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Adultery मस्तराम की कहानियाँ

डाल दो रस मेरी प्यासी चूत में--

हेलो दोस्तो, मेरी ये कहानी एक कहानी नहीं, एक वास्तविक घटना है, एक आत्म कथा है, एक उपन्यास के रूप में पेश कर रही हूँ. इस कहानी में एक पात्र ने मुझे ये सचाई बताई है जिसको मैने लिखने की कोशिश की है. उम्मीद है आप पसंद करेंगे. मुझे अपने विचार ज़रूर लिखना.

मुझे अपनी ज़िंदगी की पहली याद है जब मैं पढ़ता भी था और काम भी करता था. मेरा नाम गणेश है और मैं जनम से ही अनाथ हूँ. मेरी उमर तब 15 साल की थी जब से मैं सरकारी स्कूल में पढ़ता था और रात को एक रेस्टोरेंट में सफाई करता था. मेरी वाकफियत शहर के बदमाश लोगों से थी और मैं एक नंबर का हरामी था. रेस्टोरेंट का मालिक रोशन नाम का एक बदमाश था और मुझे अक्सर उसके घर काम करने जाना पड़ता था.

मेरा कद 6 फीट का हो चुका था और शरीर भी ताकतवर था. एक दिन मैं मालिक के घर खाना देने गया तो ऐसा लगा कि घर में कोई नहीं है. मैं अभी पलटने ही लगा था कि मालकिन के कमरे से आवाज़ सुनाई पढ़ी तो मैं चौंक पढ़ा,” उफफफफफ्फ़ साले हरामी आराम से चोद….मैं कोई रंडी हूँ क्या? रोशन के सामने तो मुझे भाबीजी कहता है और अब देखो कैसे चोद रहे हो अपनी भाबी को? मादरचोद कितना बड़ा है तेरा लंड? तेरी बीवी खूब मज़े लेती होगी…मुझे तो थका दिया तुमने राज, काश मेरे पति का भी लंड तेरे जैसा विशाल होता. बहनचोड़ फाड़ कर रख डाली है अपनी भाबी की चूत…..अब जल्दी से चोद डाल मुझे, गणेश खाना ले कर आता ही होगा….मैं क्या करूँ मूह से अधिक भूखी तो मेरी चूत है….चोद मुझे राज….ज़ोर से पेल….मैं झड़ी” मेरी ना चाहते हुए भी नज़र दरवाज़े के छेद से अंदर चली गयी. मालकिन का गोरा जिस्म पसीने से नाहया हुआ था. उसका दूधिया बदन मालिक के दोस्त के सामने कुतिया की तरह झुका हुआ था. कितनी प्यारी लग रही थी मालकिन! पीछे से मालिक का दोस्त उस्स्को छोड़ रहा था और बगलों से हाथ डाल कर मालिकन की गोरी चुचि को बे-रहमी से मसल रहा था.

मैं चुप चाप बाहर हॉल में बैठ कर वेट करने लगा और थोड़ी देर में मैने बेल बजा दी. मालकिन एक गाउन पहन कर आई और मैने उस्स्को खाना पकड़ा दिया. मेरी नज़रें झुक गयी लेकिन मालकिन का जिस्म गाउन से बाहर निकलने को आतुर हो रहा था. खाना लेते हुए मालकिन का हाथ मुझ से स्पर्श कर गया और मुझे एक करेंट सा लगा. मालकिन की आँखें मेरे बदल को टटोल रही थी. वो मुझे वासनात्मक नज़रों से देख रही थी जैसे बिल्ली दूध के कटोरे को देखती है. मेरे सीने पर हाथ रख कर वो बोली,” गणेश, तुम तो जवान हो गये हो और सुंदर भी. कभी क़िस्सी चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझ से माग लेना. मैं जानती हूँ की जवानी में मर्द को बहुत मुश्किल आती है.” मैं जानता था कि वो मुझ से चुदवाने के लिए तड़प रही है, लेकिन मैं अपनी नौकरी को रिस्क में नहीं डाल सकता था.

वापिस आते हुए मेरे बदन में एक अजीब हुलचूल हो रही थी और मेरा लंड ना चाह कर भी अकड़ रहा था. मालकिन का नंगा जिस्म बार बार मेरी नज़र के सामने आ जाता. उस रात मैने मालकिन की याद में मूठ मारी.

स्कूल में एक लड़का और एक लड़की नये दाखिल हुए. सुनील और नामिता दोनो भाई बेहन थे. वो हमारी एमएलए प्रभा देवी के बच्चे थे. प्रभा देवी को सब जानते थे. वो प्रेम और ममता की तस्वीर मानी जाती थी. प्रभा देवी कोई 45 साल की थी. हमेशा सफेद सारी में रहती किओं की उसस्का पति मर चुका था. सभी उस्स्को मा कह कर बुलाते थे. सुनील, मेरी क्लास में था. वो बिल्कुल लड़कीो जैसा दिखता था, गोरा चिटा, और कोमल. सभी लड़के उस्स्को प्यारा लोंदा कहते और प्यार से या ज़ोर से उसस्की गांद को चिकोटी काटने की कोशिस करते. सुनील की छाती भी औरतों जैसी सॉफ्ट थी. वो लड़का कम और लड़की अधिक लगता था. उसस्की बहन नामिता मुझ से दो क्लास आगे थी. लंबी, सुंदर और सेक्सी. उसस्की छाती का उठान देखते ही बनता. पॅंट में उसस्के चूतड़ बहुत उभरे हुए दिखते. काले कटे हुए बाल और तेज़ आँखें देख कर मैं पहली नज़र में नामिता से प्यार कर बैठा. उस रात से मैं नामिता को नंगी कल्पना करके मूठ मारने लगा. कल्पना में मैं अपने आप को राज और नामिता को मालकिन के रूप में देखने लगा.

कुच्छ दिन बाद रघु(स्कूल का एक बदमाश लड़का) ने सुनील को ग्राउंड में दबोच लिया और उसस्की पॅंट उतारने लगा. बेचारा सुनील रोने लगा.” चल साले लोंडे, मैं तुझे चोद कर अपना पर्सनल लोंदा बना कर रखूँगा. बहनचोड़, वेर्ना सारा स्कूल तुझे चोदने को तैयार बैठा है. अगर मेरे साथ दे गा तो तेरी बेहन को भी प्रोटेक्षन दूँगा. साली माल तो बहुत बढ़िया है तेरी बेहन. अगर मेरे बिस्तर में आ जाए तो तेरी चाँदी लगवा दूँगा, मेरे साले” मैं सब कुच्छ देख कर वहाँ चला गया. सुनील की पॅंट उत्तर चुकी थी और उसस्के गोरे चूतड़ एक काले अंडरवेर में झाँक रही थी. साली उसस्की गांद भी बहुत सेक्सी दिख रही थी. लेकिन उसस्का रोना देख कर मैं अपने आप को रोक ना सका और रघु से बोला,” रघु, सुनील को छ्चोड़ दे, वेर्ना अच्छा ना होगा.” रघु भी भड़क उठा और बोला” बहनचोड़, ये लोंदा मेरा माल है और उसस्की बेहन भी मेरा माल है. चल फुट यहाँ से वेर्ना तेरी भी गांद मार लूँगा.”

मेरा गुस्सा भड़क उठा. रघु मदेर्चोद मेरी नामिता के बारे ग़लत बोल रहा था. मैं दिल से नामिता को प्यार करता था. मैने रखू को गले से पकड़ कर खूब मारा. मैने चाकू निकाल लिया जब उसस्के दोस्त वहाँ पहुँच गये. चाकू मैने रघु की गांद पर मारा जहाँ से खून निकलने लगा. सभी लड़के भाग गये. सुनील मुझे थॅंक्स कहने लगा. तभी नामिता वहाँ आई और अपने भाई से सारी बात पुच्छने लगी. सुनील उस्स्को बताने लगा. तभी नामिता की नज़र मेरे चाकू पर गयी और वो मुझे नफ़रत से देखती हुई बोली,” चलो भैया, यहाँ तो लोग चाकू लिए घूमते हैं.” मेरा दिल टूट गया.

अगले दिन सुनील मुझ से हंस कर बात करने लगा और मुझे अपने घर भी बुलाया. मैं शाम को उसस्के घर गया तो प्रभा देवी ने मुझे शाबाशी दी की मैं बहादुरी से उसस्के बेटे की रक्षा करता हूँ. प्रभा देवी ने मुझे अपने सीने से लगा लिया और उसस्का गुदाज़ सीना मेरी कठोरे छाती से चिपक गया. आख़िर औरत का नरम सीना मर्द के दिल में आग लगा ही देता है. बेशक प्रभा देवी का रूप एक मा की याद दिलाता है फिर भी उसस्की नरम चुचि अपने सीने में महसूस कर के मेरे दिल में आग लग गयी.” गणेश बेटा, तुम रहते कहाँ हो?” मैने जवाब दिया,” माजी, मैं एक रेस्टोरेंट में काम करता हूँ और वहीं रहता हूँ.” “खैर अब तुझे काम करने की ज़रूरत नहीं है. तुम हमारे घर में रह सकते हो. मेरे ऑफीस वाले हिस्से में एक कमरा खाली है जहाँ तुम रह सकते हो और पूरी आज़ादी भी मिल सकती है, ठीक है, बेटा? तुझे सॅलरी भी मिलेगी.”

अंधे को क्या चाहिए? दो आँखें? फ्री में कमरा, रोटी, और घर जैसा माहौल. उस दिन से मैं उनके घर में रहने लगा. रहने क्या लगा, मेरी तो लॉटरी निकल पड़ी. स्कूल में सुनील की तरफ कोई आँख ना उठाता और नामिता भी मुझे अब नफ़रत नहीं करती थी. लेकिन अभी प्यार भी नहीं करती थी. खैर सब कुच्छ एक दम नहीं हो जाता. देखा जाए गा.

घर में सभी मुझे बहुत प्यार करने लगे और प्रभा देवी को अपने बच्चो की सेफ्टी का कोई डर ना था. सब से पहले मुझे खाना पकाने वालों से मिलवाया गया. रसोई में दो लोग काम करते थे. गंगू, एक बुजुर्ग आदमी और नाज़, एक 25 साल की औरत जो कि घर में ही रहती थी. नाज़ का कमरा मेरे कमरे से साथ ही था. बस बीच में एक बाथरूम था जो हम दोनो का सांझा था. नाज़ का रंग सांवला था, नैन नक्श तीखे, जिस्म भरा हुआ, आँखें चमकीली. उसस्की चुचि का साइज़ ज़रूर 36 ड्ड रहा होगा और चूतड़ काफ़ी गद्दे दार. उस्स्को देख कर मुझे अपनी मालकिन की याद आ गयी. नाज़ जब चलती तो कूल्हे मटकाती और मेरा लंड खड़ा कर देती. नाज़ देख सकती थी कि उसस्का जवान जिस्म मुझ पर क्या असर कर रहा है. जब भी मौका मिलता तो वो मेरे सामने झुक कर मुझे अपनी मस्त चुचि की झलक दिखा ही देती. एक दिन मैने हौसला कर के उसस्की चुचि को टच कर लिया जब वो मुझे ग्लास पकड़ा रही थी, वो मुझे बोली,” बच्चू, अभी छ्होटे हो, ऐसी हरकत तब करना जब मर्द बन जाओ. बेटे, मुझे बच्चो में कोई दिलचस्पी नहीं है. मर्दों का काम बच्चा नहीं कर सकता.” उसस्की बात सुन कर मैं जल भुन गया.

उस रात मैं नाज़ को अपनी पहली औरत बनाने की स्कीम बनाने लगा. अब मैं जवान था, लंड बैचैन था. मुझे भी चोदने के लिए औरत चाहिए थी. नाज़ बुरी नहीं थी बस मुझ से उमर में बड़ी थी. दूसरा कारण नाज़ को फसाने का ये था कि नामिता के दिल में ईर्षा पैदा हो जाए गी और वो मेरी तरफ आकर्षित हो जाए गी. यानी एक चूत से दूसरी का शिकार.

रात को मैं बिस्तर में लेटा हुआ था जब नाज़ की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी. वो गा रही थी. नहाते हुए गाना आम बात है. लेकिन मेरी कल्पना अब नाज़ का नहाता हुआ नंगा जिस्म देखने लगी. मैने अपने कान दीवार से लगा दिए. दीवार में मुझे अचानक एक छेद दिखाई पड़ा. मैने छेद में झाँका. छेद छ्होटा सा था लेकिन नाज़ की नंगी जवानी की झलक दिखाई पड़ ही गयी. उसस्का भीगा बदन पानी से चमक रहा था और वो मल मल कर नहा रही थी. मेरा लंड तन गया और मैने मूठ मारनी शुरू कर दी. काश नाज़ मेरे सामने आ कर चुदवा लेती. तभी उससने अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया. उसस्की मखमल जैसी चूत फाड़ फाडा रही थी. उसस्की उगली चूत में घुस गयी और वो भी उंगली से अपनी चूत चोदने लगी. नाज़ बाथरूम में अपनी उंगली से चूत चोद रही थी और मैं कमरे में मूठ मार रहा था.” ओह….अहह…..” मेरे मूह से निकल गयी एक हल्की सी चीख जब मेरे लंड ने रस छ्चोड़ दिया. नाज़ ने शायद मेरी चीख सुन ली. इसी लिए वो घबरा उठी और उससने अपने हाथ को रोक दिया और टवल लपेट कर बाहर चली गयी.

मैं घबरा गया और डर रहा था कि नाज़ को पता चल गया है की मैं उस्स्को नहाते हुए देख रहा था और वो मेरी शिकायत प्रभा देवी को लगाएगी. मेरी घर से च्छुटी हो जाएगी. खैर दूसरे दिन नाज़ मुझ से आँख नहीं मिला रही थी और ना ही मुझ से बात कर रही थी. एक अजीब बात ये थी कि नाज़ और नामिता च्छूप च्छूप कर धीमी आवाज़ में आपस में बातें कर रही थी. उस दिन सारा दिन मुझे स्कूल में उदासी लगी रही, लेकिन रह रह कर नाज़ का नंगा जिस्म मेरी नज़रों के सामने आ जाता.

स्कूल से वापिस आते हुए नामिता मुझे अजीब नज़रों से देख रही थी. दोपहर को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में लेटा हुया था जब क़िस्सी ने दरवाज़ा खाट खाटाया. बाहर नाज़ खड़ी थी. वो लाल रंग की सलवार कमीज़ पहने हुए थी और बहुत सीरीयस लग रही थी.” गणेश, मेरे कमरे में आयो, ज़रूरी बात करनी है.” मेरी गांद फटी जा रही थी. उसस्के कमरे में नामिता पहले से ही बैठी थी. “तो जनाब, नाज़ को छुप कर नहाते हुए देख रहे थे? मैं अगर मा को बता दूँ तो अभी च्छुटी हो जाए तेरी.” नामिता ने मुझे धमकाया.”नही….मैने कुच्छ नहीं ……मेरा कोई कसूर नही….सच मुझे कुच्छ नहीं पता….” मैं कुच्छ बोल ना पा रहा था.

नामिता ने मुझे गुस्से से देखा,” नाज़ ने तेरी आवाज़ सुनी थी. तुम क्या कर रहे थे? नाज़ तो अपनी चूत में उंगली कर रही थी, बेह्न्चोद तुम क्या कर रहे थे? इस तरह एक चुदासी लड़की को देखना अच्छा है? मैं और नाज़ कब से एक लंड की तलाश में थी और तू अपना लंड दिखाने की बजाए इसकी चूत देख रहे थे कामीने. तेरी सज़ा ये है कि या तो तू घर से जाएगा और या हमारे सामने अपने लंड का पारदर्शन करेगा. बोल क्या इरादा है?” कहते हुए नामिता हंस पड़ी और नाज़ भी मुस्कुराने लगी. मैं समझ गया कि दोनो लड़कियाँ मुझ से चुदवाना चाहती हैं. मेरी लॉटरी निकल पड़ी थी.

मैं अपनी पॅंट खोलने लगा. तुम जैसी मस्त लड़कियो से प्यार करने के लिए मैं जनम से तड़प रहा हूँ और तुम मुझ से चुदवाना चाहती हो. तो देखो नामिता, कैसा लगा गणेश का लोड्‍ा? नाज़ तुम भी देखो रानी, आपकी सेवा में हाज़िर है मेरा कुँवारा लंड. सच में तुम मेरे लिए सुंदरता की देवी हो!” नामिता हंस पड़ी,” बहन्चोद, पहली बात ध्यान से सुन. सब के सामने तुम हुमको दीदी कह कर पुकारो गे और हम तुझे भैया. इस तरह क़िस्सी को शक नहीं होगा और हमारा खेल सेफ्ली चलता रहे गा. चुदाई के खेल को रिश्तों के पर्दे में ढक लिया जाएगा और हम तीनो मज़े करते रहेंगे, ठीक है?”

नाज़ अपने कपड़े उतारने लगी और नामिता भी नंगी होने लगी. मुझ जैसे लड़के की किस्मत खुल रही थी. मेरी नज़र नामिता के नंगे शरीर से हट नहीं रही थी. जब उससने अपनी ब्लॅक कलर की पॅंटी उतारी तो मेरा दिल धक धक करने लगा. उसस्की चुचि एक दम कड़ी हो चुकी थी. नामिता की चूत पर छ्होटी छ्होटी झांट थी. शायद कुच्छ दिन पहले शेव की थी उससने अपनी चूत. उसस्की आँख में लाल डोरे तेर रहे थे. मैने काँपते हाथ से उसस्की चुचि को स्पर्श किया तो उसस्की आह निकल गयी. मैं भी पूरा नंगा हो चुका था, नाज़ मेरी पीठ से चिपकने लगी. नाज़ की भरपूर चुचि मेरी पीठ में गढ़ रही थी और उसस्के होंठ मेरी गर्दन को चूमने लगे. मैने नामिता को अपने आलिंगन में ले लिया एर उसस्की चूत पर हाथ फेरने लगा. उसस्की चूत एक आग की तरह दहक रही थी. मैने अपने तपते होंठ उसस्की होंठों पर रख कर किस करने लगा. कमरे में वासना की आँधी उमड़ चुकी थी. नाज़ की बिन बालों वाली चूत मेरी चूतड़ से टकरा रही थी और उससने झुक कर मेरे लंड को पकड़ लिया और आगे पीच्छे करने लगी.

“दिल तो चाहता है कि मैं पहले चुदाई करवाउ पर डर लगता है. नाज़, तुम तो तज़ुर्बेकार हो, तुम ही पहली बार इस लंड का मज़ा ले लो और मुझे चुदाई की तड़प में जलने दो कुच्छ देर और. फिर तुम मुझे इस मूसल लंड से निपटने में मदद करना. गणेश भैया, तुम पहले अपनी बड़ी दीदी की चूत को ठंडा कर दो और बाद में मुझ को मज़े से चोदना. किओं नाज़ तैयार हो अपने भैया के लंड से अपनी चूत चुदवाने के लिए?” नाज़ बिना बोले मेरे लंड पर अपना मूह झुकाती चली गयी और उससने मेरे लंड को मुख में भर लिया. अपने एक हाथ से उससने मेरे अंडकोष उप्पेर उठा लिए और मेरे लंड को चूसने लगी. मुझे लगा जैसे मेरा लंड झाड़ जाए गा जल्दी ही. लेकिन मैने अपना ध्यान अपने सामने खड़ी वासना से भरी सेक्सी लड़कियो से दूर हटाया क्योंकि मैं अभी झड़ना नहीं चाहता था.

नाज़ मेरा लंड चूस रही थी और फिर मैने नामिता की चूत को सहलाना शुरू कर दिया. मैने एक उंगली उसस्की चूत में डाल दी और आगे पीच्छे करने लगा. वो गरम हो कर अपनी चूत मेरी उंगली की तरफ बढ़ाने लगी, जैसे वो सारी उंगली ले लेना चाहती हो,” गणेश बेह्न्चोद, साले और डाल मेरी चूत में. अपनी बेहन को उंगली से चोद बेह्न्चोद, ज़ोर से पेल. मेरी चूत में आग लगी हुई है.” मैं भी बहुत गरमा चुका था,” दीदी, अभी तो चोदा भी नहीं है तुमको, तुमने तो मुझे पहले से ही बेहन्चोद कहना शुरू कर दिया. अगर मुझे बेह्न्चोद बनाने की इतनी जल्दी है तो पहले तुझे चोद लेता हूँ. जब छ्होटी बेहन से बिना चुदाई किए नहीं रहा जाता तो पहले उसस्की चूत ठंडी कर देता हूँ. नाज़ दीदी तो पहले काफ़ी लंड का स्वाद ले चुकी होगी. पहले तुझे ही किओं ना चोद लूँ, नामिता दीदी?”

नामिता इतनी गरम हो चुकी थी कि उससने नाज़ को मेरे लंड से अलग किया और खुद चूसने लगी. नाज़ मुझ से लिपटने लगी और मैने अपने होंठ उसस्की चुचि पर रख दिए और उसस्का दूध चूसने लगा,” ओह भैया किओं तडपा रहे हो अपनी बेहन को, पी लो मेरा दूध. मेरे निपल चूस लो भैया, मेरी चूत से रस की बरसात हो रही है. अपनी बहनो को चोद डालो भैया, हम को चोदो मेरे भाई. एस्सा करो, तुम पहले नामिता की सील तोड़ लो. मैं तो पहले ही चुद चुकी हूँ, तुम नामिता को औरत बना डालो, भैया” मैने नामिता को अपने लंड से अलग किया और उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया. कामुकता से भरी नामिता मुझे गौर से देख रही थी और उसस्की नज़र मेरे लंड से नहीं हट रही थी. नाज़ ने नामिता को होंठों पर किस किया और फिर उस्स्को पीठ के बल लिटा कर नामिता की चूत चाटने लगी. मैं नाज़ के चूतड़ सहलाने लगा,” अहह…..ओह….नाआआज़….चोद दे मेरी चूत…….भैया अब नहीं रहा जाता…….गणेश….पेल दो अब तो…..मेरी चूत जल रही है…..और मत जलायो मुझे…..हाआँ नाज़….अब जीभ से नहीं चैन मिलता, मेरे अंदर लंड डलवायो मेरी बहना…”

नाज़ मुस्कुराते हुए उठी और बोली,” गणेश भाई, तेरी बेहन अब भत्ती की तरह दहक रही है. अपना लंड एक हथोदे की तरह मारो इसकी जलती हुई चूत में. निकाल दो इस छिनाल की गर्मी. इसकी चूत को अपने लंड से भर दो. मैं इस्को चुदते देखना चाहती हूँ.” मैने नामिता की टाँगों को फैला दिया और उसकी चूत के होंठ अपने आप खुल गये. चूत के उप्पेर उसका छ्होला फुदक रहा था. मैने उसकी चूत को थपकी मारी तो वो कराह उठी,” जल्दी करो भैया, प्लीज़….और मत तडपयो, चोद डालो अब तो मेरे भाई”

मैने लंड का सूपड़ा चूत के मूह पर टीकाया. एस्सा लगा कि सूपड़ा क़िस्सी आग के शोले पर रख दिया हो. धक्का मारा तो लंड आसानी से चूत में घुस गया. शायद नामिता की चूत का रस इतना बह रहा था कि उसस्की चूत कुँवारी होने के बावजूद आसानी से लंड निगल गयी. और या फिर उसने पहले ही बैंगन या खीरा इस्तेमाल कर की चूत को खोल लिया था. कट की ग्रिफ्त लंड पर कितना मज़ा देती है मैं नहीं जानता था. लेकिन अब मुझे महसूस हुआ की चुदाई का मज़ा क्या होता है. मेरे चूतड़ अपने आप आगे पीच्छे हो कर चुदाई करने लगे. असल में मैं जितनी तेज़ी से धक्के मारता, मुझे उतना ही मज़ा आता. उधर नामिता भी अपनी गांद उछाल्ने लगी मेरे धक्कों का जवाब चूतड़ उच्छल कर देने लगी.

मैने नाज़ को कहा कि वो नामिता की चुचि को चूसना शुरू कर दे. नाज़ बिना बोले नामिता की चुचि पर झुक कर उसस्के निपल्स चूसने लगी. मेरे हाथों ने नामिता को चूतड़ के नीचे से जाकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा,” अर्र्र्रररगज्गघह……मैं मर गइईई….ज़ोर से भाई….चोद बेह्न्चोद….चोद मुझे…..मैं गइईई…..गणेश…….ज़ोर सी” च्चपक च्चपक की आवाज़ से कमरा गूँज रहा था जब मेरा लंड नामिता की चूत के अंदर बाहर होता.” बहुत मज़ेदार हो तुम बहना….मैने एस्सा मज़ा कभी नहीं लिया…अगर पता होता इतना मज़ा आता है तो बेहन तो क्या मा को भी चोद देता को….ओह्ह्ह मेरी प्यारी बहना, बहुत मज़ेदार हो तुम…तुम ने मुझे धान्या कर दिया दीदी”

तभी नामिता की चूत मेरे लंड पर और ज़ोर से कस गयी और उसस्का बदन एंथने लगा. उसस्की साँस मुश्किल से चलने लगी. उसस्की जंघें मेरी कमर पर कस गयी. इधर मेरा लंड भी छूटने को था. मेरा लंड राजधानी एक्सप्रेस के पिस्टन की तरण चुदाई करने लगा,” ओह…दीदी….बस…..तेरा भाई झाड़ रहा है…..मेरा लंड झाड़ रहा है……क्या मैं पिचकारी चूत में डाल दूं या बाहर निकाल लूँ…भगवान कसम नहीं रहा जाता दीदी” नामिता की चूत पानी छ्चोड़ चुकी थी और वो अपने आप को संभाल कर बोली,” बाहर निकाल लो लंड, को भैया, मुझे गर्भवती नहीं होना है, बाहर निकालो जल्दी से.”

मैने अपना लंड बाहर खींचा तो नाज़ ने झट से झपट लिया और अपने मूह से लगा कर चूसने लगी और मेरा अंडकोष से खेलने लगी. मेरे हाथ नामिता दीदी की भीगी चूत को सहलाने लगे. अचानक मेरा लंड पिचकारी छ्चोड़ने लगा. मेरा लंड रस नाज़ के गालों पर, चुचि पर और कंधों पर जा गिरा. कुच्छ तो उससने पी लिया लेकिन रस की धारा इतनी तेज़ थी कि नाज़ के नंगे जिस्म पर फिर भी गिर पड़ा. नाज़ एक रंडी की तरह मेरा रस चाटने लगी.

मेरा लंड अब सिकुड चुका था. अब मुझे चुदाई में कोई दिलचस्पी ना रही थी. मैं नामिता की बगल में लेट गया. नाज़ की बारी अभी बाकी थी. लेकिन मेरे में अब दम नहीं रहा. मेरे पैरों के पास नाज़ मुझे चूमने लगी. उसस्के होंठ मेरे पैरों के अंगूठे को लंड की तरह चूसने लगे. फिर उससने मेरे पैरों को किस किया, फिर टख़नो को. धीरे से उसस्की ज़ुबान उप्पेर उठने लगी. उसकी ज़ुबान मुझ में फिर से वासना भरने लगी और मेरा लंड फिर से सिर उठाने लगा. मैने नामिता की चुचि को मसलना शुरू कर दिया. वो हंस कर बोली,” अपनी बेहन को चोद कर अभी दिल नहीं भरा, भैया? फिर से लंड खड़ा हो रहा है. मेरी चूत की चटनी बना दी है तुमने.” कहते हुए नामिता ने मेरे लंड को पकड़ लिया और मुठियाने लगी. नीचे से नाज़ की जीभ और हाथ मुझे उतेज़ित कर रहे थे. मुझे होश तब आया जब नाज़ ने मेरे अंडकोष को मूह में भर लिया,”गणेश भैया, अब तुझे दूसरी बेहन को चोद कर शांत करना है, मेरे भाई. उस्स्को भी तो उसस्का हिस्सा मिलना चाहिए.” नामिता मेरे कान में बोली.

