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Adultery कीमत वसूल

ऋतु बोली- "आप इसको सुन लीजिए। मैं बाकी काम निपटाकर आती हूँ.."

मैंने कहा- "बाद में कर लेना..."

ऋतु ने कहा- "इसको सुनने के बाद आप मुझे कोई काम नहीं करने दोगे..."

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मैं समझ गया की इसमें सब लण्ड खड़ा करने वाली बातें हैं। मैंने कहा- “चलो तुम काम निपटाकर आओ मैं सुनता हूँ..” मैंने फिर से प्ले किया पर सुनकर यकीन नहीं हो रहा था मुझे अगर ऋतु की आवाज की पहचान नहीं होती तो मैं इस रेकार्डिंग को नकली ही समझता। बातचीत कुछ इस तरह थी। आप लोग यकीन माना या ना मानो, मैंने स्टोरी के इस पार्ट को लिखने से पहले आज वो कार्डि फिर से सनी, और अल्लमोस्ट मैं सेम लिख रहा है।

अन्- और आज आफिस में कैसा रहा?

ऋतु- जैसा रोज होता है।

अनु- आज कुछ हुआ नहीं क्या, या मोका नहीं मिला?

ऋत्- क्या दीदी आप भी ना... हर टाइम सिर्फ सेक्स के बारे में सोचती रहती हो।

अनु- अरे मुझसे क्या छुपा रही है, बता ना आज तुम लोगों ने सेक्स किया?

ऋतु- नहीं दीदी, मैं आज बहुत थकी थी फिर उनको भी लग रहा था की मैं थकी है। इसलिए आज कुछ नहीं हुआ बस किस ही किया उन्होंने।

अनु- इसका मतलब बो तेरी फीलिंग को देखकर सेक्स करता है?

ऋतु. ही दीदी सच में वो बड़े अच्छे हैं। उनको मेरी छोटी से छोटी प्राबलम भी अपनी लगती है। सच में वो मझे बड़ा प्यार करते हैं।

अनु- मैं तो आज सोच रही थी की तो से मजेदार किस्सा सुनेंगी। तनें तो सच मजा ही खराब कर दिया। चल में बता बो तुझें सेक्स करने से पहले क्या-क्या करता है। पर सब साफ-साफ बोलियो उसमें मजा आता है।

ऋतु- यार दीदी आपको भी ना... चलो मैं आपको सब साफ-साफ ही बताती हैं। सबसे पहले वो मुझे पूरा नंगी करते हैं, फिर वो मेरी एक चूची को चूसते हैं, और दूसरी का निप्पल मसलते हैं। फिर उनका हाथ मेरी गाण्ड पर आ जाता है। वो मेरी गाण्ड को कस-कस के मसलते हैं। मैं उनका लण्ड पकड़कर हिलाती रहती हैं फिर बो मेरी चूत में अपनी उंगली डाल देते हैं। उनकी उंगली पता नहीं क्या करती है की मेरी चूत गीली हो जाती है। वो मेरे दाने को मसलते हैं तो अहह..." साथ में अन् की भी आह्ह... निकलती है।

अन्- हाँ यार सच में... अगर कोई दसरा मेरे दाने को रगड़े तो मजा आ जाए। पर वो तो मेरी चूत को देखते भी नहीं।

ऋतु- दीदी आप उनसे कभी कहो ना की आपको ये सब अच्छा लगता है।

अनु- उहह... क्या कहूँ उनका एक ही डायलाग होता है की 'अनु मुझे सुबह जल्दी उठना है टाइम मत खराब करो जल्दी से पैंटी उतारी और बस ना किस ना चूची दबाते हैं। मेरा इतना मन करता है की वो मेरी चूचियों को मसल दें, और अपने मुँह में लेकर चूसें। पर कुछ भी नहीं करते। बस लण्ड को चूत में डालकर धक्के मारते हैं, दो-चार मिनट में झड़कर बोलते हैं- गुड नाइट..."

ऋतु- "दीदी, आप उनको बायफ्रेंड दिखाओ। हो सकता है उसे देखकर उनका मइ चेंज हो जाए.."

अनु रुचांसी आवाज में. "अरे यार मैं सब ट्राई कर चुकी हैं। वो बायफ्रेंड देखकर भी कुछ नहीं करते। उनका दिमाग सिर्फ अपना पानी निकालने में रहता है। दूसरे के एमोशन्स की कोई परवाह नहीं। अब में अगर ज्यादा कुछ बोलूगी तो पता है उनके दिमाग में यें आएगा की मैं उनसे खुश नहीं हो पाती, और कहीं वो मुझे गलत समझ बैठे तो पता नहीं क्या होगा? हौँ फिर त बता ना... तेरी चत पनिया जाती हैं फिर?"

