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Adultery ब्लैकमेल

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एक रुममें सॅम और रघु रहते थे. रुमके स्थितीसे यह जान पडता था की उन्होने रुम किराएसे ली होगी. कमरे में एक कोने में बैठकर सॅम अपने कॉम्प्यूटरपर बैठकर चॅटींग कर रहा था और कमरेके बिचोबिच रघु डीप्स मारता हूवा एक्सरसाईज कर रहा था. सॅम अपने कॉम्प्यूटरपर दिख रहे चॅटींग विंडोमें धीरे धीरे उपर खिसक रहे चॅटींग मेसेजेस एक एक करके पढ रहा था. शायद वह चाटींगके लिए कोई अच्छा साथीदार ढूंढ रहा होगा. जबसे उसे चॅटींगका आविष्कार हूवा तब से ही उसे यह बहुत पसंद आया था. पहले खाली वक्तमें वक्त बितानेका गप्पे मारना इससे कारगर कोई तरीका नही होगा ऐसी उसकी सोच थी. लेकिन अब जबसे उसे चॅटींगका आविष्कार हुवा उसकी सोच पुरी तरह बदल गई थी. चॅटींगकी वजहसे आदमीको मिले बिना गप्पे मारना अब संभव होगया था. कुछ जान पहचानवाले तो कुछ अजनबी लोगोंसे चॅट करने में उसे बडा मजा आने लगा था. अजनबी लोगोंसे आमने सामने मिलने के बाद कैसे उन्हे पहले अपने कंफर्टेबल झोन में लाना पडता है और उसके बाद ही बातचित आगे बढ सकती है. और उसके लिए सामनेवाला कैसा है इसपर सब निर्भर करता है और उसको कंफर्टेबल झोन में लाने के लिए कभी एक घंटा तो कभी कई सारे दिनभी लग सकते है. चॅटींगपर वैसा नही होता है. कोई पहचान का हो या अजनबी बिनदास्त मेसेज भेज दो. सामनेवाले ने एंटरटेन किया तो ठीक नही तो दुसरा कोई साथी ढूंढो. अपने पास सारे विकल्प होते है. कुछ न समझनेवाले तो कुछ गाली गलोच वाले कुछ संवाद उसे चॅटींग विंडोमें उपर उपर खिसकते हूए दिखाई दे रहे थे.

तभी उसे बाकी मेसेजसे कुछ अलग मेसेज दिखा ,

" अच्छा तुम क्या करती हो? … मेरा मतलब पढाई या जॉब?"

किसी अस्तित्व का मेसेज था.

वह उसका असली नामभी हो सकता था या नकली …

" मैने बी. ई. कॉम्प्यूटर किया हूवा है … और जी. एच. इन्फॉरमॅटीक्स इस खुदके कंपनीकी मै फिलहाल मॅनेजींग डायरेक्टर हूं " अस्तित्व के मेसेजके रिस्पॉन्सके तौरपर यह मेसेज अवतरीत हूवा था.

भेजनेवाले का नाम ईशा था.

अचानक मेसेज पढते हूए सॅमके दिमागमें एक विचार कौंधा.

इस मेसेजसे क्या मै कुछ फायदा ले सकता हूं ?…

वह मनही मन सोचकर सारी संभावनाए टटोल रहा था. सोचते हूए अचानक उसके दिमागमें एक आयडीया आ गया.

वह झटसे रघुकी तरफ मुडते हूए बोला, " रघु जल्दीसे इधर आ जाओ "

उसका चेहरा एक तरहकी चमकसे दमक रहा था.

रघु एक्सरसाईज करते हूए रुक गया और कुछ इंटरेस्ट ना दिखाते हूए धीमे धीमे उसके पास आकर बोला, " क्या है ?… अब मुझे ठीकसे एक्सरसाईज भी नही करने देगा ?"

" अरे इधर मॉनिटरपर तो देखो … एक सोनेका अंडा देनेवाली मुर्गी हमें मिल सकती है .." सॅम फिरसे उसका इंटरेस्ट जागृत करनेका प्रयास करते हूए बोला.

अब कहा रघु थोडा इंटरेस्ट लेकर मॉनिटरकी तरफ देखने लगा.

तभी चॅटींग विंडोमें अवतरीत हूवा और उपर खिसक रहा अस्तित्व का और एक मेसेज उन्हे दिखाई दिया,

" अरे बापरे!.. " तुम्हे तुम्हारे उम्रके बारेमें पुछा तो गुस्सा तो नही आएगा ?… नही … मतलब मैने कही पढा है की लडकियोंको उनके उम्रके बारेमें पुछना अच्छा नही लगता है. … "

उसके बाद तुरंत ईशाने भेजा हूवा रिस्पॉन्सभी अवतरीत हूवा –

" २३ साल"

" देख तो यह हंस और हंसिनी का जोडा… यह हंसीनी एक सॉफ्टवेअर कंपनीकी मालिक है … मतलब मल्टी मिलीयन डॉलर्स…" सॅम अपने चेहरेपर आए लालचभरे भाव छूपानेका प्रयास करते हूए बोला.

तभी फिरसे चॅटींग विंडोमें अस्तित्व का मेसेज अवतररीत हूवा,

" अरे यह तो मुझे पताही था… मैने तुम्हारे मेल आयडीसे मालूम किया था…. सच कहूं ? तूमने जब बताया की तूम मॅनेजींग डायरेक्टर हो … तो मेरे सामने एक ४५-५० सालके वयस्क औरतकी तस्वीर आ गई थी… "

रघुने उन दोनोंके उस विंडोमें दिख रहे सारे मेसेजेस पढ लिए और पुछा, " लेकिन हमें क्या करना पडेगा ?"

" क्या करना है यह सब तुम मुझपर छोड दो … सिर्फ मुझे तुम्हारा साथ चाहिए " सॅम अपना हाथ आगे बढाते हूवा बोला.

" कितने पैसे मिलेगे ?" रघुने असली बातपर आते हूए सवाल पुछा.

" अरे लाखो करोडो में खेल सकते है हम " सॅम रघुका लालच जागृत करनेका प्रयास करते हूए बोला.

" लाखो करोडो?" रघु सॅमका हाथ अपने हाथमे लेते हूए बोला, " तो फिर मै तो अपनी जानभी देनेके लिए तैयार हूं "

तभी फिरसे चॅटींग विंडोमें ईशाका मेसेज अवतरीत हूवा , " तूमने तुम्हारी उम्र नही बताई ?…"

उसके पिछेही अस्तित्व का जवाब चॅटींग विंडोमें अवतरीत हूवा, " मैने मेरे मेल ऍड्रेसकी जानकारीमें … मेरी असली उम्र डाली हूई है …"

" २३ साल… बहूत नाजुक उम्र होती है … मछली प्यारके जालमें फसकर कुछभी कर सकती है " सॅम अजिब तरहसे मुस्कुराते हूए बोला.
 
२१

लगभग आधी रात हो गई थी. सॅमके कमरेका लाईट बंद था. लेकिन फिरभी कमरेमें चारो तरफ धुंधली रोशनी फैल गई थी- कमरेमें, कोनेमें चल रहे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी वजहसे. सॅम कॉम्प्यूटरपर कुछ करनेमें बहुत लीन था. उसके आसपास सब तरफ खानेकी, नाश्तेकी प्लेट्स, चायके खाली, आधे भरे हूए कप्स, चिप्स, खाली हो चुके व्हिस्किके ग्लासेस और आधीसे जादा खाली हो चुकी व्हिस्किकी बॉटल दिख रही थी. उसके पिछे कॉटपर हाथपैर फैलाकर रघु सोया हुवा था. उस आधी रातके सन्नाटेमें सॅम तेजीसे कॉम्प्यूटरपर कुछ कर रहा था और उसके किबोर्डके बटन्सका एक अजिब आवाज उस कमरेमें आ रहा था. उधर सॅमके पिछे सो रहे रघुका बेचैनीसे करवटपे करवट बदलना जारी था.

