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Adultery अधूरी दास्तां

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आंखों पर पट्टी

रंगीला के स्टूडियो में हुए उस 'मिट्टी के खेल' के बाद, डॉली अपने कमरे में लौटी तो वह पूरी तरह से हिल चुकी थी। उसका शरीर अब भी उस ठंडी मिट्टी और रंगीला की जलती हुई नज़रों को महसूस कर रहा था।

राज का वह आखिरी लुक—जिसमें गुस्सा और धोखा दोनों था—उसे अंदर ही अंदर कचोट रहा था। लेकिन एक अजीब सा सच यह भी था कि उसे वह सब अच्छा लगा था। वह 'दोषी' महसूस कर रही थी, लेकिन 'जीवित' भी।

शाम ढल चुकी थी। हवेली के गलियारों में फिर से मशालें जला दी गई थीं।

डॉली अपने बिस्तर पर लेटी छत को घूर रही थी, तभी उसके दरवाज़े के नीचे से एक काला लिफाफा सरकाया गया।

डॉली उठी और लिफाफा खोला। अंदर एक काला रेशमी कपड़ा था—एक ब्लाइंडफोल्ड। और एक नोट:

"रात 9 बजे। डाइनिंग हॉल। अपनी आँखें कमरे में छोड़ कर आना। आज रात हम सिर्फ़ 'अंधेरे' पर भरोसा करेंगे।" — रंगीला

डॉली ने उस रेशमी पट्टी को अपनी उंगलियों में महसूस किया। यह बहुत मुलायम था। उसने एक गहरी सांस ली। क्या राज आएगा? क्या वह उससे बात करेगा?

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रात 9 बजे। डाइनिंग हॉल।

हॉल में आज कोई मोमबत्ती नहीं थी। सिर्फ़ एक धीमी, लाल रोशनी थी जो कोनों में छिपी लाइट्स से आ रही थी। माहौल किसी अंडरग्राउंड क्लब जैसा था—रहस्यमयी और नशीला।

रंगीला पहले से मौजूद था। वह हॉल के बीचों-बीच खड़ा था, हाथ में एक केन लिए हुए। आज उसने ऑल-ब्लैक पहना था।

मेहमान एक-एक करके आए।

कामिनी ने आज हदें पार कर दी थीं। उसने एक सिल्वर रंग की स्लिप ड्रेस पहनी थी जो इतनी पतली थी कि शरीर का हर कर्व चिल्ला रहा था। उसने अपने ब्लाइंडफोल्ड को गले में स्कार्फ की तरह बांधा हुआ था।

विक्रम थोड़ा नर्वस लग रहा था। कल रात लाइब्रेरी और आज सुबह की बातें उसके दिमाग में चल रही थीं।

इरा हमेशा की तरह शांत और कंट्रोल में थी। उसने एक मरून गाउन पहना था।

और फिर राज आया। डॉली की सांसें अटक गईं। राज ने फॉर्मल कपड़े नहीं पहने थे। वह एक ब्लैक बनियान और जींस में था। उसकी बाहें और मज़बूत कंधे खुले थे। उसने डॉली की तरफ देखा भी नहीं। उसका चेहरा पत्थर जैसा सख्त था।

और अंत में डॉली। उसने एक सफ़ेद साड़ी पहनी थी, जिस पर चांदी की कढ़ाई थी। वह किसी अप्सरा जैसी लग रही थी जो नर्क में भटक गई हो।

"स्वागत है," रंगीला ने अपनी छड़ी को फर्श पर धीरे से ठोकते हुए कहा। "आज का डिनर... एक एक्सपेरिमेंट है। 'विश्वास' का एक्सपेरिमेंट।"

उसने सबको मेज़ के चारों ओर खड़े होने का इशारा किया। कुर्सियाँ हटा दी गई थीं।

"अपनी-अपनी पट्टियाँ बांध लीजिए," रंगीला ने आदेश दिया।

सबने हिचकिचाहट के साथ अपनी आंखों पर काली पट्टी बांध ली। अब वे अंधे थे। सिर्फ़ रंगीला देख सकता था।

"अब," रंगीला की आवाज़ उनके चारों तरफ घूम रही थी। "आप छह लोग इस कमरे में हैं। संगीत शुरू होगा। आपको घूमना है। और जब संगीत रुकेगा, तो आप जिसके सबसे करीब होंगे... वह आपका पार्टनर होगा। इस राउंड के लिए।"

धीमा, कामुक वायलिन संगीत बजने लगा।

डॉली ने अपने हाथ आगे किए ताकि वह किसी चीज़ से टकरा न जाए। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ी। उसे किसी के परफ्यूम की खुशबू आई—महंगी, वुडी खुशबू। विक्रम?

कामिनी बेफिक्र होकर घूम रही थी। उसे अंधेरे में मज़ा आ रहा था। वह जानबूझकर लोगों से टकरा रही थी।

राज एक जगह खड़ा था, बिल्कुल नहीं हिला। वह एक शिकारी की तरह इंतज़ार कर रहा था कि कोई शिकार खुद उसके पास आए।

संगीत अचानक रुक गया।

डॉली रुक गई। उसके ठीक सामने कोई था। वह उसकी गर्मी महसूस कर सकती थी।

"अपने पार्टनर को ढूंढिए," रंगीला ने कहा। "छूकर। बोलकर नहीं।"

डॉली ने अपने हाथ बढ़ाए। उसकी उंगलियाँ किसी की छाती से टकराईं। वह छाती सख्त थी, मज़बूत थी। डॉली ने अपनी हथेलियाँ उस छाती पर रखीं। दिल की धड़कन तेज़ थी, लेकिन स्थिर थी। डॉली के हाथ ऊपर चढ़े... चौड़े कंधे... छोटी कटी हुई दाढ़ी...

राज।

डॉली पहचान गई। यह राज था। उसका राज।

लेकिन राज ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वह बुत बना खड़ा रहा।

डॉली ने हिम्मत करके अपना हाथ राज की गर्दन के पीछे ले जाकर उसके बालों को सहलाया। यह उसका माफी मांगने का तरीका था। 'मुझे माफ़ कर दो, राज।'

राज ने अचानक डॉली की कलाई पकड़ ली। उसकी पकड़ इतनी ज़ोरदार थी कि डॉली की हल्की सी चीख निकल गई। राज ने डॉली को एक झटके से अपनी ओर खींचा। डॉली का शरीर राज के शरीर से पूरी तरह सट गया।

डॉली, जिसकी आंखों पर पट्टी थी, देख नहीं सकती थी कि राज के चेहरे पर क्या भाव हैं। लेकिन वह उसका गुस्सा और उसकी प्यास महसूस कर सकती थी। राज ने डॉली की कमर पर अपना दूसरा हाथ रखा और उसे इतनी ज़ोर से दबाया कि डॉली की सांसें उखड़ गईं।

"तुमने मुझे चुना," राज ने डॉली के कान में फुसफुसाया, आवाज़ में ज़हर और शहद दोनों था। "या यह सिर्फ़ इत्तेफाक है?"

