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अशोक ने पूजा के पेट को और भी कस कर पकड़ लिया। पूजा की साँसों के साथ उसका पतला पेट भी तेजी से बहुत ज्यादा अंदर बाहर हो रहा था। उसका पेट इतना अंदर जा रहा था कि शायद उसकी साड़ी उसके पेटीकोट से बाहर अपने आप ही आ जाएगी.
इन सब के बीच पूजा दायें बायें हिल रही थी और पिछे से चिपके अशोक के लंड से रगड़ खा रही थी। वो बेसुध थी कि उसका पल्लू सीने से हट चुका हैं। अशोक को लगा कि पूजा उसके वश में आ चुकी हैं। उसने उसका हाथ जो पूजा की नाभी के ऊपर था उसे नीचे खिसकाना शुरु किया.
जैसे ही तेज लेती साँसों से पूजा का पेट अंदर गया, अशोक ने अपनी दो उंगलिया पूजा के पेटीकोट में जरा सी उतार दी. अशोक की उंगलिया पेटीकोट में जाते ही पूजा कड़क हो गयी।
पूजा ने अपनी सांस रोक ली और अपने पेट और पेटीकोट में जगह बनाए रखी। अशोक की चारो उंगलिया अब
पूजा के पेटीकोट में उतरने लगी और पूरी उंगलिया अब पेटीकोट के अंदर थी।
पूजा ने सांस लेना शुरु कर अपने पेटीकोट को टाइट कर लिया और अशोक का हाथ अंदर फिसलना बंद हुआ और वहीं रुक गया। अगली सांस अंदर जाते ही अशोक ने अपना हाथ उसके पेटीकोट से बाहर निकाल दिया।
अशोक ने पूजा के कानो के पीछे चूमना बंद किया और उसको घुमाते हुए अपने सामने किया. पूजा की नशीली आंखे खुली और अशोक की आँखों में झाँकने लगी।
अशोक ने पूजा की चूत के हिस्से को अपने लंड के हिस्से से चिपकाया । अशोक ने पूजा की कमर पर हाथ रख ऊपर के हिस्से को पीछे झुकाया और अपने होंठ पल्लू हटने के बाद खुल चुके नंगे सीने पर रख दिया।
पूजा अभी भी डांस करते लहरा रही थी और उसकी चूत अशोक के लंड से रगड़ खा रही थी। अशोक ने पूजा के मम्मो के ठीक ऊपर के भाग पर ब्लाउज के बाहर झांकते मम्मो के उभार पर अपनी जीभ लगा ली.
पूजा ने तुरंत झटका खाते हुए लहराना बंद किया और सीधी होकर पीछे हट गयी और तेजी से अपना पल्लू उठा कर फिर अपने सीने पर रख अपनी छाती को छुपा लिया।
अशोक फिर पूजा की तरफ बढा पर पूजा ने उसको हाथ आगे कर रोक दिया। फिर पूजा ने मुझे और नितीन को देखा, जैसे वो कोई गुनाह करती पकड़ी गयी थी।
मैने ताली बजाना शुरु किया ताकि पूजा थोड़ी नार्मल हो जाए और फिर नितीन और अशोक ने भी ताली बजाई. पूजा गंभीर चेहरा बनाए अब टेबल की तरफ चलते हुए आने लगी।
नितीन: “हमारे इस प्राइवेट रूम का समय खत्म होने वाला हैं। हम ऊपर रूम में चलते हैं, गिफ्ट अदला बदली कर लेते हैं”
पूजा: “रूम !! वो किसलिए?”
नितीन: “तुम्हारे लिए सरप्राइज हैं, मैंने सोचा आज रात हम होटल रूम में ही रुकेंगे. वहीं पर गिफ्ट भी अदला बदली कर लेते हैं”
अशोक: “तुम दोनो लड़कियां रूम में जाओ, हम पेमेन्ट करके आते हैं”
मैने चाबी ले ली और पूजा को लेकर रूम की तरफ ले आयी। पूजा को अभी भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा हैं। मै और पूजा अब रूम का ताला खोल कर अंदर आये. पूजा इधर ऊधर देखने लगी पर उसे वहां कोई गिफ्ट बॉक्स नहीं दिखा.
पूजा: “रूम बुक करने की जरुरत थी! हर साल तो नहीं करते. यहाँ कोई गिफ्ट भी नहीं दिख रहा”
मैं: “थोड़ा सब्र करो, तुम्हारा गिफ्ट नितीन अभी लेकर आएगा. वैसे डांस करते क्या हो गया तुम्हे. फिर से बहक गयी थी क्या?”
पूजा अब बुरी तरह से शर्मा गयी थी। उसके हाथ साड़ी के अंदर छुपे थे पर वो बुरी तरह कांप रहे थे.
