• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest आग्याकारी माँ

ऐसेही ही वो दूसरे कान के साथ करता है.... उसे भी अपने मुह मे लेकर चूसता है और फिर अपनी जीभ उसके कान मे घुमाने लगता है... फिर वो अपना चेहरा बसंती के चेहरे के सामने ले आता है दोनों एक दूसरे की नजरो मे झाकते है फिर सतीश अपने चेहरा आगे की और बड़ा कर बसंती के होंठो पर अपने होंठ रख देता है और दोनों एक दूसरे के होठो को.चुसने चाटने लगते है... सतीश बसंती के होंठ को अपने होठो मे रख कर चुस्ने लगता है बसन्ती भी उसके होंठो को चुस्ने लगती है... फिर सतीश अपनी जीभ बसंती के मुह मे दाल देता है और बसंती तुरंत ही उसे अपने मुह मे लेकर चुस्ने लगती है और उसकी जीभ का सारा रस पिने के बाद वो अपनी जीभ सतीश के मुह मे दाल देती है सतीश भी तुरंत उसकी जीभ को अपने मुह मे भर कर उसका रस चुस्ने लगता है.... ५ मिनट की किसिंग के बाद वो दोनों एक दूसरे से अलग होते है और अपनी साँसों पर कण्ट्रोल करने लगते है....

सांसो के कण्ट्रोल मे आते ही सतीश अपनी बनियान उतार देता है.... और बसंती को बेड पर धक्का देकर लीटा देता है और उसके पैरों के दोनों तरफ अपने घुटने टीका कर उसके ऊपर आ जाता है और झुक कर उसके होंठो को चुस्ने लगता है फिर गालो को चूमता हुआ उसके गले को चुमते हुए निचे आने लगता है..

निचे आकर वो बसंती के पल्लू को उसकी छातियों से हटा देता है उसने एक डीप कट का ब्लाउज पहना हुआ था, जिसमे से उसके उभार छलक रहे थे और वो ब्लाउज मे काफी कैसे हुए लग रहे थे... ऐसा लग रहा था जैसे वो ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आ जाएंगे...

अब वो उसके बॉब्स जोकि ब्लाउज से बाहर थे को चूमने लगता है फिर सतीश तेजी से उठ कर बैठ जाता है और उसके ब्लाउज के हुक को एक के बाद एक खोलते चला जाता है...

बसन्ती सतीश का उतावलापन देख कर मुस्कुरा देती है....

पर सतीश तो ब्लाउज को अनहुक करने मे लगा था... और थोड़ी देर मे ही बसंती के ब्रा मे कैद बॉब्स उसके सामने आ जाते है...

बसन्ती- लगता है तुम्हे काफी एक्सपीरियंस है ब्लाउज के हुक खोलने का, इतनी जल्दी तो हम भी नहि खोल पाते जितनी जल्दी तुमने खोल दिया...

सतीश बसंती की बात सुन कर कहता कुछ नहि, बस मुस्कुरा देता है....

ओर बसंती के ब्लाउज को साइड मे करके उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही पकड़ कर मसल देता है....

अब सतीश बसंती के दूध को ब्रा के ऊपर से ही मसल रहा था उसके मसलने से बसंती की निप्पल खड़ी हो जाती है... सतीश उसकी निप्पल को अपनी ऊँगली और अँगूठे मे लेकर मसल देता है....

बसन्ती के मुह से सिसकारी फुट पड़ती है और वो अपनी सिसकारी रोकने के लिए अपने होंठो को अपने दाँतो तले दबा लेती है....

सतीश- आंटी अब इस ब्रा को तो उतार दो...

बसन्ती उठ कर बैठ जाती है और एक कामुक मुस्कान के साथ- तुम ही उतार दो..

सतीश अपने हाथ उसकी पीठ के पीछे ले जाता ही और उसको अनहुक कर देता है और थोड़ी देर मे ब्रा को उसके जिस्म से अलग करके फेक देता है....

ओर फिर बसंती के होंठो को.किस्स करते हुए वो उसे वापस लीटा देता है, किस करने के साथ ही सतीश उसके ४० की चूचियों को मसलने लगता है.... फिर किस तोड़ कर निचे आता है और उसकी चूचियों को देखने लगता है.... बसंती की सांवली चूचियां थी और उस पर भूरा निप्पल जोकी उसकी चूचियों की सुंदरता को बड़ा रहा था....

सतीश एक चूचि को किस करने लगता है और फिर उसे जीभ निकालकर चाटने लगता है, साथ ही साथ वो दूसरी चूचि को अपने हाथ से रगड रहा था... फिर वो निप्पल पर अपनी जीभ रगडता है और उसे अपने मुह मे भर कर चुस्ने लगता है और काटने लगता है....

बसन्ती की सिसकियाँ बढ़ती जा रही थी वो अपने हाथ उसके बालो मे फिरा रही थी...

फिर सतीश उस चूचि को छोड़ कर दूसरी को चूमने चाटने लगता है... और फिर निप्पल को मुह मे लेकर उसे चुस्ने और काटने लगता है....

बसन्ती- आआह्ह्ह्ह, सतीश बाबू बहुत मजा आ रहा है... ूउम्मम्महहह ऐसे ही और जोर से चुसो....

सतीश अब उसकी चूचियों को उसके पेट् पर किस करते हुए निचे बढ़ने.लगता है और फिर उसकी नाभि पर पहुच कर उसमे जीभ दाल उसे चुस्ने लगता है.... थोड़ी देर तक चुस्ने के बाद वो निचे उसके पैरों के पास आता है... और उसकी साड़ी उसके पेटीकोट सहित उसे ऊपर उठता है...बसन्ती अपनी कमर ऊपर उठा देती है और सतीश उसकी साड़ी पेटीकोट सहित उसके पेट् तक कर देता है बसंती की सफ़ेद पेन्टी अब उसके आँखों के सामने थी जोकि चुत के रस से भीग कर उसकी चुत से चिपक चुकी थी सतीश उसकी चुत पर पैंटी के ऊपर से ही हाथ फिरा देता है... बसंती के मुह से सिसकारी निकल पड़ती है....

सतीश उसकी पैंटी को उसकी टाँगो से निचे खिसका देता है... और उसकी झांटो से घिरि चुत उसके आँखों के सामने आ जाती है....

सतीश- तुमने तो पूरा जंगल ऊगा रखा है...

 
सतीश उसकी पैंटी को उसकी टाँगो से निचे खिसका देता है... और उसकी झांटो से घिरि चुत उसके आँखों के सामने आ जाती है....

सतीश- तुमने तो पूरा जंगल ऊगा रखा है...

बसन्ती- क्यों तुम्हे पसंद नहीं?

सतीश- नहि मुझे क्लीन चुत पसंद है...

बसन्ती- कल तुम्हे क्लीन ही मिलेगी...

सतीश का मन अब चुत चाटने का नहि हो रहा था झांटो की वजह से और उसका लंड भी अब दर्द करने लगा था.... वो उठ कर आगे जाता है और अपना लंड बसंती के होंठो पर रख देता है... बसंती उसकी इच्छा समझ जाती है और वो तुरंत सतीश के लंड को मुह मे ले लेती है... थोड़ी देर तक लंड चुसवाने के बाद सतीश उठ कर उसकी टाँगो के बिच आ जाता है, बसंती अपने पैर फेला लेती है... सतीश अपना लंड उसकी चुत पर रगडता है और लंड को उसकी.क्लिट पर मसलता है... फिर वो अपने लंड को उसकी चुत के छेद पर टीका देता है और बसंती की आँखों मे देखते हुए एक जोर का झटका देता है उसका लंड चुत को फैलाता हुआ आधा अंदर चला जाता है... बसंती दर्द से तड़प उठती है क्युकी उसकी चुत ने इतना मोटा और लम्बा लंड पहले कभी नहि लिया था... और चुत गिली होने के बावजूद उसका लंड काफी कसा हुआ अंदर जा रहा था उसके मुह से चीख़ निकल जाती है....

