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कड़ी_83 विशाल पूछता है और अदिति जवाब देती है
अदिति की जुबानी अपने खुद के बाप से संभोग के बाद विशाल ने कहा- “तो तुमने खूब एंजाय किया पापा के साथ भी? वो बेहद खुश थे तुमको पाकर और बहुत जल्दी कर लिया, क्योंकी उसने तुमको पहली बार लिया था, और तुमने तो बिल्कुल ही समर्पण कर दिया था। मगर तुम्हें इतनी जल्दी नहीं देना चाहिए था, तुम्हें उनको कुछ और दिनों तक थोड़ा तड़पाना चाहिए था मेरे खयाल से। तुम क्यों इतनी जल्दी मान गई?”
अदिति ने जवाब दिया- "उनको पहले से सब पता चल चका था तो मैं कैसे उन्हें मना करती? मैंने कहा ना की राकेश के साथ करने के बाद मुझे लगा की उसने मेरे लिए अब रास्ते खोल दिए थे। मुझे राकेश के साथ इतना मजा आया था की मैंने सोचा की उनके साथ भी वैसा ही होगा और हआ भी। और ऊपर से उस रात को तुमने नहीं किया था तो सुबह को जब पापा ने मुझे उस तरह से छुआ तो मुझे उसकी जरूरत भी महसूस हुई, सो आई गेव इन। और हाँ, उनके लिए उस दिन मैं एक बहुत आसान चीज थी.”
विशाल ने कहा- “और उन दिनों मैं आफिस में अक्सर सोचा करता था की तुम अकेली तीन मर्दो के बीच घर में हो और क्या पता के उनमें से कोई तुम्हारे साथ फ्लर्ट कर रहा हो, और कौन जाने की किसी ने तुमको लेटा भी दिया हो? और वो सब सच में हो रहा था। धत्... मुझे तब क्यों नहीं पता चला? क्यों मैंने तुम लोगों को नहीं देख लिया किसी दिन तभी? मुझे कितनी खुशी होती तब तुमको उनमें से किसी के साथ देखकर..”
अदिति ने कहा- “उन रातों को मैंने तुमको बताने का कई बार सोचा, मगर मैं घर का माहौल नहीं खराब करना चाहती थी। जिस तरह से तुम सबका एक अपनापन है, मैं वो नहीं तोड़ना चाहती थी, भाई-भाई के बीच मैं दरार नहीं डालना चाहती थी, बाप बेटे के बीच मैं लड़ाई नहीं करवाना चाहती थी, तो मैंने चुप रहना पसंद किया उन दिनों...”
विशाल ने खुद से बात किया तब- “असल में यह अदिति ने हमेशा मुझसे सब छुपाई है, आनंद के साथ भी तो इसने ऐसा ही किया था। जिन दिनों आनंद घर आया करता था और मैं बाहर सिगरेट पीने जाता था और छुपकर बाहर से देखता था अदिति को आनंद के साथ, किस तरह से आनंद उसको दुलारता था, किस करता था और जब मैं वापस अंदर आता था तो अदिति ऐसी बिहेव करती थी की कुछ भी नहीं हुआ है। और जिन दिनों मैं कोई और बनकर उसको टेक्स्ट करता था अदिति ने मुझे कभी यह बात नहीं बताई की कोई उसके साथ फ्लर्ट करता है मोबाइल पर, और कैसी गंदी-गंदी बातें करता है। अदिति सब अकेले एंजाय किया करती थी। यह मेरी अदिति अइवेंचरस है और इसे नहीं पता
इसे नहीं पता की मझे कितनी खशी दे रही है ऐसा होकर। वो अपने लिए सीक्रेटली सेक्स आड्वेंचर्स रखना चाहती है, जैसे की मैं उसको अकेले किसी और के साथ देखना पसंद करता हूँ। वो खुद यह सब पसंद करती है की बिना मुझे बताए एंजाय करे किसी और के साथ, इसीलिए मुझको कभी भी नहीं बताया अपने सभी आड्वेंचर्स के बारे में। आज आई है ऊँट पहाड़ के नीचे और सब बक रही है, तो मुझे तो एंजाय करना है सब जानकर, मगर अभी उसको चोदने को बड़ा मन कर रहा है..”
