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Adultery कीमत वसूल

मैंने उसकी ब्रा का हक खोलकर उसकी चूचियों को आजाद कर दिया। मैंने भी अपनी जीन्स और शर्ट उतार दी। ऋतु ने अपनी पाजामी का नाड़ा खोलकर अपनी पाजामी को उतार दिया। अब वो मेरे सामने सिर्फ पैटी में थी।

मैंने उसको कहा- "इसको भी उतार दो...'

ऋतु ने बड़ी अदा से कहा- "इसको आप खुद उतार लो."

मैंने उसकी पैटी के एलास्टिक में अपनी उंगली डालकर पैटी को नीचे कर दिया, तो ऋतु की चूत मेरे सामने नंगी थी। मैंने ऋतु की चूत पर उंगली फेरते हुए कहा- "तुम जरा अपनी दोनों टाँगों को खोल लो.."

उसने खोल दी, तो मैंने उसकी चूत की दोनों फांकों को फैलाकर उसकी चूत पर अपनी जीभ रख दी। ऋतु की चूत की महक मेरी सांसों में समा गईं। मैंने आज तक ऋतु की चूत जैसी महक किसी और चूत में नहीं महसूस की थी। ऋतु की चूत में कुछ अलग ही महक है। मैं कुछ देर तक ऋतु की चूत पर अपनी जीभ फेरता रहा। फिर मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ को जरा सा घुसा दिया। ऐसा करते ही ऋतु में अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत पर दबा दिया और सीईड... सीईईई की आवाजें करने लगी। उसको चूत चटवाने में कितना मजा आ रहा होगा मैं समझ सकता था।

फिर मैंने ऋतु में कहा "अब मेरा लण्ड को गुस्सा आ गया है."

ऋतु ने कहा- "इसको तो मैं अभी खुश कर दूँगी.."

फिर ऋत में मेरे लण्ड को अपने होंठों पर रखकर उसको हल्के-हल्के अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। वो मेरे सुपाड़े को अपने मुँह में दबाकर जीभ से छूने लगी। दिनों दि ऋतु का लण्ड चूसने का तरीका मस्त होता जा रहा था। अब वो नये-नये तरीकों से लण्ड को चूसती श्री। सच कहूँ तो उसको लण्ड चुसवाने में मुझे चुदाई से ज्यादा मजा आता था। क्योंकी ऋतु लण्ड पूरे दिल से चूसती थी और चूसते वक़्त मुझे ऐसे देखती थी जैसे बिल्ली मलाई चाट रही हो। ऋतु जब लण्ड चूसती है तब वो लण्ड को आइसक्रीम जैसे चाटती है, पूरा गीला कर देती हैं। अब मेरा लण्ड ऋतु के गले तक जा रहा था।

मैंने ऋतु से कहा- "अब तुम सोफे पर घोड़ी बन जाओ..."

उसको घोड़ी बनाकर मैंने उसकी चूत में लण्ड डाला। उसकी चूत में मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लण्ड गरम पानी में हो। मैं अत की चूत पर कस-कस के शाट मार रहा था, और मैंने ऋतु की दोनों चूचियों को अपने हाथों में पकड़ रखा था। बल्कि ऐसा समझो की मैं उसकी चूची को पकड़कर उसे आगे पीछे करके चोद रहा था। ऋत् भी मुझे पूरा सहयोग कर रही थी। फिर जोश बढ़ता गया और मेरा माल ऋतु की चूत में झड़ गया। मैंने अपना लण्ड ऋतु की चूत से निकाल लिया और सोफे पर बैठ गया।

मैंने ऋतु से कहा- "यहां कोई कपड़ा तो है नहीं, लण्ड कैसे साफ करं?"

ऋतु ने हँसते हुए कहा- "मेरे राजा जी आप चिंता मत करो.." फिर ऋतु में अपनी पैटी से मेरा लण्ड पोंक दिया।

उसकी इस हरकत से मेरे झड़े हुए लण्ड में भी जोश पैदा हो गया। ऋतु ने अपनी चूत भी अपनी पैटी में साफ की और पेंटी को अपने बैग में रख लिया।

मैंने कहा- "इसको कहीं फेंक देना.."

 
ऋतु ने कहा- "मेरे पास इतनी ज्यादा पैटी नहीं है.".

मैंने उसको कहा- "कल मैं तुमको शापिंग करवाने ले चलूँगा..."

