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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

कड़ी_68 विशाल उनको देख रहा था, तभी कुछ विचित्र हुवा

अदिति तड़पने लगी थी, डाइरेक्टर जब उसकी चूत को चूसे जा रहा था। वो बिस्तर पर करवट बदलती जा रही थी मुट्ठी में चादर पकड़े हुए। सिसकारियां फूट रही थी और कराहने लगी थी।

जल्द ही डाइरेक्टर अदिति के ऊपर आ गया और अपने लण्ड को अदिति की चूत में डालने जा रहा था और मैनेजर उसकी चूचियां चूस रहा था। अदिति हाँफ रही थी और उसने डाइरेक्टर के गले में अपनी बाहों का हार डालकर उसको अपनी चूचियों पर चिपकाया और अपने हाथ से उसके लण्ड को अपनी चूत के अंदर अदिति ने

खुद डाला। फिसलते हुए आसानी से लण्ड उसकी गीली चूत में घुसने लगा और डाइरेक्टर जी की खुशी की इंतेहा न थी अपने लण्ड पर अदिति की चूत की गर्मी को महसूस करते हुए।

मैनेजर तब वहाँ से नंगा उतारकर बेड के सिरहने तक गया और अदिति के माथे को चाटने लगा, फिर उसकी नाक को चाटा और गालों को, तब उसके होंठ तक पहुँचा तो अदिति ने डाइरेक्टर के होंठ छोड़कर मैनेजर के मुंह को अपने मुँह में लिया चूमने को। मैनेजर की जीभ को चूसने लगी अदिति और अपने अंदर डाइरेक्टर के लण्ड को आते-जाते हुए भी महसूस करती जा रही थी एक साथ।

डाइरेक्टर साहब धक्के पे धक्का देने लगे, मगर शिकायत किया की कुछ ज्यादा गर्मी है और ठंडी हवा की

जरूरत की तलब किया उन्होंने। बहुत पशीना छूट रहा था डाइरेक्टर का चोदते हुए।

विशाल बाहर से देखते जा रहा था और फिकरमंद हआ की कहीं डाइरेक्टर पर्दे को बिल्कुल हटाने का आर्डर ना दे दे। क्योंकी अगर वैसा हुआ तो वो नहीं देख पाएगा। अभी तो उसी पर्दे के पीछे छुपा हुआ था वो बाहर से।

अदिति मैनेजर की जीभ चूसे जा रही थी, डाइरेक्टर का लण्ड अपने अंदर महसूस करते हुए। एक बार अदिति ने विशाल को सोचा और खुद से कहा- “कहीं वो इधर ही कहीं से छुपकर उसको देख तो नहीं रहा? और उसने सोचा की विशाल बहुत खुश होगा उसको दो मर्दो के साथ देखकर..”

डाइरेक्टर साहब अचानक असामान्य बिहेव करने लगे। वो एक भूखे शेर की तरह गुर्राते हुए धक्का दिए जा रहा था, और पशीना-पशीना हो चुका था, थोड़ा तड़प भी रहा था, और सख्ती से कमर हिलाते हुए अपने लण्ड को अदिति की चूत में घुसेड़े जा रहा था और ज्यादा हॉफ भी रहा था। फिर अचानक एक अजीब सी तड़पती आवाज किया डाइरेक्टर ने और बहुत ही ज्यादा पशीना बहने लगा उसके पूरे शरीर से। उसने चोदना रोक दिया, अपने

लण्ड को बाहर खींचा और साँस लेने के लिए फड़फड़ाने लगा, जैसे उसको साँस लेने में तकलीफ हो रही थी, और नीचे जमीन पर गिर गया।

अदिति बहुत हैरानी से उसको देखने लगी और उठकर बेड पर बैठ गई।

डाइरेक्टर ने अपने सीने पर एक हाथ दबाया हुआ था और मुश्किल से मैनेजर को इशारे से अपनी तरफ आने को कहा। मैनेजर जल्दी से उसके पास आया तो डाइरेक्टर ने कहा- “जल्दी डाक्टर को फोन करो लगता है दिल का दौरा पड़ा है। जल्दी करो..."

अदिति को झटका लगा और झट से बेड से उतरकर अपने कपड़े पहनने लगी। विशाल ने भी ये सब देखकर जल्दी से दरवाजा खटखटाया। अदिति ने दरवाजा खोला और अपने आपको विशाल की बाहों में लेजाकर रोने लगी डाइरेक्टर को नीचे फर्श पर नंगा देखते हुए।

मैनेजर और विशाल ने डाइरेक्टर को कपड़े पहनाए।

डाइरेक्टर बात नहीं कर पा रहे थे, उसको बहुत जोर से दर्द हो रहा था उसके सीने में, और तड़प रहा था। उसने फिर मुश्किल से कहा- “मुझको कुछ नहीं दिख रहा था और चक्कर आने लगा था। मेरी आँखों के सामने सिर्फ

अंधेरा था."

तब मैनेजर ने विशाल और अदिति को वापस घर जाने की सलाह दिया और कहा- “बिल्कुल किसी को पता नहीं चलने दिया जाए की इस रात को दोनों इधर आए थे.”

डाइरेक्टर ने भी विशाल को वापस जाने के लिए कहा। '

विशाल अदिति को लेकर अपनी कार तक गया और वापस घर को ड्राइव किया उसने।

अदिति ने जाते वक़्त विशाल से पूछा- “कहाँ थे तुम? ऐन वक्त पर कैसे पहुँच गये वहाँ तुम? तुम मुझको कहीं से झाँक रहे थे, है ना? और तुम बंगलो के अंदर ही थे ना?"

विशाल ने झूठ कहा- “मैं नाइट शिफ्ट के वर्कर्स को सुपरवाइज करने गया था और उसी वक़्त अंदर आया जब हादसा हआ तब...” और विशाल ने पूछा- “किया हआ अचानक डाइरेक्टर को? और कैसे सब हआ?"

अदिति ने सेक्स के बारे में कुछ नहीं बताया, सिर्फ कहा- “डाइरेक्टर की छाती में अचानक दर्द होने लगा था।

उस रात को अदिति ठीक से नहीं सो पाई। उसको सिर्फ डाइरेक्टर उसके ऊपर धक्का देते हुए दिखाई दे रहा था दर्द से तड़पते हुए। अदिति ने खुद से कहा- “वो मेरे ऊपर मर सकता था मुझको चोदते हुए। ओह माई गोड..”

और अगली सुबह को उनको सच में यही बुरी खबर मिली, की डाइरेक्टर को दिल का दौरा पड़ने से सुबह 3:00 बजे हास्पिटल में मौत हो गई। विशाल और अदिति दोनों बहुत चकित हो गये। फ्यूनरल में गये दोनों और कंपनी के सभी मुलाजिम भी मौजूद थे।

काफी देर बाद विशाल ने मैनेजर से अपने प्रमोशन के बारे में बात किया और जवाब सुनकर बहुत निराशा हवा।

मैनेजर ने कहा- “सब कुछ सिर्फ कहा था उनसे डाइरेक्टर जी ने, मगर कुछ भी अफीशियल नहीं हुवा था तो अब उस बात को भूल जाना चाहिए। बोर्ड आफ डाइरेक्टर्स ने एक नये मेंबर को डाइरेक्टर बनाया है इस कंपनी का जिसको विशाल की प्रमोशन के बारे में कुछ भी नहीं पता था। असल बात यह थी की कुछ था ही नहीं। पुराने डाइरेक्टर ने अपनी तरफ से कुछ जुगाड़ किया था विशाल की पत्नी को पाने के लिए। हो सकता था की अपने बाल पर वो विशाल को किसी दूसरे यूनिट का मैनेजर बना भी देता। मगर क्योंकी कुछ भी अप्रूव्ड नहीं हुआ था,

और अफीशियल बिल्कुल नहीं था, इसलिए सब कुछ भूलना ही बेहतर था..."

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विशाल और अदिति को अब नया बंगला और नई कार के सपने को भूलकर वापस वैसे जीना था, जैसे जीते चले

आ रहे थे इतने दिनों से उसी अपार्टमेंट में। विशाल को उसी पोस्ट में खुश रहना था, जिस पोस्ट पर पहले से काम करता चला आ रहा था।

दोबारा सब रूटीन हो गया जैसे था। विशाल ज्यादा अमीर और ऊँचा पद पाना चाहता था। मगर वो सपना पूरी नहीं हो सका तो अब वही पहले जैसा रूप धारण करना पड़ा फिर से। और धीरे-धीरे फिर से अपने पुराने पोस्ट में खुश रहने लगा। अदिति को कुछ अंतर नहीं महसूस हुई और वो आनंद और ओम के साथ वापस फ्लर्ट करने लगी पहले की तरह। कुछ हफ्ते बाद दोनों की सेक्स जिंदगी फिर से स्पाइसी होने लगी रोल-प्ले के साथ। और विशाल की गैर हाजिरी में अदिति ओम और आनंद को वैसे ही रिसीव करने लगी पहले की तरह।

आखीरकार, डाइरेक्टर वाला एपिसोड उन दोनों की जिंदगी से मिट गया।

और एक दिन आफिस में विशाल की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उसको ठंड और गरम दोनों एक साथ महसूस होने लगा। पशीना छूटने लगा और बदन में दर्द महसूस होने लगा। बाडी टेंपरेचर हाई हो गया। चेक करवाया तो पता चला की बुखार हो रहा है उसे। तो आफिस से छुट्टी लिया घर वापस जाने के लिए। उस समय 11:00 बजे थे।

अंडरग्राउंड में कार पार्क किया और बड़ी मुश्किल से चलकर लिफ्ट तक गया और अपने अपार्टमेंट के दरवाजे तक पहुँचा। दरवाजा अंदर से लाक था, उसको ताकत नहीं थी अदिति को आवाज देने के लिए, तो अपनी चाभी से दरवाजे को खोला और अंदर दाखिल हआ। अपने बेडरूम की तरफ बढ़ रहा था और चौखट पर आया तो देखा की

अदिति सिर्फ पैंटी में थी, उसकी चूचियां लटक रही थीं और वो झक कर विशाल के बड़ा भाई राकेश को जो तकरीबन नंगा था, उसको किस कर र

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कड़ी_69 विशाल बीमा और अदिति राकेश का साथ

विशाल चौखट पर खड़े होकर एक लम्हा दोनों को देखता है। फिर कदम पीछे हटाकर लाउंज में चला जाता है।

तबीयत खराब होने की वजह से वो लत्फ़ नहीं ले पाया।

अदिति को किसी की मौजूदगी महसूस हुई और वो अचानक उठकर जैसे थी उसी स्थिति में लाउंज में गई, मतलब नंगी सिर्फ अपनी पैंटी में, और देखा की विशाल काउच पर आँख बंद किए लेटा हुआ है। अदिति हकबका गई और झट से वापस बेडरूम में जाकर राकेश से फुसफुसाते हुए फिकरमंद होकर कहा- “विशाल वापस आ गया है और ठीक नहीं दिख रहा है, चेहरे का रंग दोनों ने कपड़े पहने और लाउंज में आए विशाल से पूछने की क्या बात हो गई।

विशाल बहुत बीमार महसूस कर रहा था और बहुत ही कमजोर था, जिश्म में बिल्कुल ताकत नहीं थी और सिर चकरा रहा था। कभी ठंड तो कभी गरम महसूस हो रहा था उसे। उल्टी भी आ रही थी। बात भी ठीक से नहीं कर पा रहा था जैसे आवाज ही नहीं निकल रही हो। कैसे भी करके उसने कहा- “एक डाक्टर की जरूरत है...”

अदिति ने ओम को फोन करके जितनी जल्दी हो सके एक डाक्टर को लाने को कहा।

राकेश ने अदिति को एक तरफ बुलाकर पूछा- “क्या विशाल ने उन दोनों को बेडरूम में देखा?"