"राज..." डॉली ने भी फुसफुसाया।

"चुप," राज ने कहा।

वहीं पास में, कामिनी किसी और से टकराई थी। उसने अपने हाथ बढ़ाए और सीधे उस शख्स के चेहरे को छू लिया। मूंछें नहीं थीं, चिकना चेहरा। विक्रम।

कामिनी हंसी। उसने विक्रम के होंठों पर अपनी उंगली फेरी और फिर अपनी उंगली को अपने मुंह में ले लिया। विक्रम ने अंधेरे में कामिनी की कमर पकड़ ली।

इरा अकेली रह गई थी? नहीं। रंगीला उसके पास था।

"लगता है तुम मेरे हिस्से में आई हो, नंबर 6," रंगीला ने कहा। उसने इरा को छुआ नहीं, सिर्फ़ अपनी छड़ी की नोक को इरा के कंधे पर रखा और धीरे-धीरे नीचे सरकाया, उसकी रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ।

इरा सिहर उठी। यह स्पर्श इंसानी नहीं था, लेकिन बिजली जैसा था।

"अगला चरण," रंगीला ने घोषणा की। "फीडिंग।"

"आपके सामने मेज़ पर फल और मिठाइयाँ रखी हैं," रंगीला ने कहा। "अपने पार्टनर को खिलाइए। लेकिन याद रहे... उंगलियों का इस्तेमाल करें। और अगर कुछ गिर जाए... तो उसे जीभ से साफ़ करें।"

डॉली ने अंदाज़े से मेज़ पर हाथ मारा। उसके हाथ में एक अंगूर आया। उसने उसे राज के होठों के पास ले गई।

राज ने अपना मुंह खोला। डॉली की उंगलियाँ राज के गीले होठों और दांतों से टकराईं। राज ने अंगूर के साथ-साथ डॉली की उंगली को भी अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगा।

डॉली के पेट में तितलियाँ उड़ने लगीं। यह बेहद कामुक था। राज उसकी उंगली को ऐसे चूस रहा था जैसे वह कोई लॉलीपॉप हो। उसकी जीभ का खुरदरापन डॉली को पागल कर रहा था।

"अब मेरी बारी," राज ने कहा।

राज ने मेज़ से कुछ उठाया। यह चॉकलेट में डूबी हुई स्ट्रॉबेरी थी।

राज ने उसे डॉली के मुंह में नहीं डाला। उसने उसे डॉली की गर्दन पर, ठीक उसकी पल्स के ऊपर रख दिया। ठंडी चॉकलेट और स्ट्रॉबेरी डॉली की गर्म त्वचा पर पिघलने लगी।

"आह..." डॉली ने अपनी गर्दन पीछे झुका ली।

राज ने झुककर उस पिघली हुई चॉकलेट को चाटना शुरू कर दिया।
 
डॉली ने राज के कंधे को जकड़ लिया। उसकी जीभ डॉली की गर्दन पर, उसके कॉलरबोनपर रेंग रही थी। डॉली देख नहीं सकती थी, इसलिए हर स्पर्श दस गुना ज़्यादा तीव्र लग रहा था। उसे नहीं पता था कि राज की जीभ अगली बार कहाँ जाएगी।

उधर, कामिनी ने विक्रम को खिलाने की जहमत नहीं उठाई। उसने एक चेरी उठाई और उसे अपने ही क्लीवेज में गिरा लिया।

"विक्रम," कामिनी ने कहा, "मेरा खाना गिर गया। ढूँढो।"

विक्रम, जिसकी आँखों पर पट्टी थी, कामिनी की आवाज़ की दिशा में झुका। उसके हाथ कामिनी की गर्दन से होते हुए नीचे गए। उसे चेरी मिल गई, कामिनी के स्तनों के बीच फंसी हुई।

विक्रम ने अपने हाथ इस्तेमाल नहीं किए। उसने अपना मुंह वहां लगा दिया।

कामिनी ने विक्रम के बालों को मुट्ठी में भर लिया। "गुड बॉय," उसने कहा।

इरा और रंगीला का खेल अलग था। रंगीला ने एक बर्फ का टुकड़ा उठाया।

"इरा," रंगीला ने कहा। "तुम्हें ठंडा पसंद है या गर्म?"

"कंट्रोल," इरा ने जवाब दिया।

रंगीला ने वह बर्फ का टुकड़ा इरा की पीठ पर, उसके गाउन की ज़िप के ऊपर रख दिया। बर्फीला पानी पिघलकर इरा की पीठ पर बहने लगा, उसके गाउन के अंदर जा रहा था।

इरा ने एक गहरी सांस ली, लेकिन हिली नहीं।

"बहुत अच्छे," रंगीला ने कहा।

संगीत फिर बदल गया। अब यह और भी धीमा, और भी भारी ड्रम बीट्स वाला संगीत था।

"अब," रंगीला ने कहा, "नृत्य। लेकिन यह साधारण डांस नहीं है। यह 'घर्षण'का डांस है। जितना करीब हो सको, उतना करीब आओ।"

डॉली और राज पहले से ही चिपके हुए थे। राज ने डॉली की साड़ी के पल्लू को हटा दिया ताकि उनके बीच कपड़े की कोई बाधा न रहे। राज की छाती डॉली के ब्लाउज़ से दबी हुई थी।

वे धीरे-धीरे हिलने लगे। राज ने अपनी एक टांग डॉली की दोनों टांगों के बीच फंसा दी। जब वे हिलते, तो राज की जांघ डॉली के सबसे संवेदनशील हिस्से पर रगड़ खाती।

डॉली का संयम टूट रहा था। आँखों पर पट्टी होने की वजह से वह अपनी दुनिया में अकेली थी—सिर्फ़ वह और यह अहसास।

"राज..." डॉली ने सिसकते हुए कहा। "मुझे माफ़ कर दो... स्टूडियो के लिए।"

राज ने डॉली को घुमाया और उसकी पीठ अपने सीने से लगा ली। अब वे दोनों एक ही दिशा में देख रहे थे (हालांकि वे देख नहीं सकते थे)। राज ने डॉली के पेट पर हाथ रखा, ठीक वहां जहाँ रंगीला ने मिट्टी लगाई थी।

"उसने तुम्हें यहाँ छुआ?" राज ने पूछा, अपनी उंगलियों को डॉली की नाभि के पास दबाते हुए।

"उसने... उसने मिट्टी लगाई थी," डॉली ने सच कहा।

"मैं उस निशान को मिटा दूँगा," राज ने कहा। "अपनी निशानी से।"

राज का हाथ नीचे सरक गया। साड़ी के ऊपर से ही उसने डॉली के उस उभार को अपनी हथेली से ढक लिया। उसने उसे मसला।

डॉली की टांगें कांपने लगीं। वह राज के सहारे खड़ी थी। हॉल में संगीत तेज़ था, लेकिन डॉली को सिर्फ़ अपनी धड़कनें सुनाई दे रही थीं।

"यहीं?" डॉली ने पूछा, घबराते हुए। "सबके सामने?"

"कोई देख नहीं सकता, डॉली," राज ने याद दिलाया। "सब अंधे हैं। हम अकेले हैं।"

यह विचार—कि वे सबके बीच होकर भी अकेले हैं—बेहद नशीला था।

राज ने डॉली की साड़ी को थोड़ा ऊपर खींचा। उसका हाथ डॉली की नंगी जांघ पर था।

लेकिन तभी, संगीत बंद हो गया।

"पट्टियाँ हटाओ!" रंगीला का आदेश आया।

राज का हाथ रुक गया। डॉली ने जल्दी से अपनी साड़ी ठीक की।

सबने अपनी पट्टियाँ हटाईं। रोशनी ने उनकी आँखों को चौंधिया दिया।

जब डॉली ने देखा, तो वह सन्न रह गई।

वह राज के साथ खड़ी थी, यह ठीक था। लेकिन विक्रम... विक्रम कामिनी के साथ नहीं था। विक्रम फर्श पर घुटनों के बल बैठा था, और कामिनी उसके सामने खड़ी थी।

और रंगीला? रंगीला अपनी कुर्सी पर बैठा था, आराम से वाइन पी रहा था। और इरा? इरा रंगीला के पैरों के पास बैठी थी, रंगीला के घुटने पर अपना सिर रखे हुए।

क्या उन्होंने पार्टनर बदल लिए थे? कब? कैसे?

