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Adultery * * * * *पाप (30 कहानियां) * * * * *

मैं पहले उसका इंतेजार करती थी पर अब मैं उसके लिए बेचैन रहने लगी थी। मैं पहले उससे लड़ती थी पर अब मैं उससे शिकायत करने लगी थी। पहले मैं उससे छीन लेती थी पर अब मैं उससे माँगने लगी थी। पहले मैं उससे माँग करती थी पर अब मैं उससे उम्मीद करने लगी थी।

मुझे नहीं पता था की वो मेरे लिए किस तरह से महसूस करता था। उसके बर्ताव में भी मैंने कुछ बदलाव महसूस किए थे पर कभी ये फैसला नहीं कर पाई की क्या वो मुझे अब भी दोस्त समझता है या उससे ज्यादा। और अगर वो कुछ महसूस करता था तो शायद वो भी इस उलझन का शिकार था जिसका नतीजा ये हुआ की हम दोनों के बीचे कभी इस टापिक को लेकर कोई बात नहीं हुई। हम सामने से एक दूसरे के सिर्फ दोस्त ही रहे। बट डीप विदिन, है वाज माइ लवर। इश्क़ था मुझे उससे।

ये इश्क़ एक तरफा था या वो भी मुझे चाहता था इस बात का जवाब मुझे कभी मिल नहीं पाया। पर बिना इस सवाल के मैंने दिल ही दिल में एक अजीब दुनिया कायम कर ली थी। मेरे ख्याओं में मैं अपनी पूरी जिंदगी । उसके साथ ही बिताने वाली थी।

इट वाज डेस्टाइंड टु हैपन। उसके पापा का मेरे पापा के साथ ट्रान्सफर, हमारे घर साथ साथ होना, एक ही स्कूल और एक ही क्लास, क्लास में सिर्फ हम दोनों नये, इतनी गहरी दोस्ती, इट वाज आल डेस्टिनी। है वाज माइन फ्रॉम आल्वेज..."

और ऐसे ही ना जाने कितने लाजिक मैं अपने आपको दिया करती थी। हम अब भी साथ साथ ही रहते थे, साथ स्कूल आते जाते, एक दूसरे के घर आते जाते और रात को सोने से पहले घर के लैण्डलाइने पर छुपकर बातें पर इन सब में अब एक नफासत आ गई थी- “तू” की जगह “तुम ने ले ली थी। खुद कुछ खाया हो या ना हो पर दूसरे के खाने का खास ख्याल रहता था और अगर ना खाया हो तो जबरदस्ती खिलाया जाता था। और इन सब

छोटी छोटी बातों में वक़्त कहाँ उड़ गया पता ही नहीं चला।

हम कभी एक दूसरे से दिल की बात नहीं कह पाए और वो वक़्त आ गया जब मेरे पापा का ट्रान्सफर एक दूसरे शहर में हो गया था और मैं जानती थी की अब मुझे उससे दूर जाना है। ट्रान्सफर उसके पापा का भी हुआ था पर एक दूसरे शहर में। गर्मी की छुट्टयां शुरू होने वाली थी और हम दोनों ही ये शहर छोड़कर दो अलग अलग शहरों में जा रहे थे। इ-मेल और मोबाइल फोन्स उन दिनों नहीं हुआ करते थे। उस वक़्त एक दूसरे के टच में रहने का जरिया लेटर्स और लैण्डलाइन फोन्स पर एस.टी.डी. काल्स ही थी।

देखो मैं जाते ही अपना अड्रेस सुनील को भेज देंगी और तुम उसको लेटर लिख लेना। वो हम दोनों के अड्रेस और नये फोन नंबर्स एक दूसरे को दे देगा, समझे..” सुनील हमारा क्लासमेट था जो उसी शहर का था और हमेशा वहीं रहने वाला था।

मुझे याद है की उस दिन मेरी 12:00 बजे की ट्रेन थी और मैं सिर्फ उससे मिलने के लिए अपने घर वालों से लड़कर उस आखिरी दिन भी स्कूल गई थी। आखिरी कुछ घंटे उसके साथ गुजारना चाहती थी इसलिए उसके । साथ ही स्कूल गई। पापा मुझे स्कूल से पिक करते जहां से हम सीधा रेलवे स्टेशन ही जाने वाले थे। हम दोनों स्कूल के बाहर ही बैठे थे। वो उस दिन पीरियड्स बंक करके मेरे साथ वक्त गुजार रहा था।

ये क्या है?” उसने मेरी गोद में एक रंग बिरंगी सी किताब रखी तो मैंने हैरान नजर से उसकी तरफ देखते हुए पूछा।

स्लॅम बुक..” उसने जवाब दिया।

वो क्या होता है?” मैंने सवाल किया।

इट्स लाइक आ जर्नल यू नो, लाइक आ बुक दैट कंटेन्स इन्फर्मेशन ओन आल माइ फ्रेंड्स। मेरे जितने भी दोस्त होंगे उकी इन्फर्मेशन और वो मेरे बारे में क्या फील करते हैं वो सब। कल ही खरीदी है। पहले तुम से ही

भरवा रहा हूँ..”

वेस्टर्न कल्चर का थोड़ा थोड़ा प्रभाव उन दिनों हमारे यहाँ के स्कूल्स में भी आ रहा था और स्लॅम बुक उसी । कल्चर का एक हिस्सा थी। आजकल तो शायद स्कूल का बच्चा बच्चा स्लॅम बुक के बारे में जानता हो पर उन दिनों ये एक नयी चीज थी। बहरहाल, मैंने अपनी इन्फर्मेशन जैसे की नाम, डेट आफ बर्थ, फवुरिट कलर, हाबीस

पर आखिर में एक कालम था जिसमें मुझे ये भरना था की मैं उसके बारे में क्या सोचती हूँ। मुझे याद है की उस कालम पर मैंने खास तवज्जो दी थी। और उसके बाद पापा ने रेलवे स्टेशन जाते हुए मुझे स्कूल के बाहर से पिक किया और हम सीधा रेलवे स्टेशन ही चले गये।

पर बद-किश्मती से मेरी ये प्रेम कहानी सिर्फ इतनी ही रही। नये शहर में पहुँचते ही मैंने सुनील को अपना अड्रेस

और फोन नंबर भेज दिया पर उसने ऐसा नहीं किया। उसने सुनील को कभी अपना नया अईस या फोन नंबर नहीं भेजा। बहत इंतेजार किया मैंने ये सोचकर की शायद उसके पास सुनील की इन्फर्मेशन खो गई हो और वो जरूर पता लगाकर मुझे कांटैक्ट करेगा पर ऐसा हुआ नहीं। और वक़्त के साथ धीरे-धीरे मेरे उसके साथ देखे सारे ख्वाब धुंधले पड़ गये।

वो मेरा पहला प्यार था, मेरी पहली और शायद सबसे गहरी मोहब्बत।

और आज 15 साल बाद मुझे किश्मत सिर्फ उसी शहर नहीं बल्कि उसी स्कूल में एक टीचर बनाकर ले आई थी। उसके बाद मैंने कालेज पूरा किया, बी.एड. किया, टीचर बनी और इस सबके बीच मेरे कई बायफ्रेंड बने, प्यार भी हुआ पर ना जाने क्यों मैं कभी उसे भूल ही नहीं पाई। शायद इसीलिए कहते हैं की पहला प्यार कभी भुलाए नहीं

