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चार बजे पुलिस हैडक्वार्टर के सामने, इन्कम टैक्स ऑफिस के पिछवाड़े में बने एक साउथ इन्डियन रेस्टोरेंट में मेरी इन्स्पेक्टर यादव से फिर मुलाकात हुई ।
“अम्बरीश कौशिक के कत्ल की खबर लग गयी ?” - मैंने पूछा ।
“कत्ल की ?” - उसकी भवें उठी ।
“लग गयी खबर ?”
“खबर तो लग गयी लेकिन वो तो आत्महत्या का ओपन एण्ड शट केस बताया जा रहा है ।”
“आत्महत्या, माई फुट ।”
“क्या माजरा है, राज ?”
“हत्यारे ने अपनी तरफ से बड़ी होशियारी से आत्महत्या की स्टेज सैट की थी और वो अपने मकसद में कामयाब रहा था, इसका यही काफी सबूत है कि तुम्हारा ए सी पी तलवार पूरी तरह से आश्वस्त है कि वो आत्महत्या का केस है ।”
“लेकिन तुम आश्वस्त नहीं हो ?”
“नहीं हूं । सुनो क्यों नहीं हूं: नम्बर एक, गोली माथे में लगी पायी गयी । मैं ये नहीं कहता कि खुद की माथे में गोली मार कर आत्महत्या नहीं की जा सकती लेकिन ये एक स्थापित तथ्य है कि आत्महत्या करने वाले रिवाल्वर की नाल को अपनी कनपटी से लगाकर ही इस काम को अंजाम देते हैं । दूसरे, मौत से पहले की उसकी हालत बहुत खस्ता बताई जाती है । फ्लोर वेटर का कहना है कि सुबह दस बजे जब वो कौशिक के लिये विस्की की नयी बोतल लाया था, तो उस वक्त वो बहुत नर्वस, बहुत परेशान, बहुत डरा-डरा, बहुत हलकान और बीमार सा लग रहा था । यानी कि ऐसा आदमी तो वो सुबह दस बजे ही नहीं था जिसे कि अपने आप पर मुकम्मल कंट्रोल रहा है । ऊपर से उसने और विस्की भी पी ली थी ।”
“कैसे मालूम ?”
“भई, जब उसने नयी बोतल मंगायी थी तो पीने के लिये ही तो मंगायी होगी । कोई मेज पर सजा कर रखने को तो मंगायी नहीं होगी !”
“खैर फिर ?”
“जैसी हालत मैंने अभी कौशिक की बयान की है, यादव, वैसी हालत में आदमी पिस्तौल को उल्टी करके हाथ में पकड़ कर नाल को माथे पर ऐन पलकों के बीच सटा कर आत्महत्या करने की नहीं सोच सकता ।”
“और ?”
“और आत्महत्या करने के लिये उसने जगह देखो कौन सी चुनी ? दरवाजे के सामने की । जैसे वो किसी के लिये दरवाजा खोलने गया हो और फिर सोचा हो दरवाजा क्या खोलना है, आत्महत्या ही कर लेता हूं ।”
“मजाक मत करो ।”
“ये मजाक नहीं है ! उस खस्ताहाल आदमी ने अगर आत्महत्या करनी थी तो पलंग पर पड़े-पड़े कर लेता ! कुर्सी पर बैठे-बैठे कर लेता ! आत्महत्या करने के लिये तो उठकर दरवाजे पर क्यों गया ?”
“क्यों गया ?”
“इसका जवाब कि नहीं गया । आत्महत्या के लिये नहीं गया ।”
“तो और किसलिये गया ?”
“ये भी कोई पूछने की बात है !”
“दरवाजे पर दस्तक पड़ने पर किसी को दरवाजा खोलने ?”
