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Adultery मस्तराम की कहानियाँ

रेस्ट्रॉन्ट पहुँचते ही बर्थडे केक और उपहार (गिफ्ट) टेबल पर मंगवाया. इतना बड़ा केक और इतना अच्छा उपहार देख कर डॉली ख़ुशी के मारे फूली नहीं समा रही थी. केक काटने के समय रेस्ट्रॉन्ट के स्टाफ ने और बाकी मेहमानोने भी तालिया बजाकर डॉली का अभिनन्दन किया. केक काटकर उसने हम दोनोंको खिलाया फिर खुद भी खाया. फिर उसने मुझे अपनी बाहोंमें जकड कर मेरे गालों पर चुम्बन करके मुझे सौ बार थैंक यू कहा. फिर वो पराग के भी गले मिली और उसे भी बार बार थैंक यू कहती रही.

केक के बाद भोजन की बारी आयी. हम दोनोंके लिए शाकाहारी और डॉली के लिए शाकाहारी और माँसाहारी पदार्थ मंगवाए. सभी को भोजन बहुत स्वादिष्ट लगा. पान खाकर हम लोग आस पास थोड़ देर तक घूमे. अब डॉली के दायी तरफ मैं थी और बायीं तरफ पराग. उसने खुद हो कर हम दोनोंके हाथ पकड़ लिए थे. अब ऐसा लगने लगा था की उसे हम दोनोंका साथ अच्छा लगने लगा था. टहलते टहलते अब पराग दोनोंके बीच आ गए. मैंने उसे आंखोंसे इशारा किया और उसने हम दोनोकी कमर में हाथ डाल दिया. डॉली को बिलकुल अटपटा या बुरा नहीं लगा.

आधे - एक घंटे तक हम तीनो ऐसी ही टहलते और बाते करते रहे. फिर कार में बैठकर हम तीनो निकल गए. हमने डॉली को उसके घर पर पहुंचा दिया. कार से नीचे उतरने के बाद फिर एक बार उसने हम दोनोंको गले लगाकर थैंक यू कहा. फिर हम दोनों कार में बैठकर अपने घर चले गए.

बैडरूम में जाते ही हम डॉली के बारे में फैंटसी करने लगे. "अनु डार्लिंग, आज लो नैक गाउन में डॉली की चूचिया कितनी मस्त लग रही थी," कहते हुए पराग ने मेरी चुत चाटना आरम्भ किया.

"हाँ, पराग डार्लिंग, सोचो की तुम मेरी नहीं डॉली की चुत चाट रहे हो. आज जब उसने तुम्हे गले लगाया तब तुम्हारा लौड़ा खड़ा हो गया था, जो मुझे भी दिखाई दिया."

"हाँ, अनु डार्लिंग, मुझे यकीन हैं की उसे भी मेरे लौड़े की चुभन महसूस हुई होगी."

"फिर भी दूसरी बार उसने तुम्हे गले लगाया, जब वो कार से उतरी थी. इसका अर्थ, उसे तुम्हारा लंड का चुभना बुरा नहीं लगा."

"आह मेरी डॉली जान. क्या मीठी और रसदार चूत है तुम्हारी. बड़ा मज़ा आ रहा हैं इसे चाटने में."

"चाट इसे पराग, कितने प्यार से चाट रहे हो, डार्लिंग," अब मैंने डॉली का रोल प्ले शुरू किया.

"ओह डॉली, देख अब मैं दो उंगलिया घुसेड़ कर तेरी चुत को और सुख देता हूँ एंड उसे और गीली करता हों," ये कहकर पराग ने मेरी पहले से ही गीली चुत को दो उंगलियोंसे चोदना आरंभ किया.

अगले आधे घंटे तक हमारा रोल प्ले चला और फिर धुआंधार सम्भोग के बाद हम दोनों एक दुसरे को लिपट कर सो गए. काफी दिनोंके बाद इतनी कायदे से चुदाई हुई थी. रोल प्ले हमेशा ही सेक्स में तड़का लगाने का काम करता है.

अगले दो-तीन महीनोंतक हम ऐसे ही डॉली से मिलते रहे और वो हमारे करीब आती गयी. रविवार के दिन हम तीनो फिल्म देखने जाते थे और अक्सर पराग को डॉली से स्पर्श करने का कोई न कोई मौका मिल ही जाता. जभी भी वो हमारे घर पर आती थी, हम दोनोंके साथ बिनधास्त हंसी मज़ाक, एडल्ट जोक्स और एक दुसरे के अंगोंको छेड़ना आम बात हो गयी. कई बार तो वो पराग के साथ ही शाम को हमारे घर आ जाती थी. साथ में भोजन करने के बाद ताश, कैरम या अंताक्षरी खेलते थे. फिर देर रात को वो, मैं और पराग (खुद गाडी चलाकर) उसे उसके घर पर छोड़ने जाते थे. उसके सामने मैं और पराग एक दुसरे को चूमना और सहलाना आम बात थी, बल्कि डॉली को भी वो सब देखने में मज़ा आने लगा था.

एक रविवार को हम तीनो दो घंटे जॉगिंग करके आये. घर पर आने के बाद मैंने जान बूझ कर कमर में मोच आने का नाटक किया. फिर पराग और डॉली ने मिलकर मेरी कमर, पीठ और जांघोंकी तेल लगाकर मालिश की. वो करते समय डॉली काफी हॉट हो गयी थी ऐसा पराग ने मुझे बाद में बताया. शायद उसने भी किसी सुन्दर और सेक्सी लड़की को इतना नजदीक से लगभग नंगा देखा नहीं होगा. मालिश करने के समय खुद के कपडे तेल से खराब न हो जाए ये बहाना करके पराग सिर्फ छोटी सी शॉर्ट में ही था. उसकी बालों से भरी और कसरत से कमाई हुई छाती और नंगी जाँघे देखकर भी शायद डॉली उत्तेजित हुई होगी.

दो हफ्तोँके बाद जब हम फिर रविवार की जॉगिंग के बाद मिले तब मैंने कहा, "पिछली बार तुम दोनोने मेरी इतनी अच्छी मालिश की. मैं पूरी तरह ठीक हो गयी और मुझे बड़ा फ्रेश लग रहा हैं. अब इस बार किस की मालिश होगी?"

"अरे यार अनु, वो तो तुम को मोच आयी थी इसलिए हमने मालिश की थी," डॉली ने हँसते हुए कहा. अब वो भी मुझे अनु बुलाने लग गयी थी.

"नहीं यार, मैं चाहती हूँ की मैं तुम दोनोंमेंसे एक को आज मालिश करू," मैं भी ज़िद पर अड़ गयी. मेरी बाते सुन कर पराग मन ही मन मुस्कुरा रहा था.

आखिर कार मैं और डॉली मिलकर पराग की मालिश करेंगे यह तय हुआ.

पराग सिर्फ फ्रेंची पर लेट गया. डॉली को उसके बदन को मसलने में शर्म आ रही थी, मगर उसके भी मन में लड्डू फुट रहे थे, की ऐसे बांके जवान की मालिश करने मिलेगी. कपडोंको तेल लगकर वो ख़राब ना हो जाए ये बहाना कर के मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी पहनकर आयी. मैंने डॉली से भी अपने ऊपर के कपडे उतारने के लिए कहा. मगर वो मानी नहीं. वैसे तो पराग की मालिश करने के लिए उसका तैयार होना ही बहोत बड़ी बात थी.

अब हाथोंमे तेल लगाकर पीठ की मालिश से शुरुआत हुई. पराग की पीठ को हम दोनों मालिश करने लगे, मैं एक तरफ और डॉली दूसरी तरफ से. दस मिनट के बाद अब जांघोंकी मालिश शुरू हो गयी. मैंने देखा की डॉली भी पराग के अध् नंगे बदन को मसलने से काफी उत्तेजित हो गयी थी. डॉली की सांस भारी हो गयी थी, माथे पर पसीना और दिल धक् धक् कर रहा था. मालिश पूरी होने के बाद पराग उठकर नहाने चला गया. तब उसकी फ्रेंची में तना हुआ उसका लंड देखकर डॉली और भी उत्तेजित हुई ऐसा लगा.