आखिर अपने आपको ना रोक पाकर रघु उठकर बैठते हूए सॅमसे बोला, " यार तेरा यह क्या चल रहा है? … ८ दिनसे देख रहा हूं … दिनभर किचकिच… रातकोभी किचकिच… कभीतो शांतीसे सोने दे… तेरे इस साले किबोर्डके आवाजसे तो मेरा दिमाग पागल होनेकी नौबत आई है …"

सॅम एकदम शांत और चूप था. कुछभी प्रतिक्रिया ना व्यक्त करते हूए उसका अपना कॉम्प्यूटरपर काम करना जारी था.

"अच्छा तुम क्या कर रहे हो यह तो बताएगा ? … आठ दिनसे तेरा ऐसा कौनसा काम चल रहा है ?… मेरी तो कुछ समझमें नही आ रहा है …" रघु उठकर उसके पास आते हूए बोला.

" अस्तित्व और ईशाका पासवर्ड ब्रेक कर रहा हूं …. ईशाका ब्रेक हो चुका है अब अस्तित्व का ब्रेक करनेकी कोशीश कर रहा हूं " सॅम उसकी तरफ ना देखते हूए कॉम्प्यूटरपर अपना काम वैसाही शुरु रखते हूए बोला. .

" उधर तु पासवर्ड ब्रेक कर रहा है और इधर तेरे इस किबोर्डके किचकीचसे मेरा सर ब्रेक होनेकी नौबत आई है उसका क्या ?" रघु फिरसे बेडपर जाकर सोनेकी कोशीश करते हूए बोला.

किसका पासवर्ड ब्रेक हूवा और किसका ब्रेक होनेका रहा इससे उसे कुछ लेना देना नही था. उसे तो सिर्फ पैसेसे मतलब था. रघुने अपने सरपर चादर ओढ ली, फिरभी आवाज आ ही रहा था, फिर तकिया कानपर रखकर देखा, फिरभी आवाज आ ही रहा था, आखीर उसने तकीया एक कोनेमें फाडा और उसमेंसे थोडी रुई निकालकर अपने दोनो कानोंमे ठूंस दी और फिरसे सोनेकी कोशीश करने लगा.

अब लगभग सुबहके तिन बजे होंगे, फिरभी सॅमका कॉम्प्यूटरपर काम करना जारीही था. उसके पिछे बेडपर पडा हूवा रघु गहरी निंदमें सोया दिख रहा था.

तभी कॉम्प्यूटरपर काम करते करते सॅम खुशीके मारे एकदम उठकर खडा होते हूए चिल्लाया, " यस… या हू… आय हॅव डन इट"

वह इतनी जोरसे चिल्लाया की बेडवर सोया हूवा रघु डरके मारे जाग गया और चौककर उठते हूए घबराए स्वरमें इधर उधर देखते हूए सॅमसे पुछने लगा, " क्या हूवा ? क्या हूवा ? "

" कम ऑन चियर्स रघु… हमें अब खजानेकी चाबी मिल चुकी है … देख इधर तो देख …" सॅम रघुका हाथ पकडकर उसे कॉम्प्यूटरकी तरफ खिंचकर ले जाते हूए बोला.

रघु जबरदस्तीही उसके साथ आगया. और मॉनिटरपर देखने लगा.

" यह देखो मैने अस्तित्व का पासवर्डभी ब्रेक किया है और यह देख उसने भेजी हूई मेल " सॅम रघुका ध्यान मॉनिटरपर अस्तित्व के मेलबॉक्ससे खोले हूए एक मेलकी तरफ आकर्षीत करते हूए बोला.

मॉनिटरपर खोले मेलमें लिखा हूवा था –

" अस्तित्व … २५ को सुबह बारा बजे एक मिटींगके सिलसिलेमें मै मुंबई आ रही हूं … १२.३० बजे हॉटेल ओबेराय पहूचूंगी … और फिर फ्रेश वगैरे होकर १.०० बजे मिटींग अटेंड करुंगी … मिटींग ३-४ बजेतक खत्म हो जाएगी … तुम मुझे बराबर ५.०० बजे वर्सोवा बिचपर मिलो … बाय फॉर नॉऊ… टेक केअर"

" चलो अब हमें अपना बस्ता यहांसे मुंबईको ले जानेकी तैयारी करनी पडेगी. " सॅमने रघुसे कहा.

रघु अविश्वासके साथ सॅमकी तरफ देख रहा था. अब कहां उसे अस्तित्व आठ दिनसे क्या कर रहा था और किस लिए कर रहा था यह पता चल गया था.

" यार सॅम … यू आर जिनियस" अब रघुके बदनमेंभी जोश दौडने लगा था.
 
२२

वर्सोवा बिचपर ईशा अस्तित्व की राह देख रही थी और उधर बडे बडे पत्थरोंके पिछे छुपकर सॅम और रघु अपने अपने कॅमेरे उसपर केंद्रीत कर विवकके आनेकी राह देखने लगे. थोडी देरमें अस्तित्व भी आ गया, अस्तित्व और ईशामें कुछ संवाद हुवा, जो उन्हे सुनाई नही दे रहा था लेकिन उनके कॅमेरे अब उनके एक के पिछे एक फोटो खिचने लगे. थोडीही देरमें अस्तित्व और ईशा एकदुसरेके हाथमें हाथ डालकर बिचपर चलने लगे. इधर सॅम और रघुभी पत्थरोके पिछेसे आगे आगे खिसकते हूए उनके फोटो ले रहे थे.

अंधेरा छाने लगा था और एक लमहेमें उनमें क्या संवाद हुवा क्या पता?, अस्तित्व ने ईशाको कसकर अपने बाहोंमें खिंच लिया. इधर सॅम और रघुकी फोटो निकालनेकी रफ्तार तेज हो गई थी. फिरभी वे संतुष्ट नही थे. क्योंकी उन्हे जो चाहिए था वह अबभी नही मिला था.

ईशाकी कार जब ओबेराय हॉटेलके सामने आकर रुकी. उसके कारका पिछा कर रही सॅम और रघुकी टॅक्सीभी एक सुरक्षीत अंतर रखकर रुक गई. ईशा गाडीसे उतरकर हॉटेलमें जाने लगी और उसके पिछे अस्तित्व भी जा रहा था, तब सॅमने रघुकी तरफ एक अर्थपुर्ण नजरसे देखा और वे दोनोभी उनके खयालमें नही आए इसका ध्यान रखते हूए उनका पिछा करने लगे.

अब ईशा और अस्तित्व हॉटेलके रुममें पहूंच गए थे और रुमका दरवाजा बंद हो गया था. उनका पिछा कर रहे सॅम और रघु अब जल्दी करते हूए उनके रुमके दरवाजेके पास आगए. रघुने दरवाजा धकेलकर देखा. वह अंदरसे बंद था.

" अब क्या हम यहां उनकी पहरेदारी करनेवाले है ?" रघुने चिढकर लेकिन धीमे स्वरमें कहा.

" डोन्ट वरी… वुई हॅव अ सोल्यूशन " सॅमने उसका हौसला बढाते हूए कहा.

रघु दरवाजेके कीहोलसे अंदर हॉटेलके रुममें देख रहा था …

अंदर फोन उठाते हूए ईशाके हाथका हल्कासा स्पर्श अस्तित्व को हुवा. बादमें फोनका नंबर डायल करनेके लिए उसने दुसरा हाथ सामने किया. इसबार उस हाथकाभी अस्तित्व को स्पर्श हुवा. इसबार अस्तित्व अपने आपको रोक नही सका. उसने ईशाका फोन डायल करनेके लिए सामने किया हाथ हल्केसे अपने हाथमें लिया. ईशा उसकी तरफ देखकर शर्माकर मुस्कुराई. उसने अब वह हाथ कसकर पकडकर खिंचकर उसे अपने आगोशमें लिया था. सबकुछ कैसे तेजीसे हो रहा था. उसके होंठ अब थरथराने लगे थे. अस्तित्व ने अपने गरम और अधीर हूए होंठ उसके थरथराते होंठपर रख दिए और उसे झटसे अपने मजबुत आगोशमें लेकर, उठाकर, बाजुमें रखे बेडपर लिटा दिया ….

