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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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तीन चार बार ऐसा करने के बाद मैडम ने मुझको पीछे से हटा दिया और मुझको एक झपाटे से बिस्तर पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ बैठी और बड़ी ही तेज़ रफ़्तार से उन्होंने मुझको चोदना शुरू कर दिया.वो आँखें बंद करके बिना रुके मुझको चोद रही थी और वो झड़ने के निकट पहुँच रही थी, वो जल्दी जल्दी से ऊपर नीचे हो रही थी और ऐसी मेहनत के बाद वो शीघ्र ही स्खलित हो गई और इस बार उसकी चूत में से काफी गाढ़ा पदार्थ निकला जो मेरे पेट पर फ़ैल गया और वो स्वयं निढाल हो कर मेरे पेट पर लेट गई.

मैंने उसके होटों पर गर्म गर्म चुम्बन देने शुरू कर दिए और इसके कारण वो मुस्कराते हुए मेरे ऊपर लेटी रही और कुछ अस्फुट शब्दों में बोलने लगी- थैंक यू सतीश यार, तुमने मेरी महीनों की प्यास मिटा दी!मैं मैडम को चूमते हुए बोला- आपका स्वागत है मैडम जी, जब भी आपका दिल करे, आप एक फ़ोन कर के आ जाओ, मैं आपके लिए सदा हाज़िर हूँ.

फिर हम एक दूसरे की बाहों में कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे.थोड़े समय बाद मैंने फिर कोशिश की मैडम को पुनः चुदाई के लिए तैयार कर लूं लेकिन मैडम ने मेरा हाथ रोक दिया और प्यार से कहने लगी- बस सतीश, अब और नहीं!और यह कहते हुए मैडम उठी, अपने कपड़े पहनने लगी और मैं भी उसके अनुकरण में कपड़े पहनने लगा.

मैंने मैडम से पूछा- क्या लोगी मैडम, ठंडा या फिर गर्म?मैडम बोली- एक कप गर्म कॉफी का मिल जाए तो मज़ा ही आ जाए!

मैंने नैना को आवाज़ दी और जब वो आई तो मैंने उसको दो कप कॉफ़ी बनाने के लिए कहा.दस मिन्ट में काफी तैयार हो गई और हम मज़े से उसका स्वाद ले ही रहे थे कि नैना तेज़ी से आई और बोली- छोटे मालिक, बाहर कुछ लड़कियाँ आई हैं जो आपसे मिलने के लिए ज़िद कर रही हैं.मैंने मैडम की तरफ देखा और बोला- सॉरी मैडम, शायद मेरे कुछ फैन आई हैं, अगर आपकी इजाज़त हो तो अंदर बुला लेता हूँ उनको?

मैडम ने सहमति में सर हिला दिया और नैना बाहर जा कर 5-6 बड़ी ही स्मार्ट लड़कियों को अंदर लेकर आ गई.उनमें से जो सबसे शोख और तेज़ तर्रार लड़की थी, वो बोली- सतीश जी, हमने आपकी पिक्चर देखी है और हम सब आपके डांस की मुरीद हो गई हैं.मैंने ख़ुशी जताते हुए उनका थैंक्स किया और पूछा- आप सबकी क्या सेवा करें?सबने अपनी ऑटोग्राफ कापी आगे बढ़ा दी और मैंने बारी बारी से उन सब पर अपने दस्तखत कर दिए.

अब अंजलि मैडम बोली- अच्छा सतीश, मैं अब चलती हूँ, कल कॉलेज में मिलते हैं.मैं उनको बाहर कार तक छोड़ आया, अंदर आकर मैंने उन लकड़ियों से पूछा- आप क्या लेंगी? ठंडा या फिर गर्म?उनमें से तेज़ तर्रार लड़की बोली- मेरा नाम श्रुति है, आपके कॉलेज में फर्स्ट ईयर आर्ट्स में पढ़ती हूँ और ये सब भी वहीं पढ़ती हैं.

फिर श्रुति ने सबसे मिलवाया और कहा- ये सब भी आपका चिपको डांस देख कर आप पर पागल हो रही हैं, क्या करना चाहिए?नैना जो यह सब बातें सुन रही थी, बोली- छोटे मालिक ने जो डांस किया है, वो तो सिर्फ पिक्चर तक ही है ना… उसके बाद आप क्या करना चाहती है?श्रुति बोली- हम सतीश जी से दोस्ती करना चाहती हैं.मैं बोला- तो ठीक है, कल कॉलेज में मिलते हैं, वहीं पक्की दोस्ती कर लेते हैं. क्यों ठीक है ना?

सबने बड़ी मुश्किल से हाँ की और फिर सबको नैना ने कोल्ड ड्रिंक्स पिला कर रवाना कर दिया.

थोड़ी देर बाद उर्वशी भाभी और रति दोनों ही आ टपकी और दोनों ही मेरे साथ हल्की फुल्की चुहलबाज़ी करने लगी.उर्वशी भाभी भी मेरी डांस वाली पिक्चर देख आईं थी तो वो और रति दोनों मेरे साथ चिपको डांस करने के लिए काफी उतावली हो रही थी.मैंने भी उन दोनों का दिल रखने के लिए चिपको डांस करने के लिए हामी भर दी.

और तब रति ने आगे बढ़ कर मेरे रिकॉर्ड प्लेयर पर चिपको डांस वाला गाना लगा दिया और हम तीनों मज़े मज़े से चिपको डांस की नक़ल उतारने लगे.रति के साथ डांस पहले शुरू किया और वो इतनी ज़्यादा कामुक हो चुकी थी कि वो बिना किसी शर्मो लिहाज़ के अपनी सलवार कमीज में लिपटी हुई गांड मेरे लौड़े के ठीक सेंटर में रख कर खूब सेक्सी डांस करने लगी, यहाँ तक कि मेरा लंड भी एकदम खड़ा हो चूका था और रति की गांड की दरार में तकरीबन घुसा हुआ था.

अब भाभी को भी होशियारी आनी शुरू हो गई थी और जैसे ही रति और मैंने डांस का एक चक्कर खत्म किया, भाभी ने लपक के रति को हटा दिया और स्वयं मेरे साथ अपनी गोल और उभरी हुई गांड को लंड के ऊपर रगड़ने लगी और मुझको अपनी बाहों में लेकर कभी आगे से और कभी पीछे से अपने शरीर को मेरी पैंट में खड़े हुए लंड से रगड़ने लगी.

भाभी तो इतनी कामुक हो गई थी कि मुझको लगा कि दूसरे चक्कर के दौरान में वो पूरी तरह से स्खलित हो गई और उनके शरीर में एक हल्की सी कंपकंपी दौड़ गई और वो मुझसे चिपक कर झूमने लगी.

रति की चुदासी चूत

नैना यह सब देख रही थी, वो आगे बढ़ी और उसने भाभी को पकड़ कर सोफे पर बिठा दिया और इसका इंतजार करती हुई रति दौड़ कर मुझसे आकर चिपक गई और अपनी गांड को पुनः मेरे लंड से रगड़ने लगी.रति ने कान में फुसफुसा कर कहा- अब मुझको कब चोदोगे सतीश?.

मैं उसको चुप रहने के इशारे कर रहा था लेकिन वो अब अपने गोल गदाज़ मुम्मे मेरी छाती से रगड़ रही थी बिना भाभी की परवाह किये हुए.मैं और कंम्मो हैरान थे लेकिन वो दोनों मस्त हुई मेरे साथ काफी देर चिपको डांस करती रहीं एक के बाद एक!