फिर रात में मैं और पराग डॉली के बारे में सोचके जबरदस्त सेक्स में जुटे रहे. अगर हमारी ये योजना सफल हो जाती तो मेरी आँखों के सामने मेरा पति पराग हमारी दोस्त डॉली को चोदने वाला था. पता नहीं मगर क्यों मुझे इस बात से बिलकुल जलन की भावना नहीं हो रही थी. शायद मैं पराग से इतना प्यार करती हूँ की उसे खुश देखने के लिए मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हो गयी थी. हो सकता हैं की मैं पराग और डॉली के साथ थ्रीसम भी करने को भी मन बना चुकी थी.
 
दो हफ़्तों के बाद जब हम जॉगिंग के लिए मिले तब डॉली हमसे आँखें चुरा रही थी, क्योंकि मालिश करवाने की अब उसकी बारी थी. वो पराग के सामने ब्रा और पैंटी में आकर उसीके हाथोंसे मालिश करवाने में शर्मा रही थी. वैसे आज उसकी जवानी कसे हुए टॉप और शॉर्ट्स में गजब ढा रही थी. आज उसके टॉप का गला कुछ ज्यादा ही खुला था, जिससे उसके भरपूर वक्ष लुभा रहे थे. शायद वो अपनी टांगोंकी वैक्सिंग भी करके आयी थी, इसलिए उसकी त्वचा भी चमक रही थी. जॉगिंग करते समय एक दो बार पराग का हाथ उसकी गदराई हुई गांड पर और तंग वक्षोंको लग गया था. इन सब बातोंके कारण पराग की शार्ट में उसका कड़क हथियार तम्बू बनकर खड़ा हो गया था.

इतना अंग प्रदर्शन करने के बाद भी डॉली को पराग के सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में लेटने से लज्जा का अनुभव हो रहा था. जब हम तीनों घर पहुंचे तब मैंने इस समस्या का एक हल निकाला. पहले पराग सिर्फ नीले रंग की फ्रेंची पहन कर आया. उसके बाद मैंने उसकी आँखों पर पट्टी बाँध दी, ताकि उसे कुछ भी दिखाई न दे. इसके बाद डॉली अपने संगमरमर से बदन पर सिर्फ गुलाबी रंग की ब्रा और पैंटी पहन पर कमरे में आ गयी और पेट के बल लेट गयी. उसका गदराया हुआ मस्त बदन देखकर मैं भी झूम उठी. इतनी हॉट और सेक्सी लड़की के साथ थ्रीसम के ख्याल से मैं भी उत्तेजित हो गयी. न जाने क्यों मेरी योनि से भी गीलापन महसूस होने लगा.

अब कांपते हुए हाथोंसे मैंने डॉली की ब्रा का हुक खोल दिया और दोनों पट्टे बाजू में हटा दिए. अब उसके पूरे बदन पर केवल छोटी सी पैंटी ही थी. मैंने पराग के हाथो में तेल लगाकर उसके हाथ डॉली की नंगी पीठ पर रख दिए. वो कुछ भी देखे बिना डॉली की पीठ को मालिश करने लग गया. जैसे ही पराग के हाथों ने उसके तन को छुआ, डॉली कसमसाने लगी. उसकी मुलायम काया को मसलने से उसका औजार और भी सख्त हो गया. अब किसी भी बात की परवाह किये बगैर पराग ने अपनी फ्रेंची उतार दी और अपने तने हुए लौड़े को आज़ाद किया. पूर्ण रूप से नंगे पराग को सिर्फ पैंटी पहनकर लेटी हुई कामसुन्दरी डॉली की मालिश करते हुए देखना किसी पोर्न फिल्म से कम नहीं था.

दूसरी और से मैं भी उसकी मुलायम पीठ को सहलाने लगी. मालिश करते करते पराग का हाथ अक्सर नीचे डॉली की गांड पर चला जाता था, क्योंकि उसे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था. मालिश करते करते कई बार उसके हाथ डॉली की पैंटी में घुस गए. मुझे पता था की आँखों की पट्टी का तो बहाना था, पराग को डॉली की गांड भी मसलना था. जब जब पराग का हाथ डॉली की पैंटी में घुसता, वो एक मादक सिसकारी भर लेती थी. एक बार भी उसने न गुस्सा किया या पराग को रोकने के लिए भी नहीं कहा. इसका साफ़ मतलब था की वो भी उसको एन्जॉय कर रही थी. कई बार जब पराग मालिश के लिए खड़े रहने की जगह बदलता, तब उसके कड़क लिंग का स्पर्श डॉली के शरीर को हो जाता. हर बार वो रोमांच से काँप उठती थी.

"क्या डॉली मालिश अच्छी लग रही हैं न?" मैंने मुस्कुराते हुए पूंछा.

"हाँ, अनु, बदन एकदम हल्का सा लग रहा हैं, और बहुत मजा आ रहा हैं."

"हाँ, मज़ा तो मालिश करने वाले को भी बड़ा आ रहा हैं," मैंने व्यंग कसते हुए कहा.

फिर मैंने पराग के हाथ डॉली की भरी हुई, मांसल और पुष्ट जाँघों पर रखा और हम दोनों मिलके जाँघोंकी मालिश करने लगे. पराग का हाथ पैंटी के नीचे के हिस्से से अंदर घुसने लगा. फिर वही सिसकारियां और फिर वही पराग का डॉली के सेक्सी शरीर को सलामी देता हुआ लंड. इस सारे माहौल से उत्तेजित होने से मेरी खुद की पैंटी भी पूरी तरह गीली हो गयी.

पराग को डॉली की पिण्डलियोंकी मालिश में लगाकर मैंने अपने दोनों हाथ डॉली की पैंटी में घुसा दिए. मैं उसके गोल मटोल चूतडोंको मसलने लगी. डॉली की उत्तेजना अपनी चरम सीमा पर थी.

अब बिना संकोच किये वह बोल उठी, "आह, अनु, कितना मज़ा आ रहा हैं. तुम कितनी प्यारी हो और कितना अच्छा मसाज कर रही हो. आह, आह, फक, ऐसा सुख पहली बार मिल रहा हैं."

मैंने उसकी पैंटी निकाल कर उसके घुट्नोंतक नीचे कर दी और पूरी ताकत से उसकी गांड को मसलने लगी. जैसे ही मैं उसपर झुकती, मेरे कठोर वक्ष उसपर दब जाते. फिर मुझे भी मस्ती आयी और मैंने पराग के दोनों हाथ डॉली की गांड पर रख दिए और मैं खुद थोड़ा पीछे हट गयी. पराग पूरी लगन से उन भरे हुए नितम्बोँको मसलता गया. बीच बीच में पराग की उंगलिया डॉली के योनि को भी स्पर्श कर रही थी. डॉली को भी समझ में आ गया की ये मर्द के मजबूत हाथ उसकी गांड को मसल रहे हैं और मेरे दोनों हाथोंका स्पर्श नहीं हो रहा है.

"डॉली रानी, अब पराग के बलिष्ठ हाथ की सुपर हॉट मालिश का मज़ा लो. हाय , कितना सेक्सी हैं यह नज़ारा," मैंने कहा और डॉली के सर को प्यार से सहलाने लगी.

"ओह पराग, कितना अच्छा मसल रहे हो तुम, ओह माय गॉड, यस, ओह फक, आह, आह," डॉली को खुद को पता नहीं चल रहा था की वो क्या बोल रही थी.

मुझे यकीन था की उसकी चुत भी योनिरस से पूरी तरह गीली हो गयी होगी. आखिर पराग ने उन मस्त चूतड़ों पर से अपने हाथ हटा दिए. मालिश पूरी हो गयी थी.

