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Adultery कीमत वसूल

फिर मैंने उसको कहा- "अब घर जाओ, देर हो जाएगी.."

उसने कहा- "सर प्लीज... आप हमको इस परेशानी से बचा लीजिए। आप जो कहोगे में करोगी। आपकी हर बात माऊँगी। आपको कोई भी शिकायत नहीं मिलेंगी..."

मैं जानता था की अब उसके पास और कोई रास्ता नहीं है। वो जानती है की मैं हेल्प की कीमत उसकी कुंवारी चूत को फाड़कर वसूल करगा। मैंने कहा- "चिंता मत करो। मैं हैं ना..."

वो चली गई। ऋतु के जाने के बाद मैं कुछ देर सोचता रहा। अब मेरे दिमाग में कुछ और ही नया प्लान चलने लगा था। मैं अब ये तो जान ही चुका था की ऋतु मेरे आगे पूरी तरह से समर्पण कर चुकी है। जब मर्जी उसको चोद सकता है। पर अब मैं उसको ऐसे नहीं चोदना चाहता था।

मैंने तिवारी को फोन लगाया। तिवारी वो बंदा था जिसने ऋतु की मम्मी को लोन दिया था। मैंने उसको कहा की मुझे आज रात को विक्टर बार में मिलो। वो बार मेरे दोस्त का ही है जिसमें मैं कभी-कभी चला जाता हैं। मैं ठीक 9:00 बजे बार में पहुँचा, तो तिवारी वहां पहले से बैठा था। मुझे देखकर तिवारी ने कहा- "आज अचानक से मुझे कैसे याद करा आपने?"

मैंने तिवारी से कहा- "पहले एक-एक पेंग पीते हैं। फिर बात करते हैं..."

तिवारी ने मेरे पेग में आइस डालते हुए कहा- "सरजी, आप मुझे जल्दी से बताओं की क्या बात है। जब में

आपका फोन आया है मैं सोच में पड़ा है."

मैंने मुश्कुराते हुए कहा "तिवारी तुमने किसी रमेश नाम के आदमी को कोई लोन दिया है?"

सुनते ही तिवारी बोला- "हाँ सरजी दिया है। पर आप में क्यों पूछ रहे हो?"

मैंने तिवारी से कहा- "तुमको इंटरस्ट मिल रहा है या नहीं?

तिवारी ने गली देते हुए कहा- "उसकी तो मैं अब माँ चोदकर ही पैसा वसूल करेंगा.."

मैंने कहा- "शांत बैठकर बात करो, गुस्सा मत दिखाओ। मैं तेरा फैसला करवा सकता है."

सुनकर तिवारी उल्लू की तरह मुझे देखने लगा।

मैंने मुश्कुराकर कहा- "पहले मुझे सब बात सच-सच बता। तूने उसको पैसा क्या देखकर दिया था?"

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तिवारी बोला "सर, मैं उस छिनाल की बातों में आ गया था..."

मैं समझा गया की वो ऋतु की माँ की बात कर रहा है। मैंने उससे अंजान बनते हए कहा- "कॉन छिनाल?"

तिवारी बोला. "उसकी रमेश की बीबी। शोभा साली अपनी चूचियां दिखाकर मेरे से पैसा ले गई और कहा की हर

महीने टाइम पर इंटरेस्ट देती रहेगी..."

मैंने भी सोचा- "इसकी दो जवान लड़कियां हैं, साली मुझसे क्या धोखा करेंगी? मैं उसकी लड़कियों को चोदकर पैमा ले लँगा.."

मेरी समझ में अब पूरा माजरा आ गया था। मैंने तिवारी को अपनी जेब से एक लाख का पैकेट निकालकर दिया

और कहा- "मैं अब जैसा बोलता है वैसा ही करता जा."

 
मेरी समझ में अब पूरा माजरा आ गया था। मैंने तिवारी को अपनी जेब से एक लाख का पैकेट निकालकर दिया

और कहा- "मैं अब जैसा बोलता है वैसा ही करता जा."

तिवारी कभी मुझे और कभी पैसों को देख रहा था। उसकी समझ में नहीं आया की मैं क्या कह रहा हैं।

मैंने उसको कहा- "अपना दिमाग ज्यादा मत लगा। मेरी बात सुन। त कल ही उसका चेक बैंक में लगा दें..."

