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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

कड़ी_14 विशाल घर वापस, फिर से हाट सेशन ।

ओम ने अपनी किस्मत दोबारा आजमाया अदिति से यह कहते हुए- “प्लीज... आप एक बार फिर से अपने पैर को ऊपर मेटल बार पर रखो ना मेडम... बहुत मजा आया था दिन में। एक बार और करो ना मेडमजी, मेरी आँखों को खुश कर दो ना अदिति जी। जी करता है आप मेरे करीब होती इस वक्त। पैर ऊपर करो ना प्लीज..."

अदिति- “यह तुम्हारे लिए एक खेल है क्या? इसीलिए कह रही हूँ की तुमको शादी कर लेना चाहिए अब। मैं क्यों तुम्हारी आँखों को खुश करूँ भला? शादी के बाद अपनी पत्नी से यही करने को कहना, वो तुमको खुश करेगी हिहिहीही..” और अदिति ने यह सब गुस्से में नहीं हँसते हुए कहा था ओम को।

ओम- “ओहह... तेरी, अब तो लगता है मेडमजी नाराज हो गई। पर दिन में तो आपने यह किया था जी...”

अदिति- “मुझे पता नहीं मैंने क्यों वैसा किया था दिन में, शायद मैं तुमको छेड़ना चाहती थी। मगर वो काफी था, और तुमको अब बिहेव करना होगा, वरना मैं तुमसे बात नहीं करूँगी। बाइ मेरा पति आ रहा है अब..." और अदिति ने फोन काट दिया।

ओम निराश हो गया और सोचा- “इन औरतों की क्या प्राब्लम है? कभी तो रिझाती हैं और कभी सीता बनने की ढोंग करती हैं। इसकी माँ की साली."

विशाल गेट के पास आया तो ओम ने गेट खोला विशाल की कार को अंदर आने के लिए, और ऊपर अदिति को सिर उठाकर देखा की वो विशाल को वेव कर रही है। अदिति ओम के चेहरे में देख रही थी और सोच रही थी

की शायद ओम को टेस पहुँची है, उसकी आखिरी लाइन से।

विशाल यह सोचते हुए की किससे अदिति बात कर रही थी, जल्दी से घर आया अदिति की एक्सप्रेशन्स पढ़ने के लिए। विशाल जैसे ही ऊपर गया, अदिति ने उसको जोर से बाहों में लेते हुए किस किया अपने पूरे जिश्म को उसके जिश्म से सटाते हुए। अदिति बहुत खुश दिख रही थी और खूब हँसमुख थी, और बहुत गरम दिख रही थी, विशाल को जैसे रिझा रही हो उस वक्त। विशाल को बहुत अच्छा लागा। मगर सोच रहा था किससे आखिर वो बात कर रही थी। उसने सोचा की वो कुछ भी नहीं पूछेगा, जब तक अदिति खुद नहीं बताती इस बात को। दोनों घर के अंदर गये, चौखट पर से एक दूसरे की कमर में हाथ डाले, एक पर्फेक्ट शादीशुदा कपल दिख रहे थे दोनों उस वक्त। कुछ बातें किए मियां बीवी ने और विशाल ने नोटिस किया की अदिति कुछ ज्यादा ही कामुक थी उस वक्त, जैसे उसी वक्त सेक्स करना चाहती हो।

कल रात वाली सेशन अभी तक बहुत जीवित थी दोनों के दिमाग में। दोनों की चाह उस वक्त वैसी ही थे सेक्स के बारे में। लगता था दोनों को बिस्तर पर तुरंत जाने का मन हो रहा था। जब विशाल नहाने गया तो उसका लण्ड जमकर खड़ा हुआ था और उसको मूठ मारने का मन किया, मगर अपने आपको रोका और अदिति के लिए बचाकर रखा लण्ड के पानी को।

डिनर टाइम हुआ तो अदिति लाउंज से किचेन आना जाना कर रही थी डिनर बनाते हुए। जबकी विशाल टीवी के

सामने बैठा अदिति को ध्यान से देखा रहा था। अदिति बहुत ही चंचल, सेक्सी, और हाट लग रही थी, जैसे तुरंत चुदवाना चाह रही हो। असल में वो अपनी उस चाल से विशाल को रिझा ही रही थी, अपनी जांघे और क्लीवेज को दिखाते हुए। और जब-जब वो विशाल के पास सोफे पर बैठ रही थी, तो जानबूझ कर अपनी स्कर्ट को ऊपर हो जाने देती थी विशाल को दिखाने के लिए। और विशाल के कंधों पर हर बार झुक जाती थी अपनी चूचियों को उसपर रगड़ते हुए।

विशाल इस इंतेजार में था की अदिति उसको बताएगी की किसी ने उसको फोन किया था, मगर कुछ नहीं बता रही थी अदिति। हालांकी के विशाल ने उससे फोन के बारे में बात भी किया।

अदिति ने डिनर सर्व किया और खाते वक्त दोनों ने ऐसे ही बातें किया। अदिति चुदासी ही लग रही तब भी, खूब हँस रही थी, चुलबुला रही थी, और बहुत खुश दिख रही थी। विशाल को लगा की कुछ तो गड़बड़ है और जानना चाहा की क्या बात थी। विशाल जानना चाहता था की किसने अदिति को फोन किया था मगर समझ में नहीं आता था उसको की कैसे पूछे? चो चाहता था अदिति खुद बताए।

जब अदिति बर्तन धो रही थी सिंक के पास डिनर के बाद तो विशाल ने उसको पीछे से पकड़ा अपने जिश्म को उसकी पीठ से दबाते हुए और अपनी जीभ को उसके गले के पीछे वाले हिस्से पर फेरते हुए चाटा।

अदिति ने मुश्कुराते हुए उसको अपने कहुनी से मारा यह कहते हुये- “सब्र करो अभी वक्त है.."

