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इधर नेहा रिया के रूम में आ जाती है। रिया जाने के लिए तैयार हो रही थी।
रिया नेहा को यहाँ देखकर- "क्या हुआ दीदी, आप भी आ रहे हो क्या?"
नेहा- नहीं। वो मैं ये कहने आई थी की सब लोग उधर जा रहे हैं तो मैं अकेली रह जाऊँगी इधर।
रिया- इसीलिए कह रही हैं दीदी आप भी चलो हमारे साथ।
नेहा- वो... रिया क्यों ना तुम भी रुक जाओ इधर हो। मम्मीजी और पापाजी हो आएंगे उधर।
रिया- लेकिन दीदी वो दोनों अकेले?
नेहा- अरे तो तू सौरभ को काल कर देना... मैं विशाल को काल कर देती हैं। वो दोनों चले जाएंगे उनके साथ।
रिया- ठीक है दीदी में करती हूँ काल सौरभ को।
नेहा- ठीक है में विशाल को काल कर के आती है।
फिर नेहा वहीं से ब्याहर आ जाती है। नेहा विशाल को काल करके सब बताती हैं और वो और सौरभ उधर से घर के लिए निकल जाते हैं। नेहा बाहर हाल में आई हुई थी। तभी उसकी सास अपने रूम से तैयार होकर आती है।
नेहा उधर जाकर- "मम्मीजी सब ठीक हो जायगा। फिकर मत कीजिये.."
सावित्री वो सब तो ठीक है बहू, लोकल तुम नहीं आ रही हो क्या?
नेहा- नहीं मम्मीजी मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है। मैंने विशाल को काल कर दिया है वो लोग आ रहे हैं।
सावित्री ठीक है बहू ।
थोड़ी देर में वो लोग आ जाते हैं। फिर वो लोग निकल पड़ते हैं उधर जाने के लिए। अब घर में नेहा और रिया ही बचे हुए थे, और नेहा को रूम में राज।
नेहा हाल में खड़ी थी कि उसे एकदम से याद आता है की उसके गम में तो राज है। नेहा जल्दी से जाने लगती है
रिया- दीदी क्या हुआ? कहाँ इतना जल्दी जा रही हो?
नेहा- वो कुछ नहीं बस वो थोड़ा गीजर ओन किया था। नहाने जा रही हैं।
रिया- ठीक है दीदी। रात भी बहुत हो गई है। मैं भी सो जाती हैं।
नेहा- "ठीक है." फिर नेहा उधर चली जाती है। रुम में जाकर वो देखती है की राज बेड पर पूरा नंगा लेटा हुआ है। नेहा उसे देखकर शर्मा जाती है।
राज- हाय आ गई त। आ जा जल्दी से।
नेहा धीरे-धीरे उधर जाने लगती है। नेहा एक नाइटी में और चलते हुए उसकी चूचियां हिल रही थी। जिसे राज बड़े ही कामुक नजर से देख रहा था। नेहा बेड के पास आ जाती है।
राज. क्या हुआ नीचे? उस रिया मेमसाहब को रोक लिया या नहीं?
नेहा- हाँ रोक लिया।
राज- और अब तुम दोनों ही हो ना घर में?
नेहा- हाँ ।
राज- क्या बात है मेरी जान... अब तने की जा मेरी गर्लफ्रेंड वाली बात।
नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है। राज फिर अपनी जेब से अपना छोटा सा मोबाइल निकालकर किसी को काल लगता है।
राज- "हाँ सुन बे तेरी रिया अकेली है अपने रूम में। और घर में कोई भी नहीं हैं। जल्दी से आ अंदर... राज ने जय को काल किया ।
नेहा- किसे काल किया था तुमने?