अदिति ने कहा- “मुझको नहीं पता, पर हो सकता है

राकेश ने कहा- “माको नहीं पता. पर हो सकता है की उसने सब कछ देख लिया हो.."

फिर भी राकेश ने अदिति से कहा नार्मल बिहेव करने को और कहा- “अगर विशाल ज्यादा सवाल पूछे तो कहना की मैं अभी-अभी उसके आने से दो-तीन मिनट पहले आया था और तुम मेरे लिए किचेन में चाय बना रही थी और मैं टायलेट गया हुआ था..”

अदिति ने कहा- “मैं वैसा ही कहंगी..."

कुछ ही देर बाद डाक्टर ने आकर विशाल को चेक किया, इंजेक्सन लगाया और कुछ दवाइयां लिखी। डाक्टर ने कहा- “बुखार है और कोई चिंता की बात नहीं."

राकेश गया दवाइयां खरीदने और तुरंत वापस आ गया दवा के साथ। इंजेक्सन की वजह से विशाल को सोना था

और उसको बेड पर लेटाया गया, तो एक लम्हे के बाद उसको गहरी नींद आ गई।

राकेश ने बेडरूम बंद किया और अदिति को लाउंज में ले गया चोदने के लिए। मगर अदिति को डर लग रही थी और उसने मना क्या। राकेश ने अदिति को फसलाकर काउच पर बिठाया और धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारने लगे। ना चाहते हुए भी अदिति राकेश को चोदने दे रही थी। अदिति अब भी सोच रही थी की कैसे उसको महसूस हुआ था की विशाल चौखट पर खड़ा उसको राकेश को किस करते हुए नंगी हालत में देख रहा था।

अदिति ने राकेश से कहा- “मेरे खयाल से उसने हम दोनों को किस करते हए देखा है। ठीक उस वक्त जब मैं कपड़े बिल्कुल उतारकर बेड पर तुम्हारे ऊपर झुक कर तुमको किस कर रही थी, ठीक उसी वक्त मुझको ऐसा महसूस हुआ था की कोई हमारे पीछे खड़ा है दरवाजे के पास, इसीलिए मैं झट से उठकर लाउंज में आई थी तो देखा की वो लेटा हुआ है इसी काउच पर। उसकी आँखें बंद थीं। मुझे लगता है उसने सब कुछ देख लिया। अब अगर उसने पूछा तो क्या जवाब दूंगी? मुझे बहुत चिंता हो रही है राकेश.."

राकेश को उस वक्त अदिति से ऐश करना था, और सिर्फ उसी के लिए आया हुआ था वो तो। इसलिये वो उस मौके को नहीं गँवाना चाहता था। फिर वो अदिति की चूचियों को मसलता गया ड्रेस के अंदर अपने हाथ डालकर और उसकी ब्रा को खोलने लगा। अदिति मना करती जा रही थी। मगर राकेश ने अदिति की ड्रेस को निकाल फेंका और उसको अपने नीचे ले लिया सोफे पर ब्रा और पैंटी में। राकेश अदिति को सोफे पर कचलने लगा और जल्द ही उसकी ब्रा और पैंटी भी फर्श पर पाई गई।

राकेश ने झट से अदिति के टाँगों को अलग किया और उनके बीच चला गया अदिति की चूत को चूसते हुए। जबकी अदिति की जिश्म सोफे पर ऐंठने लगा। उस वक्त अदिति सेक्स पर कन्सेंट्रेट नहीं कर पा रही थी। सिर्फ राकेश उस वक़्त उसके बदन का मजा ले रहा था। अदिति बिना मजा के राकेश को चोदरने दे रही थी। अदिति विशाल के बारे में सोच रही थी सिर्फ। अदिति चिंतित थी और उसका दिमाग बेचैन था।

राकेश उसकी चूत चाटते और चूसते जा रहा था, मगर अदिति गीली नहीं हुई थी। राकेश को रस नहीं मिल रहा था। अदिति चकित थी जो कुछ हुआ कुछ देर पहले, इसलिए उसको उस वक्त सेक्स करने में कोई इंटेरेस्ट नहीं था। राकेश ने अपने थूक से उसकी चूत को थोड़ा गीला किया और अपनी दो उंगलियों को उसकी चूत में ठूस कर अंदर-बाहर करने लगा, एक हाथ को उसकी गाण्ड के नीचे डालकर संभालते हुए।

अदिति धीमी-धीमी सिसकारियां ले रही थी। राकेश वो सब करते हुए अदिति के चेहरे में देख रहा था, उसकी सिसकारियों को सुनते और उसकी तड़प को देखते हुए। राकेश को अदिति का चेहरा देखना बहुत पसंद था उसको

चोदते वक्त बिल्कुल अपने छोटे भाई की तरह। और जल्द ही राकेश का लण्ड अदिति के मुँह में था। राकेश उसके गले में चोद रहा था। उस वक्त अदिति तकरीबन बैठी हुई थी सोफे पर। जबकी राकेश खड़ा हुआ था थोड़ा

सा झुक कर अदिति के मुंह में हल्के-हल्के धक्के देते हुए। अदिति ने एक हाथ से उसका लण्ड थामा हुआ था

और दूसरे हाथ से खुद को सपोर्ट कर रही थी सोफे पर रखकर।

राकेश को मजा आ रहा था और लगातार अपने लण्ड को अंदर-बाहर किए जा रहा था अदिति के मुंह में। राकेश को यह सोचकर और भी मजा आ रहा था की अपने छोटे भाई की पत्नी को उसकी मौजूदगी में चोद रहा था,

उसी के घर में। हवस से भरा राकेश का दिमाग उस वक्त सिर्फ लस्ट और सेक्स सोच रहा था और बेइंतेहा मजा आ रहा था उसको। उसका लण्ड एकदम से कसके खड़ा था जैसे कभी भी नर्म नहीं होने वाला है। अदिति नहीं चाहती थी। मगर राकेश को झड़ाने के लिए उसकी मदद कर रही थी। ताकी जल्दी से वो झड़े, और अदिति विशाल के पास जाए।

बिना अदिति की चूत में लण्ड डाले ही, राकेश अदिति को उस मजबूर हालत में देखते हुए बड़ा लुत्फ़ ले रहा था

और मजे से मुँह में उसको चोद रहा था। इतना गरम फीलिंग हुआ राकेश को की उसको लगा की उसके लण्ड की नशों में एक जबरदस्त लहर आई और उसने महसूस किया की उसका वीर्य निकालने वाला है। राकेश ने जोर से अदिति के सिर को एक हाथ से दबाते हए गुर्राते हए- “आअगघ्गघ..” की आवाज निकली और अदिति के गले के अंदर ही उसने पिचकारी छोड़ा, जिससे अदिति को साँस लेना मुश्किल हो गया।

अदिति ने जैसे ही राकेश के गरम वीर्य को अपने गले के अंदर महसूस किया, उसने आँखें ऊपर उठाकर राकेश के चेहरे में देखा, और झट से अपने सिर को पीछे किया। अदिति ने अपनी हथेली को राकेश के पेट पर दबाते हए और थोड़ा सा वीर्य अदिति की चूचियां और गले पर गीरा और कुछ नीचे जमीन पर। अदिति की साँसें फूल गई और वो थूकते हुए खाँसने लगी। सभी वीर्य को अदिति ने नीचे थूक दिया और टिश्यू लेकर पोंछने लगी।

राकेश अपने लण्ड को अदिति के होंठों पर रगड़ता गया, लण्ड को अपने हाथ में पकड़े हुए। अदिति उसको करने दे रही थी। आखीर में राकेश ने लण्ड को अदिति की निपल पर रगड़ा और चूचियों पर दबाया। लण्ड नरम और छोटा होने लगा धीरे-धीरे राकेश के हाथ में और उसने अदिति से विनती की की वो उसको मुँह में ले ले।

अदिति ने राकेश को खुश करते हुए लण्ड को मुँह में ले लिया और चूसा जो कि नरम हो चुका था। फिर अदिति ने राकेश के चेहरे में देखते हुए लण्ड के छेद पर अपनी जीभ को दबाकर फेरा। जिससे राकेश की आss निकली और उसका जिश्म काँप उठा। तब लण्ड बिल्कुल छोटा हो गया था और अदिति ने मुश्कुराते हुए कहा

भब इसको छपा लो, यह अब मेरे किसी काम का नहीं..." और ये बोलने के बाद अदिति हँस पड़ी।

तकरीबन दो घंटे के बाद राकेश को जाना था। वो विशाल के जागने का इंतेजार कर रहा था। मगर वो नहीं उठ रहा था तो जाने से पहले राकेश ने अदिति से कहा- “विशाल से कुछ भी नहीं कहना, चाहे वो पूछे फिर भी...”

और जब राकेश निकलने वाला था, उस वक्त अदिति ने राकेश को जोर से अपनी बाहों में जकड़ा और प्यार से बात किया। उसने अपने चेहरे को राकेश की छाती से लगाया, छाती को चूमा और एक बचपना आवाज में कहा।

अदिति- “सारी आज मैं एंजाय नहीं कर पाई। मुझे पता है मैंने तुमको हमेशा की तरह प्लीज नहीं किया आज, मगर प्लीज माइंड मत करना, अगली बार हम और बेहतर तरीके से करेंगे ओके डार्लिंग.. मुआहह..”

राकेश ने उसको जमकर किस किया और बाइ कहा।

रात को 9:00 बजे विशाल जागा और बेहतर महसूस कर रहा था। बहुत बेहतर। इंजेक्सन ने अच्छा काम किया था। बुखार गायब था, उसका टेंपरेचर नार्मल हो गया था। उसको बहुत जोरों की भूख लगी थी और खाने को माँगा अदिति से। दोनों ने डिनर किया। अदिति बहुत ही खयाल रख रही थी और बड़े प्यार से विशाल की सेवा कर रही थी। बार-बार विशाल की गोद में बैठ जाती थी और विशाल के गालों को सहला रही थी, अपनी उंगलियों को उसके सिर के बालों में फेर रही थी, सिर दबा रही थी। खैर जैसे एक छोटे बच्चे की देख भाल की जाता है उस तरह से अदिति खयाल और प्यार कर रही थी विशाल से।

आखीरकार, जब दोनों लाउंज में टीवी के सामने बैठे थे तो विशाल ने पूछा- “तो भाई ने तुमसे खूब एंजाय किया? उसने कब शुरू किया, आज मैं सब कुछ जानना चाहता हूँ। सब कुछ शुरू से अंत तक। मुझे सब पता है तुम्हारे और उन लोगों के बारे में। पापा, राकेश और दीपक सब मालूम है मुझे। मैं तुमको उन सबके साथ देख चुका हूँ। मैं गुस्सा नहीं हूँ और ना ही परेशान। यह सब हमारे सेक्स लाइफ को और भी मसालेदार बनाता है,

और यह तुम भी जानती हो, है ना? तो यह मेरे लिए कोई ताज्जुब की बात नहीं है बिल्कुल। बस मैं सब कुछ शुरू से जानना चाहता हूँ, पहला दिन किससे हुआ? कैसे हुआ? तुमको कैसा लगा? क्या तुमने शुरू में इनकार किया? मैं कहाँ था? रात को या दिन में? किसने पहल किया? तुमको कौन ज्यादा पसंद है? कौन बेहतर है हम चारों में से? किसके साथ ज्यादा एंजाय करती हो? सब कुछ, सब कुछ बताओ आज मुझे। मैं एक-एक बात जानना चाहता हूँ। कम ओन स्टार्ट नाउ बेबी..."

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कड़ी_70 अदिति बात करती है

अदिति ने थोड़ा सा डिस्टर्ब महसूस किया और उसकी समझ में नहीं आया की कैसे रिएक्ट करे और क्या कहें? सवालिया नजरों से विशाल की आँखों में देखा। अदिति ने ये जानने की कोशिश करते हुए की जो उसने कहा। क्या उसका वही मतलब था या वो पहलियां बझा रहा था? और विशाल उसको देखे जा रहा था इस उम्मीद से की वो कुछ कहे, मगर जब अदिति ने कुछ नहीं कहा तो विशाल बोला।

विशाल- “ओफफो अदिति, मैं इंतेजार कर रहा हूँ जान... सब बताओ मुझे, सब कुछ मैंने कहा..”

