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Adultery वासना की मारी औरत की दबी हुई वासना

[SIZE=150%] जग्गू शराब के नशे में था, बहुत ज्यादा नहीं पी रखी थी लेकिन फिर भी मतलब भर की पीने के कारन ठीक थक नशा उसे चढ़ा हुआ था - नूतन रानी यहाँ एकांत में दो दो लंडो से चुदवा रही थी | साला हमको भनक तक नहीं लगने दी बहनचोद | इतना बुरा है मेरा लंड क्या ???

नूतन अपने की ठीक करते करते भड़कती हुई - यहाँ क्या कर रहा है तू |

जग्गू कुटिल मुस्कान के साथ - यही सवाल तो मै तुझसे पूछु साली कुतिया तो ......................|

नूतन - वहां बहुत शोर हो रहा था, मुझे एकांत चाहिए था इसलिए यहाँ आई थी |

जग्गू - रंडी की चूत साली रंगे हाथो पकड़ा है तुझे लेकिन फिर भी न झूठ बोलना नहीं छोड़ेगी | रंडी की औलाद सच काहे नहीं बोलती, चुदने आई थी और वो दोनों तुझे चोदकर चले भी गए |

नूतन - देख जग्गू जबान संभलकर बात कर, वरना आज तू पिटेगा मेरे हाथो |

जग्गू - साली चुद्दकड़ कुतिया, तू मुझे धमका रही है | अभी एक आवाज लगा दू, तेरी सारी पोल पट्टी खुल जाएगी |

एक लंड काफी नहीं तो दो दो से चुदने का चस्का पाल लिया हरामजादी |

नूतन - बकवास बंद कर और यहाँ से फुट ले जल्दी| तेरे जैसा आदमी गन्दी नाली का कीड़ा ही रहेगा | जैसी जगह से आया है वैसा ही सोचेगा, गटर छाप |

नूतन ने बस कमर के नीचे के कपड़े काफी हद तक ठीक कर लिए थे | अपनी ब्रा बस पहनने जा रही थी......

गटर छाप सुनते ही जग्गू को गुस्सा आ गया, उसने आगे बढ़कर नूतन के बाल खीच लिए - साली कुतिया गटर छाप किसको बोला, तू गटर छाप, तेरा खानदान गटर छाप, यहाँ खुलेआम चुदवा रही थी और गटर छाप मै ?????

नूतन बिलबिला गयी - आआआआईईईई छोड़ हरामी के लंड मादरचोद, छोड़ मेरे बालो को, सुवर की औलाद |

जग्गू - साली जबान संभाल कर बोलना, माँ की गली नहीं जानती नहीं मै कौन हूँ | साला यही रगड़ दूगां, 6 दिन तक बिस्तर से नहीं हिलेगी |

नूतन दर्द से बिलबिला रही थी, उसके पैर का घुटना चल गया लेकिन निशाना चुक गया, सेण्टर में लगने की बजाय वो जग्गू की बायीं जांघ पर जाकर लगा |

अब जग्गू का गुस्सा और बढ़ गया - साली मुझे मर्दानगी दिखाएगी | जग्गू ने नूतन को बिस्तर पर पटक दिया |

जग्गू का गुस्सा अब बहुत बढ़ चूका था - साली कुतिया मादरचोद, मुझे चोट पन्हुचाएगी | साला एक तो वैसे भी जब से पार्टी में आया हो, दिमाग ख़राब हो रखा है | उस भोसड़ी वाली प्रियम की चाची को भी आज ही आना था | मादरचोद दिमाग का दही कर दिया है, भोसड़ी वाली उस हुस्न परी को जब से देखा है, लंड नरम होने का नाम ही नहीं ले रहा | ऊपर से सहला सहला कर हाथ में भी दर्द हो गया है लेकिन ये साला बैठने का नाम ही नहीं ले रहा | साला इतनी खूबसूरत औरते बनाने की क्या जरुरत है कि खुद को रोकना मुस्किल हो जाये | साली साड़ी में भी इतनी क्लासिक लग रही थी, उसी चूची देखि है साली कुतिया तूने, उसकी गांड देखि है, जब चलती है कैसे चूतड़ थलर थलर हिलते है | मेरा तो साला उसके चलते समय उठती हिलती गांड के झटके देखकर कर ही नियति ख़राब हो गयी थी | मन कर रहा था वही गिरा जमीं पर उसकी साड़ी खोलकर वही उसकी गांड में लंड घुसेड़ दू और कुतिया बनाकर खूब चोदु , जब तक मन न भर जाये | उसके आगे तेरे जिस्म में तो कुछ भी नहीं है | उसके बारे में सोच सोच कर वैसे ही दिमाग ख़राब हो रखा है | ऊपर से तू रंडी की जनी यहाँ चूत खोलकर नंगी बैठी है |

अब अगर तेरी जैसी किस्मत से अचानक नंगी मिली चूत को भी नहीं चोदा तो साला धिक्कार है अपनी जिंदगी पर | तुझे तो कुतिया बनाकर तेरी चीखे ना निकलवाई तो मेरा नाम भी जग्गू नहीं |

जग्गू नशे और गुस्से में क्या क्या बक रहा था, उसे भी पता नहीं था, बस बक रहा था | अब नूतन के चेहरे पर गुस्से और डर के भाव के जगह एक सन्नाटे वाली दहसत ने ले ली थी | एक खामोश सी चीत्कार करती दहसत, जिसकी खामोश चीखे नूतन के रोम रोम में घुसकर, उसके शरीर के हर नस नस में सिहरन भर रही थी | उसके सामने सवाल था अब क्या होगा, क्या आज सचमुच उसकी इज्जत लुट जाएगी, क्या आज जागु उसका बलात्कार कर डालेगा ?????????????? बिस्तर पर पड़ी नूतन के मन में ऐसे अनगिनत जिस्म में सिहरन पैदा करने वाले दहसत भरे सवाल उसके दिमाग में उमड़ रहे थे |

जग्गू की बाते सुनकर हट के गेट के पास कड़ी रीमा के रोम रोम में सिहरन दौड़ गयी, जग्गू की बातो ने उसके अन्दर उत्तेजना, रोमांच और दहशत तीनो ही उसके अन्दर भर दी थी | रीमा को लगा उसे जाकर नूतन को बचाना चाहिए | फिर उसने सोचा, कही वो ही उल्टा न फंस जाये, पता चला नशे में धुत जग्गू उसकी इज्जत तार तार करके उसकी दुर्गति कर दे, फिर वो समाज में कैसे जी पायेगी, कैसे खुद से आंख में आंख मिला पायेगी | दो टके का नाली का कीड़ा उसे पाने का कोई हसीन ख्वाब नहीं देख रहा था बल्कि सबसे दर्दनाक वहसी तरीके से उसके जिस्म को नोचने का सपना पाले बैठा था | उसके न मिलने पर आज वो मासूम नूतन को अपना शिकार बनाएगा | वो नूतन के मासूम नाजुक कोमल जिस्म को नोच नोच कर वसियाना तरीके से भोगेगा और बेचारी बेबस नूतन उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगी | डर और क्रोध के कारन रीमा का रोम रोम कांपने लगा | उसका बस चले तो जग्गू जैसो को अभी गोली मार दे |

रीमा ने एक पल को आंखे बंद की, एक लम्बी साँस खीची और उसकी चेतना, गुस्से और डर से बाहर आई | उसने हर हाल में नूतन को बचाने का फैसला किया | उसने अपने फ़ोन का कैमरा ऑन कर दिया और दरवाजे को ओट से ही जो भी अन्दर हो रहा था उसे शूट करने लगी |

अपने दिमाग की उधेड़बुन से बाहर आती नूतन ने जग्गू से हवसी जकड़न से बचने की आखिरी कोशिश की और बिस्तर से हट के गेट की तरफ उठ भागी | जग्गू ने बिस्तर से उठकर भागने की कोशिश करती नूतन को एक बार फिर से बिस्तर पर पटक दिया |

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[SIZE=150%] एक तो शराब का नशा और ऊपर से नूतन की नौटंकी, जग्गू का गुस्सा बढ़ रहा था जग्गू गुस्से से दांत पीसता हुआ - देख ज्यादा हाथ पाँव मारेगी तो मुझे भी सख्ती करनी पड़ेगी | प्रियम और राजू से अपनी चूत चुदवा चुकी है, अब चुपचाप मुझसे भी चुदवा ले और शांति से घर चली जा | जग्गू नूतन की पैंटी खिसकाने लगा और एक झटके में नूतन के जिस्म से वो कपड़े का आखिरी टुकड़ा भी अलग हो गया |

नूतन को लगा अब जग्गू से बचने का एक ही तरीका है, उसने हाथ जोड़ लिए और रिक्वेस्ट के मोड मोड़ में आ गयी, उसे लगा रहा था कि वो जग्गू के चंगुल से निकालकर यहं से नहीं जा पायेगी, अपनी इज्जत बचाने के लिए उसकी चिरौरी करने में भी क्या बुराई है |

नूतन तोडा नरम होते हुए - मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है, जग्गू तू समझ क्यों नहीं रहा है |

जग्गू को लगा ये उसका चुतिया काट रही है - साली तू मुझे क्या मंद बुद्धि समझती है |

नूतन - मेरी बात का यकीन करो, जैसा तुम सोच रहे हो वैसा बिलकुल नहीं है |

जग्गू - कैसा नहीं है साली कुतिया, अभी अभी यहाँ से राजू और प्रियम गए है | यहाँ तू अन्दर अधनंगी खुद को ठीक कर रही थी, क्या सोचु मै | उनसे आराम से चुदवा लिया, मेरे से चुदवाने में क्या तकलीफ है, मेरे लंड में क्या नागफनी के कांटे लगे है, जो तेरी चूत चीर डालेगे | जैसा उनका लंड है वैसा ही तो मेरा लंड है |

