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“आहह अभिषेक सीईइ” मेने अपनी अध खुली आँखो से अभिषेक और प्राजक्ता की ओर देखते हुए सिसकारी भरी…अभिषेक ने प्राजक्ता के होंठो से अपने होंठो को अलग किया, और फिर मेरे ऊपर झुकते हुए, मेरे स्लीव्लेस्स नाइटी के स्ट्रॅप को पकड़ कर कंधो से नीचे सरकाना शुरू कर दिया. मेने उसे रोकने की कोशिश की, पर उसके आगे मेरी एक ना चली, जैसे ही मेने उसके हाथो को पकड़ कर रोकना चाहा.
उसने अपने लिंग को दो तीन बार पूरी तेज़ी से मेरी योनि के अंदर बाहर कर दिया……मेरे पूरे बदन मे करेंट सा दौड़ गया…..और मेरी पकड़ अभिषेक के हाथो पर ढीली हो गयी. और उसका फ़ायदा उठाते हुए, उसने मेरी नाइटी के स्ट्रॅप्स को मेरे कंधो से नीचे सरका कर , मेरी बाहों से बाहर निकालते हुए, नीचे खेंच दिया.
मेरे स्तन अब नाइटी की क़ैद से बाहर आ गयी थी…..जो मेरे तेज़ी से साँस लेने से ऊपर नीचे हो रही थी…..फिर अभिषेक ने झुकते हुए, मेरे हाथो को पकड़ कर बेडशीट से टिका दिया. और मेरी एक स्तन मूह मे भर कर चूसने लगा. उसने मेरे दोनो हाथो को पकड़ कर मेरे सर के दोनो तरफ बिस्तर पर दबाया हुआ था……मेरी आँखे मस्ती में बंद होने लगी……
तभी मेरा पूरा बदन एक दम से कांप गया……मुझे मेरे दूसरे स्तनाग्र पर मुझे कुछ गरम और नरम सा अहसास हुआ. मेने अपनी आँखो को ज़ोर लगा कर खोल कर देखा, तो में एक दम से हैरान रह गयी…..मेरे एक स्तन को अभिषेक चूस रहा था. और दूसरे स्तन को प्राजक्ता अपने मूह मे भर कर चूस रही थी….मेरे पूरे बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी. और साथ ही शरमसार भी हुए जा रही थी. मेरी योनि और ज़्यादा पानी छोड़ने लगी……नीचे अभिषेक के धक्के और तेज हो गये. वो अपने लिंग को पूरा बाहर निकाल निकाल कर मेरी योनि मे पेल रहा था.
अब मुझसे भी बरदाश्त से बाहर होता चला जा रहा था. मेरी योनि की आग इस कदर बढ़ चुकी थी कि, मेने खुद ही अपनी नितंब को ऊपर की ओर उछालना शुरू कर दिया……मेरी इस हरक़त को देख प्राजक्ता ने अपना मूह मेरी स्तनाग्र से हटा लिया. और फिर मेरी योनि की तरफ देखने लगी. जिसमे अभिषेक का लंबा मोटा लिंग बड़ी तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था….”आह धीरे आह अहह उंह “
अभिषेक: ले साली और ले…….देख तुझे तेरे बेटी के सामने ठोक रहा हूँ. देख प्राजक्ता तेरी माँ की योनि कितनी गरम है. देख कैसे पानी छोड़ रही है….
अभिषेक ने अपना लिंग मेरी योनि से बाहर निकाल कर दिखाते हुए कहा. उसका लिंग मेरी योनि के पानी के कारण ट्यूब लाइट की रोशनी मे चमक रहा था. उसका झटके ख़ाता हुआ लिंग आज और ज़्यादा विकराल लग रहा था.
फिर प्राजक्ता ने वो क्या जिसके बारे में मेने सोचा भी नही था. अभिषेक ने प्राजक्ता की गर्दन के पीछे एक हाथ डाल कर उसे अपने लिंग पर झुका लिया. जो मेरी योनि के ठीक ऊपर झटके खा रहा था. और मेरे देखते ही देखते. प्राजक्ता ने अपने मूह को खोल कर अभिषेक के लिंग के बड़े और मोटे लाल सुपाडे को अपने होंठो में कस लिया.”आह” अभिषेक भी सिसक उठा….उसने अपने दोनो हाथों से प्राजक्ता के सर को पकड़ कर अपनी कमर को तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया.
