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Guest
अब तक मैं पूरा बदन ढक कर रखती थी, पैंट और पूरी बांह के शर्ट, या कभी कभी लंबी स्कर्ट के साथ। बिच में कभी कभी पूरा ढका हुआ कुर्ता। हमेशा सीने के उभार को ढकता हुआ एक स्कार्फ़।
शायद मैं ऐसा कुछ दिखाती ही नहीं जिससे राहुल मेरी तरफ देखे। पर इन्ही कपड़ो के बावजूद बाकी के पुरुष कर्मचारी तो मुझे घूरते रहते हैं। दोष कपड़ो का नहीं शायद नीयत का हो। पर फिर भी मुझे कोशिश तो करनी ही थी।
अगले ही वीकेंड पर मैंने नयी शॉपिंग की और ऑफिस वियर के ऐसे कपडे चुने जो तंग हो और थोड़ा शरीर भी दिखाए। पता नहीं मुझे पर कैसा भूत चढ़ गया था, जिन चीजों से मैं बचने का प्रयास करना चाहती थी वो ही मैं कर रही थी।
फिर अपने आप को समझाया कि एक बार की ही तो बात हैं। बस एक बार अपनी तारीफ़ सुन लू, राहुल का व्रत तोड़ दू तो मेरा काम हो जायेगा और फिर मैं अपने उसूलो पर लौट आउंगी।
अगले सोमवार को मैंने नयी खरीदी पेंसिल स्कर्ट पहन ली। उस तंग काली घुटनो से थोड़ा ऊपर तक की शार्ट स्कर्ट के पीछे से मेरे नितंबो का उभार और उस पर मेरी पतली कमर बहुत ही सेक्सी लग रही था।
सोचा ऊपर भी कोई स्किन दिखाऊ टॉप पहन लेती हु पर अपने आप को रोका कि एक साथ दो झटके ठीक नहीं होंगे। मैंने अपना बटन डाउन सफ़ेद तंग शर्ट पहना। उसमे से मेरे सीने का उभार जैसे फट कर बाहर आ रहा था तो मैंने गले में स्कार्फ़ डाल कर उससे सपना सीना ढक लिया।
ऑफिस में पहुंचने के बाद तो क़यामत ही आ गयी, पुरुष तो पुरुष महिलाये भी तारीफ़ करने लगी कि मुझे कभी ऐसे छोटे कपड़ो में नहीं देखा। पुरुष कर्मचारी में कोई नहीं बचा जो आकर मेरी तारीफ़ ना कर गया हो।
मुझे लगा कि इन लोगो पर असर तो पड़ा हैं मतलब राहुल भी मुझ पर ध्यान जरूर देगा।
मैं इंतज़ार करने लगी कि कब राहुल अपने केबिन में आएगा और मैं वहा जाकर उसको आश्चर्यचकित कर पाऊँगी। हमेशा की तरह बिना दाए बाए देखे राहुल अपने केबिन में चला गया। उसके कुछ मिनट के बाद मैंने ही कोई बहाना बना उसके केबिन में जाने का मन बनाया।
मैं पहले वाशरूम में हो आयी अपना मेकअप टच अप कर लिया और कपड़े देख लिए कि सब ठीक लग रहा हैं। सोचा सीने पर पड़ा स्कार्फ़ भी हटा लू और अपने सीने का उभार भी दिखा दू फिर सोचा ठीक नहीं रहेगा।
वाशरूम से जाने लगी फिर कुछ सोच स्कार्फ़ हटा लिया और मेरे टाइट शर्ट से मेरे मम्मो का उभार बहुत ही उत्तेजित लग रहा था। फिर कुछ मन में आया और ऊपर का एक बटन भी खोल दिया। बहुत हल्का सा मम्मो का नंगा उभार दिखने लगा।
मैंने दूसरा बटन भी खोल कर देखा और मेरा क्लिवेज दिखने लगा। ये ज्यादा हो जायेगा सोच दूसरा बटन फिर बंद कर दिया। एकदम से जो कुछ दिख रहा था बंद हो गया। अपने शर्ट के दोनों खुले हिस्सों को पकड़ थोड़ा चौड़ा कर अपना सीना दिखाया।
अब बाहर जाने की बारी थी, पर राहुल के केबिन के बाहर अपनी सीट तक जाते जाते मुझे दूसरे लोगो के सामने से जाना होगा। मैंने अपना स्कार्फ़ फिर से कंधे पर डाल अपना खुला सीना ढक लिया।
मैं अपनी सीट पर पहुंची। आस पास देखा, सब अपने क्यूबिकल में बैठे थे तो कोई नजर नहीं आया, मैंने अपना स्कार्फ़ रख दिया और अपने सीने को देखा और शर्ट को फिर इस तरह एडजस्ट कर लिया कि मेरा सीना दिखने लगे।
मैं फाइल उठा राहुल के केबिन की तरफ मुड़ी और एक दस्तक दी। राहुल ने अंदर आने को बोला और मैंने एक गहरी सांस भरी और अंदर घुसी। राहुल ने एक नजर देखा कौन आया हैं और फिर नीचे टेबल पर पड़े अपने लैपटॉप में देख अपना काम करने हुए पूछा कि मैं किस काम से आयी हूँ।
