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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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रति की कुंवारी चूत का शीलभंग


मैंने तीन चार बार ही ऐसा किया कि रति अपनी कमर नीचे से उठाने लगी और मेरे लंड को पूरा अंदर जाने के लिए उकसाने लगी लेकिन नैना ने मुझको रोक दिया और कहा- अभी कुछ मत करना, कल इसकी भाभी से सलाह करके ही आगे बढ़ेंगे.

अगले दिन हम फिर कॉलेज साथ साथ ही बाइक पर बैठ कर गए.डांस रिहर्सल में रति फिर पूरे जोश से मेरे साथ चिपक कर डांस कर रही थी और दूसरी लड़की सलोनी (लोनी) भी बार बार मेरे निकट आने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैं काफी सम्भल गया था तो उसको ज़्यादा भाव नहीं दे रहा था.

फिर डांस टीचर के कहने पर मैंने लोनी और 2 अन्य लड़कियों के साथ मिल कर डांस किया और लोनी ने फिर मेरे लंड और चूतड़ों पर हाथ फेरने की कोशिश की, मैंने भी उसको रोका नहीं.डांस के दौरान दो अन्य लड़कियाँ भी मेरे करीब आने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैं उनको कोई मौका ही नहीं दे रहा था.

अगले दिन रविवार था, तकरीबन 6 जोड़ों ने मेरी कोठी में डांस प्रैक्टिस के लिए हामी भर दी थी और हमको यह प्रैक्टिस दोपहर 3 बजे से शुरू करनी थी.जब मैं रति को लेकर घर पहुँचा तो नैना बोली- रति को उसके घर में ही छोड़ दो, क्यूंकि उसकी भाभी उस का इंतज़ार कर रही है.

घर वापस आने पर नैना बोली- खुशखबरी है, भाभी ने रति की सील तोड़ने की अनुमति दे दी है और वो स्वयं भी प्रेग्नेंट हो गई है और बड़ी खुश लग रही थी.मैं भी खुश होकर बोला- चलो, अच्छा है, भाभी की मुराद पूरी हो जाए तो अच्छा है लेकिन यह बात रति को नहीं पता चलनी चाहिए, क्यूंकि अगर उसको पता चल गया तो भाभी और आने वाले बच्चे के लिए उसके मन में इज़्ज़त और प्यार कम हो जाएगा.नैना बोली- वाह छोटे मालिक, कभी कभी आप बहुत ही सुलझे हुए विचार बताते हैं.

मैं बोला- वो तो ठीक है नैना रानी लेकिन कल हमारे बंगले में 10-12 कॉलेज के छात्र आने वाले हैं डांस प्रैक्टिस के लिए… उनके स्वागत में कुछ कमी नहीं रहनी चाहिए. शाम का वक्त होगा तो उनके लिए चाय नाश्ते का ही इंतज़ाम करना होगा.

नैना मेरे पास आ कर मुझ को बड़ी ही कामुक जफ़्फ़ी डाली और बोली- आप बेफिक्र रहो मेरे आका, यह बांदी आपके हुक्म की ग़ुलाम है, पता नहीं आज आप मुझको बहुत ही सुंदर और कामुक लग रहे हो, जी चाहता है कि आप को चोद दूँ.मैं बोला- तो देख क्या रही हो? चोद दो ना!

नैना थोड़ी सीरियस होते हुए बोली- आज तो रति की चुदाई का समय फिक्स किया है ना… अभी आप थोड़ी देर आलखन कर लो, फिर बाद में आपको काफी काम करना है. मैं रति को पीने के लिए एक दवाई उसकी भाभी को देकर आई हूँ. देखो, उसका क्या नतीजा निकलता है?मैं बोला- कोई ख़ास किस्म की दवाई है क्या?नैना बोली- हाँ छोटे मालिक, यह दवाई पीने के बाद हर औरत और जवान लड़की में फ़ौरन उबाल आ जाता है और वो बहुत ज़्यादा ही कामातुर हो जाती है! देखो रति को क्या होता है?

हम ये बातें कर ही रहे थे कि रति तकरीबन भागते हुए हमारी बैठक में दाखिल हुई और आते ही मुझ को बड़ी ही टाइट जफ़्फ़ी डाल दी और अपने शरीर के सारे अंग मेरे शरीर से रगड़ने लगी.मैं कहता ही रहा ‘यह क्या कर रही हो रति?’ लेकिन वो तो बिल्कुल बहरी हुई मुझसे और भी ज़्यादा ही चिपकने लगी और मुझको धकेलते हुए वो मेरे कमरे में ले गई.

वहाँ पहुँचते ही रति ने पागलों की तरह से मुझ को चूमना शुरू कर दिया, कभी होटों पर और कभी गालों पर और कभी गर्दन पर.फिर रति का ध्यान मेरे कपड़ों की तरफ गया और वो जल्दी जल्दी मेरे कपड़े उतारने लगी और एक मिनट में ही उसने मुझको अंडरवियर तक नंगा कर दिया और नीचे बैठ कर उसने मेरे अंडरवियर में हाथ डाला और जैसे ही उसको नीचे किया उसमें से उछलते हुए लौड़ा उसके मुंह की ओर लपका लेकिन मैंने ऐन वक्त पर अपने शरीर को पीछे कर लिया ताकि नई दुल्हनिया को चोट ना लगे.

रति ने झट से लोहे की सलाख के समान अकड़े हुए और लाल सुर्ख हुए लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसको बेतहाशा चूसने लगी.नैना यह सब देख कर एकदम दंग रह गई क्यूंकि उसको कतई यह उम्मीद नहीं थी कि रति ने जो दवाई पी थी, उसका इतना गहरा असर होगा इतनी जल्दी.

नैना ने रति को पकड़ा और उसके कपड़े उतारने लगी और रति पूरी तरह से अपने को नंगा करने में नैना की मदद कर रही थी.लेकिन नैना ने रति को कस कर पकड़ा हुआ था और वो उसको धीरे धीरे बिस्तर की तरफ ले गई, उसको लिटा दिया और उसकी चूत में उंगली डाल कर रति के गीलेपन की जानकारी लेने की कोशिश करने लगी.
 
यह करके नैना उठी और मुझको आँख मारी- रति तैयार है तुम्हारे लिए!.