ऋतु- हाँ फिर में उनका लण्ड अपने मुँह में लेकर चूसती हैं, उनके लण्ड से हमेशा स्वीट सी महक आती है। मन करता है चूसती ही रहा

अन्- "किस टाइप की महक समझी नहीं मैं?" मैंने पहले भी लिखा हैं मैं अपने लण्ड पर डी.ओ. लगाता हैं।

ऋतु- अब मैं आपको कैसे समझाऊँ? जैसे की भीनी-भीनी खुशबू आती है।

अनु- फिर वो तेरी चूत कब चाटता है? उसका लण्ड जब तैयार हो गया तो वो चूत में नहीं डालता क्या?
 
ऋतु- दीदी नही तो खासियत है उनकी। वो बड़े धैर्य वाले हैं। पहले मैं उनका लौड़ा चूसती है, उसके बाद वो मेरी चत को बड़ी मस्ती से चाटकर तैयार करते हैं। पता है मैं तो उनका लण्ड डालने से पहले ही झड़ जाती हैं। उनकी जीभ भी उनके लण्ड की तरह है।

अन्- हे में तो सुन-सुन केही पनिया गई। अच्छा फिर उसके बाद?

ऋतु- वो मेरी चूत को चाटकर गीली कर देते हैं उसके बाद मुझे फिर से अपना लौड़ा चुसवाते हैं। फिर वो मेरी चूत में अपना लौड़ा डालते हैं, और लौड़ा डालकर रुक जाते हैं। मेरी हालत खराब हो रही होती है।

फिर मुझे कहेंगे. "बताओ चुदना है?"

मैं कहती हूँ- "हो...

फिर कहेंगे- "मैंह से बोलो.."

और जब तक मैं ना कहूँ की- "प्लीज मुझे चोदो." तब तक धक्के नहीं मारते।

अनु- इस बात का क्या मतलब हुआ?

ऋतु- अरे बाबा वो मुझे इतना गरम कर देते हैं अपनी हरकतों से की मैं उनको खुद कहने को मजबूर हो जाती हैं, और उसके बाद तो बस उनकी स्पीड हाईईई... वो जब तक 8-10 मिनट तक धक्के ना मारें उनका झड़ता ही नहीं।

अन् की चौंकाने वाली आवाज- "क्याउ:58-10 मिनट?"

ऋतु- ही दीदी इससे कम कभी नहीं लगता।

अनु- तुझ टाइम का आइडिया नहीं है, तू गलत सोच रही है।

ऋतु-दीदी मैं भी पही सोचती थी। पर मैंने जब टाइम चेक किया तब मैं मान गई।

अनु- है राम... आदमी है या घोड़ा? होहोहोही.." और हँसती है।

ऋतु- हाँ दीदी, यही समझ लो वो घोड़े जैसे हैं। मुझे जब घोड़ी बनाते हैं तो मुझे ऐसा लगता है मैं सच में घोड़ी

अनु- "अच्छा-अच्छा में बता वो तुझं आगे से ही चोदता है या कभी पीछे से भी कहता है हम्म्म्म

.."

ऋतु- पीछे से मतलब डागी स्टाइल में?

अन्- अरे यार गाण्ड में... तु भी पागल है।

ऋतु- "तो इसमें क्या बात है? मैने कई बार पीछे भी डलवाया है आप लोग करते हो या... ...."

अन्- "ओहह... त कैसे करवाती है? मैंने तो सुना है उसमें गाण्ड फट जाती है, बड़ा दर्द होता है। मैंने तो कभी ट्राई किया ही नहीं, बस सुना है..."

ऋतु- "दीदी, मैंने भी सुना था और मैंने जब पहली बार उनसे गाण्ड मरवाई तो मुझे भी डर लग रहा था। पर वो सच में जो भी करते हैं, उसमें मजा आता है।

अनु- अच्छा ये बता वो गाण्ड मारने से पहले क्या करता है? कीम तो लगाता ही होगा?
 
अन्- "ओहह... त कैसे करवाती है? मैंने तो सुना है उसमें गाण्ड फट जाती है, बड़ा दर्द होता है। मैंने तो कभी ट्राई किया ही नहीं, बस सुना है..."

ऋतु- "दीदी, मैंने भी सुना था और मैंने जब पहली बार उनसे गाण्ड मरवाई तो मुझे भी डर लग रहा था। पर वो सच में जो भी करते हैं, उसमें मजा आता है।

अनु- अच्छा ये बता वो गाण्ड मारने से पहले क्या करता है? कीम तो लगाता ही होगा?

ऋतु- "वो तो लगानी ही पड़ती है। पर जब वो अपनी उंगली से लगाते हैं तब बड़ा मजा आता है। गाण्ड में सुरसुरी हो जाती है...

अनु- हाय रे कितना अजीब लगता होगा गाण्ड में उंगली इलवाना? और उसको कुछ गंदा नहीं लगता उंगली करने में

ऋतु- नहीं वो बड़े ही प्यार से उंगली डाल-डाल के गाण्ड को बिल्कुल मुलायम कर देते हैं।

अनु- पर गाण्ड तो बो निरोध लगाकर ही मारत होगा?