मुझे उस वक्त इतना गुस्सा आया कि मैं बता नहीं सकती। खैर मैं जिस बहाने से गयी वो बताया और उसने मुझे देखे बिना उसका समाधान कर दिया और मुझे एक हारे हुए खिलाडी की तरह वापिस वहा से जाना था।
शायद मैं ऐसा कुछ दिखाती ही नहीं जिससे राहुल मेरी तरफ देखे। पर इन्ही कपड़ो के बावजूद बाकी के पुरुष कर्मचारी तो मुझे घूरते रहते हैं। दोष कपड़ो का नहीं शायद नीयत का हो। पर फिर भी मुझे कोशिश तो करनी ही थी।
अगले ही वीकेंड पर मैंने नयी शॉपिंग की और ऑफिस वियर के ऐसे कपडे चुने जो तंग हो और थोड़ा शरीर भी दिखाए। पता नहीं मुझे पर कैसा भूत चढ़ गया था, जिन चीजों से मैं बचने का प्रयास करना चाहती थी वो ही मैं कर रही थी।
फिर अपने आप को समझाया कि एक बार की ही तो बात हैं। बस एक बार अपनी तारीफ़ सुन लू, राहुल का व्रत तोड़ दू तो मेरा काम हो जायेगा और फिर मैं अपने उसूलो पर लौट आउंगी।
अगले सोमवार को मैंने नयी खरीदी पेंसिल स्कर्ट पहन ली। उस तंग काली घुटनो से थोड़ा ऊपर तक की शार्ट स्कर्ट के पीछे से मेरे नितंबो का उभार और उस पर मेरी पतली कमर बहुत ही सेक्सी लग रही था।
सोचा ऊपर भी कोई स्किन दिखाऊ टॉप पहन लेती हु पर अपने आप को रोका कि एक साथ दो झटके ठीक नहीं होंगे। मैंने अपना बटन डाउन सफ़ेद तंग शर्ट पहना। उसमे से मेरे सीने का उभार जैसे फट कर बाहर आ रहा था तो मैंने गले में स्कार्फ़ डाल कर उससे सपना सीना ढक लिया।
ऑफिस में पहुंचने के बाद तो क़यामत ही आ गयी, पुरुष तो पुरुष महिलाये भी तारीफ़ करने लगी कि मुझे कभी ऐसे छोटे कपड़ो में नहीं देखा। पुरुष कर्मचारी में कोई नहीं बचा जो आकर मेरी तारीफ़ ना कर गया हो।
मुझे लगा कि इन लोगो पर असर तो पड़ा हैं मतलब राहुल भी मुझ पर ध्यान जरूर देगा।
मैं इंतज़ार करने लगी कि कब राहुल अपने केबिन में आएगा और मैं वहा जाकर उसको आश्चर्यचकित कर पाऊँगी। हमेशा की तरह बिना दाए बाए देखे राहुल अपने केबिन में चला गया। उसके कुछ मिनट के बाद मैंने ही कोई बहाना बना उसके केबिन में जाने का मन बनाया।
मैं पहले वाशरूम में हो आयी अपना मेकअप टच अप कर लिया और कपड़े देख लिए कि सब ठीक लग रहा हैं। सोचा सीने पर पड़ा स्कार्फ़ भी हटा लू और अपने सीने का उभार भी दिखा दू फिर सोचा ठीक नहीं रहेगा।
वाशरूम से जाने लगी फिर कुछ सोच स्कार्फ़ हटा लिया और मेरे टाइट शर्ट से मेरे मम्मो का उभार बहुत ही उत्तेजित लग रहा था। फिर कुछ मन में आया और ऊपर का एक बटन भी खोल दिया। बहुत हल्का सा मम्मो का नंगा उभार दिखने लगा।
मैंने दूसरा बटन भी खोल कर देखा और मेरा क्लिवेज दिखने लगा। ये ज्यादा हो जायेगा सोच दूसरा बटन फिर बंद कर दिया। एकदम से जो कुछ दिख रहा था बंद हो गया। अपने शर्ट के दोनों खुले हिस्सों को पकड़ थोड़ा चौड़ा कर अपना सीना दिखाया।
अब बाहर जाने की बारी थी, पर राहुल के केबिन के बाहर अपनी सीट तक जाते जाते मुझे दूसरे लोगो के सामने से जाना होगा। मैंने अपना स्कार्फ़ फिर से कंधे पर डाल अपना खुला सीना ढक लिया।
मैं अपनी सीट पर पहुंची। आस पास देखा, सब अपने क्यूबिकल में बैठे थे तो कोई नजर नहीं आया, मैंने अपना स्कार्फ़ रख दिया और अपने सीने को देखा और शर्ट को फिर इस तरह एडजस्ट कर लिया कि मेरा सीना दिखने लगे।
मैं फाइल उठा राहुल के केबिन की तरफ मुड़ी और एक दस्तक दी। राहुल ने अंदर आने को बोला और मैंने एक गहरी सांस भरी और अंदर घुसी। राहुल ने एक नजर देखा कौन आया हैं और फिर नीचे टेबल पर पड़े अपने लैपटॉप में देख अपना काम करने हुए पूछा कि मैं किस काम से आयी हूँ।
मुझे उस वक्त इतना गुस्सा आया कि मैं बता नहीं सकती। खैर मैं जिस बहाने से गयी वो बताया और उसने मुझे देखे बिना उसका समाधान कर दिया और मुझे एक हारे हुए खिलाडी की तरह वापिस वहा से जाना था।