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अपने मन की गहराई में अदिति ने यह सोचा की उसका पति वहीं पर है और वो किसी दूसरे मर्द की बाहों में उस तरह से चिपकी हुई है और पति को कोई ऐतराज नहीं हो रहा है। इस सोच ने अदिति में एक और गरम एहसास जगाया और उसने खुद को बहने दिया उस मौके के बहाव में। आनंद की खुशी की इंतेहा नहीं थी की वो अपनी बाहों में एक इतनी हसीन जवान औरत को लेकर झूम रहा था उसके पति की हाजिरी में, और पति कुछ नहीं कर सकता था।
उधर विशाल सब कुछ देखते हुए इस बात से खुश हो रहा था की अब उसका सपना पूरा जरूर होगा अदिति को किसी और से चुदवाते हुए देखने का। तीनों के दिमाग में कुछ ना कुछ था सबके सकारात्मक होने के लिए। जिसके लिए सब अपने-अपने में मगन थे उस वक्त।
आनंद का मोटा खड़ा लण्ड रगड़ता जा रहा था अदिति की जांघों के बीच ठीक चूत के ऊपर, और अदिति सब महसूस करते हुए आनंद को बाहों में जकड़े डान्स करती जा रही थी। ऊपर आनंद हर बार उसके बालों को गले से हटाते हुए उसके गले को चूम और चूस रहा था। अदिति होश खोती जा रही थी और ऐसा बिहेव कर रही थी जैसे उस वक़्त दोनों अकेले हैं वहाँ, जैसे विशाल वहाँ है ही नहीं उसके लिए।
जब आनंद ने उसके गले से उसके बाल हटाए तो अदिति ने आनंद की गरम साँसों को महसूस किया अपने गले के ऊपर। अदिति ने फिर उसकी गरम मगर भीगी हुई जीभ को महसूस किया अपने गले पर, जिससे अदिति के जिश्म के सभी रोंयें खड़े हो गये और उसके जिश्म में एक कांपती हुई लड़र दौड़ी। अदिति को पता था आनंद क्या चाहता था उस वक्त। और कुछ पल के लिए अदिति भी वही चाहती थी। मगर जब भी वो अपने आपको आनंद को समर्पण करना चाहती थी तो विशाल का खयाल उसको वैसा करने से रोकती थी।
अदिति तुरंत मुड़कर विशाल को नजरों से ढूँढने की कोशिश करने लगी, मगर विशाल ने अपने आपको छुपा रखा था उधर।
आनंद का हाथ धीरे-धीरे अदिति की ड्रेस के नीचे गया और उसकी पैंटी पर पहुँचा और आनंद ने उसके चूतड़ों को जोर से दबाया अपने हाथ में, और ऊपर आनंद का मुँह अदिति के मुँह को ढूँढ़ रहा था, और अदिति ने प्यासी जैसी होकर अपने मुँह को खुद जल्दी से खोल दिया और आनंद के मुँह को अपने मुँह में ले लिए। उसकी बाहें आनंद को जकड़े हुए थीं, जिश्म एक दूसरे से चिपके हुए इस तरह से किस कर रहे थे जैसे जिंदगी में कभी नहीं किया हो। एक दूसरे के मुँह, होंठ, जीभ, गाल को जैसे दोनों खा रहे थे भूखों की तरह। म्यूजिक बजता जा रहा था, दोनों एक दूसरे को बाहों में जकड़े और किस में डूबे उस धुन की लहर पर झूम रहे थे।
उधर विशाल अपने कोने में से दोनों को प्यासा देख रहा था।
किस के दौरान आनंद ने अपनी उंगली को अदिति की चूत में डालने की कोशिश की, तकरीबन डाल ही दिया
था, मगर पूरी तरह से नहीं। क्योंकी उस वक्त अदिति का जिश्म उसके जिश्म से एकदम से चिपका हवा था, और आनंद को पूरी पोजीशन नहीं मिली वो करने की। आनंद ने उस तरफ देखा जहाँ विशाल बैठा होना चाहिए था और क्योंकी वो नजर नहीं आया तो आनंद ने अपनी जिप खोली, लण्ड को बाहर निकाला, अदिति की ड्रेस को ऊपर किया, उसकी पैंटी को नीचे किया उसकी घुटनों तक और गरम साँसों के साथ अपनी टाँगों को थोड़ा टेढ़ा करते हुए, जैसे ही अपने लण्ड को अदिति की चूत के अंदर डालने जा रहा था, म्यूजिक सिस्टम में सी.डी. स्किप हुआ और एक ऐसा जोर से कान को फाड़ देने वाला शोर हुआ की सब कुछ बिगाड़ दिया इन दोनों के बीच।
