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शहनाज अदा से चलती हुई राज के सामने आई और बोली- "मैं खाना लगाती हूँ, चलिए कुछ खा लीजिए "
वसीम अपनी मीटिंग खतम कर चुका था। उसके पास अब कोई काम नहीं था। लेकिन वो घर नहीं जाना चाहता था। वो शहनाज को बोल चुका था की वो कल आएगा। उसने एक होटल लिया और वहीं शिफ्ट हो गया। उसका बिल्कुल मन नहीं लग रहा था। शादी के बाद ये पहली रात थी उसकी शहनाज के बिना। जब वो इस शहर में आया था तो एक सप्ताह बड़ी मुश्किल से काटा था उसने। तब मजबूरी थी। लेकिन आज वो यहाँ है और उसकी बीवी किसी और के साथ सुहागरात मना रही है। उसे बहुत बुरा लग रहा था। बहुत गुस्सा आ रहा था की क्यों उसने शहनाज को पर्मिशन दिया ।
वसीम को शहनाज में भी गुस्सा आ रहा था की कौन औरत ऐसा करती है। राज पे भी गुस्सा आ रहा था की उसने मेरी भोली भाली बीवी को फँसा लिया। लेकिन सबसे ज्यादा नाराज वो खुद से था । मुझे शहनाज को शुरू में ही डांटना चाहिए था। मैंने उसे पता नहीं क्यों किसी और से चुदवाने की पर्मिशन दे दी। अभी वो बूढ़ा मेरी हसीन बीवी के जवान जिश्म से खेल रहा होगा। उसका मन हुआ की अभी तुरंत घर चला जाए लेकिन अब काफी देर हो चुकी थी। वो दूसरे शहर में था और अब उसके पहुँचते-पहुँचते आधी रात हो जाती। इससे तो अच्छा है की अब जो जो रहा है होने दूं ।
शहनाज किचेन में चली गई खाना लाने। उसके चलने से चूड़ियों और पायल की छन-छन और खन खन हो रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे एक अप्सरा कमरे में चहल कदमी कर रही है। शहनाज खाना डाइनिंग टेबल पे लगा दी। राज आकर चेयर पे बैठ गया और शहनाज राज की गोद में जा बैठी। वो अपना धर्म निभा रही थी। मदद करने का धर्म और पत्नी होने का धर्म। आज की रात वो राज को किसी तरह की कमी नहीं होने देना चाहती थी। उसे वो सब कुछ मिलना चाहिए जो वो सोचता है चाहता है।
शहनाज राज से पूछना चाहती थी- "कैसा लगा मुझे चोदकर ? अब तो आप खुश हैं ना? अब तो आप संतुष्ट हैं ना? अब तो आप रिलैक्स रहेंगे ना?" लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हुई। वो अभी भी एक संस्कारी औरत थी जो सेक्स के बारे में ज्यादा बात नहीं कर सकती थी।
शहनाज खाना हाथ में लेकर राज के मुँह में देने लगी। राज शहनाज के बदन को सहला रहा था और खा रहा था। फिर वो भी शहनाज को खिलाने लगा। बारे प्यार से दोनों खाना खा और खिला रहे थे।
कितनी बार शहनाज अपने मुँह में पूड़ी का टुकड़ा लेकर लिप किस करते हुए राज को दी। राज भी ऐसा ही कर रहा था। शहनाज राज के लुंगी को साइड में कर दी थी और उसके लण्ड को भी सहला रही थी। शहनाज खीर को अपने चेहरा पे लगा ली और राज चूमते चाटते हुए उसे साफ करने लगा। शहनाज का तौलिया उसके बदन से गिर पड़ा और वो फिर से नंगी हो गई। शहनाज खीर को अपनी चूचियों पे लगा ली और राज के सामने कर दी।
राज - “आहह.... मेरी जान, तुमने मुझे खुश कर दिया उम्म्म... उंमन्न..” बोलता हुआ शहनाज की चूचियों पे लगी खीर को खाने लगा।
फिर शहनाज नीचे बैठकर लण्ड पे खीर लगाकर चूसने लगी। थोड़ी देर में राज ने उसे मना कर दिया। वो अभी लण्ड का पानी नहीं गिराना चाहता था।
