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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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एंग्लो इंडियन डायना का चूत चोदन

सबने जाते हुए अपने टेलीफोन नंबर एक दूसरे को बता दिए और यह वायदा भी किया कि फिर ज़रूर मिलेंगे.मैंने नैना को बोला- तुम रिक्शा करके घर पहुँचो, मैं डायना को अपनी बाइक पर लेकर घर आता हूँ.मैं जब अपनी कोठी पहुंचा तो शाम का झुटपुटा हो चला था और पारो हमारे लिए कोक की बोतलें खोल कर ले आई.

थोड़ी देर में नैना भी आ गई और कुछ देर आपस में औपचारिक बातें करने के बाद डायना बोली- काफी बड़ी कोठी है आपुकी सतीश जी, और बाहर काफी बड़ा लॉन भी है, बहुत ही सुंदर और मन मनमोहक फूल भी लगा रखे हैं आपने… वाह! बड़े सुन्दर दिख रहे हैं. क्या मैं आपका लॉन देख सकती हूँ?मैंने कहा- हाँ हाँ, क्यों नहीं, चलो मैं भी चलता हूँ आपके साथ!

हम निकल ही रहे थे कि नैना ने डायना से पूछ ही लिया- मैडम, क्या आप हमारे यहाँ खाना खाना पसंद करेंगी?मैं भी बोला- हाँ खाना खाकर जाना तुम, वैसे तुम कहाँ रहती हो?डायना बोली- मैं यहाँ पास में ही एक लड़कियों का हॉस्टल है, वहीं रहती हूँ… वैसे आप खाने का तकुल्फ ना करें, मैं हॉस्टल में खा लूंगी.मैं बोला- तकुल्फ कैसा डायना, यू आर वेलकम!

मैं और डायना कोठी के लॉन में चले गए और वहाँ की ठंडी हवा का लुत्फ़ उठाने लगे.घूमते हुए मैंने डायना को कोठी का सारा लॉन घुमा दिया और सुन्दर फूलों की क्यारियाँ देख कर वो बड़ी ही खुश हुई.हमारे लॉन में कई ऐसे झुरमट और घने पेड़ लगे हुए थे जहाँ अगर अँधेरे में कोई छिप जाए तो पता ही नहीं चलता था कि वहाँ कोई छुपा हुआ है.

अब अँधेरा काफी घना हो गया था, मैंने मौका देख कर डायना को एक पेड़ के पीछे पकड़ कर अपनी बाहों में बाँध लिया और साथ ही उसके गुलाबी होटों पर एक मस्त किस जड़ दी.डायना ने भी मेरी चुम्मी का भरपूर जवाब दिया और अपने लबों को मेरे लबों से चिपकाए रखा.

डायना ने एक बहुत ही पतली सी स्कर्ट पहन रखी थी जो उसके घुटनो तक ही पहुँच रही थी और पतला सा लाल ब्लाउज ही पहन रखा था जो उसके गोरे शरीर पर बहुत ही सुन्दर लग रहा था.चुम्बन करते हुए मैं एक हाथ से उसके नितम्बों को सहला रहा था और ऐसा करते हुए मुझको उसकी पैंटी महसूस हो रही थी.डायना का भी एक हाथ मेरे खड़े लौड़े पर टिका हुआ था.

चुम्बन का खेल कुछ देर चला फिर मैंने कहा- डायना, क्या तुम यहाँ सेक्स करना पसंद करोगी या फिर कोठी के अंदर चलें?डायना ने एक बहुत ही कामुक चुम्बन देते हुए कहा- वैसे मैंने कभी भी खुले में सेक्स नहीं किया है लेकिन अगर तुम को विश्वास है कि हमको कोई देख नहीं पायेगा तो यहाँ ही करने में बड़ा ही आनन्द आएगा. उफ्फ मम्मी… खुले आम सेक्स करना में कितना मज़ा आएगा यारो!

मैं डायना से आलिंगनबद्ध हुए ही उसको लॉन के पूरे अँधेरे कोने में ले गया और उसकी स्कर्ट को ऊंची करके उसकी पैंटी को नीचे कर दिया और कुछ क्षण अपने लंड को उसके चूतड़ों के बीच में छुपी चूत के मुंह पर रगड़ता रहा.फिर उसको एक घने पेड़ के साथ खड़ा करके मैंने उसकी तरल हो रही चूत में लंड को पेल दिया.

लंड की मोटाई और लम्बाई से वो थोड़ी देर के लिए चिहुंक गई लेकिन मैंने उसकी गांड को अच्छी तरह से अपने हाथों में पकड़ रखा था और फिर धीरे धीरे से चुदाई की लय को बनाते हुए मैंने डायना की चुदाई शुरू कर दी.अब मेरा एक हाथ डायना के गोल और मोटे मुम्मों पर फिसल रहा था और उसकी ब्रा के अंदर से झाँक रहे मुम्मों के चूचुक मसल रहा था.

हल्के धक्कों से शुरू करके मैंने चुदाई की स्पीड धीरे से बढ़ानी शुरू कर दी और डायना ने भी अपने चूतड़ों को हिला हिला कर मेरा साथ बड़ी कामुकता से देना शुरू कर दिया.हम दोनों चुदाई में एकदम से इतने तल्लीन थे कि जान ही नहीं सके कि कब नैना आकर हमारे पीछे खड़ी हुई हमारी चुदाई का आनन्द ले रही थी.

जब मुझको महसूस हुआ कि कोई हमारे पीछे खड़ा है और हमारी चुदाई का मज़ा ले रहा है तब तक डायना का छूटने का कार्यक्रम शुरू हो गया था और वो आखरी धक्के के बाद आहिस्ता से काँपने लगी और अपने मुम्मों को अपने हाथों से भींचने लगी.उसकी आँखें मुंदी हुई थी और उसकी चूत में खुलने और बंद होने की हलचल शुरू हो चुकी थी.

फिर वो एकदम से मुड़ी और उसने मुझको अपनी कोमल बाहों के घेरे में लेकर एक शुकराना जफ्फी मारी.जब वो जफ्फी मार रही थी, तभी उसकी नज़र मेरे पीछे खड़ी नैना पर पड़ी और वो एकदम से चौंक पड़ी और अपने कपड़े संभालने लगी लेकिन मैंने उसके हाथ को रोक दिया और कहा- डरो मत डायना डार्लिंग, यह तो अपनी नैना है.
 
यह सुन कर डायना थोड़ी संयत हुई और तभी नैना ने अपने साथ लाई हुई चादर को नीचे बिछा दिया और कहा- आ जाओ, दोनों यहाँ बैठ कर थोड़ा सुस्ता लो, मैं आप दोनों के लिए यह लाजवाब शर्बत भी लाई हूँ जिसको पीकर तुम दोनों फिर से तैयार हो जाओगे.

डायना मेरे और नैना के बीच में अधनंगी ही बैठ गई क्यूंकि उसने अपनी पैंटी को उतार दिया था और अपनी स्कर्ट को भी ऊपर कर दिया था और अब वो अपने ब्लाउज को भी खोल रही थी.उसके शरीर पर एक ब्रा ही रह गई थी जिसको मैंने पीछे से उसके हुक को खोल कर उतार दिया था और डायना अब एकदम अपने चमकते हुए सफ़ेद शरीर के साथ रात की चांदनी में दमक रही थी.

उसने हाथ बढ़ा कर मेरी पैंट को उतार दिया और मेरे लौड़े को हाथ में पकड़ कर उसके साथ खेलने लगी थी.फिर उसने मेरे लौड़े को अपने मुंह में ले कर चूसना शुरू कर दिया और नैना ने उसकी उठी हुई गांड और चूत को मसलना शुरू कर दिया.नैना ने फिर अपना मुंह उसकी चूत पर रख कर उसकी चूत के लबों को चूसना और चाटना शुरू कर दिया.

डायना और भी ज़्यादा गर्म हो चुकी थी और वो बार बार अपनी गांड को हिला हिला कर नैना को इशारा कर रही थी वो चुदने के लिए तैयार है.नैना भी अपने पूरे कपड़े उतार चुकी थी और उसके गोल मोटे और सॉलिड मुम्मे अधखिले चाँद की चांदनी में दमक रहे थे.

उधर डायना के सफ़ेद शरीर में उसकी चूत पर छाये काले बाल चांदनी में चमक रहे थे और एक खासा सेक्सी नज़ारा पेश कर रहे थे, जैसे सफ़ेद चाँद में काला दाग़ होता है, वैसे ही डायना के काले बाल उसके शरीर पर बहुत अधिक कामुक दृश्य उपस्थित कर रहे थे.