राज- मेरी जान, रिया के आशिक को।
नेहा- तुम दोनों सच में पागल हो।
राज. पागल तो मैं हैं ही, तेरे हान के प्यार में।
नेहा शर्मा जाती है। राज उसे अपने ऊपर खींच लेता है। इधर जय मुख्य दरवाजे से होते हए आराम से अंदर आ जाता है। जय चलते हुए जा रहा था रिया के रूम की तरफ।
इधर राज नेहा को अपने ऊपर खींच कर उसे अपनी बाहों में भरे हुए था।
नेहा- जानेमन अब तो तेरे घर में कोई नहीं है। बहुतू मज़े करेंगे।
नेहा- क्या कोई नहीं है। रिया हैं ना? और तुमने इतना कुछ किया आलरेडी। थकते नहीं क्या तुम?
राज. तेरे साथ अक गया तो क्या फायदा मेरी जान। तू चीज ही ऐसी है की मेरा मन तुझसे कभी नहीं भरता।
नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती हैं। तभी रिया के कमरे से आवाज आती हैं।
रिया- "दीदी दीदी.."
राज इधर समझ जाता है की वहाँ जय आ चुका है।
नेहा- यह रिया को क्या हो गया? क्यों चिल्ला रही है? मैं देख कर आती हैं।
राज उसका हाथ पकड़कर वापस बिठा देता है, और कहता है- "मेरी जान फिकर मत कर। कुछ नहीं हुआ उसे। वो उसका आशिक आ गया लगता है.."
नेहा- लेकिन वो चिल्ला रही है। कहीं तुम्हारे उस दोस्त ने कुछ कर तो नहीं दिया?
राज- कुछ नहीं करेगा।
नेहा थोड़ा शांत हो जाती है।
इधर रिया के रूम में हश्य ही कुछ अलग था। रिया को दीवार से सटाया हुआ जय बिल्कुल उसके सामने खड़ा
था। रिया की दोनों नाजुक कलाई जय के काले हाथ पकड़े हुए थे। और रिया के चेहरे पर गुस्सा साफ नजर आ रहा था। रिया जो तैयार हुई थी जाने के लिए। अभी भी उन कपड़ों में भी। बी जीन्स और टाप में थी। टाप थोड़ा टाइट आ। इस तरह दीवार से सटे होने की वजह से रिया की धड़कनें तेज चल रही औं। जिसकी वजह से उसकी चूचियां उस टाइट टाप में ऊपर-नीचे हो रही थी। जय अपना बदसूरत चेहरा लिये हुए उसके सामने खड़ा आ, और रिया को देख रहा था। रिया लाख कोशिश कर रही थी उसकी पकड़ से छुटने की लेकिन नहीं हो पा रहा था उससे
जय- भूल गई क्या थप्पड़ जो तूने मुझे मारा था।
रिया- मैं चिल्लाऊँगी।
जय- चिल्ला चिल्ला। तेरे घर में कोई नहीं है मुझे पता है।
रिया- "दीदी दीदीड....
जय- तेरी दीदी नहीं आनेवाली।
रिया- क्यों?
जय अब रिया के गले को चूमने लगता है।
रिया- आहह... दूर रहो मुझसे ।
जय- "तुझसे दूर रहने के लिए यहीं नहीं आया हूँ मैं समझी..." ऐसा बोलकर जय अब रिया के गल्ले को चाटने लगता है।
रिया- "ओहह... दूर रहो मुझसे..." रिया को पहले भी जय ऐसा पकड़ चुका था लोकिन आज घर पर कोई नहीं आ। रिया को जय के मुँह से आती गंदी बदबू अलग से परेशान कर रही थी। कहती है- "छोड़ मुझे कमीने.."
जय उसको छोड़ कर- "ले छोड़ दिया। अब क्या?"
रिया जय को एक बार गुस्से से देखकर, उधर से जाने लगती है। वो थोड़ी दूर जाती है की जय उसे पीछे से पकड़ लेता है और उसकी चूचियां दबाने लगता है।
रिया- "अहह.. कमीने..." और रिया को अपनी गाण्ड की दरार में जय का बड़ा लण्ड महसूस हो रहा था। साइज महसूस करके ही रिया बहुत डर जाती है। रिया उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश करती हैं। लेकिन जय की पकड़ बहुत मजबूत थी।
जय रिया के कान के पास आकर- "तो इस मखमली जिम के लिये बहुत तड़पा है में..."