प्राजक्ता भी अभिषेक के लिंग आधे से ज़्यादा निगलते हुए चूस रही थी….उसका एक हाथ मेरे पेट के ऊपर था. और दूसरा हाथ उसने बेड पर टिका रखा था.
“पुच पबब्ब पबब्ब की आवाज़ें प्राजक्ता के मूह से निकल रही थी….फिर थोड़ी देर बाद प्राजक्ता ने लिंग को मूह से बाहर निकाला. और फिर हाथ से पकड़ कर तेज़ी से हिलाने लगी. और फिर मेरी तरफ देखते हुए बोली. “मम्मी ये तुम्हारी बेटी की तरफ से तुम्हारे लिए तोहफा है” और फिर उसने हाथ से अभिषेक के लिंग को पकड़ कर मेरी योनि के छेद पर लगा दिया…..
में भी अपनी योनि की फांको को अपने हाथो से फेलाते हुए, उसे अपनी योनि का गुलाबी छेद दिखाया. और अभिषेक का लिंग एक बार फिर से मेरी योनि के छेद पर था. “अह्ह्ह्ह प्राजक्ता बेटा मुझी ये गिफ्त बहुत पसंद है….अहह अह्ह्ह्ह धीरे अभिषेक आह मर गयी. मेरी योनी अह्ह्ह्ह” अभिषेक ने फिर से अपना पिस्टन चलाना शुरू कर दिया था…..उसके हर झटके के साथ ठप ठप की आवाज़ पूरे रूम में गूँज रही थी…..
तभी मुझे अपने ऊपर कुछ महसूस हुआ. मेने मस्ती में सिसकते हुए अपनी आँखो को खोल कर देखा तो, प्राजक्ता मेरे ऊपर थी. उसके दोनो पैर मेरी कमर के दोनो तरफ थे. और वो बिलकुल डॉगी स्टाइल मे मेरे ऊपर थी…..”माँ मुझे भी तुमसे गिफ्ट चाहिए “ प्राजक्ता ने मेरी अध खुली आँखो में झाँकते हुए कहा.
पर मैं कुछ बोल नही पा रही थी…उसने मेरे कोई जवाब देने से पहले ही, अपने होंठो को मेरे होंठो की तरफ बढ़ा दिया. “आह नही” मेने अपनी योनि मे महसूस हो रहे धक्को से सिसकते हुए कहा, और अपना फेस दूसरी तरफ घुमा लया.
अभिषेक और ज़ोर से अपना लिंग बाहर निकाल निकाल कर अंदर पेलने लगा था. उसके हर धक्के से मेरा पूरा बदन हिल रहा था. उसके बॉल्स मेरी नितंब के छेद पर टकरा रहे थे. “उम्मह सीईईई अभिषेक आह धीरे आह” फिर प्राजक्ता ने मेरे फेस को अपने हाथो में पकड़ कर जबरन अपने होंठो को मेरे होंठो पर लगा दिया.
मेने शरम के मारे अपने होंठो को आपस मे भींच लिया. पर अभिषेक के लिंग के झटके अब मेरी योनि में इतने तेज हो गये थे कि, मुझे अपने होंठो को खोलना पड़ा. जैसे ही मेने अपने होंठो को खोला, प्राजक्ता ने अपनी जीभ मेरे मूह मे घुसा दी. उसकी जीभ मेरे मूह के हर कोने में घूम रही थी.
उसके दोनो हाथ मेरे स्तनों पर थे. जिसे वो दबा दबा कर खेंच रही थी. फिर उसने मेरे होंठो को चूसना शुरू कर दिया. अब मेरे भी बरदाश्त से बाहर होता जा रहा था. मेने मन में सोच लिया था कि, अगर मेरे बेटी मुझसे इस तरह बेशर्मी से पेश आ सकती है, तो में क्यों पीछे रहूं.