अब मैं आगे बढ़ा और रति के लबों पर एक अत्यंत कामुक चुम्मी दे डाली और उसकी बगल में चित लेट गया और झट एक हाथ रति की चूत में डाला.और यह देख कर मैं हैरान हो गया कि रति की चूत एकदम लबालब पानी से भरी हुई थी और रति अपने चूतड़ों को उठा उठा कर अपनी कामुकता का प्रदर्शन कर रही थी.

मैंने नैना की तरफ देखा तो उसने जल्दी से रति की चूत के अंदर और बाहर बहुत ज़्यादा कोल्ड क्रीम लगा दी और रति के चूतड़ों के नीचे एक तौलिया भी बिछा दिया ताकि रति की चूत से निकलने वाले खून से चादर खराब ना हो.

ये सब तैयारी के बाद नैना ने फिर इशारा किया और मैंने झट रति की टांगों के बीच बैठ कर अपने लंड को रति की गरम चूत के मुंह पर रख दिया, एक हल्का धका लंड का मारा और उसकी टिप चूत में बिना किसी रुकावट के चली गई.रति नीचे से अपने चूतड़ों को ऊपर उठा कर लंड को पूरा अंदर लेने के लिए अधीर हो रही थी. लेकिन नैना की ट्यूशन के मुताबिक कुंवारी चूत में लंड को डालने की कभी जल्दी नहीं करनी चाहिए, धीरे धीरे चूत को मनाते हुए, उसको फुसलाते हुए लंड को अंदर प्रवेश करवाने का काम ही ठीक ढंग का माना जाता है. (वात्स्यायन लिखित काम शास्त्र पृष्ठ संख्या 110 के अनुसार)

जैसे ही लंड मैंने फिर से अंदर डाला तो उसको आगे रुकावट का सामना करना पड़ा और अब मैंने धीरे धीरे लंड का प्रेशर चूत के अंदर स्थित झिल्ली पर डालना शुरू किया और दो तीन धक्कों में छर से अंदर कुछ फटने की हल्की सी आवाज़ आई और रति एकदम दर्द से कराह उठी लेकिन नैना ने उसको कस कर बिस्तर पर लिटाये रखा.

मैंने भी धक्के मारने रोक दिया और लंड को चूत की तह तक डाले हुए ही मैं रति के ऊपर लेटा रहा.फिर जब रति का कांपना थोड़ा कम हुआ तो मैंने धक्कों की स्पीड आहिस्ता से बढ़ा दी और धीरे धीरे नार्मल स्पीड पर आ गया और अब रति के चेहरे पर मुस्कान आने लगी और उसको चुदाई का मज़ा आने लगा.

हालाँकि रति की चूत से काफी खून गिरा था झिल्ली के फटने से लेकिन नैना वो साथ ही साथ साफ़ कर रही थी और मेरा लंड भी उसने चुदाई के दौरान ही साफ़ कएर दिया था.

मैं अब इस कोशिश में था कि रति का एक दो बार छूट जाए तभी हमको तसल्ली होगी कि रति की बिमारी कुछ ठीक होती दिख रही है या नहीं.इस लिए मैं अपनी सारी काम कला के ज्ञान को इस्तेमाल करते हुए रति को कभी धीरे और कभी तेज़ चोदने की कोशिश करने लगा और जल्दी ही इन कोशिशों के कारण रति बहुत आक्रामक तरीके से अपनी चरम सीमा पर पहुंची.

जैसे ही वो छूटने वाली हुई तो उसने मेरे होटों को अपने लबों में लेकर ज़ोर से दांतों से मुझको काट लिया और मैं बिलबिला कर चिल्ला पड़ा और छूटने के बाद रति को अपनी गलती का अहसास हुआ तो वो मुझसे माफ़ी मांगने लगी और साथ ही उसने मेरे लबों को चूम चूम कर खून को साफ कर दिया और फिर मुझ से बड़ी गहरी जफ़्फ़ी डाल दी.

तब नैना ने रति को मुझसे अलग किया और हम दोनों साथ साथ लेट गए और रति ने लेटते ही मेरे लंड पर कब्ज़ा किया. वो उसके साथ मज़े मज़े से खेल रही थी, कह रही थी- वाह यार लंडम लाल, ज़िंदगी का मज़ा दे दिया मुझ कुंवारी कन्या को! मेरी चूत का तो हलवा बना ही लेकिन जो आनन्द तुमने दिया है वो ब्यान नहीं किया जा सकता. फिर कब करोगे मोहन प्यारे?

रति की बातें सुन कर नैना और मैं हंसी के मारे लोटपोट हो रहे थे.मैं भी रति की सिल्की बालों से भरी चूत के बालों से खेलता रहा.

कोई दस मिन्ट के खेल के बाद ही रति फिर चुदाई के लिए ज़िद करने लगी और मैं नैना के इशारे पर फिर उसको चूमने लगा और उसके मम्मों को चूसने के बाद ही उसकी चूत में हाथ लगाया तो वो फिर बेहद पनिया रही थी.

अब नैना ने रति को घोड़ी बनाया और मैंने उसके पीछे बैठ कर लंड को चूत के अंदर डाला तो वो बहुत अधिक टाइट महसूस हुई और बड़ी मुश्किल से लंड को अंदर घुसेड़ पाया.रति भी ‘आह उह…’ कर रही थी क्यूंकि चूत के अंदर से छिल गई थी और मेरे लंड पर भी खराशें पड़ गई थी लेकिन मैं भी दर्द बर्दाश्त करते हुए रति को बड़े प्यार से हल्के हल्के धक्कों से चोदने लगा.
 
कोई दस मिन्ट के खेल के बाद ही रति फिर चुदाई के लिए ज़िद करने लगी और मैं नैना के इशारे पर फिर उसको चूमने लगा और उसके मम्मों को चूसने के बाद ही उसकी चूत में हाथ लगाया तो वो फिर बेहद पनिया रही थी.

अब नैना ने रति को घोड़ी बनाया और मैंने उसके पीछे बैठ कर लंड को चूत के अंदर डाला तो वो बहुत अधिक टाइट महसूस हुई और बड़ी मुश्किल से लंड को अंदर घुसेड़ पाया.रति भी ‘आह उह…’ कर रही थी क्यूंकि चूत के अंदर से छिल गई थी और मेरे लंड पर भी खराशें पड़ गई थी लेकिन मैं भी दर्द बर्दाश्त करते हुए रति को बड़े प्यार से हल्के हल्के धक्कों से चोदने लगा.