विशाल अदिति के कानों में बोला- “तुम बहुत ही सेक्सी लग रही हो आज...” और उसने अदिति के गले पर दाँत से काटा और उसके चूतड़ों पर हाथ से थपथपाते हुए वहाँ से निकला। जबकी अदिति ने उसको पानी फेंक के मारा।

विशाल सोफे पर बैठा, हाथ में एक मगजीन लिए अदिति का इंतेजार कर रहा था की वो आकर अपनी पसंदीदा

सीरियल देखे, और अब भी इंतेजार कर रहा था की अदिति उसको फोन के बारे में बताए।

जब अदिति उसके पास आकर बैठी तो खुद को उसकी छाती पर लगा लिया। अपनी उंगलियों को उसकी बाल भरी छाती पर फेरते हुए और पूछा- “तो आज दिन में तुमने मुझको कितना याद किया?"

 
विशाल ने उसके माथे को चूमते हुए कहा- “ओह गोड... तुमने एक पल भी मेरे दिमाग को अकेला नहीं छोड़ा

आज। पता है मैं सिर्फ और सिर्फ तुमको और कल रात के सेशन को सोचता रहा दिन भर आज। क्या तुमने भी वो सब सोचा आज? पक्का यकीन है की तुमने भी सब सोचा होगा, झूठ मत बोलना..."

अपने होंठों को दाँतों में चबाते हुए अदिति बोली- “बहुत अजीब था ना जिस तरह हम दोनों को आर्गेज्म हुवा कल रात को? तुम खुश थे जिस तरह सब गुजरा कल रात को?”

विशाल ने बहुत खुश होते हुए कहा- “बिल्कुल... हाँ, बहुत बहुत खुश हुआ था मैं जान, यू वेयर पर्फेक्ट और आई लव्ड इट हनी। मगर मुझको तुम सच-सच बताओ की तुमने भी उतना ही एंजाय किया था ना?"

अदिति ने हँसते हुए अपने चेहरे को उसके छाती पर छुपाया और कहा- “बहुत अजीब था मगर मैंने बेहद पसंद किया जो भी हुआ जैसे भी हुआ, बहुत ही एंजाय किया था.."

तब विशाल ने सोचा- "इसका मतलब यह हुआ की अदिति को आनंद को सोचकर करते हुए बहुत मजा आया। अगर इसने सब कुछ बहत एंजाय किया तो मतलब मेरे रंगों में रंगने लगी है मेरी अदिति भी...”

और ठीक उसी वक्त अदिति सोच रही थी की किस तरह ओम ने उसकी जांघों के बीच में देखने की माँग किया था। तभी यहाँ अदिति ने अपनी स्कर्ट को थोड़ा सा हटाते हुए विशाल की नजरों को देखा की क्या वो उसकी जांघों को देखता है या नहीं। और हाँ विशाल ने देखा और अपने हाथ को दोनों जांघों के बीच डाला और सहलाने लगा।

अदिति बोली- “तुम ओम को जानते हो, वो कांपाउंड के वाचमैन को?"

विशाल ने जांघों से हाथ हटाया, सीधा बैठा और जवाब दिया- “आफ कोर्स उसको जानता हूँ, तुमको कैसे पता

चला उसका नाम?"

अदिति विशाल की बेसब्री को देखते हुए हँसी और कहा- “हीहीहीही... क्यों तुम उठ बैठे ऐसे सैनिक की तरह? कल मैं माल गई थी थोड़ी देर के लिए, तो वो मुझसे मिला था और कहा की प्लम्बिंग और एलेक्ट्रिक के काम भी करता है वो, और घर में कुछ बिगड़े तो उसको काल करूँ। उसने अपना फोन नंबर भी दिया मुझे और मेरा नंबर लिया मुझसे...”

विशाल- “ओह्ह... अब समझा। तो फिर कल तुमने क्यों नहीं बताया मुझे की तुम माल गई थी?"

अदिति- “मौका ही कहाँ मिला तुमको बताने को कल? तुम्हारा दोस्त आया था और रात को क्या हुआ जानते ही हो। क्या उस खेल को खेलने के अलावा हमको कछ बातें करने का टाइम मिला था क्या कल?"

विशाल बहुत खुश था की अदिति ने उसको बता दिया वो बात। मगर वो यह भी चाहता था की अदिति उसको बताए की वो आज किसके साथ फोन पर बात कर रही थी। अदिति उसकी बाहों ही में थी और वो विशाल की छाती पर अपनी उंगलियों को फेर रही थी और उसकी चूचियां विशाल की छाती पर कसके दबी हुई थीं, कुचल रही थीं चूचियां विशाल की छाती पर।

विशाल को लगा कि अदिति को चुदने का मन कर रहा है तो पूछा- “तुम्हारा आनंदजी आज भी तुम्हारे बिस्तर

पर आएगा तुमसे मजा करने को?”

अदिति जोर से हँसी और उसकि छाती पर अपनी जीभ फेरते हुए कहा- “पता नहीं... यह तुम पर निर्भर करता है जो तुम चाहो...”

विशाल- “ओके तो आज कुछ अलग करते हैं.."

अदिति ने विशाल के चेहरे में देखते हुए पूछा- “क्या अलग?"

विशाल- “आज रात को तुम डिसाइड करो और बताओ की कौन तुम्हारे साथ होगा, जिसको ज्यादा पसंद करती हो सेलेक्ट करो, और बोलो मैं वही बन जाऊँगा आज...”

 


अदिति ने बचकानी आवाज में थोड़ा नखरों के साथ उसकी छाती पर घूसा मारते हुए कहा- “नहीं मैं नहीं, तुम्ही बताओ ना..."

और तभी अचानक अदिति ने कहा- “पता है आज ओम ने मुझको फोन किया था?”

विशाल को तब चैन आया और पूछा- “अच्छा और क्यों फोन किया उसने?"