अदिति का चेहरे लाल पड़ गया और वो सोफे से उठ गई, एक-दो कदम इधर-उधर चली, छत के दरवाजे के पास रुकी, बाहर देखा, फिर उस दरवाजे को खोला, थोड़ी सी ठंडी हवा खाई और वापस विशाल की तरफ देखा जो उसी को देख रहा था, उसकी हर एक मूटमेंट को टटोल रहा था उस वक्त। फिर अदिति ने आss भरते हुए गहरी साँस ली, फिर विशाल के तरफ चलकर आई और अपने एक घुटने को सोफे पर रखा विशाल के पास, और होंठों को दाँतों में दबाते हुए अदिति ने कहा।

अदिति- “तमको यकीन है खद पर की तम सब सनना चाहते हो और डिस्टर्ब नहीं होगे सब जानकर? मझे लगता है की सब सचाई जानने के बाद हमारे रिश्ते में दरार आ जाएगी...”

उसकी घुटने पर हाथ रखकर ऊपर की तरफ उसकी जांघों पर फेरते हुए विशाल ने कहा- “मेरी जान मैंने कहा ना

की मुझे सब पाता है और मैं तुमको उन लोगों के साथ कई बार देख चुका हूँ.”

अदिति- “ओके पहले तुम बताओ की कब-कब तुमने मुझको उन लोगों के साथ देखा?"

विशाल- “ओहह... नो। क्या अब हम इस बारे में बहस करेंगे? क्या तुमको यकीन नहीं आता की मैं तुमको उन

सबके साथ देख चुका हूँ? जैसे आज मैंने तुमको राकेश के साथ देखा, वैसे ही तुमको है और दीपक के साथ भी देख चुका हूँ...”

अदिति- “और यह कब की बात है? अभी हाल की या बहुत पहले की?"

विशाल- “अरे यार इससे क्या तालुक है की पहले की बात है या हाल की? बात यह है की वह सब तुमसे यहाँ मिलने आते हैं, जब मैं नहीं होता हूँ, ठीक? तो प्लीज... अब तुम सवाल करना बंद करो और मेरे सवालों का

जवाब तो दो ना यार। बताओ कब यह सब शरू हआ? किसने स्टार्ट किया? कौन पहला था तीनों में से? क्या सिचुयेशन थी? चलो मैं हेल्प करता हूँ। मुझे यह बताओ की किसने तुमको पहले-पहले प्रपोज किया? डैड ने या

मेरे दो भाइयों में से किसी एक ने?"

अदिति का चेहरा फिर से लाल हो गया और एक तरफ चेहरा करके उसने कहा- “नहीं वैसे नहीं बताऊँगी, सब कुछ शुरू से बतानी होगी ताकी तुमको समझ में आए की सब कैसे शुरू हुआ, और कैसे मैं इन सब में पड़ गई

और आखीरकार एक लत जैसी लग गई इन सबकी..."

विशाल ने उसका हाथ पकड़कर खिंचते हए अदिति को अपनी गोद में बिठाया और उसकी आँखों में देखते हुए

कहा- “तुमको उनमें से किसी से प्यार है जान?"

अदिति ने मुश्कुराते हुए तुरंत बिना झिझक के जवाब दिया- “तुम्हारे घर के हर एक सदस्य से प्यार करती हूँ मैं तो। तुम्हारी बहन लीना से भी..”

विशाल- “अच्छा ओके ठीक है। एक बात और बताओ, पिछली बार जब हम उत्सव के लिए वहाँ गये थे तो उनमें से किसी ने एंजाय किया तुम्हारे साथ, जो मुझे पता नहीं?"

अदिति- “तुम क्यों बीच में से कुछ जानना चाहते हो? क्यों शुरू से सब नहीं सुनना चाहते? यही तो पूछा तुमने ना की शुरू से सब बताऊँ?”

विशाल- “ओके सारी। शुरू से सब बताना स्टार्ट करो अब। मुझे बहुत बेचैनी हो रही है सब जानने के लिए, बहत उत्तेजित महसूस कर रहा हूँ, और यह देखो खड़ा हो गया है यह सिर्फ सोचकर ही..” और विशाल ने अदिति का हाथ अपने लण्ड पर रखा पैंट के ऊपर ही। और फिर कहा- “ओके शुरू करो काउंटडाउन शुरू करता हूँ- 5-4-3-2-1

और गो...”

अदिति ने अपने दिल की धड़कनों को तेजी से धड़कते हुए खुद सुना और उसके पैर थोड़ा सा काँप उठे शुरू करने से पहले। बहुत हिम्मत जुटाकर उसने अपने चेहरे से लटों को पीछे किया और विशाल के चेहरे में उसके एक्सप्रेशन्स को देखते हुए कहा- “हमारी शादी के कुछ हफ्ते बाद ही की बात है, मैंने जिंदगी में कभी भी नहीं सोचा था की वैसी चीजों में मैं कभी शामिल होंगी...”

विशाल बहुत खुश दिखा और जोर से अदिति को अपनी बाहों में दबाते हुए कहा- “वाउ... शादी के सिर्फ कुछ हफ्ते बाद ही? इतनी जल्दी सब शुरू हो गया था और मैं अंजान था? मजा आएगा सब जानकर वाह..”

अदिति ने उसके सिर पर मारते हुए कहा- “सुनो तो... वो बात नहीं है। अब तुम बताओ, क्या तुमको पता भी है की तुम्हारे घर में क्या-क्या चलता है वहाँ? क्या तुमने कभी यह जानने की कोशिश भी किया की घर में सब कुछ ठीक है की नहीं? नहीं तुमने कभी कोशिश भी नहीं किया। मगर मुझको सिर्फ कुछ हफ्ते के बाद ऐसी चीजों

का पता चला, जिससे मेरे रोंगटे खड़े हो गये.”

विशाल ने अदिति को सवालिया नजरों से देखा और भोलेपन में पूछा- “क्या? क्या पता होना चाहिए था मुझे? तुमको क्या पता चला जो मुझे नहीं था? चलो ठीक है तुम्हीं बताओ मुझे अपने घर के बारे में क्या नहीं पता मुझे?”

अदिति ने अपने जिश्म को विशाल के जिश्म से दबाते हुए कहा- “तुमने कभी खुद से सवाल किया है की राकेश ने क्यों आज तक शादी नहीं की? क्यों उसने कुँवारा रहना पसंद किया?"

विशाल ने जवाब दिया- “यह तो एक आसान सवाल है जान... राकेश कभी भी शादी नहीं करना चाहता था और उसकी उम्र बढ़ड़ती गई तो देर हो चुकी थी। इसीलिए उसने शादी नहीं की। मगर आखीरकार, वो खुशनसीब निकला की मैंने तुमको जो ला दिया घर में, और अब उसको कभी एक पत्नी की जरूरत नहीं पड़ेगी तुम जो मिल गई उसे.”

अदिति हँसी और कहा- “नहीं उल्लू... मैं अपने बारे में नहीं बोल रही हूँ। मेरे उस घर में आने से पहले ही राकेश की जिंदगी में कोई पहले से था, इसीलिए वो शादी नहीं करना चाहता था.."

विशाल को झटका लगा और अदिति की आँखों में देखते हुए पूछा- “क्या? ओह माई गोड... तुम्हारा मतलब है की राकेश किसी और को घर में लाता था और तुमने उसको रंगे हाथों पकड़ा? और क्योंकी तुमने उसको देख लिया तो उसने तुमसे फ्लर्ट करना शुरू किया और इस तरह तुमको भी पा लिया उसने? क्या यही हुआ था?"

अदिति ने आहें भरते हुए ऊपर छत के तरफ देखा और कहा- “ओह गोड... क्या तुम सवाल करना बंद करोगे भी? मुझे सब बताने दो और तुम खामोश सिर्फ मुझको सुनो ओके? डन? समझ गये तुम?"

तब विशाल ने अपनी उंगली को होंठों से लगाते हुए सिर हिलाया बिना कुछ बोले।

अदिति ने बयान जारी रखा।

शादी के दो या तीन हफ्ते बाद, एक दिन मुझको हैरानी हई की दिन में लीना नजर नहीं आ रही थी। उस दिन उसका सिलाई सीखने जाने का दिन नहीं था। वो हफ्ते में दो या कभी तीन रोज सीलाई सीखने जाती थी दोपहर बाद। मगर उस दिन नहीं जाना था उसे। मगर कहीं नजर नहीं आ रही थी वो। तीन बार मैंने उसको आवाज दी मगर उसने कहीं से मुझको जवाब नहीं दिया। तो मैं घर में उसको ढूँढ़ने लगी। मगर वो कहीं भी नहीं दिख रही थी। हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गये थे थोड़े दिनों में ही। हमारे बीच किसी भी तरह की बातें होती थी। वो मेरी हम उम्र जो है। वो भी 18 साल की थी और मैं भी। तो हम दोनों एक दूसरे को बहुत अच्छी तरह से समझते थे और बहुत करीब थे एक दूसरे के। मैंने लीना को सभी कमरों में ढूँढा सिवाए तुम्हारे डैड और राकेश के। फिर क्योंकी उस वक़्त पापा और राकेश काम पर गये हुए थे तो मैंने सोचा की शायद लीना उन लोगों में से

एक के कमरे में कोई काम कर रही होगी, तो मैंने सोचा पहले राकेश के कमरे में चेक करती हूँ अगर वहाँ नहीं मिली तो पापा के कमरे में देखूगी।

मगर मेरे रोंगटे खड़े हो गए जब मैं राकेश के कमरे के करीब गई। क्योंकी अंदर से सिसकारियों की धीमी-धीमी आवाजें आ रही थी। मेरे दिल की धड़कनें तेज हो गईं और गर्मी सी महसूस होने लगी मुझे वो सुनकर। साँस लेना मुश्किल हो रहा था मुझे उस वक्त, और राकेश के कमरे का दरवाजा खटखटाने या खोलने में डर लगने लगा मुझे उस वक्त। सिसकारियां सिर्फ लड़की की आ रही थी तो मैंने सोचा शायद लीना अपने जिश्म पर हाथ फेर रही होगी, या अपनी गर्मी मिटाने की कोशिश कर रही होगी, तो मैंने उसको छेड़ने के लिए सोचा रंगे हाथ पकडूं। तो मुझको दरवाजे की हैंडल को पकड़कर घुमाने की साहस हुई और दरवाजा खोल दिया। और मेरी जिंदगी की सबसे बड़ा झटका लगा मुझे उस वक़्त, वो देखकर जो मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कभी। लीना अधनंगी थी राकेश के बेड पर और उसके मुंह में राकेश का लण्ड था."

***** *****
 
कड़ी_71 अदिति बात करती रही

यह सुनकर विशाल को झटका लगा और वो अदिति के चेहरे में कुछ देर देखता रहा और अदिति उसके एक्सप्रेशन्स को समझने की कोशिश कर रही थी। अदिति उम्मीद कर रही थी की विशाल कोई सवाल करेगा, मगर वो तो जैसे शाक में था और अपने सिर को झटका। बिना कुछ बोले अदिति के चेहरे में घूर कर देखता रहा काफी देर तक। दो

अदिति ने बोलाना बंद कर दिया। रुक गई वो विशाल की चुप्पी देखकर। विशाल उठकर छत की तरफ चलते हुए एक सिगरेट सुलगाया। अदिति वहीं सोफे पर बैठी विशाल को देखती रही और खुद से पूछा- “क्या मैंने सही किया विशाल को लीना के बारे में बताकर?” उसका दिल जोरों से धड़कने लगा और धीरे से चलकर वो भी छत

पर गई विशाल के पास।

विशाल के करीब जाकर अदिति ने एक हाथ को उसके कंधे पर रखते हुए कहा- “मेरे खयाल से मुझे तुमको वो

सब नहीं बताना चाहिए था ना? तुमको शाक लगा है ना? मुझे भी ऐसा ही झटका लगा था उस दिन जान। मगर क्योंकी तुमने कहा की तुम शुरू से सब जानना चाहते हो तो मैंने बताया। क्योंकी वहीं से सब शुरू हुआ बेबी.."