रघु अंदर कीहोलसे इतनी देरसे अंदर क्या देख रहा है? … और वहभी कुछ शिकायत ना करते हूए. सॅमको आशंका हूई. उसने रघुका सर कीहोल से बाजू हटाया. और वह अब खुद अंदर देखने लगा …

अंदर ईशाके शरीर पर अस्तित्व झुक गया था और वह उसके गलेको चुम रहा था मानो उसके कानमें कुछ कह रहा हो. धीरे धीरे उसका मजबुत मर्दानी हाथ उसके नाजूक अंगोसे खेलने लगा. और प्रतिक्रियाके रुपमें वहभी किसी लताकी तरह उसे चिपककर सहला रही थी. हकसे अब वह उसके शरीरसे एक एक कर कपडे निकालने लगा और वहभी उसके शरीरसे कपडे निकालने लगी….

रघुने सॅमकी उसका सर कीहोलसे बाजू होगा इसकी थोडी देर राह देखी. लेकिन वह वहांसे हटनेके लिए तैयार नही था. तब रघुने जबरदस्ती उसका सर कीहोलसे बाजु हटाया और वह उसे बोला, " मेर भाई यह देखनेसे अपना पेट भरनेवाला नही है … थोडा अपने पेट पानीका भी सोचो "

अंदरका दृष्य देखनेमें लिन हूवा सॅम अब कहा होशमें आ गया.

" लेकिन अब उनके फोटो तूम कैसे निकालनेवाले हो ?" रघुने कामका सवाल पुछ लिया.

" डोन्ट वरी वुई आर इक्वीपड विथ टेक्नॉलॉजी." रघुने उसे दिलासा दिया और उसने अपने जेबसे एक वायरजैसी चिज निकालकर उसका एक सिरा अपने कॅमेरेसे जोडा और दुसरा सिरा दरवाजेके कीहोलसे अंदर डाला.

" यह क्या है … पता है ?" रघुने पुछा.

" दिस इज स्पेशल कॅमेरा माय डियर" सॅमने कहा और वह उस स्पेशल कॅमेरेसे हॉटेलके रुमके अंदरके सारे फोटो निकालने लगा.
 
२३

शामका वक्त था. सॅम सुबहसे अबतक उसके रुममें कॉम्प्यूटरपर बैठा हूवा था. रघु उसके बगलमें आकर खडा हो गया और उसका क्या चल रहा है यह देखने लगा. रघुकी आहट होतेही सॅम कीबोर्डकी कुछ बटन्स दबाता हूवा बोला,

" देख यह है हमने निकाली हूई तस्वीरे … कैसी लग रही है ?"

कॉम्प्यूटरके मॉनिटरपर ईशा और अस्तित्व की हॉट फोटोज किसी स्लाईड शो की तरह एकके पिछे एक ऐसी आगे आगे खिसकने लगी.

" वा वा .. एकदम परफेक्ट… जस्ट लाईक अ प्रोफेशनल फोटोग्राफर…" रघु सॅमकी सराहना करते हूए बोला.

" लेकिन सिर्फ यह फोटोग्राफ्स देखकर क्या होनेवाला है … हमें आगे भी कुछ करना पडेगा … सिर्फ सुबहसे शामतक कॉम्प्यूटरपर बैठकर क्या होनेवाला है? " रघु उसे ताना मारते हूए बोला.

" अरे … अब आगेका काम यह कॉम्प्यूटरही करनेवाला है … पहले मै ईशाके मेलबॉक्ससे अस्तित्व को एक मेल भेजता हूं … फिर उसके बाद तुम्हारा काम शुरु होनेवाला है " सॅमने कहा.

" तूम मेरे कामके बारेमें एकदम बिनदास रहो … सिर्फ पहले तुम्हारा काम होनेके बाद मुझे बता देना .. " रघुने कहा.

सॅमने काफी मेहनत करके हासिल किया हूवा पासवर्ड देकर ईशाका मेलबॉक्स खोला और वह मेल टाईप करने लगा –

" अस्तित्व … सबसे पहले तुम्हे लिखू या ना लिखू ऐसा सोचा …. लेकिन बादमे तय किया की लिखनाही ठीक रहेगा … हम मुंबईको मिलनेके बाद मै वापस गई और इधर एक प्रॉब्लेम होगया … वैसे उसको प्रॉब्लेम नही बोल सकते … लेकिन तुम्हारे लिए उसे प्रॉब्लेमही कहना पडेगा … इधर मेरे रिश्तेदारोंको क्या लगा क्या मालूम लेकिन उन्होने तुरंत मेरी शादी तय की है … पहले मुझे बहुत बुरा लगा … लेकिन बादमै मैने उसके बारेमें बहुत सोचा और मै इस नतिजेपर पहूंची हू की मेरे रिश्तेदार जो भी कर रहे है वह मेरे भलेके लिए ही है .. लडका अच्छा है, अमेरीकामें पढा हूवा है ….इंडस्ट्रीयल फॅमिली है और हमारे बराबरीकी है … अब मुझे धीरे धीरे समझने लगा है की अबतक जो भी हमारे बिच हूवा वह एक अपरीपक्वताका नतिजा था…. इसलिए तुम्हारे और मेरे लिए यही अच्छा रहेगा की कुछ हुवाही नही इस तरह सब भूल जाएं … हम मुंबईको मिले थे यह शायद मेरे रिश्तेदारोंको पता चल चुका है … तुमने मुझसे मिलनेकी या मुझसे संपर्क बनानेकी कोशीशभी की तो वे लोग तुम्हे कुछभी कर सकते है … इसलिए तुम इस मेलका रिप्लायभी मत भेजना … मेरा मेलबॉक्सभी शायद मॉनिटर किया जा रहा है … अपना खयाल रखना …इतनाही मै तुम्हे कह सकती हूं … ईशा"

सॅमने मेल मानो ईशानेही टाईप कर अस्तित्व को भेजी हो इस तरहसे टाईप की. मेल पुरी तरह लिखनेके बाद उसने एक बार फिरसे उसे पढकर देखा. उसके चेहरेपर एक वहशी मुस्कुराहट छुपाए नही छुपाई जा रही थी. उस मेलमें कुछभी त्रूटी बची नही है इसकी तसल्ली होतेही उसने वह मेल अस्तित्व को भेज दी और ईशाका मेलबॉक्स बंद किया.

इधर अस्तित्व सायबर कॅफेमें बैठा था. उसे आशंका … नही यकिन था की ईशाकी कोई तो मेल उसे आई होगी. उसने अपना मेलबॉक्स खोला और उसे मेलबॉक्समें ईशाकी आई हूई मेल दिखाई दी. उसने तुरंत, मानो उसके बदनमें बिजली दौड गई हो, वह मेल खोली. मेल पढते हूए उसका खिला चेहरा एकदमसे मायूस हो गया. मेल पुरी पढनेके बादभी वह जैसे शुन्यमें देख रहा हो ऐसे मॉनिटरकी तरफ देखता रहा.

यह ऐसे कैसे हूवा ?…

वह अपना मजाक तो नही कर रही है ?…

उसे एक पलके लिए लगा.

तभी सायबर कॅफेमें एक आदमी आ गया. वह आए बराबर सिधा अस्तित्व के पास गया. धीरेसे उसके पास झुककर उसने उसके कानमें कुछ कहा, –

" अस्तित्व … आपही है ना ?"

" हां " अस्तित्व आश्चर्यसे उस आदमीकी तरफ देखते हूए बोला.

क्योंकी वह उस आदमी को पहचानता नही था.

" ईशाजी घरसे भागकर आई है … बाहर गाडीमें आपकी राह देख रही है …" वह आदमी फिरसे उसके कानमें बोला.

अस्तित्व ने झटसे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरपर खुले हूए थे वह सब वेब पेजेस बंद कर दिए. और उस आदमीके पिछे पिछे सायबर कॅफेसे बाहर निकल गया.

उस आदमीके पिछे पिछे सायबर कॅफेके बाहर जाते हूए अस्तित्व सोचने लगा.

उसने तो मुझे जो हूवा वह सब भूल जानेके लिए मेल की थी …

फिर वह अचानक भागकर क्यों आगई होगी? ….