अदिति- “मुझको उसने याद दिलाया की क्या-क्या काम करता है और चेक कर रहा था की हमने नंबर एक्सचेंज किए थे तो सही हैं या नहीं। बस यही.” मगर अदिति ने उन बातों को नहीं कहा जो ओम ने उसके साथ किया था।

विशाल ने खुद से कहा- “तो यह ओम से बात कर रही थी दिन में आज, जब मैं दूरबीन से देख रहा था, इसीलिए नीचे की तरफ देख रही थी। अब समझा मैं। हम्म... मगर इसने यह नहीं बताया की लंच टाइम के वक़्त किसने फोन किया था..."

तब विशाल ने पूछा- “कितने बजे ओम ने फोन किया था तुम्हें?”

अदिति- “दिन के लंच टाइम के वक़्त."

विशाल को मालूम हो गया की शाम वाली फोन टाक के बारे में नहीं बता रही है। अब विशाल का खड़ा हो चुका

था और उसने जोर से दबाया अपने लण्ड को उसकी जांघों पर। और लण्ड के ऊपरी हिस्सा को बाहर करके जांघों पर फेरा और पूछा- “बताओ जान कौन अपने लण्ड को तुम्हारी जांघों पर फेर रहा है अभी? किसको तुम्हारा जाँघ पसंद है?”

अदिति ओम का नाम लेने जा रही थी, क्योंकी ओम ने उसकी जांघों के बीच देखा था। मगर रुक गई और सिसकियों के साथ नखरे किए।

विशाल ने रगड़ना जारी रखा और उसके गाल, और गला चाटते हुए अदिति के मुँह तक गया और मुँह में मुँह डालकर दोनों एक जबरदस्त किस में खो गये कुछ देर तक। अदिति ने एक भूखी बिल्ली की तरह किस का जवाब दिया और उसके हाथ भी चलने लगे विशाल के जिश्म पर।

विशाल ने उसकी ब्लाउज़ को खोलते हुए कहा- “बोलो जानी कौन यह सब कर रहा है तुम्हारे साथ इस वक्त

ओम या आनंद?"

अदिति की साँसें भारी हो गई और हाँफते हुए जवाब दिया- “पता नहीं जान, जिसको भी तुम ठीक समझो। और अब बेड पर चलो ना ईसस्स्स्स ...”

तब तक दोनों बिल्कुल गरम हो गये थे और आक्सन के लिए तैयार थे। विशाल ने उसको अधनंगी बाहों में उठाया और किस करते हुए बेड की तरफ जाने लगा। जल्द ही अदिति बेड पर लेटा दी गई और विशाल ने

जल्दी से अपने कपड़े उतारे, और झट से अदिति की ब्रा निकाल फेंका, और उसकी स्कर्ट खींचकर उतारा और अपने सिर को उसकी जांघों के बीच डालकर उसकी पैंटी को चूमते हुए अपने दाँतों से उसको निकाल बाहर किया। तब तक अदिति अपने आपको खोने लगी थी, बेड पर कराहते हए, अपने जिश्म को साँप के जैसे रेंगते हुए विशाल के सिर के बालों को अपी मुट्ठी में नोच रही थी।

नीचे अदिति बिल्कुल गीली हो गई थी और विशाल ने उसके रस को चाटना शुरू किया। अदिति बेकाबू हो रही थी, वो बिल्कुल तैयार थी विशाल के लण्ड को अपने अंदर लेने के लिए। विशाल ने उसकी चूत में एक उंगली घुसाकर थोड़ा बहुत हिलाया और ऊपर सिर उठाकर अदिति को देखा। वो चिल्ला उठी और हाँफते हुए उसको चोदने को कहा, विशाल के दोनों हाथों को अपने पंजे में जकड़े हुए। विशाल उसपर चढ़ गया और अदिति के कानों में भुनभुनाया- “कौन आनंद या ओम? कौन तुम्हारी चूचियों को

चूस रहा है इस वक़्त? किसका लण्ड तेरे अंदर घुसने को तायार है नीचे जल्दी बता जान मेरी? किसको महसूस कर रही हो? किसके साथ ज्यादा जल्दी झड़ जाओगी बोलो...”

अदिति बेहाल थी और चिल्लाई- “आनंदजी ओह्ह... आनंदजी... हाँ आनंदजी हैं, मुझको खुश करो आनंदजी जल्दी करो, सब्र नहीं होता मुझसे। जल्दी करो मेरे साथ... कल रात को बहुत मजा आया आपके साथ... आनंदजी वैसे ही मुझको और खुश करो ना प्लीज़्ज़... इसस्स्स... आईईई... उफफ्फ...”

यह सुनकर और अदिति का हालत देखते हुए विशाल से रहा नहीं गया और अपने लण्ड को अंदर लूंस दिया और धक्के देने लगा एक के बाद एक ज्यादा जोर से। जबकी अदिति कराहने लगी काँपते हुए और ऐसी सिसकियां भरी आवाज निकाली उसने जिससे चोदने में विशाल का मजा दोगुना हो गया। फिर अदिति ऐसी जोश में आई, जैसे उसपर कोई भूत सवार है। उसने अपने जिश्म को हिलाते और रेंगते हुए विशाल के कंधों पर अपने नाखून को गड़ाते हुए उसके गले में एक वैम्पायर की तरह दाँत से काटा और चूसा उसके गले और छाती को।

फिर से कल रात की तरह ज्यादा वक्त नहीं लगा और दोनों जल्द ही आर्गेज्म पर पहुँचने लगे। दोनों की साँसें भारी हो गईं और हॉफते हुए अदिति चिल्लाई- “आहह... हाँ एस हाँ आनंदजी आई लाइक इट ओह माई गोड... इट्स सो नाइस आई लोव यू, लोव मी डियर आनंदजी... यू प्लीज में आ लाट बेबी डू इट हार्डर, हार्डर। ओह माई गोड... आई आम कम्मिंग... इसस्स्ह... आहह..” और अदिति ने अपनी चूचियों को विशाल की छाती से चिपकाते हुए उसके मुँह से जीभ का रस चूसने लगी, दिल की तेज धड़कनों के साथ।

