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नीरव- “हाँ वही, राजकोट की सबसे अच्छी डाक्टर वही तो है...” नीरव ने चाय खतम करते हुये कहा।
उसके बाद मैंने जल्दी-जल्दी खाना बनाया, खाना खाकर मैंने बर्तन साफ किए बिना ही छोड़ दिए। 11:00 बजे मैं और नीरव हास्पिटल पहुँच गये। 3:00 बजे हमारी बारी आई। डाक्टर ने पहले मेरी सोनोग्राफी कराई और कुछ रिपोर्ट निकलवाए ये कहकर की अगर आपकी रिपोर्ट नार्मल आए तो ही हम आपके पति का चेकप करेंगे, ज्यादातर प्राब्लम फिमेल में ही होती है।
रिपोर्ट और सोनोग्राफी में ही 5:00 बज गये। दोनों के रिपोर्ट दूसरे दिन आने वाले थे, नीरव और मैं घर के लिए निकल ही रहे थे कि नीरव को आफिस से काल आ गया तो नीरव ने मुझसे कहा- “निशु तुम रिक्शा में चली जाओ, मुझे जल्दी से आफिस जाना पड़ेगा..."
नीरव के कहने पर मैं रिक्शा में बैठ गई। घर थोड़ा ही दूर था, तभी मेरा ध्यान जोपड़पट्टी के पास लड़ रहे दो आदमियों पर गई। मैंने रिक्शा में से बाहर झांक के देखा तो दोनों में से एक रामू था और दूसरा कान्ता का । पति। वो दोनों जहा लड़ रहे थे, उसके सामने की तरफ जाकर मैं उतर गई और देखने लगी की क्या हो रहा है? उन लोगों की आवाज मुझे सुनाई नहीं दे रही थी, पर एक दूसरे की तरफ हाथ कर-करके गालियां दे रहे होंगे ऐसा लग रहा था।
कान्ता के पति के हाथ में लोहे की राड थी जिसकी एक तरफ धार निकली हुई थी। रामू ने उससे कुछ कहा तो गुस्सा होकर वो रामू को वो राड से मारने को दौड़ा। वो रामू के नजदीक गया और जैसे ही राड उठाकर रामू को मारने गया, तभी रामू ने उसका वो राड वाला हाथ पकड़ लिया और फिर उसे जोर-जोर से मारने लगा, थोड़ी मार खाते ही कान्ता का पति चिल्लाने लगा।
कान्ता के पति के पास बचने का एक ही उपाय था, वो राड छोड़ देना और उसने राड छोड़ भी दी और सड़क पे पड़ा एक पत्थर उठाया और रामू को दे मारा। पत्थर रामू के सिर पे लगा और खून बहने लगा। रामू ने अपना हाथ सिर पे रखा जिससे उसका हाथ खून से भर गया। रामू ने हाथ नीचे किया और देखा की उसका हाथ खून
से रंगा हुवा था।
रामू का गुस्सा सातवें आसमान पे चढ़ गया, उसने लंबी-लंबी छलाँग भरी और कान्ता के पति को पकड़ लिया
और फिर कालर से पकड़कर ऊपर करके नीचे पटका। कान्ता के पति ने नीचे गिरते ही रामू को फिर से गालियां देनी शुरू कर दी। रामू उसके पैरों को कान्ता के पति के दोनों तरफ करके खड़ा हो गया और उसने राइ को दोनों हाथ से मजबूती से पकड़ा और कान्ता के पति को मारने के लिए हाथ ऊपर किया।
वहां पर जो लोग इसे अभी तक तमाशा समझकर देख रहे थे, सबकी आँखें चौंधिया गई, पर अब बहुत देरी हो चुकी थी, किसी में भी हिम्मत नहीं थी बीच में पड़ने की।
जैसे ही रामू ने पूरे जोश से राड को थोड़ी ही नीचे किया तो मेरे मुँह से चीख निकल गई- “रामू..” मेरी चीख सुनते ही रामू का हाथ रुक गया, और उसने मेरी तरफ देखा। शायद आवाज की दिशा से उसने अंदाजा लगाया होगा की मैं किस तरफ खड़ी हूँ। मैंने जरा सी भी देरी की होती तो कान्ता का पति जिंदा नहीं होता।
रामू का सारा बदन जनून के मारे थरथरा रहा था, उसकी आँखों में रोशनी की जगह चिंगारी दिख रही थी। मैंने उस चिंगारी को सामने देखकर मेरा सिर दो बार 'ना' में हिलाया, जिसे देखकर रामू ने अपने हाथ से राड को फेंक दिया और कान्ता के पति के बाजू में जमीन पे बैठ गया। ये देखकर वहां खड़े लोगों में से ज्यादातर लोगों का ध्यान मेरी तरफ गया।
जिसे देखकर मुझे बहुत ही शर्मिंदगी महसूस हुई। मैं नजर नीचे करके वहां से जल्दी से सरक गई। वहां जितने भी लोग थे, उसमें से कोई मुझे जानता होगा ऐसा तो मुझे नहीं लगता था। ये सोचकर मुझे थोड़ी राहत हुई। घर आकर रह-रहकर मुझे रामू की आँखें दिखाई दे रही थीं, उसका जनून देखकर मैं आज बहुत डर गई थी।
उसके बाद मैंने जल्दी-जल्दी खाना बनाया, खाना खाकर मैंने बर्तन साफ किए बिना ही छोड़ दिए। 11:00 बजे मैं और नीरव हास्पिटल पहुँच गये। 3:00 बजे हमारी बारी आई। डाक्टर ने पहले मेरी सोनोग्राफी कराई और कुछ रिपोर्ट निकलवाए ये कहकर की अगर आपकी रिपोर्ट नार्मल आए तो ही हम आपके पति का चेकप करेंगे, ज्यादातर प्राब्लम फिमेल में ही होती है।
रिपोर्ट और सोनोग्राफी में ही 5:00 बज गये। दोनों के रिपोर्ट दूसरे दिन आने वाले थे, नीरव और मैं घर के लिए निकल ही रहे थे कि नीरव को आफिस से काल आ गया तो नीरव ने मुझसे कहा- “निशु तुम रिक्शा में चली जाओ, मुझे जल्दी से आफिस जाना पड़ेगा..."
