राहुल और निकुल गद्दी में तेजी से आगे बाद रहे थी.. और फिर वो उसे जगह पे पहुंच गये जहाँ पे आक्सिडेंट हुआ था. आक्सिडेंट वाली जगह पे बॅरियर्स लगे हुए थे.काफी बड़ा एरिया बंद करा हुआ
था..लेकिन इस वक्त वहां पे कोई भी पुलिस वाला ने था..इसलिए उसे बेअरिएर को क्रॉस करते हुई निकुल और राहुल उसे आक्सिडेंट की मैं जगह पे पहुंच गयी...
दोनों आगे बढ़ते जा रहे थी.. फिर उन्हें खून का बहुत बड़ा स्पॉट दिखा..
यहाँ शायद दीक्षा ने आखिरी. राहुल ने इतना ही कहा और आगे बाद चला...
निकुल :- राहुल तुझे क्या लगता है जो तूने कल देखा क्या उससे इस आक्सिडेंट का कोई रीलेशन है.
हाँ है यार. वो देख रोड की साइड में पानी पड़ा है...
निकुल :- लेकिन यहाँ आया कैसे.
शायद उसे पीपे से.. राहुल ने साइड में लगी पीपे की तरफ इशारा किय्ाआ..
निकुल :- और तूने कहा था की गेम की ड्राइवर तेरी दीक्षा लगी और उसका गेम में आक्सिडेंट भी हुआ.एक ट्रक से ही...
हाँ. बिलकल और उसके बाद रात में एक गिलास गिरा. वो भी गोल था.और पुलिस के मुताबिक ट्रेन में गोल गोल बारे पिल्लर्स थी.. तुझे नहीं लगता की ये सब एक कनेक्टेड है..
निकुल :- हम..पर मेरी एक बात समझ नहीं आई.. ये दीक्षा कब्रिस्तान की तरफ क्यों जा रही थी अपनी घर जाने की बजाए..
राहुल :- यार यही बात तो मुझे खाए जा रही है.. मगर मुझे ऐसा लग रहा है की दीक्षा ने हमसे पक्का कुछ छुपाया था.कुछ ऐसा जो वो हमें नहीं बताना कहती थी.
निकुल :- तो फिर.
हमें खुद पता करना होगा..राहुल ने कुछ सोचते हुई कहा.
ई वॉंट तो चेक थे दीक्षा डेस्क.राहुल ने रिसेप्षन पे बैठी लड़की से कहा..
नो सर अभी कॅंट गेव आ पर्मिशन फॉर तीस ई आम सॉरयी..
ई हॅव आ तीस पर्मिशन माँ.. ( उसने पुलिस का एक पेपर दिया)
ओहक यू कॅन गो और चेक इट.
थेन्क यू .. (बोलते हुई राहुल और निकुल निकल जाते हैं और पहुंच जाते हैं दीक्षा की डेस्क पे..)
यहाँ क्या मिलेगा... निकुल ने डेस्क को खोल के उसमें से देखते हुई कहा.
शायद कुछ मिल जाई.. राहुल भी खोज बिन मैंने जुड्डा हुआ था.
कुछ देर तक धुंते रहे..
कुछ नहीं है यार जो ढंग का मिला हो हमें... निकुल परेशान होते हुए बोला.
रहल भी दाँत पीस की खड़ा रहता है की तभी उसकी नज़र डस्टबिन पे पड़ती है.. उसके दिमाग मैंने कुछ आता है..और वो उससे गिरा की उसमें ढूंढ़ने लगता है..पेपर ही पेपर पड़े थे उस्मी.
वो हात्स ए टटोलने लगता है की तभी उसके हाथ में एक छोटा सा पेपर आता है.वो उससे उठा के निकुल को दिखता है...
निकुल :- राहुल ये तो...
राहुल :- मैंने कहा था ना दीक्षा ने कुछ छुपाया है हमसे.. पर क्यों.. ये बात समझ नहीं आई...
राहुल में नहीं जाऊंगा उसके घर. में उसकी शक्ल भी देखना नहीं कहता..निकुल चिढ़ता हुआ बोला.
राहुल :- ठीक है तू गद्दी में बैठा रही.. में होकर आता हूँ..
निकुल :- तुझे नहीं लगता हमें उससे नहीं मिलना कही.
राहुल :- मिलना तो मैंने भी नहीं कहता था..लेकिन इस वक्त हमारे पास कुछ ऐसा है जिससे करना जरूरी है ना की पेरोसनल बातों को लेकर बैठना समझा..तू रुक में आता हूँ.
राहुल बोटला हुआ निकल जाता है गद्दी सी..और फिर दरवाजा पे जाकर नॉक करता है..दरवाजा खुलता है सामने एक औरत खड़ी होती है..
क्या में सोनल माँ से मिल सकता हूँ?
आप? उसे औरत ने पूछा..
उनको कहना मिस्टर राहुल आए हैं. वो समझ जाएँगी..
आप अंदर आई..
नहीं में बाहर ही ठीक हूँ आप प्लीज़ बुला देनगीए..में बाहर उसे गर्दन में हूँ..
बोलते हुआ राहुल गर्दन की तरफ चला गया और वहां खड़ा सोचने लगा. कुछ मिनट बाद उसके कानों में आवाज़ पड़ा...
इसे....
राहुल आवाज़ सुन के पीछे घुमा.और सामने खड़ी सोनल को देखा.
सोनल आज भी बिलकल वैसे ही थी. राहुल को सामने देख के सोनल भी थोड़ा शॉक्ड हो गयी उससे लगा कोई और राहुल होगा.
ई आम नोट एक्सपेक्टिंग यू अगेन.. सोनल मुस्कुराते हुई बोली..
लेकिन राहुल ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया..
राहुल :- सोनल ई नींद तो अस्क यू सम्तिंग.. और ई वुड लाइक यू तो गेव में आ राइट आन्सर्स?
सोनल :- दो यू थिंक ई ल्ल गेव यू आन्सर्स ऑफ और क्वेस्चन्स.. ई आम नोट युवर सर्वेंट..यू कॅन गो नाउ..(बोलते हुई मुड़ते हुई जाने लगती है)
अगर में यूँ कहूँ की जो में बात करने जा रहा हूँ उसमें तुम्हारी जिंदगी जुद्डी हुई है तब भी तुम बात नहीं करोगी...राहुल ने सीधे अपने मतलब की बात की..
ये सुन के सोनल के दिमाग की बत्ती जल्ली और वो एक दम से रुक गयी और राहुल की तरफ मुड़ती हुई बोली..
क्या क्वेस्चन्स करना कहते हो तुम...
राहुल :- मेरा पहला सवाल. 10 को तू और दीक्षा कहाँ थे?
सोनल राहुल का क्वेस्चन पूछ के थोड़े टेंस्न में चली जाती थी है जिससे राहुल साफ देख पा रहा था.. राहुल :- सोनल तुम और दीक्षा 10 को कहाँ थे?
सोनल :- वॉट दो यू मीन? (आटिट्यूड के साथ बोलते हुए)
राहुल :- आन्सर में क्वेस्चन ... (राहुल ने अपनी बात पे ज़ोर देते हुए कहा)
वॉट रब्बिश.. ई आम अट में होम.. दीक्षा वो अपनी ऑफिस में होगी मुझे क्या पता.. सोनल ने अपने बालों को
ठीक करते हुए कहा..
राहुल :- ई आम आस्किंग तीस क्वेस्चन लास्ट टाइम.. वेर थे हेल बहुत ऑफ यू अट 10त सेप्टेंबर?
(इस बार उसकी आवाज़ में गुस्सा था)
सोनल कुछ सोच में डूब गयी..
यू अरे नतिंग तो टॉक में लाइक तीस. यू गो तो हेल..(सोनल ने गुस्सा करते हुए कहा और दुबारा मूंड़ के जाने
लगी..)
दीक्षा इस डेड.. राहुल की ये कहते ही सोनल दुबारा रुकी और अचानक से टर्न लिया और राहुल को घूरने लगी.
यू अरे नोट टेकिंग में सीरियस्ली डियर.. राहुल ने अपनी पॉकेट में हाथ डाला और उसमें से कुछ निकल की सोनल
को दिखाया..
राहुल :- ई थिंक नाउ यू रिमेंबर. लुक सोनल तेल में थे ट्रूथ.. इट्स अबौट थे लाइफ .. हमारी जिंदगी और
तुम्हारी भी. थे ऑल डिपेंड्स ऑन और ट्रूथ. सो जस्ट तेल में वेट्स गोयिंग ऑन.
सोनल ने एक लंबी सांस छोड़ी...
इट्स अन्बिलीवबल दीक्षा इस डेड. कल ही तो बात हुई थी मेरी उससे..
राहुल :- ई आम नोट हियर तो लिसन और तिस्स स्टूफ.ई वॉंट तो कनव में आन्सर.. प्लीज़..
हम अभी अरे बहुत ऑन थे सेम प्लेस वेर यू ऑल अरे तेरे.. चिड़िया घर. और ये टिकट जो तेरे पास है
वो वहीं की है..
उफफफफफफफ्फ़.. देन वाइ दीक्षा लिड तो में? राहुल को जिस बात का अंदाज़ा था वो सच हुआ..
उसके पीछे एक बहुत बड़ा रीज़न है.. ई प्रॉमिस तो दीक्षा की में ये बात कभी नहीं बताऊं किसी को.. पर
नाउ शी डेड तो शायद अब ये बात बताने में कोई बुराई नहीं है.. सोनल बोलते हुए गर्दन में रखे
झूले पे बैठ गयी.
राहुल :- वॉट प्रॉमिस?
थे दे अरमान डाइड.. वेन अरमान वाज़ रन्निंग हियर और तेरे. अभी अरे तेरे एक कोने में हम दोनों खड़े
थी.. इतना शोर था वहां की कोई भी किसी की आवाज़ नहीं सुन पा रहा था..
हम दोनों की आँखों के सामने अरमान भगा और उसका पर स्लीप कर गया और वो वहीं गिर गया.तभी हम
दोनों ने देखा की एक हाथी उसकी तरफ बाद रहा है. पर उसका ध्यान नहीं था.
ई स्टेप फॉर्वर्ड तो हेल्प हिं.. लेकिन दीक्षा डोंट वॉंट त्त ई हेल्प हिं. ई गेट शॉक्ड आ मिनट लेकिन शी साइड तो में.
की हे डिच हेयर और उससे इस लाइफ में रहने का कोई हक नहीं है. मेक हिं डेड.. में कुछ कर पट्टी
या फिर कुछ कह पट्टी इतनी देर में .. (सोनल बोलते बोलते रुक गयी) ई रेअल्ल्ली डोंट वॉंट हिं तो दिए..
राहुल को जितना जानना था वो जान लिया था उसने..वो मुड़ा और वापिस चल दिया.. सोनल उससे जाते ही ऐसे
देखती रही. पर अचानक राहुल मुड़ा और सोनल को देखते हुए बोला..
राहुल :- यू कनव वॉट सोनल. आज दीक्षा हमारे साथ होती शायद अगर वो सब पहले सच सच बता देती..
पर कहते हैं ना सच कभी ना कभी सबके सामने आ जाता है.. खैर यू ताकि केर..(बोलते हुए वापिस चला
जाता है)
राहुल का दिमाग तेजी से चल रहा था. उसको बार बार कुछ बातें खटक रही थी.. वो आया और गद्दी में जा
बैठा जहाँ निकुल उसका इंतजार कर रहा था..
निकुल :- क्या हुआ उसने. ? (राहुल के बैठे ही निकुल ने सवाल किया)
राहुल कुछ बोलता.. उसका फोन बज उठा उसने फोन देखा तो स्क्रीन पे इशिका का नाम शो हो रहा था.
राहुल के चेहरे पे एक प्यार की झलक आ गयी..उसने निकुल की तरफ देखा .. निकुल मुस्कराया.. फिर राहुल ने फोन
को पिक किया..
हेलो. इशिका की जैसे ही आवाज़ आई राहुल के दिल में एक अजीब सी ठंडी कपकपि छा गयी...
अब. अब क्या करना है.. निकुल ने राहुल से सवाल किया?
कोमल :- राहुल कुछ समझ आया की ये क्या हो रहा है .. बेक जो भी हो रहा है की वो..(कोमल आगे नहीं बोल पति)
राहुल बालकनी में कहा हॉकी बोलना शुरू करता है..
एक बात तो कन्फर्म है.. की जो हुआ भी अरमान और दीक्षा के साथ उसमें पीछे कोई एक लिंक जुड़ा हुआ है.. बहुत बड़ा लिंक .. बात साफ है की उसे दिन जिस दिन अरमान मारा उसे दिन सब वहीं थी उसी जगह के आस पास दीक्षा अरमान की हेल्प कर सकती थी लेकिन उसने नहीं की और अरमान की डेत हो गयी..और उसके अगले दिन दीक्षा की भी डेत हो गयी. और उसकी हेल्प भी कोई नहीं कर पयाअ. पर एक बात मुझे खटक रही है.. की जब कुबेर भाई का पब वहीं है चिड़िया घर के पास तो वो क्यों चिड़िया घर पे गए थी किसी से मिलने.. वो उससे वहां पे भी तो बुला सकते थे..
निकुल :- होगा यार कुछ कम. इस बात को हम नहीं जोड़ सकते कहीं भी..
इशिका :- पर राहुल के पूछते ही कुबेर के चेहरे पे अजीब सी टेन्शन देखी मुझे.
कोमल :- हाँ मुझे भी..
इशिका :- पर मेरे इस बात को समझना मुश्किल है की हम सब एक ही जगह पे थे और तब ये हादसा हुआ इस बात को हम कैसे जोड़ सकते हैं..
कोमल :- क्या पता कुछ और है जो हमने अभी तक नहीं जोड़ा.
एक बात है...जिससे अभी तक नहीं जोड़ा गे.राहुल गहरी सोच में डूबते हुए कहा.
क्या... तेंनो ने सवाल किया.
थे टाइम ऑफ डेत... राहुल ने सबको घूरते हुई कहा.. सब उससे घूरने लगे मानो पूछ रहे हो क्या मतलब.?
उसे रात बालांगार्ह में.. (फिर वो बात बता देता है जो हादसा दीक्षा और अरमान के साथ हुआ था पर राहुल ने और वक्त पे आकर बच्चा लिया था)
श में गोद. इतना सब हुआ और हमें आज पता चल रहा है.. कोमल चौंकते हुए बोली..
निकुल :- इससे क्या अंतलब् निकलता है ?
उसे रात जहाँ तक मुझे याद है टाइम था 2 के आस पास..और दीक्षा की डेत हुई तब भी टाइम 2 के आस पास का ही था.. राहुल ने कनेक्षन्स को जोड़ते हुए कहा.
इशिका :- वाइ अभी अरे मेकिंग कनेक्षन्स लाइक डेठ..
राहुल :- बेक तेरे इस आ सम्तिंग कन्णेक्टिओं विद में ड्रीम इशिका.. थे ड्रीम डेठ सेव्स ऑल और लाइफ्स डेठ दे .. रिमेंबर डेठ...
राहुल का इतना कहते ही सब एक सोच में चले जाते हैं.. राहुल भी बाहर के चल रहे ट्रैफिक को देख के कुछ सोचने लगता है.. तभी उसके दिमाग में ना जाने कुछ आ जाता है..
