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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

अशोक ने पूजा के पेट को और भी कस कर पकड़ लिया। पूजा की साँसों के साथ उसका पतला पेट भी तेजी से बहुत ज्यादा अंदर बाहर हो रहा था। उसका पेट इतना अंदर जा रहा था कि शायद उसकी साड़ी उसके पेटीकोट से बाहर अपने आप ही आ जाएगी.

इन सब के बीच पूजा दायें बायें हिल रही थी और पिछे से चिपके अशोक के लंड से रगड़ खा रही थी। वो बेसुध थी कि उसका पल्लू सीने से हट चुका हैं। अशोक को लगा कि पूजा उसके वश में आ चुकी हैं। उसने उसका हाथ जो पूजा की नाभी के ऊपर था उसे नीचे खिसकाना शुरु किया.

जैसे ही तेज लेती साँसों से पूजा का पेट अंदर गया, अशोक ने अपनी दो उंगलिया पूजा के पेटीकोट में जरा सी उतार दी. अशोक की उंगलिया पेटीकोट में जाते ही पूजा कड़क हो गयी।

पूजा ने अपनी सांस रोक ली और अपने पेट और पेटीकोट में जगह बनाए रखी। अशोक की चारो उंगलिया अब

पूजा के पेटीकोट में उतरने लगी और पूरी उंगलिया अब पेटीकोट के अंदर थी।

पूजा ने सांस लेना शुरु कर अपने पेटीकोट को टाइट कर लिया और अशोक का हाथ अंदर फिसलना बंद हुआ और वहीं रुक गया। अगली सांस अंदर जाते ही अशोक ने अपना हाथ उसके पेटीकोट से बाहर निकाल दिया।

अशोक ने पूजा के कानो के पीछे चूमना बंद किया और उसको घुमाते हुए अपने सामने किया. पूजा की नशीली आंखे खुली और अशोक की आँखों में झाँकने लगी।

अशोक ने पूजा की चूत के हिस्से को अपने लंड के हिस्से से चिपकाया । अशोक ने पूजा की कमर पर हाथ रख ऊपर के हिस्से को पीछे झुकाया और अपने होंठ पल्लू हटने के बाद खुल चुके नंगे सीने पर रख दिया।

पूजा अभी भी डांस करते लहरा रही थी और उसकी चूत अशोक के लंड से रगड़ खा रही थी। अशोक ने पूजा के मम्मो के ठीक ऊपर के भाग पर ब्लाउज के बाहर झांकते मम्मो के उभार पर अपनी जीभ लगा ली.

पूजा ने तुरंत झटका खाते हुए लहराना बंद किया और सीधी होकर पीछे हट गयी और तेजी से अपना पल्लू उठा कर फिर अपने सीने पर रख अपनी छाती को छुपा लिया।

अशोक फिर पूजा की तरफ बढा पर पूजा ने उसको हाथ आगे कर रोक दिया। फिर पूजा ने मुझे और नितीन को देखा, जैसे वो कोई गुनाह करती पकड़ी गयी थी।

मैने ताली बजाना शुरु किया ताकि पूजा थोड़ी नार्मल हो जाए और फिर नितीन और अशोक ने भी ताली बजाई. पूजा गंभीर चेहरा बनाए अब टेबल की तरफ चलते हुए आने लगी।

नितीन: “हमारे इस प्राइवेट रूम का समय खत्म होने वाला हैं। हम ऊपर रूम में चलते हैं, गिफ्ट अदला बदली कर लेते हैं”

पूजा: “रूम !! वो किसलिए?”

नितीन: “तुम्हारे लिए सरप्राइज हैं, मैंने सोचा आज रात हम होटल रूम में ही रुकेंगे. वहीं पर गिफ्ट भी अदला बदली कर लेते हैं”

अशोक: “तुम दोनो लड़कियां रूम में जाओ, हम पेमेन्ट करके आते हैं”

मैने चाबी ले ली और पूजा को लेकर रूम की तरफ ले आयी। पूजा को अभी भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा हैं। मै और पूजा अब रूम का ताला खोल कर अंदर आये. पूजा इधर ऊधर देखने लगी पर उसे वहां कोई गिफ्ट बॉक्स नहीं दिखा.

पूजा: “रूम बुक करने की जरुरत थी! हर साल तो नहीं करते. यहाँ कोई गिफ्ट भी नहीं दिख रहा”

मैं: “थोड़ा सब्र करो, तुम्हारा गिफ्ट नितीन अभी लेकर आएगा. वैसे डांस करते क्या हो गया तुम्हे. फिर से बहक गयी थी क्या?”

पूजा अब बुरी तरह से शर्मा गयी थी। उसके हाथ साड़ी के अंदर छुपे थे पर वो बुरी तरह कांप रहे थे.

पूजा: “तुम्हे ऐसा लगा? नितीन ने पता नहीं क्या सोचा होगा। मैंने कुछ गलत किया क्या? बताओ ना”

मैं: “तुमने एक ही चीज गलत की थी कि अपने आप को दबा रही थी। अपने दिल की बात छुपाओ मत. नितीन को तो तुम्हारा डांस बहुत पसंद आया। ऐसा टूट कर डांस किया कि मजा आ गया। उसने ताली भी तो बजाई थी”

पूजा: “अच्छा? मेरा तो पल्लू भी कब गिरा पता ही नहीं चला. मुझे बहुत बुरा लग रहा हैं”
 
पूजा की तेज तेज सांसें एक बार फिर शुरु हो चुकी थी। उसने अपने दोनो हाथों को आपस में बाँध लिया था और उसकी छाती तेजी से धड़क कर ऊपर नीचे हो रही थी।

मैं: “तुमने इस से पहले कभी किसी पराये मर्द के साथ डांस किया हैं?”

पूजा: “नहीं”

मैं: “तुम पहले कभी डांस करते वक्त बहकी हो?”

पूजा: “नहीं”

मैं: “इसका क्या मतलब हैं, तुम्हे पता नहीं चला?”

पूजा: “क्या!”

पूजा की सांसें अब और भी तेज हो चुकी थी और शरीर कांपने लगा था

मैं: “तुम्हे शायद जरुरत हैं”

पूजा: “किसकी?”

मैं: “तुमको अशोक पसंद आ गया हैं”

पूजा: “कैसी बातें कर रही हो तुम. वो तुम्हारा पति हैं। मै उसके बारे में ऐसा कुछ नहीं सोचती”

मैं: “तो फिर तुमने उसको रोका क्युँ नहीं जब वो तुम्हे चुम रहा था”

पूजा की जुबान अब लड़खड़ा गयी थी।

पूजा: “वो सिर्फ डांस का पार्ट था”

मैं: “उसने तुम्हारा पल्लू गिराया, वो भी डांस था?”

