• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
अब मैं सोच रही थी कि पिछले कुछ मिनटों में मैंने क्या किया। मैंने अपनी कमजोरी को राहुल के सामने पूरा खोल दिया और उसके इशारो पर नाचती रही। फिर सोचा वो चाहता तो उस वक़्त मेरी चूत को अपने लंड से भी चोद सकता था या मुझे आगे से पूरा नंगा देख सकता था जो मैं अब तक छुपाती आ रही थी। पर इतना होने के बाद मैं उसका सामना कैसे करुँगी।

मैं अब नजरे झुकाये बाहर आयी। राहुल अपना सूट पहन तैयार था। हम दोनों बाहर आकर कार में बैठे। हम दोनों चुपचाप बैठे थे।

राहुल: “तुम्हे अपने आप को रोकना नहीं चाहिए, तुम्हारी बहुत सी दबी हुई इच्छाएं हैं, उनको बाहर आने दो, रोको मत। खुल कर जियो।”

मैं चुप चाप नजरे झुकाये सब सुनती रही।

राहुल: “कुछ तो बोलो ”

मैं कुछ नहीं बोल पायी। चुप ही रही।

राहुल: “तो फिर कल मेरे केबिन से शुरू करे”

मेरे मुँह पर तो जैसे शर्म का ताला लग चूका था, मैंने सिर्फ ना में गरदन हिला दी।

राहुल: “हां बोल कर अब पीछे मत हटो। इतनी जगहों के लिए हां बोला था…अच्छा बताओ उन सब में से कौन सी जगह के लिए तैयार हो।

मैं सर झुकाये शर्म से सिर्फ गरदन हिलाते हुए ना कर रही थी।

राहुल: “अरे शर्माओ मत, बोल भी दो, अब कैसी शर्म”

मैं: “इसी कारण से मैंने उस दिन तुम्हारी जगह जोसफ को चुना था। एक बार कुछ हो गया तो हमेशा मुझे ऐसी बातें सुनने को मिलेगी।”

राहुल: “अच्छा सॉरी, मैं बार बार नहीं बोलूंगा, बस एक बार बता दो, कहा करेंगे?”

मैं: “जो होना था हो चूका, अब कुछ नहीं होगा”

राहुल: ” अच्छा ठीक हैं, अब मैं नहीं बोलूंगा। वैसे डील मिलने वाली हैं तो हम सेलिब्रेट करते हैं।”

मैं: “तुम फिर से वैसी ही बातें कर रहे हो। ”

राहुल: “मैं असली पार्टी की बात का रहा था। फार्म हाउस पर पार्टी रखते हैं ।”

मैं: “ऊप्स सॉरी, इस बार मैं पति को भी लाऊंगी. पार्टी में।”

राहुल: “ओह, तो पति के सामने करवाने का ऑप्शन चुना हैं तो तुमने। ठीक हैं। ”

मैं: “हे? मैं पार्टी की बात कर रही हूँ। वैसे भी पति के सामने करवाने से बेहतर बंद कमरे में करवा लू।”

राहुल: “मैं तो पहले ही बोल रहा था, मेरे केबिन में कर लेते हैं। तो कल का पक्का रखे प्रोग्राम फिर। ”

मैं: “अब इस बारे में कोई भी बात की तो मैं कार से उतर जाऊंगी”

राहुल “इस पार्टी में वैसे भी सिर्फ स्टाफ होगा उसकी फॅमिली नहीं। फॅमिली के लिए तो सालाना पार्टी होती ही है।”

उसके बाद राहुल पुरे रास्ते चुप ही रहा। पर कार ऑफिस पहुंचते ही उसने मुझे फिर छेड़ ही दिया।

राहुल: “अभी मैं बार बार याद नहीं दिलवाऊंगा, कल मेरे केबिन में हमारा प्रोग्राम हैं।”

मैं सर हिलाते हुए ऑफिस में आ गयी। ये तो मुझे अब ऐसे ही परेशान करता रहेगा। वैसे ये वाला राहुल पहले के खड़ूस राहुल बॉस से बेहतर था।

दोपहर बाद सैंड्रा और जोसफ हमारे ऑफिस में आये। मैंने और राहुल ने उनको रिसीव किया और सीधा राहुल के केबिन में आये। सभी लोगो को अपेक्षा थी कि आज हमें डील मिल ही जाएगी। हम चारो राहुल के केबिन में पहुंचे और बैठ गए।

सैंड्रा: “राहुल मैंने बोला वो काम हुआ कि नहीं।”

राहुल: “हो गया हैं, प्रतिमा जरा वीडियो दिखाओ।”

मैं अपने मोबाइल पर पहले ही वीडियो ओपन कर तैयार बैठी थी। मैंने अपना मोबाइल सैंड्रा की तरफ बढ़ाया।

सैंड्रा: “सबूत की जरुरत नहीं, राहुल का चेहरा ही बता रहा हैं कि काम हो गया।”

राहुल: “ठीक हैं प्रतिमा तुम जाओ। कुछ काम होगा तो बुला लूंगा। ”
 
मैं अब बाहर अपने क्यूबिकल में आ गयी। फ़ालतू में इतनी मेहनत कर अपनी इज्जत गवाई, राहुल अपना ये वाला सतुष्ट चेहरा दिखा देता तो मुझे कुछ करना ही नहीं पड़ता। मैंने फिर भी वो वीडियो डिलीट नहीं किया, पता नहीं कब मांग ले । डील साइन होंने तक तो रखना ही था।

करीब पंद्रह मिनट के बाद वो तीनो बाहर आये। राहुल ने तीन बार ताली बजा कर सबका ध्यान आकर्षित किया और अपने पास बुलाया कुछ घोषणा करनी थी। सबको आभास हो गया क्या घोषणा हैं। मैं भी खड़ी हुई। मेरी जगह तो केबिन के एकदम बाहर ही थी। मैंने देखा जोसफ का

विशाल शरीर मेरे सामने था और मैं उसके आगे खड़े राहुल को बड़ी मुश्किल से देख पा रही थी।

जोसफ के दोनों हाथ उसकी पीठ की तरफ थे और मोबाइल खुला था। मैंने ध्यान दिया उसमे लिखा था “मेरे पास तुम्हारे लिए एक वीडियो हैं। अपना मोबाइल नंबर मुझे नीचे लिखे नंबर भेजो , मैं तुम्हे वो वीडियो भेजूंगा।”

जोसफ दूसरे लोगो से छुपा कर मुझे कोई मेसेज दे रहा था। वो कौनसे वीडियो की बात कर रहा था। तब तक सारा स्टाफ राहुल के सामने जमा हो गया था और राहुल सब स्टाफ का शुक्रिया कर रहा था।

मुझे जोसफ का मेसेज देख लगा उसके पास जरूर मेरे और उसके बीच गेस्ट हाउस में हुई चुदाई का वीडियो हैं और वो मुझे ब्लैकमेल करना चाहता हैं। कल तो बड़ा दिलदार बन कर दया दिखा रहा था और आज ब्लैकमेल पर उतर आया। मैंने जल्दी से अपने मोबाइल से उसके मोबाइल स्क्रीन का फोटो ले लिया ताकि उसका नंबर तो नोट कर लू, बाकि क्या करना हैं, बाद में देखा जायेगा।

राहुल ने घोषणा कर दी कि हमे डील मिल चुकी हैं और सारा ऑफिस तालियों की गड़गड़ाहट से भर गया। किसी को भी नहीं पता कि उसके लिए मैं दो बार अपनी इज्जत दे चुकी हु और एक राक्षस उसी दौरान मेरा फिर से भंजन करने को उतारू था।