“बिल्कुल । फिर दस्तक देने वाले आगंतुक ने ही दरवाजा खुलने पर उसके माथे के साथ पिस्तौल सटाई और उसे शूट कर दिया । कौशिक वहीं पीठ के बल फर्श पर धराशायी हुआ तो उसने पिस्तौल उसके दायें हाथ में थमायी और वहां से खिसक गया ।”
“हूं ।”
“आत्महत्या की थ्योरी के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत ये है कि उसके पास आत्महत्या के लिये पिस्तौल कहां से आयी ?”
“क्या मतलब ?”
“मंगलवार को उसकी गैरहाजिरी में मैंने उसके होटल के कमरे की भरपूर तलाशी ली थी । तब वहां कोई पिस्तौल मौजूद नहीं थी । फ्लोर वेटर का कहना है कि मंगलवार से कौशिक ने होटल से बाहर कदम नहीं रखा था । अब तुम बताओ कि आत्महत्या करने के लिये पिस्तौल कहां से आ गयी उसके पास ?”
“उसने” - यादव सोचता हुआ बोला - “फोन किया होगा किसी को पिस्तौल के लिये । कोई पिस्तौल उसे होटल में आके दे गया होगा ?”
“क्या कहने ! पिस्तौल न हुई, झुनझुना हो गया ।”
यादव खामोश रहा ।
और फिर ये न भूलो कि कौशिक दिल्ली शहर में परदेसी था । बाहर से आये आदमी के लिये कोई हंसी खेल नहीं है दिल्ली में किसी को फोन करके लोली पॉप की तरह पिस्तौल मंगा लेना ! कौन देता है ऐसे किसी को कोई हथियार ! जबकि उसे यूं हथियार हासिल करने वाले की किसी मंशा की भी कोई खबर न हो !”
“राज ! तू ये कहना चाहता है कि आत्महत्या के खिलाफ ये जो बातें तुझे सूझीं, वो हमारे माननीय ए सी पी साहब को नहीं सूझीं ?”
“मुझे नहीं पता सूझी या नहीं सूझी लेकिन अपनी जुबानी उसने ये ही कहा था कि वो आत्महत्या का केस था इसलिये वो मुझे बख्श रहा था, हत्या का केस होता तो वो मुझे आसानी से न छोड़ देता ।”
“हूं । और क्या खबर है ?”
फिर मैंने उसे पचौरी के फ्लैट से बरामद कागजात की बाबत बताया और ये भी बताया कि मैंने उसका क्या हश्र किया था ।
“यानी कि” - यादव बोला - “कागजात वहां भी प्लांट किये गए थे ?”
“एक निगाह में तो ऐसा ही मालूम होता है, अलबत्ता असल में इसका भी कोई सारगर्भित मतलब हो सकता है ।”
“यानी कि तुम्हारी निगाह में हत्यारा अभी भी शबाना की चौकड़ी में से बाकी बचे तीन जनों में से कोई हो सकता है ।”
“हत्यारा कोई भी हो अब मैं उसकी अगली मूव की बुनियाद बनाने के लिये अपने फ्लैट का रुख करने जा रहा हूं ।”
“क्या मतलब ?”
“मतलब मैं तुम्हें पहले भी समझा चुका हूं । जब तक मैं अपने फ्लैट पर नहीं लौटूंगा हत्यारे को ये आश्वासन नहीं होगा कि उसके द्वारा जगह-जगह प्लांट किये गये कागजात मेरे फ्लैट पर पहुंच गए हैं ।”
“यानी कि उसे खबर नहीं लगी होगी कि कुछ कागजात बैक्टर ने भस्म कर दिये थे और कुछ की खुद तुमने धज्जियां उड़ा दी थी ।”
“उम्मीद तो यही है कि खबर नहीं लगी होगी । बैक्टर ने कागजात अपनी बन्द स्टडी में जलाये थे जहां किसी का झांका पाना नामुमकिन था मैंने राजपथ पर जहां कागजात नष्ट किये थे, वहां मेरे इर्द-गिर्द दूर-दूर तक कोई नहीं था ।”
“यानी कि तुम अपने फ्लैट पर जाओगे, अपनी वहां मौजूदगी स्थापित करने के लिये थोड़ी देर टिकोगे जिसकी कि हत्यारे को या तुम्हारे फ्लैट की हत्यारे के लिये निगरानी करते किसी शख्स को खबर लग जायेगी और फिर अपने पीछे हत्यारे के लिए मैदान खाली छोड़ कर वहां से कूच कर जाओगे ?”