विशाल ने धुएं का एक कश लिया और मुश्कुराते हुए कहा- “नहीं जान मैं चकित नहीं हूँ, बल्की लीना के बारे में सोच रहा हूँ। मैंने बिल्कुल कभी भी नहीं सोचा था की ऐसी चीजों के लिए उसकी उमर भी हो गई है। मैं उसको हमेशा बच्ची समझता रहा। और मुझको साफ दिखने लगा है की क्यों राकेश भाई ने शादी नहीं करना चाहा कभी। मगर कब से वह दोनों यह सब करते थे? तुमको सब पता है ना? उसने तुमको सब बताया होगा? लीना, भाई के साथ तब से वो सब कर रही है जब वो बहुत छोटी थी, है ना? हम्म... मुझे सच बताना प्लीज?"

अदिति ने आराम से अपने सिर को विशाल के कंधे पर रखा और पूछा- “क्या तुम चाहते हो मैं तुमको सब कुछ बताऊँ? तुम डिस्टर्ब नहीं होगे जैसे अभी हुए?"

विशाल ने सिगरेट के बाकी हिस्से को अपने जूते के नीचे कुचलकर अदिति की कलाई को पकड़े लाउंज के तरफ बढ़ते हुए बोला- “हाँ जान मैं और ज्यादा और भी ज्यादा जानना चाहता हूँ, और अब तो उत्तेजित महसूस कर रहा हूँ। चलो वहाँ बैठते हैं और तुम बोलना जारी रखो सब बताओ मुझे..” और दोनों वापस सोफे पर आ गए।

अदिति को बोलना पड़ा- “मैं उनको देखते ही तुरंत दो कदम पीछे हट गई, वो सब देखकर मेरे दिल की धड़कनें तेज हो गई और मेरे हाथ पैर काँपने लगे थे। लीना ने मुझको नहीं देखा था मगर राकेश ने मुझको दरवाजा खोलकर बंद करते हुए अच्छी तरह से देखा था..."

विशाल- “क्यों लीना

को नहीं देखा? कैसे?"

अदिति- “लीना ने उस दरवाजे की तरफ पीठ किया हुआ था, और अपने घुटनों पर थी राकेश का लण्ड हाथ में थामकर मुँह में लिए हए। जबकी राकेश का चेहरा सीधे दरवाजे पर ही था। उसने मेरे चेहरे में देखा मगर ऐसा बिहेव किया की देखा ही नहीं, उसके होंठों पर एक अजीब सी मश्कान थी और एक पल के लिए उसने मेरी

आँखों की गहराई में देखा, इससे पहले की मैं दरवाजे को धीरे से वापस बंद करती। जितना हो सका उतना तेजी से भागते हुए मैं अपने कमरे में गई वहाँ से। मुझको डर सा लगने लगा था और हाथ पैर काँपे जा रहे थे, दिल बहुत जोरों से धड़क रहा था, साँस लेना मुश्किल हो रहा था और मेरी समझ में नहीं आ रहा था के मैं क्या करूँ उस वक़्त? मैं सोचने लगी की अब कैसे राकेश को देख सकूँगी? कैसे उसका सामना करूँगी? और मैं प्रार्थना करने लगी की वो लीना को मत बताए की मैं वहाँ आई थी और उन दोनों को वहाँ देखा उस हालत में। मैं लीना से उस बारे में कोई बात नहीं करना चाहती थी। मैं हम दोनों की दोस्ती नहीं बिगाड़ना चाहती थी। मैं नहीं चाहती थी की लीना को शर्मिंदगी महसूस हो इस बात की वजह से। मैं तो चाहती थी की उसको पता नहीं चले की मैं वहाँ आई थी। मेरा मन कर रहा था की उसी वक्त राकेश से बात करूँ और उसको बोलूं की लीना को कुछ नहीं बताए की मैं वहाँ आई थी। तो मैं झट से वापस वहाँ गई और उस दरवाजे पर कान लगाकर सुनने की कोशिश किया कि किया वो लीना को कुछ बता रहा है? मगर वहाँ मुझे सिर्फ दोनों की सिसकारियां और आहे सुनाई दे रही थीं उस वक़्त, तो मैंने डिसाइड किया की राकेश के मोबाइल पर उसको फोन करके बोलूं की वो चुप रहे लीना को कुछ नहीं बताये.”

विशाल बड़ी रुचि से सब सुन रहा था और अदिति साँस लेने के लिए रुकी तो विशाल ने पूछा- “तो तुमने राकेश

को फोन किया? पक्का किया होगा, है ना?"

अदिति ने अपने लटों को चेहरे से हटाते हुए कहा- “हाँ। मैंने उसको तुरंत काल किया। उसने काल उठाया और हाँफते हुए बात कर रहा था। मैंने उससे कहा की लीना को नहीं बताना की मैंने उन दोनों को देख लिया.”

राकेश ने हँसते हुए पूछा- “क्यों?"

मैंने उससे मिन्नतें की की मेरी प्रजेन्स को इग्नोर करे, उससे रिक्वेस्ट किए- "बस ऐसा समझो की मैंने दरवाजा बिल्कुल खोला ही नहीं..” और मैंने उससे कहा- “मैं किसी को इस बात के बारे में नहीं बताऊँगी, बस जैसे मैंने कुछ देखा ही नहीं...”

मगर राकेश फिर से हँसा।

फोन पर मैंने लीना को

ना, उसने राकेश से पूछा- “किससे बातें कर रहे हो?"

मगर राकेश मुझसे मजा ले रहा था बात करते हुए और अचानक उसने कहा- “क्या तुम भाग लेना चाहोगी?"

मुझे सदमा लगा और उसको “शटप” कहकर फोन काट दिया। मुझे बहुत शर्म आ रही थी और सोच रही थी की लीना से आमना सामना कैसे करूँगी, अगर उसको पता चल गया की मैं वहाँ आई थी तो? कैसे भी करके मैं अपने कमरे में गई और बहुत बेचैन थी। घंटों मैं कमरे से बाहर नहीं निकली।

सब कुछ शांत होने का इंतेजार करने लगी। फिर मैं सोचने लगी की- “लीना को कैसा महसूस होगा अगर उसको पता चलेगा की मैंने उसको राकेश के साथ देखा तो? उसको बहुत शर्म और अजीब लगेगा मुझसे सामना करने के लिए...” उसके लिए मुझे अफसोस होने लगा। मुझे इसकी भी फिकर होने लगी के वह लोग क्या सोचेंगे मेरे बारे में? वह लोग यह भी सोच सकते हैं की मैं कैसी औरत हूँ जो दूसरों के कमरे में ताक झाँक करती हूँ? उल्टा सब मुझको दोषी ठहरा सकते थे।

मगर मैंने जानबूझ कर कुछ नहीं किया था। मैं तो लीना को ढूँढ़ रही थी और मुझे बिल्कुल पता नहीं था की उस वक़्त राकेश घर पर होगा, तो इसमें मेरा किया कसूर? फिर भी मैं बहुत परेशान थी की वह मेरे बारे में पता नहीं क्या सोचेंगे? अपने आपको मैं कोसने लगी थी की क्यों मैंने उस दरवाजे को खोला उस वक्त। अपने आपको कुसूरवार समझने लगी थी मैं उस वक़्त। मुझको दरवाजा नहीं खोलना चाहिए था, अपना सिर पटक पटक कर फोड़ने को दिल करता था मेरा। और यह सब सोचते हुए मेरी आँख लग गई।

विशाल ने सब सुनते हुए अदिति के सिर पर अपना हाथ फेरते हुए उसको देखा और उसको महसूस हुआ की

अब भी अदिति अपने आपको दोषी मान रही है उस दरवाजे को खोलने के लिए तो उसने प्यार से कहा।

विशाल- “नहीं मेरी जान, इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं था की तुमने उस दरवाजे को खोला उस दिन। तुमने वही किया जो करना चाहिए था, अच्छा आगे क्या हुआ उस दिन वो बताओ अब?"

अदिति- एक घंटे के बाद मेरे कमरे के रूम पर एक दस्तक से मेरी नींद टूटी। उस दस्तक को मैंने जैसे बहुत दूर से सुना, इतनी गहरी नींद में थी मैं उस वक़्त। लगता था एक सपना देख रही थी। गला सखा हआ था तो आवाज भी नहीं निकली जवाब देने को। तब तक दरवाजा खुला। मैंने सोचा अब लीना फ्री होगी तो मुझसे बक बक करने के लिए आई होगी। मगर मुझको एक झटका लगा यह देखकर की राकेश कमरे में घुसा आ रहा है। वैसे दोनों दीपक और राकेश को मेरे कमरे में आने की आदत थी, किसी भी वक़्त दिन में। मगर जो मैंने राकेश को करते हुए देखा उसके बाद तो मैंने सोचा की वो मेरा सामना भी नहीं करेगा, मुझसे नजरें चुराएगा, मगर यह तो बिल्कुल नहीं सोचा था की वो मेरे कमरे में आने की हिम्मत करेगा। मैं तुरंत बेड से उतारकर अपने पल्लू को सवांरने लगी, और उसके चेहरे में फिकरमंद होकर देखते हए मैंने उससे पूछा- “लीना कहाँ है इस वक़्त?” मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था और एक डर सा महसूस हो रहा था उस वक़्त मुझे।

राकेश होंठों पे एक मुश्कुराहट सजाए हुए बेड की तरफ बढ़ा और बेड पर बैठकर बोला- “क्यों तुम लीना के लिए इतनी फिकर कर रही हो अदिति?"

मैंने अपना थूक निगलने की कोशिश किया फिर भी गला सूखा हुआ ही पाया। फिर भी मैंने पूछा- “क्या लीना

को पता है की मैंने उसको देखा था?"

मगर राकेश ने शैतानी हरकतें करते हुए कहा- “और अगर मैं तुमसे कहूँ की हाँ मैंने लीना को सब बता दिया तो? तो किया अदिति?"

मैंने झट से जवाब दिया- “नहीं, तुम ऐसा नहीं कर सकते, उसको बहुत शर्म आएगी मुझसे नजरें मिलाने में, बोलो ना क्या सच में उसको पता है की मैं वहाँ आई थी बताओ ना प्लीज?”

राकेश ने तब मेरी कलाई पकड़ा और मुझको अपनी तरफ खींचने लगा। मैं नहीं जा रही थी, प्रतिरोध कर रही थी मगर वो ज्यादा ताकतवर होने से मुझको खींच लिया और बेड पर बैठने को कहा अपने पास। मैं काँपने लगी थी

और मेरे होंठ थरथरा रहे थे।

राकेश ने कहा- “देखो इतना फिकर करने की कोई जरूरत ही नहीं। तुमने कोई गुनाह नहीं किया है। तुमको पता ही नहीं था की हम लोग वहाँ थे। है ना?"