शायद उसके रिश्तेदारोंने उसपर दबाव बनाया होगा …

और इसलिए उसने वह मेल लिखी होगी …

अब अस्तित्व उस आदमीके पिछे पिछे सायबर कॅफेके बाहर पहूंच गया था. बाहर सब तरफ अंधेरा था और अंधेरेमें एक कोनेमें उसे एक खिडकीयोंको सब काले शिशे लगाई हूई कार दिखाई दी.

इसी गाडीमें आई होगी ईशा…

जैसे वह आदमी उस गाडीकी तरफ बढने लगा, अस्तित्व भी उसके पिछे पिछे उस गाडीकी तरफ बढने लगा. गाडीके पास पहूंचतेही उसके खयालमें आगया की गाडीका पिछला दरवाजा खुला है.

दरवाजा खुला रखकर वह अपनी राह देख रही होगी….

गाडीके और पास पहूंचतेही अस्तित्व ने पिछले खुले दरवाजेसे ईशाके लिए अंदर झांककर देखा.

लेकिन यह क्या ?…

तभी किसी काले सायेने पिछेसे आकर उसके नाकपर क्लोरोफॉर्मका रुमाल रख दिया और उसे अंदर गाडीमें धकेल दिया. वह अंदर जानेके लिए प्रतिकार करने लगा तो उस काले सायेने लगभग जबरदस्ती उसे अंदर ठूंस दिया. गाडीका दरवाजा बंद होगया और गाडी तेजीसे दौडने लगी. अस्तित्व के खयालमें आगयाकी उसके साथ कुछ धोखा हूवा है. लेकिन तबतक देर हो चुकी थी. उसे अब अहसास होने लगा था की वह अपना होश खोने लगा है.

जिस आदमीने अस्तित्व को गाडीतक लाया था उसने जेबसे पैसे निकाले और वह वे पैसे गिनते हूए वहांसे निकल गया.

अस्तित्व एक बेडपर बेसुध पडा हुवा था. अब धीरे धीरे उसे होश आने लगा था. जैसेही वह पुरी तरह होशमें आगया, उसे वह एक अन्जान जगहपर है ऐसा अहसास होगया. वह तुरंत बैठ गया और अपनी नजर चारो तरफ दौडाने लगा. उसके सामने रघु और उसके दो साथी काले लिबासमें बैठे थे. उनके चेहरेभी काले कपडेसे ढंके हूए थे. अस्तित्व ने उठकर खडे होनेकी कोशीश की तब उसके खयालमें आगया की उसके हाथपैर बंधे हूए है.

वैसेही हालमें जोर लगाकर फिरसे उठकर खडे होनेकी कोशीश करते हूए वह बोला, " कौन हो आप लोग? … मुझे यहां कहां और क्यो लाया आप लोगोनें …"

" चिंता मत करो … यहां हम तुझे ठाठबाठमें रखनेवाले है … हमने तुम्हे ईशाजीके रिस्तेदारोंके कहे अनुसार यहा लाया है … वैसे वे लोग बहुत अच्छे है … जादातर ऐसे झमेलेमें पडते नही है … लेकिन क्या करे इसबार बाते उनके बसके बाहर निकल गई .. फिरभी उन्होने तुम्हे कोई तकलिफ ना हो इसका खास ध्यान रखनेकी हिदायत दी है … "

रघु वहांसे उठकर जानेलगा तो अस्तित्व चिल्लाया.

" मुझे छोड दो … मुझे पकडकर तुम्हे क्या मिलनेवाला है ?"

रघु जाते हूए एकदमसे रुक गया, और मुंहपर उंगली रखते हुए अस्तित्व से बोला,

" चूप जादा आवाज नही करना … "

फिर अपने दो साथीकी तरफ देखकर वह बोला, " ओय… तुम दोनो इसपर ध्यान रखो … "

फिर दुबारा अस्तित्व की तरफ देखकर रघु बोला, " और मजनू तूम … जादा चालाकी करनेकी कोशीश मत करना.. नही तो दोनो पैर तोडकर तुम्हारे हाथमें दे देंगे… और ध्यान रखो ईशाजीके रिश्तेदार अच्छे लोग होंगे … हम नही … "

रघु आगे और उसके दो साथी उसके पिछे पिछे कमरेके बाहर निकल गए. उन्होने कमरेको बाहरसे ताला लगाकर चाबी उन दोनोंमेसे एक के पास दी, उसे वह चाबी संभालकर रखनेकी हिदायत दी और रघु वहांसे निकल गया.
 
२४

सुबहका वक्त था. एक कमरेमें सॅम कॉम्प्यूरपर बैठा था और रघु उसके बगलमें बैठा हुवा था, " अब देखो … हमारा मजदूरीका काम अब खत्म हुवा है " सॅमने रघुसे कहा और उसने कॉम्प्यूटरपर अस्तित्व के मेलबॉक्सका ब्रेक किया हुवा पासवर्ड देकर अस्तित्व का मेलबॉक्स खोला.

" अब असली काम शुरु हो गया है …" सॅम कॉम्प्यूटर ऑपरेट करते हूए बोला.

रघु चूपचाप गौरसे वह क्या कर रहा है यह देख रहा था.

सॅम अब अस्तित्व के मेलबॉक्समें मेल टाईप करने लगा –

" मिस ईशा… हाय… वुई हॅड अ नाईस टाईम … आय रिअली ऍन्जॉइड इट.. खुशीसे लथपथ और आपके प्यारसे भीगे हूए वह क्षण मैने अपने हृदय और कॅमेरेमें कैद कर रखे है …"

सॅमने टाईप करते हूए एक बार रघुकी तरफ देखा. दोनों एक दुसरेकी तरफ देखकर अजीब तरहसे मुस्कुराए. फिर सॅम आगे टाईप करने लगा –

" मै तुम्हारी क्षमा मांगता हूं की वे पल मैने तुम्हारे इजाजतके बिना कॅमेरेमें कैद किए … वे पल थे ही ऐसे की मै अपने आपको रोक ना सका … तुम्हे झूठ लगता है? … तो देखो … उन पलोंमेसे एक पलका फोटो मै इस मेलके साथ भेज रहा हूं … ऐसे काफी पल मैने मेरे कॅमेरेमें और मेरे दिलमें कैद करके रखे है … सोच रहा हूं की उन पलोंको .. उन फोटोग्राफ्सको इंटरनेटपर पब्लीश करुं … क्यों कैसी झकास आयडिया है ? नही? … लेकिन वह तुम्हे पसंद नही आएगा … नही तुम्हारी अगर वैसी इच्छा ना हो तो उन पलोंको मै हमेशाके लिए मेरे हृदयमें दफन कर सकता हूं … लेकिन उसके लिए तुम्हे एक मामुली किमत अदा करनी होगी … क्या करें हर चिजकी एक तय किमत होती है … नही?…"

फिरसे सॅम टाईप करते हूए रुका, वह रघुकी तरफ मुडकर बोला,

" रघु बोलो तुम्हे कितनी किंमत चाहिए ?"

" मांगो २०-२५ लाख" रघुने कहा.

" बस २५ लाखही … ऐसा करते है २५ तुम्हारे और २५ मेरे … ५० कैसा रहेगा " सॅमने कहा.

" ५० !" रघु आश्चर्यभरी आंखोसे सॅमकी तरफ देखते हूए बोला.

सॅम फिरसे बची हूई मेल टाईप करने लगा –

" कुछ नही बस सिर्फ ५० लाख रुपए… तुम्हारे लिए एकदम मामुली रकम है … और हां … पैसोंका बंदोबस्त जल्दसे जल्द करो … पैसे कहां और कैसे पहूंचाने है … यह सब बादकी मेलमें बताऊंगा …

मै इस मेलके लिए तुम्हारी तहे दिलसे माफी चाहता हूं … लेकिन क्या करे कुछ पानेके लिए कुछ खोना पडता है … अगले मेलकी प्रतिक्षा करना… और हां … मुझे पुलिससे बहुत डर लगता है … और जब मुझे डर लगता है तब मै कुछभी कर सकता हूं …. किसीका खुनभी …

— तुम्हारा … सिर्फ तुम्हारा … अस्तित्व "

सॅमने पुरी मेल टाईप की. फिर एक दो बार पढकर देखी ताकी कोई गलती ना छुटे. फिर कोई गलती नही है इसकी तसल्ली होते ही ‘सेंड’ बटनपर क्लीक कर ईशाको भेजभी दी.

