे पहुँच गई.. उसने आँखें बंद कर लीं और मोन करने लगी।

शाजिया- ऊउउ ऊउउ उह आह ओह उफफ़् एयाया आपा उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह आह..

आज पहली बार शाजिया की फुददी का लावा बाहर निकला था और इतना पानी निकला कि उसकी पेंटी तो क्या, पजामा भी गीला हो गया। वो धम से बिस्तर पे गिरी और लंबी साँसें लेने लगी।

रज़िया- क्यों डार्लिंग मज़ा आया ना.. इसे कहते हैं लाइफ और तू आज तक जो जी रही थी.. वो लाइफ से ये लाइफ लाख गुना अच्छी है।

शाजिया- सच में आपा आप बहुत अच्छी हो, ऐसा मज़ा ऐसा सुकून आज तक नहीं मिला, मेरी पूरी बॉडी इतनी हल्की हो गई कि ऐसा लगता है मैं हवा में उड़ रही हूँ। थैंक्स आपा मुझे ये सब सिखाने के लिए!

रज़िया- अरे थैंक्स कैसा.. तू तो मेरी स्वीट फ्रेंड है, तेरे लिए सब कुछ करूँगी।

शाजिया- आपा, देखो मैं पूरी गीली हो गई हूँ। कपड़े चेंज कर लूँ.. नहीं तो अम्मी आएगीं तो उनको पता लग जाएगा।

रज़िया- अरे कुछ नहीं होगा.. खाला क्यों आएंगी.. तू बाद में साफ़ कर लेना, अभी बस मेरी बातों पे ध्यान दे। तुझे अब आगे ऐसे ही करना है।

शाजिया- हाँ आपा अब मैं समझ गई अब ऐसे ही करूँगी.. आज मुझे बहुत मज़ा मिला।

रज़िया- अभी तो शुरूआत है जानेजिगर आज जो किया वो कपड़ों के ऊपर से किया। अबकी बार पूरी नंगी होकर करना तब तुझे और भी ज़्यादा मज़ा आएगा।

शाजिया- नहीं आपा आपके सामने पूरी नंगी होने में मुझे शर्म आएगी।

रज़िया- अरे कुछ नहीं होगा और अबकी बार मेरे सामने नहीं.. तू जब अकेली हो तब ये करना। बस उंगली ऊपर ही रगड़ना.. अन्दर मत डालना वरना गड़बड़ हो जाएगी।

शाजिया- कैसी गड़बड़ आपा.. मुझे बताओ?

रज़िया ने उसको सील यानि झिल्ली के बारे में समझाया और उससे ये भी कहा कि जब उसके पीरियड्स पूरे होंगे उसको लेसबो भी सिखाएगी मगर आज के लिए बस इतना काफ़ी है।

शाजिया- ओके आपा मगर एक बात है अभी तो ये वीडियो देख के मुझे मज़ा आया तब ये करने का दिल किया मगर अकेले में कैसे में कर पाऊंगी।

रज़िया- तेरे पास मोबाइल भी नहीं है वरना तुझको ये वीडियो दे देती। अच्छा एक काम कर तेरी मॉम के पास तो मोबाइल है ना… मैं तुझे कुछ बताती हूँ तू वीडियो को जाने दे और राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर हिंदी सेक्स कहानी रीड कर.. उसमें तुझे ज़्यादा ज्ञान मिलेगा।

शाजिया- कैसी हिंदी सेक्स कहानी आपा और ये राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम क्या है.. मैं समझी नहीं।

रज़िया- अरे पागल जैसे सेक्स वीडियोस होते हैं.. वैसे ही सेक्स कहानी भी होती हैं।

शाजिया- अच्छा तो राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम में सब कुछ डिटेल में लिखा होता है?

रज़िया- हाँ सही समझी.. अब सुन राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम वर्ल्ड की सबसे बेस्ट साइट है हिंदी सेक्स कहानी के लिए और वहाँ बहुत से राइटर हैं ..