बसन्ती-एआईईईई मा.... आराम से सतीश बाबू बहुत दर्द हो रहा है आह्ह्ह्हह

पर सतीश उसकी एक न सुनते हुए अपना लंड वापस खींचता है और एक जोर का झटका मारता है, इस धक्के से उसका पूरा लंड बसंती की चुत मे चला जाता है और उसके मुह से चीख़ निकलती उससे पहले ही वो अपने होंठ उसके होंठो पर रख देता है... बसंती की चीख़ सतीश के मुह मे ही घुट जाती है और बसंती उसके पीठ को कस कर पकड़ अपने नाख़ून गडा देती है..... आज उसकी चुत वहा तक खुल गई थी जहाँ तक उसे कोई नहि खोल पाया था...

सतीश थोड़ी देर तक बिना हिले डुले ही उसके होंठ चूसता रहता है.... और जब वो नार्मल हो जाती है तो धीरे धीरे अपना लंड आगे पीछे करने लगता है....

थोड़ि देर मे बसंती उसे अपनी कमर हिला कर रिस्पांस देणे लगती है... सतीश समझ जाता है की अब उसे भी मजा आ रहा है...

ओर वो उसके होठो को छोड़ कर उठ जाता है और उसके चूचियों को अपने हाथ मे लेकर मसलते हुए धक्के लगाने लगता है...

बसन्ती- आज तो तुमने मेरी चुत ही फाड़ दि... पता है कितना दर्द हुआ मुझे...

सतीश उसे छोडते हुये- क्या आंटी तुम तो पहले ही काफी बार चूदी हुई हो, आप तो ऐसे रियेक्ट कर रही हो जैसे पहली बार चुद रही हो...

बसन्ती अपनी कमर उछलते हुये- चूदी हूँ पर इंसान के लन्ड से गधे के लंड से आज पहली बार चुद रही हूँ ना इस्लिये दर्द हो रहा है....

सतीश- अच्छा मे गधा हु... तो अब मे दीखाता हूँ की गधे कैसे चोदते है अपनी गधी को....

ओर सतीश अपने लंड को टोपे तक बाहर निकल कर वापस अंदर पेल देता है और अपने धक्को की स्पीड बड़ा देता है.... बसंती की सिसकियाँ पूरे रूम मे गूँजने लगती है....

सतीश उसके निप्पल्स को अपनी उँगलियों से मसलना शुरू कर देता है... और साथ ही साथ धक्के लगाता रहता है...

सतीश अपना लंड बाहर निकाल लेता है, बसंती जिसकी आँखे मस्ती मे बांध थी वो अपनी आँखे खोल कर आश्चर्य से उसकी तरफ देखति है... सतीश अपना लंड उसके मुह के करीब ले आता है वो तुरंत लंड को मुह मे भर कर चुस्ती है थोड़ी देर बाद सतीश अपना लंड उसके मुह से निकलता है और उसे गधी बन्ने को कहता है...... बसंती घोड़ी की पोजीशन मे आ जाती है और सतीश उसके पीछे आकर उसकी साड़ी जोकि निचे आ गई थी उसको उठा कर उसकी पीठा पर दाल देता है.... अब उसकी बड़ी गांड सतीश के आँखों के सामने थि, बसंती की गांड साँवली कलर की थी और सोनाली से काफी बड़ी थि, सतीश उसके पीछे से उसकी चुत पर अपना लंड टिकाता है और उसे एक ही बार मे अंदर घुसेड देता है.... बसंती की सिसकारी निकल पड़ती है... सतीश अब उसके चूतडो पर एक के बाद एक कई थप्पड़ मारता है.... और उसे तेजी मे चोदता भी जा रहा था... कमरा सिसकारियों से गुंज रहा था और सतीश उसकी कमर को अपने हाथ से पकडे ताबाड तोड़ धक्के मारे जा रहा था.... उसका लंड बसंती की चुत गिली होने के बावजूद काफी कसा हुआ अंदर बाहर हो रहा था.... दोनों ही जन्नत की सैर कर रहे थे, सतीश जब अपने लन्ड को बाहर निकाल कर वापस अंदर ड़ालता है तो बसंती के चुत्तड़ से उसका शरीर टकराने के कारन धप्प धप्प की आवाज हो रही थी.... सतीश तेजी से बसंती क चोदे जा रहा था....

 
बसन्ती- आह्ह्ह्ह सतीश बाबू मे झड़ने वाली हु....आह सतीश मैं गयी.......

ओर इसी के साथ बसंती की चुत पानी छोड़ देती है और वो निढाल होकर अपना सर बेड पर टिका देती है..... पर सतीश के धक्के तो थमने का नाम ही नहि ले रहे थे वो १० मिनट तक बसंती को कन्टिन्यूसली चोदता है, अब सतीश का लावा भी उसके गोटियों मे बाहर निकलने को उफान मारने लगा था.... और सतीश अपने धक्को की स्पीड बड़ा देता है.....

सतीश- आआह्ह्ह्हह आंटी मे गया.....

ओर इसी के साथ वो अपना लंड चुत मे घुसेड कर अपना सारा लावा अंदर उडेल देता है..... और निढाल होकर बसंती के ऊपर ही गिर जाता है....

थोड़ि देर मे बसंती नार्मल होकर सतीश को ऊपर से हटा कर उठती है और सतीश के होठ पर किस करके अपने कपडे सही करती है और जाने लगती है....

सतीश- अब कब दोगी आंटि...

बसन्ती- जब टाइम मिलेगा तब, वैसे भी अब ये सब तुम्हारा ही है....

ये बात बसंती अपनी चुत पर हाथ फिराते हुए कहती है और एक कामुक मुस्कान देकर रूम से निकल जाती है और बाकी बचे कमरो की सफाई करने लगती है.... सतीश भी बेड से उठ कर बेड शीट जोकि उनकी रासलीला को बयान कर रही थी को धुलने दाल देता है... और नई बेड शीट बिछा कर फ्रेश होने चला जाता है...

सतीश फ्रेश होकर निचे आ जाता है, उसे बहुत जोर की भूक लगणे लगी थी और लगती भी क्यों न आखिर उसने मेहनत भी तो काफी करी थी... दो-दो बार अपना पानी निकला था उसने और अब उसके पेट् मे चुहे कुदने लगे थे वो सीधे सोनाली के रूम मे जाता है.... सोनाली अभी तक सो रही थि, और सतीश उसे डिस्टर्ब करना ठीक नहि समझता वो रूम से निकालकर किचन की तरफ बढ़ जाता है और किचन मे जाकर अपने लिए नाश्ता लगा कर बाहर खाने की टेबल पर बैठ कर पेट् पूजा करने लगता है...

