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Incest आग्याकारी माँ



ओर फिर सतीश वह से निकल जाता है, बाहर आकर टाइम देखता है तो

कॉलेज छूटने मे अभी भी टाइम था.... और वैसे भी वो चुदाई के बाद

काफी थकान मह्सुश कर रहा था, इस्लिये वो बाइक उठाकर सीधा घर की तरफ

चल देता है.....

१५ मिनट मे सतीश की बाइक उसके घर के बाहर पहुँच जाती है....

सतीश के द्वारा की गई मेहनत(चुदाई) के कारन उसके पेट् मे बहुत जोर से

चुहे कुद रहे थे, इस्लिये वो बाइक को स्टैंड पर लगा कर तेजी से गेट की तरफ

बढ़ता है और वो डोर बेल्ल बजाने

ही वाला था की उसकी नजर गेट पर पड़ती है, गेट लॉक नहीं था ये देख सतीश

थोड़ा चौकता है क्योकि अक्सर सोनाली जब भी कोई घर पर नहीं होता था तो गेट

लॉक ही रखती थी......

सतीश अपने मन में हो सकता है की आज ध्यान न दिया हो....

ओर वो गेट को लॉक करके अंदर आ जाता है... वो अपने बैग को सोफ़े

पर पटकता है और अभी वो अपनी माँ को आवाज लगाने ही वाला था की

उसे किसी की सिसकारियों की आवाज सुनाइ पड़ती है... वो इस सिसकि को पहचान सकता था ये सिसकि किसी और की नहीं वल्कि उसकी माँ की ही थी उसे तो अपने कानो पर यकीन ही नहीं होता....

सतीश मन सतीश-तो सब के जाने के बाद माँ किसी गैर मर्द के साथ रंग रलिया करती है, तभी मे कहु की आज गेट कैसे खुला छूट गया,

चुत की आग बुजाने के चक्कर मे गेट भी लॉक करना भूल गई

सतीश ग़ुस्से मे सोनाली के कमरे की तरफ बढ़ता है, सोनाली के मुह से निकलि

सिस्कियाँ उसके अंदर ग़ुस्से की आग को और भड़का रही थी वो सिसकियाँ उसके कानो मे पिघले लोहे की तरह मह्सुश हो रही थि, आज लाइफ मे पहली बार उसे इतना गुस्सा आया था आज उसकी माँ

के साथ जो कोई भी हो उसका क़त्ल होना तय था....... पर रूम के पास पहुँचते ही उसकी आँखें

फ़टी की फटी रह जाती हे....

 
अपडेट 15

सामने उसकी माँ पूरी नंगी बेड से अपने दोनों पैर निचे लटकाये लेटी हुई

थी और अपने दोनों हाथो मे अपने बॉब्स को लेकर मसल रही थी और बेड के निचे

उनकी दोनों टांगो के बीच माँ की चुत मे मुह डाले.....??

कहानी अब तक्....

दोस्तो आपने अब तक पडा की कहानी की हीरोइन सोनाली जोकि एक सेक्सी जिस्म की मालिक है और बहुत चुदककड भी पर उसके पति को पिने की बहुत बुरी आदत पड़ गई जिस के कारन अविनाश ने सोनाली के साथ बहुत समय से सेक्स नहि किया था और सेक्स की आग में जलती सोनाली को अपनी आग अपने आप ही शांत करणी पडति, ऐसे ही एक रात जब सोनाली अपने चुत को ठण्ड करने में ब्यस्त थी तब उसका बेटा सतीश उसे अपनी चुत में डिलडो करता हुआ देख लेता है...

सोनाली का सेक्सी जिस्म.देखकर उसका ईमान डोल जाता है और अपनी माँ के नाम की.मुठ लगा कर नंगा ही अपने कमरे में सो जाता है...

कल सुबह जब सोनाली सतीश को चाय देणे आती है तब वो उसका लंड देख कर चौक जाती है उसे यकीन नहि होता की लंड इतना बड़ा भी हो सकता है, उसकी चुत पानी छोड़ने लगती है पर वो अपने पर कण्ट्रोल करती है और फिर डोर को बंद करके फिर से नॉक करती है सतीश अपने कपडे पहनकर डोर खोलता है, सोनाली उसे हाथ मुह धोकर तैयत होने को कहकर शिप्रा अपनी छोटी बेटी को उठाने चलि जाती है और उसे चाय देकर नीचे आ जाती है और फिर सतीश की चाय गरम होने के लिए रख देती है उसका दिमाग सतीश के लंड के ख्यालो म खो जाता है पर शिप्रा के आवाज देणे पर वो होश सतीश आती है और शिप्रा के हाथ सतीश की चाय भिजवा देती है....

सतीश बाथरूम में नहा रहा था और वो अपनी माँ को चोदने का निच्छय कर लेता है उधर सतीश के कमरे में शिप्रा उसकी चादर पर निशान पडे देखति है जिसे देख कर उसके चेहरे पर अर्थपुर्ण मुस्कान आ जाती है तभी सतीश के मोबाइल की टोन बजती है वो उठा कर देखति है किसी प्रियंका नाम की लड़की का मेसेज था...

इतने म सतीश बाथरूम से निकल आता है और फिर उन दोनों की.हलकी फुल्की झडप.होती है फिर शिप्रा सतीश को चिड़ाते हुए भाग जाती है सतीश कपडे पहनकर निचे आता है यहा फिर से शिप्रा से झड़प होती है जिसे सोनाली खतम कर देती है... और नाश्ता लगा देती है नाश्ते के समय भी सतीश अपनी माँ को.ही घूर रहा था फिर नास्ता करके सतीश और शिप्रा कॉलेज के लिए निकल जाता है....

शिप्रा को कॉलेज छोड़कर सतीश प्रियंका के यहां चल देता है जहाँ उसका सामना एक और हॉट milf से होता है जोकि प्रियंका की माँ थी सतीश का लंड तो वैसे ही कल रात वाली बात से जोर मार रहा था और नलिनी को देख कर तो वो और तन गया नलिनी उसे अंदर ले जाती है और फिर प्रियंका आती है प्रियंका भी मस्त हॉट आइटम थी सतीश प्रियंका के सामने ही उसकी माँ से फ्लिर्टिंग करता है प्रियंका उसे अपने कमरे में ले जाती है जहाँ सतीश उसकी धमाके दार चुदाई करता है, नलिनी भी उनकी चुदाई खिड़की में से देख रही थी जिसे सतीश देख लेता है....