उसकी चूत पर हाथ लगाने पर देखा तो वो बहुत ही ज़्यादा पनिया रही थी और मैंने उससे पूछा- अब कैसे चुदवाने की मर्ज़ी है क्वीन एलिज़ाबेथ?वो भी शरारती ढंग से बोली- क्वीन तो हमेशा ऊपर से ही चुदवाती है… तुम लेट जाओ और मैं तुमको ऊपर से फक करती हूँ..

मैं चुपचाप लेट गया, वो झट से मेरे ऊपर आई और अपनी चूत को बाहर से मेरे लौड़े से रगड़ा और फिर दोनों टांगों के बल बैठ कर अपनी गीली चूत में मेरा खड़ा लंड डाल लिया.धीरे से पूरा बैठने पर मेरा लौड़ा धक्क से सारा अंदर चला गया और वो मेरी छाती पर दोनों हाथ टिका कर आँखें बंद करके मस्त ऊपर नीचे होने लगी.

नैना भी उसके पीछे बैठ गई और अपने मुम्मे उसकी पीठ से रगड़ने लगी और अपने हाथों से उसके मुम्मे सहलाने लगी.मैं अपने दोनों हाथ अपने सर के नीचे रख कर मस्ती से गोरी चुदाई का आनन्द लेने लगा और कभी कभी नीचे से हल्का सा तुनका मार देता ताकि सनद रहे कि मैं अभी सोया नहीं.

धीरे धीरे आनन्द लेती हुई डायना अब अपनी चरम सीमा पर पहुँच रही थी और उसकी उठक पठक अब बहुत ही तेज़ हो गई थी और उसी के बराबर नैना ने भी उसके मुम्मों की चुसाई तेज़ कर दी और मेरी ऊँगली भी उसकी भग को मसल रही थी.इस तीन गुना हमले से डायना की चूत जल्दी ही पिंघल गई और वो कांपती हुई मेरी चौड़ी छाती पर पसर गई.

जब वो मेरे ऊपर से उतरी तो उसकी जगह झटसे नैना ने ले ली और वो भी मुझ को मस्त पगली की तरह चोदने लगी.काफी देर से चुदाई के माहौल में रहने के कारण उसकी कामुकता बड़ी तीव्र हो चुकी थी और वो बड़े ही बेरहमी से मेरे को चोद रही थी और उसकी इस बेरहमी का मुझको बहुत ही आनन्द आ रहा था.

अब थोड़े ही समय में वो भी मैदान-ए- जंग में ढेर हो गई और मुझ को बेतहाशा चूमने लगी जैसे मेरा लाख लाख शुक्रिया अदा कर रही हो!

हम तीनों तगड़ी चुदाई के बाद एक दूसरे के गले में बाहें डाल कर लेटे थे.डायना मेरे खड़े लौड़े के साथ खेल रही थी और मैं भी उसकी और नैना की चूतों में ऊँगली डाल कर उनकी चूत की काली ज़ुल्फों के साथ खेल रहा था.

तभी ऐसा लगा कि वहाँ कोई काले कपड़ों में एक साया सा आया है जो मेरे सर के ऊपर आकर खड़ा हो गया था.मैं चौंक गया और आहिस्ता से बोला- कौन है वहाँ?

तभी वो साया मेरे सामने आया और धीमी लेकिन कड़क आवाज़ में बोला- सब चुपचाप लेटे रहो, नहीं तो एक एक को भून कर रख दूंगा.
 


लॉन में डायना और रति की गांड चुदी


तभी ऐसा लगा कि वहाँ कोई काले कपड़ों में एक साया सा आया है जो मेरे सर के ऊपर आकर खड़ा हो गया था.मैं चौंक गया और आहिस्ता से बोला- कौन है वहाँ?तभी वो साया मेरे सामने आया और धीमी लेकिन कड़क आवाज़ में बोला- सब चुपचाप लेटे रहो, नहीं तो एक एक को भून कर रख दूंगा.इसके साथ ही काले साये के हाथ में एक काली पिस्तौल चांद की रोशनी में चमक गई.

मैं घबरा गया और एकदम हड़बड़ा कर उठने की कोशिश करने लगा लेकिन वो पिस्तौल वाले हाथ ने बिजली की फुर्ती से पिस्तौल को मेरी कनपट्टी पर लगा दिया और फुसफुसाहट में बोला- खबरदार… जो किसी ने हिलने की कोशिश की! लेटे रहो यहीं पर तुम सब!

मैं, डायना और नैना एकदम हैरान होकर देख रहे थे कि यह क्या हो रहा था.डायना का हाथ कांप रहा था, मैंने हिम्मत कर के पूछा- तुम हो कौन जो मेरी ही कोठी में मुझ पर हुक्म चला रहे हो? तुम क्या चाहते हो हम से?एक बड़ी ही ज़हरीली हंसी सुनाई दी- मैं कौन हूँ? अभी पता चल जाएगा जब पुलिस यहाँ आएगी और तुम सब को नंगे पंगे देखेगी तो सोचो क्या हाल होगा तुम सबका?

अब मेरा ठाकुरी खून खौला आर मैंने भी कड़कती आवाज़ में पूछा- क्या बिगाड़ लेगी पुलिस हमारा? हम कोई गैर कानूनी काम तो कर नहीं रहे, हमको काहे का डर है?वो आवाज़ बोली- तुम सब एक दूसरे के साथ कुछ कर रहे हो जो गलत है सो तुमको इसकी सजा तो मिलेगी ना!

अब मुझको इस आवाज़ पर कुछ शक हुआ, मुझे ऐसा लगा कि आवाज़ जानबूझ कर बदली हुई लग रही है जैसे कोई लड़की आवाज़ बदल कर मर्दाना आवाज़ में बोलने की असफल कोशिश कर रही हो.मैंने अपनी दाईं तरफ लेटी हुई नैना के हाथ को दबाया और उसको इशारे में कहा कि तुम इसको बातों में उलझाओ ताकि मैं इस पर अचानक हमला कर सकूँ.

अब नैना बोली- देखो भाई, जो कोई भी हो तुम… हम तो आपस में प्यार मुहब्बत ही कर रहे थे और वो भी अपने घर के अंदर जो किसी तरह भी कानून की नज़र में गलत नहीं है.काला साया बोला- खामोश ऐ बदकारा औरत, नंगी लेटी है गैर मर्द के साथ… जाने क्या क्या किया होगा तुम सबने एक दूसरे के साथ? शर्म भी नहीं आती खुले आम करते हुए यह सब?नैना बोली- किस बात की शर्म? क्या अपने घरवालों के साथ नंगा लेटने में कोई मनाही है? बोलो बोलो?

जब ये दोनों बातें कर ही रहे थे तो मैं चुपचाप खिसक कर और अँधेरे की तरफ निकल गया.जब मुझे यकीन हो गया उस साये में छुपे बन्दे ने मुझे नहीं देखा तो फुर्ती से एकदम उठा और उस साये के एकदम पीछे आ गया और झट से आगे बढ़ कर अपनी एक बाज़ू उस साये के गले में डाल दिया.दूसरे हाथ को उसके पिस्तौल वाले हाथ पर रख कर एक झटका मारा और पिस्तौल उस के हाथ से छूट गई और वो नैना के पाँव में जा गिरी.

नैना ने झट से पिस्तौल अपने हाथ में ले ली और फुर्ती से उठ कर उस साये के ऊपर पड़े हुए काले कपड़े को हटा दिया.कपड़े के हटते ही नैना के मुंह से एक चीख निकल गई- तो यह तू है साली… हमको नकली पिस्तौल से डरा रही है. अगर चुदवाने की इच्छा थी तो सामने से आ जाती ना, हम सब तुझको चोद चोद कर हरा कर देते. यह सब क्यों किया री?

मैंने तो उसको पकड़ा हुआ था, मुझे उसका चेहरा दिख नहीं रहा था लेकिन यह महसूस हो रहा था कि वो कोई औरत या फिर लड़की है क्योंकि उसके गोल चूतड़ों से रगड़ लग कर मेरा बैठा हुआ लौड़ा खड़ा हो रहा था.अब मैंने उस की छातियों को टटोला तो वहाँ भी गोल गोल गुम्बद महसूस हुए.अब मैं समझ गया था कि ‘हो ना हो, यह तो रति ही है जो भेस बदल कर हम को तंग कर रही है.’