विशाल भी दूसरे पल में गुर्रा उठा- “आघघ्य... ओहह... ओहह... इसस्स्स..” और पिचकारी मारा अपने लण्ड से

अदिति की चूत के ऊपर, पेट पर और चूचियों तक लथफथ कर दिया। कुछ देर बाद एक दूसरे को बाहों में लिए दोनों सपनों की दुनियां में खो गये।

 
कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
कड़ी_15 अदिति ने जानमरू ड्रेस पहनी

अदिति और विशाल के बीच वैसा खेल हर रात चलता रहा। दोनों रोल-प्ले खेला करते थे सेक्स करते वक्त, और अदिति को आदत हो गई, और हर रात को वो भी कुछ ना कुछ सोच ही लेती थी खेलने के लिए। वो भी रोल प्ले के बिना नहीं करना चाहती थी, क्योंकी रोल-प्ले करते वक़्त उसको भी ज्यादा मजा आने लगा था और वो बहुत ज्यादा उतेजित होती थी, और जिश्म में मस्ती ज्यादा तेज बढ़ती था खेलते वक्त। फिर भी दोनों के बीच

इस मामले में बात कम हुआ करती थी। मगर सिर्फ बेड पर सेक्स करते वक्त यह सब बातें होती थीं। अगर कभी दिन में विशाल बात को छेड़ता तो अदिति बात को बदलकर कुछ और बातें करने लगती थी।

मगर जब अदिति अकेली होती थी तब तो, इन्हीं बातों को ज्यादा सोचा करती थी, और गीली हो जाती। फिर करने को मन करता था उसका। दिन-बा-दिन उसको सेक्स करने का ज्यादा से ज्यादा मन करने लगा था, जितना पहले कभी भी नहीं हुआ था। और वो इसलिए था क्योंकी विशाल ने उसको उस तरह से तैयार किया था सेक्स के बारे में बढ़ावा देते हुए, और रोल-प्ले करते हुए।

जब कभी बाहर जाते थे सप्ताहांत में तो विशाल अदिति को सेक्सी ड्रेस पहनाता था। फिर अदिति पर दूसरे आदमियों की नजरों को ध्यान से देखा करता था। देखता था की कितने लोग अदिति को देखते हैं, और अदिति में इंट्रेस्टेड होते हैं। तब दोनों सभी देखने वालों में से किसी एक को सेलेक्ट करके रात को उसको रोल-प्ले में मुख्य पात्र बनाकर सेक्स करते थे। विशाल वो आदमी बनता था जो अदिति को सबसे ज्यादा सेक्सी नजरों से, ठरकीपने से देखा था बाहर।

मामूल तौर पर अदिति के कपड़े बहुत डीसेंट होते थे। फिर भी कुछ साड़ियां ऐसी थीं जो ट्रेंड और फैशन के हिसाब से स्लीवलेश और बैकलेश हआ करती थी, जिसमें उसकी बेदाग पीठ, कमर और नाभि नजर आती थी। मगर धीरे-धीरे विशाल ने उसके लिए छोटी स्कर्टस और टाइट वाली खरीदने लगा, जिसमें उसके चूतड़ों को आसानी से दिखाई देती थी, उसपर उसकी जांघों का ऊपरी सफेद, ज्यादा गोरा हिस्सा भी नजर आता था। वो हिस्से जो इतने सालों से ढके रहते थे और अब जब छोटी स्कर्ट पहनती थी तो उन छुपी हुए जांघों के वो भाग ज्यादा सफेद और गोरे दिखते थे, मामूल से ज्यादा।

उन हिस्सों को देखकर किसी का भी खड़ा हो जाता था, और बहत आकर्षक लगती थी अदिति। जब वैसी ड्रेस पहनती थी तो, उसको सिर्फ चोदने को मन करता था हर किसी को उसको वैसे देखकर। विशाल ने कुछ ऐसे ड्रेस भी खरीदे जिनमें अदिति की क्लीवेज भी ज्यादा दिखे और मन को डांवाडोल करे। खुद विशाल जब अदिति को उस ड्रेस में देखता था तो सबर नहीं कर पाता था। सेक्सी टी-शर्ट भी थे अदिति के, जिनमें कुछ स्लीवलेश थे बहुत सेक्सी स्ट्रैप्स वाले, जिसमें उसकी ब्रा की स्ट्रैप्स भी नहीं छिप सकती थी।

विशाल, अदिति से हमेशा कहता था की वो चाहता था की अदिति बहुत सेक्सी और हाट दिखे हमेशा और उसको अपनी पत्नी को वैसे देखना बहुत पसंद था। इसलिये अदिति अपने पति को खुश करने के लिए वैसी ड्रेस की और उसको नार्मल लगता था की एक पति अपनी पत्नी को वैसे कपड़ों में देखना चाहे।

आनंद और आदित्य अक्सर रोल-प्ले का हिस्सा रहते थे जिससे दोनों की सेक्स लाइफ पर चार चाँद लग जाती थी रातों को। एक रात को विशाल ने अदिति से कहा- “तुम अपनी तरफ से एक रोल-प्ले शुरू करो...”

विशाल ने कहा- “अदिति उस आदमी को लेकर रोल-प्ले शुरू करो जिससे उस रात को तुम करना पसंद करोगी और कहा की बीच में मैं कुछ नहीं बोलूंगा, अदिति को ही सब करना होगा..."

