• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest आग्याकारी माँ

शिप्रा कुछ कहने के लिए मुह खोलती है, पर सतीश उसके साइड से होते हुए अपने रूम की तरफ बढ़ जाता है...

शिप्रा डोर लॉक करके- आरे भय्या सुनो तो...

शिप्रा सतीश के पीछे पीछे उसके रूम मे पहुंच जाती है....

शिप्रा- आई एम सॉरी भइया...

सतीश- मे थक गया हूँ मुझे आराम करने है...

शिप्रा- पर भेया...

सतीश-पर वर कुछ नही...

शिप्रा वहि खड़ी रहती है उसकी आँखे अब नम हो चुकी थी.... और उसकी आँखों से आँसु बहने लगते हैं वो सतीश से बहुत कुछ कहना चाहती थि, पर कुछ कह नहि पाती और वहि खड़े आँसु बहाने लगती है....

सतीश जब गेट की तरफ देखता है तो शिप्रा को रोता हुआ देख वो तुरंत उसके पास आकर उसके कन्धो को पकड़ते हुये

सतीश- अरे पगली तू रो रही है....

शिप्रा उसके गले लगते हुये- प्लीज् भाई मुझे माफ़ कर दो मे जानती हूँ की मैंने आपका दिल दुखाया है, पर आगे से ऐसा नहि होगा और अब मे प्रिंस से भी नहि मिलूँगी पर प्लीज् आप मुझसे नाराज मत होना......

सतीश ने तो सोचा भी नहि था की प्रिंस नाम की प्रॉब्लम से इतनी जल्दी छुटकारा मिल जाएगा,

सतीश- अरे पगली मे तुझसे नाराज नहि हु... वो तो मे थक गया था इस्लिये तेरे से बात नहि कर रहा था.......

शिप्रा सुबकते हुये- सच कह रहे हो ना...

सतीश- एकदम सच्... भला मे तुझसे झुट क्यों बोलूंगा... चल अब टेसुए बहाने बंद कर और अपना मुह धोले जाकर....

शिप्रा उससे अलग होकर अपने रूम मे चलि जाती है और सतीश भी अपना लैपटॉप खोल कर बैठ जाता है.... थोड़ी देर मे ही सोनाली उनको खाने के लिए बुला लेती है.. सतीश जब निचे पहुचता है तो खाने की टेबल पर सोनाली और शिप्रा उसका वेट कर रही थी....

सतीश जैसी ही वह पहुचता है सोनाली उससे सवालो की झड़ी लगा देती है वो चुपचाप उनके जवाब देता है और फिर सब लोग भोजन करके अपने अपने रूम मे चले जाते है...

आज सतीश की आँखों मे नींद नहि थी वो तो बस शिप्रा के सोने का वेट कर रहा था क्युकी उसे आज रात का हॉट लाइव शो देखना था और उस पल के बारे मे सोच कर उसका लंड अभी से जोर मार रहा था......

पर तभी उसके डोर पर नॉक होती है जिससे वो ख्ययालो की दुनिया से बाहर आ जाता है...

सतीश घडी की तरफ देखता है जिसमे १० बज रहे थे- इस समय कोण होगा....

ओर सतीश बेड से उठ कर डोर खोलने के लिए बढ़ जाता है और गेट खोलते ही उसे अपना प्लान चोपट होता हुआ नजर आता है....

गेट खोलते ही सतीश का सारा प्लान चोपट हो जाता है, सामने शिप्रा खड़ी हुई मुस्कुरा रही थी....

सतीश- तू सोयी नहि अभी तक्...

शिप्रा- आपको मे सोयी हुई लगती हूँ क्या...

सतीश- मेरे कहने का मतलब है की तू इतनी रात को यहा क्या कर रही है, जा जाकर सोजा...

शिप्रा- क्या भाई मे आपसे बात करने आई हूँ और आप मुझे भगा रहे हो...

सतीश- हाँ बता क्या बात करनी है...

शिप्रा- क्या भाई अब गेट पर खड़ा रखोगे क्या अंदर नहि बुलाओगे...

सतीश अपने रूम को देखता है की कहि कुछ उल्टा सीधा तो नहि है फिर अपना पूरा गेट खोल कर उसे अंदर बुलाता है...

शिप्रा आकर सतीश के बेड पर टाँगे फैलाकर लेट जाती है और पास मे पड़े रिमोट को उठा कर टीवी ऑन कर लेती है, सतीश भी उसके पास आकर लेट जाता है...

सतीश- तू क्या टीवी देखने आई है यहां पर...

शिप्रा- नहि भाईया मे तो आपसे बात करने आई थी....

सतीश- बता तुझे क्या बात करनी है...

शिप्रा- भाई आप तो भारती से प्यार करते हो न...

सतीश उसकी तरफ देखता है पर शिप्रा अपनी नजरे टीवी पर टिकाये हुए थी...

शिप्रा- बताओ न भाई...

सतीश- हम्म बहोत प्यार करता हु...

शिप्रा- फिर ये प्रियंका कौन है भाई....

सतीश एक बार फिर से उसे देखता है पर वो अभी भी नजरे टीवी पर टिकाये हुए थि, सतीश उसकी बात का कोई जवाब नहि देता...

शिप्रा- आप भारती को कही चीट तो नहि कर रहे..

सतीश उसकी बात से बौखलाते हुये- तू पागल है क्या तू जानती है की मे उसे चीट नहि कर सकता...

शिप्रा- तो फिर प्रियंका कोण है....

सतीश- फ्रेंड है...

इस बार शिप्रा सतीश की तरफ देखति है पर वो ऐसे बिहेव करता है जैसे की कितने ध्यान से टीवी देख रहा हो... शायद अब वो शिप्रा से नजरे नहि मिला रहा था...

शिप्रा- तो भारती को तो पता ही होगा ना प्रियंका के बारे मे... क्यों भाईया?

सतीश- नहि... उसे नहि पता...

शिप्रा- यानी की आप उसे चीट कर रहे हो...

सतीश- तू आज कुछ ज्यादा ही सवाल जवाब नहि कर रहि...

शिप्रा- वो तो मे बस ऐसे ही जनरल नॉलेज के लिए ही पूछ रही थी...

सतीश उसके बालो को पकड़ कर धीरे से खीचते हुये- मे बढ़ाऊ तेरी जनरल नॉलेज.

शिप्रा- नही छोड़ो दर्द हो रहा है भाई, आपको नहि बताना तो मत बताओ इसमें इतने नाराज होने की क्या बात है...

सतीश उसके बाल छोड़ते हुये- चल भाग अपने रूम में...

शिप्रा बेड से उठते हुये- अगर आप नहि बता पा रहे है तो मे बात दू भारती को प्रियंका के बारे मे....

सतीश अपने बेड से उठ कर शिप्रा का हाथ पकड़ते हुये- तुझे मेरी कसम है शिप्रा तू भारती को कुछ भी नहि बतायेगि, तुझे पता है मे उसके बगैर नहि जी सकता....

ये बात सतीश ने बहुत सीरियसली कहि थी...

शिप्रा- डोंट वरि भाई मे उसे कुछ नहि बताऊंगी...

सतीश- थँक्स फ़ॉर धिस

शिप्रा- तो अब बताओगे की ये प्रियंका कौन है,

सतीश- सही टाइम आने पर बता दूँगा... अब तू जाकर सोजा मुझे बहुत जोर की नींद आ रही है, और जाते समय लाइट ऑफ कर जाना...

ओर सतीश आँखे बंद करके ऐसे रियेक्ट करता है जैसे उसे कितनी तेज नींद आ रही हो...