रति को अब बहुत ही अधिक आनन्द आने लगा और वो अस्फुट शब्दों में कह रही थी- सतीश यार फाड़ दे इस साली चूत को, बहुत ही तंग करती थी मुझ को ! ज़ोर के धक्के मार मेरे लंडम लाल… उफ़, मैं फिर मर रही हूँ… ओह्ह्ह मैं गई रे… ओह्ह्ह… कुछ छूटा अंदर से? आअहाअ!यह कहते हुए रति अपने सर को इधर से उधर मारने लगी और उसकी गांड ज़ोर ज़ोर से मेरे लंड पर आगे पीछे होते हुए मेरे पेट से टकराने लगी.

और फिर रति के मुंह से एक ज़ोर से हुंकार निकली और उसकी चूत के अंदर खुलना और बंद होना शुरू हो गया.फिर रति बिस्तर पर ढेर हो गई और मैं भी उसके साथ लेट गया.मेरा लंड अभी भी तन्ना खड़ा था जिसको देख कर रति थोड़ी हैरान हो रही थी और साथ में खुश भी हो रही थी.नैना के इशारे पर मैं बिस्तर से उठा और अपनी सफाई की और कपड़े पहन कर बाहर बैठक में आकर बैठ गया.

थोड़ देर बाद उर्वशी भाभी भी आ गई बैठक में और आते ही उसने मुझको एक कसके जफ्फी मारी और एक हॉट किस भी मेरे होटों पर जड़ दी और मैं भी उसके चूतड़ों पर हाथ फेरने लगा.गोल और सॉलिड चूतड़ थे भाभी के, और जब वो निर्वस्त्र होती थी तो वो एकदम ख़ूबसूरती का मॉडल लगती थी..

मेरा बैठा हुआ लंड फिर खड़ा होना शुरू हो गया और भाभी ने मेरी पैंट में उभरते हुए लंड को पकड़ लिया, उसके साथ खेलने लगी.तभी नैना थोड़ा ज़ोर से बोली- छोटे मालिक, रति के लिए कोकाकोला तो गिलास में डाल लो, वो बड़ी प्यासी हो रही है.

मैं और भाभी फ़ौरन संभल गए और कुछ समय बाद ही रति और नैना बैठक में आ गए लेकिन भाभी को देख कर रति एकदम शरम से लाल हो गई और दौड़ कर भाभी से लिपट गई.

उर्वशी भाभी ने उसको गले लगाया और उसके कान में चुपके से कहा- क्यों री? काम हो गया तेरा?रति ज़रा और शरमा गई और हाँ में सर हिला दिया और फिर आकर मेरे पीछे खड़ी हो गई.हम सब कोक पीने लगे और छोटी मोटी बातें करने लगे.

तब मैं बोला- कल हमारी कोठी में कॉलेज के डांस ग्रुप का डांस रिहर्सल है, शाम को काफी रौनक रहेगी. रति ने भी आना है क्यूंकि वो तो हमारे कॉलेज ग्रुप की जान है उर्वशी भाभी!भाभी यह सुन कर बहुत खुश हुई.

फिर नैना उर्वशी भाभी को लेकर कमरे में चली गई और दस मिन्ट बाद जब वापस आई तो उर्वशी भाभी बहुत ही खुश थी.मेरे को देख कर नैना ने भी हाँ में सर हिला दिया और मैं समझ गया कि नैना ने उर्वशी भाभी की दोबारा जांच की है, प्रेग्नेंट होने की खबर पक्की है.

थोड़ी देर बाद भाभी और रति अपने घर लौट गई और मैं जल्दी से अपने कमरे में पलंग पर लेट गया क्यूंकि मुझको लंड में काफी दर्द हो रहा था.जब नैना कमरे में आई तो मुझको इस तरह लेटे देख कर वो मेरे पास आई, पूछने लगी- क्या बात है छोटे मालिक? क्या कुछ तकलीफ है आपको?

मैं बोला- हाँ नैना, मुझ को मेरे लंड पर काफ़ी दर्द महसूस हो रहा है, शायद चुदाई में लगी रगड़ ज़्यादा ही गहरी हो गई थी?नैना आगे बढ़ कर मेरी पैंट को नीचे सरका कर लंड को देखने लगी.लंड जो बैठा हुआ था धीरे धीरे से फिर अकड़ने लगा.

नैना ने देख कर कहा- रुको छोटे मालिक, मैं अभी इस पर एक मलहम लगा देती हूँ, जल्दी ही ठीक हो जाएगा.नैना के मलहम लगाते ही मेरा दर्द कम होना शुरू हो गया.मलहम लगा कर नैना जाने लगी तो मैंने पूछा- भाभी का गर्भ ठीक है ना?

नैना बोली- कसम से छोटे मालिक, आपके अंदर पैदा होने वाले कीड़े एकदम मस्त और ताकतवर हैं, आज तक कोई नहीं बची जो आपके कीड़ों के हमले से गर्भवती ना हुई हो! आप चाहें तो सैकड़ों बच्चो के बाप बन सकते हो!मैं कुछ हैरान होकर बोला- ऐसा क्या है मेरे स्पर्म में नैना?

नैना बोली- जो मैंने आयुर्वेदिक पुस्तकों और यूनानी चिकत्सा पुस्तकों में पढ़ा है उन सबने केवल इसी बात पर ज़ोर दिया है कि स्त्री के अण्डों और पुरुष के स्पर्म के मिलन से ही बच्चा उत्पन्न होता है और यह बात सदियों से मानी जा रही है और इस बात का सबूत अब विदेशी चिकत्सा पद्धति में हो रही खोज में पूरी तरह से मिल रहा है.मैं तो अपनी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार ही केवल नब्ज़ देख कर ही अंदाजा लगा लेती हूँ कि कोई स्त्री गर्भवती हुई या नहीं जबकि एलोपैथिक चिक्तिसा पध्दति के अनुसार यह बात गर्भ ठहरने के एक महीने बाद ही पता चलती है जब स्त्री का मूत्र टेस्ट किया जाता है.लेकिन जब आपके स्पर्म का मैंने लैब में टेस्ट करवाया था तो लैब के टेक्नीशियन यह देख कर हैरान रह गए थे कि आपके कीड़े बड़े ही शक्तिशाली और तीव्र गति वाले हैं जो बहुत ही कम दिखाई देता है. यही कारण है आपके द्वारा वीर्यदान एकदम सक्षम होता है किसी भी तंदरुस्त स्त्री को गर्भवती बनाने में! जय हो छोटे मालिक.

