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Adultery बड़े घरों की बहू बेटियों की करतूत

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बाहर खड़ी रिया के कान भी खड़े हो जाते हैं राज के मुँह से अपना नाम सुनकर। वो आँखें खोलकर अंदर देखती हैं। अंदर का दृश्य किसी को भी गरम करने के लिए काफी था। रिया राज का काला लौड़ा नेहा की चूत में लगातार अंदर-बाहर होता हुआ देखती है।

राज- रिया को भी मजा करने का हक है।

नेहा- “आहह.. राज बोल्ल दूंगी। तुम्म इस वक्त मेरे साथ हो तो बस मुझे मजा दो.."

रिया- "ये दीदी क्या बोल रहा है? और ये कमीना मुझे मजे देने की बात कर रहा है..." रिया का हाथ अभी भी उसकी चूत को सहला रहा था साड़ी के ऊपर से।

राज. साली की चूचियां मस्त हैं और उसकी गाण्ड का तो दीवाना हो गया है में।

नेहा- अहह... अहह... अहह... आहह... राज हौ.."

राज थोड़ी देर ऐसे ही चोदने के बाद रुक जाता है। नेहा की हालत खराब हो गई थी इतने घमासान चुदाई से। नेहा हाँ फ रही थी।

राज- "क्या साली, इतने में ही थक गई। अभी तो पूरी रात बची है। इसी तरह उस रिया का स्टेमिना भी देखना पड़ेगा। देखता हूँ कितूने देर टिकती है?"

नेहा एक बार झड़ चुकी थी लेकिन राज की ऐसी चुदाई से वो फिर गरम हो चुकी थी। नेहा राज को धक्का देकर बेड पर गिरा देती है और खुद उसपर चढ़ जाती है।

नेहा- "उसका स्टेमिना बाद में देख लेना। पहले मुझे तो शांत करो ना राज। अपनी गर्लफ्रेंड को छोड़कर तुम किसी और के बारे में क्यों सोच रहे हो?"

रिया मन में- "गर्लफ्रेंड... ये दीदी क्या बोल रही है तो क्या दीदी इस बूढ़े की गर्लफ्रेंड हैं और ये डा दीदी का

बायफ्रेंड? ओ माई गोड.. और ये सब बातें रिया को और उत्तेजित कर रही थी। नेहा का जोश देखकर उसकी चूत भी गीली हो रही थी। कहीं ना कहीं उसकी चूत भी राज का लण्ड मांग रही थी।

इधर नेहा राज पर चलकर अपनी टाँगें फैलाकर अपनी चूत राज के लौड़े पर सेट करती है, और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगती है- “आहह." और अब नेहा राज की छाती पर हाथ रखकर उसके लौड़े पर उछलने लगती है। नेहा नगरम भी तो जोश में वो बिफल रंडी जैसे बिहेव कर रहीं औ।

रिया ये देखकर चकित थी कि बाहर से भोली भाली दिखने वाली नेहा असल में ये एक बड़े लौड़े से बेशर्मा की तरह चुदवा रही है।

राज अम आराम से लेटा हुआ था। इस घर की खूबसूरत जवान बहू जो उसके काले लौड़े की दीवानी भी। रंडियों

की तरह चुदवा रही थी।

नेहा- “आहह... राज क्यों तुम दूर रहे मुझसे इतने दिन?"

राज- साली तभी तो मेरे पास आ सकती थी। तू क्यों इतने दिन चुप रहो?

नेहा ऊपर-नीचे होते हुए- "मरी मेरे राजा... अब से कभी भी तुमको दूर नहीं जाने दूंगी.." इतना बोलकर नेहा झुक कर अपने गुलाबी होंठ राज के काले सूखे बड़े होंठों से मिला देती है।

रिया की धड़कन ये दृश्य देखकर तेज हो जाती हैं। रिया मन में. "ये क्या दीदी इस बूढ़े को किस कर रही हैं। छी... कितना बदसूरत है वो, बीड़ी सिगरेट सब पीता है वो छा.... दीदी कसे किस कर रही हैं उसे? आहह.."

नेहा राज को किस करते हुए ऊपर-नीचे भी हो रही थी उसके लौड़े को काफी हाट दृश्य था इस घर की जवान खूबसूरत बहू एक काले बुड्ढे ड्राइवर से चुदवा रही थी। राज का प्लान कामयाब हो रहा था वो जानता था की नेहा की बेशर्मी रिया देख रही होगी, और वैसे ही हो भी रहा था।

रिया खुद अपनी चूत सहलाने में जुटी थी राज और नेहा की चुदाई देखते हुए।

नेहा किस तोड़कर फिर से जुट जाती है उछल कूद में राज के काले लण्ड लौड़े पर- “आहह... अहह... अहह.."

और नेहा थकने लगी औ खुद मेहनत करके।

राज. साली क्या हुआ थक गई क्या?

