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Adultery माशूका बनी दोस्त की बीवी

अबकी बोतल सनी पर रुकी और मुझे बताना था, मैं तो खार खाए बैठी थी, मैंने कहा- सनी मेरी सुबह वाली ब्रा पैंटी सेट पहन कर आएगा…

अब बावली खेलने की बारी सनी की थी।

नीता हंसते हंसते लोटपोट हो रही थी… सनी को ब्रा पेंटी पहन कर आना पड़ा… उसे देख कर हम दोनों हंसते हंसते बेड पर ही उछलने लगे।

अब मस्ती के आलम में गेम आगे बढ़ा।

अबकी बोतल नीता पर आई और सनी को बताना था… नीता सनी से रिक्वेस्ट करने लगी- प्लीज मेरी इज्जत बचा लो..

पर अब सनी भी मार खाया था… उसने भी फरमान जारी कर दिया कि नीता भी नाईट ड्रेस में आये वो भी बिना ब्रा पैंटी के…

नीता के सामने अब नाटक का कोई चारा नहीं था, उसे ड्रेस पहननी पड़ी… नीता नाईट ड्रेस में हूर की परी लग रही थी… गोरी चिट्टी वो.. ऊपर से जालीदार ड्रेस जिसमे से झांकते उसके गोल गोल मम्मे… उसकी बिना बालों की चूत भी झलक दिखला रही थी।

सनी का तो लंड पैंटी में तम्बू बन चुका था… मैंने हंसते हुए नीता को सनी का लंड दिखाया।

हम दोनों हंसने लगी, सनी शर्मा गया।

गेम फिर चल पड़ा… अबकी बार बोतल सनी की ओर रुकी और मुझे बताना था, तो मैंने कहा- सनी खड़ा होकर एक झटके में अपनी पैंटी उतरेगा और फिर पहन लेगा।

सनी ने पहले तो नखरे दिखाए और फिर खड़ा हो गया… उसने पहले तो ब्रा उतार फेंकी और फिर उसने अपनी पैंटी भी उतार फेंकी … अब वो बिल्कुल नंगा खड़ा था।

हम हंस रहे थे उसे देखकर… वो अचानक मुझपर झपटा और अगले एक मिनट में उसने जबरदस्ती मेरा टॉप उतार दिया।

अब गेम वासनामय हो गया था।

मुझे भी पागलपन सूझा.. मैंने नीता का टॉप और पैंटी दोनों उतार दी… इसी बीच सनी ने मेरी भी पैंटी नीचे खींच दी… अब हम तीनों बिल्कुल नंगे थे।

एक मिनट तो हम तीनों की गर्म सांसें ही कमरे में सुनाई दे रही थीं।

अब बारी मेरी थी शर्म उतारकर गेम आगे बढ़ाने की… मैंने नीता की चूत में अपना मुंह कर दिया और चूसने लगी।

सनी भी पुरानी याद ताज़ा करता हुआ नीता के मम्मों को चूसने लगा।

नीता हांफ रही थी, मैंने उसकी चूत में उंगली करनी शुरू कर दी थी और नीता ने अपने मुंह में सनी का लंड ले लिया था।

मुझे लगा की अब मुझे बीच से हट जाना चाहिए और सनी को नीता को भरपूर चोद सके।

मैं हटी और नीता के होंठों से अपने होंठ मिला दिये, उधर सनी नीचे खिसक कर अपना लंड नीता की चूत में घुसा चुका था।

अब उन दोनों का घमासान चालू था… नीता भी पुराने दिन ताज़ा कर रही थी और सनी भी बिना किसी डर के उसे चोद रहा था।

अचानक नीता ने सनी को नीचे किया और खुद उसके ऊपर चढ़ गई… पर वो जल्दी ही हांफ गई… सनी का निकल ही नहीं रहा था।

अबके सनी ने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत में घुस गया। उसने अपने हाथों से उसके मम्मे दबाने शुरू कर दिये।

वो बड़ी बेदर्दी से अब नीता को चोद रहा था, एक बार तो उसने नीता के बाल भी खींचे… पर नीता तो मस्त होकर चुदवा रही थी।

सनी ने सारा माल उसकी चूत में ही निकाल दिया और नीता निढाल होकर पेट के बल लेट गई और सनी भी उसके ऊपर चढ़ा चढ़ा ही लेट गया…

मेरी चूत अभी प्यासी थी, पर मैंने यह सोचा कि चलो आज मैंने नीता पर एक एहसान कर दिया… मुझे क्या मालूम था कि वो दोनों तो इस खेल के पुराने खिलाड़ी थे… आज तो उन्होंने अपने खेल को मेरी मंजूरी का जमा पहनाया।

हम तीनों बहुत खुश थे।
 
मेरी चूत अभी प्यासी थी, पर मैंने यह सोचा कि चलो आज मैंने नीता पर एक एहसान कर दिया… मुझे क्या मालूम था कि वो दोनों तो इस खेल के पुराने खिलाड़ी थे… आज तो उन्होंने अपने खेल को मेरी मंजूरी का जमा पहनाया।

हम तीनों बहुत खुश थे।

नीता ने मुझसे पूछा कि क्या मैं विकास से चुदना चाहती हूँ…

मेरा कोई मन नहीं था.. मैंने कहा- अभी नहीं… कभी मन होगा तो बता दूँगी।

खाना खाकर हमने नीता को विदा किया क्योंकि अभी मेरी चूत की प्यास बुझनी बाकी थी।

जाते जाते नीता ने हमसे यह वादा लिया कि विकास को इसका कभी पता नहीं चलना चाहिए और जब भी हम तीनों का मूड होगा हम फिर इकट्ठे होंगे।
 
ग्रुप सेक्स के नए जोड़ीदार

में आपने पढ़ा था कि कैसे नीता ने अपने और सनी के रिश्ते को सनी की पत्नी रोमा से एप्रूव करा लिया और यही नहीं सनी और रोमा की जिन्दगी में भी बहार ला दी। अब नीता और सनी रोमा के सामने ही और बल्कि उसको भी शामिल करके ग्रुप सेक्स का आनन्द लेते थे।

दूसरी तरफ नीता के घर पर नीता के पति विकास को ग्रुप सेक्स का ऐसा नशा चढ़ गया था कि वो सनी को जबरदस्ती घर बुलाता और वो और सनी मिलकर नीता की चुदाई करते।

रोमा को इस खेल की जानकारी नहीं थी और विकास को इसकी जानकारी नहीं थी कि रोमा के घर क्या गुल खिलता है।

हालाँकि नीता ने कई बार रोमा से पूछा कि अगर रोमा चाहे तो नीता विकास को इस खेल में शामिल कर सकती है पर रोमा को कुछ झिझक थी इस वजह से उसने कभी इसमें उत्सुकता नहीं दिखाई।

एक दिन सनी ने घर आकर रोमा को बताया कि उसका एक बचपन का दोस्त समीर यहाँ एक इंश्योरेंस कंपनी में ब्रांच हेड बन कर आया है और वो आज उसकी फैक्ट्री आया था।

समीर बड़ा जिंदादिल और स्मार्ट बंदा है और सनी और समीर की स्कूल और बाद में कॉलेज में खूब पटती थी। समीर की शादी को भी पांच साल हो गए हैं और उनकी एक बेटी है जो समीर की पत्नी प्रीति की मां के पास ही रहती और पढ़ती है।

रोमा ने कहा कि अगर सनी चाहे तो समीर और प्रीति को खाने पर बुला ले।

सनी ने बताया कि अभी ट्रान्सफर के बाद प्रीति आगरा में ही अपनी माँ के पास ही रह रही है… एक महीने बाद आएगी।

आज सनी बेड पर मस्त मूड में था… टॉपिक आज सिर्फ समीर और उसकी और सनी की बदमाशियाँ थीं।

सनी ने बताया कि वो और समीर साथ साथ पढ़ते समय एक दूसरे का लंड पकड़ लिया करते थे… पॉकेट मनी से डेबोनेयर या प्लेबॉय मैगजीन खरीदते और फोटो देखकर मुठ मारते… वगैरा वगैरा…

समीर की एक बात पर सनी ने बहुत जोर दिया और रोमा को भी सुन कर अच्छा लगा कि समीर का लंड मोटा और लम्बा है।

बताते बताते सनी का भी खड़ा हो गया और रोमा भी उत्तेजित हो गई थी।

चुदाई के दौरान रोमा ने सनी से कहा कि आज उसका लंड कुछ बदला बदला सा लग रहा है, कहीं उसने अपना लंड समीर से बदल तो नहीं लिया।

यह सुन कर सनी को और जोश आ गया… वो अपनी स्पीड बढाते हुए बोला- ले आज तू समीर से ही चुद ले… वो आज तेरी फाड़ ही देगा…

रोमा ने भी कह दिया- चलो, आज मैं भी टेस्ट बदल कर देख ही लेती हूँ, नीता भाभी तो रोज ही कहती है कि एक से रोज रोज क्या चुदना!