शाजिया- ओके आपा, मगर ‘अम्मी’ के फ़ोन में ये सब करना रिस्की होगा।

रज़िया- अरे कुछ नहीं तू रीड करके साइट बंद कर देना और हिस्टरी क्लियर कर देना।

रज़िया ने शाजिया को अपने मोबाइल में सब समझा दिया कि कैसे करना है, उसके बाद वो चली गई और शाजिया अपने ख्यालों में खो गई कि कैसे 2 दिन में उसकी लाइफ कितनी बदल गई है और आज जो मज़ा उसको मिला.. वो सोच कर उसके होंठों पे एक मुस्कान आ गई।

 
फ्रेंड्स, शाम तक ऐसा कुछ नहीं हुआ.. चलो सीधे शाम की पार्टी का मज़ा लेते हैं।

जैसे कि शाहिद ने पहले ही सबको समझा दिया था कि क्या करना है। रज़िया के दिल में आया कि वो शाजिया को भी साथ ले ले, मगर शाहिद ने उसको मना कर दिया।

शाम को 7 बजे सब शाहिद के पुराने घर पर पार्टी की तैयारी कर रहे थे।

रज़िया ने रेड गाउन पहना हुआ था वो बहुत मस्त आइटम लग रही थी, जिसे देख कर सलमान और फैजान लार टपका रहे थे।

फैजान- हे रज़िया क्या लग रही है तू.. साली जब मकान मिला तो तूने रेड सिग्नल दे दिया।

रज़िया- अरे कुत्ते, तुझे किसने बताया रे..!

शाहिद- अरे सुबह मैंने बताया था ये साला तो कुत्ता ही है.. अबे सालों रूबी आती होगी.. अब ये गंदी बातें बंद करो।

सलमान- उफ़ साली का नाम सुनकर ही लंड फुंफकारने लगा.. यार वो चुदवा तो लेगी ना?

आज़म- साली सेक्स बॉम्ब है.. नहीं मानेगी तो साली को ज़बरदस्ती लंड पेल देंगे।

शाहिद चुपचाप उन सबकी बातें सुन रहा था मगर रज़िया से रहा नहीं गया- पागल हो गए हो क्या? ज़बरदस्ती से काम बिगड़ जाएगा.. शाहिद तुम इनको कुछ बोलते क्यों नहीं?

शाहिद- अरे ख्याली पुलाव हैं.. पका लेने दो.. साले को कौन सा ये सच में उसका बलात्कार करेगा हा हा हा हा।

आज़म- क्या यार, तूने ही तो कहा था कि आज फुददी का इंतजाम हो गया।

शाहिद- साले मैंने आज का नहीं कहा था, बस इंतजाम हो गया ये कहा था, अब उसको पटाने तो दो.. तुम सब ऐसे वहशी बनोगे तब तो समझो स्कीम फेल ही हो गई।

अमन- यार सब लोग चुप हो जाओ.. शाहिद ने कुछ तो सोचा होगा, ऐसे तो उसने हमें यहाँ बुलाया नहीं है।

शाहिद- देखो सिर्फ़ ये अकेला समझदार है.. बाकी सब चूतियापने की बातें कर रहे हो। अब तुमको स्कीम बताने का टाइम आ गया।

फैजान- जल्दी बता यार.. मेरा लंड तो उसकी गांड मारने को बेताब हो रहा है।

रज़िया- अबे साले उसकी गांड देखी है तूने.. तेरी मूँगफली कहीं खो ना जाए उसमें हा हा हा हा..

रज़िया के साथ सब हंसने लगे और फैजान चिढ़ गया और गुस्से में उसने लंड पेंट के बाहर निकाल लिया।

फैजान- क्या मूँगफली बोलती है साली.. देख लो नाप ले ले.. पूरे 5″ का है.. ये तो अभी नॉर्मल साइज़ है, अब ये बाकी सबका 7″ 8″ का है तो मेरा तुझे छोटा हे लगेगा ना।

शाहिद- अबे साले बंद कर.. वो आ जाएगी तो सारा गेम ओवर हो जाएगा।

अमन- तुम स्कीम बताओ यार, ये तो ऐसे ही करेगा.. साला आदत से मजबूर है ये!