अभि वो खाना ही खा रहा था की उसकी नजर सीडियों से नीचे उतरती बसंती पर पड़ती है जोकि ऊपर की सफाई करके आ रही थी.... बसंती की नजर भी सतीश पर पड़ जाती है और वो उसे देख कर मुस्कुरा देती है, सतीश भी उसकी स्माइल के जवाब मे मुस्कुरा देता है..... सतीश खाना खा रहा था पर अब उसकी नजर बसंती पर ही टीकी हुई थी.... बसंती भी ये बात अच्छे से जानती थी सतीश नाश्ता करके बर्तन किचन मे रखता है और हाथ ढो कर सोफ़े पर आकर बैठ जाता है और बसंती की तरफ देखते हुए अपना लन्ड सहलाने लगता है, बसंती ये देख कर एक कामुक स्माईल.देति है और निचे उतर कर सीधे सतीश के पास आती है....

बसन्ती- मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो सतीश बाबु, क्या आज से पहले मुझे कभी देखा नहि है क्या???

सतीश- देखा तो बहुत बार पर जब आज देखा तो पता चला की मैंने तो कभी तुम्हे देखा ही नहि और जो आज देखा है तो अब तो तुमसे.नजर ही नहि हट रही है....

बसन्ती अपनी तारीफ सुनकर मुस्कुराते हुये- अच्छा आज ऐसा क्या देख लिया...?

सतीश- अजी ये पूछिए की क्या नहि देखा... तुम्हारा ये भरा हुआ जिस्म, ये बड़े बड़े मम्मे, और ये भारी गांड देख कर तो मे ये सोच रहा हूँ की आज तक तुम पर मेरी नजर क्यों नहि पडी.... और अब जब पड़ी है तो मन कर रहा है की तुम्हे नंगा करके पूरे दिन तुम्हारी चुत मे लंड डाले तुम्हे चोदता रहु....

बसन्ती सतीश की बाते सुनकर गरम होने लगती है और उसका चेहरा अपनी तारीफ सुनकर शर्म से लाल.हुअ जा रहा था....

बसन्ती- क्या सतीश बाबू आप भी ना... झूटी तारीफ़ करते हुए आपको शर्म नही आती...

सतीश- झूटी तारीफ़??? तुम्हे ये झूटी तारीफ लगती है... अगर लगती है तो ये देख...

ओर सतीश अपने शार्ट को निचे खिसका देता है और उसका साँप दनदनाता हुआ बाहर आ जाता है......

सतीश- देखो जब से तुमको देखा है बैठने का नाम ही नहि ले रहा, क्या अब भी तुम्हे लगता है की मे झुट बोल रहा हु...

बसन्ती अपने मुह पर हाथ रखते हुये- हाय राम ये फिर से खड़ा हो गया, अभी आधा घंटा पहले ही तो मैंने इसको शांत करा था... पर ये तो फिर से तैयार हो गया, ये कभी बैठता भी है की नहि....

सतीश- जब सामने आप जैसा कड़क माल होगा तो ये कैसे बैठेगा भला... मेरा मन तो अब एक और राउंड लगाने का कर रहा है...

ओर वो बसंती की तरफ बढ़ता है , बसंती पीछे हटते हुये...

बसन्ती- अभी नहि सतीश, तुम्हारी मम्मी उठ सकती है किसी भी समय इस्लिये आज नहि अब कल करना जो जी चाहे...

सतीश अपने लंड की तरफ इशारा करते हुये- फिर इसका क्या करू मैं....

बसन्ती-वहि जो रोज करते थे...

ओर बसंती हंस देती है...

सतीश- मजाक उडालो हमारी हालत का...

ओर सतीश मुह फैला कर बैठ जाता है...

बसन्ती- ओह्ह्ह क्या हुआ मेरा बाबू रूठ गया...

पर सतीश कोई जवाब नहि देता....

बसन्ती- देखो सतीश इसमें खतरा है... तुम्हारी माँ ने देख लिया तो सब गड़बड़ हो जाएगा.... और मुझे घर भी जाना है

सतीश- रहने दो ये बहाने, तुम्हे मेरी बिलकुल चिंता ही नहि है वरना तुम मुझे यूँ छोड़ कर नहीं जाती.
 
बसन्ती- देखो सतीश इसमें खतरा है... तुम्हारी माँ ने देख लिया तो सब गड़बड़ हो जाएगा.... और मुझे घर भी जाना है

सतीश- रहने दो ये बहाने, तुम्हे मेरी बिलकुल चिंता ही नहि है वरना तुम मुझे यूँ छोड़ कर नहीं जाती.

बसन्ती- ठीक है मे इसे मुह मे लेकर चूसूंगी पर केवल चूसूंगी और इससे ज्यादा कुछ भी नहि...

सतीश एकदम खुश होते हुए उठ जाता है और अपना शार्ट निचे करने लगता है... बसंती उसे रोकते हुये- यहां नही..

सतीश- तो फिर कहा...

बसन्ती- तुम्हारे रूम में....

ओर इतना कहकर वो ऊपर की तरफ बढ़ जाती है... सतीश भी उसके पीछे पीछे चल देता है......

दोनो उसके कमरे मे घुस जाती है और सतीश कमरे मे आकर गेट लॉक कर देता है और उसे अपनी बाँहों मे लेकर अपने बेड पर लीता देता है और खुद उसके ऊपर लेट कर उसे किस करने लगता है...

किस ख़त्म होते ही बसंती उसको धक्का देकर अपने ऊपर से हटा देती है और बैठते हुये- ये चादर भी गन्दी करनी है क्या? पुराणी चादर कहा है?

सतीश उसे इशारे से बता देता है, बसंती चादर उठा कर- अब बैठे रहोगे या हटोगे भी...

सतीश खड़ा हो जाता है बसंती नै चादर हटा कर पुराणी चादर बिछा देती है....

सतीश तुरंत अपना शार्ट उतार कर बेड के किनारे से बैठ जाता है, उसका लंड झटके खा रहा था...

बसन्ती उसके पैरों के बिच मे बैठ जाती है और उसके लंड को अपने हाथो मे लेकर उसकी मुट्ठ मारने लगती है... और थोड़ी देर तक मुट्ठ मारने के बाद लंड को अपने मुह मे ले लेती है और उसे चुसना शुरू कर देती है...

सतीश अपने हाथ पीछे बेड पर टीका देता है और लंड चूसाई का मजा लेने लगता है...

बसन्ती उसके लंड को अपने मुह मे लेकर चुस रही थि, वो कभी उसके सुपाडे पर अपनी जीभ फिराती और उसके लंड को अपने मुह मे लेकर लॉलीपॉप की तरह चुस्ने लगती है...

बसन्ती भी इस चूसाई से गरम होने लगी थी...

सतीश अब अपने हाथो से उसके बालो को पकड़ कर कुछ बड़े स्ट्रोक मारता है और फिर उसके सर को पीछे करके अपना लंड बसंती के मुह से बाहर निकालता है, बसंती उसकी तरफ हैरत भरी निगहाओं से देखति है सतीश बेड से उठता है और बसंती को खड़ा करके उसे पीठ से झुका देता है बसंती अपना हाथ बेड के किनारे पर टीका देती है उसे समझ आ गया था की अब क्या होने वाला है पर वो उसका विरोध नहि करती क्युकी उसकी चुत को भी लंड चाहिए था......

सतीश उसे झुका कर उसकी साड़ी को पेटीकोट सहित उसकी कमर पर दाल देता है... और अपने लंड क उसकी चुत के छेद पर टीका कर एक धक्का देता है... उसका आधा लंड चुत मे था, सतीश अब दूसरा धक्का मरता है और अपना लंड चुत की गेहराई मे उतार देता है...