मेने भी प्राजक्ता का साथ देना शुरू कर दिया. कभी वो मेरे होंठो को चुस्ती, तो कभी मैं उसके होंठो को चुस्ती………”आहह सालियो मुझे भूल गयी क्या ?” अभिषेक ने नीचे से मेरी योनि में अपना लिंग पेलते हुआ कहा. और फिर उसने एक ज़ोर दार थप्पड़ प्राजक्ता की नितंब पर मारा.
जिसकी आवाज़ मुझे साफ सुनाई दी, और फिर प्राजक्ता के सिसकने की आवाज़ आई. मेने देखा, प्राजक्ता मेरे ऊपर से उठ कर फिर से अभिषेक के पास जाकर घुटनो के बल बैठ गयी. अभिषेक ने अपने लिंग को मेरी योनि से बाहर निकाला, और प्राजक्ता की तरफ देखने लगा. प्राजक्ता ने अभिषेक को लिंग को हाथ में पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया.
अभिषेक का लिंग मेरी योनि के कामरस से पूरी तरहा भीगा हुआ था. प्राजक्ता उसके लिंग को हिलाते हुए धीरे धीरे नीचे झुकने लगी. उसके होंठो और मेरी योनि के बीच सिर्फ़ थोड़ा ही फाँसला ही रह गया था. और योनि के ठीक सामने अभिषेक का लिंग था. उसने झुकते हुए अभिषेक के लिंग को मूह में भर लिया.
और जोर जोर से सर हिलाते हुए, अभिषेक के लिंग को चूसने लगी. में ये सब देख कर और गरम हुई जा रही थी…..अभिषेक ने मेरी टाँगो को घुटनो से मोड़ कर ऊपर उठाया,और मेरी जाँघो को ज़ोर से पकड़ लाया. फिर उसने एक हाथ से प्राजक्ता के बालों को पकड़ा और उसका सर पीछे खेंचते हुए, अपने लिंग को उसके मूह से बाहर निकल लिया. फिर उसने प्राजक्ता के बालो को पकड़े हुए, उसके फेस को मेरी योनि की तरफ बढ़ा दिया. अगले ही पल उसने प्राजक्ता के बालो को छोड़ कर मेरी टाँगो को पकड़ कर और फैला दिया.
इससे पहले कि मैं कुछ कर पाती, प्राजक्ता ने अपनी जीभ को नॉकदार बनाते हुए, मेरी योनि के छेद पर लगा दिया. मैं जल बिन मछली की तरह तड़प उठी. पर मैं अपने आप को छुड़ा नही पा रही थी. क्योंकि अभिषेक ने मेरी टाँगो को फेला कर ज़ोर से पकड़ रखा था……प्राजक्ता अपनी जीभ मेरी योनि के छेद पर रगड़ रही थी.
सुर्प सुर्प की आवाज़ से ऐसा लग रहा था. जैसे कि वो मेरी योनि से बह रहा सारा पानी पी जाएगी. मेरे आँखे फिर से मस्ती मे बंद हो गयी…..
मैं: अह्ह्ह्ह सोइना आहह ईए ईए क्याअ कर मत करो अह्ह्ह्ह उंह सीयी आह बेटाअ अहह हट जाअ….
मेरी मस्ती का कोई ठिकाना नही था. मेरी कमर अपने आप ही झटके खाने लगी. जिससे मेरी योनि बार बार प्राजक्ता के मूह पर दब जाती, और वो और ज़ोर से मेरी योनि की फांको को मूह में भर कर चूसने लगती…..फिर अभिषेक ने मेरी टाँगो को पकड़ और ऊपर उठा दिया. इतना ऊपर कि, मेरी नितंब बेड से ऊपर उठ गयी…और अगले ही पल प्राजक्ता ने मेरी योनि को चाटते हुए, एक तकिया मेरी नितंब के नीचे लगा दिया. मेरी योनि से निकल रहा पानी, और प्राजक्ता का थूक बहता हुआ मेरी नितंब के छेद की तरफ जा रहा था….