वो अपना फोन निकलता है.. और नंबर डायल करता है..
रिंग जाती थी है.. .. राहुल की दिल की धड़कन तेज चल रही थी. करीब 25 सेकेंड बाद कॉल पिक करा जाता है.
हेलो. ही. कैसा है तू? हम हाँ यार आउट ऑफ इंडिया था.. बस अभी आया. हाँ यार न्यूज देखी ई कनवव ऑल डेठ. सुन मुझे तुझे कुछ कम है.. क्या तू कर देगा.. हाँ मुझे डीटेल्स कही..
अंदर तीनों आपस में बात कर रहे थे..
कोमल :- निकुल ई आम फ़ीलिंग लिट्ल स्केर्ड..
निकुल :- नतिंग तो भी स्केर्ड ऑफ यार.. राहुल जरूर कुछ करेगा. अभी हम खुद समझ नहीं पे की ये सब क्या हो रहा है. अभी तक कोई रास्ता नहीं मिला है. सिर्फ़ पिछली मौतों के कुछ कनेक्षन्स मिले है.
इशिका :- ई डोंट बिलीव की दीक्षा कुछ ऐसा करेगी.. वो हेल्प कर सकती थी..पर..
शायद इसी वजह से आज वो खुद भी ज़िंदा नहीं है.. राहुल ने अंदर आ हुए जवाब दिया. इशिका और राहुल एक दूसरे को देखने लगी. कुछ मिनट तक एक दूसरी की आँखों में..जिसमें बोलने के लिए बहुत कुछ था.. पर शायद अभी कोई कुछ बोलना नहीं कहता था.. शायद वक्त नहीं था अभी..
राहुल :- कल हमें किसी से मिलने जाना है..
निकुल :- कहाँ?
राहुल :- शायद कल इसी गूती को सॉल्व करा दे.. शायद कल खुल जाई इस राज़ से परदा.. (राहुल की आँखों में आने वाल को जाने की इच्छा थी..)
एक रहसाए को जाने की इच्छा .. एक उलझी हुई कहानी को सूलजाने की इच्छा..
अगला दिन. दोनों ड्राइव करते हुए कहीं जा रहे थी..ड्राइव राहुल कर रहा था... दोनों ड्राइव करते हुई एक जगह पे पहच गये. टाइम हो रहा था सुबह के 10. गद्दी एक जगह आकर रुक गयी.
निकुल :- किससे मिलना है यार तुझे?
वो देख सामने.. राहुल उंगली से इशारा करता है .. निकुल सामने देखता है..
निकुल :- अरे ये तो मिलन है अपनी क्लास का.
राहुल गद्दी से उतार जाता है .. निकुल भी उतार जाता है.. राहुल साइड जाकर मिलन से गॅल लगता है.. निकुल भी गॅल लगता है..
मिलन :- गुड तो सी यू गाइस हियर.. और राहुल यार तू तो कितने टाइम बाद मिल रहा है..
राहुल :- हाँ यार तू तो जनता ही है क्यों?
मिलन :- हम. वैसे अरमान और दीक्षा के बारे में सुन के दुख हुआ.. बहुत अजीब बात हुई..ये
राहुल :- हाँ तभी तो मैंने तुझे वो कम करने के लिए बोला था. हुआ?
मिलन :- या तू कह दे और हो ना.. ये ली अड्रेस..
राहुल :- करेक्ट है एक दम..
मिलन :- 100%.अच्छा मुझे कुछ काम है में निकलता हूँ.. यू बहुत ताकि केर..ओहक बाबयए.
राहुल :- बाए बडी और थेन्क यू सो मच..
मिलन :- एनिटाइम यार. (बोल के मिलन निकल जाता है)
निकुल :- किसका अड्रेस है ये..
राहुल :- जिसने मेरी मदद की थी..
निकुल :- कहाँ मदद की थी..किस जगह पे और कब.. कहाँ फँस गया था तू..
राहुल :- तू सवाल बहुत करता है
निकुल :- पर तू जवाब क्यों नहीं देता.. कहाँ हेल्प की थी इसने?
राहुल :- सपने में..
निकुल :- क्या??
राहुल :- तू चल.. अगर जिसे जगह हम सब जा रहे हैं अगर वो जगह सही निकली तो सब पता चल जाएगा.. (राहुल ने चस्मा लगाया और फिर गद्दी को तेजी से भगा दिया)
राहुल ने दरवाजे के पास लगी घंटी को बजाया. अजीब सी घंटी की आवाज़ थी.. जो बार बार बज रही थी.. राहुल के दिल की धड़कन तेज चल रही थी. वो बार बार घंटी बजा रहा था..
निकुल :- लगता है है नहीं कोई यहाँ?
राहुल :- नहीं ऐसा नहीं हो सकता. निकुल मुझे इसके अंदर रहने वाले से मिलना है.. वो यहीं होना कही वो नहीं मर सकता. पता नहीं मुझे क्यों लग रहा है की वही आदमी है जो हमारी मदद करेगा. (वो मुड़ते हुई निकुल से बोल रहा था)
अरे कोन है जो इतनी घंटी बजा रहा है. बॅस इतना ही कह पाया और राहुल की तरफ देखने लगा...
राहुल भी अंदर खड़े लड़के को देखने लगा... निकुल को कुछ समझ नहीं आ रहा था की आख़िर ये क्या हो रहा है..
में जनता था एक दिन तुम जरूर आओगी . मैंने राहुल की तरफ देखते हुए कहा और फिर दरवाजा से साइड में हटता हुआ..
अंदर आओ.. मैंने दोनों को अंदर बुलाया और दरवाजा को बंद कर दिया...
राहुल और निकुल मुझे घूर रहे थी.. मानो ऐसे सुन के थोड़ा शॉक में थे..
डर्सल राहुल किसी और शॉक में था और निकुल किसी और शॉक में...
राहुल :- तुम जिंदिया हूँ?? "राहुल ने अपना सवाल किया?
निकुल :- उससे पहले ये बताओ भाई की आप हो कोन.. मैंने आपको कभी नहीं देखा..तो कैसे जानते हो?
में तुम्हें नहीं जनता.. पर राहुल. आम ई राइट राहुल हे नाम है ना तुम्हारा.
राहुल ने हाँ में गर्दन हिलाई..
हाँ तो में इससे अच्छी तरह से जनता हूँ.. इसकी शक्ल नहीं भूल सकता में. (मैंने दोनों को सोफे पे बैठने का इशारा किया)
राहुल :- क्या तुम्हारा नाम ही हर्षित है ? सवालिया नजरों से उसने सवाल किया?
हाँ में हीए हूँ मैंने पानी .... गिलास में डालते हुई कहा.
राहुल :- अगर तुम वही हर्षित हो जो उसे ट्रेन में थे.. तो तुम उसे ट्रेन में से बच कैसे गये?
तुम्हारी वजह से दोस्त. उसे दिन बालांगार्ह के सतत्िओं पे जब तुम चिल्ला रहे थी तो में उसे दबे के दरवाजा पे ही खड़ा था और तुम्हारी बात सुन रहा था. तुम्हारी बात उसे वक्त सुन के तो नहीं उतरा और जाकर सीट पे बैठ गया..पर पता नहीं दिमाग में तुम्हारी बातें ही घूम रही थी बार बार. परेशान हो गया था में.. पर दिल ने कहा की अगले स्टेशन पे उतार जा हर्षित.. और पर खुद बीए खुद ट्राईिन से नीचे चले गयी..(मैंने दोनों को पानी देते हुई अपनी बात कह दी)
दोनों ने पहले पानी पिया.. दोनों के चेहरे की शकलें ऐसी हो गयी थी मानो अब कुछ होने वाला है जिससे कुछ ऐसा पता चलेगा की जिंदगी में कुछ अलत पलट हो जाएगा.
निकुल :- राहुल प्पलेआसए तू मुझे कुछ बता.. नहीं तो में पागल हो जाऊंगा आख़िर क्या हो रहा है?
हाँ मुझे भी जानना है की तुमने मेरे बारे में कैसे पता किया की में यहाँ रहता हूँ? मैंने भी अपना सवाल पूछ डाला.
राहुल :- हम.. तो सुन निकुल . असल में जिस दिन मैंने वो ट्रेन का सपना या फिर यूँ कहूँ प्रेमनिशन (पूर्भभास) हुआ जब मेरी मदद की किसी ने.
निकुल :- किसी ने मतलब?
राहुल :- ये कोई और नहीं हर्षित ही था. अकोर्डिंग तो में ड्रीम ये हमारी ही कोच में था और हमारी सीट के सामने वाली सीट पे ही बैठा था. इतना ही नहीं उसके बाद ट्रेन का आक्सिडेंट हुआ उसमें मेरी हेल्प एक जगह पे इसी ने की... जब में पुल चढ़ रहा था उप्पर आने के लिए तब इसी ने हाथ देकर मेरी मदद की. नहीं तो में वहां गिर जाता.. पर इसने बच्चा लिया और उसके बाद में इशिका और सबको बचाने लगा और में इससे भूल ही गया और पता नहीं चला की ये कहाँ गया..(राहुल ने अपनी बात कह डाली)
पर फिर भी मेरे मान में एक सवाल था की इससे कैसे पता चला और इस सवाल को मैंने राहुल से पूछ डाला
पर तुम्हें कैसे पता की में जिंदा हूँ और यहाँ रहता हूँ? (मैंने सवालिया नजरों से पूछा)
सीट नो. से... राहुल ने कहा
निकुल :- कैसे?
राहुल :- मैंने मिलन को उसे दिन के ट्रेन के डाथतबसे में घुसने को बोला..और उसने वैसा ही किया.. उसने हमारे नाम ट्रेन में ढूंढ़ने जिससे हमारी कोच का पता चल गया.. अब सपने के मुताबिक वो आदमी यानि की हर्षित हमारे कोच में ही था.. अब ट्रेन की लिस्ट के इस्सब से हम सब मर चुके थी. वो तो हम सब ने बाद में कन्फर्म करवाया की ट्रेन में से कुछ पस्ससेंगेर बच गये हैं. तो मिलन ने उसे डेटबेस में घुस के जहाँ वो नाम थे जो उस ट्रेन में बच गये थी.. उसमें हमारे ग्रुप के अलावा सिर्फ़ एक नाम था. वो था हर्षित का.. वहीं से अड्रेस मिला इसकाअ ...
निकुल :- लेकिन फिर तूने अंदर एंटर होते ही हर्षित से क्यों पूछा तुम जिंदा कैसे हो?
राहुल कुछ बोलता उससे पहले मैंने इस सवाल का जवाब दे दिया..
ओबिओौस है निकुल जब ट्रेन का असिदेंट हुआ तो कोई नहीं बच्चा.. सिवा मेरे जिसका जवाब मैंने अभी थोड़ी देर पहले दिया की में कैसे बच्चा... वैसे काफी अच्छा दिमाग लगा के तुमने मुझे ढूंढ. निकाला.
निकुल :- हम अब समझा में.. की क्या चल रहा है.. पर यार राहुल एक बात बता की हर्षित हमारी क्या मदद करेगा..
राहुल :- नहीं जनता.. ये तो अचानक बॅस दिमाग में आया की उसे रात उसे सपने एक आदमी था जो बार बार मुझे फोकस कर रहा था.. ट्रेन के अंदर और उससे बाहर भी. जब इसने मेरी मदद की.. तभी दिल ने कहा की उसे इंसान को ढूंडू..
वैसे बहुत बहुत थेन्क यू . तुम्हारी वजह से आज में यहाँ खड़ा हूँ नहीं तो अभी तक तो टिकट काट लिया होता मेरा... हहा .. यू नींद टी ओर कॉफी. में हसन्ते हुई किचन की तरफ जाने लगा..
पर शायद वो खेल अभी पूरा नहीं हुआ.. शायद अभी कुछ बाकी है.. राहुल ने मुझे कहा..
में उसकी बात को सुन के थोड़ा सा चौन्न्का और फिर मूंड़ के उसकी तरफ देखने लगा..
क्या मतलब? मैंने सवालिया नज़रो से सवाल किया?
राहुल :- यही की हमारे ग्रुप में से मेरे 2 फ़्रेंड मर चुके हैं...
वॉट..... श में गोद. ऐसा नहीं हो सकता. नू.. तीस इस नोट राइट. मैंने काफी घबराते हुई चेयर को पकड़ते हुई कहा..
दोनों मुझे ऐसे घबराहट में देख की सोफे से कहदे हो गये...
निकुल :- क्या गलत है. क्या हुआ है.
मौत.... मौत को धोका देना गलत हुआ. मुझे लगा था की उसे रात के बाद सब ठीक हो गया .. सब कुछ पहले जैसा हो गया.. पर राहुल की इस बात से रूह कांप गयी है मेरी.. मैंने चिंतित टोन में निकुल की आँखों में देखते हुई कहा.
राहुल :- क्या मतलब है तुम्हारा?
राहुल मौत जिंदगी का वो हिस्सा है जो आज नहीं तो कल सबको मिलती है. और उसी मौत को तुमने धोका दिया है.. जिसकी वजह से वो मौत तुमसे बहुत कफफा है.. बहुत गुस्सा है.. मौत को हर पसन्द नहीं है. बिलकुल नहीं. पर तुमने उससे हरा दिया.. हाँ तुमनी ही उससे हराया है... शायद अब वो उसी बात का बदला ले रही है.. मैंने राहुल की तरफ बढ़ते हुई उसकी तरफ देखते हुई कहा.
निकुल :- ये सब बकवास है. (निकुल ने मेरी बात का मज़ाक बनाते हुई कहा)
बकवस्स..लग रहा है तुम्हीं. (मैंने निकुल की आँखों में ड्कहते हुए थोड़ी बाहरी आवाज़ में कहा)
राहुल क्या तुम्हें ऐसा लगा की कुछ गलत होने वाला है और वो हो गया? फिर मैंने राहुल की तरफ देखते हुए कहा..
राहुल :- हाँ. दीक्षा की मौत से पहली.. मुझे ऐसा लगा कुछ गलत होने वाला हां.
मुझे सब कुछ बताओ.. सब कुछ.. एवेरी सिंगल डीटेल्स ऑफ उर्स.. मैंने जन्नने की इचुकता सी राहुल से कहा.
फिर राहुल एक गेरही सांस लेता है. और मुझे सब कुछ बता देता है जो भी कुछ हुआ.सब कुछ.जो भी ट्रिप से लेकर दीक्षा की डेत से हुआ. उसके बनाए हुई कॉंनेक्टिोंसस सब कुछ..
ह्म्म्म्ममममममम.. में दीवार से तक लगा के खड़ा था और राहुल की बात को सुन के एक गहरी सोच में खोया हुआ था..
रिचा और टान्या उसे ट्रेन में हे थी. इंटरेस्टिंग.. मैंने अपने आप से कहा और फिर घूम के राहुल से पूछ.आ.
बस.. यही सब हुआ.. की और कुछ भी हुआ और तुमने बताया नहीं अभी तक?
राहुल :- नहीं यही सब हुआ और कुछ तो.नहीं..
क्या तुम्हें उससे पहले कभी कोई ऐसे सपने नहीं आई? मैंने ऐसी ही ये सवाल कर दिया क्यों की में जनता था की इसका आन्सर नो होगा पर..