अब मैंने उसको पलट कर अपनी तरफ किया तो उस साये नुमा लड़की ने मेरे होटों पर अपने होंट चिपका दिए.‘उफ्फ्फ मौला… यह तो रति ही है.’और रति हम सबसे चिपक चिपक कर हंस रही थी और हमसे खूब जफ्फी मार रही थी..

मैं गुस्सा होते हुए बोला- रति यह क्या बदतमीज़ी है? ऐसा तुमने क्यों किया?नैना बोली- यह बेहूदा हरकत क्यों की रति तुमने?रति बोली- बस मन किया कि आप सबको सरप्राइज दे दूँ और आप लोगों को एकदम चौंका दूँ.

अब मैंने संयत होते हुए पूछा- पर तुम को पता कैसे चला कि हम लोग यहाँ हैं?रति रहस्यमय तरीके से मुस्कराई और बोली- तुम्हारी कोठी और हमारी कोठी की दीवार आपस में जुड़ी हुई है और हमारी साइड में भी एक अच्छा सा लॉन है जिस में फूल और पौधों की क्यारियाँ बनी हुई हैं. मैं शाम को वहाँ टहल रही थी जब मुझे तुम्हारी कोठी वाली साइड से कुछ आवाज़ें सुनाई दी.पहले तो वो साधारण बातें लग रही थी लेकिन जब मैंने ध्यान से सुना तो वो किसी जोड़े की आपस में बातें हो रही लगी. हमारी साइड में दीवार के साथ एक स्टूल पड़ा हुआ मिला, मैं उस पर चढ़ कर आपके बंगले के अंदर झाँकने लगी.
 
पहले तो मुझे कोई खास कुछ नहीं दिखा लेकिन जैसे ही मैं स्टूल से उतरने लगी तो मुझे एक गोरी लड़की की झलक दिखी और साथ में सतीश को भी देखा. तो मन में यह जानने की इच्छा हुई कि सतीश ठाकुर रात को किस लड़की के साथ लॉन में घूम रहा है.मैं ध्यान से देखती रही और फिर मैंने रात के अँधेरे में सतीश को गोरी लड़की को किस करते हुए देख लिया और फिर मैंने उन दोनों को पेड़ के साथ खड़े हो कर चुदाई करते हुए देख ही लिया.

अब तो मेरा खून खौल उठा और मैंने भाग कर कोठी के अंदर से अपने बचपन के ज़माने की होली की पिचकारी नुमा काली पिस्तौल उठा ली और एक काली शाल को अपने चारों तरफ लपेट लिया और फिर दीवार के साथ आ कर स्टूल पर चढ़ कर खड़ी हो गई और अंदर का दृश्य देखने की कोशिश करने लगी.

सतीश की कोठी के लॉन में उस वक्त वहाँ मुझे 3 जने हल्के से दिखाई दिए लेकिन वो तीनों मिल कर एक दूसरे को चोद रहे हैं ऐसा मुझे आभास हुआ जब कि साफ़ कुछ नहीं दिख रहा था.मैं अपने स्टूल से उतर कर दीवार के अंतिम कोने पर गई जहाँ से मुझे सतीश की कोठी में कूदने में काफी आसानी हुई. सतीश की कोठी में जब मैं अंदर पहुँच गई तो अपने शरीर को अच्छी तरह से शाल में लपेट कर मैं उस तरफ बढ़ी जिस तरफ चुदाई चल रही थी.

उनके नज़दीक पहुँच कर देखा कि सतीश एक गोरी लड़की को चोद रहा है और नैना दीदी भी नंगी हुई उनके साथ रास लीला में शामिल है. यह देख कर मेरा गुस्से का पारा एकदम सातवें आसमान पर पहुँच गया.

जब सतीश ने गोरी को चोदने के बाद नैना दीदी की चुदाई शुरू की तो मैंने सोचा कि अब हल्ला बोल देती हूँ लेकिन फिर सोचा कि नैना दीदी को भी मज़ा ले लेने दो फिर हल्ला बोलूँगी.उसके बाद क्या हुआ, वो तो आप सब जानते ही हो.

नैना को एकदम बड़ा गुस्सा आया और वो रति की तरफ झपट ही रही थी कि मैंने उसको रोक दिया और उसको कस कर अपने आलिंगन में बाँध लिया.अब मैं बोला- रति ने बड़ा ही घोर अपराध किया है, उसने हम सबकी दोस्ती पर एक बहुत कड़ा आघात लगाया है जिसकी सजा उसको मिलनी ही चाहिए. अब तुम सब फैसला करो कि क्या सज़ा मिलनी चाहिए? क्यों डायना? तुम क्या कहती हो इस बारे में?

डायना पहले तो चुप रही और फिर बोली- यह आप लोगों का अपना मामला है क्यूंकि आप सब आपस में दोस्त भी हो और सेक्स भी करते हो, आप लोग फैसला करो कि क्या सजा मिलनी चाहिए इस पागल लड़की को?अब मैंने नैना की तरफ देखा और उससे पूछा- क्यों नैना, तुम्हारा क्या विचार है?

नैना बोली- मेरी राय तो यह है कि रति के साथ हम सब सारे रिश्ते नाते तोड़ दें और आगे से उसका पूरा बायकाट करें.मैं कुछ देर सोचता रहा और फिर बोला- तुम्हारे कहने पर चलने से रति को कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ेगा. हमारे साथ रिश्ते ना रखने से रति को कोई ख़ास परेशानी भी नहीं होगी.

फिर मैंने नैना को अपने पास बुलाया और उसके कान में कुछ कहा और उससे पूछा- क्यों यह ठीक रहेगा क्या?नैना का चेहरा एकदम से खिल उठा और बोली- हाँ, यही ठीक रहेगा, इसकी यही सजा सबसे उत्तम रहेगी.अब मैं बोला- देखो रति, तुमने काम ही ऐसा किया है कि तुमको कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. इस लिए हमने यह फैसला किया है कि मैं तुमको हर प्रकार से चोदूँ यानि चुदाई में तुम्हारे शरीर के सारे अंगों में लंड डाल कर तुम को आनन्द प्रदान करूँ.

रति बहुत खुश होते हुए बोली- वाह, यह यह तो बड़ी अच्छी सजा है.मैं बोला- तो यह सजा तुम को मंज़ूर है? सोच कर बताना सब अंगों का मतलब है सब अंग?रति अब हँसते हुए बोली- इसमें सोचना क्या है, मुझे मंज़ूर है.

डायना और नैना ने आगे बढ़ कर रति के कपड़े उतारने शुरू कर दिए और जब वो बिल्कुल नंगी हो गई तो नैना और डायना ने उस को लॉन पर बिछी चादर पर लिटा दिया और खुद दोनों उसके एक एक तरफ लेट गई.अब दोनों उसके लबों पर चूमने में लग गई और फिर बारी बारी से वो उसके स्तनों को चूसने और चाटने लगी.
 
दोनों के होंट रति के मुम्मों के साथ खेल कर फिर उसके शरीर की नाभि को चूमते हुए उसकी चूत पर आ पहुंचे.नैना बड़ी निपुणता से रति की चूत की चुसाई कर रही थी और डायना उसके उभरे हुए चूतड़ों को किस कर रही थी.

इस सारी कार्रवाई से रति अति कामुक हो चली थी और बार बार अपनी चूत को ऊपर उठा कर यह घोषणा कर रही थी कि कोई इस की भी तो सुनो.

जब रति की चूत बहुत अधिक रसीली हो गई तो नैना ने मुझे इशारा किया और मैंने आते ही उसको घोड़ी बना दिया और उसकी गीली चूत पर अपने लौड़े को रगड़ा.जब लौड़ा चूत के रस से पूरी तरह से भीग गया तो मैंने उसकी टाइट चूत में अपना लौड़ा डालने के बाद थोड़ा रुक गया और लंड को रति की चूत में गोल गोल घुमाने लगा.

फिर मैंने रति को घोड़ी के पोज़ में बड़ी तेज़ी से चोदना शुरू किया और अब जब रति को चुदाई में बहुत अधिक मज़ा आने लगा था, मैंने लंड को पूरा निकाल कर रति की सूखी गांड में अपने लंड को घुसेड़ दिया.रति की कुंवारी गांड में लंड के जाते ही रति एकदम से उछल पड़ी और लंड को बाहर निकालने के लिए अपनी चूत और गांड को तेज़ी से इधर उधर करने लगी और इस उथल पुथल में मेरा पूरा लंड रति की गांड में घुस चुका था.