डॉली ने उठ कर अपनी पैंटी पहन ली और ब्रा को अच्छे से बाँध लिया फिर मेरे गले लग गयी. हम दोनों भी पसीने से और गीली चूत से लबालब थी. बिना संकोच मैंने उसके होठों पर अपने होठ रख दिए. उसने भी मेरे चुम्बन का स्वीकार किया और दो मिनट तक हम एक दूजे के होठों को चूसती रही. अब उसने मेरी बाहों से निकल कर पराग की तरफ मुड़ गयी.

मुझे कुछ समझ में आये इसके पहले उसने मेरे नंगे और तने हुए लौड़े से भरपूर पति को बाहों में भर लिया. उसकी कठोर चूचिया पराग की छाती पर दबने लगी. पराग ने डॉली को जबरदस्त किस किया और वो भी अपनी जीभ से उसका मुँहतोड़ जवाब देने लगी. पराग के हाथ डॉली की पीठ और गांड को सहलाते हुए उसकी चूचियोंपर चले गए. अब इतना सब हो जाने के बाद पराग के आँखों की पट्टी का कोई मतलब ही नहीं रहा. इसलिए मैंने पराग को पीछे से आलिंगन दिया और उसकी आँखों की पट्टी उतार दी. अब उसकी छाती को डॉली के स्तनोंका और पीठ को मेरे पुष्ट स्तनोंका स्पर्श मिल रहा था.
 
जैसे ही पराग ने डॉली को सिर्फ ब्रा और पैंटी में देखा, वो तो और भी पागल हो गया. उसने झट से उसकी ब्रा का हुक खोला और ब्रा को उसके शरीर निकल कर जमीन पर फेंका. डॉली के नीचे लिटाकर पराग उसकी चूचिया बारी बारी चूसने लगा. मैंने भी अपने कपडे उतारे और पराग का तगड़ा लौड़ा मुँह में लेकर चूसने लगी. पराग ने डॉली की पैंटी निकाल दी और उसकी गीली चूत चाटने लगा. मैंने डॉली के भरे हुए स्तनोंको चाटना और उसके निप्पल्स को चूसना शुरू किया.

"ओह अनु, तुम दोनों कितने सेक्सी हो. ऐसी मालिश कर दी की अब हम तीनो एक साथ सेक्स करेंगे. पराग, ऐसे ही चाटो मेरी चूत, आह आह, फक, आय ऍम सो फकिंग हॉर्नी."

"डॉली डार्लिंग, क्या मीठी मीठी चूत हैं तेरी, और कितना जूस निकलते जा रहा हैं," डॉली की चूत चाटते हुए और दो उंगलियोंसे चोदते हुए पराग ने कहा.

पराग ने डॉली की जाँघे और फैलाकर अब तीन उंगलिया घुसेड़ने लगा. योनि रास से भरी उंगलिया चाट कर और भी जोर लगाकर चाटने और चोदने लगा.

"क्या मस्त माल हैं तू डॉली, चल अब तू मेरी चूत चाट," कहकर मैं उसके मुँह पर अपनी गीली चूत लगाकर बैठ गयी. आज तक दोनों भी लड़कियोने सिर्फ लडकोंके साथ ही सम्भोग किया था, मगर मालिश के बाद हम तीनो इतने गर्म हो गए थे की हर कोई कुछ भी करने को तैयार था. डॉली मेरी चूत को चाटते हुए योनि से निकलता पानी निगलती गयी. फिर उसने मेरा क्लाइटोरिस का दाना मुँह में लिया और उसे चूसती गई. मुझे जल्द ही एक ज़बरदस्त ओर्गास्म आया. मेरे चूत के रस से डॉली का चेहरा भर गया.

इतने छोटे से पलंग पर बड़ी दिक्कत हो रही थी. हमारा मास्टर बेड काफी लम्बा और चौड़ा था. थ्रीसम सेक्स के लिए एकदम सही था. पराग ने डॉली को उठाकर बैडरूम में लेके गया, मैं भी पीछे पीछे गयी. पराग से सब्र नहीं हो रहा था, उसने एक कंडोम निकालकर अपने लौड़े पर चढ़ाया और डॉली की टाँगे खोलकर उसे चोदने लगा. आज पहली बार मेरा पति मेरे सामने किसी और लड़की को चोद रहा था. फिर भी मुझे जरा भी ईर्ष्या या जलन नहीं हुई. मैं डॉली के स्तनोंको चूसती और उसके निप्पल्स को हलके से काटते गयी.

पराग डॉली को मिशनरी स्टाइल में पूरी ताकत लगाकर चोद रहा था. डॉली के मुँह से सिसकारियां और आंखोंसे ख़ुशी के आंसू छलक रहे थे. पराग का एक नयी लड़की के साथ भरपूर सम्भोग का सपना साकार हो रहा था.

"चल डॉली, अब कुतिया बन जा, तुझे डॉगी स्टाइल में पीछे से चोदता हूँ," कहकर पराग उसके बदन पर से उठा. मैंने पराग को बाहों में लेकर किस किया और पूंछा, "अब तो खुश हो न मेरी जान?"

"हां अनु डार्लिंग, इसको चोदने के बाद तुमको चोदना है. तुमने इसको पटाया इसलिए आज इतना सारा सुख मिल रहा हैं मुझे. जब मैं तुम्हे चोदना शुरू करूंगा तब ये सेक्सी डॉली तुम्हारी चूचियोंको चूसेगी."

डॉली अब डॉगी पोज में आ गयी और एक ही झटके में पराग का लम्बा चौड़ा लंड उसकी चूत में धक्के मारने लगा. मैं डॉली की गांड, वक्ष और जांघोंको सहलाती रही. फिर मैंने पराग और डॉली दोनोंको बिस्तर के नीचले हिस्से में जाने को कहा. मैं ऊपर के हिस्से में पीठ के बल लेट गयी और डॉली का मुँह अपनी चूत से सटा दिया.

अब डॉली मेरी चूत चाटकर बहता हुआ पानी पी रही थी और मैं आँखें मूंदकर आनंद लेने लगी. करीब चालीस मिनट तक पराग डॉगी स्टाइल में चोद कर डॉली को स्वर्ग का सुख धरती पर ही दे रहा था. जैसे ही पराग झड़ने को हुआ, उसने चूत से लौड़ा निकाल दिया। फिर कंडोम हटाकर सारा वीर्य डॉली के मुँह में गिरा दिया. इतना सारा और इतना गाढ़ा वीर्य निकला की काफी सारा उसके होठोंसे बाहर उसके गालों, बूब्स पर और जाँघों पर गिरा. मैंने डॉली को नीचे लिटाया और उसके शरीर पे से सारा वीर्य चाट चाट कर पी गयी.
 
दस मिनट के विश्राम के बाद पराग ने मेरी पलंगतोड़ चुदाइ की. उस दौरान डॉली अपनी चूत मुझसे चटवाती रही.

रात भर में पराग ने हम दोनोंको दो-दो बार भरपूर सूख का अहसास दिया।

अगले ही दिन, डॉली का टेस्ट करके हमने सुनिश्चित कर लिया की उसे कोई बीमारी नहीं हैं. डॉली ने भी गर्भनिरोधक गोलियां खाना शुरू कर दिया, उसके बाद तो पराग बिना कंडोम के हम दोनोंको चोदता गया.

तीसरा भाग पराग की जुबानी है.

मुझे इस बड़ी कंपनी में दो साल हो गए थे, और मेरे अच्छे काम के कारण मुझे एक बड़ी पदोन्नति (प्रमोशन) मिला. उसकी ख़ुशी मनाने के लिए मैं, अनु और डॉली तीनोंने गोवा जाकर पांच दिन की छुट्टी मानाने का प्रोग्राम बनाया। स्वाभाविक हैं की मैंने और डॉली ने एक ही समय उन तीन दिनोंकी छुट्टी के लिए अर्जी दी (दो दिन वीकेंड था). मंगलवार की रात को हम तीनो वातानुकूलित बस में बैठकर गोवा के लिए रवाना हुए. सीधा अगले सोमवार की सुबह वापसी होनी थी.