तिवारी बोला, "मैंने तो उसको 7 दिन का टाइम दिया है..."

मैंने कहा- "उल्लू के पट्टे तुझें पैसा मैं अभी दे रहा हूँ। तू 7 दिन क्या झक मरवाता रहेगा?"

तिवारी ने मुझसे कहा- "सर जी आप इन जैसे फकले लोगों के चक्कर में कहा से आ गये, माजरा क्या है?"

मैंने कहा- पहले कल चेक बैंक में लगवा, और जब तक मैं तुझे फोन नहीं कर त मेरे आफिस नहीं आना। तू मुझे जानता भी नहीं है। ये बात शोभा को नहीं बोलोगे समझा?"

तिवारी ने ही में मंडी हिला दी।

मैं वहां से घर आ गया। अगले दिन ऋतु आफिस में गुमसुम सी बैठी थी। मैंने उसको अपने केबिन में बुलाया

और पूछा- "क्या बात है?"

ऋत ने कहा- "सर, घर में सब उसी बात से परेशान हैं। इसलिए थोड़ा सा मूड खराब है और कोई बात नहीं.." फिर उसने कहा- "सर आप हमारी हेल्प करेंगे ना?"

मैंने कहा- "मैं तुमसे बाद में बात करता हैं। तुम अभी रूको जरा..." और मैंने पूरा दिन ऋतु को यह कहकर टाल दिया की मैं कुछ ना कुछ करता हूँ।

अगले दिन मैं आफिस में गया ही नहीं, मुझे कुछ काम था। ।

उसके अगले दिन में आफिस में देर से गया। तब तिवारी का मेरे पास फोन आया की शोभा का चेक बाउन्स हो

गया है।

मैंने उसको कहा की आज ही उसको लीगल नोटिस भेज दे और कल तक का टाइम दे दे..."

मैंने उस दिन भी ऋत् को कोई पाजिटिव जवाब नहीं दिया। बस उसको यही कहा की में कुछ ना कुछ करता है। टाइम बीत रहा था, ऋतु की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। मुझे अंजू से पता चला की ऋतु के घर से उसकी मोम का भी कई बार फोन आया था। मैं तो बस अब कल का इंतजार कर रहा था।

और अगले दिन जब नाटिस शोभा को मिली तो उसका बुरा हाल हो गया। वो सीधा मेरे आफिस में आ गई। उसकी हालत ऐसी हो रही थी जैसे उसके जिश्म में खून ही नहीं हो, और था भी कुछ ऐसा ही।

मैंने कहा- क्या हुआ?

वो बोली- "तिवारी ने 7 दिन का टाइम दिया था। पर उसने तो 3 दिन में ही नोटिस भेज दिया। अब क्या होगा?" वो डर से काँप रही थी।

ऋतु ने मेरी तरफ देखते हुए कहा- "सर अब क्या होगा?"

मैंने कहा- "मैं तिवारी से बात करता हूँ... मैंने तिवारी को फोन लगाया।

तिवारी ने जो कहना था वो मैं उसको पहले ही समझा चुका था। मैंने जानबूझ कर सेल का स्पीकर आन कर दिया था, ताकी शोभा को सब सुनाई दे की क्या बात हो रही है? तिवारी ने मेरा फोन उठाकर मुझसे अंजान बनते हए कड़क आवाज में बात की। उसने मेरी बात सुनते ही मुझं साफ-साफ बोल दिया की मुझे पूरा पैसा अगर आज ही दे दो तब मैं केस वापिस ले सकता है।

मैंने उसको कहा- "एकदम से इतनी बड़ी रकम का इंतजाम कैसे हो पाएगा? प्लीज... तुम हमको कुछ दिन की मोहलत दे दो। हम पैसे का इंतजाम जल्दी कर लेंगे..."

उसने साफ-साफ मना कर दिया। तिवारी ने कहा- "मैं आज के बाद किसी भी कीमत पर केस वापिस नहीं लेगा। में तो अब शोभा को जेल भिजवाकर ही रहँगा.."

मैंने कहा- "हम तुमको अभी दुबारा फोन करते हैं...

