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Adultery मस्तराम की कहानियाँ

फिर हसन ने मुझे कहा- मेरा लण्ड अपने मुँह में डाल छिनाल…

मैंने कहा- नहीं..

तो उसने ज़बरदस्ती मुझे उठा कर ज़मीन पर बिठाया और मेरे मुँह को खोल कर अपना लण्ड मेरे मुँह में डाल दिया।

मैंने पहली मुज़हमत की लेकिन फिर समझ गई कि कोई फ़ायदा नहीं है।

मैं फिर उसका लण्ड पकड़ कर अपने मुँह में डालने लगी।

हसन मेरे बालों को पकड़ कर अपना लण्ड मेरे मुँह के अन्दर-बाहर करने लगा।

ऐसा लग रहा था कि वो मेरे मुँह को चोद रहा है… कुछ देर ऐसा करने के बाद उसने अपना लण्ड मेरे मुँह से निकाला और मेरी दोनों चूचियाँ के दरमियाँ लंड फंसा कर आगे-पीछे करने लगा।

मुझे भी इसमें मज़ा आ रहा.. क्योंकि इससे मेरे मम्मे भी दब रहे थे और मुझे उसका बड़ा लौड़ा भी साफ़ दिख रहा था।

काफ़ी देर तक ऐसा करने के बाद उसका पानी निकलने लगा.. तो वो चिल्ला उठा- आआआ… हीराआआ… मेरा.. पानीईईई निकलल्ल गया.. है…

यह कहते ही उस के लण्ड से सफेद गाढ़ा और गरम पानी निकल कर मेरे मम्मों.. मेरी गर्दन और मेरे मुँह पर गिरने लगा…

वो थक कर बिस्तर पर गिर गया और मैं ज़मीन पर गिर पड़ी। हम दोनों ज़ोर-ज़ोर से साँसें ले रहे थे।

हम दोनों नंगे थे.. फिर थोड़ी देर बाद वो उठा और मुझे उठा कर बिस्तर पर ले गया और मेरे पूरे जिस्म को चूमने लगा।

अब मुझे वो अच्छा लगने लग गया था।

फिर उसने मेरी टाँगों को खोला और अपना लण्ड मेरी चूत पर रख दिया और साथ ही मेरे मम्मों को दबाने लगा।

फिर आहिस्ता से अपना लण्ड मेरी चूत में डालने लगा..

ज्यों ही उसका सुपारा मेरी चूत में घुसा.. तो मैं चीख पड़ी- प्लीज़ हसन भाई.. नहीं..न्न दर्द होगा…

लेकिन हसन ने एक ना सुनी और अपना लण्ड अन्दर करने लगा…

हालांकि वो अपना तना हुआ लौड़ा आहिस्ता आहिस्ता डाल रहा था… जब उसने लण्ड थोड़ा और अन्दर किया तो मैं चीख़ उठी- आआआ… नाआ कराऐन्न्नणणन् प्लज़्ज़्ज़्ज़…

लेकिन वो अन्दर करता रहा।

जब उसका तकरीबन आधा लण्ड अन्दर चला गया.. तो वो रुक गया और आहिस्ता-आहिस्ता लण्ड वहीं से ही अन्दर-बाहर करने लगा।

मुझे बहुत दर्द हो रहा था..

जब थोड़ी देर तक वो ये करता रहा तो उसका लौड़ा मेरी चूत में जगह बना चुका था और मुझे भी मज़ा आने लगा और मैं मज़े से कराहने लगी।

थोड़ी देर ऐसा करने के बाद हसन रुक गया और मेरी तरफ देखकर गुस्से से बोला- साली साना रंडी.. चुद.. ले खा मेरा लवड़ा…

यह कह कर हसन ने ज़ोर से झटका मारा और अपना पूरा 8 इंच का लौड़ा मेरी चूत के अन्दर घुसा दिया।

मैं तो मर ही गई.. मेरी आँखें बाहर आ गईं.. मैं इतने ज़ोर से चीखी कि दूसरे घर तक आवाज़ चली गई।

‘आआआ… ऊऊऊओ.. अम्म्मी आह उऊहह अहह उई माआईयईईईई अम्मिईई… मेरी..ई तो फट गइिईई.. अम्मी मैं मरर गइईईई. माआररर डालाअ इसने मुझेए… बदला लेई रहाआ है..यईईईई… आआआ…

मेरी आवाज़ इतनी ऊँची थी कि मेरे घर तक आवाज़ चली गई।

एक तो रात का वक़्त ऊपर से गाँव.. आवाज़ तो जानी ही थी।

मेरी अम्मी एकदम बाहर आईं और जोर से चिल्ला कर मुझे आवाज लगाई- क्या हुआ साना?

वो डर गई थीं।

हसन ने एकदम मेरे मुँह पर अपना मुँह रख कर मेरे मुँह को बंद कर दिया।

मदीहा साथ वाले कमरे में चली गई थी.. वो एकदम उस कमरे से बोली- चची कुछ नहीं.. मैं और हीरा एक-दूसरी को तंग कर रहे थे… आप सो जाएं।

अम्मी ने वहाँ से ही कहा- बदतमीजो इंसान बनो.. और सो जाओ.. सारा गाँव जाग जाएगा….

मदीहा ने कहा- ओके चची आप सो जाओ…

अम्मी यह कह कर अन्दर चली गईं।

इधर मेरी तो हालत खराब हो गई थी.. एक तो हसन अपना मोटा लण्ड मेरी चूत से निकालने का नाम नहीं ले रहा था और ऊपर से मेरे मुँह को भी बंद कर दिया था।

मेरी चूत फट चुकी थी.. मेरी चूत से खून निकल कर नीचे गिर रहा था।

थोड़ी देर ऐसा रहने के बाद जब मेरा दर्द थोड़ा कम हुआ तो हसन ने अपना मुँह मेरे मुँह से हटा लिया और अपना लण्ड मेरी चूत में अन्दर पड़ा रहने दिया।

जब मुझे थोड़ा आराम हुआ तो उसने अपना लण्ड मेरी चूत के अन्दर-बाहर करना चालू कर दिया.. मुझे दर्द तो हो रहा था.. लेकिन ज्यादा नहीं…

थोड़ी देर तक वो यूँ ही धीरे-धीरे मेरी चुदाई करता रहा।

तो मेरा दर्द आहिस्ता-आहिस्ता ख़तम होने लगा.. मुझे दर्द हो रहा था.. लेकिन अब दर्द से ज्यादा मुझे मज़ा आ रहा था।

वो लवड़े को मेरी चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था।

मुझे मजा आने लगा और मैंने अपनी कमर को चलाया तो वो तेज़-तेज़ मेरी चूत में अपना लण्ड अन्दर बाहर करने लगा।

अब मैं तो मज़े में पागल हो रही थी और कहने लगी- आआआ… ऊऊ… हसन भाई और तेज़ करो ना.. प्लीज़.. मज़ा आ रहा है.. करते रहो.. अपनी बेटी को चोदो ना.. प्लीज़ मत रूको.. येह्ह..ह आई एम एंजायिंग इट… प्लीज़ चाचूऊओ…एयेए आ… और तेज़्ज़्ज़ तेज़्ज़्ज़… अगर यही आप का बदला था तो ये बदला पहली ले लेते नाआ… जानू… फक्कक मीईई…

मेरी बातें सुनकर हसन और भी तेज़ हो गया.. और कहने लगा- अयाया… हाआअन्न ना मेरी हीरा छिनाल. तुझे चोदूँ.. रण्डी… तुझे मैं रोज चोदूँगा.. मेरी बेटी.. अह… तुझे तो रखैल बनाऊँगा अपनीईई… आआआ…एसस्सस्स… रंडडईईईई….

हम दोनों आसमान में उड़ रहे थे।

तभी अचानक मेरा पानी निकलने लगा.. तो मैंने कहा- जानू मेरा पानी निकल रहा है।

उसने कहा- रूको.. मेरा भी निकलने वाला है.. साथ में निकलेंगे…

फिर थोड़ी देर तक चुदवाने के बाद… हम दोनों का पानी निकलने लगा।

मैं बोली- आआआ… जान्नू.. आआआ… जानू मेरा पानी निकल रहा है..अई आआआ… तेज़्ज़्ज़्ज़ करोऊओ….

वो भी बोला- साना मेरा पानीई भी निकल रहा अहाईईईई.. तुझे अपने मंगेतर हिलाल का वास्ताअह.. रुक.. मेरा सारा पानी अपनी चूत के अन्दर डालना और एक कतरा भी बाहर ना आने पाए…

मैंने कहा- आआआह.. जानन्न्नूऊ ये किस हरामी का नाम ले लिया है..ईईईईई… मैं भी तेरी ओर मेरी चूत भी तेरी.. हसन भाई.. जो दिल कहे वो करो..

इसके साथ ही मेरा पानी निकलने लगा और उसका पानी भी सारा का सारा.. मेरी चूत में चला गया।

हम दोनों कराहते रहे और हमारा पानी निकलता रहा।

फिर हम दोनों थक कर बिस्तर पर लेट गए और हम दोनों फिर नंगे एक-दूसरे के साथ लिपट कर सो गए।

तकरीबन 2-3 घंटे सोने के बाद हम उठे और जब मैं कपड़े पहनने के लिए उठी, तो हसन की नज़र मेरी गाण्ड पर पड़ गई..

फिर तो वो और पागल हो गया और एकदम उठ कर मेरी गाण्ड को पकड़ा और वक्त ज़ाया किए बगैर अपना पूरा खड़ा लण्ड.. मेरी गाण्ड में पेल दिया…

मैं तो चीख पड़ी और रोने लग गई।

लेकिन वो ना माना और मेरी गाण्ड को भी चोदने लगा और मेरी गाण्ड को भी फाड़ दिया।

आधा घंटा मेरी गाण्ड को चोदने के बाद उसका पानी निकल गया और मैं भी अपनी चूत में ऊँगली मार रही थी तो मेरा पानी भी निकल गया।

एक बार फिर हम दोनों थक कर बिस्तर पर गिर गए।

थोड़ी देर लेटने के बाद फजर का वक्त हो गया और आख़िर वो सेक्सी रात जो नफ़रत ओर ब्लॅकमेलिंग से शुरू हुई.. एक अच्छे.. कामुक और रोमान्टिक इंतकाम पर खत्म हुई।

हसन भाई फिर उठे और उसने मेरे गदराए जिस्म को चूमा और अपने कपड़े पहन कर बाहर चले गए।

मैंने भी अपने कपड़े पहने और लेट गई।

हसन भाई अनवर भाई के पास चले गए और वहाँ सो गए…

और मेरी सहेली मदीहा वापस मेरे पास आ गई।

इसके बाद भी हसन ने मेरे साथ बहुत एंजाय किया।
 
लंड की सैटिंग

यह बात तब की है, जब मैं अपने दोस्त को सारी बातें बताता था. सुजन भी मुझे सारी बातें बताता था. मैंने और सुजन ने मिलकर अनेकों बार मुठ मारी थी. हम लोगों ने मिलकर कई सेक्सी वीडियो भी देखे थे. जिस समय हम दोनों सेक्स वीडियो देखते थे. तब आपस में शर्त लगा कर मुठ मारते थे कि किसका माल पहले गिरता है.

एक बार जब मैं अपने दोस्त के साथ घूमने जा रहा था, मैं जरा किसी काम से रुक गया और सुजन आगे बढ़ गया. कुछ आगे निकल कर सुजन की नजर खेत पर पड़ी. उसने देखा एक लड़का लड़की खेत में सेक्स कर रहे थे. सुजन ने अपनी जेब से फोन निकालकर उन दोनों की चुदाई करते हुए की फोटो खींच ली. साथ ही उन दोनों की वीडियो भी बना ली.

जब तक मैं अपने दोस्त के पास आ गया. उसने मुझे ये बात बताई.

हम दोनों की आंखें चमक उठीं. हम दोनों वहां पर गए. उन दोनों को धमकाया, तो लड़की ने झट से अपने सारे कपड़े पहन लिए और लड़का कपड़े लेकर भाग गया.

हमने उस लड़की को बताया कि मैंने तुम्हारी फोटो और वीडियो निकाल लिए हैं.

ये सुनकर लड़की डर गई, वह पैर पकड़ने लगी- प्लीज फोटो और वीडियो डिलीट कर दीजिए.

सुजन मेरे कान में बोला- भाई चुत मिल गई.

मैंने मना किया, पर सुजन न माना. उसने मुझे भी राजी कर लिया.

पर मेरा एक उसूल है कि लड़की जब तक राजी न हो, तब तक चोदना नहीं और जब लड़की राजी हो, तो उसे छोड़ना नहीं है.

मैंने सुजन से कहा- इससे मुझे बात करने दो.

सुजन ने मायूस होते हुए सर हां में हिला दिया.

मैंने लड़की से कहा- वह लड़का कौन था?

वह बोली- वो मेरा बीएफ था.

मैंने उससे पूछा- तुम लोग कितनी बार सेक्स कर चुके हो?

उसने कहा- मैं पहली बार कर रही थी.

मैंने कहा- कर रही थी से क्या मतलब है? क्या अभी अन्दर नहीं लिया था?

वो शर्माते हुए बोली- नहीं.

मैंने फिर पूछा- क्या तुम्हारी चुत सीलबंद है?

वो लड़की हंसने लगी. उसने हां में सर हिला दिया.

मैंने लंड पर हाथ फेरते हुए कहा- हम दोनों से चुदोगी?

वो कुछ नहीं बोली, बस मेरी पेंट में फूलते लंड की तरफ देखने लगी.

सुजन बोल पड़ा- तुम्हारी फोटो एक ही शर्त पर डिलीट करूंगा, तुमको मेरे साथ सेक्स करना पड़ेगा.

लड़की पहले तो मना करने लगी.

मैं बोला- ये फोटो मैं डिलीट करवा दूँगा. हम दोनों किसी की मजबूरी का फायदा नहीं उठाते हैं. हां लेकिन हम दोनों का तुमको चोदने का मन है.

लड़की कहने लगी- प्लीज ये फोटो किसी को मत दिखाना.

ये कह कर वो मुस्कराने लगी.

हम दोनों की खोपड़ी घूम गई कि अभी तो ये बंदी डर रही थी और अब मुस्कुरा रही है.

मैंने उससे मुस्कुराने का कारण पूछा, तो वो खुद से चुदने की बात कहने लगी. वो कहने लगी कि वो लड़का मैंने ही सेक्स के लिए सैट किया था. मुझे उससे कोई लव नहीं था.

मतलब वो हम दोनों से चुदने को मान गई थी.

हम दोनों उसे अपने रूम पर लाए. सुजन कुछ खाने पीने का सामान लेने की कह कर निकल गया.

मैं उस लड़की से बात करने लगा.

कोई दस मिनट बाद सुजन बाहर जाकर कुछ खाने पीने का सामान ले आया. तब तक मैं उस लड़की से काफी बातें कर चुका था.

सुजन कमरे में आते ही उस लड़की को किस करने लगा.

लड़की फिर से सुजन से ड्रामा करने लगी- प्लीज मान जाओ.

मैंने उससे कहा- अभी तो तू चुदने को राजी हो गई थी. अब नाटक कर रही है.

वो हंसने लगी और बोली- इसको छेड़ रही थी. ओके मैं रेडी हूँ, तुम दोनों एक एक करके कर लो.

पहले हम दोनों दोस्त उसके साथ एक साथ सेक्स करने वाले थे. फिर सुजन ने लड़की से कहा कि तुमको सैंडविच सेक्स का मजा भी दे देंगे.

वो समझ ही न सकी कि सैंडविच सेक्स क्या होता है. वो बोली- ठीक है, मैं सैंडविच सेक्स का मजा भी ले लूंगी.

उसने मुझे किस किया. मैंने उसके कपड़े उतार दिए. उसने ऊपर टी-शर्ट पहनी थी, नीचे जींस पैंट पहनी थी.

मैंने उसकी टी-शर्ट और पेंट उतार दी. देखा, वो बहुत सेक्सी माल लग रही थी. उसके बूब्स बहुत बड़े थे. उसका गोरा बदन देख कर हम दोनों के लंड खड़े हो गए.

सुजन ने उसके बूब्स चूसना शुरू कर दिए. उसकी ब्रा के ऊपर से दूसरी तरफ से मैं भी जाकर उसके बूब्स चूसने लगा.

फिर हम लोगों ने उसकी ब्रा पेंटी भी उतार दी और अपने भी सारे कपड़े उतार दिए.

जब मैंने उसकी पेंटी उतारी, तो उसकी चुत के बाल बने हुए थे. उसकी गुलाबी चुत देख कर हम दोनों के लंड एकदम से कड़क हो गए.

अब सुजन ने अपना लंड उसके मुँह में दे दिया. वो मना करने लगी. पर सुजन न माना. उसने लड़की की एक चूची जोर से मसली, तो लड़की का मुँह खुल गया. उसी समय सुजन ने अपना लंड लड़की के मुँह में दे दिया.

वो लंड चूसने लगी. उसे भी मजा आने लगा. फिर मैंने भी उसे अपना लंड चूसने को कहा. वो मेरे लंड को भी चूसने लगी.

अब सुजन ने अपने लंड और उसकी चुत पर तेल लगाया. मुझे भी तेल दे दिया. मैंने भी अपने लंड पर तेल लगा लिया. फिर सुजन ने उसे चुदाई की पोजीशन में लिटा कर उसकी चुत में लंड डाला, तो वो चिल्ला उठी. उसे दर्द होने लगा. लेकिन सुजन न रुका.

उसके एक दो झटके में ही उस लड़की की चुत से खून आने लगा था. वो रोने लगी- निकाल लो … प्लीज निकाल लो … बहुत दर्द हो रहा है.

मैं जाकर उसे किस करने लगा और उसके बूब्स दबाने लगा. सुजन थोड़ा रुक गया. जब लड़की का दर्द कम हुआ तो सुजन ने फिर से धीरे धीरे चुदाई शुरू कर दी. अब लौंडिया को भी मजा आने लगा. धकापेल चुदाई होने लगी. कुछ देर बाद वो और सुजन एक साथ झड़ गए.

उसके बाद मैंने उसकी चुत मारी. मेरा लंड बड़ा था. मेरा लंड लेते ही लौंडिया चिल्ला उठी. उसकी आंखों की पुतलियां फ़ैल गई थीं. उसकी आवाज बड़ी मुश्किल से आ पा रही थी ‘अअ उम्म्ह … अहह … हय … ओह … अ ऊ ऊ ऊ.’

कुछ देर बाद से मजा आने लगा. मैंने भी से बीस मिनट तक चोदा और उसकी चुत में ही निकल गया.
 
इसके बाद हम तीनों ने कुछ देर रुक कर एक दूसरे से बातें की. मैं और सुजन उस लौंडिया की चुचियों से खेलते रहे.

फिर सैंडविच सेक्स की बात शुरू हो गई.

सुजन ने उसकी गांड में तेल लगा कर अपना लंड पेल दिया. वो फिर से चिल्ला उठी. उसकी आवाजें निकलने लगीं. ‘ऊ ऊ उम्म्ह … अहह … हय … ओह … अ..’

इसी बीच मैंने आगे से लंड पेल दिया उसकी सैंडविच चुदाई होने लगी. वो बहुत चिल्ला रही थी. लेकिन बाद में जब हम दोनों ने उसे गोद में उठा कर उसके दोनों छेद एक साथ चोदे, तो उसे लंड झूला मजा देने लगा. अब वो बड़ी मस्ती से चुदवा रही थी.

