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***** **** *कड़ी_02
विशाल और आदिति मूव
जल्द ही दोनों एक नये फ्लैट में आ गए और नये तरीके से बिना किसी परिवार मेंबर के जिंदगी जीने लगे, सिर्फ पति और पत्नी। शुरू में कुछ अजीब लगा वैसे अकेले जीने में, मगर धीरे-धीरे आदत पड़ गई। सब कुछ खामोश, सुनसान था और बहुत आराम और सुकून मिल रहा था वैसे जीने में।
और यही वक्त था जब विशाल, आदिति के दिल-ओ-दिमाग में अपनी फँटसीस को पूरा करने की शुरुवात करने का डिसाइड किया। जबसे शादी हुई थी, तब से अब तक विशाल ने आदिति को कुछ नहीं बताया था अपनी फँटसीस के बारे में। मगर इतने दिनों में विशाल ने आदिति को सेक्स का आदि बना दिया था और हर रोज
सेक्स करता था। शादी की पहली रात से लेकर अब तक, कभी भी मिस नहीं किया था चोदने को। जब आदिति को पीरियड्स होते थे तब विशाल उसके चूतरों के बीच में अपने लण्ड रगड़कर वीर्य वहाँ छोड़ता था।
अपनी तसल्ली के लिए और आदिति को समझाने के लिए की कहीं भी उसके जिश्म पर वो कर सकता है और अपने आपको खुश कर सकता है। विशाल ने बड़े आराम से, बहुत वक्त लिया आदिति को सेक्स की दुनियां में डूबोने को और उसको भी सेक्स को पसंद करने और एक बहुत अहम जरूरतमंद चीज साबित करने के लिये।
आदिति को उसने अपनी तरह से किस करना सिखाया। विशाल खुश था की आदिति बहुत जल्द सीख लेती थी और बिल्कुल उसकी जरूरत के मुताबिक वैसे ही करती थी जैसे वो चाहता था। जैसे की किस करते वक्त वो चाहता था की अपनी जीभ आदिति के मुँह में डाले और वो उसकी जीभ को चूसे और उल्टा आदिति भी अपना जीभ विशाल के मुँह में डाले और वो उसको चूसे।
बहुत सारी लड़कियां यह करने से मना करती हैं। सिर्फ ऊपर-ऊपर होंठों को चूमती रहती हैं। मगर आदिति सब सीख गई और सेक्स के दौरान अपने आप ही वैसे किस करती, और विशाल के जिश्म के ऊपर भी चारों तरफ किस करती और दाँत भी काटती थी। विशाल के गले पर अक्सर लोव बाइट्स हआ करते थे जो आदिति ने किए हुए थे सेक्स के दौरान।
अपने ससुर के घर में आदिति हमेशा चूड़ीदार या साड़ी में रहती थी। आदिति की फिगर बहुत दिलचस्प थी, बहुत खूबसूरत मुश्कान और बहुत हसीन गोरा रंग और एक जान वा नजरें थी उसकी। उसकी आवाज एक और चार चाँद लगाने वाली बात थी उसमें। बस जिस तरह से वो बात करती थी, और जिस तरह से आदिति ने उसके परिवार के साथ दोस्ती किया था, वो विशाल को बेहद पसंद आया था।
अपने पिता के घर उन 10 महीनों के दौरान विशाल ने बहुत कोशिश किया था आदिति को सेक्सी कपड़े पहनाने की। जैसे की क्लीवेज दिखाने वाले ड्रेस, बदन पर खूब चिपके हुए चूड़ीदार ताकी उसकी फिगर का पता चल जाए। छोटी करती ताकी जब वो बैठे तो उसकी जांघों का आकार दिखे। कभी-कभी आदिति वैसे कपड़े पहन लेती थी उसको खुश करने के लिए। मगर ज्यादातर मना करती रहती थी क्योंकी उस घर में और भी मर्द थे। पर जब भी वो कोई ऐसी ब्लाउज पहनती जिसमें उसकी क्लीवेज दिखे तो यह जरूर खयाल रखती थी की उसका पल्लू क्लीवेज को अच्छी तरह से ढंक दे।
विशाल छुपकर उसको देखता था, जब वो खाना परोसती थी पूरे परिवार को। विशाल देखा करता था की कौन
कौन उसकी क्लीवेज को देखता है घर में? जब भी आदिति अपने ससुर या देवर या विशाल के बड़े भाई से बातें करती थी या किसी काम से उन लोगों का पास होती थी तो विशाल खास तौर से ध्यान से देखा करता था आदिति को की उन मर्दो में से कौन आदिति की तरफ ज्यादा देखता है, और उसके जिश्म पर किस तरफ देखता