पणजी पहुँचते ही हमने थ्री स्टार होटल में चेक इन किया. हमने एक बड़ा सा आलिशान सूट लिया था. मैंने अपना बरमुडा पहना। अनु ने नीले रंग की वन पीस बिकिनी और डॉली ने फूलोंकी डिज़ाइन वाली लाल रंग की टू पीस बिकिनी पहनी थी. जैसे ही हम स्विमिंग पूल पहुंचे, सबकी नजरे हमपर टिक गयी. एक लड़के के साथ दो दो सेक्सी लड़कियोंका होना कोई साधारण बात नहीं थी. दो-तीन घंटोंतक हमारी मस्ती चलती रही. मैं कभी अनु से लिपटता तो कभी डॉली से. मालदीव की तरह यहांभी कई लड़कोंने और कुछ कपल्स ने हमसे दोस्ती करने को कोशिश की. मगर हमने किसी को घास नहीं डाली. सारे मर्द मानो आंखोंसे अनु और डॉली को नंगा कर रहे थे और चोद रहे थे.

दोपहर का भोजन कर हम तीनो कमरे में चले गए. वहां बियर और वाइन का दौर चला. हमारे सूट का बड़ा वरांडा समुन्दर की तरफ था, इसलिए उसे खुला रखकर ही हम चुदाई में लग गए. अब इतने दिनोंके कामुक और गर्मागर्म सम्भोग के बाद अनु और डॉली काफी खुल गयी थी. चुदाई के समय गांड के अंदर एक या दो ऊँगली से चोदना दोनोंको भी अच्छा लगने लगा था. वीर्यपतन होने के बाद जब मैं अगले राउंड के पहले आराम करता, तब अनु और डॉली दोनों सिक्सटी नाइन के पोज में सुख लेती और देती थी. उनका वो भरपूर सेक्स देखकर मेरा लौड़ा भी जल्दी खड़ा होकर फिर हम थ्रीसम में जुट जाते थे.

शाम को मैं पतला सा टी-शर्ट और शार्ट पहना था. अनु ने बैकलेस गाउन और डॉली ने अंगप्रदर्शन करने वाला छोटा सा फ्रॉक पहना था. रात को डिस्को में दस बजे तक नाचने और शराब के नशे मे धुत्त होने के बाद हम सूट पर पहुंचे. आज एक अमेरिकन जोड़ा हमसे काफी घुल मिल गया था. उनका सूट भी हमारे सूट से नजदीक ही था, इसलिए हम तीनो और वो दोनों साथ ही साथ चले आये थे. वो लड़का (माइकल) ३० साल की उम्र का था, मगर २२-२३ का लगता था. उसने अपने आप को बहुत फिट रक्खा था. माइकल भी मेरी तरह टी-शर्ट और शॉर्ट्स में ही था. उसकी गर्लफ्रेंड (जूलिया) ३२ साल की थी, मगर वो भी २५ साल के करीब की लगती थी. उसके चूचे मध्यम आकार के, कमर पतली, नितम्ब गोलमटोल और टाँगे मांसल थी. उसकी गोरी त्वचा, नीली आँखें और होठोंपर मीठी मुस्कान देखते ही बनती थी. उसने चोलीनुमा टॉप और मिनी स्कर्ट पहना था. उसके बार बार ऊपर होने से उसकी गुलाबी पैंटी दिखाई दे रही थी. टॉप भी काफी पतला था और उसके नुकीले स्तनाग्र आसानी से दिख रहे थे, मतलब उसने ब्रा पहनी ही नहीं थी.

माइकल और जूलिया ने अमेरिकन डॉलर में सूट लिया था, इसलिए उनका सूट काफी बड़ा था. उन्होंने हमें और बियर और वाइन पीने के लिए उनके सूट में आने के लिए बहुत आग्रह किया.

"क्या अनु, क्या बोलती हो तुम, जाना ठीक रहेगा? और डॉली डार्लिंग तुम्हारी क्या राय हैं?" मैंने पूंछा.

"बस मैं माइकल के साथ चुदाई नहीं करूंगी, उसके अलावा मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं हैं," दोनोंने एक ही स्वर में कहा.

"हाँ, उनके बाजे में लेटकर अपना थ्रीसम करते रहेंगे. उनको उनकी चुदाई करने दो. हम उनको हमारा लाइव शो दिखाएंगे, और हम उनका लाइव शो देख लेंगे," डॉली ने हँसते हुए कहा.

"ओके, चलो फिर."

और हम तीनो माइकल और जूलिया के आलिशान बड़े सूट में आ गए. मास्टर बेड बहुत बड़ा और गोल आकर में था. अब इसके बाद उनके साथ जो संवाद हुआ उसे मैं हिंदी में अनुवादित करके लिख रहा हूँ.

"आप लोग क्या पीयोगे," माइकल ने पूंछा.

"मेरे लिए बीयर और डॉली तुम वाइन पीओगी न?" अनु ने खिलखिलाते हुए कहा.

"हाँ मेरी जान, वाइन ही लूंगी," डॉली आधे नशे में बोल उठी.

"और मेरे लिए, रम सोडे के साथ," मैंने जूलिया के अधनंगे बदन को घूरते हुए कहा.
 
माइकल मेरे साथ रम और जूलिया वाइन लेकर हम पाँचों का पीने का दौर चला. अश्लील हास्य विनोद और किसी का भी किसी को स्पर्श करना शुरू हो गया. संगीत की ताल पे सभी कदम थिरकने लगे और माइकल बारी बारी अनु और डॉली को आलिंगन देने लगा. मैंने भी जूलिया को बाहोंमें लेनेमें और उसके खुले अंगोंको चूमने में कोई कसर नहीं छोड़ी. सबपे शराब और जवानी का नशा चढ़ा हुआ था.

अनु को दुसरे मरदोंसे चुदने के अलावा बाकी हर कोई मस्ती करने में कोई परेशानी नहीं थी, इसलिए वो दिल खोलके माइकल के साथ चूमा चाटी कर रही थी.

"क्या गज़ब की माल हो तुम हनी," कहते हुए माइकल अनु के होंठ चूसते हुए उसके गठीले वक्षोंको उसके गाउन के ऊपर से ही मसलने लगा.

"वॉव , कितना मस्त लम्बा और कड़क लौड़ा हैं तेरा," उसके शॉर्ट में हाथ डालकर उसके लंड को सहलाती हुई अनु बोली.

माइकल ने अनु के स्लीवलेस गाउन के कंधे पर का कपडा हटाया और पीछे की ज़िप खोल दी. अब वो गाउन अनु की कमर तक आ गया और काली ब्रा में अनु के सख्त और कठोर स्तन उजागर हुए. उन्हें मसलते हुए माइकल ने गाउन को अनु के शरीर पर से हटा दिया. अब अनु सिर्फ काले रंग की ब्रा और पैंटी में थी. उसकी मांसल मुलायम जाँघे देखकर माइकल उत्तेजित हुआ. डॉली ने अपना फ्रॉक खुद ही उतार दिया और वो भी माइकल को पीछे से चिपक गयी.

माइकल के दोनों तरफ खूबसूरत, सेक्सी और हॉट लड़किया थी. अनु की ब्रा का हुक खोलकर माइकल उसके स्तनोको पीने लग गया. तभी डॉली ने माइकल को धीरे से बेड की दिशा में धकेला और तीनो बिस्तर पर गिर गए. माइकल ने अनु के स्तनोंको चूसना जारी रखा. डॉली ने माइकल की अंडरवेयर निकालकर उसके लंड को चूमने और चाटने लगी. माइकल ने अनु की काली पैंटी हटा दी और उसकी दो उंगलिया अनु की योनि को चोदने लगी.