भूलता।

 
टैक्सी से उतरकर मैं एक बार फिर उसी स्कूल के गेट की तरफ बढ़ी जहाँ 15 साल पहले मैं रोज जाती थी। कभी ऐसा वक़्त था की मैं इस गेट से उसके साथ रोजाना गुजरती थी। उस वक़्त कभी सोचा भी नहीं था की मैं एक दिन टीचर बनकर इसी गेट को फिर से क्रास करूंगी।

स्कूल में जाकर मैंने प्रिन्सिपल को रिपोर्ट किया। जो प्रिन्सिपल मेरे टाइम पर यहाँ थे वो कोई और थे। उनका क्या हुआ ये मैं नहीं जानती थी पर जो अब कुर्सी पर मौजूद थे वो काफी खुशनुमा और हँसमुख किश्म के इंसान थे। उन्होंने खुद मुझे अपने साथ लेजाकर स्टाफ रूम दिखाया और स्कूल का चक्कर लगवाया। अगले दिन से जाय्न करने की हिदायत लेकर जब मैं वापिस गेट की तरफ चली तो मेरे पैर जैसे वहीं के वहीं जम गये।

लोहे के गेट से लगा वो वहाँ पर खड़ा था। आज 15 साल बाद मैं उसे देख रही थी।

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नहीं... ये वो नहीं है। मैंने हँसकर अपना दिमाग झटका और गेट की तरफ चली। जो मेरे सामने खड़ा था वो 1415 साल का लड़का था जबकि वो इस वक़्त जहाँ भी होगा, 30-31 साल का जवान आदमी होगा और शायद शादीशुदा भी होगा।

जैसे जैसे मैं गेट के नजदीक आई, मेरी आँखें हैरत से फैलती चली गई। गेट पर खड़े लड़के को मैं हैरत से। देखती रह गई। मेरी याद 15 साल पुरानी थी और उसके साथ साथ मेरे दिमाग में उसका चेहरा भी धुंधला सा पड़ गया था पर मेरे सामने खड़े लड़के ने जैसा हर याद को ताजा कर दिया था। उसकी शकल 100% मेरी 15 साल पुरानी याद से मेल खाती थी। वही बालों का स्टाइल, वही कद काठी, वही रंगत, वही नैन नक्श, वही हल्की उगती हुई दाढ़ी, वही यूनिफार्म पहनने का स्टाइल और कंधे पर बिल्कुल वैसा ही लाल रंग का बैग। वो लड़का उसकी 100% कापी था।

मैं उसकी तरफ देखती हुई गेट की तरफ बढ़ती रही। वो भी आराम से खड़ा मुझे ही देखता रहा। हम दोनों की नजरें एक दूसरे से मिली और लाक होकर रह गई। वो आराम से खड़ा मुझे देखता रहा और मैं उसके चेहरे पर नजर जमाए स्कूल से बाहर निकल गई।

हम-शकल होते हैं ये मैंने सुना था पर क्या किसी की शकल इस हद तक किसी से मेल खा सकती है... कौन था ये लड़का... उसका कोई रिश्तेदार... उसका बेटा... नहीं उसका बेटा इतना बड़ा नहीं हो सकता... मुझे याद था की सुनील का घर स्कूल के पास ही था। जाने क्या सोचकर मैं टैक्सी में बैठने के बजाय कदम उठाकर सुनील के घर की तरफ चल पड़ी।

सुनील कुछ वक़्त तक मेरे लेटर्स का जवाब देता था और मेरा हाल चाल पूछता रहता था पर धीरे-धीरे मेरा उससे भी कांटैक्ट टूट गया था। वो इसी शहर का था पर मैं नहीं जानती थी की वो अब भी इसी घर में रहता है या । नहीं फिर भी कुछ सोचती हुई मैं उसके घर तक जा पहुँची। और किश्मत की बात ही थी की वो अब भी इसी । शहर और इसी घर में ही रहता था। और तो और वो मुझे घर के बाहर ही मिल गया और मुझे देखते ही पहचान भी गया- “ओ माइ गाड.. यू स्टिल डोंट नो...”

अंदर लेजाकर उसने मेरी खासी मेहमान नवाजी की। चाय का दौर गुजर जाने के बाद जब मैंने उसके बारे में पूछा तो सुनील के चेहरे का रंग बदल गया।

=

“आई आम सारी बट आई थाट यू न्यू। काफी वक्त तक तो मुझे भी नहीं पता था और जब पता चला तो हमारे लेटर्स का सिलसिला खतम हो गया था। वो मर चुका है, ही इस नो मोरे। उन दिनों एक काफी बड़ा ट्रेन हादसा हुआ था, रिमेंबर... ही वाज ओन दैट ट्रेन। जहाँ उसके डैडी का ट्रान्सफर हुआ था वहाँ जाते हुए उस आक्सिडेंट में उसकी पूरी परिवार गुजर गई थी। मुझे भी काफी वक्त के बाद पता चला था."

मेरे आँसू रोके नहीं रुक रहे थे। सुनील के घर से निकलकर अपने घर तक का रास्ता मैंने पैदल ही पूरा किया। मुझे होश तक नहीं था की मेरे आस पास क्या हो रहा है। बस बद-हवस सी अपने घर की तरफ चलती रही। दिमाग में हजारों बातें चल रही थी और कई पुरानी बातों के जवाब अब मिल रहे थे।

“इसलिए उसने कभी मुझे कांटैक्ट नहीं किया। वो तो मेरे जाने के एक हफ्ते बाद ही मर गया था। ओह गाड..” मेरी आँखें भीगी हुई थी और मेरे साइड से गुजरने वाले कई लोग मुझे हैरत से देख रहे थे की मैं रो क्यों रही हैं। पर उन सबसे बेखबर बदहवास मैं अपने घर की तरफ बढ़ती जा रही थी।

। ।

तो वो लड़का कौन था...” अचानक मुझे गेट पर खड़े उस लड़के का ख्याल आया। जिस तरह से वो मुझे देख रहा था और जिस तरह से उसकी शकल मिलती है, मैंने डिसाइड कर लिया था की कल स्कूल जाकर सबसे पहले उस लड़के का पता करूंगी। मुझे पता नहीं की मैं कितनी देर चली पर आखिर मैं अपने घर पहुँची। लान से होती हुई मैं अपने घर के दरवाजे के पास पहुँची ही थी की जमीन पर पड़ी एक चीज ने मेरा ध्यान अपनी तरफ खींचा। मेरे दरवाजे के ठीक सामने एक लाल रंग की किताब रखी हुई थी। मैंने उसे उठाकर खोला तो ऐसा लगा जैसे मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई हो।

ये उसकी स्लॅम बुक थी जो उसने मुझसे तब भरवाई थी जब हम आखिरी बार मिले थे। पहली पेज पर मेरी लिखी हुई बातें ही और पूरी स्लॅम बुक में एक सिर्फ मेरी ही एंट्री थी।

ये यहाँ कैसे आई?"