बसन्ती- हायःआहः सतीश बाबू कितना बड़ा है तुम्हारा... आअह्हह्ह्....और जोर से चोदो....हहह्म्म ऐसे ही...

सतीश उसकी कमर को पकड़ कर ताबाड तोड़ धक्के लगाने लगता है.... और एकबार फिर से रूम का माहोल गरम हो गया था....

सतीश का लंड बसंती की बच्चेदानी पर टक्कर मार रहा था... सतीश और बसंती तो जैसे जन्नत मे थे...

सतीश- आह्ह्ह्ह.... बसंती इतनी उम्र मे भी तेरी चुत कितनी टाइट है.... आअह्हह्ह्... मजा आ गया....

बसन्ती- तो कर दे न तू ढीली.... ऊऊफफफफ.... आह्हः... तेरा लंड मेरी बच्चेदान से टकरा रहा है.... कितना बड़ा है रे तेरा.... आह्ह्ह्हह

ओर सतीश धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था.... और फिर २० मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद सतीश और बसंती एक साथ झड जाते है...

सतीश बसंती की पीथ से टिक कर अपनी साँसे कण्ट्रोल करने लगता है... और फिर अपना लंड निकाल कर उसके पेटीकोट से पोछ देता है... बसंती की चुत से सतीश और बसंती का मिला जुला रस निचे टपकने लगता है...

बसन्ती अपनी चुत को अपने पेटीकोट से पोछ कर अपनी साड़ी निचे करती है... और फिर निचे पड़े माल को गन्दी चादर से साफ़ करके उसे ढ़ोने के लिए दाल देती है... और नई चादर बिछा कर सतीश को किस करके...

बसन्ती- अब तो खुश्...

सतीश-बहुत...

फिर बसंती उसके रूम से निकलती है और निचे उतर कर अपने घर के लिए चलि जाती है.... और सतीश भी अपने कपडे चेंज करके निचे आ जाता है.... उसकी माँ अभी भी सो रही थी... अब उसे चिंता होने लगती है, क्युकी उसकी माँ कभी भी दिन मे नहि सोती थी और आज तो उसे सोते हुए भी काफी टाइम हो गया था...

 
ओ उसके कमरे मे जाता है और उसे आवाज लगाता है... आवाज पर कोई रिस्पांस न देणे से वो उसको हिला कर जगाने के लिए जैसे ही उसके हाथ पर अपना हाथ रखता है वो चौक जाता है, सोनाली का हाथ काफी तप रहा था वो उसके माथे पर हाथ रख कर चेक करता है उसका माथा बहुत तेज तप रहा था सोनाली को बहुत तेज बुखार था और उसका जिस्म बुखार की वजह से तप रहा थ, सतीश अपनी माँ की हालत देख कर बहुत परेशान हो जाता है और तुरंत अपने फॅमिली डॉक्टर को कॉल करता है, और किचन मे जाकर एक बाउल मे पानी ले आता है और अपने रुमाल को पाणी मे भिगो कर उसे निचोडने के बाद वो सोनाली के माथे पर रख देता है.... और नवरत्न आयल से उसके तलवो की मालिश करने लगता है... और बिच बिच मे वो रुमाल को वापस भिगा करा उसके माथे पर रख देता है...

सोनाली को अब थोड़ा आराम मिला था और सतीश के दोबारा गिला कपडा रखने पर उसकी आँखे खुल जाती है... और वो उठने की कोशिश करती है पर सतीश उसे उठने से रोकते हुये- आप लेती रहो मोम, सतीशने डॉक्टर अंकल को बुलाया है वो आते ही होंगे....

सोनाली- पर....

सतीश-पर वर कुछ नहि आप लेटे रहिये चुपचाप और सतीश वापस उसके पैरों की तरफ आकर उसके तलवो.की मालिश करने लगता है....

ओर सोनाली उसे ये सब करते देखति रहती है

सोनाली सतीश को ही देख रही थि, उसे सतीश की आँखों मे अपने लिए केयर और प्यार दोनों नजर आ रहे थे और उसे सतीश पर बहुत प्यार आ रहा था पर इस प्यार मे लस्ट नहि था और न ही सतीश के मन मे इस समय कोई गन्दा ख्याल था अपनी माँ को लेकर, वो तो बस अपनी माँ के दर्द से दुखी था और उसको ख़तम करने की जी तोड मेहनत कर रहा था...

सोनाली- रहने दे सतीश अब मे सही हु...

सतीश- नहि माँ जब तक डॉक्टर अंकल नहि आ जाते तब तक मे आपको नहि छोडूंगा....

तोड़ि देर मे ही डोर बेल्ल बजती है, सतीश सोनाली को लेटे रहने की हिदायत देकर डोर खोलने के लिए चल देता है.... बाहर डॉक्टर अंकल थे सतीश उनके हाथ से बैग लेकर उन्हें अंदर सोनाली के रूम मे ले जाता है.....

डोक्टर सोनाली का चेकउप करते है....

सतीश- अंकल क्या हुआ है मम्मी को......

ड़ोक्टर- कुछ नहि बेटा नार्मल सा बुखार था, लगता है आज कल तुम्हारी मम्मी कुछ ज्यादा ही टेंशन लेती है, जिसके कारन इन्हे ये बुखार हुआ है मे दवाई लिख देता हूँ तुम ले आना पर अगर इन्होने चिंता करना नहि छोडी तो इनकी तबियत और भी ज्यादा सीरियस हो सकती है इस्लिये इन्हे खुश रखने की जिम्मेदारी तुम्हारी है.......

सतीश- उसकी चिंता आप मत करो अंकल मे जानता हूँ की माँ को कैसे खुश रखना है...

ड़ोक्टर उसे दवाई लिख कर देता है और उसे समझा देता है की कब और कैसे उसे दवाई सोनाली को खिलानी है...

सतीश डॉक्टर को बाहर तक छोड़ कर आता है और फिर सोनाली को आराम करने को बोल कर वो दवाई लेने के लिए निकल जाता है...

थोड़ि देर मे ही वो दवा लेकर आजाता है और किचन से हल्का नाश्ता और एक गिलास जूस लेकर सोनाली के पास आ जाता है... और उसे उठा कर बेड से टीका कर बैठा देता है और फिर अपने हाथो से ही उसे नाश्ता कराता है, और नाश्ते के बाद उसे मेडिसिन दे देता है सोनाली पानी से मेडिसिन लेती है और गिलास को सतीश को पकड़ा देती है सतीश उस गिलास को टेबल पर रख कर उसे जूस का गिलास उठा देता है....

सोनाली उसके हाथ से गिलास लेते हुये- क्या बात है आज बड़ी केयर कर रहा है अपनी इस बूढी माँ की...........

सतीश- मे आपकी केयर नहि करूँगा तो भला कौन करेगा आखिर आप मेरी इतनी प्यारी मम्मी हो..... और रही बात बूढ़ी होने की तो ये आप अपने दिमाग से निकाल दो की आप बूढ़ी हो, आपके सामने तो जवान लड़किया भी फेल है और इस उम्र मे भी आपने अपनी बॉडी को काफी फिट रखा है.... अगर आप एक इशारा कर दो तो लड़को की लाइन लग जाएगी.....

सोनाली अपनी प्रसंसा सुन कर खुश हो जाती है और उसके कंधे पर धीरे से हाथ मारते हुये- धत पागल कहि का कुछ भी बोल देता है.... भला मे कहा टक्कर ले लुंगी आज की लड़कियों से....