घमासान चुदाई के बाद दोनों एक दूसरे की बाँहों में सो गए।

पर एक सपना जग गया… ग्रुप सेक्स के खेल के नए जोड़ीदारों की लिस्ट में एक नया नाम जुड़ने की तैयारी हो रही थी।

अगले दिन सनी का फोन आया कि आज शाम को समीर खाने पर आएगा, कुछ अच्छा बना लेना और अच्छा सा कुछ पहन लेना।

रोमा ने पूछा- अच्छा क्या पहनूँ?

तो सनी बोला- कुछ मत पहनना…

रोमा बोली- ज्यादा पागलपन मत सोचा करो, हो सकता है समीर अब बदल गया हो…

खैर यह तो मजाक था, ऐसे कौन पहली बार में ही कुछ होने जा रहा था।

शाम को सनी ने तो नहाकर लुंगी और कुरता पहन लिया, रोमा ने एक लॉन्ग टाइट मिडी पहनी।

रोमा ने देखा कि उसके बूब्स और बम्प्स खूब शेप में दिख रहे हैं।

हाँ एक चीज जो सनी ने दिखाई कि उसकी पैंटी लाइन दिख रही थी… सनी ने जोर दिया तो रोमा ने पैंटी उतार दी, अब उसके चूतड की गोलाई गजब ढा रही थी।

घंटी बजी, सनी ने गेट खोला, समीर था… गोरा, लम्बा और हंसमुख… बड़ी बेबाकी से उसने सनी को गले लगाया और रोमा से हाथ मिलाया और उसे एक बड़ी चॉकलेट गिफ्ट दी।

क्या जादू था समीर में… रोमा को तो शब्द ही नहीं मिल रहे थे, फिर वो संभल कर बोली- बैठिये भाई साहब… बताईये क्या लेंगे… हार्ड ड्रिंक या सॉफ्ट?

समीर बैठते हुए बोला- मैंने आपको गले नहीं लगाया, इसका मतलब यह नहीं कि आप मुझे भाई साहब बोलें… मैं और सनी कितने खुले हैं, यह मैं समझता हूँ कि आपको सनी ने बता दिया होगा अब तक?

रोमा ने कहा- आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि सनी ने मुझे क्या क्या बताया होगा। भला कोई अपनी बदमाशियाँ दूसरे को बताता है?

समीर बोला- आप भोली न बनें… मैं सनी को बहुत अच्छे से जानता हूँ… अगर यह लड़का नहीं होता तो मैं इससे ही शादी करता।

मैंने भी कह दिया- बिना शादी किये ही आप लोगों ने क्या कम मस्ती की थी…

समीर हंस पड़ा, बोला- देखिये पकड़ा गया न चोर… अब आप कैसे कह सकती हैं कि सनी ने आपको सब कुछ नहीं बताया और सनी ने ही क्या कल फोन पर मैंने भी प्रीति को सब कुछ बताया तो वो तो कह रही थी कि चलो अब मेरी जगह सनी से ही काम चला लेना जब तक मैं न आऊँ…हम सब हंस पड़े…

आगे की कहानी आप रोमा से ही सुनिए…

मैंने फिर पूछा- बियर लाऊँ या व्हिस्की?

समीर बोला- जिसमें आप साथ दें, वो ले आयें।

मैं बियर में ही कम्फर्ट फील कर रही थी तो वही लाई…

इन दोनों ने लार्ज गिलास बनाया और मैंने स्माल!

बियर स्ट्रोंग थी, कुछ तो नशा उसका था और कुछ माहौल बन गया था।

समीर और सनी के नॉन-वेज जोक्स शुरू हो गए।

समीर तो एक बार बोला- सनी तुझे नहीं लगता कि अगर रोमा मेरी और तेरी शादी से पहले एक साथ हमें दिखी होती तो हम दोनों ही इससे शादी कर लेते और एक साथ रह लेते…

ऐसे ही हंसी मजाक में खाना खाकर समीर जाने को हुआ तो सनी बोला- अभी दस ही तो बजे हैं तुझे घर जाकर क्या करना है, रूक कॉफी पीकर जाना।

मैं जब कॉफी बना रही थी तो सनी किचन में आया और बोला- कॉफ़ी लेकर तुम समीर के पास बैठना।

मैंने पूछा- क्यों?

तो सनी बोला- उसका लंड देखना, बाहर आने को तैयार है।

खैर में कॉफ़ी लेकर बाहर आई और अलग ही बैठी।

सनी ने मुंह बनाया, मैंने कहा- यहाँ से अच्छा दिखेगा।

समीर बोला- क्या अच्छा दिखेगा?

मैंने कहा- आपका नूरानी चेहरा!

समीर हंस कर बोला- सनी, आज तक जितनी लड़कियों की फोटो देखकर हमने अपने हाथों को तकलीफ दी है, उनमें रोमा सबसे खूबसूरत है।

मैं शरमा गई।

समीर ने कहा- अच्छा, अब थोड़ी सीरियस होकर मेरी बात सुनो, मुझे अपनी कंपनी के लिए एक एजेंट चाहिए जो फोन पर ही या कभी कभी मेरे साथ गाड़ी में जाकर क्लाइंट्स से मिले और पालिसी बेचे, इसमें अच्छी कमाई है।

समीर चाहता था कि सनी या मैं इस काम को कर लें।

सनी को प्रपोजल अच्छा लगा, अपने लिए नहीं पर मेरे लिए… क्योंकि बेटे के स्कूल के समय सुबह आठ बजे से दोपहर एक बजे तक मैं बिल्कुल खाली थी।

यह तय हुआ कि मैं एक दो हफ्ते करके देखती हूँ अगर अच्छा लगा और कर सकी तो करूंगी।

अगले दिन में दस बजे समीर के ऑफिस गई।

समीर ने मुझे दोपहर तक अपनी पॉलिसीस के बारे में बताया और चलते समय कुछ ब्रोशर्स दिये और कहा कि मैं इन्हें पढूँ।

अगले दिन के लिए यह तय हुआ कि समीर मुझे घर से नौ बजे ले लेगा और हम एक क्लाइंट के ऑफिस में मिलेंगे।

सनी से पूछा तो उसे कोई एतराज नहीं था।
 
अगले दिन मैं जीन्स और टॉप मैं समीर के साथ गई।

मेरा जाना इतना शुभ हुआ कि हमें दस लाख का बिज़नस मिल गया… समीर तो लौटते समय ख़ुशी से पागल था। मैं भी बहुत खुश थी… बहुत अच्छा पैसा कमीशन में मिलेगा मुझे!

समीर ने मुझे घर ड्राप किया… वो जाने लगा, मैंने कहा- रुक कर जाना…

मैं और वो लॉक खोल कर अंदर आ गए।

समीर ने मेरे हाथ अपने हाथ में लेकर कहा- तुम बहुत भाग्यशाली हो मेरे लिए!

