• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery लेखक-प्रेम गुरु की सेक्सी कहानियाँ

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
तीन पत्ती गुलाब

गौरी हमारी घरेलू नौकरानी गुलाबो की तीसरे नंबर की बेटी है। उम्र करीब 18 वर्ष, दरमियाना कद, घुंघराले बाल, गोरा रंग, मोटी मोटी काली आँखें, गोल चेहरा, सुराहीदार गर्दन, चिकनी लंबी बांहें, शहद भरी पंखुड़ियों जैसे एक जोड़ी होंठ और सख्त कसे हुए दो सिंदूरी आम।

हुस्न के मामले में तो जैसे भगवान ने उसे अपने हाथों से फुरसत में ही तराशा होगा और लगता है उसके लिए ख़ूबसूरती के खजाने के सारे ताले तोड़ डाले होंगे। उसकी मोटी-मोटी काली नरगिसी आँखें देखकर तो कोई भी दीवाना हो जाए और गलियों में गाता फिरे

“इन आँखों की मस्ती के दीवाने हज़ारों हैं।”

अगर आपने ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में भिड़े की लौंडिया सोनू देखी हो तो आपको गौरी की खूबसूरती का अंदाज़ा हो जाएगा। गोल चेहरा और गोरे गालों पर पड़ने वाले डिंपल देख कर तो दिल यही चाहेगा कि लंड को तो बस उसके मुखश्री में ही डाल दिया जाए।

उसकी सबसे बड़ी दौलत है उसकी एक जोड़ी पतली मखमली केले के तने जैसी सुतवाँ टांगें और 23-24 इंच की पतली कमर के नीचे दो गोल खरबूजे जैसे चिकने तराशे हुए थिरकते नितम्ब। या खुदा! अगर शोले वाला गब्बर इन्हें देख लेता तो बस यही कहता

‘ये गांड मुझे दे दे गौरी!’

मेरा दावा है अगर वो जीन पैंट और टॉप पहनकर सड़क पर निकल जाए तो लोग गश खाकर गिर पड़ें। उसकी ठोड़ी पर बना वो छोटा सा तिल तो किसी गाँव की गौरी की याद ताज़ा करवा देता है। ऊपर से नीचे तक बस कयामत! वाह … खुदा कसम क्या साँचे में ढला मुजसम्मा तराशा है? कोई भी बस एक निगाह भर देख ले तो या अल्लाह की जगह ईलू ईलू कर उठे।

पिछले 2-3 सालों में मैंने पलक (तीसरी कसम) को भुलाने की बहुत कोशिश की थी पर गौरी को देखकर फिर से पलक बार-बार मेरे दिल-ओ-दिमाग में दस्तक सी दिए जाती रहती है। पलक के जाने के बाद मैंने कसम खाई थी कि अब किसी नादान, नटखट, चुलबुली, अबोध, कमसिन, परी जैसी मासूम लड़की से प्रेम नहीं करूंगा। पर लगता है गौरी तो मेरी इस कसम को तुड़वाकर ही दम लेगी। मैं क्या करूँ उसके कसे हुए नितम्ब देखकर तो कोई भी अपना ईमान और तौबा दोनों ही तोड़ डाले, मेरी क्या बिसात है। हे लिंगदेव! अब तो बस तेरा ही आसरा है।

गुलाबो आजकल बीमार रहती है। उसकी जगह गौरी को काम पर आते हुए अभी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं। गौरी सुबह जल्दी काम पर आ जाती है और दिन में सारा काम करती है और फिर शाम को ही अपने घर वापस जाती है।

इन 5-7 दिनों में वह मधुर से इस तरह घुल मिल गयी है जैसे वर्षों की जान-पहचान हो। उसके आने से मधुर को बहुत आराम हो गया है। उसने रसोई, बर्तन, कपड़े, सफाई आदि सारा काम सलीके से संभाल लिया है।

मेरे पुराने पाठक तो जानते हैं कि मधुर स्कूल में पढ़ाती भी है पर अभी गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही हैं; बस थोड़े दिनों में स्कूल शुरू हो जाएंगे। आजकल उसके सिर पर घर की सफाई का फितूर चढ़ा है इसलिए सारे दिन गौरी के साथ लगी ही रहती है। गौरी 5-4 क्लास तक स्कूल गई है बाद में उसने पढ़ाई छोड़ दी। मधुर उसे आजकल शामम को पढ़ाती भी है। वैसे मधुर शाम को बच्चों की ट्यूशन करती थी पर आजकल उसने बच्चों की ट्यूशन करना बंद कर रखा है।

गौरी का हमारे यहाँ आने का भी एक दिलचस्प किस्सा है। मैंने गौरी को पहले कभी देखा नहीं था। पता नहीं गुलाबो ने इस हीरे की कणि को इतने दिनों तक कहाँ छुपाकर रखा था।

मधुर ने बताया था कि गौरी अपनी मौसी के यहाँ फैज़ाबाद में रहती थी. अब 6-8 महीने पहले ही कालू (गुलाबो का बड़ा बेटा) की शादी में यहाँ आई थी और उसके बाद घर वालों ने उसे वापस नहीं भेजा।

मधुर कुछ बातें जानबूझकर भी छिपा जाती है। असली कारण मुझे बाद में पता चला था। दरअसल उसकी मौसी का लड़का गौरी के ऊपर लट्टू हो गया था और वह किसी भी तरह गौरी को रग़ड़ देना चाहता था।

भई सच ही है इतने खूबसूरत खजाने के लिए तो सभी की जीभ और लंड दोनों की लार टपकने लगें उस बेचारे की क्या गलती है। रही सही कसर गौरी के बाप ने पूरी कर डाली थी। कालू की शादी के बाद जैसे नंदू (गुलाबो का पति) पर तो नई जवानी ही चढ़ आई थी।

गुलाबो आजकल बीमार रहती है और पति की रोज-रोज की शारीरिक सम्बन्धों की माँग पूरी नहीं कर पाती तो वह यहाँ वहाँ मुँह मारता फिरता है। इसी चक्कर में उसने दारू के नशे में एक रात गौरी को ही पकड़ लिया था। बेचारी गुलाबो ने किसी तरह उसे छुड़ाया था।

जब गुलाबो ने मधुर को सारी बातें बताई तो मधुर ने इसे हमारे यहाँ रख लेने का निश्चय कर लिया। खैर कारण जो भी रहा हो मेरे लिए तो जैसे जीने का नया मक़सद ही मिल गया था।

हमारे सामने वाले घर में जहाँ पहले

अभी ना जाओ चोदकर

हुई चौड़ी चने के खेत में

वाली नीरू बेन रहती थी, आजकल नये किरायेदार आए हैं। बंगाली परिवार है और घर में फकत 3 जीव हैं। पति पत्नी और एक लड़की। आदमी का नाम सुजोय बनर्जी है जो किसी सरकारी दफ्तर में काम करता है। वह खुद तो मरियल सा है पर संजया बनर्जी उर्फ संजीवनी बूटी तो पटाका नहीं पूरा एटम बम है।

वैसे भी बंगाली औरतों की आँखें और बाल बहुत ही खूबसूरत होते हैं। साँवरी देह में नरगिसी आँखें विधाता बंग सुंदरी को ही देता है। पतली कमर, गोल कसे हुए नितम्ब और गहरी नाभि का छेद तो मृत्यु शैया पर पड़े आदमी को भी संजीवनी दे दे।

उम्र कोई 40-42 के लपेटे में होगी पर दिखने में 35-36 से ज्यादा नहीं लगती। सुडौल बदन की मल्लिका, गदराया सा बदन देखते ही मन करे किसी मंजरी (लता) की तरह उससे लिपट जाए। कभी नाभि दर्शना साड़ी में, कभी जीन पैंट और टॉप में कभी ट्रैक सूट में पूरे मोहल्ले में छमक-छल्लो बनी फिरती है। इसलिए लौंडे लपाड़े उसके आगे पीछे घूमते रहते हैं।

