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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

उसी तरह राहुल ने भी लंबे समय से किसी को चोदा नहीं था तो वो भी जड़ने के करीब आ गया था। जब मुझे लगा मै झड़ने के करीब हूँ तो मैंने अपनी हिम्मत जुटाई और अपने धक्को की गति बढ़ाई और राहुल के लंड को तेजी से अपनी चूत में अंदर बाहर करने लगी।

मेरे ऐसा करते ही राहुल की तेज सिसकियां निकलने लगी और फिर मै भी शुरु हो गयी “आंह आह” करते चिखने लगी। राहुल ने मेरी गांड और कमर के बीच से टाइट पकड़ लिया और अपना लंड कुछ ज्यादा ही मेरी चूत में घुसा दिया और मैंने भी उसको बाहर नहीं निकाला।

उसने अपना पानी मेरी चूत में खाली कर दिया और उसी वक्त मैंने अपनी चूत को सिकोड़ते हुए उसके लंड को निचोड़ सा दिया और खुद भी जड़ गयी।

दोनो ने जड़ने के बाद एक दूसरे के होंठो को चूमते हुए रस लेना शुरु किया. राहुल और मैंने एक दूसरे को धन्यवाद बोला और मै उसके ऊपर से हटी।

................................

आखिरकार मैंने शादीशुदा होकर भी राहुल से एक बार फिर चुदवाया ताकि मैं उसके बच्चे की माँ बन पाऊ। राहुल को उसके ऊपर चढ़कर चोदने के बाद मैं उसके ऊपर से हटी।

इतने दबाव में मेरे मम्मो से 1-2 बूंद दूध निकल कर राहुल के सीने पर निकल गया था। मै शरमाई और राहुल हंसने लगा।

राहुल: “तुम्हे याद हैं एक बार मैंने तुम्हारे मम्मो का दूध दुहने की विनती की थी। उस वक्त तो तूम्हारे मम्मो में दूध नहीं था पर आज तो हैं। आज मै फिर तुम्हारे मम्मो का दूध दुहना चाहता हूँ.”

मैं: “नहीं, बिल्कुल नहीं। यह मेरे बच्चे के हिस्से का दूध हैं, मै दूध को बेकार नहीं होने दूंगी”

राहुल: “दूध तो खाना खाने के बाद फिर से बनता ही रहेगा। चलो, गाय की तरह बैठो”

मैं: “नहीं, वेस्टेज होने से माँ के दूध का अपमान होता हैं”

राहुल: “ठीक हैं, मै तुम्हारी बात का सम्मान करता हूँ। पर सिर्फ एक चुदाई से क्या होगा! बच्चा पैदा करने के लिए तो कई बार चोदना पड़ेगा”

मैं: “मै एक महीना इंडिया में ही हूँ। तब तक जितना जी चाहे चोद लेना। मगर इस शहर में यहाँ तुमसे और रूबी से मिलने मै सिर्फ 2 दिन के लिए आयी थी। फिर मै अपनी माँ पापा के शहर में रहुंगी, तुम्हे इसके बाद अगर मुझे चोदना हैं तो मेरे शहर आना पड़ेगा। अभी मै चलू या और करना हैं?”

राहुल: “थोड़ी देर रुक जाओ, लंच करके हम फिर सेकंड राउंड कर सकते हैं”

मैं: “मेरा 3 महीने का बच्चा घर पर हैं और बड़ा वाला बच्चा भी। रूबी उनका ध्यान रख रही हैं और मै सिर्फ यहाँ तुमसे चुदवाने आयी थी। अभी मुझे जाना हैं”

राहुल: “तो फिर शाम को मै रूबी के घर ही आ जाऊ तुम्हे चोदने के लिए? पता दे दो रूबी के घर का”

मैं: “पता मै देती हूँ, पर थोड़ा लेट ही आना, तब तक बच्चे सो जायेंगे”

उसी तरह राहुल ने भी लंबे समय से किसी को चोदा नहीं था तो वो भी जड़ने के करीब आ गया था। जब मुझे लगा मै झड़ने के करीब हूँ तो मैंने अपनी हिम्मत जुटाई और अपने धक्को की गति बढ़ाई और राहुल के लंड को तेजी से अपनी चूत में अंदर बाहर करने लगी।

मेरे ऐसा करते ही राहुल की तेज सिसकियां निकलने लगी और फिर मै भी शुरु हो गयी “आंह आह” करते चिखने लगी। राहुल ने मेरी गांड और कमर के बीच से टाइट पकड़ लिया और अपना लंड कुछ ज्यादा ही मेरी चूत में घुसा दिया और मैंने भी उसको बाहर नहीं निकाला।

उसने अपना पानी मेरी चूत में खाली कर दिया और उसी वक्त मैंने अपनी चूत को सिकोड़ते हुए उसके लंड को निचोड़ सा दिया और खुद भी जड़ गयी।

दोनो ने जड़ने के बाद एक दूसरे के होंठो को चूमते हुए रस लेना शुरु किया. राहुल और मैंने एक दूसरे को धन्यवाद बोला और मै उसके ऊपर से हटी।

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आखिरकार मैंने शादीशुदा होकर भी राहुल से एक बार फिर चुदवाया ताकि मैं उसके बच्चे की माँ बन पाऊ। राहुल को उसके ऊपर चढ़कर चोदने के बाद मैं उसके ऊपर से हटी।

इतने दबाव में मेरे मम्मो से 1-2 बूंद दूध निकल कर राहुल के सीने पर निकल गया था। मै शरमाई और राहुल हंसने लगा।

राहुल: “तुम्हे याद हैं एक बार मैंने तुम्हारे मम्मो का दूध दुहने की विनती की थी। उस वक्त तो तूम्हारे मम्मो में दूध नहीं था पर आज तो हैं। आज मै फिर तुम्हारे मम्मो का दूध दुहना चाहता हूँ.”

मैं: “नहीं, बिल्कुल नहीं। यह मेरे बच्चे के हिस्से का दूध हैं, मै दूध को बेकार नहीं होने दूंगी”

राहुल: “दूध तो खाना खाने के बाद फिर से बनता ही रहेगा। चलो, गाय की तरह बैठो”

मैं: “नहीं, वेस्टेज होने से माँ के दूध का अपमान होता हैं”

राहुल: “ठीक हैं, मै तुम्हारी बात का सम्मान करता हूँ। पर सिर्फ एक चुदाई से क्या होगा! बच्चा पैदा करने के लिए तो कई बार चोदना पड़ेगा”

मैं: “मै एक महीना इंडिया में ही हूँ। तब तक जितना जी चाहे चोद लेना। मगर इस शहर में यहाँ तुमसे और रूबी से मिलने मै सिर्फ 2 दिन के लिए आयी थी। फिर मै अपनी माँ पापा के शहर में रहुंगी, तुम्हे इसके बाद अगर मुझे चोदना हैं तो मेरे शहर आना पड़ेगा। अभी मै चलू या और करना हैं?”