जब स्क्रिनपर ‘मेल सेंट’ मेसेज आया. दोनोंने एक दुसरेका हाथ टकराकर ताली बजाई.

उधर ईशाने जब मेलबॉक्स खोलकर वह मेल पढी, उसे अपने पैरोंके निचेसे मानो जमिन खिसक गई हो ऐसा लगा. उसने झटसे अपने सामने रखे इंटरकॉमपर दो डीजीट दबाए ,

" दीपिका… सेन्ड निकिता इन … इमिडीयटली"
 
२५

शामका वक्त था. सॅम एक कमरेमें कॉम्प्यूटरपर बैठा हुवा था. उस कमरेसे बगलकेही कमरेमें बंद किया हुवा अस्तित्व दिख रहा था. लेकिन अस्तित्व को उसके कमरेसे सॅमके कमरेमेंका कुछ नही दिख रहा था. सॅमको रातदिन कॉम्प्यूटरके सिवा कुछ सुझताही न था. रघु अपना एक्सरसाईज वैगेरे निपटाकर पसिना पोंछते हूएही अतुलके पास जाकर बैठ गया.

" क्यों लडकी क्या बोलती है? … उसे पैसा प्यारा है या अपनी इज्जत? " रघुने पुछा.

रघुको अपने पास आकर बैठा हुवा पाकर अतुल अस्तित्व का मेलबॉक्स खोलते हूए बोला,

" देखो तुम्हे एक मजेकी चिज दिखाता हूं "

सॅमने अस्तित्व के मेलबॉक्समेंसे एक मेल खोली.

" देखोतो इस मेलमें ईशाने क्या लिखा हुवा है."

दोनो पढने लगे. मेल पढनेके बाद दोनो उनके कमरेको और अस्तित्व के कमरेंको अलक करते कांचसे अस्तित्व की तरफ देखने लगे.

"देखोतो इस मेलमें यह ईशा …

अस्तित्व को समझानेकी कोशीश कर रही है…

वह सोच रही होगी..

कबूतरकी एकदमसे कैसे मर गयी सारी वफाए…

अब इसको क्या बताएं, कैसे समझाए

कि बेचारा इधर पिंजरेमे बंधा तडप रहा है "

फिरसे अस्तित्व की तरफ देखते हूए उन्होने एक दुसरेके हाथसे ताली बजाई और वे जोरसे हंसने लगे. दोनोंका हंसना थमनेके बाद रघुने एक आशंका उपस्थित की,

" यह अस्तित्व अपने होस्टेलसे अचानक गायब होनेसे वहा कुछ हंगामा तो नही खडा होगा ?"

" अरे हां … अच्छा हुवा तुमने याद दिलाया … उसके होस्टेलमें रह रहे उसके किसी दोस्तको मेल कर उसका बंदोबस्त करता हुं " सॅमने कहा.

सॅम मेल टाईप करने लगा और टाईप करते हूए बोला, " लेकिन रघु याद रखो … इसके आगेही असली खतरा है … इसके आगे हमे सारी मेल्स अलग अलग सायबर कॅफेमें जाकर भेजनी पडेगी … नही तो ट्रेस होनेका बडा खतरा है … "

…. कॉम्प्यूटरपर मेल आनेका बझर बजतेही ईशाने अपना मेलबॉक्स खोला. उसे एक नई मेल आयी हूई दिखाई दी. वह मेल उसने भेजे स्निफर प्रोग्रॅमकीही थी. उसने झटसे वह मेल खोली और

" यस्स!" उसके मुंहसे जितभरे उद्गार निकले.

उसने भेजे स्निफरने अपना काम सही सही निभाया था.

उसने बिजलीके गतीसे मेल सॉफ्टवेअर ओपन किया और …

" यह उसका मेल आयडी और यह उसका पासवर्ड" कहते हूए अस्तित्व का मेल ऍड्रेस टाईप करते हूए उस प्रोग्रॅमको अस्तित्व के मेलका पासवर्ड दिया.

ईशाने उसका मेल अकाऊंट खोलतेही और की बोर्डकी दो चार बटन्स और दोन चार माऊस क्लीक्स दबाए. और दोनोभी कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखने लगी.

" ओ माय गॉड … आय जस्ट कान्ट बिलीव्ह" ईशाके खुले मुंहसे निकला.

निकिता कभी मॉनिटरकी तरफ तो कभी ईशाके आश्चर्यसे खुले मुंहकी तरफ देख रही थी.

" निकिता यह देखो अस्तित्व के मेलबॉक्समें … देखो यह मेल … जो है तो मेरे नामकी पर मैने भेजी नही है … " " मतलब ?" निकिताने पुछा.

" मतलब मै और अस्तित्व के अलावा दुसरा कोई है जो यह मेल अकाऊंटस खोल रहा है … और हो सकता है वही तिसरा आदमी जो मुझे ब्लॅकमेल कर रहा है … लेकिन वह तिसरा है कौन ?"
 
२६

कॉन्फरंस रुममें ईशा, इन्स्पेक्टर राणा और निकिता बैठे हूए थे. ईशा इन्स्पेक्टर और निकितासे इसी केसके सिलसिलेमें कुछ बाते कर रही थी. सब कुछ बयान होनेके बाद ईशाने एक लंबी सांस ली और आगे कहा,

" तो पुरी कहानी इस प्रकार है …"

ईशाने फिरसे एकबार सामने बैठे इन्स्पेक्टर राणा और निकिताकी तरफ देखा.

" राणा अंकल… अब मुझे डर … वह ब्लॅकमेलर फोटो इंटरनेटपर डालेगा क्या? इस बात का नही है … मुझे असली चिंता है अस्तित्व की … शायद अस्तित्व उनके कब्जेमें है … उसके जानको खतरा तो नही ?" ईशाने अपना डर जाहिर किया.

" उसकी जो मेल आई थी उसे हमारे एक्स्पर्टसने ट्रेस करनेकी कोशीश की थी … एकज्याट लोकेशन और कॉम्प्यूटरका तो कुछ पता नही चला … लेकिन इतना जरुर पता चला की मेल मुंबईसे कहीसे की गई होगी."

" इसका मतलब पैसे कहां देना है और कैसे देना है यह बतानेवाली मेलभी मुंबईसेही आएगी " इतनी देरसे चुप्पी साधी हूई निकिता पहली बार बोली.

" शायद हां … या शायद ना भी … यह वह क्रिमीनल कितना पहूंचा है इसपर निर्भर करेगा … लेकिन इसबार हम पहलेसेही तयार होनेसे, मेल कौनसे गांवसे, उस गांवके किस जगहसे और कौनसे कॉम्प्यूटरसे आई यह हमे पता चल सकेगा … " इन्सपेक्टरने कहा.

" इसका मतलब हमारे पास उसके अगले मेलका इंतजार करनेके अलावा दुसरा कोई चारा नही है … " ईशा निराश होकर बोली.

" हां … लगता तो ऐसाही है .. " इन्स्पेक्टरभी सोचते हूए सारी संभावनाए जांचते हूए बोला.

२७

एक पुरानी कार एक सायबर कॅफेके पास आकर रुकी. गाडीके ड्रायव्हींग सिटपर रघु बैठा हूवा था और उसके बगलके सिटपर सॅम बैठा हूवा था. शायद किसीको शक ना हो इसलिए उन्होने वहां आनेके लिए और अगले सारे कामके लिए उस पुरानी कारको चूना था. गाडी रुकतेही गाडीसे सॅम निचे उतरा.

" तूम अब पैसे लानेके लिए निकल जावो … मै मेलपर उसे जगहकी सारी जानकारी देता हूं … और सुनो … जरा संभलकर … तुम्हे काफी अंतर तय करना है " सॅमने उतरते हूए रघुसे कहा.