नूतन की आँखों में आंसू आ गए - तू क्या बकवास कर रहा है, प्लीज जग्गू मेरी बात मान, मै सच बोल रही हूँ हमने ऐसा वैसा कुछ नहीं किया |

जग्गू एक बार फिर से नूतन के दोनों हाथ दबाकर उस पर पसरता हुआ - क्या नहीं किया ??? मेरे माथे पर क्या चुतिया लिखा हुआ है |

नूतन - हमने कोई चुदाई वुदाई नहीं करी, प्लीज मेरी बात का भरोसा कर |

जग्गू का गुस्सा और बढ़ गया - कुतिया साली, तो यहाँ नंगी होकर क्या भजन कीर्तन कर रही थी | देख कान खोलकर सुन, उस औरत ने पहले ही मेरा दिमाग ख़राब कर रखा, पता नहीं कहाँ गुम हो गयी है, पिछले घंटे भर से अपने लंड को सहलाकर उसको ढूंढ रहा हूँ, कही दिख ही नहीं रही | साला सोचा था कुछ नहीं मिलेगा तो उसको देखकर मुठ ही मार लूगाँ लेकिन पता नहीं कहाँ अंतर्ध्यान हो गयी | देख पिछले एक घंटे से लंड खड़े खड़े थक गया है, इसे तो बैठना पड़ेगा | अब तेरी मर्जी है तू आराम से चुदवा ले या मै जबदस्ती करके तुझे चोदु | देख प्रियम की चाची की चूत कब मिलेगी पता नहीं लेकिन अभी जो उसके नाम का बुखार चढ़ा है उसे तो उतरना ही पड़ेगा | अब सामने तू मिल गयी वो भी जांघे खोलकर नंगी चूत लिए हुए, तो तुझे ही चोदूगां |

रीमा ये सब बाते कान लगाये सुन रही थी, उसे तो यकीन ही नहीं हुआ इस उम्र के लडके भी उसके बारे में ऐसा भी सोच सकते है |

नूतन अपनी ही उलझन में थी उसे रीमा से कोई लेना देना ही था - प्रियम की चाची का बुखार उन पर जाकर उतारो, उसको ढूंढो और जाकर चोदो, मेरी नन्ही जान के पीछे क्यों पड़ा.................. मेरी क्या गलती है |

जग्गू - तेरी गलती ये है मेरा लंड खड़ा है और तू बिलकुल नंगी है मेरे सामने, अब तेरी नंगी गुलाबी चिकनी चूत ही मेरे लंड के सामने है |

नूतन - जाकर प्रियम और उसकी चाची से हिसाब करो अपना, मुझे छोड़ दो प्लीज जग्गू |

जग्गू भी नरम होने लगा - छोड़ दूंगा लेकिन चोदने के बाद, सिर्फ एक बार चोद लेने दे, सिर्फ एक बार ही चोदूगां....................... जैसे खुसी खुसी प्रियम और राजू से चुद ली हो वैसे ही मुझे भी अपनी चूत चोद लेने दो , उसके बाद आराम से घर जावो | सब हैप्पी हैप्पी |

नूतन - जग्गू प्लीज मेरी बात मान, मै सच बोल रही हूँ, उन्होंने मुझे नहीं चोदा, दोनों में से किसी ने भी नहीं |

जग्गू के तेवर उग्र हो गए - फिर वही ड्रामा, तू साली कुतिया रंडी की चूत, ऐसे नहीं मानेगी |

जग्गू नूतन पर पसर हुआ था , जग्गू ऊपर था और नूतन नीचे, जग्गू अपने पेट की बेल्ट खोलने थोड़ा सा टूटन के जिस्म पर से बांयी तरफ को तिरछा हुआ , नूतन उसको धक्का देखर भागने की कोशिश करी, लेकिन जग्गू ने गिरते पड़ते उसे पकड़ लिया | अब जग्गू का गुस्सा हद से ज्यादा बढ़ गया था, रीमा की हवस और शराब के नशे में डूबा जग्गू पागलपन की हद तक तक पंहुच गया था | उसे लगा नूतन पर रहमदिली दिखाना व्यर्थ है |

उसने धड़ाम से नूतन को बिस्तर पर पटका और तीन चार झापड़ नूतन को लगा दिए | नूतन दर्द और बेबसी के कारन रोने लगी | जग्गू उसके ऊपर पसर गया, उसे बेतहाशा चूमने लगा - अब तो न सिर्फ तू चुदेगी, बल्कि कुतिया की तरह चुदेगी | साली प्यार से मना रहा था तो नौटकी कर रही थी | अब रंडी की तरह चोदूगा तुझे तब पता चलेगा, जग्गू के लंड से पंगा लेने का क्या मतलब होता है |

नूतन रोते रोते गिदगिड़ाइ, उसके हाथो की सख्त पकड़ को छुड़ाने की असफल कोशिश करती हुआ - प्लीज जग्गू छोड़ दो मुझे, मैंने कुछ नहीं प्रियम और राजू के साथ | प्लीज मै तुमारा लंड भी झाड़ दूँगी हाथ से, चूस भी दूँगी | प्लीज नीचे मत करो, चूत मत चोदो मेरी |

जग्गू - साली मुठ ही मरवानी होती तो लौडिया की क्या जरुरत है, अपने हाथ से ना मार लू |

नूतन - मेरा मुहँ चोद लो जग्गू प्लीज, लेकिन मेरी चूत मत मारो |

जग्गू एक हाथ से नूतन को थामकर एक हाथ से अपनी पेंट की बेल्ट खोलता हुआ - साली कितनी नौटंकी बाज है, साला मुहँ में क्या चोदेगें, ऐसे नखरे दिखा रही है जैसे साली की चूत पहली बार चुदने जा रही हो |

नूतन रोते हुए - ऐसा ही है जग्गू, प्लीज कही भी कर लो लेकिन चूत में नहीं जग्गू | कही भी कर ले लेकिन चूत में नहीं प्लीज.............................................................| मेरा मुहँ चोद ले, वो दोनों भी मुहँ में ही करके गए है, मै सच बोल रही हूँ, तेरी कसम |

जग्गू ने पेंट नीचे खिसका दी, अपना तना हुआ लंड सहलाने लगा - कितनी बड़ी नौटंकी है तू, साला मेरी कसम खाकर मुझे ही मारना है............साले वो दोनों चुतिया है................. तो क्या मै भी तुझे चुतिया लगता हूँ, चूत सामने होते हुए भी जो मुहँ में झड कर चला जाये उससे बड़ा चुतिया लंड नहीं होगा कोई दुनिया में .............और तू कौन कुंवारी कन्या है, जो इतना ड्रामा रच रही है, जहाँ इतने लंड ले लिए अपने अन्दर वहां एक और सही........ जिस चूत में एक बार लंड गया, उसमे फिर चाहे जीतनी बार जाये क्या फर्क पड़ता है |

नूतन के अन्दर जग्गू की दहसत भर गयी थी उसे लगा अब ये नहीं रुकेगा, उसने रोते हुए हाथ जोड़कर - प्लीज जग्गू उसमे आज तक किसी का लंड नहीं गया, उसे मत चोदो |

जग्गू - साली कुतिया ये रोने धोने का ड्रामा बंद कर, सौ सौ लंड खाके चूत बोले मै कुंवारी, चुप कर साली, बंद कर ये नौटंकी | अगर साली तेरी चूत की सील नहीं भी टूटी है तो इससे अच्छा क्या होगा कि उसकी सील मै तोडू | तेरे उन रईस लौंडो के कागज के लंडो से बेहतर है तो चूत के सामने होते हुए भी चुसवा कर चले गए , अलसी लंड है मेरा, चूत चोदने वाला, चूत की सील खोलने वाला, एक ही बार में पक्क्क से तेरी सुरंग का दरवाजा खोल देगा | फिर क्या सटा सट सटा सट सटा सट सटा सट सटा सट जमकर चुदो |

जग्गू को रत्ती भर मतलब नहीं था कि नूतन कुंवारी है या नहीं | उसे रीमा की हवस का बुखार चढ़ गया था और अभी फिलहाल उसे उतारने के लिए उसे एक चूत की जरुरत थी | नूतन उसका प्रतिरोध करने लगी | जग्गू ने एक हाथ से उसके दोनों हाथ थाम लिए और दुसरे हाथ से उसकी बेल्ट खोलने लगा | अभी तक छिपकर विडिओ बना रही रीमा अब सामने आ गयी | दोनों आपस में ही ऐसे उलझे थे , इसलिए गेट की तरफ दोनों में से किसी ने देखा ही नहीं | दोनों में जबरदस्त नूर कुश्ती चल रही थी | जग्गू किसी तरह से नूतन को अपने हाथ से नीचे बिस्तर पर दबाये था और नूतन अपने पैर पटक रही थी | उसकी चूतड़ की दरारों के बीच से हाथ घुसा कर उसकी चिकनी गुलाबी चूत उंगलियों से रगड़ने लगा | नूतन उससके चंगुल से बचने की कोशिश में हाथ पांव मार रही थी |