शहनाज सारा बर्तन समेटी और छन-छन करती हुई नंगी ही किचेन में चली गई। दो मिनट में बर्तन धोकर वो बाथरूम में घुस गई। पसीने से ऐसे ही उसका बदन भीग चुका था और खीर लगने से चिप चिप कर रहा था। वो नंगी ही बाथरूम में गई और दो मिनट में ही जल्दी से नहाकर बदन पोंछकर बाहर आ गई। वो राज को अकेला नहीं छोड़ना चाह रही थी। वो नहीं चाहती थी की राज को लगे की शहनाज उससे दूर है। वो उसके लिए हमेशा उपलब्ध रहना चाहती थी।
शहनाज रूम में आ गई और अपना मेकप ठीक करने लगी। वो चेहरे पे क्रीम लगा ली और काजल, बिंदी लगाने के बाद माँग में सिंदूर भरने लगी। उसे वसीम का ख्याल आया। शहनाज सच में आज वसीम को भूल गई थी। सुबह बात करने के बाद वो वसीम से बस एक बार शाम में बात कर पाई थी, वो भी बस एक मिनट ।
शहनाज को राज से चुदवाने की हड़बड़ी थी और उसकी तैयारियों के बीच वो वसीम से बात ही नहीं की। वसीम ने दिन में भी दो बार काल किया था लेकिन पार्लर में होने की वजह से वो काल ले नहीं पाई थीं। शाम का काल भी वसीम ने ही किया था, जिसमें शहनाज ने ठीक से बात नहीं की थी। शहनाज अपराधी महसूस करने लगी। शादी के बाद वो वसीम से कभी अलग नहीं रही थी। एक हफ्ते के लिए जब वसीम यहाँ आए थे पहली बार और रूम नहीं मिला था तब और फिर आज बाकी हर रात दोनों ने एक साथ गुजारी थी।
वसीम भी उस एक हफ्ते में परेशान हो गया था और शहनाज भी पिया बिना 'जल बिन मछली की तरह तड़प उठी थी। लेकिन आज तो उसे वसीम का ख्याल भी नहीं आया था। वो सोची की मैं तो यहाँ हूँ, लेकिन वो तो अकेले होंगे। वो तो परेशान होंगे। वो सोची की बात कर लेती हूँ वसीम से और उसे बता देती हूँ। लेकिन फिर उसे लगा की अभी बात करूँगी तो राज को पता चल जाएगा और हो सकता है की उसे बुरा लगे। नहीं, कहीं ऐसा ना हो की मेरी कोई छोटी सी बात से इतना सारा कुछ किया हुआ बेकर हो जाए। वो सोच रही थी लेकिन फिर उसे लगा की नहीं, आज वो राज की है। ये राज के नाम का सिंदूर है और वसीम भी तो यही चाहता था की वो पूरी तरह राज को संतुष्ट करे ।
शहनाज अपना मेकप भी जल्दी पूरा कर ली थी। उसे नंगी बाहर जाने में शर्म आ रही थी, लेकिन वो कोई कपड़ा भी नहीं पहनना चाहती थी। हो सकता है की कपड़ा पहन लेने पे राज कुछ आड महसूस करे वो तौलिया उठाकर लपेटने लगी फिर उसे खुद पे हँसी आ गई की अभी थोड़ी देर पहले भी वो तौलिया पहनी थी और थोड़ी देर भी उसके बदन पे रह नहीं पाया था। और वैसे भी अभी तुरंत तो चुदवाकर उठी हूँ और इस तौलिया से मैं क्या ढक पाऊँगी भला ।
फिर शहनाज नंगी ही बाहर आ गई और राज के पास पहुँची। राज तब तक सोफे पे बैठकर आज की वीडियो रेकार्डिंग देख रहा था, और अपने लण्ड को अपने हाथ से हल्का-हल्का सहला रहा था। शहनाज भी राज के पीछे खड़ी होकर देखने लगी। बहुत अच्छे से रेकार्डिंग की थी राज ने ।
शहनाज अपना नंगापन देखकर शर्माने लगी। वो आहह.... उह्ह... करती हुई अपना बदन ऐंठ रही थी और चुदवाने के लिए पागल हो रही थी। उसे बहुत शर्म आ रही थी की वो कैसी थी और क्या हो गई? उसने कभी सपने में भी खुद को इस तरह नहीं देखा था और यहाँ वो पोर्न फिल्मो की इंग्लीश हीरोइनों को भी मात दे रही थी।