ऋतु- नहीं दीदी, बो कभी निराध इस्तेमाल नहीं करते। आज तक कभी नहीं किया।

अनु- पर जब गाण्ड मारने में उसके लौड़े पे शिट लग जाती होगी तो उसको घिन नहीं आती क्या?

ऋतु. "दीदी आप भी ना पता नहीं क्या-क्या बोलती हो? अरे बाबा कहा ना वो इन सब बातों से नहीं घबराते। मैंने उनको कहा था एक बार तो वो बोलें- "मैं अपने नंगे लण्ड से ही चोदूँगा' जब उनको अच्छा लगता है तो मैं क्यों मना करंग?"

अनु- चल यार, आज तेरे से सुना है मैंने की लोग बिना निराध के भी कर लेते हैं। पर एक बात बता बायफ्रेंड में जो गाण्ड मारते हैं, उनका लण्ड कभी नहीं गंदा होता। वो क्या करते होंगे?"

ऋत्- "मैंने भी इनसे पूछा था, तो उन्होंने बताया था की वो औरतें पहले एनीमा करवाती हैं। इसलिए उनकी गाण्ड साफ रहती है। पर उसमें आदमी को मजा नहीं आता। अगर गाण्ड का असली मजा लेना है तो ऐसे ही गाण्ड मारनी चाहिए, उसी में मजा आता है."

अनु- बड़ा ही तजुर्बे वाला लगता है।

ऋतु- हाँ दीदी मुझे उन्होंने खुद ही बताया था की वो सैकड़ों चूत मार चुके हैं। अब इतनी चूत मारने वाले का तजुर्बा तो होगा ही।

अनु- हाँ ये भी है। पर अगर वो सच बोल रहा है तो वाकई जो भी उससे चुदी होंगी, सब उसको याद करती होंगी।

ऋतु. "जैसे मैं याद कर रही हूँ हेहेहेहे.."

अनु- "हेहेहेहे..

ऋतु- दीदी, मैं तो उनको अब किसी काम के लिए मना नहीं करती। मझे पता है ये जो भी नया करेंगे बा मस्त ही होगा।

अनु- काश हम भी मजा ले सकते ऐसे लण्ड से? हमें तो एक जैसा खाना खाने की सजा मिली है।

ऋतु- दीदी एक बात बताओ, अगर आपको मौका मिले तो आप क्या करोगी?

अनु- "अरे यार मुझे अगर ऐसा मोके मिला तो मैं उसके लण्ड को अपनी चूत में डालकर पूरा दिन निकालने ही नहीं दूंगी हेहेहेहे.."

ऋतु- "हेहेहेहे... दीदी अगर आपको सूम आ गया तो कैसे करोगी? हेहेहेहे.."

अनु- "उसके लण्ड पा कर दूँगी हेहेहेहे.."

फिर ऋतु की आवाज़ आती है- "दीदी आप कब से कर रही हो?"

अनु- हाईई इतनी मस्त बातें सुन-सुनकर रुका जाता है क्या?

ऋतु- आप भी बड़ी चंट हो, चुपचाप अपना काम कर लिया।

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अनु- अरे यार क्या काम कर लिया? इससे तो और आग लग रही देख जरा।
 
एक मिनट के बाद।

ऋतु- हाय रे दीदी.. आपनें कितना पानी छोड़ा हुआ है?

अनु- ऋतु प्लीज... आज जरा मुझं वैसे ही मजा दें, जैसे समीर तुझे देता है। उसके जैसे चाटकर दिखा तो सही।

ऋतु- मुझे क्या पता वो कैसे करते हैं?

अनु- तू जब चटवाती है तो पता नहीं चलता होगा?

ऋतु- मुझे होश कहा होता है?

अन्- चल फिर भी जितना पता है उतना तो कर।

इसके बाद अनु की मस्त सिसकियां चलती रहती हैं।

अनु- हायइंडई... आह्ह... बस्स ऐसे ही कर आईई... जुल्मी उईईई... आआआ.."

मैंने स्टाप कर दिया। मैंने जितना सोचा था उससे कहीं ज्यादा था उस रेकार्डिंग में मेरे लिए। मैं रेकॉडिंग सुनकर अपने लौड़े को कंट्रोल में नहीं रख पाया।

मैंने ऋतु को बुलाया और कहा- "अब्ब कोई काम नहीं करना, बस मेरे लण्ड को ठंडा कर दो."

ऋतु ने कहा- "मुझे पहले ही पता था."

मैंने कहा- "कैसे पता था?"

ऋतु बोली- "मैंने सुबह रेकार्डिंग चेक करने के लिए सुनी थी.."

मैंने ऋतु को अपनी ओर खींच लिया और कहा- "चलो जल्दी से अपनी सलवार खोलो। मुझे तम्हारी चत का रस पीना है.