राहुल :- हाँ. भूल गया. उससे पहले दो बार मुझे कुछ ऐसा दिखा है.
क्या?????? मैंने राहुल को घूरते हुई कहा.
राहुल :- फर्स्ट दे ऑफ में कॉलेज. (फिर ट्रेन की बात और उसे गमले से लेकर हुई घटना को राहुल ने मुझे विस्तार में बता दिया)
श. में इतना ही कहा और सोच में डूब गया..
राहुल :- इसके बाद ठीक 3 दिन बाद वो आक्सिडेंट हो गया..और उसी सेम दे को वो गमले का आक्सिडेंट भी हुआ कॉलेज में..
में अपने सर पे उंगलियाँ मसलने लगा.. मानो जवाब कहता हूँ इस बात का अपने दिमाग से..और अचानक मेरे दिमाग ने कुछ अजीब सा सोचा.
तुम्हारा फ़्रेंड जिसने मेरा अड्रेस बताया.. उससे एक बार पूछो अभी के अभी.
राहुल :- क्या?
यही की क्या उसे हाइवे पे पहले भी आक्सिडेंट हुआ था कोई ऐसा भयंकर.. और क्या तुम्हारे कॉलेज में वो गमले वाला आक्सिडेंट हुआ था.. ये दोनों बातें मुझे अभी पता कर के बताओ..
निकुल :- पर इससे क्या होगा?
मुझे जानना है अभी के अभी.. मैंने राहुल को अपनी बात पे ज़ोर डालते हुए कहा.
राहुल :- ओहकक..
राहुल ने मिलन को फोन किया.. और करीब 1 घंटे बाद
राहुल :- हाँ.. ओके थॅंक्स दोस्त. कोई कम होगा तो तुझे फोन करूँगा दुबारा.
राहुल के चेहरे पे टेन्शन थी जिससे मैंने और निकुल ने बखुबी पढ़ लिया.
क्या कहा ? मैंने राहुल की तरफ देखते हुए कहा.
राहुल :- थे रिज़ल्ट इस पॉज़िटिव भाई.. (उसने चिंता दिखाते हुए कहा)
मतलब की पहले भी हुआ वहां ऐसा... ओह गोद.. इट्स सम्तिंग बिहाइंड इन इट.. मैंने फिर चिंता दिखाते हुए कहा..
निकुल :- आक्चुयल में क्या पता लगा उससे..
राहुल :- मिलन ने अभी बताया की जिस दिन वो असिदेंट हुआ था 13 को.. उसके ठीक 3 साल पहले उसे हाइवे पे ऐसा ही जबरदस्त आक्सिडेंट हुआ था.
निकुल :- तो.. हाइवेस पे आक्सिडेंट होते रहते हैं..
हाँ होते रहते हैं.. पर निकुल याद है ना वो कॉलेज वाला आक्सिडेंट जब वो गमला गिरा था वो पहली बार नहीं था 3 साल पहले भी एक सीनियर स्टूडेंट के उप्पर वो गमला गिरा था और वो सीरियस्ली इंजूर्ड हुआ था.. राहुल ने निकुल को समझते हुए कहा..
निकुल :- में अभी भी कुछ नहीं समझा..
इस कहानी को समझना बहुत मुश्किल है. बालकनी में जाने से पहली एक सीडी बननी हुई थी वहां बैठते हुए बोला.
राहुल :- निकुल बहुत सिंपल बात है.. 2018 में जब मैंने ये सब देखा तो उसके 3 साल पहले यानि की 2015 में ही वो हादसा हुआ ठीक 3 साल पहले और डेट भी थी 13त सेप्टेंबर.. तुझे कुछ अजीब नहीं लगता
निकुल :- हम. पर फिर भी कोई और बात कही उसने..
राहुल :- हाँ एक बात जो मुझे मिलन ने कही और वो शायद कुछ ऐसी ही जो हर बार बीच में आ जाती है.
क्या?? मैंने राहुल से पूछा
राहुल :- यही.. की उसे हाइवे पे बढ़ता लिमिट और कुछ रूल्स बनाने के लिए बोला गया था लेकिन वो नहीं हो पाया. पोलिक्टिकल रीज़न्स के वजह से और दूसरी ये की कॉलेज में उसे जगह गमला रखने पर भी कई बार कंप्लेन हुई .. पर फिर भी वहां उससे रख दिया जाता. ये बात समझ नहीं आती की ऐसा क्यों हो रहा है की
जब भी कोई घटना हो रही है उसमें उससे पहले चेतावनी दी जाती थी है. या फिर यूँ कहूँ की इंसान की गलती की सजा होती है और मौत उससे अपना हथियार बना लेती है. मैंने अपने चेहरे के नीचे हाथ रख की ज़मीन को देखते हुई राहुल की बात को समझते हुई कहा.. शायद कुछ कुछ मुझे अब समझ में आ रहा था ये खेल.. या फिर यूँ कहूँ की मौत से लड़ने जा रहा था में...फिर मैंने राहुल की तरफ देखते हुए कहा
राहुल तूने सपने में ये भी देखा था की वो पुल को मैनटांसे की जरूरत है और अगर ऐसा नहीं हुआ तो वो गिर भी सकता है.
राहुल :- हाँ.. ऐसा कुछ देखा था मेनी..
ह्म्म्म्म यानि की गलती हमारी ही है.. मौत तो बॅस उसे गलती की सजा हमें दे रही है. मैंने कहा और फिर सोचने लगा. शायद कुछ था जिससे आज में किसी की जान बच्चा पाँव या फिर कुछ और जिससे इस कहानी की गूती को सुलझा पाँव..
राहुल :- में कुछ समझा नहीं?
निकुल :- में तो बिलकुल नहीं समझा..
तुम दोनों बैठूं और राहुल अब जो में कनेक्षन्स बनूंगा उससे ध्यान से सुनना और अगर कोई और भी बात याद आई उससे फौरन मुझे बताना..
राहुल ने अपनी गर्दन हाँ में हिलाइ..
हम तो सबसे पहले शुरू करते हैं अरमान से. राहुल तूने उससे क्लास में गलत डेट बातयी थी जो की थी 10 सेपएंबेर 2020.. जबकि वो 2018 चल रहा था.. उसके बाद दीक्षा और अरमान की मदद तूने एक भालू से की उसे रात. उसके बाद अरमान की मौत ठीक उसी दिन हुई जिस दिन की डेट तुमने बताई थी यानि की 10 सेप्टेंबर 2020 और वो भी एक जानवर से.. ये है कनेक्षन उसकी मौत का..
दूसरी बार्री आई दीक्षा की. जिसने अरमान की हेल्प नहीं की.. पर उसे रात तुमने उसकी हेल्प की थी. फिर तुम्हारे साथ अजीब से इन्सिडेंट होना.. और वही चीज़ों की वजह से दीक्षा का मारना ये एक बड़ी ही अजीब सी चीज़ है.. उसके बाद दीक्षा का घर ना जाकर कब्रिस्तान वाले रास्ते पे जानना.. यही कारण बना उसकी मौत का. यानि की अगर देखा जाई.. तो सब कहीं ना कहीं से जड हुए हैं किसी वजह सी.. और सबसे मैं बात उसे ट्रेन वाले आक्सिडेंट से राहुल.. हम सब उसी से जुड़े हैं.. ज़रा सोचो अगर उस ट्रेन में होते तो कोई नहीं बचता.. लेकिन हम उसे ट्रेन से बच गये.. अभी चीट डेत.. और सहयड अब..
एक एक कर की सब की बार्री है... राहुल ने मेरी बात को आगे बढ़ाया..
निकुल :- नहीं.. यार..नहीं ये नहीं हो सकता.बिलकुल नहीं.. ये सब फिल्मों में होता है असल जिंदगी में नहीं..
असल ज़ििंदगी कहीं ना कहीं फिल्मों से जुद्डी होती है निकुल..इस वक्त इमोशनल होने का नहीं.. बल्कि आगे क्या करना है वो सोचने का है.. राहुल दिमाग पे ज़ोर डाल शायद कुछ याद आ जाए तुझे. कुछ ऐसा जो तू भूल रहा हो. क्या पता वो अगली जिंदगी से जुड्डा हुआ हूँ.मैंने राहुल की तरफ देखते हुए कहा...
राहुल ने अपनी आँखें इधर उधर घुमणि शुरू कर दी.. वो कुछ सोचने लगा.. कुछ ऐसा जो वो भूल रहा था
कोई भी बात राहुल.. सोच .. शायद वो किसी की जिंदगी को बच्चा ली.. मैंने फिर से ज़ोर देते हुए कहा..
अचानक हे राहुल खड़ा हो गया..और निकुल को घूरने लगा... उसको ऐसा खड़ा देख में और निकुल भी कहदे हो गयी..
राहुल :- निकुल. के घर. उसे दिन पार्टी में. मैंने एक बूढ़ा और बूढ़ी की बहुत बुरी मौत देखी थी.
ये सुन की मेरे दिमाग के पल के लिए सुन हो गया..और शायड निकुल का भी यही हाल था..
निकुल तूने वो घर कब लिया था... में निकुल के पास गया और उससे घूरते हुई पूछा..
वो मेरी तरफ देखने लगा.उसके चेहरे पे अभी भी था की वो शॉक में है..
बता निकुल की तूने कब लिया था वो घर.. मैंने निकुल को हिलाते हुई कहा..
निकुल :- वो वो.. कुछ 5 साल पहली.
यानि की 2015 में ही..मैंने थोड़ा गंभीर सेहरा बनाते हुई कहा..
निकुल :- हाँ...
किस ब्रोकर से लिया था.. उसका अड्रेस है तेरे पास?
निकुल :- हाँ.. वो ब्रोकर का अड्रेस है मेरे पास.. लेकिन क्या हुआ है .. राहुल के उसे सपने से क्या तालूक़ है..
निकुल अभी के अभी उसे ब्रोकर से पूछ... उससे पूछ की तेरे से पहले कोन रहता था वहां कहाँ गये वो सब.. सब कुछ जो भी डीटेल है उससे अभी के अभी पूछ . मैंने चिंतित टोन में कहा.
निकुल ने बिना कुछ बोले फोन निकाला..उसके हाथ कांप रहे थे..चेहरे पे पसीना आ चुका था. उसने फोन मिलाया.. लेकिन आउट ऑफ कवरेज एरिया जा रहा था.
निकुल :- नोट रीचबल है.
अभी के अभी उसके पास जा... जल्दीीईईईईई.... मैंने निकुल को फोर्स देते हुए कहा.वो बिना कुछ बोले निकल गया.
राहुल मुझे घूर रहा था मानो पूछ रहा हो.. की क्या करा है मैंने अभी अभी.
राहुल :- ऐसा क्या हुआ की तुम्हारे चेहरे पे इतनी चिंता आ गयी.. उसे बूढ़ा बूढ़ी से निकुल का क्या रीलेशन.?
रीलेशन निकुल से नहीं. उसे घर से है राहुल..मैंने थोड़ी चिंता जताई.
उसे घर में जो भी उससे बोल अभी के अभी उसे घर से बाहर निकल जाई फौरन... में अब घबराने लगा था क्यों की मुझे अंदर से लगने लगा कुछ गड़बड़ है...
राहुल :- तू साफ साफ बोल.. की आख़िर क्या हुआ है.. (राहुल ने फोन निकलते हुई कहा)
अभी तो बस इतना समझ ली की कुछ बहुत बुरा हो सकता है.. हमें कुछ भी कर की इससे रोकना है.. मौत ने अपनी चल चल दी है...मेरे इतना कहते ही राहुल की आँखें फट गयी.. उसने फटाफट से फोन मिलाया.
घंटी बजने लगी.. घंटी बजने लगी.... पिक उप थे फोन कोमल. प्लीज़..
बेड पे पड़ा फोन बज रहा था स्क्रीन पे नाम राहुल का लिखा हुआ था.. पर बेडरूम में कोई नहीं था..
शिट्सस. कोई फोन नहीं उठा रहा... में इशिका को पूछता हूँ...फिर राहुल ने इशिका को फोन किया. रिंग्ग गयी..
हेलो.. हाँ राहुल क्या काम है.. ? इशिका ने ऐसे कहा मानो वो बात नहीं करना कहती हो..
राहुल :- इशिका कहाँ हो तुम?
क्यों तुमसे क्या मतलब?
इशिका कोमल को अभी बोलो की वो घर से बाहर निकल जाई. वो अपना फोन नहीं उठा रही ... राहुल ने चिंतित टोन में कहा..
इशिका :- राहुल.. नो. अब तुम मुझसे ये मत कहना की तुमने फिर.
दो डेठ इशिका. प्लीज़ ताकि कोमल आउट ऑफ थे होम...
पर में घर पे नहीं हूँ.. ऑफिस के कम से साउथ जाए आई हूँ.. मुझे तो कम से कम 2 घंटे लग जाएँगे पहचने में... इशिका ने डरी हुई आवाज़ में कहा..
श शिट्सस.... राहुल ने मेरी तरफ देखते हुए कहा..
क्या हुआ. मैंने उसको परेशानी में देख के अपना सवाल किया.
राहुल ने बस ना में अपनी गर्दन हिलाई.. उधर से फोन में इशिका हेलो हेलू कर रही थी..
हमें अभी के अभी निकलना पड़ेगा.. लेट नहीं कर सकते.. कामन लेट्स गो.. मैंने राहुल की तरफ देखते हुई कहा और रूम में घुस गया फोन और कार की के लेने के लिए..
राहुल :- इशिका तू पहुंच हम जा रहे हैं.
इशिका :- राहुल क्या हुआ है?
सम्तिंग विल गॉना वेरी बाद इशिका.. और अभी हॅव तो स्टॉप इट.
छल्ल राहुल. मैंने राहुल को देखते हुई कहा.
राहुल :- इशिका तू भी पहुंच में यहाँ से पहुंच रहा हूँ. (फोन कट)
फिर में और राहुल निकल गई.. मैंने गद्दी बाहर निकली और तेजी से उससे भागने लगा.
फोन ट्राइ करता रही. मैंने राहुल से कहा.. और वो फोन मिलता रहा. उसे तरफ सिर्फ़ फोन की घंटी बज रही थी.. फोन कोई नहीं उठा रहा था..
दूसरी तरफ निकुल उसे ब्रोकर के पास पहुंच चुका था.. और उससे केबिन में बैठे बात क्रर रहा था..
इशिका भी अपनी अपनी कार लेकर उसे जगह से निकल गयी.उसके चेहरे पे डर साफ दिख रही था.. उसने गाड़ी क्यों फुल बढ़ता पे रखा और भागती हुई निकुल के घर की तरफ भी देने लगी..
कोमल बाथरूम से फ्रेश हुक बाहर निकली. उसने सर पे टावल बँधा हुआ था वो अभी अभी नहा कर बाहर आई थी..
चलते हुई वो किचन की तरफ तरफ चली...और वहां अपना काम करने लगी. फिलहाल सब कुछ नॉर्मल रुटीन की तरह वो कम कर रही थी.
अंदर रूम में पड़ा फोन बज रहा था. राहुल बार बार फोन मिला रहा था लेकिन रेस्पोस्से नहीं मिल रहा था कोई..