बाकी सब उपस्थित लोग बहुत खुश थे सिर्फ मैं चिंता में थी। राहुल ने इस इस डील मिलने की ख़ुशी में अगले दिन शुक्रवार को शाम को अपने फार्म हाउस में पार्टी की घोषणा की । सैंड्रा व जोसफ विदा ले जाने लगे, जाते जाते जोसफ मुझे आँखों से इशारे कर गया।

सब लोग अपनी अपनी जगह लौटने लगे और मैं तनाव में अपनी सीट पर बैठ गयी। मेरी मुसीबते तो ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी। मैंने सोचा मुझे राहुल को सब बता देना चाहिए। पर वो तो खुद मेरे मजे ले रहा था। राहुल इतना बुरा तो नहीं होगा, हो सकता हैं उसने वो सब मजाक किया हो, इस मामले में मेरी मदद कर देगा।

बहु देर तक मैं निर्णय नहीं ले पायी। फिर बहुत सोच विचार कर घंटे भर बाद मैंने जोसफ के नंबर पर मैसेज किया “मुझे पता हैं तुम मुझे ब्लैकमेल कर रहे हो। अगले हफ्ते तुम जहा बुलाओगे आ जाउंगी, पर तुम्हे मेरे वीडियो डिलीट करने होंगे।”

मुझे डर लगा कही वो आज या कल ना बुला ले, मुझे थोड़ा समय चाहिए था सोचने का।मैंने पहले अपना और राहुल के बीच का सुबह वाला वीडियो डिलीट किया। फिर मैंने तुरंत अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया। अंत में मैंने सोचा मुझे राहुल की मदद लेनी चाहिए। मैं राहुल के केबिन में गयी।

राहुल:: “अरे तुम आज ही आ गयी, केबिन में करने का तो कल प्रोग्राम हैं। तुम इतना सीरियस क्यों हो?”

मैंने उसे जोसफ की ब्लैकमेलिंग के बारे में सब बताया।
 
राहुल: “तुम अपना फ़ोन कल पार्टी तक बंद ही रखो, मैं सैंड्रा को बोल कर जोसफ को समझा दूंगा। चिंता मत करो तुम्हे अब जोसफ परेशान नहीं करेगा, मेरी गारंटी हैं”

मुझे उसकी बात सुन सांत्वना मिली और वापिस अपनी सीट पर आ गयी।

रात भर मैं सोचती रही, एक तरफ राहुल हैं जो मेरी दुसरो से बराबर रक्षा कर रहा हैं, दूसरी तरफ हैं मेरा पति अशोक, जिसने कई बार मुझे मुसीबत में डाल दिया। मेरी इज्जत से लोगो को खिलवाड़ करने दी। मेरे दिल में अब राहुल के लिए आकर्षण बढ़ने लगा था।

अगली सुबह तैयार होते वक्त मुझे अपने वो छोटे कपड़े याद आये जो मैंने राहुल का ध्यान आकर्षित कर तारीफ़ पाने को खरीद तो लिए थे पर आज तक पहने नहीं थे। मैंने वो मिनी स्कर्ट निकाली और पहन ली। उसको पहनने का समय आखिर आ ही गया था। अब मैं ऐसे छोटे कपड़े पहन राहुल के सामने बेधड़क जा सकती हूँ। उसके ऊपर मैंने स्लीवलेस टॉप पहन लिया।

मुझे पहली बार इतने छोटे कपड़े पहने देख ऑफिस मे सबकी आँखें खुल गयी। मैं अपने हाई हील सैंडल के साथ मिनी स्कर्ट में ऑफिस में आकर्षण का केंद्र बन गयी। ऑफिस में वैसे भी शाम को होने वाली पार्टी का माहौल था।

राहुल ऑफिस में आया और आज पहली बार उसने केबिन में जाने से पहले मेरी तरफ मुड़ कर देखा। उसका मेरे ऊपर अधिकार जो बढ़ गया था। अपने जरुरी काम निपटाने के बाद उसने मुझे केबिन में बुलाया। मैं उसके केबिन में पहुंची, वो मुझे ऊपर से नीचे घूरते हुए देखने लगा ।

राहुल: “बहुत हॉट लग रही हो। ”

मैं: “थैंक यू , कुछ काम था मुझसे”

राहुल: “मैंने प्रमोशन की लिस्ट बना दी हैं , इसमें तुम्हारा भी नाम हैं । बधाई हो ”

मैं: “थैंक यू सो मच।”

राहुल: “ट्रीट तो बनती हैं।”

मैं: “ठीक हैं, कौनसी मिठाई खाओगे ले आउंगी। ”

राहुल: “मुझे मिठाई इतनी पसंद नहीं, जूस पी लूंगा।”

मैं: “ठीक हैं, मिल जायेगा।”

राहुल: “तो पिलाओ अभी।”

मैं: “चलो बाहर शॉप पर। ”

राहुल : “फ्रूट का नहीं, मुझे तुम्हारे दोनों होंठों का रस पीना हैं। ”

जिसका मुझे डर था वही हो रहा था। वो मुझे शर्मिंदा कर रहा था।

मैं: “मुझे नहीं चाहिए ऐसा प्रमोशन।”

राहुल: “प्रमोशन तो तुम्हारा हक़ हैं, ट्रीट नहीं देनी तो मत दो, एक दोस्त की हैसियत से मांग रहा था, कोई जबरदस्ती नहीं। ”

मैं अब वापिस मुड़ कर जाने लगी।

राहुल: “मैंने सैंड्रा से बात की थी जोसफ के बारे में। जोसफ कल बाहर जा रहा हैं किसी ख़ास काम से, अगले हफ्ते उसके आने के बाद सैंड्रा उसे समझा देगी। ”

मैं: “थैंक यू, मैं कल सुबह तक फ़ोन बंद ही रखूंगी। तुमने मेरी बहुत बड़ी हेल्प की हैं। ”

राहुल: “मैं तो तुम्हे दोस्त मानता हूँ, तुम मानो या ना मानो।”

मैं: “तुम नाराज हो? पर मैं ये नहीं कर सकती। ”

राहुल: “जैक को तो चूमा था।”

मैं: “सिर्फ दो सेकंड के लिए इजाजत दूंगी, और ये आखिरी बार होगा। ”

राहुल: “पांच सेकण्ड्स और दोनों होंठो पर।”

मैं: “हम्म, ठीक हैं पांच सेकंड से एक सेकंड भी ज्यादा नहीं, मैं गिनूँगी।”
 
मैं राहुल के करीब पहुंची, हम दोनों की ही साँसे बहुत तेज चल रही थी। दो बार चूमते चूमते मैंने उसे रोक दिया था और आज आख़िरकार पांच सेकंड के लिए ही सही मैंने उसे इजाजत दे दी थी। उसने अपने दोनों हाथ मेरे एक एक कान के नीचे गले के पास रखे और मुझे अपने करीब खिंचा। हम इतने करीब थे की एक दूसरे की गरम साँसे महसूस कर रहे थे।

उसने अपना सर थोड़ा तिरछा किया और मैंने अपने होंठ जरा सा खोल कर आँखें बंद कर ली। वो घड़ी आ चुकी थी जब पहली बार राहुल मुझे चूमेगा। जल्द ही मेरा ऊपर वाला होंठ उसके दोनों होंठो के बीच था, और उसने उसे चूसना शुरू कर दिया। मेरी गिनती चालू थी और उसने मेरे होंठ तीन बार ही चूसे थे कि मैं अलग हो गयी पांच सेकंड हो चुके थे।

मैंने आँखें खोली । मेरे होंठ उसके रस से गीले हो चुके थे और उसके होंठ मेरे रस से। मेरी साँसे और भी गहरी हो चुकी थी। वो फिर से आगे बढ़ा, अपने वादे के मुताबिक उसको मेरा निचला होंठ भी चूसना था। इस बार उसने अपने होंठो के बीच मेरा निचला होंठ भरा और जल्दी जल्दी मेरा रस लेने लगा। उसका मजा शुरू ही हुआ कि मेरे पांच सेकंड हो चुके थे और हम अलग हुए।