सोचते हुए मैं हैरत से उसके पेजेस ही पलट रही थी की अपने पीछे हुई आहट से मैं पलटी और वो ठीक मेरे पीछे खड़ा था। स्कूल यूनिफार्म पहने जैसे वो मुझे गेट के पास दिखा था, अब भी उसी यूनिफार्म में था। वो आज भी बिल्कुल नहीं बदला था। बिल्कुल वैसा ही था। बल्कि जब मैंने गौर से उसे देखा तो वो बिल्कुल वैसा था जैसा की मैं आखिरी बार उसे छोड़कर गई थी। जब वो आखिरी बार मुझसे मिला था। आज उसको यूँ देख रही थी तो एक एक करके सारी बातें याद आ रही थी।

उस दिन उसकी एक उंगली पर बंद-एड थी जो आज भी वहीं मौजूद थी। उसके माथे के ऊपर दायां साइड में एक खरोंच थी जो आज भी थी। उसकी शर्ट का एक बटन टूटा हुआ था जिसको लेकर मैंने उसे डांटा भी था, वो बटन आज भी टूटा हुआ था। उसने पहली बार शेव करने की कोशिश की थी और बड़े ही बेढंगे तरीके से की थी, वही शेव आज भी उसके चेहरे पर थी।

उस दिन जल्दी में वो स्कूल शूस की जगह घर वाले ब्राउन जूते पहनकर आया था और वो आज भी उसके पैरों में थे। वही शर्ट, वही ट्राउजर, सब कुछ वही। हैरत से मैंने उसे ऊपर से नीचे तक देखा और फिर स्लॅम बुक की तरफ देखा। उसमें मेरी लिखी हुई लाइन आज भी मौजूद थी,

“मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। यू आर माइ फर्स्ट लोव और आई विल आल्वेज लोव यू। तुम दुनिया के सबसे क्योंट लड़के हो, यू आर द बेस्ट इन द वर्ल्ड। मैं नहीं जानती के तुम मुझसे प्यार करते हो या नहीं, पर अगर करते हो तो मेरे लिए दो काम करोगे...

डोंट एवर चेंज और वेट फार में..."

***** समाप्त *****

 
05 एडल्टी यूजर आईडी- पासवर्ड

मिहिर वर्मा ने अपना आईडी और पासवर्ड डाला लाग-इन किया। सुधा आनलाइन थी। विंडो के मुताबिक वो उनका इंतेजार कर रही थी।

लाग-इन करते ही फौरन उसकी मेसेज विंडो अपने आप खुल गई। उसका असली नाम सुधा था।

सुधा- हाय... आई वाज वेटिंग फार यू।

मिहिर- साड़ी थोड़ा लेट हो गया। एक क्लाइंट बैठा हुआ था, जाने का नाम ही नहीं ले रहा था।

सुधा- नहीं... कोई बात नहीं.. ज्यादा वेट नहीं करना पड़ा। मैं भी बस अभी आनलाइन आई ही थी।

मिहिर- आपने अपना वादा पूरा किया।

सुधा- कैसी ना करती, आपने इतने प्यार से आने के कहा था।

मिहिर- वैसे एक बात बताऊं आपको?

सुधा- बताइए।

मिहिर- जिस दिन मुझे पता होता है की आज आपसे बात होने वाली है, सुबह से ही मेरा लण्ड खड़ा रहता है।

सुधा जोर से हँसते हुये- “तो घर में एक चूत है तो, घुसा दिया कीजिए.."

मिहिर- मेरी बीवी... उससे बेहतर तो ये है की मैं बाथरूम में जाकर हिला हूँ।

सुधा- तो क्या ऐसा किया?

मिहिर- मतलब?

सुधा- हिलाया।

मिहिर- हाँ हिलाया ना... सुबह से 3 बार मूठ मार चुका हूँ।

सुधा- हिलाते हुए क्या सोच रहे थे?

मिहिर- यही की हकीकत में आपको चोदूंगा तो कैसा फील होगा?

सुधा- डोंट वरी.. जल्दी पता चल जाएगा। वैसे डर नहीं लगता तुम्हें?

मिहिर- किस बात का?

सुधा- तुम कभी नहीं जान हकते... हो सकता है की मैं कोई पागल किश्म की सीरियल किलर टाइप लड़की निकलें। या हो सकता है की मुझे कोई एड्स टाइप बीमारी हो?

मिहिर- “ठीक है..” कहकर जोर से हँसता है।

मिहिर वर्मा एक बड़ी कंपनी में काफी अच्छी पोस्ट पर था। बड़ा सा घर, बड़ी सी गाड़ी, दो बच्चे और शादीशुदा जिंदगी से परेशान। उसकी शादी 22 साल की उमर में ही करा दी गई थी। ऐसा नहीं की वो हमेशा से अपनी

शादी से परेशान रहा था। उसकी बीवी एक पढ़ी लिखी, बहुत सुंदर और एक अमीर घराने की लड़की थी। शुरू शुरू में दोनों में सेक्स भी बहुत था। कई सालों तक मिहिर अपनी बीवी को हर रात चोदकर ही सोता था और सुबह होते ही सबसे पहला काम होता था बीवी पर चढ़ जाना। पर बच्चे होने के बाद धीरे-धीरे उसकी बीवी सेक्स के मामले में जैसे बुझती चली गई।

रोज रात होने वाला सेक्स अब वीकली बेसिस पर होने लगा था और उसमें भी उसे लगता था की किसी सेक्स डाल को चोद रहा है। पहले कई साल तक उसने अपनी बीवी में फिर से वही चिंगारी पैदा करने की कोशिश की पर जब नाकाम रहा तो निराश होने लगा। किसी रंडी के पास जाना उसके उसूल के सख्त खिलाफ था इसलिए सेक्सुवल निराशा धीरे-धीरे बढ़ने लगी।

और इसी निराशा में उसने इंटरनेट का सहारा लिया। पार्न साइट्स पर जाना, पार्न वीडियोस देखना, चैटरूम में जाकर किसी लड़की को ढूंढना और उससे गंदी गंदी बातें करना, उसकी सेक्स लाइफ यहीं तक सिमट गई थी।

 
और एक दिन ऐसे ही एक चैटरूम में उसको सुधा मिली। उसका असली नाम सुधा था। और उसके बाद फिर जैसे बातों का सिलसिला चल निकला। वो दोनों टाइम फिक्स करके आनलाइन आते और एक दूसरे से चैट करते। पहले दोनों सिर्फ साइबर सेक्स और रोल-प्लेस को लेकर ही बात करते थे पर फिर धीरे-धीरे बातें सेक्स से हटकर

भी होने लगी।

और यही वो टाइम था जब सुधा ने उसको सजेस्ट किया था की उन दोनों को मिलना चाहिए और जिस तरह से वो आनलाइन सेक्स करते हैं, वैसे ही हकीकत में भी करना चाहिए।

मिहिर- मिलने का प्लान पक्का है ना वैसे?

सुधा- हाँ... होटल में रूम बुक किया तुमने?

मिहिर- हाँ कर लिया, सट और सनडे।

सुधा- आ-सम।

मिहिर- ब्लैक ब्रा और पैंटी।

सुधा- हाँ खरीद ली। जैसी तुमने कही थी बिल्कुल वैसी।

मिहिर- मेरा तो सोचकर ही खड़ा हो रहा है।

सुधा- मैं ठंडा कर दें?

मिहिर- करो।

ये उन दोनों का हमेशा का रूटीन था। दोनों सेक्स में कोई रोल-प्ले करते और इस तरफ मिहिर अपना लण्ड हिलाता और जैसा की सुधा ने उसको बताया था, वो भी दूसरी तरफ अपनी चूत में उंगली करती थे। मिहिर ने

कई बार उसपर जोर डाला था की वो दोनों एक दूसरे को देखकर ये काम करें पर सुधा हमेशा मना कर देती थी। उसके हिसाब से एक दूसरे को नंगा उन्हें तभी देखना चाहिए जब वो मिले।

सुधा- आई कांट बिलीव की कुछ दिन बाद ही तुम मुझे नंगी देखोगे।

मिहिर- देगा नहीं जानेमन, बहुत कुछ करूंगा।

सुधा- क्या क्या करोगे?