जब विशाल काम पर होता था तो अक्सर सोचा करता था की क्या पता इस वक्त आदिति घर में किसी के साथ होगी, उसके (विशाल के) पिता के साथ? राकेश के साथ या फिर दीपक के साथ। और रात को जब भी वो ।
आदिति के साथ सेक्स करता तो दिमाग में यही दृष्य देखता की कोई और मर्द उससे कर रहा है। विशाल खुद अपने मन में खुद को अपना बाप या अपना बड़े भाई समझकर आदिति को चोदता था और उसको बड़ा मजा आता था वैसे सोचकर चोदते हए। मगर तब विशाल ने इस बारे में आदिति को कुछ भी नहीं कहा था, सिर्फ अपने दिमाग में ऐसा सोचता था। आदिति को उन 10 महीनों में कुछ नहीं पता था जब विशाल के पिता के घर में रहते थे।
जब कभी भी दिन में वो आदिति को अपने पिता के साथ या राकेश के साथ देखता तो उस मौके को इश्तेमाल करता। अपने दिमाग में अपनी तरफ से कुछ चढ़ा-बढ़ाकर एक सिचुयेशन बनाता अपने जेहन में तब आदिति से सेक्स करता था। जैसे एक बार विशाल ने देखा था की उसका पिता आदिति से टीवी देखते वक्त छेड़खानी कर रहा था एक सीरियल देखते वक्त। आदिति और लीना एक सोफे पर बैठे हुए थे, विशाल के पापा वहीं थे और वो मसकरी कर रहा था और आदिति और लीना हँसे जा रहे थे। उस वक़्त विशाल अपने कमरे के दरवाजे के पीछे खड़ा देख रहा था आदिति और अपने डैडी को।
विशाल ने एक पोजीशन लिया ज्यादा देखने के लिए। क्योंकी वोही वक्त था की आदिति सबको दूध देने जाती
थी। क्योंकी हार रात को आखिरी सर्विंग वही करती थी सबको अपने-अपने ग्लास दूध देकर। आदिति उस वक़्त एक साड़ी में थी और ब्लाउज़ काफी टाइट थी, और क्लीवेज नजर आ रहे थे, तो विशाल देखना चाहता था की जब वो दूध का ग्लास देगी उसके बाप को तो कैसे देगी? और क्या उसका बाप आदिति की क्लीवेज को देखेगा या नहीं? इस इंतेजार में विशाल खड़ा देखे जा रहा था। उसके डैड को दूध देने के बाद आदिति राकेश को भी दूध देने जाती थी।
विशाल सब देखने के लिए खड़ा था दरवाजे के पीछे अपने रूम में। विशाल हर रात और दिन को ऐसा करता था,
छुपकर आदिति को देखा करता था, इंतेजार में था की कब उसके घर का कोई मर्द आदिति के जिश्म को देखे। पर आदिति को कुछ भी पता नहीं था की विशाल उसको वैसे देखता है हमेशा से।
उस रात को जब आदिति दूध वाली ट्रे लेकर आई तो लाउंज की बीच वाली छोटी मेज पर झुक कर रखा। और जो चीज पहले नजर आया विशाल को वो थे आदिति के लंबे बाल, जो उसके झुकने की वजह से आगे की तरफ आ गये थे और उसके बालों से उसकी क्लीवे
ल ने अपनी नजरों को अपने पिता पर किया तो देखा की उस समय उसके पिता आदिति को मुश्कुराते हुए देख रहे थे। तब विशाल ने अपने बड़े भाई की तरफ अपनी आँखें की और देखा की वो आरोवई खेल रहा था। मगर जिस वक्त आदिति ने दूध की ट्रे मेज पर रखा उसने भी आदिति की तरफ देखा एक बार, और दीपक लैपटाप पर गेम खेलने में बिजी था।
तब आदिति ने गर्दन हिलाकर अपने बालों को पीछे किया और सीधा खड़ी हो गई, अपने दोनों बाजुओं को ऊपर उठाकर बाल को पीछे के तरफ करके बाँधने लगी। उस समय उसकी बाजू के नीचे कांख की जगह भीगी हुई थी, ब्लाउज़ पशीना से और विशाल के डैड उस भीगे हुए ब्लाउज़ को देख रहा था और राकेश भी, विशाल ने दोनों को
अच्छी तरह से देखा।
विशाल की नजरें उसके बाप और बड़े भाई पर काफी देर तक रही, वो चेक करना चाहता था की कुछ ऐसा वैसा होगा की नहीं? मगर कुछ भी नहीं हुआ। अब जब बाल बाँधने के बाद आदिति झुकी दूध का ग्लास उसके पिता को देने के लिए तो आदिति ने विशाल की तरफ पीठ किया हुआ था तो विशाल को कुछ नहीं दिखा, और ना ही वो अपने पिता की नजरों को देख सका की क्या वो आदिति की छाती को देख रहा था या नहीं?