नलिनी अपनी बेटी को इतने बड़े मूसल से चुदता देख गरम हो जाती है और अपनी चुत में ऊँगली करके उसे शांत करने लगती है... शांत होने के बाद वो वहाँ से निचे आ जाती है...

उपर सतीश भी प्रियंका की गांड मारने के बाद झड जाता है और प्रियंका से अगले दिन के बारे में पूछता है पर वो मना कर देती है क्युकी उसे बाहर जाना था २-३ दिन के लिये....

सतीश निचे आता है तो नलिनी उसे अगले दिन भी आकर प्रियंका के साथ स्टडी करने के बहाने खुदको चुदवाने का खुला ऑफर देती है जिसे सतीश एक्सेप्ट कर लेता है और अपने घर चल देता है....

विस्तार से पढ़ने के लिए आप पिछले अपडेट पड़ सक्ते है, मैंने आपको काफी संछेप में बताने की कोशिश की पता नहि इसमें मे कितना सफल हुआ और कोई ग़लती हो तो माफ़ करना...

पर रूम के पास पहुँचते ही उसकी आँखें फटी की फटी रह जाती हे....

सामने उसकी माँ पूरी नंगी बेड से अपने दोनों पैर निचे लटकाये लेटी हुई थी और अपने दोनों हाथो मे अपने बॉब्स को लेकर मसल रही थी और बेड के निचे उनकी दोनों टैंगो के बीच में उनकी चुत मे मुह डाले उनके घर की नौकरानी बसंती थी जोकि पूरी तरह से नंगी थी....

बसन्ती उम्र ३५ साल सांवला कलर ३८ के ब्रैस्ट और चौडी काली गांड़....

 
अपडेट 16

सतीश का तो बुरा हाल हो गया बसंती अपनी जीभ से उसकी माँ की चुत कुरेद रही थी... और सोनाली की मादक सिसकारी पूरे कमरे म गुंज रही थी... सोनाली अपने होंठो को अपने दाँतो में दबाये अपनी सिसकारियों रोकने की भरपूर कोशिश कर रही थी पर वो ऐसा करने में असमर्थ थी....

ओ अपने दोनों हाथो से अपने दूध मसल रही थी और कभी अपनी उंगलियो में अपनी निप्पल्स को दबा कर मसल देती....

अब सतीश की नजर बसंती पर जाती है उसके दूध निचे लटक रहे थे और उसकी बड़ी गांड पर जाकर सतीश की नजर रुक जाती है उसकी गांड काफी चौडी थी और उसका काला छेद सतीश को साफ़ नजर आ रहा था... सतीश का लौडा पूरी तरह अकड कर तन गया था, वो उसे बाहर निकाल कर मुट्ठ मारना शुरू कर देता है और फिर उसकी नजर गांड से थोड़ी निचे जाती है तो उसे बसंती की चुत दिखाइ देती है, उसकी चुत काले बालो से घिरि हुई थी और एक दम काली.... अंदर दो मस्त घोडियों को इस तरह देख कर उसका लंड लावा उगलने को तैयार हो जाता है सतीश तुरंत अपना रुमाल निकाल कर अपने लौडे पर लगा देता है और उसका लंड सारा माल उसके रुमाल में गिरा देता है... आज ३ बार झड़ने के बाद वो थक गया था इस्लिये वो अपने लंड को वापस अंदर दाल कर जीप बंद करता है, तभी उसकी नजर घडी पर पड़ती है कॉलेज छूटने का टाइम हो गया था उसका मन तो नहि था ये नजारा छोड़कर जाने का पर उसकी मज़बूरी थी क्युकी शिप्रा उसका वेट कर रही थी... वो तुरंत अपना बैग उठाता है और बाहर निकल कर धीरे से दरवाजे को बंद करके निकल जाता है...

ओर थोड़ी देर मे ही वो कॉलेज पहुंच जाता है और शिप्रा का वेट करने लगता है, थोड़ी देर मे ही उसे शिप्रा किसी लड़के के साथ आती दिखाइ देती है उस लड़के को देखते ही सतीश की आँखों मे खून उतर आता है वो सतीश के क्लास का ही लड़का प्रिंस था और इस कॉलेज का सबसे हरामी लड़का भी वो अक्सर भोलि भाली लड़कियों को पटा कर उनके साथ सेक्स करता और फिर उनकी वीडियो बना कर उन्हें ब्लैकमेल करके अपने दोस्तों के आगे भी परोस देता और इस कारन उसकी और सतीश की कई बार लड़ाई भी हो चुकी थी इस कॉलेज में केवल सतीश ही था जिससे प्रिंस नहि उलझना चाहता था, और प्रिंस उससे बदला लेना चाहता था इस्लिये उसने जानकर शिप्रा से दोस्ती की थी.... और शिप्रा ने इसी साल इस कॉलेज मे एडमिशन लिया था इस्लिये उसे उसके बारे में कुछ भी नहि पता था....

सतीश को देख कर प्रिंस शिप्रा से बाई बोल कर चला जाता है.... शिप्रा सतीश के पास आ जाती है,

शिप्रा- “क्या हुआ भैय्या ऐसे मुह फुलाये क्यों खड़े हो?

सतीश- “तू उस लड़के के साथ क्या कर रही थी?

शिप्रा- “वो प्रिंस था भाईया बहुत अच्छा लड़का है, आपकी क्लास में ही तो पडता है वह”

सतीश- “मे जानता हूँ की कितना अच्छा लड़का है वह, तू बस उससे दूर ही रहा कर”....

शिप्रा- “पर भेया”...

सतीश- “पर-वर कुछ नहि सतीशने कहा ना की उससे दूर रहना मतलब उससे दूर रहना”..

सतीश का ख़राब मूड देख कर शिप्रा उससे कुछ नहि कहती और चुप-चाप बाइक पर बैठ जाती है, सतीश घर की तरफ वापस चल देता ह...

शिप्रा मूड चेंज करने के लिये

शिप्रा- “वैसे भाईया आज आप कहा थे?

सतीश- “थे का मतलब? क्लास मे ही था”....

शिप्रा- “झूठ मत बोलो भाईया मे जानती हूँ की आप कॉलेज में नहि थे... अब आप खुद बताते है की मे घर पर माँ को बताऊ”...

सतीश के पास अब कोई ऑप्शन नहि था पर सच तो वो बता नहि सकता था...