उसकी बातों को सुनकर मुझे तसल्ली हुई और आराम मिला। फिर भी उसके चेहरे में देखते हुए मैंने पूछा “मतलब यह की तुमने लीना को कुछ नहीं बताया, बैंक यू वेरी मच। अब मेरी जान में जान आई..” मगर तब राकेश ने मेरे कंधे पर अपना बाजू रखा और उसकी उंगलियां मेरे कंधे के अंतिम हिस्से पर जैसे फेरने लगा। और मैंने अपने हाथ को उसके हाथ के ऊपर रखते हुए उसको वैसा करने से रोका।

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कड़ी_72 राकेश लीना चालू रहे।

अदिति ने विशाल को बताना जारी रखा।

मुझे उसका उस तरह से छूना अजीब लगा तो मैं बेड से उठकर आलमारी तक गई जैसे किसी चीज को ढूँढ़ रही

थी।

मगर राकेश मेरे पीछे आया और मुश्कुराते हुए कहा- “मेरी प्यारी अदिति धीरे-धीरे तुम लीना के बारे में और बहुत कुछ जान जाओगी, फिलहाल मैंने उसको कुछ नहीं बताया है, तो फिकर मत करो तुम। एक दूसरे के चेहरे में बिना डर के देख सकती हो। मगर मैं खुद से पूछता हूँ की आखीरकार, कब तक तुम उससे हमारे रिश्ते के बारे में पूछने के बगैर रह पाओगी?"

उसके बातों का मुझे कुछ समझ में नहीं आया तो मैं मुड़कर उसको देखते हुए पूछा- “तुम क्या कहना चाहते

हो?"

तब तक वो मेरे करीब आ चुका था और ठीक मेरी पीठ के पीछे खड़ा था और उसकी हिम्मत देखो की उसने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए फुसफुसाते हुए बात किया, अपने मुँह को मेरे कान के बिल्कुल करीब लगाकर। मुझको उसकी साँसें महसूस हुई और उसके होंठ मेरे कान से टकराए, जिससे मेरे शरीर में एक कंपन सी उठी। पर उसने विषय बदलते हुए जैसे मुझसे फ्लर्ट करते हुए कहा- “बताओ मुझे तुमको क्या महसूस हुआ। जब तुमने लीना को मेरे साथ उस पोजीशन में देखा तो? तुम्हारे जिश्म में उस वक्त क्या गुजरा हमें देखकर? मैं वो जानना चाहता हूँ बाताओ ना.”

अब जबकी राकेश उन बातों को कहते हुए मुझसे बिल्कुल सटा हुआ था तो मैंने अपने कदमों को थोड़ा सा पीछे खिसकाया, तो वो भी अपने कदमों को वैसे ही खिसकाकर मेरे करीब आया। मैं उसके जिश्म को मेरे जिश्म को

छूते हुए महसूस कर सकती थी उस वक़्त। और मैं कहीं नहीं हिलडुल सकती थी। क्योंकी सामने आलमारी थी.."

विशाल सब कछ आराम से सुन रहा था मगर अदिति को रोकते हए पछा- “तब तक उसके हाथ तम्हारे कंधों पर ही थे? बहुत मजा आ रहा है मुझे अब, तुम्हारे पति का बड़ा भाई तुम्हारे बेडरूम में अकेले, एक सेक्स वाली बात करते हुए जो हाल में तुमने उसको करते हुए देखा वा। मजा आ गया, इट्स सो हाट डार्लिंग, और वो पहली बार थी। ओके आगे बताओ फिर क्या हुआ?”

अदिति ने विशाल के चेहरे की एक्सप्रेशन्स पढ़ने की कोशिश किया की क्या वो सच में उत्तेजित महसूस कर रहा है, या बहाना कर रहा है ज्यादा आगे जानने के लिए? फिर भी उसने बोलना जारी रखा।

अदिति- हाँ उसकी हथेली मेरे कंधे पर ही थी उस वक़्त और उसकी उंगलियां उन हिस्सों पर फिर रही थीं जहाँ कपड़े नहीं थे, ब्लाउज़ थोड़ा लो-कट था तो कंधे आधा नंगे थे। उन हिस्सों पर वो अपनीउंगली दबा रहा था और हल्के से फेर रहा था, मगर उसके होंठ बहत करीब थे मेरी चमड़ी से। मैं अपने कंधे पर उसकी गरम साँसों को

महसूस कर रही थी। मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था और मुझे बहुत अजीब महसूस हो रहा था। तब मैंने विषय बदलते हुए उनसे कहा- “लीना कहाँ है इस वक़्त? वो मुझको ढूँढ़ते हुए यहाँ आ सकती है आप हटिये वरना वो सोचेगी के आप मेरे इतने करीब क्यों खड़े हो?"

मगर तब तो राकेश ने झट से अपने दोनों हाथों को मेरे पेट पर दबाकर मुझको पीछे से जोर से जकड़ा और उसका पूरा जिश्म मेरी पीठ से चिपक गया था वैसे करने से। मैं झुक गई नीचे की तरफ उसके बाहों से निकलने

के लिए और तब मेरा पिछवाड़ा उसके नीचे वाले हिस्से से जोर से दब गया एक पल के लिए।

विशाल ने बीच में कहा- “वाओव... सुपर्ब किया सिचुयेशन थी। और तुमने उसका लण्ड नहीं महसूस किया अपनी गाण्ड पर मेरी जान? उस वक्त तो उसका जबरदस्त खड़ा हुआ होगा तो तुमने अपनी गाण्ड पर बिल्कुल महसूस किया होगा। है ना? सच-सच बताओ मुझे...”

अदिति ने इस बार जारी रखते वक़्त बिना विशाल के चेहरे में देखे हुए कहा।

हाँ, मैंने महसूस किया, उसका बिल्कुल खड़ा हुआ था, एकदम तना हुआ था। मगर तभी मैं उसके चुंगल से निकल गई और दरवाजे तक जा चुकी थी। मेरे पशीने छूट चुके थे और मैं हाँफ रही थी, दिल की धड़कनें और

भी ज्यादा तेज हो गई थी।

राकेश मुझसे भी ज्यादा तेज रफ्तार से चलकर दरवाजे तक आया और मुझे बाहर निकलने से रोकते हुए और फिर से फुसफुसाते हुए कहा- “ओके जाना है तो जाओ बस इतना बता दो जाने से पहले की क्या तुमको उत्तेजना हुई थी लीना को मुझे ब्लोवजोब देते हुए देखकर? तुम गीली तो जरूर हुई होगी ना... है ना?”

मुझे बहुत शर्म आई और चेहरा लाल हो गया उनसे ऐसी बातें सुनते हुए। बहुत बहुत शर्म आ रही थी मुझे। मगर गुस्सा भी आया यह सोचकर की वो मुझसे ऐसे गंदी बातें कैसे कर सकते हैं? तो उसको मैंने तिरछी नजरों से गुस्से से देखा और तकरीबन चिल्लाते हुए कहा- “मुझे उत्तेजना हुई पूछ रहे हो? मुझे झटका लगा था, सदमा लगा था, शर्म आई थी। आप मुझसे ऐसीबातें करने की जुर्रत कैसे कर सकते हो भला? आप सच में बहुत कामीने हो...” यह कहकर मैंने दरवाजे को बहुत जोर से पीटा और बाहर निकल गई।

विशाल ने जोर से हँसते हुए अदिति को देखा और कहा- “हाहाहाहा... तुमने सच में भाई को वैसे कहा? हाहाहाहा... उसका चेहरा देखने लायक होगा उस वक्त ओह माई गोड... बेचारा राकेश भाई उसको क्या महसूस हुआ होगा एक छोटी 18 साल की लड़की के मुँह से ऐसे शब्द को अपने लिए सुनते हए, जबकी वो 40 साल के ऊपर का है? तुमको बाद में अफसोस नहीं हवा के तुमने राकेश भाई को वैसा कहा था अदिति? ओह गोड... हेहेहेहे... मैं अब

भी उसके एक्सप्रेशन को सोच रहा हूँ की कैसा रहा होगा उस वक़्त..."

अदिति भी विशाल को उस तरह हँसते हुए देखकर हँसने लगी। अदिति को विशाल का उस तरह से हँसते देखकर अच्छा लगा और वो उसके छाती में बंद मुट्ठी से मारने लगी।

विशाल ने कहा- “बहुत अच्छी तरह से सब बता रही हो मुझे, सही जा रही हो। ऐसे ही सब एक-एक करके बताती चलो, मुझे बेहद मजा आ रहा है। तो फिर किया हुआ जान?”

अदिति ने बताना जारी रखा।

क्योंकी तब मैं कमरे के बाहर आ गई थी तो जोर से लीना के नाम की आवाज दिया। ताकी राकेश मेरे पीछे नहीं आए। मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा की वो मेरे बेडरूम से निकला या नहीं, बस लीना को फुकारते हुए आगे चलती गई। जब दूसरी बार मैंने आवाज दी तो लीना ने किचेन से जवाब दिया तो मैं रसोई में गई उससे मिलने। और जब मैं रसोई के दरवाजे तक पहुँची तब मुड़कर देखा तो राकेश लाउंज के मेन डोर से निकल रहा था। तुमको मालूम है ना की किचेन के दरवाजे के पास से लाउंज का दरवाजा दिखता है।

राकेश निकल रहा था और उसके हाथों के इशारे से और होंठों के मूव्मेंट्स से मैं समझी की उसने कहा- “लीना को मत बताना की तुम मुझसे मिली हो। मैं जा रहा हूँ अब.."

मैं किचेन के अंदर चली गई। लीना बिल्कुल नार्मल बिहेव कर रही थी, जैसे कुछ हुआ ही नहीं था। बहुत खुश दिख रही थी। ऐसी बिहेव कर रही थी जैसे हमेशा रहती है, और मैंने खुद से पूछा की- “कैसे इस तरह से नार्मल हो सकती है वैसा काम करने के बाद अपने बड़े भाई के साथ?” मैंने उसको थोड़ी अजीब नजरों से देखा जो मुझे नहीं करना चाहिए था।

क्योंकी लीना ने नोटिस किया और मुझसे पूछा- “कोई प्राब्लम है क्या भाभी? क्यों इतनी पीली दिख रही हो आज? कुछ हुआ क्या?”

तब मैंने महसूस किया की मैं नार्मल नहीं बिहेव कर रही थी, इसीलिए उसने वैसा सवाल किया मुझसे। तो मैंने सिरदर्द का बहाना किया।

मगर तुरंत लीना बचकानी आवाज में यह कहते हुए मेरे माथे को दबाने को आई- “ओह्ह... मेली प्याली भाभी को सिरदर्द है। अभी एक पल में मिटा देती हूँ आप की सिरदर्द को। घर में सब कहते हैं की मेरी उंगलियों में जादू है, क्योंकी मैं मसाज करती हूँ तो पल भर में दर्द गायब हो जाता है...”

लीना ने वैसे कहा तो मैंने मौके का फायदा उठाते हुए उससे सवाल किया जब मैं चेयर पर बैठी उससे अपना सिर दबवा रही। मैंने कहा- “अच्छा? तो कौन लोग कहते हैं की तुम्हारी उंगलियों में जादू है?”

हा- “सब

लीना मेरे माथे के दोनों तरफ अपनी उंगलियों को गोल-गोल द यही कहते हैं, डैड, राकेश भाई और दीपक भाई...”

मैंने अपने आँखों को बंद करते हुए अपने सिर को उसके सीने पर रखा, क्योंकी बहुत आराम मिल रहा था, सच में जिस तरह से वो दबा रही थी, और मैंने उससे पूछा- “तो तुम उन सबको अक्सर मसाज करती हो?"

उसने एक बहुत सेक्सी आवाज में कहा- “अक्सर तो नहीं, मगर जब उन लोगों को शिकायत होती है की इधर दर्द है, यहां दुख रहा है, तब कभी-कभी मसाज कर देती हैं। तो वह लोग कहते हैं की मेरे उंगलियों में जादू है, जिस हिस्से को मसाज करने को वह कहते हैं वह कर देती हूँ और उनके दर्द गायब हो जाते हैं हीहीहीही.."

मैंने लीना से ज्यादा सवाल पूछने की कोशिश की, जैसे जिश्म के किन हिस्सों को मसाज करती हैं उन लोगों के? तो कुछ देर लीना जवाब देने में हिचकिचाई फिर कहा- “ऐसे ही, कभी उनकी बाहें या पैर, या सीना और कभी सिर जैसे आपका दबा रही हूँ। मगर डैड अक्सर, बहुत ज्यादा तेल से अपनी पीठ और कंधे मसाज करवाते हैं मुझसे। उनको बहुत आराम मिलता है वो कहता हैं.."