मिहिर- तुम्हें बिस्तर पर रगडूंगा।

सुधा- ऐसे नहीं, शुरू से बताओ। इमेजिन करो की मैं बस अभी कमरे में आई ही हैं?

मिहिर- जैसे ही तुम कमरे में आई, मैंने कमरे का दरवाजा बंद किया।

सुधा- और मैं आगे बढ़कर तुमसे लिपट गई।

मिहिर- मुझसे इंतेजार नहीं हो रहा था इसलिए बिना कुछ कहे मैंने अपने होंठ तुम्हारे होंठों पर रख दिए और एक हाथ से तुम्हारी छाती पकड़ ली।

सुधा- कौन सी.. दायीं या बांयीं?

मिहिर- दायीं।

सुधा- आह्ह्ह... जान... जोर से दबाओ।

मिहिर- मैंने तुम्हारे होंठों को चूसते हुए तुम्हें दीवार के साथ लगा दिया और नीचे दोनों हाथों से तुम्हारी छातियां दबा रहा हूँ।

सुधा- लण्ड को भी चूत पर रगड़ो ना।

मिहिर- मैं अब अपना लण्ड कपड़ों के ऊपर से ही तुम्हारी चूत पर रगड़ रहा हूँ।

सुधा- मैंने अब अपना एक हाथ नीचे लेजाकर तुम्हारे लण्ड को सहलाना शुरू कर दिया।

मिहिर- चूसोगी नहीं?

सुधा- चूसूंगी... पर पहले तुम मुझे नंगी तो करो।

मिहिर- अब मैं तुम्हें धीरे-धीरे चूमता हुआ धीरे-धीरे बिस्तर की ओर ले जा रहा हूँ। बिस्तर के पास लेजाकर मैंने तुम्हें बिस्तर पर धक्का देकर गिरा दिया।

सुधा- अब चढ़ जाओ मेरे ऊपर, एक रंडी की तरह चोदो मुझे।

मिहिर- वैसे जब हम रियल में मिलेंगे, सबसे पहले क्या बनकर चुदवाओगी... माइ लवर या एक रंडी?

सुधा- रंडी... सबसे पहले मुझे एक रंडी समझकर चोदना। ऐसा चोदना की मैं रो पड़े।

|

!!

मिहिर- चिंता मत कर मेरी जान। तेरी चूत में लण्ड घुसाके निकालूंगा नहीं। ऐसे धक्के लगाऊँगा की यू विल क्राइ, बोथ इन पेन और प्लेजर।

सुधा- विल यू लिक माइ चूत?

मिहिर को चूत पर मुँह लगाना बिल्कुल पसंद नहीं था। सोचकर ही उल्टी आती थी। एक यही काम उसने बिस्तर पर कभी नहीं किया था।

मिहिर- आफ कोर्स... आई विल लिक योर चूत, रब इट, टीज इट, प्ले वित इट।

सुधा- पर पहली बार में गाण्ड मारने की कोई कोशिश मत करना प्लीज। आई नो हाउ मच यू वान्ट इट पर पहली बार में नहीं।

मिहिर- उंगली भी नहीं।

सुधा- नहीं प्लीज... गाण्ड में कुछ मत डालना।

मिहिर- ओके।

सुधा- अच्छा डिड यू गेट द रोप्स।

मिहिर- हाँ आई डिड।

सुधा- कूल... मेरा बड़ा दिल है की मैं तुम्हें बिस्तर से बाँध दें ताकि तुम हिल भी ना सको और फिर मैं तुम्हारे ऊपर चढ़े।

मिहिर- और?

सुधा- और फिर मैं तुम्हारे होंठों को चूहूं, जब तक मेरा दिल चाहे।

मिहिर- और?

सुधा- और फिर मैं तुम्हारे गले को चूमते हुए नीचे आऊँ, तुम्हारी छाती पर किस करूँ, फिर तुम्हारे निपल्स को धीरे से काहूँ।

मिहिर- फिर?

सुधा- फिर धीरे-धीरे नीचे आऊँ और तुम्हारे पूरे लण्ड को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दें।

मिहिर- ओहहह... गाड... सोचकर ही कितना मजा आ रहा है।

सुधा- इमेजिन करो, और तुम बँधे हुए होगे और हिल भी नहीं पाओगे और मैं तुम्हारा लण्ड चूसूंगी और तुम कुछ भी नहीं कर पाओगे।

मिहिर- जानता हूँ मैं।

सुधा- दैटस माइ फवुरेट पार्ट.. आक्च्युयली मेरा बड़ा मन है। तुम्हें बिस्तर से बाँध देंगी, फिर तुम्हारी आँखों पर भी एक पट्टी बाँध देंगी और फिर अपना खेल खेलूंगी।

उस दिन सुबह मिहिर उठा तो किसी बच्चे की तरह खुश था। आज वो सुधा से मिलने जा रहा था, पूरे वीकेंड के लिए यानी की अगले दो दिन तक वो सुधा को जी भरकर चोदने वाला था। घर पर उसने अपनी बीवी को कह दिया था की वो बिजनेस मीटिंग के लिए जा रहा है पर शायद ना भी बताता तो कुछ बिगड़ने वाला नहीं था। हमेशा की तरह वो सुबह से ही अपने दोस्तों के साथ कोई चैरिटी फंक्सन प्लान करने में बिजी थी।

इतना उत्तेजित वो तब था जब उसकी शादी हो रही थी या शादी के पहले कुछ दिनों में जब उसको पता था की घर जाकर वो अपनी बीवी की चूत मारेगा। ये सोच सोचकर ही की थोड़ी देर बाद उसका लण्ड एक चूत में होगा, उसके दिल की धड़कन तेज होने लगती थी। लण्ड इस तरह खड़ा हो जाता था की पैंट में छुपाना मुश्किल हो

जाता था।

यही हाल उसका आज भी था। सुबह से उसका लण्ड तना खड़ा था। दिमाग में सिर्फ यही चल रहा था की थोड़ी देर बाद वो एक कमरे में वासना का हर गंदा खेल खेलने वाला है। वो सब करने वाला है जो वो करना तो चाहता था पर कभी बीवी के साथ कर ना सका। जी भरकर चुदाई के दौरान गालियां देगा, सुधा को जिस नाम से चाहे बुलाएगा, जिस पोजिशन में चाहे चोदेगा, जब तक चाहे चोदेगा।

 
सुधा ने उसे वादा किया था की दो दिन तक वो दोनों होटल के रूम में नंगे ही रहेंगे, बिल्कुल कपड़े नहीं पहनेंगे। मिहिर की एक फैंटेसी थी और वो थी की वो किसी लड़की के साथ नंगा बैठकर खाना खाए, जब वो और लड़की दोनों डाइनिंग टेबल पर नंगे बैठे हों और खाना खा रहे हों। बीवी से ऐसी फरमाइश वो कभी कर नहीं सका पर जब सुधा से कहा, तो वो फौरन मान गई।

आज उससे पहली मुलाकात होगी, फिर आमने सामने बात होगी...” वो दिल ही दिल में गुनगुना रहा था- “अरे बात नहीं, चुदाई होगी..." दिल ही दिल में सोचकर वो हँस पड़ा।