मगर अदिति बहत हिचकिचाती और माना करती थी, वैसा करने से, और कभी शुरू करती फिर रुक जाती और विशाल को ही चालू करने को कहती थी। तकरीबन हर रात को ऐसा ही गुजरता था दोनों के बीच। विशाल उन

लोगों से रोल-प्ले शुरू करता, जो लोग आस-पास रहते और दिखाई देते थे। रोल-प्ले में ऐसा मौका बनता थी की अदिति अकेली है और उन लोगों में कोई एक अदिति से किसी काम से मिलने आता है, जब वो घर पर अकेली होती है।

 
इस तरह से खेल शुरू करता था अक्सर। कभी अदिति शुरू करती और हँसने लगती, जोक्स मारती और रुक जाती। फिर विशाल जारी रखता था रोल-प्ले को जब तक दोनों बुरी तरह उसमें डूब नहीं जाते थे, और मसालेदार चुदाई से रोल-प्ले खतम होता था। मगर जब भी अदिति रोल-प्ले शुरू करती तो जरूर बीच में हँसने लगती थी,

और खेल को खराब कर देती थी। इसीलिए हर वक्त विशाल को ही करना पड़ता था, मगर अदिति बहुत ही अच्छी तरह से भाग लेती थी, जैसे सच में किसी से चुदवा रही हो।

फिर विशाल का बर्थ-डे आया। बर्थ-डे के एक दिन पहले अदिति ने विशाल से काम पर नहीं जाने को कहा उसके बर्थ-डे के दिन क्योंकी वो उसके साथ कहीं बाहर घूमने जाना चाहती थी उसके बर्थ-डे वाले दिन को।

मगर विशाल ने कहा- “मैं काम से छुट्टी नहीं ले सकता, क्योंकी वर्क प्रेशर बहुत ज्यादा था...” फिर भी अदिति से कहा- “अपने जनम दिन वाले दिन को 4:00 या 5:00 बजे वापस आने की कोशिश जरूर करूंगा। मगर तब अदिति ने कुछ ऐसा कह दिया जिसने विशाल को कुछ और सोचने पर मजबूर किया।

अदिति बोली- “क्यों ना चंद दोस्तों को बुलाएं और छोटी सी पार्टी दें?”

विशाल का गंदा दिमाग उल्टा सोचने लगा और सोचा की आनंद को एक ड्रिंक के लिए बुलाना बहुत मस्त रहेगा

उस दिन। फिर भी विशाल ने अदिति से पूछा- “किसको इन्वाइट करें?"

अदिति ने कहा- “अरे तुम्हारे भाइयों को, तुम्हारे डैड और बहन को तो बुला सकते हैं ना?"

रहते हैं और एक छोटी 2-3 घंटे की पार्टी के लिए उन लोगों को इतने मगर विशाल ने कहा- “वो ल दूर से डिस्टर्ब करना ठीक नहीं रहेगा...”

अदिति ने विशाल के चेहरे में देखा, चेहरा लाल हुआ, और शर्माई। फिर एक तरफ देखा और कहा- “तो फिर तुम्हारा दोस्त आनंदजी अपनी बीवी बच्चों के साथ तो आ सकता है ना?” लेकिन जिस वक्त अदिति ने आनंद का नाम लिया, वो बहत शर्माई और उसको लगा जैसे हर रात को आनंद उसके साथ ही सोता है और उसको चोदता है। क्योंकी हर रात को वो उन दोनों के खयाल में रहता है रोल-प्ले में।

विशाल उस वक्त अदिति के चेहरे में यही देखने की कोशिश कर रहा था, जब वो आनंद के बारे में बात कर रही थी तब। फिर अदिति को छेड़ते हुए विशाल ने कहा- “हम्म्म्म ... तो तुम अपने आनंदजी को यहाँ लाना

चाहती हो, हाँ...”

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अदिति ने घूसे से हल्के से विशाल के छाती पर मारा। क्योंकी उसको पता था की विशाल मजाक कर रहा है और उसको छेड़ रहा है।

विशाल ने अपने दिमाग में कुछ बड़ा प्लान बनाया। और उधर अदिति भी अपने दिमाग में कुछ और सोचने लगी, क्योंकी उन दोनों के लिए आनंदजी एक ऐसा जरूरी व्यक्ति था उनके सेक्स लाइफ के लिए की उसके बिना इन दोनों का सेक्स नहीं चलता था। रोल-प्ले के जरिये विशाल ने अदिति के मन में आनंद के लिए कुछ तो कर ही दिया था, और यही तो विशाल चाहता था। तब विशाल ने सोचा की अब वक्त आ गया था कुछ और ही ट्राई करने का। विशाल आनंद की वाइफ को नहीं इन्वाइट करना चाहता था, मगर सिर्फ और सिर्फ आनंद को, और आफिस में विशाल ने आनंद को इन्वाइट कर दिया कल के लिए।

सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट की प्राब्लम थी क्योंकी अगर पार्टी 10-11 बजे तक चलेगी तो आनंद पिएगा तो ड्राइव नहीं

कर पाएगा घर वापस जाने के लिए, तो एक टक्सी को भी कांटैक्ट किया गया उसको घर वापस छोड़ने के लिए।

दूसरे दिन विशाल ने आफिस में पर्मिशन लिया 4:00 बजे ही घर वापस जाने के लिए। उसने आनंद को याद दिलाया

खतम करने के बाद उसके घर आना है। घर वापस आते ही विशाल ने अदिति का हाथ बटाया स्नैक्स को तैयार करने में और लिकर वगैरा जो था उस मंगवाने के लिए सब सजाने सवारने में।

अब वक़्त था अदिति को अपना स्पेशल ड्रेस पहनने का। विशाल चाहता था की वो हाट और सेक्सी लगे। फिर विशाल को हैरानी हुई की अदिति ने उसका पसंद किया ड्रेस पहनने से इनकार नहीं किया यह जानते हुए की आनंद आने वाला है। विशाल ने सोचा था की अदिति उस ड्रेस को पहने से इनकार करेगी आनंद के सामने। क्योंकी उसमें उसके जिश्म का बहुत हिस्सा नजर आता है। मगर अदिति ने यह जानते हुए की आनंद उन दोनों के बीच होगा थोड़ी देर में। वो फिर भी उस ड्रेस को पहनने को तैयार थी।