डॉली ने राज को देखा। राज भी हैरान था। उसे लगा था कि वह डॉली के साथ है। लेकिन क्या बीच में कोई और आया था? अंधेरे में, क्या उसने किसी और को छुआ था?

रंगीला मुस्कुराया।

"विश्वास," रंगीला ने कहा, अपना गिलास उठाते हुए। "एक बहुत ही नाज़ुक चीज़ है। आपको लगा आप अपने पार्टनर के साथ थे। लेकिन अंधेरे में... क्या आप वाकई श्योर हो सकते हैं?"

उसने अपनी जेब से एक सफ़ेद रूमाल निकाला और उससे अपनी उंगलियाँ पोंछीं। रूमाल पर चॉकलेट लगी थी।

डॉली का दिल थम गया।

चॉकलेट?

राज ने डॉली की गर्दन पर चॉकलेट लगाई थी। लेकिन रंगीला की उंगलियों पर चॉकलेट क्यों थी?

क्या अंधेरे में, उस एक पल के लिए जब राज कुछ लेने मुड़ा था, रंगीला ने डॉली को छुआ था? क्या वह जीभ... वह स्पर्श... राज का नहीं, रंगीला का था?

डॉली ने राज को देखा। राज की आँखों में भी वही शक था। उसने डॉली की गर्दन पर लगी चॉकलेट को देखा, और फिर रंगीला के रूमाल को।‘

राज की मुट्ठी भिंच गई। वह रंगीला की तरफ बढ़ा।
 
"रिलैक्स, फौजी," रंगीला ने कहा, अपनी छड़ी को राज की छाती पर टिकाते हुए उसे रोक दिया। "यह खेल है। और खेल में... हर खिलाड़ी का हक़ होता है अपनी चाल चलने का।"

"तुमने उसे छुआ," राज गुर्राया।

"मैंने?" रंगीला ने मासूमियत का नाटक किया। "मैंने तो बस... स्वाद चखा। जो शायद तुमने उसके लिए छोड़ा था।"

हॉल में तनाव चरम पर था। विक्रम और कामिनी भी अब खड़े हो चुके थे।

"आज की रात का असली खेल अब शुरू होगा," रंगीला ने खड़ी होकर कहा। "ब्लाइंडफोल्ड का मक़सद सिर्फ आँखों को बंद करना नहीं था, बल्कि आपके डर को खोलना था। अब आप जानते हैं कि अंधेरे में... कोई भी किसी का हो सकता है।"

उसने डॉली की तरफ देखा और एक आंख मारी।

"कल मिलते हैं," रंगीला ने कहा और सीढ़ियाँ चढ़ गया।

राज ने डॉली का हाथ पकड़ा और उसे हॉल से बाहर खींच ले गया।

"मेरे कमरे में चलो," राज ने कहा। "अभी।"

डॉली ने विरोध नहीं किया। लेकिन उसके दिमाग में एक सवाल घूम रहा था—वह चॉकलेट वाला स्पर्श... वह जीभ का स्वाद... अगर वह रंगीला था, तो उसे वह इतना उत्तेजक क्यों लगा था? क्या वह अनजाने में रंगीला की तरफ आकर्षित हो रही थी?

राज डॉली को खींचते हुए हवेली के गलियारे से ले जा रहा था। उसकी पकड़ डॉली की कलाई पर इतनी सख्त थी कि डॉली जानती थी वहां निशान पड़ने वाले हैं।

डॉली ने विरोध नहीं किया; उसे पता था कि राज अभी तर्क सुनने की हालत में नहीं है। वह एक घायल शेर की तरह था जिसे छेड़ा गया हो।

वे राज के कमरे, 'सिंह कक्ष' के सामने रुके। राज ने दरवाज़ा लात मारकर खोला और डॉली को अंदर धकेल दिया। डॉली लड़खड़ाई, लेकिन गिरने से पहले ही संभल गई। राज अंदर आया और उसने दरवाज़े को ज़ोर से बंद करके लॉक कर दिया। उस आवाज़ से डॉली सिहर उठी।

कमरा मर्दाना ऊर्जा से भरा था—चमड़े, पुरानी लकड़ी और राज की अपनी गंध। चिमनी में आग जल रही थी, जो राज की आँखों में जल रही आग का प्रतिबिंब लग रही थी।

"राज..." डॉली ने अपनी कलाई सहलाते हुए कहा, "तुम मुझे चोट पहुँचा रहे हो।"

"चोट?" राज डॉली की तरफ बढ़ा, एक शिकारी की तरह। "तुम्हें लगता है यह चोट है? चोट वो है जो मैं महसूस कर रहा हूँ, डॉली। जब मैंने देखा कि उस... उस साले रंगीला की उंगलियों पर चॉकलेट लगी थी। वही चॉकलेट जो मैंने तुम्हारी गर्दन पर लगाई थी।"

राज ने डॉली को कन्धों से पकड़ा और उसे दीवार से सटा दिया। "सच बताओ। क्या तुम्हें पता था? जब अंधेरे में वह स्पर्श बदल गया... क्या तुम्हें महसूस हुआ कि वह मैं नहीं था?"

डॉली की सांसें अटक गईं। यह वह सवाल था जिसका जवाब वह खुद भी ढूँढ रही थी। अंधेरे में, उस एक पल के लिए, स्पर्श बदल गया था। वह ज्यादा ठंडा था, ज्यादा गणनात्मक था, लेकिन... उत्तेजक भी था।

"मुझे... मुझे नहीं पता, राज," डॉली ने अपनी नज़रें झुका लीं। "अंधेरा था। मैं भ्रमित थी। मुझे लगा वह तुम हो।"

"मेरी आँखों में देखो!" राज चिल्लाया, डॉली की ठुड्डी को ऊपर उठाते हुए। "झूठ मत बोलना। क्या तुम्हें वह स्पर्श पसंद आया?"

डॉली की आँखों में आंसू आ गए। "राज, मैं सिर्फ तुम्हारे साथ हूँ। मैं यहाँ तुम्हारे साथ हूँ।"

राज का गुस्सा पिघला नहीं, लेकिन उसका रूप बदल गया। अब वह ठंडा नहीं, बल्कि जल रहा था। "साबित करो," उसने फुसफुसाया। "साबित करो कि तुम सिर्फ मेरी हो। अभी। इसी वक्त। मुझे मिटा दो उस स्पर्श को। हर उस जगह से जहाँ उसने तुम्हें छुआ हो।"

राज ने डॉली को नहीं छोड़ा। उसने एक झटके में डॉली की साड़ी का पल्लू खींच लिया। रेशमी कपड़ा फर्श पर गिर गया। डॉली ने सांस रोकी। राज की आँखों में अब सवाल नहीं, आदेश था।
 
राज ने डॉली के ब्लाउज़ की डोरी नहीं खोली; उसने उसे फाड़ दिया। चर्र... की आवाज़ कमरे में गूंज गई। डॉली चौंक गई, लेकिन उसने राज को रोका नहीं। राज का यह जंगलीपन, यह अधिकार, डॉली के अंदर दबी हुई उस आदिम औरत को जगा रहा था जो 'सभ्य' डॉली के नीचे छिपी थी।

ब्लाउज़ के टुकड़े ज़मीन पर गिर गए। डॉली अब ऊपर से नग्न थी। उसका सीना तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहा था।

राज ने डॉली की गर्दन को देखा—वही जगह जहाँ रंगीला ने शायद छुआ था। राज ने अपना मुंह वहां लगा दिया। उसने चूमा नहीं; उसने काटा। एक तीखा, गहरा लव-बाइट । डॉली सिसक उठी, दर्द और मज़े के मिश्रण से।