“हां ।”
“हत्यारा सीधे ही तुम्हारी बाबत पुलिस को खबर कर देगा या पहले तुम्हारे पलैट में घुसकर इस बात की तसदीक करेगा कि तुम्हें फंसाने में काम आने वाले कागजात वगैरह तुम्हारे यहां मौजूद थे ।”
मैं कुछ क्षण सोचता रहा ।
“वो तसदीक वाला कदम भी उठा सकता है ।” - फिर मैं बोला - “आखिर शबाना के काफी सारे कागजात अभी भी उसके अधिकार में हैं । बैक्टर और पचौरी वाले कागज मेरे फ्लैट में न पहुंचे पाकर, अस्थाना के ऑफिस में प्लांट किया गया मर्डर वैपन वहां न पाकर वो बाकी बचे कागजात को प्लांट करके मेरी दुक्की पीटने का सामान कर सकता है ।”
“राज !” - यादव चेतावनीभरे स्वर में बोला - “वो ये कदम उठा चुकने के बाद एक कदम और भी उठा सकता है ।”
“कौन सा ?”
“वो तेरा कत्ल कर सकता है । ताकि अपने फ्लैट में से बरामद होने वाले कागजात वगैरह की कोई सफाई देने के लिये तू बाकी न बचे । अगर वो कौशिक की आत्महत्या की स्टेज सैट कर सकता है तो तेरा भी यूं कत्ल कर सकता है जैसे कि तू किसी एक्सीडेंट की चपेट में आ गया हो !”
“यार, तुम तो मुझे डरा रहे हो !”
“डरा नहीं रहा, इस बात पर जोर दे रहा हूं कि अब अपने ऐसे किसी अंजाम से भी तुझे खबरदार रहना चाहिये ।”
मैंने बड़ी संजीदगी से सहमति में सिर हिलाया ।
***
“अम्बरीश कौशिक के कत्ल की खबर लग गयी ?” - मैंने पूछा ।
“कत्ल की ?” - उसकी भवें उठी ।
“लग गयी खबर ?”
“खबर तो लग गयी लेकिन वो तो आत्महत्या का ओपन एण्ड शट केस बताया जा रहा है ।”
“आत्महत्या, माई फुट ।”
“क्या माजरा है, राज ?”
“हत्यारे ने अपनी तरफ से बड़ी होशियारी से आत्महत्या की स्टेज सैट की थी और वो अपने मकसद में कामयाब रहा था, इसका यही काफी सबूत है कि तुम्हारा ए सी पी तलवार पूरी तरह से आश्वस्त है कि वो आत्महत्या का केस है ।”
“लेकिन तुम आश्वस्त नहीं हो ?”
“नहीं हूं । सुनो क्यों नहीं हूं: नम्बर एक, गोली माथे में लगी पायी गयी । मैं ये नहीं कहता कि खुद की माथे में गोली मार कर आत्महत्या नहीं की जा सकती लेकिन ये एक स्थापित तथ्य है कि आत्महत्या करने वाले रिवाल्वर की नाल को अपनी कनपटी से लगाकर ही इस काम को अंजाम देते हैं । दूसरे, मौत से पहले की उसकी हालत बहुत खस्ता बताई जाती है । फ्लोर वेटर का कहना है कि सुबह दस बजे जब वो कौशिक के लिये विस्की की नयी बोतल लाया था, तो उस वक्त वो बहुत नर्वस, बहुत परेशान, बहुत डरा-डरा, बहुत हलकान और बीमार सा लग रहा था । यानी कि ऐसा आदमी तो वो सुबह दस बजे ही नहीं था जिसे कि अपने आप पर मुकम्मल कंट्रोल रहा है । ऊपर से उसने और विस्की भी पी ली थी ।”
“कैसे मालूम ?”