फिर मैंने शोभा से कहा- "देखिए तिवारी कुछ नहीं सुन रहा। कुछ भी करके इसको आज ही पैसा देना होगा,

अगर नहीं दिया तो कल पोलिस आपके घर आ जाएगी.." कहकर मैंने शोभा की तरफ गौर से देखा।

शोभा ने मुझसे बिल्कुल रोते हुए कहा- “सर, हमारे पास तो काई भी इंतजाम नहीं है। हम तो सिर्फ आपकी हेल्प से ही कुछ कर सकते हैं.

मैंने ऋतु को कहा- "तुम जरा बाहर जाओ। मुझे अकेले में कुछ बात करनी है."

ऋतु बाहर चली गई।

उसके जाने के बाद मैंने शोभा से कहा- "देखिए अगर आप इस प्राब्लम से निकलना चाहते हो तो आपको मैं जैसा कह बैंसा करना होगा..."

शोभा ने कहा- "आप जो भी कहा हम करने को तैयार हैं."

 
मैंने शोभा की आँखों में आँखें डालकर कहा- "मैं आपके लोन का पैसा आज ही चुका ,गा, और तिवारी से आज ही केस भी वापिस करवा दूंगा। लेकिन इसके बदले में में ऋतु को अपनी रखैल बनाकर रखूगा..."

ये सुनते ही शोभा ने मुझे गुस्से में देखा और जोर से चीखते हुए कहा- "आप जानते भी हैं की आप कितनी घटिया बात कर रहे हैं....

मैंने कहा- "मैंने सिर्फ आपको आप्षन दिया है मानो या ना मानो आपकी मी..."

शोभा बोली- "हम लोग मजबूर हैं। पर है इज्ज़त दार लोग हैं। आपसे ये उम्मीद नहीं थी की आप हमारी मजबूरी का ऐसा नाजायज फायदा उठा रहे हो। आपने इतनी घटिया बात सोची भी कैसे?"

मैंने कहा- "शोभा जी आपकी इज्जत की धज्जियां उड़ने में अब देर नहीं है। अगर तिवारी को पैसा नहीं दिया तो कल आपका क्या होगा सोच लो। मैं सिर्फ इसी शर्त पर आपकी हेल्प कर सकता हैं। अगर आप चाहती हो की

आपकी इज्ज़त का जनाजा नहीं निकले और आप जेल नहीं जाना चाहती तो आप मेरी बात मान लो। वरना मैं आपकी कोई हेल्प नहीं करेंगा। एक बात और याद रखना की अगर तिवारी ने आपको एक बार जेल में भिजवा दिया तो आपकी बेटियां तो वैसे ही सड़क पर आ जाएंगी। फिर तो उनका कोई भी आसानी से नोंच सकता है। तब आप क्या कर लोगी?"

मेरी बात सुनकर शोभा को लगा की अब उसके पास कोई और रास्ता नहीं है। वो अपना सिर झुका कर बैठी रही।

मैंने शोभा को कहा- "आप ऋतु की चिंता मत करो, ऋतु पहले से ही इस बात के लिए राजी है.."

शोभा ने बाजी में मुझे देखा और बोली- "क्या आपने उसको राजी कर लिया है?"

मैंने मुश्कुराते हुए कहा "यकीन नहीं तो पूछ लो अत से। लेकिन मैं सब काम आपकी मज़ी से करना चाहता है। में ऋतु के साथ अपनी सुहागरात मनाना चाहता हैं वो भी आपके घर पर..."

शोभा फिर से चौक गई और तिलमिलते हए बोली- "तो आप क्या चाहते हो?"

मैंने कहा- "मैं ऋतु को उसके ही घर में नई नवेली दुल्हन के लिबास में चोदूंगा। आपको मेरी सुहागरात का इंतजाम करना होगा."

शोभा की हालत तो ऐसी हो गई जैसे काटो तो खून नहीं। उसकी जबान सूखने लगी। वो बोली- "हमारे घर पर कैसे होगा ये सब? वहां तो ऋतु के पापा भी होंगे। और हम तो सिर्फ दो रूम के किराए के घर में रहते हैं। घर में एक जवान बेटी और है, कालोनी के लोग क्या कहेंगे। मैं शिल्पा (ऋतु की छोटी बहन) को क्या कहूँगी?"