राहुल: “थोड़ी देर रुक जाओ, लंच करके हम फिर सेकंड राउंड कर सकते हैं”

मैं: “मेरा 3 महीने का बच्चा घर पर हैं और बड़ा वाला बच्चा भी। रूबी उनका ध्यान रख रही हैं और मै सिर्फ यहाँ तुमसे चुदवाने आयी थी। अभी मुझे जाना हैं”

राहुल: “तो फिर शाम को मै रूबी के घर ही आ जाऊ तुम्हे चोदने के लिए? पता दे दो रूबी के घर का”

मैं: “पता मै देती हूँ, पर थोड़ा लेट ही आना, तब तक बच्चे सो जायेंगे”

मैने राहुल को रूबी के घर का पता दिया और अपने कपड़े पहन फिर से रूबी के घर आ गयी। राहुल को चोदने के बाद मेरे पूरे शरीर को बहुत संतुष्टि मिल रही थी।

मैने राहुल को रूबी के घर का पता दिया और अपने कपड़े पहन फिर से रूबी के घर आ गयी। राहुल को चोदने के बाद मेरे पूरे शरीर को बहुत संतुष्टि मिल रही थी।
 
रात के आठ बजे थे और मै और रूबी अपने बच्चो के साथ खेल रहे थे कि डोरबेल बजी। रूबी ने दरवाजा खोला तो राहुल था। रूबी ने उसको अंदर लिया।

उसको इतना जल्दी यहाँ देख मै घबरा गयी। मेरा बड़ा बच्चा अभी जाग रहा था । मैंने राहुल को लेट आने को बोला था।

मैं: “तुम! इतना जल्दी!”

राहुल: “कण्ट्रोल नहीं हो रहा था”

यह सुनकर मै शर्मा गयी और रूबी पिछे खड़ी हस रही थी। अपने बच्चे के सामने मै कैसे राहुल के साथ अंदर बेडरुम में जाती, पर रूबी ने बात संभाली और राहुल को बेडरुम का रास्ता बताया।

मै रूबी के हवाले अपने छोटे बच्चे को देकर जाने लगी तो बड़े वाले ने मेरे कपड़े पकड़ मुझे रोक लिया कि मै कहा जा रही हूँ। अब मै उसको क्या एक्सप्लेन करती। रूबी ने मेरी मदद की।

रूबी: “बेटा छोड़ दो मम्मी को, मम्मी को अंकल के साथ अंदर बहुत जरुरी काम हैं”

बच्चा भी मासूम था तो पूछ ही लिया कि क्या जरुरी काम हैं। मम्मी की जगह रूबी आंटी चली जाओ।

रूबी: “नहीं बेटा, मेरी ऐसी किस्मत कहा हैं! यह जरुरी काम तुम्हारी मम्मी ही कर सकती हैं। जाने दो, तुम्हारी मम्मी कमजोर हैं ना, वो अंकल ऐसा इंजेक्शन देंगे कि तुम्हारी मम्मी मोटी हो जाएगी”

मैं: “रूबी, तुम संभाल लोगी ना?”

रूबी: “किसको? अंदर वाले को या इन बाहर वालो को?”

मैं: “अंदर वाले को मै संभाल लुंगी, फिलहाल तुम इन दोनो बच्चो को संभालो”

मै अब बेडरुम में गयी, जहा बिस्तर पर पहले ही राहुल बैठा था। मेरे आते ही वो खड़ा हो मेरे पास आ गया।

राहुल: “चलो अब इंतजार नहीं होता, जल्दी से करते हैं”

मैं: “मै तो थक चुकी हूँ, तुम्हे ही करना पड़ेगा”

राहुल: “कर लूंगा, पर अब यह मत कहना कि मै जबरदस्ती कर रहा हूँ”

मैं: “तुम्हे जबरदस्ती करनी हैं तो भी कर सकते हो, मेरी खुली छूट हैं”

राहुल ने मुझे जल्दी से नंगा कर दिया और फिर घोड़ी बना कर बिस्तर पर मेरे दोनो हाथ बाँध दिए। मै घोड़ी बनी बैठी रही और वो मेरे पास आया।

एक हाथ की ऊँगली से उसने मेरी चूत को रगड़ कर गरम किया और दूसरे हाथ से मेरे नीचे लटके मम्मो को हल्के हल्के से हाथ फेराया। उसने मेरे मम्मे दबाने की कोशिश नहीं कि वरना दूध निकल कर बेकार हो जाता।

फिर उसने मम्मो वाला हाथ मेरे पेट, कमर, पीठ जांघो सब तरह रगड़ते हुए मेरे शरीर को महसूस किया। उसके हाथ लगाने भर से मै उत्तेजित हो चुकी थी।

अब उसने मेरी चूत रगड़ना छोड़ा और मेरे पिछे आया। अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगा और थोड़ा सा मेरी चूत के अंदर धकेल दिया।

उसने फिर एक झटके में अपना लंबा मोटा लंड मेरी चूत में जोर लगाते हुए उतार दिया और वो बहुत ज्यादा अंदर उतर गया, जिसकी वजह से मेरी एक चीख निकली।

मैने फिर कण्ट्रोल किया और हल्की सिसकियां निकालते हुए उसकी चुदाई का मजा लेने लगी। वो अपने दोनो हाथों से मेरी गांड पकड़े मेरी चूत को डोगी स्टाईल में चोदने लगा।

हम दोनो एक सूर में आहें भरते हुए अब उस चुदाई का आनंद ले रहे थे। कुछ मिनट के बाद मै मुंह खोले तड़पती हुयी खुद ही आगे पिछे हो चुदती रही, मेरा मजा इस से बढ़ता गया।

हम दोनो अब और तेजी से सिसकियां भर रहे थे। जैसे जैसे जड़ने के करीब आते गए उसके झटके तेज होते गए. तभी उसने अचानक अपना लंड मेरी चूत से निकाल दिया।

चुदते चुदते अचानक मेरी सिसकियां बंद हो गयी और मजा आना बंद हो गया। उसने मेरी गांड के दोनो हिस्सों को एक दूसरे से दूर किया और मेरी गांड का छेद खोल दिया। फिर अपने लंड का निशाना मेरी गांड के छेद पर लगाया।

मैं: “राहुल, गांड में नहीं। तुम्हे बच्चा चाहिये या गांड मारनी हैं”

राहुल: “दोनो चाहिए”

यह कहते हुए उसने अपना लंड का थोड़ा हिस्सा मेरी गांड में घुसा दिया। मै इस झटके के लिए तैयार नहीं थी और मै दर्द के मारे जोर से चिखी तो वो रुक गया।
 
मेरी गांड दर्द के मारे कांपने लगी थी। काफी समय से मेरी गांड ने कोई लंड नहीं लिया था तो मै कांप उठी थी। मुझे ध्यान आया कि मेरे बच्चे और रूबी बाहर ही हैं और वो मेरी चीख सुन क्या सोचेंगे !

राहुल ने अब धीरे धीरे मेरी गांड में अपना लंड अंदर बाहर करना शुरु किया। मै इस बार तैयार थी तो उसको सहन किया और अपनी चीख दबाए रखी।

राहुल को मेरे सिर्फ मजे लेने थे तो थोड़ी देर गांड मारने के बाद उसने अपना लंड फिर बाहर निकाला और चूत में घुसा दिया। मुझे फिर थोड़ी शांत मिली।

मै एक बार फिर आगे पिछे हो चुदने लगी। राहुल ने भी धक्के मारना शुरु कर दिया। कुछ मिनट की चुदाई के बाद मेरी मजे के मारे हालत खराब हो गयी और मै जोर जोर से सिसकियां मारने लगी।

राहुल ने मुझे पूरा चोद दिया और अपना पानी पूरा मेरी चूत में खाली कर दिया और उसके ठीक बाद मै भी पूरी ताकत लगाये आगे पिछे होते हुए उसके लंड को अपनी चूत में रगड़े जड़ गयी।

हमारी आवाजे शांत होने के बाद राहुल उठा और अपना लंड साफ़ करने वाशरूम में गया। वो बाहर आया तो मैंने राहुल को अपने हाथ खोलने को बोला।