मैंअपने होंठो पर जबान फेर रही थी क्यों कि वहा मीठी गुदगुदी हो रही थी। वो मुझे तरसती निगाहो से देख रहा था मुँह को लगा हाथ को ना आया। उसकी प्यास तो पूरी मिटी भी नहीं थी। मैं मुड़ कर जाने लगी और उसने मुझे रोक लिया।

राहुल: “कहाँ जा रही हो? नीचे के होंठ बाकी हैं अभी।”

मैं: “अभी निचला होंठ ही तो चूसा था तुमने। ”

उसने मेरी चूत की तरफ इशारा किया और बोला : “मैं यहाँ के, नीचे के होंठो की बात कर रहा था।”

मैं: “नहीं वहां नहीं, मैं कपड़े खोल नहीं दिखा सकती”

राहुल: “कल तो खोले थे ”

मैं: “पर सामने से तो नहीं दिखाया था ”

राहुल: “फिर भी पीछे से तुम्हारे नीचे वाले होंठ दिख रहे थे, वैसे ही दिखा दो, मैं रस ले लूंगा ऐसे ही।”

मैं: “सिर्फ पांच सेकंड के लिए। ”

राहुल: “पांच सेकंड अगर आगे से होंठ चूमने दोगी तो। पीछे से कोई समय सीमा नहीं होगी। सोच लो।”

मैं अभी भी शर्म से राहुल को अपनी चूत सामने से दिखाने में असहज थी। इसलिए पीछे से मेरी चूत का रस पिलाने के लिए मान गयी।

मैं: “पीछे से चुम लो, पर सिर्फ एक मिनट। मंजूर हो तो बोलो वरना मैं जाती हूँ। ”

राहुल: “ठीक हैं, मेरे टेबल पर आ जाओ।”

वो अपनी कुर्सी पर जाकर बैठ गया और मैं उसकी तरफ पीठ कर खड़ी हो गयी। उसने मेरी मिनी स्कर्ट का हुक खोल कर ढीला कर दिया और नीचे से हाथ डाल कर मेरी पैंटी पूरी निकाल दी। फिर मुझे अपनी टेबल पर चढ़ा कर मुझे कल की तरह कोहनियो और घुटनो के बल बैठा दिया। उसने मेरी मिनी स्कर्ट को ऊपर की तरफ खींच कर मेरी गांड को नंगा कर दिया।

उसकी पहले की चुंबन और बने माहौल से मेरी चूत वैसे ही थोड़ी गीली हो अपना रस छोड़ चुकी थी।

राहुल: “अपने पाँव और खोलो, अपने होंठ पुरे दिखाओ….हां ऐसे….पहले थोड़ा रस बनाता हु फिर चूसूंगा”

ये कहते हुए उसने अपनी ऊँगली मेरी खुली चूत की दरार में रगड़नी शुरू कर दी। उसकी ऊँगली की रगड़ से मेरी गांड और टाँगे थरथराने लगी। इसके साथ ही मेरी चूत में और पानी बनने लगा और बाहर आने को उतारू हो गया। मगर वो अपनी ऊँगली प्यार से फेरता रहा। मैं मेरी चूत के होंठ गीले महसूस कर रही थी।

मैंने अपने सर को दोनों हाथों के बीच डालते अपनी दोनों टांगो के बीच देखा। राहुल की ऊँगली मेरी चूत पर घुम कर गीली हो चुकी थी। मेरी चूत के होंठ खुले थे और बीच में घाटी बन चुकी थी जहा उसकी ऊँगली रगड़ रही थी । थोड़ी देर बाद तो मेरी चूत से दो तीन बून्द पानी नीचे टेबल पर टपक पड़ा।

मैं: “बन गया रस, अब जल्दी से पी कर ख़त्म करो ये नाटक”

राहुल: “तुम बोलो तो ऊँगली की जगह थोड़ी मोटी चीज डाल दू? ज्यादा मजा आएगा दोनों को ”

मैं: “नहीं, मैं अपनी चीख रोक नहीं पाऊँगी, ये ऑफिस हैं।”

राहुल: “तो आज शाम पार्टी में कर सकते हैं ?”

मैं: “तुम्हे ये काम करना हैं या मैं जाऊ ?”

उसने अब ऊँगली रगड़ना बंद किया और मैं उसके होंठ और दाढ़ी को अपनी दोनों टांगो के बीच देख सकती थी। उसके मुँह के होंठ मेरी चूत के होंठो पर लग रस चाट कर मजे ले रहे थे और मैं हलकी सिसकियाँ निकाल रही थी। मैंने भी घडी का ध्यान नहीं रखा और वो एक मिनट की बजाय काफी ज्यादा मेरे चूत के होंठो को मुँह में दबा मजा लेता रहा।
 
मैं अनियंत्रित होने लगी, कही मैं झड़ ही ना जाऊ इसलिए मैंने उसको रोका और थोड़ा आगे हटी। अपनी स्कर्ट नीचे कर दी और पीछे खिसक कर टेबल से उतर गयी । मैं अपनी स्कर्ट का हुक फिर बांधती उससे पहले ही उसने मुझे मेरी कमर से पकड़ कर मुझ सहित अपनी कुर्सी पर बैठ गया। मैं उसकी जांघो पर बैठी थी।

उसने एक हाथ से मुझे झकड़े हुए दूसरे हाथ से अपने पैंट की चैन खोल दी और अपना कड़क हो चुका लंड बाहर निकाल दिया। वो एकदम तैयार था चोदने के लिए। क्या वो मुझे यही ऑफिस में चोदने वाला था। मैं उसको मना करने लगी कि यहाँ नहीं कर सकते पर उसने मेरी स्कर्ट को पीछे से ऊपर कर अपनी गोद में बैठा लिया।

मैं अपनी गांड पर उसके कठोर लंड की छुअन का अनुभव कर रही थी। मेरी चूत तो पहले ही गीली थी तो आसानी से उसका लंड एक झटके में मेरी चूत के अंदर फिसल गया। बाकी का उसने जोर लगाते हुए मेरी चूत में चार पांच इंच लंड अंदर कर दिया। मैं उठने की कोशिश कर रही थी पर वो मुझे नीचे बैठाये रख रहा था।

मैं उठने की कोशिश करती और वो मुझे नीचे बैठा देता, इस चक्कर में उसका लंड मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था। मैं तो पहले ही झड़ने वाली थी पर अब उसके लंड की चूत में होती रगड़ से मैं झड़ने की करीब आ गयी।

मैंने अब ऊपर उठना ही बंद कर दिया। पर उसका लंड उत्तेजना के मारे मेरी चूत में बिना हरकत के ही सिकुड़ और फुल रहा था। जिससे मेरी चूत में भी कम्पन हो रहा था। मैं किसी भी क्षण झड़ने वाली थी।

मैं: “राहुल, मेरा पानी निकलने वाला हैं, तुम्हारी पैंट खराब हो जाएगी।”

राहुल ने मुझे छोड़ दिया और बोला: “चलो छोड़ दिया, तुम्हारी इच्छा तुम उठना चाहती हो या चुदना चाहती हो”

मेरी ऐसी हालत थी कि मैं चाहते हुए भी उठ नहीं पा रही थी। मैंने सोचा मैं पूरा कर ही लेती हूँ। पर तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और मैं घबरा कर राहुल के ऊपर से उठी। एक सांस में मैंने जल्दी से अपनी स्कर्ट नीचे की और उसका हुक लगा लिया। मैं वापिस टेबल के दूसरी तरफ आ गयी, तब तक राहुल ने भी अपनी चैन बंद कर कुर्सी सही लगा ली।

