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Adultery बड़े घरों की बहू बेटियों की करतूत

इधर नेहा रिया के रूम में आ जाती है। रिया जाने के लिए तैयार हो रही थी।

रिया नेहा को यहाँ देखकर- "क्या हुआ दीदी, आप भी आ रहे हो क्या?"

नेहा- नहीं। वो मैं ये कहने आई थी की सब लोग उधर जा रहे हैं तो मैं अकेली रह जाऊँगी इधर।

रिया- इसीलिए कह रही हैं दीदी आप भी चलो हमारे साथ।

नेहा- वो... रिया क्यों ना तुम भी रुक जाओ इधर हो। मम्मीजी और पापाजी हो आएंगे उधर।

रिया- लेकिन दीदी वो दोनों अकेले?

नेहा- अरे तो तू सौरभ को काल कर देना... मैं विशाल को काल कर देती हैं। वो दोनों चले जाएंगे उनके साथ।

रिया- ठीक है दीदी में करती हूँ काल सौरभ को।

नेहा- ठीक है में विशाल को काल कर के आती है।

फिर नेहा वहीं से ब्याहर आ जाती है। नेहा विशाल को काल करके सब बताती हैं और वो और सौरभ उधर से घर के लिए निकल जाते हैं। नेहा बाहर हाल में आई हुई थी। तभी उसकी सास अपने रूम से तैयार होकर आती है।

नेहा उधर जाकर- "मम्मीजी सब ठीक हो जायगा। फिकर मत कीजिये.."

सावित्री वो सब तो ठीक है बहू, लोकल तुम नहीं आ रही हो क्या?

नेहा- नहीं मम्मीजी मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है। मैंने विशाल को काल कर दिया है वो लोग आ रहे हैं।

सावित्री ठीक है बहू ।

थोड़ी देर में वो लोग आ जाते हैं। फिर वो लोग निकल पड़ते हैं उधर जाने के लिए। अब घर में नेहा और रिया ही बचे हुए थे, और नेहा को रूम में राज।

नेहा हाल में खड़ी थी कि उसे एकदम से याद आता है की उसके गम में तो राज है। नेहा जल्दी से जाने लगती है

रिया- दीदी क्या हुआ? कहाँ इतना जल्दी जा रही हो?

नेहा- वो कुछ नहीं बस वो थोड़ा गीजर ओन किया था। नहाने जा रही हैं।

रिया- ठीक है दीदी। रात भी बहुत हो गई है। मैं भी सो जाती हैं।

नेहा- "ठीक है." फिर नेहा उधर चली जाती है। रुम में जाकर वो देखती है की राज बेड पर पूरा नंगा लेटा हुआ है। नेहा उसे देखकर शर्मा जाती है।

राज- हाय आ गई त। आ जा जल्दी से।

नेहा धीरे-धीरे उधर जाने लगती है। नेहा एक नाइटी में और चलते हुए उसकी चूचियां हिल रही थी। जिसे राज बड़े ही कामुक नजर से देख रहा था। नेहा बेड के पास आ जाती है।

राज. क्या हुआ नीचे? उस रिया मेमसाहब को रोक लिया या नहीं?

नेहा- हाँ रोक लिया।

राज- और अब तुम दोनों ही हो ना घर में?

नेहा- हाँ ।

राज- क्या बात है मेरी जान... अब तने की जा मेरी गर्लफ्रेंड वाली बात।

नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है। राज फिर अपनी जेब से अपना छोटा सा मोबाइल निकालकर किसी को काल लगता है।

राज- "हाँ सुन बे तेरी रिया अकेली है अपने रूम में। और घर में कोई भी नहीं हैं। जल्दी से आ अंदर... राज ने जय को काल किया ।

नेहा- किसे काल किया था तुमने?

राज- मेरी जान, रिया के आशिक को।

नेहा- तुम दोनों सच में पागल हो।

राज. पागल तो मैं हैं ही, तेरे हान के प्यार में।

नेहा शर्मा जाती है। राज उसे अपने ऊपर खींच लेता है। इधर जय मुख्य दरवाजे से होते हए आराम से अंदर आ जाता है। जय चलते हुए जा रहा था रिया के रूम की तरफ।

इधर राज नेहा को अपने ऊपर खींच कर उसे अपनी बाहों में भरे हुए था।

नेहा- जानेमन अब तो तेरे घर में कोई नहीं है। बहुतू मज़े करेंगे।

नेहा- क्या कोई नहीं है। रिया हैं ना? और तुमने इतना कुछ किया आलरेडी। थकते नहीं क्या तुम?

राज. तेरे साथ अक गया तो क्या फायदा मेरी जान। तू चीज ही ऐसी है की मेरा मन तुझसे कभी नहीं भरता।

नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती हैं। तभी रिया के कमरे से आवाज आती हैं।

रिया- "दीदी दीदी.."

राज इधर समझ जाता है की वहाँ जय आ चुका है।

नेहा- यह रिया को क्या हो गया? क्यों चिल्ला रही है? मैं देख कर आती हैं।

राज उसका हाथ पकड़कर वापस बिठा देता है, और कहता है- "मेरी जान फिकर मत कर। कुछ नहीं हुआ उसे। वो उसका आशिक आ गया लगता है.."

नेहा- लेकिन वो चिल्ला रही है। कहीं तुम्हारे उस दोस्त ने कुछ कर तो नहीं दिया?

राज- कुछ नहीं करेगा।

नेहा थोड़ा शांत हो जाती है।

इधर रिया के रूम में हश्य ही कुछ अलग था। रिया को दीवार से सटाया हुआ जय बिल्कुल उसके सामने खड़ा

था। रिया की दोनों नाजुक कलाई जय के काले हाथ पकड़े हुए थे। और रिया के चेहरे पर गुस्सा साफ नजर आ रहा था। रिया जो तैयार हुई थी जाने के लिए। अभी भी उन कपड़ों में भी। बी जीन्स और टाप में थी। टाप थोड़ा टाइट आ। इस तरह दीवार से सटे होने की वजह से रिया की धड़कनें तेज चल रही औं। जिसकी वजह से उसकी चूचियां उस टाइट टाप में ऊपर-नीचे हो रही थी। जय अपना बदसूरत चेहरा लिये हुए उसके सामने खड़ा आ, और रिया को देख रहा था। रिया लाख कोशिश कर रही थी उसकी पकड़ से छुटने की लेकिन नहीं हो पा रहा था उससे

जय- भूल गई क्या थप्पड़ जो तूने मुझे मारा था।

रिया- मैं चिल्लाऊँगी।

जय- चिल्ला चिल्ला। तेरे घर में कोई नहीं है मुझे पता है।

रिया- "दीदी दीदीड....

जय- तेरी दीदी नहीं आनेवाली।

रिया- क्यों?

जय अब रिया के गले को चूमने लगता है।

रिया- आहह... दूर रहो मुझसे ।

जय- "तुझसे दूर रहने के लिए यहीं नहीं आया हूँ मैं समझी..." ऐसा बोलकर जय अब रिया के गल्ले को चाटने लगता है।

रिया- "ओहह... दूर रहो मुझसे..." रिया को पहले भी जय ऐसा पकड़ चुका था लोकिन आज घर पर कोई नहीं आ। रिया को जय के मुँह से आती गंदी बदबू अलग से परेशान कर रही थी। कहती है- "छोड़ मुझे कमीने.."

जय उसको छोड़ कर- "ले छोड़ दिया। अब क्या?"

रिया जय को एक बार गुस्से से देखकर, उधर से जाने लगती है। वो थोड़ी दूर जाती है की जय उसे पीछे से पकड़ लेता है और उसकी चूचियां दबाने लगता है।

रिया- "अहह.. कमीने..." और रिया को अपनी गाण्ड की दरार में जय का बड़ा लण्ड महसूस हो रहा था। साइज महसूस करके ही रिया बहुत डर जाती है। रिया उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश करती हैं। लेकिन जय की पकड़ बहुत मजबूत थी।

जय रिया के कान के पास आकर- "तो इस मखमली जिम के लिये बहुत तड़पा है में..."

रिया को ये सुनकर ही घिन आ रही थी। वो फिर से जय की पकड़ से छूटने की कोशिश करती है, लेकिन नहीं हो पाता। उल्टा जय के लण्ड का दबाब उसकी गाण्ड पर और ज्यादा हो रहा था। अब तो जय रिया की गाण्ड पर दबाव डाल रहा था अपने लण्ड से। जो रिया के लिए कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था।

इधर राज और नेहा इस रूम में मस्ती कर रहे थे। राज की बाहों में नेहा थी।

राज- मेरी जान, चल ना देखते हैं वो दोनों क्या कर रहे हैं?

