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* * * * *10 गुड़िया * * * * *
यू वान्ट टु शो मी इनसाइड..” मेहरा ने घूम कर मेरी तरफ देखा।
यू नो वाट.. आई वुड रादर स्टे आउट। आई कैन गिव यू द कीस सो यू कैन गो इन और लुक..” मैंने जेब से चाभी निकलते हुए कहा।।
“अरे यू किडिंग मी.. आप मुझे ये घर बेचना चाहती है और खुद मुझे ये कह रही है की यहाँ भूत रहते हैं. यू बिलीव दैट शीत अबौट द हाउस... आपको सीरियस्ली लगता है की ये घर हॉटेड है..” मेहरा हँसता हुआ बोला।।
“भूत ओर नो भूत, मैं इस घर के अंदर नहीं जाना चाहती...” मैंने चाबी उसकी ओर बढ़ाई।
।
मेहरा ने चाबी मेरे हाथ से ली और हँसते हुए गर्दन ऐसे हिलाई जैसे ताना मार रहा हो।
30 साल से ये घर मेरी प्रॉपर्टी है। मरने से पहले डैड ये मेरे नाम कर गये थे पर पिछले 30 साल से यहाँ कोई नहीं रहा, या यूँ कह लीजिए की मैंने रहने नहीं दिया। मेरे पति ने कई बार कोशिश की इस घर को बेच दिया जाए पर घर की लोकेशन ऐसी थी की बाहर का कोई खरीदने में इंट्रेस्टेड नहीं था और आस पास के लोग तो इस घर के नाम से ही डरते थे, खरीदना तो दूर की बात थी।
मेरी इस घर से डर और नफरत की वजह बस इतनी ही थी की इस घर की हर चीज मुझे 30 साल पहले की वो रात याद दिलाती है जब मेरे परिवार की खुशियां इस घर की कुर्बानी चढ़ गई थी। उस रात यहाँ जो कुछ हुआ था उसके बाद मेरी मम्मी ने अपनी बाकी की जिंदगी एक मेंटल संसथान में गुजारी और पापा ने शराब की बोतल में।
कहते हैं की ब्रिटिश राज के दौरान किसी ब्रिटिश आफिसर ने इंग्लेंड वापिस जाने के बजाय इंडिया में ही रहने का इरादा कर यहाँ पहाड़ों के बीच एक खूबसूरत वादी में ये घर बनाया था। लोगों की मानी जाए तो ये उस आफिसर की जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी। कहते हैं की घर बनने के कुछ अरसे बाद ही एक सुबह उस आफिसर और उसके बीवी बच्चों की लाशें घर के बाहर मिली थी। कोई नहीं जानता की उन्हें किसने मारा था पर लाशों की हालत देखकर यही अंदाजा लगाया गया की ये किसी जंगली जानवर का काम था।
घर का दूसरा मालिक भी एक अंग्रेज ही था। एक महीना घर में रहने के बाद वो और उसकी बीवी ऐसे गायब हुए जैसे गधे के सर से सींग। बहुत कोशिश की गई पर उन दोनों का कोई पता नहीं चला, लाशें तक हासिल
नहीं हुई। एक बार फिर इल्ज़ाम जंगली जानवरों पर डाल दिया गया।
घर के तीसरा मालिक एक आर्मी मेजर था। घर खरीदने के एक महीने बाद वो अपने कमरे के पंखे से झूलता। हुआ पाया गया। आत्महत्या की कोई वजह सामने नहीं आ पाई। कहते हैं की मेजर अपनी जिंदगी से बहुत खुश था और अपने आपको मारने की उसके पास कोई वजह नहीं थी। उसने ऐसा क्यों किया ये कोई नहीं बता पाया पर उसके बाद इस घर में रहने की किसी ने कोशिश नहीं की।
मेरे पिता कभी भूत प्रेत में यकीन नहीं रखते थे। उनका मानना था की भूत, शैतान जैसे चीजें इंसान ने सिर्फ इसलिए बनाई हैं ताकि उसका विश्वास भगवान में बना रहे। घर उन्हें कोड़ियों के दाम मिल रहा था और अपना एक वाकेशन होम होने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने फौरन खरीद भी लिया। जब मेरी माँ ने उन्हें रोकने
की कोशिश की तो उन्होंने हँसकर कहा था- “हाउस डोंट किल पीपल। पीपल किल पीपल...”