.जैसे ही प्राजक्ता ने मेरी नितंब के नीचे तकिया लगाया. अभिषेक ने मेरी टाँगो को छोड़ दिया. नीचे तकिया होने के कारण मेरी नितंब अब कुछ ज़यादा ही ऊपर उठ चुकी थी…….
उसने अपने लिंग को दो तीन बार पूरी तेज़ी से मेरी योनि के अंदर बाहर कर दिया……मेरे पूरे बदन मे करेंट सा दौड़ गया…..और मेरी पकड़ अभिषेक के हाथो पर ढीली हो गयी. और उसका फ़ायदा उठाते हुए, उसने मेरी नाइटी के स्ट्रॅप्स को मेरे कंधो से नीचे सरका कर , मेरी बाहों से बाहर निकालते हुए, नीचे खेंच दिया.
मेरे स्तन अब नाइटी की क़ैद से बाहर आ गयी थी…..जो मेरे तेज़ी से साँस लेने से ऊपर नीचे हो रही थी…..फिर अभिषेक ने झुकते हुए, मेरे हाथो को पकड़ कर बेडशीट से टिका दिया. और मेरी एक स्तन मूह मे भर कर चूसने लगा. उसने मेरे दोनो हाथो को पकड़ कर मेरे सर के दोनो तरफ बिस्तर पर दबाया हुआ था……मेरी आँखे मस्ती में बंद होने लगी……
तभी मेरा पूरा बदन एक दम से कांप गया……मुझे मेरे दूसरे स्तनाग्र पर मुझे कुछ गरम और नरम सा अहसास हुआ. मेने अपनी आँखो को ज़ोर लगा कर खोल कर देखा, तो में एक दम से हैरान रह गयी…..मेरे एक स्तन को अभिषेक चूस रहा था. और दूसरे स्तन को प्राजक्ता अपने मूह मे भर कर चूस रही थी….मेरे पूरे बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी. और साथ ही शरमसार भी हुए जा रही थी. मेरी योनि और ज़्यादा पानी छोड़ने लगी……नीचे अभिषेक के धक्के और तेज हो गये. वो अपने लिंग को पूरा बाहर निकाल निकाल कर मेरी योनि मे पेल रहा था.
अब मुझसे भी बरदाश्त से बाहर होता चला जा रहा था. मेरी योनि की आग इस कदर बढ़ चुकी थी कि, मेने खुद ही अपनी नितंब को ऊपर की ओर उछालना शुरू कर दिया……मेरी इस हरक़त को देख प्राजक्ता ने अपना मूह मेरी स्तनाग्र से हटा लिया. और फिर मेरी योनि की तरफ देखने लगी. जिसमे अभिषेक का लंबा मोटा लिंग बड़ी तेज़ी से अंदर बाहर हो रहा था….”आह धीरे आह अहह उंह “
अभिषेक: ले साली और ले…….देख तुझे तेरे बेटी के सामने ठोक रहा हूँ. देख प्राजक्ता तेरी माँ की योनि कितनी गरम है. देख कैसे पानी छोड़ रही है….
अभिषेक ने अपना लिंग मेरी योनि से बाहर निकाल कर दिखाते हुए कहा. उसका लिंग मेरी योनि के पानी के कारण ट्यूब लाइट की रोशनी मे चमक रहा था. उसका झटके ख़ाता हुआ लिंग आज और ज़्यादा विकराल लग रहा था.
फिर प्राजक्ता ने वो क्या जिसके बारे में मेने सोचा भी नही था. अभिषेक ने प्राजक्ता की गर्दन के पीछे एक हाथ डाल कर उसे अपने लिंग पर झुका लिया. जो मेरी योनि के ठीक ऊपर झटके खा रहा था. और मेरे देखते ही देखते. प्राजक्ता ने अपने मूह को खोल कर अभिषेक के लिंग के बड़े और मोटे लाल सुपाडे को अपने होंठो में कस लिया.”आह” अभिषेक भी सिसक उठा….उसने अपने दोनो हाथों से प्राजक्ता के सर को पकड़ कर अपनी कमर को तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया.