मैं पता नहीं किन सपनों में खोई थी… कब उससे लिपट गई, कब हमारे होंठ मिल गए… कोई होश नहीं…

होश आया तो अलग हुई।

समीर सॉरी बोलते ही बाहर जाने लगा, मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा- सॉरी क्यों? क्या कुछ गलत हो गया… क्या सनी की बीवी तुम्हारी दोस्त नहीं हो सकती।

अब तो समीर ने मुझे पागलों की तरह लिपट कर चूमना शुरू कर दिया और हमारा यह चूमने का कार्यक्रम सोफे पर बैठते ही ख़त्म हुआ और अब समीर के हाथ मेरे टॉप के अंदर थे या यूं कहें कि मेरा टॉप उतार रहे थे… मुझे भी कोई एतराज नहीं था।

समीर ने मेरी ब्रा खोल कर मेरे मम्मे चूसने शुरू कर दिये।

हम ज्यादा आगे बढ़ते, तभी सनी का फोन आ गया।

मैं संभल कर सनी को अपने बिज़नेस के बारे में बताने लगी। और यह भी बता दिया कि समीर मुझे छोड़ने घर आये हैं।

सनी को बिल्कुल बुरा नहीं लगा, उसने समीर को भी मुबारकबाद दी और तय हुआ कि शाम को डिनर बाहर करेंगे।

मगर जो अब चल रहा था वो तूफ़ान इस फोन से थम सा गया, समीर कपड़े ठीक करके जाने लगा।

गेट तक पहुंचा ही था कि अचानक मैंने उसे आवाज दी…

वो पलटा तो मैं अपनी जीन्स उतारकर सिर्फ पैंटी में खड़ी थी।

मुझे इस हालत मैं देखकर समीर पगलों सा पलटा और अपना ब्रीफकेस सोफे पर पटककर मुझे बेतहाशा चूमने लगा और फिर मुझे गोदी में उठाकर बेड रूम में ले गया।

पांच मिनट बाद हम दोनों बिना कपड़ों के एक दूसरे की बाँहों में थे, मैं उसके लंड को कस के पकड़े थी।

वो नीचे हुआ और मेरी चूत को चूसने लगा।

उसने मेरी टांगों को ऊपर उठाकर अपनी जीभ पूरी मेरी चूत के अंदर कर दी और चूसने लगा।

वो बार बार अपना थोड़ा सा थूक भी मेरी चूत में डाल देता, जिससे मेरी चूत और आस पास का इलाका गीला और चिकना हो गया।

अब उसने अपनी एक उंगली भी मेरी चूत में करनी शुरू कर दी।

मेरा मजा बढ़ रहा था, मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत को चौड़ा किया हुआ था और मैं चाह रही थी कि वो और जोर से मेरी चूत की मालिश करे।

मैंने सोचा और उधर अब समीर ने अपनी दो उंगलियाँ मेरी चूत में अंदर बाहर करनी शुरू कर दी।

मेरे मुल्ह से सीत्कार निकल रही थी, मेरी चूत उसके थूक से लबलबा रही थी।

अब उसने अपनी उंगली से थोडा सा थूक मेरी चूत से खिसका कर मेरी गांड में कर दिया और अपनी एक उंगली से गांड के ऊपर मसलने लगा।

मुझे लगा कि वो गांड को चिकना कर रहा है, मैंने कभी गांड मरवाई नहीं थी, मुझे मालूम भी नहीं था कि गांड भी मरवाई जाती है।

समीर ने अचानक मेरे मुंह को अपने होठों से बंद करके मेरी गांड में उंगली कर दी।

मैं दर्द से छटपटाई तो तुरंत समीर ने उंगली बाहर कर दी और अब अपना लंड मेरी चूत के ऊपर रख दिया।

चूत तो नए मेहमान के स्वागत के लिए तैयार थी और मेरी जिन्दगी का भी वो पल आ गया था जब मैं अपने पति के अलावा किसी और से चुदने जा रही थी।

मैंने अपनी टांगें फैला दी और समीर ने एक ही झटके मैं अपना मूसल मेरी चूत में घुसा दिया।

अब समीर ने जो चुदाई की स्पीड पकड़ी, उसके सामने तो हर चुदाई फेल!

समीर ने मेरे चूतड़ों के नीचे एक तकिया लगा दिया था, जिससे मेरी चूत और उठ गई थी।

वो बहुत मस्ती से मेरी मस्त चूत चोद रहा था, मैं भी नशे में कह रही थी कि अब तक कहाँ थे मेरे राजा… आज तो तुम्हारी मर्दानगी ने मेरे बदन के सारे पेंच ढीले कर दिए… अब रुको नहीं… चुदाई स्पीड से करो…

वो भी कह रहा था- रानी, अब तक मुझे क्यों नहीं मिली… आज ऐसी चुदाई करूँगा कि तुम्हारी चूत मेरे लंड की गुलाम हो जाएगी।

मेरी चूत तो चूत, बेड का भी ऐसा हाल हो गया था कि पानीपत की लड़ाई इसी पर हुई हो।

हम दोनों पसीने से लथपथ एक दूसरे से गुंथे पड़े थे। लंड और चूत कोई भी छूटने को तैयार नहीं… सच इतना मजा कभी चुदाई में नहीं आया था।

मैं और समीर एक साथ चरम आनन्द पर आये, समीर ने मुझसे पूछा- माल कहाँ निकालूँ?मैंने कॉपर टी लगवा रखी है, इसलिए मैंने उससे माल अंदर ही गिरवाया।

अंदर गिरवाने मैं चूत को ग़ज़ब का आनन्द मिलता है।

कपड़े पहन कर समीर चला गया और मैं नहाकर फ्रेश हुई और नीता से फोन पर गप्पें मारने लगी।

आज मैं अपने को नीता से कम भाग्यशाली नहीं मान रही थी।

अपने पति के दोस्त से चुद कर मुझे बहुत मज़ा आया था और मैं खुद को नीता से कम भाग्यशाली नहीं मान रही थी।

और सच बताऊँ तो अब मेरे मन में एक बार विकास का लंड भी खाने की इच्छा हो रही थी।

मेरा बेटा स्कूल से आ गया था।

उधर मेरी मम्मी भी कहती थी कि बेटे को पढ़ने उन्हीं के पास भेज दूँ।

मेरा बेटा भी नानी से खूब हिलमिल गया था।

आज की बिजनेस डील की कामयाबी और उसके बाद मिले समीर के लंड से मेरे मन मैं भी यही आ रहा था कि बेटे को मम्मी के पास भेज दूं। सोचा, चलो सनी से पूछूंगी, वो शायद ही तैयार हो क्योंकि वो बेटे से बहुत प्यार करता है।

हम दोनों खाना खाकर सो गए।

मेरी आँख तीन बजे खुल गई… चूत फिर प्यासी हो रही थी… मैंने समीर को फोन किया और एक लम्बा किस दिया।

समीर बोला- जानू प्लीज सनी को मत बोलना… पर अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह पाऊँगा।

हम दोनों ने पौना घंटा फोन पर बातें की।

शाम को डिनर पर मिल ही रहे थे इसलिए फोन रखा।

सनी फैक्ट्री से सात बजे आया, चाय पीकर दोनों बाप बेटे खेलते रहे।

मैंने बेटे को पट्टी पढ़ा रखी थी कि वो अपने पापा से नानी के पास जाने की जिद करे।

और वही हुआ, बेटा सनी से नानी के पास जाकर वहीं पढ़ने को कहने लगा, सनी ने मना कर दिया।

मैंने भी सोचा कि देखते हैं।

नहा धोकर हम लोग डिनर पर गए, वहाँ लिफ्ट में बेटे ने जाने से मना कर दिया, वो और सनी एस्केलेटर्स से गए और मैं और समीर लिफ्ट से!

लिफ्ट में हमारे होंठ मिल गए और समीर के हाथ मेरे मम्मे दबाने लगे।

लिफ्ट रुकते ही समीर ने अपना रूमाल निकला और अपने होठों से मेरी लिपस्टिक साफ़ की… हम हंसते हुए बाहर आये।

सनी ने पूछा- क्या हुआ?

मैंने कहा- समीर मुझे छेड़ने की कोशिश कर रहा था।

इस पर सनी बोला- यार अगर न छेड़ पाया हो तो एक बार और कोशिश कर ले… सच बहुत गर्म माल है मेरी बीवी…

हम तीनों हंस पड़े और सामने रेस्तराँ में घुस गए।

टेबल पर समीर अपने पैर से बार बार मेरी साड़ी उठाने की कोशिश कर रहा था। सनी की निगाह बचाकर कर उसने अपनी स्पून मेरी स्पून से बदल ली और स्पून को चाटने लगा।

मेरी चूत तो गीली हो रही थी, मेरे दिमाग मैं एक आईडिया आ रहा था कि अगर प्रीति भी इस खेल में शामिल हो जाए और मैं भी विकास से चुद लूँ तो हम छह लोगों का ग्रुप बन जाएगा और चुदाई की ऐसी रासलीला हममें से किसी ने सोची नहीं होगी।

रात को सनी ने यह शर्त रखी कि आज बेड पर बिना कपड़ों के ही जायेंगे।

मगर बेटा सो नहीं रहा था।

मैं कॉफ़ी बना लाई और सोफे पर बैठे सनी की गोद मैं पसर गई।

मैंने फ्रॉक पहना था और नीचे कुछ नहीं था।

सनी की उंगली चूत में पहुँच गई और वो मुस्कुरा कर बोला- आज तो शब्बो पूरी तैयार है।

सनी मेरी चूत को शब्बो कहता था और मैं उसके लंड को रुस्तम।

सनी बोला- कहीं यह समीर को देखकर तो चिकनी नहीं हो रही?