" यू डोन्ट वरी… तूम एकदम बिनधास्त रहो " रघु गाडीके ड्रायव्हींग सिटपर बैठे हूए बोला.

" अच्छा पैसे मिलनेके बाद उस पंटरका क्या करना है " रघुने कुछ सोचते हूए पुछा. उसका इशारा अस्तित्व की तरफ था.

" उसका क्या करना है .. यह बादमें देखेंगे …. लेकिन वह अपनी महबुबाके लिए शहीद होगा इसकी जादा संभावना पकडकर हमे चलना होगा… क्योंकी रास्तेसे चलते हूए सामने आए गढ्ढोंको भरते हूए आगे जाना जरुरी होता है … नही तो वापस आते हूए उसी गढ्ढोंमे फिसलकर गिरनेकी संभावना जादा होती है." सॅम उतरते हूए गुढतासे हसते हूए रघुकी तरफ देखते हूए बोला.

रघुभी उसकी तरफ देखकर मुस्कुराया.

सॅम गाडीसे उतरा और सायबर कॅफेकी तरफ निकल पडा. रघुने गाडी आगे बढाई और अगले चौराहेपर मुडकर वह तेजीसे आगे निकल गया.

सॅम सायबर कॅफेमें एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठा था. उसने चॅटींग सेशन खोला और ईशाभी चाटींग रुममें है यह देखकर उससे चॅटींग शुरु की –

" हाय मिस. ईशा"

उधर सॅमने भेजा हुवा मेसेस ईशाके मॉनिटरपर अवतरीत हुवा. और तभी निकिता ईशाके कॅबिनमें आ गई. निकिताको देखतेही ईशाने उसे ‘उसकाही मेसेज है’ ऐसा इशारा किया. इशारा मिलतेही निकिता तुरंत कॅबिनके बाहर गई. बाहर जाकर निकिता ईशाके ऑफीसके बगलमें स्थित एक रुममें चली गई. उस रुममें इन्स्पेक्टर राणा और, और दो लोग एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठे थे. निकिताने कमरेमें प्रवेश करतेही कहा –

" सर उसका मेसेज आया है "

वे तिनों एकदम सतर्क होकर, सिधे बैठकर कॉम्प्यूटरकी तरफ देखने लगे.

" कम ऑन सुरज ट्रेस द ब्लडी बास्टर्ड " उन दोनोंको उत्साहीत करनेके उद्देशसे इन्सपेक्टरने कहा.

" सर ही इज ट्रेस्ड … द कॉल इज अगेन फ्रॉम मुंबई … ऍन्ड सी द आय पी ऍड्रेस…"

इन्स्पेक्टरने मॉनिटरकी तरफ देखा और तुरंत मोबाईल लगाया,

" हॅलो रोहन… हमने उस ब्लॅकमेलरको ट्रेस किया है … उसे अभीभी ईशाने चॅटींगपर बिझी रखा है … तूम वहां मुंबईमें उसके सही सही ठिकानेका पता लगाओ … ऍन्ड सी दॅट द फेलो शुड नॉट एस्केप… हां यह लो ब्लॅकमेलरका आय पी ऍड्रेस …."

अबभी ईशाको ब्लॅकमेलरका मेसेज ‘ हाय मिस ईशा ‘ उसके चॅटींग विंडोमें दिख रहा था. वह अब मनही मन उसे जादासे जादा वक्त तक चॅटींगपर कैसे बिझी रखा जाए ताकी पुलिस उसे ट्रेस कर पकड सकें, इसके बारेमें सोच रही थी. तभी अगला मेसेज आया,

‘ ईशा प्लीज ऍकनॉलेज युवर प्रेसेन्स ‘

अब ईशाके पास कुछतो मेसेजे भेजनेके अलावा कोई चारा नही था, नही तो वह डिस्कनेक्ट होनेका डर था.

‘ हॅलो.. ‘ उसने मेसेज टाईप कर भेजा.

इधर इन्स्पेक्टरने फिरसे मुंबईको फोन लगाया.

" रोहन … कुछ पता चला?"

" यस सर … द एरीया वुई हॅड जस्ट फाईन्ड आऊट… इट्स ठाणे… बट द एकज्याट स्पॉट वुई आर ट्राईंग टू लोकेट…" उधरसे राज बोल रहा था.

" कमॉन डू समथींग ऍन्ड फाईन्ड आऊट क्वीकली" इन्स्पेक्टरने कहा.

उधर ईशाको ब्लॅकमेलरका अगला मेसेज आया –

‘ मै मेलमें सारी डिटेल्स भेज रहा हूं … ‘

ईशाको लगा की उसे सारी डिटेल्स चॅटींगपरही भेजनेके लिए कहा जाए … लेकिन नही उसे आशंका होगी …

लेकिन वह अब डिस्कनेक्ट कर सकता है … उससे संभाषण जारी रखना आवश्यक था….

अचानक उसे कुछ सुझा और उसने मेसेज टाईप किया,

‘ लेकिन ५० लाख रुपए देनेके बादभी तुम मुझे ब्लॅकमेल नही करोगे इसकी क्या गॅरंटी ?’

उधर इन्सपेक्टरको चैन नही पड रहा था. उन्होने फिरसे मुंबई रोहनको फोन लगाया,

" रोहन .. कुछ पता चला ?"

" सर वुई हॅव फाऊंड आऊट द एकज्याट लोकेशन ऍन्ड दी एक्सॅट स्पॉट…" उधरसे राजने कहा.

" गुड व्हेरी गुड… नाऊ क्वीकली इन्स्ट्रक्ट द ठाणे पुलिस टू रेड द स्पॉट … " इन्स्पेक्टरने जोशके साथ कहा.

" यस सर" उधरसे प्रतिक्रीया आ गई …

ईशा अब सोच रही थी की वह उसे चटींगपर बातोंमें उलझानेमें कामयाब रही की नही, क्योंकी अबतक उसका कोई रिप्लाय नही आया था.

तभी उसका रिप्लाय आ गया,

‘ देखो … यह दुनिया भरोसेपर चलती है … तुम्हे मुझपर भरोसा करनाही पडेगा … और तुम्हारे पास उसके अलावा दुसरा कोई चाराभी नही है ‘

उसके मायूस चेहरेपर खुशीकी एक लहर दौड गई, क्योंकी कमसे कम अबतक वह उसे बातोंमें उलझानेमें कामयाब रही थी.

अब आगे उसे और उलझानेके लिए क्या मेसेज भेजा जाए, वह सोच रही थी और उसने कुछ टाईपभी किया. लेकिन तभी ब्लॅकमेलरका अगला मेसेज आ गया –

‘ ओके देन बाय… दिस इज अवर लास्ट कन्व्हरसेशन… टेक केअर… तुम्हारा … और सिर्फ तुम्हारा अस्तित्व …’

वह और कुछ टाईप कर उसे भेजती उससे पहलेही वह चॅटींग रुमसे गायब होगया.

वह इतने जल्दी चॅटींग खत्म करेगा ऐसा उसे अंदेशा नही था. ईशा तुरंत अपने कुर्सीसे उठकर जल्दी जल्दी अपने कॅबिनसे बाहर निकल गई. बाहर आकर सिधे वह बगलके रुममे, जहां इन्स्पेक्टर और दो कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टस बैठे थे वहा चली गई. ईशा वहा पहूंचतेही वे ईशाके डरसे सहमें चेहरेकी तरफ देखने लगे थे.

" अंकल उसने अभी अभी चॅटींग शेशन क्लोज किया है … लेकिन मुझे यकिन है की वह अबभी इंटरनेटपर कनेक्टेड होगा और मेल लिख रहा होगा .." ईशाने कहा.

" डोन्ट वरी… ठाणे पुलिस हॅव ऑलरेडी स्टार्टेड टू रेड द लोकेशन… " इन्स्पेक्टरने कहा.
 