और जब आदिति ने दूध दे दिया। फिर से खड़ी हुई तो एक मुश्कान थी उसके चेहरे पर और नीचे वाले उसके होंठ दाँतों तले दबे हुए थे। तब वो राकेश की तरफ जाने लगी दूध देने को। विशाल को बड़ी बेचैनी हुई की वो कुछ नहीं देख पाया। मगर अब राकेश को देखने के लिए तैयार हो गया। अब, जब आदिति चलने लगी राकेश के तरफ जाने के लिए तो विशाल ने फिर अपने डैड को देखा की क्या वो आदिति को देख रहा है? और हाँ वो आदिति को जाते हुए देख रहा था।
उस वक़्त आदिति का पीठ उसकी नजरों के सामने थी। और जो बाप को नजर आया वो थी आदिति के चूतड़, चलते वक्त उसका मटकना, और उसके बाल इस तरफ से उस तरफ हिलते हुए, उसकी चाल के जोर पर। बाप दूध का ग्लास मुँह से लगाए हुए आदिति की गाण्ड को देख रहा था। यह विशाल ने देखा। अब विशाल यह । सोचने लगा की क्यों जिस वक्त उसने उसके पिता को दूध दे दिया तो मुश्कुरा रही थी और होंठ को दाँतों के नीचे दबाया था आदिति ने। क्या उसके पिता ने आदिति को कुछ कहा था? क्या उसने कहीं छुआ आदिति को?
क्या उसने कोई तारीफ की आदिति की? क्या उसने उसके क्लीवेज को देखकर कुछ कहा उससे? यह सोचकर विशाल का लण्ड खड़ा हो गया और उसको रात को चोदने के लिए दिमाग में इमेज आ गया की क्या सोचकर
आदिति से सेक्स करेगा उस रात को।
जब आदिति राकेश को ग्लास दे रही थी, झुकी हुई तो थी मगर उसका एक हाथ उसकी छाती पर था क्लीवेज को ढंकने के लिए। पर राकेश की आँखें वहीं पर थीं विशाल ने नोट किया।
उस रात को विशाल ने आदिति के साथ सेक्स किया तो दिमाग में अपने पिता और राकेश को सोचते हुए किया। उसने ऐसा सोचा कीदूध देते वक्त उसके पिता ने उसकी क्लीवेज को छुआ, इसीलिए वो शर्माकर हँसी थी और होंठों को दबाया था। और राकेश को दूध देते वक्त आदिति ने क्लीवेज पर हाथ नहीं रखा था। राकेश को सब नजर आया था और उसने आदिति का हाथ पकड़कर अपने तरफ खींचा था। ऐसा कुछ सोचकर विशाल ने
आदिति से सेक्स किया था उस रात, जैसे की राकेश और उसका बाप आदिति के साथ कर रहे हैं।
ऐसा सोचने से उसको बड़ा मजा आता था, और उसका लण्ड जमकर खड़ा रहता था सेक्स करने के बाद भी।
आदिति को कुछ भी पता नहीं था इन सबके बारे में। वो बस समझती थी की नार्मल चुदाई हो रही है। उसको कुछ नहीं पता था की विशाल के दिमाग में क्या-क्या चलता रहता है?