सुधा से बात करते उसको 6 महीने से ज्यादा हो गये थे। वो औरत जैसे उसका दिमाग पढ़ती थी, जैसे उसको जानती थी। पहले मिहिर डरता था की कहीं ये कोई लड़का तो नहीं जो मजाक कर रहा हो क्योंकी वो कभी भी खुद को दिखाती नहीं थी पर फिर धीरे-धीरे उसको यकीन हो गया था की वो एक औरत ही थी। पहले दोनों । आनलाइन आते, साइबर सेक्स करते और मिहिर मूठ मार लेता पर फिर धीरे-धीरे सुधा ने बात को सेक्स से घुमाना शुरू कर दिया था।

बातें फिर सेक्स से हटकर उन दोनों के बारे में होती थी की उन्हें बिस्तर पर क्या पसंद है, क्या नहीं, सेक्स किस तरह का चाहिए और मिहिर को हैरानी होती थी की वो जो कहता, सुधा उसी को अपनी भी पसंद बताती। हर गंदी से गंदी ख्वाहिश के लिए उसने यही कहा की अगर वो कभी मिले, तो मिहिर उसके साथ ऐसा कर सकता है। फिर बातें सेक्स से हटकर उन दोनों की पेरसोनल जिंदगी की तरफ आ गई। बातों बातों में सुधा मिहिर के बारे में थोड़ा बहुत जान गई थी पर वो उस औरत के बारे में कुछ नहीं जनता था। कौन थी, कहाँ रहती थी, क्या करती थी, कुछ भी तो नहीं।

जैसा की उसने कहा था, वो कोई सीरियल किल्लर भी हो सकती है..” उसने दिल ही दिल में सोचा और उस बात पर हँस पड़ा।

“आल राइट बेटा...” उसने अपनी बेटी का सर चूमा- “आई विल सी यू ओन मंडे..” बीवी किसी चैरिटी वर्क में बिजी थी और मिहिर उसके घर आने से पहले ही निकल लेना चाहता था।

कोई 3 घंटे बाद उसकी कार एक होटल की लाबी में आकर रुकी। वो कार से उतरा और पहले सीधा वाशरूम में गया। अपने आपको शीशे में देखा, एक डीओ. अपने ऊपर छिड़का, माउथ फ्रेशनर अपने मुँह में स्प्रे किया और बार में पहुँचा।

जैसा की उन दोनों ने डिसाइड किया था, वो टेबल 7 पर बैठी थी। सुधा की पीठ मिहिर की तरफ थी पर वो बता सकता था की उसने ब्लैक कलर की साड़ी पहन रखी थी। ये मिहिर की एक फैंटेसी थी की औरत ब्लैक साड़ी, ब्लैक ब्लाउज , ब्लैक पेटीकोट, ब्लैक ब्रा, और ब्लैक पैंटी में हो। वो चाहता था की वो कोई कपड़े ना उतारे, बस औरत को झुकाए, फिर ब्लैक ब्रा और ब्लैक पेटीकोट ऊपर उठाए, ब्लैक पैंटी नीचे सरकाए और अपना लण्ड पीछे से चूत में डाल दे। आगे से उस औरत के ब्लैक ब्लाउज के बटन खुले हों, छातियां ब्लैक ब्रा से बाहर लटक रही

ये थी उसकी ब्लैक फैंटेसी और जब उसने सुधा से इस बारे में बात की, तो वो फौरन मान गई। और आज वाई के मुताबिक वो ब्लैक कपड़ो में ही आई थी। उसके पास कोई बैग नहीं था पर मिहिर गेस कर रहा था की बैग । आलरेडी रूम में जा चुका होगा क्योंकी रूम बुक्ड था और वो नंबर जानती थी। मिहिर ने भी होटल आकर अपना समान बेल-बाय के हाथ रूम में भेज दिया था और खुद बार में आ गया था। वो खुद भी एक ब्लैक सूट में था। ब्लैक कोट, ब्लैक वेस्ट, ब्लू शर्ट, और ब्लैक ट्राउजर। ट्राउजर के अंदर उसने सुधा की फरमाइश पर पहन रखी थी एक पिंक कलर की पैंटी।

चलता हुआ वो सुधा के पीछे पहुँचा और उसके कंधे पर हाथ रखा- “सुधा...” उसने कहा

आवाज पर औरत पलटी और उठकर सीधी खड़ी हुई और अगले ही पल दोनों के चेहरे सफेद पड़ते चले गये।

तुम...” दोनों के मुँह से एक साथ निकला।

मिहिर के सामने ब्लैक साड़ी में उसकी अपनी बीवी स्नेहा खड़ी थी।

***** समाप्त *****

***

 
06 ऐसा भी होता है

कम ओन, वेर इस माइ किस?”

सपना को मैं पिछले 3 साल से जानता था। 12वीं स्टॅडई में वो और मैं एक ही क्लास में थे जिसके बाद हम दोनों ने अलग अलग कालेजेस जान कर लिये थे। क्लास में एक बार उसने मुझसे शर्त लगाई थी जिसके हारने पर उसने मुझे किस करना था। किस वाली बात मैंने मजाक में कही थी और मुझे पता था की वो मुझे किस नहीं करेगी इसलिए जब वो शर्त हार गई तो मैंने उसे छेड़ना शुरू कर दिया की आई आम स्टिल वेटिंग फार माइ किस।

इस बात को 3 साल गुजर चुके थे। हम दोनों के कालेज बदल गये और मिलना जुलना बहुत कम हो गया। कुछ दिन पहले उसने मुझे फोन किया था की वो और उसका परिवार एक दूसरे शहर में शिफ्ट हो रहे हैं और वो मेरे साथ कुछ वक्त गुजारना चाहती है। हम दोनों शहर के एक बड़े से पार्क में बैठे थे। दिन के कोई 12:00 बज रहे। थे और उस वक्त पार्क में कोई नहीं था। हम दोनों एक कोने में कुछ पेड़ों की आड़ में बैठे थे।

मैं हमेशा से जानता था और उसने मुझे खुद भी बताया था की उसे मुझपर स्कूल में क्रश था पर कभी कह नहीं सकी। उसके बाद कालेज में उसका किसी और लड़के से चक्कर चल निकला था जिससे फिलहाल कुछ दिन पहले ही उसका ब्रेक उप हुआ था।

आने से पहले उसने मुझे फोन पर बताया था की अगले हफ्ते वो दूसरे शहर शिफ्ट कर लेगी इसलिए बहुत मुमकिन है की शायद ये हमारी आखिरी मुलाकात हो। हँसते हुए उसने ये भी कहा था की शायद आज मुझे मेरा किस भी मिल जाए पर फिर हम दोनों ही उस बात पर हँस पड़े थे।

स्कूल के दिनों में हम दोनों बहुत क्लोज फ्रेंड्स हुआ करते थे इसलिए पार्क में मैं आराम से नीचे घास पर लेटा हुआ था और सर को उसकी टाँग पर रखा था। वो मेरे बालों में हाथ फिरा रही थी और हम गुजरे दिनों और अपनी दोस्ती के किस्से एक दूसरे से डिस्कस कर रहे थे। नीचे लेटे हुए मुँह पर पेड़ के पत्तो के बीच से धूप पड़ने लगी तो मैं उठकर बैठ गया।

“क्या हुआ?” मुझे उठता देखकर वो बोली “लेटे रहो...”