फिर अचानक भाभी की नज़र घड़ी पर पड़ी और वो चौंक कर बोली- चलो रति, तुम्हारे भैया आने वाले होंगे.रति बोली- आप चलो भाभी, मैं थोड़ी देर में आती हूँ.

भाभी ने मेरी आँखों में देखा और बिना कुछ बोले वहाँ से चली गई.अब रति तो मुझको तकरीबन घसीटती हुए बैडरूम में ले गई और मेरे खड़े लंड को पैंट से निकाल कर चूसने लगी और फिर बोली- जल्दी करो सतीश, एक छोटी सी चुदाई कर दो मेरी प्लीज!

मैं अब काफी चिढ़ गया था, मैंने उसको बेड पर हाथ टिका कर खड़ा किया और रति ने स्वयं ही अपनी सलवार ढीली कर नीचे खिसका दी और मैंने अपना लंड उसकी गीली चूत में पीछे से डाल दिया.मैं तो धक्के मारने की लय के बारे में सोच ही रहा था, रति ने बड़ी तेज़ी से अपनी गांड को आगे पीछे कर के मुझको ही चोदना शुरू कर दिया.

तकरीबन 10 मिन्ट की तीव्र धक्काशाही में रति का तीव्र स्खलन हो गया और वो बेड में औंधे मुंह ही लेट गई.

कहानी जारी रहेगी.
 
साथ बने रहने के लिए आप सब का आभारी हु
 
मेरे फ़िल्मी डांस की फैंस की चूत चुदाई

तकरीबन 10 मिन्ट की तीव्र धक्काशाही में रति का तीव्र स्खलन हो गया और वो बेड में औंधे मुंह ही लेट गई.मैं वहाँ से उठा और बैठक में आकर बैठ गया.

तब तक रति भी अपने कपड़े ठीक ठाक कर के बैठक में आ गई और बोली- सतीश, तुम तो बहुत ही पॉपुलर हो गए हो सारे लखनऊ में! अब हमारा क्या होगा?मैं भी मुस्कराते हुए बोला- तुम्हारा क्या होना है?रति उदास होते हुए बोली- वही तो… अब तुम्हारा प्यार तो कई लड़कियों में बंट जाएगा, फिर हमारा नंबर तो लगना मुश्किल हो जाएगा ना?

मैं बोला- नहीं री रति, तू तो मेरी फेवरिट कुंवारी कन्या है, तेरे बिना कैसे कटेगी यह दोपहरिया? क्या तुम को अपने भैया से डर नहीं लगता? क्या सोचेंगे वो तुम्हारे यहाँ बार बार आने के बारे में?रति बड़ी बेरुखी से बोली- क्या सोचना है हमारे बारे में? हम कॉलेज में एक साथ पढ़ते हैं और फिर हम दोनों भी हम उम्र हैं तो मैं नहीं समझती वो कुछ भी सोचेंगे हमारे बारे में.

मैं बोला- ठीक है, अब तुम जाओ अपने घर, मैं थोड़ा लेट लेता हूँ.यह कह कर मैं उसको बाहर जाने के दरवाज़े तक छोड़ने के लिए चल पड़ा और जाते हुए उसके चूतड़ों पर हाथ भी फेरता हुआ गया.जाने से पहले रति मुझको कल अपने साथ कॉलेज ले जाने के लिए ज़ोर दे कर याद करा गई.

अगले दिन कॉलेज में हम दोनों पहुंचे तो कई लड़के और लड़कियों ने हम को घेर लिया, तरह तरह के सवाल पूछे जाने लगे ‘कैसे करी शूटिंग? कौन कौन सी हीरोइन के साथ डांस करा? कैसे करा? खूब ऐश लूटी होगी?’

मैं सिर्फ चुप रहा और केवल मुस्कराता रहा और फिर रति का हाथ पकड़ कर हम अपनी अपनी क्लासों में आ गए.वहाँ भी सबने मुझको घेर लिया और मेरे साथ हाथ मिलाने की भरसक कोशिश करने लगे.लड़कियों ने तो काफी करीब आ कर हाथ मिलाया और इस अफ़रा-तफरी में उनके मम्मे और चूतड़ों के साथ हाथ लगाई का कार्यक्रम चलता रहा.उनके भी हाथ यदा कदा मेरे लौड़े का भी नाप लेते रहे.

और यह कार्यक्रम चलता रहता यदि हमारे प्रोफेसर साहिबा क्लास में ना आ जाती.उन्होंने भी मुझको संबोधन करके मुझको बधाई दी.

लंच इंटरवल में कैंटीन वो कल वाली पांचों लड़कियों ने घेर लिया, बड़ी बेशर्मी से मेरे साथ चिपक कर बातें करने लगी जिसके कारण कैंटीन में सबकी नज़रें हम पर ही थी.

मैंने चुपके से उनको समझाया कि सार्वजानिक जगह पर तो कुछ लिहाज़ करें और उन्होंने भी शाम को मेरे घर मिलने का वायदा ले कर ही पीछा छोड़ा.डांस रिहर्सल भी काफी हॉट रहा, सब लड़कियाँ यह चाहती थी कि चिपको डांस उनके साथ भी किया जाए.

जब तक अंजलि मैडम नहीं आई, तब तक लड़के और लड़कियाँ आपस में मेरे चिपको डांस की नक़ल करते रहे.मैडम के आ जाने के बाद सबने अपने निर्धारित डांस स्टेप्स शुरू कर दिए.

रिहर्सल खत्म कर के मैं और रति बाइक पर और हमारे पीछे कार पर वो पांचों लड़कियाँ भी हमारी कोठी पहुँच गई. नैना ने सब का स्वागत किया.रति तो अपने घर चली गई और हम सब बैठक में बैठ गए.

नैना जलपान ले आई और उसके बाद मैंने सब लड़कियों का परिचय पूछा तो श्रुति ने सबके नाम बताये और कहा- सब यहीं के आस पास कोठियों में ही रहती हैं और पैदल हमारे घर आ जा सकती हैं.मैं श्रुति की तरफ देखते हुए बोला- तो कहिये श्रुति मैडम, आप क्या करना चाहती हैं?श्रुति बोली- थोड़ी देर चिपको डांस हो जाए हम सब के साथ, तो मज़ा आ जाए?

मैं बोला- एक साथ तो आप सबके साथ नहीं नाच सकता ना… सो आप भी दो दो के ग्रुप में डांस करिये जैसे कि मैं और श्रुति करेंगे. ठीक है?अब मैं और श्रुति बैठक में एक दूसरे के गले में बाहें डाल कर चिपको डांस करने लगे.श्रुति के छोटे लेकिन सॉलिड मम्मे मेरी छाती से चिपके हुए थे और मेरे दोनों हाथ भी उसके चूतड़ों पर टिके हुए थे और मेरा अकड़ा हुआ लंड श्रुति की चूत पर सलवार कमीज के बाहर से रगड़ा मार रहा था.

बाकी चारों लड़कियाँ भी आपस में एक साथ चिपक के डांस कर रही थी और एक दो आपस में किसिंग भी कर रही थी.श्रुति अब काफी कामुक हो चुकी थी और उसका हाथ 2-3 बार लौड़े को छू चुका था, मैंने भी उसकी चूत को कपड़ों के बाहर से सहलाया और वो मेरी आँखों में झाँक कर यह देखने की कोशिश कर रही थी कि मैं उसको चोदने के लिए तैयार हुआ कि नहीं.