मेरी चोरी पकड़ी गई… पर मैं बोली- रुस्तम के आगे दुनिया का कोई पहलवान नहीं टिक पायेगा। आज बहुत मूड है, पर ये सो नहीं रहा है।

सनी का भी मूड बना हुआ था पर बेटे की मजबूरी थी।

मैंने सनी को प्यार से कहा- सुनो, बेटे को इसकी नानी के पास भेज देते हैं… वहाँ भी तो घर ही है। यहाँ मैं तुम और नीता भरपूर मौज लेंगे और प्रीति को आने दो शायद समीर भी तैयार हो जाए।

मैंने उसे दोपहर का किस्सा कुछ नहीं बताया। नीता का नाम सुनकर और यह सुनकर कि प्रीति भी इसमें जुड़ सकती है, सनी का लंड तूफ़ान मचाने लगा और उसने बेटे को नानी के पास भेजने की हाँ कर दी।

मैं और बेटा ख़ुशी से कूदने लगे, मैंने बेटे से कहा- जल्दी सो जाओ वरना पापा नहीं भेजेंगे।

वो बेचारा फटाफट सो गया और हमारे कपड़े केले के छिलके जैसे उतर गए और मैं नंगी ही सनी की पीठ पर लटक गई।

सनी ने मेरी दोनों टांगें अपने पेट पर लपेट ली और मुझे लेकर बेड पर गया।
 
आज तो बेड की भी शामत आई हुई थी, उसके सारे पेंच तो समीर और मेरी घमासान चुदाई में ढीले हो गए थे और रात भी रंगीन होने को थी।

मुझे चिपटा कर सनी ने पूछा- समीर का कैसा लगा?

मैंने पूछा- क्या कैसा लगा?

सनी मेरे निप्पल मसलते हुए बोला- उसका लंड?

मैंने भी रो मैं कह दिया- दिलवा दो तब बताऊंगी कैसा लगा।

सनी मेरे ऊपर चढ़ गया और अपना लंड मेरी चिकनी चूत में घुसा कर बोला- सुन, तू समीर को पटा ले और अपनी गर्म चूत उसे दे दे ताकि वो भी प्रीति की चूत मुझे दिलवा दे।

मैंने ड्रामा करते हुए कहा- नहीं, मुझे तुम्हारे अलावा किसी और से नहीं चुदना। मुझे जितना मजा तुम देते हो, और कोई नहीं दे पायेगा।

अब सनी मुझे चोदते हुए बोला- नहीं मेरी जान, नए लंड और नई चूत से बड़ा मजा आता है। तू एक बार कर के तो देख!

मैंने कहा- अभी नहीं, प्रीति को आ जाने दो, देख लें वो कैसी है तब सोचेंगे। कहीं ऐसा न हो कि समीर मुझे तो चोद ले और अपनी बीवी के नाम पर मना कर दे और इस बीच मैं भी समीर से नजदीकी बढ़ा लेती हूँ।

अब मैंने सोचा कि क्या करूँ जो नीता और सनी खुद मुझे विकास के लंड के लिए जोर दें।

मैंने सनी से कहा- तुम्हें नहीं लगता कि कभी अगर विकास को मालूम पड़ गया तुम्हारे और नीता भाभी के बारे में, तो नीता भाभी को दिक्कत हो जायगी?

अब सनी क्या बताता कि विकास ने खुद ही तो नीता की चूत उसे दिलाई है।

पर अगले दिन सनी ने नीता को फोन करके कहा कि रोमा तैयार है, उसे विकास का लंड से ठुकवा दो।

नीता बड़ी खुश हुई।

नीता ने रात को बेड पर विकास से कहा- तुम्हें एक चूत और दिलवा दूं वो भी गर्म गर्म तो कैसा रहे?

यह सुन कर विकास ने जबाब तो नहीं दिया पर अपना लंड पूरा घुसेड़ दिया नीता की चूत में और उसके मम्मों को जोर से दबाते हुए बोला- अब किसकी चूत पर चढ़ आई हो?

विकास बोला- मैं तुम्हें अच्छे से जानता हूँ, तुम जरूर किसी चूत से लेस्बियन हुई होगी और अब उसकी गर्मी मेरे लंड से शान्त करना चाहती हो।

नीता बोली- हाँ, बात तो बिल्कुल यही है।

नीता ने रोमा का नाम लिया तो रोमा का नाम सुनते ही विकास के धक्के बढ़ गए, क्योंकि रीमा की मटकती गांड का दीवाना था वो!

नीता और सनी ने दो दिन बाद का सनी के घर पर ही डिनर कम कॉकटेल का प्रोग्राम बनाया।

इस बीच सनी और रोमा अपने बेटे को उसकी नानी के पास छोड़ आये थे।

अगले दिन नीता अपने और रोमा के हाथों और पैरों मैं मेहंदी लगवा लाई थी।

रोमा ने पूछा- क्यों लगवा रही हो?

तो नीता ने हंस कर कहा- तेरी सुहागरात की तैयारी जो हो रही है।

तय दिन पर रात को विकास और नीता सनी और रोमा के घर पर आये।

दिन में नीता ने एक बैग रोमा को भिजवाया था कि इसमें नीता और विकास के कपड़े हैं।

रोमा समझी नहीं, पर जब शाम को सनी घर आया तो उसने बताया कि नीता ने पार्टी का ड्रेस कोड रखा है कि लड़कियाँ बिना ब्रा पेंटी के सिर्फ फ्रॉक पहनेंगी और लंड वाले मतलब लड़के लुंगी कुरता।

और चूंकि ये कपड़े पहन कर विकास नीता घर से नहीं आ सकते थे इसलिए उन्होंने अपने पहनने के कपड़े पहले भेज दिये।
 
शाम को घर में घुसते ही सभी ने एक दूसरे को हग किया।

विकास के गले लगते रोमा को सिहरन सी हुई पर विकास ने कोई जल्दीबाजी नहीं की और न ही उसका कोई अंग दबाया।

यह रोमा को अच्छा लगा और उसका चेहरा चमक रहा था।

नीता और विकास उनके बेड रूम में गए और कपड़े बदल कर बाहर आये।

नीता की फ्रॉक का गला काफी गहरा था और ढीला था इसलिए जब वो झुकती तो उसके मम्मे झलक दिखला रहे थे।

पर नीता के मम्मे तो सबने देखे थे, नहीं देखे तो विकास का लंड और रोमा की चूत और मम्मे!

सब लोग ड्राइंग रूम में बैठे

सनी ने कोई इंग्लिश म्यूजिक लगा रखा था।

रोमा बार ट्राली खींच लाई, ट्राली पर व्हिस्की के अलावा सॉफ्ट ड्रिंक भी थी और आइस क्यूब्स और गिलास थे।

नीता और रोमा ने सॉफ्ट ड्रिंक ली और विकास और सनी ने व्हिस्की के पैग बनाये।

लड़कियों से कहा गया कि वो उनके पैग से एक सिप लेकर उन्हें दें।

मैंने सिप लेकर सनी को पैग दिया जिसे रास्ते से ही विकास ने ले लिया और नीता का सिप किया हुआ पैग सनी ने ले लिया।

विकास ने हमारे न नुकुर करने के बावजूद भी थोड़ी सी व्हिस्की हम दोनों के गिलास में टपका दी।

हंसी मजाक का दौर और नशे का सुरूर आधे पौन घंटे तक चलता रहा…

मैं तो अपने सिप धीरे धीरे ले रही थी और विकास ने मेरे गिलास में व्हिस्की डाली भी थोड़ी सी थी पर नीता के गिलास में व्हिस्की ज्यादा पड़ी थी और उसे नशा भी हो रहा था।

बहुत अश्लील मजाक शुरू हो गए थे, नीता पालथी मारकर सोफे पर बैठ गई और उसकी चूत अपना जला दिखा रही थी।

मेरे मुख से निकल गया- नीता, तुम्हारी मुनिया साफ़ नहीं दिख रही?

नीता अब नशे में आ गई थी, खड़ी हो गई और अपनी फ्रॉक पूरी ऊपर उठा ली, बोली- ले देख ले!सब हंस पड़े।

विकास ने नीता को अपने पास खींच कर उसकी चूत को चूम लिया और उसको अपनी गोदी में बिठा लिया।

मैं भी सनी की गोदी में बैठ गई और अपनी फ्रॉक को कंधे से गिरा लिया जिससे सनी मेरे मम्मी चूस सके।

अब नंगे का खेल शुरू हो गया था।

विकास ने पहले तो नीता को चूमना शुरू किया और उधर नीता ने अपने पैर से विकास की लुंगी हटा कर उसका लंड मुझे भी दिखा दिया।

क्या मजबूत लंड था विकास का!