ऋत् ने कहा- इतने जोश में आज आपको देखकर कुछ-कुछ हो रहा है।

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मैंने कहा- जल्दी करो, नहीं तो सलवार फाड़ दूँगा।

ऋतु में जल्दी से अपनी सलवार उतारी। मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को अपने मुँह में दबा लिया। ऋतु की मस्ती में सिसकी निकल गई- उईई... इस्स्स्स ... आहह..” मैंने उसकी चूत को अपने दांतों से कसकर दबा रखा था, जैसे कोई लेंग-पीस हो, और फिर मुझ ऋतु की चूत के पानी का टेस्ट मिलने लगा। उसकी चूत में पानी छोड़ दिया था। मैंने बिना रुके उसकी पैंटी उतार दी और उसको सोफे पर लिटा दिया। उसके मैंह पर अपना लण्ड रखते हुए उसकी चूत पर झुक गया।

जैसे ही मैंने उसकी चूत में अपना मुंह लगाया उसकी फिर से सिसकी जिकली. आहहह। मैंने उसकी चूत की फांकों में अपनी जीभ सा दी। ऋतु भी कहां होश में थी, उसने मेरा लौड़ा झट से अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। अब हम दोनों 69 पाज में थे। मैंने अपनी जीभ का और घुसा दिया। अब तो ऋतु को जैसे कुछ होने लगा हो। वो मेरे लण्ड को अपने मुह में ऐसे चूसने लगी जैसे बकरी का बच्चा बकरी का धन चूसता है।

च-बीच में उसकी चूत का दाना भी अपने हाथ से रगड़ देता था, जिससे उसका मजा दोगुना हो जाता था। फिर मैंने उसकी चूत के ऊपर अपनी जीभ ऐसे फिरानी शुरू की जैसे कोई बिल्ली मलाई चाट रही हो। मेरा पूरा चेहरा ऋतु के पानी से चिपचिपा हो गया था। ऋतु की सिसकियां मुझे अब और तंज सुनाई देने लगी।

ऋतु- "उहह ... आह्ह... ओहह ... हाईईई... आआआ.."

मैं समझ गया इसको अब पूरा मजा मिल गया है। मेरे लण्ड का भी कुछ यही हाल था। मैंने उसके मुँह में अपना लण्ड काफी अंदर तक घुसेड़ दिया। इस पोज में उसका मुँह मेरे लण्ड की सीध में था। मुझे अपना लण्ड उसके गले में जाता महसूस हो रहा था। पर ऋतु बिना किसी पर शनी के गले तक लण्ड ले रही थी, और जब मेरा झड़ा तो सीधा उसके गले में जाकर झड़ा। फिर में ऋतु के मुँह में ही डालकर पड़ा रहा। वा उसको चूमती चाटती रही।

जब उसने मेरे लण्ड को चाट चाटकर परा साफ कर लिया तो बोली- "अब तो उठ जाइए."

मैंने कहा- अब बताओं चुसाई में मजा आया?

ऋतु ने मुझे चिढ़ते हुए कहा- "नहीं.."

मैंने कहा- "चलो फिर से चाट देता हैं."

ऋतु बोली- "नहीं जी अब हिम्मत नहीं है मुझमें। आपको क्या पता मेरी टाँगें काँप रही हैं। मुझे अभी तक अपनी चूत फा आपकी जीभ महसूस रही है.."

मैंने हँसते हुए कहा- "तुमने अनु को कल जब चाटा तब उसका क्या हाल था?"

ऋतु बोली- "वो तो मस्ती में पता नहीं क्या-क्या बोल रही थी?"

मैंने कहा- "तुम अगर बुरा ना मानो तो एक बात कहूँ?"

ऋतु ने कहा- "मैं आपकी किसी बात का बुरा नहीं मानेंगी, आप कहो..."

मैंने कहा- "मैं तुम्हारी बहन की चूत भी एक बार चाटकर देखना चाहता हैं..."

सुनते ही ऋतु बोली- "उधर वो आपकी बातें करती है, और इधर आप उनकी। लगता है आप दोनों को एक बार मिलवाना पड़ेगा..."

मैं इस बात को सुनते ही खुशी से ऋतु का अपनी बाहों में लेकर उसकी चची मसलते हए बोला- "सच तुम ऐसा कर सकती हो क्या?"

ऋतु बोली- "मैं क्यों कर? मुझे क्या आप दोनों से कुछ मिलना है, जो में ऐसा कर?"

मैंने कहा- "अभी तो तुमनें कहा था.."

ऋतु बोली- "वो तो मेरे मुँह से निकाल गया..."

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मैंने कहा- प्लीज एक बार मिलवा दो ना?

ऋतु ने कहा- "आपको मिलवा दिया तो आप उनके पीछे पड़ जाओगे। फिर मेरे लिए आपके पास टाइम ही नहीं होगा। ना बाबा ना... मैं नहीं करूंगी..."
 
मैंने कहा- प्लीज एक बार मिलवा दो ना?

ऋतु ने कहा- "आपको मिलवा दिया तो आप उनके पीछे पड़ जाओगे। फिर मेरे लिए आपके पास टाइम ही नहीं होगा। ना बाबा ना... मैं नहीं करूंगी..."