पूजा: “वो..वो गलती से गिर गया होगा”

मैं: “उसने तुम्हारे पेटीकोट में हाथ डाल दिया था, तुमने रोका भी नहीं”

पूजा: “मुझे ..पता नहीं चला”

मैं: “क्युँ कि तुम उसके नशे में थी, वो तुम्हे पिछे से चिपक रगड़ रहा था और तुम उसका साथ दे रही थी”

पूजा: “तुम ऐसी बातें क्युँ कर रही हो! तुम्हे यह सब लगा।..तुमने मुझे रोका क्युँ नहीं? तुम्हारा पति दुसरी औरत के साथ यह सब कर रहा था था तो उसको भी रोकना चाहिये था।”

मैं: “तुम दोनो इतना एन्जॉय कर रहे थे, कोई कैसे रोकता”

पूजा: “नहीं यह झूठ हैं। मुझे डांस करना ही नहीं चाहिये था। तुमने यह सब महसूस किया तो नितीन ने भी सब देखा होगा कि कैसे मै बहक रही थी, उसने पता नहीं मेरे बारे में क्या सोचा होगा”

मैं: “शांत हो जाओ, नितीन को कुछ बुरा नहीं लगा। वो तुम्हारे लिए खुश था। अगर नितीन यह अब मेरे साथ करता तो तुम क्या करती ? तुम मुझे और नितीन को रोकती या मजे से डांस करने देती?”

पूजा: “पता नहीं”

तभी दरवाजे पर दस्तक हुआ और मैंने जाकर दरवाजा खोला. नितीन और अशोक अब कमरे के अंदर आये. पूजा अभी भी कांपते हुए मूर्ति की तरह रुआंसी खड़ी थी।

मैं: “क्या देख रही हो पूजा, नितीन तुम्हारा गिफ्ट लाया हैं, नहीं चाहिए?”

उसने नितीन को देखा, मगर नितीन के हाथ में कोई गिफ्ट नहीं था। मैं, नितीन और अशोक अब पूजा के सामने दो हाथ की दूरी पर खड़े थे.

मैं: “आज तुम्हे और नितीन को अब तक का सबसे अच्छा सालगिरह का गिफ्ट मिलेगा”

मैने अपना हाथ नितीन के कंधे पर लगा कर अपना सीना और बाकी का शरीर नितीन से सटा लिया।

मैं: “नितीन का गिफ्ट में खुद हूँ, और पूजा, आज रात तुम्हारा गिफ्ट अशोक हैं”

पूजा खुश होने के बजाय अभी भी शॉक में खड़ी थी। मैंने नितीन को छोड़ा और आगे बढ़कर पूजा का हाथ पकड़ अशोक की तरफ खिंचना चाहा.

पर तभी पूजा का एक हाथ दनदनाता हुआ आया और मेरे गाल पर आ पड़ा. एक तेज चटाक की आवाज हुयी और मेरा चेहरा उस आघात से दुसरी तरफ मुड़ गया।

पूजा को हमारा अदला बदली का आईडिया पसंद नहीं आया और मुझे तमाचा मार दिया।

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जब हमें लगा कि अब पूजा हमारे वश में आ गयी हैं और अदला बदली को तैयार हैं तभी उसने मुझे तमाचा मार कर अपने इरादे साफ़ कर दिए।

मेरा सिर चकराने लगा और गाल पूरे गरम हो जलने लगे। कानो में बस साय साय की आवाजे आ रही थी। कुछ सेकण्ड के लिए मुझे दिखना ही बंद हो गया।

मैने अपने गाल पर हाथ रख उस जलन को मिटाने की कोशिश की और आंख बंद कर ली. मुझे कुछ समझ नहीं आया कि क्या हो गया। जैसे अचानक कोई बम धमाका हो गया और सुनाई देना बंद हो गया था।

मैने सिर उठा कर आंखे खोली पर सामने पूजा नहीं थी। मेरे पास अशोक और नितीन खड़े थे। पीछे मुड़कर देखा तो पूजा दनदनाती हुयी दरवाजा खोलकर बाहर जाती दिखाई दी.

नितीन ने मेरे कंधे पर हाथ रख मुझे सांतवना दी और तुरंत हरकत में आया और पूजा के पीछे भागा. अशोक ने आगे बढ़कर मुझे अपने सीने से लगा कर मुझे शान्ति दी.

उस चांटे की चोट उतनी नहीं थी जितनी दिल पर चोट लगी थी। मेरी आंखे भर आयी थी और थोड़ी ही देर में आंसू बहने लगे। अशोक ने मुझे शांत करते हुए अपने रुमाल से मेरे आंसू पोंछे और मुझे लेकर रूम से बाहर आ गया।

हम बाहर आये तब तक नितीन और पूजा वहां से जा चुके थे। मुझे लगा मै पूजा को फंसा चुकी थी पर कुछ लोग इस तरह के रिश्तो को अपवित्र मानते हैं और उनकी सोच को इतनी आसानी से डिगाया नहीं जा सकता हैं।

मुझे समझ आ गया कि मैंने कितनी बड़ी गलती कर दी. मुझे अपने आप पर ही अफ़सोस हो गया कि मै ऐसी क्युँ हूँ! मै क्युँ नहीं पूजा की तरह पतिव्रता बन पायी।

पूजा की तरह मै भी कही बार भटकी थी, पर मै पूजा की तरह समय पर संभल नहीं पायी। काश मै प्रतिमा ना होकर पूजा होती तो आज मुझको अपने आप पर ज्यादा गर्व होता.

अशोक ने मुझे समझाने की कोशिश की कि मै ये सब भूल जाऊ और उसने मुझसे माफ़ी भी मांगी कि उसने मुझे इस काम के लिए फंसाया.

नितीन और अशोक का तो कुछ नहीं बिगड़ा पर पूजा की नजरो में मै हमेशा के लिए गिर चुकी थी। आईने में अपनी शक्ल देखी, उस पर पूजा की उंगलियों के निशान अब लाल हो चुके थे.

उस थप्पड़ की गूँज से मै रात भर सो नहीं पायी। बार बार मेरा दिल रो रहा था। सुबह आईने में मेरे गालो को देखते हुए मै फिर रो पड़ी.

मैने ऑफिस से छुट्टी ले ली. कुछ खाने का दिल भी नहीं कर रहा था। एक इच्छा हुयी कि अभी जाकर पूजा से मिलु और मिलकर उस से माफ़ी मांग लु और फिर उसको सब सच बता दू कि मैं सिर्फ मोहरा थी।

पर मेरी बात का वो क्युँ विश्वास करेगी. फिर मै उसका सामना कैसे कर पाउंगी. दिन भर इसी उधेड़बुन में रही. शाम को स्वीमिंग पर जाने का समय हो गया था। पर हिम्मत नहीं थी वहां जाकर पूजा का सामना कर पाऊ.

शाम को घर आकर अशोक ने मुझे फिर समझाया कि मै उस घटना से अफेक्ट ना होऊ. मेरा बच्चा मेरी हालत देख परेशान रहा। उसे लगा मै बीमार हूँ.

पर उसको क्या पता कि बीमार तो मै आज से पहले थी। पूजा ने तो थप्पड़ के रूप में मुझे एक इंजेक्शन लगाया था कि मै सुधर जाऊ. मुझे अब उस घटना से उभरना ही था और उसको एक सीख की तरह लेना था।

इन सब के बीच एक चीज तो साफ़ हो गयी कि सच में पूजा और अशोक के बीच पहले कुछ संबंध नहीं रहा था। उस होली वाले दिन जो कुछ भी नितीन ने कहा था वो सिर्फ झूठ था, मुझे कमजोर कर चोदने के लिए.