नाज़ ने मुझे पेट के बल लेट जाने को कहा तो मैं लेट गया. मुझे नहीं पता था कि उसस्का इरादा क्या है. मुझे अपने दोनो चुतताड पर दोनो लड़कियो के होंठ महसूस हुए. वो साली गश्ती लड़कियाँ मेरे चूतड़ चाटने लगी. क़िस्सी का हाथ मेरे चूतड़ को फैला रहा था. तभी एक उंगली मेरी गांद में घुसाने की कोशिश करने लगी. मैने गांद को टाइट कर लिया. तभी मेरी गांद पर एक ज़ोरदार थप्पड़ लगा. मेरे होश ठिकाने आ गये दर्द के मारे.” साले कुतिया की औलाद, अपनी बहन को चोद रहा था तो मज़े ले रहा था, अब अपनी गांद में उंगली गयी तो भड़क रहा है. नामिता ने तेरा 9 इंच का लंड ले लिया तब तो मज़े लेते थे, अब एक उंगली से गांद फटने लगी? अपनी गांद को ढीला छ्चोड़ो अगर हमारे साथ मज़े लेने हैं तो,” नाज़ ने एक और ज़ोरदार थप्पड़ मेरी गांद पर मारते हुए कहा. अजीब बात थी कि दूसरे थप्पड़ से मुझे दर्द तो हुआ लेकिन मज़ा भी आया. मैं मूड कर बोला,” क्या बात है? अपने भाई की गांद मारने का इरादा है क्या? तुम्हारी खातिर तो मैं कुच्छ भी कर लूँगा, मेरी बहनो. लो चोद लो अपने भाई को अगर यही इरादा है”

मैने अपनी गांद ढीली छ्चोड़ डी. तभी मुझे अपनी गांद में एक ज़ुबान घुसती महसूस हुई और मुझे बहुत मज़ा आया. नामिता या नाज़ मेरी गांद को ज़ुबान से चोद रही थी और दूसरी मेरे चूतड़ चाट रही थी. मेरा लंड काबू में नहीं था. अगर और कुच्छ देर यही खेल चलता रहा तो मैं झाड़ जाता. लेकिन तभी मुझे सीधा कर दिया गया. नाज़ ने अब अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए. मुझे किस कर के बोली,” हरामी, अपनी गांद का स्वाद चख ले मेरे होंठों से. नामिता, हमारे भाई की गांद बड़ी मसालेदार है. अगर टेस्ट करना है तो कर लो. फिर इस्सको भी तो अपनी गांद का टेस्ट करवाना है हमने!”

मेरा लंड आसमान की तरह उठा हुआ था. नाज़ मेरे उप्पेर चढ़ती हुई मेरे लंड पर अपनी चूत रगड़ने लगी. उसस्की चूत भी रस टपका रही थी,” किओं भैया, चढ़ु क्या तेरे लंड पर? करूँ सवारी अपने भैया के लंड की? तू भी क्या याद रखेगा की क़िस्सी लड़की ने चोदा था तुझे. गणेश भाई, नीचे लेट कर बहन चोदने का मज़ा लो मेरे भैया,’ कहते ही उससने मेरे लंड पर अपनी चूत को गिरा दिया. गुप की आवाज़ से मेरा लंड नाज़ की अनुभवी चूत में घुसता चला गया. मैने नाज़ के चूतड़ कस कर पकड़ लिए और नीचे से धक्के मारने लगा. नाज़ की मोटी चुचि मेरे होंठों के सामने झूल रही थी और मुझ से ना रहा गया तो मैने उसस्की चुचि को मूह में ले कर चूसना शुरू कर दिया. नामिता नीचे जा कर मेरे अंडकोष चूमने लगी. मेरी जंघें नामिता के चेहरे पर कस गयी.
 
वाह गणेश बेटा, एस्सा सुख तुझे नसीब हुआ है, मैं अपने आप से बोला. नाज़ मुझे उप्पेर से चोद रही थी. माखन जैसी चूत मेरे लंड की मालिश करते हुए चोद रही थी.” नाआआआज़ मेरी बहना, क्या चीज़ हो तुम…..क्या मज़ेदार चूत है तेरी….साली गश्ती की तरह चुदति हो….ज़ोर से चोद अपने भाई को….ओह नामिता चूसो मेरे अंडकोष…..हााअ……..एयाया…..चोदो” नाज़ ने स्पीड तेज़ कर दी. मेरी मूह बोली बेहन चुदाई की कला में अनुभवी थी…नाज़ साली धक्के धीरे कर देती जब मैं झड़ने के करीब होता. मैं उसस्के निपलेस चूस्ता रहा. हम दोनो हाँफ रहे थे. मेरी नामिता बेहन ने अब मेरी गांद में ज़ुबान घुसा डाली और मेरी गांद चोदने लगी.

” हाई भाई….चोद मुझे….चोद अपनी नाज़ को…अपनी बहना को….मेरी चूत पानी छ्चोड़ रही है….तू मेरे अंदर पिचकारी मार लेना…..मैं गोली खाती हूँ….पेलते रहो मुझे भाई….चोद डालो डाल दो रस मेरी प्यासी चूत में….चोद……चोद….चोदो…चोद चोद मदेर्चोद मैं झडियीई” नीचे से नामिता ने अपनी उंगली मेरी गांद में डाल कर चुदाई शुरू कर दी तो में भी झड़ने लगा. मेरा रस नाज़ की चूत में गिरने लगा. वो उप्पेर से थाप पर थाप मार रही थी. मुझे पता ही नहीं चला कि कब तक मेरा लंड झाड़ता रहा. शाम की 5 बजे तक हम तीनो नाज़ के बिस्तर में नंगे हो सोते रहे

टू बी कंटिन्यूड................
 
डाल दो रस मेरी प्यासी चूत में--2

पिच्छले भाग में आप ने पढ़ा कैसे नाज़ और नामिता की चुदाई के साथ मेरी चुदाई की शुरू आत हुई. उस दिन मैने सच में सेक्स का मज़ा लिया और जाना कि इस्को स्वर्ग का सुख किओं कहते हैं. मेरे सामने चुदाई का रास्ता खुल चुका था और एक नहीं दो दो लड़कियो से मैं चुदाई का खेल खेलने लगा.

अगले दिन से मुझे नाज़ और नामिता को दीदी पुकारने की आदत डालनी थी. वैसे भी प्रभा देवी मुझे बहुत प्यार करती थी. लेकिन मैं ये ज़ाहिर नहीं कर सकता था कि जिस घर ने मुझे रहने का असरा दिया है मैं उसी घर की बेटी से चुदाई का गंदा खेल खेल रहा हूँ. नामिता मेरी मुझ पर जान च्चिडकती थी और नाज़ मेरे लंड की दीवानी हो चुकी थी. रोज़ मैं नाज़ और नामिता की चुदाई करता और क़िस्सी को पता ना चलता. मेरी तो बस चाँदी ही थी.

फिर एक दिन मेरा और नाज़ के कमरे वाला हिस्सा प्रभा देवी की पार्टी के वर्कर्स के लिए खाली करवा लिया. पार्टी को एलेक्षन की तैयारी के लिए कुच्छ दिन वहीं रहना था. प्रभा देवी को भी पार्टी के सीनियर लीडर्स से मीटिंग्स करनी होती थी और वो अब सारा दिन सारी रात लीडर्स के साथ ही रहती. पार्टी के नेता मोहन लाल भी वहीं थे जिनको प्रभा देवी इज़्ज़त से पिता जी कहती थी. मुझे अब सुनील के कमरे में शिफ्ट कर दिया गया और नाज़ अब नामिता के कमरे में रहने लगी. चुदाई में रुकावट होने के चान्स थे. खैर रात को मैं अपनी किताब पढ़ कर बाहर सैर करने को निकला तो एक कमरे की बत्ती जल रही थी. रात के 2 बजे थे. मैं घूमता हुआ उधर ही निकला गया और उत्सुकतावश मैं कमरे के पास चला गया. मुझे कुच्छ आवाज़ें सुनाई पड़ी तो मैने खिड़की से झाँक लिया. अंदर का नज़ारा चौंका देने वाला था. मेरे पैरों से ज़मीन खिसक गयी.

मेरी मा समान औरत प्रभा देवी मदरजात नंगी थी. प्रभा देवी का रूप देवी का नहीं बल्कि रंडी का दिखाई दे रहा था. प्रभा देवी, पलंग के सामने झुकी हुई थी और मोहल लाल नंगा हो कर टाँगों को पसार कर लेटा हुआ था. चाहे मोहल लाल की उमर 60 साल से कम ना होगी, लेकिन उसस्का लंड सखत हो कर तना हुआ था और प्रभा उसस्के लंड को चूस रही थी. मेरी मूहबोली मा की गांद मेरी तरफ उठी हुई थी जिससे मुझे उसस्की गांद का छेद कभी खुलता और कभी बंद होता दिखाई देता. प्रभा की चुचि नीचे झूल रही थी.

मोहन लाल कभी प्रभा की चुचि को दबा देता और कभी उसस्के चूतड़ को स्पर्श कर लेता,” प्रभा बेटी, तुम बहुत कामुक औरत हो. मेरी पत्नी ने कभी मेरा लंड नहीं चूसा. साली बोलती है की लंड गंदी चीज़ है. बहनचोड़ अगर गंदी है तो चूत में किओं लेती है साली. प्रभा धीरे धीरे चूस वरना मैं चोदने से पहले ही झाड़ जायूंगा, मेरी रानी बेटी, और मैं अपनी प्यारी बेटी को चोदे बिना नहीं सो सकता. कितने दीनो के बाद ये मौका मिला है. साले अख़बार वाले हम नेता लोगों को अकेले कहाँ छ्चोड़ते हैं. कई बार सोचा है कि अपनी बीवी को तलाक़ दे कर तुझ से शादी कर लूँ, पर नेता लोगों की इज़्ज़त भी तो बहुत नाज़ुक होती है. एलेक्षन भी सिर पर हैं. पार्टी वाले तो पहले ही अफवाहें फैला रहे है कि मैं तुझे एमएलए का टिकेट इस लिए देता हूँ किओं के तुम मेरी रखैल हो. किस किस बेह्न्चोद का मूह बंद करूँ मैं? कोई सेफ रास्ता नही है हम दोनो के लिए?”

प्रभा देवी सीधी खड़ी हो गयी और अपनी चुचि को मोहन लाल के मूह में डालते हुए बोली,” पिताजी, सब के सामने आपको पिता कहती हूँ फिर भी लोग साले हमारी असलियत पहचान लेते हैं. जब से मेरे पति की मौत हुई है आप के लंड का ही तो असरा है मुझे. आपकी पत्नी भी मुझे सौतेन समझती है. वो भी अपनी जगह ठीक है किओं के मैने क़ब्ज़ा तो उसस्के अधिकार वाले लंड पर ही किया हुआ है. लेकिन, पिताजी, मैं आपके बिना नहीं रह सकती. आप ने जो मुझे एमएलए का टिकेट दिया है उस एहसान का बदला भी तो चुकाना है मुझे. आप मुझ से जो चाहें कर लो लेकिन मुझे अपने आप से अलग कभी मत करें. एक ख़याल आया है मेरे मन में. किओं ना नामिता की शादी आपके बेटे रमेश से कर दी जाए. हमारी राजनीतिक ताक़त भी बढ़ जाए गी और समाज में एक रिश्ता भी बन जाए गा. कल हमारे बच्चे ही तो नेता बनेंगे. मा के लिए समधी और बेटी के लिए पति उपलब्ध हो जाएगा और कोई कुच्छ बोलेगा भी नहीं.”

मोहन लाल प्रभा की चुचि को चूमते रहे जैसे बच्चा दूध पी रहा हो. प्रभा की चुचि उनके थूक से गीली हो कर चमक उठी. प्रभा प्यार से उनके बालों में उंगलियाँ चलती रही.’हां बेटी, रमेश की शादी तेरी बेटी से करना एक मास्टर स्ट्रोक होगा. इस से हमारी ताक़त भी बढ़ेगी और हमारा प्यार भी च्छूपा रहे गा. मैं अपनी पत्नी से बात करता हूँ. लेकिन अब जल्दी से पलंग के उप्पेर चढ़ जयो. आज मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे लंड की सवारी करो और मैं तेरा दूध पीता रहूं और चोद्ता रहूं. मैं तेरे चूतादो को थाम कर नीचे से चोदना चाहता हूँ.चल प्रभा रानी जल्दी कर, मेरा लंड बेताब हो रहा है.” प्रभा गांद मटकाती हुई मोहल लाल के उप्पेर चढ़ गयी. इस उमर में भी प्रभा के जिस्म में क्या बात थी. उससने अपनी जांघों को फैला लिया और मोहल लाल की कमर के दोनो तरह अपनी टाँगों को फैलाते हुए अपनी चूत को उसस्के लंड पर गिराना शुरू कर दिया. मोहल लाल के हाथों ने मेरी मूहबोली मा की गांद को जाकड़ कर अपने लंड पर गिरा लिया.

“उईईए….मोहन……धीरे से…..बहुत मोटा है आपका…..अहह…मोहनजी आप का लंड मेरे गर्भाष्या से टकरा रहा है… ऐसे ही मसलो मेरी चुचियो को….आअहह….ह्म्‍म्म्ममम…..ओह…हाई” प्रभा देवी बोल रही थी और उसस्की गांद अब मोहन लाल के लंड पर उप्पेर नीचे हो कर मस्ती से लंड की सवारी कर रही थी. प्रभा देवी के चूतड़ बहुत प्यारे लग रहे थे. मेरा लंड तो अपनी मूह बोली मा की गांद चोदने को ललचा रहा था. मोहन लाल नीचे से अपने चूतड़ उठा उठा कर प्रभा को निहाल कर रहा था. वो अपने मूह में ले कर प्रभा के निपल्स चूसने लगा. प्रभा ने अपनी गांद तेज़ी से उप्पेर नीचे करनी शुरू कर दी. चुदाई ज़ोर पकड़ रही थी. मोहन लाल ने प्रभा के चूतड़ अपने हाथों में थाम लिए और तेज़ी से चोदने लगा.

“मोहन जी, पता है की औरत कैसी चुदाई की ख्वाइश रखती है? कि मर्द उस पर चढ़ कर चोदे, मर्द हमेश औरत के उप्पेर का स्थान रखता है. मैं आपके लंड की सवारी कर रही हूँ, मुझे मज़ा भी बहुत आ रहा है. मैं उसी तरह से चुदाई करवाती रहूंगी जैसे आप कहेंगे, जैसा आप कहेंगे. लेकिन मुझे चुदाई के असली मज़े का एहसास तभी होता है जब आप अपनी प्रभा बेटी को उप्पेर चढ़ कर चोदते हैं, पिताजी, है अब ज़ोर से चोदो मुझे, प्लीज़ पिता जी” मोहन लाल ने अपनी एक उंगली प्रभा की गांद में पेल डाली और प्रभा चिहुनक उठी” ओह! ओह! मदरचोड़, अब मेरी गांद भी नहीं बक्षोगे…..चूत से मन नहीं भरा? आह पेल डालो गांद भी मोहन….दर्द होता है लेकिन आपके लिए दर्द भी झेल लूँगी मोहनजी….मुझे प्यार करो मोहन!”

मोहन लाल ने प्रभा के कंधे पर काट खाया और ज़ोर से चूमने लगा और तेज़ी से उंगली भी गांद में पेलने लगा. वो हानफते हुए बोला,” मेरी प्यारी बिटिया रानी, तुझे नीचे डाल कर भी चोदुन्गा….छ्चोड़ूँगा नहीं….पहले तुम तो मुझे चोद लो….फिर तुझे अपनी बीवी की तरह उप्पेर चढ़ कर भी चोदुन्गा…..तेरी गांद भी चोदना चाहता हूँ बेटी. कितनी सेक्सी है तेरी गांद? ओह रब्बा कितना मज़ा दे रही हो तुम मुझे.” दोनो पागलों की तरह चुदाई में मस्त थे. मेरा लंड खड़ा हो चुका था. मैने अपनी पॅंट खोल कर अपना लंड हाथ में ले लिया और अपनी मूह बोली मा की चुदाई देखते हुए मूठ मारने लगा. प्रभा देवी के चूतड़ उप्पेर नीचे होते हुए बहुत सेक्सी लग रहे थे और वो चिल्ला रही थी” चोदो ज़ोर से राजा…फाड़ डालो मेरी चूत….पेलो राजा…पेलो अपनी रंडी बेटी को”

अचानक मोहन लाल रुक गये और प्रभा के कान को चूमते हुए बोले,” प्रभा बेटी, अब तुझ पर सवारी करने का वक्त आ गया है. मोहन के नीचे पड़ कर चुदोगि क्या?” प्रभा नटखट अंदाज़ में बोली,” जल्दी से चोद राजा, पहले ही चूत जल रही है, लंड खा कर और भी भूख बढ़ चुकी है इससकी, राजा, अब उप्पेर चढ़ कर भी चोद डालो मुझे.” मोहन लाल ने प्रभा को घोड़ी बनाने को कहा,” क्या? घोड़ी बनूँ? ” मोहन हंस पड़ा” बेटी, औरत और घोड़ी में क्या फरक है? दोनो ही सवारी के काम आती हैं. औरत की छोटी घोड़ी की लगाम के बराबर होती है. मैं तुझे पीछे से चोदना चाहता हूँ, तुझे कोई एतराज है क्या?” प्रभा उसी वक्त पलंग पर झुकती हुई बोली,” नहीं मेरे सरकार, चुदना है तो नखरा कैसा? लंड पेल डालो मेरी प्यासी बुर में जल्दी से. मैं आपके लिए घोड़ी तो क्या कुतिया बन सकती हूँ”

जैसे ही प्रभा आगे झुकी, मोहन ने पीछे से लंड का प्रहार किया और प्रभा के चूतड़ की दरार से होता हुआ लंड उसस्की चूत में परवेश कर गया. मोहन ने अपनी रखैल की छोटी को कस के पकड़ लिया और ऐसे चोदने लगा जैसे वो घोड़ी हांक रहा हो. मोहन के अंडकोष ज़ोर ज़ोर से प्रभा की गांद से टकराने लगे. दोनो पसीने से भीग चुके थे. कमरा फ़चा फ़च की आवाज़ों से गूंजने लगा. मेरा हाथ भी तेज़ी से मेरे लंड के उप्पेर नीचे चलने लगा किओं की प्रभा देवी का नंगा जिस्म मुझे बहुत उतेज़ित कर रहा था. प्रभा अपने चूतड़ मोहन के लोड्‍े पर ज़ोर ज़ोर से मार रही थी. मेरा लंड भी झड़ने के करीब था. मोहन लाल प्रभा के चूतड़ नोच रहा था और हन्फ्ते हुए चुदाई में मस्त था.

“प्रभा बेटी, मैं झार रहा हूँ, बेटी ऐसी मस्त औरत मैने कभी नहीं देखी. तू बहुत मस्ती से चुदवाती हो रानी. ओह्ह्ह्ह मैं गया…..हाई बेटी…..” प्रभा भी मस्ती से भरी हुई थी जब मेरे लंड ने पिचकारी छ्चोड़ डी. मेरे लंड रस की धारा बहुत दूर तक गयी और अपने हाथों पर मुझे अपने लंड का रस महसूस हुआ. आख़िरी बारी अपनी मूह बोली मा के नंगे जिस्म को देखते हुए मैं सुनील के कमरे की तरफ लौट पड़ा. सारी रात प्रभा का नंगा बदन मेरी आँखों में छाया रहा और मेरा लंड सारी रात प्रभा को चोदने के लिए मचलता रहा.

अगले दिन से सारा काम रुटीन में चलने लगा लेकिन मेरी नज़र में अब प्रभा के लिए वासना जाग चुकी थी. मैं हर वक्त प्रभा को नंगे देखने की ताक में रहता, उस्स्को गले लगाने का बहाना ढूनडता रहता, उसस्कीे ब्लाउस से उसस्की चुचि की घाटी में झँकता.

एक महीने के बाद नामिता के नानाजी नामिता की शादी के सिलसिले में हमारे घर आने वाले थे. मैं उस वक्त प्रभा देवी के बाथ रूम के पास मंडरा रहा था के शायद मेरी मूह बोली मा के नंगे जिस्म की झलक मिल पड़े. तभी जब फोन बज उठा. फोन प्रभा ने बाथरूम से ही ले लिया.. “हेलो पापा, कैसे हो, कब आ रहे हो. मैं नहा रही हूँ, ओह पापा आप से क्या परदा, बिल्कुल नंगी हूँ…..बस आपके लिए……मैने अभी अभी झांते सॉफ की हैं पापा….मैं जानती हूँ मेरे पापा को अपनी बेटी की चूत पर बाल बिल्कुल अच्छे नहीं लगते….सच पापा आपकी आवाज़ सुनते ही मेरी चुचि कड़ी हो उठी है….अब मुझ से आपका इंतज़ार भी नहीं होगा….जल्दी आइए पापा, मैं आपकी बाहों में मचलना चाहती हूँ….आपका लंड चूसना चाहती हूँ, पापा, आप तो जानते ही हैं कि विधवा होने के बाद मुझे अगर क़िस्सी ने चोदा है तो आप ने…क्या आप भी नंगे हो चुके हैं? सच? आपका लंड भी खड़ा हो गया है? सच? नहीं पापा, इस्सको मूठ ना मारें, मैं मूह में ले कर चूसना चाहती हूँ, बिल्कुल वैसे जैसे मम्मी चुस्ती थी. आअप जल्दी आ जाएँ, पापा, प्लीज़”

मैं चौंक पड़ा. तो साली प्रभा देवी साली सभी बाज़ुर्ग मर्दों से चुदवाती है? अब अपने बाप से चुदाई के बातें कर रही है. मेरी बारी कब आएगी. साली का चक्कर अपने ही बाप से भी चल रहा है. बाथरूम का दरवाज़ख़्ुला और प्रभा देवी टवल लपेटे बाहर निकली. पानी से भीगा बदन कयामत ढा रहा था. उसस्के ठुमक ठुमक करते हुए कूल्हे मेरा लंड खड़ा कर रहे थे. प्रभा की जंघें अधिक दिखाई दे रही थी किओं की उसस्का टवल बहुत छ्होटा था. मैं जान बुझ कर दूसरी तरफ से तेज़ी से कमरे में आया और प्रभा से टकरा गया. टक्कर इतनी ज़ोर से मारी के प्रभा का टवल खुल गया और नीचे गिर पड़ा.” आइ आम सॉरी मा, मुझे दिखाई ही नहीं दिया कि आप आ रही हैं.” लेकिन मेरी ज़ुबान बंद हो गयी जब मेरी नज़र ने प्रभा को नगन हालत में देखा. उसस्की मस्त चुचि नज़दीक से क़िस्सी का हार्ट फैल करने के लिए काफ़ी थी. पेट एक दम सपाट और कमर पतली. मांसल जांघों के बीच फूली हुई चूत देख कर मेरे होश उड़ गये.

मेरा लंड पॅंट से सलामी देने लगा. मैं हड़बड़ा गया और दूसरी तरफ देखने लगा. प्रभा ने मेरी हालत देख ली और मुस्कुरा पड़ी.” क्या बात है बेटा, तुम तो पसीने पसीने हो रहे हो, इतनी गर्मी तो नहीं है….बेटा मेरे बदन पर मेरा टवल लपेटने में मदद कर दो ना…तुम तो घबरा ही गये हो….क्या बात है? क्या कभी क़िस्सी नंगन औरत को नहीं देखा? और मैं तो तेरी मा हूँ…मा से कैसा शरमाना? चल हेल्प कर मेरी” मैं सकपका गया और टवल उठा कर प्रभा को लपेटने लगा. इश्स वक्त मैं उसस्के पीच्छे खड़ा था और मेरा लंड सिर उठाए प्रभा की गांद से रगड़ रहा था. उससने ज़रूर मेरा खड़ा लंड अपनी गांद पर चुभता हुआ महसूस किया होगा. लेकिन वो बिना शरमाये टवल ले कर बाहर चली गयी. मैं क्या करता? बाथरूम में जा कर प्रभा को याद कर के मूठ मारने लगा. मेरी पॅंट मेरे गुटनो पर गिरी हुई थी और मेरा लंड मेरे हाथ में था जब बाथरूम का दरवाज़ा एक दम खुला और प्रभा देवी मुझे मूठ मारते देख कर बोली,” बेटे, मुझे तो पहले ही शक था कि तू यही कुच्छ कर रहा होगा. मैं तो तेरी पॅंट मेनबना हुआ तंबू देख कर समझ गयी थी के अब अपना हाथ जगन नाथ होने वाला है. लेकिन इतना बढ़िया रस हाथों पर किओं वेस्ट कर रहे हो? क्या इस पर मा का हक नहीं है? मेरा बेटा हो कर मेरी चुचि और चूतड़ को घूरते रहते हो लेकिन जब मा की चूत और चुचि पर लंड रगड़ने का टाइम आया तो अपने हाथ इस्तेमाल कर रहे हो…क्या प्रभा देवी तुझे पसंद नहीं आई?”

प्रभा बोलते हुए मेरी तरफ बढ़ी और मेरे लंड को देखते हुए आगे झुकी. मैं अब फ़ैसला कर चुका था. जो भी हो जाए आज प्रभा मुझ से चुदेगि ज़रूर. आज मेरा मदेर्चोद बनने का दिन आ चुका है. मैने हाथ बढ़ा कर प्रभा को अपनी तरफ खींच लिया और उसस्का टवल उतार फेंकते हुए मैने नंगा कर दिया और उस्स्को बाहों में भर कर होंठों पर किस करने लगा.

प्रभा का मांसल बदन बहुत मस्त था और उसस्के रसीले होंठ बहुत नमकीन. मैने उस्स्को उसस्की मस्तानी गांद के नीचे से पकड़ कर अपने साथ सटा लिया और आख बंद कर के चूमने लगा.” आप मा हैं, इसी लिए इतनी देर लग गयी वरना आप जैसी मस्त औरत को कब का चोद चुका होता. सच कहता हूँ मैने आप जैसी सेक्स औरत नहीं देखी. आप मोहन लाल जैसे बूढ़े से क्या चुदवा रही हैं, मेरे लंड का स्वाद ले कर तो देखो, मस्त कर दूँगा.” प्रभा कुच्छ समझती हुई बोली,” तो तुमने मोहन जी के साथ मुझे देख लिया है? क्या करूँ बेटा, मुझे बड़ी उमर के मर्दों से चुदवाने का शौक बचपन से ही है. और फिर एमएलए का टिकेट भी तो लेना है, खैर अब मेरे पास एक जवान लंड भी आ गया है अपने बेटे के रूप में जो पहले अपनी मा की चुदाई देखता है और फिर मदेर्चोद बन जाने को तैयार हो जाता है”

“ना केवल मोहनजी के साथ देखा, आप को अपने पापा के साथ चुदाई की बात करते भी सुना. क्या आप अपने सगे बाप के साथ भी….मेरा मन नहीं मानता कि बाप बेटी भी…..सच बतायो, मेरा लंड बेकाबू हो रहा है ये सब की कल्पना से ही.” मेरे दिल में कई किस्म के सवाल उठ रहे थे. प्रभा बे-झिझक बोली,” मेरी मा की मौत जब हुई तो मैं 17 साल की थी और मेरी चूत में आग लगी हुई थी. उधर मेरे पापा नयी नयी लड़कियो से इश्क लड़ा रहे थे. एक दिन तो हद हो गयी. मेरे पापा ने मेरी ही सहेली पर हाथ डाल दिया. जब मैं बाज़ार से वापिस आई तो मेरे पापा मेरी सहेली अनु की चुदाई उस बिस्तर पर कर रहे थे जिस पर मेरी मा की चुदाई होती थी. मैने सोच लिए की मर्द नाम का जानवर चूत के बिना नहीं रह सकता तो औरत भी तो जानवर ही है. और वैसे भी अनु की जगह लेने के लिए मेरा मन तड़प रहा था. पापा से अपनी सील तुड़वाने का फ़ैसला कर ही लिया और उस रात पापा को मैं खूबशराब पिलाई. नशे की हालत में पापा बेटी और पत्नी का फरक भूल कर मेरे साथ सुहागरात मनाने लगे. वो मेरी पहली चुदाई थी, तब से दुनिया से छुप कर ना जाने कितने मर्दों से हर तरह चुदवा चुकी हूँ. और हां, आज तुझ से भी तो चूड़ने जा रही हूँ. तुम भी तो मेरे बेटे ही हो. जब बेटा मा को चोद सकता है तो बाप किओं नहीं?”