मैंने उसको कहा- "वो तो यहां से 5-7 दिन में चली जायेगी। तुम तो मेरी लाइफ में हमेशा रहोगी। तुम मेरे लिए इतना भी नहीं करोगी?"

अतु ने कहा- "मुझे क्या मिलेगा? मैं क्यों करंग ये काम?"

मैंने उसको कहा. "तुम जो माँगोगी मैं तुमको दूंगा.."

सुनते ही ऋतु ने कहा- "ओके... मैं आपका काम कर दूंगी। पर मैं जो कहूँगी आपको करना पड़ेगा..."

मैंने कहा- "पक्का... तुम जो कहोगी मैं वो करूंगा."

ऋतु ने कहा- "इसके लिए आपको मेरे घर आना होगा। मैं आपको कहीं बाहर चलने को कहूँगी। दीदी को मना कर साथ ले चलेंगे। इसी बहाने उनसे आपकी बात बन जाएगी."

मैंने कहा- "ठीक है। मैं कब आऊँ?"

ऋतु ने कहा- आज ही आ जाइए।

मैंने कहा- मैं किस बहाने से आऊँगा?

ऋतु ने कहा- आप उनके बेबी को देखने के बहानें आ जाना।

मैंने कहा- अबें ही यार ये आइडिया सही है।

शाम को करीब 7:00 बजे ऋतु का फोन आया- "आपके काम की शुरुवात मैंने कर दी है। आप मेरे घर आ जाओ। मैं आपकी दीदी से मीटिंग करवाती हैं..."

मैंने कहा- "मैं आता है." कहकर में जल्दी से तैयार हआ और ऋतु के घर पहुँच गया।

वहां जाते ही ऋतु की स्माइल से मैं समझ गया की उसने कोई चाल चलकर काम बना दिया है। मैं जैसे ही रूम में एंटर हुआ, साफ पर अन् बैठी थी। उसकी गोद में उसका बेबी था।

आनु मुझे देखते ही बोली- "आइए सर, नमस्ते.."

मैंने भी उसको स्माइल देते हुए कहा- "नमस्ते.."

शोभा बोली- "आइए सर बैंठिए..."

मैंने कहा- "मुझं ऋतु ने बताया की आप आई हुई हैं, तो मैंने सोचा मैं आपके बेबी को देख आऊँ.."

इतने में शोभा में अनु की गोद में बैबी को ले लिया और मेरे पास ले आई। मैंने उसको अपनी गोद में लिया

और देखकर कहा- "बड़ा प्यारा बेबी है." और मैंने अपनी जेब से ₹1000 का नोट निकाला और उसको दे दिया। मैंने इसको पहली बार उठाया है शगुन तो बनता है।

अनु और शोभा दोनों एक दूसरे को देखने लगी। अन् बोल पड़ी. "सर ये क्या? इतने सारे मत दीजिए..."

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मैंने मुश्कुरा के कहा- "मैंने बेबी को दिया है। आप कुछ ना बोलिए."

अनु बोली- "पर सर........"

मैंने उसको रोकते हुए कहा- "प्लीज आप कुछ नहीं कहेंगी..."

इतने में ऋतु बोली- "दीदी कोई बात नहीं रख लीजिए। बार-बार कहने से उनको बुरा लगेगा.."

अनु चुप हो गई। फिर मैंने देखा अनु मुझे अलग ही नजरों से देख रही है। फिर दुनियादारी की बातें होती रही।

मैंने कहा- "अच्छा अनु जी आपसे मिलकर बड़ा अच्छा लगा। आप तो अभी यहां है किसी दिन ऋतु के साथ मेरे घर आइए डिनर पर, मुझे बड़ी खुशी होगी... फिर मैंने कहा- "अच्छा मैं चलता है."
 
अनु बोली- "अरे आप अभी तो आए हैं, अभी जा रहे हैं। डिनर करके जाइए ना.."

मैंने कहा- नहीं नहीं थैक्स। मैं तो बिना बताए आ गया। आप परेशान नहीं होइए।

अनु समझ गई मुझे पता है की अभी डिनर की कोई तैयारी नहीं है। अनु ने ऋतु को देखा।

ऋतु ने कहा- चलिए आज कहीं बाहर डिनर कर के आते हैं।

मैंने कहा- "ओके... पर एक शर्त पर। डिनर मेरी तरफ से होगा..."

ऋतु बोली- "ऐसा कैसे हो सकता है? आप हमारे घर आए हैं, हम आपको लेकर जाएंगे."

मैंने ऋतु को कहा- "फिर मैं नहीं जाने वाला.."

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सुनकर ऋतु शरारत से बोली- "अच्छा सर, आपकी जैसी मज़ीं। वैसे भी आपके आगे किसी की चलती है क्या? सर हम 10 मिनट में तैयार हो जाएंगे। तब तक आप मम्मी से बात कीजिए.."