वसीम अपनी मीटिंग खतम कर चुका था। उसके पास अब कोई काम नहीं था। लेकिन वो घर नहीं जाना चाहता था। वो शहनाज को बोल चुका था की वो कल आएगा। उसने एक होटल लिया और वहीं शिफ्ट हो गया। उसका बिल्कुल मन नहीं लग रहा था। शादी के बाद ये पहली रात थी उसकी शहनाज के बिना। जब वो इस शहर में आया था तो एक सप्ताह बड़ी मुश्किल से काटा था उसने। तब मजबूरी थी। लेकिन आज वो यहाँ है और उसकी बीवी किसी और के साथ सुहागरात मना रही है। उसे बहुत बुरा लग रहा था। बहुत गुस्सा आ रहा था की क्यों उसने शहनाज को पर्मिशन दिया ।
वसीम को शहनाज में भी गुस्सा आ रहा था की कौन औरत ऐसा करती है। राज पे भी गुस्सा आ रहा था की उसने मेरी भोली भाली बीवी को फँसा लिया। लेकिन सबसे ज्यादा नाराज वो खुद से था । मुझे शहनाज को शुरू में ही डांटना चाहिए था। मैंने उसे पता नहीं क्यों किसी और से चुदवाने की पर्मिशन दे दी। अभी वो बूढ़ा मेरी हसीन बीवी के जवान जिश्म से खेल रहा होगा। उसका मन हुआ की अभी तुरंत घर चला जाए लेकिन अब काफी देर हो चुकी थी। वो दूसरे शहर में था और अब उसके पहुँचते-पहुँचते आधी रात हो जाती। इससे तो अच्छा है की अब जो जो रहा है होने दूं ।
शहनाज किचेन में चली गई खाना लाने। उसके चलने से चूड़ियों और पायल की छन-छन और खन खन हो रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे एक अप्सरा कमरे में चहल कदमी कर रही है। शहनाज खाना डाइनिंग टेबल पे लगा दी। राज आकर चेयर पे बैठ गया और शहनाज राज की गोद में जा बैठी। वो अपना धर्म निभा रही थी। मदद करने का धर्म और पत्नी होने का धर्म। आज की रात वो राज को किसी तरह की कमी नहीं होने देना चाहती थी। उसे वो सब कुछ मिलना चाहिए जो वो सोचता है चाहता है।
शहनाज राज से पूछना चाहती थी- "कैसा लगा मुझे चोदकर ? अब तो आप खुश हैं ना? अब तो आप संतुष्ट हैं ना? अब तो आप रिलैक्स रहेंगे ना?" लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हुई। वो अभी भी एक संस्कारी औरत थी जो सेक्स के बारे में ज्यादा बात नहीं कर सकती थी।
शहनाज खाना हाथ में लेकर राज के मुँह में देने लगी। राज शहनाज के बदन को सहला रहा था और खा रहा था। फिर वो भी शहनाज को खिलाने लगा। बारे प्यार से दोनों खाना खा और खिला रहे थे।
कितनी बार शहनाज अपने मुँह में पूड़ी का टुकड़ा लेकर लिप किस करते हुए राज को दी। राज भी ऐसा ही कर रहा था। शहनाज राज के लुंगी को साइड में कर दी थी और उसके लण्ड को भी सहला रही थी। शहनाज खीर को अपने चेहरा पे लगा ली और राज चूमते चाटते हुए उसे साफ करने लगा। शहनाज का तौलिया उसके बदन से गिर पड़ा और वो फिर से नंगी हो गई। शहनाज खीर को अपनी चूचियों पे लगा ली और राज के सामने कर दी।
राज - “आहह.... मेरी जान, तुमने मुझे खुश कर दिया उम्म्म... उंमन्न..” बोलता हुआ शहनाज की चूचियों पे लगी खीर को खाने लगा।
फिर शहनाज नीचे बैठकर लण्ड पे खीर लगाकर चूसने लगी। थोड़ी देर में राज ने उसे मना कर दिया। वो अभी लण्ड का पानी नहीं गिराना चाहता था।