डांस के अगले दौर में श्रुति ने शर्म को ताक पर रख कर मेरे लबों पर एक गर्म चुम्मी जड़ दी जिसको उसकी सहेलियों ने भी देखा और जवाब में मैंने उसको अपनी बाहों में भींच लिया और उसके चुम्बन का जवाब हॉट फड़कती हुई किस से दिया.

अब हम वास्तव में चिपक कर डांस कर रहे थे जिसमें मेरा लंड तो तकरीबन उसकी चूत में घुसा हुआ था कपड़ों के ऊपर से!फिर श्रुति मेरे कान में फुसफुसाई- आपकी इच्छा कुछ बनी क्या?मैं मुस्कराया- वो तो सब आपकी इच्छा पर निर्भर करता है.श्रुति भी मुस्करा दी- मेरी तो इच्छा हो रही है, बाकी मैं अपने फ्रेंड्स से भी पूछ लेती हूँ.
 
वो मुझ को छोड़ कर अपनी सहेलियों के पास गई और उन्होंने भी थोड़ा शर्माते हुए हामी भर दी.मैंने नैना को आवाज़ दी और वो जल्दी ही बैठक में आ गई और मैंने उसको लड़कियों की इच्छा बताई तो वो बोली- छोटे मालिक, आप पाँचों के साथ कैसे कर पाओगे? मेरे ख्याल से यही अच्छा होहा कि आप इन में से दो के साथ आज चुदाई कर लें और बाकी के साथ फिर किसी और दिन का टाइम दे दें.

श्रुति ने बाकी लड़कियों से पूछा तो वो कहने लगी क़ि करेंगी तो एक साथ नहीं तो नहीं करेंगी.नैना मेरी तरफ देखने लगी और साथ ही उसने हल्के से हाँ में सर हिला दिया.

फिर नैना उन सबको लेकर बैडरूम में आ गई और फिर उनसे चुपके से कुछ पूछा और फिर बोली- सब ठीक है छोटे मालिक, आप एक एक करके इन सबको चोदो और हम मिल कर इन कुंवारी लड़कियों को चुदाई के लिए तैयार कर देंगी.

नैना उनको बोल गई- आप अपने कपड़े उतारो और छोटे मालिक के भी कपड़े भी उतारो, मैं अभी आती हूँ.श्रुति ने सबसे पहले अपने कपड़ों को उतारने के लिए हाथ बढ़ाया ही था, कि मैं उसके पास पहुँच गया और एक कामुक जफ्फी उसको मारी और उसके लबों पर एक ज़ोरदार चुम्मी कर दी.

फिर मैं उसके कपड़े उतारने में संलग्न हो गया और एक एक कर के जैसे ही उसके कपड़े उतरे, वो काफी हसीं लड़की के रूप में निकलती आ रही थी. उसके मम्मे बड़े गोल और सॉलिड थे लेकिन साइज में मध्यम से थे और उसके चूतड़ भी गोल और काफी सख्त थे और उसकी चूत भी काले बालों की काली घटा में छिपी हुई थी.

मैंने बाकी दूसरी लड़कियों की तरफ देखा तो वो भी प्रायः नग्न हो चुकी थीं और लाइन में खड़ी हो गई थी.चारों काफी खूबसूरत थीं और उनके शरीर भी बहुत उत्तेजक और मादक थे. नंबर तीन लड़की का शरीर उन सबसे बहुत अधिक सुन्दर था क्यूंकि उसके मम्मे बहुत ही मोटे और सॉलिड थे और उसके चूतड़ भी गोल और उभरे हुए थे.

श्रुति ने बताया कि उसका नाम नाज़ो था और वो एक नवाबी खानदान से सम्बन्ध रखती थी और काफी रईस थी.वो ही अपनी कार में सब लड़कियों को बिठा कर हमारी कोठी ले कर आई थी.नाज़ो हमारी बातें सुन कर हमारे पास आ गई थी और आते ही उसने मेरे लौड़े पर पैंट के बाहर से हाथ रख दिया.

नाज़ो ही मेरे कपड़े उतारने लगी और जल्दी ही उसने मुझ को अल्फ़ नंगा कर दिया और झुक कर मेरे लौड़े को अपने मुंह में ले लिया और उधर बाकी की सब लड़कियों ने मुझ को घेर लिया और मेरे अंगों से अपने सुन्दर शरीरों के अंग रगड़ने लगी.

मेरा लंड अब इतना सख्त खड़ा था कि वो पूरी तरह से खड़ा होकर मेरे पेट से चिपका हुआ था.इससे पहले कि श्रुति मुझ पर कब्ज़ा करती, नाज़ो ने आगे बढ़ कर मुझ पर अपना हक जमा दिया और अपने गोल मोटे और सॉलिड मम्मों को मेरी चौड़ी छाती से रगड़ने लगी और मेरे मुंह को खींच कर उसने अपने लबों को मेरे होटों के साथ चिपका दिया और उन को खूब मज़े से चूसने लगी.

बाकी की चार लड़कियाँ भी मेरे साथ चिपकने की कोशिश करने लगी लेकिन नाज़ो उन सबसे तेज़ थी, उसने मुझको झट से पलंग पर लिटा दिया, खुद मेरे पर ऊपर चढ़ बैठी और जल्दी से मेरे अकड़े हुए लंड को बालों भरी चूत के मुंह पर रख कर एक ज़ोरदार धक्का मारा और मेरा 7-8 इंच का लौड़ा उसकी फूली हुई और निहायत ही गीली चूत में एकदम से पूरा समा गया.

अब तक नैना भी वापस आ गई थी, वो भी एकदम निर्वस्त्र होकर लड़कियों को लेकर पलंग पर विराजमान हो गई और सबको एक दूसरी के साथ चूमा-चाटी में व्यस्त कर दिया.

अब मैं भी नाज़ो को पूरी तल्लीनता से चोदने लगा और हर धक्के का मैं नीचे से जवाब देने लगा.मेरा लंड उसकी चूत के अंत तक जा रहा था, उसको भी महसूस हो रहा था और मैं भी उसके गोल मोटे मुम्मों को मुंह में लेकर चूसने की कोशिश करने लगा, उसके गोल मोड़े चूचुकों को मुंह में लेकर बहुत ही तेज़ी से चूसने लगा और एक ऊँगली से उसकी चूत पर स्थित उसकी भग में भी ऊँगली से घर्षण करने लगा.

मेरे ऐसा करने के कुछ क्षण बाद ही नाज़ो की चूत में खुलना बंद होने की प्रकिया शुरू हो गई और कुछ ही धक्कों के बाद ही नाज़ो का शरीर कंपकंपी करता हुआ स्खलित हो गया और वो अपने मोटे मम्मों के साथ मेरे ऊपर पूरी तरह से पसर गई.

नैना ने उठ कर नाज़ो को मेरे ऊपर से हटाया और श्रुति को लाकर मेरे साथ लिटा दिया.

मैंने हल्के से उससे पूछा- कैसे चुदोगी मैडम? घोड़ी या फिर खड़े होकर या फिर नीचे लेट कर या गोद में बैठ कर या फिर कमरे का चक्कर लगाते हुए?श्रुति बोली- यह कमरे में चक्कर वाला फ़क कैसा होता है? यह तो मैंने कभी नहीं सुना और ना ही देखा है, आज यही आज़मा लेते हैं, क्यों सतीश जी?मैं बोला- ठीक है श्रुति जी जैसा आप कहो!