मैं भी लंड को अंदर डाल कर दोनों हाथों से रति की कमर को थाम कर बैठा हुआ था ताकि रति मेरे लंड को बाहर ना निकाल सके.रति की आँखों से आंसुओं की झड़ी लग चुकी थी लेकिन हम सब दयाहीन हुए उसके दर्द का आनन्द ले रहे थे.

मेरे लंड के धक्कों से थोड़ी देर बाद रति को गांड मरवाई में आनन्द आने लगा, उसके आंसू थम गए और अब नैना और डायना दोनों ही रति के होटों को बारी बारी से चूमने लगी और उसके मुम्मों को भी टीपने लगी.फिर नैना ने रति की चूत में हाथ डाल कर उसकी भग को भी रगड़ना शुरू कर दिया और इस दोहरे हमले के कुछ देर बाद ही रति का बहुत ही ज़ोरदार स्खलन हो गया और वो कांपते हुए चादर पर पसर गई.

नैना ने अपने साथ लाये हुए तौलिये से उसकी गांड और चूत को साफ़ किया.नैना ने रति को अपनी बाहों से उठा कर उसको एक कोक की बोतल पीने को दी और उसके शरीर पर आये पसीने को साफ़ किया.

फिर नैना और डायना ने मिल कर उसको खड़ा किया और थोड़ा चलाया तो रति काफी संयत हो गई.अब मैं मुस्कराते हुए बोला- क्यों रति, यह सजा कैसी लगी? कुछ तो बोलो. कैसा रहा हमारा बदला?

रति एक फीकी मुस्कान के साथ बोली- मुझे नहीं मालूम था कि गांड मरवाई इतने दर्दभरी और आनन्दभरी भी है. थैंक यू सतीश यार!मैंने आगे बढ़ कर रति को आलिंगन में ले लिया और उसके होटों पर एक भाव भीनी चुम्मी जड़ दी.

अब डायना ने भी आगे बढ़ कर मुझे आलिंगन में ले लिया और मेरे लबों पर एक बड़ी हॉट चुम्मी दे दी.फिर डायना बोली- सतीश मुझे यह देख कर बड़ी ख़ुशी हुई की रति को गांड मरवाई में कोई तकलीफ नहीं हुई. यह मेरी बड़ी पुरानी इच्छा थी कि कभी कोई मेरी भी गांड मारे. अब रति को देख कर मेरा भी दिल कर रहा है कि मेरी भी गांड तुम मारो अगर तुमको कोई प्रॉब्लम ना हो तो? ओह डिअर फ़क माय ऐस… ओह माय गॉड आई विल लव इट!!!

मैंने नैना की तरफ देखा और उसने हल्के से सर के इशारे से हाँ कह दी.मैंने डायना को हॉट जफ़्फ़ी मारी और उसके होटों को चूमते हुए उसके मोटे चूतड़ों को सहलाने लगा.

डायना मुझसे अलग होकर अपने बैग में से कुछ ढूंढने लगी और फिर मुस्कराते हुए उसने एक क्रीम की शीशी बैग से निकाली और मुझे और नैना को दिखाई.नैना ने कहा- वाह, डायना तुम तो पूरा इंतेजाम करके चलती हो. अब क्रीम लगाने के बाद तुमको काफी आसानी हो जायेगी गांड मरवाने में!

नैना ने डायना से शीशी ले ली और उसमें से ढेर सारी क्रीम निकाल कर डायना की गांड के अंदर और बाहर लगा दी और फिर डायना को घोड़ी बना कर मैंने अपने खड़े लंड को डायना के गांड के मुंह पर रख दिया और आहिस्ते से एक धक्का मारा.

पहले धक्के में ही लंड काफी सारा अंदर चला गया और डायना ‘ऊओह्ह्ह अहाहा…’ करती हुए अपनी गांड को हिलाने लगी.मैंने भी डायना की गांड को दोनों हाथों से पकड़ रखा था और धीरे धीरे धक्कों की स्पीड तेज़ करते हुए पूरे लंड को निकाल कर फिर उस की गांड में डाल दिया जिस कारण डायना को अब बहुत ही अधिक आनन्द आने लगा.

उधर नैना और रति भी डायना की चूत में ऊँगली डाल कर उसकी भग को छेड़ रही थी और डायना अब हाय हाय… करते हुए गांड मरवाई का पूरा लुत्फ़ उठा रही थी.

थोड़ी देर में डायना एकदम से ज़ोर से चिल्लाई और अपनी गांड को मेरे लंड के साथ जोड़ कर कांपने लगी और फिर वो चादर पर बेसुध होकर पसर गई.मेरा लंड डायना की एकदम टाइट गांड से वाइन बोतल से निकले कॉर्क की तरह पॉप की आवाज़ में निकला.

नैना ने झट से लंड को तौलिये से पौंछ लिया और मेरे शरीर पर चमक रहे पसीने को भी उसने पौंछ दिया.इतनी देर से चुदाई में लगे होने के कारण मैं भी काफी थकान महसूस कर रहा था, मैं भी डायना के साथ लेट गया और दूसरी तरफ रति भी लेट गई.

डायना ने नैना से पूछा- दीदी, तुमको क्या गांड मरवाना अच्छा नहीं लगता है?नैना बोली- हाँ डायना, मुझे कुछ ख़ास मज़ा नहीं आता गांड मरवाई में… वैसे मेरी चूत ही इतनी टाइट है कि गांड की मरवाई में किसी किस्म का किसी को आनन्द नहीं आता है! क्यों छोटे मालिक ठीक है ना?मैं भी मुस्कराते हुए बोला- हाँ नैना ठीक कह रही है, बड़ी ही टाइट है इसकी चूत!

फिर नैना रति को दीवार कूद कर उसके घर तक छोड़ आई और मैं और डायना बैठक में आकर बैठ गये.

कहानी जारी रहेगी.
 


गर्ल्स हॉस्टल में सेक्स ही सेक्स


फिर नैना रति को दीवार कूद कर उस के घर तक छोड़ आई और मैं और डायना बैठक में आ कर बैठ गये.

रात को खाना खाने के बाद मैं डायना को उसके गर्ल्स हॉस्टल में छोड़ने के लिए बाइक पर ले गया.मैं तो उसको हॉस्टल के बाहर ही छोड़ रहा था लेकिन उसने ज़ोर डाल कर अंदर आने के लिए कहा और मैं भी मान गया.लेकिन डायना मुझ को रिसेप्शन की बजाय अपने कमरे में ले गई जहाँ उसकी रूम मेट पहले ही बैठी थी.उसने मुझको उससे परिचित करवाया.

उसका नाम नीलू था, वो भी डायना की तरह एंग्लो इंडियन थी और उसका रंग भी एकदम सफ़ेद था.हम दोनों ने हाथ मिलाया और फिर मैं उनके साथ ही बेड पर बैठ गया.

नीलू ने उस वक्त अपनी नाईट ड्रेस पहनी हुई थी और उसकी गोरी सुंदरता उसमें से साफ़ दिख रही थी.उसके मोटे और सॉलिड मम्मे नीली ड्रेस से साफ़ झलक रहे थे.

डायना और नीलू थोड़ी देर के लिए कमरे से बाहर निकली और फिर जल्दी ही नीलू तो वापस आ गई लेकिन डायना वापस नहीं आई.मैंने नीलू से डायना के बारे में पूछा तो वो बोली- डायना अभी आती है क्यूंकि उसको वार्डन मैडम ने बुलाया था.

हम यह बातें कर ही रहे थे कि इतने में डायना एक औरत के साथ अंदर आई और बोली- सतीश, इनसे मिलो, ये हैं मिस जस्सी मैडम, इस गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन और हम सबकी सहेली भी!मैंने ध्यान से जस्सी को देखा, वो 30 के आस पास की उम्र वाली एक काफी सुंदर स्त्री लग रही थी और उसने भी बड़ी आकर्षक नाइटी पहन रखी थी.

जेस्सी ने मुझको बड़े ध्यान से देखा, फिर बोली- मिस्टर सतीश तुम काफी हैंडसम लड़के हो, अच्छी हाइट है और कसरती बॉडी भी है.मैं बोला- थैंक यू मैडम! माफ कीजिये, अब मुझ को चलना चाहिए.