"यह मेरा निशान है," राज ने डॉली की गर्दन पर अपनी जीभ फेरते हुए कहा, उस काटे हुए निशान को शांत करते हुए। "अब यहाँ कोई और नहीं आ सकता।"

राज नीचे झुका। उसने डॉली की साड़ी की प्लीट्स को बेदर्दी से खींच दिया। साड़ी खुल गई। पेटीकोट भी ज़्यादा देर तक नहीं टिक पाया। कुछ ही पलों में, डॉली दीवार से सटी खड़ी थी, पूरी तरह नग्न, अपने ही कपड़ों के ढेर के बीच।

राज ने अपनी शर्ट के बटन नोच डाले। बटन टूटकर फर्श पर बिखर गए। उसने अपनी बनियान उतार फेंकी। उसकी चौड़ी छाती, जिस पर घने बाल थे, डॉली के नग्न स्तनों से रगड़ खा रही थी। त्वचा का त्वचा से यह संपर्क बिजली के झटके जैसा था।

"राज..." डॉली ने अपनी उंगलियां राज के बालों में फंसा दीं। "मुझे ले लो। अभी।"

"इतनी जल्दी नहीं," राज ने कहा। उसने डॉली को गोद में उठा लिया। डॉली ने अपनी टांगें उसकी कमर पर लपेट लीं।

राज उसे बिस्तर पर नहीं ले गया। वह उसे कमरे के बीच में रखे एक भारी ओक की मेज़ की तरफ ले गया। उसने मेज़ पर रखी चीज़ों को एक हाथ से झाड़ दिया—विस्की का गिलास, किताबें, ऐशट्रे—सब ज़मीन पर गिरकर टूट गए।

राज ने डॉली को उस मेज़ पर बिठाया। मेज़ की ठंडी लकड़ी डॉली की नंगी जांघों और नितंबों को छू रही थी, जबकि सामने राज की गर्मी थी।

राज ने डॉली की टांगों को फैलाया और उनके बीच खड़ा हो गया। उसने अपनी जीन्स की बेल्ट खोली। डॉली की नज़रें वहां टिक गईं। राज का तनाव, उसका उभार... वह तैयार था, वहशी था।

"रंगीला एक कलाकार हो सकता है," राज ने अपनी जीन्स नीचे करते हुए कहा, "लेकिन मैं एक सैनिक हूँ, डॉली। वह सिर्फ सतह को छूता है। मैं... मैं कब्ज़ा करता हूँ।"

राज ने डॉली की जांघों को अपने कंधों पर रख लिया। डॉली मेज़ के किनारे पर थी, पूरी तरह खुली हुई।

राज ने प्रवेश किया।

बिना किसी चेतावनी के। बिना किसी लुब्रिकेशन के। सिर्फ़ डॉली की अपनी उत्तेजना का गीलापन था जो उसे अंदर ले गया।

"आहहहह!" डॉली चिल्लाई। उसका सिर पीछे झुक गया। दर्द था, लेकिन एक भरने वाला दर्द। राज का आकार उसे पूरी तरह भर रहा था, उसे फैला रहा था।

राज रुका नहीं। उसने डॉली के कूल्हों को अपने हाथों में जकड़ लिया और अपनी लय शुरू की। थप... थप... थप... मांस से मांस टकराने की आवाज़ें कमरे में गूंजने लगीं।

"बोलो," राज ने हर धक्के के साथ कहा। "किसकी हो तुम?"

"तुम्हारी! सिर्फ तुम्हारी, राज!" डॉली ने जवाब दिया, अपनी एड़ियां राज की पीठ पर रगड़ते हुए।

राज की गति बढ़ती गई। वह डॉली को मेज़ पर ठोक रहा था। मेज़ हिल रही थी। डॉली के स्तन हवा में उछल रहे थे। राज ने झुककर एक स्तन को अपने मुंह में भर लिया। उसके दांतों ने निप्पल को हल्का सा खरोंचा, जिससे डॉली की कामुकता एक नए शिखर पर पहुँच गई।

डॉली को लगा कि वह अपनी सुध-बुध खो रही है। यह सेक्स नहीं था; यह एक युद्ध था। राज अपने इलाके को फिर से हासिल कर रहा था। वह हर उस याद को मिटा रहा था जो रंगीला ने दी थी—चाहे वह स्टूडियो की मिट्टी हो या डाइनिंग हॉल का अंधेरा स्पर्श।

"राज... मैं... मैं नहीं रोक सकती!" डॉली की आवाज़ टूट रही थी।

राज ने अपना सिर उठाया। उसकी आँखें लाल थीं, पसीने से लथपथ। "तो मत रोको। मेरे लिए बिखर जाओ, डॉली।"

राज ने डॉली की टांगों को और चौड़ा किया और गहराई तक गया। वह डॉली के गर्भाशय को छू रहा था। डॉली की योनि राज के लिंग को कस रही थी।

एक विस्फोटक संभोग ने डॉली को जकड़ लिया। उसकी योनि ने राज को निचोड़ लिया। वह कांपने लगी, उसकी चीखें राज के मुंह में दब गईं क्योंकि राज ने उसे चूम लिया था।

डॉली के चरम पर पहुँचते ही राज ने भी अपना संयम खो दिया। उसने दो-तीन बहुत गहरे और तेज़ धक्के मारे और डॉली के अंदर अपना बीज छोड़ दिया। वह डॉली के ऊपर झुक गया, अपना माथा डॉली के कंधे पर टिकाए हुए, भारी सांसें लेते हुए।

कमरे में अब सिर्फ़ उनकी सांसों और जलती हुई लकड़ी की आवाज़ थी।

राज ने डॉली को तुरंत अलग नहीं किया। वह उसके अंदर ही रहा, उस जुड़ाव को महसूस करते हुए। उसने डॉली के भीगे हुए बालों को उसके चेहरे से हटाया।

"मुझे माफ़ करना," राज ने धीरे से कहा, उसकी आवाज़ अब नर्म थी। "मैं... मैं अपना आपा खो बैठा था।"

डॉली ने राज के चेहरे को छुआ। "माफ़ी मत मांगो। मुझे... मुझे यह चाहिए था, राज। मुझे तुम्हारी ज़रूरत थी।"
 
डॉली ने राज के चेहरे को छुआ। "माफ़ी मत मांगो। मुझे... मुझे यह चाहिए था, राज। मुझे तुम्हारी ज़रूरत थी।"

राज ने डॉली को मेज़ से उठाया और उसे बिस्तर पर ले गया। उसने डॉली को लिटाया और खुद उसके बगल में लेट गया। उसने रजाई उन दोनों के ऊपर डाल दी।

डॉली राज की छाती पर सिर रखकर लेटी थी। राज की उंगलियाँ डॉली की नंगी पीठ पर, रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ चल रही थीं—वही रास्ता जो रंगीला ने छड़ी से इरा पर बनाया था।

"राज," डॉली ने कुछ देर बाद पूछा। "तुम्हें क्या लगता है, रंगीला क्या चाहता है?"

"वह हमें तोड़ना चाहता है," राज ने छत को देखते हुए कहा। "वह देखना चाहता है कि हमारी नैतिकता की परत कितनी पतली है। वह मज़े ले रहा है, डॉली। हम उसके खिलौने हैं।"

"तो हम क्या करें? चले जाएं?"

"नहीं," राज ने डॉली को अपनी बांहों में कस लिया। "भागना कायरता है। हम खेलेंगे। लेकिन हम उसके नियमों से नहीं खेलेंगे। हम अपने नियम बनाएंगे।"

डॉली ने सिर उठाया और राज को देखा। "कैसे?"