वो शायद किसी प्राइवेट कंपनी में जॉब भी करती है और सुबह शाम कई बार शॉर्ट्स में या ट्रैक सूट में अपनी लड़की सुहाना या झबरे बालों वाले कुत्ते के साथ पार्क में घूमने जाती है।

मधुर ने भी एक दो बार इसका जिक्र तो जरूर किया था पर मैंने उस वक़्त ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। वैसे भी मधुर उसे कम ही पसंद करती है. कारण आप अच्छी तरह समझ सकते हैं।

कल सुबह-सुबह मैंने उसे सुहाना के साथ हाथ में टेनिस रॅकेट पकड़े स्टेडियम ग्राउंड जाते देखा था। आप को बता दूँ कि मैं भी टेनिस का बहुत अच्छा खिलाड़ी रहा हूँ. पर सिमरन (काली टोपी लाल रुमाल) के जाने के बाद मैंने टेनिस खेलना बंद कर दिया था। पर सोचता हूँ टेनिस क्लब फिर से ज्वाइन कर लूँ। काश … मैं फिर से 18 साल का लड़का बन जाऊं फिर तो माँ और बेटी दोनों के साथ टेनिस मैच खेल लूं, पर ऐसा कहाँ सम्भव है?

ओह … मैं इस फुलझड़ी के बारे में तो बताना ही भूल गया … यह तो बस कयामत बनने ही वाली है। पूरी टॉम बॉय लोलिता लगती है। हाय … मेरी सिमरन तुम मुझे बहुत याद आती हो। मोटी काली आँखें जैसे कोई जहर बुझी कटार हों।

नाइकी की टोपी और स्पोर्ट्स शूज पहने जब वो उछलते हुए से चलती है तो उसकी पोनी टेल घोड़ी की पूँछ की तरह हिलती रहती है।
 
उसके गोल गोल नितम्ब और लंबी मखमली जांघें तो अभी से बिजलियाँ गिरा रही हैं। इसके छोटे-छोटे नीम्बू तो टेनिस की बॉल से थोड़े ही छोटे लगते हैं। जब ये नीम्बू अमृत-कलश बनेंगे तो क्या कयामत आएगी इसका अंदाज़ा अभी से लगाया जा सकता है।

कभी स्कूल जाते समय वैन में चढ़ते हुए स्कर्ट के नीचे से झलकती उसकी मखमली जांघें, कभी ट्यूशन पर जाते समय छाती से चिपकाई किताबों के बोझ से दबे उसके खूबसूरत चीकू, कभी बालकनी में थोड़ी झुककर अपने फ्रेंड्स से बातें करते हुए दिखते उसके नन्हे परिंदे, कभी टेनिस के बल्ले को हाथ से गोल गोल घुमाते समय दिखती उसकी मखमली रोम विहीन स्निग्ध त्वचा वाली कांख, कभी जूतों के फीते बांधते समय दिखती उसकी जांघों के बीच फंसी कच्छी और कभी बाइसिकल चलाते समय झलकती उसकी पैंटी …

देखकर तो बस यही मन करता है काश वक़्त थम जाए और मैं बस सुहाना को जिंदगी भर ऐसे ही कुलांचें भरते, गली में इक्कड़-दुक्कड़, छुपम-छुपाई या लंगड़ी घोड़ी खेलते देखता ही रहूँ।

गुलाबी और हरे रंग की कैपरी में ढकी उसकी जांघें, नितम्ब, पिक्की और चीकू … उफ्फ … कयामत जैसे चार कदम दूर खड़ी हो। याल्लाह … इसकी खूबसूरत पिक्की (बुर) पर तो अभी बाल भी नहीं आए होंगे। मोटे-मोटे पपोटों वाली गंजी पिक्की की पतली झिर्री पर जीभ फिराने का मज़ा तो किसी किस्मत के सिकंदर को ही मिलेगा।

इसे देखकर तो सब कुछ भूल जाने का मन करता है। सुहाना नाम की इस कमसिन फितनाकार कयामत को देखकर किसी दिन मेरा दिल धड़कना भूल गया तो सारा इल्ज़ाम इसी पर आएगा।

पिछले 6 महीनों से मधुर को नयी धुन चढ़ी है। वो अब एक और बच्चा पैदा करना चाहती है। मेरे पुराने पाठक तो जानते हैं हमारा एक बेटा है जिसे मीनल अपने साथ कॅनेडा ले गयी है। (याद करें ‘सावन जो आग लगाए’ और ‘मोसे छल किए जा’ वाली मीनल)

मैंने मधुर को कोई बच्चा गोद लेने के बारे में कई बार समझाया है पर वो है कि मानती ही नहीं। IVF, IUI, सैरोगेसी, कृत्रिम गर्भाधान जैसी बहुत सी नयी विधाएं (तकनीकें) हैं जिनके ज़रिए मातृत्व सुख मिल सकता है।

आप तो जानते हैं कि डॉक्टरों ने मिक्कू के जन्म के समय ही बता दिया था अब मधुर फिर से कभी माँ नहीं बन पाएगी पर मधुर को पक्का यकीन है कि वह प्राकृतिक रूप से गर्भवती जरूर होगी। इस चक्कर में हम लोग लगभग रोज ही रात को भरपूर चुदाई का मज़ा लेते हैं और वो भी मेरी मनपसंद डॉगी स्टाइल में। वीर्यपात होने के बाद भी मधुर देर तक उसी मुद्रा में नितंबों को ऊपर किए रहती है ताकि वीर्य उसके गर्भाशय तक जल्दी पहुँच जाए। इस आसन में उसे देखकर बार-बार मेरा मन उसकी खूबसूरत गांड का मज़ा लेने को करता है पर इसके लिए तो जैसे उसने कसम खा ली है कि जब तक वह गर्भवती नहीं हो जाती गांडबाजी बिल्कुल बंद।

पता नहीं वो कहाँ-कहाँ से देशी नुस्खे और टोटके ढूंढकर लाती है और मुझे कभी शहद के साथ या कभी दूध के साथ खिलाती पिलाती ही रहती है। इसके अलावा मुझे शुक्र और शनि के व्रत भी करवाती है और रोज खुद भी पूजा पाठ के चक्करों में पड़ी रहती है और मुझे भी उलझाए रखती है। हर सोमवार को लिंग देव के दर्शन करने तो जाना ही पड़ता है। आप तो जानते ही हैं कि मेरा इन सब बातों में कितना यकीन होगा।

खैर कोई बात नहीं … आप भी लिंग देव से जरूर प्रार्थना करें कि मधुर की मनोकामना जल्दी से जल्दी पूरी हो जाए क्योंकि इसमें हम सभी का फायदा है। उसे एक और चश्मे चिराग (पुत्र-रत्न) की प्राप्ति होगी और मुझे उसकी खूबसूरत गांड फिर से मारने को मिलेगी और आपको जब मैं गांडबाजी का किस्सा सुनाऊंगा तो आप भी जरूर इसे आज़माने की कोशिश करेंगे और … और … अब आप इतने भी अनाड़ी नहीं है कि सब कुछ ही बताना पड़े!

मधुर की 3-4 दिन से माहवारी चल रही है इसलिए चोदन-भोजन का तो सवाल ही नहीं उठता, मेरे पास अब सिवाय मुट्ठ मारने के कोई रास्ता नहीं बचा है। मेरे जेहन में तो बस गौरी और सुहाना ही बसी रहती हैं। काश कहीं ऐसा हो जाए कि संजीवनी बूटी खुद इस फुलझड़ी को लेकर हमारे घर आ जाए और मधुर से कहे कि इसे भी थोड़ा ट्यूशन पढ़ा दिया कीजिए। मधुर ने तो आजकल वैसे ट्यूशन पढ़ाना बंद कर रखा है पर यदि मुझे मौका मिल जाए तो मैं तो सारा दिन इसे ट्यूशन के अलावा और भी बहुत कुछ पढ़ाता रहूँ।

मेरा तो मन करता है इस साली नौकरी को लात मारकर किसी लड़कियों के स्कूल में पढ़ाना ही शुरू कर दूँ और दिन भर सुहाना और मिक्की जैसी कमसिन कलियों को बस निहारता ही रहूँ। कसम खुदा की बेमोल बिक जाऊँ इस फितनाकार फुलझड़ी के लिए। ओह … पर यह कहाँ सम्भव है.