जस्सी मैडम बोली- नहीं नहीं सतीश, तुम अभी रुको और अपनी फ्रेंड्स के साथ एन्जॉय करो. अच्छा डायना और नीलू, सतीश की खातिर करो, उसका ध्यान रखो, मैं अब चलती हूँ, अगर ज़रूरत समझो तो मुझको बुला लेना.ओके बाई बाई गर्ल्स. एन्जॉय !!यह कह कर जस्सी मैडम तो चली गई और हम तीनों बेड पर ही बैठे रहे.

कुछ क्षण बीत जाने के बाद डायना बोली- सतीश, क्या तुम नीलू को अभी फक कर सकते हो?मैं अकचका के बोला- अभी? तुम क्या पागल हो गई हो डायना? इतनी रात गए यह सब गर्ल्स हॉस्टल में करना खतरे से खाली नहीं.तब नीलू बोली- प्लीज सतीश प्लीज, मुझको फक कर दो.

मैं अब गहरी सोच में पड़ गया, अगर मैं साफ़ इंकार करता हूँ तो ये लड़कियाँ मुझको फंसा सकती हैं और मुझ पर ज़बरदस्ती भी कर सकती हैं या फिर मुझ पर गर्ल्स हॉस्टल में घुसने का इल्जाम लगा सकती हैं जिसके कारण मुझको पुलिस पकड़ भी सकती है.

आखिर मैंने यह फैसला लिया कि इन लड़कियों की बात मानने में ही मेरा हित है और फिर आज तो दिन भर में मैं कई लड़कियों को चोद चुका हूँ तो 1-2 और सही, क्या फरक पड़ता है.

मैं डायना से बोला- देखो डायना रात काफी हो चुकी है सो मेरा कोठी में लौटना ज़रूरी है. मैं सिर्फ नीलू को फक कर सकता हूँ किसी और को नहीं. बोलो मंज़ूर है?डायना ने नीलू से पूछा, उसने कहा- ठीक है सतीश सिर्फ मेरा काम कर दो और फिर तुम चले जाना.

मैंने डायना से कहा- अच्छा ठीक है, मैं नीलू को फक कर देता हूँ लेकिन मैं एक फ़ोन नैना को करना चाहता हूँ ताकि वो परेशान ना हो.डायना मुझको हॉस्टल के ऑफिस में ले गई, वहां से मैंने नैना को फ़ोन पर बता दिया कि वापस आते हुए मुझको कुछ देर हो सकती है.

डायना के कमरे में पहुंचा तो नीलू अपनी नाइटी उतार कर अपनी ऊँगली से चूत को मसल रही थी.नीलू का शरीर बड़ा ही सुंदर था, उसके खूबसूरत मोटे मम्मे और गोल चूतड़ों को देख कर मेरे लंड के मुंह में पानी आ गया.

नीलू ने आगे बढ़ कर मेरे भी कपड़े उतारने शुरू कर दिए और मैं जल्दी ही नंग मलंग उन दोनों के सामने खड़ा था.मेरा लौड़ा एकदम सीधा अकड़ा खड़ा था जिसको देख कर नीलू एकदम ख़ुशी से चहक उठी.नीलू ने जल्दी से मुझ को एक बड़ी ही कामुक जफ्फी मारी, मेरे लबों को बेतहाशा चूमने लगी और अपनी काले बालों से भरी चूत को मेरे खड़े लंड से रगड़ने लगी.

ऐसा लगता था कि वो काफी समय से लण्ड की प्यासी थी और उसकी चुदाने की इच्छा बड़ी प्रबल हो चुकी थी. वो बार बार मेरे शरीर पर अपने हाथ फेर रही थी और मेरे लण्ड और अंडकोष को सहला रही थी.

नीलू की चुम्मियों का सिलसिला और भी तेज़ हो गया था और जब उससे रहा नहीं गया वो मुझको खींचती हुई पलंग पर ले गई.मुझको लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ बैठी और मेरे लण्ड का निशाना बना कर उसके ऊपर बैठ गई.

नीलू की चूत में जैसे ही मेरा लण्ड गया, वो बेहद अधीर होकर ऊपर नीचे होने लगी और मैं भी उस के छोटे लेकिन सॉलिड मम्मों के साथ खेलने लगा और उसके नितम्बों को भी सहलाता रहा.मैंने नीलू के मुंह की तरफ देखा तो उसकी आँखें यौन आनन्द के कारण पूरी तरह से बंद थी और उसके होंठ खुले हुए थे और सांस जोर जोर से चल रही थी.
 
सात आठ धक्कों में ही नीलू प्यासी का पानी छूट गया और वो मेरी छाती पर लुढ़क गई.मैं भी जल्दी में था, मैंने उस को घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी पनियाई चूत में लण्ड डाल कर तेज़ी से चोदने लगा.

नीलू की चूत शायद साइज में कुछ छोटी थी हर बार लण्ड पूरा डालने पर उसकी चूत के अंत तक ठोकर मार रहा था और शायद यही कारण रहा होगा, वो फिर से बड़ी जल्दी ही झड़ गई.इस बार झड़ते ही उसके शरीर मेरी बड़ी तीव्र कंपकपी छिड़ गई और डायना भी दौड़ कर आई, उसको अपनी बाहों में ले लिया और उसके लबों पर चुम्मी देने लगी.

ये दोनों एक दूसरे के साथ बिजी थी कि कमरे का दरवाज़ा एकदम ज़ोर से खुला और 3- 4 लड़कियाँ धड़धड़ाती हुई कमरे में आई और मुझको नंगा देख कर उन सबके मुंह खुले के खुले रह गए.कुछ एक के मुंह से तो निकल ही गया- ओह माय गॉड… इतना बड़ा लण्ड??

मैं भी एकदम हैरान हुआ यह नज़ारा देख कर भौंचक्का हो गया.चारों ने झीनी टाइप की नाइटी ही पहन रखी थी जिसमें से उनके सेक्सी शरीरों के साफ़ दर्शन हो रहे थे.

सबसे पहले डायना ही होश में आई, उसने उनसे गुस्से से पूछा- तुम मेरे कमरे में मेरी परमिशन के बिना क्यों घुस आई?उनमें से एक जो साँवले रंग रंगत वाली लड़की थी, बोली- क्यों डायना, तुम अकेले ही यह मौज मस्ती कर रही हो और तुमने सोचा कि यह किसी को पता नहीं चलेगा??

डायना भी अकड़ कर बोली- मैंने वार्डन मैडम को बता दिया था और उन्होंने मुझ को परमिशन दे दी थी. चलो निकलो तुम चारों यहाँ से, नहीं तो मैं वार्डन मैडम को बुलाती हूँ?वही साँवले रंग वाली लड़की फिर बोली- ऐसे कैसे हो सकता है? हमको भी इस सेक्स में हिस्सा चाहिए नहीं तो हम शोर मचा कर लोगों को इकट्ठा कर लेंगी, फिर वार्डन मैडम और तुम सब फंस जाओगी. बोलो क्या कहती हो?

हालात की नाजुकता को देखते हुए मुझको इन लड़कियों की लड़ाई में बोलना पड़ा- रुको रुको तुम सब, मुझसे तो कोई पूछ ही ना रहा कि मेरी क्या मर्ज़ी है? और क्या में तुम सबका काम कर भी सकूंगा या फिर आप सब ही बेरंग जाओगी?सांवली बोली- सो सॉरी माय फ्रेंड, तुमने इन दोनों को फक किया है या नहीं?

मैंने भी जोश में कहा- बिल्कुल नहीं, इन दोनों में से सिर्फ एक लड़की नंगी लेटी है और मैंने सिर्फ उसको ही फक कर ही रहा था कि तुम सबने हल्ला बोल दिया. मैंने दूसरी लड़की डायना को फक नहीं किया. वो तो पूरे कपड़े पहन कर बैठी है जैसा कि तुम देख सकती हो.

सांवली के साथ एक दूसरी गोरी लड़की ने कहा- लेकिन तुम्हारा लण्ड तो अभी भी खड़ा ही है. अगर तुमने नीलू को फक किया है और यह तब से खड़ा है तो इसका मतलब है कि तुम हम सब को बारी बारी फक कर सकते हो! क्यों?अब डायना बोली- मेरा दोस्त अभी एक दो को तो फक कर सकता है लेकिन तुम चारों को नहीं कर सकता. समझा करो, वो कोई सुपरमैन तो है नहीं ना?