मैंने कहा- "किसी को पता नहीं चलेगा। आप सिर्फ अपने पति को दो दिन के लिए सिटी से बाहर भेज दो। बाकी सब में संभाल लेंगा। मैं खुद यही चाहता था की शिल्पा को सब पता चलना चाहिये की मैं उसकी बहन को उसके ही घर में चोद रहा हैं, और उसकी माँ की मर्जी से। क्योंकी में उसको भी बाद में लाइन पर लाने की सोच रहा था..."

फिर शोभा ने कहा- "पहले आप तिवारी से बात कर लीजिए और हमको जेल जाने से बचा लीजिए। जैसा आप

कहोगे मैं वैसा ही करेंगी..."

 
मैंने कहा- "आज शाम तक आपका केस फाइनल हो जाएगा। बस आप अपने पति को कल सुबह ही भेज दो, पूरे दो दिन के लिए..."

शोभा को मैंने भेज दिया।

उसके जाने के बाद मैंने ऋतु को बुलाया और कहा- "कल हमारी सुहागरात है। तुम कल आफिस नहीं आओगी.."

ऋतु ने मुझे हैरानी से देखा। मैंने उसको पूरी बात समझा दी की उसकी मम्मी से मेरी बात हो गई है, और में उसके ही घर में उसको चादूँगा। मैंने ऋतु को एक ए.टी.एम. कार्ड दिया और कहा- "कल बदिया सी लाल साड़ी और जो भी कछ लेना हो खरीद लेना, और किसी बंदिया पालर में जाकर मेकप करवा लेना मेहन्दी याद से लगवा लेना। तुम मुझे कल दुल्हन के लिबास में दिखनी चाहिए हो। समझी या नहीं?"

ऋत् ने हाँ में सिर हिलाया और चली गई।

उसके जाने के बाद मुझे एक बात और याद आ गई। मैंने उसको फोन किया और कहा- "तुम पेटीकोट सफेद कलर का ही लेना..."

ऋतु बोली- "वो किसलिए?"

मैंने कहा- "वो तुमको कल पता चल जाएगा..."

में अगले दिन की प्लानिंग करने लगा। फिर मैंने तिवारी का फोन किया की तुरंत उस नोटिस का रेफ्यूज करवा दे और शाम तक शोभा को फोन करके बता देना की उसको अब इरने की कोई जरबत नहीं है। लोन का पैसा मिल गया है।

आज आफिस में काई और काम नहीं था, मैं घर जाने के लिए निकल पड़ा। शाम को जैसे ही तिवारी का फोन शोभा के पास आया।

शोभा ने मुझे तुरंत ही फोन करके कहा- "आपने जैसा कहा था वैसा ही हो गया.."

मैंने उसको कहा- "अब तुम भी वैसा ही करो जैसा मैंने कहा है...

वो बोली- "आपने जैसा कहा है वैसा ही होगा..."

और फिर अगले दिन सुबह शोभा ने अपने पति को बाहर भेज दिया। मैंने दोपहर में शोभा को फोन किया। मैंने पूछा- "ऋतु तैयार हो रही है या नहीं?"

तब उसने कहा- "अभी हम बाजार में है, यहां से सीधा पार्लर जाएंगे.."

मैंने कहा- "उसकी फुल बाडी बैक्स जरगर करवा देना.." बयाकी मुझे पता है की ऋतु की टांगों पर बाल हैं।

शोभा ने कहा- "ठीक है करवा दूंगी.."

फिर मैंने कहा- "मैं रात को 9:00 बजे तक आ जाऊँगा..."

5:00 बजे में आफिस में सीधा घर चला गया। मैं जाकर दो घंटे सो गया क्योंकी रात को जागरण करना था। लगभग 8:00 बजे में उठा और मैंने 15 मिनट शाबर लिया और तैयार होकर घर से निकला। मैंने कार में विस्की की बोतल रखी और सीधा शोभा के घर की ओर चल दिया। में अपने साथ विस्की इसीलिए ले गया था,

क्योंकी में चुदाई से पहले जरा मूड बनाना चाहता था। शोभा का घर आ गया। मैंने घर के पास कार लगा दी

और डोरबेल बजा दी। शोभा ने दरवाजा खोला। मैं घर के अंदर दाखिल हो गया।

शोभा ने मुझसे कहा- "बैठिए."