नेहा- नहीं जा राज दर्द तो होता है ना इतनी देर से कर रही हैं।

राज- “साली तो क्या अहसान कर रही है? तुझे मेरे लण्ड की ज़रूरत है मुझे तेरी चूत को। नहीं समझी?" राज अब नेहा को जलील करने पर लगा हुआ था। ‘

नेहा- ऐसा मत कहू राज, मैं ट्राई कर रही हूँ ना।

राज. ट्राई मत कर सीधा सीधा कर। ‘

नेहा ऊपर-नीचे हो ही रही थी कि थकान की वजह से वो राज के ऊपर गिर जाती हैं। जिससे उसकी चुचियां धंस जाती हैं राज की छाती में "आँच..."

राज को गुस्मा आ रहा था- " रिया रंडी इतनी जल्दी हो गया तेरा। किसी काम की नहीं है तू। तेरे से अच्छा स्टेमिना तो उस रिया में होगा.."

बाहर खड़ी रिया के चेहरे पर स्माइल आ जाती हैं, और सोचती है- "कमीना कहीं का... बेशर्मों की तरह मेरे

स्टेमिना की बात कर रहा है। इसे कैसे पता मेरे स्टेमिना के बारे में? क्या मैं दीदी से ज्यादा देर तक टिक पाऊँगी इस जानवर के सामने? छी... छी... में क्या सोच रही हैं। ये बूढ़ा तो मुझे पागल कर रहा है.

अंदर नेहा गरम थी तो वो राज की बातों का खयाल नहीं कर रही थी। वो नहीं जानती थी कि उसके नाम से राज रिया को पटा रहा है।

नेहा- "ऐसा क्यों बोल रहे हो राज तुम मेशी बुराई क्यों कर रहे हो। रिया को मुझसे क्यों कंपेयर कर रहे हो? वो मेरे सामने कुछ नहीं.." और ये सब नेहा जोश में बोल रही थी।

राज- अच्छा साली तो साबित करके दिखा, और रिया भी साबित करके दिखाएगी।

रिया को नेहा की बात सुनकर अजीब लगा था। ऐसा पहली बार हुआ था कि नेहा के मुह से उसने उसकी बुराई सुनी हो।

रिया मन में- "ये क्या बोल रही हैं दीदी? सिर्फ उस बूढ़े के लिए दीदी मुझे बुरा बोल रही हैं। अब तो में भी साबित कर के दिखाऊँगी की में दीदी से बेहतर हूँ.." और रिया राज के बिछाए हर जाल में आ रही थी।

नेहा राज की बातों से और जोश में आ रहा थी । लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था क्या करे? वो तो थक चुकी थी राज के लौड़े पर कूद-कूदकर। राज बस लेटा हुआ था। नेहा कुछ सोचकर लण्ड पर से उत्तरकर नीचे आती है और एक बार राज की तरफ देखकर झुक कर राज का लौड़ा पकड़कर अपने मुँह में डाल देती हैं।

राज- "ओह्ह... साली क्या कर रही है?" और राज नीचे देखता है तो नेहा के चेहरे पर एक कातिलाना स्माइल थी। वो लण्ड चूसने लगती है।

बाहर रिया ये देखकर दंग रह जाती है- "छी... कैसे दीदी उस बूढ़े का लण्ड चूस रही है? छी.... कितना गंदा होता हैं वा लेकिन दीदी तो कर रही हैं। वो में कैसे चुसूंगू?" और रिया अंजाने में ही सही लेकिन राज से चुदवाने तैयार हो गई थी ।

नेहा राज का काला लौड़ा बड़े ही मजे के साथ चूसे जा रही थी। जैसे कोई कुल्फी चूस रही हो। वो अपना स्टेटस सब भूल चुकी थी। वो भूल चुकी थी की वो इस घर की बहू है। और एक बड़े खानदान से आई हुई है। पढ़ी लिखा होने के बावजूद भी बेशर्मी की तरह इस बूढ़े से चुदवा रही थी। लण्ड चूस-चूसकर गीला कर देती है अपनी भूक से।

राज एंजाय कर रहा था। उस जैसे घटिया आदमी को इस तरह की सविस मिल रही थी। एक तो चुद चुकी थी बेशर्मों की तरह और अब दूसरी तैयार हो रही थी।

नेहा लण्ड चूसने के बाद कहती है- "देखना है ना राज की मैं क्या कर सकती हैं? अब देखो..." उतना बोलकर वी कावगर्ल पोजीशन में आ जाती है राज के ऊपर। और राज का लौड़ा अपने कोमल हाथों में पकड़कर अपनी गाण्ड के छेद पर सेट करती है।

जी हाँ । नेहा राज को इंप्रेस करने के लिए अपनी गाण्ड मरवाने जा रही थी। हालांकी राज पहले भी उसकी गाण्ड मार चुका था। लेकिन आज खुद नेहा राज का लौड़ा अपनी गाण्ड में लेने वाली थी।
 
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