नूतन की तरफ से जबरदस्त प्रतिरोध होता देख, उसकी चूत जोर जोर से रगड़ने लगा ताकि चूत गरम होने से उसके अन्दर चुदास जग सके | वो आराम से नूतन को चोदना चाहता था इसलिए नरमी बरतने की कोशिश कर रहा था - साली चुपचाप आराम से कर लेने दे, वरण क्यों हड्डी पसली तुड़वाकर चुदना चाहती है | तुझे भी पता है आज मै तुझे चोदकर ही रहूगां | जग्गू ने जो चीज ठान ली वो करकर ही रहता है | आराम से चुदवा ले, आइस्ते से डालूँगा चूत में लंड| जब धीर धीरे जायेगा तेरी चूत में मेरा लंड , तो तू भी अपनी चूत में मेरे लंड का मजा ले | अच्छे से चोदूगा तुझे, धीरे धीर तेरी चूत में पेलुगां, फिर जमकर चोदुंगा, बीच में अधूरा प्यासा तड़पता हुआ छोड़कर नहीं जाउगा |

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[SIZE=150%] नूतन को लगा अब उसकी कुंवारी चूत नहीं बचेगी | आज जग्गू उसे चोदकर ही मानेगा | एक बार को उसके मन में आया हाथ पाँव ढीले छोड़ दे | नूतन उसके भरी भरकम शरीर के नीचे अपने हाथ पाँव पटक रही थी | नूतन को फिर चूत चुदाई के बाद होने खतरे याद आ गए | कही वो पेट से हो गयी तो | इसके पास तो कंडोम भी नहीं है | अभी तो मुझे बहुत पढ़ना है, उसे अभी बच्चा नहीं चाहिए |

आंसुओं से भरी आंखे लिए सदमे की दहसत में नूतन ने आखिरी बार गिडगिडाते हुए - कही भी कर ले जग्गू मै मना नहीं कर रही हूँ, बस मेरी चूत छोड़ दे | तू समझ नहीं रहा, कही पेट से हो गयी मै तो, तेरे पास कंडोम भी नहीं है | तुझे आगे पीछे जहाँ करना है, कर ले बस चूत छोड़ दे | मुहँ चोद ले, पीछे गांड में करना है वहां कर ले | जो भी दर्द होगा सह लूंगी, बस मेरी चूत छोड़ दे |

जग्गू वासना में पूरा अँधा हो चूका था, उसे न तो समझ आ रह था कि नूतन क्या कह रही है और न ही उसे मतलब था - साली तेरी गांड की टट्टी अपने माँ बाप से साफ़ करवाना, मै तो तेरी चूत ही मारूगां, चोद चोद कर तेरी चूत को सुरंग बना दूंगा | जग्गू नशे में धुत नूतन की चूत देखने लगा | पहाड़ी की तरह उठे दोनों चुताड़ो के बीच की दरार के निचले हिस्से में बनी घाटी में किसी नदी के बहाव की लकीर खीचती नूतन की चूत जो अपने दोनों ओंठो को कसकर एक दुसरे से चिपकाये हुए थी, ऐसी कसी टाइट चिकनी मक्खन मलाई जैसी नूतन की गुलाबी मखमली चूत देखकर जग्गू का लंड और जोर से फाड़ने लगा | उसके अन्दर की वासना की उत्तेजना अब बेकाबू होने लगी | बार बार नूतन की चूत देख जग्गू अपने होशो हवास खोने लगा | नशे में धुत, वासना में डूबा, हवस से सरोबार कुछ देर तक नूतन की चूत ही देखता रहा और बडबडाने लाहा - साला कैसे नजाकत से साफ़ सुथरी चिकनी मक्खन जैसी बनाकर रखी है अपनी चूत तूने | साला मन करता है गप गप करके खा ही जाऊ |

जग्गू उसकी पैंटी पहले ही छिलके की तरह उतार कर अलग फेंक चूका था, जग्गू उसकी चिकनी गोरी मांसल जांघो को सहला रहा था , नूतन को लगा अब उसके लिए करो या मरो की स्थिति है | नूतन ने अपने हाथ पांव ढीले कर दिए थे, जग्गू को लगा नूतन ने हथियार डाल दिए है, नूतन को इस तरह काबू में देखने के बाद जग्गू ने एक हुंकार भरी, जैसे उसकी ये पहली विजय हो | जग्गू एक हाथ अपने मुहँ की तरफ लार लेने के लिए ले गया | उसने अपनी हथेली पर लार निकाली और अपने लड़ के सुपाडे पर मलने लगा | नूतन के सोचने समझने की शक्ति ख़त्म हो गयी थी | नूतन को लगा अब चुदना ही है, तो रोने धोने का क्या फायदा | कभी न कभी किसी न किस से तो चुदुंगी ही | कोई न कोई लंड पहली बार मुझे चोदेगा ही | रही बात पेट से होने की तो यहाँ से घर पंहुचते ही गोलियां खा लूंगी | नूतन ने हथियार डाल दिए थे | अब उसके आगे अपनी चूत जग्गू के लंड से चुदवाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था |

जग्गु ने अपने लंड पर मुहँ की गीली लार मलने के बाद अपने लंड को नूतन के चूत के मुहाने की तरफ बढाया और नूतन की चूत के मुहँ से सटा दिया | एक धक्का और नूतन की चूत में जग्गु का लंड घुस जाना था | जग्गू नूतन को पीछे से चोदने के सपने देखने लगा | वो पीछे से हचक हचक कर नुतन की गुलाबी कुंवारी कसी हुई चूत में अपना लंड पेल रहा है और नूतन उसके हर धक्के के साथ अपने चूतड़ उठा गिरा रही है | पहली बार चुदने से चूत में हो रही जलन और कामवासना से तर बतर नूतन जग्गू के हर धक्के के साथ कराह रही है, उसके मुहँ से आह आह की अवजे निकल रही है और जग्गू बिना रुके पूरा का पूरा सख्त लंड नूतन की चूत में पेल रहा है | नूतन की मादक सिसकारियां जग्गू का और जोश बढ़ा रही है और वो जमकर नूतन को चोद रहा है

नूतन को समझ नहीं आया अचानक जग्गू को क्या हो गया, किस सोंच में पड़ गया, कही उसे अपनी गलती का अहसास तो नहीं हो गया |

शायद वो जो करने जा रहा है उसे उसके गलत होने का अहसास हो गया है | जग्गू नूतन के चोदने की सपनीली कल्पना में डूबा गीली लिसलिसी लार से अपने गरम लंड को मलकर चिकना कर रहा था, ताकि नूतन की सुखी कुंवारी चूत की सील तोड़ने में उसे ज्यादा जोर न लगाना पड़े |

नूतन अचानक - जग्गू रुको, मेरी सूखी चूत की संकरी सी सुरंग में, जिसमे आजतक किसी का लंड नहीं घुसा ऐसे ही लंड पेल दोगे, थोड़ी लार और लगा लो लंड पर |

जग्गू शराब और वासना दोनों के नशे में धुत था | इससे पहले जग्गू कुछ रियेक्ट करता नूतन ने जग्गू की ढीली पकड़ से अपना दाहिना हाथ छुड़ाया, और अपने मुहँ से ढेर सारा लार अपनी हथली में उड़ेल लिया | जग्गू जब तक कुछ समझता, तब तक नूतन अपनी लार से जग्गू का लंड मसलने लगी | जब जग्गू को अहसास हुआ कि नूतन क्या कर रही है, तब विजयी अंहकार के साथ बोल पड़ा - बोला था न, साली चुदने का मन सबका होता है बस नखरे इतने दिखाती है की गांड से पसीना निकाल दे |

नूतन - तुझे अच्छा लग रहा है मै तेरा लंड पकड़कर मल रही हूँ |

जग्गू - जल्दी से मल, अब रुका नहीं जाता, मेरे लंड का ठिकाना अब तेरी गुलाबी चूत की अँधेरी सुरंग है | इसे ज्यादा देर मत रोक

नूतन - हाँ हाँ, इसकी अलसी मालिश तो मेरी कुंवारी मखमली चूत की कसी हुई दीवारे ही करेगी, मै तो बस थोड़ा लोशन लगाये दे रही हूँ, ताकि आराम से मालिश हो |

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[SIZE=150%] जग्गू पूरी तरह से वासना में मस्तियाँ गया | नूतन एक हाथ से जग्गू का लंड मसल रही थी और दुसरे हाथ अभी भी जग्गू के सख्त पकड़ में था | नूतन ने अपनी करवट बदल जग्गू के ऊपर आने की कोशिश की, पहली कोशिश ने नाकाम रही लेकिन जब उसने जग्गू के लंड को जोर से मुठियाना शुरू किया तो जग्गू थोड़ा रिलैक्स हो गया और वो जग्गू के पैरो में से अपने पैर तो खिसकाने में कामयाब हो गयी | इतना होते ही उसने पूरी ताकत से जग्गू के तने हुए कठोर लंड जकड लिया और उसके दुसरे हाथ में कसकर काट लिया | एकदम अचानक हुए इस हमले से जग्गू के हाथ, पांव ढीले हो गए और नूतन उछालकर उसके चंगुल से बाहर आ गयी | जग्गू दर्द से बिलबिला गया | वो हाथ पकड़कर दर्द के मारे चिल्लाने लगा | इससे पहले नूतन रीमा को देख पाती रीमा फिर से दरवाजे के सामने से हटकर दरवाजे की ओट में चली गयी | नूतन के शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था , वो पूरी तरह से नंगी थी, उसके चेहरे पर डर और सदमे का गहरा मिश्रण था, बाल उलझे हुए थे, गालो पर थप्पड़ के निशान थे और हाथो पर लालिमा छाई हुई थी | आँखों में आंसुओं का सैलाब था | रीमा को देखते ही फूटफूट कर रोने लगी | उसकी अहलत देखकर रीमा का कलेजा अन्दर तक काँप गया | ऐसी नंगी और बदहवास हालत में अगर वो बाहर जाती है तो उसे शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है और अगर नहीं गयी तो इज्जत खतरे में थी | किस्मत अच्छी थी जो समय पर रीमा आ गयी और नूतन का रेप नहीं हुआ, जग्गू जैसे जानवर के हाथो चुदने लुटने से बच्ग गयी | इससे पहले कि दर्द से बिलबिलाता जग्गू संभल कर नूतन पर वार करता या दहसत से भरी नूतन बाहर की तरफ भागती | बाहर से एक जोर की आवाज आई - प्रियम आर यू देयर ????