फिर श्रुति के साथ भी हॉट चुम्बन और गहरी जफ्फी लगाने के बाद जब उसको उंगली से टेस्ट किया गया तो वो भी पूरी तरह से तैयार थी और काफी पनियाई हुई थी.अब मैंने खड़े होकर श्रुति को उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर उठा लिया और निशाना साध कर अपने लौड़े को उसकी गीली चूत के मुंह पर रख कर एक धक्का मारा तो सम्पूर्ण गृह प्रवेश!

श्रुति की बाहें मेरे गले में थी और वो अपने चूतड़ उठा उठा कर स्वयं ही धक्के मार रही थी, मैं तो केवल उसको उठा कर कमरे में घूम रहा था जैसे मैं हज़रत गंज में घूम रहा हूँ.

कोई 4-5 चक्कर ही काटें होंगे तो श्रुति ने अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने की स्पीड बड़ी तेज़ कर दी और अपनी बाहों के घेरे को मेरे गले में बहुत ही टाइट कर दिया और फिर वो हुंकार भरते हुए मेरी छाती से चिपक गई और ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी.

जब वो कुछ रुकी तो मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और साथ मैं भी लेट गया.नैना ने अब कुछ देर का इंटरवल घोषित किया और बाकी तीनो लड़कियाँ मेरे साथ आकर लेट गई.

मेरे साथ वाली लड़की का नाम पूछा तो उसने अपना नाम रोशनी बताया और मेरे दूसरी तरफ लेटी लड़की ने अपना नाम शमा बताया और तीसरी ने अपना नाम मधु बताया.तब नैना ने हम सब को कोकाकोला की बोतलें खोल कर दे दी और स्वयं भी कोक पीने लगी.

रोशनी ने घोड़ी बन कर चुदवाने की इच्छा जताई, मैं उसको चोदने के लिए तैयार हो गया और उसे गर्म करने की ज़रूरत नहीं थी क्यूंकि उसको नैना और उसकी सहेलियों ने उसको पूरी तरह से तैयार कर रखा था बस सिर्फ चूत में लंड डालने की ही कसर थी.

अगले आध घंटे में बाकी तीनों लड़कियों का भी कल्याण कर दिया, उन सबकी चुदाई उनकी इच्छा के मुताबिक कर दी और फिर मिलने का वायदा करके हमने उनको रवाना कर दिया.सबने जाते हुए कहा- सतीश राजा, तुम सिर्फ एक अच्छे डांसर ही नहीं हो बल्कि एक मदमस्त चोदू राजा भी हो!मैंने जवाब में कहा- थैंक यू वेरी मच!

कहानी जारी रहेगी.
 
कॉलेज की छात्राओं सलोनी और रूही की चुदाई

सब ने जाते हुए कहा कि सतीश राजा तुम सिर्फ एक अच्छे डांसर ही नहीं हो बल्कि एक मदमस्त चोदु राजा भी हो.थैंक यू वेरी मच- मैंने कहा.मैं उन लड़कियों को छोड़ कर आया ही था कि इतने में सलोनी के आने की खबर चौकीदार लखन लाल ने दी, उसके पीछे ही सलोनी जल्दी से अंदर आ गई और उसके साथ एक और लड़की भी थी जो हमारे डांस ग्रुप में थी.

मैंने हैरानी जताते हुए कहा- क्या बात है सलोनी? तुम इस वक्त यहाँ?सलोनी बोली- मैं इधर से गुज़र रही थी तो सोचा सतीश को याद करवा दूँ कि मेरा नंबर अभी बाकी है, तो कब लगा रहे हो मेरा नम्बर?मैंने कहा- कल कॉलेज के बाद इकट्ठे आ जाएंगे और तुम्हारा काम भी कर देंगे. और यह कौन हैं तुम्हारे साथ?सलोनी बोली- अरे इन को नहीं पहचाना क्या? हमारे डांस ग्रुप की रूही है जो लास्ट डांस रिहर्सल में यहाँ आई थी.मैं अपनी भूल सुधारते हुए बोला- अरे हाँ याद आया, इनके साथ तो डांस भी किया था.

तब सलोनी बोली- वो दरअसल मैं सतीश, तुम को न्योता देने आई हूँ, कल रात हमारे घर में एक छोटी सी पार्टी रखी है जिस में 6 जोड़े लड़के लड़कियों को डांस गाना और मौज मस्ती के लिए बुलाया है, तुमको भी आना पड़ेगा अपने पार्टनर के साथ… बोलो आओगे क्या?मैं बोला- लेकिन मेरी तो कोई पार्टनर नहीं है?सलोनी बोली- क्यों रति तो है ना, उसको ले कर आ जाना.मैं बोला- मैं उससे पूछूंगा, अगर मान गई तो आऊंगा, नहीं तो सॉरी!

सलोनी बोली- मैं खुद तुम को लेने आ जाऊँगी, हमारी कोठी तुम्हारे घर के पास ही है.सलोनी ने मुझ को बड़ी सेक्सी नज़र से देखा और इशारा किया कि अंदर बैडरूम में चलने का!

मैं सलोनी की सेक्सी फिगर से काफी आकर्षित था तो उन दोनों को लेकर बैडरूम में आ गया और दरवाज़ा भी बंद कर दिया.सलोनी ने बिना किसी देर के झट से मुझ को आलिंगनबद्ध कर लिया और अपने मोटे और ठोस स्तन मेरी छाती से रगड़ने लगी और उसकी सहेली भी मेरे पीछे खड़े होकर अपने मुम्मों को मेरे शरीर से रगड़ रही थी.हम तीनों ने एक दूसरे के शरीर के साथ पकड़म पकड़ाई का खेल जारी कर दिया.

दोनों जवान लड़कियों के चूतड़ काफी मोटे और उभरे हुए थे, मैं उन पर हाथ फेर कर और थोड़ा टीप कर आनन्द ले रहा था.सलोनी बोली- एक छोटी सी चुदाई कर दो हम दोनों की अभी… हम दोनों ही बहुत गर्म हो चुकी हैं. प्लीज सतीश, क्यों रूही तुम भी तैयार हो ना?

रूही ने जवाब देने के बजाये अपनी सलवार को ढीला करना शुरू कर दिया और सलोनी ने मेरी पैंट के बटन खोल दिए और मेरे खड़े लंड को पैंट से निकाल लिया.जब दोनों की सलवारें उतर चुकी तो मैंने उन को पलंग पर हाथ टेक कर खड़ा कर दिया और फिर मैं अपने खड़े लंड को पीछे से सलोनी की चूत के मुंह पर रख कर उससे पूछा- क्यों सलोनी डार्लिंग, डालूँ क्या?सलोनी ज़ोर से बोली- डाल दो सैयां… पूरा डालो, चूत के अंत तक डालो, जल्दी डालो!

उसकी चूत को हाथ लगाया तो उसमें से खूब रस टपक रहा था. अब मैंने बिना कुछ देर किये एक ज़ोर का धक्का लंड का मारा तो वो पूरा का पूरा अंदर घुस गया.अंदर डाल कर मैं कुछ क्षण के लिए रुक गया और रूही के चूतड़ों पर हाथ फेरता रहा और साथ में उसकी चूत में ऊँगली डाल कर उसकी भग को मसलता रहा.