अनु, शिल्पा, मैं और ऋतु सब घर से निकले। मैं सबको अपनी पसंद के रेस्टोरेंट में ले गया।

वहां जाकर शिल्पा अनु से बोली- "अनु दीदी यहां का खाना बड़ा टेस्टी होता है..."

मैंने शिल्पा को देखा और उसको कहा- "तुम यहां पहले भी आई हो?"

शिल्पा बोली "नो सर, पहला टाइम आई हैं। वो तो मेरी दोस्तों ने बताया था इसलिए मैंने कहा.."

मैंने कहा- "चलो आज खुद ही टेस्ट करके देख लेना.."

हम सब अंदर जाकर बैठ गये। टेबल के इस साइड में अनु और शिल्पा थी। ऋतु और मैं दूसरी साइइ थे। मेरे सामनें अनु थी मैंने उसको पूछा- "डिनर से पहले क्या लेंगी आप?"

अनु बोली- "जो आप लेंगे.."

मैंने कहा- "मैं बियर पियूँगा। अगर आपको भी बियर पीनी है तो आईर कर..."

अनु ने कहा- "नहीं नहीं मैंने कभी नहीं पी."

मैंने मुश्कुराते हुए कहा "आप सूप पीजिए। मैं बियर पियूँगा तो आपको बुरा तो नहीं लगेगा?"

अनु ने स्माइल देते हुए कहा- "नहीं आप लीजिए, मुझे कोई बुरा नहीं लगेगा.."

मैंने वेटर बुलाया और आईर दिया, 3 सूप और एक बियर का। 5 मिनट में आईर सर्व हो गया। मैंने अपने ग्लास को उठाते हुए सिप किया, और कहा- "आपको और क्या-क्या पसंद है?"

अनु ने कहा- "मुझे पहाड़ों पर जाना बहुत पसन्द है."

मैंने कहा- "आप नैनीताल गई हो?"

उसने बताया- नहीं।

मैंने कहा- "आप जब से यहां आई हो कहीं घुमने गई या नहीं?"

अनु ने कहा- "कैसे जाएं ऋतु जाब पर चली जाती हैं। शिल्पा कालेज। मम्मी और मैं घर पर ही टाइम पास कर लेते हैं। कहीं जाने का मौका ही नहीं मिलता...
 
मैंने कहा- "आप जब से यहां आई हो कहीं घुमने गई या नहीं?"

अनु ने कहा- "कैसे जाएं ऋतु जाब पर चली जाती हैं। शिल्पा कालेज। मम्मी और मैं घर पर ही टाइम पास कर लेते हैं। कहीं जाने का मौका ही नहीं मिलता...

मैंने कहा- "अगर आप कहो तो हम सब जैनीताल चलें एक दिन के लिए। पर आपका मूड हो तब मैं पायाम बनाऊँ..” कहकर मैंने अनु को देखा।

अनु ने हिचकते हुए कहा- "एक दिन में आना जाना मुश्किल हो जाता है, और मेरा बेबी अभी छोटा है। मुश्किल हो जाएगा... फिर बोली- "रहने दीजिए..."

मैंने कहा- "अरें इसमें क्या बात है? आप, मैं, ऋतु सब चलते हैं और मैंने शिल्पा से कहा- तुम भी चला..."

शिल्पा बोली "नहीं सर, मुझे तो कालेज में काम है। मैं नहीं जा सकती..."

ऋतु ने कहा- "दीदी चलो ना... बड़ा मजा आएगा, खूब मस्ती करेंगे वहां..."

अनु बोली- "मम्मी जाने देंगी तब ना?"

मैंने कहा- "आप उनकी चिंता मत करो। उनको मैं समझा लेंगा। बस आप ही करो..."

अनु बोली- "मेरी तो कोई मना नहीं है..."

मैंने कहा- फिर ठीक है। हम सब परसा चलते हैं, सथ ही अगले दिन ऑफिस भी आफ है। आराम भी हो जाएगा.."

ऋतु बोली. "सर इतनी दूर एक दिन में आना जाना हो जाएगा?"

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मैंने कहा- "हम सुबह जल्दी निकाल जाएंगे। रात तक आ जाएंगे, 4-5 घंटे वहां मस्ती हो जाएगी..."

ऋतु बोली- "ये ठीक है.."

इतने में डिनर लग गया। हम सब डिनर करने लगे। अत् बार-बार मेरी प्लेट से खाना खा रही थी।

अनु सब देख रही थी। जब अनु से रहा नहीं गया तो बोली- "आप दोनों तो एक प्लेट में ही खा लेते हैं....'

मैंने हँसते हुए कहा- "इसको चिड़िया की तरह चुग्गै मारने की आदत है.."

ऋतु शर्मा गई और अनु हँस पड़ी बोली- “यही तो प्यार होता है."

फिर डिनर के बाद हम वहां से निकले तो रास्ते में ऋतु बोली- "मुझं कुलफी खानी है."