पूजा: “तुम्हे ऐसा लगा? नितीन ने पता नहीं क्या सोचा होगा। मैंने कुछ गलत किया क्या? बताओ ना”
मैं: “तुमने एक ही चीज गलत की थी कि अपने आप को दबा रही थी। अपने दिल की बात छुपाओ मत. नितीन को तो तुम्हारा डांस बहुत पसंद आया। ऐसा टूट कर डांस किया कि मजा आ गया। उसने ताली भी तो बजाई थी”
पूजा: “अच्छा? मेरा तो पल्लू भी कब गिरा पता ही नहीं चला. मुझे बहुत बुरा लग रहा हैं”
इन सब के बीच पूजा दायें बायें हिल रही थी और पिछे से चिपके अशोक के लंड से रगड़ खा रही थी। वो बेसुध थी कि उसका पल्लू सीने से हट चुका हैं। अशोक को लगा कि पूजा उसके वश में आ चुकी हैं। उसने उसका हाथ जो पूजा की नाभी के ऊपर था उसे नीचे खिसकाना शुरु किया.
जैसे ही तेज लेती साँसों से पूजा का पेट अंदर गया, अशोक ने अपनी दो उंगलिया पूजा के पेटीकोट में जरा सी उतार दी. अशोक की उंगलिया पेटीकोट में जाते ही पूजा कड़क हो गयी।
पूजा ने अपनी सांस रोक ली और अपने पेट और पेटीकोट में जगह बनाए रखी। अशोक की चारो उंगलिया अब
पूजा के पेटीकोट में उतरने लगी और पूरी उंगलिया अब पेटीकोट के अंदर थी।
पूजा ने सांस लेना शुरु कर अपने पेटीकोट को टाइट कर लिया और अशोक का हाथ अंदर फिसलना बंद हुआ और वहीं रुक गया। अगली सांस अंदर जाते ही अशोक ने अपना हाथ उसके पेटीकोट से बाहर निकाल दिया।
अशोक ने पूजा के कानो के पीछे चूमना बंद किया और उसको घुमाते हुए अपने सामने किया. पूजा की नशीली आंखे खुली और अशोक की आँखों में झाँकने लगी।
अशोक ने पूजा की चूत के हिस्से को अपने लंड के हिस्से से चिपकाया । अशोक ने पूजा की कमर पर हाथ रख ऊपर के हिस्से को पीछे झुकाया और अपने होंठ पल्लू हटने के बाद खुल चुके नंगे सीने पर रख दिया।
पूजा अभी भी डांस करते लहरा रही थी और उसकी चूत अशोक के लंड से रगड़ खा रही थी। अशोक ने पूजा के मम्मो के ठीक ऊपर के भाग पर ब्लाउज के बाहर झांकते मम्मो के उभार पर अपनी जीभ लगा ली.
पूजा ने तुरंत झटका खाते हुए लहराना बंद किया और सीधी होकर पीछे हट गयी और तेजी से अपना पल्लू उठा कर फिर अपने सीने पर रख अपनी छाती को छुपा लिया।
अशोक फिर पूजा की तरफ बढा पर पूजा ने उसको हाथ आगे कर रोक दिया। फिर पूजा ने मुझे और नितीन को देखा, जैसे वो कोई गुनाह करती पकड़ी गयी थी।
मैने ताली बजाना शुरु किया ताकि पूजा थोड़ी नार्मल हो जाए और फिर नितीन और अशोक ने भी ताली बजाई. पूजा गंभीर चेहरा बनाए अब टेबल की तरफ चलते हुए आने लगी।
नितीन: “हमारे इस प्राइवेट रूम का समय खत्म होने वाला हैं। हम ऊपर रूम में चलते हैं, गिफ्ट अदला बदली कर लेते हैं”
पूजा: “रूम !! वो किसलिए?”
नितीन: “तुम्हारे लिए सरप्राइज हैं, मैंने सोचा आज रात हम होटल रूम में ही रुकेंगे. वहीं पर गिफ्ट भी अदला बदली कर लेते हैं”
अशोक: “तुम दोनो लड़कियां रूम में जाओ, हम पेमेन्ट करके आते हैं”
मैने चाबी ले ली और पूजा को लेकर रूम की तरफ ले आयी। पूजा को अभी भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा हैं। मै और पूजा अब रूम का ताला खोल कर अंदर आये. पूजा इधर ऊधर देखने लगी पर उसे वहां कोई गिफ्ट बॉक्स नहीं दिखा.
पूजा: “रूम बुक करने की जरुरत थी! हर साल तो नहीं करते. यहाँ कोई गिफ्ट भी नहीं दिख रहा”
मैं: “थोड़ा सब्र करो, तुम्हारा गिफ्ट नितीन अभी लेकर आएगा. वैसे डांस करते क्या हो गया तुम्हे. फिर से बहक गयी थी क्या?”
पूजा अब बुरी तरह से शर्मा गयी थी। उसके हाथ साड़ी के अंदर छुपे थे पर वो बुरी तरह कांप रहे थे.
पूजा: “तुम्हे ऐसा लगा? नितीन ने पता नहीं क्या सोचा होगा। मैंने कुछ गलत किया क्या? बताओ ना”
मैं: “तुमने एक ही चीज गलत की थी कि अपने आप को दबा रही थी। अपने दिल की बात छुपाओ मत. नितीन को तो तुम्हारा डांस बहुत पसंद आया। ऐसा टूट कर डांस किया कि मजा आ गया। उसने ताली भी तो बजाई थी”
पूजा: “अच्छा? मेरा तो पल्लू भी कब गिरा पता ही नहीं चला. मुझे बहुत बुरा लग रहा हैं”