प्राजक्ता भी अभिषेक के लिंग आधे से ज़्यादा निगलते हुए चूस रही थी….उसका एक हाथ मेरे पेट के ऊपर था. और दूसरा हाथ उसने बेड पर टिका रखा था.
“पुच पबब्ब पबब्ब की आवाज़ें प्राजक्ता के मूह से निकल रही थी….फिर थोड़ी देर बाद प्राजक्ता ने लिंग को मूह से बाहर निकाला. और फिर हाथ से पकड़ कर तेज़ी से हिलाने लगी. और फिर मेरी तरफ देखते हुए बोली. “मम्मी ये तुम्हारी बेटी की तरफ से तुम्हारे लिए तोहफा है” और फिर उसने हाथ से अभिषेक के लिंग को पकड़ कर मेरी योनि के छेद पर लगा दिया…..
में भी अपनी योनि की फांको को अपने हाथो से फेलाते हुए, उसे अपनी योनि का गुलाबी छेद दिखाया. और अभिषेक का लिंग एक बार फिर से मेरी योनि के छेद पर था. “अह्ह्ह्ह प्राजक्ता बेटा मुझी ये गिफ्त बहुत पसंद है….अहह अह्ह्ह्ह धीरे अभिषेक आह मर गयी. मेरी योनी अह्ह्ह्ह” अभिषेक ने फिर से अपना पिस्टन चलाना शुरू कर दिया था…..उसके हर झटके के साथ ठप ठप की आवाज़ पूरे रूम में गूँज रही थी…..
तभी मुझे अपने ऊपर कुछ महसूस हुआ. मेने मस्ती में सिसकते हुए अपनी आँखो को खोल कर देखा तो, प्राजक्ता मेरे ऊपर थी. उसके दोनो पैर मेरी कमर के दोनो तरफ थे. और वो बिलकुल डॉगी स्टाइल मे मेरे ऊपर थी…..”माँ मुझे भी तुमसे गिफ्ट चाहिए “ प्राजक्ता ने मेरी अध खुली आँखो में झाँकते हुए कहा.
पर मैं कुछ बोल नही पा रही थी…उसने मेरे कोई जवाब देने से पहले ही, अपने होंठो को मेरे होंठो की तरफ बढ़ा दिया. “आह नही” मेने अपनी योनि मे महसूस हो रहे धक्को से सिसकते हुए कहा, और अपना फेस दूसरी तरफ घुमा लया.
अभिषेक और ज़ोर से अपना लिंग बाहर निकाल निकाल कर अंदर पेलने लगा था. उसके हर धक्के से मेरा पूरा बदन हिल रहा था. उसके बॉल्स मेरी नितंब के छेद पर टकरा रहे थे. “उम्मह सीईईई अभिषेक आह धीरे आह” फिर प्राजक्ता ने मेरे फेस को अपने हाथो में पकड़ कर जबरन अपने होंठो को मेरे होंठो पर लगा दिया.
मेने शरम के मारे अपने होंठो को आपस मे भींच लिया. पर अभिषेक के लिंग के झटके अब मेरी योनि में इतने तेज हो गये थे कि, मुझे अपने होंठो को खोलना पड़ा. जैसे ही मेने अपने होंठो को खोला, प्राजक्ता ने अपनी जीभ मेरे मूह मे घुसा दी. उसकी जीभ मेरे मूह के हर कोने में घूम रही थी.
उसके दोनो हाथ मेरे स्तनों पर थे. जिसे वो दबा दबा कर खेंच रही थी. फिर उसने मेरे होंठो को चूसना शुरू कर दिया. अब मेरे भी बरदाश्त से बाहर होता जा रहा था. मेने मन में सोच लिया था कि, अगर मेरे बेटी मुझसे इस तरह बेशर्मी से पेश आ सकती है, तो में क्यों पीछे रहूं.
मेने भी प्राजक्ता का साथ देना शुरू कर दिया. कभी वो मेरे होंठो को चुस्ती, तो कभी मैं उसके होंठो को चुस्ती………”आहह सालियो मुझे भूल गयी क्या ?” अभिषेक ने नीचे से मेरी योनि में अपना लिंग पेलते हुआ कहा. और फिर उसने एक ज़ोर दार थप्पड़ प्राजक्ता की नितंब पर मारा.