सलोनी ने अपने चूतड़ों को आगे पीछे कर चुदाई की स्पीड खुद ही निश्चित कर दी और मैं रूही की चूत और भग को हाथ की ऊँगली से छेड़ता रहा और वो भी अब पूरी तरह से पनिया गई थी.

मैंने अब सलोनी के मोटे गदाज़ मम्मों को पीछे से पकड़ लिया और तेज़ धक्काशाही शुरू कर दी.लंड को पूरा बाहर निकाल कर फिर अंदर डाला और फिर बाहर निकाला और ऐसे मैंने कोई 9-10 बार किया और तभी ही सलोनी ‘उईईइ आआहा…’ करती हुई झड़ गई.

मैंने गीले लंड को सलोनी की चूत से निकाल कर रूही की उभरी हुई चूत में डाल दिया और वो घुप कर के अंदर समा गया.सलोनी चुपचाप बिस्तर पर लेट गई थी और मैं उसकी साइड से उसकी प्रिय सहेली को चोद रहा था.वो चुदवाने में ज्यादा एक्सपर्ट लग रही थी क्यूंकि मेरे हर धक्के का वो बराबर जवाब दे रही थी.

वो मेरी अंदर बाहर करने की स्पीड को समझ चुकी थी और उसी के मुताबिक वो अपने चूतड़ों को भी आगे पीछे कर रही थी और हर बार लंड को पूरा अंदर ले कर ही दम लेती थी.मैंने उसके मम्मों को पकड़ रखा था उसकी कमीज के ऊपर से और उसको हल्के हल्के टीपते हुए रूही की चुदाई में मग्न रहा.

जब उसकी चूत सिकुड़ना शुरू हो गई तो मैंने अपने धक्कों की स्पीड अति तीव्र कर दी और ऐसा करते ही रूही थोड़ी देर में ही स्खलित हो गई.

स्खलित होने के बाद वो भी सलोनी के साथ पलंग पर लेट गई और आँखें बंद कर के अभी हुई चुदाई का आनन्द महसूस करने लगी.मैं आज की चुदाई से इतना उत्तेजित हो चुका था कि मेरा दिल कर रहा था कि किसी की टाइट चूत में अपना वीर्य स्खलित करूँ.लेकिन ऐसी सेफ चूत का मिलना भी तो कठिन था जिसमें मैं अपने वीर्य की तीव्र धार छोड़ दु,
 
लेकिन मेरे मन में सलोनी के नग्न शरीर को देखने की बड़ी इच्छा था, मैंने उन दोनों को अपने कपड़े उतार कर अपने हुस्न के जलवे दिखाने का अनुरोध किया.दोनों मान गई सिर्फ इस शर्त पर कि दोनों की चुदाई एक बार फिर मैं करूँ जिस पोज़ में वो चाहें!

भला मुझको क्या ऐतराज़ हो सकता था…मैंने पहले सलोनी की सलवार उतार दी और फिर उसकी कमीज भी उतार दी और जब दोनों पूर्ण नग्न हो गई तो रूही ने आगे बढ़ कर मेरी पैंट को भी उतार दिया और मेरे अंडरवियर में छुपे हुए सर्प राज को बाहर निकाल कर आज़ाद कर दिया.

मैं उन दोनों के मस्त नग्न शरीर देख रहा था जिसमें उन दोनों के उन्नत उरोज खजुराहो के मंदिरों में यक्षिणी की मूर्तियों से किसी तरह भी कम नहीं थे.दोनों आकर मेरे से लिपट गई और अपने हाथों से मेरे लंड के साथ खेलने लगी और मैं भी उनके मुम्मों को बारी बारी से चूम रहा था और चूचुकों को चूस रहा था.

रूही पहल करते हुए मुझको बेड के पास ले गई और मुझको लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ बैठी और जल्दी से अपनी बालों से भरी चूत में मेरा अकड़ा हुआ लंड डाल दिया और ऊपर से तेज़ तेज़ धक्के मारने लगी.

मैं भी उसके उन्नत उरोजों को मस्ती से मसल रहा था और साथ साथ ही उसके मोटे चूतड़ों को भी मसल रहा था.थोड़ी देर की धक्काशाही में ही रूही धराशाई हो गई और हांफ़ती हुई मेरी चौड़ी छाती पर लेट गई और उसके अंदर से निकल रही अविरल पानी की धारा से अंदाजा लगा कि वो काफी दिनों के बाद ठीक ढंग से चुदी है.

मैंने जल्दी से रूही को अपने ऊपर से उतारा और साथ में ही लेटी हुई सलोनी को अपनी तरफ खींचा. वो फ़ौरन से घोड़ी बन गई और मैंने भी शीघ्र ही अपने गीले लंड को उसकी चूत में पीछे से डाल दिया और आहिस्ता आहिस्ता उसकी चुदाई शुरू कर दी.वो बड़ी मस्ती से चुदा रही थी जैसे उसको यकीन हो कि यह शहसवार जल्दी से घोड़ी से उतरने वाला नहीं.

सलोनी की आशा के अनुरूप ही मैं उसको बड़े ही प्यार से कभी धीरे कभी तेज़ स्पीड चोद रहा था और साथ ही हाथों से उसके चूतड़ों और मुम्मों को सहला भी रहा था.

पूरा अंदर और पूरा बाहर वाला कार्यक्रम चालू करने पर सलोनी को बहुत अधिक आनन्द आ रहा था और इसी तरह सलोनी भी स्खलित होने के कगार पर पहुँच चुकी थी.और जब मैंने अपना घोडा सरपट दौड़ाया तो ‘ओओओ ओओ ओओ आआअह…’ करते हुए एक कंपकंपाहट के साथ झड़ गई.

मैंने भो अपना लौड़ा निकाल कर उसके विजयी होने पर उसको बीच मैदान में खड़ा कर के लहलहाने दिया.दोनों लड़कियाँ यह देख कर चकित थी और बार बार हाथ लगा कर महसूस करने के कोशिश कर रही थी कि वो कोई सपना तो नहीं देख रही हैं.फिर दोनों ने मुझ को प्यार भरे थैंक्स करने के लिए बड़ी ही संतुष्टि से जफ्फी मारी.

थोड़ी देर में मैंने दोनों लड़कियों को उठाया और कहा- अब तुम तैयार होकर घर जाओ, वरना तुम्हारे घर वाले ढूँढते हुए यहाँ आ जाएंगे.दोनों हड़बड़ा कर उठ बैठी और जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगी.

जाने से पहले मैंने सलोनी से पूछा- कल वाली पार्टी जो तुम्हारे यहाँ होने वाली है, उसमें क्या करने का इरादा है?सलोनी बोली- वाह सतीश, तुम नहीं जानते कि हाई सोसाइटी की पार्टियों में हर चीज़ मुमकिन है तो यहाँ भी हर चीज़ हो सकती है जिस में पीना पिलाना और ग्रुप सेक्स भी शामिल है.

मैं हैरान होकर बोला- यानि दस लड़के लड़कियाँ आपस में खुले आम सेक्स करेंगे?रूही बोली- यही नहीं, वो एक दूसरे के पार्टनर्स को भी आपस में बदल बदल कर चुदाई कर सकते हैं.मैं बोला- उफ़… यह तो कमाल हो जाएगा. लेकिन एक बात है मैंने आज़मा कर देखी है हमारे लड़के लड़कियों का चुदाई के मामले में पूरा साथ नहीं दे पाते, वो जल्दी ही आउट हो जाते हैं जबकि लड़कियाँ डटी रहती हैं.