रिया को ये सुनकर ही घिन आ रही थी। वो फिर से जय की पकड़ से छूटने की कोशिश करती है, लेकिन नहीं हो पाता। उल्टा जय के लण्ड का दबाब उसकी गाण्ड पर और ज्यादा हो रहा था। अब तो जय रिया की गाण्ड पर दबाव डाल रहा था अपने लण्ड से। जो रिया के लिए कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था।
इधर राज और नेहा इस रूम में मस्ती कर रहे थे। राज की बाहों में नेहा थी।
राज- मेरी जान, चल ना देखते हैं वो दोनों क्या कर रहे हैं?
नेहा- देखो राज मैं अभी भी बोल रही है प्लीज... रिया के साथ ऐसा ना होने दो। वो अच्छी लड़की है।
राज- तू फिर से शुरू हो गई। मैंने कहा ना कुछ नहीं होता। चल देखते हैं क्या हो रहा है वहीं।
नेहा- नहीं नहीं मुझे नहीं देखना।
राज- चल ना मेरे लिए।
नेहा- "मुझे नहीं देखना राज प्लीज़."
राज- तू ऐसे नहीं मानेगी ना?" और राज नेहा की तरफ कामुकता से देखने लगता हैं।
नेहा जानती थी राज क्या कर सकता है। कहा- "नहीं नहीं चल रही हूँ.."
राज- "ये हुई ना बात.." फिर राज आगे चलने लगता है।
नेहा उधर जाने के लिए झिझक रही थी।
राज- चल जल्दी।
नेहा भी चलने लगती हैं। वो रिया के रूम के बाहर तक पहुँच जाते हैं। रूम के अंदर से आवाज आती है।
"कमीनी... छोड़ मझे." ऐसी सब आवाजें आ रही थी।
नेहा धीरे से- "देखो राज ये गलत कर रहा है वो रिया के साथ। प्लीज़... रोको उसे...
राज- कुछ नहीं कर रहा है मेरी जान। बस उसे प्यार कर रहा है।
नेहा- ये कैसा प्यार हैं जबरदस्ती से?
राज. पहले ऐसे ही होता है। बाद में वो भी लाइन पर आ जाएगी।
नेहा चुप हो जाती है। दरवाजा थोड़ा सा खुला था, जिससे यह दोनों अंदर देख रहे थे। अंदर जय रिया को पीछे से पए था, और उसकी चूचियां दबा रहा था। अब तक रिया की सिसकारियां निकलने लगी थी।
बाहर का भी दृश्य कुछ कम हाट नहीं था। नेहा आगे खड़ी थी और उसके पीछे राज। नेहा बड़े ही उत्तेजना के साथ अंदर देख रही थी, और राज भी उसके पीछे खड़ा अंदर देख रहा था।
अंदर जय अब रिया को गरम होता देखकर, अपना एक हाथ रिया की कमर से होते हुए उसकी साड़ी के ऊपर से उसकी चूत पर ले जाता है। इस तरह हाथ लगने से रिया एक बार के लिए उछल पड़ती है। लेकिन उसके चेहरे के भाब चेंज हो रहे थे। जय अब रिया की चूत को साड़ी के ऊपर से ही मसलने लगता है।
बाहर ये सब देखकर राज का लण्ड खड़ा हो जाता है। राज नेहा के कान के पास जाकर जो बड़े गौर से अंदर का दृश्य देख रही थी, कहता है- "देख मेरी जान कैसे दोनों मजे कर रहे हैं?
