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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

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उसने वो टैंक टॉप मुझे दे दिया और मैंने जल्दी से उसे पहन लिया। मै अब टैंक टॉप और हॉट शार्ट में रजाई के बाहर आयी। मै वाशरूम की तरफ जाने लगी। अलमारी के आईने के सामने से निकली तो उस सफ़ेद टैंक टॉप और काले हॉट शार्ट में मेरा गौरा बदन बहुत सेक्सी लग रहा था।

नीचे छाती पर नजर दौड़ाई तो मेरे मम्मे उस टैंक टॉप में फुले हुए थे और निप्पल का तीखापन टैंक टॉप को चीरते हुए जैसे बाहर आ रहा था।

राहुल मेरी तरफ देख रहा था और शरम के मारे मै उसके आगे से भागते हुए सीधा वाशरूम के अंदर भागी. वो मेरा नाम ले मुझे रोक रहा था पर मै बिना सुने चली गयी।

वाशरूम में जाकर मैंने अपने आप को ऊपर से नीचे ध्यान से देखा. राहुल ने यह सब देखकर पता नहीं कैसे काबू किया होगा। मैंने उसको फालतू ही डाँट दिया था।

मैने सोचा मै नहा भी लेती हूँ. राहुल के बारे में सोचते सोचते पता ही नहीं चला और मै अपने कपड़ो सहित टब में उतर गयी और कपड़े गीले हो गए.

अब वैसे भी कुछ हो नहीं सकता था तो मै कपड़े उतार पूरी नंगी हो गयी और आराम से नहाने लगी। वाशरूम के दरवाजे पर दस्तक हुआ और राहुल ने कहा कि वो बाहर जा रहा हैं और थोड़ी देर में वापिस आ जायेगा.

नहा लेने के बाद मै टब में खड़ी हुयी तो देखा टॉवल तो हैंडल पर था ही नहीं. बाहर राहुल भी नहीं था जो मुझे टॉवल पास करा दे.

मै अपने हाथों से ही अपने बदन पर गिरा पानी पोंछने लगी। मैंने सोचा मै वो गीले टैंक टॉप और हॉट शार्ट पहन कर बाहर जाती हूँ और जल्दी से बाहर से टॉवल और अपने कपड़े ले आती हूँ.

अपने टैंक टॉप और शार्ट को अच्छे से निचोड़ कर पानी निकाला और फिर से पहनने लगी। गीले कपड़े पहनते बुरा लग रहा था पर कोई दुसरा विकल्प नहीं था।

वो सफ़ेद टैंक टॉप तो मेरे बड़े मम्मो के ऊपर अब चिपक चुका था और मेरे गुलाबी निप्पल और मम्मे साफ़ दिख रहे थे। मम्मे साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे पर नंगा बाहर जाने से बेहतर था कि टैंक टॉप पहन कर जाऊ.

मैने वाशरूम का दरवाजा खोला और मुंह बाहर निकाल कर राहुल को आवाज दी ताकि कन्फर्म कर लु कि वो वहां नहीं हैं। कोई जवाब नहीं आया और मैंने बाहर आयी। एक तरफ रूम में घुसने का दरवाजा था और दुसरी तरफ बिस्तर की तरफ जाने का रास्ता.

बिस्तर के दूसरे किनारे पर टॉवल पड़ा था और अलमारी के आगे मेरे कपड़े हेंगर में लटके थे। मै दौड़ते हुए कपड़ो की तरफ लपकी.

तभी पीछे से रूम का दरवाजा खुला और राहुल अंदर आ गया। मै वहीं रुक गयी और पीछे मुड़ी. कपड़ो तक पहुंचने के मुकाबले वाशरूम मेरे ज्यादा करीब था।

मै फिर वाशरूम की तरफ भागी जहा आगे राहुल भी खड़ा था। पांव थोड़े गीले थे और मै फिसल गयी और राहुल ने मुझे थाम लिया। उसका एक हाथ मेरी छाती पर लगा और मेरे गीले मम्मे दब गए. उसने मुझे उठाया और मै उसकी बाहों में थी। मेरी धड़कने बहुत तेज हो गयी थी।

उसने अपने हाथ मुझ पर से हटाए और आगे बढ़ने लगा और मै उसकी आँखों में झांकते, डरते हुए उलटे कदम पीछे चलती रही. जल्द ही मेरे पांव बिस्तर से टकरा कर रुक गए और मै पिछे नहीं हो पायी।

राहुल ने मेरे दोनो हाथों को पकड़ा और सीधे छत की तरफ खड़ा कर दिया। फिर उसने मेरे टैंक टॉप के निचले किनारे को दोनो हाथों से पकड़ा और टैंक टॉप को ऊपर उठाने लगा।

मम्मे तो उसको मेरे गीले टॉप से वैसे ही दिख रहे थे, पता नहीं फिर भी टॉप क्युँ उतार रहा था। नंगे मम्मे भी तो वो थोड़ी देर पहले मुझे सोते हुए देख चुका था।

अगर उतारना ही था तो मेरा हॉट शार्ट उतार देता, मेरी चूत तो देख पाता. टैंक टॉप मेरे मम्मो से हट गया और मेरे हाथों से निकलता हुआ बाहर आ गया। मेरे मम्मो को थोड़ी राहत भी मिली उस गीले टैंक टॉप से ।

मै राहुल की आँखों में झाँक रही थी और वो मेरे मम्मो पर नजरे गड़ाए लार टपकाते घूर रहा था। उसने अपना सिर झुकाया और अपने होंठो में मेरा एक निप्पल ले लिया और उसे चूसने लगा।

मेरे मुंह से एक सिसकी निकल गयी। उसने फिर मुंह और ज्यादा खोलते हुए मेरे निप्पल के आस पास का मम्मो का उभार भी अपने मुंह में भर लिया और मुंह बड़ा कर दबा दिया।

उसने मेरे मम्मे को छोड़ा और अपना मुंह अब दूसरे मम्मे की तरफ बढाया. मै पीछे हटने लगी पर बिस्तर पर गिरी और पीठ के बल लेट गयी।

मै कोहनी के बल ऊपर खिसकने लगी और अपनी दोनो टांगे भी बिस्तर पर ले आयी। कोहनी के बल मै आधी लेटी और आधी बैठी हुयी थी।

राहुल मेरी टांगो के दोनो तरफ अपने घुटनो के बल खड़ा हो गया। उसने अपने हाथ आगे बढाए और मेरे हॉट शार्ट को कमर से पकड़ा.

वो अब मुझे नीचे से पूरा नंगा करना चाहता था। तभी याद आया मैंने 2 महीनो से अपनी चूत के बाल साफ़ नहीं किए थे। वो मेरी चूत पर उगी बालो की झाड़ियां देख क्या सोचेगा.

मै तुरंत पलट गयी और उल्टा हो कर पेट के बल लेट गयी। राहुल ने एक बार फिर मेरा हॉट शार्ट पकड़ा और कमर से नीचे खिसकाने लगा।

शार्ट नीचे होते ही मेरी गांड नंगी हो गयी थी। उसने वो गीला हॉट शार्ट जल्दी ही मेरी टांगो से पूरा बाहर निकाल दिया।

गीले कपड़े शरीर से निकलते ही थोड़ी राहत महसूस हुयी पर अब मै पूरी नंगी बिस्तर पर उल्टा लेटी थी और पास में राहुल खड़ा था।

मै अब राहुल से चुदवाने को तैयार थी। पर अपनी चूत के बालो के दिख जाने का डर भी था। राहुल ने आज तक मेरी सफाचट चूत देखी थी। मेरे नीचे के बालो को देख तो वो मुझसे नफरत करने लगेगा। तभी मेरी गांड पर सूखा कपडा आकर गिरा. मैंने पीछे मुड़कर देखा वो टॉवल था।

राहुल: “ज्यादा देर गीले कपड़ो में मत रहो, तुम्हारी गौरी कोमल स्किन पर रेशेस हो जायेंगे ”

मै टॉवल को अपने नंगे बदन पर लपेट खड़ी हुयी. मैंने मम्मो से लेकर जांघो तक वो टॉवल लपेटा था। अलमारी के हैंडल से लटके हेंगर से मैंने अपना टॉप और कैपरी ले लिया। राहुल की नजर मेरी चूत की तरफ थी जो टॉवल के पिछे छुपी थी।

राहुल: “तुम्हारे बाल बहुत सुन्दर हैं”

मै अपने कपड़े लेकर वाशरूम में आ गयी. उसने मेरे बालो की तारीफ तो आज तक नहीं की थी, फिर आज ऐसा क्या स्पेशल था। कही उसने मेरी चूत के बालो को तो नहीं देख लिया, उन्हे तो वो पहली बार देख रहा था। शायद इसी कारण बालो कि तारीफ करते वो मेरी चूत की तरफ देख रहा था।

बिस्तर पर भले ही मै उल्टा लेती थी पर दोनो टांगो के बीच से तो उसको मेरी चूत के लंबे बाल दिख ही गए होंगे. मुझे अपने दोनो पांव आपस में टाइट बंद कर लेने चाहिये थे.