शिप्रा सतीश को देख कर मुस्कुरा देती है और फिर रूम की लाइट ऑफ करके वो गेट को बंद करके बाहर निकल जाती है....

 
गेट के बंद होने की आवाज सुनकर सतीश तुरंत अपनी आँखे खोल देता है... और बेड से उठ कर गेट लॉक करता है, और लैपटॉप खोलके उसपर लिसा अन्न की पोर्न मूवी देखने लगता है और शिप्रा के सोने का वेट करने लगता है...

सतीश उस मूवी को देख कर काफी एक्ससिटेड हो गया था क्युकी लिसा अन्न की उम्र सोनाली के उम्र की ही थी और जो लड़का उसको घोड़ी बना कर पीछे से उसकी चुत मे अपना मूसल पेल रहा था वो उसके बेटे की उम्र का लग रहा था, वो मूवी मे लिसा अन्न की जगह सोनाली को इमेजिन करने लगता है... और उस लड़के की जगह खुद को इमेजिन करते हुए अपनी माँ की कल्पनिक चुदाई का आनंद लेने लगता है....

अब सतीश इमेजिन करता है की कैसे वो अपनी मम्मी को घोड़ी बना कर अपना लंड पीछे से उसकी चुत मे कर रहा था.... सतीश अपना लंड टोपे तक बाहर निकाल कर वापस अंदर पेलकर उसकी चुदाई कर रहा था और साथ ही साथ उसके चूतडो को अपने पंजे से मसल रहा था.... फिर वो उसके चूतडो पर जोर जोर से थप्पड़ मारने लगता है और थप्पड़ मार कर उसके चूतडो को लाल कर देता है उसके हर थप्पड़ पर सोनाली के मुह से दर्द भरी सिसकारी फुट्ने लगती है...

अब सतीश धक्को को रोक कर अपने हाथ बड़ा कर सोनाली के बड़े बड़े बॉब्स दबाने लगता है... और उसकी पीठ पर अपनी जीभ फेरने लगता है....

थोड़ी देर तक उसके बॉब्स के साथ खेल्ने के बाद सतीश अपना लंड उसकी चुत से बाहर निकाल लेता है....

सोनाली तुरंत सीधी होकर उसके लंड को अपने मुह मे लेकर चुसना सुरु कर देती है... और थोड़ी देर मे ही चूसकर उसके लंड को साफ़ कर देती है...

सतीश उसके मुह से लंड को निकालता है और उसे धक्का देकर पीठ के बल लिटा देता है... और उसकी दोनों टांगों से पकड़ निचे की तरफ खीचता है अब सोनाली की चुत बिलकुल बेड के किनारे पर थी और उसके पैर बेड से निचे लटक रहे थे सतीश उसके एक पैर को उठा कर सीधा कर लेता है और उसकी चुत मे अपना लंड पेलकर उसकी धमाकेदार चुदाई करने लगता है... थोड़ी देर मे वो झड़ने के करीब आता है तो वो अपना लंड उसकी चुत से निकलता है और अपना लंड का सारा माल उसके दूध और पेट् पर झाड देता है.... सोनाली उसके माल को अपने दूध से उठा कर अपने मूह मे डालकर चाट लेती है और बाकी माल को अपने दूध पर रगड़ने लगती है..... सोनाली के दूध अब चमकने लगे थे....

उधर मूवी ख़तम हुई इधर सतीश का लंड जिसे वो अपने हाथ से हिला रहा था, ने भी अपना लावा उगल दिया जोकि उसकी बेडशीट पर गिरा... पर सतीश तो आनंद मे खोया हुआ था और जब उसे होश आता है तब वो देखता है की उसका माल उसके बिस्तर पर पड़ा हुआ था... वो तुरंत अपने रुमाल से उसे साफ़ करता है पर बेडशीट पर निशान पड़ चुका था...

सतीश- शीट यार आज ही तो नई बेडशीट डालि थी और आज ही...

सतीश अपना माल झड़ने के बाद जोकि उसकी बेडशीट पर ही गिरा था को अपने रुमाल से बेडशीट साफ़ करता है और फिर अपने लौडे को साफ़ करके उसे अपने शार्ट मे वापस दाल देता है, अब सतीश थोड़ा हल्का महसूश कर रहा था वो घडी की तरफ देखता है जोक ११:३० बजा रही थी

सतीश- ४० मीनट. हो गये शिप्रा को गए हुए यानी की शिप्रा अब तक सो गई होगी....

ओ बेड से उठता है और फिर धीरे से अपना डोर खोल कर बाहर आ जाता है नीचे जाने से पहले वो शिप्रा का डोर चेक करता है जोकि अंदर से लॉक्ड था...

सतीश- लगता है सो गयी...

ओर फिर वो सीडियों से निचे उतरता है तो देखता है की उसके माँ के कमरे की लाइट ओपन थी...

सतीश- लगता है माँ चालू हो गये...

ओर वो धीरे धीरे उनके गेट की तरफ बढ्ने लगता है... जैसे ही वो गेट के नजदीक पहुचता है उसे सिसकारियों की आवाज आने लगती है...

ओर गेट पर पहुचते ही उसके सामने जन्नत का नजारा था....

उसकी माँ यानी की सोनाली बेड पर अपना सर तकिये पर टिकाये नंगी लेटी हुई थी और उसका एक हाथ अपने बॉब्स को मसल रहा था और दूसरे हाथ से वो डिलडो को अपनी चुत मे अंदर बाहर कर रही थी...

उसका बदन एकदम संगेमरमर की तरह चमक रहा था और उसके सेक्सी बदन को और उसकी एक्टिविटी को देख कर सतीश का लंड फिर से उसके शार्ट मे खड़ा हो जाता है....

उधर अब सोनाली अपना हाथ दूध से हटा कर अपनी क्लीट को सहलाने लगती है... सोनाली अपनी सिस्कियों को रोक्ने की भरपूर कोशिश करती है ताकि सतीश और शिप्रा तक उसकी आवाज न पहुचे.... पर फिर भी उसके मुह से सिसकारी फुट रही थी....

सतीश अपने लंड को बाहर निकालकर सहलाते हुये.... आह माँ आप क्या माल हो ये आपको भी नहि पता तभी आप इतना तड़प रही हो वरना आपको इतना तडपना नहि पडता अपनी प्यास बुजाने के लिये....

ह.दी.- भोसडी के यहि खड़ा अपना हिलाते रहियो तु... और तेरी माँ किसी और से चुदवा बैठेगी...

सतीश- नही यार फिर से नहि,

ह.दी.-क्या फिर से नहि बे...

सतीश- तू ऐसे बार बार मुझे डिस्टर्ब नहि कर सकता...

ह.दी.- हरामखोर मे तुझे डिस्टर्ब नहि करता हूँ बल्कि तुझे सच्चाई से और लंड की ख्वाहिश तुजसे जाहिर करता हु... और तेरा लंड इस समय इसकी चुत की गहराई नापना चाह रहा है.... और तू भोसडी के यहा अपना लंड हिला रहा है....

सतीश- तो कर भी क्या सकता हूँ सतीश....

ह.दी.- जाकर अपना लंड पेल दे अपनी माँ की चुत मे और बनजा मादरचोद और इस समय वो इतनी गरम है की बड़ी आराम से तेरा लंड ले लेगी....

सतीश- भोसडी के तू सोचता कहा से है...

ह.दी.- जहा से तू नहि सोचता...

सतीश- जरूर तू लंड से ही सोचता है... पर मुझे तेरी इस बकवास से कोई मतलब नहि...

ह.दी.- ह...

इस पहले की ह.दी. कुछ कह पता सतीश- और हाँ अब मुझे डिस्टर्ब मत कर और मुझे लाइव शो देखने दे...