बाहर किचन में...
कोमल ने लैटर उठाया. गॅस के चुले का नॉब घुमाया. उसमें से गॅस के बाहर आने की आवाज़ आने लगी. उसने लैटर उसे बरनर के पास करा और टिककककककक आवाज़ आईइ.और गॅस जल गयी..
में और राहुल तेजी से तरफ रहे थे निकुल की तरफ. तभी र्हौल के सेल पे फोन आया..
हाँ निकुल बोल..... क्या कहा उसे ब्रोकर ने.... क्य्ाआआआआआआआआआआआआआआआआआआअ.. (राहुल के चेहरे पे बहुत गंभीर भाव बन गये थे)
में समझ गया की क्या कहा है निकुल ने.. जो मैंने सोचा था वो सही निकला. वो बूढ़ा बूढ़ी उसे फ्लैट में रहते थी. और करीब 5 साल पहले उनके साथ वो हादसा हुआ जिसमें वो दोनों अपनी जान गंवा बैठे फिर उसी साल निकुल ने वो फ्लैट खरीदा और उसी दिन से वो उसे फ्लैट से जड गया कुदरत और मौत कब क्या खेल खेले पता नहीं चलता. में ये सब सोचते हुई एक्सलेटर पे पैर रख दिया और गद्दी तेजी से भागने लगी. मैंने राहुल के मुंह से बॅस इतना ही सुना.
निकुल तू जल्दी पहुंच हम भी पहुंच रहे हैं..... राहुल ने इतना कहा और फोन कट कर दिया.
शायद अब वक्त आ गया था मौत को एक बार फिर चकमा देने का. और अगर नहीं दे पाए तो फिर.. शायद आज फिर कुछ हर जाएँगी हम सब..
कोमल ने बरनर पे लाइटर टिकककक किया और गॅस जल गयी... उसने आँच को धीमी कर दिया..
हम तो आज सोच रही हूँ निकुल के लिए मीट बनाया जाए काफी दिन हो गये हैं..और वैसे भी आज कल माहौल इतना अजीब हो गया है तो थोड़ा मूंड़ अच्छा हो जाएगा.. कोमल मुस्कराते हुई बोली और आलमारी में से एक चाकू निकाला..(पर कहना गलत होगा की वो चाकू है.. वो कुछ 4 या 5 इंच लंबा दोनों सीद्देड तेज धार वाला कटर था जो की बहुत ही शार्प था 4 या 5 इंच चुदाई भी होगी उसकी और पकड़ने के लिए पीछे से छोटा सा प्लास्टिक का छेद वाला हैंडिल जिसमें से आधी उंगली अंदर जा सकती थी उससे पकड़ने के लिए)
कोमल ने उसे चाकू जैसे हथियार को बाहर निकाला और कुछ सब्ज़ी निकली और फ़िरडगे में सी मीट का बड़ा सा टुकड़ा निकाला.और उससे निकल की किचन के सीन के पास रख दिया सभी चीज़ों को.. इतनी देर तक वो गॅस जलती रही बिना उसे के.. हल्की हल्की उसमें फ़्लकतुआत्ीओं हो रही थी..वो कभी अजीब सी आवाज़ कर की हल्की हो जाती थी और फिर से नॉर्मल हो जाती थी.
कोमल साज़ियूं को पानी से ढोने लगी. उसके सर पे अभी भी टावल बँधा हुआ था. उसने सब्ज़ियूं को आक तरह से धो की वहीं सीन के साइड मैंने रख दिया.. फिर उसने मीट को पैकेट से बाहर निकाला और चाकू को उठाया..
उठाते ही उससे पता चला की उसका हैंडिल जो की प्लास्टिक का था वो काफी ढिल्ला पड़ा है..
कितनी बार बोला निकुल को की नया ला दे.. पर सुनते ही कहाँ है वो मेरी.. कोमल ने उसे हैंडिल को हिलाते हुए कहा.. खैर आज तो कम चल ही जाएगा. बोलते हुई उसने मीट के उप्पर वो तेज धार वाला कटर मारा. ककच...मीट की दो टुकड़े हो गयी..
धत्त तेरी की..टूट ही गया नाअ.. कोमल की उंगलीयुं में वो प्लाष्कटिक का हैंडिल फँसा हुआ था और वो ब्लेड मीट के अंदर ही घुस हुआ था. कोमल ने उसे हैंडिल को वहीं गॅस के चुले के पास रख दिया और जैसे ही रखा..
भाकककककक. आवाज़ कार्की गॅस बंद हो गयी..
आहह. कोमल के मुंह से हल्की चीख निकली उसने उसे तरफ देखा तो गॅस बंद हो गयी थी.. वो आगे बड़ी और लैटर से उससे जलाने लगी.. लेकिन वो जल ही नहीं रही थी. उसने गॅस को फुल कर दिया और फिर लैटर से जलाने लगी लेकिन फिर वो जल की ही नहीं दी..
ओफूओ अब इसमें क्या मुसीबत हो गयी.. बोलते हुई उसने दूसरे वाला का घूमया पूरा तेज कर दिया और फिर सी उससे लैटर से जलाने लगी. वो बार बार लैटर से जलाने की कोशिश करती रही.. करती रही..आख़िर जब नहीं जाली तो वो थोड़ा बरनर की तरफ झुकी अंदर देखने के लिए..फिर उसने अपनी गर्दन टेढ़ी की जिससे उसका सर का पिछला हिस्सा दूसरे बरनर के उप्पर था. और वो सामने बुर्ने को देखने लगी.
आख़िर ये जल क्यों नहीं रही.. बोलते हुए वो कुछ ज्यादा बंद हो गयी और पीछे का हिस्सा सर पे जो टावल उसने पहन रखा था उसका नीचे का हिस्सा बरनर के अंदर चला गया..टावल काफी गीला था अंदर का टेंपरेचर काफी गरम था इसी वजह सी टावल ने मोसीतेर चोदना शुरू किया और उसमें सी पानी की बंद.. टप्प्प टप्प्प.. क्र्की अंदर गिरी.. जिसकी वजह से अंदर वो पानी भाँप बन की उड़ने लगा..धीरे धीरे करके टावल भी गर्मी सी थोड़ा बहुत अंदर झुलसाना शुरू हो गया.
इस बात से बिलकुल अंजान कोमल अपनी आँखों से सामने वाले बरनर को उठा की उससे दूर से ही फोँक मर्री बिलकुल उसी पोज़िशन में खड़े हुक और फिर बरनर रख की उसने नोबे को कम कर की लाइटर को बरनर पे रखा और टिककक की आवाज़ आई..और इस बार गस्स कम आँच पे जल गयी.. कोमल के चेहरे पे एक मुस्कान फैल गयी.. फिर.
फिर जैसे ही उसने अपनी गर्दन उठाई और थोड़ा आ गयी चली की उसके मुंह से..
आआआआआआ..चिल्लाने की आवाज़ निकली और उसने हाथ पीछे अपने सर पे चले गयी. उसने अपनी आँखें तिरछी करी तो देखा उसका टावल उसे बरनर के अंदर फँसा हुआ था.कोमल उससे खींचने की कोशिश करने लगी..लेकिन उससे दर्द हो रहा था क्यों की उसके साथ वो बाल भी खिच रहे थी.. उसके चेहरे पे दर्द की लकरें बन गयी. उसने एक दो बार और खींचा.
आआआआआआआआ...निकुल........ उसके मुंह से दर्द भारी चीख निकल गयी..
एक बड़ी ही तेज़्ज़्ज़ ब्रेक की साथ गद्दी रुक गयी.....
शिट्सस... मैंने हैंडिल पे हाथ से मरते हुई कहा..
ओह गोद.. इतना ट्रैफिक जम... राहुल हड़बदते हुई बोला..(सामने एक भारी ट्रफ़िक दिखाई दे रहा था हर तरफ हॉर्न की आवाज़ गूँज रही थी)
मैंने पीछे की तरफ देखा की पीछे मूंड़ के दूसरे रास्ते से ले लंड लेकिन कोई फायदा नहीं था पीछे भी गाड़ियाँ आकर खड़ी हो गयी थी.
राहुल इशिका को फोन कर के देखो. उससे पूछो की वो कहाँ है. मैंने हॉर्न बजाते हुए कहा.
राहुल फोन मिला चुका था.रिंग जा रही थी...
हेल्लू इशिका कहाँ हो तुम? राहुल ने हड़बड़ाहट में पूछा
राहुल में यहाँ बुरी तरफ से ट्रफ़िक में फाँसी हुई हूँ.. इशिका अपनी गर्दन इधर उधर करते हुए बोली..
ओह गोद. ये क्या हो रहा है.. अच्छा ठीक है. जैसे तैसे कर की इशिका जल्दी पहुंचने की कोशिश कर.. प्लीज़. राहुल की आवाज़ में कंपन था.(फोन कट)
क्या हुआ मैंने राहुल की तरफ देखते हुई कहा.. और ट्रैफिक थोड़ा आगे बड़ा तो तेजी से गद्दी को इधर उधर कैसे तैसे करते हुई आगे बढ़ाने लगा.
इशिका भी ट्रैफिक में फाँसी हुई है..लगता है आज हमारी किस्मत हमारे साथ नहीं है.राहुल ने माथे पे हाथ रखते हुई कहा.
ऐसा मत बोल. हम पहुंच जाएँगी. मैंने राहुल को ये तो बोल दिया पर डर तो मुझे अंदर से काटते जा रहा था..
दूसरी तरफ निकुल फुल बढ़ता में गद्दी चलता हुआ अपने घर की तरफ बाद रहा था..उसके चेहरे पी एक बड़ी टेन्शन भारी पड़ा थी.. वो बार बार फोन मिला रहा था लेकिन..
वहीं बेड पे फोन बड़ा बज रहा था लेकिन उठाने वाला कोई नहीं..
श गोद कोमल.. प्लीज़ पिक उप थे फोन. निकुल चिंतित टोन में बोला..पर जब किसी ने फोन नहीं उठाया तो उसने फोन रखा और फुल बढ़ता में फिर से गद्दी भागने लगा .......................................................................................
आअहह निकुल प्लीज़. हेल्प में. कोमल की आँखों से आँसू निकल रहे थे.. वो चिलाए जा रही थी.
बरनर के अंदर उसका टावल बिलकुल चिपक गया था और एक जगह से फँसा हुआ था. जिसकी वजह सी वो बाहर नहीं निकल पा रहा था.
हेलप्प्प्प्प प्लीज़. कोमल चिल्लाई जा रही थी..और हाथ पांव मर रही थी बाहर निकालने के लिए. जिसकी वजह से उसके हाथ शसिडे में स्लॅप पे पड़ा और उसपर उप्पर रखा वो प्लास्टिक का हैंडिल नीचे गिर गया.. फिर उसका हाथ गलती सी उसे नॉब पे पड़ गया जिसपे गॅस जल रही थी जिसकी वजह सी वो गस्स तेज हो गयी...
आआआआआआआआआआआआ..प्लेआस्ीईईईई हीलप प्लीज़. कोमल चिल्ला रही थी..और अपने हाथों से बालों को खिच रही थी..उससे बहुत दर्द हो रहा था. की तभी...
भूक्ककककककक गार्की जो गॅस बंद हुई थी.वो अचानक सी जल उठीी...बरनर के उप्पर गॅस जल गयी और इस बार गॅस हे थी.. गॅस जलते ही बरनर के उप्पर फँसा टावल और कोमल के बाल उसमें जलने लगे.
आआआआआआ..आआआआआआआआआ.. कोमल पीछे आग जलता देख तेज तेज चीलायन मरने लगी. अब वो अपना हाथ पीछे भी नहीं ली जा पा रही थी. आग धीरे धीरी उसके तोवील को जला डाला जिसमें उसके वो बाल भी जल रहे थे.अब उसको वो तपाट अपनी गर्दन पे महसूस होने लगी.
आआआआआआआआआआ...चिल्लाती हुई उसकी आँख से अनू निकल रहे थे.. उसका शरीर कांप रहा था..उसकी गर्दन झुलसने लगी थी.. गॅस स्टोव की उप्परर एक काफी बड़ी सी आग लगी हुई थी..
नीचे.... एक गाडीई तेजी सी आपकी रुक्की.... निकुल उसमें से बाहर निकला.और जैसे ही उसने सामने का नज़ारा देखा उसकी आँखें फट गयी. सिशी के अंदर उससे अपनी किचन दिखाई दे रही थी और वहां जलती हुई आग को वो देख पा रहा था...वो तेज कदमों सी उप्पर की तरफ बगहा... दरवाजा को धक्का मर की खोला
कोमालल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल... चील्ला ते हुई वो अंदर पहुंचा...
निकुल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल. आवाज़ सुन के कोमल चिल्लाई .. वो वैसे खड़ी तदपड़ रही थी.. जैसे ही निकुल क्की नज़र कोमल पे पड़ा जो ऐसे जल रही थी. उसके आँखों में सी आँसू निकल आए.. वो एक पल के लिए सन हो गया..
निकुल... प्लीज़ हीलप्प में.आनन्न प्लीज़.. (कोमल रोते हुई छिलाइइ)
निकुल होश में आया वो उसके पास गया. आग की लपटें बड़ी बड़ी उठ रही तभी...जिससे कोमल के पीछे से शरीर झुलसास रहा था..
निकुल :- कोमल. चिंता मत करियू में तुझे बाहर निकालूंगा..तू हिम्मत नहीं हारेगी..
प्लीज़. निकल.. बहुत जल रहा है प्लीज़. (उसकी आँखें आधी बंद हो रही थी वो रोए जा रही थी..)
निकुल ने फटा फट से.. गॅस के नॉब को घुमाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. वो कोमल को अपनी बड़ी आँखों से देखने लगा.
निकुल :- कोमाल्ल... सब ठीक हो जाएगा.आ.. उसने कोमल को को खींचने की कोशिश करिी लेकिन वो बाहर नहीं निकल पा रही थी..
फिर उसने अपने शर्ट उतार की उसे आगे पे डाल दी.. (कहते है ना ऐसे हालत में दिमाग काम करना बंद कर जाता है वही हुआ) आग और बाद गयी.
आआआआआआआआअ.. कोमल फिर चिल्लाई.. उसका शायर पीछे सी लाफफी झुलस गया था.
नाहियीईईईईई.... निकुल चिल्लाया. उसने कोमल के चेहरे को अपने हाथों से पकड़ लिया. और वो रोनईए लगागा..
तुझे कुछ नहीं होगा कोमल.. में बच्चा लूँगा. कोमल रोए जा रही थी. वो दर्द में तड़प रही थी...
ई लव यू निकुल.. ई लव यू.. कोमल ने रोते हुए बॅस यही कहा..उसके गॅल से और कुछ नहीं निकल रहा था. निकुल बेबसी में रो रहा था वो कुछ नहीं कर पा रहा था. पर उसने फिर से कोमल के चेहरे को पकड़ की आगे खींचा पर वो बाहर नहीं निकल पाई.. लेकिन इससे हुआ ये गॅस स्टोव आगे खिसका.. जैसी पीछे उसस्पे लगी गॅस की पीपे लाइन हल्की से बाहर की तरफ हो गयी...