मैं सोफे पर बैठ गया। मैंने शोभा से कहा- "ऋतु किधर है?"

उसने कहा- "दूसरे रूम में तैयार होकर बैठी है..."

मेरे लण्ड में तनाब आजा शरन हो गया। मैंने कहा- "पहले मैं जरा ड्रिंक करेंगा। तम मेरे लिए ग्लास और ठंडे पानी का इंतजाम करो..."

शोभा उठकर जाने लगी तो मैंने कहा- "शिल्पा कहां है?"

शोभा में घबराते हुए कहा "जी वो ऋतु के पास बैठी है। मैं लेकर आती है..."

मैंने कहा- "तुम यही बैठा, शिल्पा को बुला लो.." फिर शोभा से कहा- "तुम्हारा पति कब वापिस आएगा?"

उसने कहा- "वो दो दिन बाद ही आएंगे.."

मैंने हम्म्म्म कहा, फिर मैं बोला- "शोभा तुम अभी घबराई हुई लग रही हो। रिलैक्स हो जाओ.."

शोभा ने अपने चेहरा पर फेक स्माइल लाते हुए कहा- "नहीं नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है.."

इतने में शोभा ने आवाज दी- "शिल्पा बैटा इधर आओ..."

उधर से आवाज आई- "जी मम्मी.." और शिल्पा रूम में आ गई।

 
मैंने शिल्पा को देखते हुए अपने लण्ड पर हाथ फेरा। शिल्पा ने मेरी इस हरकत को देख लिया और फिर उसने अपनी निगाहों को नीचे कर लिया। मैं अपनी नजरों से उसका एक्सरे कर रहा था। क्या माल था चिकना नाजुक जिश्म, बड़ी-बड़ी आँखें, पतली कमर बड़ी प्यारी सी लग रही थी। उसने ब्लू कलर की सलवार कमीज पहना हुआ था। उसकी चूचियां अभी छोटी-छोटी थीं। पर उभार साफ दिख रहा था। रंग गोरा, होंठ गुलाबी। कुल मिलाकर मस्त माल थी।

मैंने अपने लण्ड पर फिर से हाथ फेरते हए उससे कहा- "इधर आओ..."

वो मेरे पास आ गई।

मैंने उसको कहा- "तुम्हारा नाम क्या है?"

उसने कहा- "जी शिल्पा..."

मैंने उसको कहा- "शिल्पा जाओ जरा किचेन में एक ग्लास और ठंडा पानी लेकर आओ..."

वो बोली- "जी." और जाने लगी।

मैंने उसको पीछे से देखा तो उसकी चाल बड़ी सेक्सी थी। उसकी गाण्ड ऊपर-नीचे हो रही थी। उसकी गाण्ड को मटकता हुआ देखना मुझे अच्छा लग रहा था।

मैंने शोभा को कहा- "तुम्हारी छोटी लड़की भी बड़ी सुंदर है..."

शोभा मेरी बात का मतलब समझ गई, पर माकुरा के बोली- "हाँ जी..."

इतने में शिल्पा ग्लास और पानी लेकर आ गई। उसने टेबल पर रख दिया और जाने लगी।

मैंने उसको कहा- "रुको... जरा एक काम और कर दो। कोई नमकीन लेकर आओ..."

वो फिर से गईं। मैं उसके चूतड़ों को उठते गिरते देखता रहा। सच में उसकी गाण्ड बड़ी मस्त थी। मन कर रहा था की इसको अपनी गोद में बैठाकर इसके हाथों से जाम पियं। पर अभी उसका नम्बर नहीं था। इसलिये मैं मन को मार कर रह गया।

शोभा सब देख रही थी। मैं भी यही चाहता था की इसको सब पता चल जाए।

फिर शिल्पा नमकीन लेकर आई। मैंने तब तक पेंग बना लिया था। मैंने उसको जाने को कहा। फिर मैंने पंग को खतम किया और दूसरा पेंग बना लिया।

मैंने शोभा से कहा- "शिल्पा को भी कहीं जाब पर क्यों नहीं लगा देती। काम करेंगी तो कछ पैसा घर में आएगा..."

