S
StoryPublisher
Guest
ऐसेही ही वो दूसरे कान के साथ करता है.... उसे भी अपने मुह मे लेकर चूसता है और फिर अपनी जीभ उसके कान मे घुमाने लगता है... फिर वो अपना चेहरा बसंती के चेहरे के सामने ले आता है दोनों एक दूसरे की नजरो मे झाकते है फिर सतीश अपने चेहरा आगे की और बड़ा कर बसंती के होंठो पर अपने होंठ रख देता है और दोनों एक दूसरे के होठो को.चुसने चाटने लगते है... सतीश बसंती के होंठ को अपने होठो मे रख कर चुस्ने लगता है बसन्ती भी उसके होंठो को चुस्ने लगती है... फिर सतीश अपनी जीभ बसंती के मुह मे दाल देता है और बसंती तुरंत ही उसे अपने मुह मे लेकर चुस्ने लगती है और उसकी जीभ का सारा रस पिने के बाद वो अपनी जीभ सतीश के मुह मे दाल देती है सतीश भी तुरंत उसकी जीभ को अपने मुह मे भर कर उसका रस चुस्ने लगता है.... ५ मिनट की किसिंग के बाद वो दोनों एक दूसरे से अलग होते है और अपनी साँसों पर कण्ट्रोल करने लगते है....
सांसो के कण्ट्रोल मे आते ही सतीश अपनी बनियान उतार देता है.... और बसंती को बेड पर धक्का देकर लीटा देता है और उसके पैरों के दोनों तरफ अपने घुटने टीका कर उसके ऊपर आ जाता है और झुक कर उसके होंठो को चुस्ने लगता है फिर गालो को चूमता हुआ उसके गले को चुमते हुए निचे आने लगता है..
निचे आकर वो बसंती के पल्लू को उसकी छातियों से हटा देता है उसने एक डीप कट का ब्लाउज पहना हुआ था, जिसमे से उसके उभार छलक रहे थे और वो ब्लाउज मे काफी कैसे हुए लग रहे थे... ऐसा लग रहा था जैसे वो ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आ जाएंगे...
अब वो उसके बॉब्स जोकि ब्लाउज से बाहर थे को चूमने लगता है फिर सतीश तेजी से उठ कर बैठ जाता है और उसके ब्लाउज के हुक को एक के बाद एक खोलते चला जाता है...
बसन्ती सतीश का उतावलापन देख कर मुस्कुरा देती है....
पर सतीश तो ब्लाउज को अनहुक करने मे लगा था... और थोड़ी देर मे ही बसंती के ब्रा मे कैद बॉब्स उसके सामने आ जाते है...
बसन्ती- लगता है तुम्हे काफी एक्सपीरियंस है ब्लाउज के हुक खोलने का, इतनी जल्दी तो हम भी नहि खोल पाते जितनी जल्दी तुमने खोल दिया...
सतीश बसंती की बात सुन कर कहता कुछ नहि, बस मुस्कुरा देता है....
ओर बसंती के ब्लाउज को साइड मे करके उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही पकड़ कर मसल देता है....
अब सतीश बसंती के दूध को ब्रा के ऊपर से ही मसल रहा था उसके मसलने से बसंती की निप्पल खड़ी हो जाती है... सतीश उसकी निप्पल को अपनी ऊँगली और अँगूठे मे लेकर मसल देता है....
बसन्ती के मुह से सिसकारी फुट पड़ती है और वो अपनी सिसकारी रोकने के लिए अपने होंठो को अपने दाँतो तले दबा लेती है....
सतीश- आंटी अब इस ब्रा को तो उतार दो...
बसन्ती उठ कर बैठ जाती है और एक कामुक मुस्कान के साथ- तुम ही उतार दो..
सतीश अपने हाथ उसकी पीठ के पीछे ले जाता ही और उसको अनहुक कर देता है और थोड़ी देर मे ब्रा को उसके जिस्म से अलग करके फेक देता है....
ओर फिर बसंती के होंठो को.किस्स करते हुए वो उसे वापस लीटा देता है, किस करने के साथ ही सतीश उसके ४० की चूचियों को मसलने लगता है.... फिर किस तोड़ कर निचे आता है और उसकी चूचियों को देखने लगता है.... बसंती की सांवली चूचियां थी और उस पर भूरा निप्पल जोकी उसकी चूचियों की सुंदरता को बड़ा रहा था....
सतीश एक चूचि को किस करने लगता है और फिर उसे जीभ निकालकर चाटने लगता है, साथ ही साथ वो दूसरी चूचि को अपने हाथ से रगड रहा था... फिर वो निप्पल पर अपनी जीभ रगडता है और उसे अपने मुह मे भर कर चुस्ने लगता है और काटने लगता है....
बसन्ती की सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी वो अपने हाथ उसके बालो मे फिरा रही थी...
फिर सतीश उस चूचि को छोड़ कर दूसरी को चूमने चाटने लगता है... और फिर निप्पल को मुह मे लेकर उसे चुस्ने और काटने लगता है....
बसन्ती- आआह्ह्ह्ह, सतीश बाबू बहुत मजा आ रहा है... ूउम्मम्महहह ऐसे ही और जोर से चुसो....
सतीश अब उसकी चूचियों को उसके पेट् पर किस करते हुए निचे बढ़ने.लगता है और फिर उसकी नाभि पर पहुच कर उसमे जीभ दाल उसे चुस्ने लगता है.... थोड़ी देर तक चुस्ने के बाद वो निचे उसके पैरों के पास आता है... और उसकी साड़ी उसके पेटीकोट सहित उसे ऊपर उठता है...बसन्ती अपनी कमर ऊपर उठा देती है और सतीश उसकी साड़ी पेटीकोट सहित उसके पेट् तक कर देता है बसंती की सफ़ेद पेन्टी अब उसके आँखों के सामने थी जोकि चुत के रस से भीग कर उसकी चुत से चिपक चुकी थी सतीश उसकी चुत पर पैंटी के ऊपर से ही हाथ फिरा देता है... बसंती के मुह से सिसकारी निकल पड़ती है....