शुरू में आदिति चुदाई के मामले में बिल्कुल अनाड़ी थी। अपने आप में बंद थी, छूना मुश्किल था उसे, छूने भी नहीं देती थी ठीक से। मगर धीरे-धीरे कुछ दो महीनों के बाद उसने अपने आपको समर्पण किया सही माने में, तब खुद सेक्स को एंजाय करने लगी। शादी के बाद के पहले दो महीने विशाल ने सिर्फ खुद को खुश करने के लिए उसको चोदा था, आदिति को कोई आर्गेज्म कुछ नहीं हुई थी। उसको तो कुछ पता ही नहीं था क्या होता है सेक्स करना? पर धीरे-धीरे विशाल ने उसको समझाया की सेक्स करते वक्त उसको भी मजा आना चाहिए। उसके जिश्म में एक आग सी लगनी चाहिए वगैरा वगैरा।
विशाल आदिति का सेक्स टीचर था रातों को बेड पर, और यही चाहा था विशाल ने। और वैसे सेक्स करते हुए तीसरा महीना चला तो एक रात को करते वक्त आदिति ने अपने नाखून को जोर से गड़ाया विशाल के कंधों पर
और सिसकियों के साथ थोड़ी सी आवाज निकाली- “ओहह नम्म्म... आआआ...” करने लगी।
विशाल को समझ में आ गया की यह उसकी आदिति की पहली आर्गेज्म है, और अपने लण्ड को उसकी चूत के अंदर बरकरार रखा, और अपनी उंगलियों को चूत के ऊपरी हिस्से पर हौले-हौले मसलने लगा। जब आदिति जोश में आई तो विशाल के कंधों पर अपने दांतों को गाड़ते हए काटकर लाल कर दिया और उसकी जिश्म एक साँप की तरह रेंगने लगी, और जोरों से हाँफते हुए आदिति ने- “आऽऽ उफफ्फ... उईई माँ.” करती गई। वो पहली रात थी जब आदिति को पता चला था की जिश्म का मजा क्या होता है, और उस मजे को पाने के लिए ही चोदा जाता है।
विशाल और आदिति मूव
जल्द ही दोनों एक नये फ्लैट में आ गए और नये तरीके से बिना किसी परिवार मेंबर के जिंदगी जीने लगे, सिर्फ पति और पत्नी। शुरू में कुछ अजीब लगा वैसे अकेले जीने में, मगर धीरे-धीरे आदत पड़ गई। सब कुछ खामोश, सुनसान था और बहुत आराम और सुकून मिल रहा था वैसे जीने में।
और यही वक्त था जब विशाल, आदिति के दिल-ओ-दिमाग में अपनी फँटसीस को पूरा करने की शुरुवात करने का डिसाइड किया। जबसे शादी हुई थी, तब से अब तक विशाल ने आदिति को कुछ नहीं बताया था अपनी फँटसीस के बारे में। मगर इतने दिनों में विशाल ने आदिति को सेक्स का आदि बना दिया था और हर रोज
सेक्स करता था। शादी की पहली रात से लेकर अब तक, कभी भी मिस नहीं किया था चोदने को। जब आदिति को पीरियड्स होते थे तब विशाल उसके चूतरों के बीच में अपने लण्ड रगड़कर वीर्य वहाँ छोड़ता था।
अपनी तसल्ली के लिए और आदिति को समझाने के लिए की कहीं भी उसके जिश्म पर वो कर सकता है और अपने आपको खुश कर सकता है। विशाल ने बड़े आराम से, बहुत वक्त लिया आदिति को सेक्स की दुनियां में डूबोने को और उसको भी सेक्स को पसंद करने और एक बहुत अहम जरूरतमंद चीज साबित करने के लिये।
आदिति को उसने अपनी तरह से किस करना सिखाया। विशाल खुश था की आदिति बहुत जल्द सीख लेती थी और बिल्कुल उसकी जरूरत के मुताबिक वैसे ही करती थी जैसे वो चाहता था। जैसे की किस करते वक्त वो चाहता था की अपनी जीभ आदिति के मुँह में डाले और वो उसकी जीभ को चूसे और उल्टा आदिति भी अपना जीभ विशाल के मुँह में डाले और वो उसको चूसे।