शोभा ने कहा- अभी वो पद रही है पढ़ाई खतम होने के बाद जाब करेंगी।

मैंने कहा- "तुम चिता मत करो। मैं इसकी जाच कहीं अच्छी जगहा लगवा दूंगा... फिर मैंने दूसरा पेग खतम किया और शोभा से कहा- "जरा ऋतु को जाकर देखा तैयार है ना?"

शोभा उठकर दूसरे रूम में गई। दो मिनट में वापिस आकर बोली- "वो बिल्कुल तैयार है."

में मन ही मन में मश्कुरा उठा की ये अपनी लड़की को आज अपने सामने ही चुदवाते हुए देखेंगी। मैं ऋतु के रूम में गया। वहां जाते ही मुझे गुलाब के फूलों की महक महसूस होने लगी। मुझे देखते ही ऋतु पलंग पर । सिमट के बैठ गई। मैं ऋतु के पास जाकर बैठ गया और उसको बोला रिलैक्स हो जाओ, स्माइल लाओं अपने चेहरे पर मैंने उसका चेहरा अपने हाथ से ऊपर उठाया जैसे कोई चाँद हो ऐसे लग रही थी। मत वैसे भी सुंदर श्री पर दुल्हन के लिबास में उसकी खबसूरती गजब की लग रही थी। फिर मैंने उसके हाथों को अपने हाथों में लिया मेहन्दी वाले कामल मुलायम हाथों का स्पर्श पातं ही लण्ड में हलचल सी मचने लगी।

मैंने अत को कहा- "तुम आज बड़ी प्यारी लग रही हो..."

उसने शर्माकर अपना जवाब दिया।

मैंने ऋतु से कहा- "तुमने पेटीकोट किस कलर का पहना है?"

उसने कहा- "जी सफेद ही पहना है...

मैंने कहा- "हम्म्म्म ..." फिर मैंने ऋतु के होंठों पर अपने होंठों रख दिए होंठ चसते हुए मैंने अपना एक हाथ उसकी कमर में डाल दिया। उसकी कमर पर हाथ फेरा तो उसके पूरे जिश्म में कंपन होने लगी।

मैंने उसको कहा- "ऋतु मैं तुमको आज तुम्हारे ही घर में दुल्हन बनाकर चोदूंगा। कैसा लग रहा है?"

उसने कोई जवाब नहीं दिया।

सच में ये सब सोचने में कितना अजीब लग रहा है। पर नियति ने ऐसा करके दिखा दिया। मैंने ऋतु को कहा "मुझे अब अपना पति समझ कर मेरे से प्यार किया करो। मुझे में महसूस होना चाहिए की तुम मुझे अपने पति जैसा प्यार कर रही हो..'

उसने सिर हिला दिया।

 
मैंने उसको कहा- "ऋतु मैं तुमको आज तुम्हारे ही घर में दुल्हन बनाकर चोदूंगा। कैसा लग रहा है?"

उसने कोई जवाब नहीं दिया।

सच में ये सब सोचने में कितना अजीब लग रहा है। पर नियति ने ऐसा करके दिखा दिया। मैंने ऋतु को कहा "मुझे अब अपना पति समझ कर मेरे से प्यार किया करो। मुझे में महसूस होना चाहिए की तुम मुझे अपने पति जैसा प्यार कर रही हो..'

उसने सिर हिला दिया।

फिर मैंने ऋतु को अपनी गोद में खींच लिया और उसकी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा। ऋतु में अपनी आँख बंद कर ली। मैंने उसके बलाउज के बटन खोल दिए। उसकी रेड ब्रा को मैंने बिना हक खोले ऊपर कर दिया। अब ऋतु के दोनों कबूतर मेरे सामने नंगे थे। मैंने उसकी एक चूची को मुँह में ले लिया और दूसरी को हाथ से सहलाने लगा।