मैं केवल मुस्करा दिया और करवट बदल कर सोने की कोशिश करने लगा.

कहानी जारी रहेगी.
 


कॉलेज डांस की हॉट प्रैक्टिस


अगले दिन इतवार था और दोपहर को डांस प्रैक्टिस करने वाले सहपाठी आने शुरू हो गए, सबसे पहले पहुंचने वाली सलोनी (लोनी) ही थी, वो अपनी कार में आई थी अपने ड्राइवर के साथ, आज उसने बहुत ही टाइट सलवार कमीज पहन रखी थी जिसमें उसके शरीर के अंग काफ़ी उभर कर दिखाई दे रहे थे खासतौर पर उसके स्तन और नितम्ब जो आम लड़कियों से काफी बड़े थे और बहुत ही सेक्सी लग रहे थे.

हम दोनों ने एक दूसरे से हाथ मिलाया और फिर लोनी ने एक झटके से मुझ को अपनी बाहों में ले लिया और मेरे लबों पर एक गर्म चुम्मी जड़ दी.मैं हतप्रभ और हैरान हो गया और जब संभला तो मैंने भी आगे बढ़ कर लोनी को अपनी शक्तिशाली बाहों में भर कर एक बहुत ही टाइट जफ़्फ़ी मारी और उसके लबों पर गर्म चुम्बनों की झड़ी लगा दी.

मैं आलिंगन से छूटा तो बोला- उफ़ लोनी, तुम तो कमाल की चीज़ हो… क्या हॉट और सेक्सी शरीर है तुम्हारा!यह कहते हुए मैंने उसके गोल गुदाज़ मम्मों पर हाथ फेरा और फिर दोनों हाथों से उसके उभरे हुए चूतड़ों को सहलाया..

लोनी इस वक्त बहुत ही गर्म हो चुकी थी और उसने बिना किसी हिचक के मेरे पैंट के अंदर खड़े लौड़े को पकड़ लिया और उसको हल्के से दबाने लगी. मुझको उम्मीद नहीं थी कि वो इतनी जल्दी मेरे से इतनी खुल जायेगी, मैं अभी सोच ही रहा था कि लोनी को कैसे पटाया जाए. लेकिन वो मेरी उम्मीदों के खिलाफ बहुत शीघ्र ही पके हुए आम के तरह मेरी झोली में आ गिरी.

हम बड़े बेखबर हुए एक दूसरे को चूमने चाटने में व्यस्त थे कि हमने नोट ही नहीं किया कि कब नैना बैठक में आ गई और हल्की सी खांस कर दी जिससे हम दोनों चौंक कर एक दूसरे से अलग हो गए.नैना बोली- मैं यह बताने आई हूँ कि बाहर 2-3 कारें रुकी हैं, आप दोनों सम्भल जाओ.

फिर एक एक कर के सारे डांस करने वाले आने लगे और आखिर में हमारी डांस इंस्ट्रक्टर मिस अंजलि दास भी आ गई.नैना ने सब नौकरों के साथ मिल कर बैठक का फर्नीचर साइड में लगा दिया था ताकि हमको काफी खुला हाल जैसा स्थान मिल जाए.

अंजलि मैडम के कहने पर हम सब अपने पार्टनर्स के साथ डांस की प्रैक्टिस करने लगे.रति और मैं मिल कर डांस कर रहे थे और एक अन्य विद्यार्थी लोनी के साथ प्रैक्टिस कर रहा था.

अंजलि मैडम की नज़र हम दोनों पर टिकी हुई थी, वो हमारे पास आकर बोली- बहुत खूब सतीश और रति, बहुत अच्छा डांस कर रहे हो. लगे रहो ऐसे ही!फिर वो लोनी और दूसरे विद्यार्थी के पास गई और लड़के को थोड़ा समझाया और फिर वो बारी बारी सब के पास गई और कुछ न कुछ उनको डांस ठीक करने के लिए हिदायतें दी.

रति अब मुझसे बहुत ही घुल मिल कर डांस कर रही थी और इस बात की ज़रा भी परवाह नहीं कर रही थी कि डांस के दौरान हमारे सब अंतरंग अंग एक दूसरे को छू रहे थे.अंजलि मैडम फिर लोनी और उसके साथी छात्र के पास पुनः गई और कहा- लोनी, तुम थोड़ी देर सतीश के साथ डांस प्रक्टिस करो, वो तुम्हारे स्टेप्स ठीक कर देगा और रति तुम उस लड़के के साथ डांस करो और उसके स्टेप्स ठीक करने की कोशिश करो.

अंजलि मैडम का यह हुक्म रति को पसंद नहीं आया लेकिन वो चुपचाप अशोक के साथ डांस करने लगी और लोनी मेरी बाहों में आ गई.

अब लोनी बहुत ही अधिक बेबाकी से मेरे साथ डांस कर रही थी और बार बार उसके गोल मोटे मम्मों को वो जानबूझ कर मेरी चौड़ी छाती से टकरा रही थी.एक दो बार उसका हाथ जानबूझ कर मेरे लंड पर भी लगा और मैंने भी उसकी चूत पर उसके कपड़ों के ऊपर से हाथ फेर दिया.मैं समझ गया कि लोनी चुदाई के लिए तैयार है तो मैं उसकी फीलिंग्स को और भड़काने लगा ताकि भट्टी पूरी तरह से तप जाए तो मैं अपनी रोटी उसके जलते हुए तंदूर में लगाऊँ.

थोड़ी देर बाद अंजलि मैडम फिर हमारे पास आई और मेरे को लेकर एक दूसरी लड़की के पास गई और बोली- सुधा, अब तुम कुछ देर सतीश के साथ डांस करो क्यूंकि इसको सारे डांस स्टेप्स समझ आ गये हैं.सुधा देखने में एक सुन्दर लेकिन काफी पतली और स्लिम लड़की थी और न तो उसकी छातियों के उभार दिखाई देते थे और ना ही उसके चूतड़ों में कोई आकर्षण था.

शारीरिक रूप सो वो बहुत ही साधारण लड़की थी लेकिन उसके चेहरे के नयन नक्श बहुत ही आकर्षक थे और रंग भी सांवला सलोना और नमकीन सा था.उस डांस के दौरान मेरी आँखें तो रति और लोनी के ऊपर ही थी क्यूंकि वो ही मेरी आशिकी के अनुरूप थीं.