अभी यह बात चल ही रही थी कि वार्डन मैडम भी आ गई कमरे में और आते ही गुस्से में बोली- यह क्या हो रहा है? क्यों इतना शोर मचा रही हो तुम सब? और यह तुम्हारा फ्रेंड नंगा हो कर क्या कर रहा है यहाँ? बोलो जल्दी से?वार्डन मैडम वैसे तो डांट रही थी लड़कियों को लेकिन उसकी नज़र मेरे लण्ड पर टिकी हुई थी और उसके मुंह से उस खड़े लंड को देख कर लार टपक रही थी.

वो जल्दी से चल कर मेरे पास आई और मेरे लण्ड को अपने हाथ में ले लिया और उसको अत्यन्त भूखी नज़रों से देखने लगी.डायना ने बड़ी ही बेबस नज़रों से मुझको देखा और हल्के से सर हिला दिया, मैं समझ गया कि डायना इस मामले में कुछ भी नहीं कर सकती, अब जो कुछ भी करना है वो मुझ को ही करना पड़ेगा.

मैंने शांत मन से सोचा कि मैं पहले भी कई बार ऐसे हालात में फंस गया था जब मुझ को 5-6 लड़कियों को एक ही समय में चोदना पड़ा था. यह काम मुझको कोई ख़ास मुश्किल नहीं लगा लेकिन तब मुझको नैना का साथ था और वो काफी काम खुद कर लेती थी जिस से मुझ पर कम मेहनत पड़ती थी.

अब मैंने वार्डन मैडम को सम्बोधित किया- मैडम जी, आप तो जानती हैं हम पुरुषों की सेक्स पावर काफी लिमिटिड होती है तो यह उम्मीद करना कि मैं अकेला आप सबकी सेवा कर सकूंगा, काफी गलत होगा. इसलिए मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप सब लड़कियाँ पहले आपस में सेक्स कर लें और एक दूसरी को गर्म और तैयार कर लें, फिर मैं आप सबको बारी बारी से चोदने की कोशिश कर सकता हूँ.

वार्डन मैडम बोली- सतीश ठाकुर ठीक कह रहा है, आप पहले कमरे को लॉक करो ताकि कोई और ना अंदर आ सके और फिर जैसे सतीश कह रहा है वैसे करो.डायना ने अपने कमरे की चादरों को फर्श पर बिछा दिया और सब लड़कियाँ अपने अपने कपड़े उतारने लगी.

वार्डन मैडम ने भी अपने कपड़े उतार दिए और वो सबसे पहले नंगी होकर खड़ी हो गई और मेरे समेत सब लड़कियां मैडम की तरफ देखने लगी.
 
वार्डन मैडम की उम्र शायद 30 के आस पास की होगी लेकिन शरीर एकदम सुंदर और सुगठित और सफेद एवं और लालिमा लिए हुए था.गोल मोटे और सॉलिड मम्मे और उभरी हुई सॉलिड गांड, चुदाई के लिए पूर्ण तरह से तैयार थी और उसकी चूत पर बालों का इतना घना जमघट था कि उसकी चूत के दर्शन ही दुर्लभ हो गए थे.

मैडम बिना कुछ कहे ही मेरे पास आ गई और मेरे चौड़े वक्षस्थल पर अपने मुलायम हाथ फेरने लगी और उसके ऐसा करते ही मेरा लण्ड और भी अकड़ गया.मैडम ने मेरे होटों पर एक बहुत ही कामुक चुंबन जड़ दिया और मेरे चूतड़ों को अपने हाथों से मसलते हुए मुझको पलंग की तरफ ले गई.

मैडम ने दूसरी लड़कियों की तरफ देखा और गुस्से से उनको कहा- जल्दी से वैसा ही करो जैसा सतीश ने कहा है, और तुम डायना इन सबको देखो कि यह सब वो करें जो सतीश ने कहा है. ठीक है ना?

मैंने उन लड़कियों की तरफ देखा, वो सब निर्वस्त्र हो चुकी थी और वो सब काफी सुंदर और आकर्षक लग रही थी.अब डायना ने उनको फर्श पर लेट जाने के लिए कहा और सब एक दूसरे के साथ आलिंगन और चुम्बन में मस्त हो गई.

इधर मैडम ने मुझको लिटा दिया और स्वयं मेरे ऊपर टांगों के बल बैठ गई और अपनी चूत में मेरे लौड़े को डाल दिया, धीरे धीरे अपनी गांड को ऊपर नीचे करने लगी और मैं उनके गोल मम्मों के साथ खेलने में मस्त हो गया.अब मैंने मैडम की गांड को अपने हाथों में थाम रखा था तो अब वो काफी स्पीड के साथ मुझको चोद रही थी और उसकी टाइट चूत लपालप मेरे लौड़े को चूस रही थी.

जल्दी ही मैडम छूटने के कगार पर पहुँच गई और कुछ धक्के मेरे नीचे से मारने के बाद मैडम बड़े ज़ोर से सिसकती हुई धराशायी हो गई.जैसे ही मैडम उठी, मेरे ऊपर से तो वो सांवली लड़की ने जम्प किया ओर मेरे साथ आकर लेट गई और बिना किसी झिझक के उसने मेरे लंड को अपनी गिरफ़्त में ले लिया.

वो भी अन्य लड़कियों की मेहनत के कारण एकदम गीली हो चुकी थी, मैंने उसको घोड़ी बना कर चोदना शुरू कर दिया.तभी बाकी लड़कियों ने उसको उकसाना शुरू कर दिया- बक अप रानी… लगी रहो, जल्दी नहीं छूटना. सतीश को हरा दो यार!.

जैसे जैसे वो रानी को उकसा रही थी वैसे ही मेरी चुदाई की स्पीड तेज़ होती जा रही थी.मैं एक हाथ से रानी की चूत की भग को भी मसल रहा था और रानी अब उचक उचक कर लण्ड को अपने अंदर लील रही थी.

जल्दी ही वो भी ढेर हो गई और इस तरह उसके बाद आने वाली लड़की एक एंग्लो इंडियन थी, उसका नाम जेनी था और वो दिखने में काफी खूबसूरत थी.

उसकी खूबसूरती का आनन्द लेते हुए मैंने उसको अपने नीचे लिटा कर पूरे प्यार से चोदा और सब लड़कियां देख कर चकित हो रही थी कि जेनी इतनी अधिक कामुक हो चुकी थी, वो मुझ से पूरी तरह से चिपकी हुई थी और मेरे लण्ड को पूरा निकलने भी नहीं दे रही थी और जब वो थोड़ा बाहर आता तो वो अपनी गांड उठा कर फिर उसके साथ चिपक रही थी.

लेकिन वो भी जल्दी ही झड़ गई लेकिन फिर भी उसने मुझको नहीं छोड़ा और मुझसे चिपकी रही.डायना ने आगे बढ़ कर उसको मेरे से जुदा किया ताकि उसकी जगह दूसरी लड़की आ सके.

अब जो लड़की आई वो थोड़ी मोटी थी लेकिन उसके नयन नकश एकदम से आकर्षक थे और उसके अंग प्रत्यंग बहुत ही ठोस और मोटे थे, उसने अपना नाम नैंसी बताया.उसकी चूत पर बाल बहुत ही हल्के और भूरे रंग के थे और उसके गोरे शरीर पर वो दिखाई ही नहीं देते थे.

मैंने उसको खड़े कर के पीछे से चोदने का फैसला किया.उसको एक मस्त चुम्मी उसके लाल लाल लबों पर देने के बाद मैं उसके गोल मम्मों को चूसने लगा और उसके गोल उभरे हुए मस्त चूतड़ों को सहलाते हुए उसको पलंग के साथ हाथों को टिका कर खड़ा कर दिया और फिर मैंने पीछे से उसकी फूली हुई गोल्डन चूत में अपना लौड़ा डाल दिया.

फिर मैंने धीरे धीरे लंड को नैंसी की चूत के अंदर बाहर करना शुरू किया ही था कि बाहर से दरवाज़ा खटका और दरवाज़ा खोल कर वार्डन मैडम घबराई हुई अंदर आ गई- जल्दी करो, डायरेक्टर साहब की कार गेट में घुसी है, वो शीघ्र ही अंदर आ जायेंगे. आप सब कपड़े पहन कर अपने कमरों में चली जाओ, सतीश को स्टोर रूम में छिपा दो, उसके कपड़े भी वहीं स्टोर रूम में पहुंचा दो और याद से उसके जूते भी दे देना. और तुम नैंसी भी सतीश के साथ स्टोररूम में रहना कहीं वो घबरा ना जाए. ओके !!