नेहा कुछ नहीं बोलती
।
राज अब उससे चिपक के खड़ा हो जाता है। जिसे महसूस करके नेहा एक बार पीछे देखती है। फिर आगे देखने लगती है।
जय अब अंदर रिया की चूत सहलाना बंद कर चुका था। इसी बीच रिया झड़ चुकी थी। जय अब रिया को बेड पर धकेल देता है। रिया बेड पर गिर जाती हैं। अब जय अपनी शर्ट निकालने लगता है।
रिया- प्लीज्ज... ऐसा मत करो मेरे साथ। छोड दो ।
जय कुछ नहीं बोलता। बस अपनी शर्ट निकाल देता है। एकदम काला सा दिखने वाला शरीर उसका पहली बार रिया के सामने था।
बाहर नेहा की नजर भी पहली बार उसके पति और राज के अलावा किसी गैर आदमी के नंगे शरीर पर पड़ी।
राज उसके पीछे चिपका हुआ बड़े कामुक तरीके से नेहा की गाण्ड से चिपका हुआ था। जो नेहा को उधर गरम कर रहा था। लेकिन नेहा चुपचाप खड़ी देख रही थी अंदर।
रिया अपना मुँह फेर लेती है जय को कपड़े निकालता देखकर, और कहती है- "क्यों मेरी जिंदगी खराब कर रहे हो' प्लीज.. छोड़ दो मुझे.."
जय कुछ सोचकर- "अच्छा ठीक है छोड़ देता हूँ लेकिन एक शर्त पर।
रिया जय की तरफ हैरत से देखते हुए- "कसी शर्त?"
जय अपना लौड़ा मसलते हुए- "एक बार मेरा लण्ड चूस दे। फिर मैं तुझे छोड़ दूंगा.."
रिया- क्या? गंदे कहीं के। में नहीं करने वाली ये सब।
जय- तो फिर तैयार हो जा। आज परी रात तेरे साथ मजे करना है मुझे।
रिया इस बात से दूर जाती हैं- "नहीं नहीं प्लीज... मत करो ये सब..."
जय- देख तुझे कुछ तो करना पड़ेगा। या तो लण्ड चूस या फिर चुदाई के लिए तैयार हो जा।
बाहर खड़ी नेहा जय की बातें सुन रही थी। उसका बुरा हाल हो रहा था रिया की ये हालत देखकर। लेकिन पता नहीं वो फिर भी बड़ा इंटरेस्ट लेकर अंदर का शो देख रही थी।
रिया नेहा को यहाँ देखकर- "क्या हुआ दीदी, आप भी आ रहे हो क्या?"
नेहा- नहीं। वो मैं ये कहने आई थी की सब लोग उधर जा रहे हैं तो मैं अकेली रह जाऊँगी इधर।
रिया- इसीलिए कह रही हैं दीदी आप भी चलो हमारे साथ।
नेहा- वो... रिया क्यों ना तुम भी रुक जाओ इधर हो। मम्मीजी और पापाजी हो आएंगे उधर।
रिया- लेकिन दीदी वो दोनों अकेले?
नेहा- अरे तो तू सौरभ को काल कर देना... मैं विशाल को काल कर देती हैं। वो दोनों चले जाएंगे उनके साथ।
रिया- ठीक है दीदी में करती हूँ काल सौरभ को।
नेहा- ठीक है में विशाल को काल कर के आती है।
फिर नेहा वहीं से ब्याहर आ जाती है। नेहा विशाल को काल करके सब बताती हैं और वो और सौरभ उधर से घर के लिए निकल जाते हैं। नेहा बाहर हाल में आई हुई थी। तभी उसकी सास अपने रूम से तैयार होकर आती है।
नेहा उधर जाकर- "मम्मीजी सब ठीक हो जायगा। फिकर मत कीजिये.."
सावित्री वो सब तो ठीक है बहू, लोकल तुम नहीं आ रही हो क्या?
नेहा- नहीं मम्मीजी मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है। मैंने विशाल को काल कर दिया है वो लोग आ रहे हैं।
सावित्री ठीक है बहू ।
थोड़ी देर में वो लोग आ जाते हैं। फिर वो लोग निकल पड़ते हैं उधर जाने के लिए। अब घर में नेहा और रिया ही बचे हुए थे, और नेहा को रूम में राज।
नेहा हाल में खड़ी थी कि उसे एकदम से याद आता है की उसके गम में तो राज है। नेहा जल्दी से जाने लगती है
रिया- दीदी क्या हुआ? कहाँ इतना जल्दी जा रही हो?