मै ही पागल थी जो उसकी बातों में आ गयी और अपने पति पर शक किया था। हालांकि मेरा पति इसी तरह का हैं जो उसने मुझे ऐसे काम के लिए भेज दिया कि मुझे मेरी ही सहेली ने थप्पड़ मार दिया।

अगले दिन मै ऑफिस गयी, बहुत उदास थी और ऑफिस वाले भी मुझे देख बीमार समझे. ख़ास तौर से मेरा बॉस राहुल मेरी हालत देख परेशान हुआ।

राहुल के साथ मेरे क्या संबंध हैं ये तो आप मेरी कहानी “Nayi Dagar , Naye Humsafar” में पढ़ ही चुके हैं। राहुल मेरे प्यार मे पड़ गया था और मै भी उसको चाहने लगी थी । पर मुझे चोदने की फिराक मे उसने मेरे साथ धोखा किया था । अब हम दोनो के बीच दूरी आ चुकी थी ।

उस वक्त राहुल की सच्चाई जान मुझे जितनी बड़ा झटका लगा था उतना ही बड़ा झटका अब पूजा का थप्पड़ खाकर लगा था।

राहुल दिन भर में जब भी मिला मुझसे मेरी परेशानी का कारण पूछता रहा पर मै उसको टालती रही कि मै ठीक हूँ.

दोपहर बाद मुझे पूजा का फ़ोन आया। अपने मोबाइल की स्क्रीन पर पूजा का नाम देखते ही मेरे गालो की जलन एक बार फिर पैदा हो गयी। मन में एक डर सा बैठ गया। कल पूजा ने सिर्फ थप्पड़ मारा था मुझे कुछ सुनाया तो था ही नहीं.

शायद आज फ़ोन पर मुझे बुरा बोल कर सुनाना चाहती थी और अपनी भड़ास निकालना चाहती होगी. पहले ही मेरा मूड उदास हैं और अब उसकी खरी खोटी सुनने की इच्छा नहीं थी।

मैने पूजा का फ़ोन नहीं उठाया. मेरी हालत देख मेरी ऑफिस की सहेली रूबी भी चिंतित थी। उसने एक साल पहले ही ऑफिस ज्वाइन किया था और जल्द ही मेरी अच्छी सहेली बन गयी थी क्युँ कि वो बहुत समझदारी की बातें करती थी।

वो एक तलाकशुदा महिला थी और 32 के करीब उम्र थी। मुझसे से कही ज्यादा हिम्मत उसमे थी जो अपने पति को सहन करने के बजाय उसको तलाक देकर अपनी आज़ादी भरी ज़िन्दगी जी रही थी।

तलाक के बाद उसका बच्चा कुछ महीनो के लिए बारी बारी से माँ या बाप के साथ रहता था। मै भी कभी कभी सोचती थी कि मै रूबी की तरह मजबूत क्युँ नहीं हूँ.
 
ऑफिस में रूबी पोस्ट में मुझसे थोड़ी नीचे थी पर उम्र में मुझसे बड़ी थी। पर हम दोनो काफी करीबी सहेलियां थी और एक दूसरे से ज्यादा कुछ छिपाती नहीं थी।

रूबी को मैंने अपने पति के बारे में सिर्फ ये बताया था कि मै उनसे थोड़ी परेशान हूँ. वो मुझे हमेशा खुद की तरह तलाक देने का आईडिया देती रहती और मै उसको हमेशा टाल देती.

दोपहर को लंच के बाद जब हम थोड़ा वॉक पर जाते हैं तो वो मुझे अलग से ले आयी और मेरा हाल जानने लगी।

रूबी: “क्या हुआ तुमको? फिर से तुम्हारे पति ने परेशान किया ना!”

मैं: “नहीं, वो बात नहीं हैं”

रूबी: “तो क्या बात हैं? जो भी हो, तुम्हारी परेशानी का कारण तुम्हारा पति ही होगा”

मैं: “हां वो ही हैं इसके पीछे, मगर पूरी तरह नहीं, इसमें मेरी भी गलती थी”

रूबी: “तू कब तक अपने पति को बचाती रहेगी और उसको सहन करती रहेगी. छोड़ क्युँ नहीं देती उसको. तलाक देकर दूर कर बीमारी. मेरी तरह आज़ाद हो कर सांस ले कर देख”

मैं: “उसकी जरुरत नहीं हैं अभी”

रूबी: “मै फिर कहती हूँ, तुम जैसी औरते अपने पति को सहन करती रहेगी, सिर्फ इसलिए कि रात को चुदने के लिए तुम्हे कोई लंड चाहिये होता हैं।”

मैं: “ये क्या बोल रही हो?”

रूबी: “मैने तुमको पहले भी बोला था ना. तुम्हे चुदने की लत लग चुकी हैं। जब तक रात को तुम्हारा पति तुम्हे चोद नहीं देता, तुम्हे खाना हजम नहीं होता. सिर्फ उस चुदने के नशे की खातिर तुम अपने पति को सहन कर रही हो”

मैं: “तुम गलत समझ रही हो, मुझे कोई नशा नहीं हैं”

रूबी: “अच्छा, नशा नहीं हैं! मैंने तुम्हे दो बार चैलेंज दिया था कि एक महीना अपने पति से मत चुदवाना, फिर क्या हुआ उस चैलेंज का?”

मैं: “मैने चैलेंज लिया तो था!”

रूबी: “लिया था तो फिर नतीजा क्या निकला? पहली बार तुमने तीसरी ही रात चुदवा लिया था। और दुसरी बार तो चैलेंज लेने के बाद 4 घंटे भी इंतजार नहीं हुआ और चुदवा लिया”

मैं: “मैने कोशिश तो की थी”

रूबी: “इसे कोशिश कहते हैं! एक महीने का चैलेंज था और 3 दिन भी नहीं टिक पायी”

मैं: “हर औरत में तुम्हारी जितनी हिम्मत नहीं होती ना जो अपने पति को छोड़ कर अलग हो जाए”

रूबी: “वो ही तो मै कह रही हूँ. तुम्हे चुदने की लत लग चुकी हैं। एक दिन भी चुदाये बिना तुम रह नहीं सकती. तुम्हारी चूत पति के लंड की गुलाम हैं”

मैं: “तुम मेरा दर्द बांटने आयी हो या बढ़ाने!”

रूबी: “मै तुम्हारी मदद को ही आयी हूँ. तुम्हारा ईलाज सिर्फ तलाक हैं”

मैं: “यह इतना आसान नहीं हैं”

रूबी: “मुझे पता हैं, यह आसान क्युँ नहीं हैं। पहले तुम्हे अपनी यह लंड की गुलामी की आदत छोड़नी होगी. वरना तुम कभी हिम्मत नहीं कर पाओगी”

मैं: “बात सिर्फ चुदने की नहीं हैं। और भी मजबूरियां हैं, मेरा एक बच्चा हैं”

रूबी: “अपनी चुदाई की लत को अपने बच्चे की आड़ में मत छुपाओ. मेरा भी बच्चा हैं, पर मैंने तलाक लिया ना!”