मैंने कहा- "ओके खिलाता है..." और एक जगह कार रोकी और कुलफी का आईर दिया। 4 कुलफी कार में आ गई। ऋतु में जल्दी से अपनी कुलफी खा ली।

मैंने कहा- "और खानी हैं तो बोलो.."

ऋतु ने कहा- "नहीं खानी.." फिर एकदम से मेरी कुलफी लेकर खाने लगी।
 
मुझे हँसी आ गई। मैंने कहा- "अनु देखो इसको ये फिर से चुग्गा मार रही है."

अनु ने कहा- "आप दोनों की बात है, मैं क्या कहूँ? ये तो कुलफी है। आपका तो पता नहीं में क्या-क्या खाती है."

मैंने उसको देखा तो अनु के चेहरे पर बड़ी शरारत थी। मुश्कुरा के बोली- "मैंने सही कहां ना?"

में भी अब अन् से फेंक हो गया था। मैंने कहा- "आप भी खा लीजिए, हमने कब मना किया है?"

अनु बोली- "अच्छा जी ट्राई करेंगे कभी.."

मैंने कहा- "कभी भी..."

फिर हम घर आ गये। मैंने सबको ड्रॉप किया। मैंने शोभा से कहा- "हम सबका नैनीताल जाने का प्रोग्राम बन

गया है। आप अनु के बेबी को एक दिन के लिए रख लीजिए, और अनु को जाने दीजिए। उसका बहुत मन है.."

-

शोभा ने अनु को देखा, तो उसने हौं कहा।

तब शोभा बोली- "अगर आप सबकी मर्जी है तो मैं क्या कहूँ? कब जाना है?"

ऋतु ने कहा- परसों।

में वापिस आ गया। मैंने आने से पहले ऋतु से कहा- "आज बात कर लेना.."

ऋतु बोली- "मैं सब कर लूगी। आप फिकर नहीं करिए, काम हो जाएगा.."

अगले दिन ऋतु ने मुझे गुड न्यूज दी की दीदी से सब बात हो गई है।

मैंने कहा- "फिर कब के लिए कहा अनु ने?"

ऋतु ने मुझे आँख मारते हुए कहा- "आपका काम नैनीताल में हो जाएगा."

मुझे हसी आ गई।

फिर ऋतु ने कहा- "मुझे दीदी के साथ शापिंग करने जाना है। कल नैनीताल जाना है इसलिए दीदी को कुछ जरूरी सामान लेना है।

मैंने कहा- "मैं भी चलता हैं। तुम अनु को आफिस में बुला लो.."

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ऋतु ने फोन करके अनु को बुला लिया। अनु थोड़ी देर मेरै केबिन में बैठी। फिर हम तीनों शापिंग करने चले गये। अनु ने कुछ अपनें काम की चीज़ ली। फिर मैंने वहां अनु को अपनी पसंद का एक सूट दिलवाया।

तब ऋतु में कहा- "मुझे भी लेना है.." तो मैंने उसको जीन्स टाप दिलवाया।

मैंने अनु से कहा- "आप जीन्स नहीं पहनती?"

अनु ने कहा- "पहले पहनती थी." और शर्माते हुए- "अब जरा अच्छा नहीं लगता..."

मैं मन में सोचने लगा- "इसकी गाण्ड भारी होने की वजह से नहीं पहनती होगी."

मैंने कहा- "हौं जो अच्छा लगे वहीं पहनना सही है.... फिर मैंने अन् से कहा- "आपसे मिलने के बाद आपसे दूर होने का मन नहीं करता। पर आपको घर जाना है इसलिए चलिए आपको घर छोड़ आता हैं.." फिर मैंने उन दोनों को घर छोड़ दिया।
 
अगले दिन सुबह में जल्दी से उठ गया। तैयार होकर मैंने ऋतु को फोन किया।

ऋतु ने कहा- "हमलोग तैयार हैं."

में कार लेकर ऋतु के घर पहुँचा। वो दोनों तैयार थीं। दोनों ने अपना लगेज कार में रखा और हम सब चल पड़े। मैंने थोड़ी दर जाने के बाद कार रोकी और अनु से कहा- "तुम आगे आकर बैठो.."

मैंने मत का इशारा किया बो पीछे चली गई मैंने कार स्टार्ट करी।

अनु ने कहा- "कोई म्यूजिक चला दीजिए."

मैंने कहा- "कैसा म्यूजिक पसंद है?"

अनु ने कहा- कोई भी चलेगा।

मैंने कहा- कोई भी?

अनु ने कहा- "जी.."

मैंने कहा- मेरी पसंद का सुनोगी?

अनु ने कहा- हाँ जी।

मैंने पंजाबी गाने की सी.डी. चला दी।

अनु ने कहा- वाह... क्या पसंद है आपकी?

मैंने कहा- "थैक्स..."