ऋतु की धड़कन तेज हो गई थी। मैंने अब उसकी दूसरी चूची को मुँह में ले लिया और उसकी पहली चूची को जोर से दबाया। ऋतु ने एक सिसकी सी ली। अबकी बार मैंने थोड़ा सा और जोर से दबाया। अब उसकी सिसकी में दर्द पैदा हो गया। अब मैंने ऋत को पलंग से उतार कर नीचे खड़ा होने को कहा। वो नीचे आकर खड़ी हो गई। मैंने उसके ब्लाउज को उसके जिएम से अलग कर दिया। फिर मैंने उसकी साड़ी को खोल दिया। अब त मेरे सामने सिर्फ सफेद पेटीकोट में खड़ी थी।

मैंने उसको कहा- "अपने दोनों हाथ अपने सिर के पीछे रख लो."

ऋतु में चुपचाप रख लिए। मैंने अब उसके पेटीकोट को ऊपर उठा दिया और उसके पेटीकोट के नाड़े में उसका पेंटीकोट मोड़कर फैंसा दिया। फिर मैंने ऋतु की पैटी के ऊपर से उसकी चूत को हल्का सा सहलाया। उसकी टांगों की कंपन में साफ देख रहा था। मैंने उसकी दोनों जांघों को अपने हाथ से पकड़कर घुमा दिया। अब अत की गाण्ड मेरे सामने थी। उसकी लाल रंग की कच्छी में उसके गोरे-गोरे चूतड़ बड़े प्यारे लग रहे थे। फिर मैंने उसकी कच्छी के इलास्टिक में उंगली डालकर कच्छी को आधा नीचे किया। उसके चूतड़ों की दरार में मैंने अपनी उंगली फिरानी शुरू कर दी। चिकने चूतड़ों में उंगली फिसली जा रही थी।

मैंने अब उसकी पेंटी को थोड़ा और उत्तार दिया उसके चूतड़ों को कच्छी से बाहर निकाल दिया और उसके चूतड़ों पर किस करा। फिर मैंने पी से ही उसकी चत के मुँह पर उंगली रख दी। उसकी चूत में जैसे आग निकल रही थी। मैंने अपनी उंगली को जरा सा अंदर डाला, तो वो सीईईई... कर उठी, मैंने अब उसकी पूरी पैंटी उतार दी।

मैंने ऋतु से कहा- "ऋतु अब तुम मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसा.."

ऋतु ने अपनी जीभ से मेरे लौड़े को चाटना शुरू कर दिया। मैं पलंग पर लेट गया और मैंने ऋतु का अपने पेट पर बैठा लिया। फिर मैंने ऋतु की चूत अपने मुँह के पास कर ली। अब हम दोनों 69 पोज में थे। ऋतु की चूत आज बिल्कुल चिकनी थी। मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ रख दी। बड़ी मस्त सी महक मेरी सांसों में समा गई। ऋतु मेरा लौड़ा अब अपने मुँह में लेकर चूस रही थी। मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से रगड़ रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने ऋत को सीधा लिटा दिया और उसकी टांगों के बीच में बैठ गया। मेरा लौड़ा अब पूरी तरह टाइट था और चूत में जाने को बेकरार था।

मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा ऋतु की कुँवारी चूत के छोटे से छेद पर रख दिया। ऋतु अब लंबी-लंबी साँसे लेने लगी थी। मैंने अपने लौड़े को जरा सा जोर से दबाया तो थोड़ा सा लण्ड उसकी चूत में घुसा। ऋतु के चेहरे पर दर्द दिखाई दे रहा था। मैं उसको अभी और तड़पा के चोदना चाहता था। मैंने उसकी चूत में अपना लण्ड थोड़ा

सा और घुसा दिया, तो उसकी हल्की सी चीख निकल गईं।

अब ऋतु की आँखों में आँसू आने लगे। मैंने अबकी बार अपना लौड़ा चूत से सटाकर कसकर शाट मारा, तो मेरा लण्ड उसकी कुँवारी चूत की झिल्ली को चीरता हुआ आधा अंदर चला गया। ऋतु ने जोर से एक चीख मारी। मैंने भी उसको रोका नहीं। क्योंकी में यही चाहता था की ऋतु की चीख उसकी माँ को सुनाई देनी चाहिए। मैं जानता था की वो साथ वाले रूम में होगी।

 
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