ओर सतीश वापस अपने लौडे को हिलाते हुए अपनी माँ का लाइव शो देखने लगता है....

सोनाली अपने एक हाथ से अपनी क्लीट को सहलाते हुये अपने दूसरे हाथ से डिलडो अंदर बाहर करती है... और धीरे धीरे उसकी स्पीड बढ्ने लगती है और थोड़ी देर मे ही उसका शरीर अकड जाता है और उसकी कमर बेड से ऊँची उठ जाती है और उसकी चुत सारा पानी बहा देती है... और उसकी कमर वापस बेड से टिक जाती है उसकी चुत अभी भी रस बहा रही थी....

थोड़ी देर मे ही सोनाली बेड से उठती है और बाथरूम मे चलि जाती है... इधर पता नहीं सतीश को क्या सूझता है वो सोनाली के बाथरूम मे जाते ही अंदर उसके बेड के पास पहुच जाता है और बेड पर पड़े सोनाली की चुत के रस के पास अपनी नाक ले जाकर उसे सूंघता है...

सतीश जैसे ही सांस अंदर खीचता है उसके चुत के रस की खुशबू उसके नथुनो से होते हुए अंदर तक पहुच जाती है और वो मदहोश होने लगता है

सतीश- आह... क्या मदहोश कर देणे वाली खुसबू है, ऐसी खुसबू तो मैंने आज तक नहि सुंघी....

ओर सतीश अपनी जीभ निकाल कर उस बेड शीट पर पड़े रस को चाटने लगता है, उसकी मधहोशी पल पल बढ़ती जा रही थी...

सतीश- क्या स्वाद है माँ की चुत के रस का....

ओर वो किसी कुत्ते की तरह अपनी जीभ निकालकर ज्यादा से ज्यादा रस बेडशीट से चाटने की कोशिश करने लगता है....

तभी उसके कान मे बाथरूम का गेट खुलने की आवाज आती है सतीश हडबडा जाता है उसके पास बाहर निकलने का वक़्त नहि था वो हड़बड़ाहट मे बेड के निचे छुप जाता है....

 
सतीश की धड़कने बहुत तेज हो गई थी वो बेड के निचे से झांक कर देखता है की सोनाली नंगी ही बाथरूम से बाहर आ गई थी और फिर वार्ड रॉब से अपनी नाइटी जोकि रेड कलर की थी को निकाल कर पहन लेती है, नाइटी पूरी तरह से पारदर्शी थी और उसके थाय तक ही आ रही थी और ऊपर उसके आधे से ज्यादा दूध नाइटी से बाहर झलक रहे थे...

डर के मारे सतीश का जो लंड सिकुड गया था अब वो पूरी तरह से खड़ा हो चुका था...

ओर उधर सोनाली नाइटी पहनकर लाइट्स ऑफ करती है और नाईट लैंप ऑन करके अपने बिस्तर पर लेट जाती है...

ओर इधर बेड के निचे सतीश बेचारा बुरी तरह फास गया था...

सतीश- यार कहा फस गया आज, वो तो अच्छा हुआ माँ की नजर नहि पड़ी मुझ पर वरना आज तो लौडे लग जाने थे...

ओर अब तो मे जा भी नहि सकता जब तक माँ नहि सो जाती...

सतीश निचे पड़े पड़े ही सोनाली के सोने का वेट करने लगता है... ३० मीनट. बाद सतीश बेड के निचे से निकलता है... अभी वो बाहर की तरफ निकलने वाला था की उसकी नजर सोनाली पे पड़ती है, सोनाली पीठ के बल सो रही थी और सोटे हुए बहुत सेक्सी लग रही थी उसकी नंगी चिकनी टाँगे देख कर सतीश का मन डोलने लगता है वो वापस बेड के किनारे आकर बैठ जाता है और नाईट लैंप की हलकी रौशनी मे अपनी आधी नंगी सोती माँ को देखने लगता है....

सोनाली की नंगी चिकनी टाँगे देख कर उसका लंड पूरी तरह अकड जाता है और उसका मन सोनाली की टाँगो को छूने को मचलने लगता है....

ओर सतीश हिम्मत करके अपना हाथ सोनाली की टाँगो पर रख देता है और फिर अपने हाथ को वहि रख कर अपनी माँ की तरफ देखता है, वो गहरी नींद मे थी उसे सोता देख सतीश की हिम्मत बढ़ जाती है और वो अपने हाथ को अपनी माँ की टांगो पर नीचे से ऊपर की तरफ बडाने लगता है अपनी माँ के मख़मली टांगो पर हाथ फिराते हुए उसके पूरे बदन मे सिहरन सी दौड जाती है वो सोनाली की टाँगो पर हाथ फिराते हुए घुटने तक ले आता है... घुटने पर अपने हाथ को रोक कर वो फिर से सोनाली की तरफ देखता है वो अभी भी नींद मे थी... अब सतीश की हिम्मत और बढ़ गई और सतीश अपने दोनों हाथ उसके पैरो पर रख कर उनके घुटनो को.सहलाने लगता है और फिर अपने होंठ उसकी नंगी टाँग पर रख कर निचे से घुटनो तक उसकी टाँग को चूमता है अब वो अपने हाथो को घुटने से आगे बड़ा कर उसकी जाँघ पर रख देता है....

उसे बहोत सुखद अनुभव हो रहा था उसकी मख़मली जाँघो को छूते हुये, सतीश अपनी माँ के शरीर की गर्मी को उनकी जाँघो से ही महसूश कर रहा था....

सतीश अपने माँ की जाँघों पर अपने होंठ रख देता है... और फिर उसे किस करते हुए ऊपर की और बढ्ने लगता है.... और ऐसा ही वो दूसरे को किश करते हुये ऊपर बढ़ता है....

अब सतीश बेड पर अपनी माँ के पैरो के दोनों और अपने घुटने टेक कर बैठे हुये था और उनकी जाँघो को सहला रहा था... अब उसके दोनों हाथ जाँघो पर फिसलते उसकी नाइटी तक पहुंच गए सतीश वहा पर अपनी माँ की चुत की गर्मी को महसूश कर सकता था यानी की उसकी माँ की चुत उससे थोड़ी दूरि पर ही थी पर बीच मे नाइटी दिवार बनकर खड़ी थी उसने हिम्मत करके नाइटी को कमर तक खिसका दिया और अब उसके सामने जन्नत का द्वार था उसकी माँ की चिकनी चुत उसकी आँखों के सामने थी जिसे वो नाईट लैंप की रौशनी मे अच्छे से देख सकता था, जिस चुत ने उसे पागल बना दिया था अब वो उसके सामने थी उसके थोड़ी ही दूरि पर....

सतीश अपने चेहरे को उसके चुत के करीब ले जाता है बहुत करीब और फिर एक गहरी सांस लेकर उसकी चुत की स्मेल को अपने अंदर खींचता है, सतीश का लंड झटके मारने लगता है...

सतीश अपनी माँ की चुत की गर्मी को अपने चेहरे पर अच्छे से महसूश कर रहा था उसका मन तो कर रहा था की वो आगे बड़कर अपनी माँ की चुत को अपने मुह मे भर ले पर वो बड़ी मुस्किल से अपने पर कण्ट्रोल करके अपने चेहरे को जाँघो के बीच से हटा लेता है और ऊपर सोनाली के चेहरे की तरफ बढ़ जाता है, सोनाली गहरी नींद मे थी सतीश उसके चेहरे को देखता है वो किसी एंजेल.की तरह लग रही थी सतीश उसके होंठो की तरफ देखता है बिना किसी लिपस्टिक के ही उसके होंठ काफी गुलाबी थे सतीश अपने पर कण्ट्रोल नही कर पाता और उसके होंठो पर अपने होंठ रख देता है और तुरंत ही हटा लेता है...