“लेकिन आप तो मेरिमूह बोली मा हैं?” मेरा स्वाल था.” बात रिश्ते की है और उसस्की असलियत की है. मेरा बाप मेरा ख़सम तब बना जब उसने मुझे चोद लिया. जब तुम मुझे चोद लोगे तुम भी मेरे पति के बराबर हो जयोगे, बेशक दुनिया हुमको मा बेटा ही समझेंगे. जब मुझे नंगी देख कर तेरा लंड खड़ा हो जाता है तो मा बेटे के रिश्ते की वॅल्यू रह जाती है. दुनिया में बस औरत मर्द का ही रिश्ता रह जाता है, बाकी सब बेकार हैं, बेटे.” प्रभा देवी सच में एक कामुक औरत थी जिसने सभी तरह से सोच रखा था और मैं तो अब चुदाई के खेल में एक अनुभवी औरत से कयि सबक सीखने वाला था.

प्रभा ने मेरा लंड पकड़ लिया और मुठियाने लगी. मेरी साँस मुश्किल से चल रही थी. मैने उसस्के बालों को सहलाया और उसस्के नंगे जिस्म पर हाथ फिराने लगा. प्रभा का जिस्म बिल्कुल रेशम था, मुलायम और कोमल. मेरे लंड से रस की एक बूँद बह निकली जिस्सको प्रभा ने जीभ से चाट लिया. “प्रभा, क्या बाथरूम में ही सब कुच्छ करोगी या फिर बेड पर चलना होगा?” मैने उसस्की ठुड्डी से मुखड़ा उप्पेर उठाते हुए पुचछा. अब मुझे प्रभा को मा कहते हुए शरम आ रही थी. इसी लिए मैने उस्स्को नाम से संबोधित किया. लेकिन वो पुराने अंदाज़ में ही बोली,” बेटे, मुझे मा कहते हुए शरमाते हो? माद्रचोड़, शरम किस बात की? जब तेरे पास नंगी खड़ी हूँ तो मा या बीवी कहने से कोई फरक नहीं पड़ेगा. जब चुदाई ही करनी है तो रिश्तों से क्या घबराना. आज तुझे तेरी मा ही चुदवाने को कह रही है. जब मेरे पापा ने मुझे चोद लिया तो बेटे को क्या प्राब्लम है. जो चोदे वो ही ख़सम, बेटे. चल तुझे बिस्तर पर ही ले चलती हूँ. चल बेटे”

प्रभा का पलंग बहुत बड़ा था जिसस पर रेशमी चादर बिछि हुई थी. प्रभा मेरे आगे आगे चल रही थी और मैं उसस्की गांद को घूर रहा था. ना जाने किओं मेरा मन उसस्की गांद मारने को कर रहा था. पलंग पर जब वो लेट गयी तो मैने उस्स्को पेट के बल लेटने को कहा. वो मान गयी. मैने उस्स्को पैरों से चूमते हुए टख़नो से होते हुए उसस्की जांघों को चूमा और फिर उसस्की गर्दन पर चूमा. प्रभा की साँस धौंकनी की तरह चलने लगी. मैने अपना सूपड़ा उसस्के चुतताड की दरार में फिट कर के उसस्की पीठ को किस करना शुरू कर दिया,” ओह बेटे मा की गांद मारोगे क्या? मेरी गांद चुदी ज़रूर है लेकिन जब भी गांद में लंड जाता है, मुझे दर्द होता है. मेरे बेटे, मैं गांद भी चुड़ववँगी तुझ से लेकिन आज नहीं, आज मुझे अपने लंड से चूत में ही पेलो बेटे”

मैं उसस्की गांद से लंड को हटाते हुए अपने होंठों को उसस्के चूतड़ पर ले गया और किस करने लगा. जब मेने उसस्के चूतड़ को काट खाया तो वो चिल्ला उठी,” आरीए बेह्न्चोद आराम से. अब मेरी गांद ही खा जयोगे क्या? एसा करो, तुम मुझे अपना लंड चूसने दो और मेरी चूत को तुम खा लो. देखो मा की चूत का स्वाद कैसा लगता है तुझे और मा को अपना केला खाने दो ज़रा” मैं तुरंत मान गया और हम 69 बन गये. प्रभा की चूत के फुल्ले हुए होंठ और नमकीन रस मुझे नशा चढ़ा रहा था. उधर प्रभा मेरे लंड को हाथ में ले कर उप्पेर नीचे करते हुए चूमने और चाटने लगी. उससने मेरे अंडकोषों को भी अपने हाथ से सहलाया और मुझे पागल बना दिया. मुझे पता चल चुका था की वासना एक दम आँधी होती है. मेरी ज़ुबान जब प्रभा के क्लाइटॉरिस पर रगड़ी तो वो चिल्ला उठी,” बस मदेर्चोद, अब और नहीं सहा जाता, बस चोद डालो मुझे बेटा. मैं बूढ़े मर्दों से बहुत चुदवा चुकी हूँ, तेरे जैसा जवान मर्द आज मिला है मुझे, चल चढ़ जाओ अपनी मा पर, बेटा”

मैं जानता था की वो मुझे जान बुझ कर बेटा बेटा कह रही थी. मैने उस्स्को नीचे रख कर उसस्की जांघों को खोल दिया और उसस्स्की चूत के मुख को खोल कर सूपदे को चूत पर रख दिया. वो बुरी तरह हाँफ रही थी,” किओं मा, चोद डालूं अब तुझे? तेरी चूत तो कुतिया की चूत की तरह फुदाक रही है. मर्द की तरह चोदु या फिर मोहन की तरह कुतिया बना कर? “मैने एक ज़ोरदार धक्का मारा और मेरा लंड प्रभा की चूत में दनदनाता हुआ घुसता चला गया.” ह..तेरी माआ को मदेर्चोद….धीरे चोद….रंडी की औलाद प्यार से चोद, कितना बड़ा है तेरा लंड, बेटा…मेरी तो बुर फाड़ डाली तुमने…आराम से बेटा…”

नामिता और नाज़ ठीक थी लेकिन प्रभा की चूत का कोई जवाब ना था. साली की बुर ने मेरे लंड कस के जकड़ा हुआ था. प्रभा ने अपने जांघों का घेरा मेरी कमर पर इस तरह कसा हुआ था के उसस्की चूत बहुत टाइट लग रही थी,” बेटा, मेरी चुचि चूस…अपनी मा की चुचि चूस और चोद उस्स्को बेटा” मेरा लंड तेज़ी से बड़ी उमर की अनुभवी चूत को चोदने लगा. प्रभा ने मेरा सिर पकड़ कर अपने निपल पर झुका लिया और मैं उस्स्को अपनी मा की चुचि समझ कर चूसने लगा. एक हाथ से मैने उसस्का क्लिट छेड़ना शुरू कर दिया जिसस से वो भड़क उठी,”चोद मदरचोड़चोद….बेह्न्चोद चोद प्रभा को….चोद प्रभा गश्ती को…ओह्ह्ह्ह हरामी चोद मुझे”

मेरी स्पीड बढ़ती जा रही थी. प्रभा का जिस्म एंथने लगा. मेरी रंडी मूह बोली मा मेरे नीचे मचल मचल कर चुदवा रही थी और मुझे ज़ोर से चोदने को बिनति कर रही थी.” ओह्ह्ह्ह प्रभााअ…..तेरी मा को लंड….साली रंडी है तू….बहुत मज़ेदार चुदवाति हो रंडी….प्रभा मेरी मा….चोद अपने बेटे को साली….मैं झाड़ रहा हूँ….बोलो मा अपना लंड अंदर ही खाली करूँ या बाहर निकाल लूँ?” प्रभा अपनी गांद को उठा उठा कर मेरी थाप का जवाब देते हुए बोली,”मदरचोड़, अंदर डाल दे अपना रस…..मेरा ऑपरेशन हो चुका है….चोद डाल मुझे अंदर ही…मदेर्चोद मेरी बच्चेदानि पर ठोकर मार रहा है तेरा लोड्‍ा बेह्न्चोद” प्रभा की नीचे से स्पीड भी तूफ़ानी हो चुकी थी. वो भी झार रही थी. इधर मेरा लंड झड़ने लगा तो उधर उसस्की चूत खलास होने लगी. पागलों की तरह हानफते हुए हम दोनो एक साथ झाड़ गये. फिर तो मेरी मौज हो गई कभी प्रभा कभी नामिता कभी नौकरानी तो दोस्तो कैसी लगी ये मस्त कहानी बता ना मत भूलना आपका दोस्त राज शर्मा

समाप्त
 
मेरी माँ का यार

हाई मैं देल्ही मैं रहती हूँ मेरा नाम हेमा है. उमर अभी केवल 15 य्र्स. है. मैं एकलौती हूँ मेरी माँ अभी केवल 35 य्र्स की हैं. मेरे छ्होटे मामा अक्सर घर आया करते हैं. वे ज़्यादातर मम्मी के कमरे मैं ही घुसे रहते हैं. मुझे पहले तो कुच्छ नही लगा पर एक दिन जान ही गयी कि मम्मी अपने छ्होटे भाई यानी मेरे मामा से ही मज़ा लेती हैं. मुझे बहुत आश्चर्या हुवा पर अजीब सा मज़ा भी मिला दोनो को देखकर. मैं जान गयी मम्मी अपने भाई से फँसी है और दोनो चुदाई का मज़ा लेते हैं. मामा करीब 25 य्र्स के थे. मामा अब मुझे भी अजीब नज़रो से देखते थे. मैं कुच्छ ना बोलती थी.

घर के माहौल का असर मुझ पर भी पड़ा. मामा को अपनी चूचियों को घूरते देख अजीब सा मज़ा मिलता था. अगर पापा नही होते तो मम्मी मामा को अपने रूम मैं ही सुलाती. एक रात मम्मी के रूम मैं कान लगा दोनो की बात सुन रही थी तो दोनो की बात सुन दंग रह गयी. मामा ने कहा,

"दीदी अब तो शशि भी जवान हो गयी है. दीदी आप ने कहा था कि शशि का मज़ा भी तुम लेना."

"ओह्ह मेरे प्यारे भाय्या तुमको रोकता कौन है. तुम्हारी भांजी है जो करना है करो. जवान हो गयी है तो चोद दो साली को. जब मैं शशि की उमर की थी तो कई लंड खा चुकी थी. 5 साल से सिर्फ़ तुमसे ही चुद्वा रही हूँ. आजकल तो लड़किया 14 य्र्स मैं छुड़वाने लगती हैं." मैं चुपचाप दोनो की बात सुन रही थी और बेचैन हो रही थी.

"वह गुस्सा ना हो जाए."

"नही होगी. तुम गधे हो. पहली बार सब लड़कियाँ बुरा मानती है पर जब मज़ा पाएगी तो लाइन देने लगेगी. ज़रा चूत छातो."

"जी दीदी." वह मम्मी की चूत को चाटने लगा. कुच्छ देर बाद फिर मामा की आवाज़ आई,

"पूरी गदरा गयी है दीदी."

"हां हाथ लगाओगे तो और गदराएगी. डरने की ज़रूरत नही. अगर नखरे दिखाए तो पटक कर चोद दो. देखना मज़ा पाते ही अपने मामा की दीवानी हो जाएगी जैसे मैं अपने भयया की दीवानी हो गयी हूँ. चॅटो मेरे भाई मुझे चटवाने मैं बहुत मज़ा आता है."

"हां दीदी मुझे भी तुम्हारी चूत चाटने मैं बड़ा मज़ा मिलता है." मैं दोनो की बात सुन मस्त हो गयी. मंन का डर तो मम्मी की बात सुन निकल गया. जान गयी कि मेरा कुँवारापन बचेगा नही. मम्मी खुद मुझे चुद्वाना चाह रही थी. जान गयी की जब मम्मी को इतना मज़ा आ रहा है तो मुझे तो बहुत आएगा. ममा तो अपने सगे भाई से चुद्वा ही रही थी साथ ही मुझे भी चोद्ने को कह रही थी. मम्मी और मामा की बात सुन वापस आ अपने कमरे मैं लेट गयी. दोनो चूचियों तेज़ी से मचल रही थी और राणो के बीच की चूत गुदगुदा रही थी. कुच्छ देर बाद मैं फिर विंडो के पास गयी और अंदर की बात सुनने लगी. अजीब सा पुक्क पुक्क की आवाज़ आ रही थी. मैने सोचा कि यह कैसी आवाज़ है. तभी मम्मी की आवाज़ सुनाई दी,

"हाए थोड़ा और. साले बहन्चोद तुमने तो आज थका ही दिया."

"अरे साली रंडी अभी तो 100 बार ऐसे ही करूँगा." मैं तड़प उठी दोनो की गंदी बातें सुनकर. जान गयी की पुक्क पुक्क की आवाज़ चुदाई की है और मम्मी अंदर चुद रही हैं. मामा मम्मी को चोद रहे हैं. तभी मम्मी ने कहा,

" हाए बहुत दमदार लंड है तुम्हारा. ग़ज़ब की ताक़त है मेरी दो बार झाड़ चुकी है. आआअहह बस ऐसे ही तीसरी बार निकलने वाला है. आअहह बस राजा निकला. तुम सच्च मैं एक बार मैं दो तीन को खुश कर सकते हो. जाओ अगर तुम्हारा मंन और कर रहा हो तो शशि को जवान करदो जाकर."

"कहाँ होगी."

"अपने कमरे मैं. जाओ दरवाज़ा खुला होगा. मुझमे तो अब जान ही नही रह गयी है." मम्मी ने तो यह कह कर मुझे मस्त ही कर दिया था. घर मैं सारा मज़ा था. मामा अपनी बड़ी बहन को चोद्ने के बाद अब अपनी कुँवारी भांजी को चोद्ने को तैय्यार थे. मां के चुप हो जाने के बाद मैं अपने कमरे मैं आ गयी. जान गयी कि मामा मम्मी को चोद्ने के बाद मेरी कुँवारी चूत को चोद्कर जन्नत का मज़ा लेने मेरे कमरे मैं आएँगे.

पूरे बदन मैं करेंट दौड़ने लगा. रूम मैं आकर फ़ौरन मॅक्सी पहनी. मैं चड्डी पहनकर सोती थी पर आज चड्डी भी नही पहनी. आज तो कुँवारी चूत की ओपनिंग थी. चूत की धड़कन इनक्रीस हो रही थी और चूचियों मैं रस भर रहा था. मॅन कर रहा था कि कह दूं मामा मम्मी तो बूढ़ी है. मैं जवान हूँ. चोदो मुझे. रात के 11:30 हो चुके थे. दरवाज़ा खुला रखा था. मॅक्सी को एक टाँग से ऊपर चड़ा दिया और एक चूची को गले की ओर से थोड़ी सी बाहर निकाल दी और उसके आने की आहट लेने लगी. मैं मस्त थी और ऐसे पोज़ मैं थी की कोई भी आता तू उसे अपनी चखा देती. अभी तक लंड नही देखा था. बस सुना था.

10 मिनिट बाद उसकी आहट मिली. मेरे रोएँ खड़े हो गये. मुझे करार नही मिला तो झटके से पूरी चूची को बाहर निकाल आँख बंद कर ली. जब 35 साल की चूत का दीवाना था तो मेरी 15-16 साल की देखकर तो पागल हो जाता. तभी वह कमरे मैं आया. मैं गुदगुदी से भर गयी. जो सोचा था वही हुवा. पास आते ही उसकी आँख मेरी बिखरी मॅक्सी पर राणो के बीच गयी. मम्मी के पास से वापस आने पर मज़ा खराब हुवा था पर अब फिर आने लगा था.

वह अपने दोनो हाथ प्लांग पर जमा मेरी राणो पर झुका तो मैने आँखे बंद कर ली. मेरी साँस तेज़ हुई मेरी चूचियों और चूत मैं फुलाव आया. मैं दोनो राणो के बीच 1 फुट का फासला किए उसे 15 साल की चूत का पूरा दीदार करा रही थी. कुच्छ देर तक वह मेरी चूत को घूरता रहा फिर मेरे दोनो उभरे उभरे अनारो को निहारता धीरे से बोला,

"हाए क्या उम्दा चीज़ है, एकदम पाव रोटी का टुकड़ा. हाए राज़ी हो जाती तो कितना मज़ा आता." और इसके साथ ही उसने झुककर मेरी चूत को बेताबी के साथ चूम लिया तो पूरे बदन मैं करेंट दौड़ा. मैं तो बहाना किए थी. चूमकर कुच्छ देर तक मेरी कुँवारी चूत को देखता रहा फिर झुककर दुबारा मुँह से चूमते एक हाथ से मेरी मॅक्सी को ठीक से ऊपर करता बोला,

"हाए क्या मस्त माल है. अब तो माँ के साथ बेटी की कुँवारी फाँक का पूरा मज़ा लूँगा." मैने अपने बहन्चोद मामा के मुँह से अपनी तारीफ़ सुनी तो और मस्त हुई. चूत पे किस से बहुत गुदगुदी हुई और मन किया की उससे लिपट कर कह दूं की अब नही रह सकती तुम्हारे बिना मैं तैय्यार हूँ लूटो मेरी कुँवारी चूत को मामा. पर चुप रही. तभी मामा बेड पर बैठ गये और मेरी राणो पर हाथ फेर मेरी चूत को सहलाने लगा. उससे चूत पर हाथ लगवाने मैं इतना मज़ा आ रहा की बस मन यह कहने को बेताब हो उठा कि राजा नगी करके पूरा बदन सहलाओ. मम्मी का कहना सही था कि हाथ लगाओ, मज़ा पाते ही लाइन क्लियर कर देगी. तभी उसकी एक उंगली चूत की फाँक के बीच मैं आई तो मैं तड़प कर बोल ही पड़ी,

"हाए कौन?"

"मैं हूँ मेरी जान, तुम्हारा चाहने वाला. हाए अच्छा हुवा तुम जाग गयी. क्या मस्त जवानी पाई है. आज मैं तुमको??.." और किसी भूखे कुत्ते की तरह मुझे अपनी बाँहो मैं कसता मेरी दोनो चूचियों को टटोलता बोला,

"हाए क्या गदराई जवानी है." मैं अपने दोनो उभारों को उसके हाथ मैं देते ही जन्नत मैं पहुँच गयी. वा मेरे चेकने गाल पर अपने गाल लगा दोनो को दबा बोला,

"बस एक बार चखा दो, देखो कितना मज़ा आता है."

"हाए मामा आप छ्चोड़ो यह क्या कर रहे हैं आप. मम्मी आ जाएगी."

"मम्मी से मत डरो. उन्होने ही तो भेजा है. कहा है कि जाओ मेरी बेटी जवान हो गयी है. उसे जवानी का मज़ा दो. बहुत दिनो से ललचा रही हो, बड़ा मज़ा पओगि. मम्मी कुच्छ नही कहेंगी." और इसके साथ ही मेरी चूचियों को मॅक्सी के ऊपर से कसकर दबाया तो मेरा मज़ा सातवे आसमान पर पहुँच गया.

"मम्मी सो गयी क्या?" मैने पूछा तो वह बोला,

"हां. आज तुम्हारी मम्मी को मैने बुरी तरह थका दिया है. अब वे रात भर मीठी नींद सोएंगी. बस मेरी रानी एक बार. देखना मेरे साथ कितना मज़ा आता है." और उसने दोनो निपल को चुटकी दे मुझे राज़ी कर लिया. सच आज उसकी हरकत मैं मज़ा आ रहा था. दोनो निपल्स का नशा राणो मैं उतर रहा था.

"मामा आप मम्मी के साथ सोते हैं. वह तो आपकी बहन हैं."

"आज अपने पास सुला कर देखो, जन्नत की सैर करा दूँगा. हाए कैसी मतवाली जवानी पाई है. बहन है तो क्या हुवा. माल तो बढ़िया है मम्मी का."

"दरवाज़ा खुला है." मैने मज़े से भरकर कहा. मेरी नस नस मैं बिजली दौड़ रही थी. अब बदन पर कपड़ा बुरा लग रहा था. उसने मेरी चूचियों को मसल्ते हुवे मेरे होंठो को किस करना शुरू कर दिया. उसे मेरी जैसी कुँवारी लड़कियों को राज़ी करना आता था. होंठ चुसते ही मैं ढीली हो गयी. मामा मेरी मस्ती को देख एकदम से मस्त हो गये. धीरे से मेरे बदन को बेड पर कर मेरी चूचियों पर झुक कर मेरी रान पर हाथ फेरते बोले,

"अब तुम एकदम जवान हो गयी हो. कब मज़ा लोगि अपनी जवानी का. डरो नही तुमको कली से फूल बना दूँगा. मम्मी से मत डरो, उनके सामने तुमको मज़ा दूँगा बस तुम हां कर दो." हाथ लगवाने मैं और मज़ा आ रहा था. मैं मस्त हो उसे देखती बोली,

"मम्मी को आप रोज़ ??."

"हां मेरी जान तुम्हारी मम्मी को रोज़ चोद्ता हूँ. तुम तैय्यार हो तो तुमको भी रोज़ चोदेन्गे. हाए कितनी खूबसूरत हो. ज़रा सा और खोलो ना. तुमसे छ्होटी छ्होटी लड़कियाँ चुद्वाती हैं." मैं तो जन्नत मैं थी. मामा चूचियों को दबाए एक हाथ गाल पर और दूसरा राणो के बीच फेर रहे थे.

"मुझसे छ्होटी छ्होटी?"

"हां मेरी जान. ज़्यादा बड़ी हो जाओगी तो इसका मज़ा उतना नही पओगि जितना अभी. तुम्हारी एकदम तैय्यार है बस हां कर दो."

"मैं तो अभी बहुत छ्होटी हूँ." और दोनो राणो को पूरा खोल दिया. मामा चालाक थे. पैर खोलने का मतलब समझ गये. मुस्काराकार मेरे होंठ चूम बोले,

"मेरी छ्होटी बहन को तो तुम जानती हो, अभी 16 की भी नही है. उसकी चूचियों भी तुमसे छ्होटी हैं. वह भी मुझसे खूब चुद्वाती है." और चूत के फाँक को चुटकी से मसला तो मैं कसमसकर बोली,

"हाए मामा अपनी छ्होटी बहन को भी मेरी मम्मी की तरह चोद्ते हो?"

"हां यहाँ रहता हूँ तो तुम्हारी मम्मी को यानी अपनी बड़ी बहन को चोद्ता हूँ और घर मे मैं अपनी छ्होटी बहन यानी तुम्हारी मौसी को खूब हचक कर चोद्ता हूँ तभी वह सोने देती है. तुम्हारी चूचियाँ तो खूब गदराई हैं. बोलो हो राज़ी." और मॅक्सी के गले से हाथ अंदर डाला तो मैं राज़ी हो गयी और बोली,

"राज़ी हूँ पर मम्मी से मत बताना." मैं उसे यह एहसास नही होने देना चाहती थी कि मैं तो जाने कब से राज़ी हूँ. उसके पास आते ही पूरा मज़ा आने लगा. मैं अपना 15 साल का ताज़ा बदन उसके हवाले करने को तैय्यार थी. अगर वह मम्मी को चोद्कर ना आए होते तो मेरी कुँवारी चूत को देखकर चोद्ने के लिए तैय्यार हो जाते. पर वह मम्मी को चोद्कर अपनी बेकरारी को काबू मैं कर चूक्के थे. वा मेरी नयी चूचियों को हाथ मैं लेते ही मेरी कीमत जान गये थे. मेरे लिए यह पहला चान्स था. मामा मुझसे ज़बरदस्ती ना कर प्यार से कर रहे थे. अब तक वह मेरी नंगी चूत को देख उसपर हाथ फेर चूम भी चूक्के थे पर मैं अभी तक उनका लंड नही देखा था. मॅक्सी के अंदर हाथ डाल चूचियों को पकड़ और बेकरार कर दिया था. मामा नेदुबारा मॅक्सी के ऊपर से चूचियों को पकड़कर कहा,

"मम्मी से मत डरो. मम्मी ने पूरी छ्छूट दे दी है. बस तुम तैय्यार हो जाओ." और चूचियों को इतनी ज़ोर से दबाया की मैं तड़प उठी.

"मुझे कुच्छ नही आता." मैं राज़ी हो बोली तो उसने कहा,

"मैं सिखा दूँगा." और मेरे गाल काटा तो मैं बोली,

"ऊई बड़े बेदर्द हो मामा." मेरी इस अदा पर मस्त हो गाल सहलाते मॅक्सी पकड़ कर बोले,

"इसको उतार दो."

"हाए पूरी नंगी करके."

"हां मेरी जान मज़ा तो नंगे होने मैं ही आता है. बोलो पूरा मज़ा लोगि ना."

"हां."

"तो फिर नंगी हो मैं अभी आता हूँ." वह कमरे से बाहर चला गया. मैं कहाँ थी, बता नही सकती थी. पूरे बदन मैं चईटियाँ चलने लगी. चूत फुदकने लगी थी. मैं पूरी तरह तैय्यार थी. मैने जल्दी से मॅक्सी उतार दी और पूरी नंगी हो बेड पर लेट गयी. मम्मी तो चुद्वाने के बाद अपने कमरे मैं आराम से सो रही थी और अपने यार को मेरे पास भेज दिया था. मैं अपने नंगे जवान बदन को देखती आने वाले लम्हो की याद मैं खोई थी कि मेरी माँ का यार वापस आया. मुझे नंगी देख वह खिल उठा. पास आ पीठ पर हाथ फेर बोले,

"अब पओगि जन्नत का मज़ा." मेरी नंगी पीठ पर हाथ फेर मज़ा दे उसने झटके से अपनी लूँगी अलग की तो उनका लंड मेरे पास आते ही झटके खाने लगा. अभी उसमे फुल पवर नही आया था पर अभी भी उसका कम से कम 6 इंच का था. मैं ग़ज़ब का लंड देख मस्ती से भर गयी. वह बेड पर आए और पीछे बैठ मेरी कमर पकड़कर बोले,

"गोद मैं आओ मेरी जान." मेरा कमरा मेरे लिए जन्नत बन गया था. अब हम दोनो ही नंगे थे. जब मामा की गोद मैं अपनी गांद रखी तो मामा ने फ़ौरन मेरी दोनो चूचियों को अपने दोनो हाथों मैं ले बदन मैं करेंट दौराया.

"ठीक से बैठो तभी असली मज़ा मिलेगा. देखना आज मेरे साथ कितना मज़ा आता है." नंगी चूचियों पर उसका हाथ चला तो आँख बंद होने लगी. अब सच ही बड़ा मज़ा आ रहा था.

"हेमा."

"जी"

"कैसा लग रहा है?" मेरी गांद मैं उसका खड़ा लंड गड़ रहा था जो एक नया मज़ा दे रहा था. अब मैं बदहवास हो उसकी नंगी गोद मैं नंगी बैठी अपनी चूचियों को मसलवाती मस्त होती जा रही थी. तभी मामा ने चूचियों के टाइट निपल को चुटकी से दबाते पूछा,

"बोलो मेरी जान."