शाहिद- सुनो उस साली को मैंने सुबह ही ताड़ लिया था, अच्छी तरह चुदी चुदाई है.. मगर हमारे सामने नाटक कर रही थी। अब उसके मुँह से हम उगलवा लेंगे कि वो चुदी हुई है, उसके बाद उसको बातों में फँसा लेंगे और साली खुद ब खुद चुदने को तैयार हो जाएगी। मगर तुम सब सुन लो, सालों ज़ज्बात में जल्दी आ जाते हो.. जरा कंट्रोल में रहना।

अमन- बात तो समझ में आ गई मगर वो खुद कैसे बोलेगी उसका क्या प्लान है?

शाहिद ने विस्तार से सबको अपनी स्कीम बताई और कैसे सबको एक्टिंग करनी है.. ये समझा दिया।

आज़म- वाह यार अब सब समझ में आ गया.. अब तो साली चुदेगी ही चुदेगी।

फिर 15 मिनट तक सब नॉर्मल बातें करते रहे.. तभी गेट पर नॉक हुई तो शाहिद खड़ा हुआ और गेट खोलने चला गया। गेट खोला तो सामने रूबी ही थी, उसने पिंक कलर का शॉर्ट टॉप और नीचे ब्लेक जींस की कॅप्री पहनी हुई थी। वो सेक्स की जीती जागती देवी लग रही थी। जब वो अन्दर आई सबके होश उड़ गए। उसके भारी भरकम मम्मे टॉप को फाड़ कर बाहर आने को बेताब थे। उसका गोरा पेट साफ दिख रहा था और कॅप्री में उसकी गांड की कसावट कुछ अलग ही दिख रही थी।

रूबी- हे गाइस.. हाउ आर यू.. मैं लेट तो नहीं हुई ना!

सबने रूबी को हाय कहा और शाहिद ने कहा कि वो बिल्कुल टाइम पे आई है।

रूबी- वैसे आप ही सब यहाँ हो.. बाकी कोई नहीं दिखाई दे रहा और पार्टी जैसा माहौल भी नहीं है एवेरीथिंग इस फाइन ना..!

शाहिद- अरे सब ठीक है.. तुम समझी नहीं, पार्टी तो बस एक बहाना था.. असल तो हम सब अच्छे से आपस में मिल लें, इसलिए छोटी सी पार्टी रखी है और हाँ सुबह के लिए सॉरी यार.. वो रेगिंग वाली बात तुम सीनियर्स की कैटेगरी में आती हो।

रूबी- ओह कोई बात नहीं.. ये तो चलता रहता है, सुबह आप जैसे रेगिंग कर रहे थे.. मैं तभी समझ गई थी आप बुरे नहीं हो, वरना असली रेगिंग तो.. ओह गॉड… जाने दो और बताओ क्या प्रोग्राम है?

शाहिद- अरे क्या हुआ बताओ ना, असली रैगिंग क्या होती है?

रूबी- अरे अभी तो आई हूँ.. बाद में बता दूँगी, पहले पार्टी शुरू करें, वैसे खाने में क्या है.. और कोई भी प्रोग्राम है क्या?

शाहिद- ओह सॉरी आओ ना रूबी बैठो.. खाना तो होटल से मँगवाया है मिक्स है.. वेज भी और नॉनवेज भी है, मगर खाने से पहले थोड़ी ड्रिंकिंग हो जाए तो पार्टी का मज़ा आएगा.. तुम ड्रिंक करती हो या नहीं?

रूबी- ओह वाउ इट्स टू गुड.. या ऑफ कोर्स यार.. पार्टी बिना ड्रिंक के अच्छी नहीं लगती और हमारे गोवा में तो नॉर्मली ही ड्रिंक कर लेते हैं।

आज़म- आप तो बिल्कुल हमारे टाइप की हो.. खाने के बाद थोड़ा डांस का भी प्रोग्राम है.. वो आपको पसंद है क्या?

सलमान- कैसी बात करता है तू.. बिना डांस के पार्टी का क्या मज़ा.. क्यों रूबी?

रूबी- हाँ सही है.. डांस का अपना मज़ा है और रज़िया तुम कुछ नहीं बोल रही हो?