कुछ देर बाद खेल अपनी समाप्ति पर आ गया था. अब तक हम लोग दो-दो बार झड़ चुके थे. फिर मैंने उसके फोटो और वीडियो डिलीट कर दिए.

आज का खेल खत्म होने पर हम तीनों ने कपड़े पहन कर एक नया फोटो खींच लिया. हम लोगों ने एक दूसरे के साथ दुबारा मिलने की बात पक्की कर ली. लौंडिया हमारे व्यवहार से बड़ी खुश थी.

फिर सुजन ने नाश्ता खोला और हम तीनों ने नाश्ता किया. इसके बाद सुजन उसे छोड़ने चला गया.

उसने जाते समय मुझसे कहा- जब भी तुम लोगों का मन हो, तो मुझे बुला लेना, मैं तुम दोनों के साथ चुदने के लिए राजी हूँ.

वह हम दोनों से पट चुकी थी, उसे भी बहुत मजा आया था. जब सुजन उसे छोड़ने गया, तो उसकी नजर उसकी मां पर पड़ी. लौंडिया की मम्मी के मम्मे बहुत बड़े बड़े थे. उसकी मम्मी भी बहुत सेक्सी माल लग रही थी. सुजन का मन मचल गया.

जब वह मेरे पास वापस आया, तो चुपके से उसकी मम्मी की फोटो खींचकर लाया था. वो बोला- देख … कितनी कट्टो माल है.

मैंने पूछा- कौन है?

वो बोला- अभी जिस लड़की को चोदा है ना, ये उसकी मां है.

मैंने पूछा- तो इसकी फोटो क्यों खींच कर लाया?

वो बोला- इसको भी चोदेंगे.

मैं बोला- कैसे चोदेंगे?

उसने कहा- तू टेंशन मत ले … मैं तुझे इसे सैट करने के बाद में बताऊंगा.

अब हम दोनों लौंडिया की मम्मी पर नजर गड़ाए हुए थे. कुछ दिन तक उसकी मम्मी की जानकारी की, उसका कोई आशिक भी नहीं था. उसका पति भी खूब मालदार था … लेकिन शरीर से मरियल था.

एक दिन सुजन बोला कि आज उस लड़की को फिर से चोदा जाए.

मैंने कहा- हां वो तो खुद कह कर गई थी कि जब चाहो तब बुला लेना. लेकिन उसकी मम्मी का क्या हुआ?

सुजन बोला- अभी उसकी मम्मी सैट नहीं हुई है, आज उसकी मां नहीं, तो वही फिर से सही.

मैंने और सुजन ने उस लड़की से बात की. सुजन ने कहा कि आज रूम पर आ जाना.

वह मना करने लगी- अभी नहीं, बाद में आती हूं … आज दिन में मुझे बहुत काम है.

वो अपने हाथ में फोन लिए थी. उसे देख कर सुजन बोला- मिष्टी, यह फोन किसका है?

मिष्टी- यह फोन मेरा है?

फिर हमने उसका नंबर ले लिया.

उसने मिष्टी से कहा कि मैं तुम्हें मिस कॉल कर रहा हूं. मेरे नम्बर पर कॉल करके बता देना कि कब आ रही हो. लेकिन जल्दी आना.

वो हां कह कर चली गई.

शाम को जब मेरे पास फोन आया- तुम लोग मेरे घर आ जाओ.

मैंने उसके घर आने के कारण पूछा.

तो मिष्टी ने कहा- इसलिए क्योंकि आज मैं घर पर अकेली हूँ. मेरे मम्मी पापा शाम को मेरे लिए लड़का देखने जा रहे हैं. वो लोग दूसरे दिन वापस आएंगे. तुम लोग रात के 10:00 बजे के बाद आ जाना.

मैंने कहा- ठीक है.

मैंने सुजन को फोन लगाया और कहा कि मिष्टी का फोन आया था. वो आज रात को अपने घर बुला रही है.

सुजन ने भी ओके कह दिया. वो कुछ देर बाद मेरे घर आ गया. फिर हम लोग शाम का इंतजार करने लगे. रात को 9:30 बजे हम अपने घर से उसके घर के लिए जाने लगे.

मैंने एक बार फिर से मिष्टी को कॉल किया- हम लोग आ रहे हैं.

मिष्टी- हां आ जाओ.

हम दोनों मिष्टी के घर पहुंचे. मिष्टी ने दरवाजा खुला रखा था. हम दोनों इधर उधर नजर बचाते हुए अन्दर आए, तो देखा कि मिष्टी बहुत ही सुंदर कपड़ों में सामने खड़ी थी.

हम लोग अन्दर आ कर बैठ गए. उसने खाना लगाया और हम तीनों लोगों ने खाना खाया.

इसके बाद हम तीनों उसकी मम्मी के बेडरूम में आ गए. उस कमरे में उसकी मम्मी की कई सारी फोटो लगी थीं. फोटो देखकर सुजन का मन चंचल हो गया.

सुजन ने मिष्टी को किस किया. मैं पीछे से जाकर उसके कपड़े उतारने लगा. फिर हम लोगों ने उसे देखा, तो ऐसा लगा कि खुद हम लोगों से ज्यादा जल्दी से चुदने की पड़ी थी.

मिष्टी खुद हम दोनों को दिखा दिखा कर अपनी चूत सहला रही थी, उँगलियों से खोल खोल कर अंदर का गुलाबी भाग दिखा रही थी, हमें ललचा रही थी.

हम दोनों ने उसके मुँह में अपने लंड दे दिए. उसका मुँह छोटा था, तो लंड एक साथ नहीं जा रहे थे. वो हम दोनों के लंड एक एक करके चूस रही थी.

हम लोगों ने उसे लिटा कर खूब चूमा. वो एकदम गर्म हो गई थी.

मैं बोला- एक एक करके लोगी या एक साथ?

वो बोली- एक साथ लूंगी.

हम दोनों ने एक साथ उसके दोनों छेदों में लंड पेले … और उसे गोद में उठा कर खूब चोदा. एक बार की चुदाई के बाद एक एक बार अलग अलग करके भी उसको चोदा. फिर हम तीनों नंगे ही लिपट कर सो गए.

सुबह 4:00 बजे उठकर सुजन उसकी चुत में फिर से लंड पेला, तो वो फिर से गांड उठा उठा कर मजा देने लगी.

उसके बाद मैंने भी मिष्टी को चोदा और उससे कहा- मिष्टी, मुझे तुमसे एक बात कहनी है.

मिष्टी बोली- क्या?

मैंने कहा- हम दोनों को तुम्हारी मम्मी बड़ी मस्त लग रही हैं. यदि हम दोनों उनकी चुदाई करें, तो तुमको कोई ऐतराज तो नहीं होगा?

पहले तो मिष्टी चुप रही, फिर बोली- मुझे कोई दिक्कत नहीं है बल्कि मैं खुद तुम दोनों की इस काम में मदद करूंगी.

उसके मुँह से ये बात सुनकर हम दोनों खुश हो गए.

फिर हम दोनों उसके घर से आ गए.

मिष्टी को चोदने के बाद हम तीनों ही मिष्टी की मम्मी की चुदाई करने की जुगत में लग गए थे. मिष्टी को पहले से ही अपनी मम्मी की चुदास की जानकारी थी. उसने कई बार अपने पापा और मम्मी की असफल चुदाई को देखा था. उसकी मम्मी एक मजबूत लंड से चुदने के लिए खुद से बेचैन थीं.

जब मिष्टी ने मुझे ये बात फोन करके बताई, तो मेरे दिमाग में एक आइडिया आ गया.

मैंने मिष्टी से कहा- मैं तुम्हारे पास एक दोस्त बन कर उस समय आना चाहता हूँ, जब तुम्हारी मम्मी घर पर हों.

उसने हामी भर दी.

मैं दूसरे दिन उसके घर गया और उसकी मम्मी के सामने उससे मिला. मिष्टी ने अपनी मम्मी से मेरा परिचय अपने साथ पढ़ने वाले लड़के के रूप में कराया.

उसकी मम्मी के हाव भाव से मैं समझ गया कि उसकी मम्मी को सैट करना बड़ा काम नहीं है.

कुछ ही देर में मैं मिष्टी की मम्मी से घुल मिल गया. मैंने मिष्टी को इशारा किया कि वो हम दोनों को अकेला छोड़ दे.

मिष्टी मुझसे कह कर चली गई कि मैं जरा मन्दिर तक जा रही हूँ. अभी आधा घंटे में आ जाऊंगी, तुम मेरे आने तक रुके रहना.

मैंने हां कह दी और उसकी मम्मी से बात करने लगा.

मिष्टी के जाते ही उसकी मम्मी ने मुझसे सीधे सीधे पूछ लिया- क्या तुम मिष्टी को पसंद करते हो?

मैंने अपना सर झुका लिया.

मिष्टी की मम्मी का नाम सुषमा था.

जब सुषमा आंटी ने मुझसे जोर दे कर पूछा, तो मैंने हां कहते हुए कहा कि यदि आपको उसके लिए मैं पसंद नहीं हूँ, तो मैं आगे नहीं बढूँगा, आप बेशक उसकी शादी किसी और जगह कर सकती हैं.

सुषमा आंटी ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा- मुझे तुमसे कुछ ख़ास बात करनी है.

मैं उनके इस तरह से अपने कंधे पर हाथ देख कर कुछ चौंक गया, लेकिन मैंने उनसे कहा- हां आप कुछ भी पूछ सकती हैं.

उन्होंने एक लम्बी सांस लेते हुए कहा- मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे साफ़ साफ़ बताओ कि क्या तुम मेरी बेटी को खुश रख सकोगे?

मैंने कहा- हां मैं इस बात की गारंटी लेता हूँ कि मिष्टी मेरे साथ खुश रहेगी.

वो बोलीं- तुम किस किस तरह से खुश रखने की बात की गारंटी दे रहे हो?

मैंने कहा- मैं हर तरह से उसे खुश रखने की बात कह रहा हूँ.

आंटी ने मुझसे सटते हुए पूछा कि क्या तुम उसके साथ सेक्स कर चुके हो?

मैंने ना में सर हिला दिया.

उन्होंने कहा कि मैं अपनी शादी से सेक्स से खुश नहीं हूँ और मैं चाहती हूँ कि कहीं ऐसा न हो कि उसको भी मायूसी झेलना पड़े.

मैं समझ गया कि अब आंटी चुदाई की बात करना चाहती हैं.

मैंने उनसे पूछा- इसको साबित करने के लिए मुझे क्या करना होगा?

आंटी ने एकदम से मुझे अपनी छाती से लगा लिया और बोलीं कि पहले तुमको मुझे खुश करना पड़ेगा.

मैंने इसके आगे कोई बात नहीं की और उनकी चुचियों को मसलते हुए कहा- इसमें कौन सी बड़ी बात है.

वो मुझे खींचते हुए अपने कमरे में ले गईं और कमरे की कुण्डी लगा दी.
 
अगले कुछ ही पलों में हम दोनों नंगे थे. आंटी मेरा लम्बा लंड देख कर मस्त हो गईं और बैठ कर मेरे लंड को चूसने लगीं. मैंने भी आंटी को खूब चूसा.

सुषमा आंटी बोलीं- अब जल्दी से मेरा काम उठा दो … नहीं तो मिष्टी आ जाएगी.

मैंने आंटी को बिस्तर पर चित लिटाया और उनकी चुत में लंड पेल दिया.

मेरा बड़ा लंड लेते ही आंटी की चीख निकल गई और अगले कुछ ही मिनटों में आंटी मेरे लंड से अपनी चुत की खाज मिटवाने लगीं.

मैंने बीस मिनट तक आंटी की चूत को ठोका और उनके पेट पर अपने लंड का माल निकाल दिया.

अभी हम दोनों सेक्स करके फ्री ही हुए थे कि मिष्टी की आवाज आ गई.

आंटी ने झट से अपने कपड़े उठाए और बाथरूम में घुसते मुझसे कपड़े पहन कर बाहर जाने का कह दिया.

मैंने अपने कपड़े उठाए और नंगा ही बाहर आ गया.

मिष्टी ने मुझे नंगा देखा, तो वो समझ गई कि मैंने उसकी मम्मी की चुदाई कर दी है.

वो मेरे लंड को चूसने लगी और बोली- अब आज ही तुम मुझे मेरी मम्मी के सामने चोद कर जाओगे.

मैंने उसे नंगी कर दिया और सोफे पर लिटा कर उसकी चुत चूसने लगा. दो मिनट बाद सुषमा आंटी कमरे से बाहर निकलीं, तब तक मैंने मिष्टी की चुत में लंड पेल दिया था.

मुझे सुषमा आंटी का कोई डर नहीं था. आंटी ने मुझे चुदाई करते देखा, तो वो वापस कमरे में जाने लगीं.

मैंने मिष्टी से कहा- अपनी मम्मी को भी बुला लो.

उसने मम्मी को आवाज दी. उसकी मम्मी बाहर आ गईं.

मैंने आंटी को अपने पास खींचा और उनको भी नंगी कर दिया.

आंटी कुछ नहीं बोलीं, शायद वो खुद भी अपनी बेटी के सामने मुझसे चुदवाना चाह रही थीं. उनकी यही मंशा थी कि घर में ही कोई चोदने वाला फिट हो जाए और उनकी बेटी को भी उससे कोई ऐतराज न हो.

इस तरह से उस दिन मैंने आंटी के सामने मिष्टी की चुदाई करके उन दोनों को एक साथ चोदने का प्रोग्राम सैट कर लिया था. अब सुजन की एंट्री करवाना बाकी थी.

इसके बाद से मैं आंटी के सामने बेखौफ चुदाई का खेल खेलने लगा.

मैंने मिष्टी से जब इस बात को कहा, तो वो बोली कि तुम किसी भी दिन घर में सुजन को ले आओ. मेरी मम्मी को उससे एक बार मिलवा दो.

मैं एक हफ्ते के बाद सुजन को आंटी से मिलवाने लाया.

आंटी ने सुजन को देखा तो मुझे अलग ले जाकर पूछा- ये कौन है?

मैंने बताया कि ये आपको चोदने के लिए कैसा रहेगा.

आंटी को तो लंड की भूख थी … उन्होंने मुझसे पूछा- बिस्तर में सही काम करेगा?

मैंने कहा एक बार इसका लंड लेकर देखो. मुझसे थोड़ा छोटा है … लेकिन मोटा ज्यादा है. देर तक चलता भी है.

वो हंस कर बोलीं- क्या तुम दोनों एक साथ चुदाई कर चुके हो?

मैंने सुषमा आंटी की चूचियां मसलते हुए कहा कि हां हम दोनों कई बार एक साथ चुदाई कर चुके हैं, यदि आप बोलो तो आपकी खिदमत में सुजन को पेश कर दूँ?

आंटी मन ही मन खुश हो रही थीं. वे बोलीं- तुम बस इतना देख लो कि किसी तरह की बदनामी न हो.

मैं समझ गया कि सुजन के लंड की सैटिंग हो गई है. मैंने कहा कि आज रात को ही उसको बुला लेता हूँ.

आंटी ने हंस कर मुझे चूम लिया और कहा कि आज रात हम मिष्टी को शामिल नहीं करेंगे.

मैंने हां कर दी, लेकिन मुझे मालूम था कि मिष्टी इस बात से मानेगी नहीं, वो पूरे समय पर इस ग्रुप सेक्स का हिस्सा बनेगी.

सुजन को अलग ले जाकर मैंने कह दिया- भाई तेरी चमन चुत चुदाई के लिए राजी हो गई है.

सुजन ने अपनी ख़ुशी जताते हुए पूछा- कब का प्रोग्राम बना है?

मैंने कहा- आज रात को ही उसकी चुत का भोसड़ा बना देते हैं.

उसने पूछा- अभी ही क्यों नहीं?

मैंने कहा- अभी मिष्टी के पापा को आना है.

सुजन ने हामी भर दी.

रात को तय समय के अनुसार हम दोनों मिष्टी के घर पहुंच गए.

उनके घर पर मिष्टी के पापा हमेशा की तरह अपने बिजनेस के सिलसिले में घर से बाहर निकल गए थे.

घर पहुंच कर मैंने सुजन को सुषमा आंटी को सौंपते हुए कहा- आप इसको चखो, जब तक मैं बाहर बैठा हूँ. मैं आपको बाद में ज्वाइन कर लूंगा.

आंटी ने मुझे हग किया और मेरा लंड दबाते हुए कहा कि तुम मिष्टी से उसके कमरे में जाकर मिलो, जब तक मैं सुजन के साथ बात करती हूँ.

सुजन सुषमा आंटी को उनके रूम में ले गया. आंटी ने कमरे में जाते ही कमरा बंद कर लिया … मगर मैंने सुजन को इशारा कर दिया था कि तुम दरवाजा खोल देना.

अन्दर जाकर सुजन ने आंटी को नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया. आंटी उसके मोटे लंड को चूसने लगीं.

कुछ ही देर में सुजन ने दरवाजा खोल दिया. आंटी मना करते रह गईं और सुजन ने दरवाजा खोलते हुए मुझे आवाज लगा दी.

आंटी कुछ न कह सकीं.

मैं और मिष्टी एकदम नंगे होकर सुषमा आंटी के कमरे में आ गए. आंटी ने जब हम दोनों को नंगा देखा, तो वो समझ गईं कि सुजन भी मिष्टी को चोद चुका है.

आंटी ने मुझे खींचते हुए कहा- मतलब तुम तीनों का पहले से ही ग्रुप सेक्स का प्रोग्राम था.

मैंने हंसते हुए आंटी की चूचियां मसल दीं.

बस फिर क्या था … हम चारों एक ही बिस्तर पर चुदाई के महा खेल में लग गए.

पहले मैंने मिष्टी की चोदा और सुजन ने सुषमा आंटी को चोदा. इसके बाद मैंने आंटी की गांड में तेल लगाया, तो आंटी कहने लगीं- मैं इस छेद में पहली बार लंड ले रही हूँ … जरा धीरे से करना.

मैंने आंटी की गांड में लंड लगाने से पहले सुजन से मिष्टी की गांड में लंड पेलने का इशारा कर दिया. सुजन ने मिष्टी को कुतिया बनाते हुए उसकी गांड में लौड़ा पेल दिया. मिष्टी एक मीठी सी सिसकारी लेते हुए गांड मराने लगी. उसे गांड मराते हुए देख कर आंटी की हिम्मत भी बढ़ गई और उन्होंने ख़ुद कुतिया बन कर मेरे लंड को अपनी गांड में फिट करवा लिया.

मैंने भी बिना देरी किए आंटी की गांड में लंड ठोक दिया. आंटी की तेज चीख निकल गई, लेकिन मुझे मालूम था कि ये दर्द कुछ ही देर का है.

मैंने लंड पेलता गया और दो मिनट से भी कम समय में आंटी गांड मराने का सुख लेने लगीं.

इसके बाद गांड चुदाई के बीच में ही हम दोनों ने छेद बदल लिए. अब मैं मिष्टी की गांड मारने लगा था और आंटी की गांड में सुजन का लंड फिट हो गया था.

एक घंटे बाद मैंने आंटी से कहा- अब आपके दोनों छेद चालू हो गए हैं और अब आप सैंडविच सेक्स का मजा भी ले लो.

आंटी की समझ में नहीं आया. मैंने कहा कि अभी सब समझ आ जाएगा.

मैंने मिष्टी को इशारा किया और उसने मेरे लंड को अपनी चुत में लेते हुए मेरी गोद में झूल गई, उसके बाद सुजन ने मिष्टी की गांड में लंड पेल दिया. मिष्टी सैंडविच सेक्स का खेल दिखाने लगी.