सतीश- अरे नहीं माँ मे सही कह रहा हूँ आपकी बॉडी इतनी फिट है की जो कोई देख ले देखता ही रह जाए और ऊपर से आपकी सुन्दरत, आपका गोरा बदन आपकी सुंदरता मे ४ नहि बल्कि ४० चाँद लगा देता है.....

सोनाली को अपने बेटे के मुह से अपनी तारीफ सुन्ने मे बहुत रोमाँचित सा फील हो रहा था पर वो अपने एक्सप्रेशन को छुपाते हुये- तुझे अपनी माँ से झुट बोलते हुए शर्म नहि आति, अपनी बूढ़ी का मजाक उड़ा रहा है तू उसकी झूटी तारीफ करके....

सतीश अब खिसिया गया था,- अरे कौन कहता है आपसे की आप बूढ़ी हो गई हो, अभी इस उम्र मे आप इतनी सेक्सी लगती हो की जब आप रोड पर गुज़रती हो तो सब की नजर आप पर ही टिक जाती है, चाहे बच्चा हो या बूढ़ा सब आपको पलट पलट कर देखते है.... आप इतनी उम्र मे भी बहूत हॉट एंड सेक्सी लगती हो, जवानो की तो छोड़ ही दो बुड्ढों का भी आपको देख कर खड़ा हो जाता है....

अनायास ही सतीश के मुह से अपनी माँ के लिए हॉट और सेक्सी जैसे सब्द निकल गए थे और अपनी आखिरी लाइन बोलकर तो उसकी फट गई थी..... और यही हाल सोनाली का भी था वो अपने बेटे के मुह से अपने लिए हॉट एंड सेक्सी जैसे वर्ड सुन कर शर्म से पानी हुए जा रही थी.... और सतीश की आखिरी लाइन ने तो उसकी चुत को भी गिला कर दिया और उसके गाल टमाटर की तरह लाल हो गए थे....

थोड़ी देर तक रूम मे काफी शान्ति हो जाती है किसी को समझ ही नहि आ रहा था की क्या बोले और कैसे बोले....

सतीश- आप आराम करो मे शिप्रा को ले आता हु....

ओर इतना कह कर सतीश शिप्रा को लेने चला जाता है....

 
मैं आप सब दोस्तो का बहुत आभारी हूं दोस्तो अगर आपको मेरी कोई स्टोरी बोर कर रही हो या पसंद ना आ रही हो तो कृपया बताये ता की मैं वह स्टोरी बंद कर सकू और कोई नई स्टोरी शुरू कर सकू...सतीश
 
जबकि दूसरी तरफ सुबह जब शिप्रा कॉलेज पहुचती है तो वो देखति है की प्रिंस कॉलेज गेट पर अपने फ्रेंड्स के साथ खड़ा हुआ बातें कर रहा था....

प्रिन्स शिप्रा को आते हुए देख कर अपने दोस्तों से- देख बेटा सतीशने नया पंछी फास लिया, क्या गजब का माल है ये शिप्रा दिल तो करता है की यहि इसे नंगी करके इसकी चुत मे अपना लंड डाल दु....

प्रिन्स का दोस्त- अबे साले तुझे पता भी है ये कौन है, ये सतीश की बहन है और अगर उसे पता चल गया ना तो वो तेरी गांड फाड़ देगा....

प्रिन्स उसके गिरेबान को पकड़ कर- साले तमीज़ से बात कर वरना यहि तेरी माँ चोद दूँगा... और मुझे पता है की ये सतीश की बहन है तभी तो मे इसे अपने जाल मे फसा रहा हु, ताकि सतीश को भी पता चले की उसने कितने गलत बन्दे से पन्गा लिया है, इसको एक बार चोद लु फिर देखियो कैसे सतीश को अपने जूति तले रखुंगा....

उसका दूसरा दोस्त- भाई बहोत बढ़िया प्लान बनाया है तूने अगर ये फस गई तो सतीश को कण्ट्रोल करने की चाबी तेरे हाथ मे और फिर से कॉलेज पर अपना राज होगा..... पर भाई जब तू इसका रस चख ले तो थोड़ा हमे भी दे दियो चखने को....

प्रिन्स- है है ह.... सला आ गये अपनी औकात पर चिंता मत कर इसे तो मे बाजारू रंडी बना दूंगा इसकी वीडियो बना कर नेट पर दाल दूंगा तब उस हरामी को पता चलेगा की प्रिंस से टकराने का अन्जाम क्या होता है.... चलो अब तुम लोग खिसको वो यहा पहुचने ही वाली है....

शिप्रा जैसे ही प्रिंस के पास पहुचती है वो उसे एक बड़ी सी स्माइल देता है... पर शिप्रा उसकी और देखति भी नहि और उसके पास से होकर गुजर जाती है... प्रिंस की तो नीचे के बाल ही सुलग जाते है वो उसके पीछे आवाज लगाते हुए बढ़ता है..... और उसके पास आकर उसके हाथ को पकड़ लेता है, शिप्रा पलट कर उसकी तरफ देखति है..

प्रिन्स- क्या हुआ शिप्रा, नाराज हो क्या मुझसे, मे देख रहा हूँ की तुम मुझे इग्नोर मार रही हो, और मेरे आवाज देणे.पर भी तुमने नहि सुना....

शिप्रा अपना हाथ छुड़ाते हुये- देखो प्रिंस मुझे तुमसे कोई बात नहि करनी और आइन्दा मुझे रोक्ने की कोशिश मत करना वरना मुझसे बुरा कोई नहि होगा....

ओर शिप्रा आगे बढ़ जाती है, प्रिंस वहि खड़े उसे आवाज लगाते रहता है पर वो नहि रुकति..... प्रिंस के दोस्त जोकि ये सब बड़े ध्यान से देख रहे थे उसके पास आ जाते है.... और उसका एक दोस्त उसके कंधे पर हाथ रखते हुये- भाई चिड़िया तो उड़ गई फुर्र्र से.... अब तुम क्या करोगे?

प्रिन्स- बहुत पर निकल आये है साली के जरूर सतीश ने इसे मेरे खिलाफ भड़काया होगा.....

उसका दोस्त- भाई सतीश तो आपकी सोच से भी एक कदम आगे निकला अब आप उससे कैसे बदला लोगे.... और आपके हाथसे तो इतना मस्त आइटम भी निकल गया....

प्रिन्स- निकल के जायेगा कहा हमारे हाथ से हमे इस चिड़ियाँ के पर कुतरने ही पडेंगे.....

सतीश शिप्रा को लेने कॉलेज पहुचता है तो देखता है की शिप्रा बाहर कड़ी किसी ऑटो का वेट कर रही थि, सतीश उसके आगे बाइक लगा देता है

सतीश- लिफ्ट चाहिए????

शिप्रा उसे देख कर खुश हो जाती है और बाइक पर बैठते हुये- क्या भाई आज तुम्हे अपनी बहन की याद कैसे आ गई??

सतीश बाइक आगर बड़ा देता है- याद आ गई मतलब...

शिप्रा- मतलब ये की आज तुम मुझे लेने कैसे आ गये, आज से पहले तो कभी नहि आये...

सतीश- खाली बैठा था सोचा की तुझे ही ले आउ...

शिप्रा उसकी कमर मे हाथ दाल कर उसे चिपकते हुये- थँक्स भाई.......