मुझे उसे देखते हुए सनी ने मुझे गोदी से उतरा और विकास की ओर धकेल कर मेरी ओर आँख मारी।

मैं अब बेशर्म होकर विकास का लंड पकड़ कर उसे चूसने लगी और नीता अपनी फ्रॉक उतारकर सनी की लुंगी में घुस गई।

हम चारों नंगे हो चुके थे और वहीं कालीन पर सनी नीता के ऊपर चढ़ा हुआ उसे चोद रहा था और इधर विकास और मैं तो एक दूसरे को खा जाने के अंदाज में चुदाई कर रहे थे।

हम दोनों लड़कियों ने अपने हाथ से एक दूसरे को पकड़ा हुआ था और कभी कभी मम्मे भी दबा रही थी।

मैंने कहा- मैं चाहती हूँ कि आज मुझे सनी और विकास दोनों चोदें।

अब सनी नीचे लेट गया और मैं उसके पेट पर अपनी पीठ के बल लेटी। सनी ने अपना लंड पीछे से मेरी चूत में कर दिया अब ऊपर से विकास आया और अपने लंड को सनी के लंड के साथ ही मेरी चूत में घुसा दिया।

मैं दर्द से चीखी पर दोनों जालिमों ने अपने लंड को नहीं निकाला और मेरी चुदाई करनी शुरू कर दी।

नीता मेरे मम्मे चूसने लगी और सनी अपनी उंगलियाँ नीता की चूत में कर रहा था।

क्या मस्ती छा गई थी।

विकास ने अपना माल मेरी चूत में डाल दिया और अब सनी मेरे ऊपर चढ़ कर चुदाई करने लगा।

वो छूटने ही वाला था कि नीता आ गई और सनी का लंड खींच कर अपने मुख में कर लिया और सनी के छूटते उसका सारा माल गटक गई।

हम लोगों का ग्रुप सेक्स के सपने का पहला चैप्टर बखूबी ख़त्म हुआ।

खाना खाकर विकास और नीता घर गए और मैं और सनी एक बार और चुदाई का खेल खेलने की तैयारी करने लगे।

सुबह उठी तो चूत में दर्द था। आखिर दो दो लंड झेले थे मेरी शब्बो ने…

मैंने थोड़ी वेजीनल क्रीम लगा ली, दोपहर तक आराम आ गया था।

आज ऑफिस नहीं गई… समीर को झूठ बोल दिया कि आज कहीं कहीं जाना है।

एक दिन बाद रात को अचानक विकास और नीता बिना बताये आ गए, नाईट ड्रेस में ही थे, बोले की वाक पर निकले थे तो सोचा कॉफ़ी पी चलें।

मैंने हंस कर कहा- यह क्यों नहीं कहते कि सोचा चुदाई का खेल खेल चलें।

पर नीता बोली- नहीं आज नहीं… आज मैं छुट्टी पर हूँ, पीरियड्स आये हैं!

मैंने कहा- तुझे ही तो आये हैं, मुझे तो नहीं।

पर रात हो चुकी थी, कॉफ़ी पीकर वो चले गए और आज सनी भी थका था तो जल्दी सो गए।

सुबह उठी तो मोबाइल पर समीर का मैसेज था कि वो दस बजे आएगा, कहीं जाना नहीं है, बस उसका मन था आने का!

जाहिर है समीर सनी के जाने के बाद आना चाहता था।

मैंने खूब सोचकर सनी को कहा कि समीर दस बजे करीब आएगा, कोई नई पॉलिसी है उन को बताने आ रहा है।

सनी ने चाय पीते हुए मुस्कुराकर मुझ से कहा- बुरा न मानो तो एक बात कहूँ?

मैंने कहा- सनी कैसी बात करते हो, भला तुम्हारी बात का बुरा क्यों मानूंगी।

सनी बोला- समीर, तुमसे आकर्षित हो रहा है, लोहा गर्म है, चोट कर दो। थोड़ी सी लिफ्ट ज्यादा दे दो, अगले हफ्ते प्रीति भी आ रही है, अगर ये दोनों भी हमारे ग्रुप में आ जायें तो मजा आ जायेगा।

सनी ने प्रीति की फोटो देख रखी है, इसलिए वो प्रीति में ज्यादा इंटरस्टेड था।

मैं मुस्कुरा दी, अब उसे क्या बताती कि मैं और समीर तो गंगा नहा चुके हैं।

हाँ यह मुझे यकीन था कि समीर मेरे को पाने की चाहत में प्रीति को सनी से चुदवा देगा।

सनी के जाने के कुछ देर में ही समीर आ गया, अंदर आते ही हम दोनों के होंठ मिल गए।

आज मैं जान बूझकर समीर को चुदाई से दूर रखना चाहती थी।

समीर ने जैसे ही मेरे ट्रैक सूट में हाथ डालना चाहा, मैंने कहा- जान आज नहीं, आज मैं छुट्टी पर हूँ।

समीर मुस्कुरा दिया। वो सोफे पर बैठ कर नई पॉलिसी निकालने लगा, मैं चाय नाश्ता ले आई…

मुझे मालूम था कि समीर कुछ खा के नहीं आया होगा।

समीर का मनपसंद नाश्ता था… मैंने समीर को एक लम्बा किस दिया और नाश्ता शुरू करने को कहा।

वो बहुत खुश होकर नाश्ता करने लगा।

उसने बताया की उसे मकान मिल गया है और वो आज शाम को आगरा जायेगा प्रीति को लाने, परसों आ जायेगा।

समीर मुझे कुछ फोन नंबर और पते दे गया कि मैं इन लोगों से ऑफिस के एक स्टाफ के साथ जाकर मिल लूं और नई पॉलिसीज उन्हें समझा दूं।

जाते समय मैंने समीर को हग किया और वादा किया कि मैं उसके लिए हमेशा एक अच्छी दोस्त रहूंगी और उनके संबंधों से प्रीति और समीर के संबंधों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

समीर ने एक प्रेमी की तरह मुझे जोर से चिपकाते हुए लम्बा किस दिया।

तीसरे दिन सुबह मैंने ही फोन करके समीर से पूछा कि आ गए क्या।

उसने बताया कि आधे घंटे में पहुँच जाऊँगा।

मैंने साउथ इंडियन डिश बनाई थी, वो और चाय लेकर मैं और सनी समीर के घर पहुंचे।

वो लोग अभी आये ही थे।

प्रीति पतली लम्बी सी और बहुत मिलनसार लड़की थी, वो मुझ से गले लगी और बोली- भाभी थैंक्स! आपने समीर का बहुत ध्यान रखा… समीर तो आपकी और भैया की तारीफ करते रहते हैं।

मैंने कहा- आज के बाद भैया और भाभी मत बोलना… हम सब दोस्त हैं, तुम हमारे नाम ले सकती हो…

हम सबने चाय नाश्ता किया।

सनी तो फैक्ट्री चला गया और समीर को पीछे के काम की जानकारी दी। फ़िर वो भी ऑफिस चला गया।

अब घर पर मैं और प्रीति थे।

हमने फटाफट उनका सामान अनपैक किया और लगा दिया।

सामान काफी था… लगाते लगाते दोपहर हो गई।

तभी डोर बेल बजी, समीर ने बर्गर और कोल्ड ड्रिंक भिजवाए थे।

इस बीच मैं और प्रीति खूब खुल चुके थे।

मेरी और प्रीति की सलवार धुलाई और पोंछा लगाने में गीली हो गई थी।

मैंने प्रीति से कहा- तू कपड़े बदल ले, मेरे तो अभी सूख जायेंगे।

प्रीति ने अपना सूटकेस खोल कर दो नाईट सूट्स निकाल दिये… हम कपड़े चेंज करके बेड पर बैठ कर ही खाने लगी और खाकर वहीं लेट कर गप्पें लगाने लगी।

मेरा मन था कि प्रीति के ज्यादा नजदीक आऊँ, पर फिर मैंने सोचा कि आज नहीं।

चार बजे करीब मैं वापस आने लगी और कपड़े बदल लिए।

मैंने प्रीति को आँख मारकर कहा- आज तो सुहागरात मनेगी!

प्रीति बोली- क्यों?