बहुत सारी लड़कियां यह करने से मना करती हैं। सिर्फ ऊपर-ऊपर होंठों को चूमती रहती हैं। मगर आदिति सब सीख गई और सेक्स के दौरान अपने आप ही वैसे किस करती, और विशाल के जिश्म के ऊपर भी चारों तरफ किस करती और दाँत भी काटती थी। विशाल के गले पर अक्सर लोव बाइट्स हआ करते थे जो आदिति ने किए हुए थे सेक्स के दौरान।
अपने ससुर के घर में आदिति हमेशा चूड़ीदार या साड़ी में रहती थी। आदिति की फिगर बहुत दिलचस्प थी, बहुत खूबसूरत मुश्कान और बहुत हसीन गोरा रंग और एक जान वा नजरें थी उसकी। उसकी आवाज एक और चार चाँद लगाने वाली बात थी उसमें। बस जिस तरह से वो बात करती थी, और जिस तरह से आदिति ने उसके परिवार के साथ दोस्ती किया था, वो विशाल को बेहद पसंद आया था।
अपने पिता के घर उन 10 महीनों के दौरान विशाल ने बहुत कोशिश किया था आदिति को सेक्सी कपड़े पहनाने की। जैसे की क्लीवेज दिखाने वाले ड्रेस, बदन पर खूब चिपके हुए चूड़ीदार ताकी उसकी फिगर का पता चल जाए। छोटी करती ताकी जब वो बैठे तो उसकी जांघों का आकार दिखे। कभी-कभी आदिति वैसे कपड़े पहन लेती थी उसको खुश करने के लिए। मगर ज्यादातर मना करती रहती थी क्योंकी उस घर में और भी मर्द थे। पर जब भी वो कोई ऐसी ब्लाउज पहनती जिसमें उसकी क्लीवेज दिखे तो यह जरूर खयाल रखती थी की उसका पल्लू क्लीवेज को अच्छी तरह से ढंक दे।
विशाल छुपकर उसको देखता था, जब वो खाना परोसती थी पूरे परिवार को। विशाल देखा करता था की कौन
कौन उसकी क्लीवेज को देखता है घर में? जब भी आदिति अपने ससुर या देवर या विशाल के बड़े भाई से बातें करती थी या किसी काम से उन लोगों का पास होती थी तो विशाल खास तौर से ध्यान से देखा करता था आदिति को की उन मर्दो में से कौन आदिति की तरफ ज्यादा देखता है, और उसके जिश्म पर किस तरफ देखता
जब विशाल काम पर होता था तो अक्सर सोचा करता था की क्या पता इस वक्त आदिति घर में किसी के साथ होगी, उसके (विशाल के) पिता के साथ? राकेश के साथ या फिर दीपक के साथ। और रात को जब भी वो ।
आदिति के साथ सेक्स करता तो दिमाग में यही दृष्य देखता की कोई और मर्द उससे कर रहा है। विशाल खुद अपने मन में खुद को अपना बाप या अपना बड़े भाई समझकर आदिति को चोदता था और उसको बड़ा मजा आता था वैसे सोचकर चोदते हए। मगर तब विशाल ने इस बारे में आदिति को कुछ भी नहीं कहा था, सिर्फ अपने दिमाग में ऐसा सोचता था। आदिति को उन 10 महीनों में कुछ नहीं पता था जब विशाल के पिता के घर में रहते थे।
जब कभी भी दिन में वो आदिति को अपने पिता के साथ या राकेश के साथ देखता तो उस मौके को इश्तेमाल करता। अपने दिमाग में अपनी तरफ से कुछ चढ़ा-बढ़ाकर एक सिचुयेशन बनाता अपने जेहन में तब आदिति से सेक्स करता था। जैसे एक बार विशाल ने देखा था की उसका पिता आदिति से टीवी देखते वक्त छेड़खानी कर रहा था एक सीरियल देखते वक्त। आदिति और लीना एक सोफे पर बैठे हुए थे, विशाल के पापा वहीं थे और वो मसकरी कर रहा था और आदिति और लीना हँसे जा रहे थे। उस वक़्त विशाल अपने कमरे के दरवाजे के पीछे खड़ा देख रहा था आदिति और अपने डैडी को।
विशाल ने एक पोजीशन लिया ज्यादा देखने के लिए। क्योंकी वोही वक्त था की आदिति सबको दूध देने जाती