और फिर एक साल गर्मियों की छुट्टियां मनाने हम लोग पहली बार इस घर में रहने आए। मेरे पापा ने काफी खर्चा करके घर को रेनोवेट किया था और उस वक़्त देखने से लगता ही नहीं था की ये घर इतना पुराना था।
साहब मेरी बात मन लीजिए। वो घर मनहूस है, वहाँ जो रहा जिंदा नहीं बचा। क्यों आप अपने परिवार की जिंदगी खतरे में डाल रहे हैं..” वो टैक्सी ड्राइवर जो हमें घर तक छोड़ने जा रहा था रास्ते में बोला था।
ऐसा कुछ नहीं होता बहादुर..” पापा ने हँसकर उसकी बात टाल दी- “अगर कोई मरता है तो उसकी वजह होती है एक। बेवजह किसी की जान नहीं जाती...”
और जो लोग यहाँ मरे हैं उसकी वजह ये घर है साहब। इस घर में जो कोई भी बस्ता है, वो नहीं चाहता की उसके सिवा इस घर में कोई रहे..” बहादुर ने हमें रोकने की एक आखिरी कोशिश की थी पर पापा का इरादा नहीं
बदला।
मेरी उमर उस वक्त ** साल थी और मेरे भाई की ** साल। पापा और भाई यहाँ आकर काफी खुश थे और मम्मी जो पहले घबरा रही थी अब पापा की बातें सुन सुनकर काफी हद तक अपने आपको संभाल चुकी थी। रही मेरी बात तो एक * * साल की बच्ची के लिए यही बहुत होता है की वो अपने परिवार के साथ छुट्टयां मनाने । जा रही हैं जहाँ वो लोग बहुत मस्ती करने वाले थे। घर, भूत प्रेत इन सब बातों से तो मुझे मतलब ही नहीं था। और घर में आने के पहले ही दिन वो मुझे स्टोर रूम में पड़ी मिली थी। करीब दो फीट की वो गुड़िया जो उस वक़्त मेरी कमर तक आती थी और देखने से ही बहुत पुरानी लगती थी। उसकी एक आँख नहीं थी और एक टाँग टूटी हुई थी।
वाट आन अग्ली डाल...” मेरे भाई ने मेरे हाथ में वो गुड़िया देखी तो कहा।
आई लाइक इट..” मैंने उसको उठाकर धूल झाड़ते हुए कहा और लेकर अपने कमरे में चली गई। काश मुझे खबर होती की आने वाली कुछ रातों में सब कुछ किस तरह से बदल जाने वाला था।
यू वान्ट टु शो मी इनसाइड..” मेहरा ने घूम कर मेरी तरफ देखा।
यू नो वाट.. आई वुड रादर स्टे आउट। आई कैन गिव यू द कीस सो यू कैन गो इन और लुक..” मैंने जेब से चाभी निकलते हुए कहा।।
“अरे यू किडिंग मी.. आप मुझे ये घर बेचना चाहती है और खुद मुझे ये कह रही है की यहाँ भूत रहते हैं. यू बिलीव दैट शीत अबौट द हाउस... आपको सीरियस्ली लगता है की ये घर हॉटेड है..” मेहरा हँसता हुआ बोला।।
“भूत ओर नो भूत, मैं इस घर के अंदर नहीं जाना चाहती...” मैंने चाबी उसकी ओर बढ़ाई।
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मेहरा ने चाबी मेरे हाथ से ली और हँसते हुए गर्दन ऐसे हिलाई जैसे ताना मार रहा हो।
30 साल से ये घर मेरी प्रॉपर्टी है। मरने से पहले डैड ये मेरे नाम कर गये थे पर पिछले 30 साल से यहाँ कोई नहीं रहा, या यूँ कह लीजिए की मैंने रहने नहीं दिया। मेरे पति ने कई बार कोशिश की इस घर को बेच दिया जाए पर घर की लोकेशन ऐसी थी की बाहर का कोई खरीदने में इंट्रेस्टेड नहीं था और आस पास के लोग तो इस घर के नाम से ही डरते थे, खरीदना तो दूर की बात थी।
मेरी इस घर से डर और नफरत की वजह बस इतनी ही थी की इस घर की हर चीज मुझे 30 साल पहले की वो रात याद दिलाती है जब मेरे परिवार की खुशियां इस घर की कुर्बानी चढ़ गई थी। उस रात यहाँ जो कुछ हुआ था उसके बाद मेरी मम्मी ने अपनी बाकी की जिंदगी एक मेंटल संसथान में गुजारी और पापा ने शराब की बोतल में।