ऐसे ही ही नॉर्मली बात चित करते हुए दोनों घर आ जाते है.... घर आते ही सतीश को अपनी माँ से की गई बाटें ध्यान आ जाती है...

सतीश मन मे- यार पता नहि माँ के सामने कैसे मे वो सब कह गया, पता नहि क्या सोच रही होंगीं मेरे बारे में.... कैसे जाउँगा मे उनके सामणे....

जब्कि दूसरी तरफ सतीश के जाने के बाद सोनाली के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ जाती है, सतीश की बाटें रह रह कर उसके जेहन मे गुंज रही थी... उसे तो अभी भी यकीन नहि हो रहा था की उसके बेटे को वो हॉट और सेक्सी लगती है....

सोनाली- मेरा बेटा मेरे बारे मे ऐसी सोच रखता है??? उसने ये सब क्याजुअली कह दिया था या फिर.... कहि वो मेरे बारे मे कुछ गलत सोच तो नहि रखता?? कही वो मेरी तरफ अट्रॅक्ट तो नहि हो रहा??? वो कह रहा था की मुझे देख कर जवान तो क्या बूढों का भी खड़ा हो जाए और जवान तो वो भी है इसका मतलब कही उसका मुझे देख कर खड़ा तो.... नहि... नहि ये मे क्या सोच रही हूँ मे उसकी माँ हूँ भला कोई बेटा अपनी माँ के बारे मे ऐसा सोच सकता है??? ये मेरा ही दिमाग है जो पता नहि क्या क्या गंदे विचार रख रहा है

ओर फिर वो ऐसे ही अपनी सोचो मे खो जाती है....

 
उसकी सोचो को झटका लगता है जब डोर बेल्ल बजती है और वो बेड से उठ कर गेट खोलने को चल देती है.... बाहर शिप्रा और सतीश खड़े थे शिप्रा अंदर चलि जाती है और सतीश सोनाली से नजरे नहि मिला पा रहा था, वो अपनी गर्दन झुकाए घर के अंदर चल देता है... उसकी हरकत को देख कर सोनाली के होंठो पर स्माइल आ जाती है और वो गेट बंद करके किचन की और चल देती है... शिप्रा अपने रूम मे चेंज करने गई हुई थि, सतीश सोनाली को.किचन की तरफ जाता देख कर.....

सतीश- आप कहा जा रही हो माँ?

सोनाली पलट कर उसकी तरफ देखति है तो सतीश अपनी नजरे चुरा कर इधर उधर देखने लगता है, सोनाली अपने होंठो पर स्माइल लिए हुये- किचन मे जा रही हु, खाना बनाने के लिये...

सतीश- पर तुम्हे तो डॉक्टर ने आराम करने को बोला है ना...

सोनाली- पर अब तो मे ठीक हूँ ना और खाना ही तो बनाना है खाना बनाने मे कोई इतनी बड़ी दिक्कत थोड़े ही आ जाएगी....

सतीश अब उसकी नजारो मे एकटक देखते हुए उसकी तरफ बड जाता है- देखो माँ आपको आराम करना चाहिए और एक टाइम का खाना नहि खाएँगे तो हम मर थोड़े ही जाएंगे...

सोनाली- एक थप्पड़ मारूंगी अगर कभी ऐसी बात अपने मुह से निकाली तो....

सतीश उसके बिलकुल करीब पहुच कर उसकी आँखों मे झाकते हुये- एक हि क्या... एक हजार मार लेना पर आपको काम नहि करने दूँगा, आज तो आपको आराम करना ही पड़ेगा और आप खुद नहि जाओगी तो मे आपको गोदी मे उठा के ले जाऊंगा......

सोनाली भी एकटक सतीश की नजरो मे ही देख रही थी और उनमे उसे अपने लिए अताह प्रेम नजर आ रहा था...

सोनाली- अच्छा तू इतना बड़ा हो गया है की अब अपनी मम्मी को गोद मे उठा लगा...

सतीश-क्यों आपको यकीन नहि है क्या की मैं इतना बड़ा हो गया हूँ की आपको अपनी बाहो मे उठा सकू........

सोनाली- नहि मुझे तो यकीन नहि की तू इतना बड़ा हो गया की मुझ जैसी मोटी को अपनी बाँहों मे उठा सके, बहुत वजन है मेरे में...

सतीश- आप और मोटी....?

सतीश सोनाली की गर्दन के पीछे अपना एक हाथ ले जाता है और एक हाथ उसके पैरों के पीछे लगा कर उसे अपनी बाँहों मे उठा लेता है.....

सोनाली उसकी इस हरकत से चौक जाती है- अरेरे... सतीश मे गिर जाऊंगी...

सतीश- क्यों यकीन नहि क्या मुझ पर... ?

सोनाली कुछ नहि कहती और डरणे का बहाना करके उसके गले मे अपनी बाहे दाल देती है सतीश उसे अपनी बाँहों मे उठाये हुये उसके रूम की तरफ चल देता है....

सोनाली एकटक उसे ही देख रही थि, उसे सतीश पर बहुत प्यार आ रहा था... सतीश सोनाली के रूम मे जाकर उसे बेड पर लीटा देता है.... और फिर उसके पास बैठकर....

सतीश- हम्म्म्म आप और मोटी....

सोनाली- क्यों नहि हूँ क्या?

सतीश- फूल जितना वजन नहि है आपमें और कह रही हो अपने आप को मोटी, आप तो फूल की तरह नाजुक हो मम्मी.... और अब तो यकीन हो गया ना की आपका बेटा अब बड़ा हो गया है....

सोनाली- हम्म्म मुझे तो पता ही नहि चला की कब तू जवान हो गया.... तू तो अब इतना बड़ा हो गया की अपनी माँ का वजन भी तुझे कुछ नहि लग रहा....

सतीश ताव मे आकर- अरे माँ आपने अभी देखा ही कहा है की आपका बेटा कितना बड़ा हो गया है, जब देख लोगी तब पता चलेगा की आपका बेटा इतना बड़ा हो गया है आप जैसी कइयो को हैंडल कर सकता है....

ओर ये सब बोल कर सतीश झेप जाता है उसे यकीन ही नहि होता की उसने फिर से इतनी बड़ी बेवकूफ़ी कैसे कर दि... सोनाली उसकी ये बात सुनकर मुस्कुरा देती है....

सोनाली- अब बातो से ही अपनी माँ का पेट् भरेगा क्या? वैसे तो बड़ी चिंता करता है अपनी माँ की और इस बात की बिलकुल फ़िक्र नहि की तेरी माँ ने सुबह से नाश्ते के अलावा कुछ भी नहि खाया है....

सतीश- आरे मुझे तो ध्यान ही नहि था, आप वेट करो मे अभी खाने की ब्यवस्था करता हु....

ओर सतीश बेड से उठ कर चल देता है तभी उसे सीडियों से उतरती शिप्रा नजर आती है, वो बिना रुके गेट की तरफ चल देता है की तभी शिप्रा पीछे से उसे आवाज देकर रोक लेती है...

शिप्रा- भाई कहा जा रहे हो और माँ कहा है?

सतीश- माँ की तबियत सही नहि है

शिप्रा परेशान होते हुये- क्यों क्या हुआ माँ को?

सतीश-कुछ नहि हल्का सा बुखार था मैंने डॉक्टर अंकल को बुलवा के दिखवाया उन्होंने कहा है की माँ को आराम की सख्त जरुरत है और वो कुछ ही दिनों मे फिट हो जाएंगी...