सतीश उसकी पैंटी को उसकी टाँगो से निचे खिसका देता है... और उसकी झांटो से घिरि चुत उसके आँखों के सामने आ जाती है....
सतीश- तुमने तो पूरा जंगल ऊगा रखा है...
सांसो के कण्ट्रोल मे आते ही सतीश अपनी बनियान उतार देता है.... और बसंती को बेड पर धक्का देकर लीटा देता है और उसके पैरों के दोनों तरफ अपने घुटने टीका कर उसके ऊपर आ जाता है और झुक कर उसके होंठो को चुस्ने लगता है फिर गालो को चूमता हुआ उसके गले को चुमते हुए निचे आने लगता है..
निचे आकर वो बसंती के पल्लू को उसकी छातियों से हटा देता है उसने एक डीप कट का ब्लाउज पहना हुआ था, जिसमे से उसके उभार छलक रहे थे और वो ब्लाउज मे काफी कैसे हुए लग रहे थे... ऐसा लग रहा था जैसे वो ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आ जाएंगे...
अब वो उसके बॉब्स जोकि ब्लाउज से बाहर थे को चूमने लगता है फिर सतीश तेजी से उठ कर बैठ जाता है और उसके ब्लाउज के हुक को एक के बाद एक खोलते चला जाता है...
बसन्ती सतीश का उतावलापन देख कर मुस्कुरा देती है....
पर सतीश तो ब्लाउज को अनहुक करने मे लगा था... और थोड़ी देर मे ही बसंती के ब्रा मे कैद बॉब्स उसके सामने आ जाते है...
बसन्ती- लगता है तुम्हे काफी एक्सपीरियंस है ब्लाउज के हुक खोलने का, इतनी जल्दी तो हम भी नहि खोल पाते जितनी जल्दी तुमने खोल दिया...
सतीश बसंती की बात सुन कर कहता कुछ नहि, बस मुस्कुरा देता है....
ओर बसंती के ब्लाउज को साइड मे करके उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही पकड़ कर मसल देता है....
अब सतीश बसंती के दूध को ब्रा के ऊपर से ही मसल रहा था उसके मसलने से बसंती की निप्पल खड़ी हो जाती है... सतीश उसकी निप्पल को अपनी ऊँगली और अँगूठे मे लेकर मसल देता है....
बसन्ती के मुह से सिसकारी फुट पड़ती है और वो अपनी सिसकारी रोकने के लिए अपने होंठो को अपने दाँतो तले दबा लेती है....
सतीश- आंटी अब इस ब्रा को तो उतार दो...
बसन्ती उठ कर बैठ जाती है और एक कामुक मुस्कान के साथ- तुम ही उतार दो..
सतीश अपने हाथ उसकी पीठ के पीछे ले जाता ही और उसको अनहुक कर देता है और थोड़ी देर मे ब्रा को उसके जिस्म से अलग करके फेक देता है....
ओर फिर बसंती के होंठो को.किस्स करते हुए वो उसे वापस लीटा देता है, किस करने के साथ ही सतीश उसके ४० की चूचियों को मसलने लगता है.... फिर किस तोड़ कर निचे आता है और उसकी चूचियों को देखने लगता है.... बसंती की सांवली चूचियां थी और उस पर भूरा निप्पल जोकी उसकी चूचियों की सुंदरता को बड़ा रहा था....
सतीश एक चूचि को किस करने लगता है और फिर उसे जीभ निकालकर चाटने लगता है, साथ ही साथ वो दूसरी चूचि को अपने हाथ से रगड रहा था... फिर वो निप्पल पर अपनी जीभ रगडता है और उसे अपने मुह मे भर कर चुस्ने लगता है और काटने लगता है....
बसन्ती की सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी वो अपने हाथ उसके बालो मे फिरा रही थी...
फिर सतीश उस चूचि को छोड़ कर दूसरी को चूमने चाटने लगता है... और फिर निप्पल को मुह मे लेकर उसे चुस्ने और काटने लगता है....
बसन्ती- आआह्ह्ह्ह, सतीश बाबू बहुत मजा आ रहा है... ूउम्मम्महहह ऐसे ही और जोर से चुसो....
सतीश अब उसकी चूचियों को उसके पेट् पर किस करते हुए निचे बढ़ने.लगता है और फिर उसकी नाभि पर पहुच कर उसमे जीभ दाल उसे चुस्ने लगता है.... थोड़ी देर तक चुस्ने के बाद वो निचे उसके पैरों के पास आता है... और उसकी साड़ी उसके पेटीकोट सहित उसे ऊपर उठता है...बसन्ती अपनी कमर ऊपर उठा देती है और सतीश उसकी साड़ी पेटीकोट सहित उसके पेट् तक कर देता है बसंती की सफ़ेद पेन्टी अब उसके आँखों के सामने थी जोकि चुत के रस से भीग कर उसकी चुत से चिपक चुकी थी सतीश उसकी चुत पर पैंटी के ऊपर से ही हाथ फिरा देता है... बसंती के मुह से सिसकारी निकल पड़ती है....
सतीश उसकी पैंटी को उसकी टाँगो से निचे खिसका देता है... और उसकी झांटो से घिरि चुत उसके आँखों के सामने आ जाती है....
सतीश- तुमने तो पूरा जंगल ऊगा रखा है...