अनु की योनिसे लगातार जूस बह रहा था और आँखें मूंदकर वो एक नए पुरुष से सुख का आनंद ले रही थी. डॉली भी नंगी हो गयी और माइकल के मोटे लम्बे लिंग को चूसने लगी. माइकल ने पलट कर डॉली की चूत चाटना आरम्भ किया और अनु ने खींचकर माइकल के लौड़े को पीना शुरू किया. इस प्रकार माइकल दोनों लडकियोंको बारी बारी सुख देने लगा. पांच मिनट में गुर्राने की आवाज़ के साथ माइकल का लौड़ा वीर्य की बड़ी बड़ी पिचकारियां अनु और डॉली के चेहरे और स्तनोंपर मारता गया.

पूरा झड़ने के बाद दोनोने लौड़े को पूरा चाट कर आखरी बूँद तक पी डाली. फिर अनु और डॉली ने एक दुसरे के शरीर के ऊपर से माइकल का वीर्य चाटा। इतना सेक्सी सीन देखने के बाद माइकल का लौड़ा फिर से सख्त होने लगा.
 
अभी तक माइकल ने अनु या डॉली को चोदने की कोशिश नहीं की थी, इसीलिए सब ठीक चल रहा था. वैसे भी डॉली को गैरमर्द से चुदवाने में कोई पाबंदी नहीं थी, वो कोई मेरी पत्नी नहीं थी. सिर्फ अनु ही मेरे अलावा किसी अन्य आदमी से चुदने के लिए आज तक राजी नहीं हुई थी. पता नहीं आज वो अपने आप पर काबू रख पाएगी या माइकल के लौड़े से उसकी चूत का मिलान होगा.

इधर मैं और जूलिया फ्रेंच किसिंग करते हुए एक दुसरे के अंगोंको टटोल रहे थे. बेशर्म होकर मैं डॉन हाथोंसे उसके पुष्ट वक्षोंको टॉप के ऊपर से दबाने लगा. उसने भी हाथ मेरी शार्ट में डालकर मेरे सख्त लम्बे लौड़े से खेलने लगी. उसके हाथों का स्पर्श होते ही वो और भी कड़क होने लगा.

मैंने निःसंकोच होकर जूलिया का टॉप उतार दिया और उसके मम्मे चूसने लगा. उसने भी मेरी शार्ट खोल डाली और फ्रेंची खींचकर उतार दी. मेरे दोनों हाथ उसकी कमर में उसकी मिनी स्कर्ट खोलने लग गए. जैसे ही मैंने उसे नीचे के कपडोंसे मुक्त कर दिया, हम दोनो बेड की ओर चल दिए. मैंने जूलिया को बीएड पर लिटाया और उसके स्तन मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगा. उसने मेरे लौड़े और गोटियोंसे खेलना जारी रखा.

"चल, अब तू मेरी चूत चाट ले. अब मुझसे रहा नहीं जा रहा हैं."

"हाँ, जूलिया, ये लो मैं तुम्हारे ऊपर चढ़कर तुम्हे चाटता हूँ. तुम भी मेरे लंड को अपने मुँह में भरकर चूसती रहो."

जूलिया के बदन पर मैं सिक्सटी नाइन में चढ़कर ओरल सेक्स में लग गया. उसकी चूत का स्वाद अनु और डॉली की चूत से काफी अलग और ज्यादा स्वादिष्ट था. जैसे जैसे मैं उसकी चूत की पंखुडिया और दाना (क्लाइटोरिस) चाटते और चूसते गया, उसकी योनि से स्त्राव बहता रहा. एक एक बूँद को मैं प्यार से चाटता गया.

"क्या मस्त लौड़ा हैं तेरा यार," कहकर जूलिया मेरे लंड को अपने मुँह से बलात्कार करने लगी. एक तो इतनी गोरी और सेक्सी लड़की के साथ इतना कुछ करके ही मैं उत्तेजना की चरम सीमा पर था. उसपर जब जूलिया मेरा लौड़ा पीती गयी, तब मेरी सब्र का बाँध टूटा और एक जबरदस्त पिचकारी मारकर मेरा वीर्य उसके मुँह में झड़ने लगा. लगता हैं जूलिया को लौड़े पीने की अच्छी खासी आदात थी, इसलिए मेरा सारा वीर्य वो गटागट पीने लगी.

जूलिया के सहलाने और चूमने से कुछ ही पलोंमें मेरा लंड फिर से तन गया और मैं एक भूखे शेर की तरह जूलिया पर टूट पड़ा. उसकी चूचियोंको मसलते हुए मैंने जूलिया की जाँघे खोल दी और उसकी गुलाबी योनि को चाटने लगा.

"हाय जालिम, कितना प्यार से चाट रहे हो. फक, और चाटो. इतना अच्छा तो मेरा माइकल भी नहीं चाटता, उसे तो सिर्फ चोदने की पड़ी रहती हैं. आह, आह, यस्स, मेरे दाने को जीभ लगाते जाओ और चूसते जाओ," जूलिया मदमस्त होकर चिल्ला रही थी. उसकी आवाज़ सुनकर मेरी अनु डार्लिंग की नज़र इस तरफ पड़ी. अब तक वो माइकल और डॉली के साथ मजे लूटने में इतनी मग्न थी की उसे मैं क्या कर रहा हूँ इसका ख्याल ही नहीं था.

अनु पलट कर मेरे और जूलिया पास आ गयी. उसने जूलिया के बिस्तर पर धकेला और उसके स्तनोंको मुँह में भरकर चूसने लगी. मेरा जूलिया की चूत चाटना और तीन उंगलियोंसे चूत को चोदने का कार्यक्रम चला. उसकी चूत काफी टाइट थी और उसमेंसे निकलते हुए जूस से भरी मेरी उंगलिया मैं , अनु और जूलिया तीनो चाटते रहे.

कुछ समय बाद, जूलिया ने अनु की चूत चाटी और मैं अनु के मुँह को चोदता गया. जैसे ही मैंने मेरा पानी अनु के स्तनोंपर गिराया, जूलिया ने उसे चाटकर निगल लिया.

दूसरी तरफ माइकल और डॉली फिर सिक्सटी नाइन की पोज में आकर जीवन के सर्वोच्च सुख का आदान प्रदान करने लगे. फिर जब माइकल ने डॉली को सम्भोग के आखरी चरण पर ले जाना चाहा, तब डॉली बोली, " तुम कंडोम लगाओ और फिर हम चुदाइ करेंगे."

अब माइकल और जूलिया आपस में कंडोम के बिना ही सेक्स करते थे, इसलिए उनके पास एक भी कंडोम नहीं था. उस कारण उधर माइकल और डॉली और इस तरफ मैं, अनु और जूलिया फिर से ओरल सेक्स में जारी रहे और वीर्यपान करके तीनो लड़कियां तृप्त हो गयी.

मैं मन ही मन सोच रहा था की इतना सब कुछ होने के बाद तो अनु का मन बदल जाएगा और वो माइकल से चुद जायेगी. उससे मेरा जूलिया को चोदने का रास्ता साफ़ हो जाता. मगर अभी भी किस्मत मेरा साथ नहीं दे रही थी.

करीब दो घंटे के बाद और बहुत सारा ओरल सेक्स करके हम तीनो अपने सूट पर वापस आ गए. फिर साथ में नहाकर फ्रेश हो गए. अब थ्रीसम का एपिसोड लगभग एक घंटे तक चला. आखिरी में अनु की चूत में तीसरी बार पानी छोड़कर मैं दोनों सेक्सी लड़कियों के बीच सो गया.

अगले दिन सुबह सुबह माइकल ३६ कंडोम का बड़ा बॉक्स लेकर आ गया. उसी पल माइकल और डॉली का जोरदार सम्भोग हुआ. अभी भी अनु मेरे अलावा किसी और से चुदने से मना कर रही थी, इसलिए मैं, अनु और जूलिया फिर एक बार ओरल सेक्स थ्रीसम कर के तृप्त हो गए.