सतीश- हाँ वो आज मे दोस्तों के साथ मूवी देखने गया था”....

शिप्रा- “कोण सी?

सतीश को शिप्रा से इस बात की उम्मीद नहि थी वो उसके इस क्वेश्चन से हडबडा जाता है”....

सतीश- “ओ..वह..सतीश..वह”

शिप्रा- “रहने दो भाईया मे जानती हूँ की आप प्रियंका के साथ थे”...

सतीश की तो फट ही गई थी...

सतीश- “तू कुछ ज्यादा ही नहि बोलने लगी है आज कल, चल आज तुझे कॉफ़ी पिलवाता हूँ तू भी क्या याद करेगी की किसी रईश से पाला पड़ा था”....

 
अपडेट 17

शिप्रा- “हमं... मुह बंद रखने के लिए रिश्वत पर ऐसा नहि लगता की ये मामला आप कुछ सस्ते मे निपटा रहे हो”...

सतीश- “तो तू बोल मेरी माँ तुझे क्या चाहिये”...

शिप्रा- “अभी तो कॉफ़ी पिलाओँ बाकी बाद मे बताऊंगी”....

शिप्रा सोच रही थी की सतीश उसे डर की वजह से कॉफ़ी पीला रहा है जबकि सतीश चाहता था की सोनाली अपनी प्यास आराम से मिटवा ले और शिप्रा को इस बात का पता भी न चले ....

सतीश कैफ़े कॉफ़ी डे पहुँच कर बाइक स्टैंड पर लगाता है और फिर शिप्रा के साथ अंदर चला जाता है...

अंदर काफी कपल बैठे हुए थे पर सतीश और शिप्रा के एंटर होते ही सबकी नजरे उनपर ही टिक जाती है...

सतीश और शिप्रा के एंटर होते ही सबकी नजरे उनपर टिक जाती है, और टीके भी क्यों न वो दोनों एक खूबसुरत कपल लग रहे थे....

सतीश और शिप्रा जाकर अपनी जगह ग्रहण करते है”

सतीश- “कब से जानती है तू उस लड़के को?

शिप्रा जोकि अपने मोबाइल मे लगी हुई थी....

शिप्रा- “कोण से लड़के को?

सतीश- “प्रिंस को, कब से जानती है उसको?

शिप्रा अभी भी मोबाइल मे लगे हुये- “ह्म्म्म... हो गये ३-४ हफ्ते”...

सतीश-“और तुम मुझे अब बता रही हो”...

शिप्रा कोई जवाब नहि देती और मोबाइल मे लगी रहती है....

सतीश उसके हाथ से मोबाइल छीनते हुये- “मे तुझसे कुछ पूछ रहा हु??

शिप्रा मुह बनाते हुए थोड़े ग़ुस्से मे- “तो क्या मुझे तुम्हे अपनी हर बतानी पडेगी... जब मे तुमसे तुम्हारी प्राइवेट लाइफ के बारे मे नहि पूछती, तो तुम्हे क्यों जलन हो रही है, मेरी भी एक प्राइवेट लाइफ है, और मैं नहि चाहती की कोई मेरी प्राइवेट लाइफ मे इंटरफेर करे”....

शिप्रा ने ये बात इतने जोर से कही थी की सभी लोग उनकी तरफ देखने लगते है...

सतीश को तो यकीन ही नहि हो रहा था की उसकी छोटी बहन उससे इस तरह से बात कर सकती है...

थोड़ी देर तक टेबल पर शान्ति हो जाती ह, इतने मे ही उनकी कॉफ़ी भी आ जाती है...

शिप्रा भी अब अपनी ग़लती पर पछता रही थी....

सतीश- “सॉरी सतीश भूल गया था की तुम्हारी एक प्राइवेट लाइफ भी है”...

सतीश अपनी सीट से उठता है और रूपये टेबल पर रख कर बाहर की और निकल जाता है...

शिप्रा उसे जाते हुये देखति है और फिर ग़ुस्से मे बड़बड़ाते हुये वो भी उसके पीछे तेज कदमो से चलि जाती है....

शिप्रा बाहर निकल कर सतीश को आवाज देती है... पर सतीश बिना सुने अपनी बाइक निकालने के लिए चल देता है...

शिप्रा उसके पीछे चल देती है- “भइया.., भाईया मेरी बात तो सुनो, आई एम सॉरी” उसे जाते हुए देखति रहती है, सतीश थोड़ी आगे जाकर बाइक रोक देता है,

शिप्रा के चेहरे पर हलकी सी स्माइल आ जाती है, और वो भगति हुई सतीश के पास पहुंच कर बाइक पर बैठ जाती है...

शिप्रा- “आई ऍम सॉरी भाई... वो पता नहि अचानक मुझे क्या हुआ, आई डीड नोट वांट तो हार्ट यु”....

सतीश उसे कोई भी जवाब दिए बिना आगे बढ़ जाता है...

शिप्रा पूरे रस्ते उसे मनाती रहती है, पर सतीश उसकी बात का कोई जवाब नहि देता...

सतीश घर के बाहर बाइक को खड़ी करके डोर बेल्ल बजाता है, डोर सोनाली खोलती है, सतीश एक नजर सोनाली को देखता है वो काफी फ्रेश नजर आ रही थि, ऐसा लग रहा था जैसे की वो अभी अभी नहा कर आई हो....

पर तुरंत ही सतीश ग़ुस्से मे अपने कमरे की और चल देता है....

सोनाली उसे आवाज लगाती है पर वो सीधे अपने कमरे मे चला जाता है....

सोनाली अब शिप्रा की तरफ देखति है तो वो भी अपना सर झुकाए अपने कमरे की तरफ बढ़ रही थी....

सोनाली शिप्रा को आवाज देकर रोकती है और शिप्रा के सामने जाकर खड़ी हो जाती है- “ये सतीश को क्या हुआ और तू इतनी उदास क्यों है?

शिप्रा कोई जवाब नहि देती बस मुह लटकाये कड़ी रहती है....

सोनाली- “लगता है आज फिर तुम दोनों ने झगड़ा किया है, तुम लोग कब सुधरोगे, मुझे तो समझ नहि आता”....

शिप्रा चुपचाप अपने कमरे मे चल देती है,

सोनाली- “है भगवान् कब अकल आयेगी इन दोनों को”...