“भई, जब उसने नयी बोतल मंगायी थी तो पीने के लिये ही तो मंगायी होगी । कोई मेज पर सजा कर रखने को तो मंगायी नहीं होगी !”
“खैर फिर ?”
“जैसी हालत मैंने अभी कौशिक की बयान की है, यादव, वैसी हालत में आदमी पिस्तौल को उल्टी करके हाथ में पकड़ कर नाल को माथे पर ऐन पलकों के बीच सटा कर आत्महत्या करने की नहीं सोच सकता ।”
“और ?”
“और आत्महत्या करने के लिये उसने जगह देखो कौन सी चुनी ? दरवाजे के सामने की । जैसे वो किसी के लिये दरवाजा खोलने गया हो और फिर सोचा हो दरवाजा क्या खोलना है, आत्महत्या ही कर लेता हूं ।”
“मजाक मत करो ।”
“ये मजाक नहीं है ! उस खस्ताहाल आदमी ने अगर आत्महत्या करनी थी तो पलंग पर पड़े-पड़े कर लेता ! कुर्सी पर बैठे-बैठे कर लेता ! आत्महत्या करने के लिये तो उठकर दरवाजे पर क्यों गया ?”
“क्यों गया ?”
“इसका जवाब कि नहीं गया । आत्महत्या के लिये नहीं गया ।”
“तो और किसलिये गया ?”
“ये भी कोई पूछने की बात है !”
“दरवाजे पर दस्तक पड़ने पर किसी को दरवाजा खोलने ?”
“बिल्कुल । फिर दस्तक देने वाले आगंतुक ने ही दरवाजा खुलने पर उसके माथे के साथ पिस्तौल सटाई और उसे शूट कर दिया । कौशिक वहीं पीठ के बल फर्श पर धराशायी हुआ तो उसने पिस्तौल उसके दायें हाथ में थमायी और वहां से खिसक गया ।”
“हूं ।”
“आत्महत्या की थ्योरी के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत ये है कि उसके पास आत्महत्या के लिये पिस्तौल कहां से आयी ?”
“क्या मतलब ?”
“मंगलवार को उसकी गैरहाजिरी में मैंने उसके होटल के कमरे की भरपूर तलाशी ली थी । तब वहां कोई पिस्तौल मौजूद नहीं थी । फ्लोर वेटर का कहना है कि मंगलवार से कौशिक ने होटल से बाहर कदम नहीं रखा था । अब तुम बताओ कि आत्महत्या करने के लिये पिस्तौल कहां से आ गयी उसके पास ?”
“उसने” - यादव सोचता हुआ बोला - “फोन किया होगा किसी को पिस्तौल के लिये । कोई पिस्तौल उसे होटल में आके दे गया होगा ?”
“क्या कहने ! पिस्तौल न हुई, झुनझुना हो गया ।”
यादव खामोश रहा ।
और फिर ये न भूलो कि कौशिक दिल्ली शहर में परदेसी था । बाहर से आये आदमी के लिये कोई हंसी खेल नहीं है दिल्ली में किसी को फोन करके लोली पॉप की तरह पिस्तौल मंगा लेना ! कौन देता है ऐसे किसी को कोई हथियार ! जबकि उसे यूं हथियार हासिल करने वाले की किसी मंशा की भी कोई खबर न हो !”
“राज ! तू ये कहना चाहता है कि आत्महत्या के खिलाफ ये जो बातें तुझे सूझीं, वो हमारे माननीय ए सी पी साहब को नहीं सूझीं ?”
“मुझे नहीं पता सूझी या नहीं सूझी लेकिन अपनी जुबानी उसने ये ही कहा था कि वो आत्महत्या का केस था इसलिये वो मुझे बख्श रहा था, हत्या का केस होता तो वो मुझे आसानी से न छोड़ देता ।”
“हूं । और क्या खबर है ?”
