• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery मस्तराम की कहानियाँ

Hindi xxx stori--रात भर मैं चुदवाते रही

दोस्तों मेरा नाम आँचल है, मेरे माँ बाप मुझे अच्छी तरह से परवरिश की, पढ़ाया लिखाया, और फिर जो उनका अरमान था की मेरी शादी किसी अच्छे घर में हो और मेरा पति राजकुमार की तरह हो, मुझे कभी भी ज़िंदगी में किसी चीज की कमी नहीं हो, और फिर मेरी शादी जयपुर के एक प्रतिष्ठित परिवार में मेरी शादी करवा दी.

मेरी शादी को हुए अभी तीन साल हुए है, अभी मेरी उम्र २४ साल है, मैं देखने में काफी सुन्दर हु, जवानी भरपूर चढ़ी है, बदन गदराया हुआ है, ब्लाउज में चूचियाँ समाते नहीं समती, ब्रा का हालात भी ख़राब हो जाता है, क्यों की आज मैं बहुत खुश हु, और ससुराल बाले भी बहुत खुश है, मैं आपको अपनी ये कहानी आपके सामने पेश करुँगी. पहले तो मुझे लग रहा था की ये बात किसी और को बताऊँ की नहीं लोग क्या कहेंगे, कई तो ये सोचेंगे की क्या ये सही हो सकता है की कोई बहन अपने भाई से ही प्रेग्नेंट हो और खुश हो, पर हां ये मेरे साथ है, मैं खुश हु, और इसमें सिर्फ मैं अकेली नहीं हु, कई और भी है जो इस तरह का रिश्ता रखे हुए है और खुश है,

मेरी शादी बड़ी ही धूम धाम से हुई, और शादी के चार से पांच दिन बाद ही मेरे पति को दौरा पड़ा, और वो पागल की तरह करने लगे थे, उसके बाद से हम दोनों के बिच में सेक्स सम्बन्ध नहीं बना क्यों की वो सोते तो मेरे साथ थे पर उनका लण्ड खड़ा नहीं होता था मैं कितना भी हिलाती डुलाती मुंह में लेती पर कुछ भी इसका प्रभाव नहीं पड़ता था, मैं काफी परेशां हो गई थी, क्यों की मुझे सेक्स चाहिए था, उनका बदन तो काफी गठीला था देखने में काफी अच्छे थे, मैं रात को पूरा उनको नंगा कर देती थी और मैं भी पूरी नंगी होके उनके ऊपर लेटती थी और कभी उनको ऊपर करती थी पर कोई फायदा नहीं होता था, उलटे मेरा दिमाग ख़राब हो जाता था, क्यों की मेरी चूचियाँ तन जाती थी, मेरे चूत से पानी निकलने लगता था, चूत मेरी गरम हो जाती थी, चूचियों का निप्पल टाइट हो जाता था, आँखे नशीली हो जाती थी पर मैं प्यासी की प्यासी रह जाती थी.

कई महीनो तक इलाज चला, पर वो ठीक नहीं हुए, घर में वो अकेला संतान थे, एक दिन मेरी सास बोली की बहू रात को सोने में तो कोई दिक्कत नहीं है. मैंने कहा क्या माँ जी समझी नहीं तो वो फिर बोली की मैं ये पूछ रही हु तो तुम दोनों में प्यार मुहब्बत है की नहीं, मैं समझ गई, की पागलपन के दौरे के बाद वो मुझे चोद पा रहे है की नहीं, मैंने कह दिया हां, इसमें कोई दिक्कत नहीं है, तो सासु माँ बोली भगवान् का शुकर है की इस हवेली के एक चिराग मिल जायेगा, फिर सासु माँ कहने लगी, देख बेटी, तुम जल्दी से एक बच्चा कर लो, क्यों की इस घर को एक वारिश की जरूरत है नहीं तो सब कुछ खत्म हो जाएगा, मैं हैरान हो गई, मैंने सोचा इतना बड़ा रिश्ता, सब ठाठ बाट की ज़िंदगी, मुझे कुछ चाल चलना पड़ेगा ताकि मैं इस हवेली की बहूरानी ज़िंदगी भर बनी रहु, मैं दो तीन दिन तक प्लान सोचते रही, तभी मेरा भाई जो की बंगलुरु में रहता है आया, मेरे पति को देखने की अब तबियत में सुधार है की नहीं,

अपने भाई को देखकर मैं रोने लगी, उसने मुझे सांत्वना देते हुए कहा, बहन रोती क्यों है, हु ना मैं मैं इनको बड़ा से बड़ा डॉक्टर को दिखाऊंगा, ये ठीक हो जायेंगे, फिर पुरे दिन हम दोनों बातचीत करते रहे, उस दिन मेरे पति को चेकअप के लिए सासु माँ और ससुर दोनों जयपुर ले गए थे, घर में हम दोनों ही थे, शाम को मेरे ससुर जी का फ़ोन आया की हमलोग कल आएंगे. रात को कहना खाकर हम दोनों खुले छत पर घूम रहे थे और बात कर रहे थे तभी फिर से मेरी आँख छलक गई, और भाई ने मुझे गले लगा लिया, पता नहीं दोस्तों मुझे एक रूहानी एहसास हुआ और मैं अपने भाई के सीने से चिपक गई, वो मुझे अपनी बाहों में समेटे खड़ा था, और मैं उस पल का आनंद ले रही थी, तभी मैंने महसूस किया की भाई का लण्ड खड़ा हो रहा था और मेरे जांघों से सट रहा था, मेरी चूचियाँ उसके सीने से चीपकी हुई थी, फिर वो मेरे पीठ को सहलाने लगा, मैंने भी उसके पीठ को सहलाने लगी, और फिर मेरी साँसे जोर जोर से चलने लगी, और उसकी भी गरम गरम साँसे मेरे कानो के पास से गुजर रहा था, अचानक मैं थोड़ा अलग हो गई.

और दोनों निचे आ गए, थोड़े देर तक हम दोनों सोफे पे चुपचाप बैठे रहे और फिर मेरा भाई बोला क्या जीजा जी ठीक होंगे की नहीं, मैंने कहा कुछ भी नहीं पता और ऊपर से सास को पोता चाहिए, मैं कभी भी उनको पोता नहीं दे पाऊँगी, तो भाई बोला ये क्या बोल रही है, मैंने कहा हां, वो अब कुछ भी नहीं कर पा रहे है, पर ये बात मैंने अपने सास से झूठ बोला, जब वो मुझसे पूछी की सब ठीक ठाक है, तो मैंने कह दिया हां ठीक है और वो खुश हो गई, और बोली की चलो मेरे घर का चिराग आ जायेगा पर ये संभव नहीं है क्यों की मैं अकेले कैसे बच्चा दे सकती हु.

मैंने कहा काश एक बच्चा हो जाता तो मैं यहाँ की रानी बन कर राज करती क्यों की और भी कोई वारिश नहीं है इस हवेली का. और फिर दोनों चुप हो गए, तो भाई ने कहा देख बहन एक बात है, तुम्हारे सास को पोता चाहिए, तुम्हारा पति दे नहीं सकता, तुम्हे भी बेटा चाहिए, अगर तुम मेरे से हेल्प चाहती हो तो तुम्हारी ज़िंदगी बन जाएगी और ये बात किसी को पता भी नहीं चलेगा यहाँ तक की तुम्हारे हस्बैंड को भी नहीं क्यों की वो पागल है. मैं तो अपने भाई का मुंह देखने लगी, पर बात में जान था, करीब पांच मिनट तक चुप रही वो नजदीक आके बैठ गया और मेरी बालों को सहलाने लगा और फिर मेरे से गले लगा लिया और फिर कब एक दूसरे के बाहों में खो गए पता ही नहीं चला, फिर मेरा भाई मुझे गोद में उठकर बैडरूम में गया और बेड पे पटक दिया.

उसको बाद उसने मेरे ब्लाउज को उतार दिया और मेरे चूचियों को पिने लगा और दबाने लगा, मेरी चूचियाँ तन गई और निप्पल कड़ा हो गया, वो जोर जोर से मेरी चूचियों को खींचने लगा, और मेरे होठो को चूसने लगा, मैंने भी उसके होठों को चूसने लगी और उसके छाती के बालों को सहलाने लगी.

उसके बाद मेरा भाई मेरे सारे कपडे उतार दिए, और मेरी चूत की झांटो को सहलाने लगा, और फिर मेरे चूत में ऊँगली डालने लगा, मैं तो गरम हो गई थी, अब मुझे लण्ड चाहिए था क्यों की काफी दिन से लण्ड की भूखी थी, मैंने अपने भाई के लण्ड को मुंह में लिए और चूसने लगी, फिर दोनों 69 की पोजीशन में आ गए वो मेरे चूत को और मैं उसके लण्ड को चूसने लगी. और फिर वो बक्त आ गया जब मेरा भाई अपना मोटा लण्ड निकाल और मेरे चूत पे रख के जोर से धक्का मार और पूरा लण्ड मेरे चूत में घुसेड़ दिया, मैं आह आह करने लगी और फिर लगा वो जोर जोर से चोदने, वो मुझे गाली दे रहा था और मुझे वो गाली बहुत अच्छा लग रहा था मुझे जोश आ रहा था, फिर उसने मेरे चूत में सारा माल झाड़ दिया, और फिर से चूची को पिने लगा, करीब आधे घंटे बाद उसका लण्ड फिर से कड़ा हो गया और वो फिर से मुझे घोड़ी बना कर चोदने लगा,

रात भर मैं चुदवाते रही और वो मुझे चोदते रहा, मेरा भाई करीब दस दिन तक रहा था और मुझे खूब चोदा, मुझे तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा था जब मुझे माहवारी नहीं आई थी, डॉक्टर के पास गई तो डॉक्टर ने कन्फर्म कर दिया की मैं माँ बन्ने बाली हु, मैंने ये बात अपनी सास को बताई की मैं माँ बन्ने बाली हु वो बहुत खुश हुई, पर उनको ये पता नहीं है की ये बच्चा मेरे भाई का है, उनका बेटा तो मुझे चोद भी नहीं सकता,

 
Newhindisexstory- माँ की भी मर्जी

ये कहानी है एक 18 वर्षीय कालिया की जिसने अपने झोपड़े में अपनी ही माँ की चूत की चुदाई कर डाली।

पंद्रह साल का कालिया अपने माँ-बाप और दो छोटे भाइयों के साथ मुंबई के झोपड़पट्टी में रहता था। उसका बाप दिन भर कचरा चुनता था और सारी कमाई दारू पर उड़ा देता था। उसकी माँ भी दिन भर दुसरे के घरों में बर्तन सफाई का काम करती थी और वो भी रात में दारु पी कर सो जाती थी। किसी तरह से घर चल रहा था। कालिया भी कचरा चुन कर कुछ कमा लेता था। वो भी अपने माँ बाप की तरह अय्याश निकल गया था। जो कमाता था उसका वो सिगरेट और गुटका का सेवन करता था। वो अक्सर अपने दोस्त के घर पर ब्लू फिल्मे भी देखने लगा था। घर पर तो कोई रोकने-टोकने वाला था नहीं।

एक रात जब वो अपने दोस्तों के घर से ब्लू फिल्म देख कर अपने झोपडी में लौटा तो उसका ध्यान फिल्म के चुदाई वाले सीन पर ही था। वो अपने दोस्त के साथ उसके घर पर ही खाना खा कर आया था। घर पर पहुँचने पर उसने देखा कि बापू का कोई अता – पता नहीं है। उसकी माँ ने सिर्फ लो कट की ब्लाउज और पेटीकोट पहन रखी थी और वो दारू पी रही थी। उसकी ब्लाउज सामने से लगभग खुली हुई थी सिर्फ एक बटन के सहारे किसी तरह उसके स्तन को छिपाने का काम कर रहे थे. और उसकी पेटीकोट उसके जाँघों के काफी ऊपर तक चढ़े हुए थे. उसकी माँ का ये रूप कालिया ने कोई पहली बार नहीं देखा था. कई बार तो उसने अपनी माँ को शराब के नशे में धुत हो कर अपने सभी वस्त्र खोलते हुए पूरी नंगी होते हुए देखा था. कालिया के लिए अपनी माँ के खुले स्तन और चूत देखना कोई आश्चर्य की बात नहीं रह गयी थी. आज उसका फिर से अपनी माँ को नंगा देखने का मन करने लगा.

उसने अपनी माँ से पूछा – बापू कहाँ है?

उसकी माँ ने नशे में कहा – साला गया है अपने यारों के साथ मस्ती करने। कल आएगा।

कालिया ने अपने सरे वस्त्र खोल दिए और सिर्फ अंडरवियर पहन कर अपनी माँ के पास लेट गया.

कालिया की माँ ने कालिया से पूछा – तू कहाँ गया था?

कालिया – फिल्म देखने।

उसकी माँ ने नशे में कहा – कौन सी फिल्म देखने चला गया था? मुझे भी कहता मैं भी जाती तेरे साथ।

कालिया – वो फिल्म तेरे देखने के लायक नहीं है.

उसकी माँ – क्यों? जब तू देख सकता है तो मैं क्यों नहीं?

कालिया ने बेझिझक कहा – अब तुझे कैसे समझाऊं? उसमे नंगी औरतें और नंगे मर्द रहते हैं। औरतों के देखने लायक नहीं है। गंदे सीन होते हैं.

उसकी माँ – गंदे गंदे सीन का क्या मतलब?

कालिया – मतलब नंगे लड़के और नंगी लड़की उसमे वही काम करते हैं जो तू और बापू रात में करते हैं।

उसकी माँ – ओ तो तू चोदा – चोदी वाली फिल्म देख कर आ रहा है..?

कालिया – हाँ, चुदाई वाली फिल्म।

कालिया जानता था कि उसकी माँ को ये बात पता है कि उसके आसपास के सभी बच्चे ब्लू फिल्म (चुदाई वाली फिल्म) देखते हैं।

माँ – अच्छा एक बात बता..क्या उसमे मर्द किसी औरत को चोदते हुए दिखता है क्या?

कालिया – हाँ।

माँ- और क्या दिखाता है?

कालिया का लंड खडा हो रहा था. उसने अपने अंडरवियर के ऊपर से ही आने लंड को दबाते हुए कहा – उसमे मर्द औरत की चूची को खूब चूसता है. लड़की की सिसकारी निकल जाती है.

माँ – हिरोइन की चूची भी देखते होगे।

कालिया – हाँ, हिरोइन पूरी तरह से बिना कपडे के रहती है. सब कुछ दिखता है।

माँ- बड़े बेशर्म लोग होते हैं ना सिनेमा वाली लड़की-लड़का.

कालिया – अरे नहीं माँ. इसमें बेशर्मी कैसी? यही तो मजा है. वैसे एक बात पूंछू तेरे से?

माँ – हाँ पूछ ना.

कालिया – लड़की की चूची चूसते समय लड़की और लड़का सिसकारी क्यों भरती है?

माँ – लड़का लड़की के चूची के निपल को जब चूसता है तो लड़की की काफी मजा आता है इसलिए वो मजे से सिसकारी भरने लगती है इसलिए लड़का भी सिसकारी भरने लगता है.

कालिया – लेकिन जब बच्चा अपनी माँ का दूध पीता है तो उस समय वो माँ सिसकारी क्यों नहीं भरती?

माँ – अरे बच्चे के द्वारा निपल चुसना और बड़े के द्वारा निपल चूसने में काफी फर्क है.

कालिया – फर्क कैसा?

माँ – देख जब तू बच्चा था और जब मेरा दूध पीता था तो मुझे कुछ नहीं होता था लेकिन अब तू मेरी निपल चुसेगा तो तो मेरे अन्दर से भी सिसकारी निकलने लगेगी. और तू भी सिसकारी भरने लगेगा.

कालिया – मुझे यकीन नहीं होता.

कालिया की माँ ने एक झटके में अपना ब्लाउज खोल दिया। अन्दर ब्रा पहनी नहीं थी इसीलिए एक झटके में उसकी दोनों चूचियां कालिया के सामने आ गयी। कालिया ने इस से पहले भी कई बार नशे में धुत माँ के चूची और चूत को देख चूका था। बल्कि कई बार तो नशे में धुत उसके माँ – बाप रात में चुदाई करते थे तो कालिया की आँख खुल जाती थी और वो अपने सामने ही माँ की चुदाई देखता था।

माँ – आ चूस मेरी निपल, देख तुझे सिसकारी होती है कि नहीं ?

कालिया अपनी माँ की चूची पकड़ के दबाने लगा। उसकी माँ को काफी मज़ा आ रहा था।

माँ – आ चूस मेरी निपल, देख तुझे सिसकारी होती है कि नहीं ?

कालिया अपनी माँ की चूची पकड़ के दबाने लगा। उसकी माँ को काफी मज़ा आ रहा था।

कालिया – तेरी चूची भी बड़ी है। तेरी चूची भी हिरोइन की चूची की तरह एकदम कड़क है.

माँ – अब चूस ना .

कालिया अपनी माँ की चूची को अपने मुंह में दबाया और मजे ले ले चूसने लगा. उसकी माँ तो मस्ती में पागल हुयी जा रही थी. उसकी चूत भी गीली होने लगी. उधर कालिया को भी काफी मजे आ रहे थे. उसने अपनी माँ की दोनों चूची को चूस चूस कर पूरी तरह गीला कर दिया. वो अपनी माँ की चूची का निपल को अपनी जीभ से इस तरह चाट रहा था मानो आइसक्रीम हो. वो अपनी माँ के गले से ले कर दोनों चूची के हर कोने कोने को चूसने में लीन हो गया. और सिसकारी भी भरने लगा.

माँ – चुदाई वाली फिल्म देखता है तो तेरा मिजाज़ तो गर्म हो जाता होगा रे। तू फिर क्या करता है? कहीं रंडी के पास तो नहीं चले जाता है तू?

कालिया – नहीं माँ, गर्म होता हूँ तो अपने लंड का पानी निकाल देता हूँ।

माँ – कैसे ?

कालिया – हाथ से मुठ मार कर।

माँ – तू कब से मुठ मारने लगा है?

कालिया – लगभग 2 साल से मुठ मार रहा हूँ.

माँ- खोल के दिखा तो अपना लंड. ज़रा मैं देखूं कि कितना बड़ा है?

कालिया ने एक झटके में अपना अंडरवियर खोल दिया और माँ के सामने नंगा हो कर अपने हाथ में अपना 9 इंच का लंड पकड़ कर दिखाने लगा और बोला – देख, है कि नहीं बड़ा.

माँ – हाँ रे, तेरा लंड तो सच में बड़ा हो गया है और उस पर बाल भी मस्त हैं.

कालिया – तेरी चूत पर भी तो बड़े बड़े बाल हैं.

माँ- हाय राम, तूने मेरी चूत कब देख ली रे?