सतीश अपने कमरे मे ग़ुस्से से आग बबूला हो रहा था आज शिप्रा ने उस दो कोडी के लड़के के लिए उससे इतनी बदतमीज़ी से बात करी थी....

 
अपडेट 18

उधार शिप्रा अपने रूम मे तकिये मे मुह छुपाये सुबक रही थी उसे अब तक अपनी हरकत का बहोत अफसोश हो रहा था....

ओ जाकर भाई से माफ़ी माँगना चाहती थी पर उसकी हिम्मत नहि हो रही थी....

सतीश फ्रेश होकर अपने कपडे चेंज करता है और फिर नीचे आ जाता है... सोनाली किचन मे थी...

सतीश- “माँ मे अपने दोस्त के यहां जा रहा हूँ अब शाम को आऊंगा”....

सोनाली किचन से बाहर निकलते हुये- “पर लंच तो करता जा”....

पर सतीश नहि रुकता और बाइक निकाल कर बाहर निकल जाता है....

सोनाली- “आखिर हुआ क्या है इस लड़के को”....

सतीश अपनी बाइक से चला जा रहा था.कहा ये उसे भी नहि पता था.... आज उसका मूड पहली बार इतना ऑफ हुआ था....

सतीश १ घंटे तक बाइक को सडको पर युही दौडता रहता है, अब उसके पेट् मे चुहे कुदने लगे थे, पर वो घर भी नहि जाना चाह रहा था.... वो कहि बाहर खाना खा भी लेता पर फिर भी शाम तक का टाइम भी तो पास करना था...

सतीश अपना मोबाइल निकाल कर अपने फ्रेंड सागर को कॉल करता है...

सतीश- “कहा हो बेटा?

सागर- “कहा होंगे बे इस दोपहरी मे, घर पर ही मरा रहे है”...

सतीश- “चल ठीक है मे आ रहा हूँ तेरे पास”...

सागर- “ये भी कोई पुछने की बात है”...

सतीश- “ओके पहुचता हूँ १० मीनट में”

सतीश बाइक सागर के घर की तरफ मोड़ देता है, थोड़ी देर मे ही वो उसके घर पहुच जाता है...

बाइक खड़ी करके सतीश डोर बेल्ल बजाता है, गेट खुलता है और सतीश की सारी टेंशन जैसे काफूर हो गई...

सामने भारती खड़ी थि, सतीश को देखते ही उसके चेहरे पर स्माइल आ जाती है एक प्यारी सी स्माइल देख कर सतीश का मूड फ्रेश हो जाता है,

ओ दोनों एक दूसरे मे खो जाते है, सतीश और भारती एक दूसरे को बचपन से ही पसंद करते थे, दोनों ही एक दूसरे को टूट कर चाहते थे पर दोनों ने कभी इस बात का जिक्र एक दूसरे से नहीं किया था...

सागर- “अब सतीश को अंदर भी बुलाएगी या फिर उसे बाहर ही खड़ा रखने का ईरादा है”...

भारती और सतीश दोनों का ध्यान सागर की तरफ जाता है वो भारती के पास खड़े खड़े मुस्कुरा रहा था...

भारती- “ओह्ह्ह सॉरी ओ... वो सतीश”...

ओर वो शरमाकर अंदर की तरफ भाग जाती है... सतीश के चेहरे पर स्माइल आ जाती ह....

सागर- “अबे हमसे भी मिल ले कमीने”...

सतीश- “क्यों नहि भाई तुझसे ही तो मिलने आया हु”...

ओर वो आगे बड़कर सागर के गले लग जाता है...

सागर- “मे अच्छे से जानता हूँ की तू किस्से मिलने आया था”...

सतीश-“नहि भाई तू गलत समझ रहा है”....

सागर- “हरामखोर रग रग से वाकिफ हूँ मैं तेरी”...

सतीश सागर की बात पर मुस्कुरा देता है और दोनों सोफ़े पर बैठ जाते है...

सागर- “ह्म्मम्, तो इतने समय बाद तुझे हमारी याद आ ही गयी”....

सतीश- “भाई तुम्हे भुला ही कब था जो तुम्हारी याद आयगी”

सागर- “तो साले इतने समय बाद यहा का रास्ता कैसे भूल गया”....

सतीश- “आरे नहि यार मिलने का मन किया तो चला आया”...

सागर- “चल अच्छा किया जो तू आ गया”....

सतीश- “आंटी नजर नहि आ रही है, कही बाहर गई है क्या???

सागर- “हाँ दूर के रिलेशन मे चाचा है उनके यहा कोई फंक्शन है तो उन्ही के यहाँ गई है डैड के साथ्”...

सतीश-“ओ के”...

सागर- “और घर बार सब कैसे हैं?

सतीश- “सब बढ़िया हैं भाई”...

पहले वो दोनों नॉर्मली बात चित करने लगते है....

थोड़ी देर मे ही भारती कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स लेकर आ जाती है, और टेबल पर रख कर जाने लगती है...

सतीश- “भारती”...

भारती रुक कर सतीश की तरफ देखति है...

सतीश- “तुम भी बैठो ना हमारे साथ”...

भारती सागर की तरफ देखति है सागर हाँ मे गर्दन हिला देता है....

भारती सागर के पास जाकर बैठ जाती है,

 
अपडेट 19

ओ अभी भी अपनी नजरे झुकाए हुए बैठि थि, और उसके चेहरे पर एक प्यारी सी स्माइल थी....

ड्रिंक के साथ स्नैक्स खाते हुए वो नोर्मल्ली बातें करने लगते है पर भारती अभी भी चुप थी और कनखियों से सतीश को देख रही थी सतीश की नजरे भी बार बार उसकी तरफ चलि जाती...

सागर उन दोनों की हरकतों को देख रहा था...

सागर अपनी कोल्ड ड्रिंक खत्म.करने के बाद...

सागर उठते हुये- “भाई मुझे जरुरी काम से जाना है तू बैठ मे आधे घंटे मे आता हु”...

सतीश- “मे भी साथ चलता हु”..

सागर- “तू बैठ और बाइक की की मुझे दे”.....

सागर सतीश से बाइक की की लेकर बाहर निकल जाता है, अब घर मे केवल भारती और सतीश ही थे....

पूरे घर मे एकदम सन्नाटा फैल गया था... दोनों ही कुछ बोलना चाह रहे थे पर हिम्मत किसी की नहि हो रही थी....

सतीश हिम्मत करके अपनी जगह से उठता है और भारती के पास जाकर बैठ जाता है...