सुनकर ऋतु खुश हो गई, और बोली- "सोच लीजिए में खूब सारी शापिंग करेंगी.."

मैंने कहा- "जब तक दिल ना भरे कर लेना... फिर मत चली गई।

ऋतु के जाने के बाद अंज मेरे केबिन में आई और बोली- "सर, आजकल आप सब काम ऋतु से ही करवाते हैं, मुझे कोई काम नहीं देते.."

मैंने मन ही मन सोचा की इसको क्या पता की मैं उससे क्या काम लेता हूँ। फिर मैंने अंजू से कहा- "देखो त अभी नई है। इसलिए मैं उसको सब काम समझा रहा हैं.....

अंजू के चेहरे पर जलन का भाव आ गया। मैंने कुछ कहा नहीं। पर साफ पता लग रहा था की अत को मेरे साथ ज्यादा मिक्सप होते देखकर अंजू को जलन हो रही है। मैं भी तो यही चाहता था।

फिर मैंने अंज से कहा- "मैं भी अब जा रहा है..." और मैं आफिस से निकल गया।

 
घर जाकर मुझे आज बड़ा अजीब सा लग रहा था। क्योंकी दो दिन जो मस्ती में गुजरे थे, और आज कितना अकेलापन लग रहा था। मैंने विस्की का सहारा लिया और तीन-चार पेग लगाकर सो गया। अगले दिन मैं ऋतु को शापिंग करवाने ले गया। मैंने उसको दिल से शापिंग करवाई। अत ने कभी इतने बड़े शोरूम में शापिंग नहीं की थी।

उसका प्राइस दिखा-दिखाकर शापिंग करवाते हुए मैं बोला- "तुम मेरे साथ आई हा घबराओ नहीं.."

फिर भी उसने ज्यादा कुछ नहीं लिया। तीन-चार ड्रेस ही ली।

मैंने अत से कहा- "अपने लिए ब्रा पैटी भी तो ले लो..."

सुनते ही वो शर्मा गई। मैं उसको शाप में ले गया। वहां मैंने उसको लेटेस्ट स्टाइल की एक दर्जन ब्रा-पैंटी लेकर दी। मैंने ऋतु को उसके घर के बाहर ही छोड़ दिया और मैं वापस आ गया। इसी तरह दिन बीत रहें थे। मैं कभी आफिस में, कभी अपने घर लेजाकर ऋत का आफिस टाइम में चोद लेता था। पर वो दो रातें, जो मैंने ऋत के घर बिताई थी उनका मजा कुछ और ही था।

फिर एक दिन ऋतु आफिस में ही थी की शोभा का फोन आया की अन (ऋतु की बड़ी बहन) का बेटा हुआ है। हमको आज ही वहां जाना होगा। तू आफिस से छुट्टी लेकर आ जा।

ऋतु ने मुझे बेमन से कहा- "सर में जाऊँ क्या?"

मुझे सब बात पता लग गई थी। मैंने अत् को कहा- "क्या हआ, उदास क्यों हो रही हो?"

ऋतु बोली- "मेरा जाने का मन नहीं कर रहा है....

मैंने उसको कहा- "तुम कोई बहाना बनाकर देख लो."

ऋतु घर चली गई। रात को करीब 8:00 बजे ऋतु का फोन आया- "आप मेरे घर आ जाओ.."

मैंने कहा- "तुम वहां नहीं गई?"

ऋतु ने कहा- "पहले आप आ तो जाओ.."

में फटाफट ऋतु के घर पहुंचा। ऋतु मुझसे छिपट गई। मैंने कहा- "तुम क्यों नहीं गई?"

ऋतु बोली- "मैंने घर आकर मम्मी से कहा- "मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही। कहीं रास्ते में ज्यादा खराब ना हो जाए.

मम्मी ने कहा- "फिर तू घर ही रुक जा। हम चले जाते है.."

मैंने हँसते हुए कहा- "इतना नाटक किसलिए किया?"

ऋतु बोली- "आपके साथ पूरी रात मस्ती करने के लिए."

मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया और गाद में उठाकर अंदर ले गया। मैंने ऋतु को बैंड पर लेजाकर लिटा दिया और मैं भी उसके ऊपर लेट गया। मैंने ऋतु से कहा- "जान सच में तुमने आज मुझे खुश कर दिया है."

मत ने मेरे हाथ को चूमते हए कहा- "आपको छोड़कर जाने का मन नहीं कर रहा था सा कैसे जाती?"