सलोनी बोली- हाँ यह तो अक्सर हम देखती हैं, पर सतीश यह सब तुमको कैसे मालूम है?मैं मुस्कराते हुए बोला- पिछले साल कुछ लड़के लड़कियों ने मिल कर ऐसी ही पार्टी हमारी कोठी में की थी. लड़के सब एक दो बार के बाद ही मैदान छोड़ गए और लड़कियाँ डटी रहीं आखिर तक!

सलोनी और रूही ने भेद भरी नज़रों से मुझको देखा और पूछा- तो फिर हम क्या करें? ऐसे तो पार्टी फेल हो जायेगी ना?मैं हँसते हुए बोला- हाँ, वो तो संभव है.दोनों ने घबरा कर पूछा- फिर कैसे करें हम?

मैंने नैना को आवाज़ दी और वो झट अंदर आ गई फिर मैंने उसको सारी बात बताई तो उसने कहा- लड़कों को देर तक सेक्स के लिए डटे रहने की समस्या है, क्यों ठीक है ना?दोनों लड़कियों ने हाँ में सर हिला दिया.नैना बोली- इसका इंतज़ाम मैं कर दूँगी कि कोई भी लड़का जल्दी आउट ना हो! तुम यही चाहते हो ना?

मैं बोला- तो ठीक है नैना कुछ इंतज़ाम कर देगी लेकिन इस काम के लिए उसको भी पार्टी में शामिल करना पड़ेगा. बोलो मंज़ूर है?दोनों एक साथ बोली- मंज़ूर है नैना दीदी, आप पूरी तैयारी के साथ आ जाना और पार्टी को ठीक से चलाने की देखभाल आपकी जिम्मेदारी हो गई दीदी.नैना ने हँसते हुए हामी भर दी.

कहानी जारी रहेगी
 
साथ बने रहने के लिए आप का आभारी हूं
 


उर्वशी भाभी का चोदन प्रोग्राम उनकी कोठी में


सलोनी और रूही के जाते ही टेलीफ़ोन की घंटी बज पड़ी, मैंने फ़ोन उठाया तो दूसरी तरफ मम्मी जी बोली रही थी- कैसे हो सतीश बेटा! बड़े दिनों से तुम से बात नहीं हो सकी थी, सोचा कि आज बात कर लेती हूँ, और सब ठीक है ना?मैं बोला- चरण स्पर्श मम्मी जी, मैं यहाँ बिल्कुल ठीक हूँ और आप सुनाइए पापा कैसे हैं? और बाकी गाँव में सब ठीक है ना?

मम्मी जी बोली- यहाँ सब ठीक है, अच्छा सतीश, वो पूनम के पापा का फ़ोन आया था और वो कह रह थे कि पूनम की शादी तय हो गई है, इसी सिलसिले में वो हमारी थोड़ी सी मदद मांग रहे हैं.मैं बोला- यह तो बड़ी ख़ुशी की बात है, वो क्या मदद मांग रहे थे?

मम्मी बोली- वो कह रहे थे पूनम के भाई और भाभी कुछ दिनों के लिए पूनम के साथ लखनऊ आ रहे हैं, अगर हमको कोई ऐतराज़ ना हो तो वे तीनों हमारे घर में रुक जाएँगे और जो दहेज़ इत्यादि खरीदना, बनाना है वो वहाँ रह कर बना लेंगे. उनका सोचना है कि शायद इससे सतीश की पढ़ाई में विघ्न पड़ेगा. मैंने कहा भी कोई विघ्न नहीं होगा, आप भेज दो उन तीनों को… वो आलखन से हमारी कोठी में रह कर अपना काम कर सकते हैं. तुम बोलो सतीश, तुम क्या कहते हो?

मैं बोला- मुझको उनके आने से कोई कष्ट नहीं होगा, आप उनको कह दो कि वे निस्संकोच यहाँ आकर रह सकते हैं जब तक उनकी मर्ज़ी हो!मम्मी बोली- ठीक है, ज़रा नैना को फ़ोन देना, उसको भी समझा दूँ!मैंने फ़ोन नैना को दे दिया जो पास ही खड़ी थी और मम्मी और नैना के बीच थोड़ी देर बात हुई.

नैना अब खिलखिला कर हंस रही थी और हँसते हुए ही बोली- छोटे मालिक, आपकी तो पुरानी आशिक आ रही है, अब तो मज़ा ही मज़ा है.मैं भी खुश हो कर बोला- लेकिन नैना रानी, अबकी बार साथ में भाभी हैं और उसका भाई भी है तो बहुत मुश्किल हो जाएगा मिलना… और खासतौर पर अब जब उसकी शादी तय हो चुकी है तो हम दोनों का उस तरह मिलना ठीक नहीं होगा शायद?नैना बोली- हाँ यह तो है, लेकिन कोशिश करने पर सब कुछ हो सकता है.

मैंने आगे बढ़ कर नैना को बाहों में ले लिया और उसके लबों पर कई चुम्मियाँ जड़ दी.वो भी चुम्बन का जवाब चुम्बन से देने लगी.

हम दोनों बेखबर हुए अपने काम में लगे थे कि इतने में पारो भी वहाँ आ गई और वो भी मेरे से पीछे से लिपट गई और अपने मोटे मुम्मे मेरी पीठ से रगड़ने लगी.बड़ा आनन्द आ रहा था आगे मुम्मे और पीछे भी मुम्मे… वाह, क्या बात है!

मैं पारो को भी जफ्फी डालने के बाद उसको बोला- आज कोई चाय पिलाएगा या नहीं? प्यास के मारे जान निकली जा रही है.नैना और पारो दोनों हंसने लगी और फिर पारो दौड़ कर गई किचन में और थोड़ी देर के बाद हम तीनों के लिए चाय बना कर ले आई.

चाय पीते हुए नैना ने बताया कि गाँव में सबने छोटे मालिक की पिक्चर देखी है और सब बहुत खुश हो रहे हैं. तुम्हारी चहेती लड़कियों ने किसी एक के घर में मिल कर तुम्हारे चिपको डांस की नक़ल भी उतारी और आपस में मिल कर खूब मस्ती की और चूमा चाटी भी की.

जब नैना यह सब बता रही थी, मैंने उसको ध्यान से देखा उसका चेहरा काम वासना से एक दम लाल हो रहा था और उसका हाथ अनजाने में ही उसकी साड़ी के ऊपर से चूत को सहला रहा था, वो बेहद गर्म हो चुकी थी यह मैं समझ रहा था.

मैं टहलने के मूड में था तो मैं टहलते हुए रति की कोठी की तरफ निकल गया और मौके की बात देखिये कि भाभी के दर्शन उनकी कोठी के गेट पर ही हो गए.भाभी ने मुझको अंदर बुला लिया और हम दोनों बड़े ही प्यार से एक दूसरे से बातें करने लगे.

तभी मैंने भाभी को बताया कि एक दो दिन में हमारे मेहमान आने वाले हैं गाँव से, तो कुछ दिन रति से और भाभी से मिलना मुश्किल हो जाएगा.भाभी कुछ उदास होते हुए बोली- अच्छा सतीश, फिर तो तुम मेरे पास नहीं आ सकोगे और ना ही मैं तुम्हारे पास आकर कुछ प्यार व्यार कर सकूंगी. अच्छा सुनो सतीश, रति के भैया आज रात के लिए कानपुर जा रहे हैं, हम दोनों इतनी बड़ी कोठी में अकेली हो जाएंगी. तुम आज की रात हमारी कोठी में रह सकते हो क्या?