आंटी की आंखें फ़ैल गईं. पहले तो वो डरीं, लेकिन अपनी चुत से निकली चुत को दोनों तरफ से बजते देखा, तो वो भी सैंडविच सेक्स के लिए राजी हो गईं.

मैंने मिष्टी को अलग किया और आंटी को चोदना चालू कर दिया. आंटी मेरे ऊपर थीं. तभी पीछे से सुजन ने आंटी की गांड में लंड पेल दिया. आंटी को दर्द होने लगा, तो सुजन ने आंटी को किस करना शुरू कर दिया, मैंने बूब्स चूसना शुरू कर दिया.

फिर हम दोनों ने उन दोनों को एक साथ चोदा. मिष्टी हम दोनों के लंड के साथ अपनी मम्मी की चूत भी चूस रही थी. फिर जब हम दोनों के लंड झड़ गए तो उन दोनों माँ बेटी ने आपस में चुत चटाई की.

करीब तीन घंटे बाद हम दोनों दोस्त अपने घर चले गए.

फिर उसकी सगाई वाले दिन हम उसके घर गए और भाई और पापा से मिले.

मिष्टी की मम्मी ने कहा- ये हमारे दूर के रिश्तेदार हैं.

हम तीनों लोग उस रूम में गए, जिधर मिष्टी बैठी हुई थी. हम दोनों ने मिलकर उन दोनों को चोदा. आज की चुदाई बहुत जल्दी में चल रही थी. लेकिन मजा बहुत आया.

फिर शादी वाली रात को हम दोनों दोस्त ने मिलकर मां और बेटी को एक साथ चोदा.

उस दिन सुजन ने चुदाई करते समय अपना बीज मिष्टी की चुत में डाल दिया और कहा कि तुम्हारी चूत से हमारा बच्चा ही होना चाहिए.

उसने हंस कर हामी भर दी. उसने कहा कि मैं तुम दोनों को कैसे भूल सकती हूँ.

जब शादी के बाद घर आई, तो उसने हम दोनों को भी बुलाया और बताया कि सुहागरात वाले दिन ही मैं बिना कंडोम के चुदवाया था. मैंने उसका सारा पानी बाथरूम में जाकर निकाल दिया. जिससे बच्चा तुम्हारा ही होगा.

बाद में मिष्टी ने प्रेगनेंसी टेस्ट कराया था तो वह पोजीटिव निकला था.

हम चारों लोग बहुत खुश हुए.

मिष्टी ने अपने बेबी के जन्म के बाद उसका नाम भी सुजन ही रखा.

मिष्टी की मम्मी को अभी भी हम दोनों खूब चोदते हैं. हमें चुत की कभी कमी नहीं हुई.
 
ट्रेन मे भाई से सुहागरात--1

मेरा नाम बलविंदर कौर है और घर वाले प्यार से मुझे बिल्लो कहते हैं.भाई

का नाम जसविंदर है और हम उसा जस्सी कह कर पुकारते हैं.

मोम को देल्ही में कुछ ज़रूरी काम था और वो जम्मूतवी ट्रेन से देल्ही जा

रही थी..घूमने के बहाने भाई मोम के साथ हो लिया तो मैं भी जाने की ज़िद

करने लगी तो मोम मान गयी.दर असल जो मज़ा आजकल मुझे भाई की छेड़ खानी मे आ

रहा था उस से मैं महरूम रह जाती.ज़रा सा मौका मिलते ही भाई कभी मेरी चुचि

दबा देता तो कभी चुम्मा ले लेता था.

हम नकली लड़ाई भी लड़ते रहते थे जिसमे कभी वो मेरे उप्पर चढ़ कर फ्रॉक

हटा कर मेरी गांद मे लंड गढ़ाता और चुचियाँ मसलता तो कभी मैं उसके लंड को

भींच देती.जवानी मे कदम रखते ही मज़ा आ रहा था.इसी मज़े की मारी मैं भाई

और मोम के साथ चल पड़ी.मज़े की सुरुआत भाई ने ट्रेन मे चढ़ते टाइम ही

मुझे सहारा देने के बहाने मेरी चुचि दबा कर की.सफ़र का पूरा लुतफ उठाने

के लिए मेने ब्रा पहनी ही नही थी. फिर भाई ने मेरी गांद पे भी चिकोटी काट

ली.मेने गांद को सहलाते हुए भाई को एक हल्का सा मुक्का मारा.मोम हमारे

आगे थी इसलिए उन्हे कुच्छ पता नही था कि पिछे उनके लाड़ले बेटा बेटी क्या

गुल खिला रहे हैं. हम एसी-2 के कॅबिन के अंदर दाखिल हो गये ....प्राइवसी

के लिए भाई ने पर्दे खींच दिए.यहा से 3 बजे के करीब ट्रेन चली .

मोम ने नीचे की बर्त पे पसरते हुए कहा क मुझे रेस्ट करने दो, तुम उपर की

बर्त पे चले जाओ.भाई ने वहीं खड़े हो कर टवल लपेट कर जीन्स उतारी और सफ़र

के लिए एलास्टिक वाला पायज़मा पहन लिया.मेने गौर किया कि जीन्स के साथ

भाई ने अंडरवेर भी उतार दिया था...मुझे लगा कि आज तो मुआ चोद के ही

मानेगा.ये सोच कर ही मेरी चूत गिल्ली हो गयी.मेने मोम को सुनाते हुए भाई

से कहा कि वीर जी थोरी देर के लिए कॅबिन से बाहर जाओ, मेने भी कपड़े चेंज

करने हैं.

मोम बीच मे बोल पड़ी "अरी अब कहाँ जाएगा ये, बेटे जस्सी उधर मूह फेर

ले..बिल्लो कपड़े चेंज कर लेगी.भाई ने दूसरी तरफ मूह कर लिया.मैं सलवार

उतारने लगी लेकिन गोल गाँठ लगने की वजह से मेरी सलवार का नारा नही खुला

तो मैं मोम के नज़दीक गयी और नारा खोलने की रिक्वेस्ट की .मोम ने मूह से

खोलने की नाकाम कोशिश की और थक हार कर लेट गयी और जस्सी से बोली कि बेटे

तेरे दाँत मजबूत हैं,बिल्लो का नारा खोल दे.मैं बोल पड़ी...क्या भैया से

? मोम मेरी बात को अनसुना करके बोली कि कल तक तो तुम्हे इकट्ठा नहलाती थी

अब इतना शरमाती है, और जस्सी को कहा कि बेटे नारा खोलते टाइम तुम आँखें

बंद कर लेना,और बिल्लो अगर तुम्हे ज़्यादा शरम आए तो तू भी आँखे बंद कर

लेना,अब मुझे रेस्ट करने दो. मेने देखा कि भाई की नज़र मेरे सलवार के

नारे पे थी जिसे मैं अभी भी हाथ से पकड़े हुए थी. भाई ललचाई नज़रो से

मुझे देखते हुए सामने के बर्त पे बैठ गया.

मेने देखा कि मोम ने भी दूसरी तरफ मूह फेर लिया था.मैं शरमाती सी आगे

बढ़ी और सलवार के नारे का सिरा भाई को पकड़ा दिया और शर्ट को चुचिओ तक

उपर उठा दिया.भाई ने एक हाथ मेरे हेवी चूतड़ पे रखा और मेरी नाभि को चूम

लिया.फिर भाई जीभ नाभि मे डाल कर घुमाने लगा.मेरे सारे बदन मे करेंट सा

दौड़ने लगा.फिर भाई दांतो से सलवार का नारा खोलने लगा और जल्दी ही सलवार

खुल कर मेरे पैरों मे जा गिरी.भाई ने तेज़ी से मेरी चढ्ढि नीचे खिसका दी

और दोनो हाथ मेरे चूतदों पे लगा कर मेरी फूली हुई चूत का चुम्मा ले लिया.

आज सवेरे ही मेने चूत को साबुन की तरह चिकना बनाया था.मेने मूड कर मोम को

देखा, वो अभी भी दूसरी तरफ मूह करके लेटी हुई थी .जब भाई ने चूत पे जीभ

फेरना शुरू किया तो मेने मूह पे हाथ रख के सिसकारी को रोका. मेने भाई को

कंधा पकड़ कर हिलाया, उसने मेरी तरफ देखा तो मेने उपर वाली बर्त पे चलने

का इशारा किया.फिर मेने भी चढ्ढि और शर्ट उतार कर नाइटी पहन ली, ब्रा तो

मे पहले ही उतार कर चली थी.मोम ने हमारी तरफ देखे बगैर ही पुछा " बेटी

नारा खुल गया क्या ?".मेने कहा कि हाँ मम्मी मेने कपड़े भी बदल लिए

हैं.मोम बोली कि अच्छा बेटी, अब तुम भी रेस्ट कर लो". मैं बोली कि मम्मी

हम उपर वाले बर्त पे लेट जाते हैं . मोम ने कहा कि ठीक है बेटा, जहाँ

तुम्हारा दिल करे , सारे कॅबिन मे हम तीन ही तो हैं.मोम के ठीक उपर वाली

बर्त पे पहले मैं उपर चढ़ि तो भाई ने दोनो हाथों से मेरे कूल्हे पकड़े और

मेरे चूतदों के बीच मूह गढ़ा कर मुझे उपर चढ़ाया.फिर भाई भी उपर आगाया और

साथ लेट कर मुझे बाहों मे भर लिया.

मैं डरती हुई भाई के कान मे फुस्फुसाइ "भैया कहीं मम्मी ने देख लिया तो?

भाई मेरे कान से मूह लगा कर धीमी आवाज़ मे बोला " मम्मी हमारे ठीक नीचे

वाली बर्त पे आँख बंद करके लेटी हुई है, उसे हम नज़र नही आएँगे."फिर तो

हम एक दूजे से लिपट गये, हमारे होंठ जुड़ गये.मेने भाई के मूह मे जीभ डाल

दी तो भाई भी मेरी जीभ चूस्ते हुए नाइटी के अंदर हाथ डाल कर मेरी चुचि

दबाने लगा.उमड़ता हुआ तूफान चूत की तरफ इक्कथा हो रहा था.भाई का लंड खड़ा

होकर मेरी चूत पे गाढ़ने लगा.मेने भाई का पायज़मा नीचे खिसका दिया और गरम

मोटे लॉड को हाथ मे ले लिया.भाई ने भी मेरी नाइटी उपर सरका दी और मेरी

चूत को मुति मे भींच दिया.मैं फुर्ती के साथ नाइटी कमर तक उठा कर भाई के

उपर इस तरह हो गयी कि उसका लंड मेरे मूह के पास था और मेरी चूत उनके मूह

पर.

मेने मोटे लंड का सूपड़ा चाटना शुरू किया तो भाई भी जीभ निकाल कर मेरी

चूत को चाटने लगा..फिर मैं लौदे को गले तक निगल कर मूह को उपर नीचे करने

लगी तो भाई भी चूत के टींट से लेकर गांद के छेद तक चाटने लगा.सफ़र का

बड़ा मज़ा अरहा था.मे 2 मिनिट मे ही खलास हो गयी.भाई चूत से निकला सारा

कुँवारा अमृत पी गया.थोड़ी देर की सुस्ती के बाद मे फिर लंड को चूसने लगी

क्योकि भाई अभी नही झाड़ा था.भाई की जीभ ने फिर कमाल दिखाना शुरू कर

दिया...जीभ की नोक चूत के टिंट को गिट्टार बजाने की तरह छेड़ रही थी.मैं

दुबारा झड़ने लगी तो भाई ने भी नीचे से झटका सा मारा और लंड के पानी की

तेज बोच्चरें मेरे गले से टकरा कर नीचे उतरने लगी. लंड को दबा दबा कर मैं

आखरी बूँद तक चाट गयी. थोड़ी देर के बाद मैं सुसू करने के लिया गई. आगे

के कॅबिन में एक स्मार्ट लड़का था .

उस ने मुझे देखा में ने भी उसे देखा और फिर में टाय्लेट चली गई, वो भी

टाय्लेट के बाहर आ कर खड़ा हो गया, मैं जैसे ही निकली उस ने मुझ से पुछा

आप कहा जा रही हो तो में ने बताया कि में अपनी मोम और भाई के साथ देल्ही

जा रही हूँ, मैं वही खड़ी होकर उस से बातें करने लगी , उस ने बताया कि वो

अपनी सिस्टर को लेकर देल्ही जा रहा है फिर मैं उस की सीट पे बैठ गई और उस

की सिस्टर से बातें करने लगी , में ने ध्यान दिया कि वो लड़का बार बार

मेरी चुचि की तरफ देख रहा है, में ने भी उसे छूट देदी और अपना दुपट्टा

थोड़ा नीचे कर दिया , फिर में ने कहा कि मैं अपनी मोम और भाई से कह कर

आती हूँ कि में यहा बैठी हूँ नही तो मोम परेशान होगी, और मैं अपनी मोम के

पास चली गई और जा कर कहा कि मेरी एक फ्रेंड मिल गई है मैं उसी के पास

बैठने जा रही हूँ, मोम ने कहा ठीक है तुम भैया के साथ चली जाओ, ट्रेन

करीब करीब खाली ही थी कुछ ज़्यादा लोग नही थे , मेरा भाई भी मेरे साथ

आगेया, मेरा भाई और मैं दोनो ही मिलन के लिए मरे जा रहे थे..

ख़ासकर मेरा दिल तो बस भाई से चुदाई के लिए तड़फ़ रहा था .पर हम आपस मे

शरमाते थे.यह अलग बात है के वो भाई का प्यार दिखाने के लिए मुझे बाहों मे

भर लेता,मेरे गाल का चूमा ले लेता और कई बार मेरे चूतादो पर चिकोटी भी

काट लेता पर चुदाई के अरमान हम दोनो के दिल मे ही थे.आज हम बहुत आगे बढ़

चुके थे.मुझे इस बात का पूरा अहसास था कि भाई आज मेरी ज़रूर लेगा . ये तो

हम जानते थे के एक बार बस शुरुआत हो गई तो फिर हम सारी कसर निकाल

देंगे.एक दूसरे से पहल करने की उम्मीद लगाए बैठे थे. हम वाहा पे बैठ कर

बातें करने लगे तो मेरे भाई ने मेरे कान मे कहा कि दीदी वो लड़का

तुम्हारी चुचि को देख रहा है तो में ने कहा हां मुझे मालूम है इसी लिए तो

दिखा रही हूँ ,तुम भी उसकी बेहन को अपना निकाल कर दिखा दो.

हम बातें करते रहे फिर उस लड़के की सिस्टर को सुसू लगी और वो सुसू करने

चली गई, मुझे मोका मिल गया, और में ने उस लड़के से बात करना शुरू कर दिया

उस ने एक किताब ली हुई थी, हम ने अभी बातें शुरू ही की थी कि उस की

सिस्टर वापिस आगाई, और वो उठ कर जाने लगा तो में ने पुछा आप कहा जा रहे

हो तो उस ने कहा में बाथरूम जा रहा हूँ तो में ने कहा कि ज़रा ये बुक

देते जाए तो उस ने कहा नही में ये बुक नही दे सकता, में समझ गई कि ये कॉन

सी बुक है, फिर भी मैने उस के हाथ से बुक लेने की कोशिश की और कहा प्ल्ज़

बुक दीजिए ना जब आप आओगे तो मैं बुक दे दूँगी और झटके से बुक मेरे हाथ

में आगाई , मालूम नही उस ने क्या सोचा और चुप चाप वाहा से चला गया जब में

ने बुक खोला तो उस के अंदर एक बुक थी, जब में ने उस बुक को खोला तो मेरे

शक सही निकला वो एक सेक्सी स्टोरी की बुक थी. मैं और मेरा भाई दोनो ही उस

बुक को पढ़ने लगे हम ने थोड़ी देर में ही सारी स्टोरी पढ़ ली,स्टोरी भाई

बेहन की चुदाई की थी.मेने उस लड़की से पुछा के तुम्हे पता है के तुम्हारा

भाई कैसी किताब पढ़ता है तो उसने कहा इसमे हैरानी की क्या बात है,हम तो

अक्सर दोनो इकट्ठे पढ़ते हैं . आजकल तो भाई बेहन का लव अफेर आम बात

है.क्या तुम अपने भाई से प्यार नही करती?"

मेने कहा के प्यार तो हम भी आपस मे करते हैं पर ये किताब वाला प्यार नही.

इस पर वो बोली के" इसका मतलब है के असली स्वाद तो तुमने अभी चखा ही नही

है, गरम पानी से घर नही जला करते, आग मे डूब कर देखो"और फिर बुक को हाथ

में लेकर बैठ गई थोड़ी देर में वो लड़का वापिस आया, तो में ने उसे बुक

देते हुए कहा इस बुक की कहानी बहुत अच्छी है , इसी बीच उस की सिस्टर उपर

के बर्थ पे सोने चली गई, जब में ने उस से उस बुक की तारीफ की तो वो समझ

गया कि लाइन क्लियर है, तो उस ने मुझ से धीरे से कहा कि अगर आप अपने भाई

को जाने को कहो तो में एक और बुक देता हूँ उस में इस से भी अच्छी कहानी

है तो में ने उस से कहा कि कोई बात नही है मेरा भाई और में एक दम दोस्त

की तरहा है आप हमे बुक दो हम साथ में पढ़ेंगे, तो उस ने इशारे से पुछा की

बुक पढ़ने दूँगा तो कोई फ़ायदा होगा क्या?

तो में ने भी कह दिया रात होने दो कुछ ना कुछ तो फ़ायदा दिलाउन्गि, इस पर

उस ने कहा कि तुम अपने भाई से खुली हो तो उसे भी कुछ फ़ायदा होगा, तो में

ने अपने भाई से कहा क्यू तुम्हे इस से कुछ फ़ायदा होगा और आँख मार दी तो

मेरा भाई ने मेरी चुचि अपने हाथ से दबाते हुए कहा हां होगा, इस पर वो खुश

हो गया और अपने बॅग से एक बुक निकाल कर दिया वो रंगीन बुक थी उस में एक

से बढ़ कर एक फोटो और कई कहानिया थी मेने उस से कहा कि में बुक लेकर अपनी

मोम के पास जा रही हूँ क्योंकि अगर वो यहा पे आगाई तो ग़लत समझेंगी तुम

थोड़ी देर बाद अपनी सिस्टर को मेरे पास भेजना वो मुझे बुलाकर यहा पे ले

कर आएगी तब तक रात भी हो जाएगी और फिर हम सब को फ़ायदा हो जाएगा.इस पर उस

ने कहा ठीक है में ऐसा ही करूँगा, फिर में और मेरा भाई वो बुक लेकर मोम

के पास आए, और फिर में उपर के बर्त पे चली गई और उस में रंगीन फोटो देखने

लगी, थोड़ी देर में भाई भी उपर आया और मेरे साथ फोटो देखने लगा और मेरी

चुचि दबाने लगा, में फोटो देख कर काफ़ी हॉट हो चुकी थी, में ने अपने भाई

का हाथ पकड़ कर सलवार के नारे पर रख दिया.वो समझ गया और धीरे से मेरी

सलवार का नारा खोल कर मेरी बाल रहित योनि के ऊपेर हथेली रख दी.