नेहा- देखो राज मैं अभी भी बोल रही है प्लीज... रिया के साथ ऐसा ना होने दो। वो अच्छी लड़की है।

राज- तू फिर से शुरू हो गई। मैंने कहा ना कुछ नहीं होता। चल देखते हैं क्या हो रहा है वहीं।

नेहा- नहीं नहीं मुझे नहीं देखना।

राज- चल ना मेरे लिए।

नेहा- "मुझे नहीं देखना राज प्लीज़."

राज- तू ऐसे नहीं मानेगी ना?" और राज नेहा की तरफ कामुकता से देखने लगता हैं।

नेहा जानती थी राज क्या कर सकता है। कहा- "नहीं नहीं चल रही हूँ.."

राज- "ये हुई ना बात.." फिर राज आगे चलने लगता है।

नेहा उधर जाने के लिए झिझक रही थी।

राज- चल जल्दी।

नेहा भी चलने लगती हैं। वो रिया के रूम के बाहर तक पहुँच जाते हैं। रूम के अंदर से आवाज आती है।

"कमीनी... छोड़ मझे." ऐसी सब आवाजें आ रही थी।

नेहा धीरे से- "देखो राज ये गलत कर रहा है वो रिया के साथ। प्लीज़... रोको उसे...

राज- कुछ नहीं कर रहा है मेरी जान। बस उसे प्यार कर रहा है।

नेहा- ये कैसा प्यार हैं जबरदस्ती से?

राज. पहले ऐसे ही होता है। बाद में वो भी लाइन पर आ जाएगी।

नेहा चुप हो जाती है। दरवाजा थोड़ा सा खुला था, जिससे यह दोनों अंदर देख रहे थे। अंदर जय रिया को पीछे से पए था, और उसकी चूचियां दबा रहा था। अब तक रिया की सिसकारियां निकलने लगी थी।

बाहर का भी दृश्य कुछ कम हाट नहीं था। नेहा आगे खड़ी थी और उसके पीछे राज। नेहा बड़े ही उत्तेजना के साथ अंदर देख रही थी, और राज भी उसके पीछे खड़ा अंदर देख रहा था।

अंदर जय अब रिया को गरम होता देखकर, अपना एक हाथ रिया की कमर से होते हुए उसकी साड़ी के ऊपर से उसकी चूत पर ले जाता है। इस तरह हाथ लगने से रिया एक बार के लिए उछल पड़ती है। लेकिन उसके चेहरे के भाब चेंज हो रहे थे। जय अब रिया की चूत को साड़ी के ऊपर से ही मसलने लगता है।

बाहर ये सब देखकर राज का लण्ड खड़ा हो जाता है। राज नेहा के कान के पास जाकर जो बड़े गौर से अंदर का दृश्य देख रही थी, कहता है- "देख मेरी जान कैसे दोनों मजे कर रहे हैं?

नेहा कुछ नहीं बोलती



राज अब उससे चिपक के खड़ा हो जाता है। जिसे महसूस करके नेहा एक बार पीछे देखती है। फिर आगे देखने लगती है।

जय अब अंदर रिया की चूत सहलाना बंद कर चुका था। इसी बीच रिया झड़ चुकी थी। जय अब रिया को बेड पर धकेल देता है। रिया बेड पर गिर जाती हैं। अब जय अपनी शर्ट निकालने लगता है।

रिया- प्लीज्ज... ऐसा मत करो मेरे साथ। छोड दो ।

जय कुछ नहीं बोलता। बस अपनी शर्ट निकाल देता है। एकदम काला सा दिखने वाला शरीर उसका पहली बार रिया के सामने था।

बाहर नेहा की नजर भी पहली बार उसके पति और राज के अलावा किसी गैर आदमी के नंगे शरीर पर पड़ी।

राज उसके पीछे चिपका हुआ बड़े कामुक तरीके से नेहा की गाण्ड से चिपका हुआ था। जो नेहा को उधर गरम कर रहा था। लेकिन नेहा चुपचाप खड़ी देख रही थी अंदर।

रिया अपना मुँह फेर लेती है जय को कपड़े निकालता देखकर, और कहती है- "क्यों मेरी जिंदगी खराब कर रहे हो' प्लीज.. छोड़ दो मुझे.."

जय कुछ सोचकर- "अच्छा ठीक है छोड़ देता हूँ लेकिन एक शर्त पर।

रिया जय की तरफ हैरत से देखते हुए- "कसी शर्त?"

जय अपना लौड़ा मसलते हुए- "एक बार मेरा लण्ड चूस दे। फिर मैं तुझे छोड़ दूंगा.."

रिया- क्या? गंदे कहीं के। में नहीं करने वाली ये सब।

जय- तो फिर तैयार हो जा। आज परी रात तेरे साथ मजे करना है मुझे।

रिया इस बात से दूर जाती हैं- "नहीं नहीं प्लीज... मत करो ये सब..."

जय- देख तुझे कुछ तो करना पड़ेगा। या तो लण्ड चूस या फिर चुदाई के लिए तैयार हो जा।

बाहर खड़ी नेहा जय की बातें सुन रही थी। उसका बुरा हाल हो रहा था रिया की ये हालत देखकर। लेकिन पता नहीं वो फिर भी बड़ा इंटरेस्ट लेकर अंदर का शो देख रही थी।
 
रिया मन में- "ये में कहीं फंस गई। इस कमीने बढ़े को तो में पोलिस के हवाले कर देंगी। अब में क्या करेंग?"

जय- बोल बोल क्या करना चाहती है?

रिया नजर झका लेती है।

जय जानता था की रिया लण्ड चसने के लिए तैयार है। अब जय अपने पैंट की जिप खोलने लगता है।

इधर तभी ऐसा करते हुए देखकर नेहा पीछे हट जाती है।

राज जो उसके पीछे खड़ा था वो भी पीछे हट जाता है, खर कहता है- "क्या हुआ तुझे?"

नेहा- मुझे नहीं देखना आगे।

तभी राज अंदर देखता है। अंदर का हश्य देखकर राज भी समझ जाता है की नेहा क्यों पीछे हटी।

राज- "ओहो तो यह बात है। ठीक है चल तेरे रूम में चलते हैं...

नेहा कुछ नहीं बोलती। बस चलने लगती है अपने रुम को और। राज भी खुश होकर उसके पीछे पीछे जाने लगता है।

इधर जय जिप खोलकर अपनी अंडरवेर में से अपना काला लण्ड बाहर निकाल लेता है।

रिया उस काले बदसूरत लण्ड पर नजर पड़ते ही अपना मुँह फेर लेती हैं।

जय अपना लण्ड पकड़कर धीरे से ऊपर-नीचे करने लगता है, और कहता है- "चल अब इधर देख.."

रिया को घिन आ रही थी एक गंदे बटे के सामने लाचार होकर। वो कुछ करने की हालत में भी नहीं थी। घर में कोई था भी नहीं। जय अब रिया के मुँह के नजदीक अपना लण्ड ले जाता है। रिया अपना मुंह दूसरी तरफ किर हुई थी। पेशाब की बदबू से ही उसे उल्टी सी आने लगती है।

जय- इधर देख जल्दी।

रिया अब धीरे से अपना मुँह उधर करती है। लण्ड देखते ही फिर से वो अपना मुँह फेर लेती हैं। इतना गंदा लण्ड था जो रिया ने अपने भयानक सपने में भी नहीं देखा था। ये बात जय भी जानता था की रिया जैसी बड़े घर की इतनी खूबसूरत बह ने इतना गंदा लण्ड कभी नहीं देखा होगा।

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जय अब रिया के होंठों के करीब अपना लौड़ा ले जाता है। उसके गुलाबी होंठों के बिल्कुल पास जय का काला मोटा लण्ड था। जय बोला- "चल मँह खोल अपना..."