नूतन और जग्गू दोनों चौंक गए | नूतन कुछ समझ के लिए बाहर झांकती, इससे पहले रीमा हट के दरवाजे के मुहाने तक आ चुकी थी |

दरवाजे पर आते ही रीमा ने जो देखा - ओह माय गॉड,............................|

नूतन भी रीमा को देखकर एक दम शाक्ड रह गयी, उससे ज्यादा तगड़ा झटका जग्गू को लगा, जिसका कांपता हुआ तना कठोर सीधा लंड उसकी पेंट के बाहर झूल रहा था | नूतन सही गलत सोचने की स्थिति में नहीं थी, वो बस रीमा की तरफ लपकी और चीखी - ये जानवर मेरा रेप करने की कोशिश कर रहा था |

रीमा ने नूतन को सांत्वना दी | नूतन रीमा के पीछे जाकर खड़ी हो गयी | रीमा ने ऐसा जताने की कोशिश की जैसे वो यहाँ बस अभी आई हो, तेज आवाज में गरजी - क्या हो रहा है यहाँ ??????

जग्गू बस बुत बनकर खड़ा हो गया - वो औरत जिसको चोदने के वो सपने देखता था, उसके सामने इस हालत में, पेंट पैरो में पड़ी हो, तना हुआ लंड खून के दौरान से कांपता हुआ, हाथ में काटे जाने का जख्म और बलात्कार का आरोप | जग्गू के रीमा को चोदने के सपने की तो जैसे बाल हत्या हो गयी | एक पल में वो विलेन बन गया | सबसे बड़ी बात थी इसके लिए किसी तरह के सबूतों की जरुरत नहीं थी |

जग्गू हतप्रभ था, ये यहाँ कैसे आ गयी, उसका नशा छु मंतर हो गया | रीमा उसे दरकिनार करते हुए अन्दर की तरफ बढ़ी | नूतन के कपड़े उठाये और तेजी से फिर नूतन के पास पंहुच गयी |

रीमा ने बिना पल गंवाए नूतन को बोला - भाग नूतन भाग |

रीमा और नूतन दोनों मैंन हाल की तरफ भाग निकले, एक अच्छी खासी दूर आने के बाद नूतन ने जैसे तैसे अपने बदन पर कपडे डाले | उसके बाद दोनों मैंन हाल की तरफ चलते रहे | बीच बीच में नूतन अपने अस्त व्यस्त बालो को ठीक करने लगती लेकिन अभी भी उसे पूरा होश नहीं था कि उसके साथ क्या हो रहा है , उसके टॉप से उसके बड़े बड़े स्तन बाहर को साफ़ झलक रहे थे | उसके बाल उलझे थे, चेहरे का मेकउप अस्त व्यस्त हो गया था, आँखों से आंसू निकलने के कारन काजल बहकर गालो तक आ गया था | दोनों तेज तेज भागते हुए मैंन हाल की तरफ पंहुच गए, बाहर लान में लाइट जल रही थी लेकिन धीमी धीमी, जबकि अन्दर हाल पूरा रौशनी से जगमग था | रीमा ने बाहर से ही हाल की तरफ देखा, जिसमे शीशे के बड़े बड़े दरवाजे लगे, उसे हाल में कोई दिखाई नहीं दिया | वह नूतन को वही एक कोने में खड़ी रहने को कहकर तेजी से अन्दर गयी, वहां कोई नहीं दिखा, उसे समझ नहीं आया कि लोग ऐसे कैसे गायब हो गए, कहाँ गए सब के सब | उसने वहां सर्व कर रहे एक वेटर से भी पुछा | उसने अनभिज्ञता जाहिर की | उसने वेटर से पानी की दो बोतले ली और नूतन को पकड़कर बाथरूम की तरफ चली गयी | बाथरूम जाकर उसका अच्छे से मुहँ धोया, नूतन के कपड़े ठीक करने लगी | नूतन की भी चेतना लौटने लगी थी | नूतन भी खुद को सँभालने लगी | नूतन ने अपना मुहँ पोछा, बाल ठीक किये और शीशे में खुद को देखने लगी | उसके चेहरे पर डर और सदमे दोनों के भाव थे | वो बस फिर से रोने वाली ही थी, रीमा ने हाथ पकड़कर मजबूत आवाज में - रोना मत नूतन, उस हरामी के पिल्लो को आज सबक सिखाकर ही यहाँ से जायेगें | अगर तूने रो दिया तो वो साला दो टके का लौंडा जग्गू और उसके अन्दर का जानवर जीत जायेगें | चल अभी तो उसकी फाड़ने की बारी है |

उधर जग्गू नशे और वासना में धुत , उसे समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है, उसके हाथ पर नूतन के दांतों के खुनी निशान बन गए थे, वो दर्द से बिलबिला रहा था, लंड उसका पहले की तरह ही अकड़ा हुआ था | इधर जग्गू जब तक अपनी पेंट संभालता और उसमे अपने पूरी तरह से तने कठोर मुसल लंड, जो खून के तेज दौरान से फड़क रहा था, को हाथ से मसलता हुआ, नशे में हिलता हुआ, अपने हाथ को सहलाता हुआ, नूतन के दांतों के बने निशान देखकर कराहता हुआ जैसे ही रीमा और नूतन को पकड़ने/रोकने हट गेट के बाहर निकला, उसे रीमा और नूतन मैंन हाल की तरफ भाग कर जाती दिखाई दी | नशे में होने के बावजूद वो उनके पीछे भागा, उसकी पेंट और अंडरवियर घुटनों से खिसकती हुई पंजो की तरफ जा रही थी, जब उसकी पेंट और चड्ढी ही उसके कदमो में फसने लगी तो वो झुंझलाकर कुछ कदम दौड़कर रुक गया | नशे में भी उसका दिमाग काम कर रहा था, वो समझ गया मैंन हाल में उसका बाप होगा और ये जालिम कमसिन बेशुमार हुस्न की मलिक्का रीमा चाची पता नहीं क्या करने वाली है | उसने अपने मन में ही अंदाजा लगा लिया कि वहां क्या होने वाला होगा | वो हाल की तरफ भागती जा रही रीमा के उठते गिरते थलर थलर होते और नूतन के अध् खुले बड़े बड़े मांसल उठे हुए चुतड़ो तब तक देखता रहा जब तक उसकी नजरो से वो मंजर ओझल नहीं हो गया | रीमा और आधी नंगी नूतन उसकी पलको के सामने से एक पल में ओझल हो गयी | जग्गू कभी अपने हाथ पर बने दांतों के घाव को देखता कभी खून से भरे तने कठोर लंड को | क्या करे क्या न करे ये सब उसकी समझ से दूर था | अपने घाव वाले हाथ को दुसरे हाथ से थामे, दर्द को सहता हुआ, पैरो के पंजो तक सरक कर पंहुची अंडरवियर और पेंट में फंसे पैरो से दो चार कदम और आगे की ओर चला, लेकिन रीमा और नूतन गायब हो गए थे, जहाँ तक उसे बल्बों की रौशनी दिख रही थी, सन्नाटा था, कोई नहीं था, उसके आगे घटाटोप अँधेरा | हारे हुए जुंआरी की तरह थका हारा जग्गू पीछे की तरफ लौटा, जैसे ही उसके कदम पीछे की तरफ घूमे उसे अपनी हालात का ख्याल आया | एक पल को वो तेजी से पीछे हटा, हाथ के दर्द को बर्दाश्त करते हुए, किसी तरह अपनी अंडरवियर और पेंट को ऊपर को चढ़ाया, और हट की तरफ भागा | हट के अन्दर आते ही जोर से चीखना चाहता था लेकिन चीख नहीं सका, अपने लंड को जोर जोर से मुठीयाने लगा, लेकिन शायद वक्त और माहौल को उससे ज्यादा उसका लंड भांप चूका था, उसने अपनी अकडन छोड़ नरम होना शुरू कर दिया, उसके अन्दर की वासना मर चुकी थी, उसके मन मस्तिष्क उसके हाथो का साथ नहीं दे रहा था | बेतहाशा मुठीयाने के बावजूद लंड मुरझाता ही जा रहा था |

आखिर हारकर उसने उसे अपनी अंडरवियर और पेंट में कैद कर दिया | उसे पता था मैंन हाल में जाना बेवकूफी है और प्रियम राजू ने भी उससे अपना राज शेयर नहीं किया था | कुछ देर अपने आधे होशो हवास में वो सोचते सोचते वही बैठा रहा फिर आखिरकार थके बोझिल लड़खड़ाते कदमो से हारे हुए योद्धा की तरह पार्किंग की तरफ चल दिया | वहां उसकी गाड़ी में लेटे उसके ड्राईवर को भगाकर उसमे लेट गया | ड्राईवर को जग्गू के इस तरह के व्यवहार की आदत थी, वो जाकर जान पहचान वाले एक ड्राईवर के साथ उसकी गाड़ी में बैठ गया |