अगर वो सच में मेरी चूत के बालो की तारीफ कर रहा था तो इसका मतलब हैं कि उसको मेरे नीचे के बालो से कोई परेशानी नहीं हैं, मै ही दिखाने में शर्मा रही थी।

पैंटी तो मेरी गीली हो ही चुकी थी तो मै अपना ब्रा, टॉप और कैपरी पहने बाहर आयी। बिना पैंटी के सीधे कैपरी पहने होने से थोड़ा खाली खाली सा लग रहा था।

राहुल ने कैसे हिम्मत करके मुझे पूरा नंगा किया था। उसने एक बार भी नहीं सोचा कि मुझे कैसा लगेगा. मै बाहर आयी पर उस से बात नहीं की और अपने बाल और मेकअप सवारने लगी। वो तो पहले ही तैयार बैठा था और मुझे तैयार होते देख रहा था।

राहुल: “प्रतिमा, तुम्हे नहीं लगता कि मुझे एक चांस मिलना चाहिए, अब तो तुम भी सिंगल हो”
 
मै यह बात खुद उसको बोलना नहीं चाह रही थी कि मै भी अब उसमे इंटरेस्टेड हूँ और अब वो खुद मुझे बोल रहा था।

मैं: “तुम्हे सिर्फ मेरा शरीर चाहिये ना?”

राहुल: “मै तुमसे शादी करने को भी तैयार हूँ”

मैं: “मै ही क्युँ? मै एक बच्चे की माँ हूँ और इतने साल मेरे पति के साथ रही हूँ. मै उपयोग की गयी हूँ, तुम्हे कोई भी कुंवारी लड़की मिल जाएगी”

राहुल: “तुम्हे अच्छे से पता हैं, मै तुमसे प्यार करता हूँ”

मैं: “अगर मै इतनी खुबसूरत नहीं होती तो क्या फिर भी तुम यहीं कहते”

राहुल: “मैने तुम्हारा शरीर नहीं, दिल देखकर पसंद किया था”

मैं: “अगर हम दोनो शादी ना करे और सिर्फ फिजिकल रिलेशन में रहे तो चलेगा तुम्हे?”

राहुल: “तुम मुझे अभी भी गलत समझ रही हो. मै सिर्फ सेक्स के लिए तुमसे शादी नहीं कर रहा”

मैं: “तो फिर तुमने अभी मेरे कपड़े क्युँ खोले?”

राहुल: “मै नहीं चाहता मेरी होने वाली बीवी को गीले कपड़ो से शरीर पर एक भी रेशेस हो. क्या तुम मेरे फार्म हाऊस की मालकिन बनोगी? मै चाहता हूँ कि तुम मेरे बच्चे की माँ भी बनो”

मैं: “तुम्हारे घर वाले नहीं मानेंगे”

राहुल: “शादी के लिए मुझे सिर्फ तुम्हारी हां चाहिए”

मैं: “अगर तुम्हारे घर वाले मान गए तो मेरी भी हां हैं”

राहुल ने उसी वक्त अपनी माँ को फ़ोन लगाया और मै डर गयी। वो लोग कैसे प्रतिक्रिया करेंगे. राहुल ने उनको मेरे बारे में सब बता दिया। उसके घर वालो ने यहीं कहा कि वो राहुल की पसंद को स्वीकार करते हैं, और उनको सिर्फ दादा दादी बनने का इंतजार हैं।

यह सुनकर मै शर्मा गयी। राहुल ने फ़ोन रखा और मुझे अपने सीने से लगा लिया।

राहुल: “अब तो तुम्हे मेरा होने में कोई दिक्कत नहीं हैं। मै तुम्हारे घर वालो से बात कर लूंगा. तुम्हारा तलाक कब फाइनल हो रहा हैं?”

मैं: “अभी 9 महीनो का पिरीयड और बाकी हैं”

राहुल: “अगर तुम्हे आपत्ति ना हो तो हम बच्चे की तैयारी अभी से शुरु कर दे! हमारी शादी और बच्चा दोनो लगभग एक साथ होंगे”

मैं: “मुझे कोई आपत्ति नहीं हैं”

मै भी इतने सालो तक तड़पी हूँ कि मै अपने पति के बच्चे की माँ बनु पर अशोक के कम स्पर्म काउंट की वजह से मै उसके बच्चे की माँ कभी बन नहीं पायी थी। अब आखिरकार जाकर मेरा सपना शायद पूरा होने वाला था। मै राहुल के बच्चे की माँ बनूँगी.

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मुझे नंगा कर राहुल चाहता तो मुझे चोद सकता था पर उसने मेरा फायदा नहीं उठाया, जब कि मैं कही न कही चुदाई के लिए तैयार थी। राहुल ने मुझे प्रपोज़ कर दिया और मैं शादी के पहले ही उसके बच्चे की माँ बनने को तैयार थी।

हम दोनो एक दूसरे के होंठो को एक दूसरे में भर कर चूमने लगे। चूमने के बाद उसने मेरा टॉप और ब्रा भी निकाल दिया और मुझे बिस्तर पर लेटा दिया। काफी महीनो बाद मै चुदाई के लिए तैयार थी।

राहुल अब मेरी कैपरी पैंट निकालने वाला था। मुझे याद आया कि मेरी चूत पर तो बालो की झाडिया उगी हुयी हैं। अपने होने वाले पति को पहली चुदाई में ऐसी चूत दिखेगी तो वो क्या सोचेगा. राहुल ने अपनी पैंट और शर्ट निकाल दिया था और अपने शार्ट में आ गया था।

मैं: “राहुल, अभी रहने देते हैं। बाद में करते हैं”

राहुल: “क्युँ! अभी क्या हुआ? तुम तो तैयार थी! कोई मेडिकल परेशानी हैं?”

मैं: “मै अभी तैयार नहीं हूँ”

राहुल: “इसमें क्या तैयार होना”

मैं: “तुम नहीं समझोगे, तुम बहुत सफाई पसंद हो, मेरी अभी सफाई पूरी नहीं हैं”

राहुल ने अपना शार्ट और अंडरवियर निकाल दिया। उसके लंड पर भी बड़े बड़े बाल उगे हुए थे। पिछली बार जब मैंने उसको देखा था तब उसका लंड सफाचट था। शायद वो भी मेरी तरह सन्यास पर था और उसके भी बाल उगे हुए थे.

राहुल: “अब खोल दू तुम्हारे कपड़े?”

मैने सिर्फ शर्मा कर हां में गरदन हिलायी और उसने मेरी कैपरी कमर से नीचे खिंच कर बाहर निकाल दी और मेरी बालो भरी चूत उसके सामने थी।

उसने मेरे पांव चौड़े किए और अपने होंठ से मेरी चूत के बालो में खुजली करने लगा। और साथ ही मेरी चूत की दरार में अपनी जुबान रगड़ कर मुझे मदहोश करता रहा।

फिर उसने अपने मुंह से मेरे मम्मो को चूसना शुरु करते हुए मेरी चूत को अपनी उंगलियों से रगड़ कर मुझे गरम किया. फिर वो अपना मुँह मेरे पाँव की तरफ कर लेट गया और 69 पोजीशन बना ली.

अब वो मेरी बालो भरी चूत को चाट रहा था तो मै उसके बालो भरे लंड को चूस रही थी। थोड़ी देर इस चुसम चुसाई के बाद हम दोनो चुदाई के लिए तैयार थे.

राहुल मेरे ऊपर चढ़ गया और अपना लंड मेरी चूत के मुंह पर रख दिया और अपना मुंह मेरे कान के पास ले आया।

राहुल: “क्या तुम मेरे बच्चे की माँ बनने के लिए तैयार हो?”

मैं: “हां”

और अगले ही पल उसका लंड मेरी चूत में घुस गया। इतने समय बाद आखिर राहुल का लंड मेरी चूत में समां गया। मै भी उसके लिए बड़ा तड़पी थी।

आज तक उस से सिर्फ मजे के लिए या मज़बूरी में चुदवाया था पर आज हम अपनी शादी की नींव रख रहे थे। बरसो बाद मै एक बच्चा पैदा करने के लिए चुदवा रही थी तो बहुत ही निश्चिन्त थी।

राहुल का कसरती बदन तो मुझे याद ही था, और उसका मजबूत लंड चूत में घुसते ही एक अलग ही दुनिया की सैर करवा देता हैं। उसका लंड तेजी से मेरी चूत में अंदर बाहर हो मुझे चोद कर माँ बनाने की कोशिश कर रहा था।

उसका लंबा लंड मेरी चूत के काफी अंदर जा रहा था पर फिर भी मै अपनी तरफ से भी माँ बनने की कोशिश करते हुए अपना जोर लगा रही थी। इस चक्कर में उसका लंड ज्यादा ही अंदर घुस कर मुझे हल्का दर्द भी दे रहा था।

पर माँ बनने के लिए मुझे हर दर्द मंजूर था। राहुल का कसरती सीना मेरे मम्मो को अच्छे से रगड़ रहा था और उसके सिक्स पैक्स मेरी पेट को रगड़ गुदगुदी कर रहे थे.

मेरी चूत को उसका लंड खोद रहा था तो ऊपर मेरे होंठ वो अपने होंठो से रह रह कर चुम अपना प्यार जता रहा था। थोड़ी देर भी वो मुझे चुम्मी ना करता तो मै अपनी सिसकियां रोक खुद उसके होंठो को चुम लेती.