तभी दरवाजे पर दस्तक हुयी और रूबी की आवाज आयी। राहुल ने अपनी पैंट पहन ली और दरवाजा खोलने चला गया, जब कि मै अभी भी नंगी बिस्तर पर घोड़ी बने बंधी थी। मैंने उसको रुकने को बोला पर वो नहीं रुका।

उसने रूबी को अंदर कमरे में ले लिया और दरवाजा बंद कर दिया। इस तरह नंगी बंधे हुए मै रूबी के सामने शर्मा रही थी। मैंने रूबी को अपने हाथ खोलने को कहा और रूबी आगे बढ़ी पर राहुल ने उसको पिछे आकर उसकी कमर से पकड़ रोक दिया। उसने उस से आने का कारण पुछा।

रूबी: “वो छोटे वाले को भूख लगी हैं, प्रतिमा को उसको दूध पिलाना पड़ेगा”

राहुल: “दूध का इंतजाम मै करता हूँ। रूबी, तुम दो कटोरी लेकर आओ”

रूबी हिचकिचा रही थी और मैंने उसको मना बोला पर राहुल ने उसको जाने को बोल दिया। रूबी बाहर जाकर दो कटोरीयां ले आयी और राहुल को दे दी। राहुल ने रूबी को बाहर जाने को बोल दिया।

मै अब भी घोड़ी बनी बैठी थी और राहुल ने दोनो कटोरीयां मेरे मम्मो के ठीक नीचे रखी और मेरे मम्मे दुहने लगा।

कल मैंने उसको दूध वेस्टेज का हवाला देते हुए मेरा दूध दुहने से मना किया था पर आज उसने उन कटोरियों में मेरा दूध दुहना शुरु कर दिया था।

आज मै कोई बहाना मार कर मना भी नहीं बोल सकती थी। उसने जल्दी ही कुछ दूध इकट्ठा कर लिया और दरवाजा खोल कर रूबी को पकड़ा दिया कि वो मेरे बच्चे को वो निकाला हुआ दूध पिला दे।

राहुल ने आकर मेरे हाथ खोले और मैंने उसको इस हिमाकत के लिए डाँट दिया। पर वो मस्ती के मूड में था और उसको कोई फर्क नहीं पड़ा। राहुल और मैंने अपने कपड़े पहने लिए और बाहर आये। राहुल ने हमसे विदा ली और चला गया।

मेरा बड़ा बच्चा मुझे कहने लगा कि रूबी आंटी कह रही थी कि उन अंकल ने आपको सुई लगायी इसलिए आप चिखी थी। मैंने रूबी को देखा जो हस रही थी। मैंने भी अपने बच्चे को हां बोल दिया कि सुई जोर की लगी थी।

अगले दिन सुबह ब्रेकफस्ट के बाद मुझे मेरे बड़े बच्चे ने बताया कि सुई वाले अंकल आये हैं। मैंने देखा रूबी राहुल को लेकर बेडरुम में आ चुकी थी।

मै तो नहा कर तैयार भी नहीं हुयी थी और अपने स्लीप शर्ट और शार्ट में ही थी। रूबी मेरे दोनो बच्चो को बेडरुम से बाहर ले गयी और मुझे राहुल के साथ अकेले छोड़ दिया। राहुल ने दरवाजा बंद कर आया।

मैं: “तुम इतना जल्दी यहाँ?”

राहुल: “मै बच्चा पैदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता”

मैं: “बच्चे रात को सो जाऐ उसके बाद आया करो। मै बच्चे को क्या समझाऊ कि तुम कौन हो?”

राहुल: “तुम बोलो तो चला जाता हूँ”

मैं: “अब आये हो तो करके ही जाओ”

यह सुनते ही वो मुझ पर टूट पड़ा और मुझे बिस्तर पर गिरा दिया और तुरंत मेरे कपड़े निकाल कर मुझे नंगा कर दिया और खुद भी नंगा हो गया।

एक बार फिर हमने एक दूसरे के अंगो को रगड़ कर और चूस कर तैयार किया। अभी हम चुदाई शुरु ही करने वाले थे कि रूबी ने दरवाजे पर दस्तक दी और अंदर पड़े बच्चे के नैपकिन मांगे।
 
इस बीच राहुल ने मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया। मै उठना चाह रही थी पर राहुल ने मुझे चोदना शुरु कर दिया था। मैंने उसको अपने ऊपर से हटा कर दूर किया।

मै ऐसे ही नंगी उठकर दरवाजे तक गयी और दरवाजे की आड़ में छुपकर उसको नैपकिन दिया। मेरा मुंह और एक हाथ दरवाजे के बाहर था और बाकी का शरीर कमरे के अंदर दरवाजे के पिछे छिपा था।

इस बीच चुपके से राहुल भी चलकर मेरे पीछे आ गया था और मुझे पीछे से झकड़ लिया। इसके पहले कि रूबी मेरे हाथ से नैपकिन लेती राहुल अपना लंड वहीं खड़े खड़े मेरी चूत में पिछे से डालने लगा। मै अपने शरीर को झटकते हुए राहुल को दूर करने की कोशिश कर रही थी और नैपकिन देते मेरा हाथ हिल रहा था तो रूबी को मेरा चेहरा देख सब समझ आ गया कि राहुल क्या कर रहा होगा। वो मुंह पर हाथ रख हस रही थी

राहुल का लंड कुछ सेकण्ड पहले मेरी चूत में घुसकर वैसे ही चिकना तो था ही, तो बड़े आराम से फिर मेरी चूत में उतर गया और उसने वहीं मुझे चोदना शुरू कर दिया।

एक हाथ से उसने मेरी कमर पकड़ रखी थी और दूसरे हाथ से दरवाजा पकड़ रखा था , जिसकी वजह से मै दरवाजा भी बंद नहीं कर पा रही थी।

रूबी ने नैपकिन ले लिया था पर वहीं खड़ी थी। मेरा मुंह खुला का खुला था और आंहे मै बाहर नहीं आने दे रही थी और सहन कर रही थी।

राहुल पर गुस्सा भी आ रहा था। उसको रोमांच सूझ रहा था और मै शर्मिंदा हो रही थी। मेरे बड़े बच्चे को लगा मै लुका छिपी खेल रही हूँ इसलिए दरवाजे के बाहर मुंह निकाले देख रही हूँ.

मेरे मासूम बच्चे को क्या पता कि मै उस वक्त अपने आशिक से चूद रही थी। मैंने मुंह अंदर लिया और दरवाजा बंद करने की कोशिश की पर राहुल की ताकत के आगे मै बंद नहीं कर पायी।

कुछ सेकण्ड इसी तरह चोदने के बाद ही उसने मुझे दरवाजा बंद करने दिया। मै अब बंद दरवाजे पर दोनो हाथ टिकाये झुक कर खड़ी थी और मेरे पीछे से राहुल मुझे चोद रहा था।

वो बहूत देर तक ऐसे ही मुझे चोदता रहा और मै जड़ गयी पर राहुल तो जड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था, पता नहीं क्या खाकर आया था आज वो.

मैं इस तरह झुककर खड़े थक चुकी थी और मैंने उसको लेट कर चोदने को कहा. उसने मुझे चोदना छोड़ा और मै सीधा खड़ी हुयी.

