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Guest
[SIZE=150%] जग्गू शराब के नशे में था, बहुत ज्यादा नहीं पी रखी थी लेकिन फिर भी मतलब भर की पीने के कारन ठीक थक नशा उसे चढ़ा हुआ था - नूतन रानी यहाँ एकांत में दो दो लंडो से चुदवा रही थी | साला हमको भनक तक नहीं लगने दी बहनचोद | इतना बुरा है मेरा लंड क्या ???
नूतन अपने की ठीक करते करते भड़कती हुई - यहाँ क्या कर रहा है तू |
जग्गू कुटिल मुस्कान के साथ - यही सवाल तो मै तुझसे पूछु साली कुतिया तो ......................|
नूतन - वहां बहुत शोर हो रहा था, मुझे एकांत चाहिए था इसलिए यहाँ आई थी |
जग्गू - रंडी की चूत साली रंगे हाथो पकड़ा है तुझे लेकिन फिर भी न झूठ बोलना नहीं छोड़ेगी | रंडी की औलाद सच काहे नहीं बोलती, चुदने आई थी और वो दोनों तुझे चोदकर चले भी गए |
नूतन - देख जग्गू जबान संभलकर बात कर, वरना आज तू पिटेगा मेरे हाथो |
जग्गू - साली चुद्दकड़ कुतिया, तू मुझे धमका रही है | अभी एक आवाज लगा दू, तेरी सारी पोल पट्टी खुल जाएगी |
एक लंड काफी नहीं तो दो दो से चुदने का चस्का पाल लिया हरामजादी |
नूतन - बकवास बंद कर और यहाँ से फुट ले जल्दी| तेरे जैसा आदमी गन्दी नाली का कीड़ा ही रहेगा | जैसी जगह से आया है वैसा ही सोचेगा, गटर छाप |
नूतन ने बस कमर के नीचे के कपड़े काफी हद तक ठीक कर लिए थे | अपनी ब्रा बस पहनने जा रही थी......
गटर छाप सुनते ही जग्गू को गुस्सा आ गया, उसने आगे बढ़कर नूतन के बाल खीच लिए - साली कुतिया गटर छाप किसको बोला, तू गटर छाप, तेरा खानदान गटर छाप, यहाँ खुलेआम चुदवा रही थी और गटर छाप मै ?????
नूतन बिलबिला गयी - आआआआईईईई छोड़ हरामी के लंड मादरचोद, छोड़ मेरे बालो को, सुवर की औलाद |
जग्गू - साली जबान संभाल कर बोलना, माँ की गली नहीं जानती नहीं मै कौन हूँ | साला यही रगड़ दूगां, 6 दिन तक बिस्तर से नहीं हिलेगी |
नूतन दर्द से बिलबिला रही थी, उसके पैर का घुटना चल गया लेकिन निशाना चुक गया, सेण्टर में लगने की बजाय वो जग्गू की बायीं जांघ पर जाकर लगा |
अब जग्गू का गुस्सा और बढ़ गया - साली मुझे मर्दानगी दिखाएगी | जग्गू ने नूतन को बिस्तर पर पटक दिया |
जग्गू का गुस्सा अब बहुत बढ़ चूका था - साली कुतिया मादरचोद, मुझे चोट पन्हुचाएगी | साला एक तो वैसे भी जब से पार्टी में आया हो, दिमाग ख़राब हो रखा है | उस भोसड़ी वाली प्रियम की चाची को भी आज ही आना था | मादरचोद दिमाग का दही कर दिया है, भोसड़ी वाली उस हुस्न परी को जब से देखा है, लंड नरम होने का नाम ही नहीं ले रहा | ऊपर से सहला सहला कर हाथ में भी दर्द हो गया है लेकिन ये साला बैठने का नाम ही नहीं ले रहा | साला इतनी खूबसूरत औरते बनाने की क्या जरुरत है कि खुद को रोकना मुस्किल हो जाये | साली साड़ी में भी इतनी क्लासिक लग