फिर निकुल की नज़र साइड में पड़े उसे कटर पे गयी.. उसने कोमल की तरफ देखते हुए कहा.. कोमल सब ठीक हो जाएगा... उसने वो कुउतेर उठाया.. उससे पकड़ने के लिए कुछ नहीं था उसने उसे धार वाली जगह से पकड़ा.. उसके हाथ कांप रहे थे.. क्यों की उससे सही जगह मारना था नहीं तो कोमल को लग जाता..
उसने हाथ उप्पर उठाया और एक कदम आगे बढ़ाया और उसका पर ज़मीन पे पड़े उसे हैंडिल पे पड़ा जिससे उसका बैलेन्स बिगड़ गया और उसका हाथ उसे बालों को काटने की जगह.. कोमल के ठीक माथे के उप्पर और वो गिरता चला गया जिससे कोमल का माता उसे कटर से पूरी तरह से काट गया और खुल गया उसमें से खून की नदियाँ बह गयी. कोमल की आँखें बंद हो गयी..वो नीचे ज़मीन पी जा गिरी.. उसके सर के अंदर से खून के साथ साथ उसके स्कल के टुकड़े बिखर गये.. पर साथ ही साथ निकुल भी उसके उप्पर जा गिररा जिसकी वजह सी उसे कटर से उसके हाथों को फाड़ दिया और उसकी उंगलियाँ काट की गिर गयी और खून ही खून निकालने लगा. आधा कटर कोमल के दिमाग में घुसा हुआ था और उसके उप्परी हिस्सा निकुल के चेहरे के बिलकुल नज़द्देक.
लेकिन अपनी हालत पे उप्पर तो निकुल का ध्यान गया हे नहीं.. क्यों की अभी अभी कोमल उसके हाथों से .. मारी गयी.. कोमल का शरीर ज़मीन पे पड़ा था और ठीक उसके उप्पर निकुल था जो उससे देख रहा कोमल के सर से खून की धार निकल की पूरे ज़मीन पे फैल गयी थी..
नाआहहिईीईईईईईईईईईईईईईई निकुल चिल्ला ही रहा था की तभी उप्पर रखा स्टोव निकुल के उप्पर आ गिरा..जिसकी वजह सी उसका सर उसे कटर पे पड़ा.. और उसकी नाक को कटता हुआ बीच में से निकल गया और उसके सर को दो टुकड़ों में तब्दील कर दिया..निकुल के सर का टुकड़ा एक तरफ को और दूसरा हिस्सा दूसरी तरफ को गिर गया..खून की बौछार से उड़ने लगी...
गॅस स्टोव के नीचे गिरते ही वो पीपे लाइन स्टोव से अलग हो गयी और उसमें से गॅस निकालने लगी और पूरे किचन में गॅस फैल गयी..
नीचे एक गद्दी तेजी से आकर रुकी.. उसमें से इशिका तेजी से बाहर निकली...दूसरी तरफ से मैंने भी तेजी से ब्रेक लगते हुई गद्दी को रोका. हम निकुल के घर पहुंच चुके थे.
हम दोनों गद्दी से बाहर निकले.
राहुल :- निकुल पहुंच गया है. चल जल्दी सी (राहुल ने इतना ही कहा की तभी)
भूंम्म्मममममममम... ज़ोर से आवाज़ आई... सामने लगा शीशा टूट के चोर चोर होकर चारों तरफ फैल गया इतना जबरदस्त धमका हुआ..
हम सबने अपना सेहरा छुपा लिया.. एक पल के लिए शांति हो गयी. मैंने अपना सेरहा अपने हाथ से छुपा लिया था की तभी मेरे कानों में वो आवाज़ पड़ा जिसका डर था..
नाआहियीईईई... राहुल ज़ोर से चीलाया. और ज़ोर ज़ोर से रोने लगा... वो वहीं घुटनों के बाल ज़मीन पे बैठ गया. जब मैंने देखा तो सामने कुछ काटते हुई शरीर के कुछ टुकड़े पड़े थी मैंने राहुल की तरफ देखा तो वो ज़मीन पे बैठे ज़ोर ज़ोर से रो रहा था...इशिका भी उसके साथ वहीं बैठ गयी और राहुल को अपने सीने से लगा रखा था उससे चुप करने के लिए लेकिन रो तो वो खुद भी रही थी.
नहीं.. ई लॉस्ट देम.. ई लॉस्ट तेम्म.. अन्न्ननननणणन्..मेरी वजह से दोनों मर गये.. राहुल रोते हुई चिल्ला रहा था..
श राहुल्ल प्लीज़.. चुप हो जा..तेरी कोई गलती नहीं है इस्मी. इशिका उससे दिलासा दिये चुप करने की कोशिश कर थी थी.
लेकिन राहुल तो किसी बचे की तरफ फुट फुट के रो रहा था. इन दोनों को देख की और निकुल कोमल के जाने की वजह सी इस पठार दिल इंसान की आँखों में आँसू आ गये. दुख तो मुझे बहुत बहुत हो रहा था.. ना जाने क्यों हो रहा था.. पर हो रहा था.. जबकि हमें मिले तो कुछ ही घंटे हुए थे पर फिर भी सब मुझे अपने से लग रहे थी.. यही सोचते हुई में आगे भी देने लगा.. हर तरफ काँच के टुकड़े बिखरे हुए थे.. साथ साथ कुछ शरीर के टुकड़े भी.
एक बड़ा ही खौफनाक मंजर था. मेनी पीछे गर्दन घुमाई तो देखा की राहुल अभी भी रो रहा था और इशिका ने उससे वैसे ही सहरा दिया हुआ था उससे चुप करने की कोशिश कर रही थी.
आख़िर कर फिर से मौत ने हमें हरा दिया.. फिर से उसकी एक चल हमसे आगे थी.. कहाँ चूक रहे हैं हम.. कहाँ गलती हो रही है हमसे.. जिसकी वजह से मौत हमसे जीत रही है.. आख़िर क्या राज़ है इस मौत का.. कैसे ये अपनी चल चल रही है.. कैसे.... में अपने आप से वहां खड़े खड़े सवाल कर रहा था..
कॉफी का मग मैंने राहुल और इशिका के सामने टेबल पे रख दिये. और खुद पीछे जाकर दीवार के सहारे खड़ा हो गया...
राहुल की आँखें अभी भी नाम थी उसने अपना सर इशिका के कंधे पे रखा हुआ था जहाँ इशिका उसके सर को सहला रही थी और उससे समझा रही थी.
इन दोनों को देख की मुझे लगा की सच में दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं.. वैसे तो मुझे प्यार के बारे में कुछ नहीं पता पर इन दोनों को ऐसे जुड्डा हुआ देख दिल को बहुत खुशी हो रही है.. पर अगले पल ही आगे का सोच के दिल में एक डर घर कर रहा है बार बार.. बार बार... में कहता तो नहीं था इस पल को तोड़ना पर मुझे एक बहुत बड़ी चिंता अभी भी है.. किसी से लड़ाई में जीतने की चिंता.. जबकि वो कोई और नहीं "मौत" है.. एक ऐसी चीज़ जो हमसे हमारी जिंदगी छीन सकती है.. जबकि हम उसका कुछ नहीं.
नहीं एक चीज़ है जो हम छीन सकते हैं उससे . वो है.. वक्त.. हाँ.. वक्त.. अगर हम वो वक्त उससे चुरा ली तो जरूर उससे हरा सकी .. पर कैसे... अचानक मुझे मेरा दिमाग ऐसा लग रहा था मानो ेइंस्टाइन खुद मेरे दिमाग में घुस गये हूँ...
राहुल .... मैंने राहुल को आवाज़ लगाई.
राहुल ने तो नहीं. पर इशिका ने मेरी तरफ देखा... मैंने अपनी गर्दन से राहुल को मेरी तरफ देखने का इशारा किया..इशिका ने अपनी गर्दन हाँ में हिलाई.
फिर उसने राहुल के बालों को सहलाते हुई..
इशिका :- राहुल.. हर्षित कुछ कहना कहता है.
राहुल ने इशिका के चेहरे को देखा फिर मेरी तरफ देखने लगा..में कुछ कहता उससे पहले राहुल बोल पड़ा..
अब क्या कहना बाकी है.. क्या होगा तुम्हारे कहने सी कुछ नहीं. कुछ नहीं होगा जो भी होना है वो हुक रहेगा.. हम कुछ नहीं कर सकते. राहुल थोड़ा चिड़चिड़ा सा था.
में तेरी हालत को समझ सकता हूँ.की तुझ पे क्या बीत रही होगी पर..
नहीं समझ सकता तू.. नहीं समझ सकता की क्या बीत रही है मुझपर.(राहुल चिल्लाते हुई खड़ा हुआ) पिछले 1 साल जब मेरा कोई नहीं था.. तो वो दोनों थी जिन्होंने मुझे संभाला..वही दोनों थी जिन्होंने मेरा अकेलापन दूर किया कहे में इस कंट्री से दूर था तब. क्या समझेगा तू.. तूने कभी अपने खोए हैं जो तू समझेगा. नहीं.. मैंने खोए हैं में समझता हूँ..में समझता हूँ. (उसकी आँखों से फिर आँसू निकल आई)
में राहुल की हालत को समझ सकता था. उसकी इस हालत को देख के बुरा लग रहा था.. लेकिन कर भी क्या सकता था.. बात उसकी भी सच थी.. कभी कुछ खोया कहाँ मैंने जो मुझे उसके बारे में पता चलेगा..
राहुल प्लीज़..शांत हो जा.. इसमें हर्षित की क्या गलती है वो तो हमारी हेल्प कर रहा है..इशिका ने राहुल की आँखों से आँसू हटते हुई उसके चेहरे को सहलाया..
राहुल में जनता हूँ इस वक्त तू किस कंडीशन में है.. जनता हूँ इस वक्त तुझे आराम की जरूरत है.. पर "मौत" आराम नहीं करती.. अभी तेरा पास बहुत कुछ है जो तू बच्चा सकता है.. लेकिन तुझे उसके लिए हिम्मत रखनी पड़ेगी.तुझे मजबूत बन के लड़ाई लड़नी पड़ेगी..तुझे अपना दिमाग लगाना होगा.. मैंने राहुल के कंधे पे हाथ रखते हुए कहा..
क्या दिमाग लगौन.. कहाँ दिमाग लगौन.. जब हम सब जानते हैं की अगर उसे ट्रेन में हम होते तो मर जाते .. जबकि नहीं मर और इसलिए मौत उसे बात का बदला ले रही है.. तो फिर क्या दिमाग लगौन...क्या दिमाग लगौन.. (बोलते हुई राहुल सोफे पे बैठ गया सर पकड़ की उसके साथ इशिका भी बैठ गयी)
ट्रेन.. हाँ. ट्रेन.. तभी मेरे दिमाग में ट्रेन घूमने लगा.में तेज कदमों से अपनी स्टडी टेबल की तरफ गया वहां से एक प्लेन पेपर उठाया और एक पेन्सिल उठाई..
10 त सेप्टेंबर - अरमान डेत दे 12त सेप्टेंबर - दीक्षा डेत दे 13त सेप्टेंबर - निकुल कोमल डेत दे..
13 - 10 - 2018 , 13 - 10 - 2020
अगर में इस डेट को थोड़ा बदल दम. कहते हुई मैंने आगे का कम शुरू किया.. और फिर करता गया.. करता गया..
उधर सोफे पे इशिका राहुल से बात कर रही थी..
इशिका :- राहुल प्लीज़.. में जानती हूँ आज जो हुआ शायद वो हमारी लाइफ में नहीं होना कहिए था.
राहुल कुछ नहीं बोला और इशिका के गॅल लग गया..और रोते हुई बोला..
इशिका त्ते डाइड बिकॉज़ ऑफ में.. थे डाइड बिकॉज़ ऑफ में.. में ही बेकार इंसान हूँ हर बार मेरी वजह सी सबको तकलीफ पहुंचती है.. तुझे भी मैंने बहुत हर्ट किया है.. सब मेरी ही गलती है.
स्शह ना ना राहुल ऐसा नहीं बोलते.. तेरी कोई गलती नहीं थी.. कभी भी.शायद वक्त ही गलत था.. इशिका राहुल के बालों को सहलते हुई बोल रही थी..उसकी आँखों से भी आँसू निकल रहे थे.
फिर राहुल अलग हुआ. उसने अपने आँसू साफ किए..और इशिका की तरफ देख की उसकी आँखों से भी आँसू हटाए दोनों की एक दूसरे की आँखों में देखने लगे.. जिसमें दुख था पर आज एक नये प्यार की शुरूवात देखने को मिल रही थी.
इशिका :- अब रोना नहीं है..
राहुल ने हाँ में गर्दन हिलाई..
श में गोद..... अचानक से मुझे ऐसे चौंकते हुई खड़ा देख..दोनों मुझे घूरने लगी.
राहुल :- क्या हुआ?
यू बहुत हॅव तो सी तिस्स... मैंने दोनों को अपने पास बुलाया.. दोनों मेरे पास आई और मेरे सामने ही बैठ गयी.
इशिका :- क्या हुआ अचानक से?
बताता हूँ इशिका और ये जान की सब समझ आ जाएगा.हर बात हर पहलू हर चीज़...
13 - 10 - 2018 , 13 - 10 - 2020
ये दो डेट्स है जो हमसे जुद्डी ही है..अब अगर में इन डेट्स को थोड़ा अलग तरीके से लिखूं तो शायद ये कुछ ऐसे बनेगी.
इनको एड करने से मुझे कुछ खास इन्फार्मेशन नहीं मिली पर फिर भी अगर ध्यान दे तो 16 और 9 को हम जोददे तो तब भी 16 हे बनेगा..
वो कैसे? इशिका ने एक बचकाना सवाल किया..
सिंपल है.. 1 + 6 + 9 = 16. मैंने उससे समझते हुई कहा... और इसे मुझे बस एक चीज़ की टार्फ़ अट्रॅक्ट करता है..
वो क्या.? राहुल ने पूछा.
वो ये है की जहाँ से कहानी की शुरूवात हुई थी वही एअर हामी दुबारा मिला.. यानि की 2018.
राहुल मुझे घूरने लगा...
पर अगर अब में वो चीज़ लंड जिससे हम सब जड हैं तो शायद कुछ खास पता चली..मैंने फिर से कहते हुए लिखा.
12000028 याद आया ये नंबर?
ये तो वही ट्रेन नंबर है जिसका आक्सिडेंट हुआ. . उसने मेरी तरफ और ज्यादा हैरानी भारी नजरों से देखा..
अगर में इन नंबर्स को उसी नंबर्स की तरह लिखूं तो..
12000028 = 1 + 2 + 0 + 0 + 0 + 0 + 2 + 8 = 13
13 नंबर बन रहा है राहुल... मैंने 13 पे सर्कल लगते हुई कहाआ...
ओह माइ गॉड.. इस पे तो ध्यान ही नहीं गया. राहुल चौंकते हुई बोला..
अब समझ आया ना ये 13 तारीख क्यों ऐसी थी तेरे लिए. आज भी 13 ही है भाई..और क्यों हर बार 13 का ही कनेक्षन बन रहा था हमारे चारों तरफ.. मैंने जब कहा तो दोनों के चेहरे पे उलझन भारी हुई थी.