ये सब मुश्किल से पांच सात सेकण्ड्स में हो गया और राहुल ने दस्तक देने वाले को अंदर बुलाया। वो सुधा आंटी थी, वो शायद किसी काम से आयी थी।

मैं एकदम घबराई हुई खड़ी थी और राहुल से इजाजत लेकर बाहर आयी और सीधा वाशरूम गयी। मेरी चूत में अभी तक हलकी सी हलचल थी, मेरी पैंटी भी राहुल की कुर्सी के आस पास कही गिरी पड़ी थी जो जल्दबाजी में मैंने नहीं उठायी थी क्यों कि पहनने का समय ही नहीं था ।

मैं बाल बाल बची, अगर कोई बिना दस्तक अंदर आ जाता तो पुरे ऑफिस में मेरी ही बातें होती। वाशरूम से मैं वापस आयी देखा सुधा आंटी केबिन से बाहर आ चुकी थी।

मुझे अंदर जाकर अपनी पैंटी लेनी थी पर हिम्मत नहीं हो रही थी। मैं सीधा अपनी जगह आकर बैठ गयी। अंदर पैंटी नहीं पहने होने से कुछ खाली खाली सा लग रहा था। करीब आधे घंटे बाद मैं फिर राहुल के केबिन में गयी।

राहुल ने ऑफिस के केबिन में ही मेरे मजे लूट लिए थे और हम पकडे जाने से बाल बाल बच गए थे। इस चक्कर में मेरी पैंटी उसके केबिन में रह गयी जो मुझे चाहिए थी, मैं फिर राहुल के केबिन में गयी।

मैं: “मेरे कपड़े यहाँ रह गए थे”

राहुल: “कौन से कपड़े?”

मुझे पता था वो जानबूझ कर अनजान बन मेरे मुँह से सुनना चाहता था। मैं वापिस जाने लगी तो उसने आवाज लगा कर रोका। मैंने मुड़ कर देखा वो अपने हाथ में मेरी पैंटी पकड़ हिला रहा था।

राहुल: “ये चाहिए तुम्हे?”

मैंने आगे आकर अपना हाथ बढ़ाया, पर उसने अपना हाथ पीछे खिंच लिया।

राहुल: “इसे मैं तुम्हे पहनाउंगा ”

मै: “नहीं चाहिए, तुम्ही पहन लो”

राहुल: “अच्छा ये लो। पर इसे हाथ में लेकर बाहर कैसे जाओगी? किसी ने देख लिया तो ! पहनना तो यहाँ मेरे सामने ही पड़ेगा।”

बात तो उसकी भी सही थी। ऑफिस के अंदर तो पर्स लेकर नहीं घूम सकती। मुझे उसके सामने ही वो पैंटी पहननी थी। मैंने उससे वो पैंटी ली और उसकी तरफ पीठ कर मैंने पैंटी पांवो में डाल ऊपर खिंच ली और बड़ी सावधानी से बिना अपने ज्यादा अंग दिखाए वो पहन ली।

राहुल: “थोड़ा थोड़ा करने से मजा नहीं आया, पूरा करना हैं ढंग से”

मैं: “आगे से मैं ऑफिस में तुम्हारे पास भी नहीं आउंगी, पकड़े जाते तो आज?”

राहुल: “यहाँ नहीं करेंगे तो कहा करेंगे?”

मैं: “क्या करना हैं तुम्हे?”

राहुल: “चार काम करने हैं। पहला, तुम्हारे ऊपर और नीचे के होंठो का जी भर कर रस चूसना हैं। दूसरा, तुम्हारे मम्मे देखने हैं और चूसने हैं। तीसरा, तुम्हारे मम्मो को अपने हाथो से दूध दुहना हैं। चौथा, सामने से तुम्हारी चूत के दर्शन कर पूरा चोदना हैं”

मैं: “सैंड्रा का शुक्र मनाओ कि तुम मेरे कपड़े खोल पाए और कल पीछे से कुछ कर पाए। बाकि के ये चारो काम तुम सपने में ही करना”

राहुल: “ये चारो काम आज रात को ही होंगे पार्टी के बाद । तुम आज रात मेरे साथ मेरे फार्म हाउस पर ही रुकने वाली हो। अपने घर पर बोल कर आना कि सुबह आओगी”

मैं: “ऐसा कुछ नहीं होने वाला हैं”

राहुल: “और पांचवा काम तुम करने वाली हो, मैं तुम्हारा नीचे का रस लूंगा तो तुम भी तो मेरा रस चुसोगी”

मैं: “मैं भी देखती हु, कैसे होता हैं ”

मैं अब बाहर अपनी सीट पर आ गयी। मगर मन में यही चल रहा था कि क्या वो मेरे साथ सच में ये सब करने वाला हैं। पर मैं क्यों उसके साथ रात को रहूंगी। इतने लोगो के बीच तो वो हाथ लगा नहीं पायेगा। शाम को पार्टी के चक्कर में सब लोग ऑफिस से जल्दी निकल गए घर जाकर तैयार होने के लिए।
 
घर आकर मैं भी तैयार होने लगी। आज राहुल मेरे कपड़े देख भड़क ना जाये इसलिए मैंने जो ब्लाउज पहना वो पीठ से पूरा बंद था। कोहनियो तक आस्तीन थी और चाइनीज कॉलर था। मैंने अपनी नारंगी रंग की साड़ी लपेट दी। पुरे कपड़े पहनने के बावजूद मैं अपने कर्व तो नहीं छुपा सकती थी। बिना अंगप्रदर्शन किये हुए भी मेरे सीने और गांड के उभार मेरी तरफ किसी को भी आकर्षित करने को काफी थे।

राहुल ने पार्टी स्थल तक पहुंचने की व्यवस्था कर दी थी।

आज सब लोग बिना फेमिली के आये थे तो वहा पर माहौल बिलकुल ही अलग था। ऑफिस की सारी कुंवारी लड़कियों सहित शादीशुदा लड़किया भी छोटे कपड़े और स्किन दिखाऊ साड़ी पहन आयी थी। शायद पिछली बार पार्टी में मैंने जो कपड़े पहने थे उससे प्रेरणा ली थी।

पुरुष स्टाफ की तो चांदी हो गयी थी। आज उनको रोकने वाले उनके पति और पत्निया भी नही थी, सब अपने अरमान पुरे कर सकते थे। अपने पसंद के साथियो के साथ सब चिपक कर डांस कर रहे थे। मुझे पुरे कपड़ो में देख सबको थोड़ा आश्चर्य भी हुआ।

राहुल ने पास आकर मेरे साथ डांस करने को बोला पर मैं पहले ही सोच कर आयी थी उसको ज्यादा पास आने का मौका नहीं देना वरना वो अपनी चारो गन्दी ख्वाहिशे पूरी ना कर सके। मेरे मना करने पर भी वो मुस्कुराता रहा।

अब वो दूसरी लड़कियों के साथ बारी बारी से डांस करने लगा। वो उनसे कुछ ज्यादा ही चिपक रहा था, उसका हाथ लगातार लड़कियों की कमर और पीठ पर था। वो लड़किया भी जैसे इसी का इंतजार कर रही थी। उनको तो जैसे प्रमोशन का शॉर्टकट मिल गया था।

राहुल के हाथ कभी कभार कमर से खिसक कर लड़कियों की गांड पर भी आ गए थे। जब भी वो एक दूसरे के कान में कुछ बोलने के लिये पास आते तो उनके मम्मे राहुल के सीने से दब भी रहे थे ।