मैंने कुछ सोचते हुए कहा- ऐसा है भाभी, मुझको तो कोई ऐतराज़ नहीं लेकिन तुम फिर भी नैना से बात कर लो, अगर वो हाँ कर दे तो मैं आ जाऊंगा रात रहने के लिए!भाभी ने अपने चौकीदार से कहा- सतीश भईया के साथ उनकी कोठी जा रही हूँ थोड़ी देर के लिए और अगर रति या साहिब पूछें तो बता देना, मैं जल्दी ही लौट आऊँगी.

हम दोनों हमारी कोठी की तरफ चल पड़े और रास्ते में भाभी कहती रही- मेरा तो दिल बड़ा मचल रहा है सतीश तुम्हारे लिए… उफ़ कितना मज़ा आएगा सारी रात के लिए एक दूसरे की बाहों में!मैं बोला- वो तो ठीक है भाभी, पर रति भी तो है ना वहाँ, उसको क्या बताओगी?भाभी बोली- उसको मैं समझा लूंगी जब वक्त आएगा! बोलो, तुम तैयार हो क्या? अगर हाँ तो सब ठीक हो जाएगा.
 
कोठी में पहुंचे तो नैना हमको बैठक में ही मिल गई, भाभी ने तुरंत उसको सब बातें बता दी और उससे पूछा कि क्या सतीश रात हमारी कोठी में रह सकता है?नैना भाभी को साथ लेकर मेरे बैडरूम में चली गई और थोड़ी देर बाद दोनों वापस लौट आई, तब नैना ने कहा- भाभी के साथ रात रहने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन रति को कैसे पटाओगी? वो बड़ी चालाक है, वो सब समझ जायेगी.भाभी ने बड़ी बेपरवाही से कहा- रति की आप कोई फ़िक्र ना करें, मैं उसको संभाल लूंगी.

मैंने नैना से पूछा- क्या मैं भाभी के अंदर अपना वीर्य छूटा सकता हूँ, उससे उनको कोई फर्क तो नहीं पड़ेगा ना?नैना ने कहा- भाभी के अंदर पूरी तरह से गर्भ ठहर गया है, उसका तुम फ़िक्र ना करो छोटे मालिक. जो करना चाहते हो, वो कर लो भाभी के साथ!भाभी बोली- तो फिर ठीक है ना, सतीश आज रात हमारे घर में सो जायेगा नैना?

मैं बोला- सो तो मैं जाऊंगा भाभी लेकिन मुझको रति का बहुत डर है कहीं वो तुम्हारी गर्भाधान वाली बात भैया को ना बता दे?भाभी बोली- अरे सतीश राजा, तुम काहे घबराते हो, वो तो मेरी मुट्ठी में है, और ज़्यादा उछल कूद की कोशिश की तो तुम उसको भी चोद देना, और क्या?.

मैं मान गया और कहा कि एक घंटे के बाद खाना खाकर आता हूँ लेकिन भाभी ज़ोर डालने लगी- नहीं अभी चलो और खाना भी वहीं खा लेना. मैं तुम्हारे लिए बकरे की रान का मीट बना रही हूँ, वो बड़ा ही स्वादिष्ट बनता है.मैंने भाभी को यह कह कर रवाना किया कि मैं अपने कपड़े बदल कर अभी आता हूँ, आप चलो.

थोड़ी देर बाद मैं अपने रात का कुरता पायजामा पहन कर भाभी के घर पहुँच गया, भाभी मुझको बाहर बलखनदे में ही मिल गई जैसे कि वो मेरा इंतज़ार बड़ी बेसब्री से कर रही हों.भाभी मुझको सीधे अपनी बैठक में ले गई और जाते ही उसने मुझको अपनी बाहों में लेकर एक निहायत ही कामुक जफ्फी मारी और मेरे लबों पर मस्त चुम्मी दे दी.

मैंने पूछा- रति कहाँ है भाभी?भाभी बोली- वो अपनी एक सहेली से मिलने गई है, थोड़ी देर में वो आती ही होगी. वो आ जायेगी तो खाना खा लेंगे, तुमको जल्दी तो नहीं ना?मैं बोला- नहीं भाभी, मुझको कोई जल्दी नहीं है. अगर बुरा ना मानें तो एक बात बताइए, यह भैया हफ्ते में आपको कितनी बार चोदते हैं?

भाभी पहले तो शरमाई फिर धीरे से बोली- कहाँ रे सतीश यार, रति के भैया तो 15-20 दिन में एक आध बार कर लेते हैं जब वो थोड़ी पीकर आते हैं, वरना काफी समय तो वो मेरी तरफ देखते तक नहीं.

मैं अब भाभी-भैया की कहानी में दिलचस्पी लेने लगा था तो मैंने आगे पूछा- तो क्या भैया के करने से आपका पानी छूट जाता है? और आपकी तसल्ली हो जाती है क्या?भाभी उदास होते हुए बोली- कहाँ रे सतीश, भैया तो जब करना शुरू करते हैं तो मुश्किल से वो 5-6 धक्के मारने के बाद ही झड़ जाते हैं और फिर वो साइड लेकर सोते हुए खूब खर्राटे मारते हैं.

मैं भी उदास होते हुए बोला- तभी भाभी, आपका बच्चा होने में प्रॉब्लम हो रही है. फिर आप अपनी तसल्ली के लिए क्या करती हैं?भाभी बोली- पहले तो ऊँगली से काम चलती थी लेकिन आज कल मुझको एक अच्छी नौकरानी मिल गई है जो मेरे संग मुख मैथुन करके, मेरे चूचे चूस कर, मेरी चूत, चूतड़, जांघें चाट कर मुझको पूरी तसल्ली दे देती है.

मैं हैरान होते हुए बोला- अच्छा भाभी, क्या ऐसा भी होता है? स्त्री के संग स्त्री? मैंने कभी ऐसा देखा ही नहीं?भाभी बोली- क्या यह सब देखना चाहोगे लल्ला? चूत चुसाई और जनाना किसिंग किस्साई?मैं बोला- हाँ क्यों नहीं भाभी, अगर आपकी नौकरानी यहाँ है तो और अगर उसको कोई ऐतराज़ नहीं तो ही?भाभी बोली- खाना खाकर जब हम बैडरूम में जाएंगे तो मैं तुमको इसकी छोटी सी झलक दिखा दूंगी.

हालांकि लेस्बो सेक्स के बारे में मैंने सुन और देख रखा था, ग्रुप सेक्स में भी लड़कियाँ आपस में मजे करती थी, लेकिन मैं भाभी को यह जताना चाहता था जैसे मैं कुछ जानता ही नहीं.

थोड़ी देर बाद ही रति भी वापस घर आ गई और मुझको देख कर बड़ी खुश हुई और आते ही मुझ से पूछने लगी- आज यहाँ कैसे सतीश जी?भाभी बोली- आज तुम्हारे भैया रात भर के लिए बाहर गए हैं तो मैंने सतीश और नैना से कहा कि अगर सतीश आज की रात हमारे घर में सो जाए तो कोई ऐतराज़ तो नहीं, और दोनों मान गए हैं तो सतीश लला आज हमारे घर में सोयेगा.