मैं: “तुम्हारी बात अलग हैं”

रूबी: “क्युँ, तुम्हारी चूत में कोई हीरे मोती जड़े हुए हैं कि तुम्हे रोज चुदवाना जरुरी हैं। तुम पहले कोशिश करो कि एक महीना बिना चूदे रह सकती हो”

मैं: “ठीक हैं मै आज से ही शुरु करती हूँ”

रूबी: “चलो देखते हैं, इस बार तुम कितना रुक पाती हो”

हम लोग फिर ऑफिस में आ गए और अपने काम में लग गए. शाम होने से पहले मुझे एक बार फिर पूजा का फ़ोन आया और मेरे हाथ पैर फुल गए.

मेरा फ़ोन साइलेंट पर ही था और मैंने पूरी रिंग जाने दी पर फ़ोन नहीं उठाया. कॉल ख़त्म होने के बाद मैंने पूजा का नंबर ही ब्लॉक कर दिया।

मुझमे अब हिम्मत नहीं बची थी कि मै पूजा की आवाज सुन पाऊ. किस मुंह से बात करती मै उस से .
 
हम लोग फिर ऑफिस में आ गए और अपने काम में लग गए. शाम होने से पहले मुझे एक बार फिर पूजा का फ़ोन आया और मेरे हाथ पैर फुल गए.

मेरा फ़ोन साइलेंट पर ही था और मैंने पूरी रिंग जाने दी पर फ़ोन नहीं उठाया. कॉल ख़त्म होने के बाद मैंने पूजा का नंबर ही ब्लॉक कर दिया।

मुझमे अब हिम्मत नहीं बची थी कि मै पूजा की आवाज सुन पाऊ. किस मुंह से बात करती मै उस से .

रात को अशोक बेडरुम में मुझे चोदने के लिए तैयार था और मैंने रूबी का ध्यान करते हुए अशोक को रोका, पर वो नहीं माना. उसने कहा कि चुदने के बाद मेरी उदासी मिट जाएगी।

उदास तो मै थी और एक चुदाई की जरुरत भी थी पर रूबी को कल क्या जवाब दूंगी यह सोच मैंने मना करती रही.

परन्तु अशोक को मेरी कमजोरी पता थी, उसने मस्ती मस्ती में मेरा शार्ट और पैंटी उतार ही दी और एक बार मेरी चूत में ऊँगली जाने के बाद मै और नियंत्रित नहीं कर पायी।

अशोक ने आखिर मुझे चोद ही दिया और मै उसको मना नहीं बोल पायी। चुदते हुए यहीं दिमाग में चल रहा था कि क्या रूबी सही हैं। मेरी चूत क्या सच में लंड की गुलाम बन चुकी हैं।

चुदाई का मजा तो आ रहा था पर मन में रूबी की बातें मुझे चुभ भी रही थी।

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रूबी ने मुझे लण्ड़ का गुलाम कहा और एक महीने तक अपने पति से ना चुदवाने चैलेंज दिया मगर मैं पहली ही रात अपने पति चुदवा बैठी। अब मैं यही सोच रही थी कि रूबी को क्या जवाब दूंगी।

अगले दिन ऑफिस में मै रूबी का सामना करने से बचती रही. साथ में लंच किया और ऑफिस में इतने लोगो के बीच वो मुझ पूछ नहीं सकती थी।

रूबी की आंखे मगर लगातार मेरी आँखों में झाँक कर मेरी सच्चाई जानने की कोशिश कर रही थी। लंच के बाद वो मुझे वॉक के बहाने बाहर ले जाना चाहती थी पर मैंने काम का बहाना बना मना कर दिया।

मगर 4 बजे के करीब वो मुझे जबरदस्ती बाहर ले ही गयी। मुझे वो अकेले में ले आयी और सवाल जवाब करने लगी।

रूबी: “मुझे वैसे तुम्हारा जवाब पता हैं, पर फिर भी तुम्हारे मुंह से सुनना हैं”

मैं: “कैसा जवाब! क्या बात कर रही हो?”

रूबी: “मुझे पता नहीं चलता क्या कि तुम सुबह से मुझसे कतरा रही हो. सब पता हैं मुझको, तुमने कल रात चुदवाया हैं। एक रात भी नहीं रुक सकी!”

मैं: “मैने नहीं चुदवाया, वो तो अशोक ने बोला कि….”

रूबी: “कल को राह चलता आदमी बोलेगा तो तुम उसके साथ भी चुदवा लोगी?”

मैं: “कैसी बातें कर रही हो!”

रूबी: “तुम्हारी चूत, लंड की गुलाम हैं और तुम यह बात मान लो”

यह कहते हुए उसने मेरी दो टांगो के बीच हाथ रख मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरी चूत को पकड़ लिया। मैंने उसका हाथ हटाया और इधर ऊधर देखा, किसी ने नहीं देखा था।

मैं: “यह क्या कर रही हो खुले में! कोई देख लेगा तो?”

रूबी: “तुम जब भी चुदवा कर आती हो ना तो तुम्हारी शक्ल बता देती हैं”

मैं: “तलाक देना इतना आसान नहीं हैं”

रूबी: “अपनी चूत की कमजोरी को किसी और चीज पर मत डालो”

मैं: “यार अभी कुछ ऐसा हुआ हैं कि मेरी आंखे खुल गयी हैं। अब बस अशोक की एक और गलती और मै उसको तलाक दे दूंगी”

रूबी: “अपनी शक्ल दिखाओ, तुम्हे चुदने से फुर्सत नहीं और तुम तलाक दोगी. मै ही पागल हूँ जो रोज एक पत्थर से सिर भिड़ाती हूँ. चलो ऑफिस के अंदर, तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता”

रूबी ने भले ही मुझको नकार दिया था, पर रूबी की बातों और पूजा के उस थप्पड़ ने मुझको एक नयी दिशा दे दी थी। मुझे अपने आप को बदलना था। मैंने मन में ठान लिया कि मै अब अशोक की एक भी गलती को जाने नहीं दूंगी.
 
मैने आज तक जो गलतिया की हैं उसमे कही ना कही अशोक का ही हाथ रहा हैं। अगर वो मेरी ज़िन्दगी से जायेगा तो मै अपने आप सुधर जाउंगी. मैंने सोच लिया था कि अब किसी ग्रुप सेक्स के इवेंट में नहीं जाउंगी.

उस रात मैंने अशोक को मुझे चोदने नहीं दिया। उसको मैंने अपने नीचे के कपड़े तक खोलने नहीं दिए ताकि वो मुझे कमजोर ना कर पाये।

अगले दिन मै ऑफिस में बड़ी शान से गयी। रूबी के आते ही मैंने उसको पुछा कि उसको स्मोकिंग करने नहीं जाना. वो मुझे तिरछी नजरो से देखने लगी। कल तो मै उसके सामने आने से भी घबरा रही थी।

मै स्मोक नहीं करती पर रूबी के साथ जरूर जाती थी, इस बहाने हम कुछ देर अकेले में बात कर लेते थे। वो मेरे साथ बाहर आयी।

मैं: “कल रात मैंने नहीं चुदवाया”

रूबी: “वो मै शक्ल पर पढ़ लेती हूँ. एक दिन नहीं चुदवाया तो खुश होने की जरुरत नहीं”

मैं: “शुरुआत तो की ना ! मैंने एक सप्ताह का टारगेट फिक्स किया हैं। मै करके दिखा दूंगी”

रूबी: ” देखते हैं”

उस दिन रात को भी मैंने पूरा विरोध करते हुए पति को चोदने नहीं दिया और अगले दिन ऑफिस में आयी। हमारे अकेले समय में मै फिर रूबी के साथ बात कर रही थी।

मैं: “आज नहीं पुछोगी कल रात क्या हुआ था या मेरी शक्ल पढ़ ली?”