कालिया – जब तू दारु पी के बिना कपड़ों के सो जाती है तो मैंने तो कई बार तेरी चूत देखी है। यही नहीं जब बापू तेरी चुदाई करता है तो मैंने भी कई बार देख लिया है।

माँ – हाय राम, तू तो बड़ा हरामी हो गया है रे। जब तू मेरी चुदाई देखता है तो तू क्या करता है रे?

कालिया – मेरा लंड भी खड़ा हो जाता है और मैं भी उसी समय अपना लंड का मुठ मार कर माल निकाल लेता हूँ।

माँ – आज तो तूने फिर से चुदाई वाली फिल्म देखा है और मेरी चूची भी देख लिया है तो तेरा मिजाज़ तो और भी गर्म हो गया होगा? तो क्या अब मुठ मारेगा?

कालिया – हाँ, मारना तो पड़ेगा ही. नहीं तो लंड फट जायेगा. जब तू गरम होती है तो तू भी तो यही करती होगी ना?

माँ – हाँ.

कालिया – माँ, फिल्म में तो लड़का अपने मुंह से लड़की की चूत भी चूसता है और उसके चूत का माल भी पी लेता है.

माँ- हाय , तब तो लड़की को कैसा लगता होगा रे?

कालिया – बापू जबतेरी चूत चाटता है तो तुझे कैसा लगता है?

माँ – हाय, उसने तो कभी मेरी चूत चुसी ही नहीं, हमेशा मुझसे ही अपना लंड चुसवाता है.

कालिया – तब तू अपने चूत के माल का क्या करती है?

माँ – क्या करुँगी? पोंछ देती हूँ. या बह जाने देती हूँ.

कालिया – क्या आज तक बापू ने कभी भी तेरी चूत का रस नहीं पिया है?

माँ – नहीं रे. मेरा ये सपना सपना ही रह गया कि कभी तेरा बापू मेरी भी चूत चुसे.

कालिया – माँ , आज मैं तेरा ये सपना पूरा करूँगा. तब तुझे अहसास होगा कि जब एक मर्द एक औरत का चूत चूसता है तो औरत को कितना मजा आता है.

माँ – तू मेरी चूत का रस पिएगा?

कालिया – हाँ माँ,

कालिया की माँ ने एक झटके में अपना पेटीकोट खोल कर बिलकुल नंगी हो गयी।

कालिया ने अपनी माँ की चूत को अपने मुंह में भर लिया और जीभ को अन्दर डाल दिया. उसकी माँ की तो साँसे फूलने लगी. इतना मजा तो उसे आज तक कभी नहीं आया था. पांच मिनट तक कालिया ने अपनी माँ की चूत चुसी. उसके बाद उसकी माँ का बदन अकड़ने लगा और उसके चूत ने रस छोड़ने का सिग्नल दे दिया. उसकी माँ की आँखें कास के बंद हो गयी और दबी दभी आवाज में बोली – कालिया बेटा , मेरा चूत का रस निकलने वाला है.

कालिया ने कहा – निकलने दे माँ , आज मैं तेरे रस को पिऊंगा.

तभी उसकी माँ के चूत से सफ़ेद सफ़ेद माल निकलने लगा . कालिया ने बड़े ही प्रेम से उस रस को अपने मुंह में ले लिया. वो अपनी माँ की चूत को अच्छी तरह से चाट चाट के साफ़ कर दिया.

उसकी माँ को काफी मजा आया. इसके बाद कालिया अपने माँ के नंगे बदन पर पूरी तरह चढ़ गया और अपना मुंह अपनी माँ के होठो पर लगाया और और अपना लंड माँ के चूत पर घस रहा था.

कालिया – माँ , अब तू मेरा लंड पकड़ कर देख ना मस्त है कि नहीं?

माँ ने उसके लंड को पकड़ कर दबाने लगी और कही – हाँ रे, तेरा लंड तो एकदम कड़क जवान हो गया है.

उसके बाद कालिया ने अपनी माँ की चूत को फिर से सहलाया और उसके चूत के छेद में ऊँगली डाल कर पूछा – माँ , इसी छेद में बापू तुझे चोदता है?

माँ – हाँ रे, इसी छेद में लंड डाला जाता है.

कालिया – आज मैं तेरी छेद में लंड डालूं?

माँ – नहीं रे, पागल हो गया है क्या? माँ को चोदेगा?

कालिया ने अपनी माँ की चूत में ऊँगली अन्दर बाहर करते हुए कहा – माँ, जब इतना हो ही गया है है तो थोडा और सही.

माँ – नहीं रे, अपनी माँ को चोदना अच्छी बात नहीं.

लेकिन कालिया अब मानने वाला नहीं था. उसने अपने लंड को अपनी माँ के चूत में कस कर सटाते हुए कहा – जब तेरे बुर में मैंने अपना जीभ घुसा ही दिया है तो लंड में क्या रखा है?

माँ ने कहा – तेरे बापू क्या कहेंगे?

कालिया – अच्छा ठीक है…ज्यादा नहीं घुसाऊंगा. बस लंड की टोपी को अन्दर जाने दे.

माँ- ओह ,अब तू इतनी जिद कर रहा है तो ठीक है..थोडा ही अन्दर घुसाना ….पूरा लंड अन्दर मत घुसाना.

कालिया ने बिना एक पल की देर किये अपनी माँ के टांगों को फैला दिया। और अपनी माँ की चूत के मुंह पर अपना लंड को रखा और हल्का सा दवाब डाला. कालिया को बड़ा ही मज़ा आया.

माँ- हाँ अब देख, इस से ज्यादा अन्दर मत घुसाना.

माँ- हाँ अब देख, इस से ज्यादा अन्दर मत घुसाना.

लेकिन कालिया का पौरुषत्व जाग गया था. और उसकी माँ की चूत काफी चिकनी हो चुकी थी. उसने हल्का सा दम लगा कर अपना लंड को पूरी तरह अपनी माँ के चूत के अन्दर डाल दिया और उसे पेलने लगा। उसकी माँ की हालत खराब हो गयी। उसका सारा नशा गायब हो गया। अब उसे अहसास हो रहा था कि उसका खुद का बेटा उसे चोद रहा है। हालांकि जब तक वो समझती और प्रतिरोध करती तब तक काफी देर हो चुकी थी। उसका बेटा उसके चूत में धक्के मार रहा था। थोड़ी देर शर्माने के बाद उसकी माँ की भी झिझक खतम हो गयी।

उसने सोचा – अब जब लंड डाल ही दिया है तो जम के चुदाई का मज़ा ले लेना चाहिए। अब वो भी अपने बेटे का साथ दे रही थी। थोड़ी ही देर में कालिया ने अपनी ही माँ के चूत में माल उगल दिया। उसकी माँ भी दोबारा झड चुकी थी। वो भी काफी आनादित थी. काफी दिनों के बाद उसने काफी मन से अपनी चुदाई करवाई थी.

अब वो नहीं चाहती थी कि इस काण्ड पर उसका बेटा शर्मिंदा होए, इसलिए उसके बाद भी उसकी माँ ने कालिया के साथ 3 बार सेक्स किया ताकि कालिया को लगे कि इस में माँ की भी मर्जी थी।

उस रात के बाद कालिया जब भी ब्लू फिल्म देख कर आता अपनी माँ को जरुर चोदता था।

end
 
nonvegstory-माँ की चुदास और बेटी की प्यास

मेरा नाम डॉली है.. मैं 18 साल की हूँ। यह बात उन दिनों की है.. जब मैं स्कूल में पढ़ती थी। मेरी माँ कोमल एक प्राइवेट स्कूल में इंग्लिश की टीचर हैं और मेरे पापा दुबई की एक कंपनी में हैं। वह साल दो साल में इंडिया आया करते हैं और 25-30 दिनों के लिए ही आते हैं। जब वे घर आते थे.. तब माँ बहुत खुश रहती थीं.. लेकिन उनके जाने के बाद माँ बहुत उदास हो जाती थीं।

हमारा घर शहर की आबादी से दूर था, हम किराये के मकान में रहते थे, यह घर पापा के दोस्त जय अंकल का था। जय अंकल पापा के दोस्त थे। यही वजह थी कि वह हम लोगों से किराया नहीं लिया करते थे। जय अंकल हमारे घर अक्सर आया करते थे। उनके आने पर माँ बहुत खुश रहती थीं। उनके आने से माँ का अकेलापन दूर हो जाता था।

कभी-कभी हम लोग जय अंकल के साथ बाहर उनकी कार से आउटिंग पर भी जाते थे। धीरे-धीरे वह हमारे साथ बेहद घुल-मिल गए थे।

एक दिन मैं स्कूल से घर आई तो देखा कि मेरे पापा के दोस्त जय अंकल आए हुए हैं।

माँ दोपहर का खाना बना रही थीं। मैंने अपना स्कूल बैग कमरे में रखा और किचन की तरफ बढ़ गई.. लेकिन अन्दर का नज़ारा देख कर मेरे पाँव ठिठक गए थे।

मैंने चुपके से किचन में झांक कर देखा.. जय अंकल ने माँ को अपने आगोश में लिया हुआ था। वह अपने हाथों को माँ के बदन पर घुमा रहे थे। माँ अंकल की कमर पर हाथ फिरा रही थीं.. फिर गर्दन पर.. और फिर सर पर.. उधर अंकल माँ के होंठों को छोड़ कर उनके गालों को चूमने लगे और फिर गर्दन पर अपने होंठ फिराने लगे।

माँ लगातार उनका साथ दे रही थीं और अंकल भी उनके गुदाज स्तन लगातार दबा रहे थे। अंकल ने माँ का जालीदार सफ़ेद कुरता ऊपर उठा दिया था। माँ ने नीले रंग की ब्रा पहनी थी। जय अंकल अब अपने होंठों को उनकी गर्दन पर लेकर आए और फिर उनके कंधों पर चूमने लगे।

यह सब देख कर मैं पागल हुए जा रही थी, मैंने ऐसा पहली बार देखा था। मेरे जिस्म में आग सी लग गई थी। मैं यह समझ चुकी थी कि एक शादीशुदा औरत को पूरे-पूरे साल बिना शौहर के रहना बेहद मुश्किल होता है। पेट की भूख तो खाने से मिटाई जा सकती है.. लेकिन जिस्म की भूख का क्या?

यही वजह थी कि माँ ने अपना जिस्म जय अंकल को सौप दिया था।

वैसे भी मेरी माँ एक कॉलेज में टीचर थीं। वह खुले विचारों वाली महिला थीं। लेकिन मुझे फिर भी अपनी माँ से यह उम्मीद नहीं थी कि जय अंकल माँ को चोदेंगे।

किशोरावस्था में होने के कारण मेरी इसमें दिलचस्पी और बढ़ गई थी, मैं न चाहते हुए भी उन दोनों को देखे जा रही थी।

अभी कॉलेज से आकर मैंने अपना ड्रेस भी नहीं बदला था। मैं अपनी चूचियों को शर्ट के ऊपर से ही मसलने लगी। अंकल और माँ को बड़ा मजा आ रहा था।

माँ ने अंकल की पैंट में अपना हाथ डाला हुआ था। वह अंकल के लण्ड को सहलाने लगीं.. जिससे अंकल का लण्ड खड़ा होकर 6 इंच का हो चुका था।

अंकल ने अपना एक हाथ माँ की सलवार में डाल दिया.. शायद उनकी चूत गीली हो चुकी थी और थोड़ा-थोड़ा चिपचिपा पानी निकल रहा था।

अंकल ने माँ की सलवार का इज़ारबंद खोलना चाहा.. तो माँ ने हाथ पकड़ कर रोक दिया- अभी नहीं, डॉली आ गई है स्कूल से.. रात को..

माँ अपने कपड़े सम्हालते हुए किचन से बाहर आ गई थी। उन्होंने खाना लगाया और मुझे आवाज़ दी। हम तीनों ने मिलकर लंच किया।

फिर मैं टीवी देखने लगी माँ और अंकल आराम करने लगे। मैं यह समझ चुकी थी कि आज रात को मेरी माँ जय अंकल से चुदवायेंगी।

मैं यही सोच-सोच कर खुश हो रही थी कि आज मुझे अंकल-माँ की चुदाई देखने को मिलेगी।

फिर रात को जय अंकल माँ और मैं खाना खाकर रात साढ़े दस बजे सोने लगे, मुझे नींद तो आ नहीं रही थी।

तकरीबन दो घंटे ऐसे ही बीत गए। मेरी आँख हल्की सी लगने लगी थी। तकरीबन 15 मिनट बाद मेरे कानों में चूड़ियों के खनकने की आवाज सुनाई पड़ी। मेरी नींद खुल चुकी थी.. मैंने धीरे से अपने कमरे की खिड़की खोली.. जो कि माँ के कमरे की तरफ खुलती थी।

जय अंकल मेरी माँ के बदन पर अपना हाथ फेर रहे थे, वो शरमा रही थीं, अंकल ने उनका सफ़ेद दुपट्टा निकल कर अलग कर दिया था और उनके कन्धे पर हाथ रख दिया।

वो वहाँ से उठकर जाने लगीं.. अंकल ने माँ को पीछे से कस कर पकड़ कर अपने होंठ उनकी गर्दन पर रख दिए।

वो थोड़ा छूटने के लिए कसमसाईं.. उनके चहरे पर एक घबराहट सी थी- जय.. है तो यह गलत ना..

कुछ गलत नहीं है कोमल.. तुम्हारे शौहर मेरे दोस्त हैं.. और फिर तुम्हारी भी तो कुछ ज़रूरतें हैं।

जय अंकल ने माँ की गर्दन पर अपने होंठ फिराते हुए कहा।

माँ ने एक लम्बी सी सांस लेते हुए आँखें बंद कर ली थीं- मुझे डर लगता है.. किसी को मालूम पड़ गया तो?

माँ थोड़ा झिझक रही थीं.. लेकिन फिर धीरे-धीरे उनका विरोध कम हो गया और माँ ने खुद को ढीला छोड़ दिया।

अंकल ने उन्हें अपने पास खींचा और माँ के गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

वो थोड़ा ना-नुकर करते हुए बोलीं- तुम्हें नहीं लगता कि हम जो कर रहे हैं, ये सब गलत है.. मुझे अपने शौहर को धोखा नहीं देना चाहिए।

अंकल ने कहा- कोमल.. हम दोनों जो कर रहे हैं.. वो दो जिस्मों की जरुरत है.. तुम्हारे शौहर रंगीला मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं.. दुबई जाने से पहले उन्होंने मुझसे कहा था कि मैं आपका और आपकी बेटी डॉली का ख्याल रखूँ.. यदि तुम्हारा शौहर तुम्हारी इस जरूरत को पूरा करता है.. तो तुम बेशक जा सकती हो.. इस उम्र में ये सब सामान्य बात है। इसे धोखा नहीं कहते हैं.. यह तुम्हारी ज़रूरत है।

जय अंकल ने अपनी बात को जोर देते हुए माँ को समझाया था।

माँ मन ही मन में अंकल साथ देना चाहती थीं.. पर सीधा कह न सकीं। अंकल भी उसके मन की बात समझ गए और उसे चूमने लगा। धीरे-धीरे माँ ने खुद को समर्पित कर दिया था और अब उनका विरोध समाप्त हो चुका था।

मैं खिड़की से झांकते हुए अपनी माँ को अपने पापा के दोस्त से चुदते हुए देख रही थी।

उन दोनों ने तकरीबन दस मिनट तक किस किया। अब माँ की शर्म खत्म हो गई थी.. वह भी खुल गई थीं और अंकल का भरपूर साथ दे रही थीं।

अंकल उनके गाल के बाद उनके वक्ष स्थल पर चुम्बन करने लगे, इससे वो उत्तेजित हो गईं। वह उनके स्तनों को सहला रहे थे.. और उनके चूचुकों को अपनी उँगलियों से दबा कर मसल रहे थे.. माँ पूरी तरह गर्म हो गई थीं।

यह सब देख कर मेरे दिल में एक अजीब सी बेचैनी होने लगी थी। मेरा हाथ खिड़की पर खड़े हुए ही अपनी सलवार के अन्दर न चाहते हुए भी चला गया था।

उधर अंकल ने अपना हाथ माँ के पेट के ऊपर से सहलाते हुए उनकी सलवार में सरका दिया था.. शायद उनका हाथ माँ की चूत पर था।

‘आह्ह्ह.. जय..’

माँ मचल उठी थीं.. फिर अंकल माँ को अपनी गोद में उठाकर बिस्तर पर ले गए। उनको बिस्तर पर लेटा कर पीछे से उनकी कुर्ती की डोरियाँ खोलने लगे।

माँ ने फिर से थोड़ी ना-नुकुर की..

पर अंकल ने कहा- अब मुझे मत रोको.. जब भी मैं तुम्हारे जिस्म को मज़ा देता हूँ, हर बार तुम ऐसे करती हो कि जैसे मैं पहली बार तुम्हारे साथ ऐसा कर रहा होऊँ? हर बार तुम ना नुकुर करती हो?

प्यासी माँ की चूत पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी.. इसलिए जय अंकल को भी कोई दिक्कत नहीं हुई। पाँच मिनट बाद जय अंकल बिस्तर पर माँ के ऊपर जा पहुँचे और माँ के पीठ की चुम्मियाँ लेने लगे।

मैं यह सब देख रही थी.. लेकिन मैंने अपनी खिड़की अधखुली कर रखी थी इसलिए माँ.. अंकल को कोई शंका नहीं हुई।

जय अंकल धीरे माँ के दूध दबाने लगे.. माँ के मुँह से आवाजें निकलनी शुरू हो गई थीं। जय अंकल ने धीरे से माँ की गुलाबी सलवार का इजारबंद खोल दिया और धीरे से कुर्ती भी ऊपर सरका दी। माँ अब अधनंगी हो चुकी थीं। उन्होंने अपनी कमर पर एक काली डोरी बांधी हुई थी। जय अंकल के द्वारा माँ की चुदाई को देख कर मैं पागल हो रही थी।

जय अंकल ने इतनी जोर से माँ के दूध दबाए और चूसे कि माँ ‘आ.. आहा.. अआ.. हह्हा..आआह्ह.. धीरे से..’ करने लगीं।

जय अंकल ने धीरे-धीरे माँ की सलवार घुटनों तक सरका दी और उनकी काली चड्डी के ऊपर से ही माँ के चूतड़ दबाने और चूमने लगे। माँ ने करवट बदली और खुद ही अपने जम्पर को उतार कर फेंक दिया। माँ अब ब्रा और पैंटी में थीं।

मैंने आज पहली बार अपनी माँ का गोरा जिस्म देखा था। ब्रा-पैंटी में वो मुझे उस समय बहुत ही कामुक.. सुन्दर और मासूम लग रही थीं, वे 34 साल की होने के बावजूद इस वक़्त जवान लड़की लग रही थीं।

अंकल माँ को अपनी बाँहों में लेकर.. उनके होंठों को चूसने लगे, अब वो भी अंकल का साथ दे रही थीं।

मेरे लिए यह अनुभव जन्नत से कम नहीं था। जय अंकल ने उठकर माँ के पाँव सहलाने शुरू कर दिए और उसमें गुदगुदी करने लगे। माँ अपना पाँव हटाने लगीं।

वह दोनों किसी प्रेमी जोड़े की तरह एक-दूसरे से खेल रहे थे, उनके अन्दर कोई जल्दबाजी नहीं थी, दोनों एक-दूसरे को प्यार कर रहे थे।

जय अंकल उनकी पायल को चूमने लगे और हाथ से पाँव पर मालिश करने लगे। जय अंकल धीरे से माँ की पैंटी की तरफ पहुँचे और उसे उतार कर किनारे रख दी।

उनका लण्ड जो इतना खड़ा हो चुका था कि चड्डी फाड़ रहा था। अंकल पूरे नंगे हुए और माँ की टांगें ऊपर करके अपना सात इंच का लण्ड माँ की फूली हुई चूत में डाल दिया।

माँ सिसकार उठीं- अअह आआ.. आआह.. अहह..हाहा आआहह्ह..हा जय धीरे-धीरे.. डॉली उठ जाएगी.. अहह्ह..सिइइइ..