मैंने कहा- नया मकान, नया बेड… और तुम दोनों इतनी दिनों से मिले भी कहाँ हो…

प्रीति शर्मा के हंस पड़ी… मैंने मौका देखकर प्रीति को होठों पर चूम लिया…

हम दोनों को ही एक सिहरन सी हुई… प्रीति की आवाज थरथरा रही थी… वो हॉट फील कर रही थी… वो बोली- वादा करो हम हमेशा बहुत अच्छे दोस्त रहेंगे।

मैंने उसे अपने से चिपका कर कहा- वादा…

अब उसने अपने होंठ मेरे होठों से चिपका लिए और अपनी जीभ से मेरी जीभ को चाटने लगी।
 
दो मिनट बाद हम अलग हुए और मैं घर आ गई… प्रीति बहुत अच्छी लगी मुझे और सब कुछ वैसे ही हुआ जैसे मैं चाहती थी…

मुझे भी अब प्रीति को अपना ऐसे ही बनाना है जैसे नीता ने मुझे अपना बनाया। चाहे नीता को मैंने सनी दिया, पर नीता का एहसान तो मैं जिन्दगी भर नहीं भूलूंगी।

अगले दिन सुबह मैंने 10 बजे करीब प्रीति को फोन किया- सुहागरात कैसी रही?

तो वो बोली- अब फोन पर क्या बताऊँ, यहाँ आ जा, कर के बता दूँगी…

प्रीति, जितना मैंने सोचा था, उससे ज्यादा मस्त थी।

मैंने कहा- आज तू आ और अभी आ जा, खाना यहीं खायेंगे…

वो बोली- अभी तो मैं नहाई भी नहीं हूँ!

मैंने कहा- मैं कौन सी नहाई हूँ, आ जा साथ साथ नहायेंगे।

वो बोली- बड़ी बेशर्म है तू?

मैंने कहा- नहाने में क्या बेशर्मी… जो तुझ पर है वही मुझ पर भी है…

वो हंस पड़ी, बोली- आ रही हूँ, पता लिखा…

मैंने उसे अपना पता बताया और फटाफट पाव भाजी बना ली और एक कोल्ड कॉफ़ी की कैन फ्रीजर में रख दी।

मैंने दो फ्रॉक भी निकाल कर रख ली।

बाथरूम को भी साफ़ करके दो फ्रेश टॉवल टांग दिये।

प्रीति आ चुकी थी, आते ही लिपट कर बोली- पहले तो चाय पिला, फिर गप्पें लगायेंगे।

यह तो कन्फर्म था कि अगले 4-5 घंटे हमें डिस्टर्ब करने वाला कोई नहीं था।

बस समीर का ही डर था, उसे मैंने कह दिया था कि वो फोन भी न करे।

चाय लेकर हम दोनों नीचे सेटी पर ही बैठ गई।

रात की चुदाई पूरी प्रीति ने बड़ी बेशर्मी से सुना दी… मुझे बहुत मजा आया प्रीति की बात सुनकर…

प्रीति बोली- मैं तो सोने आई हूँ… रात भर समीर ने सोने नहीं दिया!

मैंने कहा- नहा ले, फिर सो लेना।

वो नहाने चली गई… मैं देखती रह गई… सोचा था साथ नहायेंगे… उसकी अन्दर से आवाज आई- क्यों? क्या शर्म आ रही है साथ नहाने मैं?

मैं फटाफट बाथरूम में गई।

अन्दर वो वीट से अपनी चूत के बाल साफ़ कर रही थी… क्या गोल गोल मम्मे थे बिल्कुल मेरे जैसे!

मैंने भी कपड़े उतार लिए।

वो मेरे मम्मे दबाते हुए बोली- तेरे मम्मों का तो समीर भी दीवाना है…

प्रीति नहाने गई तो मैं फटाफट बाथरूम में गई, वह वीट से अपनी चूत के बाल साफ़ करने लगी… उसके मम्मे थे बिल्कुल मेरे जैसे गोल गोल थे!

मैंने अपने कपड़े उतारे तो वह मेरे मम्मे दबाते हुए बोली- तेरे चूचों का तो समीर भी दीवाना है!

मैंने बनावटी गुस्से में कहा- समीर ने कहाँ देख लिए?

प्रीति बोली- इतनी गोल गोल हैं और जब तू टाइट ड्रेस पहनती है तो अंधे को भी नजर आ जायेंगे…

प्रीति बोली- रात समीर ने कहा था कि इसकी शेव कर लूं, इसीलिए वीट अपने साथ ले आई थी कि पता नहीं यहाँ हो या न हो।

प्रीति ने मेरे भी रिमूवर लगा दिया, हैण्ड शावर की मोटी धार से हम दोनों ने एक दूसरे की चूत मालिश की।

चिपक कर नहाने के बाद हम तौलिया लपेट कर बाहर निकली… मैंने उसे फ्रॉक दी पहनने को तो वो बोली- चल, ऐसे ही लेटते हैं, उठ कर पहन लेंगे।

बेड पर लेटते ही हम दोनों बेकाबू हो गईं, 69 पोजीशन में पहले तो चूत चटाई हुई और दोनों ने एक दूसरे की चूत में खूब उंगली की… थक कर हम दोनों चिपक कर सो गईं।

दो बजे आँख खुली, कपड़े पहन कर मैंने समीर और सनी को फोन किया कि आ जाओ, साथ खाना खायेंगे।

आधा घंटे में वो दोनों आ गए और हमें फ्रॉक में देखकर मुस्कुरा पड़े।

हम दोनों ही अच्छे से तैयार हुई थीं… हाँ, ब्रा पैंटी न मैंने पहनी थीं और न प्रीति को पहनने दी थी।

हालाँकि वो बहुत जिद कर रही थी पहनने के लिए।

सनी और समीर दोनों को समझ आ गया था कि हम लोग नीचे कुछ नहीं पहने हैं।

मैं कुछ लेने किचन में गई तो पीछे पीछे सनी आ गया और किचन में ही मुझे चूमने लगा और मेरी फ्रॉक उठा कर मेरी चूत में उंगली कर दी।

मैंने कहा- क्या करते हो? समीर आ जायेगा।

सनी बोला- उस हरामी को मैं अच्छे से जनता हूँ, वो भी बाहर यही कर रहा होगा।

मैंने कहा- दूसरे के घर में? ऐसा हो ही नहीं सकता…

सनी बोला- बाहर चलते हैं, अगर समीर प्रीति में घुसा मिले तो तुझे वहीं मुझसे चुदना पड़ेगा।

मैंने हाँ कह दी क्योंकि मुझे लगा कि प्रीति ऐसा नहीं करेगी।

बाहर आई तो देख कर हैरान रह गई कि समीर ने प्रीति को घोड़ी बना कर चुदाई शुरू कर दी थी।

मैं शर्त हार गई थी और सनी अपना लंड निकल कर मेरी फ्रॉक उठा कर मेरी चूत में घुसा चुका था।

मैं चहक कर बोली- प्रीति की बच्ची… इंतज़ार नहीं कर सकती थी? रात भर चुदी है, फिर शुरू हो गई?

प्रीति हंस कर बोली- समीर चोदने पर अमादा था… या तो वो तेरी चोदता या मेरी… अब बता तुझे चुदवाना हो तो तू आ जा…

आईडिया बढ़िया था।

सनी ने मुझे छोड़ दिया और में समीर प्रीति के पास गई…

पहले तो प्रीति को किस किया फिर समीर को…

समीर प्रीति की चूत से बाहर आ गया और मुझे पास के सोफे पर ले गया और मेरी टांगों को ऊपर करके अपनी पुरानी स्टाइल में मेरी चूत में घुस गया।

उधर सनी और प्रीति भी होंठ चिपकाये खड़े थे।

सनी ने प्रीति की एक टांग पास के सोफे पर रखी और अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया।

नया लंड नई चूत… जोर ज्यादा लग रहा था, प्रीति चीखी- फाड़ दोगे क्या मेरी?