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[SIZE=150%] रीमा और नूतन बाथरूम से मेकअप करके हाल में लौटी, लेकिन यहाँ पहले की तरह ही घनघोर सन्नाटा था | रीमा को कुछ समझ नहीं आया आखिर लोग गए कहाँ, वो इस तरह की शहर से दूर, नदी के किनारे जंगल के बीचो बीच में होने वाली पार्टियों में नहीं आती थी | रोहित ने एक दो बार उससे पुछा भी लेकिन उसने मना कर दिया था | ये पहला मौका था जब वो इस अनजान जगह आई थी | उसने वेटर से कपिल का नाम लेकर पुछा, वेटर ने इनकार कर दिया लेकिन जाते जाते वो एक सीनियर स्टाफ की तरफ इशारा कर गया- आप उनसे जाकर पूछ लीजिये | रीमा नूतन का हाथ थामे थामे उस तरफ बढ़ गयी |

रीमा सीनियर स्टाफ के बन्दे पास पंहुच कर कपिल के बारे में पूछताछ करने लगी | उसने गौर से रीमा को देखा और फिर नूतन को, वो पहले थोड़ा सकुचाया बताने में की कपिल कहाँ है लेकिन रीमा के जोर डालने उसने एक लोकल एक्सटेंशन नंबर मिलाया, बात होने के बाद रीमा को बोला - साहब अभी बिजी है आप मेसेज छोड़ दीजिये | रीमा का पारा चढ़ गया | वो सीनियर स्टाफ के बन्दे पर बरसने लगी, रीमा के तेवर देखकर उस बन्दे ने फिर फ़ोन मिलाया - इससे पहले वो दूसरी तरफ से बन्दे से अपनी बात पूरी कर पाता, रीमा ने उसके हाथ से फ़ोन रिसीवर छीन लिया और लगी धमकाने - व्हाट एवर यू मिस्टर, आई वांट टू टॉक टू मिस्टर कपिल राईट नाउ, राईट नाउ मीन्स राईट नाउ, इट्स लाइक इमरजेंसी, एनी वे टेल मी वेयर ही इस, आई ऍम कमिंग देयर |

सामने वाला बंदा गिडगिडाने लगा - मैडम गिव मी अ मिनट, मिस्टर कपिल टोल्ड अस डोंट डिस्टर्ब हिम एंड हिज फ्रेंड .............. लेट मी टॉक टू हिम एंड इ विल कन्फर्म यू, मैडम प्लीज जस्ट वेट फॉर अ सेकंड |

रीमा - बेटर ........................|

फ़ोन वाले बन्दे ने किसी से फ़ोन पर बात करी और कुछ देर बात रीमा को बोला - मैडम कपिल सर आपके पास 5 मिनट में आ जायेगें |

रीमा को ये सब बड़ा अजीब लगा | एकदम से कपिल और बाकि सारे मेहमानों का गायब होना, फिर पांच मिनट में कपिल का उसके पास आना | रीमा इस पर ज्यादा सोचने के बजाय जग्गू को सबक सिखाने के बारे में ज्यादा सोच रही थी | उसने इस घटनाक्रम पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन उसके दिमाग के कोने में कीड़ा कुलबुला रहा था |

उधर कपिल को अंदाजा हो गया था कुछ सीरियस मैटर है इसलिए जल्दी से वहां से भागा, उसके साथ साथ लाउन्ज का मालिक और जग्गू का बाप भी साथ हो लिया | असल में सब के सब रीमा के बेमिशाल हुस्न पर अपनी आंखे सेकना चाहते थे | इस पार्टी में रीमा ही नई थी जो पहले कभी उनकी पार्टी में नहीं आई, बाकि सारी हुस्न परियों को वो पहले ही देख चुके थे, लगभग सभी के साथ वो फैमिलेअर थे और मौका मिलने पर उनके साथ फ्लर्ट करने से बाज नहीं आते थे | जो सेट हो गयी उनके साथ सोना तो इनका पंसदीदा शगल था | इन्हें पता था रीमा एक बहुत ही कठिन औरत है खासकर फ्लर्टिंग को लेकर, फिर भी उसके हुस्न का दीदार करने में क्या जाता है और शराब के नशे में थोड़ी आजादी लेकर रीमा के साथ गपशप करने में क्या बुराई है | यही सोचकर अपना जरुरी काम छोड़कर रीमा के एक फ़ोन पर मैंन हाल में तीनो हाजिर हो गए तीनो का साथ में आने का और कोई मकसद नहीं था | जग्गू का बाप इस रिवर लाउन्ज के मुख्य मालिक के साथ बिज़नस में हिस्सेदार था |

रीमा ने तीनो को आते देखा तो थोड़ा अजीब लगा | उनके पास आते ही समझ गयी तीनो नशे में फुल है, चूँकि पुराने पियक्कड़ है इसलिए इतनी शराब गले के नीचे उतारने के बाद भी फुल कण्ट्रोल में है | तीनो के ओंठ सुख रहे है और नशे में आंखे सुर्ख लाल है, आते ही तीनो रीमा को घूरने लगे | इससे पहले रीमा असहज हो कपिल बोल पड़ा - एक्स्चुज अस, बताइए रीमा जी, आपने मुझे क्यों याद किया है, कपिल आपकी सेवा में हाजिर है | ये गुलाम आपकी क्या खिदमद कर सकता है |

बाकि दोनों कभी रीमा को देखते कभी नूतन को | दोनों को बारी बारी से देखकर कुछ समझने की कोशिश में लगे थे, लेकिन डिकोड कर पाने में अक्षम थे |

आखिर सच रीमा के मुहँ से निकलने के बाद ही पता चला | रीमा ने तेज आवाज में में चिल्ला चिल्लाकर बताया, ताकि पुरे हाल में आवाज सुनाई पड़े - जब वो प्रियम को ढूढ़ने पीछे हट की तरफ गयी थी तो वहां शराब जग्गू नूतन का रेप करने की कोशिश कर रहा था |

नशे में होने के बावजूद सभी ने वही सुना जो रीमा ने कहा | किसी को भी यकीन नहीं हुआ | जग्गू का बाप अपने बेटे को जानता था, ड्रग्स का मामला होता या मारपीट का तो समझ में आता उसके लेकिन रेप, वो भी उस लड़की का जिसे वो रोज कॉलेज में मिलता है | जग्गू का बाप भी नूतन को जानता था | तीनो का नशा काफूर सा हो गया | तीनो में से किसी को भी रीमा की बात पर भरोसा कर पाना मुश्किल था | सभी हैरान थे, ऐसा हो कैसे गया | तीनो क्या सोचकर आये थे, की मौका मिलते ही थोडा बहुत रीमा के साथ मटरगस्ती करेगें लेकिन यहाँ तो सावन में रेगिस्तान वाला हाल हो गया |

रीमा की बात सुनकर, नूतन के हाव भाव देखकर कपिल समझ गया कुछ तो गलत हुआ है, वो एकदम से गंभीर हो गया - दिस इस शॉकिंग, अनएक्सेप्टबल | क्या मैंने जो सुना वही तुमने कहा |

रीमा ने अपनी बात फिर से दोहरा दी | कपिल और लाउन्ज के मालिक की नज़ारे नूतन की तरफ चली गयी | नूतन अब अपने आंसू नहीं रोक पायी, सिबुकने लगी | रीमा ने उसके कंधे पर हाथ रखकर ढाढस बंधाया |

कुछ देर तक तीनो नशे में धुत होने के बावजूद घटनाक्रम को समझने की कोशिश करते रहे और बार बार रीमा और नूतन की बातो को चुपचाप अपने अनुभव कि कसौती पर कसते रहे |

लाउन्ज का मालिक ज्यादा अनुभवी था, जग्गू का बाप उसका बिज़नस पार्टनर, ऐसे आंख बंद करके रीमा के कहे को सच मान लेने की बजाय उसने सच को परखना जरुरी समझा, नूतन के पास जाकर, उसके सर पर हाथ फेरा - बोलो बेटा, कुछ गलत किया जग्गू ने तुमारे साथ, डरो मत, हम सब तुमारे साथ है, ये जग्गू का बाप है, वो इसका बेटा हुआ तो क्या हुआ तुम बस सच बतावो उसकी ये हड्डी पसली एक कर देगा |

अब तक बमुश्किल सिबुकती नूतन अपने आंसू लेकर नूतन फफकने लगी, जोर जोर से रोने लगी | ये देखकर तीनो की हवा टाइट हो गयी, उन्हें मामले की गंभीरता समझ गई |

जग्गू का बाप - रो मत बेटी, मै एक बेटे का बाप हूँ तो दो बेटियों का बाप भी, टांगे चीर दूंगा उस जग्गू की, सच सच बोल, तेरे साथ क्या हुआ |

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[SIZE=150%] नूतन ने रोते रोते, सिबुकते हुए पूरी कहानी बताई, लेकिन कहानी का पहला भाग (राजी और प्रियम की लंड चुसाई) नहीं बताया | इसकी जगह वो बोली, उसे कुछ देर एकांत में रहना था तो वो पीछे की तरफ चली गयी | वहां कुछ कीचड़ था जो वो देख नहीं पाई, और उसके कपड़े में कीचड़ लग गयी, पास में कॉटेज था इसलिए उसके अन्दर बदलने चली गयी और इतने में पता नहीं कहाँ से जग्गू आ गया | उसके साथ जबरदस्ती करने लगा | नूतन की कहानी पर लाउन्ज का मालिक सवाल जवाब करना चाहता था लेकिन उसके बोलने से पहले ही जग्गू का बाप नशे में ही दहाड़ा - उसे कुत्ते के बच्चे को मै छोड़ूगा नहीं, जहाँ देखो वहां मेरी नाक कटवाता रहता है, समाज में कही जाने लायक नहीं छोड़ा है | इसलिए लिए इस सुवर को कही ले नहीं जाता हूँ | कहाँ है साला, ढूंढ के लावो, आज इसकी हड्डी पसली एक करता हो |