विशाल ने उन दिनों को भी याद किया जैसे के जिस दिन उसने आनंद को पहली बार घर लाया था, और अदिति ने उसको रिझाने से इनकार किया था अपने पल्लू गिरा कर। और किस तरह अदिति अपने बाल पीछे बाँध रही थी आनंद के सामने और वो किस तरह से वो अदिति को घूर रहा था, फिर विशाल को यह भी याद आया की किस तरह खुद के बर्थ-डे के रोज अदिति ने खुद आनंद को इन्वाइट करने को कहा था और यह जानते हुए के आनंद भी आने वाला है अदिति ने किस तरह से उस दिखाऊ ड्रेस को पहेनने को लिये तैयार
विशाल के दिमाग में वो सब दृश्य एक मवी की फ्लैशबैक की तरह दिख रहा था। फिर विशाल को याद आया की किस तरह से जब वो स्मोक करने छत पर गया था तो अदिति आनंद के साथ
सटकर बैठकर शादी के फोटो दिखा रही थी और आनंद उसको कैसे दुलार रहा था उसके जिश्म पर अपना हाथ फेरते हुए और अदिति को किस करना चाहता था।
थोड़ी देर बाद विशाल ने अदिति के करीब जाते हुए कहा- “अब मैं गरम हो गया हूँ, मुझे चोदने का मन कर रहा है, तेरी लेने का मन कर रहा है। तुम्हीं ने गरम किया है मुझे ये सब बताकर। चलो राल-प्ले में आज तुम मेरी बहू और मैं ससुर बनता हूँ, ठीक जैसे तुमने कुछ देर पहले बताया तुम्हारे और पापा के बीच...”
अदिति मूड में नहीं थी तो मना किया। उसने कहा- “नहीं पहले मुझे खतम करने दो। तुम्हारे घर में मुझपर जो भी बीता तुम सब सुनो आज। सुनो और समझो की मैं क्यों और कैसे वैसे हुई जैसे आज हूँ? समझो की क्यों
मैंने सेक्स को इतना एंजाय करना शुरू किया? सुनो के कैसे मुझको सेक्स करने की आदत और लत लगी? सब तुम्हारे उसी घर से शुरू हुई और मैंने एंजाय करना शुरू किया। सुनो की किस तरह से तुम्हारे घर वालों ने मुझको ट्रेन्ड किया, उसमें लीना भी शामिल है। सब ठीक से सुन लो तब जो मर्जी आए करना.”
विशाल ने कहा- “ओके फिर ठीक है बताओ... बताओ मुझे तु बहुत मजा आ रहा है बस.."
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फिर अदिति ने यह सब कहा
जब राकेश के पिता ने अदिति को चोद दिया आखिरी बात यह कहते हए की किसी ना किसी तरह से लीना को सब कुछ पता चल ही जाएगा, तो अदिति नहाने को गई वहाँ से ससुर को अकेला छोड़कर खूब उसके लण्ड को अपने अंदर लेने के बाद। ससुर तो बेहद खुश था अपनी नई नवेली बहू को चोदने के बाद।
जब अदिति नहा रही थी तब बूढ़ा बाथरूम का चक्कर काट रहा था, वो अदिति को नंगी देखना चाहता था, बाहर से। किसी तरह झाँकने की कोशिश में लगा हुआ था, ठीक उसी वक्त लीना जागी और वो टायलेट की तरफ बढ़ने लगी तो उसने देखा की उसका बाप लीना को नहाते हए झाँकने की कोशिश में है। वो अपना मुँह दबाते हुए हँसी और टायलेट चली गई।
अदिति की जुबानी अपने खुद के बाप से संभोग के बाद विशाल ने कहा- “तो तुमने खूब एंजाय किया पापा के साथ भी? वो बेहद खुश थे तुमको पाकर और बहुत जल्दी कर लिया, क्योंकी उसने तुमको पहली बार लिया था, और तुमने तो बिल्कुल ही समर्पण कर दिया था। मगर तुम्हें इतनी जल्दी नहीं देना चाहिए था, तुम्हें उनको कुछ और दिनों तक थोड़ा तड़पाना चाहिए था मेरे खयाल से। तुम क्यों इतनी जल्दी मान गई?”