राज मुस्कुराया, एक खतरनाक मुस्कान। "कल उसने कहा था 'साझीदार बदल सकते हैं'। अगर वह यही चाहता है... तो हम उसे वही देंगे। लेकिन हमारी शर्तों पर।"

डॉली को राज की बात पूरी तरह समझ नहीं आई, लेकिन उसे राज पर भरोसा था।

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अगली सुबह।

डॉली की आँखें खुलीं तो राज बिस्तर पर नहीं था। लेकिन तकिए पर एक ताज़ा गुलाब रखा था और एक नोट:

"तुम्हारी सुबह खूबसूरत हो। मैं जिम में हूँ। नाश्ते पर मिलते हैं। — तुम्हारा, राज।"

डॉली मुस्कुराई। कल रात के तूफ़ान के बाद, यह कोमलता उसे सुकून दे रही थी।

वह उठी और बाथरूम गई। आईने में उसने अपनी गर्दन देखी। वहां राज का दिया हुआ 'लव-बाइट' गहरा बैंगनी हो चुका था। यह एक मोहर थी। डॉली ने उसे उंगलियों से छुआ और सिहर उठी।

जब वह तैयार होकर नीचे हॉल में आई, तो देखा कि माहौल कुछ अलग है।

हॉल में सिर्फ़ विक्रम और इरा थे। कामिनी और राज नहीं थे।

विक्रम सोफे पर बैठा था, बहुत परेशान लग रहा था। इरा खिड़की के पास खड़ी थी, बाहर देख रही थी।

"गुड मॉर्निंग," डॉली ने कहा।

विक्रम ने सिर हिलाया। "मॉर्निंग, डॉली। लगता है आज का दिन दिलचस्प होने वाला है।"

"क्यों? क्या हुआ?"

"रंगीला ने नया फरमान जारी किया है," इरा ने मुड़ते हुए कहा। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। "आज दोपहर का सत्र... 'स्विमिंग पूल' में है। और ड्रेस कोड है... 'न्यूनतम' ।"

"और कामिनी और राज?" डॉली ने पूछा।

"वे पहले ही वहां हैं," विक्रम ने कहा, थोड़ा कड़वाहट के साथ। "कामिनी... कामिनी राज को कुछ 'स्विमिंग लेसन्स' दे रही है।"

डॉली के पेट में गांठ पड़ गई। राज? कामिनी के साथ?

"डरो मत, डॉली," इरा डॉली के पास आई। उसने डॉली की गर्दन पर बने निशान को देखा और मुस्कुराई। "तुम्हारा शेर अपना इलाका मार्क करके गया है। लेकिन याद रखना... शेरनी भी शिकार करती है।"

इरा ने डॉली के कान में फुसफुसाया। "रंगीला ने पूल में कुछ इंतज़ाम किए हैं। अंडरवाटर कैमरे। और... ग्लास वॉल्स। आज सब कुछ 'बेपर्दा' होगा।"

डॉली का दिल धड़कने लगा। राज ने कहा था कि वे अपने नियमों से खेलेंगे। क्या कामिनी के साथ जाना राज की कोई चाल थी? या वह सच में बदल रहा था?

डॉली ने इरा को देखा। "मुझे पूल पर जाना है।"

"बिल्कुल," इरा ने कहा। "चलो। देखते हैं पानी में कौन डूबता है और कौन तैरता है।"

वे तीनों पूल एरिया की तरफ बढ़े।

हवेली के पीछे एक विशाल इन्फिनिटी पूल था जो रेगिस्तान की ओर खुलता था। धूप तेज़ थी। पानी नीला और साफ था।

और वहां, पानी के बीच में, कामिनी थी। उसने एक नियोन बिकिनी पहनी थी जो न के बराबर थी। वह राज के कंधों पर चढ़ी हुई थी, और राज... राज पानी के अंदर था, कामिनी को अपनी पीठ पर उठाए हुए। वे हंस रहे थे।

डॉली वहीं रुक गई।

रंगीला पूल के किनारे एक लाउंजर पर लेटा था, सनग्लास लगाए हुए। उसने डॉली को आते देखा और अपना ग्लास उठाया।

"आओ, नंबर 2," रंगीला ने पुकारा। "पानी गर्म है। और खेल... अभी शुरू हुआ है।"

डॉली ने राज को देखा। राज ने भी डॉली को देखा। उसकी आँखों में कोई शर्मिंदगी नहीं थी। उसने डॉली को एक इशारा किया—आओ।

डॉली ने गहरी सांस ली। राज की वह बात याद आई—'हम उसके नियमों से नहीं खेलेंगे।'

डॉली ने अपना दुप्पटा उतारा और एक कुर्सी पर फेंक दिया।

"ठीक है, रंगीला," डॉली ने मन में कहा। "अगर तुम्हें तमाशा चाहिए, तो हम तुम्हें तमाशा देंगे।"

वह पूल की सीढ़ियों की तरफ बढ़ी, जहाँ एक नया, गीला और कामुक अध्याय उसका इंतज़ार कर रहा था।

दोपहर की धूप तीखी थी, लेकिन इन्फिनिटी पूल का नीला पानी उसे ठंडा कर रहा था। पूल के किनारे लगे सफेद पर्दों वाले कैबाना हवा में लहरा रहे थे। रेगिस्तान की पृष्ठभूमि में यह पूल किसी नखलिस्तान जैसा लग रहा था—सुंदर, लेकिन भ्रामक।

रंगीला अपने लाउंजर पर लेटा था, हाथ में कॉकटेल का गिलास लिए। उसके बगल में एक छोटा सा मॉनिटर रखा था। वह इरा और विक्रम से बात कर रहा था, जो अभी-अभी पूल डेक पर आए थे। विक्रम ने शर्ट उतार दी थी, लेकिन वह पानी में जाने से कतरा रहा था। इरा ने एक वन-पीस ब्लैक स्विमसूट पहना था जो बहुत ही स्लीक और प्रोफेशनल लग रहा था।

लेकिन सबकी निगाहें पूल के अंदर थीं।

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कामिनी और राज।

कामिनी राज के कंधों पर बैठी थी। उसकी नियोन बिकिनी पानी में चमक रही थी। राज पानी में कमर तक डूबा था। उसकी गीली टी-शर्ट उसकी मांसपेशियों से चिपकी थी, और गीले बाल उसके माथे पर गिरे थे।

"कम ऑन, डॉली!" कामिनी ने चिल्लाकर कहा। "आ जाओ। पानी बहुत अच्छा है। या तुम्हें अपनी ड्रेस गीली होने का डर है?"