लाउन्ज का मालिक बीच में बोला - बेटा जहाँ तक मुझे पता है, पीछे कही कीचड़ है ही नहीं |

जग्गू का बाप - यार लड़की की हालत देख तुझे लगा रहा है कि ये झूठ बोल सकती है, तूने ज्यादा पी रखी है, तू चुप रह, मै इससे बात कर रहा हूँ न | नूतन बेटी तू बोल .............|

नूतन - अंकल उसने मेरे बाल खीचे, दो बार मुझे जमीन पर पटका, किसी तरह से मै जान बचाकर भागी हूँ, अगर आपको यकींन हो तो उसके हाथ पर मेरे दांतों के निशान देख सकते है | मैंने बहुत जोर से काटा था और फिर अपनी इज्जत बचाकर भागी हूँ वहां से | बाहर आते ही मुझे रीमा औंटी मिल गयी | रीमा नूतन के शरीर पर के चोट के निशान दिखाते हुए - ये देखो सबुत |

लाउन्ज का मालिक फिर से कुछ पूछने जा रहा था, उसे जग्गू के बाप ने फटकारा - क्या यार तू भी व्योमकेश बक्शी हो रहा है, जग्गू को ढूंढ के ला, दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा | लड़की की हालत से नहीं लगा रहा तुझे कि इसके साथ कुछ गलत करने की कोशिश हुई है | जग्गू को ढूढ़ के ला यहाँ | जब लाउन्ज स्टाफ जग्गू को ढूढ़ने चला तो रीमा ने प्रियम को भी ढूंढ कर लाने को कहा |

जग्गू अपने बाप का इकलौता लड़का था फिर भी जग्गू का बाप उसको लेकर बहुत सख्त रहता था | जग्गू का बाप एक झोपड़ पट्टी में पैदा हुआ वही पला बढ़ा | आगे चलकर उसने ड्रग्स, फिरौती वसूलना, गुंडा गर्दी सब कुछ कुछ किया, फिर उसे एक लड़की से प्यार हो गया और वो लड़की शादी के लिए इसी शर्त पर राजी हुई की वो ये सब मारपीट गुंडागर्दी छोड़कर एक शरीफों वाली जिंदगी जियेगा | तब से जग्गू का बाप एक सफेदपोश बिज़नस मैंन बन गया | अन्दर खाने उसके कुछ पुराने धंधे चलते रहे कुछ बंद हो गए, लेकिन उसने पहले के कमाए पैसो से रियल स्टेट के बिज़नस में काफी पैसा लगाया और शहर के पह्चानदार लोगो में अपनी जगह बना ली | वो नहीं चाहता था की जग्गू उसकी तरह कम पढ़ा लिखा रहे, गुंडा गर्दी करे मावली गिरी करे, इसीलिए उसकी माँ से ज्यादा वो सख्त रहता था | यहिकरण था बाप बेटे का रिश्ता बहुत ज्यादा मधुर नहीं था | ऐसा नहीं था जग्गू का बाप उसे प्यार नहीं करता था, आखिर अकेला लड़का किसको प्यारा नहीं होता, फिर भी उसे अपराध की दुनिया से बचाकर एक अच्छा सिविल इंसान बनाना उसकी पहली प्राथमिकता थी और इसीलिए जग्गू को किसी भी गलत काम की सजा देने में उसे कोई हिचक महसूस नहीं होती, इसके उलट उसकी बेटियां न केवल पढने में तेज थी बल्कि आज्ञाकारी भी थी यही बात जग्गू के बाप को और परेशान कर देती इसीलिए कभी कभी वो जग्गू पर और ज्यादा कठोर हो जाता |

लाउन्ज के आदमी जग्गू को ढूढ़ने में लग गए | लाउन्ज में ठहरने का भी इंतजाम था | मैंन हाल के उत्तरी सिरे पर दो मजिल के बेहतरीन सुविधाओं से लैस कम से कम ३० कमरे थे | प्रियम, राजू और उसकी मंडली उसी बिल्डिंग की छत पर अपने में मस्ती कर रही थी | उन दोनों को होश की नहीं था की इतनी देर बाद बाद नूतन यहाँ नहीं आई और न ही उनका दोस्त जग्गू यहाँ मौजूद है | स्टाफ का आदमी पता लगाते लगाते बिल्डिंग की छत पर पंहुच गया | जब प्रियम को पता चला की उसे मैंन हाल में बुलाया गया है, तब उसे होश आया, की कॉटेज से निकलने के बाद नूतन कहाँ रह गयी | उसे रीमा चाची का ध्यान आया, उसने स्टाफ से मामला जानने की कोशिश की लेकिन स्टाफ ने अनभिज्ञता दर्शायी | प्रियम नशे में अब पहले से ज्यादा धुत था | जब स्टाफ के साथ प्रियम हाल में पंहुचा तो वहां रीमा चाची और नूतन को देखते ही सकपका गया | नूतन और रीमा चाची एक साथ ............. क्या रीमा चाची को उनका भी सच पता चल गया, लगता है नूतन ने सब बता दिया | अब तो गजब हो जायेगा , रीमा चाची सबको बता देगी और फिर हमारे बाप हम दोनों को कच्चा चबा जायेगें | अब क्या होगा, उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी |

रीमा ने प्रियम की हालत देखी, उसे उस पर बहुत गुस्सा आ रहा था, जग्गू का भी पता लगाया जा रहा था | रीमा ने स्टाफ के वहां से जाने के बाद तीनो लोगो से कहा - क्या वो एक मिनट के लिए पीठ करके खड़े हो जायेगे | सभी ने एक दुसरे को अचम्भे से देखा, चूँकि रीमा का तीनो को ये पहला अनुरोध था, इसलिए आँखों हो आँखों में इशारा हुआ और बिना किसी सवाल जवाब के तीनो घूम गए | उनका घूमना था कि तड़ाक की आवाज से पूरा हाल गूँज उठा - आज के बाद जब मेरे साथ आना तो ये दोबारा कभी मत करना |

तीनो जन चौंक गए, अचानक मुड़कर देखा तो रीमा गुस्से से लाल पीली प्रियम को घूर रही है और प्रियम अपने गाल पर हाथ रखे अपने असहनीय दर्द को छिपाने की नाकाम कोशिश करता हुआ, रीमा को देख रहा है |

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[SIZE=150%] प्रियम को लगा रीमा चाची को सब पता चल गया है, अब तो उसका मरण तय है, उसकी आँखों में तेज पड़े झापड़ के दर्द के कारन आंसू छलक आये |

रीमा दांत पीसती हुई - मैंने मना किया था न शराब पीने से |

यहाँ सबके सामने वो कॉटेज की हरकत के लिए नहीं मार सकती थी, रीमा को गुस्सा इस बात का नहीं था की कॉटेज में वो नूतन से अपना लंड चुसवा रहा था, उसे गुस्सा इस बात का था कि नूतन ने दोनों के लंडो को जमकर चूसा, उन्होंने भी उसके मुहँ को जमकर चोदा, नूतन दोनों को जितना सुख दे सकती थी दिया, फिर अपने अपने लंड से पिचकारी निकलते ही दोनों ने अपने कपड़े सही किये और नूतन को वही छोड़कर बेपरवाह निकल गए | वासना का बुखार उतरते ही उनकी दिलचस्पी नूतन में ख़त्म हो गयी | वो बस नूतन के जिस्म के सहारे अपनी किशोरवय वासना बुझाना चाहते थे या उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था, और ये उन्हें नूतन ने ऑफर किया था, फिर भी दोनों को फर्ज बनता था कि अपने लंड मुरझाने के बाद भी थोड़ी देर नूतन के साथ बिताते, उसके साथ बाते करते और कायदे से जब तीनो साथ साथ आये थे तो उन्हें नूतन को साथ लेकर ही वहां से निकलना चाहिए था | अगर वो दोनों अपने साथ नूतन को लेकर निकलते तो ये नौबत नहीं आती या जग्गू के आने पर वो दोनों वहां मौजूद होते तो भी ये नहीं होता जो हुआ | प्रियम ने एक लम्बी साँस ली, ये राहत की साँस थी - थैंक गॉड रीमा चाची ने शराब के लिए थप्पड़ मारा |

प्रियम - आई ऍम सॉरी |

रीमा - अभी तुमारी इतनी भी उम्र नहीं है जो शराब पियो, एन्जॉय वो करो जो शरीर बर्दाश्त कर सके |

जग्गू का बाप - आप बिलकुल सही बोली है रीमा जी, आजकल के लड़के इसी नशे में तो बर्बाद है |

रीमा बेरुखी से - नशे की बात आप तो न ही करिए .......................|

कपिल ने उसे कुछ इशारा किया, जग्गु का बाप कुछ बोलना चाहता था लेकिन चुप हो गया, फिर दहाड़ा - अरे भाई कहाँ है जग्गू, इतनी देर हो गयी है और तुम लोग उसे ढूंढ नहीं पा रहे हो, साला सबकी पगार आधी करवा दूंगा |