इससे पहले की सतीश कुछ कहता भारती अपनी जगह से उठ कर आगे बढ़ जाती है, सतीश उठ कर पीछे से उसका हाथ पकड़ लेता है....

सतीश- “जान अभी तक नाराज हो क्या?

भारती पलट कर सतीश की तरफ देखति है....

“चटाकककक..... एक थप्पड़ की गुंज से पूरे कमरे मे फैला सन्नाटा ख़तम होता है....

ये थप्पड़ भारती ने सतीश के बाए गाल पर जड़ा था... थप्पड़ की गुंज ख़तम होते ही कमरे मे एक बार फिर से सन्नाटा हो जाता है...

भारती के चेहरे पर अब काफी गुस्सा था जिसे देखकर सतीश के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है, और वो अपना दाया गाल आगे बड़ा देता है....

“चटाककक... एक बार फिर से थप्पड़ की आवाज से घर गुंज उठता है....

सतीश भारती की और देखता है, उसकी आँखों मे आँसु थे सतीश अपना बाया गाल फिर से आगे कर देता है....

भारती ग़ुस्से से उसके छाती मे एक के बाद एक कई घुसे मारती है, और फिर उसके सीने से लग कर सुबकने लगती है... सतीश भी उसे अपनी बाँहों मे जकड लेता है...

भारती सुबकते हुये- तुम बहुत बुरे हो सतीश, मुझसे मिलने के लिए भी टाइम नहि है तुम्हारे पास... पता है आज पुरे ५ महीने और ११ दिन और ४ घंटे बाद मिले हो... तुम्हे एक पल को भी मेरी याद नहि आई”...

सतीश- ५ महीने ११ दिन ४ घंटे २० मीनट. और ४० सेकंद. एक्साक्ट्ली.... और मेरी लाइफ का एक भी मिनट ऐसा नहि गया जब मैंने तुम्हे याद न किया हो....

भारती सतीश की आँखों मे देखते हुए – “झुठ मत बोलो अगर तुमने मुझे इतना याद किया तो मिलने क्यों नहि आये ???

सतीश- “यही बात अगर मे तुमसे कहु तो.... अगर इतना ही तुम मुझे.मीस कर रही थी मिलने तो,तुम भी आ सकती थी”.....

भारती अभी भी सतीश के सीने से लगी खड़ी थी और भारती की सांसे उसे अपने चेहरे पर महसूश हो रही थि, अगर भारती की जगह कोई और लड़की सतीश के इतने करीब होती तो बेशक उसका लंड खड़ा हो चुका होता पर भारती के इतने करीब होने के बावजूद भी उसमे कोई हलचल नहि थी... और ये सब प्यार के कारन था सतीश के मन मे भारती के लिए कभी भी कोई गलत ख्याल नहि आया.... बिना एक दूसरे को आई लव यु बोले वो एक दूसरे को बेइन्तेहा प्यार करते थे....

दोनो एक दूसरे के आँखों मे खो गए थे....

भारती- “तो ठीक है अब मैं ही तुमसे मिलने आ जाया करुँगी”....

ओर इतना कहकर भारती वापस अपना चेहरा सतीश की छाती मे छुपा लेती है...

सतीश- “एक बात कहु भारती”...

भारती- “ह्म्म्म”

सतीश- “तुमने थप्पड़ बहुत जोर से मारे थे... अभी तक कान झनझना रहे है”....

भारती हस् देती है...

भारती- “देख लो बच्चू अगर तुमने दोबारा ऐसी ग़लती करी न तो तुम्हारा बैंड बजा दूँगी”....

सतीश- “जब मे आया था तो मुझे गेट पर लगा की तुम मुझे देख कर काफी खुश हो और शायद मुझसे नाराज नहि हो”....

भारती- “हमम, खुश तो मे बहुत.थी पर नाराज भी बहुत थी वो तो उस समय सागर भाईया थे वरना उसी समय तेरा मोड़ देती”....

सतीश- “कोई बात नहि उस समय नहि तो अब तो तोड़ ही दिया ना”....

भारती सतीश से अलग होते हुये- “क्या वाक़ई मे बहुत तेजी से पड़ गया हाथ”....

सतीश अपने चेहरे पर मासुमियत लाते हुये- “बहुत तेज”....

भारती उसके करीब आते हुये- “तो क्यों दिलाते हो मुझे इतना गुस्सा पता है ये तेरे गाल पर पड़ा ६० वा थप्पड़ था”...

ओर भारती अपने पंजो पर खड़े होकर सतीश के लेफ्ट गाल पर अपने होंठ रख देती है, और फिर राईट गाल पर भी अपने होंठ रख देती है...

कब वो अपने होंठ सतीश के होंठो के पास लाती है, दोनों एक दूसरे की आँखों मे झाकते है.... और फिर भारती की पलके बंद हो जाती है और वो अपने होंठ सतीश के होंठो की और बड़ा देती है, दोनों के होंठ किसी भी समय एक हो सकते थे.....

पर इससे पहले की भारती अपने होंठो को सतीश के होंठो पर रख देति, सतीश झटके से पीछे हट जाता है... और उसकी इस हरकत से भारती जोकि सतीश के सहारे खड़ी हुई थि, लडखडा जाती है पर इससे पहले की वो गिर जाती सतीश उसे थाम लेता है और भारती अपने चेहरे पर आश्चर्य के भाव लाकर उसकी तरफ देखति है....

 
अपडेट 20

भारती अपने होंठ सतीश के होंठो के पास लाती है, दोनों एक दूसरे की आँखों मे झाकते है.... और फिर भारती की पलके बंद हो जाती है और वो अपने होंठ सतीश के होंठो की और बड़ा देती है, दोनों के होंठ किसी भी समय एक हो सकते थे.....

पर इससे पहले की भारती अपने होंठो को सतीश के होंठो पर रख देति, सतीश झटके से पीछे हट जाता है... और उसकी इस हरकत से भारती जोकि सतीश के सहारे खड़ी हुई थि, लडखडा जाती है पर इससे पहले की वो गिर जाती सतीश उसे थाम लेता है और भारती अपने चेहरे पर आश्चर्य के भाव लाकर उसकी तरफ देखति है....

सतीश उसके चेहरे के एक्सप्रेशन से समझ जाता है की वो क्या कहना चाहती है...

सतीश उसे छोड़ते हुये- देखो भारती ये गलत है”....