डॉली पूल के किनारे खड़ी थी। उसने अपना दुपट्टा पहले ही उतार दिया था। अब वह अपने हल्के पीले सलवार-कमीज़ में थी। राज उसे देख रहा था। उसकी आँखों में एक संदेश था—भरोसा रखो।

डॉली ने अपनी सैंडल उतारीं। उसने सीढ़ियों से पानी में कदम रखा। पानी ठंडा था। जैसे-जैसे वह अंदर गई, उसका सलवार-कमीज़ भीगता गया और उसके शरीर से चिपक गया। कपड़ा पारदर्शी हो गया, और उसके अंदर पहने हुए हल्के रंग के अधोवस्त्र झलकने लगे।

डॉली राज की तरफ बढ़ी।

"वेलकम टू द पार्टी," राज ने मुस्कुराते हुए कहा। उसने कामिनी को अपने कंधों से उतार दिया। कामिनी पानी में गिरी, हंसते हुए, और तैरकर डॉली के पास आ गई।

"तुम बहुत बोरिंग कपड़े पहनती हो, डॉली," कामिनी ने डॉली के भीगे हुए कुर्ते को खींचते हुए कहा। "यहाँ देखो, रंगीला ने हमारे लिए कुछ भेजा है।"

कामिनी ने पूल के किनारे रखे एक बॉक्स की तरफ इशारा किया। "बिकिनीज़। हर साइज़ की। जाओ, कुछ हॉट पहनकर आओ।"

डॉली ने राज को देखा। राज ने सिर हिलाया। "जाओ, डॉली। आज तुम्हें किसी से डरने की ज़रूरत नहीं है।"

डॉली पूल से बाहर निकली और चेंजिंग रूम की तरफ गई। उसका भीगा हुआ बदन, चिपके हुए कपड़े... रंगीला और विक्रम की नज़रें उस पर थीं। डॉली को लगा जैसे वह किसी रैंप वॉक पर है।

चेंजिंग रूम में डॉली ने बॉक्स खोला। वहां कई स्विमसूट्स थे। उसने एक डीप ब्लू बिकिनी चुनी—वही रंग जो राज को पसंद था। उसने अपने गीले कपड़े उतारे।

आईने में उसने अपनी गर्दन पर राज का दिया हुआ निशान देखा। यह निशान उसका कवच था।

उसने बिकिनी पहनी। यह बहुत छोटी थी। उसके कर्व्स पूरी तरह दिख रहे थे। डॉली ने एक गहरी सांस ली। "मैं डॉली नहीं हूँ," उसने खुद से कहा।"

जब डॉली बाहर आई, तो पूल डेक पर सन्नाटा छा गया।

विक्रम का मुंह खुला रह गया। रंगीला ने अपना चश्मा नीचे किया।

डॉली पानी में उतरी। नीला रंग उसकी गोरी त्वचा पर खिल रहा था। वह तैरकर राज के पास गई।

"वाह," राज ने धीरे से कहा। "तुम... तुम जानलेवा लग रही हो।"

राज ने पानी के अंदर डॉली की कमर पकड़ ली। उसका स्पर्श पानी की ठंडक के बीच गर्म था।

"अब असली खेल शुरू करते हैं," रंगीला की आवाज़ माइक पर गूंजी। "पूल में चार लोग हैं। राज, डॉली, कामिनी और... विक्रम, तुम भी जाओ।"

विक्रम हिचकिचाते हुए पानी में कूदा।

"गेम का नाम है—'ब्रीद'," रंगीला ने कहा। "आपको अपनी सांस रोकनी है। पानी के अंदर। जो सबसे देर तक रुकेगा, वह आज रात का 'मास्टर' होगा। और जो हार जाएगा... उसे मास्टर का हुकूम मानना होगा।"

"लेकिन एक ट्विस्ट है," रंगीला ने मुस्कुराते हुए कहा। "पानी के अंदर... आप एक-दूसरे को डिस्टर्ब कर सकते हैं। छू सकते हैं। गुदगुदा सकते हैं। कुछ भी कर सकते हैं ताकि सामने वाला सांस लेने के लिए ऊपर आ जाए।"

कामिनी की आँखों में चमक आ गई। "मज़ेदार।"

"तैयार?" रंगीला ने पूछा। "3... 2... 1... गो!"

चारों ने गहरी सांस ली और पानी के अंदर डुबकी लगा दी।

पानी के नीचे की दुनिया शांत और नीली थी।

डॉली ने अपनी आँखें खोलीं। पानी साफ था। वह देख सकती थी कि सब क्या कर रहे हैं।

कामिनी तुरंत विक्रम की तरफ बढ़ी। विक्रम अपनी सांस रोके खड़ा था। कामिनी ने विक्रम के शॉर्ट्स को पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचा। विक्रम घबरा गया। कामिनी ने अपने दोनों पैर विक्रम की कमर पर लपेट दिए और पानी के अंदर ही उसे किस करने की कोशिश की। विक्रम का संतुलन बिगड़ गया। वह हड़बड़ाकर ऊपर आ गया।

स्प्लैश! विक्रम बाहर। हार गया।

अब तीन बचे थे। राज, डॉली और कामिनी।

कामिनी ने अब राज को निशाना बनाया। वह एक जलपरी की तरह तैरती हुई राज के पास आई। उसने राज के चेहरे को अपने हाथों में लिया। राज ने उसे रोका नहीं। कामिनी ने राज की छाती पर अपना हाथ फेरा और फिर नीचे... उसके स्विमिंग ट्रंक्स की तरफ।

डॉली यह सब देख रही थी। जलन की एक लहर उसके अंदर दौड़ी। राज उसका था!

डॉली ने तय किया कि वह चुप नहीं रहेगी। वह भी राज की तरफ बढ़ी।

राज ने देखा कि डॉली आ रही है। उसने कामिनी का हाथ हटा दिया और अपने हाथ डॉली की तरफ बढ़ाए।

डॉली राज के पास आई। उसने राज के गले में बाहें डाल दीं। पानी के अंदर, उनके शरीर एक-दूसरे से चिपक गए। डॉली ने अपनी टांगें राज की कमर पर लपेट लीं।

राज ने डॉली को कसकर पकड़ लिया। अब वे एक ही इकाई थे।

कामिनी को समझ आ गया कि वह यहाँ तीसरे पहिए की तरह है। उसने राज को छोड़ दिया और ऊपर चली गई।

स्प्लैश! कामिनी बाहर।

अब सिर्फ़ डॉली और राज बचे थे।

रंगीला ऊपर से देख रहा था। उसे पानी के अंदर का साफ़ नज़ारा नहीं दिख रहा था, लेकिन वह समझ सकता था।

पानी के नीचे, समय थम गया था।

राज ने डॉली की आँखों में देखा। डॉली की सांसें टूटने वाली थीं, लेकिन वह ऊपर नहीं जाना चाहती थी। वह इस पल को जीना चाहती थी।

राज ने पानी के अंदर ही डॉली को किस किया। यह किस सांसों का आदान-प्रदान था। राज ने अपनी थोड़ी हवा डॉली के मुंह में भर दी। डॉली को नई ज़िंदगी मिल गई।
 
राज का हाथ डॉली की बिकिनी के बॉटम पर गया। उसने उसे थोड़ा खिसकाया। डॉली ने पानी के अंदर राज को अपने अंदर महसूस किया—उसकी उंगलियाँ।

यह सनसनीखेज था। पानी का दबाव और राज का स्पर्श। डॉली का शरीर कांपने लगा।

अचानक, डॉली को लगा कि उसे सांस चाहिए। वह अब और नहीं रोक सकती थी।

वह राज से अलग हुई और तेज़ी से ऊपर आई।

स्प्लैश! डॉली बाहर। वह हांफ रही थी, पानी और हवा के लिए।

राज कुछ सेकंड बाद ऊपर आया। वह भी हांफ रहा था, लेकिन उसके चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी।

"राज जीत गया!" रंगीला ने ताली बजाई। "नंबर 3, तुम आज रात के मास्टर हो।"

राज पूल के किनारे आया और ऊपर चढ़ा। पानी उसके शरीर से टपक रहा था। वह किसी ग्रीक गॉड जैसा लग रहा था।

"तो, मास्टर," रंगीला ने पूछा। "हारने वालों के लिए क्या सजा है?"