रही थी, उसी चूची देखि है साली कुतिया तूने, उसकी गांड देखि है, जब चलती है कैसे चूतड़ थलर थलर हिलते है | मेरा तो साला उसके चलते समय उठती हिलती गांड के झटके देखकर कर ही नियति ख़राब हो गयी थी | मन कर रहा था वही गिरा जमीं पर उसकी साड़ी खोलकर वही उसकी गांड में लंड घुसेड़ दू और कुतिया बनाकर खूब चोदु , जब तक मन न भर जाये | उसके आगे तेरे जिस्म में तो कुछ भी नहीं है | उसके बारे में सोच सोच कर वैसे ही दिमाग ख़राब हो रखा है | ऊपर से तू रंडी की जनी यहाँ चूत खोलकर नंगी बैठी है |
अब अगर तेरी जैसी किस्मत से अचानक नंगी मिली चूत को भी नहीं चोदा तो साला धिक्कार है अपनी जिंदगी पर | तुझे तो कुतिया बनाकर तेरी चीखे ना निकलवाई तो मेरा नाम भी जग्गू नहीं |
जग्गू नशे और गुस्से में क्या क्या बक रहा था, उसे भी पता नहीं था, बस बक रहा था | अब नूतन के चेहरे पर गुस्से और डर के भाव के जगह एक सन्नाटे वाली दहसत ने ले ली थी | एक खामोश सी चीत्कार करती दहसत, जिसकी खामोश चीखे नूतन के रोम रोम में घुसकर, उसके शरीर के हर नस नस में सिहरन भर रही थी | उसके सामने सवाल था अब क्या होगा, क्या आज सचमुच उसकी इज्जत लुट जाएगी, क्या आज जागु उसका बलात्कार कर डालेगा ?????????????? बिस्तर पर पड़ी नूतन के मन में ऐसे अनगिनत जिस्म में सिहरन पैदा करने वाले दहसत भरे सवाल उसके दिमाग में उमड़ रहे थे |
जग्गू की बाते सुनकर हट के गेट के पास कड़ी रीमा के रोम रोम में सिहरन दौड़ गयी, जग्गू की बातो ने उसके अन्दर उत्तेजना, रोमांच और दहशत तीनो ही उसके अन्दर भर दी थी | रीमा को लगा उसे जाकर नूतन को बचाना चाहिए | फिर उसने सोचा, कही वो ही उल्टा न फंस जाये, पता चला नशे में धुत जग्गू उसकी इज्जत तार तार करके उसकी दुर्गति कर दे, फिर वो समाज में कैसे जी पायेगी, कैसे खुद से आंख में आंख मिला पायेगी | दो टके का नाली का कीड़ा उसे पाने का कोई हसीन ख्वाब नहीं देख रहा था बल्कि सबसे दर्दनाक वहसी तरीके से उसके जिस्म को नोचने का सपना पाले बैठा था | उसके न मिलने पर आज वो मासूम नूतन को अपना शिकार बनाएगा | वो नूतन के मासूम नाजुक कोमल जिस्म को नोच नोच कर वसियाना तरीके से भोगेगा और बेचारी बेबस नूतन उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगी | डर और क्रोध के कारन रीमा का रोम रोम कांपने लगा | उसका बस चले तो जग्गू जैसो को अभी गोली मार दे |
रीमा ने एक पल को आंखे बंद की, एक लम्बी साँस खीची और उसकी चेतना, गुस्से और डर से बाहर आई | उसने हर हाल में नूतन को बचाने का फैसला किया | उसने अपने फ़ोन का कैमरा ऑन कर दिया और दरवाजे को ओट से ही जो भी अन्दर हो रहा था उसे शूट करने लगी |
अपने दिमाग की उधेड़बुन से बाहर आती नूतन ने जग्गू से हवसी जकड़न से बचने की आखिरी कोशिश की और बिस्तर से हट के गेट की तरफ उठ भागी | जग्गू ने बिस्तर से उठकर भागने की कोशिश करती नूतन को एक बार फिर से बिस्तर पर पटक दिया |