सनी ने प्रीति को सेटी पर लिटा दिया और पहले तो उसकी चूत को चूस कर थूक से चिकना किया, जब प्रीति गर्म हो गई, तब उसने भी घमासान चुदाई शुरू की… अब तो हम दोनों ही ‘और करो… और जोर से…’ के नारे लगा रहीं थी।

थोड़ी देर में ही हम दोनों की चूत माल से भर गई… सफाई करके हमने खाना खाया।

थोड़ी देर बाद समीर और प्रीति चले गए, सनी भी फैक्ट्री चला गया।

मैंने नीता को फोन लगाया।

नीता शिकायत कर रही थी कि बहुत दिनों से हम मिले नहीं हैं।

गप्पें लगने के बाद उसका फोन रखा ही था कि प्रीति का फोन आ गया… वो बहुत खुश थी, बोली- बस किसी को पता नहीं चले प्लीज… मैंने कहा- पागल है क्या? भला ये बातें किसी से कही जाती हैं।

मैंने प्रीति से कहा- हमारे बहुत अच्छे दोस्त हैं नीता और विकास… तुम लोगों को उनसे मिलवाना है। कल नीता दोपहर को मेरे घर आएगी, तुम भी आ जाना… खाना हमारे साथ ही खाना।

अगले दिन सुबह सच में बहुत काम था, मैं और समीर सुबह से ही कई लोगों से मिले। अच्छा बिजनेस मिलने की उम्मीद थी… समीर मेरे बात करने के स्टाइल से बहुत खुश था।

मैं क्लाइंट्स को पॉलिसी बहुत प्रभावी ढंग से समझाती थी।

हमें बिज़नस भी मिल रहा था।

मैंने समीर को 11 बजे तक के लिए ही बोला था, समीर ने मुझे ठीक ग्यारह बजे घर पर उतारा।

मैंने कहा- कुछ पीकर जाना, उसे मालूम था कि प्रीति आएगी!

तो चाह कर भी वो रुका नहीं, बस गेट के अंदर आकर मुझे लिपटा कर एक लम्बा फ्रेंच किस किया।

उसके लंड के उभार को और अपनी चूत के गीलेपन को मैं समझ रही थी पर मौका नहीं था इसलिए तड़फ कर रह गई।

फटाफट कपड़े बदले… जान बूझकर एक शार्ट और टॉप डाला… अंदर कुछ नहीं…

मैंने किचन में जाकर भेलपुरी और फ्रूट चाट बनाई और एक बियर फ्रिज में रख दी।
 
थोड़ी देर में ही प्रीति आ गई… मुझे इन कपड़ों में देखकर मेरे मम्मे दबा दिये… बोली- समीर के साथ मस्ती कर रही थी क्या?

मैंने कहा- अगर उसके साथ मस्ती कर रही होती तो तुझसे क्या शर्म थी… वो तो मुझे गेट से ही छोड़ कर चला गया।

मैंने उसे भी चेंज करने को कहा तो वो मेरी वार्डरॉब से एक बरमूडा और सॉर्ट टॉप निकाल लाई और वहीं बदलने लगी।

उसके कपड़े उतरते ही मैंने उसके मम्मे लपक लिए और उन पर प्यार से काट लिया।

तभी डोर बेल बजी..

मैंने कहा- जल्दी पहन, नीता है।

जब तक मैं नीता को लाई तब तक प्रीति मेरे बेड रूम में ड्रेसिंग टेबल पर हल्का सा मेकअप ठीक करके आ गई।

हाँ उसने अब लिपस्टिक ऑरेंज कलर की लगा रखी थी जो उस पर खूब फब रही थी।

नीता और प्रीति को इंट्रोडयूस किया मैंने… उसने आते ही नीता को गले लगाकर चुम्बन लिया… जो नीता को बहुत अच्छा लगा।

हम दोनों के कपड़े देखकर नीता ने मुँह गोल करके सीटी मारी…

मैंने कहा- ज्यादा नीयत मत ख़राब कर और तू भी चेंज कर ले! फिर गप्पें मारेंगे।

नीता सकुचाई तो मैंने कहा- दो-चार घंटे कोई नहीं आ रहा।

प्रीति ने उसे एक फ्रॉक दी और कहा- आज मेरी पसंद से पहन लीजिये।

नीता बेड रूम में गई, पीछे पीछे मैं भी गई और उसे बता आई कि आज हम दोनों ने भी अंदर कुछ नहीं पहना है।

मैंमे और प्रीति किचन से सामान लेकर बेड पर ही बिछा लिया… बियर भी ले आई में।

हम तीनों बेड पर बैठी… बियर हम तीनों ही लेती थीं, इस लिए शुरुआत बियर से ही हुई।

हम तीनों के निप्पल साफ़ दिख रहे थे और नीता की तो चूत भी दिख रही थी क्योंकि उसकी फ्रॉक उसने घुटने के ऊपर कर रखी थी। हम लोगों के बीच एडल्ट जोक्स और अपनी अपनी बेड पर चुदाई और अपने अपने पतियों के लंड के चर्चे हो रहे थे।

हम सब एक दूसरे के पतियों से चुद चुकी थीं पर अभी नीता और प्रीति के बीच पर्दा था इसलिए ग्रुप सेक्स का जिक्र नहीं किया।

बियर और माहौल की मस्ती में अब चूत चिकनी हो चुकी थीं।

मैंने बेड पर से सफाई करी बस हम लोगों के बियर की गिलास हमारे हाथों में थे।

मैंने एक बदमाशी की और अपना पैर नीता की फ्रॉक में घुसा दिया और अंगूठे को उसकी चूत में कर दिया।

नीता चुप थी… प्रीति ने देख लिया, वो मेरे पीछे से आई और मेरे टॉप को उठा कर मेरे मम्मे दबाने लगी।

अब माहौल गर्म हो चुका था और अगले दो मिनट में हम तीनों के कपड़े उतर चुके थे और हम तीनों एक गोला सा बनाकर एक दूसरे की चूत को चूस या उंगली कर रही थी।

प्रीति अचानक हाँफते हुए उठी और नीता के ऊपर लेट कर अपनी चूत से उसकी चूत को रगड़ने लगी… उन दोनों की जीभ एक दूसरे को चूस रही थी।

मैं किचन से दो खीरे ले आई और नीता और प्रीति को सीधा लिटा कर उनकी चूत में घुसा दिया। अब वो दोनों ही कभी अपने आप कभी एक दूसरे की चूत की चुदाई खीरे से करने लगीं।

मैंने उन्हें डांट कर कहा- अबे कमीनियों, अपनी अपनी चूत को मजा दोगी या मेरे बारे में भी कुछ सोचोगी?

दोनों हंसती हुई उठी और प्रीति तो मेरी चूत चूसने लगी और नीता मेरे होठों से जुड़ गई।

दोनों ने अपनी चूत से खीरे नहीं निकाले थे।

नीता का खीरा तो मेरी पहुँच में था तो उसकी चूत की मालिश तो मैंने करनी शुरू कर दी और प्रीति इस स्टाइल से लेटी थी कि नीचे से बेड का दबाब उसके खीरे पर पड़े जो उसकी चूत में घुसा था।

वो बार बार हिल रही थी जिससे खीर लंड जैसे मजे उसे दे रहा था।

प्रीति उठी और मेरे ऊपर बैठ कर खीरे का दूसरा हिस्सा मेरी चूत में कर दिया और मेरे बगल में लेट गई … अब में और वो दोनों हिल हिल कर एक दूसरे की चुदाई कर रहे थे।

एक घंटे मस्ती के बाद हम थक गईं और बाथरूम में जाकर शावर लेकर बिना कपड़ों के ही बेड पर चिपक कर सो गई।

चार बजे मेरी आंख खुली, मैंने उन्हें भी उठाया, कपड़े बदल कर हमने चाय पी और वो दोनों चली गई।

अगले दिन प्रीति का फ़ोन आया उसने पूछा- सच्ची बता कि क्या तू और नीता ग्रुप सेक्स में भी हैं?

मैंने कहा- हाँ हैं… और अब तुझे और समीर को भी इसमें आना है, तू समीर से बात कर, मैं नीता से बात करती हूँ।

दो दिन प्रीति का फोन नहीं आया, मैं घबरा रही थी कि कहीं समीर ने बुरा तो नहीं मान लिया।

मैंने डर के समीर का फोन भी नहीं उठाया और न ही ऑफिस गई।
 
उधर नीता तैयार थी… मैंने प्रीति को फोन भी नहीं किया। सनी का फोन आया- समीर का फोन आया है, वो बहुत नाराज हो रहा था कि तुम फोन नहीं उठा रही हो, उसे कुछ जरूरी मीटिंग करनी है किसी क्लाइंट से… तुम तैयार हो जाओ, वो आ रहा है तुम्हें लेने।

मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या करूँ।

खैर अच्छे से तैयार हुई और समीर का इन्तजार करने लगी… कोल्ड काफी बना ली थी मैंने।

समीर आया और उसके हाथ में लाल गुलाब था, यानि वो नाराज तो नहीं था।

हमने हग किया… किस नहीं कर पाई क्योंकि मेरी लिपस्टिक और उसका चेहरा खराब हो जाता।

वो बोला- तुम भी अजीब हो… दो दिनों से फोन नहीं उठा रही हो। प्रीति का मोबाइल गिर कर ख़राब हो गया था और वो और मैं दोनों ही तुम्हें मेरे मोबाइल से फोन कर रहे थे तुम फोन नहीं उठा रहीं हो… क्या बात है?