थोड़ी देर ही सुधा के साथ डांस करने के बाद मैं सुधा के डांस करने के ढंग का आशिक हो गया.क्या नपे तुले स्टपेस के साथ वो डांस करती थी और ऐसा लगता ही नहीं था कि वो साधारण सा डांस कर रही है.अब मैं और सुधा डांस करते हुए सारे कमरे का चक्कर लगा रहे थे और धीरे धीरे दूसरे डांस करने वाले जोड़े अपने डांस को छोड़ कर हमारे डांस को बड़े ही गौर से देख रहे थे.
 
जब हमारा डांस खत्म हुआ तो सबने ज़ोर ज़ोर से तालियाँ बजाई और अंजलि मैडम ने कहा- आज से सतीश सब लड़के लड़कियों को डांस के स्टेप्स सिखाएगा और उनकी प्रैक्टिस रोज़ शाम को इसी कोठी में हुआ करेगी. क्यों सतीश, कोई प्रॉब्लम तो नहीं?मैं बोला- नहीं मैडम, कोई प्रॉब्लम नहीं है, आप सबका इस कोठी में हर समय स्वागत है.

यह सुन कर सबने तालियां बजाई और मैंने कहा- अब कुछ देर के लिए कुछ नाश्ते के लिए थोड़ा समय डांस बंद करते हैं.नैना और पारो ने टेबल पर कई मिष्ठान और नमकीन और चाय इत्यादि को परोस दिया और सब विद्यार्थी नाश्ता करने में जुट गए.

अंजलि मैडम भी मेरे साथ ही नाश्ते की प्लेट लिए हुए खड़ी थी, अब मैंने ध्यान से अंजलि मैडम को देखा तो उसको काफी आकर्षक पाया. वो शारीरिक तौर से थोड़ी स्लिम थी लेकिन उसकी गुलाबी सिल्क साड़ी में वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी.

मैंने नोट किया, वो भी मुझको काफी ध्यान से देख रही थी और एक दो बार हमारी नज़रें मिली तो वो ज़रा सा मुस्करा दी.

नाश्ते के बाद मैडम ने मुझको हर लड़की के साथ डांस करने के लिए कहा, मेरे डांस करने के ढंग से वो बहुत ही इम्प्रेस हुई और मेरे निकट आकर पूछने लगी- सतीश, एक बात बताओ, यह इतना अच्छा डांस तुमने किसी से सीखा है क्या?मैं थोड़ा शर्माते हुए बोला- नहीं मैडम, वो पिछले साल दशहरे की छुट्टियों में हमारे गाँव में एक फिल्म कम्पनी आई थी जिसमें मुझको डांस करने के लिए चुना गया था, वहीं से मैंने डांस के ये सारे स्टेप्स सीखे हैं.

अंजलि मैडम बोली- तभी तो तुम्हारे डांस करने के स्टाइल में एक ट्रेंड डांसर का आभास मिलता है. उस पिक्चर का नाम क्या है जिस में तुमने डांस किया था?मैंने पिक्चर नाम बता दिया कोई छात्र बोला- मैडम वो पिक्चर तो सिनेमा हाल में लगी हुई है लखनऊ में!

सब छात्र बोल पड़े- चलो सतीश, हमको वो पिक्चर ज़रूर देखनी है, कैसे डांस कर रहे हो तुम उस पिक्चर में, यह हम देखना चाहते हैं.मैं बोला- ठीक है, मैडम जी से पूछ लो, जैसा वो कहें?अंजलि मैडम बोली- ज़रूर देखेंगे वो पिक्चर लेकिन पहले अपनी रिहर्सल तो पूरा कर लें, फिर चलेंगे.

अब तो सब लड़के और लड़कियों ने मुझको घेर लिया जैसे कि मैं कोई फ़िल्मी स्टार हूँ.रति और लोनी तो मेरे दोनों तरफ खड़ी हो गई जैसे कि मैं उन दोनों की प्रॉपर्टी हूँ.मैंने उस लड़के से पूछा- कौन से सिनेमा में वो पिक्चर लगी है?तो उसने नाम बताया और उसका फ़ोन नम्बर भी बताया.

तब मैंने उस सिनेमा में फ़ोन किया और पूछा- कौन सी पिक्चर लगी है?तो उसने बताया पिक्चर का नाम और बोला- क्या आप जानते हैं हमारे लखनऊ के कॉलेज के एक लड़के का काफी बड़ा और सेक्सी डांस है इस पिक्चर में?मैंने पूछा- उस लड़के का नाम क्या है, बताएंगे?सिनेमा हाल का मैनेजर बोला- उसका नाम शायद सोमेश्वर सिंह है और हम उसकी बड़ी तलाश कर रहे हैं क्यूंकि फिल्म कंपनी के मालिक चाहते है फिल्म की पब्लिसिटी उस लड़के को मिला कर करवाई जाए!मैं बोला- अच्छा, क्या तुम उस लड़के को पहचान लोगे अगर वो तुम्हारे सामने आता है?मैनेजर बोला- क्यों नहीं, उस लड़के ने इतना सेक्सी डांस किया है कि कुछ पूछो मत!

मैं बोला- अच्छा, अगला शो कब है इस पिक्चर का?मैनेजर बोला- 6 बजे शाम को और फिर 9 बजे रात को… लेकिन आप यह सब क्यों पूछ रहे हैं?मैं बोला- आप हमारे लिए 15 सीटें बुक कर सकते हैं क्या? बालकनी में?मैनेजर बोला- ज़रूर कर दूंगा लेकिन किस के नाम से बुकिंग करूँ?मैं बोला- सोमेश्वर सिंह जी के नाम कर दीजीए. पैसे हम टिकट लेते हुए आप को दे देंगे.

अंजलि मैडम सब सुन रही थी, बोली- क्या बात हुई है?मैंने कहा- मैंने 15 सीटें बुक कर दीं हैं, हमको साढ़े पांच तक वहां पहुँच जाना चाहिए. आप चलेंगी ना मैडम जी?अंजलि मैडम बोली- हाँ ज़रूर चलेंगे लेकिन बाकी लड़के लड़कियाँ भी सिनेमा देखने जाना चाहते हैं क्या?

सब ने ज़ोर से हाँ बोला.तब मैडम ने उनसे कहा- वो सब अपने घरों में फ़ोन कर सकते हैं क्यूंकि पिक्चर से निकलते हुए काफी देर हो जायेगी और आप लोगों के घरवाले फ़िक्र ना करें.सब छात्रों ने ऐसा ही किया.
 