रिया बिलकुल नहीं चाहती थी की इतना गंदा लण्ड वो अपने मुँह में ले। वो भी एक काले बटे का। सोचकर ही रिया को घिन आ रही थी। रिया बेमन से अपना मुँह खोलती हैं। जय के चेहरे पर एक कमीनी स्माइल आ जाती हैं। जय धीरे से अपना काला लौड़ा रिया के गुलाबी होंठों से लगा देता हैं।

रिया के चेहरे पर लण्ड अपने होंठों से टच होते ही एक अजीब सा अनुभूति आ जाती है, जैसे वो उल्टी करना चाहती हो। लेकिन वो खुद को संभाल लेती हैं।

जय अब अपना लण्ड धीरे-धीरे रिया के मुंह में डालने लगता है। रिया को बहुत बदल आ रही थी उस गंदे लण्ड से। लेकिन वो बस बुत बनी बैठी थी। जिससे जय को आसानी हो रही थी। रिया को जय की झांटों से भी परेशानी हो रही थी। उन घनी झांटों से पसीने की बदब अलग आ रही थी। जय का काला मोटा लण्ड बहुत मुश्किल से रिया के मुँह में जा रहा था।

जय- अहह... क्या मजा है इसमें।

जय को रिया के मुँह की गर्मी अपने लण्ड पर पागल बना रही थी। एक बड़े घर की खूबसूरत बह के मुँह में अपना काला लौड़ा डाले हुए रहना उसको उत्सुकता से पेल रहा था।

जय- “आहह..." और जय आधा लण्ड अंदर डालने के बाद धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगता है।

रिया अपना मुह जितना हो सके उतना खुला रखने की कोशिश कर रही थी। जय अपना पूरा लण्ड नहीं घुसा पर रहा था अंदर। था ही उतना बड़ा उसका लण्ड। वैसे करते हुए उसके बाल्स जो एकदम गंदे काले लग रहे थे। हर धक्के के साथ हिल रहे थे। रिया के बाल बार-बार उसके चेहरा पर आ रहे थे।

जय अब रिया के बाल अपने एक हाथ से अपनी मुट्ठी में पकड़ता है। और अपने लण्ड पर रिया का चेहरा आगे-पीछे करने लगता है। जय मजे में डूबा हुआ था। जय के खड़े होने की वजह से उसको रिया के ब्लाउज़ से उसकी क्लीवेज साफ दिख रही थी। जो जय को और पागल बना रही थी। ऊपर से रिया के गले में लटकता हुआ उसके पति के नाम का मंगलसूत्र। रिया के मुँह से गप्न-गप्प की आवाजें आने लगती है। रिया की भूक से जय का लौड़ा गोला हो गया था। रिया को अपने मुँह में अजीब सा नमकीन टेस्ट आ रहा था।

रिया ने कभी नहीं सोचा था की वो कभी अपने पति के अलावा किसी गैर मर्द का वो भी एक गंदा काला बुड्ढ़ा का लण्ड चूसेगी। थोड़ी देर बाद जय से रहा नहीं जाता और वो रिया के सिर को पीछे से पकड़कर अपने लण्ड पर दबाता है। इस बार काफी लण्ड उसके मुँह में अंदर चला जाता है।

रिया को बहुत तकलीफ हो रही थी। रिया खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी। लोकल जय ने बहुत मजबूती से पकड़ रखा था उसके सिर को। जय का लण्ड रिया के गले तक गया हुआ था। अभी भी थोड़ा लण्ड बाहर था। जय की झांटें रिया के मुंह के करीब थी। कुछ एक मिनट ऐसे करते हुए हो गया था। रिया की साँसें अटकी हुई थी। वो जैसे अब किसी भी वक्त बेहोश हो जायेगी। उसकी आँखें बंद होने लगती हैं।

तभी जय अपना लण्ड बाहर निकाल लेता है। जैसे ही लण्ड बाहर निकलता है रिया झक कर खांसने लगती हैं। वो बुरी तरह से सांस ले रही थी। अपनी सौंसों पर काबू पानी की कोशिश कर रही थी। वहीं जय के काले लौड़े पर रिया की थूक लगी हुई थी। रिया खोंसते हुए बहुत सेक्सी लग रही थी। बाल उसके चेहरे पर आए हुए थे। उसके गुलाबी होठों पर उसकी भूक लगी हुई थी। जय भी ये सब देखकर बहुत खुश हो रहा था।

रिया थोड़ी देर बाद नार्मल हो जाती है। अब रिया उठकर वाशरूम की तरफ जाने लगती है। तभी जय उसका गोरा कोमल हाथ पकड़ता है। जिसे देखकर प्रिया उसकी तरफ गुस्से से देखती है।
 
रिया- छोहो मेरा हाथ।

जय- क्यों?

रिया- तुमको जो चाहिए था वो मिल गया ला। इसलिए छोड़ो मुझे।

जय- तुझे इस हालत में देखकर में और बहक रहा हैं।

रिया इस बात पर डर जाती है, और कहती है- "देखो तुमने सिर्फ इतने की ही बात की थी...

जय- वादा तो नहीं किया था ना?

रिया अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करती है- "छोड़ो मुझे."

जय- तुझ छोड़ने के लिए नहीं चोदने के लिए पकड़ा है।

रिया फिर से उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश करती है। लेकिन जय उसे जाने नहीं देता। बल्कि इस बार जय उसे जोर से अपनी ओर खींचता है। जिससे वो जय की ओर खिंची चली जाती है। रिया सीधा जय की बाहों में चिपक जाती है। जिस फोर्स से जय ने उसे खींचा था की रिया की चूचियां जय की छाती से दबी हुई थीं। जय रिया को पीछे से अपनी तरफ और दबाकर जोर से अपने गले लगाता हैं। जिसमें रिया की चूचियां जय की छाती से दब जाती हैं।

थोड़ी देर बाद जय रिया की गाण्ड फर अपने हाथ रखता है और मसलता है। जिसमें रिया को अजीब सी फीलिंग आती है। अब तक जय की जबरदस्ती से उसे बहुत घिन आ रही थी। लेकिन मैं जय का उसकी गाण्ड दबाना उसे एराटिक फीलिंग दे रहा था। लेकिन फिर भी वो खुद को जय से हारना नहीं चाहती थी, और लगातार विरोध कर रही थी। लेकिन इस बार जय की हरकत ने उसे अंदर से हिला दिया था। जय का अकड़ा हुआ लण्ड उसको अपनी चूत पर चुभ रहा था साड़ी के ऊपर से। दोहरा अटक हो रहा था उसपर जय दवारा।

जय मन में- "ये साली अब थोड़ा शांत लग रही हैं। यही सही मौका है इसकी और गर्म करने का...'

जय अब आगे से झटके मारने लगता है। जैसे वो रिया को चोद रहा हो। इस तरह हरकत रिया उम्मीद नहीं कर रही थी। लेकिन ऐसा करने से उसके शरीर में एक बिजली से दौड़ जाती है। उसका बदन अकड़ने लगता है। इसी बात का फायदा उठाते हुए जय रिया के ब्लाउज़ की डोरी खोल देता है। जिससे रिया की पीठ नंगी हो जाती है। जय रिया की गोरी नंगी पीठ पर अपने काले हाथ फेरते हर कहता है।

जय- तेरा जिश्म क्या मस्त है? क्या गारा और कोमल बदल है तेरा.. तेरे सामने अच्छी से अच्छी हेरोइन भी फेल हो जाये। तेरे इस मखमली जिम के साथ में बड़े अच्छी तरह से खेलेंगा..

जय अब रिया की पीठ पर हाथ फेरते हुए उसके ब्लाउज़ को आगे से निकाल देता है। रिया एक अजीब दुनियां में खोई हुई थी। उसका विरोध काफी हद तक कम हो गया था। रिया अब ऊपर से ब्रा में थी। आँखें बंद, गोरी आधी नंगी पीठ। ये सब चीजें जय को बम और पागल बना रही थी। अब जय आगे से रिया के पेटीकोट का नाड़ा खोलने लगता है।

रिया उसे रोकती है- "प्लीज़... मत करो.."

जय उसकी बात को अनसुना करते हुए नाड़ा खोल देता है। रिया का पेटीकोट सरकते हुए नीचे उसके पैरों में गिर जाता है। अब रिया सिर्फ ब्रा और पेटी में खड़ी थी। रिया खुद को छुपाने लगती है। तभी जय उसे फिर से अपनी बाहों में भर लेता है। लेकिन इस बार उसे वो उठाकर बेड की तरफ जाने लगता है। बेड के पास पहुँचकर वो रिया को बेड पर लिटा देता है, और खुद साइड में खड़े होकर अपने कपड़े एक-एक करके उतार देता हैं। अब वो सिर्फ अपनी बड़ी सी अंडरवेर में था। जिसमें एक बड़ा सा तंबू बना हुआ था। जो साफ-साफ बता रहा था के उसका बड़ा काला लौड़ा अंदर से परा तैयार हैं रिया की हालत बुरी करने के लिए।

जय अब बेड पर चढ़ता है, और रिया के ऊपर आ जाता है। वो रिया के चेहरे की तरफ जाने लगता है। जय का बदसूरत चेहरा अपने खूबसूरत चेहरे की तरफ आता देखकर रिया अपना मुँह दूसरी तरफ कर लेती है। लेकिन उससे जय को कुछ फर्क नहीं पड़ता। वो रिया के गले पर अपना मुह रखकर चूमने लगता है वहाँ।

रिया- "उम्म्म्म ... आहह.."

रिया की धड़कनें तेज चल रही थी जिसकी वजह से उसकी ब्रा में केंद्र चूचियां ऊपर-नीचे हो रही औं। जय रिया के गले की हर तरह से चल रहा था। वो तो ऐसे चम रहा था जैसे उसे कोई चीज बरसों बाद मिली हो। बस टूट पड़ा आ वो रिया के ऊपर। थोड़ी देर बाद वो थोड़ा नीचे आता है और रिया को ब्रा के ऊपर से ही उसकी क्लीवेज को चूमता है।

रिया- "अहह..."