उस पल को पता नहीं क्यों मेरे खयाल में वो दृश्य नजर आया, जहाँ उसने राकेश के लण्ड को अपनी उंगलियों में थामी थी, उसको चूसते हुए और मुझको एक अजीब सी एहसास हुई तो अपनी आँखों को तुरंत खोला मैंने

और लीना की उंगलियों को देखा। फिर उसको रुकने को कहा उससे कहते हए की दर्द गायब हो गया।

लीना खुशी से चिल्लाई- “देखा भाभी... यह थी मेरी उंगलियों का कमाल। दर्द गायब आआआ...”

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कड़ी 73 राकेश और अदिति

अदिति ने बोलना जारी रखा

उस रोज मेरा दिन बुरा गुजरा। उससे भी बुरी थी शाम उन सबके बारे में सोचने से। उस रोज तुम रात को 11:00 बजे वापस आने वाले थे, तुमने काल करके बताया था घर पर। उस शाम को जब राकेश काम से घर वापस आया तो मैं उससे नजरें चुरा रही थी, जितना हो सके उसके सामने नहीं जाती थी। मगर डिनर के वक्त सब लोग सामने थे तो मजबूरन उससे मुझे बात करनी पड़ी। क्योंकी मैं डिनर सर्व कर रही थी, और उसने जब तब मौके का फायदा उठाते हुए मुझको छुवा भी, जब पापा और दूसरे लोग नहीं देख रहे थे।

एक बार उसको कुछ सर्व करना था तो मुझे उसकी बगल में जाना पड़ा सर्व करने के लिए, तो सबके चेहरे में देखते हुए उसने मेरे पिछवाड़े पर हाथ फेरा, जब सब अपनी-अपनी प्लेटें पर ध्यान दे रहे थे। और जब मैं सिंक के पास प्लेटें धो रही थी तो दो बार वो मेरे पास आया और अपने नीचे वाले हिस्से को मेरे चूतड़ों पर पीछे से रगड़ा उसने, हाथ धोने का बहाना करते हए। हालांकी लीना वहीं थी उस वक़्त। दीपक और पापा उस वक्त लाउंज में टीवी देख रहे थे।

राकेश ने लीना से कहा- “तुम्हारा फेवुरिट सीरियल शुरू हो रही है नहीं देखने जाओगी लीना?” राकेश लीना को बाहर निकाल रहा था मेरे साथ अकेले रहने के लिए। मैं वो समझ गई और मुझे बाकी सारे प्लेटें और बर्तन धोने थे उस वक्त। तो मैंने लीना से सभी बर्तनों को सुखाकर रखने को कहा जाने से पहले।

मगर भोली लीना ने राकेश के इरादे को ना

हा- "भाई बर्तनों को उठा देना प्लीज... मैं चली अपनी सीरियल देखने अब..” और वो धड़धड़ाते हुये चली गई लाउंज में, मुझे राकेश के साथ अकेली छोड़कर किचेन में।

विशाल ने मुश्कुराते हुए अदिति को देखा और कहा- “तो उस दिन घर में तुमको एक और प्रेमी मिल गया। और बिल्कुल जिस तरह मैं तुम्हारे साथ रहता था किचेन में जिन दिनों घर पर होता था, उसने वैसे ही मुझको

रीप्लेस भी किया हाँ? तो उसने किया क्या जान, बताओ? देखो मेरा लण्ड कैसे जमकर खड़ा हो गया है यह सब सुनकर..."

अदिति- “तुमको यह सब मजाक लग रहा है? उस वक़्त मैं बहुत ही नाराज थी और उससे नफरत कर रही थी, उस वक़्त राकेश को कोई चीज उठाकर मारने को मेरा मन कर रहा था.."

विशाल- “अरे वो उसका पहली बार था ना.. इसीलिए तुमको वैसा महसूस हो रहा होगा। मगर मुझे इस बात की

उत्सुकता हो रही है जानने की कि तुमने उसको पहली बार कैसे अपने पास आने दिया? मगर मैं ऐसे ही चाहता हूँ की तुम धीरे-धीरे सब बिल्कुल डीटेल में बताओ। सही जा रही हो ऐसे ही सब एक-एक करके बताओ। मुझे बहुत ही मजा आ रहा है मेरी जान। तो तुम उसके साथ अकेली थी किचेन में, जब सब लाउंज में टीवी देख रहे थे। तब किया हुआ बताओ मुझे, बहुत बेचैन हूँ जानने के लिए, बहुत ही उत्तेजना हो रही है मेरी जान..."

अदिति- “तुम क्या सोच रहे हो की उसी दिन मैंने उसको मेरे करीब आने दिया?”

विशाल- “डिपेंड करता है। वो तुमको ब्लैकमेल कर सकता था की लीना को सब बता देगा या कुछ भी हो सकता

था। मैं तो रात को 11:00 बजे वापस आने वाला था और उसके पास बहुत टाइम था तब तक। चलो बताओ आगे क्या हुआ उसके बाद?”

अदिति को लगा उस वक़्त विशाल थोड़ा अग्रेसिव था फिर भी उसने कहना जारी रखा।

मैंने उससे कहा- “मुझे तुम्हारी हेल्प की जरूरत नहीं है, तुम भी लाउंज में चले जाओ...”

उसने लीना के सोफे पर बैठने का इंतेजार किया तब मेरे पास आया, मेरे पीछे खड़े होकर फिर से फुसफुसाते हुए मेरे कानों में कहा- “विशाल देर से आएगा क्या? कितने बजे आएगा आज?"

मैंने उसको कड़वे स्वर में जवाब दिया- “यह आपकी प्राब्लम नहीं है, वो किसी भी वक़्त वापस आए?"

मगर उसने हँसते हुए जवाब दिया- “यह तुम्हारा प्राब्लम हो सकता है। हाँ ठीक है। मगर जब तक वो नहीं आए मैं तुम्हारे साथ तो रह सकता हूँ ना... मेरी प्यारी छोटी भाभी?"

मैंने गुस्से में कहा- “मैं आपकी कोई प्यारी व्यारी नहीं हूँ, मुझको वैसे मत बुलाना। मैं लीना नहीं हूँ.."

वो कुछ ज्यादा जोर से हँसा और कहा- “मगर तुम लीना से बेहतर हो, तुम अनुभवी हो, और मुझे पूरी उम्मीद है की तुम मुझको लीना से बेहतर सर्व कर सकोगी। है ना?"

मेरा चेहरा लाल हो गया उसकी बातों को सुनकर और बहुत ही गुस्सा आया मुझे और पशीने छूट गये मेरे, गर्मी सी छा गई गुस्से से और तकरीबन चिल्लाते हुए मैंने जवाब दिया- "तुम चुप करोगे? और यहां से बाहर जाओ?"

मेरा जवाब और स्वर सुनकर उसका चेहरा थोड़ा लाल हो गया पर वो मेरे और ज्यादा पास आया और मुझको थामने की कोशिश किया।

मगर मैं पीछे हट गई यह कहते हये- “देखो अगर तुमने मुझको छुआ तो मैं सब कुछ ऐसे ही छोड़कर लाउंज में जा रही हूँ। तब तुम जवाब देना की क्यों सभी बर्तन सिंक में पड़े हुए हैं। सुना आपने?"

उसने अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए कहा- “ओहह... ओहह... ओहह... डरो मत जवान औरत। मैं तुमको हाथ नहीं लगा रहा हूँ। देखो मेरे हाथ ऊपर उठे हुए हैं। ठीक है मैं सिर्फ बात करूँगा तुम धोती रहो प्लेटों को। देखो मैं यहाँ से बात करता हूँ। ठीक है?” और वो कोई एक फूट के दूरी पर खड़ा था।

मुझे उस वक्त लगा की इस बार वो डर गया और मैं विजेता थी, तो मुझको हँसी आ गई।

फिर उसने पूछा- “हाँ तो बताओ तुमने लीना का सामना कैसे किया, जब मैं चला गया दिन में आज? सब ठीक रहा? तुमने उससे सवाल किया?"

मैंने उसको कोई जवाब नहीं दिया।

तब उसने कहा- “अगर नहीं बताओगी तो मुझे लीना से पूछना पड़ेगा। मैं उससे पू?"

मैंने फिर भी कोई जवाब नहीं दिया। वो मेरे दायीं तरफ खड़ा था और मैं अच्छी तरह से महसूस कर रही थी की वो मुझको नीचे से ऊपर तक घूर रहा था। मेरी कमर और पेट दिख रहे थे मेरी साड़ी और ब्लाउज़ में उस वक्त। और मुझे पता चला की वो मेरी कमर को देख रहा है। तो मैंने अपने हाथ से पानी झटकते हुए अपनी साड़ी से कमर को ढंका।

उसने तुरंत कहा- “क्यों जुल्म कर रही हो? कम से कम देखने तो दो, तुम्हारी चमड़ी कितनी मुलायम है, गोरी गोरी, हाट और सेक्सी वाह... लीना से बहुत ज्यादा हाट और सेक्सी हो तुम तो... छूने नहीं दे रही हो तो कम से कम प्रशंसा तो करने दो ना.."

मैंने फिर से कोई जवाब नहीं दिया। बर्तनों को धोती गई सिंक में नजरें झुकाए। मगर मैंने महसूस किया की उसने एक कदम बढ़ाया मेरे तरफ तो तुरंत मैंने मुड़कर उसको मोटी-मोटी आँखों से देखा और वो जहाँ था वहीं रुक गया।

विशाल- “हाहाहाहा... तुम भाई को डरा रही थी अदिति? बेचारा भाई, मैं सोच रहा हूँ उस वक्त उसने कैसा

महसूस किया होगा हाहाहाहा... तो तब उसने तुम्हारी कमर को छुआ क्या? उसका खड़ा नहीं हुआ था? उसका लण्ड खड़ा हो गया होगा उस वक्त, तुमने नोटिस नहीं किया?"

अदिति- “नहीं, उस वक़्त मैं इतनी गुस्से में थी की वो सब नहीं देखा था। मगर हाँ लाउंज में जाने से पहले नोटिस किया मैंने। हाँ उसक

था...”

विशाल- “पता था मुझे वो तो खड़ा होना ही था, तुम जैसी हाट जवान भाभी के जिश्म के हिस्सों को देखकर, किसी का भी खड़ा हो जाता। तो किचेन में फिर कुछ हुआ?”

अदिति- नहीं। क्योंकी मैं उसको कोई जवाब नहीं दे रही थी तो वो वहीं खड़े होकर मुझको निहार रहा था और जब मैं जाने लगी।

तब उसने इतना कहा- “मैं तुमको निहारे बिना रह नहीं सकता। तुम बहुत आकर्षित करती हो मुझे अदिति, मन करता है तुमको जोरों से अपनी बाहों में जकड़ लूँ..”

मगर मैं वहाँ से तेजी से चलते हुए निकल गई और अपने कमरे में चली गई।

जब मैं किचेन से निकलकर लाउंज से गुजरते हए रूम की तरफ जा रही थी तो लीना ने ऊँची आवाज में पूछा “भाभी भाई ने तुमको बर्तनों को समेटने में मदद किया?”

मैंने हाँ में सिर हिलाया और रूम में चली गई।

विशाल- “और उस रात को यही सब हुआ?"

अदिति- “नहीं जान, वो सब नहीं था और कुछ हुवा था उस रात को। आगे सुनो अब। मैंने शावर लिया और नाइटी पहनी। अब जैसा की तुम चाहते थे हमेशा की नाइटी पहनते वक्त मैं ब्रा नहीं पहनूं तो मैंने ब्रा नहीं पहनी

थी। वैसे तुमसे शादी से पहले मैं नाइटी के नीचे भी ब्रा पहनती थी, तुमको तो पता है ना? तो तुमने आदत दे दिया मुझे यह कहकर की नाइटी पहनते वक्त ब्रा नहीं पहननी चाहिए। इसलिये मैंने नाइटी पहनकर ऊपर वाला नाइटी का गाउन पहना हर रात की तरह, और हर रात की तरह लाउंज में जाने लगी। मगर राकेश को सोचकर

उस रात को लाउंज में जाने का मन नहीं किया। फिर मैंने सोचा की कहीं वो रूम में ना आ जाये इसलिए मैं लाउंज में गई। क्योंकी वो कभी टीवी देखता ही नहीं था, बल्की अपने रूम में रहता था..”