कहानी अभी खत्म नहीं हुई है.. मैंने फिर से पेन्सिल से लिखते हुए कहा..
अच्छा ये बता हम इस ट्रेन नंबर से कैसे कैसे नंबर निकल सकते हैं.
मतलब? इशिका ने सवाल किया.
सबसे पहले ये बता दम अरमान की मौत उसे दिन डिसाइड हुई जिस दिन राहुल ने वो डेट कही.. जो की साफ है.. क्यों की उससे पहले राहुल ने 2 बार उसकी जान बचाई. 2 बार और इसी ने क्यों बचाई.. क्यों की इसी ने उसकी मौत की डेट फिक्स की थी और वक्त भी.
वक्त कैसे? राहुल ने अटकते हुई सवाल किया..
याद कर उसे दिन लेक्चर का टाइम और चिड़िया घर में हादसे का टाइम.. दोनों सेम होंगे लगभग? मैंने उससे पूछा..
राहुल कुछ मिनट के लिए सोचता रहा.. और उसके मुंह से वही निकला जिसकी मुझे उम्मीद थी..
हन्ंणणन्. उसने कहा..
हम अब आ हैं मेरे उसे क्वेस्चन पे दुबारा की हम ट्रेन नो. को कैसे लिख सकते हैं..
12000028 को और कैसे लिख सकते हैं.
दो दो के ग्रुप में डिवाइड करके एड करे तो.? अचानक इशिका थोड़ा खुश होते हुए बोली..
हम ठीक है करके देखते हैं.
12 + 00 + 00 + 28 = 30
और किसी तरह...
हाँ.. अगर हम ऐसे करे तो. राहुल ने मेरे हाथ सेपेंसिल लेते हुई लिखा..
1+2 + 0 0 00 + 28 = 31 . पर फिर भी इससे कुछ समझ नहीं आ रहा है. राहुल कन्फ्यूज़न में बोला
अब आएगा दोस्त. में कहते हुई उसके हाथ से पेन्सिल लिया और कहा.
फिर मैंने बनाया उसे नुमेर से एक नंबर.
12 + 0000 + 2 + 8 = 22
22 इससे क्या पता चल रहा ? इशिका ने पूछा
अभी बताता हूँ. अगर में इन 22 को अलग कर दम तो. यानि की 2 , 2 तो.
1200028 ये है ट्रेन नंबर .. मैंने लिखते हुई कहा.. और 12 को सर्कल करा.
हो गये ना 22 बराबर.... और हाँ राहुल निकुल के घर जो बूढ़ा बूढ़ी का सपना देखा था वो भी दोपहर का था.
इशिका का हाथ उसके चेहरे पे था..राहुल की आँखें खुली हुई थी.. दोनों को एक बड़ा झटका दिया था मैंने अभी अभी..
मतलब अगली मौत का राज़ भी इसी में छुपा है? राहुल ने मुझे घूरते हुई कहा..
हाँ बिलकुल. लेकिन अभी तक पता नहीं चल पाया है... वही ढूंढ. रहा हूँ.
फिर राहुल और इशिका बात करने लगे.. लेकिन मेरा दिमाग तो कुछ ढूंढ. रहा था वो था अगली मौत का टाइम डेट जहाँ तक है मुझे बार बार लग रहा था वो 13 हे निकलेगी.. पर टाइम नहीं निकल रहा था.. क्यों की डेट तो हमारी मौत की उसी ट्रेन से जुद्डी थी..
फिर मेरे दिमाग में कुछ आया.. और मैंने ऐसी ही लिखने लगा..
12000028 2018
अगर में ध्यान से देखूं तो दोनों के लास्ट में 8 है.. मैंने 8 को सर्कल करते हुई कहा.
फिर में पेन्सिल को उंगलीयुं से घूमने लगा..कुछ जोड़ने लगा. की तभी..
अगर में लास्ट के दो नंबर लंड तो. मैंने ट्रेन के लास्ट नंबर लिए. 2 + 8 = 10 और फिर डेट के लास्ट नंबर लिए 8 + 2 = 10
ओह माइ गॉड.. यही है वो टिमी.. हाँ. मैंने अचानक जोश में कहा..
राहुल और इशिका दोनों मुझे घूरने लगे.
10 बजे है अगली मौत का टाइम... मैंने थोड़ा अटकते हुई कहा..
कैसे कह सकता है तू? राहुल ने पूछा.
फिर मैंने दोनों जोददे हुए नंबर दिखाए..
लेकिन 8 से पहले 1 है.. तो 9 बनेगा..? इशिका ने एक सवाल वो किया जो शायद सही था.
हाँ इशिका तू सही है.. पर अगर 2018 को एक पेपर की तरह फोल्ड करूँ तो 8 के बाद 2 ही आएगा. हमें सीधे नहीं उल्टे तरीके से सोचना है तभी हम उसकी ईक्वेशन को समझ पाएँगी.. इसलिए बोल रहा हूँ की अगली मौत आज रात 10 बजे ही होगी...
पर डेट कैसे आज की हो सकती है.. तू इतना शुरू कैसे है?
क्यों की ये डेट उसे ट्रेन ने डिसाइड की है राहुल . शायद 10 बजे के बाद कोई और टाइम हो मरने का. पर फिलहाल हमें 10 बजे वाली मौत को रोकना है..
पर ये कैसे पता चलेगा की मौत किसकी होने वाली है..? इशिका ने वो सवाल किया जिसका जवाब नहीं था मेरे पास..
वही तो जानना है इशिका... मैंने इशिका से एक डरी हुई आवाज़ में कहा.
हाउ अभी ऑल नो की अब अगला नंबर किसका है. ? राहुल खिंचते हुए बोला
रिलॅक्स रहल जब हमें टाइम का पता चल गया है तो ये भी पता चल जाएगा की अगला नुकबेर किसका है.. इशिका
ने राहुल को समझते हुई कहा..
हम शी इस राइट. कहानी हमारे इर्द गिर्द ही जुद्डी है.. मैंने इशिका की बात में हामी भारी
पर कैसे.? नंबरों के खेल से हमने एक फिगर बनाई जिससे मरने वालों का टाइम हमें पता चला और
शायद जो अब हमने टाइम निकाला हो वो भी ठीक हो.. पर क्या नंबरों से हम ये पता कर पाएँगे की उसे
रात ट्रेन में मरने वालों की लिस्ट में अब अगला नंबर किसका है.. राहुल ने फिर से चिड़चिड़ी टोन में
कहा...
एक बार फिर राहुल के ट्रेन की बात कहते ही मेरे दिमाग में कुछ घूमने लगा मानो अभी भी कुछ है
जो हम चोद रहे हैं..कोई ऐसी चीज़.. हाँ. हां.. शायद यही.. शायद यही है.यही है मौत का
क्रम.. यही है उसकी लाइन. मेरे दिमाग में जैसे ही वो बात आई मेरे अंदर एक अजीब सी एनर्जी आ गयी..
राहुल मरने वाले की लिस्ट में सबसे पहले कोन था.? मैंने राहुल से सवाल किया..
वो मेरी तरफ एक पल देखता रहा फिर बोला. कुबेर का...
उसके बाद?
शायद रिचा और तान्या.. और उसके बाद सोनल फिर निकुल उसके बाद कोमल..और..
बॅस बॅस.. एक मिनट.. तूने एक बात गौर की? मैंने राहुल से सवाल किया
कोन सी बात? वो कन्फ्यूज़्ड होते हुई बोला..
अगर हम मौत की लाइन को समझी.. तो सबसे पहले मारा अरमान. उसके बाद दीक्षा.. उसके बाद निकुल और
कोमल.
कहना क्या चाहता है? इशिका ने पूछा
पता नहीं पर अगर में जो सोच रहा हूँ..अगर वो सही हुआ.. तो अगला नंबर सोनल का है...
वॉट??????? दोनों के मुंह से निकला..
हाँ.. अगर में मौत की लाइन बनौन तो जहाँ सबसे पहले मारना था कुबेर को.. वहां मारे रिचा और
टान्या.. जिससे मौत का सारा क्रम बिगड़ गया.. मौत की लाइन बदल दी गयी.. इसलिए मौत ने अपनी लाइन दुबारा
बनाई वो भी वहां से जहाँ से शुरूवात हुई.. यानि की अरमान की डेट से.
तुम दोनों की मौत से पहले राहुल तेरे मुताबिक लास्ट में दीक्षा फिर अरमान , निकुल , कोमल , और सोनल
अगर में अरमान को बीच में से हटा दम इसलिए क्यों की उसी की डेट से लाइन बननी या यूँ कहूँ की अरमान
को में पहले ले आना.. तो क्रम बनेगा
दीक्षा निकुल कोमल और अब सोनल और उसके बाद कुबेर का नो ... राहुल ने मेरी बात को कंप्लीट किया..
मैंने घड़ी में टाइम देखा 9 बज चुके थे.. हमें जल्दी करना होगा.. में अपनी जगह से खड़ा होता
हुआ बोला.
इशिका :- ओह गोद.. ये हामरे साथ ही क्यों.
इशिका शायद हमारी किस्मत में यही था.. पर तू चिंता मत कर में तुझे कुछ नहीं होने दूँगा..अगर
मौत तेरे पास भी आई तो उससे में तुझे ले जाने नहीं दूँगा.. राहुल ने अपनी भारी आँखों से कहा..
फिर दोनों एक दूसरी की आँखों में देखने लगी.....
हम कुछ करना पड़ेगा.. साला इस लड़के ने सच में परेशान कर रखा है.. कुबेर अपनी कूसरी पर
बैठ के सोच रहा था... की तभी उसका फोन बजा.
फोन स्क्रीन पे राहुल का नंबर शो हो रहा था...
हाँ बोल.. कुबेर ने फोन उठाते ही कहा..
कुबेर भाई.. आपकी जान को खतरा है. और शायद सबसे ज्यादा 10 से 12 के बीच में.. नहीं जनता जो बोल रहा
हूँ वो सही है.. पर आपको सावधान रहना होगाआ.नहीं तो..
नहीं तो क्या में भी निकुल और कोमल की तरह टपक जाऊंगा. कुबेर ने आगे कहा..
हाँ.. शायद.. पर आपको कैसे पता की? राहुल पूरा बोलता उससे पहले..
ये बता अभी कहाँ है तू? कुबेर के दिमाग में कुछ चल रहा था.
वो में.. सोनल के पास जा रहा हूँ.. अगला नंबर उसका ही है.. उसको मुझे बचना है. राहुल हड़बदते
हुई बोला..
हम अच्छा..ठीक है. (उसने फोन कट कर दिया)
उधर राहुल कुछ कहना कहता था पर उसने नहीं सुन्नी..
क्या हुआ.. क्या बात हुई .. मैंने ड्राइव करते हुई कहा..
कुछ नहीं.. पता नहीं क्या होगा. राहुल ने खिड़की के बाहर देखते हुई कहा.
तू ही है इस जब का झड़. राहुल . तेरी वजह सी सब मर रहे हैं.. अगर में तुझे मर दम तो.. क्या फिर
मौत मेरे पास नहीं भटकेगी. हाँ .. यही सही है शायद.. तुझे मारना पड़ेगा राहुल.. कुबेर अभी नहीं मर
सकता.. अब तो तुझे ही खत्म करना पड़ेगा... कुबेर नईए गुस्से में अपने आप से कहा और उठ
के बाहर चला गया...
सोनल मैडम कहाँ है. राहुल ने सोनल के घर पे खड़े चौकीदार से पूछा.
मैडम तो आज एक पार्टी में गये हैं.
ओह शिट्स.. मुझे अड्रेस कही. अभी .. फिर राहुल से अड्रेस ले लेता है.. और फिर मैंने उसे अड्रेस की
तरफ गद्दी भगा दी...
9:30 हो गये हैं. कम से कम आधा घंटा लगेगा इस जगह पे पहुंचने में. मैंने राहुल से कहा.
में सोनल को फोन करता हूँ.. राहुल के हाथ कांप रहे थे.. उसने सोनल को फोन किया.
उधर....
बैग में रखा फोन रिंग हो रहा था .. और बैग से बाहर... सोनल एक रेड कोलौए की बेहद ही सेक्सी ड्रेस
में उसे बैग को अपने फॉरार्म में डल्ले अपनी कमर मटकती हुई हे हील्स पहन के चल रही थी..एक बहुत
बारे हॉल में.
काफी बड़ा हॉल था. विद लॉट्स ऑफ लाइटिंग.. उसे हाल की उप्पर एक बहुत ही बड़ा चंडेलौर लगा हुआ था
और उसके चारों तरफ के पतली सी अलमुनिमून की वाइर्स लगी ही थी.काफी सुंदर हॉल था वो..
सोनल चलते हुई आगे बड़ी और कुछ जनो से हेलो ही किया.. उसका बेक हाफ न्यूड था.. उसकी ड्रेस काफी
ही ज्यादा एक्षपोसिवे थी पर उसे पार्टी में जितनी भी लॅडीस थी उनके कपड़े ऐसे ही थी..
तूने बराबर चेक कर लिया ना..इस पर टाइट हो गया है ना अच्छी.. एक आदमी ने दूसरे आदमी से पूछा
हाँ सर बिलकुल इस बार अच्छी तरह सी हो जाएगा.. मेरा आदमी उप्पर लगा हुआ है..आप चिंता मत करूं..
उप्पर . टॉप फ़्लोर पी एक आदमी चंडेलौर को टाइट कर रहा था ..
आबे जल्दी कर..नीचे एक से एक आइटम है. दूसरे आदमी ने उससे पीछे से कहा..
हाँ हाँ बस हो गया.. चल.. वो आदमी खड़ा हुआ और वहां सी निकल गया...
हाँ सब कम अच्छे से कर दिया ना..
हाँ सर हो गया. सब कुछ..
हाँ अगर एक भी चीज़ लूस रही गयी तो ये नीचे की तरफ आ जाएगा फिर पता है ना कितनी बड़ी गड़बड़ हो
जाएगीइ..
फिक्र मत करिए सर.. सब कुछ सेट कर दिया है .. अब इस चंडेलौर को आप आराम से आगे पीछे कर सकते
हैं..
ओहक तो फिर अनाउन्स कर देते हैं..
लॅडीस और गेन्तेलमान. सॉरी फॉर थे डिस्टर्बेन्स. लेकिन में आप सब को इस जगह का एक बेहट्रायण नमूना
दिखना कहता जिसमें आपके बॅस 5 मिनट कहता हूँ..
लाइट्स ऑफ प्लीज़.. तभी वहां पे अंधेरा हो जाता है. और तभी उसे चंडेलौर की लाइट्स जलती है
वाऊ सब कहदे लोग उससे देखते हुई कहते हैं.
उसमें से निकलती लाइट्स बहुत ही अच्छी लग रही थी.. तभी वो चंडेलौर मूव करने लगता है.. पूरा का पुउरा
राइट की तरफ जाता और वहां अपनी रोशनी सी उसे जगह को जगमगाता.
सब उसे सुंदर कलर्स को देख रहे थी...
में तेजी से गद्दी को चलते हुई मंजिल की तरफ बाद रहा था लेकिन शायद कोइओ और भी था जो उसे
मंजिल की तरफ बाद रहा था.