एक शादी शुदा औरत तो राहुल के साथ कुछ ज्यादा ही चिपक गयी थी, उसकी कमर के नीचे का हिस्सा आगे से राहुल से पूरा चिपक गया था। मैं ना जाने क्यों वो सब नहीं देख पा रही थी। मुझे वो सब देख जलन हो रही थी।

वो सब मिलकर मुझसे राहुल को दूर कर रही थी या मैंने खुद ही राहुल से दुरी बना उन्हें मौका दे दिया था। मुझे अहसास हुआ शायद मैं राहुल से शायद प्यार करने लगी थी। पर राहुल के मन में मेरे लिए क्या हैं, अगर कुछ होता तो वो इस तरह दूसरी लड़कियों के साथ इस तरह चिपक कर डांस नहीं करता।

एक चालीस साल के सहकर्मी ने मेरे साथ डांस करने का प्रस्ताव रखा और मैंने मान भी लिया, पहला मौका था जब मैंने राहुल के अलावा ऑफिस में किसी के साथ डांस का करना स्वीकार्य किया था। उसको तो जैसे खजाना हाथ लग गया।

बाकि के युवक आश्चर्य करने लगे, उन जैसे अच्छे दिखने वाले लड़को को छोड़ मैंने अपने से ज्यादा उम्र वाले को डांस पार्टनर चुना। मैंने कपड़े पुरे पहन रखे थे फिर भी साड़ी के ऊपर से ही वो मेरी कमर को पकड़े था। मैं उससे थोड़ी दुरी बनाये हुए थी ताकि मेरे सीने का उभार उससे ना छुए।

इन सब के बीच मेरी नजरे बराबर राहुल पर थी कि वो क्या कर रहा हैं। बीच में एक दो बार वो अपनी अलग अलग डांस पार्टनर के साथ हॉल से बाहर भी गया था, शायद उनके अंगो को अच्छे से छूने के लिए अकेले में ले गया हो। वो लड़किया तो उसे चूमने भी देगी।

सब लोग अब हॉल से निकल कर बाहर बरामदे में लगे डिनर के लिए आ गए। राहुल अभी भी अपनी गोपियों के बीच में ही था और हंस हंस कर जैसे मुझे जलाते हुए मजे ले रहा था।

खाना हो जाने के बाद सभी लोग बाहर गार्डन में ही आपस में बातें कर रहे थे। शायद राहुल सही था, मैं ही जलन में पागल हो गयी थी। कैटरर अपने सामन समेट कर जा रहा था। कुछ लोग जा चुके थे और कुछ जाने की तैयारी में थे।

राहुल एक साड़ी वाली लड़की को लेकर वापिस अंदर गया। मुझे दाल में काला लगा, मैं थोड़ी देर बाद अंदर गयी। वो दोनों सामने से बाहर ही रहे थे। राहुल ने उस युवती को बाहर जाने दिया और मेरे लिए वही रुक गया।

राहुल: “तुम मेरा पीछा कर रही हो?”

मैं: “मुझे सब पता हैं तुम आज पार्टी में क्या कर रहे थे, सबसे बड़ा चिपक चिपक कर डांस कर रहे थे। मुझे तो लगा तुम्हे सिर्फ मुझ में रूही दिखाई देती हैं। पहले मुझे रात को यहाँ रुकने को बोल रहे थे, मैंने मना किया तो अभी जो गयी हैं उसको रात को रोकने वाले हो। ”

राहुल: “तुम्हारे अलावा इन सब की कैब मैं बुला चूका हूँ । तुम कहो तो तुम्हारी कैब भी मंगवा लेता हु। एक तरफ मेरा बैडरूम हैं, दूसरी तरफ बाहर जाने का रास्ता। तुम्हारी इच्छा हैं, तुम कहाँ जाना चाहती हो। मैं बाहर सब लोगो को विदा करने जा रहा हूँ”

शायद राहुल सही था, मैं ही जलन में पागल हो गयी थी। राहुल हाल से बाहर जाने लगा और मैं बैडरूम की तरफ मुड़ी तभी उसकी आवाज आयी।

राहुल: “मुझे मेरे चारो काम करने दोगी तो ही अंदर जाना ”

मैं उसके चारो काम याद कर बहुत शरमाई और भाग कर बैडरूम में चली गयी। अंदर जाकर मैंने अपना मेकअप ठीक किया और अच्छे से देख लिया सब ठीक हैं । परफ्यूम लगा लिया और माउथ स्प्रे कर दिया। फिर याद आया पति को तो बोला ही नहीं कि रात को यही रुकने वाली हूँ।

मैंने अपना मोबाइल निकाला जो कल दोपहर से जोसफ के डर से स्विच ऑफ था । मैंने फ़ोन स्विच ऑन किया और अशोक को फ़ोन लगा कर झूठ बता दिया कि आज हम सब ऑफिस वाले यही रुकने वाले हैं, मैं अगली सुबह आ जाउंगी।
 
इस बीच मेरे फ़ोन पर पांच छह पेंडिंग मैसेज डिलीवर हुए। फ़ोन काट कर मैंने नोटिफिकेशन देखे एक मैसेज जोसफ का था, कोई मीडिया भेजा था। कही ये मेरे और उसके बीच उस दिन हुई चुदाई का वीडियो तो नहीं। मेरी तो मैसेज खोलने की हिम्मत ही नहीं। वैसे भी राहुल ने बोला था कि सैंड्रा सब संभाल लेगी।

मैं सोच ही रही थी कि राहुल बैडरूम में आया और दरवाजा बंद कर लिया। उसके हाथ में एक थर्मस था जो उसने टेबल पर रख दिया। मैं फ़ोन पर्स में रख बेड से उठकर खड़ी हो नजरे नीची कर ली। मेरे यहाँ रुकने का मतलब मेरी उसके साथ आज सुहागरात होने वाली थी।

उसने मेरे पास आकर मुझे पीठ से पकड़ कर अपने सीने से चिपका लिया। फिर उसने पीछे हटते हुए मेरी साड़ी का पल्लू पकड़ लिया और अपनी तरफ खिंच लिया। कंधे पर लगी पिन से साड़ी अटक गयी, मैंने वो पिन निकाल दी और उसने साड़ी मेरे सीने से अलग कर दी और मेरा ब्लाउज और उसके अंदर के उभार दिखने लगे।

मैने पटली पर लगी पिन भी खोल दी। उसने मेरे पेटीकोट में ऊपर से हाथ डाल मेरी साड़ी की पटली को पेटीकोट से बाहर कर दिया। फिर उसने साड़ी खींचना जारी रखा और मैं गोल गोल घूमने लगी। धीर धीरे मेरी साड़ी मेरे पेटीकोट से उतरने लगी।

जब साड़ी पूरी उसके हाथ में आ गयी तब मैं रुकी। मैं अब पेटीकोट और ब्लॉउज में शर्माए खड़ी थी। उसने मुझे खुद अपना ब्रा निकालने को बोला। मैंने उसकी तरफ पीठ कर ली और ब्लाउज के आगे के सारे हुक खोल दिए।

फिर पीठ पर ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर ब्रा का हुक खोल दिया। मैंने ब्लाउज पहने हुए ही अंदर हाथ डाल ब्रा को निकाल दिया. उसने मुझे उसकी तरफ मुड़ने को बोला और मैंने आगे से खुले ब्लाउज को हाथ से पकड़ कर बंद रखा और उसकी तरफ मुड़ गयी।

उसने मुझे बिस्तर पर लेटने को बोला मैं अपने ब्लाउज को पकड़े बंद रख लेट गयी। वो थर्मस लेकर आया और खोल कर उसमे से एक आइस क्यूब निकाल लिया। उसमे से पानी टपक रहा था। उसने मेरे होंठो के ऊपर आइस क्यूब पकडे रखकर दो तीन ठंडी बूंदें गिराई। मेरा मुँह अपने आप ही खुल गया।