मेरे डांस वाली पिक्चर सिनेमा में


सब कॉलेज के लड़के और लड़कियाँ अपनी कारों में बैठ गए और फिर मैंने नैना को बुलाया और कहा कि तुम भी चलो हमारे साथ पिक्चर देखने!और जब मैंने उसी पिक्चर का नाम लिया जिसमें सबने बहुत ही ज्यादा मेहनत से काम किया था तो वो और पारो दोनों झट ही तैयार हो गई.मेरी इसी कहानी के 112 से 138 भाग देखिये.

हम ठीक समय पर सिनेमा में पहुंचे तो मैं और एक दो लड़के लड़कियाँ सीधे मैनेजर के कमरे में चले गए.जब उसने मुझ को देखा तो एकदम से चिल्ला पड़ा- अरे, ये तो फ़िल्मी सोमेश्वर सिंह जी हैं! आपकी तो हम बड़े दिनों से तलाश कर रहे थे क्यूंकि फिल्म कंपनी चाहती है कि फिल्म की पब्लिसिटी में आप हमारा साथ दें!

यह सुन कर सिनेमा का सारा स्टाफ वहाँ जमा हो गया और हैरानी से और ख़ुशी से मुझको देख रहा था.सबने बारी बारी से मेरे से हाथ मिलाया और साथ यह भी कहा- क्या कमाल का डांस किया है आपने फिल्म में सोमेश्वर जी, आपने तो लखनऊ का नाम रोशन कर दिया. वाह वाह!

इतने में पहला शो खत्म हुआ और जब उन सबको पता चला कि मैं भी वहाँ आया हुआ हूँ तो सारी भीड़ उमड़ पड़ी मुझको देखने के लिए और खूब धक्का पेल शुरू हो गई.मैं और मेरे साथी मैनेजर के कमरे में छुप गए.

मैनेजर साहिब ने मुझसे पूछ कर घोषणा कि कल दिन मैं सिनेमा की लॉबी में सब चाहने वालों को मिलूंगा 3 बजे के बाद और उनको अपने हस्ताक्षर भी दूंगा.यह सुन कर सब लोग धीरे धीरे वहाँ से जाने लगे और कुछ ने फिर भी मुझ से हाथ मिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

फिर मैनेजर साहिब ने टिकट के पैसे लेने से मना कर दिया और हम सब को हाल के अंदर तक छोड़ कर आये और यह भी कहा कि हम सबकी जलपान व्यस्था कर दी है और वो हाल में पहुंचा दिया जायेगा.

हाल में मेरे साथ बैठने की कश्मकश लड़कियों के बीच लगी हुई थी और मैडम के कहने के मुताबिक एक तरफ वो स्वयं बैठी थी और मेरे दूसरी तरफ सलोनी को बिठा दिया गया और उसके साथ ही रति को बैठा दिया था.बाकी की सारी लड़कियाँ रति के बाद बैठा दी गई और अंत में लड़कों को बिठाया गया.

पिक्चर शुरू हुई तो वही रोना धोना था लेकिन कोई 15 मिन्ट बाद हमारे गाँव को दिखाना शुरू कर दिया, नदी और उसके किनारे के सुन्दर जंगल की फोटोग्राफी बड़ी ही मनमोहक थी!फिर वह गाँव की लड़कियों का डांस शुरू हो गया और साथ में गाँव वाले लड़कों की ड्रेस में मुझ को गाँव की बालाओं को छुप छुप देखते हुए दिखाया गया.

फिर मेरे साथ डांस वाली सब लड़कियों के साथ डांस शुरू हो गया और यह देख कर मेरे साथ बैठे सब सहपाठियों ने तालियाँ मारनी शुरू कर दी.थोड़ी देर बाद ही मेरा चिपको डांस शुरू हुआ जिसको देख कर तो सारा हाल तालियों और सीटियों से गूँज उठा.बालकनी में बैठे हुए सभी लोगों को मेरे वहाँ होने का आभास मिल चुका था तो सब मुड़ मुड़ कर मुझको देख कर तालियाँ बजा रहे थे और मैं भी उठ उठ कर उनका अभिवादन स्वीकार कर रहा था.

सलोनी मेरे चिपको डांस से इतनी प्रभावित हो चुकी थी कि उसके हाथ मेरे लौड़े पर टिके हुए थे.और जब उसने महसूस किया कि मेरा लंड खड़ा हुआ है तो उसने अजीब हिम्मत दिखाई और मेरे लौड़े को पैंट से आज़ाद कर अपने हाथ में ले लिया.

मैंने अपनी दूसरी तरफ देखा तो अंजलि मैडम पिक्चर देखने में मगन थी तो मैंने भी सलोनी की टाइट चूत के ऊपर उसकी सलवार के ऊपर से हाथ रख दिया.फ़िर सलोनी ने अपनी कमीज को ऊपर कर दिया और मेरे हाथ के ऊपर उसको रख दिया.अब मेरा हाथ लोनी की चूत पर रखा था और मैं धीरे धीरे से उसकी सलवार के ऊपर से चूत पर हाथ फेरने लगा, बालों से भरी चूत के बालों को महसूस करने लगा.

फिर धीरे धीरे उसकी चूत में गीलापन आना शुरू हो गया और वो उसकी पतली सलवार से बाहर तक महसूस होने लगा.सलोनी के साथ बैठी हुई रति को शक हो रहा था कि सलोनी ज़रूर मेरे साथ कुछ ना कुछ कर रही होगी इसलिए वो बार बार उचक उचक कर देखने की कोशिश कर रही थी कि हम दोनों क्या कर रहे हैं.

थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया अंजलि मैडम जो मेरी बाईं तरफ बैठी थी, उनका एक हाथ मेरे बाईं जांघ के ऊपर पड़ा हुआ था और वो हल्के हल्के मेरी जांघ पर जैसे चल रहा था.मैंने भी अपना हाथ मैडम के हाथ के ऊपर रख दिया और उन्होंने मेरा हाथ अपनी सिल्की साड़ी वाली जांघ पर रख दिया.

अब हम दोनों एक दूसरे की जांघों पर अपने हाथ फेर रहे थे और दूसरी तरफ सलोनी मेरी जांघों और लंड के साथ खेल रही थी.मैडम के हाथ को देखते हुए मैंने अपने लंड को अपनी पैंट के अंदर कर लिया ताकि कहीं गलती से मैडम का हाथ मेरे अकड़े लंड पर ना पड़ जाए.