विशाल बहुत खुश हुआ जब अदिति उस ड्रेस को पहनने को राजी हुई तो, और सोचा की क्यों और कैसे अदिति उस ड्रेस को पहनने को तैय्यार हुई, यह जानते हुए की आनंद आने वाला है। सब रोल-प्ले का असर था विशाल ने सोचा। वो ड्रेस उसके घुटने तक ही आती है और जब वो बैठेगी तो उसकी जाँघ का ऊपर वाला हिस्सा दिखेगा। ऊपर कंधों पर स्ट्रैप्स थे, तो उसकी ब्रा की स्ट्रैप्स भी नजर आती थी, और लार टपकाने वाला क्लीवेज भी।

विशाल खुशी से आनंद का आने का इंतेजार करने लगा जब। अदिति ने इस ड्रेस को पहन लिया और दोनों छत

पर चले गये आनंद की राह देखने।

***** **** *
 
U[date _16 अदिति और विशाल इंतेजार में आनंद के

विशाल यह सोचते हुए बहुत खुश था की आनंद, अदिति को उस ड्रेस में देखकर कैसा रिएक्ट करेगा? वो सोच रहा था की 4-5 घंटे जो आनंद यहाँ बिताएगा उस दौरान कितनी बार अदिति को कुछ ऐसे मूव्मेंट्स करने पड़ेंगे, जिससे उसके जिश्म के गुप्त हिस्से नजर आएंगे और आनंद कितना मजा लेते हुए अदिति को नजरों से खेएगा और विशाल कितना मजा लेते हुए सब देखेगा।

दोनों छत की मेटल रेलिंग पर हाथ रखकर झुके हुए नीचे गेट की तरफ देख रहे थे आनंद का इंतेजार करते हुए,

और नीचे से ओम अदिति को ऐसे ड्रेस में देखकर बौखला सा गया। अब ऐसी ड्रेस में उसको देखकर कौन पागल नहीं होगा।

हालांकी अदिति अपने पति के साथ थी। ओम अदिति को देखता रहा था नीचे से। सिर झुकाते हुए ओम ने

अदिति को सल्यूट जैसा किया।

विशाल ने अदिति के कान में भुनभुनाते हुए कहा- “देखो तुम्हारा नया बायफ्रेंड तुमको देख रहा है नीचे से..."

अदिति ने विशाल को अपने पंजे से मारा उसकी पीठ पर। अब ओम को नीचे देखकर अदिति ने थोड़ा शैतानी करने को सोचा, तो उसने अपनी एक टांग को जानबूझ कर रेलिंग के ऊपर रखा। ओम यही तो रिक्वेस्ट कर रहा था उससे कल दिन में करने के लिये। अब यह ड्रेस तो घुटनों के ऊपर तक ही है, तो जब अदिति ने पैर उठाकर रेलिंग के ऊपर रखा तो सोचना चाहिए की नीचे ओम को क्या नजारा देखने को मिल रहा था?

विशाल को उस बारे में कुछ भी पता नहीं था की अदिति क्या कर रही है। अदिति उस वक़्त जैसे हर वाइफ लोग किया करते हैं, कभी विशाल के बाजू को पकड़कर अपना सिर उसके कंधे पर रखती थी, तो कभी उसके बालों में उंगली फिराती या कभी उसके बाजू में अपनी बाहें डालती। मगर यह सब करते वक़्त उसका एक पैर रेलिंग पर ही रहा। ओम नीचे से अपनी नजरों को नहीं हटा सका, देखता ही गया ऊपर अदिति के जांघों के बीच, और ओम को सिर्फ जांघे नहीं दिखाई दी, बल्की अदिति की पैंटी भी साफ दिखती रहे।

ओम का जमकर खड़ा हो गया था, और उसकी समझ में नहीं आ रहा था की कैसे मनेज करे? क्योंकी बाहर सबके सामने खड़ा था उस वक्त वो। अब अदिति को लगातार भी नहीं देख सकता था, क्योंकी विशाल साथ में था तो ओम अपने छोटे गेट केबिन में गया आराम के लिए अपने लण्ड को सीधा करने। फिर तुरंत बाहर निकला अदिति की सफेद, गुलाबी जांघों का नजारा लेने और उसकी सफेद पैंटी को देखने, जो जांघों के बीच चूत को कसके दबाए हुए थी। ओम ने उसकी जांघों के बीच देखते हुए अदिति के चेहरे में देखा। और अदिति ने भी एक शैतानी मुश्कान से ओम को देखते हुए एक आँख मारी उसे। ओम पागल हो रहा था मगर कर भी सकता था उस वक़्त ?

विशाल अदिति से पूछना चाहता था की कैसे वो उस ड्रेस को पहनने के लिए तैयार हो गई? जबकी उसको मालूम था की आनंद आने वाला है। मगर फिर विशाल ने सोचा की वैसा पूछने से कहीं अदिति आनंद के आने से पहले ड्रेस को चेंज नहीं कर ले, इसलिए नहीं पूछा। वो चाहता था की आनंद अदिति को ऐसे ही देखे जैसे दिख रही है इस ड्रेस में।

विशाल ने सोचा- “हो सकता है की अब अदिति को मेरी तरह ीक्षायें होने लगी हों उसको भी। और मुझको खुश करने के लिए हो सकता है अदिति आनंद को सिड्यूस करेगी अपने तरीके से। मुझे अदिति से बात करने का मन कर रहा है की उसको बताऊँ के किस तरह से वो आनंद से बात करें? किस तरह से उसके सामने पेश आए? उसको कहना चाहता हूँ की आनंद के सामने अपनी ड्रेस को थोड़ा ज्यादा ऊपर करे, और अपने ड्रेस की स्ट्रैप को बाहों पर फिसलने दें, जब वो हम दोनों के बीच होगी तब। मगर अब कुछ नहीं कहूँगा, मैं देखना चाहता हूँ की कहाँ तक अदिति अपने आप यह सब कुछ करती है। किस हद तक अदिति जा सकती है बिना मेरा कहे वो देखना है आज। मैं यह भी देखना चाहता हूँ की हमारे रोल-प्ले ने कितना असर किया है अब तक उसपर?”