जय फिर थोड़ा और नीचे आकर, ब्रा के ऊपर से उसकी दोनों चूचियों को चूमता है।

रिया- "अहह... अहह.. और रिया का विरोध अब सिसकारियों में चेंज हो रहा था।

जय थोड़ा और नीचे आकर रिया की गोरी नाभि को एक बार चूमता हैं। थोड़ी देर रिया के गोरे गेट को देखने के बाद जय अपनी ज़बान बाहर निकालकर उसके पेट को चाटने लगता है। रिया के लिए ये बिल्कुल नया अनुभव था। उसे नहीं पता था की सेक्स में ये सब कुछ भी होता है। जो भी था लेकिन जय की हरकतें अब उसे गरम कर रही थी। उसे ये डर था कि कहीं वो भड़क ना जाए।

जय के ऐसा करने से रिया का पेट थर थर कांप रहा था, और उसकी चूचियां तेज धड़कनों की वजह से ऊपर-नीचे हो रही औं। काफी हाट दृश्य बन गया था वहाँ। इस घर की छोटी बहू, बेहद खूबसूरत और जवान, एक काले बदसूरत बुड्ढे की हरकतों से गरम हो रही थी।

रिया- हाय उम्म्म्म

... अहम्म ..."
 
जय थोड़ी देर बाद थोड़ा नीचे आता है। रिया की गोरी जांघों को वो एक बार चूमता है।

- "अहह.. अहह.." फिर जय अपनी कमीनी नजर रिया की पैंटी पर डालता है। उसे ये जरूर पता था की अब तक तो रिया की चूत रस छोड़ रही होगी। और हुआ भी वैसा ही। जय की हरकतों ने रिया को एक बार आलरेडी झड़ने पर मजबूर कर दिया था।

जय अपनी नाक रिया की पैंटी के ऊपर लगाकर वहीं संघने लगता है। रिया अपनी आँख खोलकर एक बार अपनी पैंटी की तरफ देखती है, और जय को अपनी पैटी सूँघता देखकर उसकी आँखें फिर से बंद हो जाती हैं। थोड़ी देर वैसे करने के बाद अब वो थोड़ा नीचे जाने लगता है। उसके पैरों को चूमते हुएवो रिया की उंगलियां भी अपने मुँह में लेकर चूमता है। जो रिया को एक मस्त सी फीलिंग दे रहा था।

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जय अब वापस रिया को पटा के पास जाता है और इस बार पैंटी पर हाथ रखता है। जय का हाथ पड़ते हो रिया की जैसी जान ही निकल जाती है। जैसे वो तड़प रही हो किसी के टच के लिए। अब जय रिया की पैंटी थोड़ा साइड में कर देता हैं। जिससे रिया की आधी नंगी गुलाबी चूत उसके सामने आ जाती हैं।

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जय साफ देख पा रहा था की रिया आलरेडी झड़ चुकी है। क्योंकी उसकी चूत से रस अभी भी बह रहा था। चूत देखकर जय एक बार रिया के खूबसूरत चेहरे की तरफ देखता है। मासूम सा चेहरा, आँखें बंद थी। जैसे किसी आनंद के सागर में गोते लगा रही हों। अब जय एक उंगली धीरे से रिया की चूत पर फेरता है।

रिया- "अहह.." और रिया की आइ5 बड़े ही कामुक अंदाज में निकली भी।

जय की काली उंगली रिया को गुलाबी मासूम चूत को टटोल रही थी। जय ये भी महसूस कर रहा था की रिया की चूत गर्म भी है। जय जानता था की अब ज्यादा वक्त नहीं लगेगा रिया को चोदने में। जय अब धीरे से रिया की पैंटी नीचे करने लगता है। रिया पता नहीं किस खयालों में और विरोध का नाम-ओ-जिशान नहीं था उसकी तरफ से। जय गिया की पैंटी निकालकर फेंक देता है। और एक बार उसकी गुलाबी चूत की तरफ देखता है, जो तड़प रही थी किसी लण्ड के लिए।

रिया को गुलाबी चूत यूँ देखकर जय का लौड़ा हिचकोले खाने लगता है। वो एक बार अपना लण्ड दबाता है चूत के ऊपर से। फिर वो रिया को चूत के करीब जाते हुए अचानक चूत पर अपना मुँह रख देता है।

रिया- "उम्म्म्म

.. अहह..."

जय के मुँह की ठंडक से जैसे रिया को अपनी चूत की गर्मी को राहत मिली हो। रिया का पति भी कभी फोर प्ले नहीं करता था। जय रिया की चूत पर अपनी जबान फेरने लगता है।

रिया- "अहह.. दूर रहो अहह.." और रिया अपनी पूरी कोशिश कर रही थी की ये सब आगे ना बढ़े लेकिन उसका शरीर उसका बिल्कुल साथ नहीं दे रहा था।

जय की जीभ उसकी चूत पर किसी फायर ब्रिगेड का काम कर रही थी। जो उसकी आग बुझाने आई हो। जय अब रिया की मासूम गुलाबी चूत चाटने लगता है। रिया को इसपर अजीब सा मजा भी आने लगा था।

रिया- "उम्म... अहह... आहह.. उसम्म आहह..' करती है। बिना बालों वाली रिया की चूत एकदम किसी छोटी बच्ची की की तरह लग रही थी।

जय ये भी जानता था की उसका बड़ा लौड़ा इस मासूम चूत में डालना आसान नहीं होगा। रिया का रोना लाजमी था आज। जय अब चूत चाटते हुए अपने हाथ थोड़ा ऊपर ले जाता हैं चूचियां दबाने, तो वो क्या देखता है की रिया के खुद के हाथ उसकी चूचियां हल्के-हल्के दबा रहे थे। उसके गुलाबी होंठ एकदूसरे को किस रहे थे, और उसकी आँखें बंद, सब मंजर बयान कर रही थी। जिसे देखकर जय समझ जाता है की रिया गरम हो चुकी है। अब उसे आसानी होगी रिया को चोदने में।

जय अब रिया की क्लिट पा चाटने लगता है। जिससे रिया को बहुत मजा आ रहा था। लेकिन वो बयान करने से दूर रही थी। वो नहीं बताना चाहती थी जय को की उसे मजा आ रहा है इन सब में। जय क्लिट पर चाट हो रहा था की उसे अपने सिर पर रिया के हाथ महसूस होते हैं। जय खुश हो जाता है। उसे भी पता था की अब रिया मना नहीं करेगी।

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जय मन में- "साली गरम हो चुकी है। यही सही मौका है इस हसीना को अपनी बनाने का..."

जय अब उसकी चूत से अपना मुँह हटाता है। जिसे महसूस करके रिया अपनी आँखें खोलकर जय को देखने लगती है। जय के बदसूरत चेहरे पर एक कमीजी मुश्कान भी। रिया शामिंदा भी खुद से की कैसे उसने एक गंदे बूढ़े की हरकतों को एंजाय किया।

जय अब अपना अंडरवेर भी उतार देता है और फिर एक बार अपना लौड़ा दबाकर रिया की गोरी टाँगों के बीच आ जाता है। रिया उसे रोकने लगती है। अपने हाथ से उसको दूर करने की वो नाकाम कोशिश कर रही थी। जय अब रिया की जांघं मजबूती से पकड़कर अलग करता है। और अपना लौड़ा पहली बार रिया की चूत पर लगाता है।

रिया- "अहह.." और रिया की चूत गीली होने के साथ आग की तरह तप रही थी।

जय को भी बहुत मज़ा आता है रिया की चूत की गर्मी अपने लौड़े पर महसूस कर के। अब जय एक बार रिया के चेहरे की तरफ देखता है।

रिया- "अम्म्म

..."

जय अब लण्ड से थोड़ा दबाव डालता है रिया की चूत पर।

रिया- "अहह... प्लीज़... मत करो ऐसे..."

जय देखने में भी भयानक लग रहा था, और ऐसा लण्ड रिया की मासूम सी चूत में जाएगा ये सोचकर ही र लग रहा था रिया को।

रिया- "नहीं प्लीज़... मत करो..."

तभी जय एक धक्का लगाता है।

रिया- "अहह... और उसके लण्ड की टोपी अंदर चली जाती है। रिया बेडशीट कसकर पकड़ लेती हैं- "अहह ...

जय मन में. “साली की चूत बहुत ही ज्यादा टाइट है। क्या चौदा होगा इसको इसके पति ने..." जय अब एक और धक्का लगाता है।

रिया- "अह्ह... मर गई... बाहर निकालो अहह.."