थी। क्योंकी हार रात को आखिरी सर्विंग वही करती थी सबको अपने-अपने ग्लास दूध देकर। आदिति उस वक़्त एक साड़ी में थी और ब्लाउज़ काफी टाइट थी, और क्लीवेज नजर आ रहे थे, तो विशाल देखना चाहता था की जब वो दूध का ग्लास देगी उसके बाप को तो कैसे देगी? और क्या उसका बाप आदिति की क्लीवेज को देखेगा या नहीं? इस इंतेजार में विशाल खड़ा देखे जा रहा था। उसके डैड को दूध देने के बाद आदिति राकेश को भी दूध देने जाती थी।
विशाल सब देखने के लिए खड़ा था दरवाजे के पीछे अपने रूम में। विशाल हर रात और दिन को ऐसा करता था,
छुपकर आदिति को देखा करता था, इंतेजार में था की कब उसके घर का कोई मर्द आदिति के जिश्म को देखे। पर आदिति को कुछ भी पता नहीं था की विशाल उसको वैसे देखता है हमेशा से।
उस रात को जब आदिति दूध वाली ट्रे लेकर आई तो लाउंज की बीच वाली छोटी मेज पर झुक कर रखा। और जो चीज पहले नजर आया विशाल को वो थे आदिति के लंबे बाल, जो उसके झुकने की वजह से आगे की तरफ आ गये थे और उसके बालों से उसकी क्लीवे
ल ने अपनी नजरों को अपने पिता पर किया तो देखा की उस समय उसके पिता आदिति को मुश्कुराते हुए देख रहे थे। तब विशाल ने अपने बड़े भाई की तरफ अपनी आँखें की और देखा की वो आरोवई खेल रहा था। मगर जिस वक्त आदिति ने दूध की ट्रे मेज पर रखा उसने भी आदिति की तरफ देखा एक बार, और दीपक लैपटाप पर गेम खेलने में बिजी था।
तब आदिति ने गर्दन हिलाकर अपने बालों को पीछे किया और सीधा खड़ी हो गई, अपने दोनों बाजुओं को ऊपर उठाकर बाल को पीछे के तरफ करके बाँधने लगी। उस समय उसकी बाजू के नीचे कांख की जगह भीगी हुई थी, ब्लाउज़ पशीना से और विशाल के डैड उस भीगे हुए ब्लाउज़ को देख रहा था और राकेश भी, विशाल ने दोनों को
अच्छी तरह से देखा।
विशाल की नजरें उसके बाप और बड़े भाई पर काफी देर तक रही, वो चेक करना चाहता था की कुछ ऐसा वैसा होगा की नहीं? मगर कुछ भी नहीं हुआ। अब जब बाल बाँधने के बाद आदिति झुकी दूध का ग्लास उसके पिता को देने के लिए तो आदिति ने विशाल की तरफ पीठ किया हुआ था तो विशाल को कुछ नहीं दिखा, और ना ही वो अपने पिता की नजरों को देख सका की क्या वो आदिति की छाती को देख रहा था या नहीं?
और जब आदिति ने दूध दे दिया। फिर से खड़ी हुई तो एक मुश्कान थी उसके चेहरे पर और नीचे वाले उसके होंठ दाँतों तले दबे हुए थे। तब वो राकेश की तरफ जाने लगी दूध देने को। विशाल को बड़ी बेचैनी हुई की वो कुछ नहीं देख पाया। मगर अब राकेश को देखने के लिए तैयार हो गया। अब, जब आदिति चलने लगी राकेश के तरफ जाने के लिए तो विशाल ने फिर अपने डैड को देखा की क्या वो आदिति को देख रहा है? और हाँ वो आदिति को जाते हुए देख रहा था।
उस वक़्त आदिति का पीठ उसकी नजरों के सामने थी। और जो बाप को नजर आया वो थी आदिति के चूतड़, चलते वक्त उसका मटकना, और उसके बाल इस तरफ से उस तरफ हिलते हुए, उसकी चाल के जोर पर। बाप दूध का ग्लास मुँह से लगाए हुए आदिति की गाण्ड को देख रहा था। यह विशाल ने देखा। अब विशाल यह । सोचने लगा की क्यों जिस वक्त उसने उसके पिता को दूध दे दिया तो मुश्कुरा रही थी और होंठ को दाँतों के नीचे दबाया था आदिति ने। क्या उसके पिता ने आदिति को कुछ कहा था? क्या उसने कहीं छुआ आदिति को?