विशाल ने अदिति से कहा- “अब तक आनंद को आ जाना चाहिए था। ही इज लेट...”

अदिति ने ओम को देखते हुए कहा- “उसको फोन करके क्यों नहीं पूछ लेते हो की कहाँ है?"

विशाल- "ड्राइव कर रहा होगा, क्यों ना हम नीचे गेट के पास चलें उसको पार्किंग करना पड़ेगा वहीं उसका स्वागत करें?"

ओम को नीचे देखते ही अदिति खुशी से बोली- “हाँ, ये बहयत अच्छा आइडिया है। चलो नीचे चलते हैं गेट के पास..”

मगर तभी दोनों ने देखा की आनंद की कार गेट में घुस रही है। अदिति ओम को जलना चाहती थी इसीलिए नीचे जाना चाहती थी मगर। वापस अंदर जाने से पहले अदिति ने छुपकर ओम को वेव क्या तब वापस अंदर गई। ओम खुशी से मुश्कुराया अदिति की वेव देखकर।

अब विशाल लिफ्ट के पास जाकर आनंद का इंतेजार करने लगा, जबकी अदिति चौखट पे इंतेजार कर रही थी, उसके चौखट से दूर नहीं थी, लिफ्ट एक दूसरे को देख सकते थे दोनों। अदिति की आँखें लिफ्ट के दरवाजे पर थी। आनंद को बाहर आने के लिए देख रही थी जबकी विशाल वहाँ से अदिति को देख रहा था।

विशाल ने अदिति को वैसे चंचल देखते हुए सोचा- “बहुत खुश लग रही है आनंद को रिसीव करने के लिए। उसके सपनों का सेक्स का राजकमार। अदिति ने ही मझको प्रपोज किया की आनंद को इन्वाइट करूँ आज। उसने वाइफ के साथ आने को कहा था मगर अदिति को पहले से जरूर मालूम हो गया होगा की मैं उसको अकेले बुलाऊँगा, तो बहुत खुश लग रही है अब। मुझे थोड़ा पीछे रहकर देखना होगा की कैसे आनंद को किस करती है और आनंद का हाथ उसके जिश्म के किस हिस्से पर जाएगा किस करते वक्त? पिछली बार आनंद ने अपनी उंगलियों को अदिति की कमर पर फेरा था। आज मुझे बहुत कुछ देखना है। छुपकर भी देखना पड़ा तो देखूगा आज तो। ओह माई गोड... मेरा तो अभी से ही खड़ा हो गया.”

हाँ यह सब सोच-सोचकर विशाल बहुत उत्तेजित हो रहा था उर जमकर खड़ा हो गया था उसका। वो बेहद खुश था की उसको आज ऐसा मौका मिल रहा है अदिति को किसी गैर मर्द के साथ देखने को। मगर अभी कुछ तय नहीं था की किसी एक को दूसरे की तरफ बढ़ना है या नहीं। अभी सब कुछ नार्मल चल रहा था। सिर्फ विशाल के दिमाग के अंदर कुछ पक रहा था। मगर कौन यह जान सकता है की उस वक्त अदिति के दिमाग में क्या था? क्यों वो उस ड्रेस को पहनने के लिए तैयार हुई? क्या उसको पता नहीं था की उस ड्रेस में वो कितनी हाट और सेक्सी दिखती है? क्या उसको मालूम नहीं है की उसकी जांघे कितनी नजर आएंगी जब वो आनंद के सामने बैठेगी? क्या वो जानती नहीं थी की उसकी चूचियां लटक जाएंगी जब वो कुछ सर्व करेगी आनंद को? क्या अदिति को पता नहीं था की उसकी क्लीवेज कितनी दिखती है इस ड्रेस में?

 
अदिति सब बहुत अच्छी तरह से पता है, फिर भी वो तैयार हुई इस ड्रेस को पहनने को, और पिछली बार सिर्फ पल्लू सरकाने को मना किया था। तो क्या पिछली बार से अब तक अदिति में कोई बदलाव आया है? अगर हाँ तो क्यों? हर रोज के रोल-प्ले वजह था क्या? या अदिति की कुछ स्पेशल फीलिंग्स है आनंद के लिए मगर वो विशाल से छपाती है? किसको इस बारे में कभी पता होगा?

लिफ्ट रुकी और आनंद बाहर निकला। विशाल ने बाहों को खोला और आनंद और विशाल ने एक दूसरे को गले लगाया और अदिति अपने चौखट से दोनों को मुश्कुराते हुए देखती रही। विशाल ने अपने कदम को थोड़ा रोका, और आनंद को आगे जाने दिया। जब वो अदिति की तरफ बढ़ने लगा तो अदिति को सिर से पैर तक खुशी से देखते हुए एक बार आनंद मुड़कर विशाल को देखने जा रहा था।

तभी अदिति ने कहा उसको “हेलो" तो आनंद ने सामने अदिति को देखते हुए अपने कदमों को तेज किया। अदिति ने आनंद के कंधों के ऊपर से विशाल को देखा। और विशाल तो तो उस वक्त आनंद को देख रहा था, खास कर उसके हाथ को की वो कहाँ-कहाँ छुएगा उसकी पत्नी को। और जैसे ही आनंद अदिति की चौखट के करीब पहँचा, अदिति दो कदम पीछे हटकर घर के अंदर चली गई और आनंद के कदम भी चौखट के अंदर गये और उसने अपनी दोनों बाहों को ऊपर उठाते हुए अदिति को हग किया।