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राहुल और मैं रूबी के घर पर पुरे नंगे होकर चुदाई का मजा ले रहे थे और मैं खड़े खड़े थक चुकी थी । राहुल ने मुझे अपनी तरफ घुमाया और अपने सीने से चिपका लिया। मेरे मम्मे फिर उसके शरीर से दब गए. उसने मेरी गांड से पकड़ा और मुझे उठा लिया।

मैने अपनी दोनो बाहें उसके गले में डाल उसको पकड़ा और दोनो टांगो से उसकी कमर को झकड़ लिया। राहुल का लंड एक बार फिर मेरी चूत के अंदर था और उसने ऐसे ही खड़े खड़े मुझे गोद में उठाए चोदना जारी रखा।

अपने दोनो हाथों से मेरी गांड को पकड़ वो मुझे अपनी गोद में उछाल रहा था और मै चूद रही थी। एक बार तो मै वैसे ही जड़ ही चुकी थी पर इस तरह की गहरी चुदाई का मजा मुझे मिल रहा था।

इस तरह औरत को उठा कर चोदने के लिए सच में ताकत चाहिये होती हैं और राहुल का कसरती बदन इसके काबिल था। मेरे दिमाग में यहीं चल रहा था कि आज अगर वो मुझे गोद में उठाए चोद रहा था तो 9 महीने बाद मै उसको गोद में खेलने के लिए एक बच्चा जरूर दूंगी।

राहुल के लंड ने मेरी चूत में एक भयंकर तूफान ला दिया था और अंदर पानी पानी हो गया था, हम दोनो की सिसकियां बुरी तरह से निकल रही थी और राहुल के जड़ने के साथ मै भी एक बार फिर जड़ चुकी थी।

राहुल मुझे ऐसे ही गोदी में बैठाये बिस्तर के पास ले आया और मुझे बिस्तर पर लेटा दिया। हम थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहे और फिर साथ में हमने बाथ लिया।

राहुल ने फिर हमसे विदा ली. आज शाम में मेरे मायके लौटने वाली थी तो उस से पहले मैंने अपने बड़े बच्चे को उसके पापा यानी मेरे पहले पति अशोक और दादी से मिलवाना था। सोचा इस बहाने पूजा से भी मिल लुंगी.

अशोक के घर पर पूजा नहीं मिली, पता चला वो भी अशोक को छोड़ कर चली गयी थी। मुझे पता था कि अशोक के साथ टिकना किसी भी औरत के लिए मुश्किल ही होगा।

फिलहाल मै रूबी के पास लौट आयी और उस से विदा लेने पर उसके पहले मैंने पूजा को फ़ोन लगाया और वो मुझसे मिलना चाहती थी। मैंने उसको रूबी के घर का पता दिया और वो मुझसे मिलने आयी।

मैं: “तो तुमने भी अशोक को छोड़ ही दिया, क्या हुआ?”

पूजा: “तुम्हे तो पता ही होगा कि अशोक कैसा इंसान हैं, मेरा नहीं जमा उसके साथ। वैसे मै तुम्हारे लिए कुछ लायी हूँ”

उसने एक बॉक्स मुझे दिया, मैंने खोल कर देखा तो होश उड़ गए।

पूजा: “तुम अपनी डायरीज अशोक के घर में ही भूल गयी थी, वही लायी हूँ।”

मैं: “तुमने पढ़ ली?”

पूजा: “सब पढ़ लिया, तुम कब कहा किसके साथ क्या करती थी, सब पता चल गया”

मैं: “अशोक को भी बता दिया?”

पूजा: “नहीं बताया। पर यह डायरी कुछ पुरानी हैं, मुझे तुम्हारी आगे की कहानी भी पढ़नी हैं”

मैं: “कुछ समय से मै डायरी में ना लिख कर लैपटॉप पर ही रखती हूँ। मुझे वैसे भी अब किसी से कुछ नहीं छिपाना। तुम्हे अगर दिलचस्पी हैं तो मै तुम्हे भी भेज दूंगी। बाकी काफी कुछ रूबी भी बता सकती हैं”

रूबी: “तुम्हारी पुरानी कहानी तो अब मै भी पढुंगी, पता तो चले कितने आशिक थे तुम्हारे। वैसे तुम्हारी जितनी कहानी मै जानती हुं, फिल्म बन सकती है।”

पूजा: “मुझे लगता हैं कि तुम्हारी पहचान गुप्त रख कर ये कहानी लोगो को भी पता लगनी चाहिये। औरत को भी अपने हिसाब से जिंदगी जीने का हक है।”

मैं: “तुम दोनो मेरी अच्छी सहेलियां हो, मेरी कहानी इस काबिल हैं तो तुम दोनो पबलीश कर देना, मेरी अनुमति हैं”

इंडिया छोड़कर मै फिर जोसफ के पास आयी। वहां जाने के बाद मुझे पता चला कि मैं गर्भवती हो चुकी हूँ और राहुल के बच्चे को जन्म दे पाउंगी। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था, जिस चीज के लिए इतने पापड़ बेले थे, वो अब वो जाकर पूरी हुई। अगर ये बहुत पहले ही हो जाता तो मै जोसफ की बजाय राहूल से शादी कर सकती थी।

अब मुझे ये बात जोसफ को बतानी थी पर सूझ नहीं रहा था कि कैसे कहूं ! रूबी से पुछा तो उसने मुझे सुझाव दिया कि कुछ ऐसा करू कि जोसफ को पहले खुश कर दू और फिर यह गहरा आघात उसको दु।

मैंने काफी सोचा फिर यह फैसला किया कि मैं जोसफ को उसकी अधूरी इच्छा पूरी करने दूंगी और उसको पहली बार गांड मारने दूंगी। मुझे काफी दर्द होगा पर जो गलती मैंने की हैं उसके लिए ये सजा तो होनी ही चाहिए।

वर्किंग डे की दोपहर में जब घर पर कोई नही होता है, तब मै जोसफ को लेकर घर आई। उसको भी लगा मेरा चुदने का मूड है तो वो खुशी खुशी आ गया।
 
मैने जब उसको कहां कि वो आज मेरी गांड मार सकते है तो पहले वो बहूत खुश हुआ, फिर मेरी चिंता हुई और अंत मै मुझसे पुछा कि कोई बात है जो मै छुपा रही हुं।

मैने जोसफ से कहां कि वो मुझे चोदना शुरु करेगा तो मै उसको पुरी बात बताती रहुंगी। हम दोनो अपने कपड़े निकालने लगे और मैने कहानी बतानी शुरु की।

मै: “मै इंडिया गई तब राहुल से भी मिली थी, मुझे लगा उसने शादी कर ली होगी पर पता चला कि उसका वो सगाई का कार्ड झुठ था। वो तो अभी भी मेरा इंतजार कर रहा है।”

जोसफ अपने कपड़े निकाल नंगा हो चुका था और मेरी बात सुनकर सकते में आ गया।

जोसफ: “फिर…उसने कही तुम्हे बहलाने की कोशिश की तो नही की ना?”