धूप पड़ रही है मुँह पर...” मैंने कहा और पेड़ से टेक लगाकर बैठ गया। और फिर मुझे जाने क्या सूझी की मैंने उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचा और उसे अपनी टाँगों के बीच कर लिया। 3 साल पहले हम दोनों ही एक दूसरे को बेहद पसंद करते थे और दोनों के दिल में दोस्ती के अलावा और भी कई बातें थी जो कभी सामने

आ नहीं पाई थी। ये शायद उसी का नतीजा था की जब मैंने उसे यूँ अपने करीब खींचा तो वो भी चुपचाप सिमट कर मेरी बाहों में आ गई और मेरी टाँगों के बीच अपनी कमर मेरी छाती पर टिकाकर आराम से बैठ गई।

कुछ पल तक हम दोनों यूँ ही खामोश बैठे रहे। उस एक पल में यूँ करीब होकर बैठने से हमने पहली बार दोस्ती से आगे कदम उठाया था इसलिए शायद झिझक रहे थे की अब क्या कहें? और फिर उसने वो किया जिसकी

 
मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। आगे बढ़कर उसने मेरा गाल चूम लिया और धीरे से मेरे कान में बोली- “आई लोव यू...”

मैं एक पल के लिए उसकी इस हरकत पर चौंक सा पड़ा। वो ऐसा करेगी इसका मुझे दूर दूर तक कोई अंदेशा नहीं था। मैंने गर्दन घुमाकर उसकी आँखों में आँखें डालकर देखा और आगे बढ़कर अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए। वो एक छोटा सा किस था। हमारे होंठ आपस में मिले और कुछ पल साथ रहकर अलग हो गये। पर जैसे। उस एक किस ने चिंगारी का काम किया। कुछ पल बाद ही हमारे होंठ फिर आपस में मिले और इस बार जैसे एक दूसरे से चिपक कर रह गये। मैं उसके दोनों होंठों को अपने होंठों में पकड़कर चूस रहा था और वो भी मेरा बराबर का साथ देते हुए पलटकर मेरे होंठ चूसने लगी।

“ओह साहिल..."

मेरे होंठ थोड़ी देर बाद उसके होंठों से हटे और फिर उसके गाल और गर्दन को चूमने लगे। उसका हाथ मेरे बालों पर आ गया और पल भर को भी उसने मुझे रोकने की कोशिश नहीं की। मैं बारी बारी से कभी उसकी गर्दन, कभी गाल और कभी होंठों को चूमता रहा।

“साहिल कोई देख लेगा..” कुछ पल बाद वो बोली।

कोई नहीं देखेगा। हम पेड़ की आड़ में हैं और इस वक़्त यहाँ कोई है भी नहीं..” कहते हुए मैंने अपना चूमने का काम जारी रखा।

थोड़ी देर के लिए वो फिर मेरा साथ देने लगी- “साहिल हटो। मेरा पूरा मुँह गीला कर दिया तुमने...”

थोड़ा आगे बढ़ जाऊं” जवाब में मैंने पूछा।

“क्या?” उसको शायद मेरी बात समझ नहीं आई पर मैंने जवाब का इंतेजार किए बिना अपना एक हाथ उसकी एक छाती पर रख दिया।

ओह साहिल..” उसने मेरे जिश्म को अपने हाथों में ऐसे जकड़ लिया जैसे करेंट का झटका लगा हो- “मैं जानती थी तुम यही करोगे। तुम सब एक जैसे होते हो...”

पर उसने उस वक़्त मेरा हाथ हटाने की कोई कोशिश नहीं की। मैं धीरे-धीरे उसके होंठ चूमता हुआ अपने हाथ से उसकी छातियां कमीज के ऊपर से ही सहलाने लगा।

बस अब हटो..” उसने मेरा हाथ थोड़ी देर बाद अपनी छाती से हटा दिया।

पर मेरे अंदर वासना का तूफान जैसे जाग उठा था। मैं थोड़ी देर के लिए तो अलग हुआ पर कुछ पल बाद ही फिर उसके होंठ चूमने लगा और इस बार बिना झिझके अपना हाथ सीधा उसकी छाती पर रख दिया। मेरे हाथ

को अपने सीने पर महसूस करते ही उसने एक गहरी साँस ली और फौरन हटा दिया। मैंने अगले ही पल फिर अपना हाथ उसके सीने पर रख दिया और वो फिर ऐसे काँपी जैसे बिजली का झटका लगा हो। उसने फिर मेरा हाथ हटाया और मैंने फिर उसकी एक छाती पकड़ ली।

“बस करो साहिल कोई देख लेगा...”

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कोई नहीं है। अकेले हैं इस वक़्त हम यहाँ...” मैंने कहा और इस बार मैं और आगे बढ़ा।

मेरा हाथ इस बार उसके पेट पर आया और उसकी कमीज के एक छोर से होता हुआ अंदर जाकर सीधा उसके नंगे पेट को छू गया।

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“ओहहह... साहिल...” मेरे हाथ को अपने नंगे जिश्म पर महसूस करते ही उसने फिर एक गहरी साँस ली और कमीज के ऊपर से मेरे हाथ को पकड़ लिया, जैसे कोशिश कर रही हो की मेरा हाथ उसके जिम के किसी और हिस्से को ना छुने पाए।

हाथ हटाओ..” मैंने उससे मेरा हाथ छोड़ने को कहा।

सूट बहुत टाइट है साहिल..”

हाथ हटाओ ना प्लीज...”

कमीज बहुत टाइट है मेरी...”

हाथ हटाओ सपना..”

और उसने अपना हाथ हटा लिया और मेरा हाथ उसकी कमीज के अंदर उसके जिश्म को महसूस करने के लिए आजाद हो गया। उसके चिकने पेट और पीठ पर फिसलता हुआ मेरा हाथ सीधा ब्रा के ऊपर से उसकी एक छाती पर आ टिका। उसकी छातियां ना तो बहुत बड़ी थी और ना ही बहुत छोटी। जिस तरह से उसकी एक छाती पूरी मेरी एक मुट्ठी में समा गई, उससे मैंने उसके ब्रा का साइज 32 इंच होने का अंदाजा लगाया।

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साहिल क्या कर रहे हो तुम?” उसने ठंडी आह भरी पर मुझे रोकने या मेरा हाथ हटाने की कोई कोशिश नहीं की।

कभी मैं कमीज के अंदर हाथ डाले ब्रा के ऊपर से उसकी छातियां सहलाता, कभी उसके पेट पर हाथ फिरता, तो कभी हाथ थोड़ा अंदर करके उसके नंगी पीठ को छूता।

ओह साहिल...” वो बराबर लंबी साँसें लेते हुए आहें भर रही थी और मुझसे लिपटी जा रही थी।

मेरे होंठ अब भी कभी उसके गालों पर होते तो कभी उसके होंठ और गले पर। और इसी बीच मेरा हाथ एक बार फिर कमीज के अंदर उसके पेट को सहलाता उसकी छाती पर आया पर इस बार ब्रा के ऊपर से आने के बजाय सीधा ब्रा के अंदर घुसा और उसकी नंगी छाती मेरे एक हाथ में आ गई।

साहिल...” वो मेरी बाहों में ऐसे मचल रही थी पानी के बिना मछली।

*

 
मैंने बारी बारी ब्रा के अंदर हाथ घुसाकर उसकी दोनों छातियों को महसूस किया, सहलाया। मेरे खुद के जिम में जैसे एक आग सी लगी हुई थी और मुझे खुद को समझ नहीं आ रहा था की मैं कैसे इस पार्क में उस आग को ठंडी करूं।

चलो कहीं और चलते हैं.” उसकी छातियां सहलाते हुए मैंने कहा।

“कहाँ?” वो आहें भरती हुई बोली।

मैंने चारों तरफ देखा। हमसे थोड़ी देर एक फुलवारी लगी हुई थी और हम उसके पीछे आराम से छिप कर बैठ सकते थे।

उधर चलते हैं...” मैंने इशारे से कहा।

नहीं मुझे नहीं जाना...” उसने फौरन मना कर दिया।

चलो ना...”