उसने अब वो आइस क्यूब मेरी ठुड्डी से लेकर गले तक प्यार से फिराई । मेरी साँसे बहुत तेज हो गयी और मेरे पुरे शरीर में हलचल सी हुई और मैंने अपने हाथ ब्लाउज से हटा लिए और नीचे बिस्तर को कस कर पकड़ लिया।

मेरा ब्लाउज अभी भी मेरे मम्मे ढके हुए थे पर खुले ब्लाउज में दोनों मम्मो के बीच की थोड़ी वादियां दिखने लगी। वो अब आइस क्यूब मेरे पेट पर नाभी के आसपास लगाने लगा। मेरा बदन अब लगातार फड़क रहा था।

मेरी चूत अब थोड़ी गीली हो चुकी थी। उसने अब नया आइस क्यूब निकाला जिस पर लगा पानी टपक रहा था और उसने मेरे ब्लाउज का एक हिस्सा मेरे मम्मे से हटा दिया और आइस क्यूब रगड़ने लगा। उसने पहली बार मेरे मम्मे देखे थे और मेरे शरीर के रोंगटे खड़े हो चुके थे।

मैं अपने सीने को ऊपर उठाये अपने आप को नियंत्रित रखने का प्रयास कर रही थी। मेरे मम्मे पुरे फूल कर निप्पल तन गए थे। उसने दूसरी तरफ से भी ब्लाउज को हटा दूसरा मम्मा बाहर कर दिया। मैं अब भी तेज तेज साँसे ले तड़प रही थी।

उसने आइस क्यूब अपने मुँह में लिया और मेरे मम्मो पर मलने लगा। मैं मुँह खोल बुरी तरह से आहें भर रही थी। थोड़ी देर बाद उसने मुझे छोड़ा। मैं बिस्तर पर हाथ फैलाये पड़ी थी और मेरे मम्मे खुले पड़े थे। मैंने उन्हें ढकने का प्रयास नहीं किया, वैसे भी वो अब सब देख चूका था।

उसने मेरे ऊपर सर लाते हुए मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूसना शुरू कर दिया। मैं भी उसके होंठो को चूसते हुए आनंद लेने लगी। उसकी एक के बाद एक ख्वाहिशे पूरी होती जा रही थी और मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं थी।

मेरे मम्मे देखने की उसकी ख्वाहिश पूरी हो चुकी थी और साथ ही मुझे चूमने की भी। अगले पांच मिनट तक हम एक दूसरे को चूमते ही रहे और उसने अपनी महीनो की अधूरी चाहत पूरी की।

उसके चूमने में एक अपनापन था जो जैक के चूमने में भी था। मेरे होंठो को छोड़ने के बाद उसके होंठ मेरे मम्मो की तरफ बढे और मेरा एक तना हुआ निप्पल अपने होंठ में भर चूसने लगा।

बारी बारी से उसने कभी मेरे निप्पल को चूसा तो कभी अपने मुँह में मेरे मम्मे को भर लिया। मैं उसके चूसने का आनद ले ही रही थी कि उसने अचानक मेरे मम्मे को काट लिया और लव बाइट दे दी। मैं एकदम से चीखी और उस हिस्से को रगड़ कर अपना दर्द मिटाने लगी। तब तक उसने मेरे दूसरे मम्मे पर भी एक निशान दे दिया।
 
दर्द से ज्यादा मैं इस बात से परेशान थी कि मेरे पति जब इन लव बाइट को देखेंगे और पूछेंगे तो मैं क्या जवाब दूंगी। वो लगातार मेरे मम्मो को को चूसे जा रहा था। चूमते चूमते हुए वो मेरे पेट पर आ गया और मेरा पेट फिर फड़फड़ाने लगा।

उसके इस चूमने से मुझे मजा बहुत आ रहा था और नशे से मेरी आहें भी निकल रही थी। फिर उसने पेट चूमते हुए मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। मैं उसके बालों में हाथ डाल सहलाने लगी। उसने एक हाथ से मेरा पेटीकोट नीचे खिसकाने की कोशिश की।

मैंने खुद ही अपना वजन उठा कर उसको जगह दी और उसने पेटीकोट घुटनो तक नीचे कर दिया। फिर मैंने खुद ही पाँव को झटके मार पूरा पेटीकोट बाहर कर दिया।

उसने अब पेट चूमना बंद किया और मेरी दोनों टांगो के बीच आकर बैठ गया। उसने मेरी नजरो से नजरे मिलाई।

उसके दोनों हाथ मेरी पैंटी पर थे। उसको आखिरकार सामने से मेरी चूत के दर्शन होने वाले थे। धीरे धीरे कर उसने मेरी पैंटी को नीचे किया और जैसे जैसे मेरी चूत दिखने लगी उसकी आँख की चमक बढ़ने लगी।

उसने पूरी पैंटी निकाल दी और अब मैं नीचे से पूरी नंगी थी। उसने मेरे पाँव फोल्ड किये और ऊपर की तरफ उठा कर चौड़े कर दिए और अपना होंठ मेरी चूत पर रख चाटने लगा। सुबह भी उसने ये कोशिश की थी पर सिर्फ पीछे से थोड़ा चूस पाया था पर अब तो सब उसके सामने था।

वो अपनी तीखी जुबान को मेरी चूत की दरार में ऊपर नीचे तेजी से रगड़ रहा था और मैं दोनों हाथों से सर के नीचे लगे तकिये को कस के पकड़े हुए थी।

मेरा पानी निकलना शुरू हो गया और मैंने आहें भरते हुए उसको रोकने की कोशिश की कि उसे कही गंदा न लगे पर उसे जो जैसे स्वाद लग गया था। वो इस तरह मेरा पानी चाट रहा था जैसे सचमुच का फ्रूट जूस पी रहा हो।

उसने मेरी चूत के होंठो को पकड़ कर चौड़ा किया और मेरी चूत का छेद खोल दिया। मेरी चूत के छेद में अब उसकी जबान थी और वो अपनी जबान से ही मुझे चोद रहा था। कभी उसकी जबान आगे पीछ हो रही थी तो कभी लपलपा कर ऊपर नीचे।

मेरे सब्र का बाँध भी अब टूट रहा था। मैं कोशिश कर रही थी अपनी चुदाई से पहले ही कही झड़ ना जाऊ। अपने शरीर को मैंने कस लिया था ताकि मेरी भावनाये ना बह जाए। पर मेरी सारी कोशिशे बेकार जा रही थी।

उसकी जबान लगातार मेरी चूत को भेद रही थी और मैं अपने शरीर के नियंत्रण को छोड़ रही थी। थोड़ी देर बाद मैंने हार मान ली और अपना शरीर ढीला छोड़ दिया और चूत को पुरे मजे लेने की छूट दे दी। मेरा पानी और तेज रिसने लगा और मेरी आहें भी।

मेरी मुँह से लगातार आह्ह अहहह उम्म्म्म ऊह्ह्ह आह आह आह आह करते हुए मैं झड़ गयी। मैं बिस्तर पर धराशाई हो पड़ी थी। व वो अब भी मेरे ताजा निकले पानी को चाट रहा था।

उसने अब अपना मुँह ऊपर उठाया। जैसे लस्सी पीने के बाद सफ़ेद मुछे बन जाती हैं वैसे उसके होंठ मेरे पानी से भीगे हुए थे। उसके भीगे होंठ देख मैं और भी शर्माने लगी।

राहुल: “अब बारी हैं तुम्हारा दूध दुहने की”

मैं: “ये क्या बचपना हैं? वैसे भी मेरे अभी दूध नहीं निकलता”

राहुल: “मजा तो मम्मे दुहने का हैं, दूध आये ना आये”