फिर हम लोग बातें करते रहे मैंने बातों-बातों में अपना हाथ अनु की जाँघ पर रख दिया। अनु ने आज भी सलवार सूट पहना हुआ था। उसकी जाँघ पर हाथ रखा तो एहसास हुआ माल थोड़ा भारी है पर चिकना है। अनु ने मुझे देखा और स्माइल दी। मैं समझ गया लाइन साफ है। मैंने अपने हाथ से उसकी जाँघ को सहलाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे मेरा हाथ उसकी जाँघ में काफी ऊपर जहां से चूत का जोड़ शुरू हो जाता है वहां तक कर दिया अब अनु को कुछ-कुछ होने लगा, उसने अपनी दोनों जंगो को आपस में चिपका लिया।

मैंने कुछ कहा नहीं। मैं अपनी उंगलियों से उसको गरम करता रहा। फिर मैंने उसकी चूत पर हाथ रख दिया और अपने हाथ से उसकी जांघों को अलग कर दिया। उसने मुझे बड़ी चुदासी नजर से देखते हुए अपनी जांघों को अलग कर लिया।
 
मैंने कुछ कहा नहीं। मैं अपनी उंगलियों से उसको गरम करता रहा। फिर मैंने उसकी चूत पर हाथ रख दिया और अपने हाथ से उसकी जांघों को अलग कर दिया। उसने मुझे बड़ी चुदासी नजर से देखते हुए अपनी जांघों को अलग कर लिया।

मैंने फिर उसकी चूत पर हाथ फेरना शुरु कर दिया तो अन् ने अपनी आँखें बंद कर ली। मैंने देखा ऋतु को झपकी आ गई थी। मैंने अपना हाथ अनु के चेहरे पर फिराना शुरू कर दिया। मैंने अपनी उंगली उसके गाल से फेरते हुए उसके होंठों पर जाकर रोक दी। उसने मेरी उंगली को अपने मुँह में ले लिया और चसने लगी। मुझे उसकी ये अदा बड़ी पसंद आई। मैं समझ गया की ये मेरी उंगली को लण्ड समझकर चूस रही है, इसको लण्ड चूसने का मन कर रहा है।

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फिर मैंने अपने लण्ड पर उसका हाथ रख दिया। उसका हाथ रखते ही लण्ड ने झटके मारने शुरू कर दिए। अनु ने मेरे लौड़े को सहलाना शुरु कर दिया और मुझे चुदासी नजर से देखा। मैंने उसको फ्लाइंग किस किया। उसने भी जवाब दिया। वो मेरे लण्ड पर हाथ फेर रही थी बल्कि , समझ लो की वो उसका साइज नाप रही थी।

मैंने उसको धीरे से कहा- "बाहर निकाल क्या?"

अनु ने मुझे तिरछी नजर से देखा और अपना सर हिला दिया।

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मैंने अपनी जिप खोली और लण्ड बाहर निकाल दिया। अब मेरा नंगा लौड़ा अनु के हाथ में था। वो उसको बड़े ही प्यार से ऊपर-नीचे कर रही थी। उसका हाथ मेरे सुपाड़े में नीचं तक फिसल रहा था। मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर कस दिया, और उसके हाथ को जोर-जोर से ऊपर-नीचे करने लगा। दो मिनट में मेरा माल निकल गया। अन् के हाथ मेरे माल से लिसलिसे हो गये। मैंने उसको देखा तो वा मुझे शिकायत भरी नजरों से देखने लगी।

मैंने उसको शरारत से देखते हुए कहा- "इसे चाट के देखो, क्रीम का टेस्ट आएगा..."

अनु ने मुँह बिचकाया।

मैंने उसको कहा- "एक बार ट्राई तो करो। अच्छा ना लगे तो फिर कहना..."

अन् ने हिचकते हए अपनी उंगली पर जीभ रखी और फिर पता नहीं उसको क्या हआ उसने अपना पूरा हाथ ऐसे चाटना शुरू किया की जब तक सब चाट नहीं लिया रूकी नहीं। मैं उसको देखता रहा। बो ऐसे लग रही थी जैसे की वो सच में कीम चाट रही हो। अनु ने मुझे देखा तो मैं मुश्कुराया और वो शर्मा गईं।

मैंने कहा- कैसा लगा?

अनु ने कुछ नहीं कहा।

मैंने कहा- "मुँह से नहीं बताना है तो इशारे में बता दो."

अनु ने मुझे देखा।

मैंने उसको कहा- "चलो हों या ना में बता दो..."

अनु ने सिर हिला दिया। मैं समझ गया इसको पसंद आया है।

इतने में ऋतु की नींद खुल गई वो बोली- "कहां तक आ गये। अभी कितनी दूर है?"

मैंने कहा- "अभी 25-30 किलोमीटर है..."

ऋतु बोली- "अच्छा तो मैं सो रही हैं, उठा देना जब आ जाए.." और बो सो गई।

मैंने अनु से कहा- "तुमने तो मेरी कीम का टेस्ट ले लिया अब मुझे अपनी क्रीम का स्वाद कब चखाओगी?"

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