नेहा- वो कुछ नहीं बस वो थोड़ा गीजर ओन किया था। नहाने जा रही हैं।
रिया- ठीक है दीदी। रात भी बहुत हो गई है। मैं भी सो जाती हैं।
नेहा- "ठीक है." फिर नेहा उधर चली जाती है। रुम में जाकर वो देखती है की राज बेड पर पूरा नंगा लेटा हुआ है। नेहा उसे देखकर शर्मा जाती है।
राज- हाय आ गई त। आ जा जल्दी से।
नेहा धीरे-धीरे उधर जाने लगती है। नेहा एक नाइटी में और चलते हुए उसकी चूचियां हिल रही थी। जिसे राज बड़े ही कामुक नजर से देख रहा था। नेहा बेड के पास आ जाती है।
राज. क्या हुआ नीचे? उस रिया मेमसाहब को रोक लिया या नहीं?
नेहा- हाँ रोक लिया।
राज- और अब तुम दोनों ही हो ना घर में?
नेहा- हाँ ।
राज- क्या बात है मेरी जान... अब तने की जा मेरी गर्लफ्रेंड वाली बात।
नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है। राज फिर अपनी जेब से अपना छोटा सा मोबाइल निकालकर किसी को काल लगता है।
राज- "हाँ सुन बे तेरी रिया अकेली है अपने रूम में। और घर में कोई भी नहीं हैं। जल्दी से आ अंदर... राज ने जय को काल किया ।
नेहा- किसे काल किया था तुमने?
राज- मेरी जान, रिया के आशिक को।
नेहा- तुम दोनों सच में पागल हो।
राज. पागल तो मैं हैं ही, तेरे हान के प्यार में।
नेहा शर्मा जाती है। राज उसे अपने ऊपर खींच लेता है। इधर जय मुख्य दरवाजे से होते हए आराम से अंदर आ जाता है। जय चलते हुए जा रहा था रिया के रूम की तरफ।
इधर राज नेहा को अपने ऊपर खींच कर उसे अपनी बाहों में भरे हुए था।
नेहा- जानेमन अब तो तेरे घर में कोई नहीं है। बहुतू मज़े करेंगे।
नेहा- क्या कोई नहीं है। रिया हैं ना? और तुमने इतना कुछ किया आलरेडी। थकते नहीं क्या तुम?
राज. तेरे साथ अक गया तो क्या फायदा मेरी जान। तू चीज ही ऐसी है की मेरा मन तुझसे कभी नहीं भरता।
नेहा के चेहरे पर स्माइल आ जाती हैं। तभी रिया के कमरे से आवाज आती हैं।
रिया- "दीदी दीदी.."
राज इधर समझ जाता है की वहाँ जय आ चुका है।
नेहा- यह रिया को क्या हो गया? क्यों चिल्ला रही है? मैं देख कर आती हैं।
राज उसका हाथ पकड़कर वापस बिठा देता है, और कहता है- "मेरी जान फिकर मत कर। कुछ नहीं हुआ उसे। वो उसका आशिक आ गया लगता है.."
नेहा- लेकिन वो चिल्ला रही है। कहीं तुम्हारे उस दोस्त ने कुछ कर तो नहीं दिया?
राज- कुछ नहीं करेगा।
नेहा थोड़ा शांत हो जाती है।
इधर रिया के रूम में हश्य ही कुछ अलग था। रिया को दीवार से सटाया हुआ जय बिल्कुल उसके सामने खड़ा
था। रिया की दोनों नाजुक कलाई जय के काले हाथ पकड़े हुए थे। और रिया के चेहरे पर गुस्सा साफ नजर आ रहा था। रिया जो तैयार हुई थी जाने के लिए। अभी भी उन कपड़ों में भी। बी जीन्स और टाप में थी। टाप थोड़ा टाइट आ। इस तरह दीवार से सटे होने की वजह से रिया की धड़कनें तेज चल रही औं। जिसकी वजह से उसकी चूचियां उस टाइट टाप में ऊपर-नीचे हो रही थी। जय अपना बदसूरत चेहरा लिये हुए उसके सामने खड़ा आ, और रिया को देख रहा था। रिया लाख कोशिश कर रही थी उसकी पकड़ से छुटने की लेकिन नहीं हो पा रहा था उससे
जय- भूल गई क्या थप्पड़ जो तूने मुझे मारा था।
रिया- मैं चिल्लाऊँगी।
जय- चिल्ला चिल्ला। तेरे घर में कोई नहीं है मुझे पता है।
रिया- "दीदी दीदीड....