सलोनी को भी सर हिला कर मना कर दिया कि वो मेरे लंड को ना छेड़े.इंटरवल में मैनेजर साहिब के कहने पर हम सब के लिए कोल्ड ड्रिंक्स और समोसे आ गये और हम सबने ही बड़े चाव से खाए.
 
इंटरवल के बाद मेरी दाईं सीट पर रति आ बैठी.जैसे ही हाल में अँधेरा हुआ, वो शुरू हो गई मुझसे छेड़ छाड़ करने लेकिन मैंने उसके कान में फुसफुसा दिया कि मैडम का कुछ तो लिहाज़ करो!

इंटरवल के बाद मैडम भी काफी बोल्ड हो चुकी थी और अब वो खुल कर मेरे लंड और शरीर के साथ खेलने लगी, मैं भी मैडम का पूरा साथ दे रहा था.मैम ने मेरे लंड को निकाल रखा था पैंट से और मैं भी उनके मम्मों और चूत पर साड़ी के ऊपर से हाथ फेरता रहा.

पिक्चर खत्म हुई तो मैडम बोली- सतीश तुम वापस मेरी कार से चलना, मैं तुमको रास्ते में ड्राप कर दूंगी.मैंने भी हामी भर दी.मैडम के साथ जाने से पहले मैंने नैना और पारो और रति को एक कार में बिठा दिया जो उनको घर तक छोड़ आने वाली थी क्यूंकि वो लड़की भी उसी तरफ की रहने वाली थी.

मैडम बड़ी अच्छी कार चलाती थी और वो कार को चलाती हुई मुझको एक रेस्तराँ में ले गई.वहाँ जाते ही उसने हम दोनों के लिए बड़ा ही हॉट डिनर मंगवाया जिसमें मटन के कई बड़ी स्वादिष्ट व्यंजन थे.

खाना खाते हुए अंजलि मैडम ने अपना बायाँ हाथ मेरी जांघ पर ही रखा हुआ था और वो बार बार चुदाई के हिंट्स दे रही थी.मुझको समझते देर नहीं लगी कि वो चुदाई के लिए काफी बेकरार हो रही थी तो मैंने भी अपनी रज़ामंदी उनकी जांघों पर अपने हाथ को फेरते हुए ज़ाहिर कर दी.

खाने के दौरान मैडम ने मुझसे पूछा- सतीश, तुम्हारी कोठी में कौन कौन रहता है?मैं बोला- मैडम जी, मैं और मेरे सर्वेन्ट्स ही रहते हैं अभी तो, आप आ सकती हैं जब आप की मर्ज़ी हो लेकिन ज़रा पहले बता देंगी तो मैं सारे इंतज़ाम कर के रखूंगा.अंजलि मैडम बोली- कल तो तुम बिजी होगे सिनेमा में, तो क्या मैं परसों आ जाऊँ?

मैं बोला- मैडम जी, आप कल शाम को फ्री हैं क्या? यदि हाँ तो आप कल ही आ जाएँ मेरे घर, तब तक मैं भी सिनेमा से फ्री हो जाऊंगा.मैडम मान गई और खाना खाने के बाद वो मुझ को घर छोड़ते हुए अपने घर चली गई.

अगले दिन कॉलेज में रिहर्सल करने के बाद मैं और रति दोनों सिनेमा चले गए जहाँ काफी लोग मुझसे मिलने के लिए आये और मेरे ऑटोग्राफ लेने के लिए सब काफी उत्सुक थे.सबने मेरे डांस की काफी तारीफ की और 3-4 लड़कियों ने तो मेरा फ़ोन नंबर भी ले लिया और वायदा किया कि वो मुझ से दुबारा मिलेंगे.

सिनेमा का काम खत्म कर के मैं घर वापस आया और रति को उस के घर भेज दिया, अब मैं अपनी कोठी में अंजलि मैडम का इंतज़ार करने लगा.इससे पहले कि अंजलि मैडम आती, उर्वशी भाभी तेज़ी से कोठी के अंदर आ गई और सीधे मुझको लेकर मेरे वाले बैडरूम में चली गई.

आते ही उन्होंने बेतहाशा मुझ को होटों पर चूमना शुरू कर दिया और मैं कहता भी रहा ‘भाभी यह क्या कर रही हो?’ लेकिन तब तक उन्होंने मेरे सारे शरीर पर हाथ फेरने शुरू कर दिये.भाभी ने झट से मेरे लौड़े को पैंट से निकाला और उसको चूसने लगी..

अब मुझको थोड़ा गुस्सा आने लगा था, मैंने एक झटके से भाभी को अपने से अलग किया और कहा- भाभी यह आप क्या कर रही हो? अभी मेरे कॉलेज के प्रोफेसर्स आने वाले हैं, वो क्या सोचेंगे आपके बारे में? आप जल्दी से घर जाओ!भाभी- सॉरी सतीश, वो क्या है अभी रति ने मुझको बताया कि तुमने पिक्चर में कितना अच्छा डांस किया है तो मैं अपने आप को रोक नहीं सकी. क्या एक छोटी सी चुदाई मेरी कर सकते हूँ अभी? प्लीज सतीश, मैं बहुत हॉट हो रही हूँ… प्लीज प्लीज!

मैंने भी अपने लंड को पैंट के बाहर निकाला और भाभी की साड़ी ऊपर करके बेड के सहारे उनको खड़ा करके उनकी गर्म चूत में अपना लंड घुसेड़ दिया और गीली चूत में लंड सर्र से अंदर चला गया पूरा का पूरा.मैंने भी सरपट भागते घोड़े की तरह से भाभी की चुदाई शुरू कर दी और 5-7 मिन्ट में ही भाभी का पानी छूट गया और भाभी अपनी चूत को अपने पेटीकोट से पौंछती हुए एक आखरी चुम्बन मेरे लबों पर देकर जल्दी से कोठी से बाहर निकल गई.

करीब दस मिन्ट बाद ही मैडम भी आ गई और मैंने उनका अच्छी तरह से स्वागत किया.

कहानी जारी रहेगी.
 
साथ बने रहने के लिये आप सब का आभारी हूं
 


अंजलि मैडम की चुदासी चूत की चुदाई


नैना हमारे लिए कोक ले आई और कोक पीकर हम सब एकदम फ्रेश हो गए.फिर मैं मैडम को लेकर अपने बैडरूम में आ गया.