भारती हैरत से- “पर”

सतीश- “नहि मे अपने दोस्त के विश्वास को नहीं तोड़ सकता, उसने मुझे तुम्हारे साथ अकेला छोडा क्युकी वो जानता है की हम प्यार करते हैं और हम अकेले मे अपने गीले सिक्वे मिटा सकें पर हमे दूरि बनाकर रखणी होगी जब तक की हमारी एंगेजमेंट नहि हो जाति”...

भारती- “सॉरी सतीश वो मैं”....

सतीश- “तुम्हे सॉरी बोलने की कोई जरूरत नहि है भारती”...

भारती थोड़ी नर्वस हो जाती है इस्लिये भारती के मूड को फ्रेश करने के लिये...

सतीश- “वैसे एक बात तो है तुम्हारे मल्हम ने काम कर दिया अब मेरे गाल दर्द नहि कर रहे..... थोड़ा और मल्हम लगाओगी क्या??

भारती हस्ते हुए उसकी तरफ बढ़ती है- “अब तुम मार खाओगे मेरे हाथ से”...

सतीश- “मारलो जितना मारना है बाद मे मल्हम भी तो तुम्हे लगाना पड़ेगा मेरे जख्मो पर”.....

भारती सतीश के गले लगते हुये- “तुम न बहुत बुरे हो”...

सतीश- “हाँ वो तो मे हु”...

तभी डोरबेल बजती है भारती सतीश से दूर हटके गेट खोलने के लिए बढ़ती है, और सतीश अपनी जगह पर बैठ जाता है....

गेट पर सागर था सागर अंदर आते हुये- “तूने ज्यादा परेशान तो नहि किया ना मेरे दोस्त को”...

भारती- “क्या भाई आप भी ना?

सागर सतीश की तरफ बढ़ जाता है और भारती गेट बंद करके किचन की तरफ...

सतीश-“कहा मराने गया था बे??

सागर- “आरे गया था कहि मराने तुझे इससे क्या? हाँ तुझे मरानी हो तो मुझे बता”...

सतीश सागर के कंधे पर मुक्का मारते हुये-बड़ा हरामी हो गया है तु.”..

सागर- “सब तेरी संगत का असर है”....

ओर दोनों हस देते है....

सागर- “छोड़ इन बातों को और ये बता की तू किस बात को लेकर परेशान था”...

सतीश- “मे और परेशान, भाँग पीकर तो नहि आया है रे छोरे”....

सागर- “बेटा मुझे लौंडिया चोदना मत सिखा, चुपचाप बता की बात क्या है”...

सतीश- “चल तो तेरे कमरे मे चलकर बात करते है”...

सागर- “चल...

दोनो उठकर सागर के कमरे की और चल देते है...

सतीश- सिगरेट है...

सागर सतीश को एक सिगरेट देता है और एक खुद लेता है और दोनों उसे लाइट करके कश लगाने लगते है...

सागर- अब बतायेगा या फिर पैक भी बनाऊ.

सतीश- नहि यार बताता हु...

ओर सतीश उसे शिप्रा और प्रिंस के बारे मे और फिर कैफ़े मे हुई बात के बारे मे बताता है...

बात पूरी होने के बाद कमरे मे शान्ति हो जाती है दोनों एक एक और सिगरेट जला कर कश लगाने लगते है...

सागर- बात तो ये वाकई मे चिंता की है....

सतीश- साले अगर चिंता की बात न होती तो मे इतनी टेंशन क्यों लेता...

सागर- अबे तू कहे तो ठिकाने लगा देते हैं उसके दिमाग को साले के हाथ पैर तोड़ देंगे....

इससे पहले की सतीश कुछ कहता रूम का गेट खुलता है और भारती रूम मे एंटर होती है..

सागर जोकि अभी सिगरेट का कश लगा रहा था उसको देख कर इतना शॉकेड हो जाता है की अपने मुह से सिगरेट निकालना भी भूल जाता है जबकी दूसरी तरफ सतीश भारती को देखते ही उठ कर खड़ा हो जाता है और अपनी सिगरेट पीछे छुपाने की असफल कोशिश करता है....

रूम फ्रेशनर के बावजूद सिगरेट की स्मेल पुरे कमरे मे फैल गयी थी....

भारती ग़ुस्से से सागर की तरफ देखति है और फिर अपनी नजरे सतीश पर टीका देती है और उसे घुरने लगती है... भारती के देखने के तरीके से ऐसा लग रहा था की जैसे वो अभी सतीश को कच्चा चबा जाएगी....

सतीश उसके ऐसे घुरने पर चुतियों की तरह अपनी बत्तीसी दिखा कर हॅसने लगता है...

सतीश- ओ... वो भारती तुम गलत समझ रही हो. .

इससे पहले की वो कुछ और कहता भारती ट्रे को टेबल पर रख कर...बलकी पटक कर कहना ज्यादा बेहतर रहेगा, कप्स मे से थोड़ी कॉफ़ी बाहर छलक कर ट्रे मे गिर गई थी....

ओर ट्रे को रखने के बाद वो ग़ुस्से मे तेजी से रूम से निकलती और गेट को इतनी तेजी से बंद करती है की गेट के बंद होने की आवाज पूरे रूम मे गुंज जाती है....

गेट इतनी तेजी से बंद हुआ था की थोड़ी देर तक सागर और सतीश गेट की तरफ ही देखते रह्ते है...

 
ओर फिर सतीश सागर की तरफ बढ़ता है और उसके सर पर एक थपकि लगाते हुये- “भोसडी के तू एक काम भी ठीक से नहि कर सकता ना”,

सागर- सॉरी भाई मे गेट करना भूल गया था....

सतीश- हरामखोर लौंडिया चोदते समय तो ४-४ बार चेक करते हो... तब क्यों नहि भूलते गेट खुला छोड़ना...

सागर- अब ग़लती हो गई भाई, अब क्या जान लेगा मेरी..

सतीश- साले तेरी ग़लती की वजह से मेरी तो बज गई ना... इतनी मुस्किल से तो मनाया था उसे और तूने फिर से अपनी गांड मरा ली.... अब पता नहि कितने खाने पडेंगे....

सागर- खाने तो मुझे भी पडेंगे....

सतीश उसकी बात पर उसकी तरफ देखता है...

सतीश- मतलब तुझे भी उसके हाथ से...

सागर- भाई जब वो ग़ुस्से मे होती है तो किसी को नहि छोड़ती....