मैंने अपने मिरर में देखा की एक गद्दी कब से मेरे पीछे आ रही है.. पर मैंने उसे बात को इग्नोर कर
दिया और सोनल की लाइफ के बारे में सोचता हुआ तेजी से आगे बाद रहा था..
उधर वो चंडेलौर अपनी खूबसूरती बिखैर रहा था पर.. उसके ठीक उप्पर में.. उसके कनेक्षन्स
का एक बोल्ट हिल रहा था उसके नीचे एक गोल ग्लिप फाँसी हुई थी शायद किसी चीज़ को रोकने के लिए उसे बोल्ट को
उप्पर फिट किया हुआ था...
9:57 मिनट.... घड़ी की सुई धीरे धीरे बाद रही थी.
सोनल के हाथ में ड्रिंक थी.. वो उप्पर देख रही थी.. उसके चेहरे पे एक स्माइल थी.. वो बिलकुल बीच में
खड़ी थी. हॉल की...
हॉल की लाइट जल गयी. और चंडेलौर अपनी जगह पे आने लगा धीरे धीरे..
9:59 मिनट....
मैंने गद्दी को तेजी से दरवाजा के अंदर घुसाया.. तेंनो गद्दी से तेजी से निकले और भागते हुए अंदर
जाने लगी.. दरवाजा पे गौरड़स ने रोक लिया.
गुरदस :- इन्विटेशन कार्ड के बिना एंट्री नहीं है.
पर मैंने और राहुल ने उनकी नहीं सुन्नी और धक्का मरते हुई अंदर जा घुसीए..
30 सेकेंड बच्चे थी 10 बजने में.
जैसे ही वो चंडलेओुर अपनी जगह पे सेट हुआ उसका वो बोल्ट उछाल की नीचे गिर गया.. और उसमें फँसा हुआ
क्लिप धीरे धीरी उप्पर की तरफ उठने लगा..
10 सेकेंड...
इधर में राहुल और तेजी से बहगते हुई हॉल की तरफ बाद रहे थी... 4 सेकेंड...
अचानक वो क्लिप बबर आ गया. और जैसे ही बाहर आया..वो चारों अल्यूमिनियॅम की वाइयर अपनी जगह सी
छुट्टी हुई. अजीब सी आवाज़ करी.. और चारों तार तेजी से सोनल की तरफ बाद गयी...
10 :00
सोनालल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल राहुल हॉल के दरवाजा पे कहदे होकर चीलाया..
सोनल उसकी तरफ मुद्दई.... और तभी वो वाइर्स पालक झपकते ही क्रॉस हो गयी अलग अलग दिशा में और
हवा में हिलने लगी...उन वाइर्स पी खून लगा हुआ था और उसे वाइर्स में से टपक रहा था..
सोनल राहुल की तरफ आँखें खोल की देख रही थी.
में और राहुल सोनल को आँखें फाड़ दे देख रहे थी... की तभी आँखों के सामने वो आया जिससे शायद ही
कभी देखा हूँ..
देखते ही देखते सोनल की आँखों के नीचे सी खून की लकरें निकालने लगी..और तभी.
सोनल चार हिस्सों में बात गयी एक हिस्सा पीछे की तरफ राइट साइड में एक हिस्सा लेफ्ट साइड में पीछे की तरफ
और दो हिस्से उसके आगे की तरफ गी गयी.. जैसे आम को काट की उससे सज़ने वाले स्टाइल मैंने रखते हैं
वैसे. उसकी अंतड़ियां उसके फेफड़े गुर्दे सब उसी जगह के बीच में जमा हो गये और वहां खून की नदियाँ
बह गयी..
आआआआआआआआआआआआआआआआअ.. वहां कहदे सभी के चिल्लाने की आवाज़ आईइ...
इशिका जैसे हे अंदर आईइ राहुल ने उससे अपने तरफ खिच की अपने सीने से जोड़ लिया और सामने का नज़ारा
ना देखने दिया उसने खुद भी आँखें बंद कर ली. पर में सामने का नज़ारा देखता रहा.. मुज़ेः गुस्सा
आ रहा था. की हमें पता होने के बावजूद हम नहीं बच्चा पे उससे...
हम तीनों एक कोने में बैठे थी.. पुलिस आई हुई थी और वहां जाँच कर रही थी .. में काफी ज्यादा
परेशान हो गया था... मैंने घड़ी में टाइम देखा तो 11:15 हो चुके थी.. एका एक मेरे दिमाग में आया की..
अगर मौत की तारिक़ सिर्फ़ आज तक ही हो तो.. क्या पता सिर्फ़ आज की डेट में ही सब का नंबर लगना हो तो.. लेकिन फिर दिमाग में दूसरा कहयाल आया की अगर ऐसा होता तो दीक्षा एक दिन पहले कैसे मर गयी. ट्रेन नंबर से तो में सिर्फ़ असंप्षन लगा सकता हूँ. लेकिन फिर भी ऐसा क्यों लग रहा है अगर हम आज का दिन सर्वाइव कर गये. तो इशिका और राहुल को कुछ नहीं होगा.
तभी मेरे कानों में एक आदमी की आवाज़ पड़ा की अब आप सब जा सकते हैं.
मैंने राहुल और इशिका तेंनो बाहर निकल गयी. घर जाने का मान नहीं कर रहा था.. पर फिर भी जाना तो था ही.. गद्दी में बैठे और चल पड़े हम तीनों वापिस.. किसी के पास कहने के लिए कुछ था नहीं.. बस आने वाले पल का इंतजार था की क्या होगा. की तभी...
गाड़ी का थोड़ा सा बैलेन्स निगाड़ गया मैंने ब्रेक दबा दिया और बाहर निकल की देखा तो तैयार पांचार हो गया था..
तैयार पांचार हो गया है.. मैंने राहुल और इशिका से कहा.आ..
दोनों दोनों बैठो में देखता हूँ की आस पास कोई सही करने वाला मिल जाई गद्दी में एक्सट्रा तैयार नहीं है..
राहुल :- ओहक हम यहीं बैठे हैं..
बोलते हुई में आगे जाने लगा की तभी पीछे से किसी गद्दी की हेडलाइट की रोशनी पड़ा..उसे सुसन रास्ते में ये लाइट बहुत ज्यादा जगमगा रही थी इसलिए आसानी से पता चल गया..की कोई गद्दी पीछे से आ रही है.. में मुड़ा ही था की देखा वो गद्दी वहां ठीक हमारी गद्दी के पीछे आकर रुकी. उसके से कोई आदमी निकला दूर से अंधेरे में दिखा नहीं.. पर वो हमारी गद्दी की तरफ बाद रहा था.. मुझे ऐसा लगा की कुछ
गड़बड़ है.. मैंने ज़ोर से आवाज़ लगाई..
राहुल्ल इशिकााआआआअ. बाहर निकलो.. और भागते हुई गद्दी की तरफ जाने लगा..
मेरी आवाज़ सुन के राहुल और इशिका दोनों चौक गयी दोनों बाहर निकली लेकिन जैसे हे इशिका पीछे के दरवाजा से बाहर निकली..उससे किसी ने पकड़ लिया.
आआआआआअ.राहुल्ल्ल्ल्ल. इशिका चीलाईइ..
में और राहुल भागते उसे तरफ पहुची. में राहुल के पीछे खड़ा था... तो राहुल की आँखें फट गयी सामने कहदे इंसान को देख के..पर में नहीं पहचान पाया.
कुबेर भाई.. आप ये क्या कर रहे हूँ. राहुल ने जब देखा की कुबेर ने इशिका के गले पे बंदूक लगा रखी है तो राहुल की सिट्टी पिटी गुल हो गयी..
इशिका :- कुबेर.. चोद क्या कर रहे हो तुम?
कुबेर :- कैसे चोद दम इशिका. कैसे चोद दम. नहीं चोद सकता. वैसे में तुझे भी नहीं चोदूंगा राहुल तेरी वजह सी ही सब मर रहे हैं. सिर्फ़ तेरी वजह से.. हम अच्छा भला एक साल सी सही थी लेकिन तेरे आ ही सब मरने शुरू हो गयी. अब में जनता हूँ की अगला नंबर मेरा है. पर अगर में तुम दोनों को मर दम तो मौत का खेल फिर बिगड़ जाएगा. और उसके बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा में बच जाऊंगा. इसलिए तुम दोनों को मारना पड़ेगा..
अरे ये क्या बोल रहे है कुबेर ऐसा कुछ नहीं होगा..मौत तो सबको मिलेगी.. तेरे ऐसे करने से कुछ ने होगा तू पागल हो गया है..तेरा दिमाग सही जगह नहीं है.. शांति सी बात को समझ सब क्कूह ठीक हो जाएगा.. राहुल उससे समझते हुई बोला..
कुछ ठीक नहीं होगा.. कुछ भी ठीक नहीं होगा. हम सब मरेंगी.अगर मैंने तुझे और इससे नहीं मारा ऐसा करते ही में बच जाऊंगा. पहले तेरे इस महबूबा को मारूँगा.. कुबेर गुस्से में बोला..
राहुल :- तेरा दिमाग ठीक जगह नहीं है.. तू अपने दोस्तों को मरेगा..
मेरे लिए मेरी जिंदगी ही सबसे बड़ी चीज़ है.. कोई दोस्त नहीं कोई कुछ नहीं. (मौत उसके दिमाग पे हावी हो गयी थी)
ये दोनों बात कर रहे थे..इसलिए कुबेर का ध्यान मुझ पर नहीं गया. मुझे कुछ जल्दी करना था नहीं तो इशिका और राहुल मर जाएँगे और साथ मैंने में भी.. तभी मेरी नज़र नीचे ज़मीन पे पड़ा मुझे वहां एक पठार दिखा..मैंने सावधानी से उससे उठाया..
आबे ये गयी. बोलते हुई कुबेर ने ट्रिग्गर दबाना शुरू किया.. इशिका ने अपनी आँखें बंद कर ली..
नहियीईईईई राहुल चिल्लाया.
पर इधर मैंने.. आआ. चिल्लाते हुई पठार उठा की कुबेर के सर पी दे मआराअ..
आआआआआआहह.. वो दर्द में करहता हुआ हल्का सा पीछे हुआ.जिससे इशिका उसके चंगुल से चुट्त गयी. राहुल ने इशिका को अपनी तरफ खींचा.पर कुबेर ने अपने आप को संभाल लिया उसके सर से खून बह रहा था पर फिर भी उसने इशिका की तरफ गोली चलाई.. लेकिन राहुल बीच में आ गया और गोली सीधे उससे जा लगी.. और वो इशिका के साथ ज़मीन पे गिर गया.
राहुल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल में और इशिका दोनों एक साथ चिल्लाई.. फिर कुबेर ने मेरी तरफ बदुक की लेकिन मेनी उसका गला पकड़ लिया और गुण को उप्पर कर दिया.. लेकिन कहाँ में और कहाँ वो हटा कटता कुबेर. उसने मेरा गला पकड़ लिया और मुझे पीछे की तरफ गाःसिटने लगा..
में किसी कट्पुतली की तरह पीछे होता चला गया. पर मेरा मकसद था उसके हाथ से वो गुण नीचे गिरवा देना. पर मेरी आँखें बाहर होने को हो गयी थी..सांस नहीं मिल रही थी इतना ज़ोर से गला दबा रखा था.. पर आख़िर में सफल हो ही गया में और मैंने कुबेर के हाथ से गुण नीचे गिरा ही दी..
गुण साइड में गिर गयी.. कुबेर ने कुछ कदम मुझे पीछे की तरफ घसीटा और फिर एक दम उछाल की पीछे की तरफ फेंक दिया. में पीछे रोड पे गिर गया. कंधों के बाल...
सेल मुझे मारा. अब नहीं चोदूंगा तुझे.. तू गया. कुबेर गुराता हुआ अपनी गुण ढूंढ़ने लगा.. में ज़मीन पे पड़ा था.. मेरे कंधे पे बड़ी ज़ोर से लग गयी थी. आख़िर कुबेर को अपनी गुण दिखाई दी जो उसके पीछे पड़ा थी..वो उससे उठाने के लिए गया वहां झुका उसने गुण बस उठाई ही थी की तभी.
आआआआआआआआ.. राहुल पीछे से आया और उसने कुबेर को धक्का दे दिया जिसकी वजह से कुबेर रोड के बिलकुल बीचों बीच आ गया लदकड़ते हुए खड़ा हो गया. उसके हाथ मैंने बंदूक थी उसने अपने दाँत
दिखाते हुई राहुल के उप्पर बंदूक्क टन दी.. लेकिन वो ट्रिग्गर दबाता उससे पहली..
एक गाड़ी तेजी से आई..... और धूमम्म्ममममममममम उससे उड़ा दिया. कुबेर उड़ता हुआ साइड में लगे पोले पे निकली लोहे की रोड में जा गुस्सा.. वो पॉली उसके मुंह से घुसता हुआ उसके गले में से बाहर निकल गया. खून की नदियाँ नीचे गिरने लगी. पर शायद ये मौत भी कम थी उसके लिए.. उसके बाद वो पोले उसका वजन ना सहन कर पाया.. इसलिए उसके नीचे का हिस्सा आधे मुंह से साथ नीचे गिर गया और आर उप्पर का उसे पोले से चिपका रहा. नीचे गिरते ही खून की बॉटल खुल गयी और आधी मुंह के आगे सी खून की धारा बहने लगी..
कुबेर की मौत के बाद मैंने फौरन टाइम देखा तो टाइम हो रहा था.. 11:56
में लदकड़ते हीए रहल के पास गया.. उसको गोली हाथ में लगी थी..इसलिए वो बच गया था.. इशिका भी सही थी..
तीस इस इट राहुल.. अब मुझे समझ आ गया. इस मौत का खेल.. अभी सर्वाइव्ड.. मैंने जब कहा तो दोनों मेरी तरफ देखने लगे...मानो पूछ रहे हो कैसे?
में उनकी बात को समझते हुई कहा..
इस पूरे गेम में ंम्ब्ेर्स जीतने इम्पोर्टनट रखते हैं.. उतनी ही रीलेशन भी दोस्त. दीक्षा अरमान को बच्चा सकती थी पर उसने नहीं किया रिज़ल्ट दीक्षा डेड.. कोमल को निकुल बच्चा सकता था पर नहीं कर पाया बहुत डेड. सोनल को इसलिए नहीं बच्चा पाए. क्यों की शी ब्रेअकेस एवेरी रीलेशन.. और आज तुम दोनों बच गये बेक ऑफ और रीलेशन.. तूने अपनी जान की परवाह किए बिना इशिका को बचाया.. यू सेव्ड हेयर लाइफ और चीट हेयर डेत... और यू सेव्ड में लाइफ टू रिज़ल्ट कुबेर डेड.. अभी चीट डेत भाई. अभी चीटेड वन्स अगेन.. नाउ अभी सर्वाइव.. अभी अरे फ्री मान. अभी अरे फ्री..
इशिका के आँखों से आँसू निकल आई जब उसने मेरी बात सुनी.
राहुल :- और यू सेव्ड में लाइफ ब्रू ... (बोतल हुई मेरे गॅल लग गया) एस्स अभी चीट डेत.. अभी दीदी इट...
शायद मेरी खाई हुई बात कहीं ना कहीं सही थी.. हम लाइफ में अकेले नहीं रही सकते किसी ना किसी के साथ की जरूरत पड़ती है.