मैंने ऋतु से कहा- "तुमने मुझे आज जो साइज दिया है वो मैं जीवन भर याद र गा."

ऋतु बोली- "मुझे नहीं पता था की आप इतनी जल्दी से आ जाओंगे में तो नहाने जा रही थी। अब अगर आप कहाँ तो मैं नहाने जाऊँ..."

मैंने उसको कहा- "मैं भी तुम्हारे साथ चलता है दोनों एक साथ नहाते हैं...
 
ऋत ने शरारत भरी आवाज से कहा- "मैं जानती थी आप ऐसे ही कहोगे.." फिर ऋतु ने अपने सब कपड़े उतार दिए और मुझसे कहा- "आप क्या कपड़ों में नहाते हो?"

मैंने भी हँसते हुए अपने सच कपड़े उतार दिए। हम दोनों नंगे थे।

ऋतु ने मुझसे कहा- "मेरे प्यारे पिया जी, अब मुझे अपनी गोदी में उठाकर बाथरुम तक के चलो.."

मैं ऋतु के मुँह से ये सुनकर दंग भी हो गया और खुश भी मैंने कहा- "फिर से कहो.."

ऋतु ने अबकी बार मेरे गले में अपनी बाहों को डालकर मेरी आँखों में देखते हए कहा- "पियाजी मुझे बाथरूम में

ले चलिए ना..

मैंने उसको चमते हए अपनी गोद में उठा लिया हम बाथरूम में आ गये। वहां मैंने ऋत को शावर के नीचे खड़ा कर दिया। शाबर से ठंडा-ठंडा पानी उसके जिम को भिगोने लगा। ऋतु ने मुझे अपने जिम से चिपका लिया। हम दोनों शाबर के नीचे खड़े हए होंठों पे होंठ रखकर शावर ले रहे थे। मेरे दोनों हाथ ऋतु के चूतड़ों पर थे और उसके मेरी कमर पर। मैं हल्के-हल्के नीचे झुकता गया और अब मेरा मुँह ऋतु की चूत के पास था। मैंने अत की चत पर नीचे से ऊपर तक अपनी जीभ फिरा दी।

ऋतु में अपनी जांघों को सिकोड़ लिया। मैंने ऋतु की दोनों जांघों को अपने हाथ से चौड़ा किया और फिर से उसकी चत पर मैंह लगा दिया। ऋत ने मादक सिसकियां लेनी शरू कर दी। मैं इतने में कहां मान जाता। मैंने अत को घमा दिया। अब उसकी गाण्ड मेरे सामने थी। मैंने ऋत की गाण्ड पर एक काट लिया ऋत ने उद्दई की आवाज निकाली। मैंने अब उसके दूसरे चूतड़ पर हल्के से काटा।

ऋतु ने फिर से- "उईईई आह्ह..." किया।

मैंने ऋतु को कहा- "जान तुम्हारी गाण्ड बड़ी मस्त है."

ऋतु भी आज पूरे मूड में थी। वो मुझसे बोली- "आपका लण्ड भी कितना मस्त है.."

मैंने कहा- "मेरे लण्ड का क्या करोगी?"

उसने कहा- "देखते जाइए...' कहकर उसने मेरे लण्ड पर साबुन लगा दिया और फिर मेरे लण्ड को रगड़-रगड़कर धोने लगी।

अब मेरा लण्ड बिल्कुल खड़ा हो गया था।

ऋतु ने अपना मुँह मेरे लण्ड पा रखा और बोली- "आप मेरे मुँह में अपना लण्ड जितना डाल सकते हैं डाल दीजिए...

मैंने कहा- "पागल हो क्या?"

ऋत बोली- "आप डालिए तो..."

मैंने उसके मुँह में अपना लण्ड आधा डाल दिया और उसके मुँह में धक्के मारने लगा। धीरे-धीरे मेरा लण्ड ऋतु के गले तक जाने लगा।
 
ऋतु ने मेरे लण्ड को मह से निकाला और कहा- "और डालिए.."

मैने अबकी बार ऋत का सिर पकड़कर अपना लण्ड आधे से ज्यादा उसके मुँह में डाल दिया। मुझे एहसास हो गया की मेरा लण्ड उसके गले में चला गया है, तो मैंने लण्ड को बाहर निकाल लिया।

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ऋतु ने मेरी तरफ प्यार से देखा और कहा "मैं अब आपका लण्ड अपने मुँह में कितना ले लेती हैं देखा."