"हाए अब और मज़ा आ रहा है. मामा."

"घबराव नही तुमको भी मम्मी की तरह पूरा मज़ा दूँगा. हाए तुम्हारी चूचियाँ तो दीदी से भी अच्छी हैं." वह मेरी मस्त जवानी को पाकर एकदम से पागल से हो गये थे. निपल की च्छेड़च्छाद से बदन झनझणा गया था. तभी मामा ने मुझे गोद से उतारकर बेड पर लिटाया और मेरे निपल को होंठ से चूस्कर मुझे पागल कर दिया. हाथ की बजाए मुँह से ज़्यादा मज़ा आया. मामा की इस हरकत से मैं खुद को भूल गयी. उसको मेरी चूचियाँ खूब पसंद आई. मामा 10 मिनिट तक मेरी चूचियों को चूस चूस्कर पीते रहे. चूचियों को पीने के बाद मामा ने मुझसे राणो को फैलाने को कहा तो मैने खुश होकर अपने बहन्चोद मामा के लिए जन्नत का दरवाज़ा खोल दिया. पैर खोलने के बाद मामा ने मेरी कुँवारी चूत पर अपनी जीभ फिराई तो मैं तड़प उठी. वह मेरी चूत को चाटने लगे. चत्वाते ही मैं तड़प उठी. मामा ने चाटते हुवे पूछा,

"बोलो कैसा लग रहा है?"

"बहुत अच्छा मेरे राजा."

"तुम तो डर रही थी. अब दोनो का मज़ा एक साथ लो." और अपने दोनो हाथ को मेरी मस्त चूचियों पर लगा दोनो को दबाते मेरी कुँवारी गुलाबी चूत को चाटने लगे तो मैं दोनो का मज़ा एक साथ पा तड़पति हुई बोली,

"हाए आआहह बस करो मामा ऊई नही अब नही."

"अभी लेती रहो." मुझे ग़ज़ब का मज़ा आया. वह भी मेरी जवानी को चटकार मस्त हो उठे. 10 मिनिट तक चाटते रहे फिर मुझे जवान करने के लिए मेरे ऊपर आए. मामा ने पहले ही मस्त कर दिया था इसलिए दर्द कम हुवा. मामा भी धीरे धीरे पेलकर चोद रहे थे. मेरी चूत एकदम ताज़ी थी इसलिए मामा मेरे दीवाने होकर बोले,

"हाए अब तो सारी रात तुमको ही चोदुन्गा." मैं मस्त थी इसलिए दर्द की जगह मज़ा आ रहा था.

"मैं भी अब आपसे रोज़ चुद्वाउंगी." उस रात मामा ने दो बार चोदा था और जब वह अगली रात मुझे पेल रहे थे तो अचानक मम्मी भी मेरे कमरे मैं आ गयी. मैं ज़रा सा घबराई लेकिन मामा उसी तरह चोद्ते रहे. मम्मी पास आ मेरी बगल मैं लेट मेरी चूचियों को पकड़कर बोली,

"ओह बेटी अब तो तुम्हारी चोद्ने लायक हो गयी है. लो मज़ा मेरे यार के तगड़े लंड का."

"ओह मम्मी मामा बहुत अच्छी हैं. बहुत अच्छा लग रहा है." अब मैं और मम्मी दोनो साथ ही मामा से चुद्वाते हैं.
 
भाई बहन की दोस्ती या वासना--1

मेरा नाम अदिती है और मै चन्डीगढ की रहने वाली हूं.आज मै आप को अपनी फ़ैमली की एक ऐसी काहानी बताने जा रही हूं जो मैने अबतक किसी से भी शेयर नही करी है. इस काहानी मे कुछ भी झूट नही है हर बात सच सच है लेकिन सिर्फ़ नाम बदल दिये हैं मैने. मै एक मिडल क्लास फ़ैमली से हूं. हमारी फ़ैमली एक बडी फ़ैमली है. मेरे दो भाई और एक बैहन हैं. सब से बडा भाई सुनील २५ साल फिर समीर २२ साल फिर मै २० साल और सबसे छोटी कल्पना १७ साल की है. मेरे पिताजी की एक ट्रांसपोर्ट कम्पनी है. मा ग्रिहणी हैं. बडा भाई शादी शुदा है और वो भी पिताजी के साथ काम करता है. हम सब साथ ही रहते हैं. बाकी बहन भाई शादी शुदा नही हैं. मै और समीर घर मे सब से अच्छे दोस्त हैं. हमारी सिटी मे शायद ही किसी बहन भाई मे इतनी दोस्ती हो जितनी के मेरी और समीर की है. मैने कभी भी ये सोचा ना था के मै ऐसा भी कर बैठूंगी. पता नही समीर के दिमाग मै ऐसी बातें कब से आ गयी थीं. अक्सर हम रात को देर रात तक बातें करते रहते थे. एक रात हम बातें करते करते टीवी भी देख रहे थे और हमारी बातों का टॊपिक लव मैरिज था. उस का कैहना था के शादी हमेशा मा बाप की मरज़ी से करनी चाहिये और मै लव मैरिज को वोट कर रही थी. क्यों के मुझे एक लडके से प्यार था लेकिन समीर को इस बात का पता नही था.. उस रात जब मैने लव मैरिज को इतना वोट किया तो अचानक समीर ने मुझसे एक सवाल किया जिसके लिये मै तय्यार नही थी. उसने काहा: अदिती एक बात तो बताओ. क्या तुम्हे किसी लडके मे इन्टरस्ट है? मेरा मतलब क्या तुम किसी से प्यार करती हो? मै अचानक इस सवाल को सुन कर चुप हो गयी. वो फिर बोला: बताओ तो सही........ .इस मे कोई बुराई तो नही. सब को हो जाता है. हो सकता है तुम को भी हो गया हो, मुझ से शेयर कर लोगी तो शायद मै तुम्हारी मदद कर सकूं. ये सुन कर मेरा कुछ हौसला बढ गया. और मैने सिर्फ़ सर हिला कर उसे हां काहा. वो बोला: कौन है वो? मैने उसे बता दिया के मै अपनी क्लास के लडके रिशी को पसन्द करती हूं. कुछ देर बाद वो बोला: एक बात बताओ..... ......सच सच बताना. क्या तुम दोनो मे कुछ हुआ है? मै ये सवाल समझ नही सकी तो मैने पूछा: क्या मतलब? वो फिर बोला........ .....मेरा मतलब कोई ऐसी वैसी हर्कत की है उसके साथ? अब मै उस का मतलब समझ गयी और बोली : नही. वो कई बार कोशिश कर चुका है. पर मैने कभी भी उसे अपने को छूने नही दिया. वो बोला: वैसे मै जानता हूं उसके बारे में. काफ़ी लडकियां हैं उसके जाल मे तुम्हारी तरह. और बहुतों के साथ तो वो काफ़ी कुछ कर भी चुका है. मै बोली: क्या कर चुका है? वो कुछ देर चुप रहने के बाद बोला........ ...सेक्स कर चुका है और क्या. मै सुन कर हैरान रह गयी और फ़ोरन समीर से लडने वाले अन्दाज़ मे बोली: नही वो ऐसा नही है......... .....हां मुझसे वो ज़रूर छेड छाड करता है मगर उसका किसी और लडकी के साथ चक्कर नही है. वो बोला: अरे तुम चाहो तो मेरे दोस्त की बहन सिमरन से पूछ लेना. वो उसकी शिकार बन चुकी है. ये सुन कर मै बहुत परेशान हो गयी लेकिन मुझे अब भी इस बात का यकीन नही था. एक दो दिन बाद मुझे सिमरन मिली तो मैने उससे रिशी के बारे मे पूछा. सिमरन ने समीर की बात को कन्फ़र्म कर दिया के दो साल पहले रिशी ने उसे पटा के उसके साथ सेक्स किया था. मुझे बहुत बडा धक्का लगा और मैने रिशी से अपना रिशता तोड दिया. उस दिन मै घर आके सारा दिन रोती रही. रात को भी ठीक से नही सोई और रोती रही. अगले दिन सन्डे था. जब मै उठी तो ९ बज चुके थे पर मेरी आंखें अभी भी लाल थी. मा ने देख कर पूछा क्या हुआ अदिती तुम को? मै बोली कुछ नही मा बस रात को नीन्द ठीक से नही आई. वो ये सुन कर दांटने लगी : एक तो तुम दोनो बहन भाई पता नही रात को इतनी देर तक क्या बातें करते रहते हो. कभी जलदी भी सो जाया करो, बीमार हो जायेगी और वो तुम्हारा भाई भी. मै बोली: कुछ नही होता मा. और बाथरूम मे चली गयी. नाश्ता करते हुए मा ने बताया के आज रोहित का मुन्डन है और हम सब जा रहे हैं, नाशते के बाद तय्यार हो जाओ. (रोहित मेरी चाची का दो साल का लडका है) मेरा जाने का मूड नही था इसलिये बोली: मा मेरी तबीयत ठीक नही है. मै नही जाना चाहती. मा ये सुन कर गुस्से मे बोली: और जागो सारी सारी रात, लेकिन तुम घर मै अकेली क्या करोगी? समीर बोला: मा मै भी नही जाना चाह राहा. मै अदिती के पास रहता हूं आप लोग चले जाओ. नाशते के बाद सब लोग तय्यार होने लगे और करीब ११ बजे सब चले गये. अब घर में सिर्फ़ मै और समीर थे. वो टीवी देख राहा था और मै अपने कमरे में थी. कुछ देर बाद समीर मेरे कमरे में आया और बोला : कैसी हो अदिती तुम अब? मै: ठीक हूं समीर. समीर: नराज़ हो क्या मुझसे? मै: नही समीर ये कैसे सोच लिया तुमने? समीर: बात तो करती नही मुझसे तो फिर ऐसा ही सोचूंगा ना. मै: कुछ नही समीर तुम भी ना..... अच्छा चलो कोयी और बात करो. समीर: पहले हंस कर दिखाओ. इस बात पर मै फ़ोरन ही हंस पडी और उसने मुझे हंस्ता हुआ देख कर उसने अपने गले लगा लिया. उसने मुझे माथे पर किस भी किया. ऐसा पहले कभी नही किया था उसने. मुझे बहुत ही अच्छा लगा और मै और भी चिपक गयी उसके साथ. हम ऐसे ही कोई २ - ३ मिनट तक रहे. फिर मैने भाई से पूछा: समीर एक बात तो बताओ? समीर: क्या? मै: क्या सब लडके हम लडकियों के बारे मै ऐसा ही सोचते हैं? समीर: म्म्म्म्म हां ज़्यादा तर लडके ऐसा ही सोचते हैं आज कल. मै: क्या तुम भी ऐसा सोचते हो किसी के लिये? समीर: म्म्म्म्म्*म्म्म्म्म हां मै: किसके लिये? समीर: हो सकती है कोई भी तुम्हे इससे क्या मतलब? मै : नही....मुझे बताओ ना? समीर: छोडो इस बात को अब..........किस तरह की बातें कर रही हो तुम? मै: तुमने रात को ही काहा था के हम सब कुछ शेयर कर सकते हैं. अब क्यों छुपा रहे हो? समीर:देख लो. तुम जानती हो की मै काफ़ी बोल्ड हूं. अगर कुछ बोला तो किसी को बताना नही. मै: नही बताऊंगी.........अब बताओ ना? समीर: तो सुनो...........मै रीना के बारे मै ऐसा सोचता हूं. (रीना मेरी भाभी हैं) मै ये सुन कर हैरान हो गयी.....और उससे पीछे हट गयी. वो अब मुझे सिर्फ़ मुसकुराता हुआ देखता राहा. मेरी समझ मे नही आ राहा था के अब मै उससे क्या कहूं. फिर मै बोली: क्या मतलब है तुम्हारा? क्या तुम भाभी की बात कर रहे हो? समीर : हां..........उसी की बात कर राहा हूं.........और बात बताऊं तुमको? उसे भी ये पता है और उसे ये सुन कर खुशी हुई थी. अब तो मेरी हैरानगी की कोयी हद नही थी. मेरी समझ मे नही आ राहा था के वो क्या कह राहा है. फिर मै बोली: समीर तुम को पता है ना तुम क्या कह रहे हो? वो तुम्हारी भाभी हैं. कैसे सोच लिया तुमने उसके बारे में? समीर: भाभी हैं तो क्या हुआ. हैं तो एक लडकी ही ना आखिर. खुबसूरत हैं मुझे अच्छी लगती हैं और उसे मै भी अच्छा लगता हूं. इसमे बुराई क्या है? मै: एक बात बताओ...........किस किसम का रिशता है तुम्हारा और रीना भाभी का? समीर: वैसा ही जैसा होता है इस सूरत मे. मै: क्या मतलब.....कैसा होता है इस सूरत मे? समीर: प्यार भरा और क्या मै: क्या तुम उसके साथ कुछ कर तो नही बैठे? समीर: हां थोडा बहुत कर चुका हूं मै: हे भगवान..........भाभी के साथ? समीर तुम पागल तो नही हो गये? किस हद तक गये हो तुम उसके साथ? समीर: हां पागल कर दिया था उसने........मै क्या करता........और रही बात हद की, तो प्यार मे कोई हद नही होती मै: क्या मतलब? समीर: वही जो प्यार करने वाले करते हैं...........कुछ किसिंग.......कुछ हगिंन्ग ...............और कुछ वो भी. मै: वो भी......................? सच सच बताओ..................कहीं सेक्स तो नही क्या तुम ने? समीर: हां हो तो गया है ..........इसमे मेरा क्या कसूर? इतनी खुबसूरत औरत जब पास हो तो आदमी से ये कुछ भी हो सकता है. मै: कसूर.............? क्या मतलब ? अगर कोई भी खुबसूरत औरत हो तुम उसके बारे मे ऐसा ही सोचोगे? चाहे वो तुम्हारी बहन ही क्यों ना हो समीर:म्म्म्म्म्*म्म्म्म्म्*म्म्म.................. ...........हां ................ऐसा ही है.............. ये सुन कर तो मेरा दिमाग खराब होने लगा........कुछ देर तो मै चुप रही...........फिर बोली: क्या तुम मेरे बारे भी इस तरह से सोचते हो? समीर: देखो अदिती..........तुम मेरी सब से अच्छी दोस्त हो.........बहन ही..........इस लिये तुमसे कुछ नही छुपाऊंगा..........हां तुम मुझे आकर्शित करती हो.............अगर तुम मेरी बहन ना होती तो मै तुमसे शादी करने की सोचता. मै: समीर!!.....................तुम पागल तो नही हो गये ..... मै तुम्हारी बहन हूं ............कैसे आदमी हो तुम? समीर: बहन तो हो.............पर खुबसूरत भी बहुत हो.............और सेक्सी भी..............अब मेरा क्या कसूर? पता नही क्यों समीर की इन बातों से मज़ा आ राहा था और मै भाभी वाली बात का धक्का भूल गयी थी.अजीब सी हालत थी मेरी.मै सोच रही थी की अब मै इसे क्या कहूं और कैसे कहूं...............दिमाग मै कुछ नही आ राहा था.......लेकिन मै एक बात ज़रूर नोट कर रही थी. वो ये के समीर की ये बातें बुरी नही लगी मुझे. मै अब कुछ नही बोल रही थी और वो मुझ को सिर्फ़ देख राहा था और मुसकुरा राहा था. मै कुछ डर भी रही थी..............पता नही क्या हो राहा था मुझे..................पता नही मै शर्मा कर या डर कर रूम से बाहर चली गयी..............समीर वहीं बैठा राहा....................मेरे अन्दर एक अजीब सी हालत थी..........मेरा भाई और मेरे बारे मै ये सोचता है..............क्या मै सच मे इतनी खुबसूरत हूं?.............अब मुझे क्या करना चाहिये?...........................कैसे हैन्डल करूं इस हालात को? अब मै समीर के बारे मै एक और ही तरह से सोच रही थी. ये बात तो सच थी के समीर है काफ़ी हैन्ड्सम और सेक्सी भी................लेकिन वो मेरा भाई है........................ये बात बार बार मेरे दिमाग मै आ रही थी. उस दिन मैने फिर समीर से इस टॊपिक पर ज़्यादा बात नही की क्योंकी मै पहले ही बहुत शॊक मे थी. मुझे अपने लव अफ़ेयर का सदमा कुछ ही दिन मे भूल गया क्योंकी मै अपने बॊयफ़्रेन्ड पर बहुत ही गुस्सा थी. मैने उससे बिलकुल मिलना छोड दिया और फिर उससे कोई रिशता ना रखने की कसम खा ली. एक दिन रात को टीवी देखते हुए मुझे एक खयाल आया के आखिर समीर ने जो भी मुझको रीना भाभी के बारे मे बताया है क्या वो सच हो सकता है के नही. इसलिये मैने सोचा क्यों ना इस बात का पता लगाया जाये और मै अब समीर से नही बल्के भाभी से इसके बारे में पूछूं. लेकिन कैसे?

अगले दिन मै लन्च के बाद भाभी के पास बैठ गयी और इधर उधर की बातें करने लगी और बातें करते करते मैने भाभी से पूछा की आज कल ज़िन्दगी भर किसी एक के साथ रहना काफ़ी मुश्किल होता है ना भाभी? क्या आप भैया से बोर नही हो जाती? वो मेरी यी बात सुन कर अजीब तरीके से मुसकुरा कर कहने लगी: इस के इलावा कर भी क्या सकते हैं. आखिर ज़िन्दगी भी तो गुज़ारनी है ना. मै: भाभी..... क्या भैया भी तुम से बोर नही होते? क्या तुमको यकीन है के उनका कोई बाहर चक्कर वक्कर नही है? भाभी: लगता तो नही है.....(फिर हंसते हुए बोली) अगर है भी तो मुझे क्या? वापस तो मेरे पास ही आना है ना. मैने फिर भाभी से सवाल किया: भाभी एक बात पूछूं?........... भाभी: हां पूछ क्या बात है? मै: अगर मेरा कोई चक्कर हो तो भैया क्या करेंगे? भाभी: बहुत गुस्सा करेंगे तुझे. अगर ऐसी कोई बात हो तो मुझ तक ही रहने देना. वैसे कोई चक्कर है क्या? मै: नही भाभी...अभी तक तो नही है............लेकिन एक लडका लाईन मार राहा है मुझ पर काफ़ी दिनों से. भाभी: कौन है वो और कैसा है? मै: मेरी क्लास मै पढता है और है भी हैन्ड्सम............. भाभी: तो तेरा क्या खयाल है........? पसन्द है क्या तुझे? मै: है भी और नही भी भाभी: म्म्म्म्म्*म्म ..........अगर तो तुम सीरिअस हो तो बात करूं घर वालों से? मै: नही नही भाभी...........इतना भी पसन्द नही है मुझे. भाभी: तो फिर टाईम पास कर और मज़ा ले के छोड देना. मै ये बात सुन कर हैरान हो गयी के भाभी मुझे क्या कह रही है और भाभी से पूछा: मज़ा लूं?.........इस का क्या मतलब? भाभी हंस्ते हुए आहिस्ता से बोली: अरे जवानी के मज़े ले और क्या. यही तो उमर है ऐश करने की. मै: भाभी अगर मैने कुछ किया तो मेरे होने वाले पती को पता नही चलेगा के मैने क्या कुछ किया हुआ है? भाभी: अरे नही पता चलता............(भाभी ने इधर उधर देखा और आहिस्ता से बोली) अब तुम्हारे भाई को पता चला है क्या मेरे बारे मे? मै: क्या मतलब भाभी? क्या आप भी? कब, कैसे और किस के साथ? भाभी: मै बहुत ही चालाक हूं. मैने एक काम किया की घर की बात घर मे ही रह जाये...................और किसी को शक भी ना हो............ मै: क्या किया आपने? भाभी: मै तो कसम खा सकती हूं के मैने आज तक तुम्हारे भाई के इलावा किसी के साथ सेक्स नही किया..............हां ये बात अलग है के वो सुनील के इलावा भी हो सकता है.............. मै: हे भगवान .भाभी.........समीर के साथ? कब? और कहां? भाभी: अब चुप ही रहो किसी से बात ना कर बैठना. मै: भाभी आप को मुझ पर यकीन नही है क्या? भाभी: है तभी तो इतनी बातें कर रही हूं ना..............वैसे तुम्हारे भाई समीर की क्या बात है..........बहुत ही सेक्सी है............. भाभी से बात करने के बाद मुझे पता चल गया के समीर की बात सच थी. फिर भाभी ने अपनी सारी कहानी सुनाई जो मै आप को किसी और दिन बताऊंगी. फिर मै ने इधर उधर की बातें करके बात खतम कर दी. उसी रात को जब मै और समीर टीवी देख रहे थे और बाकी सब सो चुके थे मैने समीर को बताया के आज मेरी भाभी से क्या बात हुई. वो मेरी बातें सुन कर सिर्फ़ मुसकुराता राहा. मैने समीर से एक सवाल किया : ऐसा करने के बारे मे तुम्हे खयाल कैसे आया? समीर: तुम को पता है मै कम्प्यूटर पर बहुत ज़्यादा टाईम बिताता हूं और नेट से बहुत कुछ पता करता हूं...बस वहीं से मेरा इन बातों पर ध्यान गया. मै: क्या ध्यान गया समीर: चलो अभी दिखाता हूं. वो ये कह कर मुझे कम्प्यूटर पर ले गया और नेट पर देसी सेक्स की कहानियों की एक साईट खोल दी और मुझे काहा लो तुम बैठ कर इन्हें पढो. मुझे अब शरम आ रही थी पर समीर मुझे कम्प्यूटर के समाने छोड कर चला गया. कुछ देर मै इधर उधर देखती रही फिर हिम्मत करके पढना शुरू कर दिया..........और जब मैने काहानियां पढनी शुरू की तो मेरी हैरानी की हद नही थी. इन काहानियों मे तो किसी किसम का भी रिश्ता माफ़ नही किया गया था. कोई अपनी भाभी या साली के साथ, कोई मां या बाप के साथ, कोई अपने कज़न और कोई अपने सगे भाई या बहन के साथ सेक्स की बातें बता राहा था.......मेरे अन्दर एक अजीब सी फ़ीलिन्ग हो रही थी. पता नही मुझे क्या हो राहा था. लेकिन जो भी था अच्छा लग राहा था और मै पढते ही जा रही थी. मुझे पता ही नही चला के कब सुबह के ४:०० बज गये. मैने जल्दी से कम्प्यूटर बन्द किया और सोने चली गयी. उस रात मैने एक सपना देखा की मै अपने बाथरूम में नाहा रही हूं और अचानक समीर बाथरूम मै आ गया और वो बिलकुल नंगा था लेकिन मै उसे देख कर खुश हो रही थी. समीर बाथरूम मै आते ही मुझे चूमने लगा और मुझे बहुत मज़ा आ राहा था. फिर मेरी आंख खुल गयी तो देखा की मेरा हाथ मेरे वैजाईना पर है..........और मै नीचे सी गीली हो चुकी थी. समीर जब नाश्ते पर मिला तो हंसते हुए आहिस्ता से मुझसे पूछा: कैसी रही रात की एन्टरटेनमेन्ट? मै:ठीक थी.........सिर्फ़ एक काहानी पढी और फिर सो गयी. कोई खास मज़ेदार नही थी...... मैने जान बूझ कर समीर से झूट बोला. पता नही क्यों मै उससे सच नही बोल पाई. वो मेरी बात सुन कर मुसकुराता हुआ चला गया. मुझे लग राहा था के मै अब समीर को किसी और नज़र से देख रही हूं पर किस नज़र से? इस का जवाब नही था मेरे पास. उस दिन जब समीर नही था मैने मौक देख कर फिर कम्प्यूटर ऒन किया और फिर से उसी साईट पर चली गयी और मज़े से कहानियां पढने लगी. एक अजीब मज़ा आ राहा था. हां उस काहानी को ज़रूर पढती थी जिस मै भाई और बहन का सेक्स होता था. मुझे वो अच्छी लगती थी. मै फिर से नीचे गीली हो चुकी थी. दो घन्टे तक काहानियां पढती रही. ऐसा कुछ दिनों तक चलता राहा और अब मै अक्सर भाई बहन के सेक्स के बारे में सोचती थी और मेरी पैन्टी गीली हो जाती थी. एक रात को जब मैने समीर से फिर से कम्प्यूटर पर बैठने की इजाज़त मंगी तो वो मुसकुराया और कहने लगा अभी नही.........जब सारे सो जायेंगे तब.........और आज मै भी तुम्हारे साथ बैठूंगा कम्प्यूटर पर. मै चुप हो गयी और टीवी देखने लगी. रात १०:०० बजे के करीब समीर ने काहा जाओ देख कर आओ सब सो गये हैं क्या? मै उठी और देखा के सब सो चुके थे. लेकिन सुनील भैया के रूम की लाईट ऒन थी. मैने समीर को ये बताया तो बोला: चलो आज मै तुम को कहानीयां नहीं बल्के असली चीज़ दिखाता हूं. मै बोली: वो कैसे समीर: जैसे मै कहूं वैसे करती जाओ. फिर देखो क्या होता है. ये कह कर वो मेरा हाथ पकड कर मुझे छत पर ले गया. छत पर सिर्फ़ एक ही कमरा है जिसमे सुनील भैया और रीना भाभी रेहते हैं. उसने जा कर उनके कमरे के दर्वाज़े को खटखटाया. रीना भाभी नाईटगाउन मे बाहर आयी और हमसे पूछा: क्या बात है? समीर ने ऊंची आवाज़ मे काहा: वो आज का अखबार चाहिये. हमे कुछ देखना था उसमे. अन्दर से सुनील भैया की अवाज़ आयी: रीना, यहां पर पडा है अखबार, आके ले जाओ और दे दो इसे. रीना भाभी अन्दर से अखबार लेकर आयीं तो समीर उन्हें खींच कर साईड पर ले गया और दबी ज़ुबान मे बोला: रीना, आज रात को सुनील के साथ सेक्स का प्रोग्रैम है क्या तुम्हारा? रीना बोली: हां, क्यों? समीर: तुम खिडकी पर से परदाआ थोडा हटा देना और थोडी सी लाईट भी आने देना रीन मुसकुराते हुए बोली: "क्यों, क्या करोगे तुम लोग देख कर" समीर: अरे कुछ नही, अदिती की बहुत इच्छा है सच मे सेक्स देखने की, इसकी उत्सुकता शान्त हो जायेगी रीना: समीर, तू इसको भी बिगाड रहा है समीर: अरे नही, इसको ग्यान दे रहा हूं. अच्छा शो दिखाना रीना: अच्छा मै देखती हूं क्या कर सकती हूं फिर भाभी अन्दर गयी और दर्वाज़ा बन्द करके चिटकनी लगा दी. उसने बडी लाईट बुझा कर एक छोटी लाईट ऒन कर दी और परदा खोल कर, खिडकी भी खोल दी. फिर उसने परदा किया, लेकिन पूरी तरह नही. फिर रीना अपने बेड पर बैठ गयी. सुनील भी बेड पर आकर लेट गया और रीना उसके साथ चिपक गयी. उसके दोनो मम्मे समीर के सीने से दबे थे. सुनील उसकी गान्ड को अपने हाथ से सहला राहा था और एक दूसरे को देख दोनो मुसकुरा रहे थे. तभी रीना ने झुक कर सुनील के होंठों पर किस किय. फिर सुनील ने उसके चेहरे को पकडा और उसके होंठों को अपने होंठों से कसकर चूसने लगा. अब वो दोनो एक दूसरे को किस कर रहे थे. ३-४ मिनट बाद रीना हांफ़ती हुई सुनील के ऊपर ढेर हो गयी और समीर ने भी उसे अपने बांहों में कस लिया. हमे कमरे की हल्की रोशनी मे ये सब कुछ साफ़ नज़र आ राहा था. हम चुपचाप खिडकी के पास खडे हो कर परदे की दरार मे से देख रहे थे. मुझे अजीब सा लग राहा था अपने भाई और भाभी को छुप छुप के देखना पर अन्दर ही अन्दर मज़ा भी आ राहा था. कुछ देर सुनील ने रीना की गान्ड को नाईटगाउन के ऊपर से सहलाया और फ़िर हाथ को नाईटगाउन के अन्दर डाल उसकी गान्ड को सहलाने लगा. फिर उसने नाईटगाउन को उठा कर निकाल दिया. अब वो सिर्फ़ पैन्टी और ब्रा में थी. फिर सुनील खडा हुआ और अपना शर्ट और पजामा उतार दिया और अपने अन्डरएयर मे रीना के सामने खडा हो गया. उसका लन्ड उसके अन्डर्वेयर मे तन के खडा था. मैं आंखें फाड फाड के ये नज़ारा देख रही थी. मेरी सांसें तेज़ी से चल रही थी. रीना ने खिडकी की तरफ़ देखते हुए अपने मम्मों को अपने हाथों मे पकड कर बोला: सुनील कैसी लग रही हूं आज? मै समझ गयी की वो असल मे हमे दिखा रही थी और ये सवाल समीर के लिये था. सुनील बोला: अरे तू तो है ही बहुत खूबसूरत यार. चल अब इनको बाहर निकाल. उसने भाभी के मम्मों की तरफ़ इशारा करके काहा. रीना ने अपनी ब्रा खोली और ब्रा हटाई तो मै देखकर दन्ग रह गयी. एकदम गोल और कसे कसे मम्मे थे. फिर वो लेटी और अपने मम्मों को उभार दिया. सुनील उसके ऊपर झुका और पहले दोनो निप्पल को चूमा और फ़िर जीभ निकल दोनो को १०-१५ बार चाटा. जीभ से चाटने के बाद दोनो मम्मों को हाथों से पकड मसला और फ़िर एक को मुंह में लेकर चूसने लगा. मै दोनो का खेल देख उत्तेजित हो गयी थी. मेरे से राहा नही गया और मै अपने मम्मों को पकड के हल्का सा दबाने लगी. मगर फिर मैने देखा की समीर मुझे ये करते हुए देख राहा है तो मैने अपना हाथ जलदी से हटा लिया. रीना सिसकियां ले रही थी और बार बार अपनी चूंचियों को ऊपर की ओर उचका के सुनील के मुंह में घुसेड रही थी. मै सोच रही थी की मम्मे चुसवाने और निप्पल चटवाने में कितना मज़ा आता होगा. सुनील कुछ देर तक मम्मे चूसने के बाद उठा और फ़िर रीना कि पैन्टी को खिसकाया. रीना ने अपनी गान्ड उठा के पैन्टी को उतरवाया और अब वो बिलकुल नंगी बेड पर लेती थी. सुनील ने अपना हाथ रीना की चिकनी टांगों पर रखा और सहलाते हुए चूत तक ले गया और पूरी चूत को हाथ से दबाया. फिर उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा और उसकी क्लिट को अन्गूठे से मसलने लगा. रीना बोली: मुंह से करो ना. सुनील उसकी दोनो टांगों के बीच आया और अपने मुंह को झुका कर उसकी चूत पर रख दिया. चूत से जीभ लगते ही भाभी के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकल गयी. भाभी इस पोस में लेटी थी की हमे सब कुछ साफ़ साफ़ दिखायी दे राहा था. भैया जीभ को पेलकर चाट रहे थे और हाथ से दोनो मम्मों को भी दबा रहे थे. भाभी मज़े से भर करे अपनी गान्ड उछाल रही थी और तेज़ तेज़ अवाज़ में सिसक रही थी. मुझे भी अपनी पैन्टी गीली होने का ऐहसास हुआ क्योंकी मेरी चूत से भी पानी निकलने लगा था. १०-१२ मिनट तक चटवाने के बाद रीना हांफ़्ते हुए बोली: आह बस अब बस करो नही तो मैं झड जाऊंगी. हाय रुको और अब मुझे अपना लन्ड दो. फ़िर वो उठी और सुनील को लिटाया और उसके अन्डर्वेयर को हाथ से निकाल दिया. मै भैया के लन्ड को देख कर दन्ग रह गयी. खूब मोटा और लम्बा था. लन्ड एक्दम सख्त और ऊपर को तना था. उसने झुककर लन्ड को अपने मुंह में लिया और चूसने लगी. वो पूरे लन्ड पर चारों तरफ़ जीभ चलाती फ़िर मुंह में लेकर चूसती. मैने देखा की समीर का लन्ड भी पैन्ट के अन्दर तन के खडा है और वो उसे अपने हाथ से हल्के हल्के सहला राहा है. समीर ने देख लिया की मै उसके लन्ड को देख रही हूं और मुसकुरा दिया पर रुका नही. बलकी उसने अपनी पैन्ट की ज़िप खोल दी और अब उसका लन्ड अन्डर्वेयर के अन्दर तन के दिखने लगा.
 