तवा गरम हो चुका था. मेने उसकी हथेली को अपनी चूत के ऊपेर दबाया तो वो

मेरी चूत को मुति मे भरने लगा ,फिर चूत मे उंगली करने लगा और मेने भी

आहिस्ता से उसका पयज़ामा खोल कर विकराल लंड को थाम लिया. हाए कितना मोटा

और गरम था.मेरे बदन मे मज़े की मद होशी सी छाने लगी.मेने एक बार नीचे

झाँक कर देखा, मोम हमारी बर्त के बिल्कुल नीचे आँखें बंद किए लेटी हुई

थी.बेफिकर हो कर मेने भाई के लंड का चुम्मा लिया.

मैं लंड को मूह मे भरने लगी तो कुच्छ आहट सी हुई.सर उठा कर देखा तो उस

लड़के की बहेन थी .वो मेरी मोम से मिली थोड़ी देर बाद उस ने मुझ से कहा

चलो ना वही पे बैठते है तो मेरी मोम ने कहा की हां हां तुम लोग जाओ अपनी

फ्रेंड के साथ , भाई को भी साथ ले जाओ मगर जल्दी अजाना और खाना खा लेने

फिर खाना खा के चली जाना, हम ने कहा ठीक है, मगर जब हम वाहा पे गये तो वो

लड़का वही पे बैठा था उस ने अपनी सिस्टर को थॅंक्स कहा , और फिर हम बातें

करने लगे, बातो बातो में पता चला कि वो दोनो सगे भाई बहेन है मगर वो भी

आपस में चुदाई का मज़ा लेते है, उस लड़की ने मुझ से खुल कर कहा कि "घर पे

कई दिन से मौका नही मिल रहा था,मैं आज मेरे भाई से चुदवाउन्गि, मुझे खुशी

हुई कि अब कोई डर नही है हम आराम से चुदाई का मज़ा ट्रेन में भी ले सकते

हैं,

Train Me Bhai Se Suhagraat--1

Mera naam Balwinder Kaur hai aur ghar wale pyar se mujhe Billo kehte

hain.Bhai ka naam Jaswinder hai aur hum usai Jassi keh kar pukarte

hain.

Mom ko delhi mein kuch jaruri kam tha aur wo Jammutawi train se Delhi

ja rahi thi..Ghumne ke bahane bhai mom ke sath ho liya to me bhi jane

ki jid karne lagi to mom maan gayi.Dar asal jo maza aajkal mujhe bhai

ki chher khani me araha tha us se me mehroom reh jati.Jara sa mauka

milte hi bhai kabhi meri chuchi daba deta tau kabhi chumma le leta

tha.

Hum nakli ladai bhi ladte rahte the jisme kabhi wo mere uppar chadh

kar frock hata kar meri gaand me lund gadata aur chuchian masalta tau

kabhi me uske lund ko bhinch deti.Jawani me kadam rakhte hi maza araha

tha.Isi maze ki mari me bhai aur mom ke sath chal padi.Maze ki suruwat

bhai ne train me chadhte time hi mujhe sahara dene ke bahane meri

chuchi daba kar ki.Safar ka poora lutaf uthane ke liye mene bra pehni

hi nahi thi. Phir bhai ne meri gaand pe bhi chikoti kat li.Mene gaand

ko sehlate hue bhai ko ek halka sa mukkaa mara.Mom hamare aage thi

isliye unhe kuchh pata nahi tha k pichhe unke ladle beta beti kya gul

khila rahe hain. hum AC-2 ke cabin ke ander dakhil ho gaye ....Privacy

ke liye bhai ne parde khinch diye.yaha se 3 baje ke karib train chali

.

Mom ne niche ki berth pe pasarte hue kaha k mujhe rest karne do, tum

upar ki berth pe chale jao.Bhai ne wahin khade ho kar towel lapet kar

jeans utari aur safar ke liye elastic wala payzama pehan liya.Mene

gaur kiya k jeans ke sath bhai ne underwear bhi utar diya tha...Mujhe

laga k aaj tau mua chod ke hi manega.ye soch kar hi meri choot gilli

ho gayi.mene mom ko sunate hue bhai se kaha k vir ji thori der ke liye

cabin se bahar jao, mene bhi kapde change karne hain.

Mom bich me bol padi "ari ab kahan jayega ye, bete Jassi udhar muh

pher le..Billo kapde change kar legi.Bhai ne dusri taraf muh kar

liya.Me salwar utarne lagi lekin gol gaanth lagne ki vajah se meri

salwar ka nara nahi khula tau me mom ke najdik gayi aur nara kholne ki

request ki .Mom ne muh se kholne ki nakaam koshish ki aur thak haar

kar let gayi aur Jassi se boli k bete tere daant majboot hain,Billo ka

nara khol de.Me bol padi...Kya bhaiya se ? Mom meri baat ko ansuna

karke boli k kal tak tau tumhe ikktha nahlati thì ab itna sharmati

hai, aur Jassi ko kaha k bete nara kholte time tum ankhen band kar

lena,Aur Billo agar tumhe jyada sharam aye tau tu bhi ankhe band kar

lena,ab mujhe rest karne do. Mene dekha k bhai ki nazar mere salwar ke

nare pe thi jise me abhi bhi hath se pakde hue thi. Bhai lalchai nazro

se mujhe dekhte hue samne ke berth pe baith gaya.

Mene dekha k mom ne bhi dusri taraf muh pher liya tha.Me sharmati si

aage barhi aur salwar ke nare ka sira bhai ko pakra diya aur shirt ko

chuchion tak upar utha diya.Bhai ne ek hath mere heavy chutad pe rakha

aur meri nabhi ko chum liya.phir bhai jibh nabhi me dal kar ghumane

laga.mere sare badan me current sa daurne laga.phir bhai daanto se

salwar ka nara kholne laga aur jaldi hi salwar khul kar mere pairon

me ja giri.bhai ne teji se meri chadhi niche khiska di aur dono hath

mere chutadon pe laga kar meri phuuli hui choot ka chumma le liya.

Aaj savere hì mene choot ko sabun ki tarah cìkna banaya tha.mene mud

kar mom ko dekha, wo abhi bhi dusri taraf muh karke leti hui thi .jab

bhai ne choot pe jibh pherna shuru kiya tau mene muh pe hath rakh ke

siskari ko roka. mene bhai ko kandha pakad kar hilaya, usne meri

taraf dekha tau mene upar wali berth pe chalne ka ishara kiya.phir

mene bhi chadhi aur shirt utar kar nighty pehan li, bra tau me pehle

hi utar kar chali thi.mom ne hamari taraf dekhe bagair hi puchha "

beti nara khul gaya kya ?".mene kaha k han mummy mene kapde bhi badal

liye hain.mom boli k achha beti, ab tum bhi rest kar lo". me boli k

mummy hum upar wale berth pe lait jate hain . mom ne kaha k thik hai

beta, jahan tumhara dil kare , sare cabin me hum tin hi tau hain.Mom

ke thik upar wali berth pe pehle me upar charhi tau bhai ne dono

hathon se mere kulhe pakde aur mere chutadon ke beech muh gada kar

mujhe upar charhaya.Phir bhai bhi upar agaya aur sath lait kar mujhe

bahon me bhar liya.

Me darti hui bhai ke kaan me phusphusai "bhaiya kahin mummy ne dekh

liya tau? Bhai mere kaan se muh laga kar dhimi awaz me bola " mummy

hamare thik niche wali berth pe aankh band karke leti hui hai, usai

hum nazar nahi ayenge."phir tau hum ek duje se lipat gaye, hamare

honth jur gaye.Mene bhai ke muh me jibh dal di tau bhai bhi meri jibh

chuste hue nighty ke ander hath dal kar meri chuchi dabane

laga.Umadta hua tufaan choot ki taraf ikkatha ho raha tha.Bhai ka lund

khada hokar meri choot pe garne laga.mene bhai ka payzama niche khiska

diya aur garam mote laude ko hath me le liya.bhai ne bhi meri nighty

upar sarka di aur meri choot ko muthi me bhinch diya.me furti ke sath

nighty kamar tak utha kar bhai ke upar is tarah ho gayi k uska lund

mere muh ke paas tha aur meri choot unke muh par.

Mene mote laude ka supada chatna shuru kiya tau bhai bhi jibh nikal

kar meri choot ko chatne laga..phir me laude ko gale tak nigal kar muh

ko upar niche karne lagi tau bhai bhi choot ke teent se lekar gaand ke

chhed tak chatne laga.safar ka bada maza araha tha.Me 2 minute me hi

khalas ho gayi.Bhai choot se nikla sara kunwara amrit pi gaya.Thodi

der ki susti ke baad me phir lund ko choosne lagi kyoki bhai abhi nahi

jhada tha.Bhai ki jibh ne phir kamal dikhana shuru kar diya...Jibh ki

nok choot ke tint ko gittar bajane ki tarah chher rahi thi.Me dubara

jhadne lagi tau bhai ne bhi niche se jhatka sa mara aur lund ke pani

ki tej bochharen mere gale se takra kar niche utarne lagi. lund ko

daba daba kar me akhri boond tak chat gayi. thodi der ke baad me susu

karne ke liya gai. aage ke cabin mein ek smart ladka tha .

us ne mujhe dekha mein ne bhi use dekha aur fir mein toilet chali gai,

wo bhi toilet ke bahar aa kar khada ho gaya, mein jaise hi nikli us ne

mujh se puchha aap kaha ja rahi ho to mein ne bataya ki mein apni mom

aur bhai ke sath delhi ja rahi hun, mein wahi khadi hokar us se

baatein karne lagi , us ne bataya ki wo apni sister ko lekar delhi ja

raha hai fir mein us ki seat pe baith gai aur us ki sister se baatein

karne lagi , mein ne dheyan diya ki wo ladka bar bar meri chuchi ki

taraf dekh raha hai, mein ne bhi use chhut dedi aur apna dupatta thoda

niche kar diya , fir mein ne kaha ki mein apni mom aur bhai se keh kar

aati hun ki mein yaha baithi hun nahi to mom pareshan hogi, aur mein

apni mom ke pass chali gai aur ja kar kaha ki meri ek friend mil gai

hai mein usi ke pass baithne ja rahi hun, mom ne kaha thik hai tum

bhaiya ke sath chali jao, train karib karib khali hi thi kuch zyada

log nahi the , mera bhai bhi mere sath aagaya, mera bhai aur mein dono

hi milan ke liye mare ja rahe the..

Khaskar mera dil tau bas bhai se chudai ke liye tadaf raha tha .par

hum apas me sharmate the.Yeh alag baat he ke wo bhai ka pyar dikhane

ke liye mujhe bahon me bhar leta,mere gaal ka chuma le leta aur kai

bar mere chutado par chikoti bhi kat leta par chudai ke arman hum

dono ke dil me hi the.Aaj hum bahut aage barh chuke the.Mujhe is baat

ka pura ahsas tha k bhai aaj meri jarur lega . ye to hum jante the ke

ek bar bas shuruwat ho gai to phir hum sari kasar nikal denge.Ek dusre

se pehal karne ki umeed lagaye baithe the. hum waha pe baith kar

baatein karne lage to mere bhai ne mere kaan me kaha ki didi wo ladka

tumhari chuchi ko dekh raha hai to mein ne kaha haan mujhe malum hai

isi liye to dikha rahi hun ,tum bhi uski behan ko apna nikal kar dikha

do.

hum baatein karte rahe fir us ladke ki sister ko susu lagi aur wo susu

karne chali gai, mujhe moka mil gaya, aur mein ne us ladke se bat

karna shuru kar diya us ne ek kitab li hui thi, hum ne abhi baatein

shuru hi ki thi ki us ki sister wapis aagai, aur wo uth kar jane laga

to mein ne puchha aap kaha ja rahe ho to us ne kaha mein bathroom ja

raha hun to mein ne kaha ki zara ye book dete jaye to us ne kaha nahi

mein ye book nahi de sakta, mein samajh gai ki ye kon si book hai, fir

bhi mein us ke hath se book lene ki koshish ki aur kaha plz book

dijiye na jab aap aaoge to mein book de dungi aur jhatke se book mere

hanth mein aagai , malum nahi us ne kya socha aur chup chap waha se

chala gaya jab mein ne book khola to us ke andar ek book thi, jab mein

ne us book ko khola to mere shak sahi nikla wo ek sexy story ki book

thi. mein aur mera bhai dono hi us book ko padhne lage hum ne thodi

der mein hi sari story padh li,story bhai behan ki chudai ki thi.Mene

us ladki se puchha ke tumhe pata hai ke tumhara bhai kaisi kitab

padhta hai to usne kaha isme hairangi ki kya bat hai,hum to aksar dono

ekathe padhte hain . Aajkal to bhai behan ka love affair aam baat

hai.kya tum apne bhai se pyar nahi karti?"

Mene kaha ke pyar to hum bhi apas me karte hain par ye kitab wala pyar

nahi. Is par wo boli ke" iska matlab hai ke asli swad to tumne abhi

chakha hi nahi hai, garam pani se ghar nahi jala karte, aag me doob

kar dekho"aur fir book ko hanth mein lekar baith gai thodi der mein wo

ladka wapis aaya, to mein ne use book dete hue kaha is book ki kahani

bahut achhi hai , isi bich us ki sister upar ke barth pe sone chali

gai, jab mein ne us se us book ki tarif ki to wo samjh gaya ki line

clear hai, to us ne mujh se dhire se kaha ki agar aap apne bhai ko

jane ko kaho to mein ek aur book deta hun us mein is se bhi achhi

kahani hai to mein ne us se kaha ki koi baat nahi hai mera bhai aur

mein ek dam dost ki tarha hai aap hume book do hum sath mein padhenge,

to us ne ishare se puchha ki book padhne dunga to koi faida hoga kya?

To mein ne bhi keh diya raat hone do kuch na kuch to faida dilaungi,

is par us ne kaha ki tum apne bhai se khuli ho to use bhi kuch faida

hoga, to mein ne apne bhai se kaha kiun tumhe is se kuch faida hoga

aur aankh mar di to mera bhai ne meri chuchi apne hanth se dabate hue

kaha haan hoga, is par wo khush ho gaya aur apne bag se ek book nikal

kar diya wo rangeen book thi us mein ek se badh kar ek photo are kai

kahaniya thi meine us se kaha ki mein ne book lekar apni mom ke pass

ja rahi hun kiun ki agar wo yaha pe aagai to galat samjhengi tum thodi

der bad apni sister ko mere pass bhejna wo mujhe bulakar yaha pe kar

aayegi tab tak raat bhi ho jayegi aur fir hum sab ko faida ho

jayega.is par us ne kaha thik hai mein aisa hi karunga, fir mein aur

mera bhai wo book lekar mom ke pass aye, aur fir mein upar ke berth pe

chali gai aur us mein ki rangeen photo dekhne lagi, thodi der mein

bhai bhi upar aaya aur mere sath photo dekhne laga aur meri chuchi

dabane laga, mein photo dekh kar kafi hot ho chuki thi, mein ne apne

bhai ka hath pakar kar salwar ke nare par rakh diya.Wo samjh gaya aur

dhire se meri salwar ka nara khol kar meri baal rahit yoni ke ooper

hatheli rakh di.

Tawa garam ho chuka tha. Mene uski hatheli ko apni choot ke ooper

dabaya to wo meri chut ko muthi me bharne laga ,phir choot me ungli

karne laga aur meine bhi ahista se uska payjama khol kar vikral lund

ko tham liya. Haye kitna mota aur garam tha.Mere badan me maje ki mad

hoshi si chhane lagi.Mene ek bar niche jhank kar dekha, mom hamari

berth ke bilkul niche ankhen band kiye leti hui thi.befikar ho kar

mene bhai ke lund ka chumma liya.

Me lund ko muh me bharne lagi tau kuchh ahat si hui.sar utha kar dekha

tau us ladke ki behen thi .wo meri mom se mili thodi der baad us ne

mujh se kaha chalo na wahi pe baithte hai to meri mom ne kaha ki haan

haan tum log jao apni friend ke sath , bhai ko bhi sath le jao magar

jaldi aajana aur khana kha lene fir khana kha ke chali jana, hum ne

kaha thik hai, magar jab hum waha pe gaye to wo ladka wahi pe baitha

tha us ne apni sister ko thanks kaha , aur fir hum baatein karne lage,

baato baato mein pata chala ki wo dono sage bhai behen hai magar wo

bhi apas mein chudai ka maza lete hai, us ladki ne mujh se khul kar

kaha ki "ghar pe kai din se mauka nahi mil raha tha,mei aaj mere bhai

se chudaongi, mujhe khushi hui ki ab koi dar nahi hai hum aram se

chudai ka maza train mein bhi le sakte hain,

kramashah.........................
 
ट्रेन मे भाई से सुहागरात--2

गतान्क से आगे...................

वो लोग जिस कॅबिन में थे वो बिकुल खाली था तो उस ने कहा कि तुम दोनो यही

पे सोने अजाना, तो में ने कहा आप ही मोम से कहना कि हम दोनो यही पे

सोएंगे, उस ने कहा ठीक है में तुम्हारी मोम से बात कर लूँगी, थोड़ी देर

में एक स्टेशन आया हम ने चाइ पे फिर में और भाई मोम के पास आए रात के

8:30 बज चुके थे हम ने खाना खाया, फिर हम बैठे ही हुए थे कि वो लड़की उस

का नाम तन्नू था वो आई और मोम से बोली आंटी बिल्लो और जस्सी को आप वाहा

पे भेज दो में अकेली हूँ अपने भाई के साथ उस कॅबिन में कोई नही है तो मैं

बोर हो रही हूँ हम वाहा पे बातें करेंगे फिर ये दोनो वही सो जाएगी, सुबा

आजाएगी , तो मोम ने कहा ठीक है तुम लोग जाओ वही सो जाना, मेरी तो खुशी का

कोई ठिकाना नही था ट्रेन में भी मुझे जुगाड़ मिल गया था, हम वाहा पे आए

और हम चारो बैठ कर बातें करने लगे हम हम चारो एक दम खुल के बातें कर रहे

थे तन्नू ने मुझे और मेरे भाई जस्सी को अपने भाई से अपनी चुदाई के कई

किस्से सुनाए, जिस से मेरी चूत उसी वक्त लंड माँग रही थी,

सेक्स की इच्छा बढ़ती ही जा रही थी , पता ही नही चला कि कब रात के 10 बज

गये हम टाइम हो चुका था कि कुछ किया जाय तो में ने तन्नू से पुछा कि केसे

करना है तो उस ने कहा तुम दोनो बेहन भाई एक एक कर के बाथ रूम में जाना और

वही चुदाई कर लेना, और फिर चाहो तो हम चारो एक साथ बातरूम चलेंगे क्यो कि

रात में कोई बाथरूम नही आएगा तो में ने उस लड़के उस का नाम गौरव था उस से

कहा कि जाओ देख कर आओ कि मेरी मोम सोई है या नही तो वो गया और आकर बताया

कि मोम सो गई है,

तो में ने तन्नू से कहा के पहले तुम गौरव के साथ कर्लो,फिर हम चले

जाएँगे. फिर तन्नू और गौरव दोनो बाथरूम चले गये. पहले हम ने देखा कि हमे

कोई देख तो नही रहा है वाहा पे कोई नही था तो हम दोनो भाई बेहन एक दूसरे

से लिपट गये और किस करने लगे.मैने भाई को कहा के' जस्सी वो तो बाथरूम मे

करके आएँगे, आजा हम यहीं बर्त पर ही जल्दी-2 कर लेते हैं".जस्सी बोला के

दीदी जल्दी-2 मे क्या मज़ा आएगा,जी चाहता है सारी रात करूँ. मेने उसके

गाल पर चिकोटी काट ते हुए कहा बाकी कसर घर चल कर पूरी कर लेना.अभी तो

जल्दी करले.उनके सामने मुझे शरम आएगी.