नहीं..."

उसने फिर मना किया और इस बार वो संभल कर बैठ गई। मेरा हाथ उसने अपनी कमीज के अंदर से निकाल दिया और अपना दुपट्टा सही करने लगी- “उधर एक परिवार आकर बैठी है। वो देख लेंगे हमें। अब प्लीज कुछ

मत करो...”

उसने पार्क के एक तरफ इशारा किया जहाँ एक परिवार चादर बिछा कर बैठने की तैय्यारी कर रहा था। पर उनका ध्यान हमारी तरफ बिल्कुल नहीं था और बहुत मुश्किल था की उनकी नजर हम पर पड़ती या वो हमें

नोटिस करते।

नहीं देखेंगे...” मैंने फिर उसे अपनी तरफ खींचा और हाथ सीधा उसकी कमीज के अंदर घुसा कर उसकी नंगी छातियों को पकड़ लिया।

ओह साहिल तुम क्या कर रहे हो.." वो आह भरकर बोली और फिर चुपचाप मेरे किस का जवाब देने लगी।

हम कुछ देर तक खामोशी से काम लीला में लगे रहे।

सपना...” कुछ देर बाद मैंने कहा।

हाँ.. वो मुझसे लिपटी हुई बोली।

कुछ मांगू?”

क्या?”

एक बार अपने ये दिखा दो ना...” मैंने उसकी छाती पर हल्के से दबाव डाला।

मेरी बात ने जैसे 1000 वाट के झटके का काम किया। वो फौरन छिटक कर मुझसे अलग हो गई- “बिल्कुल नहीं...” मेरा हाथ अपनी कमीज से निकालते हुए वो अपना दुपट्टा ठीक करने लगी।

प्लीज...”

नहीं...”

एक बार..."

तुमने टच कर लिया यही बहुत बड़ी बात है..."

एक बार देखने दो ना...”

नहीं...” वो अपने कपड़े ठीक करने लगी- “और अब चलो यहाँ से। बहुत देर हो गई है...”

थोड़ी देर तो रुक जाओ...”

रुकेंगी तो तुम फिर शुरू हो जाओगे..”

अच्छा नहीं करूंगा कुछ...”

पक्का ?”

एक आखिरी किस दे दो फिर कुछ नहीं करूंगा...” मैंने कहा।

 
एक आखिरी किस दे दो फिर कुछ नहीं करूंगा...” मैंने कहा।

नहीं..." उसने मना किया पर उसकी आँखों में भी वासना के डोरे साफ नजर आ रहे थे। मैं जानता था की उस लम्हे को जितना मैं एंजाय कर रहा हूँ उतना वो भी कर रही है।

“अच्छा बैठ तो जाओ..." वो खड़ी हुई तो मैंने फिर उसका हाथ खींचकर नीचे बैठा लिया।

थोड़ी देर तक हम दोनों खामोशी से बैठे रहे।

“एक आखिरी किस के बारे में क्या ख्याल है?”

मैंने कहा तो वो तड़प कर ऐसे मेरी तरफ पलटी जैसे मेरे पूछने का इंतेजार ही कर रही थी। अपने होंठ उसने सीधा मेरे होंठो पर रख दिए और एक बार फिर चूमने लगी। और मेरा हाथ जैसे अपने आप उसकी कमीज के अंदर घुसकर उसकी ब्रा से होता हुआ उसकी नंगी छाती पर आ टिका।

एक बार दिखा दो ना प्लीज...” मैंने फिर इलतेजा की।

बिल्कुल नहीं..”

“प्लीज...”

अपनी बेगम के देख लेना शादी के बाद...”

उसकी बात सुनकर मेरी हँसी छूट पड़ी।

अब बस करो...” कहकर वो अलग हुई और फिर संभाल कर बैठ गई।

“बहुत फास्ट हो तुम..” कुछ देर बाद वो बोली।

“क्या?” मैंने पूछा।

इतनी सी देर में कहाँ से कहाँ पहुँच गये। एक्सपर्ट हो। कितनी लड़कियों को ला चुके हो ऐसे...”

मैं सिर्फ हल्के से मुश्कुरा कर रह गया।

:

“सीरियस्ली साहिल। जरा सी देर में कितना कुछ कर डाला तुमने..”



थोड़ी देर के लिए फिर खामोशी छा गई। वो बैठी अपनी तेज हो चली साँसों को शांत करने की कोशिश करने लगी और मैं अपनी तेज हो चली धड़कन को नार्मल करने की कोशिश। पर मेरा दिल तो कर रहा था की एक बार फिर उसको पकड़कर चूम हूँ और उससे लिपट जाऊं।

और शायद यही हाल उसके दिल का भी था। इससे पहले की मैं कुछ करता, वो खुद ही घूम कर मेरी तरफ पलटी और मुझे सिमट गई।

“क्या हुआ?"

किस करो मुझे...”

“अभी तो किया था...”

तब तुम्हें करना था। अब मुझे करना है...”

मैं भला मना क्यों करता। मेरे लिए तो प्यासे को पानी मिलने जैसे बात हो गई थी। एक बार फिर से वही सिलसिला शुरू हो गया। मैं उसे चूमने लगा और मेरा हाथ उसकी कमीज के अंदर घुसकर कभी उसकी नंगी

छातियां सहलाता तो कभी पेट तो कभी पीठ।

वो भी बराबर मेरा साथ दे रही थी पर शायद उसकी हद यहीं तक थी। इससे आगे वो कुछ करना चाहती नहीं थी। मैंने भी जो मिले सो अच्छा सोचते हुए जितना मिल रहा था उसी का भरपूर फायदा उठाने की सोची।

इस बार जब मेरे होंठ उसके होंठों से होते उसके गले तक आए तो वहीं आकर रुके नहीं। उसके गले से नीचे होते हुए मैंने कमीज के ऊपर से ही उसके गले पर किस किया और थोड़ा नीचे होकर उसकी दोनों छातियों को चूम लिया।

“साहिल..” उसने मेरे बाल अपनी मुट्ठी में पकड़ लिए।

मैं उम्मीद कर रहा था की वो मना करेगी पर जब उसने कुछ नहीं कहा तो मैं बिना रुके अपने होंठ कमीज के ऊपर से ही उसकी दोनों छातियों पर फिराने लगा।

देख लो...”

अचानक मेरे कानों में आवाज आई तो मैं चौंक पड़ा- “क्या?” मैंने उसकी तरफ देखते हुए पूछा।

देख लो...” उसने फिर वही बात दोहराई।

मैं तो जैसे कब से इसके इंतेजार में ही बैठा था। मैंने फौरन उसकी कमीज का पल्लू पकड़ा।

“साहिल प्लीज..” उसने फौरन अपने कमीज को पकड़ लिया- “तुम्हें कसम है। कमीज ऊपर मत करना प्लीज...”

 
“फिर कैसे?"