कहते हैं की ब्रिटिश राज के दौरान किसी ब्रिटिश आफिसर ने इंग्लेंड वापिस जाने के बजाय इंडिया में ही रहने का इरादा कर यहाँ पहाड़ों के बीच एक खूबसूरत वादी में ये घर बनाया था। लोगों की मानी जाए तो ये उस आफिसर की जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी। कहते हैं की घर बनने के कुछ अरसे बाद ही एक सुबह उस आफिसर और उसके बीवी बच्चों की लाशें घर के बाहर मिली थी। कोई नहीं जानता की उन्हें किसने मारा था पर लाशों की हालत देखकर यही अंदाजा लगाया गया की ये किसी जंगली जानवर का काम था।
घर का दूसरा मालिक भी एक अंग्रेज ही था। एक महीना घर में रहने के बाद वो और उसकी बीवी ऐसे गायब हुए जैसे गधे के सर से सींग। बहुत कोशिश की गई पर उन दोनों का कोई पता नहीं चला, लाशें तक हासिल
नहीं हुई। एक बार फिर इल्ज़ाम जंगली जानवरों पर डाल दिया गया।
घर के तीसरा मालिक एक आर्मी मेजर था। घर खरीदने के एक महीने बाद वो अपने कमरे के पंखे से झूलता। हुआ पाया गया। आत्महत्या की कोई वजह सामने नहीं आ पाई। कहते हैं की मेजर अपनी जिंदगी से बहुत खुश था और अपने आपको मारने की उसके पास कोई वजह नहीं थी। उसने ऐसा क्यों किया ये कोई नहीं बता पाया पर उसके बाद इस घर में रहने की किसी ने कोशिश नहीं की।
मेरे पिता कभी भूत प्रेत में यकीन नहीं रखते थे। उनका मानना था की भूत, शैतान जैसे चीजें इंसान ने सिर्फ इसलिए बनाई हैं ताकि उसका विश्वास भगवान में बना रहे। घर उन्हें कोड़ियों के दाम मिल रहा था और अपना एक वाकेशन होम होने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने फौरन खरीद भी लिया। जब मेरी माँ ने उन्हें रोकने
की कोशिश की तो उन्होंने हँसकर कहा था- “हाउस डोंट किल पीपल। पीपल किल पीपल...”
और फिर एक साल गर्मियों की छुट्टियां मनाने हम लोग पहली बार इस घर में रहने आए। मेरे पापा ने काफी खर्चा करके घर को रेनोवेट किया था और उस वक़्त देखने से लगता ही नहीं था की ये घर इतना पुराना था।
साहब मेरी बात मन लीजिए। वो घर मनहूस है, वहाँ जो रहा जिंदा नहीं बचा। क्यों आप अपने परिवार की जिंदगी खतरे में डाल रहे हैं..” वो टैक्सी ड्राइवर जो हमें घर तक छोड़ने जा रहा था रास्ते में बोला था।
ऐसा कुछ नहीं होता बहादुर..” पापा ने हँसकर उसकी बात टाल दी- “अगर कोई मरता है तो उसकी वजह होती है एक। बेवजह किसी की जान नहीं जाती...”
और जो लोग यहाँ मरे हैं उसकी वजह ये घर है साहब। इस घर में जो कोई भी बस्ता है, वो नहीं चाहता की उसके सिवा इस घर में कोई रहे..” बहादुर ने हमें रोकने की एक आखिरी कोशिश की थी पर पापा का इरादा नहीं
बदला।
मेरी उमर उस वक्त ** साल थी और मेरे भाई की ** साल। पापा और भाई यहाँ आकर काफी खुश थे और मम्मी जो पहले घबरा रही थी अब पापा की बातें सुन सुनकर काफी हद तक अपने आपको संभाल चुकी थी। रही मेरी बात तो एक * * साल की बच्ची के लिए यही बहुत होता है की वो अपने परिवार के साथ छुट्टयां मनाने । जा रही हैं जहाँ वो लोग बहुत मस्ती करने वाले थे। घर, भूत प्रेत इन सब बातों से तो मुझे मतलब ही नहीं था। और घर में आने के पहले ही दिन वो मुझे स्टोर रूम में पड़ी मिली थी। करीब दो फीट की वो गुड़िया जो उस वक़्त मेरी कमर तक आती थी और देखने से ही बहुत पुरानी लगती थी। उसकी एक आँख नहीं थी और एक टाँग टूटी हुई थी।
वाट आन अग्ली डाल...” मेरे भाई ने मेरे हाथ में वो गुड़िया देखी तो कहा।
आई लाइक इट..” मैंने उसको उठाकर धूल झाड़ते हुए कहा और लेकर अपने कमरे में चली गई। काश मुझे खबर होती की आने वाली कुछ रातों में सब कुछ किस तरह से बदल जाने वाला था।