अगले पूरे दिन, माइकल और डॉली उस आलिशान सूट में रहे और माइकल ने डॉली को कम से कम दस बार अलग अलग तरीके से चोदा . मैं, अनु और जूलिया हमारे सूट में रहे. क्योंकि अनु माइकल से चुदवाने के लिए राजी नहीं थी, इसलिए उसका सम्मान करते हुए पूरा दिन हम तीनो थ्रीसम का मजा लेते गए, मगर मैंने एक बार भी जूलिया को यनि में अपना हथियार नहीं घुसाया. रात को थ्रीसम के दो राउंड हुए, दोनों बार मैंने अपना वीर्य जूलिया के स्तनोंपर उंडेल दिया, जिसे अनु प्यार से चाट गयी. कुछ कुछ जूलिया के साथ भी बांटा. दोनों नंगी सेक्सी लड़कियोंके बीच मैं एक महाराज की तरह गहरी नींद में सोया हुआ था.

आधी रात को मेरे लंड पर कुछ गीला गीला महसूस होने लगा, साथ ही लौड़ा फन निकालकर खड़ा हो रहा हैं ऐसा भी लगा. जब गोटियोंको भी गीलेपन का स्पर्श हुआ तब मेरी आँख खुली. अँधेरे में आँखे मुश्किल से खुली, तो देखा जूलिया ही मेरे लौडे और गोटियोंको चाट रही थी. मेरे मुँह से कुछ आवाज़ निकले इसके पहले उसने अपनी उंगली मेरे होठोंपर रख दी. मैं इशारा समझ गया और आँखे मूंदकर आहे भरने लगा. जैसे ही मेरा लौड़ा पूरा सख्त हुआ, उसने मुझे उठाया और बाथरूम की तरफ ले गयी.
 
अंदर जाते ही हम फिर से गले मिले और उसने मेरा एक प्रदीर्घ चुम्बन लिया. फिर सिंक के नीचे के ड्रावर से पांच कंडोम का पैकेट बाहर निकाला और मेरी तरफ देखके मुस्कुरा दी.

"माइकल के ख़रीदे हुए कंडोम बॉक्स में से ये एक पत्ता लायी हूँ डार्लिंग. मुझे पता है की तुम इसके बगैर सेक्स नहीं करोगे," जूलिया ने शरारती अंदाज़ में कहा.

"हाँ जूलिया डार्लिंग, मैं डॉली के साथ सम्भोग करू या तुम्हारे साथ, एक ही तो बात हैं. अनु को अच्छा नहीं लगेगा मगर मैं तो तुम्हें चोदे बगैर नहीं रूकूंगा," इतना कहकर मैंने उसे घोड़ी बनकर सिंक के सहारे झुकाया। फिर जूलिया के स्तन मसलने लगा. तुरंत मेरा लंड और भी सख्त होने लगा और समय न गवाते हुए, मैंने कंडोम पहन लिया. एक ही झटके में मेरा हथियार जूलिया की चूत में प्रवेश कर गया. उसकी योनि पहले से ही इतनी ज्यादा गीली थी की किसी भी फोरप्ले की आवश्यकता नहीं थी.

ज्यादा आवाज़ हुई तो अनु की नींद खुलने का डर था. मुझे पता नहीं था, की मुझे जूलिया को बाथरूम में चुपके से चोदते हुए देखकर अनु की प्रतिक्रिया क्या होगी. इसीलिए बिना कोई शब्द कहे हम डॉगी स्टाइल में सेक्स करते रहे. जूलिया की चूत से कुछ ही समय में फव्वारा निकला. उसका ओर्गास्म देखकर मैं और भी उत्तेजित होकर उसे चोदता गया. जूलिया भी बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ पर काबू किये थी. जूलिया को लगातार दो और ओर्गास्म आये और वो मानो स्वर्ग की सैर कर रही थी.

जूलिया के नितम्बोँको मसलते हुए दस पंद्रह मिनट तक चोदने के बाद मुझे लगा की अब फव्वारा छोड़ने की मेरी बारी हैं. मैंने लौड़ा बाहर निकाला और उसे मेरी तरफ घुमाया. कंडोम को हटाकर फेंक दिया और चूसवाने के लिए लौड़े को तैयार किया.

जूलिया अपने घूटनोंपर बैठकर मेरे लंड को चूसने लगी.

"ओह यस, फक, ऐसे ही चूसती रहो जूलिया डार्लिंग," मैं दबी हुई आवाज़ में बोला.

मेरी आँखों में आँखें डालकर जूलिया जोर जोर से चूसती गयी और मेरा पानी निकल गया. वीर्य की पिचकारी सीधे उसके गले में गयी. तीन चार बड़ी पिचकारियां मारने के बाद लंड का पानी छोड़ना बंद हुआ. जूलिया ने मेरे लौड़े के ऊपर से एक एक बूँद को चाटकर निगल लिया और मुझे देखकर मुस्कुराती रही.

बैडरूम में दबे पाँव दोनों वापस आये और पंद्रह मिनट तक एक दुसरे की बाहोंमें लेटकर आलिंगन चुंबन का सुख लिया. फिर से लंड महाराज खड़े हो गए, क्योंकि इतनी हॉट और सेक्सी अमेरिकन लड़की को चोदने का मौका बार बार नहीं मिलने वाला था. फिर से बाथरूम में जाकर चुसाई और ठुकाई हुई.

सुबह पांच बजे तीसरी और आखरी बार जूलिया को चोदने के बाद हम एकदम गहरी निद्रा में सो गए. निकलने से पहले मैंने हमारा फ़ोन नंबर और पता जूलिया और माइकल को दिया.

"जब कभी भारत आओ, तब फ़ोन कर देना. हम तुरंत आप लोगोंसे मिलने आ जाएंगे," मैं, अनु और डॉली ने एक स्वर में कहा.

गोवा से लौटने के एक हफ्ते बाद, जब में ऑफिस के काम में मग्न था, तब रिसेप्शन से डॉली का फ़ोन आया. जैसे ही मैंने फ़ोन उठाया, उसने कहा, "पराग, तुम्हारे लिए कोई एक पार्सल छोड़ गया हैं."

मैंने वहां पहुँच कर वो पार्सल ले लिया और अपने डेस्क पर आया.

"अरे यार, किसने मुझे पार्सल भेजा होगा यार, और वो भी ऑफिस के पते पर?" अपने आप से बात करते हुए मैंने पार्सल खोला.

अंदर की चीज़ देखकर मेरे पैरों तले की जमीन खिसक गयी. उसमें मेरे, अनु और डॉली के सेक्स करने के फोटोज थे. और तो और गोवा में माइकल और जूलिया के साथ जो भी अलग अलग प्रकार से सेक्स किया था, उसके भी फोटो थे. साथ में एक मोबाइल फ़ोन था. उसको खोलके देखा तो उसमें हमारी चुदाई के वीडियो भी थे. सीधी सी बात थी की कोई हमें ब्लैकमेल कर रहा था.

लिफ़ाफ़े में एक और कागज़ था, जिस पर पर लिखा था, इसी मोबाइल पर फ़ोन आएगा, जो बताएगा की आगे क्या करना हैं. फ़ोन का इंतज़ार करना.

चौथा भाग भी पराग की जुबानी है.

लिफाफे के अंदर मिले फोटो, मोबाइल के वीडियो और धमकी भरा खत पढ़ने के बाद तो मेरी बुरी तरह से गांड फट गयी. अगर इसमें से एक भी फोटो या वीडियो अनु के रिश्तेदारोंतक, ख़ास कर उसके पिताजी तक पहुंचा तो मेरी खैर नहीं। अगर ऑफिस में किसी को यह दिख गए तो मेरी नौकरी तो जाती ही थी, साथ में बदनामी होती वो अलग. मैं और अनु समाज में किसीको मुँह दिखाने लायक नहीं रहते. हम दोनों के साथ साथ डॉली की भी बदनामी हो जाती. सबसे बड़ी मुसीबत ये थी की मदद मांगने के लिए किसी के पास जा भी नहीं सकते थे.
 