रूबी: “पढ़ ली शक्ल तुम्हारी. कल रात तुमने भले ही ना चुदवाया हो, पर तुम्हारी शक्ल बता रही हैं कि अंदर तुम कितना तड़प रही हो.”

मैं: “अगर मै चुदवाऊं तो भी तुम्हे परेशानी और ना चुदवाऊं तो भी परेशानी”

रूबी: “मुझे कोई परेशानी नहीं हैं। परेशानी तुम्हे होगी. अभी जो बिन चुदवाए तुम्हारी हालत हैं, मै बता सकती हूँ कि तुम चुदवाने के लिए कितना तड़प रही हो”

मैं: “मैने दो दिन कण्ट्रोल किया हैं, मै आगे भी कर लुंगी”

रूबी: “यह बताओ तुम्हारा पति तुम्हारी चूत में ऊँगली करता हैं उसके बाद तुम नियंत्रित नहीं कर पाती ना? फिर तुम उसको चोदने से मना नहीं बोल पाती होगी, मैंने सही बोला ना?”

मैं: “तुम्हे कैसे पता?”

रूबी: “मै भी कभी बीवी थी, मुझे पता हैं”

मैं: “मैने दो दिन से अशोक को मेरे कपड़े ही नहीं खोलने दिए तो वो मेरी चूत में ऊँगली कैसे करेगा. इसलिए दो दिन से बच रही हूँ”

रूबी: “तो ऐसे कैसे तुम ज्यादा दिन टिक पाओगी? चैलेंज तो तब हैं जब वो तुम्हारी चूत में ऊँगली करे और फिर भी तुम अपने आप को नियंत्रित कर चुदने से बच जाओ. बोलो कर पाओगी?”

मैं: “नामुमकिन हैं। एक बार अगर चूत के अंदर ऊँगली गयी तो फिर मुझसे कण्ट्रोल नहीं होता”

रूबी: “यह कण्ट्रोल कर लो, फिर तुम में तलाक लेने की हिम्मत आ जाएगी”

मैं: “तुमने कैसे कण्ट्रोल किया?”

रूबी: “शाम को मेरे घर चलना बताती हूँ”

मैं: “घर क्युँ जाना, यहीं बता दो”

रूबी: “खोलो अपनी स्कर्ट”

मैं: “यहाँ खुले में! पागल हो क्या?”

रूबी: “हां तो क्या हुआ! लोगो को भी मजे लेने दो”

मैं: “हट पागल. शाम को मै तुम्हारे घर आती हूँ. पर तुम्हारा बच्चा आजकल कहा रहता हैं?”

रूबी: “इस महीने वो मेरे पति के पास रहेगी. तुम शाम को मेरे साथ चलो”
 
शाम को ऑफिस से निकलने के बाद मै रूबी के साथ उसके घर आ गयी। घर पर अशोक को फ़ोन कर बोल दिया कि मै लेट हो जाउंगी. अब हम रूबी के ड्राइंग रूम में थे.

रूबी: “चलो अपने सारे कपड़े निकालो”

मैं: “ऊपर के कपड़े क्युँ खोलने हैं?”

रूबी: “तुम्हारा पति जब तुम्हे चोदता हैं तब तुम सारे कपड़े नहीं निकालती हो?”

मैं: “निकालती हूँ, पर अभी उसकी क्या जरुरत हैं”

रूबी: “हम चुदाई का विकल्प करने वाले हैं। इसके बाद तुम्हे अपने पति के लंड की जरुरत नहीं पड़ेगी”

मैं: “पहले बताओ कि तुम करने क्या वाली हो”

रूबी: “जो तुम्हारा पति करता हैं वो मै करुंगी. तुम्हारी चूत को अपनी उंगलियों से रगड़ कर सेतुष्ट कर दूंगी, फिर तुम्हारे पति के लंड की जरुरत नहीं होगी”

मैं: “मै कोई होमोसेक्सुअल नहीं हूँ”

रूबी: “मै भी स्ट्रैट हूँ, कोई लेस्बियन नहीं हूँ. मुझे भी कोई शौक नहीं हैं तुम्हारी चूत को छुने का. मैंने सोचा तुम्हारी मदद कर दू”

मैं: “नाराज क्युँ हो रही हो? पहले ही बता देती कि यह करने वाली हो. यह तो मै खुद कर सकती हूँ”

रूबी: “पहले कभी खुद को ऊँगली की हैं”

मैं: “हां 1-2 बार”

रूबी: “मजा आया फिर?”

मैं: “हां थोड़ा बहुत”

रूबी: “जब दुसरा ऊँगली करता हैं तभी मजा आता हैं, खुद करोगी तो कैसे पूरा मजा आएगा. तुम्हे मुझसे करवाना हैं तो बोलो, वरना मुझे और भी काम पड़े हैं”

मैं: “मगर इस से मेरी चुदने की आदत कैसे छुटेगी?”

रूबी: “पहले अपने पति पर तुम्हारी जो निर्भरता हैं उसको खत्म करो. उसके लिए यह करना जरुरी हैं। मैंने भी ऐसे ही किया था, तब जाकर अपने पति को तलाक देने का मन बना पायी”

मैं: “मतलब तुम जो मुझे कहती रहती हो, वो तुम भी हो. तुम्हारी चूत भी तुम्हारे पति के लंड की गुलाम थी ? तुम भी एक दिन बिना चुदाये रह नहीं पाती थी?”

रूबी: “इतनी आदत थी कि दिन में दो-दो बार करते थे। हम एक ही ऑफिस में काम करते थे तो कभी कभी दोपहर में भी वाशरूम में कर लेते थे”

मैं: “फिर तो तुम्हारे लिए बहुत मुश्किल रहा होगा अपने पति को तलाक देना!”

रूबी: “मन में ठान लो तो हो जाता हैं। अभी तुमने क्या सोचा हैं?”