खैर चलो लिंग देव ने गौरी को तो भेज ही दिया है। सुहाना नहीं तो गौरी ही सही।

गौरी के साथ मेरा अभी सीधा संवाद नहीं हुआ है। वैसे भी मैंने उसे बोलते हुए बहुत कम देखा और सुना है। सच कहूँ तो मैंने गौरी को ढंग से (प्रेम गुरु की नज़र से) अभी देखा ही कहाँ है? एक दो बार झुककर झाड़ू लगाते हुए उसके कसे हुए उरोजों की हल्की सी झलक ही दिखी है। पता नहीं कब इन सिंदूरी आमों को देखने, छूने, मसलने और चूसने का मौका मिलेगा?

मेरा अंदाज़ा है उसकी बुर पर हल्के-हल्के बालों का पहरा होगा। गुलाब की पंखुड़ियों जैसे पतले नाजुक पपोटे और गहरे लाल रंग का चीरा तो कहर बरपा होगा। पता नहीं उसके दीदार कब होंगे?

हे भगवान! वो जब सु-सु करती होगी तो कितनी पतली धार निकलती होगी और उसका मधुर संगीत तो पूरे बाथरूम में गूंज उठता होगा।

अनारकली (मेरी अनारकली) और अंगूर (अंगूर का दाना) को तो मैंने बाथरूम में सु-सु करते कई बार बिना किसी हील-हुज्जत (झंझट) देख लिया था पर गौरी की पिक्की को देखने का सौभाग्य पता नहीं मेरे नसीब में है या नहीं अभी क्या कहा जा सकता है?

अनार और अंगूर दोनों को ही मुझे अपने प्रेमजाल में फंसा लेने में बहुत ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी थी पर इस गौरी नाम की चंचल हिरनी को काबू में करना वाकई मुश्किल काम लग रहा है। दिमाग ने तो काम करना ही जैसे बंद कर दिया है। क्या किया जाए … अपना तो यही फलसफा है.

कोशिश आखरी सांस तक करनी चाहिये यारो …

मिल गई तो चूत और नहीं मिली तो उसकी माँ की चूत।

मैने अपने सभी साथियों (लंड, आँखें, होंठ-मुँह-जीभ, कान-नाक, हाथ, दिल और दिमाग) की आपातकालीन बैठक (एमर्जेन्सी मीटिंग) बुलाई.

लंड तो 4-5 दिन से जैसे अकड़ा ही बैठा है। मेरी सुनता ही कहाँ है? उसने तो सबसे पहले चेतावनी सी देते हुए कह दिया है कि मुझे तो बस गौरी की चूत और गांड से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।

आँखों ने कहा हमें तो बस उसके गोल सिंदूरी आमों और मखमली बुर का दीदार जल्दी से जल्दी करवा दो।

होंठों ने कहा कि उन्हें तो बस उसके भीगे होंठों को चूमने का एक बार मौका दिलवा दो। हाए … उसके ऊपर और नीचे के होंठों का रस कितना मधुर होगा उसे चूसकर तो आदमी का यह मनुष्य जीवन ही धन्य हो जाए। सच कहूँ तो मेरे होंठ तो उसके गालों, उरोजों और बुर को चूम लेने को इतने बेताब हैं कि बार-बार मेरी जीभ अपने आप मेरे होंठों पर आ जाती है।

कान कहते हैं कि उन्हें तो उसकी बुर का मधुर संगीत सुनना है।

नाक कहती है गुरु उसके कमसिन बदन से आती खुशबू तो दूर तक महकती है जब वो तुम्हारे आगोश में आएगी तो उसके बदन से निकलने वाली खुशबू तो तुम्हें अपना दीवाना ही बना देगी, जरा सोचो।

हाथ और अंगुलियाँ कहती हैं गुरु … एक बार उसे अपनी बांहों में जकड़ लो, साली कबूतरी की तरह फड़फड़ा कर अपने आप समर्पण कर देगी। सोचो उसके गालों पर, नाभि के छेद पर, पेट और पेडू पर, नितंबों पर, फूली हुई हल्के बालों वाली बुर और गांड के छेद पर हाथ और अंगुलियाँ फिराने में दिल और दिमाग को कितना सुकून और लज्जत मिलेगी तुम्हें पता ही नहीं?

दिल तो जैसे मुँह फुलाए बैठा है, मेरी सुनता ही नहीं है। उसने तो मुझे जैसे धमकी ही दे डाली है कि अगर गौरी नहीं मिली तो वो किसी दिन धड़कना ही बंद कर देगा। तुम तो अपने आप को प्रेमगुरु कहते हो, पता नहीं ऐसी कितनी लौंडियों को अपने प्रेमजाल में उलझाया है क्यों नहीं कुछ उपक्रम करते? प्लीज कोई तिगड़म जल्दी भिड़ाओ ना!

और दिमाग का तो जैसे दही ही बन गया है। कुछ सूझता ही नहीं। कहता है गौरी नाम की इस गुलाब की तीसरी पत्ती को तोड़ना मरोड़ना बिल्कुल नहीं … बंद आँखों से बस धीमी-धीमी सुलगती इस आँच को अपनी अंगुलियों, अपने होंठों, अपनी जीभ और अपने हाथों से महसूस करो। उसके कुँवारे जिस्म से आती मदहोश कर देने वाली खुशबू को सूंघ कर देखो।

पर खबरदार! जल्दबाजी बिल्कुल नहीं! कहीं ऐसा न हो यह चंचल हिरनी गीली मछली की तरह तुम्हारे हाथों से फिसल जाए और फिर तुम जिन्दगी भर के लिए अपना लंड हाथ में लिए आँसू बहाते फिरो। बाकी तुम्हारी मर्ज़ी … ये लंड तो हमेशा बेहूदा हरकतें करता ही रहेगा। अभी इसे बुर चाहिए बाद में गांड माँगेगा और फिर कुछ और। तुम्हें ऐसा फंसाएगा कि कहीं के नहीं रहोगे। इस चूत के लोभी और गांड के रसिया लंड की बातों में बिल्कुल नहीं आना!!!

मेरे प्रिय पाठको और पाठिकाओ। अब आप बताएँ मैं क्या करूँ? दिल और दिमाग दोनों अलग अलग खेमे में खड़े हैं किसकी सुनूँ? किसी ने क्या खूब कहा है कि आदमी का हौसला और औरत का भोसड़ा दुनिया में कुछ भी करवा सकता है। चलो एक शेर मुलाहिजा फरमाएँ :

जो चुदाई की तमन्ना दिल में रखते हैं उन्हें चूतें जरूर मिलती हैं।

अगर आपके हिलाने में सच्चाई है तो उसे हिचकी जरूर आएगी।

हे लिंग देव … पिछले 6 महीने से रोज सोमवार को सर्दियों में सुबह सुबह ठंडे पानी से नहाकर 2 किलोमीटर पैदल चलकर तुम्हारी मूर्ति पर दूध-जल चढ़ाने का कुछ तो सिला (प्रतिफल) मिलना ही चाहिए ना? बस एक बार इसकी गांड मारने को मिल जाए तो मैं जिंदगी में फिर कभी कुछ नहीं माँगूँगा। लगता है मुझे अब यह चौथी कसम खानी ही पड़ेगी.
 