तन्नू ने बाद मे मुझे बताया था कि जैसे ही बाथरूम का दरवाज़ा बंद किया

गौरव अपनी बेहन के उपर टूट पड़ा और उसे पागलो की तरहा किस करने लगा, उसे

भी उसका किस करना अछा लग रहा था तो उस ने भी किस का जवाब देना शुरू कर

दिया, वो बार बार उसकी चुचि को दबाता जा रहा था उसे किस किए जा रहा था

कभी उसकी चूत को दबाता और कभी उसकी गंद को , उसे अब बर्दाश्त करना

मुश्किल हो रहा था तो उस ने उसे दूर हटा दिया और जल्दी जल्दी अपने सारे

कपड़े उतार दिए, उसे कपड़े उतारते देख कर वो भी अपने कपड़े उतार कर नंगा

हो गया, अब वो दोनो एक दम नंगे थे, तन्नू ने उस का लंड अपने हाथ में पकड़

लिया उस का लंड बहुत ज़्यादा मोटा लंबा था , और फिर उसने तन्नू को किस

करना शुरू कर दिया,तन्नू भी उसे बेतहाशा किस किए जा रही थी उस ने किस

करते हुए अपने हाथ मे गौरव के लंड को लेकर सहलाने लगी. फिर उसके भाई ने

उसा घोड़ी बना कर खूब चोदा.

इधर मुझे भी बड़ा मज़ा आरहा था काफ़ी देर तक मैं और जस्सी किस करते रहे,

उसी बीच में एक बार झाड़ भी गई थी,

फिर जस्सी ने मुझे लंड चूसने को कहा में वही बैठ गई और उस का लंड चूसने

लगी, थोड़ी ही देर में उस ने मेरे सिर को ज़ोर से अपने लंड पे दबा लिया

में समझ गई की इस का पानी निकलने वाला है, और उसी टाइम उस के लंड का पानी

निकल कर सीधे मेरे मूह में गया में ने भी सारा पानी पी लिया एक बूँद भी

नीचे नही गिरने दिया ,आख़िर भाई के लंड से निकला अमृत जो था. फिर उस ने

अपना लंड मेरे मूह से निकालना चाहा मगर में ने नही निकाला में उस के लंड

को अपने मूह में भरी रही ,जी चाहता था के सारी उमर यूही लंड को मूह मे

लिए रहू.मगर उस ने ज़ोर लगा कर अपने लंड निकाल लिया, और अपने कपड़े पहनने

लगा मुझे अच्छा नही लगा ,

में ने तुरंत ही उसे किस करना शुरू कर दिया जिस से वो दोबारा जोश में

आगेया , और एक बार फिर से उस का लंड खड़ा होगया, हम थोड़ी देर तक किस

करते रहे फिर, उस ने अपना लंड मेरी चूत में सटा दिया मगर में ने उसे हटा

दिया तो उस ने कहा क्या हुआ में ने कहा नही अभी चूत नही अभी तुम मेरी

गांद ही मार लो तो भाई मेरे पिच्छवाड़े पे हाथ फेरने लगा.मे उनकी तरफ देख

कर मुस्कुराइ , दोनो तरफ फिर चिंगारी भड़क चुकी थी.मे बेबस हो कर बर्त पर

पेट के बल लेट गयी और अपने घुटनो के बल होकर अपने चूतर हवा मे उठा चौपाया

बन गयी.मेरे गोल मटोल गोरे गोरे चूतर भाई की आँखों के सामने लहरा रहे थे.

भाई से रहा नही गया और झुक कर चूतर को दन्तो से कस कर काट लिया. भाई पिछे

हो कर चूत के साथ साथ गांद पे भी जीभ फेरने लगा तो सारा बदन एक नयी

लज़्ज़त से रोशन हो गया.मेने कूल्हे और उँचे कर लिए. भाई जैसे ही मेरे

उपर चढ़ा तो लंड का सूपड़ा सीधा गांद पे जा लगा. फिर भाई ने मेरे चूतर को

दोनो हाथों से पकड़ कर ज़ोर का धक्का लगाया और भाई का सुपरा मेरी गंद की

छेद मे चला गया. मेरी कसी गंद ने भाई के लंड के सुपरे को जाकड़ लिया.

मुझे थोडा दर्द हुआ. भाई ने दोबारा धक्का दिया और मेरी गंद को फड़ता हुआ

भाई का आधा लंड गंद मे दाखिल हो गया. मे ज़ोर से चीख उठी, "उईइ मा,

दुख़्ता है मेरे राजा." पर भाई ने मेरी चीख पर कोई ध्यान नही दिया और लंड

थोड़ा पीछे खींच कर जोरदार शॉट लगाया. भाई का 9" का लंड मेरी गंद को

चौड़ा हुआ पूरा का पूरा अंदर दाखिल हो गया. मे फिर चीख उठी.

मैं बार बार अपनी कमर को हिला हिला कर भाई के लंड को बाहर निकालने की

कोशिश कर रही थी. भाई ने आगे को झुक कर मेरी चूंची को पकड़ लिया और उन्हे

सहलाने लगा.भाई मेरी गर्दन और गालों की चुम्मियाँ ले रहा था. लंड अभी भी

पूरा का पूरा मेरी गंद के अंदर था. कुछ देर बाद मेरी गंद मे लंड डाले

डाले मेरी चूंची को सहलाता रहा. जब मे कुच्छ नॉर्मल हुए तो अपने चूतर

हिला कर बोली, "चलो राजा अब ठीक है." मेरा सिग्नल पाकर भाई ने दोबारा

सीधे होकर मेरे चूतर पकड़ कर धीरे-धीरे कमर हिला अंदर-बाहर करना शुरू कर

दिया. मेरी गंद बहुत ही टाइट थी. भाई को चोदने मे बड़ा मज़ा आ रहा था.

अब मे भी अपना दर्द भूल कर सिसकारी भरते हुए मज़ा लेने लगी. मेने अपनी एक

उंगली चूत मे डाल कर कमर हिलाना शुरू कर दिया. मेरी मस्ती देख कर भाई भी

जोश मे आ गया और धीरे-धीरे अपनी रफ़्तार बढ़ा दी. भाई का लंड अब पूरी

तेज़ी से मेरी गंद मे अंदर-बाहर हो रहा था. मे भी पूरी तेज़ी से कमर आगे

पीछे करके भाई के लंड का मज़ा ले रही थी. लंड ऐसे अंदर-बाहर हो रहा था

मानो एंजिन का पिस्टन. पूरी कॅबिन मे चुदाई की ठप ठप की आवाज़ गूँज रही

थी. जब मेरे थिरकते हुए चूतर से भाई के अंडकोष टकराते थे तो लगता कोई

तबलची तबले पर ठप दे रहा हो. मे पूरी जोश मे पूरी तेज़ी से चूत मे उंगली

अंदर-बाहर करती हुई सिसकारी भर कर भाई से गांद मरवा रही थी.

हम दोनो ही पसीने पसीने हो गयी थे पर कोई भी रुकने का नाम नही ले रहा था.

मे भाई को बार बार ललकार रही थी, "चोद लो मेरे राजा चोद लो अपनी बेहन की

गंद. आज फाड़ डालो इससे. शाबाश मेरे साजन, और ज़ोर से राज्ज्जा और ज़ोर

से. फाड़ डाली तुमने मेरी तो." भाई भी हुमच हुमच कर शॉट लगा रहा था. पूरा

का पूरा लंड बाहर खीच कर झटके से अंदर डालता तो मेरी चीख निकल जाती. भाई

का लावा अब निकलने वाला था. उधेर मे भी अपनी मंज़िल के पास थी. तभी भाई

ने एक झटके से लंड मेरी गांद मे जड़ तक धंसा दिया. भाई मेरे बदन को पूरी

तरह अपनी बाहों मे समेत कर दनादन शॉट लगाने लगा. मे भी सम्हल कर ज़ोर

ज़ोर से आह उहह करती हुई चूतर आगे-पीछे करके अपनी गांद मे भाई का लंड

लेने लगी. हम दोनो की सांस फूल रही थी. आख़िर भाई का ज्वाला मुखी फुट

पड़ा और भाई मेरी पीठ से चिपक कर मेरी गांद मे झाड़ गया. मे भी झड़ने को

थी और चीख़्ती हुई झाड़ गयी.

तन्नू और गौरव के आने से पहले ही हमने कपड़े पहन लिए, मेने तन्नू से

मज़ाक करते हुए कहा क्या बात है काफ़ी टाइम लगा दिया, कितने स्वाद लिए?

तन्नू ने भी कहा के एक बार मूह में और एक बार गांद में तो मेने कहा अरे

चूत में नही उसने कहा के अभी टाइम है हर जगह पे चुदवाउन्गि, फिर हम बैठ

कर बातें करने लगे,और फिर थोड़ी देर बाद गौरव और जस्सी का फिर से मूड बन

गया, गौरव ने तन्नू को बाहों मे भरते हुए कहा क यार अब हमारे बीच क्या

परदा और हम अपने-2 भाई की बाहों मे समा गयी.अब की बार हम शरमाये नही और

उनके सामने ही किस करने लगे.

उन्हे हमारी सुध कहाँ थी,मेने देखा के गौरव का लंड तन्नू की चूत मे समा

चुका है.लगता था कि वो इसके पहले ही आदि थे.तन्नू बड़े मज़े से ताल से

ताल मिला कर अपने भाई से चुदवा रही थी,मुझे तो डर भी लग रहा था कि पता

नही भाई का मोटा लंड मेरी कुँवारी चूत झेल पाएगी या नही .मेरी पहली रात

थी,फिर भी उनकी चुदाई को देख कर मे रुक ना सकी और तकिये पे पुराना कपड़ा

डाल कर अपने चूतड़ टिकाए और भाई को अपने ऊपेर खींच लिया.जस्सी ने मोटे

लंड का गरम सूपड़ा जैसे ही मेरी चूत पर लगाया,मेरी तो एईद हो गयी.मेने

नीचे से चूतड़ उच्छाले तो गॅप से लंड का सूपड़ा योनि को चौड़ा करता हुआ

अंदर चला गया.मेने बाहों का घेरा भाई पर कस दिया तो भाई ने एक जोरदार

घस्सा मारा, कपड़ा फटने जैसी आवाज़ हुई और उनके अंडकोष मेरी गांद से आ

लगे.चूत को फाड़ कर लंड मेरी नाभि से टकरा रहा था. बर्त पर ही जोरदार

चुदाई शुरू हो गयी.भाई के धक्के तेज होते गये और जल्दी ही मे भी ताल से

ताल मिलाने लगी.ट्रेन के हिचकोलो के साथ कॅबिन मे फ़च फ़च..पाट..पाट..की

आवाज़ें गूँज रही थी.दो भाई और दो बहने स्वर्ग मे गोते लगा रहे थे.

मुझे तो लग रहा था के जैसे ये मेरी सुहागरात है.जब भाई का गरम गरम वीर्य

मेरे गरभ मे गिर रहा था तो मे तीसरी बार झाड़ रही थी.जब सखलन का नशा उतरा

तो हमारा ध्यान दूसरी तरफ गया.वो लड़का अपनी बेहन को घोड़ी बना कर चोद

रहा था और उसकी बेहन भी मज़े से आँख बंद करके गपा गॅप पिछे से भाई का लंड

डलवा रही थी.ये नज़ारा देख कर हमने एक दूजे को देखा और भाई का इशारा समझ

कर मैं घूम कर झुक गई. उस ने अपना लंड पिछे से मेरी चूत में डाल दिया

.लंड मोटा था इस लिए एक बार चूत मरवाने के बाद भी आराम से चूत में नही

गया, और मुझे काफ़ी दर्द हो रहा था,पर भाई का दिया हुआ दर्द था जो कि

बहुत मीठा लग रहा था.

फिर उस ने चूत मे शॉट लगाने शुरू किए. उस के हर घस्से पे में आसमान की

सेर कर रही थी .करीब 10 मिंट तक उस ने मेरी चूत की चुदाई की , इस दौरान

मे दो बार फिर से झाड़ चुकी थी. फिर भाई की रफ़्तार बढ़ गई में समझ गई कि

इस का पानी निकलने वाला है तो में ने उस का लंड अपनी चूत से निकाल कर मूह

में भर लिया और एक बार फिर उस का पानी मेरे मूह में गिरा, इस तरहा से

चलती ट्रेन में चुदवाने का मज़ा ही कुछ और था,वो भी अपने सगे भाई से.

कभी चूत तो कभी गांद हम दोनो जोड़े सारी रात चुदाई मे लगे रहे.सुबह होने

पर हम बेहन भाई मम्मी के पास आकर ऐसे बैठ गये जैसे कुच्छ हुआ ही ना हो.पर

मेरी उलझी लतें और चेहरा पे खुशी का नूर तो सब कुच्छ बता रहा था.सारी रात

की किस्सिंग से मेरे होंठ भी कुच्छ सूज से गये थे.जस्सी मेरे पास मे बैठ

कर फिर मुझे छेड़ने लगा तो मेने धीरे से उसके कान मे कहा के क्या कर रहे

हो, मा देख लेगी,सारी रात तो सोने नही दिया,थोड़ा सा सबर भी नही होता, घर

चल कर दे दूँगी".और ये सिलसिला अब रुकने का नाम नही ले रहा है.हम एक दूजे

के बिना नही रह सकते.

समाप्त

Train Me Bhai Se Suhagraat--2

gataank se aage...................

wo log jis cabin mein the wo bikul khali tha to us ne kaha ki tum dono

yahi pe sone aajana, to mein ne kaha aap hi mom se kehna ki hum dono

yahi pe soyenge, us ne kaha thik hai mein tumhari mom se baat kar

lungi, thodi der mein ek station aaya hum ne chai pe fir mein aur bhai

mom ke pass aye rat ke 8:30 baj chuke the hum ne khana khaya, fir hum

baithe hi hue the ki wo ladki us ka naam Tannu tha wo aai aur mom se

boli anti Billo aur Jassi ko aap waha pe bhej do mein akeli hun apne

bhai ke sath us cabin mein koi nahi hai to mein bore ho rahi hun hum

waha pe baatein karenge fir ye dono wahi soo jayegi, subha aajayegi ,

to mom ne kaha thik hai tum log jao wahi so jana, meri to khushi ka

koi thikana nahi tha Train mein bhi mujhe jugad mil gaya tha, hum waha

pe aaye aur hum charo baith kar baatein karne lage hum hum charo ek

dam khul ke baatein kar rahethe Tannu ne mujhe aur mere bhai Jassi ko

apne bhai se apni chudai ke kai kisse sunaye, jis se meri choot usi

vakt lund maang rahi thi,

sex ki ichha badhti hi ja rahi thi , pata hi nahi chala ki kab raat ke

10 baj gaye hum time ho chuka tha ki kuch kiya jaya to mein ne Tannu

se puchha ki kese karna hai to us ne kaha tum dono behan bhai ek ek

kar ke bath room mein jana aur wahi chudai kar lena, aur fir chaho to

hum charo ek sath bathroom chalenge kiun ki raat mein koi bathroom

nahi aayega to mein ne us ladke us ka naam Gaurav tha us se kaha ki

jao dekh kar aao ki meri mom soi hai ya nahi to wo gaya aur akar

bataya ki mom so gai hai,

to mein ne Tannu se kaha ke pehle tum Gaurav ke sath karlo,phir hum

chale jayenge. fir Tannu aur Gaurav dono bathroom chale gaye. pehle

hum ne dekha ki hume koi dekh to nahi raha hai waha pe koi nahi tha to

hum dono bhai behan ek dusre se lipat gaye aur kiss karne lage.Maine

bhai ko kaha ke' Jassi wo to bathroom me karke ayenge, aaja hum yahin

berth par hi jaldi-2 kar lete hain".Jassi bola ke didi jaldi-2 me kya

maja ayega,jee chahta hai sari raat karun. Mene uske gaal par chikoti

kat te hue kaha baki kasar ghar chal kar puri kar lena.Abhi to jaldi

karle.Unke samne mujhe sharam ayegi.

Tannu ne baad me mujhe bataya tha k Jaise hi bathroom ka darwaza band

kiya Gaurav apni behanke upar tut pada aur use pagalo ki tarha kiss

karne laga, use bhi uska kiss karna acha lag raha tha to us ne bhi

kiss ka jawab dena shuru kar diya, Wo bar bar uski chuchi ko dabata ja

raha tha use kiss kiye ja raha tha kabhi uski chut ko dabata aur kabhi

uski gand ko , use ab bardash karna mushkil ho raha tha to us ne use

dur hata diya aur jaldi jaldi apne sare kapde utar diye, use kapde

utarte dekh kar wo bhi apne kapde utar kar nanga ho gaya, ab wo dono

ek dam nange the, Tannu ne us ka lund apne hanth mein pakad liya us ka

lund bahut zyada mota lumba tha , aur fir usne Tannu ko kiss karna

shuru kar diya,Tannu bhi use betahasha kiss kiya ja rahi thi us ne

kiss karte hue apne hath me Gaurav ke lund ko lekar sehlane lagi. phir

uske bhai ne usai ghodi bana kar khoob choda.

Idhar mujhe bhi bada maza aaraha tha kafi der tak mai aur Jassi kiss

karte rahe, usi bich mein ek bar jhad bhi gai thi,

Fir Jassi ne mujhe lund chusne ko kaha mein wahi baith gai aur us ka

lund chusne lagi, thodi hi der mein us ne mere sir ko zor se apne lund

pe daba liya mein samjh gai ki is ka pani nikalne wala hai, aur usi

time us ka lund ka pani nikal kar sidhe mere muh mein gaya mein ne bhi

sara pani pee liya ek bund bhi niche nahi girne diya ,akhir bhai ke

lund se nikla amrit jo tha. fir us ne apna lund mere muh se nikalna

chaha magar mein ne nahi nikala mein us ke lund ko apne muh mein bhari

rahi ,jee chahta tha ke sari umar yuhi lund ko muh me liye rahu.magar

us ne zor laga kar apne lund nikal liya, aur apne kapde pehnne laga

mujhe achha nahi laga ,

mein ne turant hi use kiss karna shuru kar diya jis se wo dobara josh

mein aagaya , aur ek bar fir se us ka lund khada hogaya, hum thodi der

tak kiss karte rahe fir, us ne apna lund meri chut mein sata diya

magar mein ne use hata diya to us ne kaha kya hua mein ne kaha nahi

abhi chut nahi abhi tum meri gaand hi mar lo tau bhai mere pichhwade

pe hath pherne laga.Me unki taraf dekh kar muskurai , dono taraf phir

chingari bhadak chuki thi.Me bebas ho kar berth par pet ke bal let

gayee aur apne ghutno ke bal hokar apne chutar Hawa me utha chaupaya

ban gayi.mere gol matol gore gore chutar bhai ki ankhon ke samne

lahara rahe the.

bhai se raha nahee gaya aur jhuk kar chutar ko danto se kas kar kat

liya. Bhai pichhe ho kar choot ke sath sath gaand pe bhi jibh pherne

laga tau sara badan ek nayee lazzat se roshan ho gaya.Mene kulhe aur

unche kar liye. Bhai jaise hi mere upar charha tau lund ka supada

sidha gaand pe ja laga. Phir bhai ne mere chutar ko dono hathon se

pakar kar jor ka dhakka lagaya aur bhai ka supara meri gand ki chhed

me chala gaya. meri kasi gand ne bhai ke lund ke supare ko Jakar liya.