कपिल भी स्टाफ से कहने लगा - जल्दी करो, हम लेट हो रहे है, मीटिंग ख़तम हो जाएगी |

रीमा - रात को १० बजे कौन सी मीटिंग होती है |

कपिल - सॉरी मीटिंग नहीं डीलिंग | मीटिंग तो ऑफिस में ही कर लेते है, लेकिन ऑफिस में तो सिर्फ मीटिंग मीटिंग करनी है ये बिज़नस डीलिंग ऐसी पार्टियों में ही होती है | तुम नहीं समझोगी |

रीमा - हूंम्मम्मम्म |

जग्गू के बाप को भी मीटिंग की देर हो रही थी - उसने किसी को फ़ोन मिलाया, बात की | उसके बाद रीमा और नूतन को मुखातिब होकर बोला - हमारे लड़के ने बड़ी गलती कर दी है, हमें माफ़ कर दो | नूतन बेटा मेरा वादा है जग्गू सुबह सब मेहमानों के सामने तुमारे पैरो में नाक रगड़ रगड़ कर माफ़ी मांगेगा | उस नालायक की हरकत के लिए एक दो बेटियों का बाप तुमसे मांफी मांगता है | इतना कहकर नूतन के सामने कमर तक झुक गया | नूतन असहज हो गयी, जब उसकी बाप की उम्र का आदमी उसके सामने हाथ जोड़कर कमर तक झुककर खड़ा हो जाये |

रीमा और नूतन को ये समझने में कुछ वक्त लगा, आखिर फ़ोन पर बात करने के बाद जग्गू का बाप एकदम से सरेंडर मोड में क्यों आ गया | असल में जब लाउन्ज का स्टाफ जग्गू को ढूढ़ने में नाकाम रहा तो उसने अपने ड्राईवर को फ़ोन मिलाया और ड्राईवर ने न केवल जग्गू के गाड़ी में सोने की बात बताई, बल्कि जाकर उसके हाथ पर दांतों का निशान भी चेक किया | इसलिए जग्गू का बाप रीमा और नूतन के सामने झुककर मांफी मांगने लगा | अभी वो नशे में धुत सो रहा था इसलिए जग्गू के बाप ने सुबह तक रुकने की रिक्वेस्ट करी | लाउन्ज के मालिक भी रीमा और नूतन से मिन्नतें करने लगा, कुछ भी हो जाये ये बात बाहर पब्लिक को पता नहीं चलनी चाहिए | उसने FIR न करने के लिए स्पेशल रिक्वेस्ट करी | उसने पैसे से लेकर सबके सामने जग्गू से माफ़ी मांगने का वादा भी कर दिया | जग्गू के बाप ने भी वादा किया वो सुबह सबके सामने जग्गू से माफ़ी मंगवायेगा |

पैसो का नाम सुनते ही नूतन थोड़ा नरम पड़ गयी, एक गरीब परिवार से थी इसलिए पैसो की अहमियत उससे ज्यादा कौन जान सकता था, ऊपर से अगर जग्गू उससे जबदस्ती न करता तो शायद चुदाई को छोड़कर वो अन्य तरह के सारे सुख जग्गू को भी दे सकती थी | फिलहाल उसकी इज्जत पर कोई आंच नहीं आई थी, लाउन्ज का मालिक और जग्गू का बाप दोनों उसके सामने नतमस्तक थे ऊपर से अच्छा खासा पैसा भी मिल रहा था | नूतन जैसी महत्वकांक्षी लड़की को और क्या चाहिए था |

कपिल रीमा के थोड़ा करीब जाकर कान के पास - रीमा जी, इस लड़की से बोलिए थोड़ा कोआपरेट करे | ये लोग माफ़ी मांगने के साथ साथ पैसा भी अच्छा खासा देने को तैयार है |

रीमा हैरानी से कपिल को देखती हुई, कुछ सोचकर - इसका फैसला मै कैसे ले सकती हूँ, नूतन ........ बोलो | रीमा को लगा था नूतन नहीं झुकेगी, क्योंकि उसकी जगह वो होती तो शर्तिया जग्गू को जेल भिजवाती , लेकिन नूतन की तरफ से हामी भरते ही रीमा सकते में आ गयी | नूतन की तरफ से ग्रीन सिग्नल मिलते ही तीनो ऐसे भागे, जैसे कोई ट्रेन छुट रही हो |

रीमा को उनका इस तरह जाना जरा अजीब लगा, लेकिन वो नूतन के इस फैसले से खिन्न हो गयी | उसके नैतिकता के सारे सिधान्तो को एक पल में नूतन ने ठेंगा दिखा दिया था | आज ही रीमा को पैसे की ताकत पता चली और क्यों लडकियां पैसो के लिए किसी भी नैतिकता और आदर्शो को ठोकर मारने को तैयार है | वही है जो ये सब ढोने की असफल कोशिश कर रही है | कोई नहीं मानता इन खोखली बातो को आजकल | सब बिकाऊ है बस बोली लगाने वाला होना चाहिए | हेय द्रष्टि से नूतन को देखती हुई अगर इसका रेप हो जाता तो उसकी भी ये कीमत वसूल लेती | कैसी है आजकल के ज़माने की लड़कियां | कहाँ एक पल पहले वो नूतन की रक्षा के लिए किसी भी हद तक उसका साथ देने को तैयार थी और अब उसे नूतन के पास खड़े होने में भी घुटन होने लगी|

खुद को समझती हुई बोली, चल यहाँ से वरना तेरे दिमाग की नशे ये सब सोच सोच कर फट जाएगी | अपने विचारो की उधेड़बुन में खोयी पड़ोस में खड़े प्रियम पर उसकी निगाह गयी | और उसके विचार एक पल में बदल गए | मै कौन होती हूँ किसी को चरित्र प्रमाण पत्र देने वाली, मै भी इसका लंड चूस चुकी हूँ, ये मेरे जिस्म का कोना कोना देख चूका है, मेरी चिकनी गुलाबी चूत न केवल देख चूका बल्कि उसका तो रसपान भी किया | अपने लड़के की उम्र के बच्चे के साथ नंगी होकर मैंने भी तो अपनी प्यास बुझाई थी, कीमत सिर्फ पैसो की ही तो नहीं होती | तुमारी वासना भी तो बेलागाम थी और प्रियम का लोलीपोप लंड चूसकर तुमने उसे बुझाया | आखिर तुमने भी तो रिश्तो की बलि चढ़ा दी, इसके आगे पैसो की कीमत तो बहुत कम है | पराये मर्द का लंड अपनी चूत में लेने वाली मै कौन होती हूँ किसी की चूत को कुलटा का सर्टिफिकेट देने वाली | उसे पैसे की जरुरत है और कमाने का मौका है तो पैसा वसूल रही है | तुम्हे भी तो लंड की जरुरत थी और जब रोहित तुमारे पास आया था तो तुम मना कर सकती थी लेकिन तुमने मना नहीं किया फिर तुम नूतन से अलग कैसे हो | सबकी अपनी अपनी जरूरते है | रीमा के मन के अंतर्द्वंद का कोई अंत नहीं था लेकिन उसकी चेतना मन की गहराई से बाहर निकल वास्तविकता में लौटी, एक पल पहले जो मन नूतन के फैसले पर व्याकुल था वहां अब शांति थी और रीमा का मन स्थिर हो चूका था |

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[SIZE=150%] रीमा प्रियम से मुखातिब हुई - कहानी समझ आई या फिर से समझाऊ | चलो इतनी रात को मै वापस शहर नहीं जाउंगी | सुबह जब जग्गू नूतन से मांफी मांग लेगा तभी यहाँ से निकलूंगी | तब तक चलकर सोते है आराम से | एक काम करो तुम दोनों लोग चलो, मै जरा रूम की चाभी लेकर आती हूँ |

नूतन बोली - मै अकेले कंही नहीं जाउंगी |

रीमा - ठीक है एक मिनट रुको, मै (हाल के कोने में बने काउंटर पर बैठे आदमी की तरफ इशारा करके ) चाभी लेकर आती हूँ |

काउंटर पर बैठ आदमी फ़ोन में गौर से एकटक कुछ देखने में बिजी था | रीमा काउंटर पर गयी - गेस्ट कोड 17R के रूम की चाभी देना | उस आदमी में एक बड़ा सी चाभियो से भरी ड्रोर से दो चाभी निकाली और रीमा को दे दी | रीमा उसको थैंक्यू बोलकर बस आगे ही बढ़ी थी, पीछे से काउंटर पर बैठे आदमी ने उसे रोका - सॉरी मैडम, वो मैंने आपको एक गलत चाभी दे दी | एक आपके रूम की चाभी है, दूसरी मैंने आपको गलती से दे दी है |

असल में फ़ोन पर वो कुछ अश्लील फिल्म देख रहा था, इसलिए उसका पूरा ध्यान वही लगा हुआ था | रीमा की तेज निगाहे से उसका फ़ोन बच नहीं पाया | उसने सकपकाते हुए फ़ोन ऑफ किया | वो समझ गयी की ये फ़ोन पर क्या देख रहा था रीमा ने एक बार उस आदमी को घूर कर देखा और एक बार चाभी को, काउंटर पर बैठे आदमी ने चाभी लेने के लिए हाथ आगे किया | रीमा ने उसकी तरफ ध्यान देने की बजाय चाभी को ध्यान से देखा,चाभी पर 17R नंबर पड़ा था, उसने पहले वाली चाभी को देखा उस पर भी 17R पड़ा था |

रीमा ने दोनों चाभी को गौर से देखा, एक चाभी के दूसरी तरफ पैराडाइज लिखा था | रीमा ने पूछ लिया - दोनों चाभियो पर नंबर तो एक जैसा ही पड़ा है |

वो आदमी सकपकाया - मैडम वो मीटिंग रूम की चाभी है |

रीमा - मीटिंग रूम, जहाँ ये कपिल मीटिंग करने गया है |

स्टाफ - जी वो हमें नहीं मालूम |

रीमा - तुम्हें मालूम नहीं है तो यहाँ क्यों बैठो हो, जिसको पता है उसको बैठाओ यहाँ पर |

स्टाफ - मैडम, हमें जितना बताया जाता है उतना ही कर सकते है | आपकी चाभी ये है, वो पैराडाइज वाली चाभी आप वापस कर दीजिये |

रीमा चाभी को देखती हुई - ये पैराडाइज क्या है ?