सतीश सोनाली के गुलाबी होंठो पर अपने होंठ रख देता है और तुरंत ही अपने होंठ हटा लेता है, सतीश का मन तो कर रहा था की उसके होंठो को अपने होंठो मे लेकर चुस लु पर उसकी हिम्मत नहि हो रही थी क्युकी उसकी इस हरकत से सोनाली जाग सकती थी...

 
सतीश सोनाली के होंठो पर २-३ छोटी किस करता है, और फिर उसकी गर्दन पर किश करते हुए नीचे आता है अब सतीश की नजर सोनाली के नाइटी से बाहर झलकते हुए चूचियों पर पड़ती है सतीश का मन सोनाली की चूचियों को नंगा देखने को मचलने लगता है, सतीश हिम्मत करते हुए उसकी नाइटी मे अपनी उँगलियाँ फसा देता है और उसकी नाइटी को चूचियों पर से निचे खिसकाने लगता है ये सब करते हुए सतीश की नजर सोनाली पर ही टीकी हुई थी...

उसकी मेहनत रंग लाती है और थोड़ी देर मे ही सोनाली की चूचियां सतीश के सामने नंगी थि, सतीश तो उन्हें देखते ही रह जाता है सोनाली की चूचियां वेल शेप्ड और एकदम गोरी थी.... इस उम्र मे भी सोनाली ने अपने फिगर को काफी अच्छे से मेन्टेन कर रखा था.... सतीश उसकी चूचियों पर अपने हाथ रख देता है अपनी माँ की मख़मली चूचियों के एहसाश से उसके मुह से सिसकि निकल जाती है....

सतीश- आह्हः माँ क्या माल हो आप, दिल तो करता है की आपकी चूचियों को अपने हांथो मे लेकर मसल दू और आपकी निप्पल्स को मुह मे लेकर चुसू और काटु....

सतीश अपनी माँ की चूचियों पर अपने हाथ हलके हलके फेरने लगता है इस समय सतीश जैसे जन्नत की सैर कर रहा था....

अब वो उसकी दोनों चूचियों पर अपने होंठो से चूमने लगता है और अपने अंगूठो से निप्पल्स को रब करने लगता है और ये सब वो बहुत ही आराम से कर रहा था और बीच बीच मे सोनाली की तरफ भी देखता की कही उसकी माँ की नींद न तूट जाए....

काफी देर तक किश करने के बाद सतीश अपनी जीभ से उसकी दोनों चूचियां बारी बारी से चाटने लगता है... और चूचियों चाटने के बाद वो सोनाली के निप्पल्स को अपने मुह मे लेकर चुस्ने लगता है थोड़ी देर तक चुस्ने के बाद वो दूसरे निप्पल को अपने मुह मे भर कर चुस्ने लगता है सतीश इतना एक्ससायटेड हो जाता है की वो भूल जाता है की वो कहा और किसके साथ ये सब कर रहा है और निप्पल को हलके से बाईट कर लेता है, उसकी इस हरकत से सोनाली कसमसा उठती है सतीश तुरंत ही बेड से निचे उतार कर उसके निचे छुप जाता है जबकि ऊपर सोनाली हलकी सी कसमसा कर अपनी करवट बदल कर लेट जाती है उसकी नींद अभी भी नहि टुटी थी ऐसा लगा था जैसे आज वो काफी समय बाद इतने सुकून की नींद ले रही हो....

बेड के निचे छुपे सतीश की तो फट कर मुह को आ गई थी उसने सोचा की आज तो उसकी वाट लगनी तय है और डैड तो उसे घर से ही निकल देंगे अगर उन्हें पता चला तो... पर जब वो काफी टाइम तक बेड पर कोई हरकत नहि देखता तो बेड के निचे से बाहर निकल कर देखता है तो उसे अपनी माँ को सोता देख सुकून मिलता है और सोनाली का चेहरा उसकी तरफ ही था और उसके दोनों चूचियां लटक रही थी... और निचे से उसकी नाइटी कमर से भी ऊपर हो गई थी.... ये सीन देख कर सतीश की आँखों मे फिर से हवस के कीड़े रेंगने लगते है, और वो उठ कर सोनाली के नंगे पैरों पर हाथ फिराते हुए ऊपर की तरफ बढ़ते हुए उसकी गांड तक पहुच जाता है सोनाली की मोटी गांड अब उसकी आँखों के सामने थी सतीश उसकी गांड देख कर पागल हो जाता है, मोटी और बड़ी गांडो का तो दीवाना था सतीश, वो बेतहाशा सोनाली की गांड को चूमने लगता है और उसकी गांड को हलके हाथ से मसलने लगता है... उसकी गांड को नंगी देख कर उसपर एक पागलपन सवार हो गया था और उसका लंड उसके शार्ट मे खड़े खड़े दर्द करने लगा था सतीश अपने लंड को बाहर निकाल कर सोनाली के पीछे लेट जाता है और अपना लंड उसकी गांड के पट्टो के बिच मे फसा देता है और धीरे धीरे घस्से मारने लगता है... सतीश अब जन्नत की सैर कर रहा था वो अपना एक हाथ आगे बड़ा कर उसके बॉब्स पर रख देता है और धीरे धीरे उन्हें सहलाने लगता है....

धीरे धीरे सतीश की स्पीड बढ्ने लगती है और वो अपनी कमर को तेजी से आगे पीछे करना लगता है उसका मुसल लंड गांड के बीच मे से होते हुए उसकी चुत से टकरा रहा था...

सतीश को ऐसा लग रहा था जैसे वो सच मे अपनी माँ की गांड मे लंड दाल के तेजी मे पेल रहा है, उसके आनंद की तो कोई सीमा ही नहि थी....

उसका लंड अब तेजी से गांड के बिच मे से होते हुए उसकी माँ की चुत पर ठोकर मार रहा था जिससे उसकी चुत पनिया गई थि, सोनाली की चुत इतना पानी बहा रही थी की सतीश का लंड टोपे तक उसके चुत के पानी से भीग गया था.... सतीश अपने लंड को गांड मे घस्से मारते हुए उसकी चूचियों को अपने हाथ से मसल रहा था

सतीश को ऐसा लग रहा था जैसे वो सच मे अपनी माँ की गांड मे लंड दाल के तेजी मे पेल रहा है, उसके आनंद की तो कोई सीमा ही नहि थी....

उसका लंड अब तेजी से गांड के बिच मे से होते हुए उसकी माँ की चुत पर ठोकर मार रहा था जिससे उसकी चुत पनिया गई थि, सोनाली की चुत इतना पानी बहा रही थी की सतीश का लंड टोपे तक उसके चुत के पानी से भीग गया था.... सतीश अपने लंड को गांड मे घस्से मरते हुए उसकी चूचियों को अपने हाथ से मसलने लगता है....

इधर सोनाली अपने सपने मे – आह आह उफ़्फ़फ़ डार्लिंग और जोर से हाँ ऐसे ही करते रहो बहोत अच्छा लग रहा है और जोर से दबाओ आह्ह्ह्ह....

सतीश को समझते देर नहि लगती की उसकी माँ सपने मे डैड से चुद रही है जबकि हक़ीक़त ये थी की उसका बेटा खुद उसे पेल रहा था....

सतीश अब अपनी स्पीड और तेज कर देता है उसका लंड तेजी मे उसकी गांड के बीच से होता हुआ उसकी चुत से टकरा रहा था...

अनजाने मे ही सही पर सोनाली भी इस सबका मजा ले रही थी....