रज़िया- क्या बोलूँ यार.. तुम सबने जो डिसाइड किया, वही ठीक है।

रूबी- अरे क्या हुआ.. पार्टी के माहौल में तुम इतनी रूखी-रूखी क्यों हो?

शाहिद- अरे कुछ नहीं ऐसे ही.. अब चलो सब बैठ जाओ, नहीं तो बियर गर्म हो जाएगी।

सब वही गोल घेरे में बैठ गए। शाहिद ने शाम को टेबल चेयर का बंदोबस्त कर लिया था। अब पार्टी शुरू हो गई थी.. सब मज़े से बियर गटक रहे थे।

शाहिद ने फैजान को इशारा किया कि वो प्लान को शुरू करे।

फैजान- अरे यार सब ऐसे चुप क्यों हो.. बात करो रूबी नई है.. इसे अपने बारे में बताओ और रूबी तुम भी हमें अपने बारे में बताओ.. गोवा में क्या करती थी घर के बारे में दोस्तों के बारे में!

शाहिद- हाँ सही है.. अब हम सब दोस्त हैं तो ये जानकारी होनी ही चाहिए।

रूबी- ओके ठीक है.. मगर ये जानकारी की बात लास्ट में करेंगे.. अभी बस बियर का मज़ा लो.. वो एक और देना आज़म और प्लीज़ वो साथ में फ्रेंच फ्राइ भी देना।

सब एक-दूसरे से हँसी-मज़ाक कर रहे थे और बियर पी रहे थे। अब रूबी पे भी नशा चढ़ने लगा था.. उसकी आँखें नशीली हो रही थीं.. इसी मौके का फायदा उठा कर रज़िया ने पासा फेंका जो निशाने पे लगा।

रज़िया- कहाँ से लाया है ये बियर.. इसका टेस्ट ही अजीब लग रहा है।

अमन- अरे इतनी पीने के बाद तुझे टेस्ट खराब लगा क्या?

शाहिद- अरे जाने दे उसका मूड सही नहीं है.. इसलिए वो जो बोले सब सही है।

रूबी- क्या हुआ रज़िया.. मैं जब से आई हूँ तुम उदास लग रही हो.. सब ठीक है ना?

रज़िया- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है.. वो दरअसल आज मेरे पीरियड शुरू हुए ना तो बस सब बकवास लग रहा है।

सबका ध्यान रूबी की तरफ़ था.. वो इस बात को सुनकर कैसे रिएक्ट करती है।

रूबी- अरे क्या यार ये तो नॉर्मल है सबको पीरियड आते हैं.. अब इसका मतलब ये थोड़े ही है कि पार्टी एंजाय ना करें।

शाहिद- यही तो इसको मैं कब से समझा रहा हूँ मगर ये समझती ही नहीं।

 
रज़िया- तुम तो चुप ही रहो.. तुम लोगों को नहीं आते ना.. इसलिए पता नहीं हम लड़कियों की क्या हालत होती है।

सलमान- ये क्या बात हुई यार.. तुमको तो महीने में एक बार आते तो तुम्हारा मूड खराब होता है.. साला यहाँ तो हफ्ते में 2 बार मूड खराब होता है।

रज़िया- क्या बकवास कर रहे हो.. तुम्हें कौन से पीरियड आते हैं.. जो ऐसा होता है?

फैजान- तुम समझी नहीं रज़िया.. ये साला सपनों में फेल होता है.. उसकी बात कर रहा है हा हा हा हा हा हा..

फैजान के साथ सभी हंसने लगे और रूबी तो कुछ ज़्यादा ही हंस रही थी।

रज़िया- चुप करो सालों.. हवस के पुजारी हर टाइम बस यही सूझता है।

आज़म- अब इसमें इनकी क्या ग़लती है यार.. तू टाइम पर दे दे तो ये नौबत ही ना आए।

शाहिद- ये क्या बकवास कर रहे हो सबके सब.. रूबी क्या सोचेगी कुछ अक़ल है कि नहीं तुम लोगों में? और रज़िया तू भी इनके साथ शुरू हो गई?