खुशी और भावनाओं में इतना बह गया की शायद कुछ अभी भी भूल गये हम..
7 मंत्स लेटर.........
साफ मौसम. बेहद आराम दायक जिंदगी. संडे का दिन किस को अच्छा नहीं लगता...
में पलंग से अंगड़ाईयाँ मरते हुई खड़ा हुआ.. चलते हुई बाथरूम में घुस गया फ्रेश हुआ. और कुछ देर बाहर निकला...
रूम से बाहर निकला .. टीवी ऑन किया सुबह सुबह ज्यादा कुछ नहीं आ रहा था तभी एक स्पोर्ट्स चॅनेल पे लगा दिया तो उसपर कोई पुराना सा मॅच आ रहा था..
30 पे 4 विकेट.. ये हालत कब हुई इंडिया की.. मैंने सोक्ोरे देखते हुई कहाआ..की तभी बेल बज्जी.
मैंने टीवी बंद किया और घर का दरवाजा खोला.. सामने देखा तो बाज्जु वाली आंटी खड़ी थी.
अरे आंटी आप सुबह सुबह.. कुछ कम था? मैंने उनसे सवाल किया
नहीं नहीं बेटा.. वो ये 30 ऋूपपे देने आई हूँ तुम्हारे.. वो सोनू तुमसे ले गया था कुछ 3 या 4 महीने पहले और अब बता रहा था.. मैंने उसकी अच्छी खड़ी काहबर ली है.. बदमाश कहीं का..
अरे आंटी कैसी बात कर रही है आप.. वो मुझे बलकल पैसे ले सकता है.. आप 30 रुपये देने आई है.. में ये नहीं ले सकता और वो इतने महीनों पुरानी बात.. मुझे तो याद भी नहीं थी..मैंने थोड़ा स्टे हुई कहा..
अरे नहीं नहीं बेटा.रख लो. उन्होंने मेरे हाथ में थमते हुई कहा. अच्छा में चलती हूँ..बोलते हुए वो निकल गयी..
मैंने दरवाजा बंद कर दिया और 30 र्स को वहीं टेबल पे रख दिया. अब सुबह सुबह मुझे को कॉफी पीने की आदत है तो चल पड़ा में किचन की तरफ को कॉफी बनाने के लिए..
ऊहह टेरी की दूध ही नहीं है.. मैंने सर पे हाथ मरते हुए कहा..रोज़ रात को ऑफिस से आता हुआ दूध ले आता था पर कल भूल गया . मैंने फ्रीज बंद किया और बाहर बालकनी में जाकर खड़ा हो गया की अगर सोसाइटी में आने वाला दूध वाला आ जाए तो आज उसी से ले लूँगा..
और मेरी किस्मत भी अच्छी निकली दूध वाला भी अंदर आता दिखाई दिया..
ओईई.. दूध वल्ली.मैंने आवाज़ लगाई और उससे बोल दिया दूध दे जाने के लिए.उप्पर आकर उसने दूध दिया तो मैंने उससे 30 र्स पकड़ा दिये.. अब 30 र्स में इतना दूध मिल गया की एक कप को कॉफी तो बन ही जाती थी मैंने अपने लिए को कॉफी बनाई..और बना की में बाहर अपने बालकनी में आकर बैठ गया न्यूसपेपर लेकर..
संडे के अक्भर में ज्यादा क्कूह होता है नहीं पड़ने के लिए.. पहले ही पेज पे.. 30% डिसकाउंट का एड लगा हुआ था.. आख़िर तक हर कर जब कुछ नहीं हुआ तो मैंने वो अख़बार बंद कर के साइड में रख दिया और नीचे देखने लगा जहाँ बच्चे क्रिकेट खेल रहे थी.उनकी आवाजें आ रही थी..
आबे 30 ऋण हो गये हैं. सिर्फ़ 4 बाकी है अब... में बना लूँगा.. उनको देख की अपना बचपन याद आ गया. फिर में मुड़ा और अंदर जाने लगा..और अक्भर पे आज की डेट पड़ा..
फिर पता नहीं मुझे क्या हुआ डेट देख की में उससे गौर से देखने लगा.. ना जाने क्यों पर देखने लगा... फिर तभी मेरे दिमाग में कुछ आया.. जिससे मेरे शरीर के अंदर बेचैनी बाद गयी. मैंने सबसे पहले घड़ी में टाइम देखा 11 बज रहे थे..और उसके बाद अपनी स्टडी टेबल की तरफ बगहा. उसमें कुछ ढूंढ़ने लगा.. काफी सारी बुक्स निकल के रख दी..लेकिन मुझे वो नहीं मिला जिससे ढूंढ. रहा था.. फिर करीब 20 महन्त के बाद मुझे वो चीज़ मिली जो मैंने बुक के बीच में रखी थी संभाल की.
वो पेपर. वो पेज जिसमें हमारी मौत की कॅल्क्युलेशन्स हुई थी..करीब 10 मिनट तक उसे पेपर को देखने के बाद मेरी रूह कांप गयी.. और मेरे सामने सुबह से घटना घूमने लगी. वो 30/4 स्कोर.. आंटी का 30 र्स देना.. दूध वाले को 30 देना.. डीस्कुंत का 30% देखना.. बच्चों का क्रिकेट में 30 का स्कोर होना.. मेरा दिमाग और शरीर पूरी तरह से हिल गया..
मैंने तुरंत राहुल को फोन लगायाअ..
रिंग जाती थी रही.जाती थी रही. और फिर उनसे पिक किया.
हाँ हर्षित कैसे याद किया सुबह सुबह.. राहुल ड्राइव करते ही बोला..उसके बगल में इशिका बैठी थी.. जो काफफी खुश लग रही थी...
कहाँ है इस वक्त तू? मैंने थोड़ा घबराया हुआ बोल रहा था..
में बॅस यार मैडम जी को सुबह से शॉपिंग करनी थी तो इसलिए गॅलक्सी माल जा रहा हूँ . क्यों क्या हुआ..
इशिका भी तेरे साथ में है? मैंने फिर से घबराहत में साव्ल किया
हाँ अबवीऔस यार.. अब मैडम तो इशिका ही है.. तुझे क्या लगा कोई और पता ली मैंने
राहुल जल्दी से घर आ जा मुझे कुछ अजीब लग रहा है.. हेलू. सुन रहा है ना तू..
उधर राहुल ने फोन कोन पे नहीं लाग रखा था उससे पुलिस वाले ने पकड़ रखा था.
हीलूओ हेल्लूऊऊऊओ में बार बार बोले जा रहा था की तभी राहुल की आवाज़ आई..
आबे तेरे चाह कर में चलन काट रहा है बाद में बात करता हूँ.. बोलते हुई उसने फोन कट कर दिया
दमीड्ड... में गुस्से में बोला और फट से घुस गया रूम में रेडी होने के लिए.. करीब 10 मिनट के अंदर घर से बाहर निकल गया.और अपनी कार निकली और उसके बताए हुई जगह पर निकल गया.
उधर राहुल गद्दी अपनी मंजिल की तरफ बाद रहा था और पहुंचने के बाद उसने पार्किंग से पहले नॉर्माली रोड की साइड में गद्दी लगा दी..
में तेजी से गद्दी चला रहा था 5 या 7 मिनट लगते मुझे पहुंचने में..
राहुल और इशिका गद्दी से बाहर निकले.राहुल चल पड़ा पर उसने देखा तो इशिका नहीं दिखी..
क्या हुआ इसी. राहुल ने आवाज़ लगाई..
यार ये बार बार पर्स में से निकल के गिर रहा है.. उसने पर्स पे लगी के चैन को दिकहते हुई कहा..
राहुल :- तो हटा दे ना इससे.
इशिका :- नहीं हटूंगी.
अब जब उसने ना बोल दिया तो बात हे कहतम.. राहुल और इशिका चल पड़े.. तभी राहुल के फोन बज्जा
आज ये बड़ा परेशान है... उसने फोन पिक किया..
हाँ राहुल तू जहाँ है वहीं रहियो में आ रहा हूँ. सुन रहा है ना.. मैंने कहा..
क्या. क्या बोल रहा है.. उससे कुछ सुनाई नहीं दी रहा था क्यों की डिवाइडर पे अड्वर्टाइज़िंग बोर्ड का कम चालू था वहां मशीन से उस पोले पे कुछ कर रहे थी...
अरे सुन रहा है ना क्या कह रहा हूँ.. वहीं रुक में आ रहा हूँ..
आबे क्या बोल रहा है ज़ोर से बोल. सुनाई नहीं दे रहा.. (और अचानक से फोन कट हो जाता है)
श शितत बटीरी दोववण. राहुल बोलते हुई आगे बाद रहा था की तभी उसने देखा की इशिका उसके साथ नहीं है.. उसने मूंड़ के देखा तो इसका चलती हुई बीच रोड पे पहुह गयी थी अपनी के चैन को उतनी
ये भी ना.. राहुल ने अपने आप से कहा और फिर उसकी नज़र उसे तरफ रोड पे पड़ा जहाँ एक गद्दी तेजी से आ रही थी.. इशिका ने उसे तरफ धान नहीं दिया..
इशिका.... राहुल छिलता हुआ भगा इशिका के पास और उससे अपनी तरफ खिच लिया. और गद्दी सन करती हुई निकल गयी..
इसी इसी.... ठीक तो है ना तू. राहुल ने डरी ही आवाज़ में कहा..
हाँ.. वो भी डरी हुई थी..
में कह रहा हूँ की चोद दे उससे.. लेकिन पता नहीं क्या है.. राहुल ने इशिका का हाथ पकड़ा और फिर चल पड़ा.
थोड़ी ही दूर गये थे तो राहुल ने इशिका की तरफ देखा जिसका सेहरा मुरझाया हुआ था
राहुल :- क्या हुआ?
इशिका :- कुछ नहीं.. चालू मुज़ेः कोई शॉपिंग नहीं करनी..
राहुल :- ओफू ऐसा क्या है उसे के चैन में जो इतना परेशान हो रही है..
इशिका :- क्यों की वो तुमने दिया था इसलिये.. [इशिका ने बच्चों की तरह कहा]
जिससे देख की राहुल अपने आप को हँसने से नहीं रोक पाया.. अच्छा बाबा ला देता हूँ.. तू यहीं रुक..
इशिका :- हम.. [ खुश होते हुई]
फिर राहुल चल पड़ता है उसे के चैन को लेने जो वहीं पड़ा थी ज़मीन पी...राहुल देखते हुई चल पड़ता है. और आख़िर कर उसे चैन को उठा लेता है और इशिका की तरफ मूंड़ की उस्सी दिखाने लगती है.. दोनों के चेहरे पे एक मुस्कुराहट होती है..
में तेजी से गद्दी चला रहा था और ऑलमोस्ट पहुंच ही गया था गलक्ष्य के सामने बस मुझे यू टर्न लेना था.की तभी मेरी नज़र सामने राहुल पे पड़ा. मैंने उससे आवाज़ लगाई पर वो सुन ही नहीं रहा था. पर अचानक मेरी नज़र सामने जब रोड पे पड़ड़ती तो एक गद्दी हॉर्न बजाते हुई तेजी से बाद रही थी उसकी तरफ..
पर राहुल तो इशिका की उसे मुस्कुराते चेहरे में खो गया था और इशिका उसमें .. उन दोनों ने ध्यान ही नहीं दिया की वो दोनों कहाँ कहदे हैं...
जब मैंने देखा वो गद्दी तेजी से राहुल की तरफ बाद रहा है मैंने अपनी गद्दी को फुल बढ़ता दिया और साइड डिवाइडर में घुसती हुई उसे रोड पी जैसे ही आया... सामने से आती हुई गद्दी जो राहुल को उड़ाने वाली थी.. सीधे उसमें गुस्सा दी.. जिससे मेरी गद्दी और उसकी गद्दी रोड की दूसरी तरफ पहुंच गयी..
आआआआआआआआआआआ.. सब लोग वहां कहदे छिलालयी.. इस हमले से इशिका भी चीलाईइ रहल ने भी अपनी नज़र इधर की..तो उससे ये आक्सिडेंट दिखा..
मुझे चोट नहीं लगी.. एरबॅग खुलने की वजह सी.. बस हल्की से सर पे लगी थी. में जल्दी से उतरा पर शायद देर कर दी..
मेरे इस आक्सिडेंट की वजह से पिछले वेचिलेस का बैलेन्स बिगड़ गया..और एक गद्दी सीधे दिवदर से टकराती हुई.
राहुल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल... इशिका चिल्लइ. राहुल उसे गद्दी से बच गया.. एप्र वो गद्दी सीधे उसे अड्वर्टाइज़िंग बोर्ड से जा टकराई जिसके पोले अभी लग रहे थी. और भूंम्म्मममम ढाम्म्म्ममममममममममम
आवाज़ की स्ताः वो बोर्ड नीचे की तरफ गिरने लगा.
राहुल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल.......में चिल्लाया. और उसकी तरफ बगा. पर जैसे ही उसने उप्पर देखा तो वो बड्डा सा बोर्ड उसके उप्पर गिर गया..
पकचह जैसी आवाज़ आई.. और राहुल का शरीर अव्हीन पिचक गया.. उसका एक हाथ उसके शरीर से अलग होते हुई साइड में जा गिरा.. और बाकी का शायर किसी सॅंडविच की तरह पिस की तकड़ों में बदल गया था हर जगह खून ही खून फेल गया.
नाहियीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई.इशिका ज़ोर से चिल्लाई.. और वहीं पे एक कार और आयी और इशिका को कुचल गयी. में कभी राहुल के उसे पीस्से हुई शरीर की तरफ देखता तो अक्भी इशिका को देखता. मेरे हाथ पैर सुन्न हो गये थी.. जो भी देखा मैंने अभी अभी.. क्या वो सपना था.. काश सपना ही हो.
पर ऐसा नहीं था..वो सपना नहीं है.. हक्कइकात है. एक ऐसी हक्कइकात जिससे हम मुकर नहीं सकती...
30 एप्रिल आज की डेट.. यानि की 30 / 4.. मौत का वक्त इशिका और राहुल ने खुद तय किया था.. याद है आप सब को वो नंबर्स. जो राहुल और इशिका ने खुद बताए थी.
12 + 00 + 00 + 28 = 30 ये इशिका ने बताया था उसे ट्रेन नो. के कलक्लुआतीओं से..
12 + 00 + 00 + 28 = 31 . मतलब की 3 + 1 = 4
30 यँनी की आज की डेट और 4 आज का मंथ यानि की एप्रिल..
इतने ही ज़ीरो थी इस ट्रेन नंबर में.. जो हमें कभी उसे ही नहीं किया.. क्यों की हमारी नज़र में ज़ीरो की कोई वॅल्यू नहीं है पर शायद मौत की नज़र में ज़ीरो की बहुत वॅल्यू है.. एक बार फिर मौत ने हमें धोका दे दिया. और वो जीत गयी.. आख़िर उसने राहुल और इशिका को हमसे छीन लिया.
में एक बार फिर हर गया।
And kahani ka hua the end, and main baat ye hai ki maut se bada kuch na hai na hero na vilan usse koyi na jeet sakta bas taal sakte ho wo bhi thode der ke liye....