अब सतीश के धक्के और तेज होने लगे थे और वो झड़ने के करीब पहुच गया था की तभी डोर बेल्ल बजती है,

 
सतीश हडबडा कर अपनी माँ से अलग होता है और तेजी से अपने शॉर्ट्स को ऊपर चड़ा कर गेट की तरफ बढ़ जाता है क्युकी वो दर रहा था की डोरबेल के बार बार बजने से उसकी माँ की आँख खुल सकती थी जोकि वो नहि चाहता था.... वो समझ गया था की गेट पर डैड हैं क्युकी इस समय किसी और के होने का तो चांस ही नहि बनता....

ओ तेजी मे गेट पर पहुच कर गेट को ओपन करता है... बाहर उसके डैड जोकि पूरी तरह नशे मे धुत्त थे और उनका दोस्त दुश्यंत रोज की तरह उन्हें छोड़ने आया था पर आज सतीश को गेट खोलता देख कर उसके सोनाली से मिलने और उसकी एक सेक्सी झलक पाने के अरमाओ पर पानी फिर चुका था वो अविनाश को सतीश को सौपते हुये- हेलो बेटा हाउ आर यु??

सतीश-ठीक हु अंकल और आप?

दुश्यंत- मि टू बेटा और आज मम्मी नहि आई तुम्हारी?

सतीश- माँ की तबियत ठीक नहि है इस्लिये आज वो जल्दी सो गयी...

फिर दुश्यंत उसको गुड नाईट बोलकर चला जाता है और सतीश अपने डैड को उनके बैडरूम मे ले आता है और एंटर होते ही देखता है की उसकी माँ ने फिर से करवट बदल ली है और अब वो पीठ के बल लेट कर सो रही थी...

सतीश अपने डैड को जोकि बेहोषी की हालत मे थे बेड पर साइड पे लीटा देता है और लाइट ऑन करके अपनी माँ के सुन्दर बदन को निहारने लगता है काफी टाइम तक अपनी माँ का चक्षु चोदन करने के बाद सतीश अपने डैड के शूज और शॉक्स उतार देता है...

ओर फिर लाइट्स ऑफ करने के बाद अपने खड़े लंड को हल्का करने के लिए वो वापस बेड पर आ जाता है और अपनी माँ के पैरो को थोड़ा सा फैला देता है अब सोनाली की चूत खुल कर उसके सामने आ जाती है.... सतीश देर न करते हुए उसकी चुत पर एक किस्स करता है और फिर अपने लंड को बाहर निकाल कर उसके चुत पर रख कर मिशनरी पोजीशन मे उसके ऊपर आता है पर उसकी बॉडी पर अपना वेट नहि ड़ालता और ऊपर से ही उसकी चुत पर घिसाई करने लगता है थोड़ी देर मे ही सोनाली की चुत पानी बहाना सुरु कर देती है और सतीश को धक्के लगने मे आसानी हो जाती है इस समय उसका मजा दोगुना था क्युकी वो अपनी माँ की चुत पर लंड से धक्के लगा रहा था और उसका बाप उसकी माँ के बगल मे लेटा हुआ था इस बात से एक अलग ही रोमाँच आ रहा था उसके अंदर.... और वो इसको ज्यादा बरदास्त नहि कर पाता और झड़ने के करीब पहुच जाता है झड़ने से पहले ही वो अपने लंड का टोपा सोनाली की चुत मे अंदर कर देता है और टोपे के चुत मे घुसते ही वो अपना सारा रस उसमे उडेल देता है....

हल्का होने के बाद सतीश अपना टोपा जोकि चुत के होंठो मे फसा हुआ था को बाहर निकलता है और उसे अपनी माँ की थाय पर रगड कर साफ़ करके अपने शार्ट मे दाल कर रूम बाहर निकल जाता है और अपने कमरे मे चला जाता है उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था की उसने ये सब किया तो किया कैसे....

ओ इस बात के बारे मे ज्यादा न सोचते हुए फुल नुड हो जाता है और जानबूझकर अपना दरवाजा खुला छोड़ देता है ताकि अगर उसका शक सही है की उसकी माँ ने उसका लौडा देख लिया है तो वो फिर से देखेंगी... वो अपने मोबाइल मे सुबह ६ बजे का अलार्म लगता है ताकि वो उठ कर अपनी माँ के एक्सप्रेशन देख सके सोने की एक्टिंग करते हुये....

सतीश बेड पर लेट जाता है और थोड़ी देर मे ही नींद के आग़ोश मे चला जाता है....

सूबह जब सोनाली की आँख खुलती है तो वो अपनी हालत देख कर शॉकेड रह जाती है, वो अपने पास अपने पति को लेटा देख कर....

सोनाली अपने आप से बुड़बुड़ाते हुये- ये किस टाइम आ गए इन्होने तो आने को मना कर दिया था इस्लिये मे स्लीपिंग पिल्स लेकर सो गई थि, जरूर इन्होंने मेरी ये हालत होगी क्युकी अपने आप तो बॉब्स नाइटी से बाहर आ नहि सकते....

सोनाली अब अपनी चुत की तरफ देखति है उसे चुत के निचे की चादर पर पड़े निशान दिखाइ देते है....

सोनाली अपने आप से- लगता है कल मेरी चुत ने काफी पानी बहाया है पर ये निशान तो वीर्य के लग रहे है, जरूर अविनाश ने ट्राय करा होगा और हर बार की तरह चुत की गर्मी से बाहर ही अपना माल झाड़ दिया होगा, इस नशे की लत ने तो इन्हे कही का नहि छोडा पहले हम साथ मे कितना एन्जॉय करते थे और अब तो ये आते ही बिस्तर पर लेट जाते है और कभी ट्राय भी करते है तो कुछ करने से पहले ही झड जाते है....

सोनाली बिस्तर से उठ कर बाथरूम मे फ्रेश होने चलि जाती है... आज उसने काफी अच्छी नींद ली थी जिसका असर उसके चेहरे से पता चल रहा था वो काफी फ्रेश लग रही थि, थोड़ी देर मे ही सोनाली फ्रेश होकर वाशरूम से बाहर निकलती है और सबके लिए टी बनाने के लिए किचन मे चलि जाती है....

ईधर सतीश के रूम मे ६ बजे अलार्म बजता है, अलार्म की आवाज से सतीश की नींद तूट जाती है और वो उठ कर अलार्म बंद करता है और फिर बिस्तर पर लेट जाता है, सतीश बेसब्री से अपनी माँ का इन्तजार कर रहा था... और थोड़ी देर मे ही उसके इन्तजार की घडी ख़त्म होने वाली थी क्युकी सोनाली कप्स मे चाय डालकर उसके रूम की तरफ ही बढ़ रही थी.....

 
सतीश के रूम के बाहर पहुच कर सोनाली गेट खोलने ही वाली थी की उसे कल वाला इंसिडेंट याद आ जाता है और वो रुक जाती है, अब उसके मन मे खलबली मची हुयी थी एक तरफ तो वो सोच रही थी की उसे नॉक करना चाहिए डोर पर..... वहि दुसरी तरफ उसका मन अंदर जाकर उस हसीन नज़ारे के दर्शन करने को कह रहा था...

सोनाली असमंजस की स्थिति मे थि, की तभी उसे कल वाला सीन याद आ जाता है जब उसने सतीश के लंड को देखा था, कितना भयानक लग रहा था वह, कितना बड़ा और मोटा था जिसकी चुत मे भी वो जाता उसे तो जन्नत नसीब हो जाती...

सोनाली अपने आप को रोकने की बहुत कोशिश कर रही रही पर उसे अपनी जिस्म की आग के आगे झुकना ही पडता है...