वो मेरी ज़िन्दगी की सबसे हसीन चुदाई थी। मै एक नये जीवन में प्रवेश कर रही थी। हम दोनो बहुत देर तक चुदते रहे और अपने चरम की तरफ बढ़ते गए. मै राहुल को पुकारते हुए जोर लगा कर मुझे माँ बनाने की विनती कर रही थी।

मैं: “ओह्ह्ह्ह राहुल, मुझे चोद कर माँ बना दो…आआह्ह… और अंदर… आआईई…और अंदर……ऊहहहहहह…. आह…..चोद दो…..हां ऐसे…..ऊईईईई माँ….जोर से चोदो….डाल कर चोदो….आईईएई.”

राहुल पहली बार बाप बनना चाहता था, तो उसने अपना पूरा जोर लगा कर मुझे चोद दिया और उसके लंड से बहुत तेज पानी का फव्वारा मेरी चूत में छूटा और मेरी चूत उसके पानी से गीली हुयी और साथ में मैंने भी अपनी चूत को सिकोड़ते हुए उसके लंड को अच्छे से अपनी चूत में झकड़ कर मै जड़ गयी।

मैने उसको कुछ देर तक लंड बाहर नहीं निकालने दिया ताकि उसके लंड से निकली हर स्पर्म की बूँद मेरी चूत में रहे. इस चुदाई के बाद हम दोनो थक चुके थे तो वो मेरे ऊपर ही लेट कर थोड़ी देर ऐसे ही रहा।

फिर हम दोनो ने एक साथ वाशरूम में जाकर बाथ लिया। हम अपनी फ्लाइट पकड़ अपने शहर आ गए थे। मैंने राहुल वाली बात किसी को नहीं बताई थी।

मै गर्भवती होने के बाद ही अपने घर वालो और दोस्तों को खुशखबरी देना चाहती थी। मेरे चेहरे को खिला हुआ देख कर रूबी ने मुझे ऑफिस में अकेले पकड़ ही लिया।

रूबी: “किसके साथ चुदवाया?”

मैं: “अपने पति के साथ”

रूबी: “पहले तो बड़ी बड़ी बातें कर रही थी। अलग होने के बाद भी तुम अपने पुराने पति का लंड मिस कर रही हो. मैंने जब बोला मेरे साथ चलो मिलकर मर्दो के मजे लेंगे तब नहीं आयी”

मैं: “अपने पुराने पति की नहीं, होने वाले पति की बात कर रही थी”

रूबी: “अरें वाह! बड़ी छुपी रुस्तम निकली. कौन हैं वो खुशनसीब?”

मैं: “अभी ये एक राज हैं। वक्त आने पर बता दूंगी”

रूबी: “मगर फिर से अपनी चूत को लंड की गुलाम मत बना देना”

मैं: “तुम्हारी तरह अलग अलग लंड की गुलाम बनने से अच्छा हैं मै एक ही लंड की गुलाम बन जाऊ”

हम फिर ऑफिस के अंदर आ गए. मौका देखकर मै अपने होने वाले पति राहुल के केबिन में गयी।

राहुल: “तुम मेरी मंगेतर की हैसियत से आयी हो या ऑफिस कर्मचारी की तरह”

मैं: “अगर मंगेतर की हैसियत से आयी हूँ तो क्या करोगे?”

राहुल अपनी सीट से उठकर आगे आया और मेरी कमर पकड़ कर मुझे अपने से चिपका लिया।

राहुल: “मेरा पहला लक्ष्य तुम्हे माँ बनाना हैं”

मैं: “यहीं ऑफिस में बनाओगे?”

राहुल: “पहली बार थोड़े ही हैं। पहले भी तो तुम्हारे साथ इसी केबिन में किया था”

मैं: “और कोई अंदर आ गया तो?”

राहुल: “मै बाहर जाकर बोल देता हूँ कि हम पति पत्नी व्यस्त हैं, कोई परेशान ना करे”

मैं: “नहीं अभी नहीं, मेरे तलाक के बाद, हमारी शादी की डेट आने के बाद ही हम सबको बताएँगे”
 
राहुल ने फ़ोन करके अपने सेक्रेटरी को बोल दिया कि वो किसी को ना भेजे और परेशान ना करे, वो मीटिंग में हैं।

राहुल: “अब ठीक हैं?”

मैं: “मगर ऑफिस में चोदने की क्या जरुरत हैं! मै शाम को तुम्हारे साथ आ जाउंगी”

राहुल: “मुझे जल्दी से जल्दी बच्चा पैदा करना हैं। मै दिन में 5-6 बार तुम्हे चोदुंगा”

मैं: “कितना भी चोदो, बच्चा तो 9 महीने में ही पैदा होगा ना”

राहुल: “जितनी तुम्हे चोदुंगा, उतना प्यार बढ़ेगा और उतना खुबसूरत बच्चा पैदा होगा”

मैं: “5-6 बार कुछ ज्यादा नहीं हो जायेगा! दिन में बस दो बार”

राहुल: “नहीं, दिन में कम से कम 3 बार, और छुट्टी वाले दिन 5-6 बार चोदुंगा. तुम्हे मंजूर हैं तभी मै तुमसे शादी करूँगा”

मैं: “तुम तो बोल रहे थे कि सेक्स के लिए मुझसे शादी नहीं कर रहे”

राहुल: “मै कोई मजे के लिए थोड़े ही चोद रहा हूँ. मै तो बच्चे के लिए चोद रहा हूँ”

मैं: “पक्का मजे के लिए नहीं चोद रहे!”

राहुल: “हां, पक्का”

मैं: “मजे के लिए नहीं चोदोगे तो फिर क्या फायदा!”

राहुल: “तो फिर क्या करु?”

मैं: “ठीक हैं मै तुम्हे चोदती हूँ. तुम्हारा बच्चा पैदा करने का काम भी हो जायेगा और मेरा मजा भी हो जायेगा”

मेरा और राहुल का मिशन था कि मैं उसके बच्चे की माँ बन जाऊ और उसके लिए हम दिन रात चुदाई के लिए भी तैयार थे। फिलहाल दोपहर में ऑफिस के उसके केबिन में हम दोनों चुदाई की तयारी कर रहे थे।

हम दोनो ने अपने कपड़े उतारने शुरु कर दिए. अपने सारे कपड़े वहीं नीचे फेंक कर हम पूरे नंगे हो चुदाई के लिए तैयार थे। हमारा सन्यास टूट चुका था और मेरी चूत सफाचट थी और राहुल का लंड भी.

राहुल अपने केबिन में लगे सोफे पर बैठ गया और मै उसकी तरफ मुंह कर उसकी गोद में बैठ गयी। मेरी चूत उसके लंड के ऊपर थी। उसका लंड तो मेरी बातें सुनकर और मुझको अपने कपड़े खोलते देख कर ही कड़क हो चुका था।

मैने जल्दी से उसके लंड को अपने चूत में घुसाया और ऊपर नीचे होते हुए खुद चुदने लगी। पहली बार मै खुलकर इस तरह ऑफिस में राहुल से चुदवा रही थी।

बाहर ऑफिस का सारा स्टाफ था और अंदर इस तरह चुदवाते हुए एक रोमांच सा जाग रहा था। पहली बार मै ऑफिस में पूरे कपड़े खोल नंगी हुयी थी।

राहुल ने भी मेरी गांड पकड़े मुझे ऊपर नीचे होने में मदद की. थोड़ी ही देर में चाप चाप करते हुए उसका मोटा लंड मेरी चूत में आवाज कर रहा था।

राहुल कभी मेरे निप्पल और मम्मो को अपने हाथ से दबा कर छेड़ देता तो कभी अपने होंठो में भरकर चूस लेटा। कभी प्यार से भरकर मेरे चेहरे को अपने पास लाकर मेरे होंठो का रस चूस कर छोड़ देता.

मैने दोनो हाथों से सोफे का सिरहाने पकड़ा और घुटनो का जोर लगाते हुए अपने चोदने की रफ़्तार बढा दी. चाप चाप की आवाज अब चपड़ चपड़ और सर्र सर्र में बदल गयी थी।

इस मधुर आवाज को सुनकर हम दोनो ही मदहोश हुए जा रहे थे। राहुल बराबर मेरे पूरे बदन को छूकर मुझे कर्रेंट भी दे रहा था।

मजे के मारे मै चेहरा छत की तरफ कर, ऊपर नीचे हो रही थी। राहुल ने आगे सिर लाकर मेरे तने हुए गले में अपने होंठो से थोड़ी देर तक चूमा.

मेरी चूत में हम दोनो के निकले पानी से कीचड़ जमा हो चुका था और चुदाई के साथ वो पानी अंदर आवाज कर रहा था। मेरी आहें अब बढ़ने लगी थी और राहुल भी लम्बी सांसें छोड़कर आवाज निकाल रहा था।

मै अपने मजे के हिसाब से राहुल के लंड को अपनी चूत के उस हिस्से पर रगड़ लगा रही थी जहा मुझे सबसे ज्यादा मजा आता हैं। इसका असर यह हुआ कि मै जल्दी ही जड़ गयी।

मेरे जड़ते वक्त राहुल ने मेरे मम्मे अपने मुंह से दबा कर चूसना जारी रखा था। इस जबरदस्त चुदाई के बाद मेरे हाथ पैर ठंडे पड़ चुके थे। सारी ताकत जा चुकी थी।

राहुल ने मुझे मेरी गांड से पकड़े मुझे ऊपर नीचे करना शुरू किया ताकि उसका भी पानी निकले वरना बच्चे की नीव कैसे रखेंगे।

माँ बनने के जोश में मैंने अपनी ताकत फिर जुटाई और तेजी से ऊपर नीचे हो चोदना शुरु किया. अब तो राहुल ने भी मेरी मदद करते हुए अपनी गांड उछलते हुए धक्के मारना शुरू किया.