स्टाफ - मैडम मुझे नहीं पता है, मुझे बस इस कंप्यूटर स्क्रीन पर आता है किस गेस्ट को कौन सी चाभी देनी है, मै उसे निकालकर दे देता हूँ |

रीमा - तुम्हे नहीं पता है तो किसको पता होगा ? उसका नाम बतावो नहीं तो मै तो दोनों चाभियाँ रखूंगी |

स्टाफ गिडगिडाने लगा - आप मेरे सुपरवाइजर से बात कर लो मैडम, मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता |

रीमा - सुपरवाइजर कौन है उसे यहाँ बुलाओ |

स्टाफ सरेंडर की मुद्रा में आ गया - मैडम मै आपकी फ़ोन पर बात करा सकता हूँ, मैडम आप समझ नहीं रही है मेरी नौकरी चली जाएगी | मालिक का सख्त आदेश है, किसी से जरा सी भी गड़बड़ हो तो उसे तुरंत नौकरी से निकाल दो |

रीमा ने स्टाफ की रोनी सी शक्ल देखि फिर चाभी को गौर से देखा, एक बार को उसने पैराडाइज वाली चाभी वापस करने को हाथ आगे भी बढ़ा दिया, फिर तेजी से वापस पीछे खीच लिया | रीमा ने प्रियम को इशारे से बुलाया, उसे अपने रूम की चाभी दी और बिल्डिंग में जाकर सोने को बोला | उसने प्रियम से थोड़ी देर में आने को बोला, वो बस दूसरी चाभी वाला मसला दूर करके आ जाएगी | साथ ही हिदायत दी नूतन को कही भी अकेला न छोड़े | साथ में लेकर सीधे रूम में जाये |

प्रियम नूतन चले गए | रीमा अब इस चाभी का सच जानना चाहती थी |

रीमा - दोनों चाभी एक जैसी, फिर मै इस चाभी को अपने साथ क्यों नहीं ले जा सकती | ये बताओ कपिल ले गया है ऐसी चाभी |

स्टाफ वाला बंदा कुछ सकुचाया, रीमा ने घुड़का - कंप्यूटर में देखकर बताते हो या फ़ोन वाली बात बताऊ तुमारे मालिक को और हाँ मै ये चाभी लेकर जा रही हूँ |

स्टाफ बस रीमा के पैरो में गिरने को रह गया था - मैडम मेरी नौकरी चली जाएगी |

रीमा - नहीं बताएगा, नौकरी तो तेरी वैसे भी जानी है |

स्टाफ बहुत ही धीमी आवाज में - हाँ मैडम, जिसको मीटिंग करनी होती है उसको ये चाबी दी जाती है और मीटिंग करने सब बड़े लोग आते है, हमें तो बस अपना काम करना होता है | मैडम प्लीज किसी को बताना मत की मैंने ये बात आपको बताई है |

इससे पहले वो कुछ समझ पाता, रीमा ने मॉनिटर की स्क्रीन अपनी तरफ मोड़ ली | पार्टी में आये गेस्ट में से जिनको भी वो जानती थी सबको पैराडाइज वाली चाभी भी असाइन थी | मजे की बात सॉफ्टवेर में मास्टर की भी दिख रही थी | रीमा ने मास्टर की का नंबर देखा, मॉनिटर स्क्रीन वापस उस बन्दे की तरफ घुमाते हुए - मै ये चाभी तुम्हें वापस कर दूँगी लेकिन एक शर्त पर, ये बतावो मै तुम्हें कैसी लगती हूँ |

वो भौचंका सा रीमा को देख रहा, वो कुछ समझ ही नहीं पाया, क्या बोले, क्या रियेक्ट करे |

रीमा - देखो मुझे M01R पैराडाइज चाहिए, मुझे पता है तुम पोर्न देख रहे थे और तुमने मुझे गलत चाभी भी दी है अब अगर मै अभी तुमारे बॉस को बुला लू या इस लाउन्ज के मालिक को तो तुमारी छुट्टी पक्की है | मै तुम्हे ये चाभी वापस कर दूँगी लेकिन M01R पैराडाइज चाभी चाहिए |

स्टाफ वाला बंदा हलकान हो गया, किर्तव्य विमूढ़ सा बैठा, क्या करे क्या न करे |

रीमा - देखो मेरे पास टाइम नहीं है, मुझे बस जाना है और वापस आना है २ मिनट लगेगे | मै थक गयी हूँ फिर मुझे सोने जाना है | ये चाभी मेरे हाथ में है, जल्दी से सोच लो |

स्टाफ - मैडम मेरी नौकरी चली जाएगी, मै सड़क पर आ जाऊंगा |

रीमा - नौटंकी मत कर ये ड्यूटी पर बैठकर पोर्न देखने से पहले सोचना चाहिए था | चल निकाल कर चाभी दे, नहीं तो अपने ऊपर वाले को फ़ोन लगा |

स्टाफ - मैडम आप दो मिनट में आ जाएँगी न |

रीमा - पक्का लेकिन जब चाभी देगा तब तो वापस आउंगी |

स्टाफ के बन्दे ने कांपते हाथो से ड्रोर से चाभी का गुच्छा निकाला, रीमा ने उसके हाथ से गुच्छा झपट लिटा और पलक झपकते ही चाभियाँ पलट पलट कर M01R दूंढ निकाली |

चाभी हाथ में आते ही - किधर जाना है, जल्दी बोल |

स्टाफ - मैडम वो मुझे नहीं पता, वो सिर्फ मेरे सुपरवाइजर को पता है |

रीमा - तू न बहुत बड़ा नौटंकी है, फ़ोन कर और पूँछ कर बता |

स्टाफ - मैडम मै नहीं पूँछ सकता, मालिक का सख्त आदेश है पैराडाइज के बारे स्टाफ में कोई भी किसी तरह की बात नहीं करेगा, न ही कोई जानकारी जुटाने की कोशिश करेगा | मैडम हमें कुछ नहीं पता, हम बस चाभी मैनेज करते है |

रीमा को लगा इस पर टाइम खराब करने से अच्छा है खुद ही ढूंढ ले | वो चाभी ले तेजी से बाहर निकली | स्टाफ - मैडम जल्दी आना, वरना मेरी नौकरी चली जाएगी | बाहर निकलते ही रीमा पहले गेस्ट के ठहरने के लिए बनी बिल्डिंग की ओर चली लेकिन तभी उसके दिमाग में कुछ कौंधा | जब वो प्रियम को ढूढ़ने पीछे की तरफ जा रही थी | तभी एक कॉटेज में तीन चार लड़कियां जाती दिखाई दी थी, जब तक रीमा उनके करीब पंहुचती कॉटेज बंद हो चूका था | जहाँ तक रीमा को याद है वो उस पार्टी में कही नहीं दिखी थी | कॉटेज के गेट पर एक हैंडल लॉक था और गेट पर लाइट्स जल रही थी, लेकिन कॉटेज का गेट खुलने और बंद होने के बीच कॉटेज में से कोई लाइट निकलती नहीं दिखाई दी | रीमा अच्छे से याद करके उस तरफ बढ़ी | लान की लाइट्स या तो बंद हो चुकी थी या डिम कर दी गयी थी | जब रीमा उस कॉटेज के पास पंहुची तो वहां घनघोर अँधेरा था | उसके आस पास की लाइट्स अब बंद हो गयी थी | रीमा कॉटेज के दरवाजे में लगे हैंडल को मोबाईल की रौशनी में देखने से पहचान गयी | उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, इसका अहसास मंजिल के इतने करीब आकर हुआ | पता नहीं क्या हो रहा होगा अन्दर | मुझे क्यों अन्दर जाना चाहिए | जिसको जो करना है करे, मुझसे क्या मतलब | मै क्यों फालतू में किसी के लफड़े में पडू | अगर यहाँ किसी ने देख लिया, हाय मै तो शर्म से पानी पानी हो जाउंगी, क्या मुहँ दिखाउंगी इन सबको | अभी सबके सामने शान से छाती उठकर चलती हूँ, पता नहीं अन्दर क्या होगा, कौन होगा, क्यों फ्री फंड में मुसीबत को खुद ही दावत दे रही हूँ | इतने समझाने के बाद भी रीमा के मन के सवाल जस के तस थे | आखिर सबको पैराडाइज की चाभी क्यों दी गयी है सिवाय मुझे छोड़कर | क्या ये सब पहले भी आते रहे है या मै रोहित के बदले चली आई इसलिए | आखिर ये सब के सब औरते भी कौन सी मीटिंग कर रहे है | सिर्फ मै ही क्यों अकेले छोड़ दी गयी | मुझे अन्दर जाकर एक बार पता तो लगाना ही चाहिए | लेकिन अन्दर जाते हुए किसी ने मुझे देख लिया तो कितनी शर्मिंदगी होगी |

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