ओर फिर दोनों हॅसने लगते है...

सागर- छोड़ वो मान जाएगी... तू प्रिंस का बता, ठोंक दू उसे क्या...

सतीश- अबे अकल क्या तूने बेच दी है.. अगर तू उसके हाथ पैर तोड़ेगा तो शिप्रा को उससे और सिम्पथी हो जायेगी और वो मुझे ही गलत समझेगी...

सागर- बात तो तेरी सही है, तो तू ही बता क्या करना है....

सतीश- यार अभी तो हम कुछ नहीं कर सकते सिवाए उसपर नजर रखने के, हमे बस ये ध्यान रखना है की प्रिंस उसके साथ कोई गलत हरकत न करे...

सागर- ठीक है पर ऐसा हम कब तक करेंगे....

सतीश- जब तक की मे उसके सामने प्रिंस की असलियत ना ला दु... या फिर वो उससे खुद बा खुद दूर न हो जाए...

सागर- चल ठीक है... पर अगर उसने कुछ गलत करने की कोशिश की शिप्रा के साथ तो मे उसे नहीं छोडूंगा....

सतीश- हमं... तब अगर तूने कुछ नहि करा तो मे तुझे नहि छोडूंगा....

ईधर सतीश और सागर अपनी आगे की योजनओं के बारे मे बातें कर रहे थे उधर दूसरी तरफ सतीश के घर मे शिप्रा जोकि बेड पर अपने आँसु बहाते हुए ही नींद के आग़ोश मे चलि गई थि, अपनी नींद से जागति है वो अपने बेड से उठकर वाशरूम मे जाकर फ्रेश होती है और फिर अपने रूम से निकल कर सतीश के रूम की तरफ बढ़ती है....

शिप्रा मन मे सोचते हुये- मुझे भाई से अपनी ग़लती के लिए माफ़ी माँगनी ही होगी कुछ भी हो मुझे उनसे इस तरह बेहेव नहि करना चाहिए था, पर मे उन्हें मना कर ही रहुंगी.....

यहि सब सोचते हुये.जब वो सतीश के रूम तक पहुचती है तो देखति है की रूम का गेट खुला हुआ है और रूम मे कोई नहि है.....

शिप्रा- भाई जरूर निचे होंगे...

ओर वो तेजी मे सीढियाँ उतरते हुए निचे आती है तो देखति है की उसकी माँ सोनाली सोफ़े पर बैठे टीवी देख रही थी....

शिप्रा अपनी माँ के गले मे पीछे से हाथ डालते हुए उनके गाल पर किस करती है....

सोनाली प्यार से उसके बालों मे हाथ फिराते हुये- उठ गई महारानी तुम्...

शिप्रा अपनी माँ के पास आकर बैठते हुये- माँ भाई कहा है कही नजर नहि आ रहा?

सोनाली- वो तो कॉलेज से आने के १५ मीनट. बाद ही निकल गया था खाना भी नहि खाया.... वैसे खाना तो तूने भी नहि खाया.. मैंने तुझे कितनी आवाज लगाई पर तू गेट अंदर से लॉक करके सो गई थी.....

शिप्रा- माँ भाई बता कर गए है की वो कहा गये है?

सोनाली- तू तो जानती है की वो कहा मुझे कुछ बताता है हमेशा अपने मन की करता है.. कहकर गया है की दोस्त के यहाँ जा रहा है शाम को आयेगा.... पता नहि कुछ खाया भी होगा की नहि इस लड़के ने, फ़ोन भी तो उसका स्विच ऑफ जा रहा है...

शिप्रा अपनी माँ की बात से और परेशान हो जाती है... क्युकी वो जानती थी की सतीश उससे नाराज होने के कारन ही घर से बाहर चला गया है...

सोनाली- मे खाना लगा देती हु तू कुछ खा ले, सुबह से तूने भी कुछ नहि खाया...

पर शिप्रा ने तो जैसे कुछ सुना ही न हो और वो अपनी सोचो मे गुम अपने कमरे की तरफ बढ़ जाती है...

सोनाली उसे पीछे से आवाज लगाती रह जाती है, पर वो नहि सुनति...

सोनाली- क्या हो गया है आज दोनों को...

 
शिप्रा अपने रूम मे पहुच कर सतीश का नम्बर मिलाती है पर वो स्विच ऑफ था, फ़ोन रखते हुये- पता नहि कहा गया होगा भाई... सुबह से भूखा है मेरी वजह से.... पता नहि कोण से दोस्त के यहाँ गया होगा....

ऎसे ही काफी देर तक वो अपने विचारों मे खो जाती है फिर अचानक उसकी आँखों मे एक चमक आ जाती है और वो तुरंत अपना मोबाइल उठा कर एक नम्बर. डायल करती है...

दूसरी तरफ सागर के घर मे भारती अपने रूम मे बैठि हुई थी और वो अभी भी सतीश और सागर के सिगरेट पिने से ग़ुस्से मे थी...

तभी उसका मोबाइल बजने लगता है वो जब उसे उठा कर देखति है तो उसके चेहरे पर एक स्माइल आ जाती है... और वो फ़ोन पिक करके

भारती- तो इतने समय बाद राजकुमारी को इस गरीब की याद आ ही गयी...

दूसरी तरफ से- आरे यार तुझे भूलि ही कब थी जोकि तुझे याद करति... वैसे एक बात बताओ महारानी जी याद तो आप को भी नहि आई इस नाचीज की...

ये फ़ोन किसी और का नहि बल्कि शिप्रा का ही था, शिप्रा और भारती काफी अछि फ्रेंड थी और शिप्रा जानती थी की सतीश और भारती एक दूसरे को प्यार करते है और उसका बेस्ट फ्रंड सागर भारती का ही भाई है इस्लिये वो ज्यादातर इन्ही के यहां आता था क्युकी इस तरह वो अपने बेस्ट फ्रंड से और अपने प्यार दोनों से मिल लेता था, और उसका गेस सही भी था...

भारती उसकी बात सुनकर हस्ते हुये- दोनों भाई बहन एक ही डायलॉग मारते है.... इसके अलावा कोई और डायलॉग नहि आता क्या?

शिप्रा- अरे डार्लिंग आते तो बहुत है पर हर बन्दे के हिसाब से डायलॉग मारे जाते है ताकि उस बन्दे को अपनी बातो से झांसे मे लिया जा सके... अब तू ही देख मेरा भाई भी तुझे यहि डायलॉग मारके पटाता है और मे भी और तू एक ही डायलॉग से दो लोगो के झांसे मे आ गयी....