आज पूरा दिन गौरी के बारे में सोचते ही बीत गया। उसके चक्कर में मैं आज दफ्तर से थोड़ा जल्दी घर आया था। पर गौरी नज़र नहीं आ रही थी शायद वह काम निपटाकर चली गयी थी। मधुर ने आज भूरे रंग की पैंट और टॉप पहना था। मधुर के नितम्ब और कमर इन कपड़ों में बहुत कातिलाना लगते हैं।

पैंट में कसे हुए उसके नितम्ब ऐसे लगते हैं जैसे वो कोई 18-20 साल की कॉलेज गर्ल हो। नितंबों के बीच की विभाजक रेखा ने तो आज भी मुझे अपने ऊपर लट्टू बना रखा है। सच कहूँ तो हमारे सुखी और सफल दाम्पत्य जीवन का असली राज ही यही है कि वो मुझे सेक्स के मामले में हर तरह से संतुष्ट कर देती है और किसी भी क्रिया के लिए मना नहीं करती। आप मेरी हालत का अंदाज़ा बखूबी लगा सकते हैं कि आज उसकी गांड मारने की मेरी कितनी प्रबल इच्छा हो रही थी।

मैं यह सोच रहा था अगर गौरी ऐसे कपड़े पहन ले तो कैसी लगेगी। उसकी बुर और नितंबों का जोग्राफिया तो उस कसी हुयी पैंट में साफ नज़र आ जाएगा। रात में बिस्तर पर जब मैंने मधुर को बांहों में भरना चाहा तो उसने चुदाई के लिए मना कर दिया बहाना वही माहवारी के चौथे दिन का। भेन चुद गयी इस चौथे दिन की। एक बार तो मन किया कि सुहाना और गौरी को याद करके मुट्ठ ही मार लूँ पर बाद मैंने अपना इरादा बदल दिया। सारी रात गौरी के हसीन ख्वाबों में ही बीत गई।

शादी के बाद शुरूवाती दिनों में कई बार जब मधुर सुबह-सुबह रसोई घर में काम कर रही होती थी तो मैं चुपके से वहाँ जाकर उसे पीछे से बांहों में दबोच लिया करता था। थोड़ी देर कुनमुनाती थी और फिर हल्की सी ना-नुकर या उलाहने के बाद अहसान सा जताते हुए रसोई में ही चुदाई के लिए मान जाया करती थी। और फिर रसोई के शेल्फ पर उसे थोड़ा सा झुकाकर पीछे से उसकी चूत में लंड पेलने की लज्जत तो आज भी मुझे रोमांच से भर देती है। आप भी कभी इसे आजमाकर जरूर देखें पूरा दिन मधुर स्मृतियों और कल्पनाओं में ही बीत जाएगा।

अभी भी वह सुबह थोड़ा जल्दी उठ जाती है और नित्यक्रिया से निपटकर पहले पूजा पाठ करती है और फिर चाय बनाकर मुझे जगाती है।

पर आज मेरी आँख थोड़ी जल्दी खुल गयी थी। मैं बाथरूम से ब्रश करके जब बाहर आया तो देखा मधुर रसोई में ही है। शायद वह नहा चुकी थी और चाय बना रही थी। पजामे में कसे हुए उसके नितम्ब साफ दिख रहे थे। शायद उसने अंदर पैंटी नहीं पहनी थी। दोनों नितंबों के बीच की खाई तो जैसे मुझे उसे अपनी बांहों में दबोच लेने को उकसा ही रही थी।

मुझे अपनी शादी के शुरू के दिन याद आ गये। आज मैं एक बार फिर से उन्हीं लम्हों को दोहरा लेना चाहता था। मधुर अपने ध्यान में मस्त हुई कुछ गुनगुना रही थी। मैंने चुपके से उसके पीछे जाकर एक हाथ से उसके एक उरोज को कसकर पकड़ा और दूसरे हाथ से उसकी बुर को पकड़कर दोनों अंगों को जोर से भींच लिया। मेरा लंड उसके कसे नितंबों की खाई में जा टकराया।

मैंने आँखें बंद करके अपना सिर उसके कंधे पर रखते हुए अपने होंठ उसके गालों से लगा दिए। मेरा अंदाज़ा था मधुर अपने दोनों हाथ पीछे करके मुझे अपने आप से चिपका लेगी और अपने चिर-परिचित अंदाज़ में उलाहना देते हुए कहेगी … हटो परे!

“उईईई ईईईई … ” अचानक एक हल्की सी चीख उसके मुँह से निकल गयी और हाथ में पकड़ा बर्तन नीचे गिर पड़ा।

“ओहो … छ … छोड़ो मुझे … त्या तल लहे हो?” उसने अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करते हुए मुझे एक धक्का सा दिया।

मैं इस अप्रत्याशित आवाज़ को सुनकर हड़बड़ा सा गया। आज मधुर को क्या हो गया है? वो मेरी पकड़ से निकल गई और अपनी कुर्ती और पाजामे को ठीक करने लगी। उसका चेहरा सुर्ख हो गया था और साँसें लोहार की धोंकनी की तरह चलने लगी थी।

ओह … यह तो मधुर नहीं गौरी थी। लग गए लौड़े … !!! और फिर मुझे तो जैसे काठ ही मार गया।

“ओह … आ … आ … ई अम सॉरी … म … म … मुझे लगा … मेरा मतलब है … मैंने सोचा म … मधुर होगी। ओह … स … सॉरी … आ … ई आम रिअली सॉरी, प्लीज!” मैं हकलाता सा बोला। मुझे खुद पता नहीं मैं क्या बोल रहा था। इस अप्रत्याशित स्थिति के लिए मैं कतई तैयार नहीं था। बहुत बड़ी गलती हो गयी थी। हे भगवान … ! ये क्या हो गया??? अगर मधुर को पता चल गया या उसकी चींख सुनकर वो अभी आ गयी तो क्या होगा? सोचकर ही मुझे तो लकवा सा मार गया।

“वो … वो … वो मधु कहाँ है?” बमुश्किल मेरे मुँह से निकाला।

“दीदी सामने पाल्क में गाय तो लोटी डालने गयी है.” उसने मरियल सी आवाज़ में जवाब दिया। उसकी मुंडी झुकी हुई थी और एक हाथ से वह अपनी छाती को सहला रही थी।

“ग … गौरी … प्लीज … मुझे माफ करना … मुझसे अनजाने में गलती लग गयी प्लीज, आई अम सॉरी.” मैं मिमियाया।

“आप बाहल जातल बैठो मैं चाय लाती हूँ.”

“ओह … हाँ” कह कर मैं कमरे में आ गया। मैंने अपना सिर पकड़ लिया।

अब मैं आगे का सीन सोच रहा था।

हे भगवान … 2-4 मिनट में जब मधुर आएगी तो क्या होगा? पता नहीं गौरी क्या और किस प्रकार इस घटना का जिक्र मधुर से करेगी और पता नहीं मधुर क्या समझेगी और क्या प्रतिक्रिया करेगी? आज तो यकीनन लौड़े लग ही गए समझो। हे लिंग देव! रक्षा करना प्रभु … अब तो बस एक तेरा ही आसरा है। मैं इस बार सच्चे मन से तेरा सोमवार का व्रत रखूँगा और दिनभर कुछ नहीं खाऊँगा … कसम से … बस इस बार इज्जत बचा ले मेरे मौला … मेरे दीन दयाल … !!!

गौरी बिना बोले कमरे में चाय रख गयी। उसने अपनी नज़रें झुका रखी थी। मेरी भी अब उस से आँख मिलाने की हिम्मत कहाँ थी। मैं चाय लेकर बाथरूम में चला आया। इस स्थिति में मैं मधुर का सीधा सामना नहीं कर सकता था। चाय पीने की तो बिल्कुल भी इच्छा नहीं रह गयी थी, मैंने उसे टॉयलेट के हवाले किया और फ्लश चला दिया।

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैं आगे के हालात के बारे में सोचने लगा। क्या किया जा सकता है? आगे आने वाली अनचाही स्थिति का सामना कैसे किया जाए? दिमाग में कुछ नहीं सूझ रहा था। अलबत्ता मैंने अपने कान बाहर ही लगाए रखे।

तभी मुझे मधुर के कदमों की हल्की सी आहट सुनाई दी- साहब को चाय दे दी क्या?