राज ने डॉली, कामिनी और विक्रम को देखा जो पूल में थे।

"मेरी सजा बहुत सरल है," राज ने कहा। "आज रात... विक्रम और कामिनी, तुम दोनों हवेली के बाहर, गार्डन में सोओगे। तंबू में। अकेले।"

विक्रम और कामिनी चौंक गए।

"और डॉली?" रंगीला ने पूछा। "वह भी हारी है।"

"डॉली..." राज डॉली के पास झुका और उसे पानी से बाहर खींच लिया। "डॉली मेरी कैदी है। वह मेरे साथ रहेगी। मेरे कमरे में। और उसे... मेरी सेवा करनी होगी।"

डॉली का दिल धड़क उठा। 'सेवा'? राज के दिमाग में क्या था?

कामिनी ने विक्रम को देखा और कंधे उचकाए। "गार्डन में? नॉट बैड। हम वहां अपना गेम खेल सकते हैं।"

रंगीला हंसा। "अच्छा खेल है, राज। मुझे पसंद आया।"

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शाम 7 बजे। राज का कमरा (सिंह कक्ष)।

डॉली नहाकर तैयार थी। राज ने उसे एक खास ड्रेस पहनने को कहा था—एक सफ़ेद सिल्क रोब और उसके नीचे कुछ नहीं।

राज एक आर्मचेयर पर बैठा था, व्हिस्की का गिलास हाथ में लिए। उसने भी नहा लिया था और एक ब्लैक पायजामा और खुला हुआ गाउन पहना था।

"आओ यहाँ," राज ने इशारा किया।

डॉली धीरे-धीरे उसके पास गई।

"घुटनों पर," राज ने कहा।

डॉली घुटनों के बल बैठ गई, राज के पैरों के पास। राज ने अपना गिलास डॉली को पकड़ाया।

"पियो," उसने कहा।

डॉली ने एक घूंट पिया। व्हिस्की ने उसके गले को जला दिया, लेकिन उसके अंदर एक गर्मी भी पैदा की।

"तुमने कहा था मैं तुम्हारी कैदी हूँ," डॉली ने ऊपर देखते हुए कहा।

"हाँ," राज ने डॉली के बालों में हाथ फेरते हुए कहा। "और एक कैदी अपने मालिक को खुश करता है।"

राज ने अपने पैर फैलाए।

"मुझे खुश करो, डॉली," राज ने कहा।

डॉली समझ गई। उसने अपना सिर झुकाया और राज के गाउन की बेल्ट खोली।

यह जबरदस्ती नहीं थी। यह एक रोलप्ले था। राज का 'मास्टर' बनना और डॉली का 'कैदी' बनना—यह उनकी आपसी सहमति का खेल था। डॉली को इसमें एक अजीब सा सुकून मिल रहा था। सबमिशन का अपना नशा होता है—जिम्मेदारी छोड़कर सिर्फ़ सुख देना और लेना।

डॉली ने राज को देखा। वह तैयार था।

डॉली ने अपना काम शुरू किया। उसने राज को अपनी जीभ और होंठों से पूजा। राज ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना सिर पीछे टिका दिया। उसके हाथ डॉली के सिर पर थे, उसे गाइड कर रहे थे।

"यही..." राज ने कराहते हुए कहा। "यही चाहिए था। पानी के नीचे... जब तुम मेरे पास आईं... मुझे पता था तुम मेरी हो।"

राज ने डॉली को उठाया और अपनी गोद में बैठा लिया। डॉली का रोब खुल गया। उसकी नंगी त्वचा राज के गाउन से रगड़ खा रही थी।

"आज रात," राज ने डॉली के कान में कहा, "मैं तुम्हें दिखाऊंगा कि एक मास्टर अपनी पसंदीदा कैदी को कैसे इनाम देता है।"

राज ने डॉली को बिस्तर पर लिटा दिया। उसने एक रेशमी डोरी उठाई जो बेडसाइड टेबल पर रखी थी।

"हाथ ऊपर," राज ने कहा।

डॉली ने अपने हाथ ऊपर कर दिए। राज ने उसके हाथों को बेड के हेडबोर्ड से बांध दिया। बहुत कसकर नहीं, लेकिन इतना कि डॉली हिल न सके।

"अब तुम हिल नहीं सकतीं," राज ने डॉली के ऊपर चढ़ते हुए कहा। "अब तुम सिर्फ़ महसूस कर सकती हो।"

राज ने डॉली के पूरे शरीर को चूमा—गले से लेकर पैर के अंगूठे तक। वह डॉली को तड़पा रहा था। वह छूता, फिर रुक जाता। वह किस करता, फिर हट जाता।

"राज... प्लीज़!" डॉली ने बेबसी में कहा। "मुझे चाहिए... तुम चाहिए!"

"इंतज़ार करो," राज ने मुस्कुराते हुए कहा। "सब्र का फल मीठा होता है।"

राज ने एक पंख उठाया—शायद किसी मोर का पंख जो कमरे में सजावट के लिए था। उसने उस पंख को डॉली के संवेदनशील अंगों पर फेरा।

डॉली की सिसकियाँ कमरे में गूंज रही थीं। बंधे हुए हाथ, रेशमी पंख और राज का नियंत्रण—यह डॉली के लिए अब तक का सबसे कामुक अनुभव था।

आखिरकार, जब डॉली रोने लगी, तब राज ने उसे आज़ाद किया।

उसने डॉली के हाथ खोले और उसे अपनी बांहों में भर लिया। और फिर... उसने डॉली को वह दिया जिसके लिए वह तड़प रही थी। एक गहरा, पूरा और प्रेमपूर्ण मिलन।

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देर रात।

डॉली राज की छाती पर सो रही थी। राज जाग रहा था।

अचानक, उसे बालकनी से कुछ आवाज़ आई।

वह उठा और चुपचाप बालकनी में गया।

नीचे गार्डन में, विक्रम और कामिनी का तंबू लगा था। तंबू की ज़िप खुली थी। राज ने देखा कि तंबू खाली है।

वह हैरान हुआ। वे कहाँ गए?

तभी उसकी नज़र दूर जंगल की तरफ गई। वहां टॉर्च की रोशनी चमक रही थी। दो लोग जंगल की तरफ जा रहे थे।

और उनके पीछे... एक तीसरी आकृति थी।

इरा।

इरा उनके पीछे जा रही थी, छिपते हुए।

राज की भौहें तन गईं। जंगल में क्या हो रहा है? और इरा क्या कर रही है?

उसने पीछे मुड़कर डॉली को देखा जो गहरी नींद में थी।

"खेल अभी खत्म नहीं हुआ," राज ने बुदबुदाया। "कल... जंगल की बारी है।"

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सुबह की हवा में एक अजीब सा तनाव था। रात को जो बारिश हुई थी, उसने हवेली के आस-पास के जंगल को एक गहरे, हरे और नम रहस्य में बदल दिया था। लेकिन आज सूरज नहीं निकला था; आसमान बादलों से घिरा था, जैसे वह हवेली के अंदर होने वाले किसी तूफ़ान की चेतावनी दे रहा हो।

राज और डॉली 'सिंह कक्ष' में देर तक सोए थे। कल रात का 'मास्टर और कैदी' का खेल डॉली के शरीर और दिमाग पर गहरा असर छोड़ गया था।

जब वह उठी, तो उसकी कलाइयों पर रेशमी डोरी के हल्के निशान थे—गुलाबी और कोमल। राज अभी भी सो रहा था, उसका एक हाथ डॉली की कमर पर था। डॉली ने धीरे से उसका हाथ हटाया और बाथरूम की तरफ गई।

जब वह बाहर आई, तो राज जाग चुका था। वह बिस्तर पर बैठा अपनी सिगरेट बना रहा था।

"आज का दिन भारी होगा," राज ने डॉली को देखते हुए कहा। "मुझे ऐसा लग रहा है।"

डॉली ने अपनी साड़ी पहनते हुए पूछा, "क्यों?"