अगले 2-3 मिनट के मेहनत के बाद ही राहुल बावला हो गया और अचानक अपने धक्को की गति बढा दी. वो जड़ने वाला था इसलिए मैंने भी अब गहराई में उसके लंड को घुसाना शुरु किया. अगले कुछ झटको के बाद राहुल मुंह खोले आहें भरता अपना पानी मेरी चूत में खाली कर गया।

हमने एक दूजे को होंठो पर चुमा और एक दूसरे को धन्यवाद बोला. राहुल के केबिन में ही वाशरूम था इसलिए हम अपने कपड़े उठाए उसके वाशरूम में गए और अपनी थोड़ी सफाई कर ली.

इस चुदाई के बाद मै कमजोर सा महसूस कर रही थी जिसकी वजह से मेरे हाथ पैर भी कांप रहे थे। मै अब उसके केबिन से बाहर आयी।

मुझे डर था कि कही रूबी मुझे पकड़ ना ले। वो तो चेहरा देखते ही पकड़ लेती हैं कि मैंने चुदाई करवाई या नहीं. मैंने वाशरूम में जाकर अपना मेकअप दुरुस्त कर लिया ताकि रूबी मेरा चेहरा नहीं पढ़ पाए.

मेरा गौरा चेहरा शर्म से पूरा लाल हो चुका था और मैंने मेकअप से उसको छिपाने की कोशिश की. रूबी को थोड़ा शक जरूर हुआ पर उसको यकीन नहीं हुआ क्युँ कि मै ऑफिस के लोगो के साथ चुदाई के सख्त खिलाफ थी।

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मैने और राहुल ने निर्णय किया था कि गर्भवती होने तक हम दिन में कम से कम 3 बार चुदाई करेंगे. इसलिए मै शाम को उसके साथ ही गयी और हमने एक बार फिर चुदाई की.

अब ये हमारा रुटीन बन गया था। सुबह ऑफिस आने के पहले मै और राहुल एक बार चुदाई करते और फिर दिन में एक बार उसके केबिन में चुदाई करते. फिर शाम को एक बार फिर उसके साथ चुदाई होती.

छुट्टी वाले दिन मै अपने बच्चे को अशोक के पास ही छोड़ कर जाती और पूरे दिन राहुल के साथ उसके फार्महाऊस पर रहती. राहुल फार्महाऊस पर काम करने वाले अपने स्टाफ को पहले ही वहां से जाने को बोल देता.

पूरे दिन हम कपड़े नहीं पहनते थे और नंगे ही रहते थे। जब जी में आता और इच्छा होती हम चोदना शुरु कर देते. फिर हम चाहे बेडरुम, ड्राइंग रूम में या गार्डन में ही क्युँ ना हो.

दो बार तो उसने मुझे खाना बनाते वक्त किचन में ही चोद दिया था। उसके चक्कर में मेरी सब्जी भी जल चुकी थी। फिर हमें बाहर खाना खाने जाना पड़ा था। लौटटे वक्त उसकी फिर इच्छा हुयी और फार्महाऊस तक पहुंचने का भी इंतजार नहीं किया. हमने रास्ते में ही साइड में कार लगायी और कार में ही उसने मेरी चुदाई कर दी.

उस दिन वो कुछ ज्यादा ही मूड में था। उन 24 घंटो के दौरान उसने मुझे 5-6 बार चोद दिया था। मुझे अब लंड का गुलाम बनने में कोई परेशानी नहीं थी।

मेरे पिरीयड की डेट 2-3 दिन बढ़ चुकी थी पर पिरीयड नहीं आया। पहली बार पिरीयड नहीं आने पर मै इतना खुश हुयी थी। इस से पहले जब मुझे पहला बच्चा हुआ था तब इतनी ख़ुशी थी।

जब मैंने यह बात राहुल को ऑफिस में बताई तो उसने मुझे दोपहर में ऑफिस में चोदने से मना कर दिया कि होने वाले बच्चे पर बुरा असर पड़ेगा.

मैने उसको समझाया कि ऐसा कुछ नहीं होता और मैंने उसको चोदने के लिए मना ही लिया। वो डर रहा था तो मै ही उसके ऊपर आयी और चुदवाया. शाम को मै उसके साथ गयी और हमने फिर चुदाई की.

पर उस चुदाई के बाद सफाई के दौरान मुझे एक झटका लगा। मेरा पिरीयड आ गया था। पिछले 20 दिनों में हमने तकरीबन 70 बार चुदाई की थी पर फिर भी मै गर्भवती नहीं हुयी थी।

मै बहुत निराश थी। राहुल ने मुझको खुश करने कोशिश की. उसने हिम्मत बंधायी कि हम फिर से कोशिश करेंगे. मैंने उसको बताया कि हम सुबह जल्दी चुदाई करेंगे ताकि गर्भवती होने की संभावना बढ़ जाऐ।

मैने अब अपने बच्चे को पूरा अपनी सासुमाँ और अशोक के भरोसे छोड़ दिया था। उनको भी अजीब लगा कि मै अपने बच्चे को कितना प्यार करती हूँ और अब रात को अपने पास नहीं रखती।

शाम को ऑफिस से जाने के बाद राहुल मेरे घर ही आ जाता और सुबह हम साथ ही ऑफिस जाते. सुबह जल्दी का अलार्म लगा कर सोते और सुबह की चुदाई के मजे लेते.

हम कोई भी कसर नहीं छोड़ रहे थे ताकि इस बार मै गर्भवती हो जाऊ. महीने के बीच जब गर्भवती होने का उत्तम समय था तब तो हम दोनो ऑफिस में उसके केबिन में दिन में दो बार चुदाई करते.

मगर एक बार फिर मेरा पिरीयड आ गया। मै अब बहुत ही ज्यादा उदास थी और राहुल ने मुझे बोला कि हम डॉक्टर से कंसल्ट करेंगे.

वहीं हुआ जिसका डर था। मेरा पहले एक बार मिसकैरीज हो चुका था। डॉक्टर ने बताया कि उसकी वजह से ऐसी जटिलता आ गयी हैं कि मै अब कभी माँ नहीं बन सकती हूँ. मेरा रो रोकर बुरा हाल था। राहुल ने मुझे बहुत समझाया पर मै इसको सहन नहीं कर पा रही थी।

शायद मेरी किस्मत में कभी अपने पति के बच्चे की माँ बनना लिखा ही नहीं था। जब मै माँ बन सकती थी तब पति उस काबिल नहीं मिला, अब जब पति काबिल हैं तो मै इस काबिल नहीं थी।

राहुल ने मेरा हौंसला बढाया कि हम सरोगेट मदर की मदद लेंगे. मुझे एक आशा की किरण दिखाई दी. राहुल मुझे लेकर अपने माँ बाप से मिलवाने ले गया।

उसने उनको पूरी बात बता दी कि वो सरोगेट मदर की मदद लेगा. मगर उसके माँ बाप इसके लिए तैयार नहीं थे. उनका तर्क था कि उनका बेटा राहुल जब किसी लड़की से शादी कर बाप बन सकता हैं तो मुझसे शादी कर इस प्रकार के तरीके को अपनाने की क्या जरुरत थी।

वो लोग तो वैसे ही एक तलाकशुदा , एक बच्चे की माँ को बहू स्वीकारने में थोड़ा हिचकिचा रहे होंगे और अब यह एक और मुसीबत.

मगर राहुल अपनी ज़िद पर अड़ गया कि वो तो मुझसे ही शादी करेगा. उसके माँ बाप को एक डर यह भी था कि जो औरत सरोगेट मदर बनेगी, उसके भी तो जीन उस बच्चे में आ जायेंगे.

राहुल ने मुझसे भी पुछा कि मेरी नजर में कोई मेरी तरह खुबसूरत अच्छे घर की औरत हैं जो सरोगेट मदर बनने को तैयार हो. मै तो बच्चे को अपनी कोख में रख नहीं सकती थी तो ऐसी खुबसूरत औरत चाहिये थी जो कि राहुल के बच्चे की माँ बने और 9 महीने अपनी कोख में रख हमें बच्चा दे पाये।

पर पैसो के लालच में वो औरत अपना हक़ बच्चे पर जता सकती थी। मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था। हमने कोशिश कि पर ऐसी कोई भरोसेमंद औरत हमें नहीं मिली। अच्छे घर की खूबसूरत औरत ढूँढना बहुत मुश्किल काम था।

मै अब पूरी तरह से टूट चुकी थी। एक तरफ राहुल के घर वालो का साथ मुझे नहीं मिला था ऊपर से मै राहुल को बाप नहीं बनवा सकती थी।

फिर एक दिन मै पूजा से टकराई। खुबसूरत तो वो बहुत थी। उसका बच्चा भी दिखने में खुबसूरत ही था। मैंने उस से बात करने की सोची.