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नूतन अपने की ठीक करते करते भड़कती हुई - यहाँ क्या कर रहा है तू |
जग्गू कुटिल मुस्कान के साथ - यही सवाल तो मै तुझसे पूछु साली कुतिया तो ......................|
नूतन - वहां बहुत शोर हो रहा था, मुझे एकांत चाहिए था इसलिए यहाँ आई थी |
जग्गू - रंडी की चूत साली रंगे हाथो पकड़ा है तुझे लेकिन फिर भी न झूठ बोलना नहीं छोड़ेगी | रंडी की औलाद सच काहे नहीं बोलती, चुदने आई थी और वो दोनों तुझे चोदकर चले भी गए |
नूतन - देख जग्गू जबान संभलकर बात कर, वरना आज तू पिटेगा मेरे हाथो |
जग्गू - साली चुद्दकड़ कुतिया, तू मुझे धमका रही है | अभी एक आवाज लगा दू, तेरी सारी पोल पट्टी खुल जाएगी |
एक लंड काफी नहीं तो दो दो से चुदने का चस्का पाल लिया हरामजादी |
नूतन - बकवास बंद कर और यहाँ से फुट ले जल्दी| तेरे जैसा आदमी गन्दी नाली का कीड़ा ही रहेगा | जैसी जगह से आया है वैसा ही सोचेगा, गटर छाप |
नूतन ने बस कमर के नीचे के कपड़े काफी हद तक ठीक कर लिए थे | अपनी ब्रा बस पहनने जा रही थी......
गटर छाप सुनते ही जग्गू को गुस्सा आ गया, उसने आगे बढ़कर नूतन के बाल खीच लिए - साली कुतिया गटर छाप किसको बोला, तू गटर छाप, तेरा खानदान गटर छाप, यहाँ खुलेआम चुदवा रही थी और गटर छाप मै ?????
नूतन बिलबिला गयी - आआआआईईईई छोड़ हरामी के लंड मादरचोद, छोड़ मेरे बालो को, सुवर की औलाद |
जग्गू - साली जबान संभाल कर बोलना, माँ की गली नहीं जानती नहीं मै कौन हूँ | साला यही रगड़ दूगां, 6 दिन तक बिस्तर से नहीं हिलेगी |
नूतन दर्द से बिलबिला रही थी, उसके पैर का घुटना चल गया लेकिन निशाना चुक गया, सेण्टर में लगने की बजाय वो जग्गू की बायीं जांघ पर जाकर लगा |
अब जग्गू का गुस्सा और बढ़ गया - साली मुझे मर्दानगी दिखाएगी | जग्गू ने नूतन को बिस्तर पर पटक दिया |
जग्गू का गुस्सा अब बहुत बढ़ चूका था - साली कुतिया मादरचोद, मुझे चोट पन्हुचाएगी | साला एक तो वैसे भी जब से पार्टी में आया हो, दिमाग ख़राब हो रखा है | उस भोसड़ी वाली प्रियम की चाची को भी आज ही आना था | मादरचोद दिमाग का दही कर दिया है, भोसड़ी वाली उस हुस्न परी को जब से देखा है, लंड नरम होने का नाम ही नहीं ले रहा | ऊपर से सहला सहला कर हाथ में भी दर्द हो गया है लेकिन ये साला बैठने का नाम ही नहीं ले रहा | साला इतनी खूबसूरत औरते बनाने की क्या जरुरत है कि खुद को रोकना मुस्किल हो जाये | साली साड़ी में भी इतनी क्लासिक लग रही थी, उसी चूची देखि है साली कुतिया तूने, उसकी गांड देखि है, जब चलती है कैसे चूतड़ थलर थलर हिलते है | मेरा तो साला उसके चलते समय उठती हिलती गांड के झटके देखकर कर ही नियति ख़राब हो गयी थी | मन कर रहा था वही गिरा जमीं पर उसकी साड़ी खोलकर वही उसकी गांड में लंड घुसेड़ दू और कुतिया बनाकर खूब चोदु , जब तक मन न भर जाये | उसके आगे तेरे जिस्म में तो कुछ भी नहीं है | उसके बारे में सोच सोच कर वैसे ही दिमाग ख़राब हो रखा है | ऊपर से तू रंडी की जनी यहाँ चूत खोलकर नंगी बैठी है |