मैं: “मै तैयार हूँ, पर ऊपर के कपड़े रहने देते हैं”

रूबी: “सारे कपड़े खोलो, तभी तो फीलिंग आएगी”

मैने अब अपने शर्ट के बटन खोलना शुरु किया और पूरा शर्ट निकाल कर रख दिया। अंदर से मेरा ब्रा और ब्रा से झांकते मेरे मम्मे दिखने लगे थे जो रूबी बड़े गौर से देख रही थी।

थोड़ी शरम भी आ रही थी जिसकी तरह वो मुझे घूर रही थी पर उसकी लड़कियो में दिलचस्पी नहीं हैं वो उसने मुझे पहले ही बता दिया था तो मुझे चिंता नहीं थी।

मैने अब अपनी स्कर्ट खा हूक खोला और उसको भी निकाल दिया। अब मै सिर्फ ब्रा और पैंटी में रूबी के सामने खड़ी थी और वो मुझे ऊपर से नीचे देख रही थी।

मैं: “ऐसे क्या देख रही हो? तुम्हारे इरादे तो नेक हैं? मेरे पास जो हैं वो तुम्हारे पास भी हैं”

रूबी: “यहीं देख रही हूँ कि गजब का फिगर मेंटेन किया हैं। सच सच बताना कितने आशिक हैं तुम्हारे? मेरा पति

अगर तुम्हारा पति होता तो दिन में कम से कम चार बार चोदता”

मै शर्मा कर रह गयी। मैंने अब अपना ब्रा निकाल दिया और मेरे कसे हुए बड़े से मम्मे बाहर आ गए. फिर मैंने अपनी पैंटी भी उतार दी और रूबी के सामने नंगी खड़ी हो गयी।

रूबी: “मुझे तुम्हारे पति पर तरस आ रहा हैं। अगर तुमने सच में उसको तलाक दे दिया तो बेचारा तुम्हारे इस हूस्न की जुदाई में अपनी जान ही ना दे दे. क्या खाती हो, कैसे मेंटेन करती हो ये हूस्न?”

मैं: “अभी जिस काम के लिए आये हैं वो करे?”

रूबी: “अभी तुम सोफे पर पांव चौड़े कर बैठो”

मै अब सोफे पर पीठ टिकाये बैठ गयी और एक पांव जमीन पर तो दुसरा मौड़ कर सोफे पर रख अपने पांव चौड़े कर दिए. मेरी चूत खुल कर रूबी के सामने थी।

रूबी अब आकर मेरे सामने बैठी और अपनी चारो उंगलिया आपस में सटा कर मेरी चूत पर रख ढक दी. मेरी चूत खुली थी तो उसके बीच की एक ऊँगली मेरी चूत में थोड़ा सा धंस गयी।

उसने अपनी उंगलिया ऊपर नीचे रगड़ी और मेरी आहें निकलने लगी। उसने अपनी उंगलिया और भी तेज रगड़नी शुरु कर दी तो अब तेज आहें लगातार आने लगी थी।

रूबी ने अपनी एक ऊँगली मेरी चूत में थोड़ा अंदर घुसा कर रगड़ना शुरु कर दिया था। मै अपनी आंहो को काबू करने की कोशिश कर रही थी पर पूरी तरह कामयाब नहीं हो पा रही थी।

रूबी बढे ही सधे हाथों से कामूक तरीके से मेरी चूत में अपनी ऊँगली और उतार अब अच्छे से रगड़ने लगी थी। मुझे चुदाई वाली फिलींग आने लगी थी और अब मेरे लिए आहें रोकना मुश्किल हो गया था।

तभी डोरबैल बजी और रूबी की उंगलियां थम गयी और मेरी आहें भी.

मैं: “अभी कौन आया होगा?”

रूबी: “मै देखती हूँ, तुम ऐसे ही रहो”

मैं: “नहीं, कोई अंदर आ गया तो?”

रूबी: “अरें, मै नहीं आने दूंगी अंदर”

मैं: “नहीं मुझ डर लगता हैं, मै अंदर बेडरुम में जा रही हूँ”

मै सोफे से उठकर बेडरुम की तरफ गयी और रूबी दरवाजा खोलने के लिए गयी। मै बेडरुम का दरवाजा थोड़ा सा खोले मुंह बाहर निकाल देख रही थी कि कौन आया हैं।

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रूबी के बताये उपाय के तहत मैं उसके घर पर अपनी चूत में उस से ऊँगली करवा कर मजे ले रही थी कि तभी डोरबेल बजी।

रूबी ने मै दरवाजा आधा ही खोला था और किसी से बातें कर रही थी। थोड़ी देर बात करने के बाद उसने दरवाजा बंद कर दिया। मुझे आवाजे साफ़ सुनाई नहीं दे रही थी तो समझ नहीं आया कि क्या हुआ।

रूबी ने अब दरवाजा बंद कर फिर सोफे के करीब आयी और मुझे इशारा किया. मै एक बार फिर उस नंगी हालत में आधी चुदी हुयी सोफे पर आकर बैठी.

मैं: “कौन था?”

रूबी: “मेरा एक आशिक था”

मैं: “मजाक मत कर”

रूबी: “मेरा पडौसी था, अकेली औरत आसान शिकार होती हैं। लाईन मारता रहता हैं मुझ पर”

मैं: “तुमने उसकी शिकायत नहीं की?”

रूबी: “शिकायत क्या करनी हैं, मै खुद संभाल लेती हूँ उसको. मुझे मर्दो को टरकाना आता हैं”

मैं: “कैसे भगाया उसको?”

रूबी: “वो मुझे पूछ रहा था कि क्या कर रही हो?”

मैं: “फिर!”

रूबी: “फिर क्या! मैंने बोल दिया कि चूत में ऊँगली कर रही थी”

मैं: “ओह! तुम उस से इस तरह की बातें करती हो?”

रूबी: “ऐसे मर्दो को ऐसी बातें करके ही तो संभालते हैं”

मैं: “तुम ऐसी बातें करती हो तो उसको तो सिगनल मिलता हैं ना! किसी दिन तुम्हारे साथ कुछ कर दिया तो”

रूबी: “उसकी हिम्मत नहीं हैं”

मैं: “तुमने बोला चूत में ऊँगली कर रही हो और उसने कुछ नहीं कहा!”

रूबी: “बोला ना, उसने कहा कि ऊँगली दिखाओ. मैंने उसको अपनी ऊँगली टेस्ट करवा दी”

मैं: “तुम पागल हो क्या? तुमने मेरी चूत के पानी से भीगी ऊँगली एक गैर मर्द को चटवा दी !!”

रूबी: “हां तो क्या हो गया, उसको तो यहीं लगा ना कि मेरी चूत में भीगी ऊँगली हैं। उसने तो उल्टा तारीफ ही की, उसको टेस्ट बहुत पसंद आया, तुम्हे तो उल्टा खुश होना चाहिए”

मैं: “तुम बहुत खतरनाक हो, तुम ऐसे मर्दो से बच कर रहना”

रूबी: “मैने उसको चूत का पानी टेस्ट करवाया, फिर उसको भागा दिया ना! मुझे मर्दो को भगाना आता हैं”

मैं: “मुझे बहुत बुरा लग रहा हैं, मेरी चूत का पानी किसी ऐसे मर्द ने टेस्ट किया हैं जो ठरकी हैं। तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिये था”

रूबी: “तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे तुम्हारी चूत तुम्हारे पति के अलावा कभी किसी ने चाटी ही नहीं होगी”

मैं: “फालतू बातें मत करो. मै जा रही हूँ”

रूबी: “काम तो पूरा करवा लो, नहीं तो रात को अपने पति से चुदवाना पड़ेगा”
 