ये बातें चल ही रही थी कि एक बड़ी ही सुंदर जिस्म वाली सांवली सी लड़की ने आकर भाभी से पूछा- भाभी, क्या खाना लगा दूँ टेबल पर?भाभी बोली- हाँ लगा दे लाजो, और रति तुम जल्दी से हाथ मुंह धोकर खाने के लिए आ जाओ.

यह कहते हुए भाभी रसोई में चली गई और रति ने मौका देख कर मुझको धर दबोचा और बड़ी ही कसी जफ्फी मारी और ताबड़तोड़ चुम्मियों की बारिश मेरे होटों पर कर दी.मैंने भी उसको बाहों में कस लिया और उसके लबों पर बहुत ही गहरी चुम्मी जड़ दी और उसके गोल मोटे चूतड़ों पर हाथ फेरने लगा.
 
हम काफी देर एक दूसरे की बाहों में बंधे रहे और फिर किसी के आने के आहट सुन कर हम एक दूसरे से अलग हो गए.

लाजो आई थी खाने की प्लेटें रखने के लिए और जाते हुए नज़र भर कर मुझको भी देख गई और मेरी आँखों से आँखें मिला गई.मैंने भी सोचा ‘कुड़ी फँस सकती है अगर भाभी साथ दे तो!’

लाजो देखने में काफी आकर्षक थी क्यूंकि उसके नयन नक्श बड़े ही तीखे थे चाहे उसको रंग सांवला था और मुझको यकीन था कि वो भी मेरे गाँव वाले काले हीरे से किसी तरह भी कम नहीं थी.उसकी चाल मतवाली थी और सादी सी धोती में उसके मस्त मुम्मे और गोल मोटे चूतड़ों को देखने में बड़ा ही आनन्द आ रहा था.

लाजो को देखने के बाद मन उसके लिए मचल रहा था फिर सोचा आज रात को तो भाभी चूत चुसाई लाजो के साथ दिखाने वाली है तो शायद उस वक्त काम बन जाए?

खाना बड़ा ही स्वादिष्ट बना था और मन पूरी तरह से तृप्त हो गया और फिर हम सब कोक पीते हुए बैठक में बैठे रहे.यहाँ रति मेरे कंधे से कन्धा जोड़ कर बैठी हुई थी और मेरे हाथ के साथ अठखेलियाँ कर रही थी.

फिर भाभी मुझको गेस्ट बैडरूम में ले गई और जहाँ मेरे सोने का पूरा इंतज़ाम कर दिया था.अच्छा बड़ा पलंग था और रेशमी चादर से ढका हुआ था फिर थोड़ी देर बाद वो दोनों अपने अपने कमरों में चले गई.

मैं भी लेट गया और भाभी का इंतज़ार करने लगा और वो करीबन एक घंटे बाद लाजो को लेकर आई और आते ही उसने मुझको एक मीठी सी प्यारी सी जफ्फी मार दी तब मेरी आँखें लाजो से मिलीं और मैंने उसको हल्की आँख मार द॥लाजो के चेहरे पर मुस्कराहट खेल गई.

तब भाभी ने सबसे पहले मेरे कपड़े उतारने शुरू किये और जब मैंने लाजो की तरफ इशारा किया तो वो बोली- अरे सतीश, वो तो अपनी ही है उससे क्या शर्म करना? क्यों लाजो? दिखा दे सतीश भैया को अपने हुस्न के जलवे!और मेरे कपड़ों के साथ ही लाजो के कपड़े भी उतरने शुरू हो गए, जैसे पहले धोती उतरी और फिर ब्लाउज उतरा और फिर पेटीकोट उतरा.

लाजो का नंगा रूप बहुत ही मादक था, उसका सांवला जिस्म एकदम साँचे में ढला हुआ था और उसका हर अंग प्रत्यंग सॉलिड और गोलाई नुमा था.

इधर जैसे ही भाभी ने मेरे लौड़े को अंडरवियर से आज़ाद किया वो झपट कर भाभी के गालों को छूता हुआ सीधा तन गया.भाभी थोड़ी देर के लिए चौंकी लेकिन फिर जल्दी ही वो संभल गई.लाजो की काली आँखें मेरे सीधे खड़े हुए लंड पर टिकी थी और वो हैरानी से फैली हुई थी.

मैंने अब भाभी को नंगी करने के लिए हाथ बढ़ाया और चंद मिनटों में भाभी को भी निर्वस्त्र कर दिया.तब भाभी ने लाजो को भी अपने पास बुला लिया और फिर हम सब एक दूसरे की गर्दनो में बाहें डाल कर कमरे में घूमने लगे.मैं एक हाथ से लाजो के मोटे सॉलिड चूतड़ों को सहला रहा था और दूसरे से भाभी के चौड़े और फैले हुए चूतड़ों को मसल रहा था.

लाजो की चूत पर बेहद घने और गहरे काले बाल थे जो मैंने आज तक नहीं देखे थे.उसकी सारी चूत काले घने बालों के साये में छुपी हुई थी और उसकी ज़रा सी झलक भी नहीं दिख रही थी.लाजो के मुकाबले भाभी की चूत पर बाल कुछ ज़्यादा घने नहीं थे और वो काफी गीले हो चुके थे क्यूंकि भाभी शायद उस समय काफी कामुक हो रही थी.

जैसे ही भाभी ने मेरे खड़े लंड को देखा, वो जल्दी ही मेरे निकट आ गई और मेरे लंड के साथ खेलने लगी और लाजो ने भी यह मौका ठीक समझ कर मेरे पास आकर अपने मोटे मुम्मे मेरी पीठ पर रगड़ने शुरू कर दिए.फिर भाभी बोली- चल लाजो, सतीश भैया को अपनी चुसम चुसाई दिखा देती हैं, वो उसको देखने के लिए काफी उतावले हो रहे हैं.

लाजो सांवरी मेरे को छोड़ कर भाभी के साथ चिपक गई और उसके लबों पर खूब चुम्बन देने लगी और साथ में वो भाभी की चूत में अपनी ऊँगली से उसकी भग को भी मसलने लगी.

अब भाभी बिस्तर पर लेट गई और लाजो की टांगों में बैठ कर उसकी चूत को चाटना और चूसना शुरू कर दिया.जब लाजो ऐसा कर रही थी तो लाजो की गांड हवा में लहरा रही थी.उसके सांवरे गोल चूतड़ हवा में ह्ते और मेरा लंड उसमें एंट्री मारने के लिए अधीर हो रहा था.

लाजो का मुंह तो भाभी की चूत में घुसा हुआ था और भाभी ने अपने चूतड़ों को ऊपर उठा रखा था और एक हाथ से लाजो के सर के बालों को पकड़ रखा था और सर को चूत में ज़ोर से घुसेड़ रखा था.भाभी तो चूत चुसाई में बहुत ही मग्न थी और लाजो की चुसाई का पूरा आनन्द ले रही थी.

मैं अपने खड़े लंड को हाथ में पकड़ कर धीरे से लाजो की गांड की तरफ बढ़ा और आहिस्ता से पलंग पर चढ़ गया और पीछे से लंड का निशाना बना कर चूत के मुंह पर रख दिया और एक हल्का धक्का ही मारा और लंड एकदम गीली चूत के अंदर घुस गया.

लाजो सब महसूस कर रही थी, उसने भी एक ज़ोर का धक्का अपनी गांड का पीछे की तरफ मारा और मेरा पूरा लंड अपने अंदर लील गई.

कहानी जारी रहेगी.
 
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