ऊपर से देख लो...” उसने खुद ही रास्ता सुझा दिया।

मैं उसकी बगल से हटकर थोड़ा सा उसके पीछे होकर बैठ गया और उसकी कमीज के गले को थोड़ा आगे करते हुए अंदर निगाह दौड़ाई। उसकी छोटी छोटी छातियां सफेद ब्रा के अंदर कैद थी। ऊपर से मुझे कुछ खास नहीं, सिर्फ उसका क्लीवेज ही दिखाई दे रहा था। मैंने एक हाथ से उसकी कमीज के गले को पकड़कर आगे को खींचा

और दूसरा हाथ ऊपर से ही कमीज के अंदर डाला।

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कैसा लगा..” उसने मुझसे पूछा। वो आँखें बंद किए बैठी थी।

*अद्भुत..” मैंने कहा और उसकी एक छाती को पकड़कर ऊपर से ही बाहर निकालने की कोशिश की पर शायद ऐसा करते हुए मैंने कुछ ज्यादा ही जोर से दबा दिए।

“आहहह...” वो फौरन दर्द से बिलबिलाई और मेरा हाथ हटाते हुए आगे को सरक गई- “क्या कर रहे हो.. हमें दर्द नहीं होता क्या?”

आई आम सारी...” मैंने कहा।

पता है कितनी जोर से दबाया तुमने...” कहकर वो फौरन उठ खड़ी हुई।

अच्छा अच्छा गलती हो गई। बेध्यानी में इतनी जोर से दबा दिया...”

चलो अब...” वो खड़ी हुई अपने कपड़े ठीक करने लगी।

मैं भी उसके साथ उठकर खड़ा हुआ और उसको अपने गले से लगा लिया। हम दोनों एक दूसरे से लिपटे चुपचाप खड़े हो गये।

वो मेरे सीने से सर लगाए चुपचाप खड़ी थी और उसकी दोनों छातियां मेरे जिश्म से दब रही थी। उसकी साँस अब भी भारी थी जिसको वो कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी पर मेरा अभी रुकने का कोई इरादा नहीं था। खड़े खड़े ही मेरे हाथ जो उसकी पीठ पर थे फिसलते हुए उसकी गाण्ड पर आ टिके।

“साहिल प्लीज नीचे कुछ मत करना...” वो फौरन बोली पर मेरा हाथ हटाने या मुझसे अलग होने की कोई

कोशिश नहीं की।

ओके...” मैंने कहा और कुछ देर तक यूँ ही उसकी गाण्ड पर हाथ टिकाए खड़ा रहा। पैंट के अंदर मेरा लण्ड एकदम टाइट खड़ा हुआ था और क्योंकी वो मुझसे लिपटी हुई थी, इसलिए उसके जिश्म को छू रहा था।

एक बार दबाओ..” उसकी आवाज़ मेरे कान में पड़ी।

वो किस बारे में बात कर रही थी मैं नहीं जानता पर उसकी बात सुनते ही मैंने वो काम किया जो मैं करना चाह रहा था। उसकी गाण्ड को थोड़ा और मजबूती से पकड़कर मैंने अपने लण्ड को उसके जिश्म के साथ दबाया।

“आहहह..” उसके मुँह से आवाज आई और मेरे गले में बाहें डाले वो मेरे गले को चूमने लगी। मेरे लिए ये जैसे ग्रीन सिग्नल जैसा था। अब सारे पर्दे उठ चुके थे, हर मर्यादा खतम हो चुकी थी। मैंने उसकी गाण्ड को अच्छे से पकड़ा, अपने घुटने थोड़ा नीचे किए और अपने लण्ड को सीधा कपड़ों के ऊपर से उसकी चूत पर दबाने लगा।

इस सारे दौरान उसने एक बार भी मुझे रोकने या कुछ कहने की कोशिश नहीं की। वो चुपचाप मुझसे लिपटी खड़ी रही और मैं अपना लण्ड उसकी चूत पर दबाता रहा, घिसता रहा।

साहिल मैं गिर जाऊंगी...” उसने कहा तो मैंने ध्यान दिया की जोश जोश में मैं उसकी गाण्ड पकड़कर उसको हल्का सा हवा में उठा दे रहा था।

नहीं गिरगी। तुम मेरी बाहों में हो...” कहते हुए मैंने उसे पेड़ से लगाया और फिर लण्ड को उसकी चूत पर घिसने लगा।

साहिल, कुछ चुभ रहा है...” वो बोली पर मैंने ध्यान नहीं दिया। जब उसने फिर से यही बात कही तो मैं रुका। मुझे लगा वो कह रही है की पीठ पर पेड़ से लगे हुए कुछ चुभ रहा है।

“क्या है?” मैं पेड़ की तरफ देखता हुआ बोला।

यहाँ नहीं। नीचे कुछ चुभ रहा है..” उसका इशारा मेरे लण्ड की तरफ था।

मैंने कोई जवाब नहीं दिया और इस बार उसको घुमा दिया। अब वो पेड़ की तरफ मुँह किए खड़ी थी और मैं । उसकी जांघों को पकड़े अपना लण्ड उसकी गाण्ड पर रगड़ रहा था। मेरे हाथ उसकी चूत के काफी करीब थे और अब तक सिर्फ यही हिस्सा रह गया था जो मैंने छुआ नहीं था। मैंने अपना हाथ धीरे से ऊपर करते हुए उसकी टाँगों के बीच सलवार के ऊपर से उसकी चूत पकड़ ली।

*

*

!!

वो ऐसे उछली की हम दोनों ही गिरते गिरते बचे- “नहीं प्लीज.. यहाँ हाथ मत लगा...” कहते हुए वो फिर से नीचे बैठ गई।

मैंने कुछ कहना या सुनना जरूरी नहीं समझा। उसके साथ नीचे बैठते हुए मैंने उसके गले में पड़ा दुपट्टा हटाकर साइड में रख दिया।

क्या कर रहे हो?” वो बोली।

मैं खिसक कर उसके करीब हुआ और एक हाथ उसके कमीज के गले में डालते हुए उसकी एक छाती पकड़कर ऊपर से ही बाहर निकल ली।

साहिल." उसने फौरन अपनी छाती अंदर घुसा ली।

प्लीज...” मैंने कहा- “देख तो ली ही है मैंने। एक बार अच्छे से देखने दो...” मैंने फिर उसकी छाती पकड़कर कमीज के गले से बाहर निकल ली।

“साहिल दोनों बाहर नहीं आएंगे। कमीज टाइट है.. जब मैंने दूसरी छाती बाहर निकालने की कोशिश की तो वो

धीरे से बोली।

उसकी बात अनसुनी करते हुए मैंने उसकी दोनों छातियां जितनी हो सकी कमीज से बाहर निकल ली। वो भी

शायद जानती थी की अब मैं क्या करूंगा इसलिए अपनी कोहनियां टिकाते हुए घास पर हल्की से लेट सी गई। और तब मुझे वो निशान नजर आया। उसके निपल के चारों तरफ बने हुए ब्राउन कलर के ओरोला से थोड़ा सा परे काले रंग का निशान... एक गोल निशान जो पूरा काला था पर एक तिहाई लाल।

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ये क्या है?” मैंने पूछा।

“बचपन से है...” वो बोली।

मुझे समझ में नहीं आया की क्या करूँ या क्या कहूँ?

मेरे कानों में अपने पापा की आवाज गूंज उठी- “हमने जहाँ से तुम्हें गोद लिया था उन्हीं लोगों ने हमें बताया था की यू वेयर विन्स पर तुम दोनों में से एक को किसी ने गोद ले लिया था। लड़की थी शायद। दूसरे बचे थे तुम तो तुम्हें हम ले आए थे। ये निशान तुम्हारी छाती पर तबसे ही है और आश्रम वालों ने बताया था की ऐसा निशान तुम्हारे विन की छाती पर भी था...”

***** समाप्त *****

 
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