शहनाज सारा बर्तन समेटी और छन-छन करती हुई नंगी ही किचेन में चली गई। दो मिनट में बर्तन धोकर वो बाथरूम में घुस गई। पसीने से ऐसे ही उसका बदन भीग चुका था और खीर लगने से चिप चिप कर रहा था। वो नंगी ही बाथरूम में गई और दो मिनट में ही जल्दी से नहाकर बदन पोंछकर बाहर आ गई। वो राज को अकेला नहीं छोड़ना चाह रही थी। वो नहीं चाहती थी की राज को लगे की शहनाज उससे दूर है। वो उसके लिए हमेशा उपलब्ध रहना चाहती थी।
शहनाज रूम में आ गई और अपना मेकप ठीक करने लगी। वो चेहरे पे क्रीम लगा ली और काजल, बिंदी लगाने के बाद माँग में सिंदूर भरने लगी। उसे वसीम का ख्याल आया। शहनाज सच में आज वसीम को भूल गई थी। सुबह बात करने के बाद वो वसीम से बस एक बार शाम में बात कर पाई थी, वो भी बस एक मिनट ।
शहनाज को राज से चुदवाने की हड़बड़ी थी और उसकी तैयारियों के बीच वो वसीम से बात ही नहीं की। वसीम ने दिन में भी दो बार काल किया था लेकिन पार्लर में होने की वजह से वो काल ले नहीं पाई थीं। शाम का काल भी वसीम ने ही किया था, जिसमें शहनाज ने ठीक से बात नहीं की थी। शहनाज अपराधी महसूस करने लगी। शादी के बाद वो वसीम से कभी अलग नहीं रही थी। एक हफ्ते के लिए जब वसीम यहाँ आए थे पहली बार और रूम नहीं मिला था तब और फिर आज बाकी हर रात दोनों ने एक साथ गुजारी थी।
वसीम भी उस एक हफ्ते में परेशान हो गया था और शहनाज भी पिया बिना 'जल बिन मछली की तरह तड़प उठी थी। लेकिन आज तो उसे वसीम का ख्याल भी नहीं आया था। वो सोची की मैं तो यहाँ हूँ, लेकिन वो तो अकेले होंगे। वो तो परेशान होंगे। वो सोची की बात कर लेती हूँ वसीम से और उसे बता देती हूँ। लेकिन फिर उसे लगा की अभी बात करूँगी तो राज को पता चल जाएगा और हो सकता है की उसे बुरा लगे। नहीं, कहीं ऐसा ना हो की मेरी कोई छोटी सी बात से इतना सारा कुछ किया हुआ बेकर हो जाए। वो सोच रही थी लेकिन फिर उसे लगा की नहीं, आज वो राज की है। ये राज के नाम का सिंदूर है और वसीम भी तो यही चाहता था की वो पूरी तरह राज को संतुष्ट करे ।
शहनाज अपना मेकप भी जल्दी पूरा कर ली थी। उसे नंगी बाहर जाने में शर्म आ रही थी, लेकिन वो कोई कपड़ा भी नहीं पहनना चाहती थी। हो सकता है की कपड़ा पहन लेने पे राज कुछ आड महसूस करे वो तौलिया उठाकर लपेटने लगी फिर उसे खुद पे हँसी आ गई की अभी थोड़ी देर पहले भी वो तौलिया पहनी थी और थोड़ी देर भी उसके बदन पे रह नहीं पाया था। और वैसे भी अभी तुरंत तो चुदवाकर उठी हूँ और इस तौलिया से मैं क्या ढक पाऊँगी भला ।
फिर शहनाज नंगी ही बाहर आ गई और राज के पास पहुँची। राज तब तक सोफे पे बैठकर आज की वीडियो रेकार्डिंग देख रहा था, और अपने लण्ड को अपने हाथ से हल्का-हल्का सहला रहा था। शहनाज भी राज के पीछे खड़ी होकर देखने लगी। बहुत अच्छे से रेकार्डिंग की थी राज ने ।
शहनाज अपना नंगापन देखकर शर्माने लगी। वो आहह.... उह्ह... करती हुई अपना बदन ऐंठ रही थी और चुदवाने के लिए पागल हो रही थी। उसे बहुत शर्म आ रही थी की वो कैसी थी और क्या हो गई? उसने कभी सपने में भी खुद को इस तरह नहीं देखा था और यहाँ वो पोर्न फिल्मो की इंग्लीश हीरोइनों को भी मात दे रही थी।