जय- तेरी दीदी नहीं आनेवाली।
रिया- क्यों?
जय अब रिया के गले को चूमने लगता है।
रिया- आहह... दूर रहो मुझसे ।
जय- "तुझसे दूर रहने के लिए यहीं नहीं आया हूँ मैं समझी..." ऐसा बोलकर जय अब रिया के गल्ले को चाटने लगता है।
रिया- "ओहह... दूर रहो मुझसे..." रिया को पहले भी जय ऐसा पकड़ चुका था लोकिन आज घर पर कोई नहीं आ। रिया को जय के मुँह से आती गंदी बदबू अलग से परेशान कर रही थी। कहती है- "छोड़ मुझे कमीने.."
जय उसको छोड़ कर- "ले छोड़ दिया। अब क्या?"
रिया जय को एक बार गुस्से से देखकर, उधर से जाने लगती है। वो थोड़ी दूर जाती है की जय उसे पीछे से पकड़ लेता है और उसकी चूचियां दबाने लगता है।
रिया- "अहह.. कमीने..." और रिया को अपनी गाण्ड की दरार में जय का बड़ा लण्ड महसूस हो रहा था। साइज महसूस करके ही रिया बहुत डर जाती है। रिया उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश करती हैं। लेकिन जय की पकड़ बहुत मजबूत थी।
जय रिया के कान के पास आकर- "तो इस मखमली जिम के लिये बहुत तड़पा है में..."
रिया को ये सुनकर ही घिन आ रही थी। वो फिर से जय की पकड़ से छूटने की कोशिश करती है, लेकिन नहीं हो पाता। उल्टा जय के लण्ड का दबाब उसकी गाण्ड पर और ज्यादा हो रहा था। अब तो जय रिया की गाण्ड पर दबाव डाल रहा था अपने लण्ड से। जो रिया के लिए कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था।
इधर राज और नेहा इस रूम में मस्ती कर रहे थे। राज की बाहों में नेहा थी।
राज- मेरी जान, चल ना देखते हैं वो दोनों क्या कर रहे हैं?
नेहा- देखो राज मैं अभी भी बोल रही है प्लीज... रिया के साथ ऐसा ना होने दो। वो अच्छी लड़की है।
राज- तू फिर से शुरू हो गई। मैंने कहा ना कुछ नहीं होता। चल देखते हैं क्या हो रहा है वहीं।
नेहा- नहीं नहीं मुझे नहीं देखना।
राज- चल ना मेरे लिए।
नेहा- "मुझे नहीं देखना राज प्लीज़."
राज- तू ऐसे नहीं मानेगी ना?" और राज नेहा की तरफ कामुकता से देखने लगता हैं।
नेहा जानती थी राज क्या कर सकता है। कहा- "नहीं नहीं चल रही हूँ.."
राज- "ये हुई ना बात.." फिर राज आगे चलने लगता है।
नेहा उधर जाने के लिए झिझक रही थी।
राज- चल जल्दी।
नेहा भी चलने लगती हैं। वो रिया के रूम के बाहर तक पहुँच जाते हैं। रूम के अंदर से आवाज आती है।
"कमीनी... छोड़ मझे." ऐसी सब आवाजें आ रही थी।
नेहा धीरे से- "देखो राज ये गलत कर रहा है वो रिया के साथ। प्लीज़... रोको उसे...