रज़िया- अरे मैंने क्या किया है.. ये साले सलमान ने पहले शुरू किया था।

रूबी- प्लीज़ यार तुम झगड़ो मत.. दोस्तों की पार्टी में ऐसे हँसी मज़ाक होता है।

शाहिद- मज़ाक अलग बात है.. ये कुछ ज़्यादा वलगर हो रहा है।

रूबी- कोई बात नहीं यार सच कहूँ तो ऐसी वलगर बातें पार्टी में होती हैं तो उसका अलग ही मज़ा आता है।

सबकी नज़रे बस रूबी को घूर रही थीं.. यानि शाहिद की स्कीम काम करने लगी थी कि पहले बकवास सी बातें करो.. फिर धीमे-धीमे बातों को सेक्स की तरफ़ मोड़ दो। अगर ये चुदी हुई है तो इसको कुछ बुरा नहीं लगेगा और अभी तक तो सब प्लान के हिसाब से हो रहा था।

फैजान- देख ये रूबी कितनी समझदार है और तू बस नाटक करती है। कल मान जाती तो मज़ा आता ना.. अब आज रेड सिग्नल देके बैठी है।

रूबी- हे हैलो.. तुम सीनियर्स हो मैं समझी तुम सब मज़ाक कर रहे हो।

रज़िया- नहीं यार ये मज़ाक नहीं सच है.. हम सबने एक साथ मस्ती करने का प्लान बनाया था मगर लास्ट मोमेंट मेरे पीरियड की वजह से सब चौपट हो गया।

शाहिद- रज़िया हद है यार.. ऐसे सारी बातें बोलना ठीक है क्या?

रज़िया- इट्स ओके यार.. शाहिद रूबी अब हमारी दोस्त है.. आज नहीं तो कल इसे सब पता लगना ही है। यहाँ नहीं तो कॉलेज में मालूम हो जाएगा.. तो इससे अच्छा हम ही इसको बता देते हैं।

रज़िया की बात सुनकर रूबी चौंक गई। उसने अपने मुँह पर हाथ लगा लिया था।

अमन- प्लीज़ यार रज़िया.. रहने दो अब जो हुआ उसको भूल जाओ पार्टी का मज़ा लो ना।

रूबी- वेट वेट.. मुझे थोड़ा कन्फ्यूजन है.. प्लीज़ रज़िया बुरा मत मानना मगर तुम शाहिद की गर्लफ्रेंड हो किसी और की?

रज़िया- गर्लफ्रेंड तो मैं शाहिद की हूँ मगर हम सब अच्छे दोस्त भी हैं तो सभी मेरे ब्वॉयफ्रेंड हैं.. इसमें कन्फ्यूजन कैसा?

रूबी- नो नो अभी तुमने कहा था सबने मिलकर मस्ती का प्रोग्राम बनाया था.. मीन्स सेक्स का ना?

रज़िया- हाँ रूबी कुछ ऐसा ही समझो।

रूबी- ओ माय गॉड 5 लड़कों के साथ तुम अकेली.. ये कैसे हो सकता है?

रज़िया- क्यों इसमें प्राब्लम क्या है.. जब सतयुग में 5 भाइयों की एक ही बीवी हो सकती है.. तो ये तो कलयुग है यार.. इसमें 10 भी हो तो बड़ी बात नहीं।

सभी साँसें रोके दोनों की बहस सुन रहे थे। एक बार तो ऐसा लगा कि ये ज़्यादा हो गया.. अब रूबी हाथ नहीं आएगी मगर रज़िया ने उसको बातों में ऐसा उलझाया कि वो उनके जाल में फँस गई।

रूबी- नहीं यार रज़िया.. ऐसा होना मुश्किल है, अच्छा ये बताओ ग्रुप के साथ तुम्हारा ये पहली बार है ना?

रज़िया- हाँ, पहली बार है क्यों?

रूबी- यार इसी लिए तो मुझे नामुमकिन लग रहा है कि तुमने ‘हाँ’ कैसे कह दी, पहली बार में तो एक ही भारी पड़ता है.. कितना दर्द होता है तुम्हें इसका अंदाज़ा भी है?

रज़िया ने रूबी की बात को फ़ौरन पकड़ लिया- अच्छा मैडम जी तो ये बात है.. तुमने तो कहा मैंने कभी सेक्स नहीं किया.. तो ये बात तुम कैसे कह सकती हो?