जय का लण्ड थोड़ा अंदर चला जाता है। रिया छटपटा रहीं भी दर्द के मारे। जय का लण्ड तो जैसे रिया की गुलाबी चूत को स्ट्रेच कर रहा था। रिया को बहुत दर्द हो रहा था। जय उसके ऊपर कोई रहम नहीं खा रहा था। अब जय एक जोरदार धक्का लगाता है। इस बार उसका लौड़ा आधे से ज्यादा अंदर चला जाता है।

लेकिन रिया की चीख तो जैसे आसमन में चोंद तारों तक सुनाई दी. "अहह... मम्मी मर गईई.."
 
लेकिन रिया की चीख तो जैसे आसमन में चोंद तारों तक सुनाई दी. "अहह... मम्मी मर गईई.."

रिया की आँखों से आँसे निकलने लगते हैं। वो बेडशीट कसकर पकड़ी हुई थी। जय इस बार थोड़ा रुक जाता है। उसकी भी अहसास हो रहा था की उसके लण्ड ने काफी हद तक रिया की चूत को स्ट्रेच कर दिया है।

इधर नेहा के रूम में नेहा रिया की चीख सुनकर डर जाती है, और राज से कहती है- "राज ये क्या कर रहा है वो रिया के साथ? देखो वो कैसे चिल्ला रही है?"

राज- "मेरी जान। ऐसे होता है पहली बार। मतलब उसका लण्ड बड़ा है तो तकलीफ तो होगी ही ना। तुझे नहीं हुई थी क्या?"

नेहा- लेकिन राज, वो बेचारी बहुत अच्छी है।

राज उसको अपनी तरफ खींचकर उसको अपनी बाहों में लेते हुए "सिर्फ इस रात की ही बात है। फिर वो भी तेरे जैसी हो जायेगी."

नेहा- मेरी जैसी मतलब?

राज- जो हमेशा चुदने के लिए तैयार रहती है।

नेहा शर्म के मारे- "छी... गंदे कहीं के... जाओ मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी.."

राज- हाय मेरी जान... नाराज़ हो गई मुझसे।

इधर रिया के रूम में। रिया थोड़ी देर बाद नार्मल लग रही थी। जय उसके ऊपर झुक कर उसके गले को चूमने लगता हैं, और नीचे में धीरे-धीरे धक्के लगाने लगता है।

रिया- “आहह... अहह....

उसका थोड़ा लण्ड अभी भी बाहर रह रहा था। रिया के ऊपर झुका हुआ वो धक्के लगाने लगा था।

रिया- "अहह... आहह.."

रिया के दर्द की सीमा नहीं थी। इतना बड़ा लण्ड अपनी चूत में लेना कोई आसान बात नहीं भी। रिया के लिए ये रात किसी खराब सपने से कम नहीं थी। लेकिन उसे क्या पता की जिसको वो दीदी दीदी बोलती है, वहीं उसके इस दर्द की काफी हद तक बजह है। जय अब थोड़ा जोर से धक्के लगाने लगता है।

रिया- "अहह... अहह.."

जय का पूरा नंगा काला शरीर रिया के कोमल गोरे जिस्म पर पड़ा हुआ था।

रिया- "अहह... अहह..

जय दस मिनट इसी तरह चुदाई करने के बाद रूक जाता है। वो रिया के ऊपर से उठकर उसको पलटा देता है झट से। और डागी स्टाइल में लाकर खुद उसके पीछे आ जाता है, और रिया की गाण्ड पकड़कर उसे अपने लण्ड की तरफ खींचता है।

रिया- "अह.."

रिया की चूचियां लटकी ही औं। आगे से काफी सेक्सी दृश्य लग रहा था। एक खूबसूरत जवान औरत को एक काला बढ़ा बदसूरत चोद रहा था।

रिया- "अहह.."

रिया की गुलाबी चूत में अंदर-बाहर होता हुआ जय का काला लौड़ा। धक्के लगाते हुए वो रिया की हिलती हुई चूचियां। कभी इसी रिया ने जय को एक थप्पड़ मारा था। आज वही जय उसे मस्त चोद रहा था।

रिया- "हाय आहह ... आहह... आह्ह..' और धक्के लगते हुए रिया की चौखें हल्की-हल्की निकल रही थी।

जय रिया की कमर को पकड़े हुए था। वैसे भी रिया में अब जान बची जहाँ थी कि वो विरोध कर सके। रिया ने उम्मीद छोड़ दी थी की जय उसे छोड़ेगा। जय ऐसे ही रिया को 20 मिनट और चोदता है फिर वो रुक कर अपना काला लण्ड उसकी चूत में से बाहर निकालता है।

रिया थकी हुई उसी पोजीशन में वहीं पड़ी रहती है। जय की चुदाई ने उसे थका दिया था। लेकिन जय इतने जल्दी अकने वाला नहीं था। वो अब रिया को कमर से पकड़कर लेटे हुए ही खुद भी लेटकर उसकी चूत पर अपना लौड़ा सेट करता है, और फिर रिया की जाँघ पकड़कर एक धक्का लगाता है।

***** *****
 
रिया की चीख में इस बार थोड़ा हल्कापन था- “आहह..."

जय अब रिया को चोदने लगता है।

रिया- "अहह.."

साइड व्यू से काफी हाट इश्य आ। दोनों के जिस्म चिपके हुए। जय का बुड्ढ़ा बदन और रिया का जवान खूबसूरत गोरा बदन।

रिया- अहह... हाय आहह.

जय रिया के कंधे को पकड़कर धक्के लगा रहा था- "साली मुझे थप्पड़ मारती है... इसी सोच के साथ जय जोर-जोर से धक्के लगाने लगता है।

रिया- "हाय धीरे अहह..." और अब रिया ने भी जय के आगे समर्पण कर दिया था। उसे भी पता था कि वो जय का सामना नहीं कर सकती- "अहह... आहह.." और धक्के लगते हुए रिया के चूचियां इधर-उधर हिल रही

जय के सामने रिया की गाण्ड भी जो पूरी नंगी थी। जय बहुत खुश था क्योंकी वो आज इतनी खूबसूरत जवान औरत को चोद रहा था। उसका काला लण्ड अंदर-बाहर हो रहा था, रिया की गुलाबी चूत में। अब काफी हद तक रिया को दर्द नहीं हो रहा था। रिया की चूत और जय के लण्ड का मिलन अब बड़े ही रोमांचक तरीके से हो रहा था।

जय ऐसे ही रिया को 20 मिनट और चोदता है, और फिर अपना लौड़ा बाहर निकाल लेता है। जय के लण्ड पर गीला रस लगा हुआ था, जो बता रहा था की रिया की चूत चुदाई के वक़्त बहुत बार झड़ चुकी है। रिया अभी उठने की हालत में नहीं थी। जय ने उसकी हालत अरी कर दी थी। दोनों पड़े हुए थे बेड पर बिल्कुल बेजान होकर। लेकिन बाड़ी देर बाद जय उठ जाता है। वो बेड में बैठते हुए रिया की तरफ एक बार देखता है। रिया पसीने से भीगी हुई थी। उसकी गुलाबी चूत से रस निकलता हुआ। उसके खूबसूरत चेहरे पर नमी। जय

को अपने लण्ड पर भी रिया की चूत का रस दिख रहा था।

इस वक़्त रिया पूरी नंगी पड़ी हुई थी चुदाई के बाद, एक काले बूढ़े के साथ। थोड़ी देर बाद जय रिया को बेड पर पेट के बल लिटा देता है। रिया को हर लग रहा था की अब यह काला बढ़ा उसके साथ क्या करेगा?

रिया- प्लीज... और मत करो। में मर जाऊँगी।

जय- तेरी जैसी माल तो इसी के लिए बनी है। तू हर मत। और सच कहें तो तुझे चोदने में जो मजा है ना वो मेरी उस अधेड़ बीवी को चोदने में बिल्कुल नहीं है।

पता नहीं क्यों लेकिन इस बात पर रिया के चेहरे पर हल्की सी स्माइल आ जाती है। जो जय की नजर से बच नहीं पाती। जय के लिए और आसानी होने वाली थी अब तो। अब जय रिया की गोरी गाण्ड पर एक बार हाथ फेरता है। अब वो अपना लौड़ा फिर से रिया की चूत पर लगाकर उसके ऊपर झुकते हर एक जोर का धक्का लगाता है।

रिया- "अहह... अहह.." और इस पोजीशन में रिया को थोड़ा दर्द हो रहा था।

जय थोड़ा झुक कर रिया की पीठ को चूमता है फिर धक्के लगाने लगता है।

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रिया- आह्ह... आहह... आहह.. हाय आअहह.." करती है।

जय के धक्के टाइम के साथ तेज हो रहे थे, और रिया की चीखें भी। रिया नीचे बेडशीट पकड़े हुए भी। उसके लिए य जय के धक्के सहन करना थोड़ा मुश्किल हो रहा था। लेकिन जय तो मजे से इस खूबसूरत जवानी को लूट रहा था। उसकी गोरी पीठ को चूम रहा था। रिया को अपनी गाण्ड पर जय के लण्ड के आस-पास की झांटें महसूस हो रही थी, और उसका तगड़ा काला लौड़ा उसकी चूत को बहुत गहराई तक चोद रहा था।

ऐसी पोजीशन में रिया को उसके पति ने भी कभी नहीं चोदा था। रिया बेडशीट पकड़ी हुई थी, और उसकी चूत पीछे से एक काला बढ़ा झुका हुआ मार रहा था। कुछ एक 5 मिनट हल्के-धक्के लगाने के बाद जय अपनी स्पीड बढ़ा देता है।

रिया- "अहह... अहह..."