मैने अपना आखिरी कपड़ा निकाल नंगे होकर उससे कहा “ना तो उसने बहलाया और ना ही कोई जबरदस्ती की।”

मैने अब एक जैल क्रीम जोसफ के लंड पर अच्छे से मल दी ताकि उसका लंड मेरी गांड को ज्यादा दर्द ना दे। उसका लंड मेरे हाथ लगाने से कड़क भी हो गया था। जैल मलते हुए मैने कहना जारी रखा।

मै: “राहुल अब कभी शादी नहीं करना चाहता, पर अपने मां बाप की खुशी के लिए एक बच्चा चाहता है।”

जोसफ: “तो तुम्हे क्यु बता रहा था? जाकर गोद ले ले किसी अनाथाश्रम से”

मै अब बिस्तर पर घोड़ी बनकर बैठ गई और जोसफ को मेरे पीछे आने को कहां। जोसफ मेरे पीछे आया और अपना लंड मेरी चूत और गांड के छेद के ऊपर ऊपर ही रगड़ता रहा।

मै: “राहूल सिर्फ मुझ से ही अपना बच्चा पैदा करना चाहता है।”

जोसफ ने अपना लंड रगड़ना बंद कर दिया। और मुझसे पुछा: “तुमने उसको बताया नही कि हमारी शादी हो चुकी है।”

मै: “उसको पहले से ही पता था। पर वो मेरे अलावा किसी और से रिश्ता नहीं बनाना चाहता है।”

जोसफ: “तुम्हे अब और उससे मिलने की जरुरत नहीं है, वो फिर तुम्हे धोखा देगा”

मै: “तुम कहते हो तो नहीं मिलुंगी”

जोसफ ने फिर अपना लंड मेरे छेदो के ऊपर रगड़ा और पुछा: “तुमने उसको बोला नही कि वो अब इस तरह की बातें तुम से ना करे! अब तुम दोनो का रिश्ता पहले वाला नहीं रहा।”

जोसफ ने अपने लंड की टोपी थोड़ी सी मेरी गांड में घुसाई।

मै: “जोसफ वो राहुल बहुत दुखी था। मुझसे देखा नहीं गया और मै मान गई । मेरे पेट में … राहुल का बच्चा है”

जोसफ ने एक जोर का झटका मारा और अपने लंड का थोड़ा हिस्सा मेरी गांड में घुसा दिया। मुझे इतना भयंकर दर्द हुआ कि मै चिल्लाते हुए आगे की तरफ उछली पर जोसफ ने मेरी कमर पकड़ रखी थी तो ज्यादा दूर नहीं जा पाई।

जोसफ कुछ नहीं बोला पर एक के बाद एक झटके मारता हुआ मेरी गांड मारता रहा और मै दर्द के मारे लगातार चिल्ला रही थी। वो मेरी जिंदगी की सबसे दर्दनाक चुदाई थी। मै लगातार रोते सुबकते हुए उससे माफी मांग रही थी।

मै: ” ऊऊऊहहह … आई ऐम सॉरी जोसफ, बहुत दुख रहा है, प्लीज धीरे करो … आईईईईईई ”

मै अपना सर झुकाए अपनी दोनो टांगो के बीच से जोसफ के लंड के नीचे लटकी बड़ी थैलीयों में उसकी गोटीयों को आगे पीछे तेजी से हिलता देख पा रही थी।

मेरी गांड मे कोई एक डंडा अंदर बाहर कर रहा हो एसा लग रहा था और दर्द के मारे मुझे अपने सारे पाप याद आ गए। वैसे तो जोसफ ने चोदते वक्त मेरे दर्द का हमेशा ध्यान रखा है पर आज वो एक जंगली जानवर बन चुका था।

मुझे उससे ये उम्मीद नहीं थी, पर शायद उसको भी मुझसे ये उम्मीद नहीं थी। उसकी ये हरकत देख मुझे बहुत दुख हुआ पर कोई शिकायत नही थी।

अगर किसी चोदते हुए पति को उसकी बीवी ये बोल दे कि उसके पेट में उसके आशिक का बच्चा है तो शायद सबका यहीं रिएक्शन होता।

मैने वो गांड चुदाई की यातना अगले 10-15 मिनट तक झेली थी पर वो एक एक मिनट एक घंटे के बराबर भारी था।

मेरी गांड बुरी तरीके से छिल चुकी थी। मेरी चीखों का उस पर कोई असर नहीं हुआ, उसने बड़ी बेरहमी से मेरी गांड मारी और अपने लंड का पानी मेरी गांड में छोड़ने के बाद ही लंड बाहर निकाला।

मैने सर झुका कर देखा, मेरी दोनो टांगो के बीच से मेरी गांड में जमा जोसफ का पानी बह रहा था। चादर ढेर सारे पानी से गीली हो चुकी थी।

दर्द के मारे मै बिस्तर पर ही गिर गई। जोसफ गुस्से में वहां आस पास पड़ी चीजो को लात मार रहा था और फिर कपड़े पहन चला गया।

मै आधे घंटे तक बिस्तर पर ऐसे ही नंगी पड़े कराहती रही। फिर जोसफ एक बार फिर आया और मुझे पेनकिलर टेबलेट दी, ताकि मेरा दर्द कम हो।

खैर वो दर्द तो मुझे 4-5 दिन तक रहा और जोसफ ने मुझसे अपने बर्ताव के लिए माफी भी मांगी पर मैने उसको सांतवना दी कि उसने जो भी किया अच्छा किया, मै इस सजा की हकदार थी।

जोसफ ने शर्त रख दी मुझे किसी एक को चुनना होगा, या तो राहुल का होने वाला बच्चा या फिर जोसफ और हमारा बच्चा।

एक बच्चे के लिए दुसरा बच्चा छोड़ देना, मेरे लिए ये बहुत मुश्किल था। मगर मै एक होने वाले बच्चे को मार नहीं सकती थी, खास तौर से वो बच्चा जिसके लिए मैने और राहुल ने पहले भी कितनी मेहनत की थी।

सच्चा प्यार कभी कुरबानी नहीं मांगता पर कुरबानी देता है, जैसे राहुल ने किया था। फिर मैने सोच लिया कि मै जोसफ को छोड़ दुंगी। मेरे दुसरे तलाक की प्रक्रीया शुरु हुई।

मैने राहुल को बता दिया था कि मै उसके बच्चे की मां बनने वाली हुं, पर ये नहीं बताया था कि मै जोसफ से तलाक ले रही हुं।

मुझे अब 6 माह का गर्भ था और तलाक की सारी कानुनी प्रक्रीया खत्म कर भारी दिल से एक साल के हो चुके अपने दुसरे बच्चे को जोसफ के पास छोड़ इंडीया आने की तैयारी करने लगी।
 
मै अपने बड़े बच्चे को लेकर टेक्सी से एयरपोर्ट आ रही थी कि रास्ते में एक्सीडेंट हो गया और मैने अपने बच्चे को खो दिया और खुद मरने की हालत में होस्पीटल में थी।

जोसफ मिलने आया और उसको मैने अपनी एक आवाज रिकोर्ड कर रुबी को भिजवाने को बोला, जिसमें मेरी आखिरी ख्वाहिश थी।

प्रतिमा: “जोसफ हो सके तो तुम रुबी से शादी कर लेना। वो भी तुमसे बहुत प्रभावित है। वो हमारे बच्चे का अच्छे से ख्याल रखेगी और तुम्हारा भी।”

सच का सामना:

अब तक जो आप प्रतिमा की कहानीयां पढ़ रहे हैं वो प्रतिमा ने पबलीश नहीं की है। मै कौन हु, ये आप अनुमान लगा सकते हैं। अब मै आपको आगे की सच्चाई भी बता देती हूँ.