अब अगर तेरी जैसी किस्मत से अचानक नंगी मिली चूत को भी नहीं चोदा तो साला धिक्कार है अपनी जिंदगी पर | तुझे तो कुतिया बनाकर तेरी चीखे ना निकलवाई तो मेरा नाम भी जग्गू नहीं |
जग्गू नशे और गुस्से में क्या क्या बक रहा था, उसे भी पता नहीं था, बस बक रहा था | अब नूतन के चेहरे पर गुस्से और डर के भाव के जगह एक सन्नाटे वाली दहसत ने ले ली थी | एक खामोश सी चीत्कार करती दहसत, जिसकी खामोश चीखे नूतन के रोम रोम में घुसकर, उसके शरीर के हर नस नस में सिहरन भर रही थी | उसके सामने सवाल था अब क्या होगा, क्या आज सचमुच उसकी इज्जत लुट जाएगी, क्या आज जागु उसका बलात्कार कर डालेगा ?????????????? बिस्तर पर पड़ी नूतन के मन में ऐसे अनगिनत जिस्म में सिहरन पैदा करने वाले दहसत भरे सवाल उसके दिमाग में उमड़ रहे थे |
जग्गू की बाते सुनकर हट के गेट के पास कड़ी रीमा के रोम रोम में सिहरन दौड़ गयी, जग्गू की बातो ने उसके अन्दर उत्तेजना, रोमांच और दहशत तीनो ही उसके अन्दर भर दी थी | रीमा को लगा उसे जाकर नूतन को बचाना चाहिए | फिर उसने सोचा, कही वो ही उल्टा न फंस जाये, पता चला नशे में धुत जग्गू उसकी इज्जत तार तार करके उसकी दुर्गति कर दे, फिर वो समाज में कैसे जी पायेगी, कैसे खुद से आंख में आंख मिला पायेगी | दो टके का नाली का कीड़ा उसे पाने का कोई हसीन ख्वाब नहीं देख रहा था बल्कि सबसे दर्दनाक वहसी तरीके से उसके जिस्म को नोचने का सपना पाले बैठा था | उसके न मिलने पर आज वो मासूम नूतन को अपना शिकार बनाएगा | वो नूतन के मासूम नाजुक कोमल जिस्म को नोच नोच कर वसियाना तरीके से भोगेगा और बेचारी बेबस नूतन उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगी | डर और क्रोध के कारन रीमा का रोम रोम कांपने लगा | उसका बस चले तो जग्गू जैसो को अभी गोली मार दे |
रीमा ने एक पल को आंखे बंद की, एक लम्बी साँस खीची और उसकी चेतना, गुस्से और डर से बाहर आई | उसने हर हाल में नूतन को बचाने का फैसला किया | उसने अपने फ़ोन का कैमरा ऑन कर दिया और दरवाजे को ओट से ही जो भी अन्दर हो रहा था उसे शूट करने लगी |
अपने दिमाग की उधेड़बुन से बाहर आती नूतन ने जग्गू से हवसी जकड़न से बचने की आखिरी कोशिश की और बिस्तर से हट के गेट की तरफ उठ भागी | जग्गू ने बिस्तर से उठकर भागने की कोशिश करती नूतन को एक बार फिर से बिस्तर पर पटक दिया |
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