भाई बहन की दोस्ती या वासना--2

आज कैसे चोदोगे?" रीना भैया के लन्ड को पकड कर हिलाती हुई बोली. सुनील उसे बेड पर लिटाते हुए बोला, तू लेट जा बस मै चोद लूंगा जैसे मन करेगा. वो लेट गयी. उसकी टांगे हमारी तरफ़ ही थी जिससे उसकी चूत का लाल चेद मुझे साफ़ दिख राहा था. फिर सुनील उसके ऊपर आया और अपने लन्ड को उसकी चूत पर रखा और धीरे धीरे घुसा कर पूरा अन्दर डाल दिया. लन्ड अन्दर जाते ही भाभी के चेहरे पर खुशी देखने वाली थी. उसने हाथों को भैया के कन्धों पर रख लिया था. फिर सुनील ने धीरे धीरे लन्ड अन्दर बहार कर चुदाई शुरू कर दी. मैं अपनी चुदती भाभी को देख बहुत ही गरम हो गयी थी. मेरी हालत बहुत खराब हो चुकी थी और पैन्टी नीचे से पूरी भीग गयी थी. समीर ने भी अपने अन्डर्वेयर की मोरी मे से लन्ड निकाल कर उसे मुठ्ठी मे पकड कर ज़ोर ज़ोर से हिलाना शुरू कर दिया था. मुझसे भी अब राहा नही जा राहा था और मैने सल्वार के नाडे को खोल के ढीला किया और अपना एक हाथ अपनी पैन्टी मे डाल दिया और अपनी चूत को रगडने लगी. समीर ने मुझे ये करते हुए देख लिया पर मुझे अब पर्वाह नही थी. फिर समीर ने मेरे एक बूब के ऊपर अपना हाथ रख दिया और उसे थोडा सा दबाया. मैने उसकी तरफ़ देखा और उसने मेरी तरफ़. दूसरे हाथ से वो अपने लन्ड को हिलाता राहा. मैने उसे कुछ नही काहा और उसने अब मेरे मम्मों कोएक एक करके कमीज़ के ऊपर से दबाना शुरू कर दिया. वहां कुछ देर तक सुनील भाभी को इसी तरह चोदता राहा और फ़िर लन्ड बाहर निकाल दिया. चूत के रस से भीगा लन्ड चमक रहा था. लन्ड बहर कर उसने रीना को उठाया और उसे डॊगी स्टाइल में किया और फ़िर पीछे से उसकी चूत में लन्ड पेल कर चुदायी शुरू कर दी. वो हाथ आगे कर रीना के दोनो मम्मों को पकड के कस कर चुदाई कर राहा था. मै अब पैन्टी मे हाथ डाले ज़ोर ज़ोर से अपनी चूत और क्लिट को मसल रही थी. फिर समीर ने मेरी कमीज़ के गले के अन्दर अपना हाथ डाला और मेरी ब्रा के ऊपर से मेरे मम्मों को दबाने लगा. मेरी मस्ती की कोई सीमा नही थी और मै चाह रही थी के वो मुझे पूरी तरह से नंगा कर दे, पर मै कुछ नही बोली. फिर उसने मेरा हाथ पकड कर पैन्टी से खींच के बाहर निकाल दिया और अपने लन्ड पर रख दिया और इससे पहले की मै कुछ बोलती अपना हाथ मेरी पैटी मे डाल दिया. वो मेरी चूत को सहलाने लगा और मै सातवें आसमान पर पहुंच गयी. मैने भी उसके लन्ड को अपनी मुठ्ठी मे लेकर हिलाना शुरू कर दिया जैसे मैने उसे करते देखा था. वहां ५-६ मिनट तक इस तरह से चोदने के बाद सुनील ने फिर लन्ड बाहर निकाला और खुद नीचे लेट गया. जब वो नीचे लेटा तो रीना जल्दी से ऊपर आयी और उसके लन्ड को पकड अपनी चूत से लगा उसपर बैठने लगी. लन्ड जब पूर अन्दर चला गया तो वो खुद ऊपर नीचे हो चुदवाने लगी. सुनील भी नीचे से अपनी गान्ड उठा उठा लन्ड पेल राहा था और हर धक्के पर भाभी ऊ आ ऊ कर रही थी. इस तरह से भी उसने ७-८ मिनट तक रीना को चोदा फ़िर उसे अपने बदन से चिपका लिया और बोला: आह्ह्ह रीना मैं झडने वाला हूं. आह्ह मेरा निकलने वाला है. रीना तेज़ी से एक झटका और देती हुई चिलाते हुए बोली: हां मै भी झड रही हूं. सुनील अब आह आह करता झड राहा था. झडने के बाद उसने रीना के होंठों पर अपने होंठ रखे और चूमने लगा. फिर दोनो एक दूसरे से चिपक कर बेड पर ढेर हो गये. इधर मै भी झड रही थी और अपने होंठों को दांतों मे दबा कर अपनी आवाज़ को रोक रही थी. मेरे हाथ मे समीर क लन्ड भी झटके खाने लगा और एक पिचकारी की तरह उसके लन्ड से वीर्य की धार निकल कर दूर जा गिरी. वहां कमरे से उठ कर सुनील बाथरूम मे चला गया तो रीना ने जलदी अपना नाईटगाउन पहना और भागकर खिडकी पर आयी और धीमी सी आवाज़ में मुझसे बोली: देखा अदिती तेरे भैया मुझे कैसे चोदते हैं? शो देख कर मज़ा आया? मैं शर्मा गयी और सिर्फ़ सर हिला दिया. वो थोडा सा हंसी और बोली: अब तुम दोनो जल्दी से याहां से निकल लो. मै अभी सोने के बिलकुल मूड में नही थी इसलिये मै और ऊपर वाली छत पर चली गयी. वहां पर खाली छत है और हमने सिर्फ़ एक गद्दा डाल रखा है कभी कभी छत पर आकर बैठने या लेटने के लिये. मेरे पीछे पीछे समीर भी छत पर आ गया और आते ही कहने लगा: कहो........ कैसी रही.......? मै: म्म्म..... ......... ....(मै कुछ देर खमोश रही और फिर बोली)....... ..समीर ये हमने ठीक नही किया........ .....हम दोनो बहन भाई हैं समीर: क्यों.. ........तो क्या हुआ?....... ......... .हमने क्या गलत किया? मै: तो क्या ये ठीक था? समीर: हां.. ...ठीक था........ .......अखिर हम दो एक दूसरे से प्यार करते हैं......... इस मे बुराई ही क्या है? मै: समीर मै तुम्हारी बहन हूं......... . समीर:देखो अदिती...... ........तुम मेरी सब से अच्छी दोस्त हो.......... जिस के लिये मै कुछ भी कर सकता हूं......... ..अगर तुम को लगता है की मैने गलत किया तो आगे से मै तुमसे दूर रहूंगा. मै: नही समीर....... ...मै ऐसा नही चाहती. समीर: तो फिर ............ मै: तो फिर क्या? समीर: इस खुबसूरत माहौल को मज़ा लो.......... और क्या मै: समीर... ......... ....तुम क्या चीज़ हो.......... .तुम को ज़रा भी शर्म नही आती अपनी बहन से ऐसी बातें करते हुए? समीर:बहन से नही........ ...अपनी दोस्त से.......... ...अपनी जान से भी प्यारी दोस्त से....अच्छा एक बात बताओ. मै: क्या? समीर: सच सच बताना? मै: पूछो तो सही? समीर: मैने जो भी किया........ ...तुम को अच्छा लगा के नही? मै ये सवाल सुन कर चुप हो गयी और समीर को भी समझ आ गया था के मेरा जवाब क्या है. कुछ देर बाद वो खुद ही मेरी तरफ़ बढा और कहने लगा: थोडी देर के लिये भूल जाओ के हम बहन भाई हैं और अपने दिल से पूछो........ ...इस वख्त क्या दिल चाह राहा है तुम्हारा? मै अब समीर की आंखों मे देख रही थी और सोच रही थी अगर सच मे समीर मेरा भाई ना हो तो? ये सोचते ही मेरे मन मे एक लहर सी दौड गयी और मुझे अब समीर एक बहुत ही हैन्डसम लडका लग राहा था और उसे देखते देखते मै मुसकुराने लगी. अब मै थोडी रिलैक्स फ़ील कर रही थी.और समीर के पास जा कर आहिस्ता से उसे गगे लगा कर उससे लिपट गयी. समीर फिर समझ गया.और बोला: चलो आज की रात हम बहन भाई नही बल्की दोस्त और प्रेमी के रिश्ते से गुज़ारते हैं. क्या तुम तय्यार हो? मैने उसकी आंखों की तरफ़ देखते हुए सर हिला दिया. समीर ने मुझे अपने गले लगा लिया और अपने से चिपका लिया. उसका हाथ मेरी कमर पर उपर नीचे चल राहा था. मै उससे और ज़ोर से चिपक गयी.समीर ने कुछ देर बाद मुझे पीछे हटाया और मेरे होंठों को अपने होंठों से टच किया. ओ भगवान ......... .......क्या लम्हा था........ ..जैसे मै हवा मे उड रही हूं. आहिस्ता आहिस्ता मैने भी उसे रिस्पॊन्स देना शुरू कर दिया. अब हम पागलों की तरह एक दूसरे को किस कर रहे थे.समीर ने अपना एक हाथ मेरे दाहिने बूब पर रख दिया. इस बार मुझे और भी मज़ा आ राहा था इसलिये मैने उसे नही रोका. हमारी किसिन्ग इतनी इनटेन्स हो गयी के हम एक दूसरे के होंठों को काटने लगे. मेरे अब बुरा हाल था.समीर ने अचानक मेरी कमीज़ को उठाना शुरू कर दिया. मै एक दम रुक गयी. और उसकी तरफ़ देखा....... ..उसने मुझे इशारे से ही ना रुकने को काहा. पता नही मुझे क्या हुआ के मैने उसे फिर से किस करना शुरू कर दिया. वो मेरी कमीज़ फिर से उतारने लगा. मैने इस बार उसकी मदद भी की. अब मै सिर्फ़ ब्रा और सलवार मै थी. मै सिर्फ़ चूमने पर ध्यान दे रही थी और वो आहिस्ता आहिस्ता मेरी ब्रा भी खोल राहा था. मुझे पता था के वो क्या कर राहा है लेकिन मैने समीर को इस बार बिल्कुल भी नही रोका. मेरी ब्रा भी उतर चुकी थी अब. समीर ने मेरे होंठों को चूमना छोड दिया और पीछे हो कर मेरे बूब्स को देखने लगा. मुझे अब शरम आ रही थी और मैने अपने दोनो हाथ अपने बूब्स पर रख लिये. वो मुसकुराया और अपनी शर्ट उतारने लगा. मै अब उसे बडे गौर से देख रही थी. इस के बाद उसने पैन्ट भी उतार दी. अब वो सिर्फ़ अन्डर्वेयर मे था और मै सिर्फ़ सलवार मे. मै अब भी अपने हाथों से बूब्स छुपा रही थी. वो मेरे करीब आया और मेरे हाथ छाती से हटाने लगा. मैने रेसिस्ट नही किया और हाथ हटा लिये. अब वो मेरे बूब्स को देख राहा था और फिर आगे बढा और मेरे बूब्स को चूसने लगा. ओ भगवान.....क्या लग राहा था......... मेरी इस बात का अन्दाज़ा सिर्फ़ वो लडकियां ही लगा सकती हैं जिन्होंने ये करवा रखा हो. मैने उसको सर से पकडा हुआ था और मेरी आंखें बन्द थी. समीर अभी भी मेरे मम्मे चूस राहा था और उसके साथ साथ उसने मेरी सलवार का नाडा खोल दिया जिस के साथ ही मेरी सलवार नीचे गिर गयी. अब मै सिर्फ़ पैन्टी मे थी. उसने बूब्स को किस करते हुए अपना अन्डर्वेयर उतार दिया और फिर मेरी पैन्टी भी नीचे खींच कर उतार दी. अब हम दोनो बहन भाई खुले आसमान के नीचे बिलकुल नंगे खडे थे और वो मेरे मम्मों को चूस राहा था. मुझे बहुत ही मज़ा आ राहा था. उसने हम दोनो के कपडे एक साईड पर कर दिये और मुझे गद्दे पर लेटने के लिये काहा और मै लेट गयी. अब समीर मेरे उपर लेट गया. लेकिन एक दम मुझे जैसे कोई करन्ट लगा. क्यों के इस सारे नशे मे मै समीर की वो चीज़ तो भूल ही गयी थी जो अब मेरे वैजाईना के बिलकुल उपर थी. हां उस का लन्ड......... ......हे भगवान......... ..पहली बार किसी का लन्ड मेरे वैजाईना के साथ टच किया था. मै बिल्कुल पागल हो चुकी थी अब. उस का लन्ड बहुत ही सख्त हो चुका था और गरम भी बहुत था. वो मेरे लेटे शरीर को ऊपर से नीचे तक चूमने लगा. फिर मेरे मम्मों को कुछ देर फिर चूस के आहिस्ता आहिस्ता मेरी चूत तक पहुंच गया. अब तो मै मरने वाली थी. जैसे ही उसने अपनी ज़ुबान मेरे वैजाईना पर लगायी मेरे मुंह से वैसी ही अवाज़ें निकलनी शुरू हो गयी जो कुछ देर पहेले रीना भाभी के मुंह से निकल रही थी. अब मेरी समझ मे आया के वो इतना क्यों तडप रही थी. अब मै समीर के सर पर हाथ रख कर अपनी चूत की तरफ़ दबा रही थी. मेरा मन कर राहा था की वो ऐसे ही रहे हमेशा के लिये.वो और भी ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत को चाटने लगा. उसकी ज़ुबान ने मेरा बुरा हाल कर दिया था. करीब ८ से १० मिनट तक वो यही करता राहा. अब मै बिलकुल समीर के वश मे थी और उसके कहने पर कुछ भी करने को तय्यार थी. समीर ये जानता था और इसी बात का फ़ायदा उठाया उसने. वो फिर से मेरे ऊपर आ कर लेट गया और लिप किसिन्ग करने लगा लेकिन इस बार एक और काम किया उसने. मेरी दोनो टांगों को खोल दिया और उनके बीच आ गया. मेरे कान मे बोला........ ..अदिती क्या तुम मुझे अपनी सब से कीमती चीज़ दोगी? क्या तुम मुझे इतना प्यार करती हो?

मै: क्या मतलब तुम्हारा..... ......... ? मै सारी दुनिया से ज़्यादा प्यार करती हूं अपने भाई से. अपना सब कुछ तो तुम को दे दिया है अब और क्या चाहिये तुम को? समीर: अच्छा. ......अब मै जो करने वाला हूं उसको बर्दाश्त कर लोगी? मै: क्या करने वाले हो तुम? समीर: अपना लन्ड तुम्हारे वैजाईना के अन्दर डालने लगा हूं. पहली बार थोडी तक्लीफ़ होती है पर कुछ देर के बाद मज़ा आना शुरू हो जायेगा मै: समीर... .....देख लो.......... .कोई गरबड ना हो जाये समीर: मुझ पर भरोसा है ना तुमको? मै: हां पूरा भरोसा है समीर: तो बुस तुम चुपचाप मै जो कर राहा हूं करने दो और थोडी देर के लिये तक्लीफ़ बर्दाश्त कर लेना...... मेरे लिये. मै: समीर तुम जो करना चाहते हो कर लो.......... .मै कुछ नही कहूंगी. मेरी ये बात सुन कर समीर ने मेरी टांगें और खोल दी और उनके बीच सीधा बैठ गया. पहली बार अब समीर का लन्ड नज़र आया मुझे...... ........हे भगवान ......... .वो तो बहुत बडा था........ मै फ़ोरन बोली: समीर ये तो सुनील भैया से भी बडा है. समीर ये सुन कर हंस पडा और उसने मेरा हाथ अपने लन्ड पर रख दिया. पहेले तो मैने पीछे हटाया पर जब उसने फिर पकडाया तो मह्सूस किया के बहुत ही सख्त और गरम था. समीर: अब इस का कमाल देखो सिर्फ़ तुम. ये कह कर वो अपना लन्ड मेरी चूत के ऊपर रगडने लगा. समीर की इस हर्कत से मुझे एक अजीब सा मज़ा आ राहा था. फिर उसने अपने लन्ड को आहिस्ता से मेरी चूत के अन्दर की तरफ़ धकेल दिया जिससे थोडा सा लन्ड मेरे अन्दर चला गया. अब मै आप को क्या बताऊं. इतना दर्द हुआ के बता नही सकती. लेकिन मै समीर से वादा कर चुकी थी इस लिये अपने होंठों को अपने दांतों मे दबा कर चुप रही. समीर मेरी हालत देख कर बोला: अभी तो सिर्फ़ १०% ही गया है. ये सुन कर मेरी तो जान ही निकल गयी. अगर १०% पर ये हाल है तो आगे क्या होगा. लेकिन मै फिर भी चुप रही. समीर अब आहिस्ता आहिस्ता लन्ड को और अन्दर धकेल राहा था और मेरी जान निकल रही थी. फिर उसने एक ज़ोर क धक्का मारा और पूरा लन्ड एक झटके से अन्दर घुसा दिया. मेरी तो चीख निकल गयी. आवाज़ इतनी थी के अगर हम कमरे मे होते तो शायद सब जाग जाते. समीर ने अकलमन्दी की और एक्दम अपने होंठ मेरे होंठों के साथ जोड दिये जिससे मेरी आवाज़ कम हो गयी. अब दर्द मेरी बर्दाश्त के बाहर था. मैने आंसू भरी आवाज़ मे काहा: समीर प्लीज़ निकाल दो नही तो मै मर जाऊंगी. समीर: बस मेरी जान हो गया........ ...कुछ देर मे ही दर्द खत्म हो जायेगा.......... ...बस थोडी देर रुक जाओ........ ......मेरे लिये. समीर की बात ने मुझे मजबूर कर दिया और मै चुप कर के बर्दाश्त करती रही. वो भी बगैर हिले मुझ पर लेटा राहा अपने लन्ड को मेरी चूत मे घुसाये. काफ़ी देर हम ऐसे ही रहे. अब वाकयी मुझे दर्द थोडा कम होता मह्सूस हुआ. मेरे चहरे को देख कर समीर को पता चल गया की अब मै पहले से ठीक हूं. समीर का लन्ड एक गरम सलाख की तरह मेह्सूस हो राहा था. अब समीर आहिस्ता आहिस्ता अपने लन्ड को आगे पीछे करने लगा. पहली ५ या ६ बार आगे पीछे करने पर मुझे फिर दर्द हुआ लेकिन वो भी आहिस्ता आहिस्ता एक अजीब से सरूर मे बदल राहा था. और कुछ देर के बाद मुझे सच मे मज़ा आने लगा. एक ऐसा मज़ा जिसका मुझे अन्दाज़ा भी नही था और मै बता भी नही सकती. मै अपने ही भाई का लन्ड अपने अन्दर ले चुकी थी. मै वो हर लिमिट पार कर चुकी थी जो शायद आज तक किसी देसी लडकी ने नही की थी. अपने भाई की मानो बीवी या लवर बन चुकी थी. समीर अब अपनी स्पीड बढाने लगा और मुझे भी मज़ा आने लगा. अब मै समीर को कमर से पकड कर ज़ोर ज़ोर से अपने अन्दर करवा रही थी. कुछ ही देर मै मेरे अन्दर एक अजीब स तुफ़ान उठा. पता नही क्या हो राहा था मुझे मै पागलों की तरह समीर को नोचने लगी. अब समीर का पीछे हटना भी मन्ज़ूर नही था मुझे. मेरा दिल कर राहा था के वो अन्दर ही अन्दर जाता जाये. मै सरूर की सीमा पर आ चुकी थी. मेरी आह निकली और पूरे शरीर में एक लैहर दौड गयी. मेरा पूरा शरीर अकड गया और मुझे एक इतना ज़बर्दस्त आर्गैस्म आया की मै झटके खाने लगी. फिर एक दम मेरे अन्दर जैसे कोई तुफ़ान थम गया हो. मै बहुत ही ज़्यादा मधोश थी. लेकिन समीर अभी भी लन्ड अन्दर बाहर कर राहा था. फिर पता नही उसे क्या हुआ और उसने अपनी स्पीड बहुत ही तेज़ कर दी और उसके मुंह सी भी अवाज़ें आने लगी. मुझे ये आवाज़ें बहुत ही अच्छी लग रही थी और फिर उसने एक झटके से अपने लन्ड को बाहर निकाल लिया और अपने हाथ मे पकड कर ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करने लगा. फिर एक दम उस के लन्ड से वीर्य की धार निकली जो सीधी मेरी छाती पर जा गिरी. काफ़ी गरम था वो पानी. इस के बाद वो भी वैसे ही शान्त हो गया जैसे कुछ देर पहले मै हुई थी. समीर मेरी साएड पर लेट गया. अब हम दोनों बहन भाई खुले आस्मान की तरफ़ देख रहे थे. काफ़ी देर तक ऐसे ही रहे. फिर मुझे खयाल आया की हम तो नंगे हैं और खुली छत पर अगर कोई आ गया तो क्या होगा. ये सारी बातें पहले नही सोची मैने. ये सोचते ही मैने समीर को काहा: जलदी करो........ ......याहां से चलें अब.......... ...कोई आ गया तो.......... ........मेरे कपडे कहां हैं?....... .......काहां रख दिये तुमने......... .? समीर: वो दीवर के साथ साफ़ जगह पर हैं. उठा लो वहां से और मेरे भी ले आओ. ये सुन कर जैसे ही मै उठने लगी तो मुझे अभी भी वैजाईना पर दर्द हो राहा था जो मै कुछ देर से भूल चुकी थी. मैने समीर की तरफ़ देखा और झूटे गुस्से से कहा ....... .......समीर . ......... ....मेरे वैजाईना को फाड दिया है तुमने......... ऐसा करता है क्या कोई अपनी बहन के साथ?ये सुन कर समीर हंसने लगा. उस समय मेरा एक हाथ मेरे वैजाईना पर था. मुझे कुछ गीला गीला मह्सूस हुआ. मैने हाथ लगा कर जब चेक किया तो मेरी चीख निकलते निकलते रह गयी........ वो तो खून थ.....ये क्या हुआ? मै घबरा के बोली: मै तो ज़खमी हो गयी हूं.....अब क्या होगा? समीर ने बडे प्यार से काहा: कुछ नही होगा बुद्धू ... ......... ऐसा ही होता है पहली बार. अगली बार ऐसा नही होगा समीर की बात सुन कर मुझे कुछ हौसला हुआ और हम दोनों ने अपने अपने कपडे पहने. और वो जगह साफ़ की जहां खून गिरा था और बडे ही आराम से अपने अपने कमरे मै चले गये. किसी को कुछ पता नही चला. अब अपने बिस्तेर पर लेटी हुई उस रात की सारी बातें याद करने लगी. मै बहुत गिल्टी फ़ील कर रही थी पर साथ साथ मुझे ये भी पता था के मै इस बात से इनकार नही कर सकती थी के मुझे बहुत मज़ा भी आया. मुझपर एक अजीब सा सकून छाया हुआ था. मुझे पता था की आज मैने समीर के साथ आखरी बार चुदाई नही की है और चाहे कुछ भी सोचूं, ये फिर से होगा और मै अपने आप को रोक नही पाऊंगी. और हुआ भी और एक दो बार तो रीना भाभी और मैने मिल के समीर के साथ चुदाई की.
 