ये कह कर उसने मुझे हाथ पकड़ कर बैठाया वो मेरे पीछे आया और मेरा ब्लाउज पूरा बाहर निकाल दिया। अब मेरे शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। उसने मुझे गाय तरह बैठने को कहा ताकि वो मेरे मम्मे दुह पाए। मैं अपनी हथेलियों और घुटनो के बल बैठ गयी और मेरे सीने से मेरे मम्मे नीचे लटक रहे थे।

उसने अपने दोनों हाथों की मुठ्ठी में मेरे निप्पल पकड़े और बारी बारी से दबा कर नीचे खींचता और फिर ऊपर करता। मेरा एक मम्मा नीचे जाता और दूसरा ऊपर, फिर पहला मम्मा ऊपर और दूसरा नीचे। इस तरह वो मेरे मम्मे से दूध दुहता रहा। अगर सच में दूध होता तो वो दूध की गिलास भर लेता।

मैं: “इसमें तुम्हे क्या मजा आ रहा हैं, इसमें तो सर्फ मुझे मजा आएगा”

राहुल: “मैं सिर्फ प्रैक्टिस कर रहा हूँ, एक दिन जब तुम मेरे बच्चे की माँ बनोगी तब मैं ऐसे ही सच में तुम्हारा दूध निकालूंगा”

उसकी बचकानी बातें सुन मैं शरमा गयी और तुरंत वहा से हट गयी। उसने अब अपने सारे कपड़े निकाल पूरा नंगा हो गया। उसका लंड पूरा तन गया था। आखिर उसे मेरी चूत के दर्शन जो हो गए थे। वो नीचे लेट गया और मैंने अपनी साड़ी से उसके दोनों हाथ ऊपर पलंग से बाँध दिए। मैंने उसका लंड अपने हाथ में लिया वो एक गरम लोहे की छड़ समान खड़ा था।

उसको थोड़ा ठंडा करने के लिए मैंने अपने मुँह में रख गीला कर दिया और फिर थोड़ी देर उसे चूसती रही, उसकी आहें शुरू हो गयी थी। मैं उसकी गोटियों को अपनी जबान से ऊपर नीचे रगड़ने लगी।

मैं अब उसके ऊपर सवार हो गयी। आगे झुक कर उसके निप्पल पर अपनी जबान रगड़ी, उसके रोंगटे खड़े हो गए। नीचे उसका लंड बार बार खड़ा हो कर मेरी चूत को छूने की कोशिश कर रहा था।

मैंने अब अपना हाथ नीचे ले जाकर उसके लंड को अपनी चूत में डाल दिया और उसकी एक गहरी आह निकली। मैं अब आगे पीछे गति करने लगी और उसका लंड अपनी चूत में रगड़ती रही। उसकी आह उह आह उह आह चलती रही।

थोड़ी देर में वो भी अपनी लोहे की छड़ को अंदर बाहर धक्का मार रहा था। उसने अब मेरे से गन्दी बातें शुरू कर दी और मैं भी मजे में उसका साथ देती रही, इससे हमारा मजा दुगुना हो रहा था ।

राहुल: “तुम्हारी चूत में क्या हैं?”

मैं: “कोक”

राहुल: “हिंदी में बोलो”

मैं: “लंड”

राहुल: “किसका?”

मैं: “तुम्हारा”

राहुल: “नाम लेकर बोलो, मैं क्या कर रहा हूँ”

मैं: “मेरी चूत में राहुल का लंड हैं ”

राहुल: “क्या कर रहा हैं ये भी बताओ ”

मैं: “चोद रहा हैं”

हम दोनों के झटको की गति एकाएक बढ़ गयी और हमारी सिसकियाँ भी बढ़ने लगी।

मैं: “आह्ह आह्ह राहुल, तुम्हे मुझे चोदना था ना। अम्म हा बोलो, मुझे चोदोगे ना अहअहअहअह”

राहुल: “आआआआआह ओह प्रतिमा तुम्हारी चूत उह्ह्ह मैं चोदूंगा, चोदने दोगी ”
 
मैं : “हां आह आह तुम्हारी ही हैं ये चूत उउउह जितनी मर्जी उतनी चोद दो। करलो पूरा करलो हां ये वाला कर लो हम्म्म आह्ह उह्ह ”

राहुल: “ओह प्रतिमा, ओह प्रतिमा, आअह्ह ऊहहुहुहु ऊहहुहुहु या या या फक यु फक यु आह आह आह हाथ खोलो मेरे… आह आह …मेरा पानी बाहर आ रहा हैं.. ऊहहु ऊहहु उउउउउउउउउ आअहाहा आअहाहा”

मैं: “उई माँ …निकाल दो पानी मेरी चूत में, हां उह माँ आईईई आअह्ह आअह्ह आअह्ह”

राहुल ने अपना सारा पानी मेरी चूत में खाली कर दिया और हम दोनों झड़ गए।

मैं उसके ऊपर से हटी और उसके हाथ खोल दिए। हम दोनों बाथरूम से साफ़ होकर वापिस आये। हम दोनों नंगे ही बिस्तर में घुस गए और एक दूसरे की तरफ मुँह कर आमने सामने लेट गए। एक बार वो मुझे मेरे होंठो पर चूमता तो एक बार मैं उसे चूमती। हम दोनों एक दूसरे की कमर में हाथ डाले एक दूसरे की तरफ देखते देखते सो गए।

अगली सुबह मेरी नींद खुली। मैं सीधी लेटी थी और और राहुल मेरी तरफ करवट लेकर लेटा था। उसका एक हाथ मेरे एक मम्मे के ऊपर था और उसकी दोनों टांगो के बीच मेरी एक जांघ फांसी हुई थी। मुझे उसकी बाहों में बहुत ही सुकून मिल रहा था। वो भी शायद उठ चूका था या शायद कोई सपना देख रहा था। उसका लंड एकदम कड़क था और मेरी जांघो को चुभ सा रहा था।

उसके हाथ की मेरे मम्मे पर पकड़ थोड़ी मजबूत हुई और वो मलने लगा। उसने भी अब आँख खोली और मुझे देख मुस्कुराने लगा। उसने अपनी ऊपर वाली टांग थोड़ी और उठा कर मेरी चूत पर ले आया और अपनी टांग से मेरी चूत रगड़ने लगा।

मैं: “क्या हो रहा हैं ये?”

राहुल: “मेरे लंड की गाड़ी को पार्किंग करनी हैं इसलिए तुम्हारी चूत को गराज की तरह तैयार कर रहा हूँ ”

मैं: “कल रात को ही तो पार्किंग की थी, पेट नहीं भरा”

राहुल: “पेट भर गया, अब तुम्हारी चूत को भरूंगा अपने पानी से”

ये कहत हुए वो मेरे ऊपर चढ़ गया और अपना लंड मेरी चूत में घुसाने लगा। मैंने उसको अपने से दूर किया।

मैं: “पहले मुझे बाथरूम जाकर तैयार होने दो, ज्यादा मजा आएगा। और तुम भी बाथरूम हो आओ”

मैं उठ करअटैच वाशरूम में गयी और पंद्रह मिनट बाद बाथरूम और माउथवाश कर आयी। बाहर आकर देखा वो अभी भी लेटा हुआ था।

मैंने उसको जबरदस्ती वाशरूम में भेजा। मैं अब बिस्तर पर आकर बैठ गयी। मेरा ध्यान मेरे मोबाइल पर गया। जोसफ का भेजा वीडियो अभी तक नहीं देखा था।

मैंने मोबाइल लिया और वो वीडियो देखना शुरू किया।

ये वीडियो राहुल के केबिन का था और उसमें सैंड्रा की भी आवाज थी। ये परसो का वीडियो था जब सैंड्रा और जोसफ डील साइन करें ऑफिस आये थे। वो सारी बातें सुन कर मैं सदमे में आ गयी। वो कुछ इस तरह था:

सैंड्रा: “तो आखिर प्रतिमा को चोद ही दिया तुमने”

राहुल: “थैंक यू, सब तुम्हारी वजह से मुमकिन हुआ। तुम वो गांड मारने की शर्त ना रखती तो प्रतिमा शायद ही मानती मेरे साथ चुदवाने के लिए”

सैंड्रा: “मैं तो उसी दिन करवा देती तुम्हारा मिलन पर उसने तुम्हारी जगह जोसफ को चुन लिया। इस जोसफ को मुफ्त में चुदाई मिल गयी”

राहुल: “तुमने मुझे उसके पुरे कपड़े क्यों नहीं खोलने दिए उस दिन। ”

सैंड्रा: “तुमको कितनी बार बोला मुझे भी कभी चोद दो, कभी हां नहीं बोलते तुम। उस दिन पहली बार तुम्हारा लंड देख के मेरी नीयत ख़राब हो गयी और प्रतिमा की जगह मैं खुद बीच में आ गयी अपनी चुदवाने के लिए । ”

राहुल: “तुमको फिर सजा मिली, गाँड़ फाड़ दी थी तुम्हारी मैंने। पर अभी तक प्रतिमा के बूब्स नहीं देख पाया हूँ”

सैंड्रा: “तो आज सुबह गांड मारते वक्त भी कुछ नहीं दिखाया उसने”

राहुल “नहीं, बहुत शर्मीली हैं। पर एक दिन उसको पूरा पाकर रहूँगा”

सैंड्रा: “तुम इसके पीछे इतना क्यों पड़े हो ”

राहुल: “बचपन से जिद्दी रहा हु, जो माँगा मिला हैं। प्रतिमा ने एक पार्टी में उसको चूमने से मुझे रोक दिया था। मेरे दिल पर लगी थी ये बात। उसी दिन सोच लिया था इसकी चुदाई करूँगा”

सैंड्रा: “बेचारी को बहुत पागल बनाया डील के नाम पर। डील को तो बॉब ने मंजूरी दे ही दी थी । तुम्हारी बॉब के साथ सेटिंग माननी पड़ेगी।”

राहुल “बेवकूफ तो बना दिया, पर.. ”

और वीडियो कट हो गया। मेरे होश फाख्ता हो गए। मुझे बिस्तर तक लाने की ये सब राहुल की चाल थी।

जिस पर इतना भरोसा किया उसने मुझे ही धोखा दिया था। अब मेरा अगला कदम क्या होगा मुझे सोचना था।

जोसफ द्वारा भेजा वीडियो देखने के बाद मैं ठगा सा महसूस कर रही थी। ये साफ़ हो गया कि राहुल ने मुझे बिस्तर तक लाने के लिये मुझे धोखा दिया था।

मैंने अपने कपडे पहनना शरू कर दिया। मुझे जल्दी से यहाँ से निकलना था। कपडे पहनते वक्त मैं सोच रही थी काश मैंने ये वीडियो कल रात को ही देख लिया होता तो राहुल मेरे जिस्म के साथ खिलवाड़ नहीं कर पाता।

उससे भी पहले मुझे अपना फ़ोन स्विच ऑफ नहीं करना था। वरना मैं इस पार्टी में आती ही नहीं। जोसफ ने तो मुझे बचाने की कोशिश की थी।

शायद उस दिन फार्म हाउस पर वो जो इशारे कर रहा था वो इसी साजिश की तरफ थे, मैं ही मुर्ख समझ नहीं पायी और उसको गलत समझती रही।

सच में दिखावे पर नहीं जाना चाहिए था। जोसफ भले ही खतरनाक दीखता हो पर उसका दिल साफ़ हैं, जबकि राहुल सुन्दर होते हुए भी दिल का काला हैं। मेरे जैक के साथ रिश्ते के बारे में जोसफ ने सैंड्रा को नहीं बताया होगा, ये भी सैंड्रा को राहुल ने ही बताया होगा अपनी साजिश को अंजाम देने के लिए।
 
मैंने कपड़े पहन लिए थे और मोबाइल वापिस पर्स में रख सैंडल पहन लिए। मैं जाने को तैयार थी और राहुल बाथरूम से बिना कपड़ो के बाहर निकला।

राहुल: “अरे कपड़े पहन लिए, अभी तो काम बाकी हैं डिअर”

मैंने अपना मोबाइल निकाल वीडियो चलाया और उसकी तरफ स्क्रीन कर दी।

मैं: “ये देखो, तुम्हारी काली करतूत रिकॉर्ड हैं।”

राहुल: “सॉरी प्रतिमा। मेरी बात सुनो, मैं समझाता हूँ तुम्हे”

मैं: “जितना सुनना था सुन लिया ”

राहुल: “पर ये पूरा सच नहीं हैं। मुझे पूरी बात बताने का मौका तो दो”

मैं अब बैडरूम से बाहर आ गयी और अपना मोबाइल वापिस पर्स में डाल दिया, वो मेरे पीछे पीछे आया और मुझे रोकने की कोशिश करने लगा। वो दौड़ कर मेरे आगे आया और बाहर जाने वाले दरवाजे को रोक कर खड़ा हो गया।

राहुल: “सिर्फ दो मिनट दो, मैं तुम्हे पूरी बात बताता हूँ, फिर तुम फैसला करना मैं गलत हु या नहीं”

मैं वापिस पीछे मुड़ी और हॉल के उस दरवाजे से बाहर निकली जो बालकनी में खुलता हैं। वो फिर मेरे पीछे पीछे आया रोकने को। मैं बालकनी में आकर उसके आगे बनी सीढ़ियों से नीचे गार्डन की तरफ उतरी। सीढ़िया उतरने के बाद उसने पीछे से आकर मेरा हाथ पकड़ लिया। मैंने उससे अपना हाथ छुड़ाया। उसने फिर मेरे कंधे से मेरा पर्स उतार लिया और अपने पीछे कर लिया।

राहुल: ‘पहले तुम मेरी बात पूरी सुनो फिर मैं तुमको पर्स दूंगा। फिर चाहे तो तुम चली जाना। आई रियली लव यु ”

वो बिना कपड़ो के वहां खड़ा था और मुझे शर्म आ रही थी कि इसके फार्म हाउस का केयरटेकर ये तमाशा देखेगा तो क्या सोचेगा। मैंने अपना पर्स लिए बिना ही वहां से जाने का सोच लिया और चल पड़ी। थोड़ा आगे आकर उसने एक बार फिर मेरा हाथ पकड़ लिया, मैं छुड़ाने का प्रयास करने लगी और वो मुझसे रुकने की गुजारिश करता रहा।

इस खींचातानी में मेरा हाथ दर्द करने लगा और मैं चीखी कि मुझे दर्द हो रहा हैं और उसने मुझे छोड़ दिया। मैं इसके लिए तैयार नहीं थी और पीछे की तरफ दम लगाने के कारण मैं तेजी से पीछे की तरफ गयी और लड़खड़ा कर पास में बने स्वीमिंग पूल में गिर गयी।

मेरा सर पानी के अंदर चला गया। मैं पूल के ज्यादा गहराई वाली जगह थी और मुझे इतना अच्छा तैरना नहीं आता खास तौर से जब मेरे पुरे कपड़े भीग गए हो और साड़ी पेटीकोट पहना था जो भीग कर मेरे शरीर से चिपक गए थे । मगर जल्द ही राहुल भी पूल में कूद पड़ा और मुझे पीछे से पकड़ कर खड़ा हो गया। उसने मुझे जमीन से थोड़ा ऊपर उठा रखा था।
 
Back
Top