वो बहुत जल्दी ही अपने तलाक के बाद अशोक से शादी करने वाली थी और अभी अशोक के साथ ही रह रही थी। उसकी भी मेरी जैसी परेशानी थी।

उसके बच्चे पर उसके पुराने पति नितीन ने अधिकार जमा रखा था। नितीन कोर्ट में यह साबित कर रहा था कि पूजा का चरित्र खराब हैं और वो बच्चे को अच्छे संस्कार नहीं दे पाएगी। वो अभी अशोक के साथ लीव-इन में रह रही थी, ये बात उसके खिलाफ जा रही थी।

पूजा को उसके बच्चे की कस्टडी नहीं मिलती दिख रही थी। ऊपर से अशोक तो उसको माँ बना ही नहीं सकता था यह बात उसको भी पता चल गयी थी।

वो मेरी मदद करने को मान गयी। मै राहुल को लेकर अशोक और पूजा के घर गए। हम चारो में एक डील होने वाली थी।
 
पूजा: “जैसे तुम्हे बच्चे की जरुरत हैं, वैसे ही हमें भी बच्चे की जरुरत हैं। राहुल को मेरे साथ दो बच्चे पैदा करने पड़ेंगे, एक हम रखेंगे और एक तुम”

अशोक: “मगर पहला बच्चा हम रखेंगे और दुसरा वाला हम तुमको दे देंगे”

प्रतिमा: “पहले बच्चे के बाद तुम मुकर गए तो? पहला बच्चा हम ही रखेंगे”

राहुल: “अशोक और प्रतिमा का एक बच्चा पहले से ही हैं। वो तुम लोग रख लो और जो पूजा से होगा वो हम रखेंगे”

पूजा: “नहीं, मुझे अपना बच्चा चाहिये। मंजूर हो तो बोलो? वरना मुझे माँ बनाने के लिए कोई भी मिल जायेगा”

पूजा अब वहां से उठ कर जाने लगी। जाते जाते वो अपनी नशीली चाल बताते गयी। उसकी मटकती गांड को राहुल देखते ही रह गया और मुझे उस से जलन हुयी।

राहुल: “मै क्या बोलता हूँ प्रतिमा, हम मान जाते हैं। मै पूजा को दो बार गर्भवती कर दुंगा. हम इंतजार कर लेंगे दूसरे बच्चे के होने तक”

उस वक्त तो मै राहुल को लेकर घर आ गयी। मेरी उस से थोड़ी बहस भी हो गयी।

मैं: “मुझे सब पता हैं, तुमने हां क्युँ बोला. उस पूजा की मटकती गांड को देखकर तुम्हारी हवस जाग गयी थी”

राहुल: “यह क्या बोल रही हो! तुम खुद ही तो मुझे ले गयी थी। फिर किसी खुबसूरत औरत को देखना गलत कैसे हैं। तुमको भी तो मर्द मुड़ मुड़कर देखते हैं”

मैं: “‘उसकी गांड इतनी पसंद आयी हैं तो उसी से शादी कर लो. वो तुम्हे बाप भी बना देगी. मुझसे शादी क्युँ करना चाहते हो”

राहुल: “तुम बेवजह नाराज हो रही हो. तुम बोलो तो पूजा के साथ नहीं करते हैं डील. अब खुश?”

मैं: “तो फिर बच्चा कैसे होगा?”

राहुल: “तो फिर करने दो ना. दो बार ही तो गर्भवती करना हैं”

मैं: “मगर मैं तुम्हे पूजा को चोदने नहीं दूंगी. हम डॉक्टर की मदद से स्पर्म उसमे इंजेक्ट करवाएंगे”

राहुल: “तुम मुझ पर शक कर रही हो कि मै पूजा के साथ मजा लेना चाहता हूँ। इतना भी भरोसा नहीं मुझ पर?”

मैं: “भरोसा हैं। पर तुम स्पर्म इंजेक्शन के लिए क्युँ नहीं मान रहे हो? ”

राहुल: “उनको पूछ लो, उनको मंजूर हो तो”

मैने पूजा को फ़ोन लगाया और उसको बताया कि हम स्पर्म इंजेक्ट करेंगे ना कि पूजा को राहुल चोदेगा, पर पूजा ने मना कर दिया कि उसको कुदरती तरीके से बच्चा पैदा करना हैं। डॉक्टर के पास जाकर उसको अपनी प्राइवेसी खत्म नहीं करनी हैं।

अब मेरे सामने कोई उपाय नहीं था। मुझे राहुल को अनुमति देनी पड़ी कि वो पूजा को चोद सकता हैं।

राहुल: “मेरी तो इच्छा नहीं हैं, पर तुम कह रही हो इसलिए मै पूजा को चोदुगा”

मैं: “ठीक हैं, पर तुम उसकी गांड नहीं मारोगे”

राहुल: “मुझे वैसे भी उसको गर्भवती करना हैं। मै गांड क्युँ मारूंगा! मुझे तो उसकी चूत ही मारनी पड़ेगी”

मैं: “मगर चूत भी सामने से मारोगे, पिछे से नहीं”

राहुल: “अब यह क्या बात हुयी, इसमें क्या बुराई हैं?”

मैं: “मुझे सब पता हैं, दूसरे मर्दो की तरह तुम भी पूजा को डोगी स्टाईल में चोदना चाहते हो”

राहुल: “मजे के लिए नहीं। पीछे से चोदने से लंड ज्यादा अच्छे एंगल से जायेगा और गर्भवती होने का चांस बढ़ेगा. और फिर आगे से करूँगा तो उसके मम्मे भी दबेंगे और होंठ पर भी किस हो सकता हैं। तुम क्या चाहती हो, मै उसके मम्मे और होंठ दबाऊ या पिछवाड़े से कर लु?”

मैं: “मुझे पता नहीं था तुम इतने चालू होंगे। मेरी मजबूरी नहीं होती तो मै तुम्हे कभी किसी औरत के साथ ये सब करने नहीं देती”

राहुल: “अगर तुम चाहो तो तुम भी चुदाई के वक़्त वहां मौजूद रहना”

मै और राहुल एक बार फिर अशोक और पूजा से डील करने गए। हम उनकी शर्तो को मान गए थे पर अशोक ने नयी शर्त रख दी।

अशोक: “पूजा मेरी बीवी बनने वाली हैं। राहुल तुम पूजा को मुफ्त में चोदोगे, इसमें मुझे क्या मजा मिलेगा! जितनी बार तुम पूजा को चोदोगे, उतनी बार मै भी प्रतिमा का इस्तमाल करूँगा”

राहुल: “प्रतिमा का इस से क्या लेना देना, वो क्युँ करेगी ऐसा!”

अशोक: “मेरी तो यहीं शर्त हैं, तुमको मंजूर हो तो बोलो। अगर पूजा किसी गैर मर्द से चुदवाएगी तो मुझ को भी मौका मिलना चाहिये।”

मैं: “कोई बात नहीं राहुल, मै वैसे भी अशोक की अभी तक बीवी हूँ, तलाक पूरा नहीं हुआ हैं। मै अशोक के साथ चुदवाने का त्याग कर लुंगी, अगर तुम्हे आपत्ति ना हो तो”

राहुल: “मै इस तरह किसी लड़की को चोदुगा तो मुझे भी बुरा लगेगा। प्रतिमा अगर तुम अशोक के साथ कम्फर्टेबल हो तो ही मै पूजा को चोदुगा”

मैं: “मै अशोक के साथ चुदवाने को तैयार हूँ”

अशोक: “मैने कब बोला मेरे साथ चुदवाना हैं। मैंने यह कहा कि जब जब राहुल पूजा को चोदेगा, तब तब मै प्रतिमा का इस्तमाल करूँगा। मतलब मै प्रतिमा को किसी भी मर्द के साथ चुदने को बोल सकता हूँ”

मैं: “यह क्या बकवास कर रहे हो?”

राहुल: “यह बिल्कुल गलत हैं अशोक। डील हम चारो के बीच की हैं”

अशोक: “प्रतिमा को तो मै वैसे ही इतने सालो तक चोद चुका हूँ, वापिस चोद कर मुझे क्या फायदा ! मै प्रतिमा को दूसरे मर्दो से चुदवा कर बदले में उनकी बीवियों को चोदुगा, मुझे भी चेंज तो मिलता रहेगा”

राहुल: “कितना कमीना इंसान हैं यह, तुम इसके साथ इतने साल कैसे रही? ”

पूजा: “तुम भी तो अपनी होने वाली बीवी का सौदा करने को तैयार हो गए थे! अब वो अशोक के साथ चुदवायें या किसी और के साथ, तुम्हे क्या फर्क पड़ेगा?”

मैं: “राहुल चलो यहाँ से, हमें कोई डील नहीं करनी”

अशोक: “पूजा को माँ बनाने के लिए तो हजारो मर्द मिल जायेंगे, जरुरत तुम्हारी हैं, सोच लो”

मैं: “चलो राहुल”

राहुल: “एक मिनट रुको; पूजा तुम अशोक को छोड़ दो, यह सही आदमी नहीं हैं। तुम हमारे साथ चलो, हम तुम्हारा अच्छे से ध्यान रखेंगे।”

पूजा: “तुम तो प्रतिमा से शादी कर लोगे, मै क्या तुम्हारी रखैल बन कर रहुंगी! सिर्फ बच्चा पैदा करने की मशीन बनुंगी.”