जिसकी आवाज़ मुझे साफ सुनाई दी, और फिर प्राजक्ता के सिसकने की आवाज़ आई. मेने देखा, प्राजक्ता मेरे ऊपर से उठ कर फिर से अभिषेक के पास जाकर घुटनो के बल बैठ गयी. अभिषेक ने अपने लिंग को मेरी योनि से बाहर निकाला, और प्राजक्ता की तरफ देखने लगा. प्राजक्ता ने अभिषेक को लिंग को हाथ में पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया.
अभिषेक का लिंग मेरी योनि के कामरस से पूरी तरहा भीगा हुआ था. प्राजक्ता उसके लिंग को हिलाते हुए धीरे धीरे नीचे झुकने लगी. उसके होंठो और मेरी योनि के बीच सिर्फ़ थोड़ा ही फाँसला ही रह गया था. और योनि के ठीक सामने अभिषेक का लिंग था. उसने झुकते हुए अभिषेक के लिंग को मूह में भर लिया.
और जोर जोर से सर हिलाते हुए, अभिषेक के लिंग को चूसने लगी. में ये सब देख कर और गरम हुई जा रही थी…..अभिषेक ने मेरी टाँगो को घुटनो से मोड़ कर ऊपर उठाया,और मेरी जाँघो को ज़ोर से पकड़ लाया. फिर उसने एक हाथ से प्राजक्ता के बालों को पकड़ा और उसका सर पीछे खेंचते हुए, अपने लिंग को उसके मूह से बाहर निकल लिया. फिर उसने प्राजक्ता के बालो को पकड़े हुए, उसके फेस को मेरी योनि की तरफ बढ़ा दिया. अगले ही पल उसने प्राजक्ता के बालो को छोड़ कर मेरी टाँगो को पकड़ कर और फैला दिया.
इससे पहले कि मैं कुछ कर पाती, प्राजक्ता ने अपनी जीभ को नॉकदार बनाते हुए, मेरी योनि के छेद पर लगा दिया. मैं जल बिन मछली की तरह तड़प उठी. पर मैं अपने आप को छुड़ा नही पा रही थी. क्योंकि अभिषेक ने मेरी टाँगो को फेला कर ज़ोर से पकड़ रखा था……प्राजक्ता अपनी जीभ मेरी योनि के छेद पर रगड़ रही थी.
सुर्प सुर्प की आवाज़ से ऐसा लग रहा था. जैसे कि वो मेरी योनि से बह रहा सारा पानी पी जाएगी. मेरे आँखे फिर से मस्ती मे बंद हो गयी…..
मैं: अह्ह्ह्ह सोइना आहह ईए ईए क्याअ कर मत करो अह्ह्ह्ह उंह सीयी आह बेटाअ अहह हट जाअ….
मेरी मस्ती का कोई ठिकाना नही था. मेरी कमर अपने आप ही झटके खाने लगी. जिससे मेरी योनि बार बार प्राजक्ता के मूह पर दब जाती, और वो और ज़ोर से मेरी योनि की फांको को मूह में भर कर चूसने लगती…..फिर अभिषेक ने मेरी टाँगो को पकड़ और ऊपर उठा दिया. इतना ऊपर कि, मेरी नितंब बेड से ऊपर उठ गयी…और अगले ही पल प्राजक्ता ने मेरी योनि को चाटते हुए, एक तकिया मेरी नितंब के नीचे लगा दिया. मेरी योनि से निकल रहा पानी, और प्राजक्ता का थूक बहता हुआ मेरी नितंब के छेद की तरफ जा रहा था….
.जैसे ही प्राजक्ता ने मेरी नितंब के नीचे तकिया लगाया. अभिषेक ने मेरी टाँगो को छोड़ दिया. नीचे तकिया होने के कारण मेरी नितंब अब कुछ ज़यादा ही ऊपर उठ चुकी थी…….