सोनाली अपने मन मे- ये जरुरी तो नहि की एक दिन उसका लंड बिना कपड़ो के देखने को मिल गया तो हर बार मुझे वो बिना कपड़ो के.देखने को मिल जायेगा.... पर हो भी सकता है की वो बिना कपड़ो के देखने को मिल ही जाए......

ओर वो बिना गेट पर नॉक करे रूम मे एंटर हो जाती है अंदर सतीश नंगा लेते हुए सोने की एक्टिंग कर रहा था और हलकी सी आँखें खोक कर गेट की ही तरफ देख रहा था....

अपनी माँ को आया देख कर ही उसका लंड और भी अकड जाता है. ...

उधर सोनाली को ये लगता है की सतीश सो रहा है और वो बेखोफ टकटकी लगाये सतीश के लौडे को देखने लगती है...

अपनी माँ को ऐसे लंड घुरता हुआ देख कर उसका लंड और झटके मारने लगता है...

सोनाली की चुत उस मदमस्त लौडे को देख कर पानी बहाने लगती है, सोनाली जिसके एक हाथ मे ट्रे थी अपने दूसरे हाथ से अपनी चुत को अपने नाइटी के ऊपर से रगड देती है.....

सतीश उसकी इस हरकत से चौक जाता है उसे तो यकीन ही नहि होता की उसकी माँ अपने बेटे के लौडे को देख कर इतनी गरम हो गई है की उसे अपनी चुत को शांत करने के लिए मसलना पड़ रहा है....

तभी सोनाली को पता नहि क्या सूझता है की वो पलट कर सतीश का गेट लॉक करती है और फिर सतीश की तरफ बढ़ जाती है, सोनाली ट्रे को बेड के पास पड़े टेबल पर रखती है और फिर सतीश के पैरों के बीच मे आकर बैठ जाती है और उसके लौडे को देखने लगती है.... उसके चेहरे के एक्सप्रेशन पल प्रति पल बदल रहे थे जिन्हे सतीश अच्छे से देख सकता था.....

सोनाली को सतीश के इतने करीब उसकी सतीश के लंड को पास से देखने की प्रबल इच्छा ले आई थी....

सोनाली सतीश के लंड के इतने करीब थी की उसके लंड की खुशबू उसके नथुनो से होते हुए अंदर चलि गई थी....

सोनाली अपने ऊपर से कण्ट्रोल खोती जा रही थी वो अपना हाथ आगे बड़ा कर सतीश के लंड को अपने हाथ मे ले लेती है, सोनाली की इस हरकत से सतीश की बॉडी काँप उठती है बड़ी मुस्किल से वो अपनी सिस्कियों पर रोक लगाता है...

सतीश की बॉडी मे हुए कम्पन से सोनाली डर के अलग हो जाती है और सतीश के चेहरे की तरफ देखति है और उसे सोता देख उस थोड़ी संतुस्टि होती है... और वो ट्रे उठाकर वापस किचन की और चल देती है...

उसे अपने आप पर यकीन नहि हो रहा था की कैसे वो अपने बेटे के साथ ये सब कर सकती है... उसे अपने पर घिन भी आ रही थी और कभी वो उसके बारे मे सोच सोच कर गरम हो रही थी....

ओ दोबारा चाय बना कर कप्स मे दाल कर सतीश के रूम की तरफ बाद जाती है.... सतीश के रूम के बाहर पहुच कर वो डोर नॉक करती है अंदर सतीश जोकि अभी तक अपनी माँ की.हारकत से रोमाँचित था उठ कर एक शार्ट ड़ालता है और थोड़ी देर वेट करता है जब तक सोनाली उसके गेट पर २-३ बार और नॉक नहि करति.... शार्ट मे उसका लंड टेंट बनाये हुए साफ़ पता चल रहा था वो गेट खोलता है और सोनाली को गुड मॉर्निंग बोलता है... सोनाली उसे कप देती है, सोनाली तिरछी नजरो से सतीश के शार्ट मे बने तम्बू को देख रही थी... और सतीश भी उसकी हरकतो को नोट कर रहा था...

सोनाली उसे चाय देकर तेजी से शिप्रा के रूम की तरफ बढ़ जाती है और सतीश के चेहरे पर विजई मुस्कान आ जाती है...

शिप्रा के रूम मे जाकर वो शिप्रा को जगाती है और उसे चाय देकर फ्रेश होकर नीचे आने को बोल देती है और नीचे किचन मे जाकर उनके लिए नाश्ता तैयार करने लगती है, पर अभी भी वो सतीश के लौडे के बारे मे ही सोच रहा थी,

सोनाली अपने मन मे- इतनी सी उम्र मे कितना बड़ा हो गया है इसका पेनिस मुझे तो यकीन ही नहि हो रहा की मैंने जो देखा वो रियलिटी थी या फिर कोई भ्रम्... इतनी सी उम्र मे ही ये तो बड़ी से बड़ी औरत को मजा देणे लायक हो गया है... ये तो खेली खाई रण्डियों को भी चिखा दे फिर मे तो इतने समय से चूदी नहि हूँ और चूदी भी हूँ तो ५ इंच के लौडे से ये तो मेरी चुत का भोसडा बना देगा....

ओर सोनाली की चुत रस बहाने लगती है... सोनाली अपने हाथ से अपनी चुत सहलाते हुये- हाय ये तो बेटे के लंड के बारे मे सोच कर ही पानी बहा रही है, तो जब वो मेरी चुत मे जायेगा तो इसका क्या हाल होगा....

सोनाली अपने मन मे ही- छि छितू ये ऐसा सोच भी कैसे सकती है वो भी अपने बेटे के बारे मे तुझे शर्म करनी चाहिए अपने आप पर सोनाली भला कभी कोई माँ कभी अपने बेटे के बारे मे ऐसा सोचती है कहि....

सोनाली नाश्ता तैयार करके बाहर आकर कुरसी पर बैठ जाती है... और अपने विचारो मे खो जाती है उसे समझ नहि आ रहा था की क्या गलत है और क्या सही है

 
सोनाली के अंदर अजीब सी कस्मकश चल रही थी... जबकि दूसरी तरफ सतीश बहुत खुश था उसे ऐसा लग रहा था जैसे अब उसकी माँ की चुत मे जलद ही उसका लंड होगा... और रात को लेट सोने के कारण वो वापस अपने बिस्तर पर आकर सो जाता है ...

इधार शिप्रा तैयार होकर नीचे आती है तो अपनी माँ को गुमसुम बैठा देख कर उसकी तरफ बढ़ जाती है और पीछे से उसके गले मे बाँहें दाल कर उसके गाल पर किस करती है उसकी इस हरकत से सोनाली अपनी सोच से बाहर आ जाती है और शिप्रा को देख कर एक फिकी सी स्माइल देती है....

शिप्रा- क्या हुआ माँ क्या सोच रही थी???

सोनाली- कुछ नहि बेटा बस ऐसे ही.. सतीश नहि आया अभी तक्...

शिप्रा-क्या माँ आप जानती हो न की भाई कितना आलसी है, कभी कोई काम टाइम से नहि करता...

सोनाली- उसकी बुराई करना बंद कर और जा उसे बुला कर ले आ मे तुम लोगो का नाश्ता लगा देती हु....

शिप्रा सतीश के रूम की तरफ बढ़ जाती है और डोर खोलते ही वो जो देखति है उसे अपनी आँखों पर विश्वासश ही नहि होता.... वो ग़ुस्से मे सतीश की तरफ बढ़ती है और उसे झिझोड़ कर जगाते हुये-

हद है भाई तू अभी तक सो रहा है कॉलेज नहि जाना क्या....

सतीश- उह्ह्ह सोने दे ना...

शिप्रा-उठ भाई काफी लेट हो गए है ओलराडी... जल्दी उठ दुष्ट...