राज- कुछ नहीं कर रहा है मेरी जान। बस उसे प्यार कर रहा है।
नेहा- ये कैसा प्यार हैं जबरदस्ती से?
राज. पहले ऐसे ही होता है। बाद में वो भी लाइन पर आ जाएगी।
नेहा चुप हो जाती है। दरवाजा थोड़ा सा खुला था, जिससे यह दोनों अंदर देख रहे थे। अंदर जय रिया को पीछे से पए था, और उसकी चूचियां दबा रहा था। अब तक रिया की सिसकारियां निकलने लगी थी।
बाहर का भी दृश्य कुछ कम हाट नहीं था। नेहा आगे खड़ी थी और उसके पीछे राज। नेहा बड़े ही उत्तेजना के साथ अंदर देख रही थी, और राज भी उसके पीछे खड़ा अंदर देख रहा था।
अंदर जय अब रिया को गरम होता देखकर, अपना एक हाथ रिया की कमर से होते हुए उसकी साड़ी के ऊपर से उसकी चूत पर ले जाता है। इस तरह हाथ लगने से रिया एक बार के लिए उछल पड़ती है। लेकिन उसके चेहरे के भाब चेंज हो रहे थे। जय अब रिया की चूत को साड़ी के ऊपर से ही मसलने लगता है।
बाहर ये सब देखकर राज का लण्ड खड़ा हो जाता है। राज नेहा के कान के पास जाकर जो बड़े गौर से अंदर का दृश्य देख रही थी, कहता है- "देख मेरी जान कैसे दोनों मजे कर रहे हैं?
नेहा कुछ नहीं बोलती
।
राज अब उससे चिपक के खड़ा हो जाता है। जिसे महसूस करके नेहा एक बार पीछे देखती है। फिर आगे देखने लगती है।
जय अब अंदर रिया की चूत सहलाना बंद कर चुका था। इसी बीच रिया झड़ चुकी थी। जय अब रिया को बेड पर धकेल देता है। रिया बेड पर गिर जाती हैं। अब जय अपनी शर्ट निकालने लगता है।
रिया- प्लीज्ज... ऐसा मत करो मेरे साथ। छोड दो ।
जय कुछ नहीं बोलता। बस अपनी शर्ट निकाल देता है। एकदम काला सा दिखने वाला शरीर उसका पहली बार रिया के सामने था।
बाहर नेहा की नजर भी पहली बार उसके पति और राज के अलावा किसी गैर आदमी के नंगे शरीर पर पड़ी।
राज उसके पीछे चिपका हुआ बड़े कामुक तरीके से नेहा की गाण्ड से चिपका हुआ था। जो नेहा को उधर गरम कर रहा था। लेकिन नेहा चुपचाप खड़ी देख रही थी अंदर।
रिया अपना मुँह फेर लेती है जय को कपड़े निकालता देखकर, और कहती है- "क्यों मेरी जिंदगी खराब कर रहे हो' प्लीज.. छोड़ दो मुझे.."
जय कुछ सोचकर- "अच्छा ठीक है छोड़ देता हूँ लेकिन एक शर्त पर।
रिया जय की तरफ हैरत से देखते हुए- "कसी शर्त?"
जय अपना लौड़ा मसलते हुए- "एक बार मेरा लण्ड चूस दे। फिर मैं तुझे छोड़ दूंगा.."
रिया- क्या? गंदे कहीं के। में नहीं करने वाली ये सब।
जय- तो फिर तैयार हो जा। आज परी रात तेरे साथ मजे करना है मुझे।
रिया इस बात से दूर जाती हैं- "नहीं नहीं प्लीज... मत करो ये सब..."
जय- देख तुझे कुछ तो करना पड़ेगा। या तो लण्ड चूस या फिर चुदाई के लिए तैयार हो जा।
बाहर खड़ी नेहा जय की बातें सुन रही थी। उसका बुरा हाल हो रहा था रिया की ये हालत देखकर। लेकिन पता नहीं वो फिर भी बड़ा इंटरेस्ट लेकर अंदर का शो देख रही थी।