शिप्रा-ओह्ह, पर तुम कहा जा रहे थे.....

सतीश-बाहर से खाना लेने जा रहा हु, क्युकी मैंने मम्मी से खाना बनाने को मना कर दिया है, उन्हें आराम की जरुरत है इसलीये....

शिप्रा- तो बाहर जाने की क्या जरुरत है मे घर पर ही खाना बना लेती हु थोडे टाइम मे खाना तैयार कर लुंगी....

सतीश उसकी तरफ हैरत से देखते हुये- क्या कहा तूने?? खाना तू बनाएगी.... है है ह

शिप्रा रुआंसी होते हुये- क्यों मे नहि बना सकती क्या?

 
सतीश- हा, बना सकती है पर आज हमे डाबर हाजमोला की जरुरत पडने वाली है तेरे खाने को पचाने के लिये....

शिप्रा- क्या भैया, जाओ मे नहि बनाती ले आओ बाहर से...

ओर शिप्रा रूठ कर सोफ़े पर जाकर बैठ जाती है....

सतीश उसके पास जाकर उसे उठा कर अपने गले से लगा लेता है- अरे पगली मे तो मजाक कर रहा था... चल अब जल्दी से उठ मेरे पेट् मे चुहे कुद रहे है जल्दी से खाना बना दे.....

शिप्रा खुश होकर उससे अलग होती है- बस आप थोड़ी देर वेट करो मे अभी बनाती हूँ पर पहले मम्मी से मिललु...

ओर शिप्रा सोनाली के रूम की तरफ बढ़ जाती है और सतीश भी उसके पीछे चल देता है... शिप्रा सोनाली के रूम मे जाकर उसके बेड पर बैठ कर उसके गले लग जाती है और उसका हाल चाल पुछने लगती है और मैं बाहर गेट पर खड़ा ये सब देख रहा था, मैं अपनी आँखों से मम्मी के हर मूवमेंट और हर एक्सप्रेशन को कैच करने की कोसिश कर रहा था, मेरी नजरे उन्ही पर टिकी हुई थी और ये बात उन्होंने भी जान ली थी और उनके होंठो पर एक स्माइल आ गई थि, और वो शिप्रा से बात करते हुए बिच बिच मे मेरी तरफ देख रही थी और मे तो जैसे खो ही गया था उनकी सुंदरता मै...

थोड़ि देर बात करके शिप्रा बाहर खाना बनाने चलि जाती है... और सतीश अंदर सोनाली के पास जाकर बैठ जाता है....

सोनाली- गेट पर खड़े हुए तू घुर घुर कर क्या देख रहा था.......

सतीश- कुछ नहि देख रहा था की आप माँ बेटी मे आपस मे कितना प्यार है....

सोनाली- और कुछ तो नहि देख राह था ना....

सतीश- ह्ह्ह्हम्मम्म, देख तो रहा था....

सोनाली- क्या?

सतीश-आपको नहि पता की मे क्या देख रहा था....

सोनाली- अगर पता होता तो तेरे से पूछती क्या?

सतीश- मे इस दुनिया की सबसे खूबसूरत लेडी को देख रहा था......

सोनाली- अच्छा और कौन है ओ....

सतीश- ये तो मे अभी नहि बता सकता.... पर जल्द ही आपको पता चल जायेगा.....

सतीश को समझ आ गया था की उसकी माँ को उससे ऐसी बाते करने मे कोई प्रॉब्लम नहि है और न ही वो उसकी किसी बात से नाराज है.... जब्कि इधर सोनाली भी अपने बेटे से अपनी तारीफ़ सुनकर गरम हो रही थी इतनी तारीफ़ तो कभी उसके हस्बैंड ने भी नहि करी थी जितनी की सतीश ने एक दिन मे कर दी थी..... कुछ तो था जो सोनाली को सतीश की तरफ अट्रॅक्ट कर रहा था अब चाहे वो सतीश का प्यार हो या फिर खुद उसकी जिस्म की आग जोकि काफी समय से ख़त्म नहि हुई थी और अब वो उसे अपने बेटे की तरफ ही आकर्षित कर रही थी..... पर जो भी हो सोनाली को इससे कोई आपत्ति नहि थी वो खुल कर सतीश के साथ मजे लेने का मन बना चुकी थी पर कही अंदर से उसकी आत्मा उसे अपने बेटे की तरफ अट्रॅक्ट होने से रोक रही थी और यहि वजह थी जोकि सोनाली अपने ऊपर कण्ट्रोल करी हुई थी वरना तो सतीश के प्यार को देख कर तो उसे ऐसा लग रहा था की अभी सतीश को अपनी बाँहों मे लेकर उसे जी भर कर प्यार करे......

सोनाली अपनी सोच मे खोई हुई थी....

सतीश- कहा खो गई माँ?

सोनाली की सोच पर ब्रेक लगता है...

सोनाली- हुह्ह्... नहि कुछ भी तो नही...

सतीश उठ कर टीवी ऑन कर लेता है और रिमोट लेकर सोनाली के बगल मे ही अपनी पीठ टीका कर लेट जाता है.... और सोनाली के साथ बात करते हुए टीवी देखने लगता है थोड़ी देर मे ही उन्हें शिप्रा कीआवाज सुनाई देती है जोकि उन्हें खाने के लिए बाहर बुला रही थी.... सतीश टीवी को ऑफ करके सोनाली के साथ बाहर आ गया शिप्रा ने खाना लगा दिया था, सतीश और सोनाली खाने की टेबल पर पहुच कर शिप्रा के साथ खाना खाते है....

शिप्रा- खाना कैसा बना है?

सतीश-इसे तुम खाना कहती हो इसे खा कर तो मुझे उल्टी आ रही है... आखिर इतना बुरा खाना कैसे बना सकती हो तुम्...

सोनाली मुस्कुरा कर- क्यू परेशान कर रहा है उसे, अच्छा तो बना है खाना...

शिप्रा- इसमें इसकी कोई ग़लती नहि माँ भला बन्दर क्या जाने अद्रक का स्वाद........

सतीश- क्या माँ आपने भी इस छिपकली के दिमाग ख़राब कर रखा है... इतनी झूटी तारीफ भी मत करो इसकी...

शिप्रा- ओये बन्दर चुपचाप खाना खा और नहि खाना तो उठ जा....

सतीश- खाने की थाली से उठा नहि करते और वैसे भी बहुत जोर की भूख लगी है वरना तो मे इस खाने को हाथ भी नहि लगाता और हाँ मुझे अब इस बारे मे कोई बहस नहि करनी इसलिये मुह बंद करके खाना खा...

ओर सतीश चुपचाप खाना खाने लगता है शिप्रा और सोनाली एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुरा देती है...

खाना ख़तम करके सतीश सोनाली के साथ उसके कमरे मे आ जाता है और शिप्रा बर्तन किचन मे ले जाती है...

सोनाली- आज खाना वाक़ई मे बहुत अच्छा बना खा कर मजा आ गया...

सतीश- हम्म खाना तो वाक़ई मे टेस्टी था पता नहीं छिपकली ने इतना बढ़िया खाना कैसे बना लिया..

सोनाली उसकी तरफ मुस्कुरा कर देखति है...

सतीश- अब आप ऐसे क्यों मुझे देख कर हस रही हो...

सोनाली- मे देख रही हूँ कि तु बाहर तो बहुत बुराई कर रहा था शिप्रा के खाने की और अंदर तू उलटी गंगा बहा रहा है....