सतीश- मे कॉलेज नहि जाउँगा आज....

शिप्रा-तो मुझे तो छोड़कर आ....

सतीश- तू ऑटो करके चलि जा... और अब मुझे डिस्टर्ब मत करियो...

शिप्रा मन ही मन सतीश को गाली देते हुए निचे आ जाती है...

सोनाली- सतीश कहा है??

शिप्रा- वो सो रहा है...

सोनाली-तूने उठाया नहि उसे...

शिप्रा- उठाय था पर वो कह रहा है की वो आज कॉलेज नहि जायेगा...

सोनाली-ये लड़का भी ना... चल तू नाश्ता करले....

शिप्रा नाश्ता करके कॉलेज के लिए निकल जाती है...

ओर सोनाली अपने हस्बैंड को उठा कर उसके लिए ब्रेकफास्ट बनाने चलि जाती है...

अविनाश थोड़ी ही देर मे नहा धोकर बाहर आ जाता है सोनाली, अविनाश को नाश्ता लगा देती है और अपने लिए भी नास्ता लगा कर अविनाश के साथ बैठ कर ही नाश्ता करने लगते है....

अविनाश नाश्ता करके अपने हैंड वाश करके रूम मे चला जाता है... और सोनाली सब बर्तन समेट कर उसे ढ़ोने के लिए दाल कर रूम मे चलि जाती है, रूम मे अविनाश ऑफिस जाने की तय्यारी कर रहा था की सोनाली रूम मे पहुचती है....

सोनाली- अविनाश मुझे तुमसे कुछ बात करनी है...

अविनाश- देखो सोनाली मेरे पास इस समय तुम्हारी फालतू की बातो के लिए टाइम नहि है....

सोनाली- देखो अविनाश मे तुम्हारे रोज शराब पिने की आदत से तंग आ चुकी हु... तुम इसे छोड़ क्यों नहि देते मेरे लिए नहि तो बच्चों के लिए ही छोड़ दो...

अविनाश टाय की क्नॉट लगाते हुये- देखो सोनाली आज मेरी बहोत इम्पोर्टेन्ट मीटिंग है और मे नहि चाहता की मे तुमसे बहस करके अपना मूड ऑफ करु....

सोनाली- पर....

अविनाश- हम इस टॉपिक पर कभी और बात करेंगे...

ओर अविनाश अपना बैग लेकर ऑफिस के लिए चल देता है...

ओर सोनाली का तो मूड ही ऑफ हो जाता है उसे समझ नहि आ रहा था की अविनाश को हो क्या गया है कहा वो दोनो.एक दूसरे को इतना प्यार करते थे की दोनों मे कोई किसी की बात को नहि टालते थे और जैसे जैसे अविनाश का बिज़नेस आसमान की उचाइयां छूने लगा वो धीरे धीरे अपनी फॅमिली से दूर होता गया और जब से उसे ड्रिंक की लत लगी तब से तो जैसे वो अपने फॅमिली से काफी दूर हो गया था.....

सोनाली अभी अपनी सोचो मे ही खोई हुई थी की डोरबेल बजती है, सोनाली डोर की तरफ चल देती है, सोनाली डोर खोलती है बाहर बसंती खड़ी हुई थि, वो अंदर आकर गेट बंद करती है सोनाली का सर दर्द करने लगा था अभी हुई घटना के कारण, वो बसंती को सारा काम बता कर अपने कमरे मे जाकर लेट जाती है... और थोड़ी ही देर मे वो सो जाती है...

बसन्ती पहले किचन का काम निपटाती है फिर निचे सभी रूम और बारामदे माँ झाड़ू पोचा करने के बाद, ऊपर के रूम की सफाई करने चल देती है...

बसन्ती सतीश के रूम मे सफाई करने के लिए एंटर होती पर हर रोज की तरह आज सतीश कॉलेज नहि गया था और न ही उसने अब तक बिस्तर छोडा था,बसन्ती अपने काम मे मसगुल हो जाती है जब वो बेड के पासा झाड़ू मार रही होती है तभी उसकी नजर सतीश के शार्ट मे बने तम्बू पर पड़ती है.... शार्ट मे बने विशाल तम्बू को देख कर बसंती को अपनी आँखों पर यकीन ही नहि होता, वो अपना एक हाथ अपने मुह पर रखती है

बसन्ती- हे भगवान् इतना बडा.. भला इतना बड़ा भी किसी का हो सकता है...

 
ओर बसंती की चुड़क्कड़ चुत पनिया जाती है.... बसंती के अंदर सतीश के लंड को.देखने की प्रबल इच्छा होने लगती है इस्लिये वो सतीश को हिला कर चेक करती है की वो गहरी नींद मे सो रहा है की नही.... सतीश रात को लेट.सोने के कारन गहरी नींद मे था....

बसन्ती हिम्मत करके उसके पैरों की तरफ आती है और उसके लंड को शार्ट के ऊपर से पकड़ कर ही उसका नाप लेने लगती है... उसकी चुत पानी बहाये जा रही थी.... शार्ट के ऊपर से सहलाने के बाद वो अपने दोनों हाथो की उंगलियो को सतीश के शार्ट मे फसा कर निचे खिसका देती है और ये सब करते हुए उसके चेहरे पर जरा भी शिकन नहि थी... अब सतीश का लंड शार्ट से आजाद होकर खुली हवा मे आकर झटके मारने लगता है... बसन्ती का तो मुह खुला का खुला रह जाता है वो आगे बढ़ कर लंड को अपने हाथो मे ले लेती है.....

बसन्ती- आअह्ह्ह्ह कितना लम्बा और मोटा है ये....एक न एक दिन मे जरूर इस लौडे को अपनी चुत की सैर करवाउंगी...

ओर वो अपने हाथ को लंड पर आगे पीछे करके उसकी मुट्ठ मारने लगती है और अपनी साडी, पेटीकोट सहित ऊपर करके अपनी चुत की आग को ठण्डा करने की कोशिश करने लगती है....

लंड की मुट्ठ मारने से लंड के टोपे पर प्रिकम की.बूद छलक आती है.... उस बूँद को देख कर बसंती उसके लंड पर झुक कर उस बूँद को अपनी जीभ से उसके टोपे से चाट कर साफ़ देती है.... प्रिकम का टेस्ट चखने के बाद उसे पता नहि क्या होता है की वो सतीश के लंड को अपने मुह मे भर लेती है और उसे चुसना चालु कर देती है, बसंती ने सोच लिया था की जब इसे अपनी चुत मे लेना ही है तो आज ही क्यु.ना ट्राय किया जाए क्युकी आज सोनाली भी सो रही है तो उसे डिस्टर्ब करने वाला घर मे कोई नहि है.... और ऐसा मौका उसे दोबारा नहि मिलेंगा.... और इतना तो भरोसा था ही उसे अपने जिस्म पर की कोई भी लड़का और आदमी या बुड्ढा जिसका खड़ा होता है वो उस जैसे माल को चोदने से कभी मना नहि करेंगा....

बसन्ती सतीश का लंड चुसना स्टार्ट कर देती है.... सतीश को अपने लंड पर एक कसाव और गिला गिला सा अनुभव होता है और उसकी आँख खुल जाती है वो तेजी से बेड पर उठ कर बैठ जाता है उसकी इस हरकत से उसका लंड बसंती के मुह से बाहर निकल आता है पर उसपर बसंती के दाँतो की रगड लग जाती है, एकदम हुई इस घटना से बसंती चौक जाती है और सतीश की तरफ देखति है सतीश उसे हैरत की नजरो से देख रहा था और अपने लंड जिस पर दाँतो की रगड के कारन दर्द होने लगा था को सहला रहा था....