रूबी- व्ववो यार ये तो कॉमन सी बात है.. सब जानते हैं।

रज़िया- देखो हम तुम्हें अपनी दोस्त मानते हैं.. इसलिए सब बता दिया। अब तुम नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं.. वैसे तुम्हें एक बात बता दूँ कि ये मेरा पहला सेक्स नहीं है, अलग-अलग तो सबके साथ कई बार कर चुकी हूँ। आज ग्रुप वाला पहली बार था।

रूबी- ओह ये बात है.. मतलब तुम लाइफ को खूब एंजाय कर रही हो।

रज़िया- छोटी सी लाइफ है यार एंजाय नहीं किया तो मज़ा क्या? फिर बुढ़ापे में पछताने से क्या फायदा अब मेरी सेक्स कहानी तो मैंने बता दी.. अब अगर तुम भी मुझे दोस्त मानती हो तो अपनी लाइफ के बारे में कुछ बताओ।

रूबी- व्ववो रज़िया बात दरअसल ऐसी है..

रूबी की बात की रज़िया ने बीच में काटकर कहा- चलो जाने दो अगर तुम्हें नहीं बताना तो चलो भाई खाना-वाना लगा लो यार.. भूख लगने लगी है।

रज़िया की चालाकी शाहिद समझ गया कि रूबी सबके सामने बोलने से हिचकिचा रही है, उसने मौके की नजाकत को समझा और सबको किसी ना किसी काम में लगा दिया ताकि रज़िया और रूबी को अकेले बात करने का मौका मिल जाए।

जब सब इधर-उधर हो गए तो रूबी ने रज़िया को ‘सॉरी..’ कहा कि वो घबरा गई थी।

रज़िया- अरे कोई बात नहीं यार.. मैं समझ सकती हूँ.. तुम पहली बार तो हमारे साथ हो। अब ऐसे में कोई भी लड़की घबरा सकती है।

रूबी- बात वो नहीं है यार.. ब्वॉयफ्रेंड के बारे में कुछ होता तो मैं सबके सामने भी बता देती.. मगर मेरी लाइफ में बहुत कुछ उल्टा हुआ था.. सो मैं घबरा गई।

रज़िया- ओह शिट तुम्हारे साथ भी..! यार ये साले मर्द कितने हरामी होते हैं ना.. मेरा भी पहला सेक्स मेरे चाचा के साथ हुआ था, मेरे सगे चाचा ने चोदा मुझे वो भी तब जब मुझे सेक्स के बारे में पता भी नहीं था।

रूबी- ओ माय गॉड, तुमने सही कहा यार मेरे साथ भी ऐसे ही हुआ।

रज़िया- किसने किया था और कैसे?

रूबी- व्ववो मेरे यार सॉरी प्लीज़ बुरा मत मानना मैं फिर कभी बता दूँगी आज नहीं.. क्योंकि ये लंबी कहानी है और खाना भी लग चुका है तो बात अधूरी रह जाएगी।

रज़िया- चलो कोई बात नहीं.. वो बात जाने दो उसके बाद होश संभालने के बाद भी तो कुछ किया होगा?

रूबी- हाँ यार, पहले तो पता नहीं था मगर बाद में तो तुम जानती ही हो मज़ा आने लगता है।

रज़िया- हाँ यार, ऐसा मज़ा आता है कि सब मज़े उसके सामने फीके होते हैं।

रूबी- मज़ा तो मैंने भी बहुत किया मगर एक साल से ये सब बंद हो गया।

रज़िया- क्यों यार क्या हुआ कि पूरा एक साल निकाल दिया.. ऐसी क्या बात हो गई?

रूबी ने इधर-उधर देखा फिर कहा।

रूबी- यार जिसने शुरूआत की थी.. वो था.. तब मज़े थे उसके बाद वो विदेश चला गया तो मैंने एक ब्वॉयफ्रेंड बनाया मगर वो ढीला था.. मुझे लास्ट मोमेंट पे धोखा दे देता था, तो मैंने उससे ब्रेकअप कर लिया। तब से आज तक कोई मिला नहीं जो पसंद आए।
 
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