माँ ने मेरे जाग जाने के डर से अपनी आवाजें बंद कर लीं। जय अंकल धीरे-धीरे चुदाई की गति तेज करने लगे। माँ की चूड़ियाँ खन-खन कर रहीं थीं।

अंकल उनको तेज-तेज चोदने लगे।

माँ भी अंकल के कंधे को पकड़ कर अपनी तरफ खींच रही थीं.. वैसे ही जय अंकल भी तेज स्पीड में उनकी चूत में धक्के लगा रहे थे। उनका सात इंच का लण्ड माँ की चूत में पूरा पेवस्त हो रहा था। माँ अपनी टांगें ऊपर किए हुए बिस्तर पर पड़ी लम्बी-लम्बी साँसें भर रहीं थीं।

तकरीबन आधे घंटे तक जय अंकल माँ को लण्ड डालकर चोदते रहे.. उसके बाद वे दोनों शांत हो गए। इसी के साथ उनकी पायलों की ‘छुन-छुन’ भी बंद हो गई थी। शायद जय अंकल झड़ चुके थे।

वह दोनों काफ़ी देर बिस्तर पर नंगे ही पड़े रहे.. उसके बाद फिर वो दूसरी बार के लिए तैयार हुए।

कुछ देर बाद उन्होंने माँ को फिर से चूमना-चाटना शुरू कर दिया। माँ ने भी जय अंकल के लण्ड को मुँह में लेकर उनके लौड़े को चूसना शुरू किया। पहली ठोकर के सारे वीर्य साफ़ को किया।

जय अंकल माँ को फिर से प्यार करने लगे। उनके दूध दबाने शुरू कर दिए। अब जय अंकल का लौड़ा फिर से हाहाकारी हो गया था। इस बार उन्होंने माँ को उल्टा किया.. मतलब अंकल ने माँ को कुतिया बना दिया।

‘ऐसे पीछे नहीं जय…’

‘तुम जानती हो मुझे कुतिया बना कर तुम्हारी गाण्ड मारना बहुत अच्छा लगता है.. कोमल..’

जय अंकल ने अपना मूसल माँ की गाण्ड के छेद में लगाया और उनके चूतड़ों पर एक थपकी दी।

मैं सोच भी नहीं सकती थी कि मेरी माँ आज पूरी रंडी बनी हुई थीं।

माँ समझ गईं कि अब ये थपकी देने का मतलब है कि उनकी गाण्ड में लौड़े की शंटिंग शुरू होने वाली है। उन्होंने खुद को गाण्ड मराने के लिए तैयार कर लिया था।

जय अंकल ने माँ की गाण्ड में शॉट मारा.. ‘आआह्ह्ह.. धीरे-धीरे जय..’

‘बस बस कोमल.. हो गया..’

माँ के हलक से एक घुटी सी चीख निकली.. जय अंकल का हाहाकारी लण्ड माँ की मुनिया की सहेली उनकी गाण्ड में पूरा घुस चुका था।

कोमल- प्लीज जय.. धीरे-धीरे दर्द हो रहा है..

माँ के चेहरे पर दर्द साफ़ झलक रहा था।

‘क्यों.. क्या रंगीला तुम्हारी गाण्ड नहीं मारता था?’

‘नहीं.. वह गाण्ड मारने के शौक़ीन नहीं हैं.. मुझे इन्हीं धक्कों का और तुम्हारे लण्ड का बड़ी बेसब्री से इन्तजार था। मुझे नहीं मालूम था जय कि तुम्हारा लौड़ा इतना बड़ा है.. आह्ह.. चोदो मुझे और जोर से चोदो..’

जय अंकल माँ के ऊपर कुत्ते जैसे चढ़े थे.. माँ की गाण्ड पर जैसे ही चोट पड़ती.. उनके दोनों चूचे बड़ी तेजी से हिलते। जय अंकल ने उनके हिलते हुए दुद्धुओं को अपने हाथों से पकड़ लिया.. जैसे जय अंकल ने माँ की चूचियों का भुरता बनाने की ठान ली हो।

उनकी गाण्ड को करीब दस मिनट तक ठोकने के बाद वे माँ की पीठ से उतरे और फिर उन्होंने माँ को चित्त लेटा दिया। अब उन्होंने माँ की कमर के नीचे तकिया लगाया और उनके पैर फैला कर उनकी चूत में अपने मूसल जैसे लौड़े को घुसेड़ दिया।

माँ भी नीचे से अपनी कमर उठा कर थाप दे रही थीं, माँ के मुँह से अजीब सी आवाजें निकलने लगीं थीं- चो..द.. जय.. और..ज्जोर.. स्से..धक्के.. मारर.. मेरेरेरे.. राज्ज्ज्ज..जा !

और फिर वो अचानक शिथिल पड़ गईं.. माँ झड़ चुकी थीं।

जय अंकल ने भी तूफानी गति से धक्के मारते हुए उनकी चूत में अपने लण्ड का लावा छोड़ दिया।

उन दोनों की चुदाई देखकर मेरी भी चूत गीली हो गई थी.. मैंने अपनी उंगली से अपनी चूत को सहलाना शुरू कर दिया था।

मुझे मालूम था कि आज जय अंकल माँ को देर तक चोदेंगे.. मैंने महसूस किया था कि जब चुदाई होती है.. तो फिर उन दोनों को.. मेरी तो जैसे सुध ही नहीं रहती है।

जय अंकल का इंजन अभी माँ की चूत में शंटिंग कर रहा था। मेरी आँखें मुंदने लगी थीं.. कुछ देर बाद मैं सो गई।
 
अब तो अंकल और माँ के बीच के सभी परदे मेरे सामने खुल चुके थे.. माँ भी अपनी पूरी मस्ती से अपनी चूत कि चीथड़े उड़वाने में लग चुकी थीं।

जय अंकल माँ को जब चाहते तब चोदते थे। धीरे-धीरे वह दोनों मेरे सामने ही एक कमरे में चले जाते और कई-कई घंटे बाद निकलते थे। मैं भी हमेशा माँ और अंकल की चुदास लीला देखती थी रात को जाग जाग कर…

एक दिन मैं जब सुबह उठी.. तो देखा कि जय अंकल मेरे साथ ही लेटे थे। वह मुझे पूरी तरह से चिपटाए हुए थे।

मैंने अंकल से पूछा- माँ कहाँ हैं?

अंकल- वह तो अपने कॉलेज चली गईं।

‘ठीक है.. मैं आपके लिए चाय बना दूँ?’

अंकल ने सिगरेट सुलगाते हुए ‘हाँ’ में सिर हिला दिया था। थोड़ी देर बाद मैं चाय लेकर आ गई थी। अंकल में मुझे पास में बैठने के लिए इशारा किया।

मैं वहीं उनके पास बैठ गई।

‘कल रात को तुम सो रहीं थी या जाग रही थीं?’ अंकल ने प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए सवाल किया।

अचानक इस तरह के सवाल से मैं सकपका गई थी। अंकल को शायद ये मालूम पड़ गया था कि माँ और उनकी चुदाई का मैंने पूरा नजारा देखा है।

‘देखो डॉली.. मैं तुम्हारा अंकल हूँ.. तुम्हारी माँ का ख्याल रखना मेरा फ़र्ज़ है.. तुम बड़ी हो गई हो.. समझदार हो.. इस बात को समझ सकती हो।’

मैंने बिना कोई जवाब दिए अपना सिर शर्म से नीचे झुका लिया था।

‘वैसे कितने साल की हो गई हो तुम?’

‘पिछले महीने में 18 साल की..’ मैंने धीरे से शरमाते हुए जवाब दिया था।

अंकल ने मुझे अपने सीने से लगा लिया- बड़ी हो गई है मेरी बच्ची.. तू फ़िक्र मत कर.. तेरे लिए मैं तेरी माँ से बात करता हूँ..

अंकल ने मुझे गले लगाये हुए ही मेरी पीठ पर सहलाते हुए कहा था। मैं किसी मासूम बच्चे की तरह उनसे चिपकी हुई थी।

अंकल ने मुझे अपनी ओर खींचा और अपनी गोद में झटके से खींच लिया.. हम दोनों बिस्तर पर गिर गए।

मैं बुरी तरह घबरा गई.. मैं हल्की सी आवाज में बोली- अंकल प्लीज मुझे जाने दो..

‘कुछ नहीं होगा तुझे मेरी गुड़िया रानी..’

अंकल मेरे कंधों पर किस करने लगे.. मुझे अच्छा लग रहा था.. परन्तु शर्म भी आ रही थी.. क्यूंकि वे मेरे अंकल थे।

मैं छूटने की कोशिश करने लगी.. परन्तु अंकल ने मुझे पीछे से जकड़ रखा था।

अचानक उनका हाथ मुझे अपनी टांगों के बीच महसूस हुआ। अंकल मेरी नन्हीं सी मासूम योनि को मसल रहे थे। मुझे अच्छा लग रहा था.. परन्तु थोड़ा अजीब भी.. क्यूंकि यह सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था।

अंकल ने मुझे मुँह के बल बिस्तर पर लिटा लिया और मेरे ऊपर लेट कर मेरी पीली जालीदार कुर्ती की ज़िप खोल कर मेरी पीठ पर चुम्बन करने लगे। मैं चुपचाप सिसकारियाँ भर रही थी।

अंकल ने मेरे अधखिले उभार मसलने शुरू कर दिए.. मेरे पीछे उभारों पर मुझे उनके लौड़ा का दबाव साफ़ महसूस हो रहा था। नीचे मेरी योनि में कुलबुलाहट सी होने लगी थी। योनि को और साथ में भगांकुर को मसलवाने को मन कर रहा था।

फिर अंकल ने मेरी काली चूड़ीदार पजामी नीचे खिसका दी और मेरी गुलाबी रंग की चड्डी की एक झटके में नीचे खिसका लिया। मुझे शर्म सी महसूस हो रही थी परन्तु आनन्द भरी सनसनाहट में लिपटी.. मैं चुपचाप लम्बी-लम्बी सांसें ले रही थी। मुझे लग रहा था कि मेरी योनि कुछ रीतापन है.. उसे भरने के लिए मैं कुछ अन्दर लेने को मचल रही थी।

मुझे सीधा करके अंकल की अब उंगली आसानी से मेरी गुलाबी चूत में जा रही थी। मैं बहुत जोर से सिसकारियाँ ले रही थी ‘उन्नन्नह्हह.. आअह्हह.. ऊऊह्ह. आहन्न.. आहऊर चूसो..’

फिर जय अंकल ने मेरे छोटे-छोटे चूचों को चूसना छोड़ कर होंठों का किस लेना शुरू कर दिया- तू तो मेरी गुड़िया रही है डॉली.. मैं तो कब से तेरे पकने का इंतज़ार कर रहा था.. मूआआह्ह्ह..

अंकल ने मुझे चूमते हुए ख़ुशी ज़ाहिर की।

कुछ देर के बाद मैं पूरी तरह से गर्म हो गई। फिर अंकल ने अपना लोअर खोला और अपना लण्ड मेरे हाथ में थमा दिया। उनका लण्ड अब तन कर पूरा 90 डिग्री का हो गया था।

मैं पहले तो शरमाई.. लेकिन कुछ देर के बाद जब उन्होंने फिर से लण्ड पकड़ाया.. तो मैं थोड़ा खुल गई।

अंकल ने बोला- इसे सहलाओ और आगे-पीछे करो।

मैं वैसा ही करने लगी।

अंकल ने फिर मेरी नन्हीं सी मासूम चूत में एक उंगली डाल दी। मैं जोर से ‘आह्ह्ह..’ करके सिस्कार उठी। कुछ देर के बाद मैंने अपनी चूड़ीदार पजामी खुद उतार दी।

‘वाह.. क्या नन्हीं सी पिंक.. बिना बाल की चूत है.. आज तो मैं तुझे कली से फूल बनाऊंगा.. मेरी गुड़िया रानी..’

अंकल ने हाँफते हुए कहा।

मेरी चूत पूरी भीगी हुई थी। मेरी चूत पर एक भी बाल नहीं था.. हल्का सा रोंया ही अब तक आया था। मेरी चूत पूरी पावरोटी की तरह फूली हुई थी।

फिर अंकल ने मुझे अपना लण्ड चूसने के लिए बोला.. मैंने मना कर दिया।

अंकल ने बोला- कुछ नहीं होता..

मैं बोलने लगी- नहीं.. मुझे घिन आ रही है..

‘देखो इस तरह से चूसो..’

यह कहते हुए जय अंकल ने मेरी चूत को चूसना शुरू कर दिया।

मैं चिल्लाने लगी- आह्हह्हह्हह.. अंकल नहीं.. बस करो..

अंकल अपनी जीभ से मुझे चोद रहे थे.. मेरे मुँह से सिसकारियाँ फूट रही थीं ‘अंकल आह्ह.. मेरी चूत में आग लग रही है.. अहह्ह्ह.. कुछ करो..’

वे लगातार मेरी चूत को चूसते रहे।

मैं जोर से चिल्ला रही थी- और जोर से.. आह्ह..

मैं अपने हाथ से उनके सिर को अपनी चूत के ऊपर खींच रही थी। अपने पैरों को कभी ऊपर तो कभी दोनों जांघों को जोर से दबा रही थी.. कभी-कभी मेरी साँसें फूल जाती थीं।

कुछ देर के बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.. अंकल ने सारा का सारा पानी पी लिया।

मैं बिस्तर पर नंगी निढाल पड़ी थी। वो मेरे गोर दुबले-पतले नाज़ुक जिस्म को देख रहे थे। मैं जोर से हाँफ़ रही थी.. जैसे कोई कई मील से दौड़ कर आई होऊँ।

‘डरती है मेरी गुड़िया रानी.. अंकल से डरती है? कुछ हुआ मेरी बेबी.. मज़ा आया ना?’

अंकल ने मुझे सीधे लिटा कर प्यार से कहा।

मैंने हाँ में सिर हिलाया।

अब अंकल का मुँह मेरे सामने था.. उनका चेहरा लाल हो चुका था। वो मेरे चेहरे की तरफ देख भी नहीं रहे थे। उन्होंने अपने इनर को उठाया.. लोअर नीचे सरका कर अपने लौड़े को बाहर निकाला।

उस वक्त तो मुझे पता नहीं था कि मेरा यौनांग कुछ छोटा था।

मुझे थोड़ा अजीब जरूर लग रहा था.. पर कामोत्तेजना बहुत हो रही थी। अंकल ने मेरी टांगें फैला दीं और खुद टांगों के बीचों-बीच आ गए।

उन्होंने लौड़े पर थूक लगाया और योनिद्वार के ठीक बीचों-बीच मुझे उनका लौड़ा महसूस हुआ। उन्होंने मेरे दोनों घुटनों को अपने हाथों से थामा और जोर का एक धक्का लगाया ‘आआआ.. ईईई आश्स्श्श्श.. माँ….

मेरी तो जैसे जान ही निकल गई.. मैं छूटने के लिए तड़पने लगी। नीचे मेरी चूत में जलन सी हो रही थी।

‘धीरे से.. धीरे से.. कुछ नहीं होगा मेरी गुड़िया रानी को..’

यह कहते हुए अंकल मेरे मासूम नन्हें अधखिले वक्ष-उभार मसलने लगे और मुझे चूमने लगे।

पहली बार मेरी चूत में कोई लण्ड गया था। कॉलेज में मुझे कई सारे लड़के मुझे लाइन मारते थे.. लेकिन मैंने सोचा नहीं था कि यह सौभाग्य जय अंकल को मिलेगा।

लगभग 5 मिनट में मेरा दर्द कुछ कम हुआ.. तो मुझे अच्छा लगने लगा और मैं खुद ही कमर हिलाने लगी और कूल्हे उठाने लगी।

अंकल ने मेरी कमर के नीचे तकिया लगाया और हल्के-हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिए और लगभग दो मिनट में उनकी रफ्तार बहुत तेज हो गई।

अब मुझे भी बहुत मजा आ रहा था.. मेरी योनि में मीठी सी चुभन मुझे आनन्द भरी टीस दे रही थी।

लगभग 7-8 मिनट तक धक्के लगाने के बाद मुझे चरमोत्कर्ष प्राप्त होने लगा और मुझे योनि के अन्दर संकुचन सा महसूस हुआ। मुझे योनि के अन्दर कुछ रिसता हुआ सा महसूस हुआ.. अंकल ने लौड़ा झटके से बाहर निकाला और सारा वीर्य मेरे योनि मुख और मेरे पेट पर गिरा दिया.. और मेरे ऊपर गिर गए।

वे झड़ चुके थे और लम्बी-लम्बी सांसें लेने लगे।

मुझे चूत में दर्द महसूस हो रहा था.. मेरी चूत खून से लथपथ हो गई थी.. मैं डर गई थी।

तब अंकल ने बताया- पहली बार में ऐसा होता है..

मैंने चड्डी चूत पर चढ़ा ली।

कुछ देर बाद अंकल मेरे छोटे-छोटे चूतड़ों को मसलने लगे और फिर से मेरी चड्डी को कमर तक खिसका दिया। मैं आँखें बंद करके चुपचाप लेटी हुई थी।

अंकल मेरे ऊपर छा गए थे। उनका लौड़ा मेरी चूत में दुबारा घुस गया था.. मैं एकदम से थक कर चूर हो गई थी। ऐसा लग रहा था कि न जाने कितनी दूर से दौड़ लगा कर आई होऊँ।

कुछ देर अंकल का लण्ड मेरी चूत में ही पड़ा रहा.. अंकल ने अपनी आँखें खोलीं और मेरे सुनहरे घने बालों में अपना दुलार भरा हाथ फिराया। हम दोनों एक-दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे।

उन्होंने अपना लण्ड मेरी चूत से बाहर खींचा..