लाउंज में जैसे की मैं हमेशा लीना के पास बैठती थी तो उसी सोफे की तरफ बढ़ी मैं लीना के पास बैठने को, तो वहाँ राकेश को देखकर मुझे झटका लगा। वो लीना के पास बैठा था सोफे पर, तो उसको पता था की मैं वहाँ आने वाली थी और लीना के पास बैठती हूँ इसीलिए वो भी वहीं था। मुझको परेशानी महसूस हुई। मुझे आते हए देखकर लीना थोड़ी सी खिसकी मेरे लिए बैठने के लिए जगह बनाते हुए, और राकेश भी खिसका मगर इस तरह की मुझको बीच वाली सीट मिले बैठने को, तो मुझे लीना और राकेश के बीच बैठना पड़ा। पहले तो किसी और सोफे पर बैठने को चाहा मैंने। मगर सोचा की दीपक और पापा और खुद लीना सोचेंगे की क्यों आज मैं लीना के पास नहीं बैठी? यह सोचकर वहीं बैठ गई मैं।

मैं बैठ गई तो लीना ने कहा- “बहुत ही एमोशनल मूवी है भाभी..”

जैसे की तुमको पता है की टीवी देखते वक्त लाउंज की सभी लाइटें आफ होती हैं और सिर्फ टीवी की लाइट रहती हैं उस वक़्त लाउंज में। तो वैसा ही नजारा था उस रात को भी। फिर मैंने राकेश का हाथ अपनी जांघों पर महसूस किया अपने मुलायम नाइटी के ऊपर।

** * * * * * * * *
 
कड़ी_74 अदिति ने बताना जारी रखा

अदिति- “जैसे ही मैंने उसकी हथेली को अपने जाँघ पर महसूस किया तो सबसे पहले मैंने लीना के चेहरे में देखा की उसने कुछ देखा तो नहीं? फिर मैंने अपने दिल की धड़कन को तेज होते महसूस किया और अपने एक पैर को दूसरे पर क्रास कर लिया। वो मेरे बायीं तरफ में बैठा था तो उसका दायां हाथ मेरी जाँघ पर था और मेरे टांगें क्रास करने के बाद उसने थोड़ा इंतेजार किया। फिर खिसकते हुए मेरे इतना करीब आया की मैंने उसकी जाँघ को अपनी जाँघ के साथ छूते हुए महसूस किया। और उसने फिर से अपने हाथ को मेरी दोनों जांघों के बीच डाला जोर लगाते हए। मैंने फिर से लीना की तरफ देखा फिर पापा और दीपक को देखा, पर उन लोगों के नजरें टीवी पर गड़ी हुई थीं। मैंने एक आss भरते हुए उसके हाथ पर चुटकी काटी। उसने बिल्कुल उम्मीद नहीं किया था की मैं वैसा करूँगी तो उसने हाथ खींचते हुए अचानक से “ओईई” कहा।

लीना ने इस बार झुक कर उसको देखते हुए पूछा- “क्या हुआ भाई? ऐसा लगा की तुमको चोट लगा है..”

उसने सिर्फ सिर को हि टीवी देखने को कहा।

विशाल बहुत उत्तेजित लग रहा था और अदिति को गौर से देखे जा रहा था उसको सुनते हुए। विशाल अदिति

के चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रहा था जब वो सब बताती जा रही थी। विशाल जानना चाहता था की अदिति को कैसा महसूस हो रहा है सब सुनाते हुए।

अदिति ने कहना जारी रखा

मुझको तब अजीब लगने लगा। क्योंकी राकेश मुझको परेशान करने लगा था। मैंने वापस अपने कमरे में जाने को सोचा। मगर फिर सोचा की हो सकता है वो जानबूझ कर वैसा कर रहा है, ताकी मैं वापस कमरे में जाऊँ

और वो वहाँ आए। यह सोचकर मैं वहीं बैठी रही। पर तब उसने अपनी दोनों बाजुओं को मोड़ा और अपने बायें मोड़े हाथ से सीधे मेरी बायीं चूची को छुआ। वो ट्राई कर रहा था की जहाँ उसके हाथ पहुँचे वहीं छुएगा। शायद खुद उसी को नहीं पता था की उसका हाथ मेरी चूची तक पहुँचेगा। उसका हाथ अपने चूची पर महसूस करते ही मैं चौंक गई। क्योंकी मैंने बिल्कुल नहीं सोचा था की वो मुझको वहाँ छुएगा।

अब क्योंकी मैं चौंकी तो लीना को नजर आया। उसने पूछा- “क्या है भाभी काकरोच है क्या?"

मैंने लीना से मुश्कुराते हुए कहा- “शायद कुछ मेरी पीठ पर चला.” और झूठ मूठ के मैंने अपना हाथ फेरा अपनी पीठ पर राकेश को मोटी-मोटी आँखों से देखते हुए।

वो मुश्कुराते हुए अपने होंठों को दाँतों में दबा रहा था। मुझको तब तक बहुत परेशानी महसूस होने लगी और मैं बेचैन हो गई थी। उसने अपने हाथ से खेलना जारी रखा और अपनी उंगलियों से मेरी चूची को महसूस करने की कोशिश जारी रखा। तब तक उसको पता चल गया होगा की मैंने ब्रा नहीं पहनी हुई है, और वो उत्तेजित महसूस कर रहा होगा मैंने सोचा। वो बहुत होशियारी से सब कर रहा था, सबकी नजरों से बचते हए। उसके फोल्डेड बाहों से किसी को कुछ पता नहीं चला था की उसके उंगलियां और एक हथेली मेरे जिश्म को छू रही है, खासकर मेरी बायीं चूची को। मेरी साँसें तेज हो गई थीं उसके हरकतों से। लगता था की मैं हाँफ रही हैं।

+

लीना ने मेरी साँसों को सुनकर कहा- "आपको गर्मी लग रही है क्या भाभी? ऐसी तो ओन है तो क्यों आप इतनी हॉफ रही हो? मुझे आपकी साँसें सुनाई दे रही हैं?"

जवाब में मैं लीना से सिर्फ मुश्कुराई। मुझे डर था की लीना को कुछ पता ना चल जाए, तो मुझे किसी तरह की मूमेंट करने से सावधानी बरतनी पड़ रही थी, क्योंकी लीना अलर्ट हो रही थी। तभी राकेश ने अपनी हथेली को मेरे बांह और कांख के बीच में डाला और मैंने बहुत जोर से उसकी हथेली को अपनी कांख के नीचे दबा दिया पूरी ताकत के साथ, ताकी वो कोई मूव्मेंट नहीं कर सके अपने हाथ से। उसकी हथेली जैसे कैद हो गई थी मेरे कांख के नीचे और वो हाथ खींचने की कोशिश कर रहा था, मगर नाकामयाब रहा। मुझको हँसी आई उसको उस हाल में देखकर। उसके लिए वो एक खेल बन गया था, तो अपने हाथ को छुड़ाने के लिए उसने उसी जगह एक उंगली से मुझको गुदगुदी किया। और जैसे तुमको मालूम है की मैं गुदगुदी नहीं सह सकती तो तुरंत मुझे उसके हाथ को छोड़ना पड़ा। फिर थोड़ी ही देर बाद, लीना की नजरों को बचाते हुए उसने अपने हाथ को फिर से मेरी जाँघ पर रखा। जितना जोर से हो सकता था मैंने उतनी ही जोर से उसको चुटकी काटी, मगर उसने सहा और हाथ को नहीं हटाया बल्की उसने हाथ को फेरा मेरी जाँघ को महसूस करते हुए।

मुझको गुस्सा आ गया और मैं खड़ी हो गई और लीना से कहा- “मैं सोने जा रही हूँ मुझको नींद आ रही है..."

विशाल ने मुश्कुराते हुए अदिति से कहा- “हम्म.. और तुमने भाई के लिए लीना को अकेली छोड़ दिया, वो सब करने के लिए हाँ?"

अदिति ने विशाल की इस बात को सुनकर गुस्से में कहा- “तो मैं क्या करती? उसको अपनी चूचियां और जाँघों को टटोलने देती? मगर सुनो वो लीना के साथ नहीं रुका वो मेरे बेडरूम में आ गया.”
 
विशाल- “अच्छा वो अंदर आया किसी ने उसको हमारे बेडरूम में आते हुए नहीं देखा? लाउंज में से हमारे बेडरूम

का दरवाजा तो साफ नजर आता है...”

अदिति- “यही पूछा मैंने उससे जब वो दाखिल हुआ तो और उसको वापस जाने के लिए विनती किया। तब तक मैं सिर्फ नाइटी में थी बिना ऊपर वाले गाउन के और बेड पर लेटी हई थी और उसी के बारे में लीना को लेकर सोच रही थी जब वो अंदर आया। मैं दरवाजे को लाक कर सकती थी, मगर तम वापस आने वाले थे और मुझको नींद लग जाती तो तुम सवाल करते की मैंने क्यों बेडरूम की दरवाजे को लाक किया हुआ है, जबकी हम कभी भी अपने दरवाजे को नहीं लाक करते थे...”

इससे पहले की मैं बेड से निकलती वो कूदकर बेड पर आया और मुझको बेड पर दबाकर मेरे गले को चाटने की कोशिश करने लगा। नाइटी पतली सी थी और कंधे पर पतली सी स्ट्रैप थी और मेरी चूचियां साफ दिख रहे थे, उसकी गोल आकार सब नजर आ रही थी, और वो उसको बहुत उत्तेजित कर रही थी उसने कहा भी।

पहली बात जो मैंने उसको कहा वो ये थी- “प्लीज चले जाओ, किसी ने आपको अंदर आते हए देखा होगा वहाँ से, मैं क्या जवाब दूंगी अगर किसी ने पूछा की रात के इस वक्त आप किसलिए आए थे जब विशाल यहां नहीं है तो?"

उसने जवाब में कहा- "फिकर मत करो मेरी जान, मैंने अंदर आने से पहले सबको देखा गौर से, सबकी आँखें टीवी पर गड़ी हुई थीं। किसी ने भी नहीं देखा मुझको अंदर आते हुये...”