अदिति ने जवाब दिया- "उनको पहले से सब पता चल चका था तो मैं कैसे उन्हें मना करती? मैंने कहा ना की राकेश के साथ करने के बाद मुझे लगा की उसने मेरे लिए अब रास्ते खोल दिए थे। मुझे राकेश के साथ इतना मजा आया था की मैंने सोचा की उनके साथ भी वैसा ही होगा और हआ भी। और ऊपर से उस रात को तुमने नहीं किया था तो सुबह को जब पापा ने मुझे उस तरह से छुआ तो मुझे उसकी जरूरत भी महसूस हुई, सो आई गेव इन। और हाँ, उनके लिए उस दिन मैं एक बहुत आसान चीज थी.”
विशाल ने कहा- “और उन दिनों मैं आफिस में अक्सर सोचा करता था की तुम अकेली तीन मर्दो के बीच घर में हो और क्या पता के उनमें से कोई तुम्हारे साथ फ्लर्ट कर रहा हो, और कौन जाने की किसी ने तुमको लेटा भी दिया हो? और वो सब सच में हो रहा था। धत्... मुझे तब क्यों नहीं पता चला? क्यों मैंने तुम लोगों को नहीं देख लिया किसी दिन तभी? मुझे कितनी खुशी होती तब तुमको उनमें से किसी के साथ देखकर..”
अदिति ने कहा- “उन रातों को मैंने तुमको बताने का कई बार सोचा, मगर मैं घर का माहौल नहीं खराब करना चाहती थी। जिस तरह से तुम सबका एक अपनापन है, मैं वो नहीं तोड़ना चाहती थी, भाई-भाई के बीच मैं दरार नहीं डालना चाहती थी, बाप बेटे के बीच मैं लड़ाई नहीं करवाना चाहती थी, तो मैंने चुप रहना पसंद किया उन दिनों...”
विशाल ने खुद से बात किया तब- “असल में यह अदिति ने हमेशा मुझसे सब छुपाई है, आनंद के साथ भी तो इसने ऐसा ही किया था। जिन दिनों आनंद घर आया करता था और मैं बाहर सिगरेट पीने जाता था और छुपकर बाहर से देखता था अदिति को आनंद के साथ, किस तरह से आनंद उसको दुलारता था, किस करता था और जब मैं वापस अंदर आता था तो अदिति ऐसी बिहेव करती थी की कुछ भी नहीं हुआ है। और जिन दिनों मैं कोई और बनकर उसको टेक्स्ट करता था अदिति ने मुझे कभी यह बात नहीं बताई की कोई उसके साथ फ्लर्ट करता है मोबाइल पर, और कैसी गंदी-गंदी बातें करता है। अदिति सब अकेले एंजाय किया करती थी। यह मेरी अदिति अइवेंचरस है और इसे नहीं पता
इसे नहीं पता की मझे कितनी खशी दे रही है ऐसा होकर। वो अपने लिए सीक्रेटली सेक्स आड्वेंचर्स रखना चाहती है, जैसे की मैं उसको अकेले किसी और के साथ देखना पसंद करता हूँ। वो खुद यह सब पसंद करती है की बिना मुझे बताए एंजाय करे किसी और के साथ, इसीलिए मुझको कभी भी नहीं बताया अपने सभी आड्वेंचर्स के बारे में। आज आई है ऊँट पहाड़ के नीचे और सब बक रही है, तो मुझे तो एंजाय करना है सब जानकर, मगर अभी उसको चोदने को बड़ा मन कर रहा है..”