दीदी ने मुझे चुदवाया--1

मैं रजनी हूँ इस साल मेरी शादी होने वाली है. मैं छ्होटे एक कस्बे

की सीधी साधी लड़की हूँ. सुंदर और भरे बदन की मालिका. जो भी

देखता बस देखता ही रह जाता. काफ़ी मनचलों ने डोरे डालने की

कोशिश की मगर मैं हमेशा अपना दामन बचा कर चलती थी. मैने

ठान रखा था कि अपना बदन सबसे पहले अपने पति को ही सौंपूँगी.

मगर किस्मत मे तो कुच्छ और ही था.

मेरी एक बड़ी बहन भी है रश्मि. रश्मि दीदी की शादी को चार साल

हो गये थे. मेरा जीजा मुकेश बहुत ही हॅंडसम आदमी है. बातें इतनी

अच्छी करते हैं कि सुनने वाला बस उनके सम्मोहन मे बँधा रह जाता

है. दीदी के मुँह से उनके बहुत किस्से सुन रखे थे. उनकी शादी से

पहले कई लड़कियों से उनके संबंध रह चुके थे. कई लड़कियों से वो

संभोग कर चुके थे.

मैं शुरू शुरू मे उनपर बहुत फिदा थी. आख़िर साली जो ठहरी. मगर

उनके कारनामे सुनने के बाद उनसे सम्हल कर रहने लगी. मैने देखा

था कि वो मुझसे हमेशा चिपकने की कोशिश करते थे. मोका ढूँढ

कर कई बार मुझे बाहों मे भी भर चुके थे. एक दो बार तो मेरी

चूचियो को अपनी कोहनी से दाब चुके थे. मैं उनसे दूरी रखने लगी.

मगर शिकारी जब देखता है कि उसका शिकार चोकन्ना हो गया है तो

उसे पकड़ने के लिए तरह तरह की चाल चलता है. और निरीह शिकार

उसके चालों को ना समझ कर उसके जाल मे फँस जाता है.

मेरे संबंध की बातें चल रही थी. मम्मी पापा को किसी लड़के को

देखने दूर जाना था. दो दिन का प्रोग्राम था. घर पर मैं अकेली रह

जाती इसलिए उन्हों ने दीदी और जीजा को रहने के लिए बुलाया. वैसे

मैने उनसे कहा कि मैं अकेली रह जाउन्गि लेकिन अकेली जवान लड़की को

कोई भी माता पिता अकेले नही छ्चोड़ते.

दीदी और जीजा के आने के बाद मेरे मम्मी पापा निकल पड़े. जैसा मैने

सोचा था उनके जाते ही मुकेशजी मेरे पीछे लग गये. द्वि अर्थी

बातें बोल बोल कर मुझे इशारा करते. दीदी उनकी बातें सुन कर हंस

देती. मैं दीदी से कुच्छ शिकायत करती तो वो कहती कि जीजा साली के

संबंधो मे ऐसा चलता ही रहता है. मुकेश जी पर किसी बात का कोई

असर नही होता था.

मैं उनकी हरकतों से झुंझला उठी थी. उस दिन मैं नहा कर निकली तो

मुकेश जी ने मुझे अपनी बाहों मे भर कर मेरे बालों मे अपना चेहरा

घुसाकर सुगंध लेने लगे. मैं गुस्से से तिलमिला उठी और उन्हे

धकेलते हुए उनसे छितक कर अलग हो गयी.

"आप अपनी हदों मे रहिए नही तो मैं मम्मी पापा से शिकायत कर

दूँगी"

"मैने ऐसा क्या किया है. बस तुम्हारे बालों की महक ही तो ले रहा

था." कहकर मुकेशजी ने वापस मुझे पकड़ना चाहा.

"खबरदार अपने हाथ दूर रखिए. मुझे च्छुने की भी कोशिश मत

करना"

मगर वो बिना मेरी बातों की परवाह किए अपने हाथ मेरी तरफ बढ़ाए.

मैं अपने को सिकोडते हुए ज़ोर से चीखी"दीदी"

दीदी किचन से निकल कर आई.

"क्या हुआ क्यों शोर मचा रही है"

"दीदी, जीजाजी को समझा लो. वो मेरे साथ ग़लत हरकतें कर रहे हैं."

दीदी ने उनकी ओर देखते हुए कहा, "क्यों रजनी को परेशान कर रहे हो"

"मैं क्या परेशान कर रहा हूँ? पूच्छो इससे मैने ऐसी कौन सी

हरकत की है जो ये बिदक उठी"

"दीदी ये मुझे अपनी बाहों मे लेकर मेरे बदन को चूमने की कोशिश

कर रहे थे."

"ग़लत बिल्कुल ग़लत. मैं तो अपनी इस खूबसूरत साली के बालों पर

न्योचछवर हो गया था. मैं तो बस उसके सुंदर सिल्की बालों को चूम

रहा था. पूच्छो रजनी से अगर मैने इसके बालों के अलावा कहीं होंठ

लगाए हों तो"

इससे पहले की दीदी कुच्छ बोलती मैं बोल उठी, "नही दीदी ये आपके सामने

झूठ बोल रहे हैं. इनकी कोशिश तो मेरे बदन से खेलने की थी."

दीदी ने जीजा जी की तरफ देखा तो वो कह उठे "तुम्हारी कसम रश्मि

मैं रजनी के सिर्फ़ बालों को छू रहा था. देखो कितने सुंदर बाल

हैं"

ये कह कर वो मेरे पास आकर वापस मेरे बालों पर हाथ फेरने लगे.

मैं गुस्से से तिलमिला कर उनको धकेलते हुए उनसे दूर हो गयी.

"रहने दो रहने दो मुझे आपकी सारी हरकतें मालूम हैं. आप बस

मुझसे दूर ही रहिए" मैं रुवासि हो उठी.

" अरे रजनी क्यों इनकी हरकतों को इतना सीरीयस लेती हो. अगर ये

तुम्हारे बालों को चूमना चाहते हैं तो चूम लेने दो. इस से तुम्हारा

क्या नुकसान होज़ायगा." दीदी ने समझाते हुए कहा.

"अरे दीदी ये जितने भोले बन रहे हैं ना उतने हैं नही"

" रजनी अब मान भी जा" दीदी ने फिर कहा.

" ठीक है. लेकिन ये वादा करें कि सिर्फ़ मेरे बालों के अलावा कुच्छ भी

नही छ्छूएँगे" मैने कहा

"ठीक है मैं तुम्हारी दीदी की कसम लेकर कहता हूँ की सिर्फ़ तुम्हारे

बालों को ही चूमूंगा उसके अलावा मैं और किसी अंग को नही छ्छूंगा.

लेकिन अगर तुम खुद ही मुझे अपने बदन को छूने के लिए कह्दो फिर?"

उन्हों ने मुझे छेड़ा

"फिर आपकी जो मर्ज़ी कर लेना मैं कुच्छ भी नही कहूँगी. मैं भी

कसम खाती हूँ कि आप अगर सिर्फ़ बालों को चूमे तो मैं कुच्छ भी नही

कहूँगी"

"देख लो बाद मे पीछे मत हटना" मुकेश जी ने कहा.

"जी मैं आप जैसी नही हूँ. जो कहती हूँ करके रहती हूँ."

"ठीक है जब तुम राज़ी हो ही गयी हो तो ये काम आराम से किया जाए.

चलो बेड रूम मे. वहाँ बिस्तर पर लिटा कर आराम से चूमूंगा तुम्हरे

बालों को" उन्हों ने चहकते हुए कहा. मैने और ज़्यादा बहस नही किया

और चुपचाप उनके साथ हो ली.

हम बेडरूम मे आ गये. मैं बिस्तर पर लेट गयी. और अपने बदन को

ढीला छ्चोड़ दिया.दीदी ने मेरे बालों को फैला दिया.

जीजाजी बिस्तर पर मेरे बगल मे बैठ कर अपने हाथों मे मेरे बाल

लेकर उन्हे चूमने लगे. धीरे धीरे उनके होंठ मेरे सिर तक आए.

मेरे सिर पर बालों को तरह तरह से चूमा फिर मुझे पीछे घूमने

को कहकर मेरे गर्देन मे अपने होंठ च्छुआ दिए. गर्दन पर पहली बार

किसी मर्द की गर्म साँसों के पड़ने से मन मे एक बेचैनी सी होने

लगी. फिर उन्हों ने मुझे सीधा किया और मेरे बालों से उतरकर उनके

होंठ मेरे माथे को चूमने लगे. मैं ये महसूस करते ही चौंक उठी.

"ये क्या कर रहे हो. आपने वादा किया था कि मेरे बालों के अलावा किसी

अंग को नही छ्छूएँगे." मैने उठने की कोशिश की.

"मैं वही कर रहा हूँ जो मैने वादा किया था. मैं तुम्हारे बालों को

ही चूम रहा हूँ. मैने ये कहाँ कहा था कि सिर्फ़ सिर के बालों को

चूमना चाहता हूँ. हां अगर ये साबित कर दो कि तुम्हारे बदन पर

सिर के अलावा कहीं और बाल नहीं हैं तो छ्चोड़ दूँगा."

मुझे सारा कमरा घूमता हुआ सा लगा. मैं अपने ही जाल मे फँस चुकी

थी. सिर, बगल, योनि पर ही क्या रोएँ तो पूरे शरीर पर ही होते

हैं. उफफफ्फ़ ये मैं क्या कसम ले बैठी. लेकिन अब तो देर हो चुकी थी.

उसके होंठ मेरे भोन्हो से सरकते हुए मेरी आँखों के पलकों पर

आगाए. उनकी होंठों का हल्का हल्का स्पर्श मुझे मदहोश कर दे रहा

था. मेरी पलकों पर से घूमते हुए वापस माथे पर आकर ठहरे. फिर

नाक के ऊपर से धीरे धीरे नीचे सरकने लगे. स्पर्श इतना हल्का

था मानो को मेरे बदन पर मोर पंख फिरा रहा हो. मेरे रोएँ उसके

स्पर्श से खड़े हो जा रहे थे. अब उसके होंठ मेरे होंठो के ऊपर

आकर ठहर गये. उनके और मेरे होंठों मे सिर्फ़ कुच्छ मिल्लिमेटेर की

दूरी थी. मैं सख्ती से आँखे भींच कर उनके होंठों के स्पर्श का

इंतेज़ार कर रही थी. ये क्या कुच्छ देर उसी जगह ठहरने के बाद

उन्हों ने अपने होंठ वापस खींच लिए. मैं उनकी इस हरकत से

झुंझला कर आँखें खोल दी. पता नही क्यों आज वो इतने निष्ठुर हो

गये थे. रोज तो मुझे स्पर्श करने का बहाना ढूँढते थे. मगर आज

जब मैं मन ही मन चाह रही थी को वो मुझे स्पर्श करें तो वो दूरी

मेनटेन कर रहे थे.

वो उठ कर बैठ गये.

"इसके कपड़े उतार दो. कपड़ों के उपर से मैं कैसे पूरे बदन के बालों

को चूम सकूँगा." उन्हों ने कहा. दीदी ने मेरी तरफ देखा. मैने

बैठते हुए अपने हाथ ऊपर करके अपनी राजा मंदी जता दी. दीदी ने

मेरी कमीज़ उतार दी. टाइट ब्रा मे कसे मेरे स्तनो को देख कर मुकेश

जी की आँखें बड़ी बड़ी हो गयी. फिर दीदी ने मेरी ब्रा के हुक खोल

दिए. ब्रा लूस होकर कंधे पर झूल गयी. मैने खूद अपने हाथों

से उसे उतार कर तकिये के पास रख दी. मैने अपने स्तनो को अपने

हाथों से धक लिया और शरमाते हुए मुकेश जी की तरफ देखा. वो

मुस्कुराते हुए अपनी मेरे बदन पर आँखें फिरा रहे थे. अब दीदी ने

आगे बढ़कर मेरी सलवार का नाडा खोल दिया. मैने झट पास पड़ी चादर

से अपने बदन को ढक लिया. दीदी ने चादर के अंदर हाथ बढ़ा कर

मेरी सलवार खोल दी फिर मेरी छ्होटी सी पॅंटी को भी पैरों से उतार दिया

मैं बिल्कुल नग्न हो कर लेट गयी. दीदी पास से हट गयी.

क्रमशः............

Didi ne mujhe chudavaya--1

Mai Rajni hoon is saal meri shadi hone wli hai. mai chhote ek kasbe

ki seedhi saadhi ladki hoon. sunder aur bhare badan ki malika. jo bhi

dekhta bus dekhta hi rah jata. Kafi manchalon ne dore dalne ki

koshish ki magar mai hamesha apna daman bacha kar chalti thi. Maine

than rakha tha ki apna badan sabse pahle apne pati ko hi saunpoongi.

magar kismat me to kuchh aur hi tha.

meri ek badi bahan bhi hai Rashmi. Rashmi didi ki shadi ko char saal

ho gaye the. Mera Jija Mukesh bahut he handsome admi hai. Baaten itni

achhi karte hain ki sunne wala bus unke sammohan me bandha rahh jata

hai. Didi ke munh se unke bahut kisse sun rakhe the. unki shadi se

pahle kai ladkiyon se unke sambandh rah chuke the. kai ladkiyon se wo

sambhog kar chuke the.

Mai shuru shuru me unpar bahut fida thi. akhir saali jo thahri. magar

unke karname sunne ke baad unse samhal kar rahne lagi. maine dekha

tha ki wo mujhse hamesha chipakne ki koshish karte the. moka dhoondh

kar kai baar mujhe bahon me bhi bhar chuke the. ek do baar to meri

chhatiyon ko apni kohni se dab chuke the. mai unse doori rakhne lagi.

magar shikari jab dekhta hai ki uska shikaar chokanna ho gaya hai to

use pakadne ke liye tarah tarah ke chaal chalta hai. aur nirih shikar

uske chalon ko na samajh kar uske jaal me fans jata hai.

Mere sambandh ki baten chal rahi thi. Mummy papa ko kisi ladke ko

dekhne door jana tha. do din ka programm tha. ghar par mai akeli rah

jati isliye unhon ne Didi aur Jija ko rahne ke liye bulaya. Waise

maine unse kaha ki mai akeli rah jaungi lekin akeli jawan ladki ko

koi bhi mata pita akele nahi chhodte.

Didi aur Jija ke ane ke baad mere mummy papa nikal pade. Jaisa maine

socha tha unke jate hi Mukeshji mere peechhe lag gaye. dwi arthi

baten bol bol kar mujhe ishara karte. didi unki baten sun kar hans

deti. mai didi se kuchh shikayat karti to wo kahti ki jija sali ke

sambandho me aisa chalta hi rahta hai. Mukesh ji par kisi bat ka koi

asar nahi hota tha.

mai unki harkaton se jhunjhla uthi thi. us din mai naha kar nikali to

mukesh ji mujhe pni bahon me bhar kar mere balon me apna chehra

ghusakar sugandh lene lage. mai gusse se tilmila uthi aur unhe

dhakelte huye unse chhitak kar alag ho gayee.

"aap apni hadon me rahiye nahi to mai mummy papa se shikayat kar

doongi"

"maine aisa kya kiya hai. bus tumhare balon ki mahak hi to le raha

tha." kahkar Mukeshji ne wapas mujhe pakadna chaha.

"khabardaar apne hath door rakhiye. mujhe chhune ki bhi koshish mat

karna"

magar wo bina meri baton ki parwah kiye apne hath meri taraf badhaye.

mai apne ko sikodte huye jor se cheekhi"Didi"

Didi kitchen se nikal kar ayee.

"kya hua kyon shor macha rahi hai"

"didi, Jijaji ko samjalo. wo mere sath galat harkaten kar rahe hain."

Didi ne unki or dekhte huye kaha, "kyon rajni ko pareshan kar rahe ho"

"mai kya pareshan kar raha hoon? poochho isse maine aisi kaun si

harkat ki hai jo ye bidak uthi"

"didi ye mujhe apni bahon me lekar mere badan ko choomne ki koshish

kar rahe the."

"galat bilkul galat. mai to apni is khubsoorat sali ke balon par

nyochhawar ho gaya tha. mai to bus uske sunder silky balon ko choom

raha tha. poochho Rajni se agar maine iske balon ke alawa kahin honth

lagaye hon to"

isse pahle ki didi kuchh bolti mai bol uthi, "nahi didi ye apke samne

jhooth bol rahe hain. inki koshish to mere badan se khelne ki thi."

Didi ne Jija ji ki taraf dekha to wo kah uthe "tumhari kasam Rashmi

mai Rajni ke sirf balon ko chho raha tha. dekho kitne sunder baal

hain"

Ye kah kar wo mere paas akar wapas mere balon par hath ferne lage.

Mai gusse se tilmila kar unko dhakelte huye unse door ho gayee.

"rahne do rahne do mujhe apki sari harkaten maloom haiin. Aap bus

mujhse door hi rahiye" mai runansi ho uthi.

" are Rajni kyon inki harkaton ko itna serious leti ho. Agar ye

tumhare baalon ko chumna chahte hain to chum lene do. Is se tumhara

kya nuksan hojayega." Didi ne samjhate huye kaha.

"are didi ye jitney bhole ban rahe hain na utne hain nahi"

" Rajni ab maan bhi ja" didi ne fir kaha.

" thik hai. Lekin ye wada Karen ki sirf mere balon ke alawa kuchh bhi

nahi chhooyenge" maine kaha

"thik hai mai tumhari didi ki kasam lekar kahta hoon ki sirf tumhare

balon ko hi choomunga uske alawa mai aur kisi ang ko nahi chhoonga.

Lekin agar tum khud hi mujhe apne badan ko chhone ke liye kahdo fir?"

unhon ne mujhe chheda

"fir apki jo marji kar lena mai kuchh bhi nahi kahoongi. Mai bhi

kasam khati hun ki ap agar sirf balon ko choome to mai kuchh bhi nahi

kahoongi"

"dekh lo baad me peechhe mat hatna" Mukesh ji ne kaha.

"Ji mai ap jaisi nahi hoon. Jo kahti hoon karke rahti hoon."

"thik hai jab tum raji ho hi gayee ho to ye kaam aram se kiya jaye.

Chalo bed room me. Wahan bistar par lita kar aram se choomunga tumhre

balon ko" unhon ne chahkte hue kaha. Maine aur jyada bahas nahi kiya

aur chupchap unke sath ho li.

hum bedroom me a gaye. Mai bistar par let gayee. aur apne badan ko

dheela chhod diya.Didi ne mere balon ko faila diye.

Jeejaji bistar par mere bagal me baith kar apne hathon me mere baal

lekar unhe choomne lage. Dheere dheere unke honth mere sir tak aye.

Mere sir par balon ko tarah tarah se chooma fir mujhe peechhe ghoomne

ko kahkar mere garden me apne honth chhua diye. Garden par pahli baar

kisi mard ki garm sanson ke padtne se man me ek bechaini si hone

lagi. Fir unhon ne mujhe seedha kiya aur mere balon se utarkar unke

honth mere mathe ko choomne lage. Mai ye mahsoos karte hi chaunk uthi.

"ye kya kar rahe ho. Apne wada kiya tha ki mere balon ke alawa kisi

ang ko nahi chhooyenge." Mai uthne ki koshish ki.

"mai wahi kar raha hoon jo maine wada kiya tha. Mai tumhare balon ko

hi choom raha hoon. Maine ye kahan kaha tha ki sirf sir ke balon ko

choomna chahta hoon. Haan agar ye sabit kar do ki tumhare badan par

sir ke alawa kahin aur bal nahin hain to chhod doonga."

Mujhe sara kamra ghoomta hua sa laga. Mai apne hi jaal me fans chuki

thi. Sir, bagal, yoni par hi kya royen to poore shareer par hi hote

hain. Uffff ye mai kya kasam le baithi. Lekin ab to der ho chuki thi.

Uske honthe mere bhonho se sarakte huye meri ankhon ke palkon par

agaye. Unki honthon ka halka halka sparsh mujhe madhosh kar de raha

tha. Meri palkon par se ghumte hue wapas mathe par akar thahre. Fir

nak ke oopar se dheere dheere neeche sarakne lage. Sparsh itna halka

tha mano ko mere badan par mor pankh fira raha ho. Mere royen uske

sparsh se khade ho ja rahe the. Ab uske honth mere hontho ke oopar

akar thahar gaye. Unke aur mere honthon me sirf kuchh millimeter ki

doori thi. Mai sakhti se ankhe bheench kar unke honthon ke sparsh ka

intezaar kar rahi thi. Ye kya kuchh der usi jagah thaharne ke baad

unhon ne apne honth wapas kheench liye. Main unki is harkat se

jhunjhla kar ankhen khol di. Pata nahi kyon aj wo itne nishthur ho

gaye the. Roj to mujhe sparsh karne ka bahana dhoondhte the. Magar aj

jab mai man hi man chah rahi thi ko wo mujhe sparsh karen to wo doori

maintain kar rahe the.

Wo uth kar baith gaye.

"iske kapde utar do. Kapdon ke upar se mai kaise poore badan ke balon

ko choom sakoonga." Unhon ne kaha. Didi ne meri taraf dekha. Maine

baithte huye apne hath oopar karke apni raja mandi jata di. Didi ne

meri kameej utar di. Tight bra me kase mere stano ko dekh kar Mukesh

ji ki ankhen badi badi ho gayee. fir didi ne meri bra ke hook khol

diye. Bra loose hokar kandhe par jhool gayi. Maine khood apne hathon

se use utar kar takiye ke pas rakh di. Maine apne stano ko apne

hathon se dhak liye aur sharmate huye Mukesh ji ki taraf dekha. Wo

muskurate huye apni mere badan par ankhen fira rahe the. Ab didi ne

age badhkar meri salwar ka nada khol diya. Maine jhat pas padi chadar

se apne badan ko dhak liya. Didi ne chadar ke andar hath badha kar

meri salwar khol di fir meri chhoti sip anti ko bhi pairon se utar di

mai bilkul nagn ho kar let gayee. didi paas se hath gayee.

kramashah............
 
दीदी ने मुझे चुदवाया--2

गतान्क से आगे.......................

मुकेश जी वापस मेरे पास आकर बैठ गये. मेरे होंठो के ऊपर से

बिना उन्हे च्छुए दो तीन बार अपने होठ घूमकर मेरे कानो की ओर

सरक गये. उनकी गर्म साँसे अब मेरे कानो पर पड़ रही थी. मैं अब

उत्तेजित होने लगी थी. कसम के कारण कुच्छ भी नही कर पा रही थी.

बस अपने तकिये को मुत्ठियों से मसल रही थी. अब उनके होठ गले से

होकर नीचे उतरने लगे. पहले उन्हों ने मुझे पेट के बल सुला दिया.

फिर मेरे बदन पर से चादर हटा कर अपने होंठ मेरे गर्देन से होते

हुए धीरे धीरे नीचे लाने लगे. रीढ़ की हड्ड़िक़े उपर ऊपर से

लेकर मेरे कमर तक अपने होंठ फिराने लगे. कई बार तो मैं सिहरन

से उच्छल पड़ती थी. मैने अपना चेहरा तकिये मे दबा रखा था. और

दाँतों से तकिये को काट रही थी. उनके होठ पूरी पीठ पर फिरने के

बाद उन्हों ने मुझे सीधा किया. अब मैने अपने बदन को च्चिपाने की

कोई कोशिश नही की. मैं निर्लज्ज होकर अपनी दीदी की मौजूदगी मे ही

उनके हज़्बेंड के सामने नग्न लेटी हुई थी. जीजा जी के होंठ मेरे गले

से होते हुए मेरी चूचियो के पास आकर ठहरे. पहले उनके होठों ने

मेरी चूचियो की परिक्रमा की फिर दोनो चूचियो के बीच की घाटी

की सैर करने लगे. धीर धीरे उनके होंठ मेरे एक चूची पर चढ़

कर मेरे निपल के पास पहुँच गये. मेरे निपल्स उनके आगमन मे

खड़े होकर एकदम सख़्त हो गये थे. मुकेश जी अपने होठ मेरे निपल

के चारों ओर फिराने लगे. हल्के हल्के से निपल के ऊपर भी फिराने

लगे. मैं उत्तेजना से छटपटा रही थी. मुँह से अक्सर "आआहह

ऊऊओह" जैसी आवाज़ें निकालने लगी मेरे पैर भी सिकुड़ने और खुलने

लगे थे. मेरा सिर तकिये पर इधर उधर झटके ले रहा था. जी कर

रहा था जीजा जी मेरे स्तनो को मसल मसल कर लाल कर दें. दोनो

निपल्स को दन्तो से काट काट कर लहुलुहन कर दें मगर मैं किसी

तरह अपने ऊपर कंट्रोल कर रही थी. उन्हों ने अपने होंठ खोले और

उसे निपल के चारों ओर लगा कर गोल गोल फिराने लगे. मगर निपल

पर बिल्कुल भी होंठ नही लगा रहे थे. मैं कतर आँखों से दीदी की

ओर देखी. वो चुप चाप खड़ी हम दोनो की हरकतें देख रही थी.

काफ़ी देर तक मेरे दोनो निपल्स के ऊपर अपने होंठ फिरने के बाद

उनके होंठ मेरी नाभि की ओर बढ़ चले. नाभि के ऊपर काफ़ी देर तक

होंठ फिराने के बाद बाकी पूरे पेट को चूमा. फिर नीचे की ओर सरक

कर बिना मेरी योनि की तरफ बढ़े मेरे पैरों के पास आ गये. मेरे एक

पैर को उठाकर उस पर अपने होंठ फिराने लगे. मुझ से अब रहा नही

जा रहा था. उसके होंठ पंजों से सरकते हुए जांघों के अन्द्रूनि

हिस्सों तक सफ़र करके वापस दूसरे पैर की तरफ लौट गये. मेरी

योनि से रस चू रहा था. पूरी योनि गीली हो रही थी. अब दूसरे

पैर से आगे बढ़ते हुए उनके होंठ मेरे जाँघो से होते हुए मेरी योनि

पर उगे बालों पर फिरने लगे. पहले उन्हों ने मेरी योनि के ऊपर सामने

की तरफ उगे बालों पर काफ़ी देर तक होंठ फिराए. फिर उनके होंठ

नीचे की ओर उतरने लगे. मैने अपने पैरों को जितना हो सकता था

उतना फैला दिया जिससे उन्हे किसी तरह की कोई बाधा महसूस ना हो. जब

उनके होंठ चींटी की गति से चलते हुए मेरी योनि के मुँह पर आए

तो मैं उबाल पड़ी.

"ऊऊऊहह म्‍म्म्ममममाआआअ" करते हुए मैने अपने हाथों से उनके सिर

को मेरी योनि पर दबा दिया. मैं अपनी कसम खुद ही तोड़ चुकी थी. अब

मुझे कोई परवाह नही थी दुनिया की अब तो सिर्फ़ एक ही ख्वाहिश थी कि

जीजा जी मेरे बदन को बुरी तरह नोच डालें. मेरी योनि मे अपना लिंग

डाल कर मेरी खाज मिटा दें. मेरे मुँह से मेरे मन की भावना फुट

पड़ी.

"ऊऊओ जीएजजीीीइ अब और मत सताओ मैईईइ हाआअर गइई.