मैंने कहा- "हाँ, पहले तो सिर्फ जरा सा ही लेती थी.." फिर ऋतु के मुँह को चूत बनाकर मैं उसके मुँह को चोदने लगा। थोड़ी देर में मेरा लौड़ा झड़ गया।

ऋतु में मेरा सारा माल पी लिया।

मैंने ऋतु से कहा- "मुझे सूसू आया है..."

ऋतु ने कहा- "रुकिये, मैं आपको सूसू करवाती हूँ..."

में हैरानी से ऋतु को देखने लगा। ऋतु ने मेरे लण्ड को अपने मुंह में ले लिया। अब मेरा लण्ड उसके मुंह में ऐसे था जैसे की मुँह में कोई चीज पकड़कर कोई चलता है।

अतु ने कहा- "अब आप सूसू करिए.."

मैंने आज तक ऐसा कभी ना देखा ना सुना था। मैंने जोर लगाया तो मेरे सस निकालने लगा। ऋतु को ये आइडिया कहां से आया, मैं समझ नहीं पाया। पर जो भी था गजब का था।

सूस करने के बाद मैंने ऋतु से कहा- "पानी में रहने से भूख लगने लगी है.." फिर मैंने ऋतु से कहा- "तुमने खाना खा लिया बया?"

अत ने ना में सर हिला दिया। हम बाथरूम से बाहर आ गये।

मैंने कहा- "मैं बाहर से कुछ ले आता हूँ.."

ऋतु ने कहा- "नहीं, मैं आपको अब कहीं नहीं जाने दूँगी। आप मुझे बताओं आपको क्या खाना है, बना देती हूँ.."

मैंने कहा- "पहले तौलिया तो दो.."

ऋतु बोली- "नहीं जी... आपको सुबह तक ऐसे ही रहना होगा.."

मने हँसते हुए कहा- "और तुम?

बा बोली- "मैं भी आपके साथ ऐसे ही रहंगी..."

उसका आइडिया मुझे पसंद आया फिर हम दोनों किचेन में नंगे हो गये वहां अत ने आलू के पराठे बनाए हम दोनों ने किचन में ही खाया। फिर हम रूम में आ गये।

मैंने ऋतु से कहा- "जान तुम मुझे कितना प्यार करती हो..."

ऋतु ने कहा- "मैं आपको अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करती हैं."

मैंने कहा- "तो फिर आज मुझे सच-सच बताओं की मैंने तुमको चोदने के लिए जो भी किया वो तुमको बुरा तो जरूर लगा होगा?"

ऋतु ने मुझसे चिपकते हुए कहा- "जरा सा भी नहीं..."

मैंने कहा- "क्यों, मैंने तो तुमको मजबूर किया था चोदने के लिए?"
 
ऋतु ने फिर जो बात मुझे बताई सुनकर मुझे यकीन ही नहीं हुआ। ऋतु में जैसे ही बोलना शुरू किया उसकी

आँखों में आँस आ गये। मैं उसकी बात ऐसे सुन रहा था जैसे की में कोई सस्पेंस वाली कहानी सुन रहा हैं

ऋतु ने कहा- "अगर आप ये सब नहीं करते तो हो सकता है की मैं आज जिदा ही नहीं होती या तो मैं घर छोड़कर कहीं चली जाती या में अपनी जान दे देती...'

मैंने कहा- "तुम मुझे पूरी बात सही-सही बताओ... फिर मैंने ऋतु को दिलासा देते हुए पानी पिलाया।

ऋतु हिचकियां लेते-लेत बोली- "आपको मैं सब शुरू में बताती हैं। वो दिन मेरी लाइफ का सबसे मनहस दिन था, जिस दिन अनु दीदी की शादी की डेट फाइनल हुई थी.."

पापा ने माँ से कहा "हम लोग अभी इतने पैसे का इंतजाम नहीं कर सकते। शादी की डेट इतनी जल्दी फिक्स नहीं करनी चाहिए थी..."

पर माँ ने पापा की एक ना सुनी। वो बोली- "आप पैसे की चिंता मत करो..."