मै फिर से अपनी पोजीशन बना कर बैठ गयी। रूबी ने एक बार फिर अपनी ऊँगली का जादू मेरी चूत में दिखाया और मै सिसकियां मारते हुए अगले कुछ मिनट में जड़ गयी। अब रूबी ने अपनी ऊँगली मेरी चूत से निकाली तो मेरे पानी से भर गयी थी।

रूबी: “तुम बोलो तो अपनी यह भीगी हुयी ऊँगली अपने पडौसी को चखा कर आती हूँ, उसका भी भला हो जाऐगा”

मैं: “तुम मेरे साथ वाशरुम में चलो और अपनी ऊँगली धो डालो”

मै रूबी को लेकर वाशरूम में गयी और पहले उसके हाथ धुलवाये और फिर अपनी सफाई करने के बाद मै बाहर आयी। फिर मैंने कपड़े पहने और रूबी को धन्यवाद बोलते हुए अपने घर आयी।

दो दिन बिना चुदाये रहने के बाद रूबी की ऊँगली से चुदाई से मै काफी सेतुष्ट महसूस कर रही थी। लगातार तीसरी रात मैंने अशोक को नहीं चोदने दिया।

उसको यहीं लगा कि मै पूजा के थप्पड़ के झटके से अभी नहीं उभरी हूँ. उसने मेरे साथ कोई जबरदस्ती नहीं की, मेरे लिए काम थोड़ा आसान हो गया था।

अगले दिन ऑफिस में मै खिली खिली सी थी और रूबी को तो पता ही था। मैंने उसको 3 उंगलिया उठा कर इशारा कर दिया कि मैंने 3 दिन कण्ट्रोल कर लिया हैं। दोपहर में हम फिर टहलते हुए बात कर रहे थे.

रूबी: “आज शाम मेरे घर चल रही हो?”

मैं: “नहीं, मै अभी अच्छा महसूस कर रही हूँ. मुझे लगता हैं मै एक सप्ताह कण्ट्रोल कर पाउंगी. अगर जरुरत हुयी तो मै कल शाम को तुम्हारे घर आ जाउंगी”

उस रात भी मैंने अशोक को मुझे चोदने नहीं दिया और उसने ज्यादा फोर्स नहीं किया. मुझे अच्छा लग रहा था कि मै सही दिशा में जा रही हूँ.

अगले दिन ऑफिस में रूबी से फिर टहलने के दौरान बातचीत हुयी. मैंने उसको बता दिया कि अब 4 दिन हो चुके हैं और मैंने अशोक से चुदाई नहीं करवाई थी।

रूबी: “आज शाम को आ रही हो, मेरा पडौसी तुम्हे बहुत याद कर रहा था”

मैं: “क्या!! तुमने उसको बता दिया मेरे बारे में?”

रूबी: “नहीं, कल शाम को फिर आया था, बोल रहा था कि उस दिन उसको टेस्ट बहुत अच्छा लगा। थोड़ा और मांग रहा था। बहुत तड़प रहा था बेचारा. मैंने उसको बोल दिया अगली बार चूत में ऊँगली करुंगी तो बता दूंगी”

मैं: “मुझे तो तुम समझ में नहीं आती हो. ऐसे कैसे किसी मर्द के साथ बातें कर सकती हो!”

रूबी: “जैसी दुनिया, वैसे ही रहना पड़ता हैं। तुम शाम को आ रही हो या नहीं. उसको तुम्हारी क्रीम चटवानी हैं”

मैं: “आज शाम को मै तुम्हारे यहाँ आना चाहती थी, पर अब यह सुनकर मैंने प्लान ड्राप कर दिया हैं”

रूबी: “नाराज क्युँ हो रही हो! मै थोड़े ही उसको बताउंगी कि यह तुम्हारा पानी हैं। उसको यहीं लगता हैं कि वो मेरा पानी था”

मैं: “कुछ भी हो, पर मुझे तो पता हैं ना कि मेरा पानी कोई गैर मर्द चाट रहा हैं। मुझसे यह बर्दाश्त नहीं होगा”

रूबी: “अपने पति को बर्दाश्त कर रही हो, पर तुम्हारा बेकार पानी किसी के काम आ रहा हैं वो तुम्हे बर्दाश्त नहीं !”

मैं: “नहीं मेरा मन नहीं मानता”

रूबी: “मै तुम्हारी मदद कर रही हूँ, तुम मेरी मदद कर दो”

मैं: “मेरी चूत का पानी तुम्हारा पडौसी चाटेगा तो तुम्हारा क्या भला होगा?”

रूबी: “अरें वो बहुत काम का पडौसी हैं, इसलिए तो उसको सहन कर रही हूँ. तुम्हारी चूत का पानी टेस्ट कर उसको ख़ुशी मिलती हैं तो आगे मेरी कोई मदद ही करेगा. बोलो चलेगा तुम्हे?”

मैं: “अगर तुम्हारा कोई फायदा हो रहा हैं तो ठीक हैं। पर तुम उसको नहीं बताओगी कि यह मेरी चूत का पानी हैं”

रूबी: “उसको यह बता दूंगी तो मेरा ही नुकसान हैं”

मैं: “तुम अपनी चूत का पानी क्युँ नहीं चखा देती उसको?”

रूबी: “मेरी चूत का पानी तो मेरे पति ने भी पसंद नहीं किया, जो कि मुझे दिन में 2-3 बार चोदता था, फिर वो पडौसी कैसे पसंद करेगा. उसको एक सेकण्ड में पता चल जाऐगा कि उस दिन का पानी अलग था”

मैं: “इसलिए बोलती हूँ, स्मोकिंग और शराब की आदत छोड़ दो. हेल्दी खाना खाया करो”

रूबी: “वो तो मुश्किल हैं। अपने गम मिटाने के लिए भी कुछ चाहिए”

शाम को मै एक बार फिर रूबी के घर पर थी। मैंने सारे कपड़े उतार दिए थे और अपनी पोजीशन ले ली थी। रूबी ने एक बार फिर अपनी उंगलियों से मेरी चूत को चोद दिया था। उंगलियों से चुदवाने से लंड के जितनी मजा नहीं आता पर कम से कम में जड़ रही थी जिसकी से मै अपने पति को मुझसे दूर रख पा रही थी।

मै सिसकियां मारते हुए एक बार फिर जड़ चुकी थी और रूबी की उंगलिया मेरे पानी से भर चुकी थी। उसने एक बार फिर ऊँगली मेरी चूत में घुसा दी और अंदर ही रखी।

अपना एक हाथ की दो उंगलिया मेरी चूत में दबाए रखते हुए उसने अपने पडौसी को फ़ोन किया और आने को बोला कि वो उसको चूत का पानी चटवायेगी.

मैं: “ऊँगली बाहर निकालो, मै अंदर जा रही हूँ, तुम पडौसी को ऊँगली चटवा देना”

रूबी: “डोर बैल बजने तक रुको, ऊँगली बाहर निकाल दूंगी तो मेरी उंगली पर लगा पानी सुख जाऐगा. ताजा ताजा उसको चटवाउंगी तो उसको भी मजा आएगा ना”

रूबी अपनी ऊँगली मेरी चूत में ही घुमा घुमा कर अपनी उंगलिया गीली करती रही और फिर डोर बैल बजी. मै सोफे पर ही उछल पड़ी.