मै और राहुल खाली हाथ वापिस लौट आये. राहुल ने विश्वास दिलाया कि हम जल्दी ही किसी लड़की को ढुंढ लेंगे. परन्तु मै अब और भी ज्यादा निराश हो गयी थी।

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ना तो मैं राहुल के बच्चे की माँ बन पा रही थी और ना ही हम अशोक और पूजा के साथ कोई डील फाइनल कर पाए थे कि पूजा राहुल के बच्चे को पैदा कर सके।

उसके कुछ दिनों बाद राहुल के माँ बाप ने मुझे उनसे मिलने बुलाया. मुझे थोड़ी ख़ुशी मिली कि शायद राहुल ने अपने माँ बाप को समझा दिया हैं कि वो मुझे ऐसे ही स्वीकार करने को तैयार हैं।

मै उनसे मिलने पहुंची पर राहुल वहां नहीं था। उन्होने मुझे स्वीकार करने नहीं बुलाया था पर इमोशनली ब्लैकमैल करने बुलाया था। उन्होने मुझको दूहाई दी कि मै क्युँ उनके बेटे की पीछे पड़ी हूँ और उसकी ज़िन्दगी खराब करने पर तुली हूँ. मेरे चक्कर में उसने किसी और से शादी के लिए मना कर दिया था।

उनकी इतनी जायदाद हैं, उसका वारीस कौन होगा! उनको अपने बेटे से इतने अरमान हैं कि उसका छोटा परिवार हो, बच्चा हो, पर मै तो उनको कुछ नहीं दे सकती. उन्होने मुझ जैसे बच्चे वाली तलाकशुदा औरत को भी भारी मन से स्वीकार किया था और अब मै माँ नहीं बन सकती फिर तो मै उनके किसी काम की ही नहीं थी।

उन्होने मुझे बहुत समझाया कि मै उनके बेटे का पीछा छोड़ कर उन बुढ़े माँ बाप पर अहसान कर दू. अगर मुझे पैसे चाहिये तो वो चाहे उतना दे सकते हैं पर मै उनके बेटे की ज़िन्दगी से दूर हो जाऊ.

मेरे सिर पर तो पहाड़ टूट पड़ा. मुझे इतनी जली कटी तो कभी सुनने को नहीं मिली थी। उनको तो मेरी नीयत पर ही शक था कि मै उनकी सम्पति हड़पने के लिए यह सब कर रही हूँ और मै लालची हूँ.

मै वहां से इतना सुनने के बाद रोते धोते निकली थी। मेरा तो दुनिया से मोह ही भंग हो गया था। उनकी बातें मुझे बहुत बुरी तरह से चुभ रही थी।

देखा जाऐ तो वो सही भी थे. उनके बेटे में कोई कमी नहीं हैं। उनको किसी अच्छे खानदान की खुबसूरत बहू मिल जाएगी जो सही तरीके से माँ भी बन सकती थी।

राहुल मेरा आखिरी सहारा था और मै उसको छोड़ना नहीं चाहती थी पर हमेशा अपने बारे में सोचने वाले स्वार्थी होते हैं। राहुल मेरे प्यार की खातिर इतना त्याग कर रहा था कि अपने माँ बाप से भी बगावत कर ली थी।

अगर मुझे राहुल से सच्चा प्यार हैं तो मुझे भी त्याग करना होगा। मैंने भारी मन से फैसला कर लिया कि राहुल से नाता तोड़ लुंगी ताकि वो अपनी नयी ज़िन्दगी शुरु कर पाये।

ऑफिस में रूबी से मिली और मैंने उसको अपनी सारी कहानी पहली बार बताई.

रूबी: “मुझे अच्छा लगा कि तुम्हारी लाईफ सेट हो जाएगी पर मुझे पता हैं, तलाकशुदा औरतो का जीवन क्या होता हैं। मै तुम्हारी जगह होती तो स्वार्थी बन जाती और राहुल को कभी नहीं छोड़ती. मगर मुझे पता हैं तुम ऐसा नहीं करोगी. तो फिर तुमने क्या सोचा?”

मैं: “मेरे समझाने से तो वो मानेगा नहीं. मै राहुल का दिल तोडूंगी, ताकि वो मुझे भूल जाऐ और अपनी नयी ज़िन्दगी शुरु करे”

रूबी: “क्या करने वाली हो तुम?”

मैं: “बेवफाई करुंगी. मै कुछ ऐसा करुंगी कि मै राहुल की नजरो में गिर जाऊ. मुझे तुम्हारी मदद चाहिये होगी. मै राहुल के सामने किसी और को किस करुंगी. तुम्हारे यहाँ इतने आशिक हैं, किसी को इस काम के लिए मना सकती हो?”

रूबी: “यार प्रतिमा, यह सब मत कर. चीजे गलत भी हो सकती हैं। राहुल तुझसे प्यार करता हैं। उसका दिल टूटा तो फिर कभी ना जुड़े यह भी हो सकता हैं। वैसे भी तुम्हे त्याग करने की जरुरत नहीं. उसके बुढ्ढे माँ बाप कितने साल ज़िंदा रहेंगे . फिर तो तुम और राहुल ही रहोगे ना. तुम दोनो अपने लिए जियो, किसी और के लिए नहीं”

मैं: “मुझे तो बुरी परिस्तिथि में भी ज़िंदा रहने की आदत हैं। मै सिर्फ अपना प्रयास करुंगी, बाकी सब ठीक ही होगा”

रूबी: “हमारे ऑफिस में जो लड़का हैं अमन, वो जल्दी ही जॉब छोड़ने वाला हैं। मै उसको तैयार कर लुंगी. तुमको किस करते देखने के बाद राहुल वैसे ही उसको जॉब से निकाल देगा, तो फर्क नहीं पड़ेगा”

मैं: “ठीक हैं तुम उसको समझा देना”

अगले दिन रूबी मुझे फिर मिली.

रूबी: “कब करना हैं बता दो?”

मैं: “आज ही करना हैं”

रूबी: “आज नहीं, कल करते हैं। उसने इस नाटक के बदले चोदने की शर्त रखी हैं। वो अकेला नहीं हैं, उसके 3-4 दोस्त और भी हैं। सब मिलकर चोदना चाहते हैं”

मैं: “मै यह नहीं कर सकती”

रूबी: “तुम्हे कुछ नहीं करना हैं। वो मै आज रात करवा लुंगी. तुम्हारी दोस्ती की खातिर मै इतना तो कर ही सकती हूँ”

मैं: “हम किसी और की मदद ले लेंगे”

रूबी: “कौन अपनी जॉब खतरे में डालेगा. जो मिल रहा हैं कर लेते हैं”

मैं: “मगर इतने लोगो के साथ एक साथ. तुमने इतने के साथ कभी किया हैं?”

रूबी: “हर चीज कभी ना कभी तो पहली बार करते ही हैं। मेरी चिंता मत कर.”

मुझे रूबी के लिए बहुत बुरा लग रहा था। मेरी वजह से वो 3-4 मर्दो से एक साथ चुदवाएगी. अगले दिन मै अपने सबसे बड़े इम्तिहान के लिए तैयार थी। बहुत नर्वस थी पर करना तो था ही. मुझे रूबी मिली, उसकी तबियत खराब लग रही थी और कुछ लंगड़ाते हुए चल रही थी।

मैं: “क्या हुआ तुम्हे? अमन तैयार हैं ना?”

रूबी: “साला हरामी, 3-4 की बजाय 5 दोस्तों को साथ ले आया। बुरी तरह थका दिया मुझे. मगर तुम फिर सोच लो, तुम्हे ये करना हैं!”

मैं: “मेरी वजह से तुम्हारी यह हालत हुयी, तुम्हारा त्याग मै बेकार नहीं जाने दूंगी. मै और अमन मेरे केबिन में किस करेंगे. तुम राहुल को मेरे केबिन में किसी बहाने भेज देना”

मेरे इस फैसला से रूबी मुझसे ज्यादा निराश थी. राहुल के आने का समय होने वाला था और मैं अपने केबिन में थी।
 
अमन मेरे केबिन के बाहर राहुल के आने का इंतजार कर रहा था। जैसे ही उसे राहुल के आने की भनक लगी और वो मेरे केबिन में घुस गया।

मेरे हाथ पैर थर थर कांप रहे थे। अमन मेरे करीब आया और मुझे अपना शर्ट भी खोल कर मम्मे दिखाने को कहा ताकि प्रभाव ज्यादा आये, पर मैंने उसको मना कर दिया।

उसने अपने होंठ आगे लाकर बुरी तरह से मेरे होंठ कस के दबा दिए और फिर चूसने लगा, जैसे कोई भड़ास निकाल रहा हो. फिर उस कमीने ने अपने एक हाथ से शर्ट के ऊपर से मेरा एक मम्मा बुरी तरह से दबोच लिया।

मुझे बहुत दर्द हुआ और मै उसका हाथ हटाटी उसके पहले ही मेरे केबिन का दरवाजा खुला और राहुल अंदर आया।

मैने अमन को दूर हटाया और उसने मुझे चूमना छोड़ा पर मम्मा फिर भी दबोचे रखा। फिर राहुल का गुस्से वाला चेहरा देखकर उसने मेरा मम्मा छोड़ा और केबिन से बाहर चला गया।

मैने ऐसी शक्ल बनाते हुए नजरे झुका ली जैसे मेरी चोरी पकड़ी गयी हो .