२८

पुलिसकी एक गाडी आकर एक सायबर कॅफेके सामने रुकी. गाडीसे एक इन्स्पेक्टर चार पाच हवालदारोंको साथमें लेकर सायबर कॅफेकी तरफ चलने लगा. वे हवालदार उसके अगले आदेशकी राह देखते हूए उसके पिछे पिछे चलने लगे. इन्स्पेक्टर सायबर कॅफेमें घूस गया और उसके पिछे वे चार हवालदारभी कॅफेमें घुस गए. पहले वे रिसेप्शन काऊंटरपर रुके. रिसेप्शन काऊंटरपर बैठा स्टाफ एकदम इतने पुलिसको देखकर हडबडाकर उठ खडा हूवा.

" यस सर… " उस स्टाफके मुंहसे मुश्कीलसे निकला.

इन्स्पेक्टरने उससे कुछ ना बोलते हूए उसके सामने रखा लॉग रजिस्टर उठाया और उसमें वह कुछ खोजनेकी कोशीश करने लगा.

" क्या हुवा साब?" वह स्टाफ फिरसे हिम्मत करके बोला.

इन्स्पेक्टरने गुस्सेसे सिर्फ उसकी तरफ देखा, वैसे वह सहम गया और चुप होगया. इन्स्पेक्टर लॉगबुकमें एक एक एन्ट्री ठीकसे देखने लगा. एक जगह इन्स्पेक्टरकी रजीस्टरपर दौडती उंगली रुक गई और आंखोकी पुतलीयांभी स्थिर हो गई. उस एन्ट्रीमें नाम के रकानेमें ‘अस्तित्व जाधव’ ऐसा लिखा हुवा था. इन्स्पेक्टर मन ही मन मुस्कुराया. उसे शायद ब्लॅकमेलरने सब सावधानी बरतनेके बावजुद वह अब पकडा जाने वाला है इस बातकी हंसी आ रही होगी. इन्स्पेक्टर उस एन्ट्रीके सामने दी सारी जानकारी पढते हूए बोला,

" सतरा नंबर किधर है ?"

" आवो मेरे साथ… मै तुम्हे उधर ले जाता हूं " वह स्टाफ इन्स्पेक्टरको एक तरफ ले जाते हुए बोला. वह सायबर कॅफेका स्टाफ आगे आगे और इन्स्पेक्टर अपने साथीयोंके साथ उसके पिछे पिछे चल रहे थे.

चलते हूए एक जगह रुककर उस स्टाफने एक बंद कॅबिनका दरवाजा धकेलकर खोला. सब पुलिस अब गुनाहगारको पकडनेके तैयारीमें थे. लेकिन कॅबिन खोलतेही जब उन्होने कॅबिनके अंदर देखा, उनके चेहरे खुलेकी खुलेही रह गए. क्योंकी कॅबिन खाली थी. कॅबिनमें कॉम्प्यूटर शुरु था लेकिन कॅबिनमें कोई नही था. इन्स्पेक्टरने चारो हवालदारोंको कॅफेमें चारो तरफ उस गुनाहगारको ढुंढनेके लिए भेजा.

इन्स्पेक्टर और चारो हवालदारोंने काफी समय तक सारा कॅफे और कॅफेके आसपासका इलाका छान मारा . लेकिन कुछभी हाथ नही लगा. गुनाहगार अब उनके कब्जेमें आनेवाला नही है इसकी तसल्ली होतेही इन्स्पेक्टरने मोबाईल लगाया,

" सर आय थींक वुई वेअर लेट बाय फ्यू सेकंड्स … हि हॅज एस्केप्ड… आय ऍम सॉरी… हम उसे पकड नही पाए "

इन्स्पेक्टर राणा मोबाईलपर बोल रहे थे और उनके आसपास ईशा, निकिता और वे दो कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टस बडी आशासे क्या हुवा यह सुननेका प्रयास कर रहे थे

" शिट … एस्केप्ड… " इन्स्पेक्टर झुंझलाए.

और कुछ पल कुछतो सोचनेजैसा करनेके बाद वह मोबाईलपर बोले,

" अब एक काम करो … वहांसे उसके फिंगर प्रिट्स लो … जिस कॉम्प्यूटरपर वह बैठा था उसके फोटोग्राफ्स लो … ऍन्ड सी द हिस्ट्री लॉग ऑफ द कॉम्प्यूटर"

" यस सर " उधरसे जवाब आया.

इन्सपेक्टरने मोबाईल डिस्कनेक्ट किया और निराशासे ईशाकी तरफ देखते हूए उसे किस तरह कहां जाए यह सोचने लगे.

" द ब्लडी बास्टर्ड हॅज एस्केप्ड…" उन्होने कहा.

लेकिन उनके बातचित और हावभावसे कमरेमें उपस्थित सारे लोग यह बात पहलेही समझ चुके थे.
 
२९

जंगलमें सब तरफ सुखे पत्ते फैले हूए थे. उन सुखे पत्तोकों रौंदते हूए एक काले शिशे चढाई हूई कार धीरे धीरे उस जंगलसे गुजरने लगी. वह कार जब जंगलसे गुजर रही थी तब उन सुखे पत्तोंके रौंदनेसे एक अजिबसी आवाज उस जंगलके शांतीमे बाधा डाल रही थी. आखिर एक पेडके पास वह कार रुक गई. उस कारके ड्रायव्हर सिटवाला शिशा धीरे धीरे निचे खिसकने लगा और अब वहां ड्रायव्हीग सिटपर बैठी हुई काला चष्मा लगाई हूई ईशा दिखने लगी. उसने एक पेडपर लगाई लाल निशानी देखी और उसने बगलके सिटपर रखी एक ब्रिफकेस उठाकर खिडकीसे उस निशान लगाए पेढकी तरफ फेंक दी. ब्रिफकेसका ‘धप्प’ ऐसा आवाज आ गया. उसने फिरसे अपनी पैनी नजर चारो तरफ घुमाई और अपनी कार स्टार्ट कर वह वहांसे चली गई.

जंगलसे बाहर निकलकर ईशाकी कार अब प्रमुख रस्तेपर आ गई थी. तभी ईशाका मोबाईल बजा.

ईशाने डिस्प्ले ना देखते हूएही वह अटेंड किया, " हॅलो…"

" हॅलो… मै इन्स्पेक्टर राणा बोल रहा हूं …" उधरसे आवाज आया.

" यस अंकल.."

" पैसे कब और कहां भेजने है इसके बारेमें ब्लॅकमेलरकी मेल तुम्हे आईही होगी " इन्स्पेक्टर राणाने पुछा.

" हां आई थी .. सच कहूं तो मै अब वहां पैसे पहूंचाकर वापसही आ रही हूं " ईशाने कहा.

" व्हॉट… " इन्स्पेक्टरके स्वरमें आश्चर्य स्पष्ट झलक रहा था.

"आय जस्ट कांन्ट बिलीव्ह धीस… तुमने मुझे बताया नही … हम जरुर कुछ कर सकते थे. " इन्स्पेक्टरने आगे कहा.

" नही अंकल अब यहां मुझे पुलिसका शामिल होना नही चाहिए था . … एक बार तो पुलिस पुरी तरहसे नाकामयाब रही है … यहां मै चान्स लेना नही चाहती थी … और मुझे चिंता सिर्फ अस्तित्व की है … पैसे जानेका अफसोस मुझे नही … बस ब्लकमेलरको पैसे मिलनेके बाद वह अस्तित्व को छोड देगा … और पुरा मसलाही खत्म हो जाएगा " ईशाने कहा.

" मै प्रार्थाना करता हूं की तूम जैसा सोचती हो… सब वैसाही हो … लेकिन मुझे चिंता होती है तो बस इस बातकी की अगर वैसा नही हुवा तो ?" इन्स्पेक्टरने कहा.

" मतलब ?" ईशाने पुछा.

" मतलब … तुमने पैसे देकरभी उसने अगर अस्तित्व को नही छोडा तो ?" इन्स्पेक्टरने अपना डर जाहिर किया.

ईशा एकदम सोचमें पड गई.
 