Mujhe thora dard hua. bhai ne dobara dhakka diya aur meri gand ko

pharta hua bhai ka adha lund gand me dakhil ho gaya. me jor se cheekh

Uthee, "uiii ma, dukhta hai mere raja." Par bhai ne meri cheekh par

koi dhyan nahee diya aur lund thora peeche kheench kar jordar shot

lagaya. bhai ka 9" ka laura meri gand ko chaura hua pura ka pura andar

dakhil ho gaya. me phir cheekh uthee.

me bar bar apni kamar ko hila hila kar bhai ke lund ko bahar nikalne

ki koshish kar rahee thee. bhai ne aage ko jhuk kar meri chunchee ko

Pakar liya aur unhe sahalane laga.bhai meri gardan aur galon ki

chummian le raha tha. Lund abhi bhi pura ka pura meri gand ke andar

tha. Kuch der bad meri gand me lund dale dale meri chunchee ko

Sahalata raha. Jab me kuchh normal hue to apne chutar hila kar boli,

"chalo raja ab theekh Hai." Mera signal pakar bhai ne dobara seedhe

hokar mere chutar pakar Kar dhire-dhire kamar hila andar-bahar karna

shuru kar diya. meri Gand bahut hi tight thee. bhai ko chodne me bara

maza aa raha tha.

Ab me bhi Apna dard bhool kar siskaree bharte hue maza lene lagee.

mene apni ek unglee choot me dal kar kamar hilana shuru kar diya.

meri mastee dekh kar bhai bhi josh me a gaya aur dhire-dhire apni

raftar barah dee. bhai ka lund ab puree tezee se meri gand me

andar-bahar ho raha tha. me bhi puree tezee se Kamar aage peeche karke

bhai ke lund ka maza le rahee thee. Lund aiese andar-bahar Ho raha tha

mano engine ka piston. Puree cabin me chudai ki thap thap ki awaj gunj

rahee thee. Jab mere thirkte hue chutar se bhai ke andkosh takrate the

to lagta koi tabalchee tabale par thap de raha ho. me puree josh me

puree tezee se choot me unglee andar-bahar kartee huee siskaree bhar

kar bhai se gaand marwa rahee thee.

Hum Dono hi paseene paseene ho gayee the par koi bhi rukne ka nam

nahee le raha tha. me bhai ko bar bar lalkar rahee thee, "chod lo mere

raja chod lo apni behan Ki gand. Aaj phar dalo isse. Shabash mere

sajan, Aur jor se rajjja aur jor se. Phar dalee tumne meri to." bhai

bhi humach humach kar shot laga raha tha. Pura ka pura lund bahar

keench kar jhatke se andar dalta to meri cheekh nikl jatee. bhai ka

lava ab niklne wala tha. Udher me bhi apni manzil ke pas thee. Tabhi

bhai ne ek jhatke se lund meri gaand me jar tak dhans diya. bhai mere

badan ko puree tarah apni bahon me samet kar danadan shot lagane laga.

me bhi samhal kar jor jor se Ahhh uhhhh kartee huee chutar

aage-peeche karke apni gaand me bhai ka lund lene Lagee. Hum dono ki

sans phul rahee thee. Akhir bhai ka jwala mukhi fut para aur bhai meri

peeth se chipak kar meri gaand me jhar gaya. me bhi jharne ko thi aur

cheekhtee huee jhar gayee.

Tannu aur Gaurav ke aane se pehle hi humne kapde pehan liye, mene

Tannu se mazak karte hue kaha kiya baat hai kafi time laga diya, kitne

swad liye? Tannu ne bhi kaha ke ek bar muh mein aur ek bar gaand mein

to mene kaha are chut mein nehi usne kaha ke abhi time hai har jagha

pe chudaungi, fir hum baith kar baatein karne lage,aur fir thodi der

baad Gaurav aur Jassi ka fir se mood ban gaya, Gaurav ne Tannu ko

bahon me bharte hue kaha k yaar ab hamare bich kya parda aur hum

apne-2 bhai ki bahon me sama gayi.Ab ki bar hum sharmaye nahi aur unke

samne hi kiss karne lage.

Unhe hamari sudh kahan thi,mene dekha ke Gaurav ka lund Tannu ki chut

me sama chuka hai.lagta tha ki wo iske pehle hi aadi the.Tannu bade

maje se taal se taal mila kar apne bhai se chudwa rahi thi,mujhe tau

dar bhi lag raha tha k pata nahi bhai ka mota lund meri kunwari choot

jhel payegi ya naì .Meri pehli raat thi,phir bhi unki chudai ko dekh

kar me ruk na saki aur takiye pe purana kapda dal kar apne chutad

tikaye aur bhai ko apne ooper khinch liya.Jassi ne mote lund ka garam

supada jaise hi meri chut par lagaya,meri to eid ho gayi.Mene niche se

chutad uchhale to gap se lund ka supada yoni ko chauda karta hua ander

chala gaya.Mene bahon ka ghera bhai par kas diya to bhai ne ek jordar

ghassa mara, kapda phatne jaisi awaz hui aur unke andkosh meri gaand

se aa lage.Choot ko phaar kar lund meri nabhi se takra raha tha. berth

par hi jordar chudai shuru ho gayi.Bhai ke dhakke tej hote gaye aur

jaldi hi me bhi taal se taal milane lagi.Train ke hichkolo ke sath

cabin me phach phach..pat..pat..ki awazen gunj rahi thi.Do bhai aur do

behane swarg me gote laga rahe the.

Mujhe to lag raha tha ke jaise ye meri suhagraat hai.Jab bhai ka garam

garam virye mere garabh me gir raha tha tau me tisri bar jhad rahì

thì.Jab sakhlan ka nasha utra tau hamara dhyan dusri taraf gaya.Wo

ladka apni behan ko ghodi bana kar chod raha tha aur uski behan bhi

maze se aankh band karke gapa gap pichhe se bhai ka lund dalwa rahi

thi.Ye nazara dekh kar humne ek duje ko dekha aur bhai ka ishara

samajh kar mein ghum kar jhuk gai. us ne apna lund pichhe se meri

choot mein dal diya .lund mota tha is liye ek bar choot marwane ke

baad bhi aram se choot mein nahi gaya, aur mujhe kafi dard ho raha

tha,par bhai ka diya hua dard tha jo ki bahut mitha lag raha tha.

Fir us ne choot me shot lagane shuru kiye. us ke har ghasse pe mein

asman ki ser kar rahi thi .karib 10 mint tak us ne meri choot ki

chudai ki , is dauran me do bar phir se jhad chuki thi. fir bhai ki

raftar badh gai mein samjh gai ki is ka pani nikalne wala hai to mein

ne us ka lund apni choot se nikal kar muh mein bhar liya aur ek bar

fir us ka pani mere muh mein gira, is tarha se chalti train mein

chudane ka maza hi kuch aur tha,wo bhi apne sage bhai se.

Kabhi choot tau kabhi gaand hum dono jode sari raat chudai me lage

rahe.Subah hone par hum behan bhai mummy ke pas aakar aise baith gaye

jaise kuchh hua hi na ho.Par meri uljhi laten aur chehra pe khushi ka

noor to sab kuchh bata raha tha.Sari raat ki kissing se mere honth bhi

kuchh sooj se gaye the.Jassi mere pas me baith kar phir mujhe chhedne

laga to mene dhire se uske kaan me kaha ke kya kar rahe ho, maa dekh

legi,sari raat to sone nahi diya,thoda sa sabar bhi nahi hota, ghar

chal kar de dungi".Aur ye silsila ab rukne ka naam nahi le raha

hai.Hum ek duje ke bina nahi rah sakte.

samaapt
 
बंजारे

मेरा नाम अनिल है उम्र 24 साल। में एक टीचर हूँ मुझे सेक्स से प्यार है मुझे कुँवारी लड़कियो से सेक्स करना बिल्कुल भी पसंद नहीं। मुझे ज्यादा उम्र की आंटी बड़ी गांड वाली सेक्स मे जानकार आंटी मेरी हमेशा से पसंद रही है मुझे आंटीयो से सेक्स करना मजेदार लगता है मैने कई औरतो लड़कियो को चोदा है। थैंक्स फॉर ऑल आंटीस गर्ल्स मुझसे चुदवाने के लिये।

में आप लोगो को बोर नहीं करूगाँ। में अपनी स्टोरी सुनाता हूँ। हुआ यू की आज से 5 महीने पहले मैने करीब 10-11 दिन से चुदाई नहीं की थी। कोई जुगाड़ नहीं लग रहा था मुझे समझ में नहीं आ रहा था की क्या करूँ। तभी मुझे पता चला की यहाँ कुछ बंजारे लोग अपना डेरा डाले है में ये अच्छे से जानता था की इन फैमिली की औरते दिन मे भीख माँगने के साथ अपने ग्राहक सेट करती है और रात मे उनसे चुदवाती है जबकि उनके पति टेंट मे रह के झाड़ू बनाते है या खाना पकाते है अगले दिन सुबह। मैने तुरंत अपनी बाइक उठाई और उनके टेंट के पास पहुचं गया दूर से खड़े हो के सिगरेट पीते हुये। वहाँ मौजूद लडकियों और औरतो मे से अपने लायक औरत तलाश रहा था।

उनमे कई लडकियाँ थी जिनकी उम्र 17 या 18 साल थी लेकिन उनके स्तन इतने बड़े लग रहे थे साफ था की उनको कई मजबूत हाथो ने बड़ा किया था। में उनमे से कोई अपने लायक नही पा सका फिर भी मैने सोचा कोई भी हो यार अब तो चाहिये ही है मैने पास जाकर वहाँ खड़ी एक लड़की को बुलाया थोड़ी देर यहाँ वहाँ की बाते की फिर मैने ऑफर किया चलना है मेरे साथ लेती हो ले लेना वो बोली में अम्मा से पूछ के बताऊँगी। मैने कहाँ जल्दी से जाकर पूछो वो गई।

थोड़ी देर बाद वो आती दिखी लेकिन उसके पीछे पीछे से एक औरत आई। मेंरी उस पर नज़र पड़ते ही सोच लिया लड़की नहीं चाहिये। अब तो ये औरत चाहिये वो भरे जिस्म की औरत ऊँचे कद की बड़े बड़े स्तन मोटी गांड का अंदाज़ा तो उसको सामने से देख के ही लग रहा था वो पास आई मेरे से बोली क्या कह रहे थे ये अभी कही नहीं जायेगी। मैने लड़की की तरफ देख के कहाँ अरे तो जितने पैसे लगते हो उससे 100 ज़्यादा दूगां। लेकिन मुझे ये लड़की नहीं चाहिये। मुझे तू चाहिये वो एकदम से देख के बोली में, मैने कहाँ हाँ तुम वो बोली कहाँ चलना है मैने उसको अपने घर का पता दिया और 50 रुपये एड्वान्स के दिये वो बोली दोपहर मे आऊँगी अभी (उस लड़की के पापा) बापू के साथ दंवाई बनानी है रविवार को बाजार मे बेचने के लिए मैने ठीक है कहाँ और 1 बजे आ जाने के लिए कहाँ में वापस आ गया।

1 बज गये में दरवाजे के पास खड़ा होकर उसका इन्तजार कर रहा था लेकिन उसका पता नहीं था मेरा दिमाग़ खराब हो रहा था मैने सिगरेट जलाई टाइम देखा ओर फिर से बाहर आया। तो मुझे वो लड़की आती दिखी मैने कहाँ चलो लड़की ही सही चूत तो मिलेगी पर उसके पीछे पीछे उसकी माँ आती दिखी में खुश हो गया वो मुझे देख के मेरे पास आ गई में उनको अंदर ले गया खिड़की दरवाजा लगा के उनको बेड मे बिठा के पानी के लिऐ पूछा उन्होंने मना कर दिया मैने पूछा देर क्यों कर दी वो बोली हम पढ़े लिखे नहीं है कई लोगो से पूछा तब जाकर आ पाये है में उन दोनो के बीच मे जाकर बैठ गया और दोनो की एक एक जाँघ पर अपना हाथ रख दिया। लेकिन उनके शरीर से बदबू आ रही थी। मैने कहाँ बाथरूम मे जाकर नहा ले वो लड़की को मैने कहाँ पहले तू जाकर नहा ले वो कपड़े नहीं लाई थी मैने अपने कपड़े देकर कहाँ ये पहन लेना वो नहाने जाने लगी और पूछने लगी कहाँ जाना है तो मैने जाकर उसको साबुन दिया बाथरूम दिखाया।

मैने कहाँ रूको और दौड़ के वापस आया अपना रेजर ब्लेड दिया कहाँ चूत के बाल हटा ले और उसके स्तन और गांड को अच्छे से साफ करना और जल्दी से नहाना वो हँसने लगी तो में वहाँ से उसकी अम्मा के पास आ गया उसकी अम्मा को देख के मैने उसके शरीर से आने वाली बदबू की परवाह नहीं की ओर पास मे जाकर स्तन दबाने लगा मैने पूछा कितने कमा लेती है वो बोली ग्राहक अच्छा मिल गया तो 200 या 300 रुपये मिल जाते है मैने कहाँ तुम लोगो का अच्छा है दिन मे चुदो तो पैसे लो और रात मे पति से चुदो तो........ वो बोली नहीं ऐसा नहीं है रात मे हरामी पुलिस वाले आकर लडकियों को चोदते है और पैसे भी नहीं देते लड़की से मन नही भरा तो हम लोगो पर चढ़ जाते हे।

मैने कहाँ कोई बात नहीं मैने उसकी फटी हुई साड़ी उतारी नीचे से वो नंगी हो गई कुछ नहीं पहने थी मैने ब्लाउज भी उतार दिया उसका पूरा काला जिस्म मादक लग रहा था। उसका जिस्म सुडोल था। मैने उसकी चूत को देखा काली एकदम बालो से भरी थी जैसी भी थी लेकिन उसकी चूत अच्छी लग रही थी मैने सोचा जब तक लड़की नहा रही है। तब तक इसको चोद लेता हूँ वो सुंदर तो थी नही लेकिन उसके बदन का आकार लंड खड़ा कर रहा था में उसके उपर ही लेट गया स्तन को दबाने का मज़ा लेने लगा वो भी मज़ा ले रही थी मैने स्तन पर किस किया और फिर मैने अपने लंड को चूसने को कहाँ वो मुहँ में थोड़ा सा लंड भर के चूसने लगी में जोश मे आ रहा था मैने तुरंत कन्डोम लिया और लंड पर चड़ाया जब पलट के उसकी तरफ देखा तो वो टाँगे फैला के चूत खोल के चुदने के लिऐ तैयार थी बोली आओ मारो।

मैने लंड को पकड़ा और उसकी चूत मे लगाकर अंदर करता गया उसकी चूत मे मेरा सवा सात इंच का लंड आसानी से पूरा चला गया वो इतनी चूत चुकी थी की लंड की लंबाई शायद कम पड़ रही थी लेकिन जब मैने लंड को खीचके दोबारा झटका मारा तो उसकी सिसक शुरू हो गई तो मैने चुदाई शुरू कर दी में उसके स्तन दबाते हुये उसे चोद रहा था। ओ आआह्ह्ह्ह आह आहहहहहहः अहहहाः आआ करने लगी तो में और चोदने लगा मुझे अब कुछ कुछ मज़ा आने लगा था उसकी चूत के बाल मेरे लंड की जड़ के पास टकरा रहे थे तो मुझे गुदगुदी हो रही थी में चोद ही रहा था। तभी वो बोली गांड मारोगे मैने कहा हाँ मारनी है तुम्हे देखते ही मैने तुम्हारी गांड मारने के बारे मे सोच लिया था अच्छी मोटी गांड है तुम्हारी। वो उल्टी लेट गई उसकी गांड के पहाड़ जैसे कूल्हे मस्त लग रहे थे

मैने कुल्हो को फैलाया ओर गांड के छेद मे थूक दिया और लंड लगा के गांड मे डालने लगा। वहाँ भी आसानी से लंड घुस गया मैने उसकी गांड मारनी चालू कर दी वो सस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स सस्ससा आ आ आह्ह्ह्हह्हह्ह्ह सस्स्स्स्स्स्स्सिससिसीसिस कहती रही में गांड मारता रहा.... मज़ा आ रहा था वो हाथ फैला के लेटी थी मैने पीछे से उसके हाथो को दबाया ओर पंपिंग स्टाइल मे गांड मारने लगा। वो हा अहहः अहहः हः हाही आ कह के मारो गांड मार... मार गांड कह रही थी। तभी उसकी लड़की आ गई मैने उसको देखा लोवर टी शर्ट मे गीले बालो मे तौलिया लपेटे खूबसूरत लग रही थी। वो चुदाई देख के शरमा गई उसकी अम्मा उसको बोली तू थोड़ी देर बैठ। में गांड मरवा लू तो वो हाँ कह के मुझे गांड मारते हुये गोर से देखने लगी मैने उसको दिखाने के लिऐ लंड को निकाला और एक ही बार मे लंड को अंदर किया तो वो ज़ोर से आहह चीखी लड़की मुस्कुराने लगी मैने जल्दी जल्दी अम्मा की गांड मारी और अपना पानी गांड मारते वक़्त निकाल दिया और तुरंत ही हट गया कन्डोम उतार के लंड को बाथरूम मे जाकर साफ किया वापस आया तो वो कपड़े पहन चुकी थी।

मैने कहा जा रही हो, वो हाँ बोली तो मैने उसको 100 का नोट दिया कहाँ बाकी में इसको दे दूगां। तो वो लड़की से बोली रज्जो जब इनका हो जाये तो सीधा आ जाना उसने हाँ मे सर हिलाया तो वो जाने लगी मैने तौलिया लपेटा और दरवाजे तक आया वो मुझसे बोली आराम से करना मैने हाँ कहा। वो चली गई। में दरवाजा बंद करके आया उसकी लड़की से कहाँ रज्जो तू अच्छी लगती है इन कपड़ो मे तो तू शहर की छोरी लग रही है वो हँसने लगी। मैने उसका लोवर उतारा तो चिकनी चूत थी में खुश हो गया और मैने कहाँ तुम्हारी चूत तो चिकनी हो गई मैने उसका लोवर ऊपर करके कहाँ। कुछ खायेगी वो हाँ बोली तो मैने उसको अपने पास रखे चिप्स के 2 पैकट दिये और एक बिस्कीट का पैकट दिया और टी.वी. चालू कर दी और नहाने चला गया उसने खा लिया पानी पिया तब तक में वापस आ गया।

मैने खुद को तौलिया से पोछा ओर नंगा ही उसके पास जाकर कहाँ इससे खेलो वो हाथ मे लेकर सहलाने लगी वो दोनो हाथो मे पकड़ कर सहलाने लगी लंड अपने आकार मे आने लगा था तब तक मैने उसकी टी शर्ट उतार दी नंगे स्तन खिल गये। मैने उनको मसलना चालू कर दिया मैने पूछा कितनी बार चुदाई की तुमने.. वो बोली याद नहीं पहले नहीं करवाती थी एक दो साल से करवाने लगी हूँ। मैने कहाँ तुम्हे किसने पहली बार चोदा था याद है वो बोली हाँ काका ने... मैने कहा कौन काका वो बोली बापू का भाई यानी की उसके चाचा ने... मैने कहा किसी ने कुछ नहीं कहा उसको... तो वो बोली नहीं यहाँ तो सब एक दूसरे की छोरी पकड़ते है