राहुल: “तुम ये सब क्युँ कर रही हो? मुझे पता हैं तुम ऐसी नहीं हो. मै भी तुम्हे इतनी आसानी से नहीं छोड़ुंगा”

फिर वो बाहर चला गया। मैंने और रूबी ने इतना त्याग किया और राहुल पर ज्यादा असर नहीं हुआ था। मै थोड़ी देर बाद राहुल के केबिन में गयी।

मैं: “राहुल, मै तुम्हारे साथ शादी नहीं कर सकती. बेहतर होगा तुम अपने माँ बाप की मर्जी से किसी अच्छी सी लड़की से शादी कर घर बसाओ.”

राहुल: “मुझे क्या करना हैं, मुझे मत सिखाओ”

कुछ समय ऐसे ही निकला, राहुल मुझे ऐसे ही मनाता रहा पर मै नहीं मानी. मैंने उस से दूरी बना ली थी। रूबी भी मुझे समझाती रही कि ऐसा मत करो.

मेरा एक साल का नोटिस पिरीयड खत्म हुआ और कोर्ट ने मुझे अशोक से तलाक दिलवा दिया। पूजा अपने खुद के तलाक पूरा होने का इंतजार कर रही थी ताकि अशोक से शादी कर ले पर वो साथ रह रहे थे.

राहुल मुझ पर भी दबाव डालता रहा कि मुझे उस से शादी कर लेनी चाहिये पर मै अपनी ज़िद पर अड़ी थी। मगर वो सुनने को तैयार ही नहीं था।

फिर हार मान कर मैंने उसको 2 दिन बाद अपने जन्मदिन के दिन मेरे घर आने को कहा. उसने ख़ुशी से मुझे गले लगा दिया। उस दिन मै उस से आखिरी बार गले मिली थी।

मैने रूबी से फिर मदद मांगी.

मैं: “राहुल नहीं मान रहा हैं। मैंने उसको 2 दिन बाद अपने जन्मदिन के दिन अपने घर बुलाया हैं”

रूबी: “क्या बात हैं! तुम उस से शादी करने को तैयार हो!”

मैं: “नहीं, उसका दिल अच्छे से तोड़ना हैं। वो जब मेरे घर आएगा, तब वो मुझे किसी के साथ चुदते हुए देखेगा. मुझे तुम्हारी मदद चाहिये। तुम अपने दीवाने किसी मर्द को भेज दो”

रूबी: “तुम पागल हो गयी हो! तुम्हे पता हैं ना अमन ने पिछली बार क्या किया था। अपने 5 दोस्तों को ले आया था। सारे मर्द ऐसे ही होते हैं, फायदा उठाएंगे तुम्हारा”

मैं: “अब बस आर पार का फैसला हो जाने दो. 5 क्या वो 10 मर्दो को भी ले आये, मुझे मंजूर हैं”

रूबी: “तुने निर्णय कर लिया और नहीं मानेगी मतलब?”

मैं: “हां”

रूबी: “मै नहीं चाहती कि तू यह सब करे, पर तुने निर्णय कर ही लिया हैं तो मै अमन जैसे किसी को नहीं भेजुंगी. मेरा वो पडौसी याद हैं जो तुम्हारी चूत के पानी का दीवाना हैं। वो सीधा इंसान हैं। वो चलेगा तुम्हे? थोड़ी उम्र ज्यादा हैं पर वो तुम्हे परेशान नहीं करेगा”

मैं: “कोई भी चलेगा, मुझे कौन सी शादी करनी हैं। मुझे तो शादी तोड़नी हैं”

रूबी: “ठीक हैं मै उसको भेज दूंगी”

मैं: “तुम भी आ जाना, तुम वहां रहोगी तो अच्छा लगेगा”

मेरे जन्मदिन वाले दिन सुबह से ही मेरा मन नहीं मान रहा था। मुझे नहीं पता था कि मै जो करने वाली हूँ वो काम करेगा या नहीं पर मुझे कोशिश तो करनी थी।

राहुल जितनी बजे आने वाला था उस से एक घंटा पहले ही रूबी अपने पडौसी को लेकर आ गयी थी। उसके पडौसी को पहली बार देखा था, हालांकि वो मेरे चूत के पानी से पहले ही मिल कर चख चुका था। वो एक 45 साल का अधेड़ उम्र का आदमी था। इतने बड़ी उम्र के आदमी से मैंने कभी चुदवाया नहीं था।

रूबी ने मुझको एक और बार सोचने की सलाह दी पर मै तो कब का सोच चुकी थी। उसकी जॉब खतरे में ना पड़े इसलिए मैंने उसको राहुल के आने से पहले अंदर ही छुप जाने को बोला.

राहुल समय का बहुत पक्का था मुझे पता था। उसके आने के आधे घंटे पहले हमने कार्यक्रम शुरु कर दिया। मै और पडौसी अपने सारे कपड़े उतार नंगे हो गए.

एक जवान औरत और वो भी इतने अच्छे फिगर वाली, वो अधेड़ पडौसी तो आंखे फाड़ता हुआ पागल सा हो गया था। रूबी खिड़की पर नजर रखे थी ताकि राहुल के आते ही हमें खबर कर दे.

पडौसी ने मेरे बदन को अच्छे से छूकर मजे लिए. ख़ास तौर से मेरे मम्मो से उसका हाथ ही नहीं हट रहा था। दो बार उसने मेरे मम्मो को अपने दांतो से काटा कर निशान भी बना दिया था।

मेरी कमर, चूत, गांड को अपनी उंगलियों से अच्छे से दबा कर मजे लिए और मेरे होंठो को भी काटा दिया था।

उसने मेरी चूत में ऊँगली घुसा कर उसे अच्छे से रगड़ा. मेरी आहें निकलना शुरु हो गया था और वो और भी तेजी से अपनी ऊँगली रगड़ने लगा। फिर वो मेरी चूत को चाटने लगा।

अपनी जुबान जब उसने मेरी चूत में रगड़ी तो मेरी चूत का पानी चखते ही वो खुश हो गया। उसको क्या पता कि वो यह पानी पहले ही चख चुका था।

उसको मेरी चूत का पानी इतना पसंद आया कि वो कुछ मिनट तक वो ही करता रहा। फिर उसका मन भरा तो मैंने उसको चोदना शुरु करने को कहा.

उसने पहले अपना लंड मुझे चूसने को बोला. उसके लंड पर छोटे छोटे बाल उगे हुए थे और मुझे उसको चूसना पड़ा. रूबी को चोद चोद कर उसके लंड की जवानी बरकरार थी।

राहुल के आने में कुछ ही मिनट बचे थे और मैंने उसको चोदना शुरु करने को बोला. वो भी अपना लंड चुसवा कर खुश था।
 
मै अब सोफे पर लेट गयी और वो मेरे ऊपर पूरा लेट गया। पर मैंने उसको मेरे मुंह से दूर रहने को कहा. ताकि राहुल मेरी शक्ल ठीक से देख पाये।

वो फिर मेरी दोनो टांगो के बीच बैठ कर अपना लंड मेरी चूत में डालने लगा। उसके पहले मैंने उसको कंडोम पहना दिया ताकि उसकी कोई बीमारी मुझे ना लगे।

उसने अपना लंड मेरी चूत में डाल चोदना शुरु कर दिया। मैंने सुना था कि आदमी और घोड़ा कभी बुढ़े नहीं होते. जितनी जिसकी ताकत से मुझे चोद रहा था मुझे लग गया कि वो कहावत सही हैं।

वो काफी अनुभव के साथ मुझे तरीके से चोद रहा था। उसको पता था कि औरत को खुश कैसे करते हैं। मै अपनी चूत में पड़ते धक्को से जो आहें निकाल रही थी उन्हे वो पढ़ रहा था।

कुछ धक्को के बाद ही उसको पता चल गया कि मुझे कितना अंदर और किस दिशा में चोदने से मुझे ज्यादा मजा आएगा. उसने अब उसी चीज पर ध्यान किया और मुझे एक ही जगह चोदना शुरु कर दिया। तभी रूबी दौड़ते हुए आयी.

रूबी: “राहुल आ गया हैं और साथ में एक बड़ा गिफ्ट लाया हैं। तुम्हे अभी भी यह करना हैं?”