मैं उसके चुंगल से निकलने की बहुत कोशिश कर रही थी, मगर नाकामयाब रही।

उसने मुझको जबरदस्ती दबाया हुआ था बेड पर, मेरे दोनों बाजुओं के ऊपर अपने हाथों को दबाकर और मेरे गले को चाट रहा था। तभी उसने कहा- "तुम्हारी चूचियां बेहद खूबसूरत हैं, लीना से बहुत ज्यादा खूबसूरत और मुझे पागल बना रही हैं यह दोनों गोल-गोल ताजी-ताजी चूचियां... मेरी जान बस इन्हें चूसने को बड़ा मन कर रहा है हम्म्म्म ...” कहकर उसने अपने चेहरे को मेरे छाती पर नाइटी के ऊपर से ही रगड़ा।

मैं उससे झपटा झपटी कर रही थी, प्रतिरोध कर रही थी, क्योंकी मुझे बहुत फिकर हो रही थी की कोई हमें सुन नहीं लें, हमारी आवाज कहीं बाहर ना चली जाए? ना चिल्ला सकती थी और ना जोर से बात कर सकती थी। बहुत बेबस और मजबूर महसूस कर रही थी मैं उस वक्त। कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या करूँ? मैं यह भी सोच रही थी की कहीं तुम जल्दी आ गये और रूम खोलकर अचानक अंदर आए और उसको मेरे ऊपर बेड पर देखा तो क्या होगा? बहुत डर लग रहा था मुझे। सोच रही थी की उसको अपनी प्यास बुझाने दूँ ताकी वो जल्दी से अपनी हवस मिटाकर चला जाए तुम्हारे आने से पहले। मगर नहीं, मैंने प्रतिरोध करना ज्यादा पसंद किया उस वक़्त।

मैंने उसको अपने घुटनों से किक करने की कोशिश की, मगर उसने मेरी टाँगों को कुछ इस तरह से खींचा की मेरे नाइटी बिल्कुल ऊपर उठ गई और मेरी पूरे जांघे उसकी आँखों के सामने नंगी आ गाई। उसने अपनी जीभ को अपने होठों पर फेरते हुए मेरी जांघों को देखा और बिल्कुल एक शेर की तरह किया, जैसे शेर करता है अपने सामने एक गोश्त का टुकता देखकर।

राकेश ने मेरी जांघों पर अपनी जीभ फेरा, चाटा और ऊपर की तरफ चाटता गया। मैं हिलने की बहुत कोशिश करती रही। मगर उसने इतनी ताकत से मुझको बेड पर चिपकाया था की मैं बिल्कुल नहीं हिल पा रही थी। अपने मजबूत हाथों से मेरे दोनों हाथों को पकड़ा हआ था और अपने जिश्म के वजन से भी दबा रहा था मुझे वो। उसकी लार टपक रही थी जिस वक्त वो मेरी जांघों को चाट रहा था, और ऊपर पैंटी के करीब पहुँच गया था। मेरा जिश्म काँप उठा था और मैंने रोती हए आवाज में उससे रुकने के लिए विनती किया। मुझे बहत चैन मिला उसको रुकते हुए देखकर।

उसने मेरे चेहरे में देखा और ऊपर मेरे चेहरे के पास आया और मेरे होठों को चाटने लगा। मैंने अपने मुँह को सख्ती से बंद कर लिया। मगर वो मेरे मुँह को खोलने की कोशिश करता गया, मुझको किस करने के लिए। मगर मैं उसको किस नहीं करने दे रही थी। वो अपनी जीभ मेरे मुँह के अंदर ठूसना चाहता था, पर मैंने मुँह को बंद रखा। वो जबरदस्ती करता गया तो मैंने अपना सिर हिलाना शुरू किया जोर से दायीं और बायीं तरफ। और वैसे सिर के हिलाने से मेरा माथा उसके ऊपरी होंठ से जोर से टकराया और उसका होंठ उसके ऊपरी दाँत से टकराया और होंठ फट गया उसका। अचानक खून निकल पड़ा और मेरे चेहरे पर उसका खून गिरने लगा।

मैं डर गई खून देखकर, बहुत घबरा गई मैं, और मेरे चेहरे पर डर और घबराहट देखकर उसने मौके का फायदा उठाया और जैसे बदला लेते हुए क्योंकी मेरी वजह से वो घायल हो गया था तो उसने मेरे चेहरे को अपने हाथ में थामा और उसी खून बहते हुए होंठ से मुझको किस किया।
 
मेरे दोनों गालों को दबाकर मेरे मुँह को खोलते हुए और मेरे मुँह में उसके खून की लज़्ज़त महसूस हुई मुझे नमकीन। क्योंकी मैं डरी और घबराई हुई थी। मेरा मुँह डर के मारे खुल गया और उसकी जीभ मेरे मुँह में आ गई और उसने मेरी जीभ को खूब चूसा, खूब किस किया उसने मुझे। क्योंकी मैं एक मूरत बन गई थी डर के मारे। मैं उसके खून की लज्जत मेरी जीभ पर काफी देर तक महसूस करती रही। मगर वो एक मामूली सी चोट थी तो पल भर में खून निकलना बंद हो गया। किस करते वक़्त उसने मेरी दोनों चूचियां दबाई और मेरे पूरे जिश्म पर हाथ फेरा।

विशाल ने अपने लण्ड को पैंट में सीधा किया और कहा- “जान तुम वैसे नहीं बता रही हो जैसे बतानी चाहिए

थी। तुमने नहीं बताया की वो किस पोजीशन में था तुमको किस करते वक्त? क्या वो तुम्हारे ऊपर था? उसका पूरा शरीर तुम्हारे जिश्म के ऊपर था? या बगल में लेटा था वो, वो सब करते वक़्त? तुमने उसके लण्ड को नहीं महसूस किया अपने जिश्म पर? क्या उसने अपने लण्ड को नहीं रगड़ा तुम पर किस करते वक्त? सब बताओ मुझे..”

*****

*****
 
फ्लै शबैक जारी

अदिति ने कहा- “हाँ राकेश का खड़ा हो गया था और झपटा झपटी के दौरान कई बार उसने अपने लण्ड को रगड़ा था मेरी जांघों के बीच.."

जिस वक्त राकेश ने अदिति को बिस्तर पर उसके दोनों हाथों को दबाकर ब्लाक किया हआ था उसके गले और छाती को चाटते हुए उस वक्त, राकेश का पूरा जिश्म अदिति के ऊपर था, अदिति की नाइटी ऊपर कमर तक उठी हुई थे और राकेश का नीचे वाला हिस्सा अदिति के नीचे वाले हिस्से पर दबा हुआ था और उसका लण्ड पैंट के अंदर से ही अदिति के ठीक पैंटी पर चूत के ऊपर रगड़ भी रहा था। अदिति बिल्कुल उसके लण्ड को अपनी चूत पर रगड़ते हुए महसूस कर रही थी।

मगर राकेश के होंठों में खून देखकर थोड़ा चिहँक गई थी तो उस समय एक बुत की तरह पड़ी हुई थी बेड पर

और उस मौके का फायदा राकेश उठा रहा था, अपने लण्ड को उसकी चूत पर रगड़ते हुए उसको महसूस किए जा रहा था। और ऊपर अदिति के होंठ और मुँह चाट रहा था और सदमे की हालत में अदिति ने मुँह खोल भी दिए

थे। तो यह सब बताया अदिति ने विशाल को।

विशाल ने पूछा- “बिल्कुल ठीक, मुझे यह पता था की उसका लण्ड खड़ा हुआ होगा और उसने जरूर रगड़ा होगा तुम्हारी चूत के ऊपर। चलो ठीक है तो आगे बताओ क्या हुआ? कब वो कमरे से निकला और क्या तुम्हारे अंदर घुसने में कामयाब भी हुआ था..”

अदिति ने विशाल से कहा- “मैं थक गई हूँ। अब बाद में बताऊँगी.”

मगर विशाल ने कहा- “मैं अभी फ्री हूँ और पहले ही सो चुका हूं और अगर तुमने नहीं बताई तो आफिस में यह सब बातें मेरे दिमाग को चैन से नहीं काम करने देगी इसलिए अदिति को उसी वक्त सब बताना चाहिए..."

अदिति के पास और कोई चारा नहीं था बताने के अलावा। तो अदिति ने बताना चालू रखा

अदिति- “उस रात को राकेश बहुत ही उत्तेजित हो रहा था मेरे के जिश्म को महसूस करते हुए अपने नीचे और मैं किस को जवाब कर रही थी इसलिए राकेश की दोगुना मजा आने लगा था। तो राकेश ने धीरे-धीरे अपने एक हाथ को अपनी जिप पर ले गया और जिप खोलकर अपने लण्ड को बाहर किया। जिप की खुलने की आवाज को सुनकर मैं जैसे किसी सपने से जागी और झट से अपने दोनों घुटनों को ऊपर उठाते हुए राकेश की पोजीशन को बदल दिया। मैंने राकेश के जिश्म से अपने जिश्म का कांटैक्ट तोड़ दिया। मैंने अपने पैरों को मोड़ लिए राकेश के चेहरे में देखते हुए। राकेश ने नहीं सोचा थे की मैं अब भी मना करूंगी। उसने सोचा के उसने मुझको अपने रंग में रंग लिया था इतने देर में। मगर मुझ को वैसा करते देखकर राकेश थोड़ा मायूस हो गया और निराश भी, और उसके लण्ड पर भी असर पड़ा अदिति की उस बिहेवियर से जो धीरे-धीरे मुरझाने लगा। मेरी के जांघों के पास राकेश अपने घुटनों पर पड़ा हुआ था, तो उसने अपने लण्ड को हाथ में थामे हुए मुझको दिखाया। मैं उसके लण्ड को ही नर्म होते हए देख रही थी एक हल्की सी मश्कान के साथ। तब मैंने बेड पर बैठकर अपनी नाइटी को नीचे करके अपनी जांघों को ढंका और एक तकिये को अपनी पीठ से लगाकर आराम से बैठ गई बेड पर."

आतिति ने राकेश के लण्ड से नजर हटकर उसको देखा और कहा- “अब आप बाहर जाओ, बहुत कुछ कर लिया आज आपने, मगर कैसे बाहर जाओगे आप? आपको कैसे पता चलेगे, अगर कोई इस कम की तरफ देख रहा है आपके निकलते वक़्त? ओह माई गोड...”

मगर राकेश के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था उस वक्त, अपने लण्ड को हाथ में थामे हुए उसने कहा- “मैं बाहर नहीं निकलूंगा, बाहर तुमको निकलकर देखना होगा की कोई इस तरफ देख तो नहीं रहा, तब तुम खुद मुझको बाहर निकालने के लिए कहोगी जब कोई नहीं देख रहा होगा तब.."

तब अदिति बेड से उतर रही थी अपना गाउन पहनने के लिए, हाथ में उसे लिए।

राकेश ने उसको रोका यह कहकर- “रुको जानेमन... मगर एक शर्त है इससे पहले हम वैसा करें..."

अदिति ने उसके चेहरे में एक बार देखा, उसके घायल होंठ पर नजर दौड़ाते हुए जो थोड़ा सूजा हुआ दिख रहा था और कहा- “ओफफो अब क्या है?"

राकेश अपने हाथ में अपना लण्ड थामे हुए घुटनों के बल बेड पर अदिति के पास गया और कहा- "इसको चूसो बस चाँद मिनट के लिए, लेट्स से 3 मिनट। तब जाऊँगा इस कमरे से...”

अदिति ने अपने बाजू को मोड़कर अपने चेहरे के सामने किया और ना में सिर हिलाई दूसरी तरफ देखते हुए। उस वक़्त राकेश का गिरा हआ लण्ड बिल्कुल उसके चेहरे के पास था राकेश के हाथ में।

राकेश उसकी इनकार से बोला- “तो फिर ठीक है। मैं तुमको जबरदस्ती ही लेता हूँ जैसे कुछ देर पहले कर रहा था। वैसे शायद ज्यादा पसंद है तुमको ना?” और राकेश ने अदिति के दोनों हाथों को फिर से जकड़ा और बेड पर अदिति की पीठ के पीछे किया उसके हाथों को और उसके गाल और होंठों को चाटने लगा।

अदिति ने सोचा की उसकी इस जबरदस्ती को सहने से बेहतर होगा के उसके लण्ड को थोड़ा सा चूस लेती, तो अदिति ने कहा- “ओके ओके सिर्फ तीन मिनट... ठीक है?"

राकेश ने एक शैतानी मुश्कुराहट से अदिति को देखा और अपने पैंट और अंडरवेर को नीचे किया वैसे ही घुटनों के बल अदिति के बिल्कुल सामने बेड पर। अदिति को एक फ्लैशबैक की तरह वो दृश्य नजर आया की उसने कैसे लीना को इस लण्ड को चूसते हुए देखा था दिन में, राकेश को खुश करते हुए। यह सोचते हुए अदिति के मन में एक अजीब सी कशिश हुई। सेक्स की फीलिंग अचानक उसके मन में जागी और सोचने लगी की लीना को कितना मजा आया होगा। बिना शादी किए घर में ही जिश्म का सब सुख मिल जाता है उसको अपने बड़े भाई से ही।
 
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