प्लीईसए मुझे मसल डालो. प्लीईएआसए"

उन्हे मेरी ओर से रज़ामंदी मिल चुकी थी. वो अपनी जीभ मेरी योनि मे

प्रवेश करा दिए. मेरे बदन मे एक बिजली सी दौड़ गयी और मैने

अपनी योनि ऊपर की ओर उठा दी. मेरा डिसचार्ज हो गया . मगर गर्मी

बिल्कुल भी कम नही हुई. मैने हाथ बढ़ाकर पॅंट के ऊपर से उनके

लिंग को भींच दिया. मैने पाया कि उनका लिंग एक दम तन के खड़ा हुआ

था. उन्हों ने मेरी हालत समझ कर अपने चेहरे को मेरी योनि से उठा

कर अपने कपड़े खोल दिए. वो भी बिल्कुल नग्न हो गये. फिर मेरी टाँगों

को अपने हाथो से पकड़ कर फैला दिया और मेरी योनि के मुहाने पर

अपना लिंग रख कर फिराने लगे. मैं अपनी योनि को उनके लिंग की तरफ

उठा रही थी जिससे कि वो मेरे अंदर घुस जाए. मगर वो थे कि मुझे

परेशान कर रहे थे.

"ह्म्‍म्म रजनी रानी बोलो क्या चाहिए." उन्हों ने मुस्कुराते हुए पूचछा.

"ऊऊओ क्यूँ सताते हो. प्लीज़ डाल दो इसे अंदर."

"नही पहले बताओ क्या चाहिए तुम्हे."

"आपका……..आपका लिंग……आपका लिंग"

"क्यों? मेरा लिंग क्यों चाहिए तुम्हे?

"मुझे चोद दो प्लीज़ अपने लिंग से मुझे चोदो खूब चोदो" मैं पूरी

तरह बावली हो गयी थी.

"उन्हु मैं नही देने वाला तुम्हे. तुम्हे अगर इसकी भूख लग रही है

तो खुद ही डाल लो इसे अपने अंदर."

मैं अब रुक नही सकी. मैने एक हाथ की चार उंगलियों से अपनी योनि के

द्वार को खोला औड दूसरे हाथ से उनके लिंग को छेद पर सेट करके अपने

पैरों को उनकी कमर पर लप्पेट दिया और पूरे ज़ोर से अपनी कमर को

उचकाया. उनका लिंग मेरी योनि को छीलता हुआ काफ़ी अंदर तक चला

गया . मैं दर्द से कराह उठी "उईईईईईई माआअ दीईदीईए आआआहह"

दीदी ने मेरे बालो पर हाथ फेरते हुए कहा "बस रजनी थोड़ा सा और

सब्र कर लो बस थोड़ा दर्द और होगा. सुनिए रजनी का ये पहला मौका

है थोड़ा धीरे धीरे करना बेचारी को दर्द ना हो"

अब मुकेश ने मुझे परेशान करना छ्चोड़ कर अपने लिंग को कुच्छ बाहर

निकाला और उसे वापस एक धक्के से अंदर कर दिया. उनका लिंग मेरी

झिल्ली को फाड़ते हुए अंदर प्रवेस कर गया.

मैं "आआआआआअहह हह" कर उठी. उनका लिंग पूरा मेरी योनि मे

फँस चुक्का था. जैसे ही उन्हों ने वापस निकाला तो उसके साथ कुच्छ

तरल प्रदार्थ भी बाहर निकल गया . अब पता नही वो रस था याँ मेरा

खून. मेरी योनि मे लग रहा था मानो आग लगी हुई है. इतनी बुरी

तरह जल रहा था मानो किसी ने उसे चीर के रख दिया हो.

धीरे धीरे मेरा दर्द कम होने लगा और उसके जगह उत्तेजना ने लेली.

वो मुझे अब ज़ोर ज़ोर से चोदने लगे. मैं भी अपनी कमर उच्छाल उच्छाल

कर उसके लिंग को अपनी योनि मे ले रही थी. काफ़ी देर तक इसी तरह

चोदने के बाद उन्हों ने बिस्तर पर मुझे चौपाया बना कर पीछे से

अपने लिंग को वापस मेरी योनि मे डाल दिया. मैं उनसे चुदती हुए दो

बार पानी छ्चोड़ चुकी थी. काफ़ी देर तक इसी तरह करने के बाद मुझे

महसूस हुआ कि उनका लिंग फूल रहा है. उन्हों ने एक जोरदार धक्का

मारा तो मैं अपने को सम्हाल नही पाई और बिस्तर पर मूह के बल गिर

पड़ी वो भी मेरे ऊपर गिर पड़े और उनके लंड से एक तेज धार निकल

कर मेरी योनि मे समाने लगी. हम दोनो यूँ ही पड़े पड़े हाँफ रहे

थे. काफ़ी देर तक यूँ ही पड़े रहने के बाद वो उठने लगे

"बस…." मैने उन्हे खींचा "इतनी जल्दी हार मान गये. अभी तो मैं

आपके बालों को चूमूँगी"

कहकर मैने उनके हाथ को पकड़ कर अपनी ओर खींचा. वो मेरे नंगे

बदन पर गिर पड़े. मैने देखा दीदी जा चुकी थी. मैने उन्हे बिस्तर

पर दबा कर लिटा दिया

मैं उठकर उनकी जांघों पर बैठ गयी. मैने देखा जहाँ मैं लेटी

थी वहाँ चादर खून से लाल हो रहा था. मैने उनके निपल्स पर

अपनी जीभ फिराने के बाद उनके निपल्स को दाँतों से काटा और उनके

होंठों पर अपने होंठ रह दिए. मैने अपनी जीभ उनके मुँह मे घुसा

दी और उनके मुँह मे उसकी जीभ और दाँतों पर फिराने लगी. काफ़ी देर

तक मैने उनके मुँह का रस पिया फिर उठ कर उनके ढीले पड़े लंड को

देखा. पहले उस लिंग को एक किस किया फिर हाथ से सहलाते हुए उसे

देखने लगी. उनकी लिंग पर अभी भी हमारा रस और कुच्छ कतरे खून

के लगे थे. मैने तकिये के पास रखी अपनी ब्रा उठाकर उनके लिंग को

पोंच्छा. फिर अपनी जीभ निकाल कर उनके लिंग को ऊपर से नीचे तक

चटा. उनके बॉल्स पर भी अपनी जीभ फिराई. उनका लिंग वापस हरकत

मे आने लगा था. फिर मैने उनके लिंग को अपने मुँह मे समा लिया और

उनके लिंग को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी. कुच्छ ही देर मे उनका लिंग पहले

की तरह खड़ा हो गया. अब मैने उठ कर उनके कमर के दोनो ओर घुटनो को

रख कर अपनी चूत की फांकों को अपने हाथों से फैलाया और उनके लिंग

को अपनी योनि पर सटा कर धीरे धीरे उनके लिंग पर बैठ गयी.

मुँह से एक आआहह निकली और उनका लिंग पहली चुदाई से दुख रही

मेरी योनि की दीवारों को रगड़ता हुआ अंदर घुस गया. फिर मैं उनके

लिंग पर बैठक लगाने लगी वो मेरी चूचियो को मसल मसल का लाल

कर रहे थे. करीब पंद्रह मिनूट तक इसी तरह उन्हे चोदने के बाद

मैं उनके सीने पर गिर पड़ी और मेरी योनि मे रस के फव्वारे छूट

गये.

फिर उन्हों ने मुझे लिटा कर मेरी कमर के नीच तकिया लगा कर मेरी

योनि को ऊपर उठाया और मेरी टाँगों की अपने कंधे पर रख कर मेरी

योनि मे अपना लिंग घुसाने लगे. मैं उनके लिंग को अपनी चूत को चीर

कर एक एक इंच अंदर जाते हुए देख रही थी, अपने लिंग को पूरी

तरह अंदर करके वो धक्के मारने लगे. मेरे मुँह से भी "औ ऊहह

उउईई" जैसी आवाज़ें निकल रही थी. मुझे अब मेरी योनि और पेट मे

दर्द होने लगा था. करीब बीस मिनट तक मुझे चोदने के बाद उन्हों

ने अपना माल मेरी योनि मे डाल दिया. उनके साथ साथ मेरा भी वीर्य

निकल गया. हम दोनो बिस्तर पर लेटे लेटे हाँफ रहे थे. दीदी ने आकर

मुझे सहारा देकर उठाया. मेरे पैर बोझ नही सह पा रहे थे.

बाथरूम तक जाते जाते कई बार मेरे पैर लड़खड़ा गये. मुझे नहला

धुला कर बिस्तर के हवाले कर दिया. कुच्छ देर रेस्ट कर के मैं तरो

ताज़ा हो गयी.

उस दिन और अगले दिन हम ने खूब चुदाई की. मेरा तो बस मन ही नही

भर रहा था.

अगले दिन शाम को मम्मी पापा लौट आए. उन्हों ने आकर सूचना दी कि

मेरी शादी पक्की हो गयी है. मैं ये सुन कर मुस्कुरा दी. शादी तो

मेरी अब पक्की हुई लेकिन सुहागरात तो पहले ही मन चुकी थी.

समाप्त

Didi ne mujhe chudavaya--2

gataank se aage.......................

Mukesh ji wapas mere pas akar baith gaye. Mere hontho ke oopar se

bina unhe chhuye do teen baar apne hoth ghumakar mere kano ki or

sarak gaye. Unki garm sanse ab mere kano par pad rahi thi. Mai ab

uttejit hone lagi thi. Kasam ke karan kuchh bhi nahi kar pa rahi thi.

Bus apne takiye ko mutthiyon se masal rahi thi. Ab unke hoth gale se

hokar neeche utarne lage. Pahle unhon ne mujhe pet ke bal sula diya.

Fir mere badan par se chadar hatha kar apne honth mere garden se hote

huye dheere dheere neeche lane lage. Reedh ki haddike upar oopar se

lekar mere kamar tak apne honth firane lage. Kai baar to mai sihran

se uchhal padti thi. Maine apna chehra takiye me daba rakha tha. Aur

danton se takiye ko kat rahi thi. Unke hoth poore peeth par firane ke

baad unhon ne mujhe seedha kiya. Ab maine apne badan ko chhipane ki

koi koshish nahi ki. Mai nirlajj hokar apni didi ki maujoodgi me hi

unke husband ke samne nagn leti hui thi. Jeeja ji ke honth mere gale

se hote huye meri chhatiyon ke paas akar thahre. Pahle unke hothon ne

meri chhatiyon ki parikrama ki fir dono chhatiyon ke beech ki ghati

ki sair karne lage. Dheer dheere unke honth mere ek chhati par chadh

kar mere nipple ke paas pahunch gaye. Mere nipples unke agman me

khade hokar ekdum sakht ho gaye the. Mukesh ji apne hoth mere nipple

ke charon or firane lage. Halke halke se nipple ke oopar bhi firane

lage. Mai uttejna se chatpata rahi thi. Munh se aksar "aaaahhhh

ooooohhhh" jaisi awajen nikalne lagi mere pair bhi sikudne aur khulne

lage the. Mera sir takiye par idhar udhar jahtke le raha tha. Jee kar

raha tha jeeja ji mere stano ko masal masal kar laal kar den. Dono

nipples ko danto se kat kat kar lahuluhan kar den magar mai kisi

tarah apne oopar control kar rahi thi. Unhon ne apne honth khole aur

use nipple ke charon or laga kar gol gol firane lage. Magar nipple

par bilkul bhi honth nahi laga rahe the. Mai katar ankhon se didi ki

or dekhi. Wo chup chaap khadi hum dono ki harkaten dekh rahi thi.

Kafi der tak mere dono nipples ke oopar apne honth firane ke baad

unke honth meri nabhi ki or badh chale. Nabhi ke oopar kafi der tak

honth firane ke baad baki poore pet ko chooma. Fir neeche ki or sarak

kar bina meri yoni ki taraf badhe mere pairon ke paas a gaye. Mere ek

pair ko uthakar us par apne honth firane lage. Mujh se ab raha nahi

jar aha tha. Uske honth panjon se sarakte huye janghon ke androoni

hisson tak safar karke wapas doosre pair ki taraf laut gaye. Meri

yoni se ras choo raha tha. Poori yoni geeli ho rahi thi. Ab doosre

pair se age badhte huye unke honth mere jangho se hote huye meri yoni

par uge balon par firne lage. Pahle unhon ne meri yoni ke oopar samne

ki taraf uge balon par kafi der atk honth firaya. Fir unke honth

neeche ki or utarne lage. Maine apne pairon ko jitan ho sakta tha

utna faila diya jisse unhe kisi tarah ki koi badha mahsoos na ho. Jab

unke honth chieenti ki gati se chalet huye meri yoni ke munh par aye

to mai ubal padi.

"oooooohhhhh mmmmmmmaaaaaaa" karte huye maine apne hathon se unke sir

ko meri yoni par daba diya. Mai apni kasam khud hi tod chuki thi. Ab

mujhe koi parwah nahi thi duniya ki ab to sirf ek hi khwahish thi ki

Jeeja ji mere badan ko buri tarah noch dalen. Meri yoni me apna ling

daal kar meri khaaj mita den. Mere munh se mere man ki bhawna foot

padi.

"ooooohhh jeeejajiiii ab aur mat satao maiiii haaaaar gayeeee.

Pleeeeeese mujhe masal dalo. Pleeeeease"

Unhe meri or se rajamandi mil chuki thi. Wo apni jeebh meri yoni me

pravesh kara diye. Mere badan me ek bijli si daud gayee aur maine

apni yoni oopar ki or utha di. Mera discharge ho gaya . Magara g

bilkul bhi kum nahi hui. Maine hath badhakar pant ke oopar se unki

ling ko bheench diya. Maine paya ki unka ling ek dum tan ke khada hua

tha. Unhon ne meri halat samajh kar apne chehre ko meri yoni se utha

kar apne kapde khol diy. Wo bhi bilkul nagn ho gaye. Fir meri tangon

ko apne hatho se pakad kar faila diya aur meri yoni ke muhane par

apna ling rakh kar firane lage. Mai apni yoni ko unke ling ki taraf

utha rahi thi jisse ki wo mere andar ghus jaye. Magar wo the ki mujhe

pareshan kar rahe the.

"hmmm Rajni rani bolo kya chahiye." Unhon ne muskurate huye poochha.

"ooooohhh kyun satate ho. Pleeesss dal do ise andar."

"nahi pahle batao kya chahiye tumhe."

"apka……..apka ling……apka ling"

"kyon? Mera ling kyon chahiya tumhe?

"mujhe chod do please apne ling se mujhe chodo khoob chodo" mai poori

tarah bawli ho gayee thi.

"unhu mai nahi dene wala tumhe. Tumhe agar iski bhookh lag rahi hai

to khud hi daal lo ise apne andar."

Mai ab ruk nahi saki. Maine ek hath ki char ungliyon se apni yoni ked

war ko khola aud doosre hath se unke ling ko chhed par set karke apne

pairon ko unki kamar par lappet diya aur poore jor se apni kamar ko

uchkaya. Unka ling meri yoni ko cheelta hua kafi andar tak chala

gaya . Mai dard se karah uthi "uiiiiiiii maaaaa deeeedeeeee aaaaaahhh"

Didi ne meri balo par hath ferte huye kaha "bus rajni thoda sa aur

sabr kar lo bus thoda dard aur hoga. Suniye rajni ka ye pahla mauka

hai thoda dheere dheere karma bechari ko dard na ho"

Ab Mukesh ne mujhe pareshan karma chhod kar apne ling ko kuchh bahar

nikala aur use wapas ek dhakke se andar kar diya. Unka ling meri

jhilli ko fadte huye andar praves kar gayee.

mai "aaaaaaaaaaahhhhhhh hhhhh" kar uthi. Unka ling poora meri yoni me

fans chukka tha. Jaise hi unhon ne wapas nikala to uske sath kuchh

taral pradarth bhi bahar nikal gaya . Ab pata nahi wo ras tha yam era

khoon. Meri yoni me lag raha tha mano aag lagi hui hai. Itni buri

tarah jal raha tha mano kisi ne use cheer ke rakh diya ho.

Dheere dheere mera dard kum hone laga aur uske jagah uttejna ne leli.

Wo mujhe ab jor jor se chodne lage. Mai bhi apni kamar uchhal uchhal

kar uske ling ko apni yoni me le rahi thi. Kafi der tak isi tarah

chodne ke baad unhon ne bistar par mujhe chaupaya bana kar peechhe se

apne ling ko wapas meri yoni me daal diya. Mai unse chudte huye do

bar pani chhod chuki thi. Kafi der tak isi tarah karne ke baad mujhe

mahsoos hua ki unka ling fool raha hai. Unhon ne ek jordar dhakka

mara to mai apne ko samhal nahi payee aur bistar par muh ke bal gir

padi wo bhi mere oopar gir pade aur unke lund se ek tej dhaar nikal

kar meri yoni me samane lagi. Hum dono yun hi pade pade hanf rahe

the. Kafi der tak yun hi pade rahne ke baad wo uthne lage

"bus…." Maine unhe kheencha "itni jaldi haar maan gaye. Abhi to mai

apke balon ko choomoongi"

kahkar maine unke hath ko pakad kar apni or kheencha. Wo mere nange

badan par gir pade. Maine dekha diidi ja chuki thi. Maine unhe bistar

par daba kar lita diya

Mai uthkar unki janghon par baith gayee. Maine dekha jahan mai leti

thi wahan chadar khoon se laal ho raha tha. Maine unke nipples par

apni jeebh firane ke baad unke nipples ko danton se kata aur unke

honthon par apne honth rah diye. Maine apni jeebh unke munh me ghusa

di aur unke munh me uski jeebh auu danton par firane lagi. Kafi der

tak maine unke munh ka ras piya fir uth kar unke dheele pade lund ko

dekha. Pahle us ling ko ek kiss kiya fir hath se sahlat huye use

dekhne lagi. Unki ling par abhi bhi humara ras aur kuchh katre khoon

ke lage the. Maine takiye ke paas rakhi apni bra uthakar unke ling ko

ponchha. Fir apni jeebh nikal kar unke ling ko oopar se neeche tak

chata. Unke balls par bhi apni jeebh firayee. Unka ling wapas harkat

me ane laga tha. Fir maine unke ling ko apne munh me sama liya aur

unke ling ko jor jor se choosne lagi. Kuchh hi der me unka ling pahle

ki tarkhada ho gaya. Ab mai uth kar unke kamar ke dono or ghutno ko

rakh kar apni chut ki fankon ko apne hathon se failaya aur unke ling

ko apni yoni par sata kar dheere dheere unke ling par baith gayee.

Munh se ek aaaahhh nikali aur unka ling pahli chudai se dukh rahe

meri yoni ki deewaron ko ragadta hua andar ghus gaya. Fir mai unke

ling par baithak lagane lagi wo meri chhatiyon ko masal masal ka laa

kar rahe the. Kareeb pandrah minut tak isi tarah unhe chodne ke baad

mai unke seene par gir padi aur meri yoni me ras ke favvare chhut

gaye.

Fir unhon ne mujhe lita kar meri kamar ke neech takiya laga kar meri

yoni ko oopar uthaya aur meri tangon ki apne kandhe par rakh kar meri

yoni me apna ling ghusane lage. Mai unke ling ko apni chut ko cheer

kar ek ek inch andar jate huye dekh rahi thi, apne ling ko poori

tarah andar karke wo dhakke marne lage. Mere munh se bhi "au oohh

uuiiiii" jaisi awajen nikal rahi thi. Mujhe ab meri yoni aur pet me

dard hone laga tha. Kareeb bees minut tak mujhe chodne ke baad unhon

ne apna maal meri yoni me daal diya. Unke saath saath mera bhi veerya

nikal gaya. Hum dono bistar par lete lete hanf rahe the. Didi ne akar

mujhe sahar dekar uthaya. Mere pair bojh nahi sah pa rahe the.

Bathroom tak jate jate kai baar mere pai ladkhada gaye. Mujhe nahla

dhula kar bistar ke hawale kar diya. Kuchh der rest kar ke mai taro

taja ho gayee.

Us din aur agle din humne khoob chudai ki. Mera to bus man hi nahi

bhar raha tha.

Agle din shaam ko mummy papa laut aye. Unhon ne akar soochna di ki

meri shadi pakki ho gayi haoi. Mai ye sun kar muskura di. Shadi to

meri ab pakki hui lekin suhagraat to pahle hi man chuki thi.

samaapt
 
लॉकडाउन में दीदी फिर से चुद गई

मेरी गर्लफ्रेंड है जिसका नाम आँचल है। वो बहुत ही सेक्सी लड़की है। उसकी हाइट बहुत लंबी है और कमर एकदम पतली। उस पर काफी लड़के फ़िदा थे लेकिन वो मेरी ही किस्मत में लिखी थी।

गर्लफ्रेंड की चुदाई करने में मुझे बहुत मजा आता था. आंचल की मुझे एक बात अच्छी लगती थी कि वो मेरी बहन युविका की तरह ज्यादा खुले विचारों वाली नहीं थी. मगर उसकी एक बात मुझे बुरी भी लगती थी कि उसे चुदाई करवाना ज्यादा पसंद नहीं था.

जब भी मैं उसकी चूत चोदने की बात करता या सेक्स करने के लिए रिक्वेस्ट करता तो वो मुझे हमेशा ये सब करने के लिए मना कर देती थी। उसकी इन्हीं हरकतों के कारण मैं उसे इन 2 सालों में सिर्फ 8-10 बार ही चोद पाया था। इतना तो मैं अपनी दीदी को एक दिन में ही चोद दिया करता था।

मैं चाहता तो आंचल को छोड़ सकता था मगर जो मज़ा उसे चोदने में आता है वो किसी और लड़की को चोदने में नहीं है। अगर आप मेरी गर्लफ्रेंड के साथ चुदाई की एक अलग कहानी चाहते हैं तो मुझे मेल या कमेंट जरूर करें। मैं आपको बताऊंगा कि मेरी गर्लफ्रेंड की चुदाई मैं कैसे करता हूं और मेरा क्या अनुभव है उसके साथ।

दीदी और मेरी चुदाई की इस कहानी को समझने के लिए आप मेरी पुरानी सिस्टर ब्रदर इन्सेस्ट कहानियां जरूर पढ़ें।

अब आज की कहानी पर आते हैं।

मेरी दीदी की एक सहेली थी जिसका नाम अरुणा था। किसी कारणवश उसकी मृत्यु हो गयी। उनका घर हमारे शहर में ही था।

ये बात जब युविका दीदी को पता चली तो वो बहुत दुखी हुई और वो अपनी सहेली को अंतिम विदाई देने के लिए हमारे घर आ गयी।

उस दिन मैं घर में नहीं था और न ही मुझे दीदी के आने की खबर थी।

मैं रात को 9 बजे घर आया। मैंने घर की घण्टी बजायी तो दीदी ने दरवाजा खोला। मैं दीदी को देख कर भौंचक्का रह गया।

मैंने दीदी को 2 साल से नहीं देखा था। मुझे यकीन करने में थोड़ा समय लग गया कि क्या ये दीदी ही है?

मेरे मुंह से कोई शब्द नहीं निकल रहा था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या बोलूं?

फिर दीदी ने ही पहल की और कहा- अंदर आएगा या यहीं खड़ा रहेगा?

उसके टोकने पर मैं अंदर आ गया और दीदी ने दरवाजा बंद कर दिया।

दीदी- कैसा है?

मैंने हिचकिचाते हुआ कहा- ठीक हूँ।

दीदी- इतना डर क्यूँ रहा है, मैं क्या चुड़ैल दिख रही हूँ?

मैंने इस पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और दीदी को जी भर कर देखता रहा।

इतने में मम्मी ने कहा- आ जा हाथ मुंह धो ले और खाना खा ले।

उसके बाद मैं गया और फ्रेश होकर आया. फिर सब लोग खाना खाने बैठ गए। इतने में कमरे के अंदर से दीदी के बेटे की रोने की आवाज़ आने लगी। तब मुझे याद आया कि दीदी का बच्चा भी हो गया है।

दीदी बच्चे के पास चली गयी और हमने खाना खाया और मैं सीधा अपने कमरे में चला गया। वहाँ मैं सोचने लगा कि वक्त कितनी तेजी से गुजर गया. पहले भाई बहन के बीच इतनी लड़ाई होती थी और फिर सेक्स भी होने लग गया और दीदी की शादी हो गयी और अब देखो, अब दीदी का बच्चा भी हो गया है।

ऐसा सोचते सोचते मैं सो गया। सुबह मैं थोड़ा लेट उठा। मुझे दीदी से बात करने में पता नहीं क्यूँ थोड़ा अजीब लग रहा था। मगर मैंने अपने आप को संभाला और शांत होने की कोशिश की। अब मैंने दीदी की नज़रों में नज़रें मिलाना शुरू कर दिया और कुछ बातें करने लगा।

मैंने दीदी से कहा- तुम तो पूरी बदल गयी हो। लग ही नहीं रहा कि तुम वही पुरानी युविका हो।

दीदी- हाँ, बदल तो गयी हूँ, पर तुम अभी भी वैसे ही हो।

इस तरह हमने बहुत सी बातें कीं और सब कुछ नार्मल हो गया। तभी मुझे पता चला कि पापा-मम्मी मेरी नानी के घर जा रहे हैं जहाँ भागवत चल रहा है। मुझे इसलिए नहीं बताया क्यूंकि मैं ऐसे कार्यक्रमों में नहीं जाता था।

फिर मुझे पता चला कि दीदी भी आज ही चली जायेगी और अपनी सहेलियों से मिलेगी और वहीं से एक हफ्ते बाद वो भी वापस चली जायेगी। ये सुनकर पता नहीं क्यों मुझे बहुत दुःख हुआ।

2 घण्टे बाद सब लोग चले गए और मैं भी बाहर चला गया। शाम को मैं जब घर आया तो सोते हुए मुझे दीदी के ख्याल आने लगे। मेरे दिल में दीदी के लिए फिर से इच्छायें जागने लगीं।

तब मैंने ध्यान दिया कि दीदी का शरीर अब थोड़ा मोटा हो गया है मगर साथ ही अब उनके स्तन और चूतड़ बहुत बड़े बड़े हो गए हैं। लगता है कि जीजा जी ने दीदी को बहुत चोदा होगा। दीदी जब चलती है तो उसके चूतड़ों को देख कर बहुत अच्छी फीलिंग आती है।

दीदी का रंग भी पहले से बहुत ज्यादा निखर गया था और एक लाली सी आ गयी थी उसके बदन पर। ये सोच सोच कर मैं पागल होने लगा और मेरा लण्ड खड़ा हो गया। उत्तेजित होकर मैंने जल्दी से अपनी गर्लफ्रेंड की नंगी फ़ोटो देख कर मुठ मारी और सो गया।

अगले दिन मैं अपनी गर्लफ्रेंड आँचल को बाहर घुमाने ले गया और सारा दिन उसे घुमाया।

बाद में मैंने उसे चुदाई के लिए पूछा तो उसने कहा कि अभी उसके पीरियड्स हैं तो वो चुदाई के लिए तैयार नहीं है।

तो मैंने उसे ज्यादा फोर्स भी नहीं किया और न ही ज्यादा कुछ बोला. फिर हम घूम फिर कर वापस घर आ गये.

ये उन दिनों की बात है जब शुरू शुरू में कोरोना वायरस के चलते दुनिया में चारों और उथल पुथल मचने लगी थी। फिर भारत में भी मामले आने शुरू हो गये.

पहले तो मैं आसानी से बाहर घूम रहा था मगर बाद में घूमने पर प्रतिबन्ध लगने लगा। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू हो गया। इसके चलते दीदी किसी जगह अपने बच्चे के साथ फंस गई।

दीदी अपनी सहेलियों के साथ होटल में ही रही किंतु बाद में होटल भी बंद हो गया. होटल बंद हो जाने के बाद दीदी किसी तरह से हमारे घर तक पहुंच पाई. मगर मम्मी पापा भी बाहर गये हुए थे तो वो भी नहीं लौट पाये.