भारती- मैं किसी के झांसे मे नहि आई और तू यहां होती तो तुझे ये बात अच्छे से समझ आ जाती जब मेरा हाथ की उँगलियाँ तेरे गालो की शोभा बढाती...

शिप्रा- बड़ी आई मेरे गालो की शोभा बढ़ाने वाली.... मैं क्या फिर तुझे छोड़ देती...

ओर फिर दोनों हस् देती है

भारती- वैसे आज कैसे याद आ गई हमारी...

शिप्रा- क्यों ऐसे ही याद नहि कर सकते क्या?

भारती- कर तो सकती है पर तेरी आवाज से से चिंता झलक रही है जल्दी बता क्या बात है

शिप्रा- वो यार मैंने ये पुछने के लिए फ़ोन किया था की भाई तेरे यहाँ है क्या?

भारती- हाँ है तो, क्यों क्या हुआ?

ओर फिर शिप्रा उसे सारी बात बताती है....

शिप्रा- ... और फिर वो बिना कुछ खाए घर से निकल आये इस्लिये थोड़ी टेंशन थी की पता नहि उन्होंने कुछ खाया भी होगा की नहि...

भारती- अब तुझे टेंशन लेने की कोई जरुरत नहि है और थँक्स यार मुझे बताने के लिए की सतीश ने कुछ खाया नहि है....

शिप्रा- थँक्स तो मुझे बोलना चाहिए तुझसे की तूने मेरी प्रोबलम सोल्वे कर दि...

भारती- चल ठीक है मे थोड़ी देर मे तुझसे बात करती है....

ओर फिर भारती कुछ सोच्ने लगती है, उसके माथे पर शिकन थि, जिससे पता चल रहा था की वो किसी बात से परेशान है, फिर वो अपने सर को झटका देकर किचन की तरफ बढ़ जाती है....

दूसरी तरफ शिप्रा भी अब थोड़ा टेंशन फ्री हो गई थी... क्युकी उसे पता था की जितनी केयर वो अपने भाई की करती है उतनी केयर ही भारती करती है और वहां पर सतीश का मूड भी फ्रेश हो जायेगा...

थोड़ी टेंशन कम होते ही अब शिप्रा को भूक लगने लगी थी वो खाना खाने निचे चलि जाती है...

 
इस तरफ शिप्रा भी अब थोड़ा टेंशन फ्री हो गई थी... क्युकी उसे पता था की जितनी केयर वो अपने भाई की करती है उतनी केयर ही भारती करती है और वहां पर सतीश का मूड भी फ्रेश हो जायेगा...

थोड़ी टेंशन कम होते ही अब शिप्रा को भूक लगने लगी थी वो खाना खाने निचे चलि जाती है...

इधर सतीश को भूक तो बहुत तेज की लगी थी पर वो करता भी क्या आज फर्स्ट टाइम था जब वो सागर से कुछ कहने मे झिजक रहा था...

ओर सागर को लग रहा था की उसे शिप्रा की चिंता सता रही है... दोनों ही अब नॉर्मली बात चीत कर रहे थे...

तभी भारती सागर को आवाज लगाती है... और सागर सतीश से वेट करने को कहकर निचे आ जाता है...

सागर की फट रही थी वो सोच रहा था की भारती ने उसकी क्लास लेने के लिए उसे बुलाया है....

ओ भारती के पास पहुचता है तो भारती उसे घुरने लगती है, सागर अपनी नजरे चुराने लगता है..

भारती- तुम्हे कुछ पता भी है की नहि,

सागर- क्या?

भारती-यही की तुम्हारा दोस्त आज सुबह से भूखा है, और तुमने उससे खाने को पूछा भी नही...

सागर- अब मुझे कैसे पता चलता उसे कुछ चाहिए होता है तो वो खुद ही मांग लेता.. पर तू इतने यकीन से कैसे कह सकती है...

भारती- शिप्रा ने बताया मुझे फ़ोन करके... मे खाना लगा देती हु तुम सतीश को बुला लो....

सागर अपने कमरे मे जाकर पहले तो सतीश को सुनाता है क्युकी उसने सागर से ये छुपाया की वो आज सुबह से भूखा है.... और फिर उसे लेकर डायनिंग टेबल पर आकर बैठ जाता है....

सतीश के बैठते ही भारती उसे खाना लगाती है और वो भारती को ही देख रहा होता है, उसे भारती की आँखों मे ग़ुस्से की जगह अपने लिये प्यार और केयर के मिले जुले भाव नजर आ रहे थे...

सतीश के जिद करने पर सागर और भारती न चाहते हुए भी खाना खाने बैठ जाते है...

खाना ख़तम करके सतीश और सागर अपने हैंड वाश करने चले जाते है और भारती बर्तन समेट्ने लगती है....

पहले भारती बर्तन साफ़ करने के बाद सागर के पास आकर बैठ जाती है और फिर तीनो हसि मजाक करने लगते है और अपने बचपन की यादो को ताजा करने लगते है...

टाइम धीरे धीरे कटता जाता है और कब ८ बज जाते है पता ही नहि चलता...

भारती- सतीश अब काफी लेट हो गया है मेरे ख्याल से अब तुम्हे घर जाना चाहिये....

सागर कुछ बोलने को होता है पर भारती उसे इशारे से चुप रहने को कहती है... अब सतीश का मूड भी फ्रेश हो गया था और अब वो अच्छे से सोचने समझने लायक हो गया था, ग़ुस्से ने तो जैसे उसके दिमाग को जाम कर दिया था...

ओर वो जानता था की भारती उससे उसके भलाई के लिए कह रही थी.... वो जाने के लिए खड़ा हो जाता है....

भारती- और सतीश अपना मोबाइल ऑन कर लेना...

सतीश भारती की तरफ देखता है और फिर एक स्माइल के साथ अपने मोबाइल को निकालकर ऑन करता है और फिर उसे अपनी जेब के सुपुर्द करता है...

अब सतीश भारती और सागर को फिर मिलने का कहकर अपने घर की तरफ निकल देता है...

तीस मिनट्स मे सतीश अपने घर पहुच जाता है, बाइक कड़ी करके वो डोर बेल्ल बजाता है... डोर शिप्रा ने ओपन किया था...

 
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