राहुल और प्रतिमा की प्रेम कहानी पूरी नहीं हो पायी। प्रतिमा अपने कोख़ में राहुल के बच्चे को लिए इस दुनियां से चली गई।

उसके कुछ दिन पहले ही प्रतिमा ने मुझे अपनी डिजिटल डायरी भी दी थी जिसकी वजह से मै उसकी आगे की कहानी आपको बता पायी।

प्रतिमा की आखिरी आवाज की रिकोर्डिंग कुछ इस तरह थी।

“रुबी तुम राहुल से कह देना कि वो अब मेरा इंतजार ना करे और शादी जरुर करे। शादी ना भी करनी हो तो कम से कम एक बच्चा जरुर पैदा कर ले। उसको पुजा बहुत पसंद आयी थी, मुझे कोई आपत्ती नहीं कि अब वो उसके साथ कैसे भी संबंध बनाएं। रुबी अब घोड़े जैसा जोसफ तुम्हारे लिए खाली है, उसका और उसके बच्चे का ध्यान रखना।”

राहूल ने प्रतिमा की आखिरी ख्वाहिश पुरी करने के लिए पुजा से अपना बच्चा पैदा करने की गुजारीश की है। पुजा अपनी सेफ्टी के लिए राहुल से पहले शादी करना चाहती है। आशा है सब कुछ ठीक होगा।

रुबी अभी जोसफ के रेगुलर टच में है और सब कुछ ठीक रहा तो प्रतिमा की एकमात्र बची निशानी यानी उसके बच्चे को एक भरोसेमंद मां मिल ही जाएगी।

पहचान छुपाने के लिए मैंने अपनी सभी कहानियो में जगहों के नाम गुप्त रखे हैं और मुख्य किरदारों के नाम भी बदल दिए, हालांकि सहायक किरदारों के नाम कही कही असली इस्तेमाल किये गए हैं।
 
नए घर में मेरी पहली होली थी. मुझे अब वैसे भी होली खेलना इतना पसंद नहीं था जितना बचपन में था. हमारे मौहल्ले में ही होली का दहन हुआ और हमने उसमे हिस्सा लिया. ये होली सेक्स स्टोरी उसी दिन के बाद शुरू हुई!

अगले दिन रंगो की होली थी. मुझमे तो इतना उत्साह नहीं था पर पति हर बार की तरह उत्साही थे. उन्होंने हमारे बच्चे को भी इस उत्साह में शामिल कर लिया था.

उनका प्लान था कि यहाँ होली खेलने के बाद वो लोग अपने पुश्तैनी घर भी जायेंगे जहा मेरी सास रहती हैं. वहाँ भी पुराने पडोसी और रिश्तेदार हैं जिनके साथ हर साल होली खेलते आये हैं..

मैंने उनको पहले ही मना कर दिया कि मेरा दो दो जगह होली खेलने का कोई प्लान नहीं हैं. इस मोहल्ले में हम वैसे भी नए थे तो ज्यादा कोई रंगो से भरेगा नहीं पर पुराने घर गए तो जान पहचान की वजह से कुछ ज्यादा ही रंग भर देंगे.

होली का दिन भी आया और सुबह एक घंटे के अंदर ही हमने मोहल्ले की छोटी सी होली खेल ली. पति का पेट तो इस छोटी सी होली खेलने से जैसे भरा ही नहीं. उनका प्लान वो वैसे ही पुराने घर जा होली खेलने का था.

मैं वापिस घर पर आ कर नहा ली. पति बच्चे को लेकर पुराने घर होली खेलने निकल गए.

मैंने अपनी वो नयी साड़ी पहन ली जो होली पर पति ने उपहार में दी थी. वैसे भी अब कोई रंग तो लगाने वाला ही नहीं था और कोई दिक्कत नहीं थी.

मैंने मोतीया रंग की काम वाली साडी और उस पर सफ़ेद रंग का ब्लाउज पहन लिया और अच्छे से मेकअप कर देखने लगी, आने वाले सामाजिक कार्यक्रम में ये साड़ी कैसी लगेगी. थोड़ी देर के लिए ही पहननी थी तो मैंने ब्रा भी नहीं पहना.

अभी पूरा तैयार भी नहीं हुई थी कि डोर बेल बज उठी. कौन आया होगा ये विचार करने लगी, कही अशोक कुछ भूल तो नहीं गए जो वापिस आ गए. पीप-होल से झाँका तो देखा हमारे पुराने घर का पडोसी नितिन जो अशोक का ख़ास दोस्त भी हैं, वो खड़ा हैं.

हर साल वो और अशोक साथ में होली की मस्ती करते हैं. इस साल हम नए घर पर हैं तो शायद नितिन यहाँ अशोक के साथ होली खेलने की चाहत में आया था. पर अशोक तो खुद उसके घर के उधर ही गया हुआ हैं.

मैं सोचने लगी, दरवाजा खोलू या नहीं, कही वो मुझे रंग से ना भर दे, मेरी नयी साड़ी ख़राब हो जाएगी. ना खोलू तो उसको बुरा लगेगा की वो घर आया और दरवाजा भी नहीं खोला. कोई और रास्ता नहीं था तो मैंने अब दरवाजा खोला.

नितिन: “हैप्पी होली”

मैं: “हैप्पी होली.”

नितिन: “अरे ये क्या तुमने तो होली खेली ही नहीं, हर साल तो खेलती हो.”

मैं: “मैंने तो होली खेल भी ली और फिर मैं नहा भी ली.”

नितिन: “अशोक को बाहर बुलाओ, उसको मैं लेने आया हूँ, उसके बिना होली खेलने का मजा ही नहीं आता हैं.”

मैं: “अशोक तो तुम्हारे वही गया हैं. अभी थोड़ी देर पहले ही निकला हैं.”

नितिन: “अच्छा ठीक हैं, मैं उसे वही मिलता हूँ. अब आया हूँ तो होली मना कर ही जाऊंगा. रंग तो लगवाना पड़ेगा.”

मैं: “होली का मतलब सिर्फ रंग लगान ही तो नहीं, मुँह मीठा करके भी होली मना सकते हैं. आज मुँह मीठा कर होली मना लो, अगले साल रंग लगा देना. अंदर आ जाओ, कुछ नाश्ता कर लो होली का.”

नितिन अब दरवाजे से अंदर आ गया और मैंने टेबल पर पड़े नाश्ते से कुछ खाने को कहा.

नितिन: “क्या प्रतिमा, थोड़ी बहुत होली तो मेरे साथ भी खेलनी ही पड़ेगी. वरना होली का कैसा नाश्ता!”

मैं: “अरे मैं नहा चुकी हूँ, वरना मैं मना नहीं करती होली खेलने से. तुम नाश्ता लो.”

नितिन: “अच्छा एक काम करो एक रंग से तिलक ही लगवा लो माथे पर, वो तो चलेगा?”

मैं: “अच्छा ठीक हैं, पर संभल कर, थोड़ा सा ही रंग लेना, साड़ी पर ना गिर जाये.”

नितिन: “अरे तुम चिंता मत करो.”

नितिन ने अपने साथ लाये गुलाल की थैली को अपने एक हाथ में पकड़े दूसरे हाथ को उसमे डाला. मैंने आँखों में गुलाल ना जाये इसलिये आँखें बंद कर दी और चेहरा आगे कर दिया ताकि रंग साड़ी पर ना गिरे.

वो मेरे ललाट पर एक तिलक लगाने लगा और तेजी से मेरे पुरे चेहरे पर रंग लगा दिया. मैं एक दम से दूर हटी.

मैं: “अरे ये क्या किया? सिर्फ तिलक लगाने को बोला था.”

नितिन: “अरे सूखा रंग हैं, कुछ नहीं होगा साड़ी को, धो लेना. होली बार बार थोड़े ही आएगी.”

मैं अपनी साड़ी पर गिरा थोड़ा गुलाल झटकते हुए बोली “अच्छा अब तो नाश्ता कर लो.”

नितिन: “हर साल मैं तुम्हे पक्का कलर लगाता हूँ, इसके बिना होली पूरी कैसी होगी.”

ये कहते हुए उसने जेब से एक पक्के कलर की छोटी डिबिया निकाल ली.

मैं: “नितिन, इसको अंदर रखो. पक्का रंग नहीं चलेगा.”

नितिन: “बस थोड़ा सा मुँह पर लगवा लो, जल्दी रंग उतर जाए तो कैसी होली.”
 