अब घर में दीदी और मैं ही थे। मेरे मन में दीदी को चोदने के बहुत ख्याल आया रहे थे मगर किसी तरह मैंने इन पर काबू रखा। दीदी ने बताया कि उसका पति 2 दिन बाद उसे लेने आ जायेगा और फिर वो चली जायेगी।

ये सुन कर मेरे अंदर से आवाज़ आने लगी कि मैं दीदी को इन 2 दिनों में चोद सकता हूँ। मगर मेरे सामने मुश्किल ये थी कि मुझे दीदी को सेक्स के बारे में पूछने में डर लग रहा था।

उस दिन मैंने दीदी के बदन को बहुत गौर से देखा। तभी दीदी का बेटा रोने लगा. वो उसे चुप करा रही थी और मेरे सामने ही बैठी हुई थी. वो चुप नहीं हो रहा था इसलिए दीदी ने अपना कमीज उठा कर अपनी चूची को बाहर निकाल लिया और बच्चे के मुंह पर अपना निप्पल लगा दिया.

वो मेरे सामने ही उसको दूध पिलाने लगी. दीदी के स्तन देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं गर्म होने लगा. मेरा मन दीदी की चुदाई के लिए मचलने लगा. मैंने निश्चय कर लिया कि आज दीदी से चुदाई के लिए पूछ कर ही रहूँगा।

दीदी बच्चे को दूध पिला ही रही थी कि मैंने दीदी से बातें करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में दीदी का बेटा सो गया और दीदी उसे लिटा कर आ गयी। हमने बहुत बातें की और अब हम दोनों इतने घुल मिल गए थे कि सब पहले की तरह हो गया।

मैंने मौका देखते ही दीदी से कहा- दीदी, मुझे पुराने दिन बहुत याद आते हैं।

ये सुन कर दीदी थोड़ी देर चुप हो गयी और थोड़ी देर में एक लंबी सांस लेकर बोली- वैसे आजकल नीचे वो स्कूल बस नहीं दिखती और न ही दास अंकल?

उसके सवाल पर मैं बोला- हां, आजकल बस स्कूल में ही खड़ी होती है और ड्राइवर अंकल भी वहीं रहते हैं और दास अंकल भी रिटायर हो गए हैं, उनकी जगह उनका बेटा होता है।

दीदी ने हंसते हुए कहा- अच्छा तो मेरी चुदाई की ये सज़ा मिली उन्हें?

इस पर हम हंसने लगे।

दीदी ने फिर कहा- तेरी वो गर्लफ्रेंड अभी भी है या ब्रेकअप हो गया?

मैं- नहीं, अभी ब्रेकअप नहीं हुआ है, वो है अभी। न मैं उसको छोड़ सकता हूँ और न वो मुझे छोड़ सकती है।

दीदी- तो उसके होते हुए तू मुझे फिर से पटाने की कोशिश क्यूँ कर रहा है?

इस पर मैं बोला- दीदी, उसे चुदाई और सेक्स ये सब ज्यादा पसंद नहीं है। इसलिए वो मुझे ज्यादा करने नहीं देती. रही बात आपको पटाने की तो 3 साल हो गए हैं आपके साथ सेक्स किये। उसके बाद इतना मजा कभी आया ही नहीं, तो सोचा 2 साल बाद मिले हैं और परसों तुम चली जाओगी तो एक बार पूछ लेता हूँ।

दीदी थोड़ी देर चुप रही और कुछ देर बाद उसने कहा- ठीक है। आखिर तुम मेरे भाई हो और उस समय तुमने मेरी भी प्यास बुझाई थी, तो ठीक है मैं तैयार हूँ। आज रात और कल पूरा दिन तुम मुझे जितना चोदना चाहते हो चोद लेना, मगर इसके बाद इसके लिए कभी मत पूछना।

ये सुन कर मैं बहुत खुश हो गया।

मैं- अरे दीदी! तुम बहुत अच्छी हो। मैं वादा करता हूँ कि मैं आपको इस समय में बहुत मजे दूंगा।

फिर हम दोनों हंसने लगे।

रात हो चुकी थी और उस समय बाहर जाने पर प्रतिबन्ध लग गया था।

मैं- दीदी! बाहर जाने में बहुत खतरा है लेकिन मैं आपके लिए कोई भी रिस्क लेने के लिए तैयार हूं. मैं बाहर जाकर कॉन्डोम और दवाईयां लेकर आ जाता हूं.

तभी दीदी ने मुझे रोकते हुए कहा- इसकी जरूरत नहीं है। अब मैंने ऑपरेशन करा लिया है. अब तू मुझे बिना कंडोम के भी चोदेगा तो मैं प्रग्नेंट नहीं हो सकती हूं।

ये सुनकर मैं बहुत खुश हो गया।

मैंने दीदी को अपनी ओर खींचा और उसे अपनी बांहों में लेकर जल्दी से किस करना शुरू कर दिया.

मगर दीदी ने मुझे हटा दिया और बोली- पहले खाना बना लेते हैं और उसके बाद सेक्स करेंगे.

मुझे सेक्स करने की जल्दी थी और दीदी की चूत में लंड पेलने की भी बहुत जल्दी थी. मैंने दीदी से कहा कि मुझे भूख नहीं है, अगर तुम्हें भूख लगी है तो मेरा वीर्य पी लेना, उससे तुम्हारी भी भूख कम हो जायेगी.

इतना कह कर मैं दीदी को फिर से किस करने लगा और अब दीदी भी मेरा साथ देने लगी। मुझे तो पुराने दिनों की याद आने लगी। मैं दीदी के ऊपर लेट गया था। किस करते करते हम दोनों बहुत जोश में आ गए थे।

तभी मैं दीदी के ऊपर से उठा और मैंने कहा- दीदी तुम्हारे स्तन और चूतड़ बहुत बड़े बड़े हो गए हैं। मैं उन्हें देखना चाहता हूँ।

दीदी बोली- हां तो देख ले, ऐसे बोल रहा है जैसे पहले तूने कभी मेरे चूतड़ और चूचियां देखी ही नहीं हों.

मैं बोला- देखी हैं लेकिन अब अलग ही मजा है उनको देखने का.

इतना कह कर मैंने दीदी की कमीज़ खोल दी और पाया कि अंदर दीदी ने पिंक कलर की सेक्सी सी ब्रा पहनी थी। मुझसे ज्यादा वेट नहीं हुआ और मैंने ब्रा खोल दी।

ब्रा खोलते ही दीदी के बड़े बड़े स्तन मेरे सामने आ गए। मैंने सोचा भी नहीं था कि दीदी के स्तन इतने बड़े हो गये होंगे।

मैंने दीदी से पूछा- दीदी आप तो किसी को अपने चूचे छूने तक नहीं देती थी, तो अब ये इतने बड़े कैसे हो गए?

दीदी ने कहा- ये तेरे जीजा की करामात है। उनको इनके साथ खेलना बहुत पसंद है। सुहागरात वाले दिन उन्होंने मेरे स्तनों को बहुत मरोड़ा। इतना मरोड़ा था कि इनसे खून निकलने लगा था।

ये सुनकर मैं और ज्यादा उत्तेजित हो गया और मेरा लण्ड कड़क हो गया। मैं भी दीदी के बूब्स के साथ उसी तरह से खेलना चाहता था इसलिए मैंने युविका के स्तनों को ज़ोर से दबा दिया. मेरी पकड़ कुछ ज्यादा ही टाइट थी जिससे दीदी को दर्द हो गया और दीदी ने मुझे हटा दिया।

मैंने पूछा- क्या हुआ दीदी?

दीदी बोली- तू इनके साथ नहीं खेल सकता। अभी मैं नयी नयी माँ बनी हूँ, इसलिए मेरे स्तनों में दूध है और इतनी जोर से दबाने से इनमें दर्द होता है।

तभी मैंने ध्यान दिया कि मैंने दीदी के स्तन इतनी जोर से दबा दिये थे कि उनसे दूध निकल गया था और निप्पल के आसपास का एरिया और नीचे तक उसके स्तन दूध से सन से गये थे.

मैंने धीरे से दीदी के दूध लगे चूचों पर अपनी जीभ से चाट लिया. दीदी भी थोड़ी कामुक हो गयी और मेरा लंड भी अकड़ कर दर्द करने लगा. अब शायद दोनों ही भाई बहन उन पुराने दिनों की यादों को फिर से ताज़ा करने के लिए तैयार हो गये थे.

मैंने कहा- दीदी मुझे माफ़ करना, मुझे ये पता नहीं था।

मैंने दीदी से पूछा- क्या मैं तुम्हारा दूध पी सकता हूँ दीदी?

दीदी बोली- पी ले, मगर सारा मत निचोड़ लेना, मुझे मेरे बेटे के लिए भी थोड़ा बचा कर रखना है, अगर वो रात में जाग गया तो फिर मैं दूध कहां से लाऊंगी?

मैं बोला- ठीक है दीदी, सारा नहीं पीऊंगा.

मैंने दीदी को सोफे पर फिर से लिटा दिया और दोनों स्तनों को बारी बारी से चूसने लगा। दीदी का दूध बहुत ही गर्म था और बहुत स्वादिष्ट भी। मैंने दोनों स्तनों से थोड़ा थोड़ा दूध पिया और फिर नीचे की तरफ आ गया।

फिर मैंने दीदी की सलवार के ऊपर से उनकी चूत पर अपना हाथ फेरना शुरू कर दिया और साथ ही दीदी का दूध भी पीता रहा। बीच बीच में मैं अपने हाथ की रफ़्तार तेज़ कर देता था जो कि दीदी को बहुत रोमांचित कर रहा था।

जब जब मैं ऐसा करता तो दीदी अपनी टांगें थोड़ी सी उठा देती थी और उन्हें सिकोड़ने की कोशिश करने लगती। उसके बाद मैंने दीदी की सलवार खोल दी। अंदर दीदी ने पिंक कलर की पैंटी पहनी थी जो कि मेरे हाथ फेरने से गीली हो गई थी।

मैं दीदी की चूत के दर्शन करने के लिए बेताब हो उठा था। इसलिए मैंने दीदी की पैंटी खोल दी। जैसे ही मैंने दीदी की पैंटी खोली तो देखा कि दीदी की चूत तो एक दम साफ़ थी, मगर अब उस चूत का भोसड़ा बन चुका था।

चूत देख कर मैंने कहा- दीदी, ये क्या हो गया है!

दीदी ने हंसते हुए कहा- “ये भी तेरे जीजा की ही करामात है। वो मुझे बहुत चोदते हैं। ये तो आजकल बच्चा हुआ है तब छोड़ा है नहीं तो पहले तो वो बहुत चोदते थे मुझे। मगर फिलहाल अभी ये चूत तेरी है। तू जो करना चाहता है इसके साथ, कर सकता है।

ये सुनकर मैं फिर से गर्म हो गया। मुझे ख़ुशी थी कि चलो आज दीदी को फिर से चोदने की ख्वाहिश तो पूरी होगी। मैंने जल्दी से दीदी की गीली चूत पर ज़ोर का किस किया जिससे दीदी की एक मादक सी आह्ह … निकल गयी।

तब मैं अपना सिर फिर ऊपर करने लगा मगर दीदी ने मेरे बाल पकड़ कर मुझे फिर नीचे कर दिया। मैंने भी ख़ुशी ख़ुशी दीदी की चूत में नीचे से ऊपर तक पूरे ज़ोर से अपनी जीभ को फेरा।
 
लॉकडाउन में दीदी फिर से चुद गई-2

बीच बीच में मैं दीदी की चूत के दाने को मसलता और उसे दांतों से काट देता, जिससे दीदी और ज्यादा उत्तेजित हो गयी। मैं ऐसे ही दीदी की चूत को बहुत देर तक चाटता और चूसता रहा। कुछ देर बाद दीदी झड़ गयी।

दीदी ने कहा- चूत चटाने में आज तक इतना मजा नहीं आया। तू तो बहुत बड़ा खिलाड़ी बन गया है रे!

इस पर मैं बोला- देख लो दीदी, मैंने आपकी चूत को कितना अच्छा मजा दिया है, अब मैं भी देखूंगा कि आप मेरे लौड़े को कितना मजा देते हो.

ये बोलकर पहले मैंने अपनी टीशर्ट को उतार दिया. फिर मैंने अपना पजामा भी खोल दिया. मेरा लौड़ा मेरे कच्छे को पूरा उठा कर रखे हुए था. अपने लंड को मैंने कच्छे के ऊपर से ही दीदी के सामने सहला दिया और दीदी देख कर मुस्कराने लगी.

मैंने दीदी से कहा- ये लो आपका सामान तैयार है, इसको अब आप ही संभालो. मेरा कच्छा आप ही खोलो।

मेरा लण्ड इतना कड़ा हो गया था कि अंडरवियर में वो आ ही नहीं रहा था और मुझे इससे दर्द हो रहा था।

दीदी ने जैसे ही मेरा कच्छा खोला तो मेरा 9 इंच का लण्ड स्प्रिंग की तरह ऊपर उठ कर झूलने लगा. दीदी का चेहरा मेरे लौड़े के पास था तो मेरा लंड उसकी नाक पर जोर से जाकर लगा.

हम दोनों की हँसी छूट गयी.

इस पर मैंने दीदी से कहा- देखो दीदी, ये भी कितना बेताब है तुम्हारे मुंह में जाने के लिए।

तो दीदी ने उसे पकड़ कर कहा- अब तो ये और भी बड़ा हो गया है. मगर तूने अपनी झाँटें क्यूँ नहीं काटी?

मैंने कहा- दीदी, किसके लिए काटता? आंचल चुदाई करने देती नहीं और तुम्हारा मुझे पता नहीं था कि तुम मानोगी या नहीं। मगर कोई बात नहीं, अब तुम यहां हो तो ये झांटें भी आप कल खुद ही काट देना।

ये सुन कर दीदी हंसने लगी और बोली- अच्छा, अब सोफे के ऊपर बैठ जाओ।

दीदी के कहने पर मैं सोफे के ऊपर बैठ गया. दीदी मेरी टाँगों के बीच बैठ गयी। दीदी मेरा लौड़ा पकड़ कर पहले आगे पीछे करने लगी. दूसरे हाथ से मेरे टट्टों को सहलाने लगी।

उसके बाद दीदी ने मेरा लौड़ा अपने होंठों पर घिसा और बाद में मेरे लौड़े के टोपे को मुंह में ले लिया और टोपे के छेद पर अपनी जीभ घुमाने लगी।

ये बहुत ही उत्तेजित करने वाला था। इससे मेरी भी हये.. निकल गई। दीदी कुछ देर ऐसा ही करती रही और कुछ देर बाद उसने धीरे धीरे मेरा पूरा लण्ड अपने मुंह में गले तक डाल दिया।

इससे मैं पागल हो गया और मैंने दीदी का सर पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करना शुरू कर दिया. इससे दीदी ने मेरे घुटने पकड़ लिए ताकि वो गिर न जाये। दीदी के मुंह से गूं … गूं … गर्र … गर्र … की आवाज़ आने लगी।

मैं ऐसा तब तक करता रहा जब तक कि मैं झड़ नहीं गया। जब मैं झड़ा तो मैंने दीदी के मुंह को बंद कर दिया ताकि दीदी मेरा वीर्य पी ले. दीदी ने किया भी ऐसा ही.

मेरा लंड गले में फंसा होने के कारण दीदी की सांस रुक रही थी और उसकी आँखों से आंसू आ रहे थे. किंतु ये मज़े के आँसू थे। फिर वीर्य निगलने के बाद दीदी ने लंड को बाहर निकाल दिया. फिर हम दोनों ज़ोर ज़ोर से सांस लेने लगे क्यूंकि हम बहुत थक गए थे।

कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे। फिर उसी बीच दीदी का बच्चा जाग गया तो दीदी उसके पास चली गयी और उसे दूध पिला कर सुला दिया।

इसी बीच मैं फिर से चार्ज हो गया था और अपने लौड़े को हिला कर तैयार कर रहा था।

उसके थोड़ी देर बाद दीदी बाहर आने लगी तो मैंने सोचा क्यूँ न दीदी को आज खड़े खड़े ही चोदा जाये। ये सोच कर मैं जल्दी से उठ कर दीदी के पास गया और दीदी को कहा कि वहीं रुक जाए।

मैं दीदी को पकड़ कर दीवार के पास ले गया और दीदी को कहा कि आज मैं आपको खड़े खड़े ही चोदूंगा। दीदी भी चुपचाप दीवार के पास खड़ी हो गयी।

पहले मैंने दीदी के नंगे बदन को अपने नंगे बदन में समा लिया। यकीन कीजिये दोस्तो, इस तरह से नंगे बदन से चिपकने में बड़ा मज़ा आता है। उसके बाद मैंने अपना लौड़ा पकड़ा और दीदी की चूत पर रख कर बाहर से घिसने लगा।

इससे हम दोनों बहुत उत्तेजित हो गए और मैंने एक ही झटके में पूरा लण्ड दीदी की चूत में डाल दिया। लंड घुसने से दीदी ज़ोर से चीख पड़ी मगर गनीमत रही कि बच्चा नहीं जागा वरना सारा मजा खराब हो जाता.

दीदी चिल्ला कर बोली- पागल हो गया है क्या तू? एक बार में कोई ऐसे ठोकता है क्या?

मैंने कहा- दीदी, माफ़ करना मुझसे रहा नहीं जा रहा है।

मैंने लण्ड को आगे पीछे करना शुरू किया। मुझे तो जन्नत ही नसीब हो गयी जैसे। दीदी अजीब अजीब आवाजें निकालने लगी. खड़े खड़े मैं दीदी को चोदने लगा. बहुत मजा आ रहा था.

मगर जल्दी ही मेरी कमर में दर्द होने लगा इसलिए मैंने दीदी को अपनी गोद में उठाना चाहा। इसके लिए मैंने दीदी के चूतड़ों पर हाथ रखा तो महसूस हुआ कि पहले तो दीदी के चूतड़ मेरे हाथों में आसानी से आ जाते थे लेकिन अब नहीं आ रहे हैं।

फिर मैंने जैसे तैसे दीदी को अपनी गोद में उठाया और उठा उठा कर दीदी को चोदा। ऐसे चोदने में लण्ड पूरी रफ़्तार से और पूरा का पूरा अंदर जाता है। ऐसा करने से दीदी और मैं पागल हो गए थे। दीदी ने मुझे बहुत जोर से पकड़ा था और मैं पूरा जोर लगा के दीदी को चोद रहा था।

इससे सारे कमरे में पट-पट की आवाज़ बहुत जोर से गूंज रही थी और वो आवाज़ शायद बाहर भी सुनाई दे रही थी। किंतु हमें इसकी कोई परवाह नहीं थी।

इस आवाज़ को सुनकर दीदी का बेटा जाग गया और वो रोने लगा।

दीदी ने कहा- छोड़ दे निखिल, बच्चा उठ गया है, मुझे छोड़ दे। बच्चे को चुप कराने के बाद मैं आ जाऊंगी।

मगर मैं उस समय जानवर बन गया था। मैंने कहा- साली रांड चुप कर, अभी मुझे चोदने दे। मैं झड़ने वाला हूँ।

मैं दीदी की चूत को ठोक ठोक कर चोदता रहा. दीदी भी मेरे धक्के झेलती रही और उसके थोड़ी देर बाद मैं झड़ गया. मैंने सारा माल दीदी की चूत में ही छोड़ दिया। जैसे ही हमारी चुदाई की आवाज़ बन्द हुई बच्चा भी चुप हो गया।

उसके बाद मैं वैसे ही दीदी को उठा कर सोफे तक ले गया और वैसे ही सोफे पर बैठ गया। वहाँ से अंदर देखा तो बच्चा फिर से सो गया था।

मैंने वैसे ही दीदी को अपनी गोद में बिठाये रखा और मेरा लण्ड कुछ देर तक दीदी की चूत में ही था।

दीदी मेरी गोद में ही सो गई। कुछ देर बाद मेरा लौड़ा दीदी की चूत से अपने आप निकल गया। फिर उसके थोड़ी देर बाद मैंने दीदी को अपने ऊपर से उठा कर सोफे पर सुला दिया और दीदी की पैंटी से अपना लण्ड और दीदी की चूत साफ़ की।

उस रात मैं दीदी को बहुत बार चोद सकता था मगर बच्चा बार बार जाग कर सारा खेल बिगाड़ देता था। इसलिए मैं उस रात दीदी को 3 बार ही चोद पाया।

आखिरी चुदाई के बाद हम दोनों सोने चले गए।

मैंने दीदी से पूछा- दीदी आपकी गांड भी बहुत बड़ी हो गयी है। जीजा जी गांड भी मारते हैं क्या?

दीदी ने कहा- हां, वो जब भी मेरी चूत चोदते हैं, उसके बाद गांड भी जरूर मारते हैं।

मैंने कहा- पहले तो आप गांड भी नहीं मरवाती थी, तो अब क्यूँ?

दीदी ने कहा- पहले तेरे जीजा जबरदस्ती गांड मार लेते थे और बाद में फिर मुझे भी आदत पड़ गयी।

दीदी की गांड चुदाई वाली बात सुनकर मेरे मन में भी लड्डू से फूट पड़े और मैंने दीदी से कहा कि तब तो मैं भी कल आपकी गांड मारूँगा।

दीदी ने कहा- ठीक है मार लेना।

मैंने दीदी से कहा- दीदी आप यहाँ कल के ही दिन रहोगे। तो मैं इस दिन को ब्रदर एंड सिस्टर सेक्स से रोमांचित बनाना चाहता हूँ।

दीदी ने पूछा- हाँ ठीक है, पर वो कैसे?

मैंने कहा- कल हम दोनों पूरा दिन नंगे ही रहेंगे।

दीदी भी मेरी बात मान गयी. फिर हम सोने लगे. दीदी का बच्चा रात को बार बार जाग जाता था जिससे मैं परेशान हो रहा था, इसलिए मैं रात में ही उठ कर अपने कमरे में चला गया।

सुबह मैं थोड़ी देर से उठा। मैं बाहर गया तो देखा कि दीदी पूरी नंगी है और नीचे बैठ कर टांगें फैला कर पोंछा लगा रही है। जिससे दीदी की चूत का दरवाजा खुला हुआ दिख रहा था.

दीदी की खुली चूत देख कर मेरा लंड एकदम से तनाव में आ गया. मैंने दीदी को वहीं पर फर्श पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसकी चूत में लंड देकर उसे वहीं पर चोद दिया.

उसके बाद दीदी ने पौंछा लगाया और मैं नंगी दीदी को ये सब करते हुए देखता रहा. मैं फिर से गर्म हो गया।

जैसे ही दीदी ये करके फ्री हुई मैं दीदी को अपने साथ बाथरूम में ले गया और दीदी को वहाँ फिर से चोदा।

दिन में दीदी रसोई में लन्च बना रही थी तो मैं पीछे से आ गया और दीदी की गांड बहुत मस्त लग रही थी. उसकी गांड देख कर मुझसे रहा न गया और मैं दीदी की गांड चोदने के लिए चला गया।

मैंने दीदी को पीछे से पकड़ लिया और एक हाथ से दीदी की चूत में उंगली करने लगा और दूसरे हाथ से धीरे धीरे उसके चूचों को सहलाने लगा। अपना लण्ड उसकी गांड के ऊपर रख कर हिलाने लगा। दीदी को पता चल गया कि मैं अब उसकी गांड मारने वाला हूँ।

फिर मैंने सामने से तेल उठाया और थोड़ा सा अपने लण्ड पर लगाया और थोड़ा सा दीदी की गांड के छेद पर लगाया। उसके बाद दीदी ने अपने हाथ खुद ही शेल्फ पर फैला दिए और अपनी टांगें फैला कर गांड को ऊपर उठा दिया ताकि मेरा लौड़ा आसानी से अंदर जा सके.

पहले मैंने तेल लगा कर अपनी एक उंगली दीदी की गांड में डाली और उसके बाद दूसरी। थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद मैंने लण्ड गांड पर रखा और धीरे से अंदर की तरफ ज़ोर लगाया। इससे थोड़ा सा लण्ड अंदर गया।

5-7 बार मैंने ऐसा ही किया और ऐसा करते हुए सारा लण्ड दीदी की गांड में चला गया। फिर मैंने धीरे धीरे पूरा लण्ड अंदर तक डालना और बाहर निकालना शुरू किया। कुछ देर बाद मैंने स्पीड बढ़ा दी और समय के साथ साथ मेरा जोश बढ़ता ही गया।

दीदी अपनी गांड को साइड से पकड़ कर खींचने लगी ताकि उसको दर्द कम हो। मगर मुझे इसमें मज़ा आने लगा था। मैंने ज़ोर ज़ोर से दीदी की गांड चोदना शुरू कर दिया जिससे घर में पट पट… पट पट की आवाज़ें होने लगीं और चारों तरफ दीदी की चीखें ही सुनाई देने लगीं.

इस आवाज को सुन कर दीदी का बच्चा फिर जाग गया और रोने लगा। दीदी मुझसे छोड़ने को कहने लगी पर मैंने अभी ही तो शुरू किया था और मुझसे रुका नहीं जा रहा था। दीदी खुद ही हटने लगी मगर मैंने दीदी के हाथ पकड़ लिए और दीदी को वैसे ही चोदने लगा।

दूसरी तरफ बच्चा और तेज रोने लगा था. फिर मैं दीदी को वैसे ही उठा कर बच्चे तक ले गया. बच्चा बेड पर लेटा था. उसने सुसू कर दी थी.

मैंने दीदी से कहा कि वो बेड पर मेरी ओर गांड करके खड़ी रहे. इससे बच्चे का डायपर भी बदल लेना और मैं पीछे से तुम्हें चोदता भी रहूंगा.

दीदी ने वैसा ही किया। वो मेरी ओर गांड करके खड़ी हो गयी. मैं पीछे से दीदी की गांड चोदने लगा. बच्चा भी दीदी की चुदाई के कारण बड़ी अजीब अजीब शक्लें देख कर हंसने लगा।

उसके बाद दीदी ने उसे एक खिलौना दिया और वो उसके साथ खेलने लगा. अभी भी मैं दीदी को वैसे ही चोदता रहा। बाद में मैं दीदी की गांड में झड़ गया।

उस दिन मैंने दीदी को 5 बार चोदा और रात को 3 बार। हम ब्रदर एंड सिस्टर सेक्स में इतना व्यस्त थे कि हमें पता ही नहीं चला कि सरकार ने 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा कर दी है. सुबह जब जीजा जी का फ़ोन आया तो हमें पता चला कि अब 21 दिन हमें वहीं रहना है जहाँ हम हैं।

ये सब सुन कर दीदी को बहुत बुरा लगा क्यूंकि उसका पति रास्ते में कहीं फंस गया था। हालांकि बाद में वो उसी दिन वापिस भी चला गया था। इससे मुझे बहुत ख़ुशी मिली कि अब 21 दिन तक मैं दीदी को चोदता रहूँगा।

उन इक्कीस दिनों में मैंने दीदी को रोज चोदा. भगवान ने भी क्या खूब लिख दिया था किस्मत में। अब मुझे अपनी गर्लफ्रेंड के नंगे फोटोज़ देखकर मुठ मारने की कोई जरूरत नहीं रह गयी थी।

मेरी गर्लफ्रेंड कभी मुझे फ़ोन कर रही थी और कभी वीडियो कॉल कर रही थी. कभी तो उसकी वीडियो कॉल तब आती थी जब मैं दीदी की चूत में लंड डाल कर उसको चोद रहा होता था. इसलिए दीदी को हटाना पड़ता था.

तो दोस्तो, इस तरह से मैंने दीदी के साथ लॉकडाउन में मजे किये. आपको मेरी ब्रदर एंड सिस्टर सेक्स स्टोरी कैसी लगी मुझे जरूर बताइयेगा।
 
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