३०

सॅम और रघु उस काले ब्रिफकेसके सामने बैठे थे. उनके चेहरेपर खुशी झलक रही थी. आखिर सॅमने अपने आपको ना रोक पाकर वह बॅग खोली. दोनो आंखे फाडकर उन पैसोंकी तरफ देख रहे थे. सॅमने उस बॅगसे एक पैसोंका बंडल उठाया, अपने नाकके पास लिया और वह उस बंडलसे अपनी उंगली फेरते हूए उस नोटोंकी खुशबु लेने लगा.

" देख तो कितनी अच्छी खुशबु आ रही है … " सॅमने कहा.

रघुनेभी एक बंडल उठाकर उसकी खुशबु लेते हुए वह बोला,

" और देखोतो अपने मेहनतके कमाईके पैसेकी खुशबु कुछ औरही आती है … नही?"

दोनोंने हंसते हूए एक दुसरेकी जोरसे ताली ली.

" इतने सारे पैसे वहभी एकसाथ… मै तो पहली बार देख रहा हूं " रघुने कहा.

दोनों उस बैगमें हाथ डालकर सारे बंडल्स उलट पुलटकर देखने लगे.

" नोटोंके बंडल्स देखते हूए रघु बिचमेही रुककर बोला, " अब उस पंटरका क्या करना है … उसे छोड देना है ? "

" छोड देना है ? … कहीं तुम पागल तो नही हूए ? … अरे अब तो शुरवात हूई है … मुर्गीने अंडे देनेकी अबतो शुरवात हुई है " सॅम बिभत्स हास्य धारण करते हूए बोला.

३१

ईशा अपने कुर्सीपर बैठकर कुछ ऑफीशियल कागजाद उलट पुलटकर देख रही थी और उसके बगलमेंही निकिता कॉम्प्यूटरपर बैठकर कुछ ऑफीशियल काम कर रही थी. तभी कॉम्प्यूटरका बझर बजा. ईशाने पलटकर मॉनिटरकी तरफ देखा.

" उसकाही मेसेज है " निकिताने बताया.

ईशा उठकर कॉम्प्यूटरके पास गई. उसके आतेही कॉम्प्यूटरके सामनेसे उठकर उसने ईशाको जगह दे दी.

" जा जल्दी जा ‘ ईशाने कॉम्प्यूटरके सामने बैठते हूए निकितासे कहा.

निकिता तुरंत वहांसे निकलकर कॅबिनके बाहर चली गई. ईशाके कॅबिनसे बाहर आकर निकिता सीधे बगलके रुममें चली गई. वहां इन्स्पेक्टर राणा और वे दोनो कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टस एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठे थे. निकिता जल्दी जल्दी उनके पास गई. उसकी आहट होतेही तिनो पलटकर उसकी तरफ मुडकर देखने लगे.

" जैसे आपने बोला था वैसाही हो गया … ब्लॅकमेलरका फिरसे मेसेज आ गया है … " निकिता जल्दी जल्दी आनेसे सांस फुले स्थितीमें बोली.

वे दोनों कॉम्प्यूटर एक्सपर्टस कुछ ना बोलते हूए अपने काममें लग गए.

" सुरज… कम ऑन… इस बार किसीभी हालमें साला छुटना नही चाहिए…. "

" सर ऍज बिफोर दिस टाईम ऑल्सो हि इज कॉलींग फ्रॉम मुंबई… और उसका आय पी ऍड्रेस देखिए …" एक्सपर्टने सॉफ्टवेअरके कुछ रिपोर्ट्स देखते हूए कहा.

वह बोलनेके पहलेही इन्सपेक्टरने मुंबईको इन्स्पेक्टर रोहनको फोन लगाया,

" हां रोहन … फिरसे हमने ब्लॅकमेलरको ट्रेस किया है … अबभी वह च्याटींगही कर रहा है … तुम उसकी एकज्याट लोकेशनका पता करो … ऍन्ड सी दॅट दिस टाईम द बास्टर्ड शुड नॉट एस्केप… और हां उसका आय पी ऍड्रेस लिख लो …"

सॅम सायबर कॅफेमें एक कॉम्प्यूटरके सामने बैठकर चॅटींगमें उलझा हुवा था.

" मिस ईशा… हाय कैसी हो ?" उसने मेसेज टाईप कर भेजा.

काफी समय हो गया था फिरभी उसका जवाब नही आया था. लेकिन उसका नामतो चॅटींगमें दिख रहा था.

कॉम्प्यूटर खुला छोडकर कही गई तो नही साली…

या फिर अपना अचानक मेसेज आनेसे गडबडा गई होगी …

उसने सोचा. अबभी उसका मेसेज आया नही था. गुस्सेसे उसका चेहरा लाल होने लगा था. तभी उधरसे मेसेज आ गया , " ठीक हूं "

तब कहा सॅमने चैनकी सांस ली. वह अब अगला मेसेज, जो उसके लिए बहुत महत्वपुर्ण था, टाईप करने लगा,

" तुम्हे फिरसे तकलिफ देते हूए मुझे बुरा लग रहा है … लेकिन क्या करे? … पैसा यह साली चिजही ऐसी है … कितनेभी संभलकर इस्तमाल करो तो भी खतम हो जाती है … मुझे इस बार २० लाख रुपएकी सख्त जरुरत है …"

सॅमने टाईप कर मेसेज भेजभी दिया.

" अभी तो तुम्हे ५० लाख रुपए दिए थे मैने … अब मेरे पास पैसे नही है …" उधरसे ईशाका दोटूक जवाब आया.

" बस यह आखरी बार … क्योंकी यह पैसे लेकर मै परदेस जानेकी सोच रहा हूं " अस्तित्व ने कुछ सोचकर टाईप किया और ‘सेंड’ बटनपर क्लिक किया.

" तुम परदेस जावो … या और कही जावो … मुझे उससे कुछ लेना देना नही है … देखो … मेरे पास कोई पैसोका पेढ तो है नही … " ईशाका मेसेज आया.

अतुलको फिरसे गुस्सा आ रहा था, लेकिन अपने गुस्सेपर काबू करते हूए उसने टाईप किया.

" ठीक है … तुम्हे अब मुझे कमसे कम १० लाख रुपए तो भी देने पडेंगे … पैसे कब कहा और कैसे पहूंचाने है वह मै तुम्हे मेल कर सब बता दुंगा …"

उसने ‘सेंड’ बटनपर क्लिक कर मेसेज भेज दिया, और चॅटींग सेशनसे लॉग आऊटभी कर दिया. वह ईशासे जादा बहस नही करना चाहता था.

अब अतुल मेलबॉक्स खोल रहा था, तभी उसका ध्यान यूंही खिडकीके बाहर गया और वह भौंचक्का होकर उधर देखने लगा. बाहर एक पुलिस इन्स्पेक्टर और, और एक दो पुलिस तेजीसे सायबर कॅफेके तरफही आ रहे थे. अब सॅमके हरकतोंमे तेजी आ गई. उसने झटसे अपना कॉम्प्यूटर ऑफ किया और काऊंटरपर पैसे देकर वह सायबर कॅफेसे बाहर निकल गया. वह बाहर निकल गया उसके बाद कुछ पलही गुजर गए होंगे जब जल्दी जल्दी पुलिस इन्स्पेक्टर और उसके साथी सायबर कॅफेमें घुस गए. सायबर कॅफेमें प्रवेश करतेही इन्सपेक्टरने ऐलान किया,

" नो बडी वील गो आऊट ऑफ दी कॅफे… ऑल ऑफ यू स्टे व्हेअर यू आर… नो बडी वील मुव्ह "

ईशाके कॅबिनके बगलके रुममें दो कॉम्प्यूटर एक्सपर्टस, ईशा और निकिता बडी आस लगाए मोबाईलपर बोल रहे इन्स्पेक्टर राणाकी तरफ देख रहे थे.

इन्स्पेक्टरने मोबाईल अपने कानसे हटाया और मायूसीसे ईशाकी तरफ देखते हूए कहा,

" द बास्टर्ड इस मॅनेज्ड टू एस्केप अगेन…"

ईशा और निकिता ने एकदुसरेकी तरफ देखा, उनके खिले हूए चेहरे मायूस हो गए थे.
 
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