मुझे अपनी साडी खतरे में दिखाई दी. मैं तुरंत बचने के लिए वहा से खिसकने लगी, पर नितिन ने पीछे से मेरी साड़ी पकड़ ही ली और साड़ी खींचने से मुझे रुकना पड़ा. उसने मेरी साड़ी छोड़ एक हाथ से मुझे कमर से कस कर पकड़ लिया. उसके दूसरे हाथ में कलर की डिबिया थी.

मैं: “नहीं नितिन, पक्का कलर नहीं. मेरी साड़ी हलके कलर की हैं, इस पर ये काला दाग लग जायेगा तो नहीं निकलेगा. मेरी नयी साड़ी हैं.”

नितिन: “अरे कलर तो लगाना ही पड़ेगा, होली हैं. साड़ी की चिंता हैं तो भले ही निकाल दो पर कलर तो लगाऊंगा.”

ये कहते हुए उसने दूसरे हाथ से कलर की डिबिया टेबल पर रखी और उस हाथ से मेरी साड़ी का पल्लू मेरे कंधे से निकाला और नीचे गिरा दिया.

उसने अपना हाथ जो कमर पर था उसको हटाया जिससे साड़ी का पल्लू पूरा नीचे जमीन पर गिर गया. पहला हाथ कमर से हटते ही उसने अपने दूसरे हाथ से मेरी कमर को पकड़ लिया.

अब तक उसका हाथ साड़ी के ऊपर से मेरे कमर को पकडे था, अब बिना साड़ी के मेरी नंगी पतली कमर को दबोचे हुए था. साड़ी हटने से मेरी पतली कमर के ऊपर सफ़ेद ब्लाउज के अंदर मम्मो का उभार अच्छे से दिखने लगा था. अंदर ब्रा भी नहीं था और सफ़ेद रंग के पतले ब्लाउज से मेरे गहरे गुलाबी निप्पल की झलक हलकी सी दिखने लगी थी.

उसने मुझे इतना कस के पकड़ा था कि उसके लंड का हिस्सा मेरे नितंबो से चिपका हुआ था. शायद भांग का नशा करके आया हो ऐसा लग रहा था. मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था. उसको पूरा होश भी नहीं था कि होली की आड़ में वो क्या कर रहा हैं.

उसने अब वो पक्के कलर की डिबिया दूसरे खाली हाथ से उठाई और पहले हाथ के पास ले आया जिससे कमर को पकडे हुए था. कमर वाले हाथ की उंगलियों से उसने डिबिया का ढक्कन खोला और अब उसी हाथ में डिबिया को पकड़ लिया.

उसने थोड़ा रंग अपने एक हाथ पर लगा दिया और उंगलिया रगड़ कर कलर अपनी हथेली पर फैला दिया और मेरे दोनों गालो और ललाट पर लगा दिया. मैं ज्यादा नहीं हिली, वरना कमर वाले हाथ में पकड़ी खुली डिबिया से रंग मेरी साड़ी पर गिर सकता था.

मेरे चेहरे पर कलर लगाने के बाद मुझे लगा अब वो मुझे छोड़ देगा, पर उसने थोड़ा और कलर अपने हाथ में लिया.

मैं: “अब तो छोडो, लग तो गया मुँह पर पक्का कलर.”

नितिन: “रुको तो सही, और भी जगह लगाना हैं कलर.”

उसने अब कलर मेरी नंगी बाहों पर लगा दिया. और फिर थोड़ा कलर और ले मेरे पेट और कमर पर मलता हुआ मेरे बदन को छूने के मजे लेने लगा.

फिर उसने थोड़ा कलर और निकाला और मेरे ब्लाउज के ऊपर की तरफ पीठ और गर्दन पर कलर लगाया. मैं हिल नहीं रही थी इस डर से कि कलर कही साड़ी पर ना गिर जाये और इसका फायदा उठा उसने अपनी उंगलिया पीठ पर मेरे ब्लाउज में डाल कलर लगाने लगा.

अंदर ऊँगली जाते ही मैं विरोध में थोड़ा आगे की तरफ झुकी तो झटके से खिंच कर मेरे ब्लाउज का आगे से ऊपर का एक हुक भी टूट गया और मेरा क्लीवेज दिखने लगा. मैं फिर से शांत हो गयी.

नितिन: “ऊप्स, सॉरी, हुक टूट गया, ज्यादा हिलो मत, चुपचाप कलर लगवा लो. जो जो जगह दिख रही हैं बस वहा कलर लगाऊंगा.”

ये कहते हुए वो आगे से मेरे गले और फिर मेरे सीने पर कलर लगाने लगा. कलर लगाते हुए उसने थोड़ी उंगलिया ब्लाउज के अंदर भी डाल दी थी. एक हुक खुलने से उसको ज्यादा जगह मिल गयी थी. मेरे मम्मो के उभार को थोड़ा दबाते हुए उसने कलर लगा दिया.

वो किसी भी क्षण मेरे मम्मो को दबोच सकता था. मै खुद को छुड़ाने के लिए फिर थोड़ा जोर से हिली और उसकी उंगलिया अभी भी ब्लाउज के अंदर थी जिससे मेरा एक और हूक टूट कर निकल गया.

मेरे मम्मो के बीच की घाटी और भी दिखने लगी. मैं अब कही ना कही हार मानने लगी थी. अब उसने मुझे कमर से पकडे रखा था तो छोड़ दिया और कलर की डिबिया को रख दिया.

हुक टूट निकल चुके थे तो मैं अपने ब्लाउज के दोनों हिस्सों को अपने हाथ से पकड़ खड़ी हो गयी. कुछ अनहोनी होने से पहले छूट जाने से मैं खुश थी. मैंने अपने नीचे लटके पड़े साडी के पल्लू को ऊपर उठाया.

मैं: “ये कपड़ा फाड़ होली खेलने आये थे तुम?”

नितिन: “तुम चुपचाप कलर लगवा देती तो हुक नहीं टूटता ना.”

मैं: “चलो अब नाश्ता कर लो, होली खेल ली.”

नितिन: “बिना पानी के कौनसी होली होती हैं! अभी तुमको पानी में डालना बाकी हैं. पिछले साल तो तुम कमरे में बंद हो गयी थी बचने के लिए.”

ये सुनते ही मैं चीखते हुए रसोई की तरफ भागने को हुई और उसने मुझे फिर पीछे से पकड़ लिया.

मैं: “नहीं नितिन, प्लीज. मेरी साड़ी ड्राई क्लीन की हैं, उसको पानी में नहीं भिगो सकते ख़राब जो जाएगी. अब छोड़ दो, वैसे भी बहुत होली खेल ली हैं तुमने. अब प्लीज परेशान मत करो.”

नितिन: “बुरा न मानो होली हैं. साड़ी नयी आ जाएगी.”

मैं: “नहीं, बहुत महँगी हैं, पहली बार पहनी हैं.”

नितिन: “मुझे वैसे भी तुम्हे पानी में भिगोना हैं, साड़ी को नहीं. पहले साड़ी निकालते हैं फिर तुम्हे पानी में डालूंगा.”

मैं: “नहीं, तुम ऐसा नहीं कर सकते.”

नितिन: “अरे मैं करके बताता हूँ.”

मेरी साड़ी का पल्लू गिर कर वैसे ही मेरे मुड़े हुए बाहों में आ गया था, उसने उसको वहा से हटाया. मैंने साड़ी पकड़ कर रखी थी पर मैं जहा से पकड़ती वो दूसरी जगह से साड़ी निकाल देता. उसमे मेरी पूरी साड़ी को मेरे पेटीकोट से जल्दी ही अलग कर दिया और साड़ी सोफे पर फेंक दी.
 