फिर अंकल ने लोअर पहना और बाथरूम में घुस गए..

मैं चुपचाप हल्की सी आँख खोलकर उनको देख रही थी.. जैसे ही वो अन्दर घुसे.. मैंने जल्दी-जल्दी अपनी पजामी ऊपर खींची.. कपड़े और बाल ठीक-ठाक किए और जल्दी से वहाँ से बाहर निकल आई.. क्यूंकि मेरा मन अंकल से नजर मिलाने को नहीं हो रहा था।

मेरे ख्याल से इस सारे प्रकरण में अंकल का कोई दोष नहीं था। मैं जानती थी कि मेरी माँ कोमल जो 34 साल की जवान और खूबसूरत औरत हैं.. उनके साथ जो हो रहा था.. वह मेरे साथ भी कभी भी हो सकता है.. लेकिन आज ही के दिन यह सब हो जाएगा.. मैं नहीं जानती थी।

कुछ देर बाद जय अंकल मेरे नजदीक आए और उन्होंने मेरे गालों पर एक ज़ोरदार पप्पी ली और 2 दिन बाद वापस आने का वादा करके चले गए।

फिर एक दिन वह हुआ.. जिसकी मैंने कभी उम्मीद भी नहीं की थी। शाम के 9 बज रहे थे.. जय अंकल की कार दरवाजे पर आकर रुकी थी। अंकल का रात को इस तरह आना.. कोई नई बात नहीं थी.. लेकिन मैंने दरवाजे पर जाकर देखा कि आज अंकल के साथ एक और आदमी भी था।
 


जय अंकल- हाय कोमल कैसी हो? इससे मिलो, यह मेरा दोस्त राज है!

माँ ने धीरे से ‘हाय’ करके अपना हाथ आगे बढ़ाया था।

‘और राज यह है मेरी प्यारी सी नन्हीं सी भतीजी डॉली..’

जय अंकल ने मेरे गाल खींचते हुए.. राज को मेरी तरफ इशारा किया।

राज ने ललचाई हुई नज़रों से मुझे नीचे से ऊपर तक देखा था.. उस वक़्त मैंने रेड स्कर्ट और ब्लैक टॉप पहना हुआ था। मैं बिना जवाब दिए अपने कमरे में चली गई थी।

मैं अपने कमरे में चली गई थी और खिड़की से उनकी बातें सुनने लगी थी।

जय अंकल माँ को कमरे में ले कर गए थे.. राज बरामदे में ही रुका था।

‘कोमल यह मेरा दोस्त राज है.. आज रात यह हमारे साथ रुकेगा..।’

अंकल माँ को समझा-बुझा रहे थे.. लेकिन माँ मानने को तैयार नहीं थीं।

‘अरे.. किसी को कुछ पता नहीं चलेगा.. बस मैं तुम और राज.. एक रात की तो बात है..’

मैं समझ चुकी थी कि जय अंकल माँ को राज से चुदवाने के लिए राजी कर रहे थे।

कोमल- तुम्हारी बात अलग है जय.. तुम मेरे शौहर के दोस्त हो.. लेकिन एक गैर मर्द के साथ मैं नहीं कर सकती।

माँ परेशानी से अपना सिर पकड़े सोफे पर बैठी थीं।

जय अंकल- मैं और राज बचपन के दोस्त हैं.. यहाँ तक कि मैंने उसकी पत्नी की भी ली है.. अब अगर वह कुछ माँगता है.. तो मैं कैसे मना कर दूँ.. और फिर यह बात इस कमरे से बाहर थोड़े ही जाने वाली है? मैंने राज को बोला है कि तुम मेरे बहुत अच्छे दोस्त रंगीला की बीवी हो।

‘तुमने मुझसे पूछ कर बोला था क्या..? मैं ऐसा नहीं कर सकती जय..’

जय अंकल ने माँ के गालों को अपने दोनों हाथों में लेते हुए अपनी बात पर जोर देकर कहा।

‘लेकिन घर में मेरी बेटी डॉली भी है.. वह क्या सोचेगी.. अब वह छोटी नहीं रही है..?’

माँ ने अपनी शंका ज़ाहिर करते हुए जवाब दिया था.. जबकि राज अंकल बाहर बरामदे में बैठे सिगरेट पी रहे थे।

‘हाँ मुझे बहुत अच्छी तरह से मालूम है कि वो ‘बड़ी’ हो गई है.. उसकी तुम फ़िक्र मत करो.. मैं उसको सम्हाल लूँगा।

फिर माँ धीरे-धीरे राजी हो गई थीं। जय अंकल माँ को अपनी गोद में लिए हुए थे और उनके कुरते में हाथ डाल कर उनके चूचों को मसल रहे थे। जिससे उनका विरोध अब कम हो गया था।

रात होने को थी.. मेरा दिल धड़कने लगा था.. मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था कि मेरी माँ मेरे सामने ही दो-दो मर्दों से चुदेगीं.. कैसे चुदेगीं.. आह्ह्ह चाचा का और उनके दोस्त का कड़क लण्ड भला अन्दर कैसे घुसेगा..? यह सोच कर तो मेरी चूत में भी पानी उतारने लगा था।

रात को माँ मेरे कमरे में आईं और मुझे ठीक से सुला दिया और चादर ओढ़ा कर लाईट बन्द करके कमरे बन्द करके चली गईं।

मैंने धीरे से चादर हटा दी और उछल कर खिड़की पर आ गई।

राज अंकल शायद शराब पी रहे थे.. उसका यह रूप भी मेरे सामने आने लगा था। अपना लण्ड मसलते हुए वो धीरे-धीरे शराब पी रहे थे।

‘उसे चादर उढ़ा दी है.. वो गहरी नींद में सो गई है..’

यह सुनते ही जय अंकल ने माँ को अपनी बाँहों में भरते हुए चूम लिया।

मुझे उनके कमरे से अब राज अंकल की भी आवाज सुनाई दे रही थी..

मेरा दिल धड़क रहा था कि माँ की आज दो मर्दों से चुदाई होगी।

जय ने माँ को राज के पास जाने को कहा।

माँ धीरे-धीरे शरमाते हुए अंकल की तरफ़ बढ़ रही थीं.. उनके पास आकर वो रुक गईं.. और अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से उन्हें निहारने लगीं।

तभी माँ मेरे सामने मुँह करके आ गईं.. मैंने देखा कि उन्होंने आज बेहद ही कीमती ड्रेस पहना हुआ था.. छोटी सी ब्लैक रंग की बैकलेस कुर्ती और उसके साथ लाल रंग की जालीदार सलवार.. यह ड्रेस शायद राज अंकल माँ के लिए लाए थे।

मैं सोचने लगी कि अरे.. वाह माँ ऐसी ड्रेस में..

मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा था, ये दोनों हरामजादे आज रात को मेरी माँ की चुदाई करेंगे।

माँ का तराशा हुआ गुदाज गोरा जिस्म.. ट्यूबलाईट की रोशनी में जैसे चांदी की तरह चमक उठा। उनकी ताजी शेव की हुई चूत की फ़ांकें.. सच में किसी धारदार हथियार से कम नहीं थीं। कैसी सुन्दर सी दरार थी.. चिकनी शेव की हुई रसीली चूत।

‘उफ़्फ़्फ़.. कोमल.. आप भी ना.. अभी किसी मॉडल से कम नहीं हो।’ राज अंकल ने माँ के गोरे सफ़ेद जिस्म को चूमते हुए कहा था।

‘हा.. हा.. हा.. अच्छा जी.. जय भाईजान की मेहरबानी है.. यह जो तुम्हारे सामने हूँ।’

माँ उनसे लिपट कर बातें कर रही थीं। कभी तो वो मेरी नजरों के सामने आ जातीं.. और कभी आँखों से ओझल हो जाती थीं।

तभी राज अंकल ने माँ का हाथ पकड़ कर अपने सामने सामने खींच लिया और कुर्ती के ऊपर से ही उनके सुडौल चूतड़ों को दबाने लगे। माँ की लम्बाई चाचा के बराबर ही थी..

उफ़्फ़.. माँ ने गजब कर दिया.. उन्होंने राज अंकल की जीन्स की ज़िप धीरे से खोल दी।

‘क्यूं आपको.. मेरे सामने शर्म आ रही है क्या? अपने लण्ड को क्यूं छुपा रखा है.. जानेमन?’

तभी मेरी धड़कन तेज हो गईं.. अंकल ने माँ की सलवार के नीचे से माँ की गाण्ड को दबा दिया। माँ ने अपनी टांग कुर्सी पर रख दी.. ओह्ह्ह तो जनाब ने माँ की गाण्ड में उंगली ही घुसेड़ दी है।

वो अपनी उंगली गाण्ड में घुमाने लगा.. माँ भी अपनी गाण्ड घुमा-घुमा कर आनन्द लेने लगीं।

कमरबंद खींचते ही माँ की सलवार उनके शरीर से खिसक कर सरसराती हुई नीचे फ़र्श पर आ गिरी। माँ की सफ़ेद दूधिया माँसल टांगें नंगी हो चुकी थीं।

‘कोमल.. तुम कितनी सुन्दर हो..’

माँ ने मुस्कुराते हुए नजर नीची कर ली.. अंकल ने आगे बढ़ कर माँ को प्यार से गले लगा लिया। उनका दुपट्टा अलग करके उनके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए थे, माँ तो जैसे उनसे चिपट सी गई थीं, दोनों के लब एक-दूसरे से मिल गए।

गहरे चुम्बनों का आदान-प्रदान होने लगा। अब राज अंकल माँ के नंगे भारी-भारी चूतड़ों को चीर कर उनकी गुदा द्वार में उंगली डाल रहे थे।

‘आउच…’

माँ के मुख से एक प्यारी सी ‘आह’ निकल पड़ी। पजामे में से अंकल का लण्ड उभर कर बाहर निकलने हो रहा था। माँ ने एक बार नीचे उनके लण्ड को देखा और अपनी चड्डी से ढकी चूत उनके लण्ड से टकरा दी। अब वो अपनी चूत वाला भाग लण्ड पर दबा रही थीं।

अंकल ने अपने दोनों हाथों से माँ की चूचियों को सहला कर दबा दिया.. तो माँ सिमट सी गईं।

‘कोमल.. मेरे लण्ड को भी प्यार करो..न..?’

अंकल ने माँ की गर्दन को चूमते हुए कहा।

मुस्कुराते हुए माँ धीरे से नीचे बैठ गईं और उनकी जीन्स को नीचे खिसका दिया.. फिर उसे धीरे से नीचे उतार दिया। अंकल का सात इंच का लण्ड बाहर आ गया.. उनका सुपाड़ा पहले से ही खुला हुआ था.. माँ ने मुस्करा कर ऊपर देखा और लण्ड को अपने मुख में डाल लिया। अंकल ने मस्ती में अपनी आंखें बन्द कर ली।

अब राज अंकल के हाथ माँ की ब्रा को खोलने में लगे थे.. माँ ने उनका लण्ड चूसना छोड़ कर पहले अपनी ब्रा को उतार दिया..

हाय रे… माँ के उरोज तो सच में बहुत सधे हुए थे.. हल्का सा झुकाव लिए.. चिकने और अति सुन्दर..

माँ ने फिर से उनका लण्ड अपने मुख में ले लिया और चूसने लगीं। अंकल के हाथ माँ के बालों में चल रहे थे.. उनके बाल खुल गए थे।

अब उन्होंने माँ को उठा कर खड़ा कर लिया- कोमल.. मुझे भी आप अपनी चूत को प्यार करने की इजाजत देंगी?’

राज की इस बात पर पहले तो माँ शरमा गईं.. फिर वो बिस्तर पर चित्त लेट गईं और उन्होंने अपनी दोनों टांगें ऊपर को खोलते हुए अपनी चूत पसार ली।

‘हाय.. कोमल.. इतनी चिकनी.. इतनी प्यारी.. लण्ड लगते ही भीतर फ़िसल जाए.. 34 साल की होकर भी तुम किसी कुंवारी लड़की से कम नहीं हो।’

‘ऐसे मत बोलो.. मेरी जान.. बस इसे चूम लो.. फिर चाहे जो करो.. भले ही उसमें अपना अन्दर उतार दो..’

राज- थैंक्स यार जय.. तेरे दोस्त की बीवी तो मस्त माल है.. मैं तो कहता हूँ कि परमानेंट बदल ले इसे मेरी बीवी से.. तू मेरी बीवी आयशा को जब चाहे.. जहाँ चाहे.. ले जाया कर.. और जैसे चाहे चोदा कर।

‘अरे यार.. तू भी कोमल को जब चाहे ले जा सकता है.. अब कोमल हम दोनों की दोस्त है।’

जय अंकल ने राज की इस बात का हँस कर जवाब दिया था।

‘अच्छा जी थोड़ा कम मस्का लगाओ..’

माँ को चुदने की बहुत लग रही थी.. इस पर अंकल ने अपना मुँह माँ की चूत पर लगा दिया.. और उनके दाने को उनके होंठों ने मसल दिया।

‘सीईईए..’ करते हुए माँ ने आँखें बंद कर लीं और अपनी चूत उछालने लगीं।

मेरी चूत में भी यह देख कर पानी उतर आया.. इधर मैं अपनी चूत को दबाने लगी।

माँ तो खुशी के मारे जैसे उछल रही थीं.. पर अंकल चूत से चिपके हुए उसका रस चूसने में लगे थे।

‘अब तड़पाओ मत.. जैसा मैं कहूँ वैसा करो..’

‘कोमल.. पीछे घूम कर कुतिया बन जाओ.. पहले तुम्हारी चिकनी गाण्ड मारूंगा..’

‘ओह.. तुम्हें भी गाण्ड मारना अच्छा लगता है.. कोई बात नहीं.. मेरे दोनों तरफ़ छेद हैं.. किसी को भी चोद दो.. पर पहले अपना ये लण्ड मुझे मुँह से चूसने दो ना..’

‘ओह.. जैसी कोमल जी की इच्छा..’

राज अंकल ने एक बार फिर बिस्तर पर बैठ गए और माँ को मुँह में अपना लण्ड दे दिया। माँ के मुँह से बीच-बीच में सिसकारी भी निकल जाती थी। वो अपने कठोर लण्ड को माँ के मुँह में मारते रहे और माँ ने अपनी चूत घिसवाना चालू कर दिया।

मुँह से लौड़ा चुसवाते हुए जैसे ही अंकल का वीर्य छलका.. माँ के मुँह से भी सीत्कार निकल पड़ी। माँ अंकल का सारा वीर्य गटक गई थीं.. और अब वे उनके लण्ड को चाट-चाट कर साफ़ करने लगी थीं।

‘इसमें आपको बहुत मजा आता है ना?’

‘हाँ’ कहते हुए उनके लण्ड को माँ ने हिलाया.. फिर माँ ने अंकल के लौड़े को अपने चिकने बोबे से लगा दिया और उसे अपनी छाती पर घिसने लगी।

माँ अब बिस्तर पर बैठ गईं और अपनी चिकनी चूत को उंगली से पहले सहलाने लगीं.. फिर चूत की फांक को मसलने सी लगीं। फिर माँ ने अपना दाना उभार कर देखा और उसे मसलने लगीं.. उन्होंने अपनी गीली चूत में अपनी उंगली घुसा ली और ‘आह’ भरते हुए हस्तमैथुन करने लगीं।

माँ जल्दी ही झड़ गईं.. वो शायद पहले से ही बहुत उत्तेजित थीं।

माँ के झड़ते ही राज अंकल माँ की चूत का रस चूसने लगे.. माँ ने उन्हें सिसकारी लेते हुए अपनी जांघों के बीच दबा लिया।

‘अब देखो.. मैं फ़िर तैयार हूँ.. अब मैं तुम्हारी जम कर गाण्ड चोदूँगा.. मजा आ जाएगा..’

माँ ने घोड़ी बन कर अपनी सुडौल गाण्ड पीछे की और उभार दी.. राज अंकल को गाण्ड मारने का शौक था, उन्होंने धीरे से लण्ड गाण्ड में डाल दिया और माँ मस्त हो गईं..

ये सब देखने में मुझे बहुत आनन्द आ रहा था।

माँ की गाण्ड को अंकल ने बहुत देर तक बजाया, माँ भी अंकल के स्खलित होने तक गाण्ड चुदाती रहीं।

माँ की गाण्ड मार कर अंकल सुस्ताने लगे।

‘जूस पियोगे या दूध लाऊँ?’

‘अभी तो दूध ही पियूँगा.. फिर जूस..’

‘ही ही ही..’
 


माँ जैसे ही दूध लाने के लिए उठीं.. अंकल ने उन्हें फिर से गोदी में खींच लिया और उनकी चूचियों को अपने मुँह से दबा लिया।

‘कोमल.. मेरी जान कहाँ जा रही हो.. अपने दूध नहीं पिलाओगी क्या?’

अंकल माँ को गुदगुदाते हुए दूध पीने लगे।

‘हुंह..’

मैं अपनी चूत में उंगली करते हुए सोच रही थी कि अंकल माँ के दूध तो खूब चूस-चूस कर पी रहे हैं.. मेरे तो चूसते ही नहीं हैं..

माँ गुदगुदी के मारे सिसकारियाँ भरने लगीं।

‘बहुत प्यारे हो तुम दोनों.. कैसी-कैसी शरारतें करते हो..’

दोनों नंगे ही एक-दूसरे के साथ खेल रहे थे.. खेलते हुए उन दोनों में फिर से आग भरने लगी थी। जय अंकल का लण्ड फुंफकारने लगा था।

‘अब देरी किस बात की है..’ माँ ने चुदासे स्वर में कहा।

‘नहीं मुझे अभी दूध पीने दो.. न..’

‘पहले बस एक बार.. मेरे ऊपर चढ़ जाओ.. मुझे शांत कर दो..’