“हओ …” यह गौरी की आवाज़ थी। वा ‘हाँ’ को ‘हओ’ बोलती है।

“आपते लिए बनाऊँ?”

“ना … मेरी इच्छा नहीं है, अभी तू पी ले.” मधुर ने लापरवाह अंदाज़ में कहा।

“अच्छा सुन! आज मार्केट चलेंगे … काम जल्दी से निपटा ले तेरे लिए कुछ ढंग के कपड़े और किताबें आदि लाने हैं.”

“हओ”

हे लिंग देव तेरा लाख-लाख शुक्र है। लगता है अभी तो जान बच गयी। मैंने भगवान का धन्यवाद किया। हालांकि मैं यह जरूर सोच रहा था अगर बाद में गौरी ने कुछ बता दिया तो क्या होगा? ओहो … गोली मारो … बाद की बाद में देखेंगे फिलहाल तो आने वाला तूफान टल गया है। दिन में अगर कुछ अन्यथा हुआ भी तो कोई बात नहीं, मैं सिर दर्द का बहाना बना लूँगा या फिर ज्यादा काम का बहाना लगाकर आज दफ्तर से देरी से आऊँगा।

मैं भी बेकार में ज्यादा ही डर रहा हूँ … मैंने शॉवर खोलकर उसके नीचे सिर लगा दिया।

आज सुबह के घटनाक्रम के बाद पूरा दिन किसी अनहोनी की आशंका में ही बीता। दिनभर यही डर लगा रहा की अभी मधुर का फोन आया, अभी फोन आया। शाम को मैं थोड़ा देरी से घर पहुँचा। मैं आज मधुर की पसंदीदा आइसक्रीम और पिज़्जा लेकर आया था।

मैंने डरते डरते घर में कदम रखे। क्या पता कोई नयी आफ़त मेरा इंतज़ार कर रही हो? मुझे लगा सब कुछ नॉर्मल सा है, मैं बेकार ही चिंता में मरा जा रहा हूँ।

गौरी शायद काम निपटाकर अपने घर चली गयी थी। मधुर भी खासे रंगीन मूड में लग रही थी। लगता है लिंग देव ने मेरी सुन ली।

कई बार मधुर जब अच्छे मूड में होती है तो अपने बालों की दो चोटियाँ बनाती है। और फिर उस रात हमारा प्रेमयुद्ध (मधुर को चुदाई, लंड, चूत और गांड जैसे जैसे शब्द पसंद नहीं हैं) बहुत देर रात तक चलता है। रात को अक्सर वह नाइटी ही पहनती है पर आज उसने सफेद रंग का कमीज़-पाजामा पहना था जिन पर काली-काली बिंदियाँ बनी थी। आज उसने दो चोटियाँ भी बनाई थी, मुझे पक्का यकीन था आज मधुर गांड देने के लिए जरूर राज़ी हो जाएगी।

पिछले 4-5 दिन से उसे माहवारी आई हुई थी और आप तो जानते ही हैं इन दिनों में मधुर चुदाई तो छोड़ो मुझे अपने आप को छूने भी नहीं देती।

आज तो खैर 5वाँ दिन … मेरा मतलब रात थी।

रात के कोई दस बजे होंगे। बार-बार सुबह की घटना मेरे दिमाग में घूम रही थी। दिमाग जैसे कह रहा था “मैने चेताया था ना? जल्दबाजी में कोई पंगा मत लेना पर साला लंड तो किसी की मानता नहीं? लग गये ना लौड़े?”

मैं अपने नाराज लेकिन खड़े लंड को पाजामे के ऊपर से ही सहला रहा था। मधुर काम निपटाकर कमरे में आई और ड्रेसिंग टेबल के शीशे के सामने खड़ी होकर अपने आप को देखने लगी। मेरा पूरा ध्यान उसकी इन हरकतों पर ही लगा था। ऐसे मौकों पर मैं अक्सर उसे अपनी बांहों में दबोच लिया करता हूँ पर आज मेरी ऐसा करने के हिम्मत नहीं हो रही थी। मैं आज पूरी तसल्ली कर लेना चाहता था कि आज सुबह वाली बात गौरी ने उसे बताई है या नहीं।

“प्रेम?”

“हूँ?” मेरा दिल जोर से धड़का।

“मैं कुछ मोटी नहीं होती जा रही?” उसने अपना कुर्ता थोड़ा सा ऊपर उठाकर अपनी कमर की चमड़ी को अपने अंगूठे और तर्जनी अंगुली के बीच दबाकर देखते हुए पूछा।

आप तो जानते ही हैं कि ये सब औरतों के नाज़-ओ-अंदाज़ और नखरे होते हैं। उन्हें अपनी तारीफ बहुत पसंद होती है। मैं आज भला उसकी तारीफ क्योंकर नहीं करता- मेरी जान, तुम बहुत खूबसूरत लगती हो। कहाँ मोटी हो रही हो मुझे तो लगता है तुम कमजोर होती जा रही हो, दिनभर काम में लगी रहती हो अपना ध्यान बिल्कुल नहीं रखती!

“हटो परे … झूठे कहीं के!” उसने अपने बालों की जानबूझ कर छोड़ी गयी पतली सी आवारा लट को पीछे करते हुए अपने चिर-परिचित अंदाज़ में कहा।

“सच … कहता हूँ … तुम आज भी 20-22 की कॉलेज गर्ल ही लगती हो.” मैंने मस्का लगाया।

“देखो ना कितनी चर्बी चढ़ गयी है.” उसने अपनी कमर को दोनों हाथों से घेरा बनाकर पकड़ते हुए मेरी ओर देखा।

वाह … ! क्या कातिलाना अंदाज़ था।

अब तो मेरा उठना और उसे बांहों में भर लेना लाज़मी बन गया था। मैं पलंग से उछला और जाकर पीछे से उसे बांहों में भर लिया। मेरा खड़ा लंड उसके नितंबों से जा लगा और एक हाथ से मैंने उसका एक उरोज और दूसरे हाथ से उसकी मुनिया को पकड़कर धीरे धीरे दबाना चालू कर दिया।

“ओहो … रुको तो सही … लाइट तो बंद करने दो.”

“जानेमन अब रूकना उकना नहीं … जल्दी से मेरे दुश्मनों को परे हटाओ.” मैंने उसके पाजामे का नाड़ा खींचते हुए कहा।

“ओहो … प्रेम तुम से तो 3-4 दिन भी नहीं रुका जा सकता? आज मेरा बिल्कुल भी मूड नहीं है, कल करेंगे प्लीज … आज तो 5वाँ दिन ही है.”

“तुम्हारे 5वें दिन की ऐसी की तैसी! आज मैं तुम्हें नहीं छोड़ने वाला!” मैंने उसे बांहों में भरे हुए ही पलंग पर पटक दिया।

इस आपाधापी में वह पेट के बल गिर पड़ी और मैं ठीक उसके ऊपर आ गया।
 
“मेरी जान, तुम क्या जानो कि पिछली चार रातें यानि 96 घंटे और 14 मिनट मैंने कैसे बिताए हैं?”

“हुंह … तुम्हें मेरी कोई परवाह ही नहीं है.”

“मधुर तुम बहुत खूबसूरत हो … मेरी जान … बोलो क्या चाहिए तुम्हें?” मैंने उसके कानो के पास चुंबन लेते हुए कहा।

“हटो … परे झूठे कहीं के?” मधुर ने उलाहना देते हुए से कहा।

“सच में मधुर, तुम्हारे नितम्ब बहुत खूबसूरत हैं.” कहते हुए मैंने उसके कानों की लॉब को अपने होंठों में दबा लिया।

“नो … बिल्कुल नहीं …”

“प्लीज मधुर आज कर लेने दो ना … ? देखो ना पूरे 9 महीने और 17 दिन हो गये हैं। आज पीछे से करने का बहुत मन कर रहा है प्लीज मान जाओ।

मैं उसके ऊपर से थोड़ा सा सरक गया और उसके नितंबों पर हाथ फिराने लगा। मेरा लंड तो पाजामें में जैसे उधम ही मचाने लगा था।

“ओहो … रुको … ना …” मधुर कसमसाने सी लगी।

“क्या हुआ?”