यह कह कर वार्डन मैडम वहां से भाग गई.

कहानी जारी रहेगी.
 


गर्ल्स हॉस्टल की नैंसी और मेहमान चंचल भाभी की चुदाई


मैंने धीरे धीरे लंड को नैंसी की चूत के अंदर बाहर करना शुरू किया ही था कि बाहर से दरवाज़ा खटका और दरवाज़ा खोल कर वार्डन मैडम घबराई हुई अंदर आ गई- जल्दी करो, डायरेक्टर साहब की कार गेट में घुसी है, वो शीघ्र ही अंदर आ जायेंगे. आप सब कपड़े पहन कर अपने कमरों में चली जाओ, सतीश को स्टोर रूम में छिपा दो, उसके कपड़े भी वहीं स्टोर रूम में पहुंचा दो और याद से उसके जूते भी दे देना. और तुम नैंसी भी सतीश के साथ स्टोररूम में रहना कहीं वो घबरा ना जाए. ओके !!

यह कह कर वार्डन मैडम वहाँ से भाग गई.

स्टोर रूम के अँधेरे में मैंने नैंसी को कस कर पकड़ा हुआ था और वो मुझको हाथ से पकड़ कर स्टोर रूम के ऐसे कोने में ले गई जहाँ पर कुछ पुराने सोफे पड़े हुए थे.नैंसी ने मुझको वहाँ पर बिठा दिया और खुद वो दरवाज़े के साथ खड़ी हो कर बाहर से आने वाली आवाज़ों को सुनने की कोशिश करने लगी.

मैं भी कमरे में बाहर से आ रही हल्की रोशनी में स्टोर रूम का जायज़ा ले रहा था और वहाँ कुछ पुराने फर्नीचर के अलावा कुछ बक्से और अलमारियाँ पड़ी हुई थी.कमरे में आ रही लाइट इतनी ज़रूर थी कि हमको सब चीज़ें साफ़ दिखाई दे रही थी.हम दोनों ही एकदम नंगे वहाँ अँधेरे कमरे में बंद हुए बैठे थे.

अब नैंसी आकर मेरे पास सोफे पर बैठ गई और मेरे अभी भी खड़े लंड के साथ खेलने लगी और मैं भी उसके मोटे स्तनों को झुक कर चूसने लगा. उसके मम्मों के चूचुक अब एकदम खड़े हुए थे और उनको मुंह में लेकर चूसने में बड़ा ही मज़ा आ रहा था.

नैंसी की चूत में हाथ डाला तो वो काफी गीली हो चुकी थी. मैंने नैंसी को कामुक चुम्मी देते हुए उसकी जांघों को चौड़ा कर दिया और उनके बीच में बैठ कर मैंने अपने होंठ उसकी चूत पर टिका दिए और हल्के हल्के से उसको चाटने लगा.

अब नैंसी बहुत अधिक कामुक हो गई थी, वो मेरे सर को अपनी चूत से हटाने की कोशिश करने लगी.लेकिन मैं भी उसकी भग को चूसने में मग्न रहा और मेरी कुछ देर की मेहनत से ही वो छूटने लगी, उसने अपनी जांघें कस कर मेरे मुंह के इर्दगिर्द बाँध दी और साथ ही वो बड़ी तीव्रता से झड़ने लगी.

मैं भी उसकी टांगों के बीच से उठा और सीधे अपने गीले लबों को उसके होटों पर चिपका दिए.फिर मैं सोफे पर बैठ गया और नैंसी को अपनी गोद में बिठा लिया और उसकी दोनों टांगों को अपनी कमर के इर्दगिर्द फैला दिया और अपने अकड़े हुए लंड को उसकी भट्टी के समान गर्म चूत में डाल दिया.

मैं तो बिना हिले बैठा रहा लेकिन नैंसी अपनी बाँहों को मेरे गले में डाल कर अपनी गांड को झूले की तरह आगे पीछे करती रही जिस से उसके आनन्द की कोई सीमा नहीं रही.अब वो अपने पूरे जोश में मुझको बैठ कर चोद रही थी और उसकी सांसें धौकनी की तरह चल रही थी.

थोड़ी देर में उसका मेरे लौड़े पर कूदना बहुत अधिक तेज हो गया और फिर उसने मुझको बहुत ही टाइट जफ्फी डाली और कांपते हुए छूट गई.

हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे को जफ्फी डाले हुए वैसे ही चिपके हुए बैठे रहे और शायद थोड़ी देर और बैठे रहते अगर हमको दरवाज़े का ताला खुलने की आवाज़ ना आती.

हम दोनों झट संभल कर बैठ गए और फिर डायना ताला खोल कर अंदर आई और हमको नंग मलंग देख कर जोर से हंस दी और बोली – वाह, तुम दोनों इतने बड़े खतरे के सामने होते हुए भी चुदाई में लगे रहे… बहुत खूब!

नैंसी और मैं मुस्करा दिए और फिर हम दोनों ने कपड़े पहनने शुरू कर दिए.तभी डायना बोली- अभी तो सिर्फ 10 ही बजे हैं रात के… अभी बाकी बची हुई लड़कियों का भी कल्याण कर जाओ सतीश प्लीज?

मैं बोला- पहले यह बताओ कि डायरेक्टर साहिब को किसी ने शिकायत की थी या फिर वो अक्सर ऐसी इंस्पेक्शन करने आते रहते हैं?डायना बोली- नहीं शिकायत किसी ने नहीं की थी और वो अक्सर अचानक इंस्पेक्शन पर आ जाते हैं.मैं बोला- ठीक है. अभी बाकी कितनी लड़कियाँ बची हैं?डायना बोली- मेरे समेत 3 और हैं.

मैं बोला- ऐसा करो तुम कल कॉलेज के बाद मेरे घर आ जाओ और उन लड़कियों को भी बुला लो, वहीं आप सबका काम कर दूँगा. बोलो क्या कहती हो?डायना बोली- मैं उन लड़कियों से बात कर लूँ, फिर आपको बताती हूँ.

थोड़ी देर बाद डायना आई और बोली- सतीश डार्लिंग, सब लड़कियाँ यह चाहती हैं कि आज ही उनका भी काम कर दूँ और तुम कर सकते हो उनके साथ भी… यह मैं जानती हूँ.

मैं डायना को लेकर उसके कमरे में आ गया और उसको एक गर्म जफ्फी मारी और फिर उसको समझाया- देखो डायना, मैं आज सारा दिन चुदाई में ही लगा रहा हूँ, पहले वो ग्रुप सेक्स… और फिर बाद में तुम्हरे साथ लॉन में और फिर रति के साथ! मुझमें इससे ज़्यादा सेक्स करने की ताकत नहीं है री… कल तुम इनको कॉलेज के बाद ले आना मेरी कोठी में या फिर इनका प्रोग्राम किसी और दिन का रख दो प्लीज डायना!
 
फिर मैंने डायना को एक और गर्मागर्म चुम्मी की और उसके मोटे गोल मम्मे दबाते हुए मैं बाहर जाने के लिए चल पड़ा और डायना भी मुझको बाहर तक छोड़ने के लिए आई.

कोठी में नैना मेरा इंतज़ार कर रही थी, मुझको देखते ही मुझ पर बरस पड़ी- छोटे मालिक तुम भी ना ज़रा ध्यान नहीं रखते अपना? गर्ल्स हॉस्टल में जाने की क्या ज़रूरत थी? तुम पर बड़ी भारी मुसीबत आ सकती थी और तुम बुरी तरह फंस सकते थे!

मैं भी शर्मिंदा होते हुए बोला- वेरी सॉरी नैना… लेकिन मैं क्या करता मैं तो गोरी चमड़ी के चक्कर में फंस गया था और तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो, मैं तो फंसते फंसते बचा हूँ.फिर मैंने उसको सारी कहानी सुना दी.

खाना खाने के बाद नैना ने बताया कि मेरे पीछे पूनम के भाई और भाभी का फ़ोन आया था और वो सब कल दोपहर में पहुँच रहे हैं और उनके साथ 4-5 दूसरी औरतें भी होंगी, कल उनके रहने का इंतज़ाम भी करना पड़ेगा, कैसे करें यह सब?

मैं बोला- भैया भाभी को नीचे का मम्मी के कमरे के साथ वाला कमरा दे दो और जो बाकी औरतें होंगी उनको ऊपर कमरे दे दो, मेरे कमरे के साथ वाले कमरे. क्यों यह ठीक नहीं है क्या?