जय को अपना लण्ड रिया की चूत में पीछे से जाता देखकर बड़ा मजा आ रहा था। इतने बड़े घर की बहू को वो जैसा चाहे वैसा चोद जो रहा था। वो यह भी जानता था कि अगर यह परी हाथ लग गई तो उसे जिंदगी में और कुछ नहीं चाहिए होगा। धक्के लगाते हुए जय के कारको साइज के बाल्म रिया की गाण्ड पर चोट कर रहे ।

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रिया- अहह... अहह... हाय अहंन्न अहह... अहह... अहह.."

जय 30 मिनट और चोदता है रिया को। जय अपना लौड़ा बाहर निकालता है। लण्ड बाहर निकालते ही उसके लौड़े से गाढ़ा पानी निकलने लगता है। रिया भी पलट जाती है। वो खुद को बेडशीट से कमाने की कोशिश करती हैं। लेकिन तभी जय उसको फिर से पकड़ लेता है और उसको लिटाकर खुद उसके ऊपर आ जाता है।

रिया- प्लीज़... और मत करो।

जय- क्यों थक गई क्या चुदाई से।

रिया जय की गंदी बातों में चुप हो जाती हैं।

जय अब रिया की चूत पर अपना लण्ड घिसने लगता है।

रिया- "ओहह... अहह..."

जय मन में- "साली को मेरा लण्ड अपनी चूत में चाहिए, लेकिन बोलती नहीं। जय वैसे ही अपना लण्ड घिसते रहता है..."

रिया- अहह... हाय अहह...

जय- बोल डाल दूं अंदर?

रिया एक बार जय की तरफ देखती है फिर अगले ही पल अपनी आँखें बंद कर लेती हैं। जय अपने बदसूरत काले चेहरे पर एक कमीनी स्माइल लाया हुआ था। रिया की आँखें बंद होना जय के लिए सिग्नल था की रिया अन मना नहीं कर रही हैं। जय रिया की दोनों जांघों को अपने कंधे पर लेते हुए उसके ऊपर झुक जाता है। अब वो अपना लण्ड भी अंदर धकेल देता है। थोड़े दबाव के साथ उसका लण्ड रिया की गोली चूत की वजह से इस बार आसानी से अंदर चला जाता है। लण्ड जाते हुए रिया के मुँह से सिसकारी निकलती है।

रिया- "अहह.."

जय अब खुद रिया फर झुका हुआ ऊपर-नीचे होने लगता है। रिया के खूबसूरत चेहरे पर एक अजीब चमक थी। उसके होंठ एक दूसरे को काट रहे थे। रिया का चेहरा देखकर जय अब अपनी स्पीड थोड़ा बढ़ाता है। उसका लण्ड अब गहराई तक अंदर जा रहा था रिया की चूत में।

रिया- "अहह... अहह.. अहह... अहह..." और धक्कों के साथ रिया की सिसकारियां भी बढ़ने लगती हैं।

जय के तेज धक्के रिया की आँखें खोल देते हैं। अब दोनों की नजरें एक बार के लिए मिल जाती हैं। दोनों के चेहरे आमने सामने थे। एक खूबसूरत जवान औरत तो एक काला बदसूरत बढ़ा। जय रिया की आँखों में देखते हए धक्के लगाने लगता है। रिया शर्म के मारे अपनी नजरें झका लेती हैं। लेकिन जय उसके ऊपर और झुक जाता है।

रिया को अपने चेहरे पर गरम साँसों का अहसास होता है, तो वो अपनी नजरें उठाकर जय की तरफ देखती है। एक बार के लिए वो चौंक जाती है। क्योंकी जय का बदसूरत चेहरा उसके बिल्कुल करीब आ। एक अजीब सा माहौल बन गया था उस वक्त। एक तो चुदाई ऊपर से ये कामुकता।
 
जय रिया की आँखों में देखते हुए जोर जोर के धक्के लगा रहा था। चोदते हुए वो अब रिया के गुलाबी होंठों के करीब जाने लगता है। जिसे देखकर रिया समझ जाती है की ये बूढ़ा क्या करना चाहता है। उसकी उतना टाइम नहीं मिलता उधर की वो जय को किस करने जा दे। अचानक ही जय अपने काले सखे होंठ रिया के गुलाबी होंठों पर रख देता है। जय के होंठ अपने होंठों पर छूते ही रिया की आँखें बंद हो जाती हैं।

रिया- "उम्म्म्म

..

जय के काले होंठ रिया के होंठों को चूसने लगते हैं, और वो साथ में जोर के धक्के भी लगा रहा था।

रिया- उम्म्म्म ...म उम्म्म उम्म्म्म ..."

रिया ने ये तेज़ी अपने पति के साथ भी कभी महसूस नहीं की थी। पता नहीं क्यों लेकिन ये बूढ़ा उसे एक अलग ही मजा दे रहा था। लेकिन वो जाहिर नहीं करना चाहती थी की वो एक गंदे लो-क्लास डे के साथ सेक्स एंजाय कर रही है। दोनों बहुत गरम हो गये थे। दोनों को बिल्कुल होश नहीं था अब तो। वो धक्के लगाते हुए किस कर हो रहा था की उसे अहसास होता है की रिया भी उसका साथ दे रही हैं धीरे-धीरे।

अब तो जय का लण्ड आलमोस्ट पूरा अंदर जा रहा था रिया की चूत में। जिस पोजीशन में वो लोग चुदाई कर रहे थे, उससे रिया की चूत जैसे जय का लौड़ा पूरा ले रही थी।

रिया- "अहह... अहह... हाय अहह... उम्म्म्म

... उम्म्म्म

... हंम्म्म

... उहह.. उम्म्म म...

दोनों नंगे शरीर जैसे बरसों से बिछड़े थे और आज मिल रहे हैं। थोड़ी देर बाद जय किस तोड़ देता है। रिया हाँ फते हुए दूसरी तरफ देखने लगती है। जय अपने धक्के जारी रखता है।

जय- मज़ा आया ना तुझ?" जय रिया के खूबसूरत चेहरे को देखते हुए बोलता है। रिया दूसरी तरफ मुँह किर हुए कुछ नहीं बोलती। जय उसको चोदता रहता है।

रिया- "अह... आहह... अहह.."

जय- बोल मजा आया ना?

रिया अभी भी कुछ नहीं बोलती। जय को थोड़ा गुस्सा आता है, तो वो रिया का चेहरा पकड़कर अपनी तरफ करता है और उसकी आँखों में देखते हुए धक्के लगाने लगता है। रिया को बहुत शर्म आ रही थी कि जय उसको देख रहा था चोदते हुए। लेकिन रिया खुद की सिसकारियां निकलने से नहीं रोक पा रही थी।

रिया- "अहह... आअहह... अहह... उम्म्म्म ... और उसकी चूत में लगातार अंदर-बाहर होता हुआ जय का काला लण्ड उसको एक अजीब हो दुनियां में ले जा रहा था- "अहह... अहह.."

रिया भी जय की आँखों में देख रही थी। उसको जय की आँखों में एक अजीब सी प्यास नजर आ रही थी।

अचानक ही जय की स्पीड और ज्यादा हो जाती है। जय झड़ने के करीब था, जो रिया महसूस कर लेती है। क्योंकी जय का लण्ड फूल रहा था। रिया को हिम्म्त तो नहीं हो रही थी लेकिन वो बोल ही देती है।

रिया- "अंदर मत गिराना प्लीज़..."

जिसे सुनकर- जय- "क्यों?"

रिया जय की तरफ हैरानी से देखती है। लेकिन कुछ नहीं बोलती। जय दो-तीन जोर के धक्के लगाकर अपना लौड़ा चूत से बाहर निकाल लेता है, और रिया के पेट पर झड़ने लगता है। उसके काले लौड़े से गाढ़ा सफेद रस निकलने लगता है।

जय- "अहह.." कर के जय मजे से अपना लौड़ा पकड़े हुए अपना पानी बाहर निकाल रहा था।

रिया पड़ी हुई थी। लेकिन उसे , जय के लण्ड से निकलता हुआ उस देखकर घिन आ रही थी। वो अपना मुँह दूसरी तरफ कर लेती है। उसकी चूत से भी सफेद पानी निकल रहा था। उसकी चूत कांप रही थी। हो भी क्यों ना? उसने अभी-अभी एक बेहद गंदा और बड़ा सा लौड़ा जो सहन किया था।

कुछ एक मिनट तक अपना रस निकालने के बाद जय शांत हो जाता है। जय इधर ही रिया के बगल में लेट जाता है। रिया झट से बेड से उतर जाती है।

जय- क्या हुआ?