वो पलटकर पीठ के बल हो गयी और फिर बोली “प्रेम … बस एक बार मुझे गर्भवती हो जाने दो फिर चाहे तुम रोज पीछे से कर लिया करना.”

“मधुर! देखो डॉक्टर ने बताया तो है कि …”

वह मेरी बात को बीच में ही काटते हुए बोली- अरे छोड़ो जी … डॉक्टरों को क्या पता … मुझे अपने कान्हाजी और लिंग देव पर पूरा विश्वास है, मेरी मनोकामना जरूर पूरी होगी.”

मैं मन ही मन हंसने लगा। लिंग देव कुछ नहीं करेंगे ये लंड देव जरूर कुछ कर सकता है।

पर मैंने उसे समझाते हुए कहा- मधुर, हम कोई बच्चा गोद भी तो ले सकते हैं?

“नहीं प्रेम, मैं तुम्हारे अंश से ही अपनी कोख भरना चाहती हूँ.”

“आजकल IVF, IUI, सैरोगेसी जैसी बहुत सी तकनीकें और साधन हैं तो फिर ..????”

“नहीं मुझे इस झमेले में नहीं पड़ना … ” मधुर कुछ उदास सी हो गयी थी।

“प्रेम???”

“हाँ”

“बोलो ना मेरी मनोकामना पूरी होगी ना? तुम क्या कहते हो?”

अब मैं क्या बोलता? डॉक्टर्स ने तो साफ मना कर दिया है कि मधुर अब कभी दुबारा माँ नहीं बन सकेगी। पर मैं उसका नाजुक दिल नहीं तोड़ सकता था। पिछली बार उसकी माहवारी 3-4 दिन आगे सरक गयी थी तो वो कितना खुश थी। पर जैसे ही माहवारी आई वो बहुत रोई थी। मैंने उसका मन रखने के लिए तसल्ली देते हुए कहा- हाँ मधुर, कई बार चमत्कार भी हो जाते हैं … हाँ हाँ तुम्हारी मनोकामना जरूर पूरी होगी.

“ओह … थैंक यू!” कहते हुए मधुर ने हाथों से मेरा सिर पकड़कर मेरे होठों को जोर से चूम लिया।

...................
 
अब मैंने उसे फिर से गोद में उठा लिया और बेड रूम में आ कर उसे ड्रेसिंग टेबल के सामने फर्श पर खड़ा कर दिया और मैं बेड पर बैठ गया। सानिया ने पहले तो अपने आप को ड्रेसिंग टेबल के शीशे में देखा और फिर थोड़ा झिझकते हुए पहले तो उसने अपना टॉप उतारा और फिर अपनी पेंट की जिप खोलने लगी।

मेरा लंड तो जैसे क़ुतुब मीनार ही बन गया था।

URL]


सानिया ने बिना किसी हूल हिज्जत के पेंट नीचे घुटनों तक कर दी। रेशम सी कोमल कमनीय काया, पतली कमर, गहरी नाभि और गोल कसे हुए नितम्ब … आह … जैसे हुस्न का खजाना सामने नुमाया हो गया था।

नेट वाली पेंटी में उसकी बुर के फूले हुए पपोटे आज कुछ ज्यादा ही मोटे लग रहे थे। और ब्रा के अन्दर कसी हुयी दो लम्बुतरी नारंगियाँ तो टेनिस की बॉल की तरह लग रही थी।

URL]


“वाह … अप्रतिम … बहुत खूबसूरत … सानू इस ब्रा पेंटी में तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो … ज़रा शीशे में अपने इस अनुपम सौंदर्य के अनमोल खजाने को एक बार देखो तो सही!”

सानिया तो मेरे बोलने से पहले ही रूपगर्विता बन चुकी थी। उसने अपने आप को एक बार शीशे में देखा और फिर शरमाकर अपनी मुंडी नीची कर ली।

अब मैं उठकर उसके पास आ गया। उसकी आँखों में लाल डोरे तैरने लगे थे और साँसें तेज चलने लगी थी। मेरे दिल की धड़कनें भी बहुत तेज हो गई थी और लंड तो उछल-उछल कर बावला ही हो रहा था।

मैं फर्श पर बैठ गया और हाथ बढ़ा कर सानिया के दोनों नितम्बों पर रखते हुए उसे अपनी ओर खींचा। अब तो उसकी बुर ठीक मेरे मुंह के सामने आ गई। उसकी बुर से आने वाली गंध ने तो मुझे और भी कामातुर बना दिया था।

URL]


मैंने एक चुम्बन पेंटी के ऊपर से ही उसकी बुर पर ले लिया। सानिया की एक किलकारी पूरे कमरे में गूँज गई।

“ईईईईई …” सानिया ने मेरे सिर के बालों को अपने हाथों में पकड़ लिया।

“आह … क्या कर रहे हो सर?”

मैंने उसकी बुर पर दो-तीन चुम्बन और लिए और ऊपर होते हुए उसके पेडू और नाभि को चूमते हुए उसके उरोजों, गले और होंठों को चूमता चला गया। सानिया की मीठी सित्कारें निकलने लगी थी।

“सानू मेरी जान … मैं तुम्हारे बिना अधूरा हूँ … जान आओ मुझे एक बार फिर से पूर्ण पुरुष बना दो.”

URL]


अब बेचारी सानू के पास बोलने के लिए ज्यादा क्या बचा था। मैंने उसे सहारा देते हुए उसे बेड पर लेटा दिया और पहले तो उसके पैरों में फंसी जीन पेंट को निकाला और फिर उसकी पेंटी को भी निकाल दिया। और फिर उसकी ब्रा की डोरी को खींच कर उसे भी निकाल दिया। अब मैंने भी अपने कपड़े उतार फेंके।

मैंने तकिये के नीचे से निरोध निकाला और उसे सानिया को पकड़ाते हुए कहा- जान आज तुम इसे अपने हाथों से पहनाओ ना प्लीज?

सानिया पहले तो थोड़ा झिझकी और फिर उसने निरोध को अपने हाथों में लेकर उसे मेरे लंड पर चढ़ा दिया। उसके कोमल हाथों में आते ही मेरा लंड तो उछलने ही लगा और बार-बार उसके हाथों से फिसलने लगा था।

अब मैंने पास में रखी क्रीम निकाल कर अपने लंड पर लगाई और फिर सानिया को अपनी जांघें चौड़ी करने का इशारा किया तो उसने थोड़ा शर्माते हुए अपने जांघें खोल दी पर अपनी बुर पर हाथ रखे रखा।

URL]


सानिया के पपोटे कल की चुदाई के कारण सूज से गए थे और आज तो थोड़े गुलाबी से लगने लगे थे। उसके ऊपर हल्के हल्के घुंघराले बाल तो रेशम से भी ज्यादा मुलायम थे। मुझे लगा अगर सानिया इन बालों को साफ़ कर ले तो बुर को चूसने में और भी ज्यादा मज़ा आ सकता है।

पर यह समय केश कर्तन का नहीं था। मैं एकबार तसल्ली से उसकी चुदाई कर लेना चाहता था।

URL]


अब मैंने सानिया का हाथ उसकी बुर से हटा दिया और उसके पपोटों को चौड़ा करके उसके चीरे के बीच में क्रीम लगाने लगा। जैसे ही मेरी अंगुलियाँ उसके गुलाबी लहसुन पर लगी सानिया तो आह.. ऊंह … करने लगी थी।

उसका चीरा तो कामराज से लबालब भरा दिख रहा था। चीरा अन्दर से इतना सुर्ख (रक्तिम) था कि किसी तरबूज की पतली सी फांक की मानिंद लगाने लगा था। और मदनमणि तो आज किशमिश के दाने की तरह लग रही थी।