माँ ने अपनी दोनों खूबसूरत सी टांगें उठा लीं.. अंकल उन टांगों के बीच में समा गए। कुछ ही पलों में अंकल का मोटा लण्ड माँ की चूत को चूम रहा था। चाचा का लण्ड माँ की चूत में घुसता चला गया।

माँ आनन्द से झूम उठी थीं।

इधर मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया.. मुझे भी एक मीठी सी गुदगुदी हुई।

मेरी माँ अपनी टांगें ऊपर उठा कर उछल-उछल कर चुदवा रही थीं और राज अंकल का लण्ड चूस रही थीं।

मेरा हाल इधर खराब होता जा रहा थ, माँ की मधुर चीखें मेरे कानों में रस घोल रही थीं।

दोनों गुत्थम-गुत्था हो गए थे.. कभी अंकल ऊपर तो कभी माँ ऊपर..! खूब जम कर चुदाई हो रही थी।

माँ को इस रूप में मैंने पहली बार देखा था.. वो एकदम रांड बनी हुई थीं। लगता था जिन्दगी भर की चुदाई वो तीनों आज ही कर डालेंगे।

तभी तीनों का जोश ठण्डा पड़ता दिखाई देने लगा..

अरे..!

क्या दोनों झड़ चुके थे?

सफ़र की इति हो चुकी थी.. हाँ सच में वो दोनों झड़ चुके थे।

राज अंकल ने मुस्करा कर माँ कर चूचे अपने मुँह में भर लिए और ‘पुच्च.. पुच्च..’ करके चूसने लगे।

माँ धीरे से नीचे बैठ गईं और राज का लण्ड पकड़ कर सहलाने लगीं, उसका लण्ड अपने मुँह में लेकर उसे चूसने लगीं।

राज कभी तो माँ की जांघें चूमता और कभी उनके बालों को सहलाता- जोर से चूसो कोमल डार्लिंग.. उफ़्फ़ बहुत मजा आ रहा है.. और कस कर जरा..

अब माँ जोर-जोर से ‘पुच्च.. पुच्च..’ की आवाजें निकालने लग गई थीं, राज की तड़प साफ़ नजर आने लगी थी।

फिर माँ ने गजब कर डाला.. माँ ने अपनी एक टांग उसके दायें और एक टांग राज के बायें डाल दी। राज का सख्त लण्ड सीधा खड़ा हुआ था, दोनों प्यार से एक-दूसरे को निहार रहे थे।

माँ उसके तने हुए लण्ड पर बैठने ही वाली थीं.. मेरे दिल से एक ‘आह..’ निकल पड़ी ‘माँ प्लीज ये मत करो.. प्लीज नहीं ना..’

पर माँ तो बेशर्मी से किसी रंडी की तरह उसके लण्ड पर बैठ गईं।

‘माँ घुस जायेगा ना.. ओह्हो समझती ही नहीं है..’

पर मैं उनके लण्ड को किसी खूँटा की तरह माँ की चूत में घुसता हुआ देखती ही रह गई.. कैसा चीरता हुआ माँ की चूत में घुसता ही जा रहा था।

फिर माँ के मुँह से एक आनन्द भरी चीख निकल गई।

‘उफ़्फ़्फ़.. कहा था ना जड़ तक घुस जाएगा.. पर ये क्या..? माँ तो राज से जोर से अपनी चूत का पूरा जोर लगा कर उससे लिपट गईं और अपनी चूत में लण्ड घुसवा कर ऊपर-नीचे हिलने लगीं।

अह्ह्ह.. खुदा वो तो मस्त चुद रही थीं.. सामने से राज माँ की गोल-गोल कठोर चूचियाँ मसल-मसल कर दबा रहा था। उसका लण्ड बाहर आता हुआ और फिर ‘सररर..’ करके अन्दर घुसता हुआ मेरे दिल को भी चीरने लगा था।

मेरी चूत का पानी निकल कर मेरी टांगों पर बहने लगा था। पूरी रात जय अंकल और उनके दोस्त राज ने मेरी माँ को किसी रांड की तरह चोदा था।

मुझे अपनी बारी का इंतज़ार था.. जो कि जल्द ही आने वाली थी।

मैं अपने बिस्तर पर आ गई और चूत में उंगली डाल कर अन्दर-बाहर करने लगी।

संयोग से एक रात को माँ को चुदवाते हुए देखकर मैं अपनी चूत में उंगली कर रही थी कि मेरे मुँह से सीत्कार निकल गई जिसको माँ ने सुन लिया। मैं जान नहीं पाई कि क्या हुआ लेकिन अगले दिन माँ का व्यवहार कुछ बदला-बदला सा था।

मुझसे रहा नहीं गया.. मैंने माँ से पूछा- क्या बात है माँ.. आज बहुत उदास हो?

माँ ने कहा- नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं है।

कुछ देर के बाद माँ ने मुझे अकेले में बुलाया और बोलीं- कल रात..

इतना सुनते ही मेरे कान खड़े हो गए.. मेरा चेहरा लाल हो गया।

तब माँ ने कहा- देखो बेटी मेरी उम्र इस वक़्त 32 साल है.. और तुम जानती हो कि तुम्हारे पापा बाहर रहते हैं.. उनको दुबई गए हुए दो साल से ऊपर हो गया।

ये सब कहते हुए माँ का गला भर आया.. उनकी आँखों से आंसू छलक पड़े। मैंने माँ को दिलासा दिया और कहा- मैं समझती हूँ.. कोई बात नहीं है माँ।

मेरी इस बात से उनका दिल कुछ हल्का हुआ और वो बोलीं- बेटी तुम नाराज़ नहीं हो न मुझसे?

मैंने कहा- नहीं माँ.. इसमें नाराज़ होने वाली कौन सी बात है.. ऐसा तो सबके साथ होता होगा?

माँ के चहरे पर कुछ मुस्कान आई।

मैं उस वक़्त कुछ और नहीं बोली।

उस दिन के बाद मैं तीन रातों तक माँ के चुदने का इंतज़ार करती रही लेकिन जय अंकल नहीं आए, उनकी चुदाई नहीं हुई।

अब मैं माँ की हमराज़ हो ही गई थी, मैंने माँ से पूछा- क्यों माँ.. आजकल अंकल रात को क्यों नहीं आ रहे हैं?

माँ ने थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहा- तुमको क्या दिक्कत हो रही है?

इधर मेरा भी तो जय के बिना बुरा हाल था, मुझे भी अंकल से चुदे कई दिन हो चुके थे। माँ के साथ-साथ मेरी चूत को भी लण्ड की ज़रूरत सताने लगी थी।

जिसका नतीजा यह हुआ कि मैंने बेअदबी के साथ माँ से कह दिया- माँ मुझे भी वही चाहिए.. जो तुम रोजाना रात को अपनी चूत में डलवाती हो।

माँ तो बिल्कुल सन्न रह गईं, उन्हें मुझसे ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी- देखो डॉली, तुम अभी बच्ची हो।

‘माँ मैंने आपको बताया नहीं.. जय अंकल मेरे साथ भी वो सब कर चुके हैं।’

‘क्या..???’

मेरे जवाब से माँ के पैरों तले जैसे ज़मीन खिसक गई थी।

‘माँ प्लीज़..’ मैंने माँ के गले लगते हुए कहा।

मेरी जिद के आगे माँ मजबूर हो गई थीं, उन्होंने कहा- ठीक है.. तुम्हारी चूत में भी लण्ड पेलवा दूँगी.. लेकिन ध्यान रहे पापा को ये सब बातें मालूम नहीं होनी चाहिए।

मैंने ख़ुशी से उछलते हुए कहा- ओके माँ.. तुम कितनी अच्छी हो।

दोस्तो.. जब मेरी माँ ने मुझसे कहा कि वे मेरी चूत में लण्ड पेलवा देंगी.. तो मैं बहुत खुश हुई कि मैंने माँ को मजबूर कर दिया था।

वैसे तो जय अंकल मुझे कई बार चोद चुके थे.. लेकिन अब मैं यह सब बिना डरे करना चाहती थी।

उसी दिन जब मैं नहाने जा रही थी तो माँ बाथरूम में आ गईं और दरवाजा बंद कर लिया।

वे बोलीं- अपने कपड़े उतारो।

मैंने माँ से कहा- माँ.. मुझे शर्म आएगी।

माँ ने मुझे डांटते हुए कहा- छिनाल कहीं की.. चूत और लण्ड का खेल देखकर पेलवाने की तुम्हारी हवस जाग उठी.. लेकिन यह नहीं जानती हो कि मर्द को क्या पसंद आता है? मर्द को चिकनी चूत चाहिए.. देखूं तुम्हारी झांटें साफ़ हैं या नहीं?

इसी के साथ माँ ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और पूरी तरह नंगी हो गईं, उनकी चूत के बाल एकदम साफ़ थे।

सच में क्या शानदार चूत थी माँ की.. मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि मैं इसी चूत के रास्ते बाहर निकली हूँ।

मैं भी फटाफट अपनी सलवार कुर्ती उतार कर नंगी हो गई। माँ ने मेरी चूत को सहलाया और बोली- आज तुम्हारे अंकल इसमें अपना लण्ड पेलकर बहुत खुश होंगे। एक बात बता दूँ.. उन्होंने मुझसे एक बार कहा था कि कोमल.. एकाध नए माल का इंतज़ाम करो.. पैसों की फ़िक्र मत करना।

माँ ने मुझे रगड़-रगड़ कर अच्छी तरह नहलाया.. मेरी चूत के बाल साफ़ किए और तब बोलीं- अब तुम्हारी चूत लण्ड लेने के लिए एकदम तैयार है।

शाम को राज अंकल आए तो मैं उनको निहारती रह गई। क्या बलिष्ठ गठा हुआ बदन पाया था अंकल ने..! मैं समझी कि माँ जय अंकल की बात कर रहीं हैं लेकिन मेरी चुदाई का प्रोग्राम राज अंकल के साथ था।

हम लोग खाना खाकर लेटने की तैयारी करने लगे। आज हम तीन लोग एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर आ गए।

माँ ने अंकल से कहा- क्यों जी.. आप किसी नए माल के बारे में कह रहे थे.. आज मैं अपनी मासूम बच्ची को आपके हवाले कर रही हूँ.. लेकिन ध्यान रखिएगा.. कि बेचारी की चूत एकदम कोरी है बहुत आराम से पेलिएगा..

‘फ़िक्र मत करो कोमल.. बस तुम देखो कैसे आज मैं तुम्हारी इस बच्ची को मासूम कच्ची कली से पूरी औरत बनाता हूँ।’

‘हम्म..’

अंकल बोले- कोमल.. तुम भी तो साथ ही रहोगी.. जब मैं इसकी चूत में अपना डंडा पेलूँगा.. तो तुम देखती रहना।

माँ ने कहा- हाँ मेरा रहना ज़रूरी है.. क्या पता तुम क्या हाल करोगे मेरी बच्ची का..

माँ ने हँसते हुए जवाब दिया।

मैं बोली- माँ मैं बच्ची नहीं हूँ.. आप ऐसे ही डर रही हो..

इस दौरान माँ ने कुर्ती और सलवार निकाल दी, मेरी चूत को सहलाकर अंकल को दिखाकर बोलीं- देखो जी कितनी चिकनी गुलाबी चूत है.. मेरी रानी बिटिया की..

मैंने अंकल के पजामे पर हाथ फ़ेरते हुए कहा- अंकल इस उम्र में भी आपका लण्ड भी कोई कम नहीं है..

माँ ने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए, अंकल भी अपने कपड़े उतार चुके थे, अब हम तीनों मादरजाद नंगे थे। अंकल मेरे होंठों को चूसते हुए एक हाथ से मेरी चूत को सहला रहे थे.. तथा दूसरे हाथ से माँ की गाण्ड सहला रहे थे।

मैं तो गर्म होने लगी.. लेकिन माँ अभी गरम नहीं हुई थीं।

माँ ने मुझसे पूछा- क्यों बेटी.. लण्ड चूसोगी?

मैंने कहा- आप लोग जैसा आदेश करें.. मैं तो अनाड़ी हूँ.. मुझे आप लोगों की निगाहबानी में ही चूत चुदवानी है।

माँ बोलीं- तब ठीक है..मैं जैसा कहती हूँ.. तुम वैसा करो।

हम तीनों ऐसी पोजीशन में हो गए कि मैं राज अंकल का लण्ड चूस रही थी। माँ मेरी चूत चाट रही थीं और अंकल माँ की चूत चाट रहे थे.. अर्थात तीनों लोगों ने एक सर्किल बना रखा था।

मैं तो माँ द्वारा चूत की चटाई से ही एक बार झड़ गई।

थोड़ी देर बाद मैंने माँ से कहा- माँ.. मेरी चूत में जल्दी लण्ड डलवा दो नहीं तो मैं पागल हो जाऊँगी।

माँ ने कहा- अच्छा.. अपनी टांगें फैलाकर पीठ के बल लेट जाओ.. मैं वैसलीन की शीशी लाती हूँ।

माँ ने मेरी चूत के अन्दर वैसलीन लगा दी और अंकल से बोलीं- मेरी रानी बिटिया की कुंवारी चूत को अपने लम्बे लण्ड से आबाद कीजिए।

माँ ने अंकल के सुपाड़े पर भी वैसलीन लगा दी। अंकल ने मेरी टांगों को फैलाकर लण्ड को मेरी प्यासी चूत के मुहाने पर रखा और मेरी माँ ने अंकल के पीछे से मेरी चूत को फैला रखा था।

अंकल ने धक्का लगाया लेकिन निशाना चूक गया।

मेरी चूत लौड़े के लिए तड़प रही थी.. कि जल्दी से उसमें लण्ड घुसे, मैं लगभग रोते हुए बोली- माँ.. पेलवा दो न.. क्यों देरी हो रही है?

माँ ने कहा- इस बार घुस जाएगा बेटी.. घबराओ मत.. मैं भी तो लगी हूँ इसी कोशिश में.. पेलिए जी मेरी बेटी को.. देखो बेचारी तड़प रही है।

जब इस बार अंकल ने अपना सुपाड़ा घुसा दिया तो मुझे लगा कि मेरी जान निकल जाएगी.. लेकिन मैंने अपने दांत भींच लिए।

‘आईईए.. माँ.. दर्द हो रहा है..’

मैंने सोचा नहीं था कि राज अंकल का लण्ड जय अंकल से मोटा और लम्बा भी है।

‘बस.. बस.. धीरे धीरे.. राज.. अभी ये कमसिन कुंवारी है..’

माँ मेरी चूत को पीछे से सहला रही थीं ताकि दर्द न हो।

अंकल ने थोड़ा और घुसाया तो मुझे लगा कि अब पूरा हो गया.. लेकिन जब मैंने अंकल से कहा- अब धक्का लगाइए.. तो उनके बोलने से पहले माँ ने बाहर निकले हुए लण्ड को नापकर कहा- बस बेटी 5 इंच लण्ड अभी बाहर है.. 3 इंच तो तुमने निगल लिया है।

यह सुनकर मेरी तो हालत खराब हो गई.. खैर अंकल ने थोड़ा और जोर लगाया.. तो दो बार में पूरा लण्ड जड़ तक घुस गया। अंकल ने स्पीड तेज़ की तो धीरे-धीरे मुझे मज़ा आने लगा।

मैं बोलने लगी ‘आह्ह्ह्ह ऊह..ह उह.. पेल दो अंकल.. फाड़ दो मेरी चूत को.. उफ़..’

थोड़ी देर के बाद ‘फच.. फच..’ की आवाज़ आने लगीं।
 


मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.. अंकल ने मेरी छोटी-छोटी कच्ची गुलाबी चूचियों के निप्पल को दबा-दबा कर लाल कर दिया था।

उधर माँ मेरी चूत को सहला रही थीं.. बीच-बीच में वह मेरी चूत और उसमें फंसे हुए लण्ड को चाटने भी लगती थीं।

माँ सिर्फ कॉलेज में ही नहीं बल्कि बिस्तर पर भी एक अच्छी टीचर थीं।

कुछ देर के बाद मुझे ऐसा लगा कि मैं आसामान में उड़ रही हूँ। अंकल ने मेरे छोटे से दुबले-पतले जिस्म को अपने कसरती शरीर में खूब जोर से भींच लिया था।

मैं अपनी गाण्ड इस क़दर उचकाने लगी कि लण्ड खूब गहराई तक घुस जाए।

अब मेरा काम-तमाम होने वाला था। मैं बड़बड़ाने लगी- अह.. मेरे राजा उन्ह.. आह औउच.. ओह.. मैं आ गई.. आह..ह ह हह ओह.. ओहोहोह..

मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.. लेकिन अंकल रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। माँ ने मुझसे पूछा- क्यों बेटी मज़ा आया? कहो तो अब मैं भी चुदवा लूँ.. तुम्हें चुदवाते देखकर मेरी चूत भी पनिया गई है।

अंकल ने अपना 8 इंच का लपलपाता हुआ लण्ड बाहर निकाल लिया। माँ को इतना जोश चढ़ चुका था कि अंकल ज्यों ही पीठ के बल लेटे, माँ ने उनके खड़े लण्ड को अपनी चूत में फंसा दिया और धक्का मारने लगीं।

मैं माँ के पीछे जाकर उनकी चिरी हुई चूत में अंकल के फंसे हुए लण्ड को देखने लगी।

क्या गज़ब का नजारा था। मैं चूत लण्ड के संधिस्थल को चाटने लगी। मेरी चूत फिर से पनियाने लगी थी। माँ ने उछल-उछल कर खूब चुदवाया। अब माँ पीठ के बल लेट गईं और अंकल ने सामने से अपना लण्ड घुसा दिया और जोर-जोर से चोदने लगे।

थोड़ी देर बाद उनका पानी निकल गया। उस रात को अंकल ने मुझे तीन बार और माँ ने जबरन दो बार चूत चुदवाई।

रात के तीन बजे हम लोग सो गए।

फिर धीरे-धीरे हम चारों एक साथ इस खेल को खेलने लगे थे। माँ के कहने पर राज ने इस गैंग-बैंग में अपनी पत्नी आयशा को भी शामिल कर लिया था, वो आयशा को अपने साथ हमारे घर लाते और तीन गर्म बदनों के साथ खेलते।

समाप्त
 
Hindi sexi stori-माँ के साथ भाभी फ्री

मित्रो मेरे घर में मेरी सौतेली माँ.. भाभी और भैया रहते थे। मेरे पिताजी ने कम उम्र की लड़की से शादी कर के उन्हें मेरी माँ बना दिया था।

मेरी सौतेली माँ की उम्र 35 साल है। मेरे पिताजी और भाई एक दिन शहर जाते हुए एक्सिडेंट में मारे गए थे। भाई की शादी को सिर्फ 3 महीने ही हुए थे। तब से घर खेत के काम माँ ही देखती हैं और घर के सभी काम भाभी देखती हैं।

मैं माँ और भाभी का लाड़ला हूँ। बचपन से मैं माँ के साथ ही खेतों में लेट्रिंग के लिए जाता था। हमारे गाँव में सभी बाहर ही खेतों में लेट्रिंग जाते थे। हमारे घर के पीछे ही कुछ दूरी पर खेत हैं.. वहीं सभी गाँव की औरतें भी लेट्रिंग जाती थीं।

लेट्रिंग के लिए माँ मुझे अपने पास ही बिठाती थीं, हमेशा अपनी माँ की चूत गाण्ड रोज देखता था। लेट्रिंग के बाद माँ मुझे नहलाया करती थीं। नहाने से पहले.. माँ मेरे लण्ड की तेल से मालिश करती थीं।

भाभी के आने के बाद कई बार मैं भाभी के साथ भी जाता था। कई बार भाभी ने भी मेरे लण्ड की मालिश की है। भाभी भी मुझे अपने पास ही लेट्रिंग के लिए बिठाती थीं।

अब जब मैं बड़ा होने लगा.. तो खुद अकेला ही लेट्रिंग जाता था और नहाता भी अकेला ही था।

अब मैं एक गबरू जवान हो गया था.. और रोज कसरत करता था। मेरी मस्त बॉडी बन गई थी। रोज सुबह जब नहाने जाता था.. तब मेरे लण्ड की मालिश के लिए भाभी मुझे रोज हाथ में तेल जरूर देती थीं.. कभी माँ भी देती थीं।

एक दिन माँ की तबियत खराब हो गई तो माँ जल्दी सो गईं। मैं अब लेट्रिंग के लिए जाने वाला था.. हाथ में पानी का डिब्बा उठाया.. तो भाभी हँसते हुए बोलीं- कहाँ जा रहे हो देवर जी?