शाम को जब मैं घर पहुंचा, तब मेरी सूरत देखकर अनु बोली, "क्या हुआ डार्लिंग, आज तुम्हारा चेहरा इतना उतरा हुआ क्यों हैं?"

"अनु, हम लोग एक बहुत बड़ी मुसीबत में फस गए हैं," लिफाफा उसके हाथोने देते हुए मैं बोला.

फोटो देखकर अनु चिल्लाई, "ओह माय गॉड, ये सब क्या हैं और किसने किया?"

"कुछ पता नहीं, फोटोज के अलावा मोबाइल में वीडियो भी हैं. अपनी तो पूरी खटिया खड़ी हो गयी है."

मैंने उस मोबाइल फ़ोन को चार्जिंग में लगाते हुए आगे कहा, "इसी मोबाइल पर ब्लैकमेलर का कॉल आएगा जो आगे क्या करना हैं ये बताएगा. पता नहीं कितनी बड़ी रकम मांगेगा वो."

"तुम चिंता मत करो डार्लिंग, मैं कुछ भी बहाना करके डैड से पैसे लेकर आ जाऊँगी."

"वो तो ठीक हैं जान, मगर जब तक उसका फ़ोन नहीं आता तब तक कितनी परेशानी रहने वाली हैं, की वो कौन होगा, क्यों ऐसा किया और उसे कितने पैसे चाहिए.."

अगले चार दिन उलझन में गए, हमने डॉली को भी सब बता दिया, वो भी डर के मारे रोये जा रही थी. हम दोनोंने बड़ी मुश्किल से उसे समझाया.

शनिवार की सुबह उस मोबाइल फ़ोन की घंटी बजी.

"हेलो, कौन बोल रहा हैं?"

"मैं तेरा बाप बोल रहा हूँ साले, तेरी जान मेरी मुट्ठीमें हैं पराग."

इसका मतलब था की वो हमें अच्छे से जानता था. वो आदमी फ़ोन पर कपडा जैसा कुछ रख कर आवाज़ बदलने की कोशिश कर रहा था, मगर फिर भी उसकी आवाज जानी पहचानी सी लग रही थी.

अपने डर को छुपाते हुए मैंने कहा, "तुम जो भी हो, तुम्हारी मांग बताओ और फिर सारा नेगेटिव और वीडियो हमको वापस कर दो."

"अरे, इतनी आसानी से कैसे जाने दूंगा तुम तीनोंको? ग्यारह बजे ये फ़ोन लेकर तुम तीनो शॉपिंग मॉल में पहुंचो. फिर मैं इसी फ़ोन पर कॉल करके बताऊंगा की कहा मिलना हैं. हाँ, और एक बात का ध्यान रहे, अगर कुछ भी उलटी सीधी चाल चली या पुलिस के पास गए, तो कितनी बदनामी होगी ये तो तुम जानते ही हो. मेरा दूसरा साथी वो सारी चीज़े..."

"नहीं नहीं, हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे, जैसा तुम कहो, वैसा ही करेंगे. प्लीज, इन चीजोंको अपने पास ही रक्खो."

हमने डॉली को तैयार रहने के लिए फ़ोन किया और उसे पिक अप करके तीनो समय पर शॉपिंग मॉल में पहुँच गए. दस मिनट बाद फिर घंटी बजी.

"मॉल के सामने एक छोटा सा कॉफ़ी शॉप हैं, वहाँ पर आ जाओ."

हम तुरंत वह पहुँच गए. वहाँ जो व्यक्ति खड़ा था उसे देखकर मेरी और डॉली की आँखें फटी की फटी रह गयी.

वो इंसान कोई और नहीं हमारे कंपनी का जनरल मैनेजर निखिल था, इसीलिए मुझे फ़ोन पर आवाज़ पहचानी सी लग रही थी.

निखिल की आयु कोई ३२ के आसपास की होगी. अनु ने उसे आज तक देखा नहीं था, इसलिए वो मेरी और प्रश्नार्थक रूपसे देखने लगी.

फिर पता चला की कुछ महीने पहले निखिल ने डॉली को पटाने की काफी कोशिश की थी, मगर डॉली ने उसे ठुकरा दिया था. उसी अपमान का बदला लेने के लिए उसने एक निजी जासूस (प्राइवेट डिटेक्टिव) डॉली के पींछे लगा दिया था. उसीने वो सारे फोटो और वीडियो लिए थे.

"निखिल सर, प्लीज मुझे माफ कर दीजिये. आप जो कहोगे, मैं वही करूंगी. मगर हमें इस मुसीबत से बचा लीजिये," डॉली ने रोते हुए कहा.

"निखिल सर, मैं आप को मुँह मांगी रकम। .."

मुझे आधे में ही रोक कर निखिल ने कहा, "पराग, तुम्हें क्या लगता हैं, ये सब मैंने पैसोंके लिए किया?"

"नहीं, सॉरी सर, आप हमें माफ़ कर दीजिये."

"अगले वीकेंड पर हम चारो खंडाला जाएंगे. एक बड़ा सा सूट बुक करो. एक ही बिस्तर पर मैं डॉली को चोदता रहूंगा और तुम तुम्हारी अनु डार्लिंग को."

"ओके निखिल सर, उसके बाद प्लीज..."

"देखेंगे, डॉली मुझे कितना खुश करती हैं, उसपर सारा निर्भर हैं. और हाँ, पुलिस या किसी के भी पास जाने की कोशिश की तो.."

"नहीं सर, हम समझ गए, हम ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे."

चेहरे पर विजय का हास्य लेकर निखिल वहाँ से चला गया, और हम तीनो सोच में डूबे रहे. आखिर मैंने कहा की घर जाकर ही आगेका प्लान बनाना चाहिए. यहाँ, कॉफ़ी शॉप में सबके सामने ये सब बाते करना उचित नहीं था.

घर पहुँच कर अनु और डॉली सिसकिया लेकर रोने लगी. मैंने दोनोंको समझा बूझा कर शांत किया. निखिल की बात मानने के सिवाय हमारे पास कोई और चारा नहीं था.
 
निखिल के कहने के अनुसार होटल की बुकिंग की गयी, अनु और डॉली दोनों वैक्सिंग करके पूरी चिकनी बन गयी. शुक्रवार की रात को हम खंडाला के होटल में पहुंचे. सूट में निखिल पहले से ही आ गया था.

डॉली: "निखिल सर, आप जो बोलोगे वो मैं करूंगी, मगर प्लीज आप कंडोम पहन कर सेक्स करिये."

"क्यों, तू तो पिल्स लेकर पराग से बिना कंडोम चुदती हो न, फिर मैं क्यों कंडोम लगाउ?"

निखिल का विवाह हो गया था मगर उसकी पत्नी कुछ महीने पहले ही उसे छोड़ कर चली गयी थी. शायद तभी से वो डॉली के पीछे पड़ा था. अब डॉली को जैसा जी चाहे चोदने का सुनेहरा मौका उसके पास था.

"सिर्फ जब मैं तेरी गांड मारूंगा, तभी कंडोम लगाऊंगा, वह भी मेरी सुरक्षा के लिए."

"नहीं निखिल सर, प्लीज, आज तक मैंने अपनी गांड नहीं चुदवाई है. प्लीज ऐसा मत किजीये."

"साली, जब मैं तुझे प्यार से पूंछ रहा था था तब मेरे साथ डिनर के लिए भी आने से इंकार करती थी, अब आज पहले तेरी चूत में अपना लौड़ा डालूँगा और फिर तुझे घोड़ी बनाऊंगा, और तेरी यह गोल गोल मस्त गांड भी चोद डालूंगा. साली रंडी, ये देख, ये वैसलीन की इतनी बड़ी शीशी क्या अचार डालने के लायी हैं क्या?"

निखिल की आंखोंमे अजीब चमक थी, जिससे मुझे डर लग रहा था.