नीरव के कहने पर मैं रिक्शा में बैठ गई। घर थोड़ा ही दूर था, तभी मेरा ध्यान जोपड़पट्टी के पास लड़ रहे दो आदमियों पर गई। मैंने रिक्शा में से बाहर झांक के देखा तो दोनों में से एक रामू था और दूसरा कान्ता का । पति। वो दोनों जहा लड़ रहे थे, उसके सामने की तरफ जाकर मैं उतर गई और देखने लगी की क्या हो रहा है? उन लोगों की आवाज मुझे सुनाई नहीं दे रही थी, पर एक दूसरे की तरफ हाथ कर-करके गालियां दे रहे होंगे ऐसा लग रहा था।
कान्ता के पति के हाथ में लोहे की राड थी जिसकी एक तरफ धार निकली हुई थी। रामू ने उससे कुछ कहा तो गुस्सा होकर वो रामू को वो राड से मारने को दौड़ा। वो रामू के नजदीक गया और जैसे ही राड उठाकर रामू को मारने गया, तभी रामू ने उसका वो राड वाला हाथ पकड़ लिया और फिर उसे जोर-जोर से मारने लगा, थोड़ी मार खाते ही कान्ता का पति चिल्लाने लगा।
कान्ता के पति के पास बचने का एक ही उपाय था, वो राड छोड़ देना और उसने राड छोड़ भी दी और सड़क पे पड़ा एक पत्थर उठाया और रामू को दे मारा। पत्थर रामू के सिर पे लगा और खून बहने लगा। रामू ने अपना हाथ सिर पे रखा जिससे उसका हाथ खून से भर गया। रामू ने हाथ नीचे किया और देखा की उसका हाथ खून
से रंगा हुवा था।
रामू का गुस्सा सातवें आसमान पे चढ़ गया, उसने लंबी-लंबी छलाँग भरी और कान्ता के पति को पकड़ लिया
और फिर कालर से पकड़कर ऊपर करके नीचे पटका। कान्ता के पति ने नीचे गिरते ही रामू को फिर से गालियां देनी शुरू कर दी। रामू उसके पैरों को कान्ता के पति के दोनों तरफ करके खड़ा हो गया और उसने राइ को दोनों हाथ से मजबूती से पकड़ा और कान्ता के पति को मारने के लिए हाथ ऊपर किया।
वहां पर जो लोग इसे अभी तक तमाशा समझकर देख रहे थे, सबकी आँखें चौंधिया गई, पर अब बहुत देरी हो चुकी थी, किसी में भी हिम्मत नहीं थी बीच में पड़ने की।
जैसे ही रामू ने पूरे जोश से राड को थोड़ी ही नीचे किया तो मेरे मुँह से चीख निकल गई- “रामू..” मेरी चीख सुनते ही रामू का हाथ रुक गया, और उसने मेरी तरफ देखा। शायद आवाज की दिशा से उसने अंदाजा लगाया होगा की मैं किस तरफ खड़ी हूँ। मैंने जरा सी भी देरी की होती तो कान्ता का पति जिंदा नहीं होता।
रामू का सारा बदन जनून के मारे थरथरा रहा था, उसकी आँखों में रोशनी की जगह चिंगारी दिख रही थी। मैंने उस चिंगारी को सामने देखकर मेरा सिर दो बार 'ना' में हिलाया, जिसे देखकर रामू ने अपने हाथ से राड को फेंक दिया और कान्ता के पति के बाजू में जमीन पे बैठ गया। ये देखकर वहां खड़े लोगों में से ज्यादातर लोगों का ध्यान मेरी तरफ गया।
जिसे देखकर मुझे बहुत ही शर्मिंदगी महसूस हुई। मैं नजर नीचे करके वहां से जल्दी से सरक गई। वहां जितने भी लोग थे, उसमें से कोई मुझे जानता होगा ऐसा तो मुझे नहीं लगता था। ये सोचकर मुझे थोड़ी राहत हुई। घर आकर रह-रहकर मुझे रामू की आँखें दिखाई दे रही थीं, उसका जनून देखकर मैं आज बहुत डर गई थी।