एक बार तो मै सोच में पड़ गयी। राहुल के सामने ये सब करना ठीक नहीं था। मगर मै निर्णय कर चुकी थी और इसी में उसके माँ-बाप की भलाई भी थी।

मैं: “तुम दरवाजा थोड़ा खुला छोड़ दो ताकि वो सीधा अंदर आ जाऐ। फिर तुम अंदर जाकर छुप जाओ”

रूबी ने वैसा ही किया और अंदर छुप गयी। पडौसी अभी भी मुझे तबियत से चोद रहा था। मेरी सिसकियां तो पहले ही निकल रही थी। मैंने अपनी सिसकियां थोड़ी बढा दी थी। नहीं बढ़ाती तो भी पडौसी के लंड के झटको से मै वैसे ही बेहाल हो चुकी थी।

उसके झटके अचानक बढ़ गए थे। इतनी खुबसूरत औरत के अच्छे फिगर को चोदते शायद उसके जड़ने का समय भी जल्दी आ गया था।

राहुल ने मेरा नाम पुकारा और फिर दरवाजा खुलने की आवाज आयी। मैंने आंखे बंद कर दी और सिसकियां भरती चुदवाती रही. राहुल की लगभग चिखते हुए मेरा नाम लेने की आवाज आयी।

मैने आंखे खोल कर देखा, राहुल की आंखे गुस्से में लाल थी और वो सदमे में मुझे चुदते हुए देख रहा था।

इधर पडौसी जड़ने लगा था और तेज दहाड़े मारते हुए मुझे बहुत तेज झटके मारने लगा, मै भी लगभग चीख पड़ी थी।

मै राहुल को देख आहें भरते हुए चुदवाती रही. राहुल ने अपने हाथ में पकड़ा गिफ्ट वहीं नीचे पटक दिया।

राहुल बाहर चला गया और जाते जाते जोर से दरवाजा बंदकर गया। पडौसी मेरी चूत में जड़ चुका था और मुझ पर पूरा लेट गया था।

पडौसी अब मेरे ऊपर से उठा और मेरे आंसू टपकने शुरु हो चुके थे। सामने रूबी खड़ी थी जिसकी खुद की आंखे नम थी।

उसने आगे बढ़कर मुझे उठाया और गले से लगा दिया और हम दोनो एक साथ रो रहे थे. पडौसी को कुछ समझ नहीं आया कि क्या हो रहा हैं। मेरा काम हो चुका था।

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राहुल मुझे भूल कर अपने माँ बाप की पसंद से शादी कर ले, इसके लिए मैंने उसका दिल तोड़ने के लिए उसके सामने एक गैर मर्द से चुदवा कर बेवफाई कर ली।

अगले ही दिन मैंने अपनी नौकरी से इस्तिफा दे दिया। मुझे एक महीने का नोटिस पिरीयड पूरा करना था तो ऑफिस आते रहना था। मैने ऑफिस जाना जारी रखा और राहुल ने मुझसे बात तक नहीं की थी। उसको जो भी कहना होता अपनी सेक्रटरी के द्वारा बोल देता या ईमेल से बताता.

3 सप्ताह बाद ही उसकी सगाई की खबर आ गयी। मेरा ऑफिस में जो लास्ट दिन होने वाला था उसके अगले ही दिन उसकी सगाई थी। ऑफिस में सब खुश थे कि आखिर उनके बॉस ने शादी करने की ठान ली थी। सिर्फ एक जना ऑफिस में खुश नहीं था और वो रूबी थी।

रूबी ने मुझको समझाया कि अभी भी देर नहीं हुयी हैं और वो सब संभाल लेगी पर मैंने उसको मना कर दिया।

मेरा ऑफिस में आखिरी दिन था और मैंने सबसे विदा लेना शुरु किया. राहुल को भी उसकी सगाई के लिए बधाई दे कर मैंने उस से विदा ली. उसने सिर्फ धन्यवाद बोला और कुछ नहीं. जाते वक्त रूबी से भी मिली.

रूबी: “तो क्या सोचा, क्या करोगी?”

मैं: “मै यह शहर छोड़कर कही और चली जाउंगी”

रूबी: “मै भी यह ऑफिस और जगह छोड़ रही हूँ”

मैं: “तुम क्युँ छोड़ रही हो?”

रूबी: “तुम्हे तो पता ही हैं, इस ऑफिस में मेरे कितने आशिक हैं। वो पडौसी भी मुझे रोज परेशान करता हैं चोदने के लिए”

मैं: “तो क्या हुआ! तुम्हे तो ऐसी ही आज़ादी वाली लाईफ चाहिये थी”

रूबी: “तुम्हारे चक्कर में मै सुधर गयी। जब से तुमने वो कांड किया हैं मैंने चुदवाया नहीं हैं”

मैं: “तुम तो एक दिन भी बिना चुदाये रह नहीं सकती, तुमने बिना चुदवायें एक महीना निकाल दिया!”

रूबी: “तुम्हे लगता था कि मैंने तुम्हे सुधरा, पर असल में तुमने मुझे सुधार दिया”

मैं: “तुमने मेरी बड़ी मदद की थी ऐसे दौर में। मुझे याद हैं तुम मेरी चूत में ऊँगली कर मेरी आदत सुधारती थी। चल आज मै तुम्हारी चूत में ऊँगली कर तुम्हारी इच्छा पूरी करुंगी”

मै रूबी के साथ उसके घर आ गयी। उसने अपने कपड़े खोले और नंगी हो गयी। उसकी चूत पर भी बड़े बड़े बाल उगे थे। यह सबूत था कि वो भी चुदाई से सन्यास ले चुकी थी। मैंने जल्दी ही उसकी चूत को अपनी ऊँगली से रगड़ कर उसको जड़ने में मदद की।

उसके जड़ने के दौरान ही बाहर दरवाजे पर उसका वो ही पडौसी आया था। रूबी उठ कर गयी और आज पहली बार उसने अपनी चूत का पानी अपने पडौसी को चखाया.

वो गाली देता हुआ वहां से चला गया कि ऐसा टेस्ट उसको करवाया। हम दोनो हस पड़े। रूबी ने मेरी भी जड़ने में मदद की पेशकश की पर मैंने उसको मना बोल दिया।

अगले दिन राहुल की सगाई थी और मैंने अपना सोशल मिडिया स्टेटस चेंज कर सिंगल कर दिया। अगले ही दिन मुझे एक जाने पहचाने आदमी का मैसेज मिला जो मुझे एक तरफा प्यार करता था।

पिछली बार जब वो विशाल कद काठी का काला इंसान भारत आया था और मुझसे मिला था तो मेरे प्यार में पड़ गया था। जो कि उसने जाते वक्त एक लव लैटर के मध्यम से बताया था।

उसने वादा किया था कि वो मेरे सोशल मिडिया स्टेटस पढता रहेगा. शायद वो इसी दिन का इंतजार कर रहा था। उसने मुझे अपना नंबर भी दिया था।

हम दोनो ने बात की। मैंने उसको बताया कि मैं अपने पति से तलाक ले चुकी हूँ और राहुल की जॉब भी छोड़ चुकी हूँ। उसने मुझे अपने पास जॉब का ऑफर दिया।

मैने अपने पुराने पति अशोक से बात कर ली कि मै हमारे बच्चे को साथ लेकर भारत से बाहर जाना चाहती हूँ। अशोक को तो वैसे भी अपने नयी बीवी पूजा से बच्चा पैदा करना था तो उसने मुझे इजाजत दे दी।

मैने अपने वीजा का प्रक्रिया शुरू कर दिया और कुछ महीनो के बाद ही मै देश छोड़कर अपने बच्चे के साथ जोसफ के यहाँ चली गयी।

उसने बड़े अपनेपन से हमारा स्वागत किया। उसने अपने नाजायज बाप बॉब की मदद से अपनी खुद की कंपनी शुरु कर दी थी और सौतेली माँ सैंड्रा के चंगूल से आज़ाद था।

मै वहां बॉब के बेटे जैक से भी मिली। जब जैक भारत आया था तो जैक और मै एक दूसरे के आकर्षण में पड़ गए थे। पर अब वो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ लीव इन में रह रहा था और जल्दी ही बाप भी बनने वाला था।

6 महीने बाद ही जोसफ ने मुझे शादी के लिए प्रोपोज़ कर दिया। मुझे पता था कि वो मुझे सच्चे दिल से प्यार करता हैं पर मै उस से कुछ छुपाना नहीं चाहती थी।

मैने उसको सब सच बता दिया पर फिर भी उसने मुझसे शादी करने की ठान ली थी। मैंने उसको उसकी माँ से भी अनुमति लेने की सलाह दी। उसकी माँ बहुत अच्छे दिल की थी और उसने मुझे स्वीकार लिया।

मैने उनको बोल दिया कि मै मेडीकल परेशानी की वजह से जोसफ के बच्चे की माँ नहीं बन पाउंगी। फिर भी उन्होने मुझे स्वीकार कर लिया कि मै अपना बच्चा खुद साथ लायी हूँ तो तो वो उसे ही अपना पोता मान लेगी।

एक तरफ राहुल के माँ बाप थे जो मुझे स्वीकार नहीं कर रहे थे और दुसरी तरफ जोसफ की माँ बाहें फेलाएं हमारे स्वागत को तैयार थी।

मुझे अच्छे से पता था कि जोसफ का लंड घोड़े की तरह बड़ा था और उस से शादी करने का मतलब उस दर्द को हमेशा के लिए झेलना था। पर उस दर्द के मुकाबले उसका प्यार ज्यादा भारी था। मैंने उसकी चुदाई से मिलने वाले दर्द को स्वीकार कर लिया।

जब मैंने अपने घर वालो को यह खबर दी कि मै एक काले आदमी, जो कि सांड की तरह दिखता हैं से शादी करुंगी तो वो शॉक में आ गए.

पर फिर मेरी आगे की ज़िन्दगी को देखते हुए वो मान गए. मेरे घर वाले मेरी शादी में आये थे। मै अपने बच्चे के साथ जोसफ के घर में खुश थी।

जोसफ को भी पता था कि उसके लंड से चुदवाने से मुझे कितना दर्द होगा इसलिए उसने मुझे पूरी छूट दी थी। मेरी इच्छा होती तो ही वो मुझसे चोदता और ज्यादा दर्द नहीं देने की कोशिश करता था।
 
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