मैं अब सिर्फ एक पेटीकोट और ब्लाउज में थी जिसके ऊपर के दो हुक टूट चुके थे. उसने मुझे उठाया और बाथरूम के अंदर ले आया. मुझे टब में खडी कर उसने नल चालू कर दिया और टब में पानी भरने लगा. मैं अपने ब्लाउज के टूटे हुए हुक के हिस्से पर हाथ रखे ब्लाउज को बंद रखे खड़ी थी.

मैं: “नितिन ये क्या कर रहे हो तुम बेशर्मो की तरह. मैंने कपडे नहीं पहन रखे हैं.”

नितिन: “पहन तो रखे हैं.”

मैं: “मेरा ब्लाउज आधा खुला है, और मैंने अंदर कुछ नहीं पहना हैं, कुछ तो समझो.”

नितिन: “अब झूठे बहाने मत मारो, पहले साड़ी का बहाना बनाया अब ये. बताओ कहा नहीं पहना हैं.”

मैं: “पागल हो गए हो तुम. अब मेरे कपड़ो में झांकोगे?”

नितिन: “भूल गयी, उस दिन पिकनिक में तुम, अशोक, मैं और पूजा पानी में उतरे थे. कपड़े बदलने की जगह नहीं थी तो कार में तुम लड़कियों ने कपड़े बदले थे और हम कार की खिड़की पर पीठ कर परदे बने थे.” (नितिन की पत्नी का नाम पूजा था.)

मैं: “पानी में धक्का भी तुम लोगो ने ही मारा था उस दिन. वैसे भी अशोक मेरे साथ था उस वक्त.”

नितिन: “अब होली के दिन बुरा मत मानो, गीला तो होना पड़ेगा.”

काश मैंने बिना दरवाजा खोले उसको बाहर से ही भगा दिया होता तो मेरी ये हालत नहीं होती. गनीमत थी कि कम से कम मेरी नयी साड़ी ख़राब होने से बच गई.

आधा पानी भरने के बाद उसने मुझे टब में बैठा दिया और अपनी दोनों हथेली में पानी भर मेरे ऊपर पानी डालने लगा. वह पानी डालते जाता और शरीर के उस हिस्से पर अपने हाथ से मुझे रगड़ते हुए पानी लगा रहा था. उसके हाथ मेरे पीठ, गर्दन, सीने, पेट, कमर पर आराम से फिरते हुए मुझे जैसे नहला रहे थे.

मैं उसके हाथों को अपने मम्मो से जैसे तैसे दूर रख रही थी. थोड़ी ही देर में मैं पूरी गीली हो गयी. उसका कलर ज्यादा पक्का नहीं था तो उसकी रगड़ से मेरा कलर भी काफी निकल गया था.

अब उसने मुझ पर पानी डालना और छूना बंद कर दिया और खड़ा हो गया. मैं भी अब टब में ही खड़ी हो गयी और उसकी तरफ हाथ बढ़ाते हुए पीछे रखा टॉवेल माँगा और उस पर ताना कसा.

मैं: “तुम मुझे होली खेला रहे थे या नहला रहे थे? साबुन भी लगा ही देते तो पूरी नहा लेती.”

मैं भूल ही गयी कि मेरा ब्लाउज सफ़ेद रंग का था और अंदर ब्रा भी नहीं पहना था. मेरा ब्लाउज गीला हो मेरे मम्मो से चिपक गया था और मेरे निप्पल साफ़ नजर आ रहे थे और मेरे मम्मो का उभार पूरी तरह से नजर आ रहा था. मेरा ब्लाउज पारदर्शी बन चूका था और मैं लगभग टॉपलेस खड़ी थी.

वो मेरे सीने को ही घूर रहा था तो मेरी भी नजर पड़ी और इससे पहले की मैं संभलती वो मेरी तरफ आगे बढ़ गया.

नितिन: “जैसी तुम्हारी इच्छा, मैं अब साबुन लगा देता हूँ.”

मैं: “नहींहीहीही, मैं मजाक कर रही थी.”

नितिन: “मगर मैंने तो सीरियसली ले लिया हैं, अब तो साबुन लगाना ही पड़ेगा.”

उसने साबुन उठाया और अपनी हथेली पर लगा कर हथेली मेरे शरीर पर रगड़ साबुन लगाने लगा. मेरे अंग जहा जहा से खुले थे वहा साबुन लगी हथेली रगड़ने लगा. मैं अपने दोनों हाथ अपने सीने पर लगाए हुए थी ताकि वो मेरे गीले ब्लाउज से दीखते हुए निप्पल ना देख पाए.

एक बार फिर साबुन लगाने के बहाने सीने पर कुछ ज्यादा ही नीचे जाकर मेरे ब्लाउज में हाथ डालने की भी कोशिश की उसने. मैं अपने हाथों से ब्लाउज कस कर पकड़ उसको खदेड़ते रही.

उसने मुझे सीधी करने के लिए मेरे पेटीकोट का नाड़ा पकड़ कर खिंचा जिससे वो नाड़ा खुल गया. वैसे तो पेटीकोट गीला हो मेरे शरीर से चिपक गया था फिर भी मैंने एहतियात के तौर पर एक हाथ सीने से हटा अपना पेटीकोट पकड़ लिया.

मैं: “बेशर्म, मेरे कपड़े क्यों खोल रहे हो.”

नितिन: “मैं तो तुम्हे सीधी कर रहा था गलती से खुल गया. पेटीकोट के अंदर तो कुछ पहन रखा होगा न? क्यों चिंता करती हो.”

मैं: “नितिन, ऐसी बातें करोगे मुझ से.”

नितिन: “भूल गयी, पूजा और तुम्हे दो महीने तक मेरे दोस्त के स्विमिंग पूल में स्विमिंग सिखाने ले गया था. वहा भी तो तुम लोग बिकिनी में रहते थे मेरे सामने. तब तो शर्म नहीं आयी.”

मैं: “अभी हम स्वीमिंग नहीं कर रहे हैं.”

नितिन: “तुम्हारी सोच कितनी छोटी हैं. पिछली होली पर अशोक ने पूजा को टब में पूरा लेटा दिया था. पूजा ने तो कोई शिकायत नहीं की.”

मैं: “तुम भी तो होंगे वहा.”

नितिन: “मैं तो तुम्हारे घर पर था, तुम्हे कमरे से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था, तुम अंदर बंद जो थी. वैसे पूजा की भी गलती थी. होली पूरी ख़त्म नहीं हुई और वो नहाने चली गयी थी तुम्हारी तरह. अशोक को पता चला तो रंग लेकर बाथरूम में ही घुस गया और रंग दिया पूजा को.”

मैं: “नहीं, अशोक तुम्हारी तरह नहीं हैं.”

नितिन: “सच बोल रहा हूँ, पूजा से कन्फर्म कर लेना. तुमने तो ब्लाउज और पेटीकोट भी पहन रखा हैं. पूजा ने तो नहाने के लिए कपड़े खोल लिए थे और सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी. मैंने उसको बोला था इतना जल्दी मत नहा.”

मैं: “तुम फेंक रहे हो या सच बोल रहे हो?”

नितिन: “सच, मैंने आकर उसका टब में लेटे हुए फोटो भी लिया था.”

मैं: “पूजा के साथ इतना हुआ और तुमने अशोक को कुछ नहीं कहा!”

नितिन: “होली पर इतनी मस्ती तो चलती हैं. वो पूजा भी तो हंस रही थी.”

मैं: “तो तुम मुझसे पूजा का बदला ले रहे हो?”

नितिन: “कैसा बदला, वो पूजा तो सुबह से इंतजार कर रही हैं अशोक कब आएगा होली खेलने. अब मुझे साबुन लगाने दो.”
 
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