विशाल को कदमों की रफ़्तार बढ़ाना पड़ा वहाँ तक पहुँचने के लिए। उसने सोचा भी नहीं था की वह दोनों अंदर चले जाएंगे। उसने सोचा था की चौखट पर ही हग और किस करेंगे और उसको सब दिखेगा। मगर यहाँ उल्टा हो रहा था। वो तेजी के साथ आया अपने घर की चौखट तक, मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चंद सेकेंड में एक हग और गाल पर एक किस पूरा हो जाता है। आनंद ने अपने सिर को झुकाया, जबकी अदिति ने अपना सिर ऊपर उठाते हुए आनंद के गालों पर किस किया। जबकी आनंद का हाथ अदिति के नंगी कंधे पर गया और ब्रा की स्ट्रैप्स को छुआ और दूसरा हाथ अदिति के कमर पर था।

जिस वक्त आनंद की उंगलियां उसके नंगे कंधे और ब्रा की स्ट्रैप पर पड़ी तो अदिति को कुछ महसूस हुआ। जिसको वो खुद नहीं बता सकती की वो क्या फीलिंग थी। मगर इतना जरूर था की अदिति को लगा की जो मर्द हर रात को उसके बिस्तर पर होता है खयालों में, आज सच में उसको छू रहा था। आनंद भी बेहद खुश हुआ अदिति की नरम चमड़ी को अपनी उंगली से छुते हुए। और जिस वक्त विशाल वहाँ आया तो आनंद का हाथ अदिति के कंधे से होकर उसकी बाहों पर फेरते हुए उसकी कलाई तक आ गया था। अदिति ने भी आनंद का हाथ पकरकर उसको अंदर आने को कहा।

अदिति ने पीछे देखते हुए विशाल से मुश्कुराते हुए कहा- “दरवाजा बंद कर देना विशाल..."

विशाल समझ गया की आनंद ने अदिति को कंधे से लेकर पूरी बाहों को सहलाया और तब कलाई को थामा। तीनों अंदर गये, विशाल ने दरवाजा बंद किया और तब तक अदिति आनंद का हाथ थामे खड़ी थी सोफे के पास और उसके चेहरे में देखते हुए मुश्कुराकर उसको बैठने को बोली और विशाल के तरफ देखते हुए सामने वाले सोफे पर बैठने को कहा, जहाँ वो भी बैठने वाली थी, आनंद के सामने।

आनंद बैठा गया और एक छोटा सा प्रेजेंट विशाल को देते हुए कहा- “दिस इस फार दि बर्थ-डे बाय, हैपी बर्थ-डे विशाल...” अदिति हँसी और जल्दी से विशाल को प्रेजेंट खोलने को कहा।

मगर विशाल ने टेबल पर उसको रखते हुए कहा- “बाद में खोलूंगा..."

मगर तभी आनंद ने कुछ और निकाला और अदिति के तरफ करते हुए कहा- “और दिस इस फार यू डियर...” उसको नाम नहीं याद आ रहा था या मालूम ही नहीं था।

विशाल ने कहा- “अदिति, उसका नाम अदिति है आनंद..."

तब आनंद बोला- “दिस इस फार यू अदिति.."

अदिति का चेहरा लाल हो गया और आनंद के चेहरे में देखते हुए पूछा- “लेकिन मुझे क्यों? ये सिर्फ विशाल का बर्थ-डे है...”

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आनंद ने कहा- “आप होस्ट हो तो सोचा आपके लिए भी कुछ लेता चलूं..” वो चाकलेट का एक पैकेट था इंपोर्टेड।

आनंद की आँखें अदिति की टाँगों से नहीं हट रही थीं। अदिति ठीक उसके सामने बैठी थी, और सोफा नीचे था और उसकी ड्रेस भी तो खुद घुटनों के ठीक ऊपर वाला हिस्सा बहुत दिखा रही थी, और आनंद को अदिति बहुत हाट, सेक्सी और आकर्षक लग रही थी। ऊपर से अदिति का खुलकर उससे बात करना और एक अपनापन सा दिखा। लगता था बरसों से आनंद को जानती है और उसकी स्वीट आवाज, उसकी अदाएं, सब आनंद को बहुत मजबूर कर रही थीं उसको देखने और तारीफ करने को। पर वो उसके दोस्त की पत्नी थी तो आनंद खुद को थोड़ा काबू में करने की कोशिश कर रहा था, और बिहेव कर रहा था।

अदिति के जिश्म का कितना हिस्सा नजर आ रहा था, चमड़ी की रंगों की मिलावट जैसे सफेद और गुलाबी के रंग की मिलावट, उसकी टाँगें, कंधा, जांघे, उसकी बाहें, ऊपरी पीठ का हिस्सा। इतनी हाट और आकर्षित कर रहे थे की आनंद को अदिति को बाहों में लेने का मन कर रहा था।

विशाल आनंद की नजरों को पढ़ने की कोशिश कर रहा था, और उसको अच्छी तरह से पता था की वो उसकी बीवी का जिश्म निहार रहा है।

कुछ देर बाद विशाल ने अदिति से शैंपेन और ग्लास लाने को कहा। अदिति खड़ी हुई और अपने सिर को एक झटका देते हए अपने बालों को पीछे किया। फिर अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाकर अपने बाल को पीछे हेयरबैंड में बाँधने लगी। आनंद ने उसकी साफ शेव की हुई कांख को देखा, तो उसका मन किया वहाँ चाटने को। विशाल ने आनंद की आँखों को देखा और फिर वहाँ देखा जहाँ आनंद देख रहा है, तो उसको अदिति की कांख नजर आई, तो उसको पता चला की आनंद अदिति की कांख देख रहा है। अदिति उनके पास से गुजर कर कारिडोर में होते हुए किचेन में चली गई।

जब दोनों दोस्त लाउंज में अकेले हो गये तो विशाल ने धीरे से आनंद से पूछा- “कैसी लग रही है आज वो?"

विशाल के चेहरे में देखते हुए आनंद ने मुश्कुराते हुए कहा- “बेहद बेहद खूबसूरत है यार, तुम बहुत ही खुशकिश्मत हो की तुमको इतनी प्यारी और खूबसूरत वाइफ मिली है, बुरा मत मानना, मैं कहूँगा की बेहद सेक्सी लग रही है आज तो तुम्हारी अदिति.."

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कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
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