दोनों को तुरंत एक दूसरे को छोड़ना पड़ा और म्यूजिक सिस्टम के पास जाकर सी.डी. को बदलना पड़ा। उसी वक़्त, लाइट को ओन किया गया सब ठीक करने के लिए, तो जो माहौल बना था उस वक्त, सब खराब हो गया, मूड बदल गया और कुछ भी वैसा नहीं था जो उस वक्त था। अगर वो सी.डी. स्किप नहीं होता तो आनंद अपने लण्ड को डालने वाला था अदिति के अंदर।
अदिति जैसे इंतेजार कर रही थी उस वक़्त आनंद के लण्ड को अपने अंदर घुसाने को, उसकी पैंटी घुटनों तक नीचे कर दी गई थी और उसने कुछ नहीं कहा था, किस करती जा रही थी आनंद को उस वक़्त। आनंद को बहुत गुस्सा आया जब डिस्क स्किप हुआ, क्योंकी वो करने ही वाला था अदिति से।
आनंद भी अब हिम्मत हार गाया, और खुद सोचा- “वो मुझे करने दे रही थी, उसकी पैंटी को मैं उसके घुटनों तक नीचे किया मगर उसने कुछ भी नहीं कहा। जब मेरी उंगली उसकी चूत में घुसी तब भी उसने कुछ नहीं कहा। जब मैंने अपने लण्ड को बाहर निकाला पैंट से तब भी अदिति ने कुछ नहीं कहा। मुझको जकड़े हुए किस किए जा रही थी, मतलब वो भी चाहती थी के मैं उसको चोदूं इस बार। साला मेरा किश्मत ही खराब है आज।
सही मौका मिला भी तो सब गड़बड़ हो गया। मूड खराब हो गया अब तो मेरा भी..”
आनंद चलकर उस हिस्से में गया जहाँ विशाल सोने का नाटक कर रहा था।
अदिति ने लाइट ओन किया और विशाल को हिलाते हुए कहा- “विशाल, विशाल, उठो... उठो ना..."
आनंद तब अदिति के पास आया और धीरे से उसके कानों में कहा- “सुनो मत जगाओ उसे, अगर नींद में है तो रहने दो उसे। बहुत अच्छा मौका है चलो तुम्हारे बेडरूम में चलते हैं अब। ऐसा मौका कहाँ मिलेगा, कम ओन लेट्स गो बेबी...”
मगर तब तक अदिति का भी मूड बिगड़ गया था तो इनकार किया। आनंद ने कई बार कहा मगर वो नहीं मानी। और तभी आनंद और भी निराश हो गया क्योंकी उसका मोबाइल तभी बजा और टैक्सी ड्राइवर जो उसको घर वापस छोड़ने वाला था वो आ गया था नीचे, और इंतेजार कर रहा था। अफसोस के साथ उदास नजरों से उसने अदिति को देखा। अदिति ने हँसते हुए आनंद को छेड़ते हुए कहा- “बहुत अच्छा हुआ, अब क्या करोगे, कुछ भी नहीं कर पाओगे अब, जाओ अपनी वाइफ के साथ ही करना सब कुछ हिहीहीही...”
आनंद ने उससे कहा- “मेरा मजाक उड़ा रही हो, इतना कोशिश किया मैंने तेरे साथ और ठीक जब सब ठीक होने वाला था सब बिगड़ गया, कितना बदनसीब हूँ मैं भी। मगर मैं सब कुछ ठीक कर सकता हूँ अभी के कभी। मेरा मजाक उड़ाया तुमने। देखना चाहती हो की टैक्सी को वापस भेज दूं और आज रात यहीं ठहर जाऊँ रात भर। तब कैसे बचोगी मुझसे बोलो?”
अदिति ने कहा- “ओके साड़ी सारी... मगर आप वापस जाइए अब, हमको और मौका मिलेगा कोई जल्दी नहीं है...” और अदिति ने विशाल को फिर हिलाते हुए जगाया।
विशाल ने नींद से उठने का ड्रामा करते हुए पूछा- “क्या हुआ?”
अदिति ने बताया- “आनंद की टैक्सी आ गई है और वो वापस जा रहे हैं...”
आनंद ने बाइ कहा और निकल गया वहाँ से।
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