उस सूट में आलिशान बेड था जिसपर निखिल ने डॉली को धकेल दिया और उसके कपडे खींचकर उतारने लगा. डॉली की आंखोमें आंसू थे मगर आज सभी बेबस थे. मैं भी लाख चाहने पर कुछ नहीं कर पा रहा था और खून का घूँट पीकर यह गया.

डॉली का टॉप और स्कर्ट उतर जाने के बाद वो काले रंग की ब्रा और छोटी सी चड्डी में आ गयी. निखिल ने उसकी ब्रा को खींच तानकर अलग किया और उसके भरपूर कठोर वक्षोंको दोनों हाथोसे आटे की तरह गूंधने लगा. बारी बारी एक एक निप्पल को चूसकर दातोंसे चबाने लगा. पीड़ा के मारे डॉली रोती रही मगर निखिल पर जैसे भूत सवार था. जोरके झटके से उसकी काली पैंटी भी फाड़ दी. अब डॉली पूर्ण नग्नावस्था में उसके सामने हताश और असहाय पड़ी थी.

अपने खुद के कपडे उतारते हुए निखिल ने कहा, "पराग, अनु, तुम दोनों भी नंगे होकर मेरे और डॉली के बाजू में लेट जाओ और ऐसी मस्ती से चुदाई करो जैसे की सिर्फ तुम दोनों ही इस बिस्तर पर हो."

सीधी सी बात थी की वह मेरी प्यारी अनुपमा डार्लिंग के नंगे बदन को देखना चाहता था और उसे चुदते हुए देखना चाहता था.
 
निखिल पूरा नंगा हो गया. उसके शरीर पर जगह जगह घने बालोंका जंगल था, और उसका आठ इंच का मोटा लौड़ा अपनी पूरी गर्मी में उठा हुआ था.

"चल रंडी, अब चुदने का मजा ले, मेरे पास कोई फोरप्ले नहीं , कुछ नहीं, सिर्फ पलंगतोड़ चुदाई."

"और तुम दोनों, चलो जल्दी नंगे होकर फकिंग में लग जाओ. देखु तो सही ये इतनी सुन्दर अनु नंगी कैसी लगती हैं."

निखिल ने डॉली की जाँघे अलग की और एक ही झटके अपना लौड़ा उसकी योनि में घुसा दिया. पहले झटके में आधा अंदर चला गया और दर्द के मारे डॉली चिल्लाने लगी. उसकी कोई परवाह किये बगैर निखिलने दूसरा झटका लगाया और अब उसका लगभग पूरा लिंग घुस गया. डॉली के वक्षोंको मसलते और रगड़ते हुए वो उसे जंगली जानवर की तरह चोदने लगा.

निखिल और नाराज़ न हो, इसलिए मैंने अनु के सारे कपडे उतार दिये और स्वयं भी नंगा हुआ. निखिल तो मानो डॉली का प्रायः बलात्कार ही कर रहा था, फिर भी वो दृश्य देखकर न जाने क्यों मेरा लौड़ा भी पूरा सख्त हो गया.

मैंने भी अनु को डॉली के बाजू लिटाया और उसकी चूत चाटने लगा. शायद बाजू में चल रही पलंगतोड़ चुदाई देखकर अनु भी उत्तेजित हो रही थी, इसलिए उसने मुझे सिक्सटी नाइन में आनेका हमारा हमेशा का इशारा (मेरी पीठ पर उंगलिया गोल घुमाई) किया. मैं झट उसपर उलटा हो गया और उसकी योनि को अपनी जीभ और होठोंसे सुख देने लगा.

आश्चर्य की बात ये थी की अनु की चूत हमेशा से ज्यादा गीली थी और लगातार कामरस की धरा बह रही थी. मैं भी उस रस की एक एक बूँद चाटता गया और अनु जैसे मेरे सख्त लिंग को चबा चबा कर खाने के प्रयास में थी.

निखिल डॉली को मसलता और चोदता गया, कुछ समय बाद उसकी आंखोंसे आंसू रूक गए. शायद वो भी इस आक्रामक संभोग को पसंद करने लगी थी. इतने में निखिल बोला, "चल छिनाल, अब घोड़ी बन. पहले तुझे पीछे से चोदूंगा और फिर तेरी गांड के बारे में सोचेंगे."

डॉली चुपचाप डॉगी पोज में आ गयी और फिर से निखिल ने उसको पीछे से चोदना चालु किया. अब निखिल कभी डॉली के लटकते हुए स्तनोंका मर्दन करता और कभी उसकी गांड पर पूरी ताकत से चांटे मारता. उन चाटों से डॉली के गांड लाल हुई जा रही थी.

मैं और अनु भी सिक्सटी नाइन से निकलकर मिशनरी पोज में चुदाई में लग गए.

"हाय, क्या सॉलिड माल मिला हैं तेरे को, साले फिर भी बाहर मुँह मारता फिरता हैं! अगर ये डॉली तुम दोनोंके बजाय तीन महीने पहले मुझे अपना सेक्स पार्टनर बना लेती, तो आज का यह दिन देखना नहीं पड़ता हरामी," डॉली को चोदते चोदते निखिल बोला।

बिना कुछ कहे मैं अनु डार्लिंग की टांगों में अपना लंड पेलता गया. निखिल की नजरे अनु की बड़ी बड़ी छातियों पर ही अटकी हुई थी.

जाहिर बात थी, की निखिल कोई शक्ति-वर्धक गोलिया खा कर आया था, ताकि उसका लंड जल्दी पानी नहीं छोड़े.

दो मिनट के बाद, वो हुआ, जिसके बारे में हम तीनोंने सोचा भी नहीं था.

"चल पराग, अब तू इधर आ और मैं तेरी अनु डार्लिंग को चोदूंगा."

"मगर आप तो सिर्फ डॉली.." अनु ने कुछ बोलने की कोशिश की, मगर उसे बीच में से काटकर निखिल बोलै, "अबे रंडी, तू गोवा में उस माइकल के साथ सब कुछ कर रही थी और अब मेरे सामने नखरे कर रही हैं."

"नहीं निखिल सर, वहाँ भी मैंने माइकल को चोदने नहीं दिया, उसके अलावा बाकी सब कुछ.."

"अब आज वो कमी भी पूरी होगी. साली, तेरेको क्या लगा, की मैं तुझे यहाँ सिर्फ मेरा और डॉली का सेक्स शो देखने के लिए लाया हूँ?" एक विकट हास्य करते हुए निखिल ने मुझे अनु के शरीर से बाजू में धकेल दिया और अनु के नंगे बदन पर सवार हो गया.

जैसे ही अनु की गीली चूत में निखिल ने अपना लौड़ा डाल दिया, वो भी डॉली की तरह चिल्ला उठी.

"उइ माँ, मर गयी, बाहर निकालो इसे प्लीज."

अब निखिल पर भूत, पिशाच सब सवार थे, वो अनु की टाँगे फैलाकर उसमें अपना लिंग घुसेड़ते गया. एक के बाद एक धक्के मारकर अपना पूरा लिंग अनु के अंदर पेल दिया.

ये सब देख कर मैं तो हक्का बक्का हो गया था. डॉली भी डर के मारे चुपचाप देख रही थी.

"पराग, चल अब तू ये नज़ारा देखेगा और उसी समय डॉली तेरा लौड़ा चूसेगी. इतना चूसेगी की तेरा पूरा पानी उसके मुँह में झड़ जाए."

पूरी तरह अपमानित और पराजित हो कर जैसे मेरा शरीर पुतले की तरह अकड़ गया.

"डॉली, चूस उसको, जल्दी," निखिल ने फ़रमाया.

"सॉरी पराग, मुझे माफ़ कर दो," इतना कहकर डॉली ने मेरा पूरी तरह मलूल और लटकता हुआ लिंग अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

निखिल ने मुझे ऐसी जगह खड़ा किया था की मैं निखिल-अनु का संभोग अच्छे से देख सकूं और वो मेरे लंड को डॉली द्वारा चूसने का सीन अच्छे से देख सके.
 
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