पापा की वैसे भी माँ के आगे नहीं चलती थी। माँ की कोई सहेली है आशा जिसने माँ को कहा था की तुम्हें जितने भी पैसे की जरूरत हो मैं इंटेरस्ट पर दिलवा दूंगी। उसने ही माँ को तिवारी से मिलवाया था। तिवारी ने जिस दिन पैसे देने थे उस दिन उसने मम्मी को अपने आफिस में बुलाया था। मैं उस दिन पहली बार मम्मी के साथ ही तिवारी के आफिस में गई थी। मैं, मम्मी और आशा हम तिवारी के पास जब गये तो वो बोला।

तिवारी शोभा जी में आपको पैसा तो दे दूँगा पर आप मुझे गारंटी में क्या दे रही हो?

मम्मी- आपको हम जैसा शरीफ आदमी काई मिलेगा ही नहीं। हम आपका पैमा टाइम पर दे देंगे।

तिवारी- फिर भी कोई तो गारंटी होनी चाहिए। मैंमें बिना गाउंटी किसी को पैसा नहीं देता।

आशा तिवरी जी आप चिंता नहीं करिए। शोभा मेरी बहन जैसी है, आपको कोई शिकायत नहीं मिलीगे।

मम्मी- फिर भी आप जो कहाँ हम आपको गारंटी दे सकते हैं।

तिवारी शोभा जी, आप मुझे इस बात की गारंटी दो की अगर आप मेरा पैसा नहीं लोटा पाई तो मैं आपकी बेटी ऋतु को अपने घर में नौकरानी बनाकर रखेगा, और उसको मैं जो भी कहगा वो उसको करना होगा।

शोभा. "नहीं नहीं तिवारी जी, आपको इसकी कोई जरूरत ही नहीं पड़ेगी..."

तिवारी ने मुझे गंदी नजर से देखते हए कहा- "ना ही पड़े तो इसके लिए अच्छा है.."

में उसकी नजरों में भरी हई दरिंदगी देखकर डर गई थी।

तिवारी- "मैं आपको बिना गारंटी के पैसा नहीं दे सकता। हाँ या ना आप सोच लो..."

आशा और मम्मी ने इशारों-इशारों में कुछ बात किया फिर आशा बोली- "चल शोभा, कोई बात नहीं तिवारी जी की बात मान लें। अगर इनका पैसा नहीं दिया तभी तो ये ऋतु का कुछ कर सकते हैं। ऐसी नौबत आएगी ही नहीं..."

मम्मी- "पर मैं ऋतु को इनके हाथ कैंस दे दूंगी? जवान लड़की है कोई जानबर तो नहीं...

तिवारी बोला"उसकी चिता आप मत करो। मैं उसको बड़े प्यार से रखूगा। आपके घर में ज्यादा ऐश से रहेगी। वहां मेरे घर में और भी लड़कियां काम करती है.."

फिर मम्मी ने तिवारी से कहा- "चलिए मुझे आपकी बात मंजूर है..."

तिवारी ने हँसते हए कहा- "ऐमें कहने से क्या मैं तुम्हारी बात का यकीन कर लेंगा? मुझे लड़की के मुंह से हाँ कहलवाओं और मैं इसमें कुछ पेपर भी साइन करवा गा."

आशावो हम सब करवा देते हैं।

शाभा- हाँ हाँ हम आपकी सब शर्ते पूरी कर देते हैं।

फिर तिवारी ने मम्मी को एक पैकेट दिया और मुझे कहा- "सनों लड़की इधर आकर बैठो..."

मैं तिवारी के सामने वाली चेयर पर बैठ गई। मैं सब समझ चुकी थी की अब वो दिन दूर नहीं जब मुझे तिवारी की हवस का शिकार बनना पड़ेगा और पता नहीं तिवारी मेरे साथ और क्या-क्या करेंगा? पर मैं मजबूर थी कुछ बोल नहीं पा रही थी।

फिर मम्मी ने मुझे प्यार से कहा- "ऋत बेटी, अब त ही अपनी बहन की शादी करवा सकती है और तिवारी जी शरीफ आदमी हैं, गारंटी हो तो माँग रहे हैं। त पेपर पर साइन कर दे..."

मैं कुछ बोल नहीं पाई।
 
मैं तिवारी के सामने वाली चेयर पर बैठ गई। मैं सब समझ चुकी थी की अब वो दिन दूर नहीं जब मुझे तिवारी की हवस का शिकार बनना पड़ेगा और पता नहीं तिवारी मेरे साथ और क्या-क्या करेंगा? पर मैं मजबूर थी कुछ बोल नहीं पा रही थी।

फिर मम्मी ने मुझे प्यार से कहा- "ऋत बेटी, अब त ही अपनी बहन की शादी करवा सकती है और तिवारी जी शरीफ आदमी हैं, गारंटी हो तो माँग रहे हैं। त पेपर पर साइन कर दे..."