मैं- भाभी अभी आता हूँ हग कर..

भाभी- पहले तो मेरे साथ हगते थे.. और अब अकेले-अकेले हग कर आते हो.. क्या आजकल किसी गाँव की दूसरी औरतों के साथ हगते हो?

इतना कह कर वे जोर-जोर से हँसने लगीं।

मैं शरमाते हुए बोला- भाभी आपने ही तो मेरे हगना बंद कर दिया.. और अब ऐसा कहती हो?

भाभी- कोई बात नहीं.. बंद कर दिया तो क्या हुआ.. अब फिर चालू कर देते हैं।

मैं- ठीक है.. चलो चलते हैं।

भाभी और मैं लेट्रिंग के लिए हमारे घर के पीछे वाले खेतों में निकल पड़े। रास्ते में चलते-चलते मैं भाभी के पीछे चलने लगा, भाभी पीछे से मस्त गाण्ड मटका मटका कर चल रही थीं।

कुछ देर में हम दोनों खेत में काफी अन्दर आ गए थे। अच्छी साफ़ जगह देखकर हम दोनों बैठने लगे। भाभी ने अपनी साड़ी ऊपर की और अपनी चड्डी नीचे कर ली और मेरे सामने लेट्रिंग बैठ गईं।

मैं भी पैन्ट और अन्डरवियर नीचे करके लेट्रिंग बैठ गया।

भाभी ने मेरे लण्ड को घूरते हुए कहा- अरे वाह देवर जी.. अब तुम्हारी नुन्नी तो लण्ड बन गई है।

मैं- हाँ.. ये तो माँ और आप की मेहरबानी है।

हम दोनों हँसने लगे।

भाभी- पर इतने बाल हैं लण्ड पर.. कभी निकालते नहीं हो क्या..?

मैं- नहीं इनके बारे में ख्याल ही नहीं आया… और आपने भी बाल निकालना कहाँ सिखाया।

मैं भी भाभी की चूत को गौर से देख रहा था.. और भाभी भी ये देख रही थीं कि मैं उनकी चूत देख रहा हूँ।

भाभी ने हँसते हुए कहा- क्यों देवर जी किसी की चूत नहीं देखी क्या.. जो मेरी चूत इतनी गौर से देख रहे हो।

मैं- देखी तो बहुत हैं और पेली भी हैं भाभी।

भाभी- क्या? कब.. किसकी देख ली और पेल ली..

उन्होंने थोड़ा गुस्सा होते हुए और अचम्भे से पूछा।

मैं- क्या भाभी.. यहाँ तो रोज ही लेट्रिंग आता हूँ.. और गाँव की सारी औरतें भी लेट्रिंग के लिए यहीं आती हैं। अब तक गांव की सारी चूतें देख चुका हूँ। गाँव की हर लड़की.. भाभी और बुढ़ियों तक की देख ली है.. और तो और गाँव की नई-नई दुल्हनों की भी चूतें देखी हैं।

भाभी- अरे वाह.. मेरे शेर.. मैं तो तुम्हें बच्चा समझ रही थी और तुम तो काफी आगे निकले.. तो सिर्फ देखी ही हैं या कुछ किया भी है.. या यूँ ही कह रहे हो कि पेली हैं।

मैं- हाँ भाभी रोज रात में गाँव की जिस भी औरत की चूत में खुजली होती है.. तो वो यहीं आ जाती है और लेट्रिंग के बाद मैं उनकी मस्त पेलता हूँ।

भाभी- क्या रवि.. गांव की इतनी औरतों को चोदा.. और घर की चूतों का ख्याल ही नहीं रखा तुमने?

मैं- मतलब.. भाभी मैं समझा नहीं कुछ?

भाभी- ज्यादा भोले मत बनो। मैंने और सासू माँ ने इतनी मालिश की तुम्हारी.. और तुम हो कि कभी हमारे साथ कुछ किया ही नहीं..

मैं- भाभी आपको और माँ को कैसे चोद सकता हूँ मैं?

भाभी- वाह.. रोज लण्ड की मालिश करवा सकते हो.. हमारे साथ नहा सकते हो.. हग सकते हो.. तो फिर चोद क्यों नहीं सकते..?

मैं- ठीक है आपको तो चोद लूँगा.. पर भाभी.. माँ को कैसे चोदूँ?

भाभी- मैं सब बता दूँगी.. चलो अभी घर चलते हैं.. आज से ही शुरू करते हैं और माँ की चिंता मत करो.. वो खुद तुम्हारे लण्ड के इंतजार में हैं। इसी लिए तो बेचारी वे तुम्हारे लण्ड की मालिश रोज करती थीं।

मैं- क्या सच में?

भाभी- हाँ..

मैं- ये आपको कैसे पता..? और माँ ने भी मुझे कभी नहीं कहा.. वे तो रोज ही लण्ड हाथ में लेती थीं.. जब इतनी बात थी तो आप दोनों ने मेरे लण्ड को चूत में क्यों नहीं लिया?

भाभी- तब तुम बच्चे थे.. अब बड़े जवान और बड़े लण्ड वाले हो.. एक दिन मैंने तुम्हारी माँ को चूत में गाजर डालते देखा था.. तो उन्होंने मुझे देख लिया था। मुझे देखते ही वो थोड़ी डर गई थीं.. और मुझे बुला कर उन्होंने कहा भी था कि किसी को मत बताना। मैंने भी कहा कि इसमें किसी से कहने की क्या बात है। मैं भी तो रोज उंगली या गाजर-मूली डाल लेती हूँ। तब तुम्हारी माँ बोलीं कि अब समय आ गया है कि रवि का लण्ड लिया जाए और जीवन का सूनापन दूर किया जाए।

मैं- अगर ऐसी बात है.. तो मैं अब आप दोनों को कभी प्यासा नहीं रहने दूँगा.. रोज चोदूँगा। आज से गाँव की औरतों की चूत मारना बंद समझो..

भाभी- हाँ जरूर रोज चोदना हम दोनों सास-बहू को.. और हाँ गाँव की चूतें जो तुमने अपने बड़े लण्ड से भोसड़ा बना दी हैं.. उन्हें भी जरूर चोदते रहना। उन्हें क्यों नाराज करते हो.. उनकी भी प्यास मैं समझ सकती हूँ।

मैं- ठीक है भाभी.. जैसा आप कहें।

अब मेरा लण्ड हगते हुए खड़ा हो गया था.. भाभी की भी नजर उस पर पड़ी।

भाभी- अरे ये क्या.. तेरा लण्ड तो अभी से खड़ा हो गया.. शायद रोज इसी समय चुदाई करते हो.. तो इसी कारण खड़ा हो गया होगा।

मैं और भाभी हँसने लगे।

अब हमने अपनी-अपनी गाण्ड धोई.. और घर की तरफ निकलने लगे।

घर जाते ही भाभी ने देखा कि माँ सो रही थीं। भाभी ने घर का दरवाजा ठीक से बंद कर दिया और मुझसे चिपक गईं, भाभी मेरे होंठ चूसने लगीं, मैं भी भाभी के होंठ चूसने लगा।

क्या बताऊँ दोस्तों.. भाभी के होंठ इतने नर्म थे.. जैसे कोई गुलाब के फूल की पंखुरियाँ हों।

हमने लगातार 10 मिनट तक होंठ चूसे।

अब मैं भाभी के बोबे दबाने लगा। उनके बोबे काफी बड़े और सख्त थे.. दबाने में इतना मजा आ रहा था कि क्या बताऊँ। हम दो जिस्म एक जान बन गए थे। इसी में 30 मिनट निकल गए।

मैंने झट से भाभी की साड़ी ऊपर की और उनकी चड्डी निकाल दी, भाभी की झाँटों वाली चूत चाटने लगा।

हम दोनों कुछ देर पहले तो हग कर आए थे.. तो भाभी ने बिना हाथ-पैर धोए और चूत धोए चूमना चालू कर दिया।

क्या मस्त मादक गंध थी भाभी की चूत की.. कभी उनके मूत की गंध.. तो कभी उनकी मादक और प्यासी चूत की गंध..

मैंने चूत को हाथों से सहलाया और चूत चौड़ी करके चाटने लगा। कभी भाभी के मस्त काले हल्के भूरे रंग के दाने को चाटता.. तो कभी पूरी जीभ चूत के अन्दर डालने लगता।

भाभी मेरा सर अपनी चूत पर दबाने लगीं और जोर-जोर से चिल्लाने लगीं- चाट रवि.. चाट.. अपनी इस भाभी की प्यासी चूत को आज खा जा.. आह्ह.. चाट इसे.. आहह..उह्ह..

अब भाभी की चूत से मस्त खारा और चिकना पानी आने लगा। मैं पूरा पानी चाटने लगा और पीने लगा।

पानी छोड़ने के बाद भाभी अब थोड़ी शांत हो गई थीं।

अब भाभी उठीं और मेरे लण्ड को मेरी पैन्ट से निकालने लगीं।

लण्ड निकालने में दिक्कत आ रही थी क्योंकि लण्ड फूल कर काफी कड़ा और बड़ा हो गया था।

भाभी ने मेरी पूरी पैन्ट निकाल दी, अब मैं नीचे से पूरा नंगा हो चुका था, भाभी ने लण्ड हाथ में लिया और बोलीं- बापरे.. ये तो पहले से भी ज्यादा बड़ा दिख रहा है.. इतना लंबा और बड़ा हो गया है कि हाथ में भी नहीं आ रहा है।

मैं बोला- ये तो आप दोनों की मालिश की देन है और आज आपको चोदने की उत्सुकता भी बहुत हो रही है.. इसी कारण इतना फूल गया है।

भाभी ने लण्ड को सहलाना चालू किया और अब मेरे लण्ड को चूसने लगीं।

मैंने भी लेट्रिंग के बाद घर आकर लण्ड और हाथ-पैर नहीं धोए थे.. लण्ड पर लगी मूत की कुछ बूँदें भी भाभी चाट रही थीं।

मेरा गाँव का देशी लण्ड भाभी के मुँह में पूरा जा ही नहीं रहा था.. काफी मोटा था। भाभी सिर्फ मेरे लण्ड का टोपा ही चूस पा रही थीं।

मैं मादक आवाज में बोला- भाभी वाह्ह.. क्या मस्त लौड़ा चूसती हो आप.. अआहहह.. उम्मम.. ओहोहोहो.. हईईईईई..

भाभी मेरे लण्ड को 10 मिनट तक चूसती रहीं।

‘भाभी बस करो.. नहीं तो मुँह में ही झड़ जाऊँगा।’

उन्होंने मेरी बात को अनसुना कर दिया और लण्ड चूसती रहीं।

मैं समझ गया कि भाभी को मेरा वीर्य पीना है।

अब कुछ ही देर में मैंने मेरे लंड का पानी भाभी के मुँह में छोड़ दिया।

भाभी भी मस्त चटकारे लेते हुए पूरा पानी पी गईं.. एक बून्द भी नहीं बाकी रखी।

माल निकल जाने के बाद भी भाभी मेरा लौड़ा चूसती रही थीं.. जिस कारण मेरा लण्ड खड़ा ही था।

भाभी ने तुरंत बिस्तर पर अपनी टाँगें चौड़ी कर दीं.. मैंने भी समय ना गंवाते अपना लण्ड उनकी चूत में रख कर धीरे-धीरे घुसाने लगा। मेरा लण्ड काफी मोटा था तो चूत में घुसने में दिक्कत आ रही थी।

मैं सम्भलते हुए धीरे से डालने लगा, अब तक लण्ड 2 इंच तक जा चुका था।

मैंने धीरे से झटका मारा.. तो भाभी जोर से चिल्ला पड़ीं- रवि आराम से.. बहुत समय से इस प्यासी चूत में लण्ड अन्दर नहीं गया..

मैंने उनकी इस बात पर ध्यान नहीं दिया और एक जोर का झटका मार दिया। अब मेरा पूरा लण्ड चूत में घुस गया था।

भाभी दर्द से छटपटाने लगीं और उनकी आँखों से आंसू आने लगे।

कुछ देर ठहरने के बाद मैं चूत को पेलने लगा, भाभी को मजा मिलना आरम्भ हो गया- फाड़ दे रवि.. अपनी भाभी की चूत को आह.. आह.. उफ़..

भाभी को मैंने लगातार काफी देर तक चोदा.. इस चुदाई में भाभी एक दो झड़ चुकी थीं।

मैंने अपना सारा पानी चूत में नहीं डाला.. लण्ड निकाल कर भाभी के मुँह में डाल दिया।

भाभी के मुँह में 7-8 झटके मारते ही मेरा पानी उनके मुँह में चला गया।

भाभी पूरा पानी पी गईं।

रात भर भाभी की चूत मैंने 4 बार मारी, हम दोनों सुबह 4 बजे सोए..

पर रोज की तरह सुबह जल्दी उठ भी गए।

सुबह माँ भी जल्दी उठीं।

अब माँ की तबियत कुछ ठीक लग रही थी, मैं सुबह फिर लेट्रिंग गया.. पर आज मैं अकेला गया था।

खेत में अन्दर जाते ही मैं लेट्रिंग बैठ गया। उसी समय गाँव की एक लड़की.. जिसकी कुछ दिन पहले शादी हुई थी और आज ही अपने मायके वापस आई थी। मैं इसकी चूत पहले भी मार चुका था.. वो आकर मेरे बाजू में लेट्रिंग बैठ गई।

मैं- अरे सरिता.. कैसी हो.. कब आई ससुराल से?

सरिता भी हगते हुए बोली- मजे में हूँ.. तुम बताओ कैसे चल रहा है.. चुदाई का मजा..

मैंने हगते हुए उसकी चूत देखी और कहा- हाँ.. अब तो गाँव की बहुत चूतों को चोद चुका हूँ और ये क्या.. सरिता शादी के बाद भी तुम्हारी चूत तो पहले जैसे ही है।

सरिता- क्या करूँ.. मेरे ‘वो’ कुछ खास चुदाई नहीं कर पाते हैं। जब से तुमसे चुदी हूँ.. पति के लण्ड में मजा ही नहीं आता.. अब यहाँ आई हूँ.. तो तुमसे चुदवा लेती हूँ।

मैं- हाँ ठीक है.. पर अभी नहीं.. कभी और अभी थोड़ा बिजी हूँ।

सरिता ने हँसते हुए कहा- हाँ.. अब तो घर की चूतों को फाड़ने में लगे होगे।

मैंने चौंकते हुए पूछा- तुम्हें कैसे पता?

सरिता- कल रात तुम्हें डिब्बा लेकर लेट्रिंग जाते देख कर मैं भी तुम्हारे पीछे आई थी। मैंने सोचा था कि चलो आज फिर हगते हुए रवि के बड़े लण्ड से चुदा लेती हूँ.. पर साथ में तुम्हारी भाभी थीं.. इसी लिए कल छुप कर लेट्रिंग बैठी और तुम दोनों की सारी बातें सुन ली थीं।

मैं- क्या करूँ सरिता.. भाभी ठीक ही तो कह रही थीं.. भैया की और पिताजी की मौत के बाद से उन्हें कोई लण्ड ही नहीं मिला.. कैसे रहती होगीं बिना लण्ड के.. आखिर में उन्हें खुश रखना भी तो मेरी जिम्मेदारी ही है।

सरिता- हाँ तुम सही कह रहे हो.. तुम जरूर खुश रखना उन्हें.. और खूब चोद-चोद कर खुश रखना। अभी के लिए मैं बिना तुम्हारा लण्ड लिए चली जाती हूँ.. पर अगली बार 2-3 बार जरूर चोद देना।

मैं- बस इतना ही.. तू कहे तो तुझे मेरे बच्चे की माँ बना दूँ?

सरिता- सच?

मैं- हाँ.. बोल लेगी मेरा बच्चा अपनी कोख में?

सरिता- नेकी और पूछ-पूछ?

हम दोनों हँसने लगे।

अब हमने अपने चूतड़ धोए और घर निकल पड़े।

घर आते ही मैं नहाने घुस गया.. आज भाभी की जगह माँ ने लण्ड की मालिश के लिए तेल दिया।

माँ हँसते हुए बोलीं- ले बेटा.. तेल.. मालिश के लिए.. ठीक से लगाना.. पहले तो तू हमारे हाथों से लगवाता था.. पर अब खुद ही लगाता है.. माँ और भाभी से कैसी शर्म..