रूबी ने अपनी ऊँगली बाहर निकाली और मै भाग कर वाशरूम में चली गयी। रूबी अपनी भीगी हुयी ऊँगली लेकर दरवाजा खोलने गयी।

मै अंदर से सिर बाहर निकाले देखने का प्रयास कर रही थी। रूबी ने एक बार फिर पडौसी को अंदर नहीं आने दिया। पर शायद वो अंदर आने की ज़िद कर रहा था।

फिर शायद वो शांत हुआ क्युँ कि रूबी ने अपनी ऊँगली पडौसी के मुंह में रख दी थी। फिर उसने पडौसी को रवाना कर दिया और दरवाजा बंद कर दिया था।

रूबी ने मुझको बताया कि उसका पडौसी मेरी चूत के पानी का दीवाना हो चुका हैं। मन ही मन मै गर्व महसूस कर रही थी पर सामने से शर्मा भी रही थी।

अपने वादें के मुताबिक मै सप्ताह में सिर्फ एक बार विकेंड पर अशोक के साथ चुदवाया. पर सप्ताह के दौरान मै दो बार रूबी के घर जाकर उसकी उंगली से चुदवा लेती.

अब यह मेरा विकली रुटीन बन गया था। इस तरह एक महीना निकल गया। रूबी इसी तरह मेरी चूत का पानी अपने पडौसी को चटवाटी रही. जब मेरे पिरीयड होते उस सप्ताह मै कुछ नहीं करती .

रूबी भी अपने पडौसी को बहाना मार देती कि उसका पिरीयड हैं। रूबी ने बताया कि जैसे लोगो को शराब का लत लग जाती हैं वैसे ही उसके पडौसी को मेरी चूत के पानी को चखने की लत लग चुकी हैं।

अगले कुछ सप्ताह में मैंने फ्रीक्वेंसी बढा दी. अब मै अशोक के साथ एक सप्ताह की बजाय 10 दिन में एक बार, फिर2 सप्ताह में एक बार चुदवाने लगी।
 
अशोक ने भी अब अपनी आदत सुधार ली थी और मुझे दबाव देना बंद कर दिया था। मेरा बाकी का काम तो रूबी कर ही देती. जल्दी ही मै अपना टारगेट प्राप्त कर दिया और एक महीने तक मैंने अशोक के साथ नहीं चुदवाया था। मै बहुत खुश थी और रूबी को भी बताया तो वो मेरे लिए भी खुश हुयी.

रूबी: “तो आखिर तुमने कर दिखाया!”

मैं: “तुम्हारी मदद के बिना मुश्किल था”

रूबी: “तो फिर सेलिब्रेट करे?”

मैं: “क्या करना हैं बोलो?”

रूबी: “मेरे पडौसी को लाइव तुम्हारी चूत का पानी पिलाना हैं”

मैं: “क्या मतलब हैं तुम्हारा? मै किसी मर्द को मुझे हाथ नहीं लगाने दूंगी और ना ही नंगी होउंगी”

रूबी: “जो तुम समझ रही हो वैसे नहीं. मेरा पडौसी दरवाजे के बाहर होगा और हम दोनो अंदर. मै तुम्हारी चूत में ऊँगली डालुंगी और फिर बाहर निकाल कर पडौसी को पिला दूंगी. उसको लगेगा मै अपनी चूत में ऊँगली डाल कर चटवा रही हूँ”

मैं: “और वो अंदर आ गया तो! सारा भांडा फूट जाऐगा”

रूबी: “मै दरवाजा चैन लगा कर रखुंगी। सिर्फ एक हाथ आने जाने जितनी जगह रहेगी, वो अंदर नहीं आ पाएगा”

मैं: “यह करना जरुरी हैं क्या? तुम वैसे भी उसको मेरा पानी चखा तो रही हो”

रूबी: “एक ऊँगली भर पानी से उसका पेट नहीं भरता. बार बार ऊँगली डाल कर उसको ढेर सारा ताजा पानी चटवाउंगी तो उसको मजा आएगा”

मैं: “ऐसी क्या जरुरत हैं?”

रूबी: “मेरा एक बड़ा काम अटका हुआ हैं, अगर वो खुश हो गया तो वो काम में उस से निकलवा सकती हूँ. उसको तुम्हारे बारे में पता नहीं चलेगा, पक्का”

मैं: “ठीक हैं, सिर्फ तुम्हारे लिए कर रही हूँ”

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मैंने अपना चैलेंज पूरा कर लिया था और इसकी ख़ुशी में मैं अपनी चूत का ताजा पानी रूबी के पडोसी को पिलाने को मान गयी थी।

शाम को मै रूबी के घर गयी और हमेशा की तरह मैंने पूरा नंगी हुयी और उसने मेरी चूत में ऊँगली डाल कर मुझे चोद दिया और मै जड़ गयी।

रूबी ने अपने पड़ौसी से पहले ही बात कर ली थी और उसको फ़ोन कर बुलाया. मै और रूबी अब दरवाजे के पास आये. मै दरवाजे के पीछे छुप कर खड़ी हो गयी।

मैं: “तुम भी अपने नीचे के कपड़े खोलो, वरना उसको शक हो जायेगा कि बिना कपड़े खोले तुम पानी कहा से निकाल रही हो”

रूबी: “मै भी तो दरवाजे के पिछे छुपी रहुंगी, वो कैसे देखेगा. पर ठीक हैं फिर भी महसूस करने के लिए मै खोल देती हूँ”

रूबी ने जल्दी से अपनी पैंट निकाल दी और नीचे से नंगी हो गयी।

पहली बार उसकी चूत देखी. उसकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे। वैसे भी उसको सफाई की क्या जरुरत, उसे थोड़े ही किसी से चुदवाना हैं। तभी बैल बजी और रूबी ने दरवाजा चैन लगा कर खोला.

मैने अपना एक पांव उठा कर अपनी चूत में जगह बनायी और रूबी ने मेरी चूत में ऊँगली डाल कर अपना हाथ दरवाजे से बाहर निकाल अपने पडौसी को चखाया.

बाहर से वाह आह की आवाजे आ रही थी और मै अपनी तारीफें सुन खुश हो रही थी। रूबी ने 15-20 बार मेरी चूत में ऊँगली डाल कर अपने पडौसी को टेस्ट करवाया था।

इस बीच वो दो तीन बार दरवाजे की खुली दरार के पास चली गयी थी जिसे शायद पडौसी का उसके नीचे का नंगापन दिख गया होगा।

दोनो बार मैंने उसके हाथ को पकड़ कर अपनी तरफ थोड़ा खिंच उसका ध्यान दिलाया कि उसने नीचे कपड़े नहीं पहने थे.

मेरी चूत अब अंदर से अच्छे से साफ़ हो चुकी थी, तब रूबी ने अपने पडौसी को जाने का बोला दिया।

पडौसी: “अपने मुंह से भी तो एक बार चाटने दो”

रूबी ने अंदर मेरी तरफ देखा, और मैंने डर के ना में सिर हिला दिया। रूबी ने अब पडौसी का ना बोल दिया और वो उदास सा चला गया।
 
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