मैं कुछ बोल नहीं पाई।

दराज से कई सारे सादे पेपर निकालें और मुझे बोला- "इस पर तिवारी ने मुझे अपनी बहशी नजरों से देखते ह

अपने साइन कर दो..."

मैंने चुपचाप साइन कर दिए।

फिर तिवारी ने एक वीडियो कैमरा निकालकर आन किया और मुझसे कहा- "कैमरे में देखो और मुस्कराकर बोलो

की मैं जो भी कर रही हूँ अपनी मर्जी से कर रही हूँ। मुझे किसी ने मजबूर नहीं किया है."

मुझे ऐसा ही करना पड़ा। उसके बाद तिवारी ने मम्मी से कहा- "अब तुम लोग जा सकती हो."

में पूरे रास्ते में सोचती रही की क्या मैंने सही किया है? काश मैं मना कर पाती। मैं घर आकर बेजान लाश जैसी बेड पर पड़ गईं।

अनु दीदी और शिल्पा ने मेरे से पूछा "क्या हुआ?"

पर मैं कुछ बोली नहीं।

मम्मी ने कहा- "इसकी तबीयत ठीक नहीं है, इसको आराम करने दो..."

मैंने बाद में मम्मी से कहा- "आपने एक बेटी का घर बसाने के लिए दूसरी बेटी को दौंच पर क्यों लगा दिया? आपने ऐसा क्यों किया? मैं आपकी सगी बेटी नहीं हैं क्या?"

मम्मी ने मुझे समझाते हुए कहा- "ऋतु तू ऐसी बात नहीं कर। मैं जो भी कर रही हैं सोच समझ कर कर रही हैं। मैं तेरी माँ हूँ कोई दुश्मन नहीं, और तू इस बात को किसी से भी नहीं कहेगी। तुझं तेरा पापा की कसम होगी.."

मैंने मम्मी को वादा किया- "मैं किसी से कुछ कहूँगी..." और उस दिन से मैं घट-घट कर जी रही थी। आपसे मिलने के बाद मुझे लगा की काश आप मेरी लाइफ में आ जाए और भगवान ने मेरी सुन ली की आप मेरी लाइफ में आ गये। में जब आपके साथ पहली बार लंच पर गईं थी। मैंने उसी दिन सोच लिया था की मैं कुछ भी करके आपको अपना बना लेंगी..."
 
मैंने ऋतु को देखा उसकी आँखें अभी तक नम थीं। मैंने उसको कहा- "तुम किसी बात की फिकर मत करो मेरे होतं कोई तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मैं तिवारी से तुम्हारी वो क्लिप और पेपर तमको वापिस ला देगा..."

ऋतु मेरे से चिपक कर हिचकियां लेने लगी।

मैंने उसकी कमर पर हाथ फेर कर उसको दिलासा दिया। मुझे अब शोभा से नफरत होने लगी थी। मैंने सोच लिया था की मैं शोभा को सबक सिखाकर रहगा। ऋतु के लिए मेरे मन में प्यार का बीज और बढ़ गया था मैंने ऋतु को अपनी बाहों में लेते हुए कहा- "अब सब भूल जाओं और मुझे प्यार करो."

ऋतु ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

फिर एक दिन ऋतु ने मुझसे कहा- "सर, मैं दो दिन के लिए आफिस नहीं आऊँगी.."

मैंने पूछा- "क्या हुआ, काई प्राब्लम है क्या?"

उसने कहा- "अनु दीदी के बेटे का नामकरण है। मुझे वहां जाना है."

मैंने पूछा- "घर से और कौन-कौन जा रहा है?"

उसने कहा- "सब लोग जा रहे हैं."

मैंने कहा- "पूरी परिवार जा रही है तो तुम्हारा भी जाना बनता है। कब जाना है?"

उसने कहा- “कल सुबह..."

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मैंने कहा- "मैं अपनी कार भेज देता हूँ। तुम सब आराम से चले जाना.."

ऋतु ने कहा- "सर आप क्या परेशान हो रहे हैं। हम लोग बस में चले जाएंगी."

मैंने कहा- पागल हो क्या? बस में कितना मुश्किल होगा परिवार के साथ। मेरे पास दो-दो गाड़ियां होते हए तुम बस में जाओगी। कार से सीधा अपनी बहन के घर जाना और सीधा उनके घर में वापिस आ जाना..."