माँ के ऐसा कहने पर मैं थोड़ा हड़बड़ा गया.. पर मन में आया कि ऐसे भी कल भाभी को चोदा है और आगे माँ को भी तो चोदना ही है.. क्यों न आज लण्ड पर तेल लगवाते हुए कुछ प्रयास किया जाए।

‘नहीं माँ.. शर्म कैसी.. तेल से मालिश की वजह से शायद तुम्हारे हाथों में दर्द होता होगा.. इसी लिए मैं खुद ही लगा लेता हूँ।’

माँ की आँखों में चमक थी और मादक मुस्कान के साथ वे बोलीं- भला मेरे बेटे के लण्ड की मालिश से मेरा हाथ क्यों दुखेगा.. लण्ड की मालिश से आगे मेरे बेटे की पत्नी काफी खुश रहेगी.. इसी लिए मैं पहले से मालिश करते आ रही हूँ।

मैंने उनके मुँह से लण्ड शब्द सुना तो मैं उनकी चुदास को समझ गया और मैंने कहा- हाँ ठीक है न माँ.. आज तुम्हीं मेरे लण्ड की मालिश कर दो।

हम दोनों घर के बाथरूम में आ गए, माँ ने गर्म पानी की बाल्टी भरी और मुझे मेरे कपड़े निकालने के लिए कहा।

मैं कपड़े निकाल ही रहा था कि माँ ने मुझसे पहले अपने कपड़े निकाल दिए, अब माँ सिर्फ सफेद रंग की चड्डी में थीं।

माँ के बड़े तरबूज के जैसे बड़े-बड़े बोबे मेरे सामने खुले थे। माँ की लंबी-लंबी खुली नंगी टाँगें मेरे सामने थीं। सफेद पैन्टी में माँ किसी हूर जैसी लग रही थीं।

मेरा लण्ड तुरंत खड़ा हो गया।

माँ मेरे लण्ड को देखते ही बोलीं- बाप रे, बेटा रवि इतना बड़ा लण्ड हो गया तेरा.. मेरी मेहनत काफी रंग लाई है।

मैं- हाँ माँ.. ये तुम्हारी और भाभी की मेहनत का नतीजा है।

अब माँ ने मेरे लण्ड पर तेल लगाया और मालिश करने लगीं। माँ मालिश करते करते समय अपने बड़े बोबे मेरी टाँगों को लगा रही थीं.. आज काफी समय बाद माँ ने मेरे लण्ड को हाथ में लिया था।

अब मैं माँ की मालिश से मदहोश हो रहा था। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं। मेरे मुँह से ‘अअहह..आह.. आह्ह.. अ..अहहा.. हा..’ की आवाजें आ रही थीं।

अचानक माँ ने मेरा लण्ड मुँह में ले लिया.. मैंने झट से आँखें खोलीं।

मैं- आह्ह.. ये क्या कर रही हो।

माँ हँसते हुए बोलीं- नई तरह की मालिश.. क्योंकि बेटा अब तू बड़ा हो गया है न.. और वैसे भी कल रात में तेरी भाभी ने काफी जोरों से मालिश की थी। तेरी और तेरी भाभी की आवाजें कल रात को जब में पानी पीने उठी थी.. तब सुनी थी।

मैं- क्या सच में माँ.. अच्छा हुआ तुमने कल हमारी चुदाई की आवाज सुन ली.. तो फिर अब तुम भी भाभी के जैसी मालिश के लिए तैयार हो या नहीं?

माँ- मैं तो सालों से इसी दिन का इन्तजार कर रही हूँ बेटा।

माँ के ऐसे कहते ही मैंने माँ को खड़ा किया और चूमने लगा।

माँ के होंठ क्या मस्त नरम और मादक थे.. हर चुम्बन पर माँ के होंठों से रस टपक रहा था। मैं अब चूमते हुए माँ के बोबे दबाने लगा.. माँ के बड़े बोबे मेरे हाथों में समा नहीं रहे थे। बोबे मस्त मुलायम और नरम थे.. दबाने में बहुत मजा आ रहा था।

कुछ ही देर बाद मैं नीचे बैठ कर माँ की कच्छी हटा कर मां की चूत चाटने लगा था। उनकी मस्त बिना बालों की चिकनी बुर.. जो पानी छोड़ रही थी.. मस्त मादक गंध के साथ बहुत पानी छोड़ रही थी।

माँ अब मादक सीत्कार निकाल रही थीं ‘म्मम्म.. ऊऊऊ ऊऊह उम्म म्म.. आआअ.. ह्ह्ह्ह्ह.. ईईई ईईई.. चाट बेटा.. चाट.. बहुत सताया है इस बुर ने.. आज पूरी चूत का पानी खाली कर दे.. चाट जोर से चाट.. आआअ.. उम्म्म्म.. ईई..’

अब मैंने चाटना बंद किया और वहीं खड़े होकर माँ की एक टांग ऊपर करके अपना लण्ड माँ की चूत पर सैट किया और धीरे से लण्ड डालने लगा।

माँ की बुर अब भी काफी टाइट थी.. क्योंकि माँ ने पिताजी के मरने के बाद लोकलाज के चलते किसी से चुदाई नहीं करवाई थी।

मैंने एक झटका तेज मारा और लण्ड आधा अन्दर डाल दिया। माँ दर्द से कराहते हुए बोलीं- ओह्ह रवि मार डालेगा क्या.. आराम से चोद न..

मैंने सुनी अनसुनी कर दी और एक और झटका मार दिया। अब मेरा पूरा लण्ड माँ की चूत में था।

माँ और जोर से चिल्लाईं। अब मैं माँ के होंठ चूमने लगा और जब तक माँ का दर्द कम नहीं हुआ.. तब तक चूमता रहा और बोबे दबाते रहा।

अब माँ ने खुद एक झटका नीचे से मारा.. और मैं समझ गया कि अब माँ झटके लेने को तैयार हैं।

मैंने झटके लगाना चालू किया.. अब माँ मेरे झटकों का मजा ले रही थीं।

माँ बोलीं- फाड़ दे रवि.. आज मेरी बुर को.. फाड़ दे.. चोद दे अपनी माँ को.. और जोर से चोद..

हमारी चुदाई लम्बी चली.. मैंने मेरा सारा पानी माँ की प्यासी चूत में डाल दिया।

मैं हाँफते हुए माँ से अलग हुआ.. तो देखा कि भाभी बाथरूम के दरवाजे पर खड़ी होकर अपनी चूत साड़ी के ऊपर से मसल रही थीं और हमारी चुदाई देख रही थीं।

माँ.. मैं और भाभी एक-दूसरे को देख कर हँसने लगे।

अब मैं रोज मेरी माँ और भाभी को पेलता हूँ और कभी-कभी लेट्रिंग जाने पर गाँव की बुरें भी चोद लेता हूँ।
 
मेरी माँ और हमारे मकान मालिक

प्यारे साथियो आपके लिए एक अंतरजातीय सेक्स कहानी लाया हूँ . भाइयो मेरा मकसद सिर्फ़ मनोरंजन करना और करवाना है किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नही आशा करता हूँ आप इस कहानी को सिर्फ़ मनोरंजन की दृष्ट से ही देखेंगे . ये सच्ची घटना है,मेरी माँ और हमारे मकान मालिक, राज के बीच हुए सेक्स की. मेरा नाम अनवर है. मैं पहले अपने माँ, और बाप के साथ कोलकाता में रहता था. मेरा बाप एक राजनैतिक पार्टी का कार्यकर्ता था, और माँ स्टेट बॅंक ऑफ इंडिया में काम करती थी. मेरी माँ एक बेहद खूबसूरत बंगाली औरत थी, उसका कद लगभग 5’5” था, फिगर 37द-31-38 थी. उसके लंबे बाल थे जो उसकी कमर तक पहुँचते थे, वो गोरे गदराए बदन, सुडोल बाहों और वक्ष की मालकिन थी. सेक्स में मेरी रूचि तब हुई जब मैं 11 साल का था. स्कूल में दोस्त लोग सेक्स की बातें करते और मस्तराम जैसी किताबें पढ़ते. कुछ दोस्त अपने माँ-बाप के सेक्स की बातें करते, मैं भी अपने माँ-बाप के सेक्स देखने की कोशिश करता, पर मेरे माँ-बाप के बीच सेक्स बहुत ही कम होता था. कभी कभी महीने में एक दो बार वो लोग सेक्स करते, उसमें भी उनका सेक्स कभी 5-7 मिनिट से ज़्यादा नही चलता था. मेरा एक दोस्त था विनय, वो अक्सर अपने बाप धरम और उसकी सेक्रेटरी नजीबा के सेक्स के किस्से सुनाता. मेरी भी बहुत इच्छा होती अपनी माँ को सेक्स करते देखने की. पर मेरे बाप को सेक्स में कोई रूचि नहीं थी, बात तब की हैं जब में 12 साल का था, माँ की उम्र तब 39 साल थी. पार्टी के चक्कर में मेरे बाप का एक लोकल नेता से झगड़ा हो गया. वो नेता वेस्ट बंगाल कमिटी का मेंबर था, और उसकी पहुँच बहुत उपर तक थी. बदला लेने के लिए उसने माँ का ट्रान्स्फर मुर्शीदाबाद के डोंकल इलाक़े में करा दिया. अब माँ के पास और कोई चारा नहीं था, वैसे भी घर उसी की सेलरी से चलता था, इसलिए वो नौकरी भी नहीं छोड़ सकती थी. बाप ने कोशिश की ट्रान्स्फर रुकवाने की, पर कुछ ना हुआ. फिर उन्होने फ़ैसला किया मैं और मेरी माँ डोंकल चले जाएँगे, क्यूंकी यही एक रास्ता बचा था. डोंकल बांग्लादेश की सीमा से बस 5 किमी दूर था, ये पूरा मोमडन इलाक़ा था, यहाँ की 95% जनसंख्या हिंदू थी, 5% हिंदू थे, जो की सब दलित थे यहाँ माहौल बहुत कन्सर्वेटिव था. कोलकाता में तो माँ स्लीव्ले ब्लाउस वाली ट्रॅन्स्परेंट साड़ियाँ पहनती थी. यहाँ वो साड़ियाँ नही पहन सकती थी, ऐसे माहौल में साड़ी पहनती तो पूरा बाज़ार पागल हो जाता. इसलिए माँ अब सलवार कमीज़ पहनने लगी, पर उसके टाइट सलवार कमीज़ में भी उसके गदराए बदन को देख के लोग उसको घूरते थे. यहाँ घर ढूँढने में भी दिक्कत थी, माँ के बॅंक मॅनेजर ने बॅंक के पास ही अज़ीम गंज इलाक़े में एक घर ढूँढ दिया. घर का मालिक एक पहलवान था, उसकी डोंकल में बहुत बड़ी मिठाई की दुकान थी, सभी होटेलों में उसी की दुकान से मिठाई जाता था. उसकी दुकान भी घर के पास ही थी. उसका नाम राज था, वो एकदम जैसा दिखता था, उसका कद 6 फुट, बदन हटटा-कॅटा, चौड़ी छाती, थोड़ा काला रंग था. उसने मूछें नहीं रखी थीं, पर वो लंबी दाढ़ी का मालिक था. वो हमेशा पठानी कुर्ता पाजामा या कुर्ता लुंगी पहनता था. कभी कभी सर पे टोपी भी पहन लेता था. मिठाई की दुकान चलाने के साथ साथ वो पहलवानी भी करता था, और अखाड़े में कुश्ती करता था, इसलिए वो सांड जैसा दिखता था. उसका घर काफ़ी बड़ा था, नीचे वो खुद रहता था, उपर का फ्लोर हमें किराए पर दे दिया. उसने शादी नहीं की थी, उसकी उम्र लगभग 42 साल की थी. वो लोकल मुनिसिपल काउन्सिल का काउन्सिलर भी था, इसलिए थोड़ी गुंडागर्दी भी करता था, मैने कई बार उसे फोन पे गाली गलोच करते सुना था, पर माँ और मेरे साथ बहुत प्यार से बात करता था. मुझे खिलोने या चॉक्लेट देता, माँ को हसाने की कोशिश करता. इसका एक कारण था, मैने देखा वो माँ को बहुत अजीब नज़र से घूरता था, माँ के बदन और उसकी मटकती गाँड को निहारता. वो उसको उसी नज़र से देखता जिस नज़र से एक ठरकी आदमी एक खूबसूरत औरत को देखता है. शायद माँ को भी ये बात पता थी, इसलिए वो उससे ज़्यादा बात नहीं करती थी, हालाँकि वो कभी कभी अपनी बातों से माँ को हंसा देता था. उसे शायरी भी आती थी, इसलिए वो उसको गालिब के शेर सुनाता. धीरे-धीरे मैने देखा माँ की झिझक कम होने लगी थी, वो भी अब उसे खुल के बात करती. बातों बातों में कभी कभी राज माँ के बदन को छू देता. अब तो वो कभी कभी हमारे साथ ही रात का खाना ख़ाता. एक महीने के बाद सब नॉर्मल सा लगने लगा था. जो डर था की हम एक इलाक़े में जा रहे हैं वो कम हो गया था. माँ अब राज के साथ घुल मिल गयी थी, मुझे भी वो अच्छा लगने लगा था. तकरीबन एक महीने बाद की बात है, रविवार का दिन था. मैं उपर अपने कमरे में बैठ के होमवर्क कर रहा था. मैने देखा माँ मेरे कमरे के बाहर खड़ी छुप के नीचे आँगन की तरफ देख रही थी. काफ़ी देर तक नीचे देखने के बाद वो अंदर आ गयी. मैं बाहर गया और आँगन की तरफ़ देखा, वहाँ डंब-बेल और कुछ फिज़िकल एक्सर्साइज़ का सामान पड़ा था. मैं समझ नहीं पाया माँ क्या देख रही थी. जैसे ही मैं अंदर आने लगा, नीचे राज आँगन में आया. वो केवल एक छोटे से लंगोट में था, उसका पूरा बदन पसीने से भीगा हुआ था. क्या बदन था उसका, एकदम डब्ल्यूडब्ल्यू एफ के पहलवानों जैसा, पर उसके बाल बहुत थे. पूरा बदन और पीठ बालों से भरी हुई थी. मुझे समझने में देर ना लगी, माँ राज को कसरत करते हुए देख रही थी. ऐसे मर्दाना बदन को देख के कोई भी औरत गर्म हो जाए. मैने सोचा माँ राज के पसीने से भरे मर्दाना जिस्म को देख रही थी. एक महीने से वो अपने पति से दूर थी. वैसे भी उसका पति सेक्स में कम ही रूचि रखता था, उसकी शारीरिक ज़रूरतें पूरी नहीं हो पा रहीं थी. वो तो बस ऐसे ही एक नंगे पहलवान को देख के नयनसुख प्राप्त कर रही थी, और अपने अंदर की आग को तृप्त कर रही थी. मुझे भी अजीब सी उत्तेजना हुई, मेरी माँ एक ग़ैर मर्द की तरफ़ आकर्षित थी, क्या वो इससे ज़्यादा कुछ करेगी, या बस ऐसे ही राज को नंगा देख के अपनी आप को शांत करेगी? अगले ही दिन एक और घटना हुई. मैं उपर अपने कमरे में बैठ के होमवर्क कर रहा था. तभी मुझे माँ और राज की हँसने की आवाज़ सुनाई पड़ी. मैं बाहर आ के देखने लगा. वो दोनों नीचे आँगन में खड़े थे. माँ ने काले रंग का टाइट सलवार सूट पहना था, वो एकदम बला सी सुंदर लग रही थी. राज एक कुर्ते और लुँगी में था. वो उसको शायरी सुना रहा था, और उसके खूबसूरत गोरे बदन की तारीफ कर रहा था. माँ भी मुस्कुरा रही थी. तभी अचानक राज ने माँ को अपनी बाहों में भर लिया, और उसे चूमने की कोशिश करने लगा. माँ एकदम से चौंक गयी, उसने अपने आप को राज की बाहों से छुड़ाने की कोशिश की और अपना मुँह फेर लिया ताकि राज उसको किस ना कर सके.

वो बोली, “क्या कर रहें हैं आप?”

राज बोला, “माँ जी आपको प्यार करने की कोशिश कर रहा हूँ.”

माँ, “छोड़िए मुझे प्लीज़, मैं शादीशुदा हूँ, ऐसी हरकत मत कीजिए मेरे साथ.”

राज, “आप भी तो मुझे चाहती हो!”

माँ, “क्या कह रहे हैं आप?”

राज, “कल आप मुझे छुप-छुप के देख रही थीं, सच बताइए!”

माँ के पास कोई जवाब नहीं था, राज ने उसकी चोरी पकड़ ली थी.

राज, “देखिए मुझे आप बहुत अच्छी लगती हैं, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ. आप मुझसे प्यार नहीं करती?”

माँ, “पर मैं शादीशुदा हूँ, मेरा 12 साल का बच्चा है, मैं आपके साथ रिश्ता नहीं बना सकती.”

मैने सोचा माँ ने साफ मना नहीं किया बल्कि अपने शादीशुदा होने का बहाना लगाया.

राज, “अगर मैं आपको पसंद हूँ तो इसमें बुरा क्या है? आपको किसी से डर लगता है?”

माँ, “नही ये रिश्ता नहीं बन सकता, मैं एक हिंदू औरत हूँ, और आप हिंदू, ये रिश्ता समाज को मंज़ूर नहीं होगा.”

राज, “तो हम किसी को पता नहीं चलने देंगे. आपकी बातों से मुझे लगा था आपके और आपके पति में प्यार नहीं है, मैं आपको वो प्यार दे सकता हूँ जो आप ढूँढ रही हो. मान जाइए माँ जी प्लीज़, मैं आपको बहुत प्यार करूँगा, मुझसे अब आपसे दूर नही रहा जाता.”

माँ, “नहीं ये ग़लत है.”

राज, “कुछ ग़लत नहीं है, आपको प्यार का पूरा हक़ है, अगर आपका पति अपना फ़र्ज़ नही निभा रहा तो आपको हक़ है की आप बाहर से वो प्यार पायें जो हर औरत की चाहत होती है.”

माँ चुप रही. राज ने अभी भी माँ को अपनी मज़बूत बाहों में जकड़ा हुआ था. मुझे बहुत उत्तेजना हो रही थी, मेरी माँ को एक लंबी दाढ़ी और मूछों वाले मर्द ने अपनी मज़बूत बाहों में जकड़ा हुआ था, और वो बेबस छटपटा रही थी.

राज बोला, “मैं चाहता तो आपके साथ ज़बरदस्ती भी कर सकता था, पर उससे आपको दुख होता. और वैसे भी मर्ज़ी में जो मज़ा है वो ज़बरदस्ती में नहीं. मैं चाहता हूँ कि आप अपनी मर्ज़ी से मेरे साथ सेक्स करें मैं आपको जाने देता हूँ, पर मैं तब तक कोशिश करूँगा जब तक आप खुद चलके मेरी बाहों में नहीं आतीं.”