मैने उसको नंगा कर दिया और मैने उसकी जांघ को चूमना शुरु कर दिया। भरपूर जवान लड़की थी 17 साल की मैने उसको मस्त कर दिया चूम चूम के मैने उसको पलट के उसके छोटे छोटे कुल्हो को मुहँ मे भर के चूसा वो और चूम लो मज़ा आ रहा हे कहने लगी। मैने उसको पकड़ के पलटाया और चूत को मुहँ मे लेकर चूसने लगा वो आआईईईईई आ कहँती रही। मैने उसको लंड चुसवाया अम्मा जितने खराब तरीके से लंड चूस के गई थी। ये उतने ही अच्छे तरीके से चूस रही थी में जान रहा था की इसको नये लड़को ने चोद के ये सब सिखाया है उस लड़की ने मुझे जोश मे ला दिया था मैने तुरंत कन्डोम चड़ाया। उसको लेटा कर उसकी टाँगे अपने दोनो कंधो पे रखी आगे को होकर चूत के पास लंड किया और धक्का देने लगा लंड घुसने लगा वो आममामा आ आहः अहहाहा मममा कहने लगी। मैने और अंदर किया तो वो आ अहाहाः कहने लगी में काफ़ी जोश मे था तो शुरुआत से ही लंबे लंबे धक्के मारने लगा वो सीसी सिस सीसीसी आह आहा आहा हा आह कहती गई और में डालता रहा। में उसकी चूत को जल्दी जल्दी चोद रहा था गजब की लड़की थी यार कसम से ऐसा जोश चड़ाया था जो उसी को भारी पड़ रहा था।

मैने हालत खराब कर दी थी मैने उसको थका दिया था और 10 मिनिट बाद में खुद थक गया मैने पूरी ताक़त से पूरे दम से चुदाई की उसके मुहँ में मुहँ लगा के होठों को चूसते हुए जो चोदा उसको हिला के रख दिया मैने 4,5 लंबे धक्के मार के उसको जकड़ के लिपट गया वो भी मुझसे लिपट गई कुछ देर हम दोनो लिपटे पड़े रहे फिर अलग हुये। वो वैसे ही लेटी रही मैने पूछा कैसी लगी चुदाई वो हल्की सी मुस्कान लिये मुझे देखने लगी फिर बोली मज़ा आया, में खुश था। लेकिन अभी तो उसकी गांड मारनी थी। मैने उसको करीब आधे घंटे तक नंगा लेटाया फिर उसकी गांड मारने लगा छोटे छोटे कुल्हो के बीच की गांड मैने अपने लंड से जम के चोदी.. वो सिर्फ़ चिल्हाती रही मैं गांड मारता रहा। हालांकी वो गांड मरवा चुकी थी। लेकिन मेरा लंड शायद उसके लिए बड़ा था इसी कारण वो दर्द महसूस कर रही थी। लेकिन शायद में उस वक़्त कई दिनों की चुदाई की प्यास बुझाने मे भूल गया और जोर से चोद के माना। मैने उसकी गांड से लंड निकाल के पूरा वीर्य उसकी पीठ मे गिरा दिया।

उसने तौलिया से पोछा ओर थक के आराम से कपड़े पहन के लेट गई। थोड़ी देर बाद वो बोली अब में जाऊँगी। मैने उसको 500 रूपये दिऐ शायद उसको पहली बार इतने रुपये मिले थे। वो खुश हो गई मैने कहाँ अगर रात मे वो यही रुक जाये तो 500 रुपये और दूगाँ वो बोली अम्मा मारेगी मैने कहाँ तब तो तुम रुक जाओ अम्मा आयेगी तो उसको पैसे देकर लौटा दूगाँ। वो मान गई और सच मे थोड़ी ही देर मे अम्मा आ गई वो उसको डाटने लगी। मैने उसको कहा चिल्ला के बात मत करो ये पैसे लो आज रात इसको यही रहने दो वो कुछ सोचने लगी लेकिन 500 के नोट ने अपना दम दिखा दिया उसने कहा रज्जो रुकना है रज्जो हाँ बोली... तो वो चुपचाप चली गई मैने उसको ठीक ठाक कपड़े पहनाये शाम को घूमने ले गया खाया पीया घर आ गये वो काफ़ी खुश थी। वो बोली तुम अच्छे हो। मैने कहाँ तुम अच्छे से चुदी हो इसीलिए ये सब किया वो बोली अच्छा तो इस बार और मज़ा दूंगी चोद लेना ओर ऐसा ही किया उसने मुझे इतना मज़ा दिया की दिल खुश हो गया।

मैने रात में उसको ब्लू फिल्म दिखा के उन सब पोज़ मे चोदा वो इतनी मस्ती मे आ गई थी की अगर वो कोई नया पोज़ देखती तो उसी तरह से चुदवाने को कहती। में भी तो यही चाहता था उस रात मैने 2 बार उसको चोदा लेकिन मुझमे ताक़त ख़त्म हो गई थी हम रात मे 3:30 बजे लिपट के पति पत्नी की तरह सो गये। सुबह 9 बजे जागे मैने जागते ही उसको पकड़ लिया क्योकि में जब जगा तो वो मेरे लंड से खेल रही थी। मैने उसको फिर से चोद लिया वो बोल रही थी कितना चोदोगे। अब बहुत हो गया जबकि वो खुद चुद रही थी मैने उसको चोद दिया फिर ब्रश किया उसके बाद चाय बनाई और हम दोनों ने पी तब तक उसकी अम्मा आ गई। मैने फिर 500 रुपये दिये और किसी दिन फिर से आने को कह के जाने दिया करीब 1 हफ्ते बाद पूरी रात को उसने फिर से रंगीन किया उसके बाद वो चली गई और ऐसी गई की शहर से ही चली गई ये थी मेरी कहानी।
 
माँ की तड़प--1

चाचा से चुदवाने के तीसरे दिन हम भाई बहन स्कूल जा रहे थे , मोम ने बोला, बेटा स्कूल जाते हुए चाचा के घर में बोलते जाना की कल (सन्डे) घेर (हमारा गोलाकार बड़ा खेत) में हल लगाना है, चाची और दीदी (उनकी लड़की) को भी आने को बोलना. मैं चलते-चलते सोच रहा था की मोम सायद एक बार फिर चाचा के खच्चर जैसे लैंड का स्वाद लेना चाहती है लेकिन चाची और उनकी लड़की को भी बुलाया है तो मैंने अपने दिमाग से ये ख्याल निकाल दिया. घर में चाची मिली मैंने उनको बोला तो वो बोली- तेरी माँ ब्याई (बच्चा देना) है, पिसर (खीस- भैंस का बच्चा होने के सुरु कागाढ़ा दूध) खाने बुलाया है. मैं पता नहीं का जवाब देकर अपने स्कूल के लिए चल दिया. दोपहर को हम दोनों भाई बहन घर पहुंचे. अन्दर से बंद दरवाजा खटखटाया तो मोम ने दरवाजा खोला, मोम एक दम नंगी थी (नहाते हुए उठकर आयी थी), दरवाजा फिर बंद करने के बाद मोम नहाने लगी और हमको कपडे उतारकर अपने पास नहाने के लिए बुलाया (नहाने की जगह झोपड़ी के जानवर बांधने वाली साइड बनी थी). हम दोनों कपडे उतारकर मोम के पास जाकर बैठ गए. मोम नहा चुकी थी पर हमको नहलाने के लिए नंगी ही बैठी थी. पहले मोम ने सिस्टर को अपने सामने बिठाया और पानी डालकर अथला (पेड़ की छाल को कूट कर बनाया गया गुच्छा जो साबुन की तरह झाग देता है, गाँव में लोग उसी से नहाते थे , साबुन यूज नहीं करते थे ) उसके पुरे बदन पर मला (कई बार मोम की उँगलियों ने सिस्टर की घेहूँ की शकल जैसी चूत को रगडा). उसको नहलाने के बाद मेरा नंबर आया, मैं उनके सामने उनकी तरफ मुह करके बैठ गया, मोम ने पानी डाला और मैं अपनी आँख का पानी साफ़ करते-करते छिपी नज़रों से उनकी चूत देखने की कोसिस करने लगा पर झांटों और एक खाई (लाइन) के अलावा कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. मोम के कहने पर मैं खड़ा हो गया और मोम पत्थर से मेरे घुटनो और पैर के पंजों पर जोर जोर से रगड़ने लगी. बीच-बीच में नोनी पर भी रगड़ देती. अब मोम भी खड़ी हो गयी और मेरे सर के ऊपर से पानी डालने लगी जिसके छींटें मोम के ऊपर भी पड़ रहे थे और पानी उनके पेट से सरकता हुवा उनकी झांटों पर अटक जाता, झांट के बालों से निकल कर कुछ तो बूंदे बन कर टपक जाती और कुछ नीचे सरकता हुवा दोनों टांगों के ठीक बीच से धार बन कर बह रहा था, लगरहा था जैसे वो मूत रही हो. अचानक मोम ने मेरी नोनी का फोरस्किन पीछे किया और लोटे से पानी डालते हुए उँगलियों से साफ़ कर ने लगी, मेरी नूनी कड़ी हो गयी. मोम, बदमास कही का बोलते हुए मेरे मुह पर देखने लगी. नहाने के दबाद मोम और मैं नंगे ही झोपड़ी के दूसरी तरफ आये जहाँ मेरी सिस्टर पहले से ही नंगी बैठी थी, मोम ने लकड़ी के सन्दुक से हमारे कपडे निकाल कर दिए और अपना पेटीकोट निकाल कर सर के ऊपर से पहनते हुए कमर में नाडा बाँधा , ब्लाउज पहना और फिर धोती. खाना खाने के बाद हम तीनो दरवाजे के सामने बिछी दरी (हमेसा बिछी रहती है) पर सो गए. नेक्स्ट डे मोम जल्दी उठ गयी थी, मुझे भी जल्दी उठा दिया नास्ता किया और बोली मैं घेर में जाऊंगी छोटी (सिस्टर) उठेगी तो नास्ता खिला देना. थोड़ी देर में चाचा, चाची और उनकी लड़की बैलों को लेकर आये, मोम ने उनको चाय पिलाई फिर उनके साथ घेर में चली गयी. थोड़ी देर में सिस्टर उठी, हम दोनों २ नंबर के लिए झोपड़ी के पीछे की तरफ बने खेत में गए, थोड़ी दुरी बनाकर हम दोनों बैठ गए. मैंने देखा बैठते ही सिस्टर की नन्ही सी चूत से लम्बी पिशाब की धार छुटी और मेरी नोनी से भी. घर आकर हमने पानी से साफ़ करने के बाद मैंने छोटी को नास्ता दिया, जूठे बर्तन धोने के बाद मैंने छोटी को खिड़की के पास बिछे बिस्तर पर बुलाया जिसपर चाचा ने मेरी मोम को जबरदस्त तरीके से पेला था. मैंने उसको नया खेल खेलने का बताकर उसको मोम की तरह बिस्तर पर लिटाया (उसने कच्छी नहीं पहनी थी-गाँव में कोई पहनता ही नहीं है) और चाचा की तरह उसके ऊपर आकर अपने ढीले ढाले कच्छे को सर्काकर अपनी नूनी (जो कड़ी हो गयी थी) पर थूक लगाया और कुछ थूक छोटी की चूत पर लगाने के बाद अपनी नूनी को उसमे घुसेदने की कोसिस करने लगा, जब जोर लगाया तो छोटी चिल्ला पड़ी- ईईईई भैया मुझे नहीं खेलना ये खेल, दरद होता है. मुझे याद आया मोम ने अपनी चूत के छेद को अपने हाथों से चौड़ा कर खोला था सो मैंने उसके ऊपर से हट कर उसकी टांगों को मोड़कर इधर-उधर फैलाया और उसके दोनों हाथों को पकड़कर उसकी चूत के पास लाकर उसकी उँगलियों को उसकी पिद्दी सी चूत के अगल-बगल की स्किन पर रखा और उसको खींचने के लिए बोला. अन्दर गुलाबी रंग की स्किन दिखाई दी, उसको इसी तरह पकडे रहने को बोलकर मैंने उसकी टांगों के बीच में आकर अपनी नोनी पर फिर थूक लगाया और उसकी चूत के मुह पर रखते ही धक्का मारा??.वो चिल्लाई माआआआआआआआआ जी और खिसक कर खड़ी हो गयी, रोते हुए उसने अपनी घाघरी ऊपर उठाई, उसकी जांघ पर खून टपक रहा था, हम दोनों घबरा गए, मैंने झट से कुछ चीनी मुह में डाली और चबाकर अपनी हथेली पर निकाल कर उसकी चूत पर लगायी, खून निकलना बंद हो गया. मैं बहुत घबरा गया था और छोटी को प्यार से समझाने लगा क़ि मोम को मत बताना और किसी को भी नहीं बताना, ये गलत खेल होता है और हम दोनों को बहुत मार पड़ेगी. ये भी बताया की ये खेल आदमी और औरत लोग शादी के बाद बच्चा बनाने के लिए खेलते है. रोते-रोते उसने कसम खायी क़ि वो किसी को नहीं बताएगी और मेरे से भी कसम दिलाई क़ि उसके साथ ये खेल कभी नहीं खेलूँगा. दोपहर को मोम, चाची और उनकी लड़की घास के गठ्हर लेकर आये, पानी पीने के बाद मोम ने उनको मट्ठा (लस्सी) पिलाकर खाना खाकर जाने को बोला लेकिन वो नहीं मानी ये बोलकर क़ि वो सुबह ही दाल चावल पकाकर आई थी. मोम ने चाचा के आने तक उनको रोकना चाहा , चाची बोली वो अभी गाद (नदी) में नहायेंगे, दयाल (रस्ते में पड़ने वाले घर का मालिक) के साथ हुक्का पीकर आयेंगे, तुम्हारे घर खाना खायेंगे , तब तक बहुत देर हो जायेगी और दोनों माँ बेटी ने अपना-अपना घास का गठ्हर उठाया और अपने रास्ते चल दी. मोम ने हम दोनों को खाना खिलाया और आराम से सोने को बोला. मेरा दिमाग में फिर हलचल मचने लगी, क्या मोम आज भी चुद वाएगी ?, नहीं-नहीं अगर चुदवाना होता तो चाची और उनकी लड़की को रोकने की कोसिस क्यों करती?.. फिर सोचने लगा क़ि हमको सोने के लिए क्यों बोल रही है. कभी दिमाग कहता नहीं चुद वाएगी कभी कहता बिना चुदे नहीं रहेगी और थोड़ी देर लेटने के बाद करवट लेकर मैं अपना वही पोज बनाकर हलकी हलकी सांस लेने लगा ताकि मोम को पता चल जाये क़ि मैं नींद में हूँ. काफी देर के बाद जब चाचा नहीं आये तो मैंने बहाने से दूसरी तरफ करवट ले ली (मोम को धोखा देने के लिए). इस बीच मोम २-3 बार बाहर गयी और लौटी सायद चाचा को देखने गयी होगी. जैसे ही बाहर बैलों की घंटी की आवाज मेरे कानो में पड़ी मैंने फिर खिड़की की तरफ लगे बिस्तर की तरफ करवट ली और हिलते हुए अपने पोज की अद्जुस्त्मेंट की. मोम भागते हुए अन्दर से घास की एक छोटी सी गद्दी उठाकर बाहर गयी, अन्दर उनकी बातें करने की आवाज आ रही थी पर समझ में नहीं आ रहा था. मोम अन्दर आई और दो थालियों में खाना परोसकर चाचा का इंतजार करने लगी. चाचा अन्दर आये और अपने चिरपरिचित अंदाज़ में बैठे, बैठते ही उनका मुरझाया हुआ लंड कच्छे सेबाहर लटक गया और जमींन पर मुड गया.

मोम- तुम इसको संभाल कर नहीं रख सकते.

चाचा- कैसे सम्भालूं, पजामा पहनने की आदत नहीं है और कच्छे में ये अन्दर रह नहीं पाता. उनके बोलने के साथ ही धीरे-धीरे उनका लंड नाग के फन की तरह उठाने लगा. भाभी डरो मत मुझे परसों की कसम याद है.

मोम-वो बात नहीं है, पर तुम्हे संभल कर बैठना चाहिए, तुम्हारे घर में जवान लड़की है. चाचा-अपनी तरफ से कोसिस तो करता हूँ पर बाहर निकल ही जाता है.

मोम-मुझे पता है तुम जान बूझ कर उसको बाहर निकाल कर बैठते हो ताकि कोई औरत उसको देखे और तुम उसका फ़ायदा उठाओ. अब तो चाचा का लंड पूरी तरह तन गया था और झटके मारने लगा. मोम ने खाना सुरु किया और उनको भी खाना सुरु करने को कहा.

चाचा- भाभी एक बार दर्शन तो करवा दो बैठे-बैठे.

मोम- तुम्हे तो सरम लिहाज नहीं है, मुझे तो है, फटाफट खाना खाओ .

चाचा- देखने और दिखाने की कसम तो नहीं खायी है भाभी.

मोम- देखे बिना मानोगे तो नहीं और मोम ने बैठे-बैठे ही अपना पेतिकोत ऊपर सरकाया और जमीन से गांड उठाकर हिप्स से ऊपर खींच कर चाचा की तरह उनके सामने बैठ कर थाली अपने घुटनों पर रख कर खाना खाने लगी. चाचा मोम की टांगों के बीच में नज़रे गढा कर मुस्कराते हुए खाना खा रहा था और उनका लंड आधा मुड़ने के बाद तन्न्न्नन्न्न्न से ऊपर झटके मार रहा था. खाना खाने के बाद मोम ने उठकर बर्तन इक्कठे किये और धोने के लिए बाहर चली गयी, चाचा ने अपने लंड की तरफ देखा और एक बार उसकी फोरस्किन खींच कर उसके सुपदे को देखा और वापस स्किन से धक् कर बैठ गए. पत्ते में तम्बाकू लपेटकर पीने लगे . मोम ने अन्दर आकर बर्तन संभाले और चूल्हे के पास बैठकर चाचा से बोली ये (चाचा का लंड ) अभी शांत नहीं हुवा. चाचा-इतनी जल्दी शांत कहाँ होगा, हो जायेगा धीरे धीरे. लम्बी सांस लेते हुए बोले-चलता हूँ भाभी घर जाकर आराम करूंगा.

मोम-आज बहुत जल्दी लग रही है घर जाकर आराम करने की, अभी खाना खाया है थोड़ी देर यही सुस्ता लो. चाचा उठकर मेरे पास आकर बैठने ही वाले थे क़ि मोम भागते हुए आई और चाचा का हाथ खींचते हुए उसी बेड के ऊपर लेजाकर बैठ गयी जिसपर २ दिन पहले चिल्ला-चिल्ला कर चाचा के लंड का मज़ा लिया था.

मोम- आज बड़े सरीफ बन रहे हो?..