सतीश- क्या माँ अगर मे उसके सामने कह देता तो उसका दिमाग सातवे आसमान पर पहुच जाता अपनी तारीफ सुनकर...

सोनाली बस मुस्कुरा देती है... सतीश सोनाली की मेडिसिन उसे देता है और किचन मे से एक गिलास पानी लेकर उसे खाने को देता है.... सोनाली मेडिसिन अपने हाथों मे लेकर मुह बनाते हुये....

सोनाली- सतीश क्या ये दवाई खानी जरुरी है...

सतीश- दवाई तो आपको खानी ही पड़ेगी वरना आप ठीक कैसे होगी...

सोनाली- पर मे तो बिलकुल ठीक हूँ अब...

सतीश- कोई बहाना नहि चलेगा आपका जल्दी से दवा खाओ और फिर आराम करो...

सोनाली दवाई ख़ाति है और फिर बेड पर आँखें बंद करके लेट जाती है... सतीश उसके सर पर हाथ फिराता है...

सतीश- अब आप आराम करो और मे बाहर ही सोफ़े पर लेटा हूँ किसी चीज की जरूरत हो तो आवाज लगा देना...

सोनाली अपनी आँखे बंद कर सतीश की केयर मे छुपे प्यार को महसूस करके मुस्कुरा रही थी...

 
सतीश सोनाली के रूम मे से निकल कर बाहर ड्राइंग रूम मे आकर सोफ़े पर बैठ जाता है और टीवी ऑन करके चैनल चेंज करके कुछ देखने लायक मटेरियल सर्च करने लगता है पर सब पर वही घिसि पिटी मूवी और बकवाश सीरिअल्स, बोर होकर सतीश म्यूजिक का चैनल लगा कर म्यूजिक सुनने लगता है..... थोड़ी देर मे ही उसे नींद आने लगती है और वो टीवी ऑफ करके सोफ़े पर ही सो जाता है...

शाम को ६ बाजे शिप्रा उसे उठाती है...

सतीश- क्यों परेशान कर रही है यार सोने दे ना...

शिप्रा- ओये शाम के ६ बजे है और तुझे अभी भी सोने की पड़ी है....

सतीश अपना मोबाइल उठा कर टाइम देखता है उसमे ६:०५ हो रहे थे, सतीश तुरंत सोफ़े से उठ कर बैठ जाता है... और अपने रूम की तरफ बढ़ जाता है... रूम से फ्रेश होने के बाद वो बाहर आ जाता है और सोनाली के रूम की तरफ बढ़ जाता है... शिप्रा सोनाली के पास ही बैठि हुई उससे बाते कर रही थी सतीश भी बेड पर जाकर अपने पैर फैला कर लेट जाता है...

शिप्रा- ओये मनहूस अभी तो सो कर उठा है और अब फिर से लेट गया..

सतीश कुछ कहता नहि बस उसे घुर कर देखता है, सोनाली शिप्रा के कंधे पर थप्पड़ मारते हुये- क्यों छेडती है तू उसे इतना जा जाकर चाय बना ले सबके लिये...

शिप्रा अपना कन्धा सहलाते हुए किचन की तरफ बढ़ जातीहै.... सतीश अब अपना सर सोनाली के गोद मे रख कर लेट जाता है अब उसका फेस के आगे सोनाली का नंगा गोरा मख़मली पेट् था.... और सोनाली भी प्यार से उसके बालों मे अपना हाथ फिराने लगती है....

सतीश- अब आपकी तबियत कैसी है मोम...

सोनाली- मे तो एकदम ठीक हूँ और अब तो हर काम भी खुद कर सकती हूँ पर तुम दोनों मुझे बिस्तर से उठेने ही नहि दे रहे....

सतीश- अभी आप काम के बारे मे कोई फ़िक्र मत करो वो हम हैंडल कर लेंगे आप बस अपनी सेहत का ध्यान रखो...

सतीश की नजरे सोनाली के नंगे पेट् पर ही टीकी हुई थी और उसका मन कर रहा था की वो आगे बढ़ कर उसके पेट् पर अपने होंठ रख कर उसे खूब चुसे और चाटे पर वो ये सब नहि कर सकता था क्युकी उसे डर था की कही जल्दवाजी मे सब बिगड ना जाये और कही माँ को पता चल गया तो पता नहि वो क्या सोचेगी उसके बारे में... वो थोड़ी देर तक वैसे ही लेटे रहता है और फिर हिम्मत करके उसकी कमर मे अपना एक हाथ दाल देता है और अपना चेहरा आगे बड़ा लेता है अब सोनाली के नंगे पेट् और उसके चेहरे मे कुछ इंच का ही गैप था... सोनाली सतीश की गरम साँसों को अपने पेट् पर महसूस कर रही थी और सतीश भी उसकी खुश्बु को सूँघ पा रहा था...

सतीश बहुत एक्ससायटेड हो रहा था और वो अपने होठ आगे बड़ा कर उसके पेट् पर रख देता है... सतीश की इस हरक़त से सोनाली के बदन मे करंट सा दौड जाता है और वो सतीश के बालों को अपनी मुट्ठि मे भीच कर उसको अपने पेट् से और चिपका लेती है... सतीश को अपनी माँ से ये उम्मीद नहि थी पर वो सब कुछ भूल कर इन पलो का मजा लेने लगता है.... थोड़ी देर मे सोनाली को होश आता है तो उसे अपनी हरक़त पर घिन आती है वो सोचती है की सतीश मुझे प्यार से ये सब कर रहा है और मे अपनी हवस उससे मिटा रही हु...

सोनाली थोड़ी देर मे ही होश मे आ जाती है तो उसे अपनी हरक़त पर शर्म आती है और वो अपने हाथ उसके बालों से हटा लेती है.... सोनाली को यकीन नहि हो रहा था की वो कैसे अपने बेटे के साथ ये सब कर सकती है

सोनाली को अपने ऊपर शर्म आ रही थी की कैसे वो अपने बेटे के साथ ये कर सकती है, जबकी उसका बेटा उसे प्यार के कारन गोद मे सर रख कर लेटा हुआ था.....

पर तभी उसका दूसरा दिमाग उसका विरोध करता है- तू पागल है सोनाली, सतीश तेरे गोद मे सर रख कर ही नहि लेटा बल्कि वो तेरे पेट् पे किस कर रहा है...

सोनाली अपने मन मे- वो किस नहि कर रहा है वो अपनी माँ को प्यार कर रहा है, और वो मेरे बारे मे कुछ गलत नहि सोच सकता....

सोनाली अपने मन को समझा रही थी की उसका बेटा उसके लिए कोई गलत सोच नहि रखता पर वो आज दिन मे अपने बेटे साथ हुई कन्वर्सेशन को भूल गई थी पर वो नहि जानती की उसका बेटा उसे प्यार नहि कर रहा बल्कि केवल अपनी हवस मिटा रहा था....

सतीश अपने होठ उसके नंगे पेट् पर रखे ही उसके जिस्म की खुश्बु और उसके स्पर्श का मजा ले रहा था....

थोड़ि देर मे ही शिप्रा चाय लेकर रूम मे एंटर होती है तो वो सतीश को सोनाली की गोद मे सर रखे लेटा देखति है, पीछे से उसे ये दिखाइ नहि देता की सतीश अपनी माँ के पेट् पर होठ रखे हुए था....

शिप्रा- क्या बात है बड़ा प्यार हो रहा है माँ बेटे में...

 
Back
Top