क्या उसने कोई तारीफ की आदिति की? क्या उसने उसके क्लीवेज को देखकर कुछ कहा उससे? यह सोचकर विशाल का लण्ड खड़ा हो गया और उसको रात को चोदने के लिए दिमाग में इमेज आ गया की क्या सोचकर
आदिति से सेक्स करेगा उस रात को।
जब आदिति राकेश को ग्लास दे रही थी, झुकी हुई तो थी मगर उसका एक हाथ उसकी छाती पर था क्लीवेज को ढंकने के लिए। पर राकेश की आँखें वहीं पर थीं विशाल ने नोट किया।
उस रात को विशाल ने आदिति के साथ सेक्स किया तो दिमाग में अपने पिता और राकेश को सोचते हुए किया। उसने ऐसा सोचा कीदूध देते वक्त उसके पिता ने उसकी क्लीवेज को छुआ, इसीलिए वो शर्माकर हँसी थी और होंठों को दबाया था। और राकेश को दूध देते वक्त आदिति ने क्लीवेज पर हाथ नहीं रखा था। राकेश को सब नजर आया था और उसने आदिति का हाथ पकड़कर अपने तरफ खींचा था। ऐसा कुछ सोचकर विशाल ने
आदिति से सेक्स किया था उस रात, जैसे की राकेश और उसका बाप आदिति के साथ कर रहे हैं।
ऐसा सोचने से उसको बड़ा मजा आता था, और उसका लण्ड जमकर खड़ा रहता था सेक्स करने के बाद भी।
आदिति को कुछ भी पता नहीं था इन सबके बारे में। वो बस समझती थी की नार्मल चुदाई हो रही है। उसको कुछ नहीं पता था की विशाल के दिमाग में क्या-क्या चलता रहता है?
शुरू में आदिति चुदाई के मामले में बिल्कुल अनाड़ी थी। अपने आप में बंद थी, छूना मुश्किल था उसे, छूने भी नहीं देती थी ठीक से। मगर धीरे-धीरे कुछ दो महीनों के बाद उसने अपने आपको समर्पण किया सही माने में, तब खुद सेक्स को एंजाय करने लगी। शादी के बाद के पहले दो महीने विशाल ने सिर्फ खुद को खुश करने के लिए उसको चोदा था, आदिति को कोई आर्गेज्म कुछ नहीं हुई थी। उसको तो कुछ पता ही नहीं था क्या होता है सेक्स करना? पर धीरे-धीरे विशाल ने उसको समझाया की सेक्स करते वक्त उसको भी मजा आना चाहिए। उसके जिश्म में एक आग सी लगनी चाहिए वगैरा वगैरा।
विशाल आदिति का सेक्स टीचर था रातों को बेड पर, और यही चाहा था विशाल ने। और वैसे सेक्स करते हुए तीसरा महीना चला तो एक रात को करते वक्त आदिति ने अपने नाखून को जोर से गड़ाया विशाल के कंधों पर
और सिसकियों के साथ थोड़ी सी आवाज निकाली- “ओहह नम्म्म... आआआ...” करने लगी।
विशाल को समझ में आ गया की यह उसकी आदिति की पहली आर्गेज्म है, और अपने लण्ड को उसकी चूत के अंदर बरकरार रखा, और अपनी उंगलियों को चूत के ऊपरी हिस्से पर हौले-हौले मसलने लगा। जब आदिति जोश में आई तो विशाल के कंधों पर अपने दांतों को गाड़ते हए काटकर लाल कर दिया और उसकी जिश्म एक साँप की तरह रेंगने लगी, और जोरों से हाँफते हुए आदिति ने- “आऽऽ उफफ्फ... उईई माँ.” करती गई। वो पहली रात थी जब आदिति को पता चला था की जिश्म का मजा क्या होता है, और उस मजे को पाने के लिए ही चोदा जाता है।