रिया कुछ जवाब नहीं देती।

जय समझ जाता है के रिया उसकी बदसूरती की वजह से उठी हैं, वो कहता है- "चुदवाते वक्त को तुझे कोई परेशानी नहीं हुई। अचानक क्या हुआ तुझे?"

रिया चुप रहती है। जय वैसे ही लेटा रहता है। रिया अब अपनी साड़ी जो जमीन पर पड़ी हुई थी उसे उठा लेती है। रिया खुद को ठीक करते हुए मन में- "ये क्या हो गया मेरे साथ अब में क्या करूँगी? इस घटिया बूढ़े ने मेरे साथ चुदाई,,,,,, अब क्या होगा मेरा? मेरे पति को में क्या जवाब दूंगी? ये बहुत गलत हुआ है, और कैसे मैं इस गंदे आदमी के साथ एंजाय कर रहीं औ? छी..."

रिया नजरें चुराते हुए जय को भी देख रही थी। रिया के मन में अलग-अलग खयाल आ रहे थे। वो एक बार जय को गुस्से देखती है। वो जय को यहाँ से भगाना चाहती थी, लेकिन जय बस पड़ा हुआ था। इसलिए वो पलटकर बाथरूम की ओर जाने लगती हाँ । वो बाथरूम का दरवाजा बंद करके नहाने लगती हैं। नहाते हुए पानी की बँदें उसके गोरे शरीर पर गिर रही थी, नीचे उसकी चूत से होते
 
रिया सोच में डूबी हुई थी, जो भी हुआ उसके साथ। वो जय का उसको बुरी तरह से चोदना। इतनी जोरदार चुदाई ही उसके मन में घूम रही थी। वो समझ भी नहीं पा रही थी की वो क्या रिएक्ट करे इसपर? नहाकर वो बाहर निकलती है तौलिया पहनकर, तो जय उसे वहीं नजर नहीं आता।

रिया मन में- "लगता है चला गया कमीना, बड़ा कहीं का.."

रिया मिरर की तरफ जा हो रही थी की जय उसे पीछे से पकड़ लेता है। असल में जय एक तरफ छिपा हुआ था। रिया जय के अचानक आने से हड़बड़ा जाती है।

रिया- "ये छोड़ो मुझे कमीने.. और रिया उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश करती हैं।

रिया सिर्फ तौलिया में थी तो बहुत हाट लग रही थी। उसके गोरे बदन पर अभी भी पानी की कुछ दें बह रही थी। उसके बाल भीगे हुए, और उसका खूबसूरत चेहरा उफफ्फ... मस्त लग रही थी रिया। लेकिन इसी जवानी को जय लूट चुका था। जय रिया को पीछे से पकड़े हुए रिया के जिस्म की खुश्बू एक बार सूँघता है।

जय- आअहह... क्या खुश्बू है तेरे जिश्म की?

रिया- छोड़ो मुझे।

जय का लण्ड रिया की गाण्ड के अहसास से फिर से खड़ा होने लगता है।

रिया को जिसका अहसास भी होता है। रिया कहती है- "छोड़ मुझे... मैंने कहा..." और इस बार रिया थोड़ा गुस्से में बोलती है।

जय भी आश्चर्यजनक रूप से छोड़ देता है। रिया उससे अलग होकर दूर खड़ी हो जाती है। जय उसकी तरफ फिर से आने लगता है।

रिया- दूर रहो मुझसे।

जय उसकी तरफ आते हुए अचानक दरवाजे की तरफ चला जाता है और बाहर चला जाता है।

रिया को थोड़ा अजीब लगता है लेकिन वो राहत की साँस भी लेती है की यह चला गया।

इधर नेहा की रूम में राज की बाहों में नेहा पड़ी हुई थी। राज उसकी चूचियां हल्के-हल्के दबा रहा था। राज कहता है- "मेरी जान... वो रिया की तो बॅंड बजा दिया होगा अब तक जय ने..."

नेहा- "तुम दोनों बस पागल हो। उस बेचारी को भी नहीं छोड़ा। पता नहीं क्या-क्या कर रहा होगा तुम्हारा वो दोस्त"

राज. और क्या करेगा... चुदाई ही कर रहा होगा।

नेहा- छी... मत करो मेरे सामने गंदी बातें।

राज- चल ठीक है। हे चल ना एक और बार करते हैं चुदाई।

नेहा- नहीं नहीं मुझसे और नहीं होगा। तुम अब जाओ यहाँ से।

राज. यही सो जाता हूँ ना तेरे साथ । वैसे भी कोई नहीं है घर में।

नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है- "नहीं। यहां सिर्फ मैं और मेरे पति ही सो सकते हैं। कोई और नहीं..."

राज. ओहह.. फिर तो तुझे मेरी पत्नी बनना पड़ेगा तेरे साथ सोने के लिए।

नेहा शर्मा जाती है।

राज- तो बोल बनेगी मेरी बीवी?

नेहा- चुप रहो। शकल देखी हैं अपनी।

राज- शकल में क्या रखा है? तू बस एक बार मेरी बीवी बन जा। फिर देख कैसे मजे देता हूँ तुझे।

नेहा कुछ नहीं बोलती बस चुप रहती है।

राज- बोल ना बनेगी मेरी बीवी?

नेहा- "नहीं। गर्लफ्रेंड हूँ उतना काफी नहीं है क्या?" नेहा शर्माते हुए बोलती हैं।

राज भी खुश हो जाता हैं कि आज पहली बार नेहा ने गर्लफ्रेंड होने की बात स्वीकार की थी

राज- "मेरी जान। जो मजे बीवी दे सकती है. वो गर्लफ्रेंड नहीं दे सकती। हाहाहा..'

नेहा- चुप रहो। और अब जाओ यहीं से। मुझे सोना है। नींद आ रही हैं।

राज- आज सोने देना तेरे साथ यहीं पर।

नेहा- "प्लीज़... राज समझा करो। तुम जाओ प्लीज.."

राज- ठीक है। अपनी गर्लफ्रेंड के लिए कुछ भी।

नेहा के चेहरे पर फिर से स्माइल आ जाती हैं। राज अब बेड से नीचे उतर जाता हैं और दरवाजे से बाहर निकल जाता है।

कुछ आधे घंटे बाद नौकर क्वार्टर्स में जय और राज बैठे

और दोनों बातें कर रहे थे। उन दोनों के हाथों में शराब की बोतल थी ।

जय- "क्या मजा आया उस छोटी वाली के साथ पूछ मत? क्या चूत है साली की। साली से बदला लिया..."

राज. आधे मजे कर लिए ना। तो हो गया क्या? और नहीं करना?

जय- “करना है करना है..." और दोनों हँसते हैं।

राज- वो सीधा सीधा मान गई थी क्या?

जय- कहा ॥ साली बहुत नाटक कर रही थी। साली को गरम करके चोदना पड़ा।

राज- हाहाहाहा साली है भी तीखी मिची।

जय- सही कहा। लेकिन उसकी चूत एकदम चिकनी हैं। मजा आ गया मार कर

राज- "ओहह..." और दोनों ऐसे ही बातें करके, शराब पीकर सो जाते हैं।
 
अगली सुबह रिया के रूम में। वो उठ चुकी थी। बेड में लेटी हुई थी। कल के बारे में सोच रही थी। कैसे जय जैसे काले बदसूरत बूढ़े ने उसकी चुदाई की। एक ऐसा हादसा जिसकि वो अपने सबसे बुरे सपने में भी ना देखा हो। रिया यही सब सोचते हुए अब बेड़ से उतरकर फ्रेश होने चली जाती है।

इधर नेहा अपने रूम में नहाकर एक साड़ी पहन लेती है। मिरर के सामने बैठकर हल्का सा मेकप करती है। वो जब लिपस्टिक लगा रही थी तो उसे राज का ध्यान आता है की कैसे राज उसके होंठ को बड़े ही सिदत से चूसता है। कैसे उसके लाल-लाल होंठों को चूमता है। राज का खयाल आते ही नेहा के होंठ दाँत से कटने लगते हैं। उसके चेहरे पर मिरर में देखते हुए एक चमक आ जाती है। वो शर्मा जाती है। फिर वो लिपस्टिक लगाकर नीचे चली जाती है नाश्ता करने। उसको नास्ता सर्व करती है नीलू।

थोड़ी देर बाद रिया आ जाती हैं। रिया ने भी एक मस्त साड़ी पहनी थी।

नेहा- अरे आओ रिया।

रिया- जी दीदी।

नीलू रिया को भी नाश्ता सर्व करती है।

नेहा- रिया कल रात सोई नहीं क्या?