"क्योंकि मैंने कल रात कुछ देखा," राज ने लाइटर जलाते हुए कहा। "विक्रम और कामिनी... और उनके पीछे इरा। वे जंगल की तरफ गए थे। और आज सुबह... वे नाश्ते पर नहीं आए।"

डॉली चौंक गई। "गायब हैं?"

"शायद रंगीला का कोई नया खेल है," राज ने धुआं छोड़ते हुए कहा। "तैयार रहना, डॉली। आज हमें अपनी आंखें और कान खुले रखने होंगे।"

दोपहर 12 बजे। इरा का कमरा (द साइक वार्ड)

रंगीला ने आज सुबह का सत्र रद्द कर दिया था और सबको अपने कमरों में रहने को कहा था। लेकिन एक व्यक्ति को विशेष निमंत्रण मिला था।

विक्रम (नंबर 5)।

विक्रम को इरा (नंबर 6) के कमरे में बुलाया गया था। विक्रम को लगा था कि यह शायद कोई सेक्सुअल एनकाउंटर होगा, जैसा कामिनी के साथ हुआ था। वह उत्साहित था।

इरा का कमरा हवेली के सबसे एकांत कोने में था। जब विक्रम ने दरवाज़ा खटखटाया, तो वह अपने आप खुल गया।

अंदर का नज़ारा किसी साधारण बेडरूम जैसा नहीं था। यहाँ बिस्तर नहीं था। कमरे के बीच में एक बड़ी, काले चमड़े की थेरेपी चेयर रखी थी, जिसमें हाथ और पैर बांधने के लिए पट्टे लगे थे। दीवार पर हज़ारों किताबें थीं, और एक टेबल पर कई तरह के औज़ार रखे थे—पंख, मोमबत्तियाँ, चाबुक, और कुछ सर्जिकल उपकरण।

विक्रम ठिठक गया। "इरा?"

"अंदर आओ, नंबर 5," इरा की आवाज़ परछाइयों से आई। "और दरवाज़ा लॉक कर दो।"

विक्रम ने दरवाज़ा लॉक किया। "यह... यह सब क्या है? कोई नया गेम?"

इरा सामने आई। उसने एक सफ़ेद सिल्क शर्ट और काली पेंसिल स्कर्ट पहनी थी। उसके बाल एक सख्त जूड़े में बंधे थे, और उसने काला फ्रेम वाला चश्मा लगाया हुआ था।

वह एक सख्त लाइब्रेरियन या टीचर जैसी लग रही थी—एक ऐसी फंतासी जो बहुत से मर्दों की कमज़ोरी होती है।

"बैठो," इरा ने कुर्सी की तरफ इशारा किया।

विक्रम हंसा। "क्या हम डॉक्टर-पेशेंट खेल रहे हैं?"

"बैठो," इरा ने अपनी आवाज़ ऊंची नहीं की, लेकिन उसमें इतना वजन था कि विक्रम की हंसी रुक गई। वह चुपचाप कुर्सी पर बैठ गया।

इरा उसके पास आई। "हाथ रखो।"

विक्रम ने हाथ आर्मरेस्ट पर रखे। इरा ने एक चमड़े का पट्टा उठाया और विक्रम की कलाई बांध दी। विक्रम को लगा यह खेल का हिस्सा है, उसने विरोध नहीं किया। फिर इरा ने उसके दूसरे हाथ और दोनों पैरों को भी बांध दिया।

अब विक्रम पूरी तरह बंधा हुआ था। वह हिल नहीं सकता था।

"कंफर्टेबल?" इरा ने पूछा, विक्रम के बालों में उंगली फेरते हुए।

"हाँ, डॉक्टर," विक्रम ने शरारती अंदाज़ में कहा। "अब इलाज शुरू करो।"

"बिल्कुल," इरा ने कहा। वह टेबल की तरफ गई और वहां से एक कैंची उठाई।

विक्रम की मुस्कान गायब हो गई। "इरा... यह क्या है?"

इरा वापस आई। "कपड़े उतारने का मेरा तरीका।"

उसने कैंची की ठंडी नोक विक्रम की शर्ट के बटन पर रखी। और कच! उसने बटन नहीं खोला, उसने शर्ट का कपड़ा ही काट दिया।

विक्रम की धड़कन तेज़ हो गई। कैंची की नोक उसकी छाती की त्वचा को छू रही थी। एक गलती, और खून निकल सकता था।

"हिलो मत," इरा ने चेतावनी दी। "वरना निशान पड़ जाएगा।"

इरा ने धीरे-धीरे विक्रम की पूरी शर्ट काट दी। कपड़े के टुकड़े फर्श पर गिर गए। अब विक्रम की नंगी छाती इरा के सामने थी।

"तुम्हें बोरियत हो रही थी ना, विक्रम?" इरा ने विक्रम के सीने पर हाथ फेरते हुए पूछा। "तुम्हारी बीवी, तुम्हारा बिजनेस, तुम्हारी लाइफ... सब बोरिंग था। तुम्हें 'किक' चाहिए थी।"

इरा ने कैंची रख दी और एक मोमबत्ती उठाई। उसने उसे जलाया।

"दर्द," इरा ने कहा, "बोरियत का सबसे अच्छा इलाज है।"

उसने मोमबत्ती को विक्रम की छाती के ऊपर झुकाया।

"इरा, नहीं!" विक्रम चिल्लाया।

एक बूंद गर्म मोम विक्रम की छाती पर गिरी।

"आहहह!" विक्रम की चीख निकल गई। वह छटपटाया, लेकिन पट्टियों ने उसे जकड़ रखा था।

"शांत," इरा ने कहा। उसने मोमबत्ती को और पास लाया। "यह दर्द नहीं है, विक्रम। यह अहसास है। महसूस करो कि तुम ज़िंदा हो।"

उसने दूसरी बूंद गिराई। फिर तीसरी। विक्रम की छाती पर लाल निशान पड़ने लगे। लेकिन अजीब बात यह थी कि दर्द के साथ-साथ विक्रम का लिंग सख्त होने लगा। दर्द और उत्तेजना का यह मिश्रण उसके दिमाग को शॉर्ट-सर्किट कर रहा था।

"देख रहे हो?" इरा ने विक्रम की पैंट के उभार की तरफ इशारा किया। "तुम्हें यह पसंद आ रहा है।"

इरा ने मोमबत्ती रख दी। अब उसने एक फेदर (पंख) उठाया।

"अब कंट्रास्ट," इरा ने कहा।

उसने उस पंख को विक्रम के जले हुए निशानों पर, उसके निप्पल्स पर, और उसकी गर्दन पर फेरा।

विक्रम की सांसें भारी हो गईं। "इरा... प्लीज़... मुझे आज़ाद कर दो।"

"क्यों?" इरा ने विक्रम के कान में फुसफुसाया। "ताकि तुम फिर से अपनी बोरिंग दुनिया में जा सको? नहीं, विक्रम। आज तुम मेरे हो। और मैं तुम्हें तोड़ूँगी, ताकि मैं तुम्हें फिर से बना सकूँ।"

इरा ने विक्रम की बेल्ट खोली। उसने उसकी पैंट की ज़िप नीचे की और उसे खींचकर उतार दिया। विक्रम अब अपने बॉक्सर में था।

इरा ने एक कुर्सी खींची और विक्रम के सामने बैठ गई। उसने अपने पैर एक के ऊपर एक चढ़ा लिए। उसकी स्कर्ट थोड़ी ऊपर हो गई, जिससे उसकी सुडौल जांघ दिखी।

"मैं तुम्हें छुऊंगी नहीं, विक्रम," इरा ने कहा। "तुम्हें सिर्फ़ देखना है। और तड़पना है।"
 
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