ऋतु मना नहीं कर पाई।

फिर मैंने कहा- "जिस टाइम जाना हो मुझे फोन कर देना। मैं कार भेज दूंगा..."

फिर अगले दिन सुबह 7:00 बजे ऋतु का फोन आया "सर हम सब तैयार हैं, आप गाड़ी भेज दीजिए."

मैंने ड्राइवर को बुलाया और समझाकर कहा "तुम ऋतु मेमसाहब के घर चले जाओ, उनको देल्ही जाना है अपनी फेमिली के साथ। जहां वो कहें उनको पहुँचा देना.." और मैंने ड्राइवर को ₹5000 दिए और कहा- "पेट्रोल तुम खुद इलवा लेना। उनका कोई पैसा खर्च नहीं होने देना..."

डाइबर कार लेकर चला गया। में भी आफिस के काम में बिजी रहा। इसलिए ऋतु को फोन ही नहीं किया। वो भी वहां जाकर बिजी हो गई। उसका भी फोन नहीं आया।

जब मेरा ड्राइवर दो दिन बाद घर वापिस आया तब मैंने हाइवर से कहा- "कोई परेशानी तो नहीं हुई?"

उसने कहा- "नहीं साहब, सब लोग आराम से गये थे..."

मैंने उसको कहा- "तुम अब अपने घर जा सकते हो..."

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ऋतु की माँ शोभा की चुदाई का वीडियो बनाया

मैं सिटी में कार खुद ही ड्राइव करना पसंद करता हैं। ड्राइवर तो मैंने सिर्फ आउट आफ सिटी जाने के लिए रखा हुआ है। ऋतु से मिले दो दिन बीत गये थे। मैं ऋतु से मिलने का बेताब हो गया था। मैंने ऋतु को फोन किया

पर उसका फोन स्विच-आफ था। मैंने कई बार ट्राई किया पर हर बार स्विच-आफ ही मिला। मैंने अब शोभा को फोन मिलाया तो उसका भी सेल आफ आने लगा। मुझे बड़ा गुस्सा भी आया और चिता भी होने लगी की सब ठीक तो है? मैने दो पंग विस्की के खींचे, और ऋतु के घर चला गया। मैंने बेल बजाई तो 5 मिनट बाद शोभा ने दरवाजा खोला।

मैंने उसको कहा- "क्या बात है इतनी देर क्यों लगा दी?"

शोभा बोली- "मैं बाथरूम में थी। बेन सुनकर जल्दी से कपड़े पहनकर आई हैं."

मैंने उसको देखा तो वो सच बोल रही थी। उसके बाल गीले थे और उसने जो मैक्सी पहनी हुई थी वो भी उसके गीले जिश्म से चिपकी हुई थी। मैं उसको गुस्से में देखता हआ घर के अंदर चला गया। मैंने अंदर जाकर देखा तो कोई भी नहीं दिखा।

मैंने पूछा- "ऋतु कहां है? उसका सेल भी स्विच आफ जा रहा है."

शोभा ने बताया- "उसका सेल जाते ही खराब हो गया था। इसलिए वो आपसे बात भी नहीं कर पाई..."

मैंने कहा- ऋतु कहां गई है?

शोभा बोली- "वो तो अभी एक-दो दिन बाद आएगी..."

मैंने कहा- "क्या मतलब... वो तुम्हारे साथ नहीं आई?"

उसने कहा- "उसके दीदी जीजा ने उसको आने ही नहीं दिया। शिल्पा और उसके पापा भी वहीं रूक गये हैं। वो सब परसों तक साथ में आएंगे..."

ये बात सुनते ही मेरा मूड और खराब हो गया। मेरा लण्ड दो दिन से ऋतु की चूत का प्यासा था। मेरे दिमाग में उस टाइम सिर्फ ऋतु की मस्त जवानी नजर आ रही थी। मेरे अंदर जैसे कोई खोलता हआ लावा भरा हो। मैंने शोभा को गौर से देखा तो उसको एहसास हुआ की वो मेरे सामने जिन कपड़ों में खड़ी है, उसमें उसके जिम के हर अंग की नुमाइश हो रही है।

मेरी वासना से भरी आँखों को देखकर शोभा बोली- "आप बैठिए, मैं जरा चेंज करके आती हैं."
 
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