नैना कुछ झुंझलाई हुई लग रही थी लेकिन मैंने उसको जफ्फी मारी और साथ में उसको एक कामुक चुम्मी भी की और उसको थोड़ा प्यार व्यार किया तो वो कुछ संयत हुई.

अगले दिन मैं जब कॉलेज से लौटा तो कोठी में काफी हलचल थी, सारे मेहमान आ चुके थे, वे मुझको बैठक में ही मिल गए.पूनम और उसके परिवार के लोग बड़े गर्म जोशी से मिले और पूनम ने हम सब को एक दूसरे से मिलवाया.नैना ने उनके खाने का बड़ा अच्छा अरेंजमेंट किया हुआ था, सबने खाने की बड़ी तारीफ की और नैना और पारो की मेहनत को खूब सराहा.

अब मैंने आने वाले मेहमानों को ध्यान से देखा.पूनम के भैया काफी स्मार्ट और पढ़े लिखे लग रहे थे, उनके साथ आई औरतों को देखा तो पूनम की भाभी काफी सुंदर और नखरे वाली लगी.

उनके साथ आई औरतों में से 2 पूनम की दूर की भाभियाँ थीं जो ज़्यादा स्मार्ट तो नहीं थी लेकिन शरीर से काफी सेक्सी लग रही थी.उनमें 3 कमसिन उम्र की लड़कियाँ भी थी जो काफी आधुनकि सलवार सूट पहने हुये थीं लेकिन दिखने में कोई ख़ास सूंदर नहीं लगी मुझको!

नैना ने उनके सोने का इंतज़ाम ऐसा किया हुआ था कि भैया भाभी को नीचे एक कमरे में और बाकी सब ऊपर मेरे कमरे के साथ वाले 3 कमरों में ठहरा दी गई थीं.रात बड़ी देर तक पूनम और उसके रिश्तेदार औरतें मेरे कमरे में बैठी रही और खूब बतियाती रही.

उनमें से एक बहुत ही तेज़ भाभी, जिसका नाम चंचल था, मेरे से बार बार आँखें चार कर रही थी और कई बार मैंने उसको मुझको बेशर्मी से घूरते हुए पाया.एक दो बार वो उठते बैठते हुए मुझको छू जाती और आँखों ही आँखों में मुझको इशारा भी कर रही थी.

पहले वो मेरे सामने ही बैठी थी लेकिन फिर वो टॉयलेट होकर आई तो मेरे साथ खाली जगह पर बैठ गई और उसके कंधे मेरे कन्धों से रगड़ खा रहे थे.जब वो साथ बैठी तो दो बार उसने जानबूझ कर अपने मम्मे मेरे बाज़ू से रगड़ दिए जिसका मुझको काफी आनन्द आया और यह भी महसूस हुआ कि वो काफी सुघटित शरीर वाली है.

रात को जब हम सब सोने के लिए उठे तो मैंने और नैना ने जाकर उन सबसे पूछा कि आपको किसी चीज़ की ज़रूरत तो नहीं है.चंचल भाभी का कमरा मेरे साथ वाला ही था और उनके साथ एक थोड़ी सांवली सी कुंवारी लड़की सोई हुई थी.

भाभी ने, जब नैना का ध्यान कहीं और था, तब हल्की सी आँख भी मारी और मैं तत्काल समझ गया यह भाभी भी लण्ड की प्यासी है.मैंने भी वापस आते हुए उसको आँख मार दी और उसको जता दिया कि मैं भी तैयार हूँ.

मैं अपने कमरे में अकेला ही सोया था और करीब आधी रात को मैंने साथ वाले कमरे में सोई चंचल भाभी के कमरे में झाँका और यह देख कर हैरान हो गया कि भाभी अपनी साड़ी ऊपर उठा का अपनी चूत में ऊँगली मार रही थी.उसकी आँखें मुंदी हुई थी और वो बड़े ही कामुक अंदाज़ में अपने होंठ दांतों के नीचे दबा रही थी जैसे कि वो शीघ्र ही स्खलित होने वाली हो.

मैंने हल्के से खांसी की और भाग कर अपने कमरे में आ गया और अपने पजामे को नीचे करके अपने खड़े लंड को बाहर कर दिया.जैसा कि मुझको उम्मीद थी, भाभी यह देखने के लिए उठी कि कौन खांस रहा है.

तब उसने मेरे कमरे में झांका और जब उस ने देखा कि मैं सोया हूं और मेरा लौड़ा एकदम अटेंशन खड़ा है तो वो एकदम चौंक गई,डरते हुए वो मेरे कमरे के अंदर आ गई और मेरे खड़े लौड़े को बड़े ध्यान से देखने लगी.

फिर उसने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया और अपनी साड़ी ऊपर करके वो पलंग पर चढ़ आई और आते ही मेरे लण्ड को चूसने लगी.मैं भी सोने का बहाना करके मस्त लेटा रहा लेकिन चंचल भाभी जब लण्ड चुसाई कुछ देर कर चुकी तो वो अपनी साड़ी को ऊपर उठा कर मेरे खड़े लंड के ऊपर बैठने की कोशिश करने लगी.

उसकी चूत अति द्रवित हो चुकी थी तो वो जैसे ही लंड पर बैठी, मेरा लण्ड घप्प से उसकी चूत में प्रवेश कर गया और उसकी मुलायम गुदाज जांघें मेरे पेट से रगड़ा खाने लगी.

उसकी आँखें मेरी आँखों की तरफ ही देख रही थी कि कहीं मैं जाग तो नहीं पड़ा लेकिन जैसे उसको चुदाई का आनन्द आने लगा, उसने अपनी आँखें बंद कर ली और अपने सर को इधर उधर फ़ेंक कर मेरी चुदाई करने लगी.

उसकी चूत से गाढ़ा और सुगन्धित द्रव्य निकल कर मेरे पेट पर गिर रहा था और वो बिना किसी हिचक के मेरे लंड पर ऊपर नीचे होती रही.थोड़ी देर में वो तेज़ी से ऊपर नीचे होने लगी और मुझको आभास हो गया कि शीघ्र ही वो स्खलित हो जाएगी.

मैं अब अपने आप को रोक नहीं सका और मैंने चंचल भाभी को फ़ौरन अपनी बाहों में बाँध लिया.चंचल भाभी पहले तो हैरान रह गई यह सोच कर कि मैं सिर्फ सोने की एक्टिंग कर रहा हूँ और फिर वो खुश हो गई कि मैं भी उसको चाहता हूँ इस लिए उसको सोते हुए भी उसको चोदने दिया.

अब मैंने चंचल भाभी को पलटी मार कर अपने नीचे पर लिया और मैं ऊपर चढ़ कर उसको जम के चोदने लगा.चुदाई की स्पीड कभी तेज़ और कभी आहिस्ता करते हुए मैंने भाभी को जल्दी ही कनारे लगा दिया.

जब उसकी किश्ती किनारे पहुंची तो उसके शरीर से निकलने वाली लहरें इतनी तीव्र थी कि मेरी स्वयं की किश्ती भी डांवाडोल होने लगी.लेकिन चंचल भाभी इतनी ज़्यादा कामुक हो चुकी थी कि उसने मुझको कस कर अपने शरीर से चिपका लिया और नीचे से फिर धक्के मारने लगी.

मेरा लंड तो खड़ा था ही तो चुदाई का आलम फिर से शुरू हो गया लेकिन मैं अब भाभी को बहुत ही धीरे धीरे चोदने की कोशिश कर रहा था.थोड़ी देर में भाभी फिर तेज़ी में आ गई और नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी.

मैं भी आँखें बंद करके भाभी की टाइट चूत का आनन्द लेने लगा.तभी हल्की आवाज़ के साथ कमरे का दरवाज़ा खुल गया और एक जनाना आवाज़ ने गुस्से के लहजे में पूछा- सतीश, यह क्या हो रहा है?

यह आवाज़ सुन कर मैं एकदम सकते में आ गया और जल्दी ही चंचल भाभी के गर्म और रसीले शरीर को छोड़ कर खड़ा हो गया और अपने आप ही मेरे खड़े लंड का दरवाज़े की तरफ निशाना बन गया.मैं भौंचक्का हुआ आने वाले की तरफ देख रहा था और आने वाले का मुंह मेरे लंड की दशा देख कर खुला का खुला रह गया.

कहानी जारी रहेगी.
 
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