मैंने एक चुम्बन उसके ऊपर लिया तो सानिया की मीठी किलकारी ही निकल गई। मुझे लगा उसकी बुर ने पानी छोड़ दिया है।

URL]


और फिर मैंने उसकी जाँघों और पेडू को चूमते हुए उसके उरोजों की घाटी को चूमा तो सानिया कसमसाने सी लगी। फिर मैंने उसे थोड़ा सा करवट के बल करते हुए उसकी पिंडलियों, जाँघों, पीठ और नितम्बों को चूमना शुरू कर दिया।

सानिया का तो सारा ही शरीर रोमांच और उत्तेजना के मारे लरजने सा लगा था। उसके शरीर के सारे रोयें खड़े से हो गए थे।
 
URL]


अब मैंने उसकी पीठ और कन्धों के ऊपर चुम्बन लिया और अपने हाथों को उसकी नितम्बों पर फिराया। रोमांच के मारे सानिया का पूरा शरीर ही लरजने लगा था। अब मैंने दोनों हाथों से उसके नितम्बों की खाई को थोड़ा सा खोला। कसे हुए नितम्ब और उनके बीच छोटा सा सांवले रंग का छेद जैसे मुझे ललचा रहा था।

मैंने पहले तो उस छेद पर अंगुली फिराई और बाद में नीचे होकर एक चुम्बन लेने की कोशिश की तो सानिया एक किलकारी सी मारते हुए जल्दी से पलटकर सीधी हो गई। उसकी साँसें बहुत तेज हो गई थी और आँखें भी लाल सी हो गई थी।

URL]


“सर … कुछ करो … नहीं तो मैं मर जाऊंगी … आह …” उसने अपनी मुट्ठिया जोर से भींच ली।

दोस्तो! अब देरी करना ठीक नहीं था। मैंने अपने लंड को उसकी बुर पर थोड़ा सा घिसा और फिर उसके पपोटों को हाथ के अंगूठे और तर्जनी अंगुली से खोलकर अपेने लंड को उसकी बुर के छेद पर लगा दिया।

अब मैं उसके ऊपर आ गया और जैसे ही मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर लगाए सानिया ने जल्दी से मेरे होंठों को चूमना चालू कर दिया और अपनी कमर उचकाने लगी। शायद उसे मेरे से भी ज्यादा जल्दी लग रही थी।

और फिर मैंने एक धक्के के साथ अपना लंड उसकी बुर में डाल दिया। सानिया के मुंह से ‘आईई’ की जगह ‘हुच्च’ की आवाज सी निकली। वह थोड़ा कसमसाई तो जरूर पर आज तो वह पहले से ही इसके लिए तैयार लग रही थी। मुझे लगता है सारी रात उसने आज के इस शुभ कार्य की योजना के बारे में ही चिंतन किया होगा।

कल मैंने बहुत ही संयम से काम लेते हुए इस क्रिया को संपन्न किया था पर आज तो मार्ग जैसे निष्कंटक था। मैंने पहले तो हल्के धक्के लगाए और बाद में थोड़े तेज कर दिए।

सानिया की चूत आज भी बहुत कसी हुई लग रही थी। हो सकता है कल की पहली चुदाई के कारण उसमें कुछ सूजन होने कारण ऐसा लग रहा है।

कोई बात नहीं अगले 5-4 दिनों में तो यह और भी रवां हो जायेगी फिर तो इसे बजाने में और भी आनंद आने वाला है।

सानिया मेरे हर धक्के के साथ अपने नितम्ब उचकाने लगी थी। उसके चहरे को देखकर तो कतई नहीं लग रहा था कि उसे कोई ज्यादा दर्द हो रहा है अलबता वह तो हर धक्कों के साथ आह … ऊंह … जरूर करती जा रही थी।

URL]


मैंने एक हाथ से उसके उरोज को पकड़कर मसलना चालू कर दिया और एक उरोज को मुंह में भर कर चूसने लगा। सानिया ने अब अपनी जांघें और भी ज्यादा खोल दी थी। अब तो लंड सरपट अन्दर बाहर होने लगा था। मैं बदल-बदल कर उसके उरोजों को चूसने लगा था और कभी कभी उसके चूचकों (स्तानाग्रों) को भी दांतों से काटने लगा था।

सानिया को शायद इन सब में बहुत ही आनंद आ रहा था। अब तो उसने अपने दोनों घुटने भी ऊपर उठा लिए थे।

अचानक वह मेरी कमर पकड़कर मुझे भींचने लगी थी। मुझे लगा उसका शरीर अकड़ने सा लगा है और उसकी बुर ने संकोचन करना चालू कर दिया है।

और फिर आआ … ईई … करते हुए उसने 2-3 लम्बी साँसें ली और फिर अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया। लगता है उसका ओर्गास्म हो गया है। मैंने भी थोड़ी देर के लिए धक्के लगाने बंद कर दिए।

“सानू थक गई क्या?”

“किच्च?” उसने अपनी आंखें खोलते हुए कहा। उसकी आँखों में संतुष्टि की झलक साफ़ देखी जा सकती थी।

मैंने उसकी आँखों पर एक चुम्बन लिया और फिर से धक्के लगाने चालू कर दिए। मैं एक बार उसे डॉगी स्टाइल में करके चोदना चाहता था पर मैंने अपना यह ख्याल बदल दिया। दरअसल मैं आज बाथरूम में इस चिड़िया के साथ नहाते समय डॉगी या घोड़ी स्टाइल में करके करने के मूड में था। मुझे लगता है अगर इस समय मैंने इसे इस बात के लिए कहा तो हो सकता है वह मान भी जायेगी पर फिर बाथरूम में इस प्रकार चुहल करने की हिम्मत वह दुबारा नहीं जुटा पायेगी।

URL]


मैं अपने ख्यालों में खोया हुआ था कि मुझे अपने होंठों पर सानिया के दांतों की चुभन सी महसूस हुयी। शायद मेरे धक्कों के बंद हो जाने से सानिया ने ऐसा किया होगा। और फिर तो मैंने दनादन धक्के लगाने शुरू कर दिए।

सानिया इसमें पूरा साथ दे रही थी।

मैं कभी उसके गालों को चूमता कभी उसके उरोजों को। जैसे ही सानिया अपने नितम्बों को उचकाती मैं अपना एक हाथ नीचे ले जाता और उसके नितम्बों की खाई में उसकी गांड के छेद को टटोलने और उसपर अंगुली फिराने का प्रयास करने लग जाता।

“सानू जान अगर तुम ऊपर आ जाओ तो तुम्हें बहुत मज़ा आएगा.”

“आह … ऐसे ही ठीक है.” कहते हुए उसने मेरी पीठ पर अपनी बांहों की जकड़ और भी बढ़ा दी।

फिर मैंने एक हाथ उसकी गर्दन के नीचे किया और फिर उसकी कमर को पकड़ते हुए एक पलटी मारी तो सानिया आआईइ … करती हुयी मेरे ऊपर आ गई।

URL]


अब वह अपने घुटने थोड़े मोड़ कर मेरे ऊपर उकडू सी हो गई। अब तो सारी कमान उसे के हाथों में थी। मैंने अपने सिर को थोड़ा ऊपर उठाते हुए उसकी बुर को देखा। मेरा लंड पूरी गहराई तक उसकी बुर में समाया हुया था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी बिल्ली के मुंह में कोई मोटा सा चूहा फंसा हो।

मैंने उसके कमर को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर उसे थोड़ा ऊपर उठाने की कोशिश की। अब सानिया इतनी भी भोली नहीं थी कि मेरी मनसा ना समझ पाए। उसने शरमाकर अपनी आँखें बंद कर ली और फिर ऊपर नीचे होने लगी। इस समय उसकी बुर की कसावट बहुत ही ज्यादा महसूस होने लगी थी। उसकी बुर ने पानी छोड़ दिया था और अब तो उसकी बुर से निकला पानी मेरे अण्डकोष तक जाने लगा था।