बसन्ती आगे बढ़ कर बेड पर बैठ जाती है और उसके लंड को सतीश के हाथो से अपने हाथ मे लेकर उसे सहलाने लगती है सतीश उसे ये सब करते देख रहा था.... बसंती उसको अपनी तरफ देखता पाकर एक कामुक स्माइल देती है और उसके स्माइल देख कर सतीश भी मुस्कुरा देता है और उस पल को एन्जॉय करने लगता है थोड़ी देर तक हाथ से मुट्ठ मारने के बाद बसंती उसके लंड को अपने मुह्ह मे भर लेती है और इसी के साथ सतीश के मुह से सिसकारी फुट पड़ती है.... अब बसंती उसके लंड पर अपना मुह आगे पीछे करने लगती है और बीच मे अपनी जीभ लंड के टोपे पर फिराती और टोपे के छेद को कुरेदने की कोशिश करती सतीश वापस पीठ के बल लेट जाता है और इस आनंद मय पल को एन्जॉय करने लगता है.... बसंती अपनी पूरी कोशिश के बावजूद सतीश का पुरा लंड मुह मे नहि ले पा रही थी पर जैसे सतीश का लंड चुस रही थी वैसा अब तक किसी ने भी चूसा था... सतीश के मुह से एक के बाद एक सिसकारी फुट रही थी...

उसे तो यकीन ही नहि हो रहा था की कभी उसकी मॉर्निंग इतनी हसीं भी हो सकती है और कभी कोई उसे इस तरह से नींद से जगायेगा....

 
*सूर्य संवेदना पुष्पे:, दीप्ति कारुण्यगंधने|*

*लब्ध्वा शुभम् नववर्षेअस्मिन् कुर्यात्सर्वस्य मंगलम् ||*

```जिस तरह सूर्य प्रकाश देता है, संवेदना करुणा को जन्म देती है, पुष्प सदैव महकता रहता है, उसी तरह यह नूतन वर्ष आपके लिए हर दिन, हर पल के लिए मंगलमय हो।```

_*नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !*_
 
सतीश अपनी आँखे बंद कर लंड चूसाईं का मजा ले रहा था.... जबकि बसंती उसके लंड को बहुत ही मुस्किल से आधे से ज्यादा मुह मे लेकर चुस रही थी... बसंती लंड को मुह से निकालती है और उस पर ढेर सारा थुक दाल कर उसे अपने हाथ को लंड पर आगे पीछे करने लगती है पता नहि बसंती को सतीश के गोटे देख कर क्या सूझता है वो सतीश के लंड की मुट्ठ मरते हुये, दूसरे हाथ मे उसकी बॉल्स ले लेती है और उन्हें मसलने लगती है, सतीश तो अब मस्ती के चरम पर पहुच गया था थोड़ी देर तक उसकी बॉल्स को मसलने के बाद वो अपना सर निचे झुकाती है और उसकी एक बॉल को अपने मुह्ह मे भर लेती है और उसे चुस्ने लगती है साथ ही साथ वो अपने हाथ से लंड को भी आगे पीछे करती रहती है.... एक बॉल को अच्छे से चुस्ने के बाद वो दूसरे को अपने मुह मे भर कर चुसना स्टार्ट कर देती है... सतीश के मुह से सिसकारियां फुट्ने लगती है....

सतीश- आह्हः ऐसे ही चुसो... आह बहोत अच्छा लग रहा है....

बसन्ती थोड़ी देर तक बॉल्स को चुस्ने के बाद उन्हें आजाद करती है और फिर अपना मुह उसके लंड पर झुका कर उसकी टोपी पर निकल आये प्रिकम को अपनी जीभ से चाट लेती है और फिर अपनी जीभ से उसके लंड को ऊपर से निचे और फिर निचे से ऊपर तक चाटने लगती है साथ ही साथ अपने हाथ मे उसकी गोटियों को.भर कर मसलने लगती है.... बसंती लंड को पूरी तरह अच्छे से चाट चाट कर साफ़ कर देती है और फिर उसके लंड को अपने मुह मे भर लेती है और उसको चुस्ने लगती है पर साथ ही साथ उसके खुट्टो को भी अपने हाथ से मसलती रहती है.... सतीश अब अपनी चरम सीमा पर था वो बिस्तर ऊपर उठ कर बैठ जाता है और अपने दोनों हाथ बसंती के सर पर ले जाकर उसके बालो को कस कर पकड़ लेता है... और फिर उसके सर को अपने लंड पर तेजी से आगे पीछे करने लगता है और हर बार वो अपना ज्यादा से ज्यादा लंड बसंती के मुह्ह मे पेल रहा था जिससे बसंती को काफी परेशानी हो रही थी उसके मुह से लार और थुक टपक कर निचे बेडशीट पर गिर रहा था... अब सतीश झड़ने के करीब था और वो कण्ट्रोल भी खो चुका था, वो अब अपबा पूरा लंड बसंती के मुह मे उतार देता है सतीश का लंड उसके गले तक उतर गया था जिससे उसका गला चोक हो रहा था और उसे सांस लेने मे भी परेशांनी हो रही थी बसंती अपने दोनों हाथ उसकी जाँघ पर टीका कर अपना मुह वापस खींचने की कोशिश करती है पर वो सतीश के आगे पूरी तरह से असफ़ल थी... सतीश अब अपने लंड को टोपे तक बाहर निकाल कर उसे वापस अंदर पेल देता वो अपना लंड मुह मे ऐसे दाल रहा था था जैसे वो चुत चोद रहा हो.... अब सतीश की नसे फूलने लगती है और उनसे लावा निकलने को ही होता है... सतीश अपना पूरा लंड उसके गले तक उतार देता है और उसका लंड अपना सारा माल उडेल देता है जिससे उसका सारा माल गले से होता निचे उतार जाता है... अपना सारा माल निकलने के बाद सतीश वापस बिस्तर पर ढेर हो है उसकी आँखे बंद थी उसे आज जितना मजा लाइफ मे कभी नहि आया था...

जब्कि लंड के मुह से निकलते ही बसंती को जैसे फन्दा लग जाता है और वो खाँसने लगती है.... और गहरी गहरी साँसे लेकर नार्मल होने की कोशिश करने लगती है...

नॉर्मल होने के बाद बसंती सतीश से- तू तो बड़ा बेरहम है रे.. अपना इतना बड़ा मुसल मेरे मुह मे दाल दिया तूने... आज तो तूने मुझे मार ही डाला था रे...

सतीश अपनी आँखे खोल कर बसंती की तरफ देखता है और फिर उठ कर बैठ जाता है...

सतीश- अरे कहा आंटी भला मे आपको मार सकता हूँ वो भी तब जब आप मेरा इतना ख्याल कर रही हो...

बसन्ती सतीश के लंड पर अपने हाथ फिरते हुये- तेरा काम तो हो गया पर मेरी मुनिया तो प्यासी ही रह गयी...

सतीश बसंती के कन्धो को पकड़ कर उसके चेहरे के पास अपना चेहरा ले जाता है और उसके कान को अपने होठो मे भर कर चुस लेता है.....

सतीश कान को छोड़ कर उसके कान के पास मुह ला कर- उसकी चिंता आप मत करो देखना अब मे कैसे आपका और आपकी मुनिया का ख़याल रखता हु, पर अगर माँ आपको ढूढ़ते हुए आ गई तो....

बसन्ती- उनकी चिंता मत कर तू वो सो रही है...

ओर इतना सुन कर सतीश अपनी जीभ निकल कर बसंती के कान मे दाल कर फेरने लगता है...

बसन्ती-इसशहह...

 
Back
Top