रिया थोड़ा डर जाती है की कहीं नेहा को पता तो नहीं चल गया?

रिया- क्यों दीदी?

नेहा- तुम्हारी आँखें लाल लग रही हैं।

रिया मन में- "ओहह नहीं... अब क्या कह दीदी को? उस बूढे कमीने ने मेरे साथ जो भी किया अगर वो किसी को भी पता चला तो मेरी क्या इज्जत रह जाएगौ?" और रिया सोच रही थी क्या जवाब दे नेहा के सवाल का।

इधर नेहा मन में- "सारी रिया। तुम्हारी जो हालत हुई कल उसमें मेरा भी कुछ हद तक हाथ था। मुझे पता है तुम्हारी कल की रात बहुत दर्द भरी गुजरी होगी। लेकिन क्या कर वो दोनों बड़े हैं ही कमीने..."

नेहा- रिया, कहां खो गई:

रिया- "वो... वो... दीदी कुछ नहीं.."

नेहा- तुम्हारी आँखें क्यों लाल है?

रिया- बो दीदी कुछ नहीं, अस आँख में कुछ चला गया था।

नेहा जानती थी कि रिया झठ बोल रही हैं। लेकिन नेहा को ये भी लगा था की रिया जैसी जवान और खूबसूरत औरत चुप रहने वालों में से तो नहीं है। फिर भी वो कैसे चुप हैं अब तक

नेहा- अच्छा ठीक है।

दोनों नाश्ता करने के बाद अपने-अपने रूम में वापस चली जाती हैं। जय काम पर चला गया था लेकिन समेसा की तरह राज फिर से कुछ ना कुछ बहाना बनाकर सक जाता है। वो जय के जाने के बाद मेनगेट से होते हुए घर में चला आता है। डाइनिंग हाल में नीलू बर्तन उठा रही थी।

नीलू राज को देखकर- "अरे राज आ जाओ नाश्ता करने.."

राज- मेरा नाश्ता तो ऊपर है।

नीलू समझ जाती है की राज नेहा की बात कर रहा है।

नीलू- ओहो... क्या बात है सुबह सुबह?

राज- साली चीज हैं वैसी है की उसके बिना मन ही नहीं लगता।

नीलू- राज तुम दोनों तो मुझे भूल ही गये हो।

राज- अब नई चीज के सामने यानी चीज की क्या हसियत?

नीलू- "बड़ा कमीना है तू." कहकर नीलू किचेन में चली जाती है।

राज सीढ़ियाँ चढ़ते हुए ऊपर जाने लगता है। नेहा के दरवाजा के पास पहुँचकर वो दरवाजा खोलता है। अंदर नेहा अपनी ब्लाउज़ की होरी खींचने की कोशिश कर रही थी, जो उसमें नहीं हो रही थी। राज ये नजारा देखकर गरम हो जाता है। नेहा की गोरी आलमोस्ट नंगी पीठ उसके सामने भी। और उसके गोरे हाथ पीछे आते हए डोरी निकालने की कोशिश कर रहे थे। राज दरवाजे से देखता है तो उससे रहा नहीं जाता और वो अंदर चला जाता है। वो नेहा की पीछे जाकर उसकी कमर में अपने काले हाथ डाल देता है।

नेहा अचानक यू अपनी पतली कमर पर राज के हाथ टच होने से मुह से ठंडी हल्की सिसकारी निकलती है “आहह.." और उसके गोरे हाथ डोरी को छोड़कर राज के काले हाथों पर आ जाते हैं।

राज- में कुछ मदद करूँ?
 
नेहा अपनी गर्दन राज के टच से पीछे कर देती हैं। जैसे वो राज से अलग नहीं होना चाहती हो। उसके टच ने एक बिजली से गुजार दी भी उसके शरीर में। राज नेहा की ब्लाउज़ की डोरी खींच देता है। डोरी खुलते ही नेहा की गोरी पीठ बिल्कुल नंगी हो जाती है। राज पीछे से थोड़ा झुक कर नेहा की गोरी दूध जैसी पीठ को चूमने लगता है।

राज के काले सखे होंठ के सूखेपन से नेहा को अपनी पीठ पर गुदगुदी हो रही थी। वो नेहा की पीठ को हर तरफ चूम रहा था। जो नेहा को पागल बना रहा था। नेहा अपने होंठों काट रही थी। वो काम के टच से पागल हो रही थी। अब राज नेहा के गले के पास आकर उसके बाल दूसरी साइड करके कान के पास चूमने लगता है।

नेहा- "अहह... क्या कर रहे हो?"

राज वहीं चूमते हुए. "प्यार कर रहा हूँ मेरी जान..."

नेहा- "अहह.."

राज के हाथ नेहा की गोरी कमर पर भी चल रहे थे। उसके काले हाथ नेहा की गोरी कमर पर। अफफ्फ... बहुत हाट दृश्य आ। नेहा अब गरम हो चुकी थी। जो राज बखूबी जानता था। अब राज नेहा के कान को अपने दाँत से हल्का सा काटता है।

नेहा- आइs क्या कर रहे हो?

राज- चप रह मेरी जान। तू बस मजा ले।

नेहा- क्या तुम सुबह-सुबह शुरू?

राज तभी नेहा की चूचियां पकड़ लेता हैं अपने दोनों हाथों से। राज के हाथ नेहा की बड़ी-बड़ी चूचियों को मसलने लगते हैं।

नेहा- "अहह... अहह..." और नेहा का बदन अकड़ रहा था राज की हरकतों से।

राज अब नेहा का ब्लाउज़ धीरे से निकाल देता है। अब नेहा ऊपर से सिर्फ ब्रा में थी, और उस ब्रा में कैद उसके गोरे दूध जैसे चूचियां। नेहा उस वक़्त मस्त लग रही थी सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में। राज का लण्ड उसकी पैंट में खड़ा हो चुका था। राज पीछे से चिपका हुआ था। अब राज नेहा के पेटीकोट के ऊपर से उसकी चूत पकड़ लेता है और एक बार मसलता है।

नेहा- "अहह.."

फिर हाथ ऊपर लाकर नेहा की ब्रा के अंदर अपने हाथ डालकर एक बार मसलता है। झा के अंदर कीम के काले हाथ नेहा की गोरी चूचियों को मसल रहे थे। नेहा की गोरी चूचियों के ब्राउन निप्पल। उफ्फ्फ... क्या दृश्य होगा। नेहा को राज का अकड़ा हुआ लौड़ा अपनी गाण्ड की दरार पर महसूस हो रहा था।

नेहा को मस्ती सूझती है, और कहती है- "तुम्हारा शैतान देखो कैसे मुझे परेशान कर रहा है?"

राज- मेरी जान बो परेशान नहीं, तेरे से प्यार कर रहा है।

नेहा- उससे कहो थोड़ा ठीक से प्यार करे। बहुत तंग कर रहा है वो मुझे।

राज अब् पीछे से नेहा की ब्रा का हुक खोलने लगता है। हक निकालकर वो एक बार उधर चूमता है और फिर ब्रा नि काल देता है। अब नेहा की चूचियां बिल्कुल नंगी थी। लेकिन नेहा अब बिल्कुल बेशर्म हो गई थी। अपनी चुचियां छपाने की बिल्कल कोशिश नहीं करती इस बार। राज अब नेहा को चुचियां पीछे से पकड़ लेता है और मसलने लगता है। इस बार वो उसके निपल भी मसल रहा था।

नेहा- "अहह... अहह.."

नेहा की गोरी चूचियां अच्छी तरह से मसल रहा था वो जैसे आंटा गूँथ रहा हो। नेहा बस अपना सिर पीछे करके सिसकारियां लेते हुए खड़ी थी तभी राज उसकी गोद में उठा लेता है। नेहा राज की तरफ देखने लगती हैं।

राज भी उसकी तरफ देखते हुए कहता है- "बेड में चले.."

नेहा शर्मा जाती है। राज नेहा को अपनी गोद में उठाकर बेड की तरफ जाने लगता है। बेड के पास जाकर वा नेहा को धीरे से लिटा देता हैं बेड पर। नेहा लेटी हुई राज को देखने लगती है।

राज भी नेहा की तरफ बड़ी प्यासी नजरों से देखते हुए अपनी शर्ट निकालने लगता है। शर्ट निकालते ही उसकी सफेद बालों से भरी हुई छाती सामने आ जाती है। नेहा उसे देखकर शर्मा जाती है।

राज- "हाय मेरी जान शर्मा गई.."
 
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