बैडरूम में पहुँचते ही अंजलि मैडम ने आगे बढ़ कर मुझको एक बहुत ही कामुक जफ्फी डाली और उसके जवाब में मैंने भी उसको अपनी बलिष्ठ बाहों में लेकर उनके लबों पर एक गर्म चुम्बन कर दिया.

थोड़ी देर हम इसी तरह एक दूसरे को चूमते चाटते रहे और फिर मैंने पहल करते हुए मैडम की शिफ़ॉन की गुलाबी साड़ी पर हाथ डाला और धीरे से उसको उतार दिया.फिर मैंने मैडम के ब्लाउज और ब्रा को उतार दिया और आखिर में उनके सफ़ेद पेटीकोट को उतार दिया.

अब थोड़ा पीछे हट कर मैं उनकी ख़ूबसूरती का रसपान करने लगा, वो वाकयी में बहुत ही सुन्दर स्त्री थी और उनकी उम्र होगी तकरीबन 25 साल!वो देखने में बड़ी ही मोहक लग रही थी जैसे साँचे में ढला हुआ शरीर और खूब मोटे और शानदार मम्मों और मोटे गुदाज़ चूतड़ों के साथ वो एक ख़ूबसूरती का मुजस्समा ही लगती थी.उनकी चूत पर घने काले रेशमी बाल छाये हुए थे जो मुझको बेहद पसंद थे.

उन्होंने बताया कि वो अभी तक शादी नहीं कर पाई क्यूंकि उनको कोई लड़का पसंद ही नहीं आ रहा था.अंजलि मैडम ने आगे बढ़ कर मेरी पैंट को उतार डाला और फिर शर्ट और बनियान.और फिर मेरे अंडरवियर में हाथ डाल कर एक झटके में उन्होंने उसको नीचे खींच डाला और साथ ही अपना मुंह भी पीछे कर लिया जैसे उसको यह अंदाजा हो गया था कि मेरा लंड आज़ाद होने पर क्या गुल खिलायेगा.

मैंने आगे बढ़ कर मैडम को अपनी बाहों में ले लिया और उनके लबों पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी.मैडम भी मेरे अकड़े हुए लम्बे और मोटे लंड के साथ खेल रही थी. वो नीचे झुकी और मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और हाथों से मेरे अंडकोष के साथ खेलने लगी.

मैंने मैडम को उठाया और बेड पर लिटा दिया, स्वयं उनकी जांघों के बीच में बैठ कर उनकी चूत की चुसाई शुरू कर दी. मेरी जीभ मैडम की भग के साथ खलने लगी और उनकी चूत के अंदर गोल गोल घूमने लगी.मैडम का सर आनन्द से इधर उधर होने लगा और उस ने दोनों हाथ से मेरे सर को अपनी चूत में दबा रखा था.

जैसे जैसे ही मैं उनकी भग को चूसता जा रहा था, मैडम का तिलमिलाना और भी तेज़ हो गया और उनकी जांघें कभी मेरे सर को जकड़ रही थी और कभी उसको और छोड़ रही थी.फिर मैडम का कंपकंपी के साथ मेरे सर को जांघों में जकड़ कर एक ज़ोरदार स्खलन हो गया और मैडम उसके बाद निढाल होकर लेट गई.

फिर मैंने महसूस किया कि मैडम की चूत लबालब पानी से भर गई है तो मैडम की टांगें चौड़ी करके मैंने उनके बीच में बैठ कर लंड का निशाना चूत के मुख पर लगा कर एक ज़ोर का धक्का लंड से मारा तो वो सुपारे समेत अंदर जा घुसा.अंजलि मैडम के मुंह से यकलख्त ही निकल गया- हाय मैं मरी रे!

लंडम लाला को धीरे धीरे जड़ तक पूरा अंदर डाल कर मैं मैडम के मम्मों को चूसने लगा. उनके निप्पल एकदम खड़े हो गए थे और उन चूचुकों को चूसने से और ही आनन्द आ रहा था.मैडम ने अब नीचे से चूतड़ों की थाप देना शुरू कर दी और मैं भी लयबद्ध हो कर चुदाई में संलग्न हो गया, कभी तेज़ स्पीड और कभी आहिस्ता स्पीड को जारी रखते हुए मैंने मैडम को कुछ क्षणों में पुनः झड़ने पर मजबूर कर दिया.

झड़ते समय मैडम की कंपकंपाहट काफी तीव्र थी और उसकी दोनों जांघें मेरी कमर के चारों और लिपटी हुई थी और उन्होंने मुझको अपने निचले हिस्से के साथ पूरी तरह से बाँध रखा था.मैडम के स्खलित होने के बाद मैंने मैडम को बेड पर दोनों हाथों को नीचे टिका कर खड़ा कर दिया, फिर मैंने अपना गीला लंड धीरे से उसकी चूत में पीछे से डाल दिया.

इस पोज़ में मैडम ने शायद पहले कभी नहीं चुदवाया था इस लिए वो बार बार पीछे मुड़ कर देख रही थी कि मैं क्या कर रहा हूँ.मैंने अक्सर यह नोट किया है कि कई औरतों को यह संदेह होता है कि इस पोज़ में शायद उनका प्रेमी उनकी गांड तो नहीं मार रहा इसलिए वो बार बार पीछे मुड़ कर चेक करती रहती हैं.

अब मैंने शुरू में आहिस्ता चुदाई से बढ़ते हुए फुल स्पीड पर मडम की चूत की चुदाई शुरू कर दी. मैडम अपनी चुदाई का पूरा आनन्द लेने लगी और पूरे जोश से वो चुदाई में मेरा पूरा साथ देने लगी.चुदाई के दौरान मेरा हाथ उसकी चूत के ऊपर रखा हुआ था जिससे मैं मैडम की भग को छेड़ रहा था ताकि मैडम काफी गर्म होकर जल्दी ही स्खलित हो सकें.

मेरी कोशिश के कारण मैडम का शरीर लहलहाते हुए झड़ने के निकट पहुँच गया लेकिन मैंने उसकी भग को मसलना छोड़ दिया और फिर हल्के धीमे धक्कों में पुनः वापस आ गया जिसके कारण मैडम के झड़ने को टाल दिया.मेरी चुदाई की कला के कारण मैडम को पूरा आनन्द तो आ रहा था लेकिन उसके स्खलित होने का समय मैं टालता जा रहा था.
 
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