मैं चुप रही… वो मुझे चिपटा कर बोला- नीता विकास के साथ दोस्ती करके हमें अच्छा लगेगा। और जब तुम कह रही हो तो दुबारा सोचना क्या… प्रीति खुश है नीता से मिलकर!

मैं खुश थी और इस ख़ुशी का यह परिणाम हुआ कि जिस क्लाइंट से हम मिलने गए थे वो मेरे प्रेजेंटेशन से इतना प्रभावित हुआ कि हमें बिज़नस तो दिया ही हमारे रीजनल हेड जिनको वो जानते थे उन्हें फोन करके समीर और मेरी तारीफ़ भी की।

यह समीर के लिए बड़ी बात थी।

घर छोड़ने आया तो समीर का सब्र का बाँध टूट गया और हम बिना कपड़ों के एक दूसरे की बाँहों में सोफे पर ही मस्त हो गए।

सोफे पर मन नहीं भरा तो खिसक कर नीचे सेटी पर समीर ने अपनी पसंदीदा स्टाइल में यानि मेरी टांगे अपने कंधे पर रख कर मेरी चुदाई की।

समीर के जाने के बाद में शावर लेकर फ्रेश हुई… तभी प्रीति का फोन आया… उसका फोन अभी ठीक होकर आया था।

फोन पर वो बहुत नाराज हुई, बोली- अगर मुझे कुछ हो जाए तो तू तो मिलने भी नहीं आएगी?

मैंने उसको सॉरी बोला… और उससे पूछा- क्या सोचा?

वो बोली- सोचना क्या है, जब तू कह रही है तो, यहाँ तो सोच सोच के चूत चिकनी हो रही है और उसका फायदा समीर मेरी चूत फाड़ के ले रहा है।

मैंने कहा- ठीक है, मैं प्रोग्राम बनाती हूँ।

मैंने नीता से और सनी से बात करके शनिवार की रात का अपने घर का प्रोग्राम बनाया। खाना सभी ने साथ ही खाना था।

इस बीच में हम तीनों ब्यूटी पार्लर जाकर फुल बॉडी वेक्सिंग वगैरा करा आईं।

मेरे और नीता की मेहंदी भी बहुत हल्की पड़ गई थी तो तीनों ने ही मेहंदी भी लगवा ली।

हमने अपने पतियों को भी पूरी शेव करने को बोल दिया था।

शनिवार को सनी ने होटल से खाना मंगाने का इन्तजाम कर लिया ताकि मुझे थकान न हो।

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शनिवार को 8 बजे तक तीनों कपल्स आ गए, सबने एक दूसरे को हग करके होठों पर किस किया।

सबको मालूम था कि किस लिए आये हैं।

हम लोग ड्राइंग रूम में बैठे, ड्रिंक रखी थीं, सब सेल्फ सर्व था, तीन गिलास व्हिस्की के थे और तीन बियर के पर समीर ने हम लोगों की बियर में भी व्हिस्की टपका दी।

सनी ने डांस म्यूजिक लगा दिया था, सबने अपने अपने पैग खली किये और अपने जोड़ों में डांस करने लगे।

अपनी वाली के साथ डांस में मजा नहीं आ रहा था तो मेरी राय पर लाइट और म्यूजिक बंद कर दिया गया और सभी अलग अलग हो गए और म्यूजिक शुरू होते ही आपस में जोड़े बाबा कर डांस करने लगे, पता नहीं कौन किसके पास था… मैंने हल्की रोशनी खोल दी… मैं समीर की बाँहों में थी, नीता सनी की और प्रीति विकास की बाँहों में थी।

डांस शुरू हुआ और हमारे होंठ जुड़ गए।

विकास और प्रीति तो बिल्कुल चिपट कर खड़े थे… विकास के हाथ प्रीति के टॉप के अंदर घुस कर उसकी पीठ सहला रहे थे और प्रीति अपने हाथों से उसे कन्धों से दबा रही थी।

विकास अपने लंड का दबाब उसकी चूत पर बनाये हुए था।

समीर भी मेरे मम्मों को दबाता हुआ मुझे चूमे जा रहा था और सनी और नीता तो बस पूछो मत… दोनों ने एक दूसरे का चेहरा अपने हाथों से पकड़ा हुआ था और चूम रहे थे।

थोड़ी देर बाद सबने अपनी पोजीशन बदली और एक दूसरे की देखा देखी आदमी सभी लड़कियों के पीछे आ गए, सभी ने अब पार्टनर बदल लिए थे।

मैं विकास के पास थी, सनी प्रीति के पास नीता समीर के पास थी।

लड़के लड़कियों की गर्दन से हाथ डालकर उनके सीने पर ले आये। हम लड़कियों ने भी अपने हाथ पीछे ले जाकर उनके सर के पीछे रख रखे थे।

कामुकता का माहौल था।

विकास के हाथ तो मेरे मम्मों पर पहुँच कर मेरे निप्पल दबा रहे थे और मैं भी अपने हाथों से उसका लंड टटोल रही थी।

प्रीति तो सनी का लंड निकाल चुकी थी और समीर ने नीता का टॉप उतार कर उसे ऊपर से नंगी कर दिया था।

एक के कपड़े उतरते ही नंगा होने और करने की होड़ मच गई और दो तीन मिनट में ही सब नंगे थे… अब चुदाई का माहौल गर्म था। इसके लिए मैंने टेंट हाउस से गद्दे मंगा रखे थे जो सबने मिलकर बिछा लिए।

एक बार फिर चूम छाती के बाद नीता ने कहा- एक बार लाइट बंद करते हैं, सब म्यूजिक पर बदल बदल के फ़ास्ट डांस करेंगे और म्यूजिक बंद होते ही जिसके पास जो होगा, वही कपल चुदाई में साथ रहेगा।

पर प्रीति ने इसका विरोध किया, बोली- आगे पति ही पल्ले पड़ गया तो मजा नहीं आएगा।

तो फिर प्रीति से ही पूछा गया- कैसे हो?

तो प्रीति बोली- ग्रुप सेक्स है तो सब मिल कर चुदाई करेंगे… बदल बदल कर और शुरू करने के लिए चूंकि मैंने विकास का लंड नहीं खाया है तो विकास और मैं… समीर के साथ रोमा क्योंकि दोनों की अच्छी पटती है और सनी और नीता…

सब खुश थे क्योंकि दिल से सब चाहते भी यही थे।

अब एक सेक्सुअल म्यूजिक प्ले हो रहा था और मैं समीर की बाँहों में चली गई।

समीर मझे चिपटा कर चूमता हुआ नीचे होने लगा और मुझे लिटा दिया और मेरी चूत को चाटने लगा… मैंने अपने हाथों से अपनी चूत के पास की खाल को खींच लिया था जिससे चूत खुल जाए।

मेरे पैरों के पास सनी और नीता गुंथे पड़े थे। वहाँ नीता सनी का लंड चूस रही थी और सनी उसकी चूत।

विकास तो प्रीति के मम्मों को पागलों की तरह चूस रहा थ और प्रीति उसका लंड हिला रही थी।

अब विकास और प्रीति भी 69 पोजीशन पर आ गए और आवाज करते हुए चूस रहे थे।

समीर से बर्दाश नहीं हो रहा था तो वो मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरी टांगें पंखे की ओर छत की तरफ करके अपना लंड मेरी लपलपाती चूत में घुसेड़ दिया।

नीता भी सनी के ऊपर बैठ कर उसे चोद रही थी, उसकी स्पीड में सनी भी नीचे से उछल उछल कर उसका साथ दे रहा था और अपने हाथों से उसके मम्मे दबा रहा था।

विकास भी प्रीति की चूत को फाड़ने की तैयारी से पूरा घुस चुका था।

मेरे मम्मों पर प्रीति के हाथ आ गए थे और वो उन्हें जोर जोर से दबा रही थी।

हर ओर यह आवाज थी ‘और जोर से… फाड़ दो… हाँ आज नहीं छोडूँगा… आज जिन्दगी भर के मजे दूंगा… हाँ और चोदो मेरे राजा, मेरी चूत तो आज तुम्हारा लंड ख जायेगी…’

कोई शर्म नहीं थी सब यह भी भूल गए कि वो पार्टनर बदल भी सकते हैं… बस एक ही आलम था चुदाई चुदाई और चुदाई…

तो यह थी दोस्तो… ग्रुप सेक्स के नए जोड़ीदारों की कहानी…

कैसी लगी?

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