माँ उपर आ गयी, मैने नाटक किया जैसे मैने कुछ सुना या देखा नहीं. रात भर मुझे नींद नहीं आई, मेरी आखों में वही दृश्य घूम रहा था, मेरे माँ एक ग़ैर मर्द, राज की बाहों में. मैं यही सोच रहा था क्या मेरी माँ मुस्लिम समाज की मर्यादाओं को तोड़ते हुए शादीशुदा होते हुए भी एक ग़ैर हिंदू मर्द से शारीरिक रिश्ता बनाएगी और क्या वो उसके साथ सेक्स करेगी? वैसे भी वो प्यासी है, कब से उसने सेक्स नही किया है. मुझे विनय के किस्से याद आए, कैसे एक शादीशुदा औरत नजीबा विनय के बाप धरमके साथ सेक्स करती थी. विनय बताता था, धरमऑफीस में या अपने घर में दिन रात नजीबा के साथ सेक्स करता था, और नजीबा भी धरमके प्यार में पागल थी. मैं तो पहले ही अपनी माँ को सेक्स करते देखना चाहता था. क्या मेरी माँ एक हिंदू मर्द से सेक्स करेगी? ये ख्याल ही मेरे लिए बहुत एग्ज़ाइटिंग था. रात के सन्नाटे में मुझे माँ के कमरे से गरम आहें सुनाई दे रही थी, मैं समझ गया, शाम की घटना के बाद माँ भी गर्म थी. माँ राज से शारीरिक रिश्ता बनाने से डर रही थी, क्यूंकी, एक तो वो शादीशुदा थी, और दूसरा, राज एक हिंदू था. कहाँ एक शुद्ध मुस्लिम औरत, माँ, और कहाँ एक पहलवान हिंदू मर्द राज . एक मुसलमान औरत होते हुए वो एक हिंदू के साथ सेक्स करने के बारे में सोच भी कैसे सकती थी. कहाँ उसका पति पार्टी का कार्यकर्ता था और मुस्लिम धर्म का प्रचार करता था, और कहाँ वो एक पहलवान हिंदू मर्द से सेक्स का सपना देख रही थी. पर क्या वो अपनी सेक्स की आग को भुजाने के लिए अपनी शादी और धर्म को भुला के एक हिंदू मर्द की बाहों में जाएगी? पता नहीं क्यों, मैं चाहता था कि ऐसा ही हो, मेरी मुस्लिम माँ, सब कुछ भुला के उस हिंदू मर्द के बिस्तर में जाए और उस हिंदू मर्द से वो प्यार पाए जो हर औरत का हक़ होता है, और जिस प्यार को वो अपने पति से नहीं प्राप्त कर पाई थी. अगले 2-3 दिनों तक राज ने माँ से बात नहीं की, पर वो माँ को अपना मर्दाना जिस्म दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ता था. वो सिर्फ़ एक लुंगी में घूमता, उसकी बालों वाली चौड़ी छाती देख के माँ के जिस्म में आग लग जाती थी. माँ भी मौका ढूँढती रहती राज के आधे नंगे शरीर को देखने की. 2 दिन यही चलता रहा. राज जान भूझ कर माँ के सामने सिर्फ़ लंगोट या लुंगी में घूमता. माँ का धैर्य टूट रहा था, उसका दिमाग़ मना कर रहा था एक हिंदू मर्द से शारीरिक रिश्ता बनाने को, पर उसका दिल नहीं मान रहा था, वो भूखी थी एक मर्द के प्यार के लिए. और आख़िर वही हुआ, माँ के सब्र का बाँध टूट गया, ये बात भुलाते हुए की वो एक मुस्लिम औरत है और राज एक हिंदू, वो अब उसके साथ सेक्स करने के लिए पागल थी.
 


उस घटना के बाद तीसरे दिन मैं घर पे बैठा पढ़ रहा था. माँ बॅंक से 3 बजे ही वापिस आ गयी, वैसे 5:30 बजे तक आती थी. आते ही अपने कमरे में घुस गयी, कहते हुए की मेरी तबीयत ठीक नहीं है. कुछ देर बाद मुझे उसके कमरे से आवाज़ आई. मैं कान लगा के सुनने लगा. वो फोन पर राज के साथ बात कर रही थी,.

माँ, “…..मुझसे भी अब रहा नहीं जाता, आपके बिना.” ….

माँ, “पर अनवर को पता नहीं चलना चाहिए.” …..

माँ, “नींद की गोलियाँ, दूध में?” ……

माँ, “ठीक है. पर शॉपिंग किस लिए?” …..

माँ, दुल्हन जैसे सजके? पर किस लिए?” …..

माँ, “ठीक है, जैसे आप कहो.” और उसने फोन रख दिया.

मैं समझ गया मेरी माँ उस मर्द से शारीरिक रिश्ता बनाने के लिए तैयार हो गयी है. आज रात ही उनका सेक्स का प्लान है, तभी वो दूध में नींद की गोलियाँ मिलाने की बात कर रही थी, ताकि में पूरी रात बेहोश रहूं. तब माँ और राज निश्चिंत होकर अपने सेक्स का आनंद उठा सकते हैं. कितनी प्यास भरी थी मेरी माँ में उस हिंदू के लिए. थोड़ी देर में राज भी घर आ गया. माँ बोली की राज उसको डॉक्टर के पास लेकर जा रहा है. करीब दो घंटे बाद वो लौटे. लग रहा था जैसे माँ ब्यूटी पार्लर जा के आई है, उसने हाथों और कलाइओं में मेहन्दी लगा रखी थी. उसके पास एक बड़ा सा शॉपिंग बॅग था, जिसे उसने झट से अपने कमरे में छुपा दिया. डॉक्टर तो बहाना था, राज तो उसे शॉपिंग ले के गया था, जैसे मैने माँ की बातों से सुना था. वो ब्यूटी पार्लर भी गयी थी अपने नये प्रेमी के लिए सजने. बॅग में क्या था ये मुझे पता नहीं चला उस वक़्त. रात 8 बजे खाना खाया. फिर माँ ने मुझे दूध का गिलास दिया, मुझे पता था इसमें नींद की गोलियाँ हैं, मैं दूध का गिलास लेकर अपने कमरे में आ गया और पीछे की खिड़की से बाहर फेंक दिया. अब माँ निश्चिंत थी. 9 बजे मैंने सोने का नाटक किया, जबकि वैसे मैं आम तौर पर 10 बजे सोता था. माँ एक बार मेरे कमरे में आई और मुझे हल्के से हिलाया. मैने सोने का नाटक किया. फिर वो चली गयी और मेरे कमरे को बाहर से बंद कर दिया. मैं झट से उपर रोशनदान की तरफ बढ़ा जहाँ से उसके कमरा के अंदर सब साफ़ दिखाई देता था. माँ ने बॅग खोला और उसमें से नयी लाल रंग की साड़ी निकाली. और उसके बाद नयी काले रंग की ब्रा और पैंटी निकाली. फ़िर वो नहाने चली गयी. 20 मिनिट बाद वो बाहर आई. उसके बाल भीगे हुए थे. उसने लाल रंग का ब्लाउस और पेटीकोट पहना था. ब्लाउस स्लीवेलेस्स, बॅकलेस और बेहद छोटा था, अंदर से काली ब्रा दिखाई दे रही थी, उसका पूरा मिड-रिफ भी दिखाई दे रहा था, उसने पेटीकोट अपनी नाभि से 2 इंच नीचे पहना था. फिर माँ आईने के सामने बैठ के शिंगार करने लगी. नयी लाल रंग की चूड़ीयाँ पहनी, जैसे एक नयी नवेली दुल्हन पहनती है, फिर आँखों में काजल लगाया, होठों पे लाल लिपस्टिक और लिपलाइनर, हल्का मेक-अप भी लगाया. उसने अपना मंगलसूत्र अपने सुडोल वक्षों के बीच रखा. आख़िर में उसने उठ के साड़ी पहनी, साड़ी पूरी ट्रॅन्स्परेंट थी, नीचे से उसका छोटा स्लीव्ले ब्लाउस, मिड-रिफ, और पेटीकोट साफ़ दिखाई दे रहे थे. वो बिल्कुल एक नयी नवेली दुल्हन लग रही थी, जैसे तैयार हो अपनी सुहाग रात मनाने के लिए. पर ये सुहाग रात वो अपने पति के साथ नहीं बल्कि एक ग़ैर मर्द के साथ मनाने जा रही थी. मेरी माँ, सजी सँवरी हुई थी एक नयी दुल्हन की तरह, सिर्फ़ उस राज के साथ सेक्स करने के लिए. और फिर वो उठ के चल दी, नीचे जाने के लिए, राज के कमरे में.

मैं झट से रोशनदान से नीचे उतरा और पीछे की खिड़की से बाहर टेरेस पर आ गया. राज के कमरे में छत के पास एक रोशनदान था जो टेरेस में खुलता था. मैं दौड़ता हुआ वहाँ पहुँचा. अंदर लाइट जल रही थी और सब साफ़ दिखाई दे रहा था. राज भी बिस्तर पर तैयार बैठा था. उसने गहरे सफेद रंग का कुर्ता-पाजामा पहना हुआ था. वो बिल्कुल एक मर्द जैसा दिख रहा था, जैसे आम तौर पर हिंदू दिखते हैं. और मेरी माँ इसी हिंदू के साथ सेक्स करने के लिए बेताब थी. माँ ने दरवाज़ा खटखटाया, दरवाज़ा खुला था, माँ अंदर आ गयी. राज उसे देख के बिस्तर से उठा. माँ ने दरवाज़ा अंदर से बंद किया.

राज और माँ दोनों एक दूसरे की तरफ बढ़े. दोनों एक दूसरे के सामने खड़े थे, और एकदम शांत खड़े एक दूसरे की आँखों में झाँक रहे थे. माँ आगे बढ़ी और राज से लिपट गयी. सिर्फ़ एक महीने में ही मेरी माँ को उस कट्टर हिंदू ने पटा लिया था, और आज वो औरत खुद चलके उस हिंदू की बाहों में आई थी, ताकि उस हिंदू के साथ उसके बिस्तर पर सेक्स कर सके. राज ने भी माँ को अपनी बाहों में भर किया और कस के जकड़ लिया. माँ ने अपनी बाहें राज के गले में डालीं और उससे चिपक गयी. माँ ने अपना सर राज की मर्दाना चौड़ी छाती में छुपा लिया. राज के हाथ माँ की कमर और गाँड को सहला रहे थे. 1-2 मिनिट तक माँ और राज ऐसे ही एक दूसरे के बदन से लिपटे रहे. फिर राज ने एक हाथ से माँ के चेहरे को अपनी छाती से हटाया, और उपर की तरफ किया. राज ने आगे की तरफ झुक के अपने होंठ माँ के लाल होठों पर लगा दिए. जैसे ही राज के होंठ मेरी माँ माँ के लाल होठों पर पड़े, माँ के बदन में जैसे करंट दौड़ गया हो. उसको झटका लगा और उसने राज को और कस के पकड़ लिया. और वो भी पूरी तमक से राज को चूमने लगी. राज ने सिर्फ़ अपने होंठ माँ के होठों से छूहाए थे, पर माँ ने तो राज के होठों को ऐसे चूसना शुरू किया जैसे आज क़यामत की रात हो और राज से सेक्स करने का बस यही एक मौका हो उसके पास. क्या मादक दृश्य था. मेरी माँ एक नयी नवेली हिंदू दुल्हन की तरह सजी हुई एक मूछों वाले से लिपटी हुई थी और उसके गरम होठों को अपने लाल होठों से चूस रही थी. क्या किस्मत थी राज की, उस मादक खूबसूरत मुस्लिम औरत के लाल होठों के शहद का मज़ा वो राज ले रहा था, नाकि माँ का पति. माँ अपनी एडियाँ उठाए राज को चूम रही थी और राज ने अपना मुँह आगे झुकाया हुआ था, क्यूंकी राज 6 फुट लंबा था और माँ 5 फुट 5 इंच. फिर राज ने माँ को अपनी मज़बूत बाहों में उठा लिया. अब उनके मुँह एक दूसरे के सामने थे, उनका किस और पॅशनेट हो गया. अब तो माँ और राज एक दूसरे के जीभ भी चाटने लग गये थे. माँ के हाथ अब राज के कुर्ते के अंदर थे और कुर्ते के अंदर से राज के पीठ को सहला रहे थे. राज ज़ोर ज़ोर से माँ की गाँड को मसल रहा था. 10 मिनिट तक दोनों एक दूसरे के होठों का स्वाद चखा, बिना रुके. ऐसा तगड़ा किस तो मैने हॉलीवुड मूवीस में भी नहीं देखा था. क्या मस्त हो के किस कर रही थी मेरी माँ उस को.. फिर राज ने माँ को छोड़ दिया और अपने पैरों के सहारे खड़ी हुई. माँ ने राज के कुर्ते के बटन खोलने शुरू किए.

राज ने कुर्ता निकालने में माँ की मदद की. फिर राज ने माँ के पल्लू को हटाया और उसकी साड़ी का पल्लू नीचे ज़मीन पर गिरा दिया. माँ ने खुद अपनी साड़ी अपने पेटीकोट से निकाली और नीचे फेंक दी, राज के कुर्ते के उपर. अब माँ राज के सामने सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज पहने खड़ी थी. फिर माँ राज के छाती के बालों के साथ खेलने लगी, उसके निपल्स को अपने होठों में लेके चूसने और दाँतों में लेके काटने लगी. वो अपनी जीभ से राज की छाती को चाट रही थी.

माँ, “तेरे बड़े बाल हैं, बहुत इच्छा थी बालों वाली छाती चाटने की, आज पूरी हुई.”

राज, “तेरे पति की छाती पर बाल नहीं हैं?”

माँ, “नहीं.”

3-4 मिनिट तक माँ ऐसे ही राज की छाती से खेलती रही. राज धीरे धीरे माँ के बदन को सहलाता रहा. फिर माँ ने राज के पाजामे का नाडा खोल दिया. राज ने सफेद रंग का फ्रेंचिए अंडरवेर पहना हुआ था, जिसमें बहुत बड़ा तंबू बना हुआ था. मैं सोच रहा था, कितना बड़ा होगा राज का लोड़ा. माँ अंडरवेर के उपर से ही राज के लंड को सहलाने लगी. फिर से दोनों का किस शुरू हो गया. कुछ देर बाद राज ने माँ के ब्लाउस के बटन खोलने शुरू किए. माँ ने अपनी दोनों बाहों को खोल कर अपने ब्लाउस को अपने शरीर से अलग कर दिया और नीचे फेंक दिया, अपनी साड़ी और राज के कुर्ते के उपर. राज ने उसकी ब्रा की हुक खोल दी. माँ ने ब्रा निकाल के अपने ब्लाउस के उपर फेंक दी.

अब वो उपर से नंगी थी. क्या मस्त दूध थे माँ के, एकदम सफेद, और बीच में पिंकिश ब्राउन निपल्स (चुचियाँ) एकदम तने हुए थे, मतलब ये था माँ पूरी गरम हो चुकी थी. राज ने आगे झुक के लेफ्ट दूध की निपल को चूसना चालू किया और राइट को अपने हाथ में लेके दबाना शुरू किया. वो माँ के निपल पे अपनी जीभ फिराता, और दाँत से काटता. दो-तीन बार राज ने माँ के निपल पर थूका और फिर अपनी जीभ से चाटा. वो दूसरे दूध की निपल को अपने अंगूठे और उंगली में लेके ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था. क्या गर्म सीन था, मेरी माँ आधी नंगी खड़ी थी, और एक नंगे मूछों वाले मर्द के सामने और वो उसके दूध चूस रहा था.

राज, “क्या गोरे और शहद जैसे मीठे हैं तेरे दूध.” जिस दूध को चूसने का हक़ सिर्फ़ उसके पति का था, उनको मेरी माँ एक कट्टर हिंदू को चुस्वा रही थी. माँ के उभारों का रस उसका पति नही बल्कि उसका मकान मालिक ले रहा था. माँ का एक हाथ राज के सर में था, और अपने हाथ से उसके मुँह को अपने उभारों पर दबा रही थी, और कह रही थी, “और ज़ोर से चूस, खा जा इनको, तेरे लिए हैं अब मेरे ये दूध, जितना रस पीना है पी ले, रुक मत, दबा और ज़ोर से.” दूसरे हाथ से माँ राज के लंड को सहला रही थी.

मैने देखा अब माँ का हाथ राज के अंडरवेर के अंदर था और अब वो उसके लंड को अपने हाथ में लेके सहला रही थी. फिर माँ ने अपने हाथ से राज का अंडरवेर निकाल दिया. राज अब पूरा नंगा खड़ा था माँ के सामने. माँ पीछे हटी, राज के मुँह से उसके निपल छूट गये. माँ ने राज के लंड की तरफ़ देखा. वो थोड़ी सी चौंकी हुई बोली, “क्या बड़ा लंड है तेरा! कितना बड़ा है ये?”

राज, “10” का है. तेरे पति का कितना बड़ा था?”

माँ, “अरे उसका तो 4.5” का ही था, लगता था जैसे 10 साल के किसी बच्चे का हो. तेरा कितना कसा हुआ है.

राज, “पहले कभी देखा नही तूने लंड?”

माँ, “नहीं आज पहली बार देखा है. जो सुना था वैसा ही है.”

राज, “क्या सुना था?”

माँ, “वही, बहुत बड़े और कसे हुए होते हैं लंड. सुपाड़ा भी कितना बड़ा है तेरे लंड का.”

राज, “तो चूस ना अपने लाल लाल होठों में लेके.”

माँ, “मैने पहले कभी चूसा नही है अपने पति का, उसको पसंद नहीं था, वो सेक्स से थोड़ा घबराता था, कहता था सेक्स करने से पाप लगता है.”

राज, “चूसना आता है?”

माँ, “नहीं.”

राज, “कोई बात नहीं, लोलीपोप तो चूसा होगा ना बचपन में, बस वैसे ही समझ ले, मेरा लंड एक लोलीपोप है.”

माँ राज के आगे बैठ गयी अपने घुटनों के सहारे, और राज के 10” लंड को अपने दोनों हाथों में लेके सहलाने लगी. फिर धीरे से उसने अपनी जीभ से उसके सुपाड़े को चाटना शुरू किया.

राज बोला, “अब अपनी जीभ से पूरे लंड को चाट सुपाड़े से लेके जड तक.”

माँ ने वैसा ही किया. 1-2 मिनिट तक वो ऐसे ही करती रही.

राज, “अब थूक और अपने हाथ से थूक को मेरे लंड पे रगड़.”

माँ ने वैसा ही किया. राज का लंड अब माँ के थूक से चमक रहा था.

राज, “अब धीरे धीरे इसको अपने मुँह में ले, और अपने मुँह को आगे पीछे कर. मेरे लंड को अपने होठों में जकड़ ले कस के और अपने को मुँह हिला जैसे मैने बताया.”

माँ एक स्कूल की छात्रा के तरह राज की हर एक इन्स्ट्रक्षन को मान रही थी.

राज, “अब मेरी आंडो को अपने होठों में ले, और अपनी तरफ खींच. हाँ ऐसे ही.”

राज, “अब सब बारी बारी से रिपीट कर, कभी सुपाड़े को चाट, कभी लंड को जीभ से सहला, कभी थूक के रगड़, कभी अपने होठों में लेके चूस और कभी आंडो के साथ खेल. समझ गयी?”

माँ ऐसे ही कर रही थी. राज का लंड चूस्ते वक़्त वो बहुत ही मादक अंदाज़ से राज की आँखों में झाँक रही थी.

राज बोला, “रुक”

माँ ने उसका लंड छोड़ दिया.
 
Back
Top