सानिया ने थोड़ी देर धक्के लगाए और फिर उसने अपना सिर मेरे सीने पर रख दिया। ऐसा करने से उसके नितम्ब थोड़े ऊपर उठ गए। अब तो मेरा हाथ उसके नितम्बों और उसकी खाई में आराम से सैर कर सकता था। हे भगवान्! नितम्बों की पूरी दरार गीली सी लगने लगी थी। मैंने उसकी दरार में अपनी अंगुलियाँ फिराना चालू कर दिया और उसके एक उरोज को भी अपने मुंह में भरकर चूसने लगा।

हमें 20-25 मिनट हो ही गए थे। इस बीच सानिया दो बार और झड़ गई थी और अब तो मुझे भी लगने लगा था मेरा तोता उड़ने वाला है।

URL]


“अब आप ऊपर आ जाओ.” कहते हुए सानिया ने पलटी सी मारने की कोशिश की। अब तो मेरा ऊपर आना जरूरी था नहीं तो इस आपाधापी में मेरा लंड फिसलकर बाहर आ सकता था और मैं ऐसी गलती नहीं करना चाहता था।

अब मैं उसके ऊपर आ गया और धक्के लगाने लगा। सानिया ने अपने दोनों पैर ऊपर उठा दिए और मैंने भी 5-7 धक्कों के साथ अपनी पिचकारियाँ छोड़ दी।

सानिया आह … उईईइ … करती अपने जीवन के इन अनमोल पलों को भोगती रही।

URL]


आज के इस प्रेम युद्ध में तो खून खराबे (रक्तपात) का कोई काम नहीं था। थोड़ी देर बाद हम दोनों उठ कर खड़े हो गए।
 
“देखो बेबी … जब तुम उस टॉमी मेरा मतलब तापस मुखर्जी को सब कुछ दिखा सकती हो और उसका देख सकती हो एक बार मुझे दिखाने में भला क्या क्या हर्ज़ है? एक बार सोच लो?”

“ओह …” कबूतरी ने इधर-उधर देखते हुए कहा- वो … वो … मैं यहाँ नहीं दिखा सकती.”

“कोई बात नहीं चलो बेड रूम में चलते हैं।”

“वो आप मम्मी को तो नहीं बताएँगे ना?”

“अगर तुम मेरा कहना मान लोगी तो बिल्कुल नहीं.”

URL]


“और वो फोटो?”

“प्रॉमिस … मैं वो सब डिलीट कर दूंगा तुम्हारे सामने ही!”

सुहाना ने मेरी ओर असमंजस और अविश्वास भरी नज़रों से देखा और फिर से अपनी गर्दन झुका ली।

मुझे लगा उसने फाइनली मेरे प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।

“तो रूम में चलें बेबी?”

कहते हुए मैं खड़ा हो गया और उसको बाजू से पकड़ कर रूम में ले आया। सुहाना ने अब कोई ज्यादा ना नुकर नहीं की।

कमरे में आने के बाद मैंने लाइट जला दी।

“प्लीज … ये लाइट बंद कर दो?”

“क्यों?”

“मुझे शर्म आती है।”

“चलो कोई बात नहीं, मैं लाइट बंद कर देता हूँ। कहते हुए मैंने ट्यूब लाइट बंद कर दी।

कमरे में ज्यादा रोशनी तो नहीं थी पर जितनी भी थी पर्याप्त थी।

“सर … मुझे बहुत डर लग रहा है.” कहते हुए सुहाना ने फिर से मेरी ओर कातर नजरों से देखा।

शायद वह सोच रही थी कि क्या पता आख़िरी समय में मैं अपना इरादा बदल लूं! पर अब जाल में फंसी इस चिड़िया को कैसे छोड़ा जा सकता था।

“बेबी अब ज्यादा नखरे मत करो … जल्दी करो … हमें तुम्हारा प्रोजेक्ट भी आज ही फाइनल करना है ना? और फिर मैं 2-3 दिन बाद बंगलुरु जाने वाला हूँ बाद में तुम्हें बहुत परेशानी होगी.”

सुहाना ने पहले तो अपनी कुर्ती को थोड़ा ऊपर उठाया और फिर दोनों हाथों के अंगूठे कमर में बंधे पायजामे में फंसा कर नीचे करने लगी।

URL]


गोल गहरी नाभि ने नीचे उभरा हुआ सा पेडू और उसके नीचे गुलाबी रंग की पतली सी पैंटी (कच्छी)। उसके पपोटे और चीरा तो उस हरे रंग की किनारियों वाली गुलाबी कच्छी में साफ़ नज़र आने लगे थे। कोमल, रेशम सी मुलायम, गुलाबी स्निग्ध जांघें।

“आइलाआआ … वाह … अप्रतीम … बहुत खूबसूरत …” मेरे मुंह से अचानक निकला।

सुहाना मेरी आवाज से थोड़ा चौंकी और उसने फिर से अपने पायजामे को ऊपर करना शुरू कर दिया।

“अरे बेबी … इतनी क्या जल्दी है? थोड़ा तसल्ली से देखने तो दो?”

“वो … आपने देख तो लिया.”

“अभी कहाँ देखी है ज़रा अपनी अँगुलियों से ये गुलाबी पर्दा तो थोड़ा सा हटाओ?” मैं खड़ा होकर उसके पास आ गया।

सुहाना तो अब किसी शिकंजे में फंसी चिड़िया की तरह फड़फड़ाने ही लगी थी। अब उसने अपनी अँगुलियों से उस गुलाबी कच्छी का किनारा पकड़कर एक तरफ कर दिया।

URL]


हे भगवान् … गुलाबी रंग के पपोटे और उनके बीच का रक्तिम चीरा तो मात्र 3 इंच का रहा होगा। दोनों फांकें आपस में चिपकी हुयी थी और बीच में गुलाबी रंग की कलिकाएँ तो ऐसे लग रही थी जैसे अभी बाहर आ जायेंगी।

गोरी चिट्टी बेदाग़ रोमविहीन गंजी बुर … मैं तो धड़कते दिल से अपने होंठों पर जीभ ही फिराता रह गया।

एक बार तो मुझे धोखा सा होने लगा कि शायद अभी इसकी बुर पर रेशमी बाल आये ही नहीं होंगे। हाँ मुझे याद आया उस फोटो में तो इसके छोटे छोटे बाल ट्रिम किए हुए दिखाई दे रहे थे मुझे लगता है इसने 1-2 दिन पहले ही वैक्सिंग करके अपनी मुनिया के बाल साफ़ किए होंगे।

अब मैं नीचे बैठ गया और उसके नितम्बों को पकड़कर उसे थोड़ा अपनी ओर खींचा और उसकी बुर पर एक चुम्बन ले लिया। कमसिन बुर की मादक खुशबू मेरे नथुनों में भर गई।

“ओह … नो … सर क्या कर रहे हो … प्लीज … छोड़ो मुझे … मुझे घर जाने दो.” उसने मेरे सिर को हटाने की कोशिश की।

“बस … थोड़ी देर ओर देख लेने दो … मैं बस एक बार इस पर किस कर लूं फिर तुम्हें कुछ नहीं कहूंगा.”

सुहाना ने अविश्वास भरी नज़रों से मेरी ओर देखा।

“मेरा विश्वास करो बेबी!”

“ओह …” एक लम्बी साँस लेते हुए सुहाना ने फिर से अपनी आँखें बंद कर ली।

URL]


अब मैंने धीरे से उसकी कच्छी को नीचे कर दिया। हे भगवान्! रेशम सी कोमल और गुलाबी फांकों वाली बुर की खूबसूरती को शब्दों में तो बयान किया ही नहीं जा सकता।

अब मैंने अपने होंठ उसके चीरे पर लगा दिए। पहले तो उसे सूंघा और फिर उसपर अपनी जीभ फिराने लगा।
 
Back
Top