चाचा-भाभी मैंने तुमको कसम दी है

मोम- कसम तुमने दी मैंने तो नहीं दी है और मोम ने चाचा की छाती पर हाथ रखकर उनको धकेलकर लिटा दिया और उनकी बनियान ऊपर सरकाकर उनकी छाती पर उग्गे बालों पर उँगलियाँ फेरने लगी और चाचा मोम के ब्लाउज के ऊपर से उनके दूध दबाने लगे. मोम अपना दूसरा हाथ चाचा के कच्छे के अन्दर ले गयी और चाचा के मुरझाये लंड को बाहर निकाल कर हिलाने लगी. तुरंत ही चाचा का लंड तन गया, मोम के चेहरे पर मुस्कान फिर सरम और कुछ कुछ घबराहट दिखने लगी . अब मोम अपने हाथ की मुठियों से चाचा के तने हुए लंड को नापने लगी, पहले मोम ने उनके लंड की जड़ पर अपने एक हाथ की मुठी रखी और उसके ऊपर दुसरे हाथ की मुठी, फिर नीचे वाली मुठी हटाकर ऊपर वाली मुठी के ऊपर रखी और फिर दूसरी वाली मुठी को फिर पहले वाले हाथ की मुठी के ऊपर, अब चाचा के लंड का फोरस्किन बाहर दिखाई दे रहा था. हे माआआआआआअ बोलते हुए मोम ने आधा लेटते हुए चाचा की छाती पर अपना सर रखा और उनके लंड का फोरस्किन ऊपर नीचे करने लगी. चाचा मोम के चुतादों के पीछे से अपना हाथ घुमा कर लाये और मोम का पेटीकोट खींच कर उनकी चूत को नंगा कर उनकी झांटों के ऊपर उँगलियाँ घुमाने लगे. काफी देर तक रगड़ने के बाद चाचा ने एक ऊँगली मोम की चूत में घुसाई और अन्दर बाहर करने लगे. एक मिनट के बाद मोम कभी-कभी अपनी टांगों को इक्कठा कर स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् करने लगी. चाचा ने मोम को उनके लंड पर थूक लगाने को बोला, मोम अपने पीछे की तरफ मुड़ी और कटोरी (जिसमे दूध निकालने से पहले भैंस के थन पर लगाने वाला मक्खन (बुट्टर) रखा था) से बुट्टर अपनी उँगलियों से निकाला और चाचा के लंड का फोरस्किन खींच कर उसकी गाँठ पर मलने के बाद फोरस्किन को ४-५ बार ऊपर नीचे किया और चाचा से पूछा अब क्या?? चाचा ने लेटे-लेटे मोम की एक टांग खींच कर अपने आप उनकी दोनों टांगो के बीच में आ गए फिर उनके हिप्स के पास से उनकी दोनों थाईस को अपने दोनों हाथों से ऊपर उठाया और नीचे से लंड उनकी चूत में घुसाने की कोसिस करने लगे. लंड की लम्बाई जादा होने के कारण सीधा खड़ा नहीं हो पा रहा था, आधे में मुड रहा था, मोम ने अपना एक हाथ पीछे घुमाकर उनके लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर रखा पर फिर भी नहीं घुसा. मोम की तड़प मैं देख रहा था, वो जल्दी से उनके ऊपर से उतर कर बैठ गयी और कटोरी से बुट्टर निकाल कर पहले अपनी चूत के ऊपर रगडा और फिर एक ऊँगली में बुट्टर लगा कर अपनी चूत के छेद में डालकर चरों तरफ घुमाया और उतनी ही जल्दी से फिर से चाचा के ऊपर आ गयी. मोम ने चाचा क़ि दोनों हथेलियों को पकड़ा और दोनों टांगो के बीचे से लाकर अपने हिप्स ऊपर उठाये और अपनी चूत की दोनों साइड में रखकर बोली चौड़ा करो देवर जी. अब उनकी चूत के दोनों साइड की स्किन फ़ैल गयी, वहीँ से अपने एक हाथ से चाचा के लंड को बीच से पकड़ा और छेद पर रखते ही नीचे झुकी और एक चौथाई अन्दर घुस गया. मोम अपने चुतद ऊपर नीचे करने लगी सायद जैसा वो चाहती थी वैसा नहीं हो पा रहा था. मोम ने चाचा को हाथ हटाकर अपना लंड पकड़ने को बोला और अपने दोनों हाथ चाचा की छाती पर रखकर एक बार फिर कोसिस करने लगी मगर जादा कामयाबी नहीं मिली सायद और मोम नीचे उतर गयी. चाचा- भाभी क्या हुवा? मोम-ठीक से नहीं हो रहा. चाचा उठकर बैठ गए और मोम को अपनी गोदी में बिठाकर उनके ब्लाउज के बटनों खोलने के बाद उनके दूध दबाने लगे. मोम बहुत परेसान लग रही थी. चाचा ने मोम को अपनी एक जांघ पर बिठाया और उनका दूध चूसने लगे, मोम उछल-उछल कर चाचा से चिपक रही थी स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् आआआआ स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् स. चाचा ने पलटते हुए मोम को बिस्तर पर लिटाया, उनकी टांगों को चौड़ा किया, जैसे ही वो मोम के ऊपर आये मोम ने बीच में हाथ लाकर उनके लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर रखते ही ऊपर उछल गयी पर चाचा का लंड नीचे को सरक गया. मोम ने फिर से लंड को अपनी चूत पर रखा, दुसरे हाथ से पहले अपनी चूत की स्किन को एक तरफ खींचा और फिर दूसरी तरफ के स्किन को खींचते ही जम्प किया हाआआआआआअ. चाचा हंसने लगे तो मोम बोली क्या हुवा.

चाचा-कुछ नहीं.

मोम- करो ना देवर जी, अन्दर खुजली जैसी हो रही है.
 
माँ की तड़प--2

चाचा- खुजली तुमको हो रही है तुम ही करो.

मोम-अच्छा, खुशा मत करवाना चाहते हो, करो ना. मैं पागल हो जाऊंगी. चाचा ने अपना पूरा वजन अपनी दोनों टांगों के पंजो और दोनों हाथ की हथेली पर रखा और झुक कर मोम की निप्पल चाटने लगे. हाआअ क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क्क् करते भी रहो नाआआ स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्. चाचा मोम का निप्पल मुह में लेकर चूसने लगे और मोम-स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्

स्स् हाआअ ईईईईईईईए करते क्यों नहीं. चाचा का पूरा बदन स्टेचू बना हुवा था, मोम के निप्पल चूसते हुए चाचा ने जैसे ही अपने पैरों को थोडा सिकोडा उनका लंड मोम की चूत से बाहर निकल गया. मोम- बड़े कमीनो हो तुम, हां स्स्स्स ह़ा. मोम ने अपने एक हाथ से चाचा की कमर को ऊपर से कसकर पकड़ा और दुसरे हाथ से उनके लंड को बीच से पकड़ कर हहा सस्स्स्सस्स्स्स करते हुए एक जम्प के साथ अन्दर ले लिया, अपने हिप्स को वहीँ रोकते हुए उनके लंड को थोडा और ऊपर से पकड़ते हुए एक और जम्प लेते हुए हाआआआ स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् सस स्स्स्स आधा लंड अन्दर ले लिया. इसी पोज में ऊपर लटके-लटके मोम खुद ही जम्प मार -मार कर हा स्स्स्स हा स्स्स्सस करते हुए मज़ा लेने लगी. मोम थक गयी थी और चुतद जमीन पर रखते ही लंड बाहर निकल गया.

मोम- कमीने आदमी, क्या हो गया है तुझे (हमेसा तुम बोलती थी), तुझे कसरी (चाचा की बेटी का नाम) की कसम??

चाचा-भाभी कसम क्यों दे रही हो और चाचा ने नीचे होकर मोम क़ि चूत पर लंड को टिकाते ही जोर का धक्का मारा ल्ल्लल्ले फिर,

मोम हाआआआआआआआआ आआआआआ चिल्लाई, ये ल्ल्ल्ले, स्स्स्सस्स्स्स हा ये ल्ले, उईईईई माआआआअ, और ल्ले, स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् मर्र्र्रर गयी, और करून ल्ल्ल्ले, हा हा, ल्ले, हा, ल्ले, हा हा हा स हां स्स्स्स हाआआआआआआआअ कमीईने यी ईईए ईईईई और मोम की दोनों थाई काम्पने लगी, गांड जमीन से ऊपर, झड़ने के कारण मुह से अब आवाज नहीं आ रही थी.

चाचा- भाभी, तुमने आज मुझे कमीना बोला और तू तड़ाक से बोला?

मोम-माफ़ कर दो देवर जी, मैं पागल हो गई थी, अन्दर बहुत जोरों की खुजली हो रही थी, आज तक कभी नहीं हुयी थी, जी कर रहा था कोई अन्दर जोर-जोर से रगड़े, माफ़ करदो, मैं अपने आप में नहीं थी.

चाचा, कोई बात नहीं भाभी कहते हुए मोम के ऊपर से उतर गए और जैसे ही उन्होंने अपना कच्छा पहनने के लिए हाथ में लिया मोम ने चौंकते हुए पूछा- क्या हुवा देवर्जी, माफ़ी मांग तो ली है तब भी नाराज़ हो रहे हो.

चाचा- मैंने कब बोला की नाराज़ हूँ.

मोम-फिर ये (कच्छा) क्यों पहनने लगे, तुम नहीं करोगे.

चाचा-तुम्हारा हो गया ना भाभी, मैं तो रात को तुम्हारी देवरानी की में पानी निकाल लूँगा. मोम-बाबा, फिर माफ़ी मांगती हूँ, गलती हो गयी, चाचा से लिपटे हुए बोली-सोबन की कसम, दोनों बच्चों की कसम मैंने जान बूजकर गाली नहीं दी, पता नहीं क्या हो गया था मुझ रांड को और अचानक रोने लगी.

चाचा-भाभी, बच्चों की कसम क्यों ले रही हो और रोने क्यों लगी. मोम सुबक सुबक कर रोने लगी. चाचा ने मोम का मुंह ऊपर किया और उनके आंसू पौंचते हुए बोले, तुम्हारी कसम भाभी मैं नाराज़ बिलकुल भी नहीं हूँ, सच में.

मोम, सुबकते हुए-फिर कर क्यों नहीं कर रहे हो

चाचा-तुमको मज़ा आ गया है न मुझे तसल्ली हो गयी.

मोम-चलो तुम भी करो

चाचा- रहने दो भाभी, किसी और दिन करेंगे.

मोम-मुझे अभी परसों जैसा मज़ा नहीं आया. उस दिन दूसरी बार बहुत मज़ा आया था.

चाचा- मैंने तो एक ही बार किया था.

मोम-पता है, अब समझी और मोम उनकी छाती पर मुक्के मारने लगी, बड़े गंदे हो.

चाचा ने हँसते हुए मोम को बिस्तर पर लिटाया और बगल में अध लेटते हुए मोम का दूध चूसने लगे और एक हाथ की उँगलियाँ उनकी चूत पर फेरने लगे. थोड़ी देर में ही मोम फिर से सिसकारी मारने लगी और जम्प भी करने लगी. चाचा ने कटोरी से मोम की चूत और अपने लंड पर बुट्टर लगाया और चूत पर रखते ही करारा धक्का मारा.

मोम-हाआआआअ चाचा मोम को स्पीड में पेलने लगे और मोम हर धक्के पर मोम की सस्स्स्सस्स्स्स हाआआआअ निकलने लगी. करीब १० मिनट के बाद मोम स्स्स्सस्स्स्स ईईईईईईईईईए ईईईईईए करते हुए झड गयी, चाचा मर्द का पट्ठा पेलने में लगा रहा. मोम की चूत का पानी बाहर बहने लगा, चाचा का लंड पर )जितना हिस्सा अन्दर जा रहा था) सफ़ेद परत जैसी जम गयी थी.

मोम- तुमको क्या हो गया है देवर जी, २ मिनट रुक जाओ मेरे पेट में दरद होने लगा है और चाचा शांत हो गए.

मोम बोली-देवर जी, मेरा दो बार हो गया पर उस दिन वाला मज़ा नहीं आया, पेट में दरद भी होने लगा है.

चाचा- रुको भाभी, चाचा ने रस्सी पर टंगे कपडे के किनारे को पानी में डुबोकर पहले अपने लंड को पौंछा फिर मोम को नंगे फर्श पर लिटाकर उनकी टांगों को चौड़ा करने के बाद उसी गीले कपडे से उनकी चूत को अच्छी तरह से साफ़ किया, एक ऊँगली में गीला कपड़ा लपेटा और अन्दर डाल कर घुमाया, फिर एक हाथ की उँगलियों से चूत की दोनों तरफ की स्किन को फैलाकर लोटे से उसमे पानी डाल कर मोम को टांग चौड़ी कर खड़ा होने को कहा. ये सब करने के बाद चाचा ने मोम को बिस्तर पर लिटाया और दूध चूसने लगे. थोड़ी देर बाद चाचा ने अपनी तीन उँगलियों पर थूका और मोम की चूत पर मला , दो बार ऐसा करने के बाद दो ऊँगली अन्दर डालकर अन्दर बाहर करने लगे. मोम का कोई रेस्पोंसे नहीं मिल रहा था. चाचा का लंड भी मुरझाया पड़ा था.

चाचा ने मोम की टांगों को चौड़ा किया, एक हाथ के अंगूठे और एक ऊँगली से उनकी चूत की स्किन को फैलाया और दुसरे हाथ की ऊँगली को मुह में डालकर थूक से गीला करने के बाद चूत के बीच और छेद से थोडा ऊपर रगड़ने लगे. थोड़ी देर रगदने के बाद फिर से ऊँगली अपने मुह में डालते और फिर रगड़ते, बस अब क्या था, मोम स्स्स्सस्स्स्स स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् करने लगी, चाचा ने मोम की चूत की स्किन से हाथ हटाकर एक ऊँगली अपने मुह में देने के बाद सीधे मोम की चूत के अन्दर डाल दी और दुसरे हाथ की ऊँगली से तेजी से उनकीचूत के ऊपर रगड़ने लगे. मोम फिर तड़पने लगी, हाआआआआअ देवर जी. इधर चाचा का लंड भी तन गया था पर लम्बाई के कारन धनुस के आकर में.

मोम-देवर जी ब्ब्ब्बस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् हाआआआआअ नहीं नाआआअ. चाचा ने जैसे ही अपनी ऊँगली चूत से बाहर निकाली मोम हाआआआआअ करके उछल गयी, मोम की गीली चूत साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी. चाचा ने मोम के ऊपर लेटते हुए उनकी दोनों टांगों को मोड़कर चौड़ा करने के बाद एक हाथ से लंड पकड़ कर मोम की चूत पर रखते ही धक्का मारा, मोम उफ्फफ्फ्फ़ करके रह गयी. चाचा ने मोम को पेलना स्टार्ट किया, पहले तो मोम धीरे धीरे हा हा हा हा हा हा करती रही फिर श्ह्ह्हह हा स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् हा स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् स हा. देवर जी स्स्स्सस्स्स्स पहली वलीईईईईए हाआआआ खुज्लीईईईईई स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् मर ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्ग्गयि. ख़्हुज्लीई देवर जी स्स्स्सस्स्स्स हाआआआ. मेरी आँखें दो जगह टिकी थी, पहली जगह मोम की गांड की लूप लूप पर और दूसरी क्या आज पूरा लंड अन्दर घुसेगा. चाचा की साँसे फूलने लगी और हूँ हूऊऊउन कर चोदने लगे, उनके तत्टों से पसीना टपक कर कुछ लंड से बहते हुए मोम की चूत में और कुछ चूत के बाहर से उनकी गांड में.

मोम- स्सस्स्स्सस्स्स्स हा सस स्स्स्सस स्स्स्सस्स्स्स हाआआ, देवर्जी रुकूऊऊऊ स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् रुको द्द्द्द्द्द्द्द्द्देवर् जी. चाचा ने लगातार हांफते-हांफते चोदते हुए पूछा अब क्या हुवा?

मोम-स्स्स्सस्स्स पिशाब ल्ल्ल्लल्ल्ल्लागा है हाआआआअ

चाचा-ऊऊउह, अभी मज़ा आ रहा है, ऊऊह बाद में कर लेना.

मोम-नाहे यी यी देवर जी स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् बर्दास्त नहीं हो रहा है

चाचा-भाभी अभी नहीं रुक सकता ऊऊऊओह.

मोम-स्स्स्सस करो फिर जोर्र्र्र्र्र्र्र्र्र् स्सस्स्स्सस्स्स्स हा सस स्स्स्स हा हां खुजली भीईईई हां स हा सस मर्गेईई सस सस माआआआअ पूरा रा रा रा दाल्ल्ल्लल्ल्ल्ल स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् स माजीईईईईए (मोम की गांड के पास की स्किन जबरदस्त तरीके से कांपने लगी और गांड का छेद लूप लूप लूप लूप करने लगा) आआअ ईईईईईईए मेरी माआआआआआआआअ कर कर कर कर कर क्कक्क्क्कक्क्क्कर कर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र् र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र् र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र् और मोम ने चाचा की कमर पकड़ कर १०-१२ जोरदार जम्प मारने के बाद हाआआआआआआआआ आआआआआअ करते हुए दोनों पैरों की आदियों के सहारे अपने चुतद हवा में उठा दिए और कांपती आवाज में चाचा से बोली-देवर्जी जल्दी करो मेरी पिशाब निकलने वाली है. चाचा ने मोम की दोनों टांगों को फैलाकर ऊपर उठाया और बिस्तर से खींच कर उनके चुतद नंगे फर्श पर लेने के बाद ऊपर उठाने के बाद मोम को लंड पकड़कर चूत पर रखने को बोला. मोम-ये क्या कर रहे हो, मेरा पिशाब निकलने वाला है. चाचा-रखो ना भाभी मैं झड़ने वाला हूँ. मोम ने चाचा का लंड पकड़कर अपनी चूत पर रखा और चाचा पंजों के बल होकर जोर-जोर से कूदने लगे. मोम चिल्लाई, देवर जी पिशाब ???मोम का पिशाब निकल गया, चाचा के जोर के धक्कों के कारण हर धक्के में पुच्चेर्रर्र्र्र पुच्चेर्र्र्र्र्र्र्र्र् पुच्चेर्र्र्रर्र्र्र करके पिशाब की पिचकारियाँ छूटने लगी (इधर मेरी हालत ख़राब होने लगी, हंसी भी आने लगी और मेरी नूनी में जबरदस्त अकदन होने लगी और गुदगुदी भी) प्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र् प्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र् की आवाजे आने लगी. चाचा ने भभीईईईईईई ईईईईईईई चिल्लाते हुए जोर का धक्का मारा और उनकी गांड भींच गयी.

मोम-बहुत ख़राब हो देवर जी, यहीं मुतवा दिया और अन्दर भी झड दिया.

चाचा-भाभी हिलना नहीं, हाथ जोड़ता हूँ, चाचा ऊपर उठे और फचाक से लंड मोम की चूत में पेला अन्दर से पीले रंग की पिचकारियाँ निकली, ३-४ बार ऐसा किया, सायद चाचा ने भी मोम की चूत में धक्के मारते हुए ही पिशाब कर दिया था. (मुझे भी लगा जैसे मेरा भी पिसब निकल गया है वो भी गुदगुदी के साथ). चाचा ने मोम की टांग चौड़ी रखे -रखे मोम को उनका लंड पकड़ कर सीधा रखने को बोला और बाहर निकालने के बाद फिर मुतने लगे, मोम की चूत में पहले से ही पिशाब भरा होने के कारन जब ऊपर से पिशाब की धार पड़ने लगी तो ऐसी आवाज आने लगी जैसे भरी बर्तन में किसी ने टोंटी खोल दी हो. चाचा के पिशाब की धार पीली थी. चाचा ने मोम की टांगों को आजाद किया, मोम ने उठकर टांगों को मोदते हुए चौड़ा किया और दोनों हाथों से चूत की स्किन को फैलाकर पीला-पीला मुतने लगी. चाचा का पेट और जांघे गीली हो रही थी. दोनों मेरे सामने से होते हुए नहाने वाली जगह पर गए और सायद अपना अपना सरीर धोने लगे (पानी की आवाज आ रही थी). मैंने भी चेक करने के लिए अपनी नूनी के पार कच्छे को देखा तो मामूली सा गीला था , पिसाब नहीं

दोस्तों कहानी कैसी लगी जरूर बताना
 
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