फिर मैंने उसे पचौरी के फ्लैट से बरामद कागजात की बाबत बताया और ये भी बताया कि मैंने उसका क्या हश्र किया था ।
“यानी कि” - यादव बोला - “कागजात वहां भी प्लांट किये गए थे ?”
“एक निगाह में तो ऐसा ही मालूम होता है, अलबत्ता असल में इसका भी कोई सारगर्भित मतलब हो सकता है ।”
“यानी कि तुम्हारी निगाह में हत्यारा अभी भी शबाना की चौकड़ी में से बाकी बचे तीन जनों में से कोई हो सकता है ।”
“हत्यारा कोई भी हो अब मैं उसकी अगली मूव की बुनियाद बनाने के लिये अपने फ्लैट का रुख करने जा रहा हूं ।”
“क्या मतलब ?”
“मतलब मैं तुम्हें पहले भी समझा चुका हूं । जब तक मैं अपने फ्लैट पर नहीं लौटूंगा हत्यारे को ये आश्वासन नहीं होगा कि उसके द्वारा जगह-जगह प्लांट किये गये कागजात मेरे फ्लैट पर पहुंच गए हैं ।”
“यानी कि उसे खबर नहीं लगी होगी कि कुछ कागजात बैक्टर ने भस्म कर दिये थे और कुछ की खुद तुमने धज्जियां उड़ा दी थी ।”
“उम्मीद तो यही है कि खबर नहीं लगी होगी । बैक्टर ने कागजात अपनी बन्द स्टडी में जलाये थे जहां किसी का झांका पाना नामुमकिन था मैंने राजपथ पर जहां कागजात नष्ट किये थे, वहां मेरे इर्द-गिर्द दूर-दूर तक कोई नहीं था ।”
“यानी कि तुम अपने फ्लैट पर जाओगे, अपनी वहां मौजूदगी स्थापित करने के लिये थोड़ी देर टिकोगे जिसकी कि हत्यारे को या तुम्हारे फ्लैट की हत्यारे के लिये निगरानी करते किसी शख्स को खबर लग जायेगी और फिर अपने पीछे हत्यारे के लिए मैदान खाली छोड़ कर वहां से कूच कर जाओगे ?”
“हां ।”
“हत्यारा सीधे ही तुम्हारी बाबत पुलिस को खबर कर देगा या पहले तुम्हारे पलैट में घुसकर इस बात की तसदीक करेगा कि तुम्हें फंसाने में काम आने वाले कागजात वगैरह तुम्हारे यहां मौजूद थे ।”
मैं कुछ क्षण सोचता रहा ।
“वो तसदीक वाला कदम भी उठा सकता है ।” - फिर मैं बोला - “आखिर शबाना के काफी सारे कागजात अभी भी उसके अधिकार में हैं । बैक्टर और पचौरी वाले कागज मेरे फ्लैट में न पहुंचे पाकर, अस्थाना के ऑफिस में प्लांट किया गया मर्डर वैपन वहां न पाकर वो बाकी बचे कागजात को प्लांट करके मेरी दुक्की पीटने का सामान कर सकता है ।”
“राज !” - यादव चेतावनीभरे स्वर में बोला - “वो ये कदम उठा चुकने के बाद एक कदम और भी उठा सकता है ।”
“कौन सा ?”
“वो तेरा कत्ल कर सकता है । ताकि अपने फ्लैट में से बरामद होने वाले कागजात वगैरह की कोई सफाई देने के लिये तू बाकी न बचे । अगर वो कौशिक की आत्महत्या की स्टेज सैट कर सकता है तो तेरा भी यूं कत्ल कर सकता है जैसे कि तू किसी एक्सीडेंट की चपेट में आ गया हो !”
“यार, तुम तो मुझे डरा रहे हो !”
“डरा नहीं रहा, इस बात पर जोर दे रहा हूं कि अब अपने ऐसे किसी अंजाम से भी तुझे खबरदार रहना चाहिये ।”
मैंने बड़ी संजीदगी से सहमति में सिर हिलाया ।
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