विशाल ने उन दिनों को भी याद किया जैसे के जिस दिन उसने आनंद को पहली बार घर लाया था, और अदिति ने उसको रिझाने से इनकार किया था अपने पल्लू गिरा कर। और किस तरह अदिति अपने बाल पीछे बाँध रही थी आनंद के सामने और वो किस तरह से वो अदिति को घूर रहा था, फिर विशाल को यह भी याद आया की किस तरह खुद के बर्थ-डे के रोज अदिति ने खुद आनंद को इन्वाइट करने को कहा था और यह जानते हुए के आनंद भी आने वाला है अदिति ने किस तरह से उस दिखाऊ ड्रेस को पहेनने को लिये तैयार
विशाल के दिमाग में वो सब दृश्य एक मवी की फ्लैशबैक की तरह दिख रहा था। फिर विशाल को याद आया की किस तरह से जब वो स्मोक करने छत पर गया था तो अदिति आनंद के साथ
सटकर बैठकर शादी के फोटो दिखा रही थी और आनंद उसको कैसे दुलार रहा था उसके जिश्म पर अपना हाथ फेरते हुए और अदिति को किस करना चाहता था।
थोड़ी देर बाद विशाल ने अदिति के करीब जाते हुए कहा- “अब मैं गरम हो गया हूँ, मुझे चोदने का मन कर रहा है, तेरी लेने का मन कर रहा है। तुम्हीं ने गरम किया है मुझे ये सब बताकर। चलो राल-प्ले में आज तुम मेरी बहू और मैं ससुर बनता हूँ, ठीक जैसे तुमने कुछ देर पहले बताया तुम्हारे और पापा के बीच...”
अदिति मूड में नहीं थी तो मना किया। उसने कहा- “नहीं पहले मुझे खतम करने दो। तुम्हारे घर में मुझपर जो भी बीता तुम सब सुनो आज। सुनो और समझो की मैं क्यों और कैसे वैसे हुई जैसे आज हूँ? समझो की क्यों
मैंने सेक्स को इतना एंजाय करना शुरू किया? सुनो के कैसे मुझको सेक्स करने की आदत और लत लगी? सब तुम्हारे उसी घर से शुरू हुई और मैंने एंजाय करना शुरू किया। सुनो की किस तरह से तुम्हारे घर वालों ने मुझको ट्रेन्ड किया, उसमें लीना भी शामिल है। सब ठीक से सुन लो तब जो मर्जी आए करना.”
विशाल ने कहा- “ओके फिर ठीक है बताओ... बताओ मुझे तु बहुत मजा आ रहा है बस.."
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फिर अदिति ने यह सब कहा
जब राकेश के पिता ने अदिति को चोद दिया आखिरी बात यह कहते हए की किसी ना किसी तरह से लीना को सब कुछ पता चल ही जाएगा, तो अदिति नहाने को गई वहाँ से ससुर को अकेला छोड़कर खूब उसके लण्ड को अपने अंदर लेने के बाद। ससुर तो बेहद खुश था अपनी नई नवेली बहू को चोदने के बाद।
जब अदिति नहा रही थी तब बूढ़ा बाथरूम का चक्कर काट रहा था, वो अदिति को नंगी देखना चाहता था, बाहर से। किसी तरह झाँकने की कोशिश में लगा हुआ था, ठीक उसी वक्त लीना जागी और वो टायलेट की तरफ बढ़ने लगी तो उसने देखा की उसका बाप लीना को नहाते हए झाँकने की कोशिश में है। वो अपना मुँह दबाते हुए हँसी और टायलेट चली गई।