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Incest आग्याकारी माँ

जब मैं आंटी के होंठों से अलग हटा तो मैंने देखा की उनके चहेरे पर एक अलग ही सुकून था.

उनके चेहरे पर तो सुकून आ गया था लेकिन मेरे अंदर तो एक तूफ़ान अभी बाकी ही था तो मैं आंटी की उसी हालत में उनकी दोनों टांगों के बीच में आया और पूरा तना हुआ लंड आंटी की गीली चूत में एक झटके में ही डाल दिया. इस बार आंटी के मुँह से एक उफ़ तक नहीं निकली और जब मैंने धक्के लगाना शुरू किए तो आंटी बोली- थोड़ी देर धीरे धीरे हिल ताकि मैं भी तैयार हो सकूं !

मैंने वही किया.

मुझे लगा अब आंटी को बाँध कर रखने की वजह खत्म हो चुकी थी तो मैंने लंड चूत में डाले डाले ही बैठ कर सबसे पहले आंटी के दोनों पैरों को खोल दिया उसके बाद आंटी के ऊपर लेटते हुए उनके दोनों हाथों को भी खोल दिया. जैसे ही आंटी के हाथ पैर खुले, आंटी ने मुझे अपने हाथ-पैरों से जकड़ लिया और कस कर बाहों में भर लिया.

आंटी भी फिर से तैयार हो चुकी थी चुदने के लिए और मैं तो पहले से ही तैयार था चोदने के लिए तो मैंने भी आंटी को एक हाथ से उनकी कमर के थोड़ा ऊपर और दूसरे हाथ से कंधे को लपेटते हुए आंटी को धक्का चोद चुदाई करने लगा. मेरे हर धक्के पर चट चट की आवाज आ रही थी आंटी के मुँह से आह आह्हह्ह की आवाजें निकल रही थी मानो मेरी चुदाई और आंटी की आहों में एक लयबद्ध प्रतियोगिता चल रही हो.

मैं ऊपर से आंटी को चोद रहा था और नीचे से आंटी भी अपनी चूत को चुदवाने के लिए मुझे कस कर जकड़े हुए थी. कभी मैं उनके होंठों को चूमता और कभी उनके स्तनों को पीने लगता.

हम दोनों में ये धक्कों का तूफ़ान चलता ही रहा और एक दूसरे में खोते रहे, इसी बीच आंटी एक बार फिर से झड़ने लगी और झड़ने के दौरान उन्होंने मुझे कस कर पकड़ लिया.

जब आंटी झड़ चुकी तो मुझे लगा कि अब आंटी फिर से नहीं चुद पाएँगी, मैं रुक गया. लेकिन मैं गलत था और आंटी ने फिर से मेरे होंठों को चूमा और मुझे इशारा किया, आंटी के इशारे की देर थी कि मैंने आंटी को फिर से चोदना शुरू कर दिया.

मैंने कुछ देर चोदा और उसके बाद मुझे आंटी को अलग तरह से चोदने का मन हुआ तो मैंने आंटी की चूत से लंड निकाला और उन्हें पलट कर घोड़ी बन जाने को कहा.

मेरे कहने भर की देर थी की आंटी ने घोड़ी बन कर अपनी चूत को मेरे सामने कर दिया, मैंने खड़े हो कर एक ही झटके में उनकी चूत में मेरा लंड अंदर तक घुसा दिया.

उसके बाद मैं आंटी को फिर से चटाचट चोदने लगा और बीच बीच में मैं हाथ से आंटी की चूत के दाने को भी रगड़ देता था जिससे आंटी अचानक ही सिहर उठती थी.

आंटी को घोड़ी बना कर चोदते हुए मैं कभी आंटी की पीठ को काट लेता था और कभी उनके चूतड़ों पर हल्की थपकियाँ लगा देता था जिससे आंटी को बड़ा मजा आ रहा था और मुझे भी.

हमें चुदाई करते हुए काफी देर हो चुकी थी और मुझे लग रहा था कि मैं अब ज्यादा देर नहीं टिक पाऊँगा तो मैंने आंटी को फिर से पीठ के बल लेटाया और उनके होंठों को मेरे होंठों में भरा, लंड को उनकी चूत में और कस कस कर धक्के लगाते हुए आंटी को चोदने लगा.

मैंने कुछ ही धक्के लगाए होंगे कि आंटी झड़ गई और वो पूरी तरह से झड़ती, उससे पहले ही मैं भी झड़ गया, मैंने उनके होंठों को चूसते हुए मेरा सारा वीर्य उनकी चूत में ही भर दिया और मैं उनके ऊपर ही लेट गया.

मैं कुछ देर उसी हालत में लेटा रहा और उन्होंने मुझे लिटाये रखा, थोड़ी देर बाद हम दोनों एक दूसरे से अलग हुए तो आंटी बोली- अच्छा बदला निकाला तुमने मुझसे?

पर मेरी बात करने की हालत नहीं थी तो मैंने कोई जवाब नहीं दिया और सिर्फ लेटा ही रहा.

थोड़ी देर बाद आंटी उठ कर जाने लगी तो मैंने उन्हें वहीं पकड़ कर अपने पास ही लेटा लिया. मैंने घड़ी देखी तो नौ बजने में सिर्फ दस मिनट बाकी थे.

आंटी बोली- सिर्फ बिस्तर पर ही रहने का इरादा है क्या? भूख नहीं लगी क्या तुम्हें? खाना नहीं खाओगे?

मैंने कहा- मैं ऑर्डर दे चुका हूँ, आधे घंटे में आ जायेगा, तब तक आप यही रहो.

और मैंने कम्बल ओढ़ कर उनको मेरे पास ही चिपका कर लेटा लिया.

हम दोनों ही थक चुके थे तो आंटी भी लेट गई और मुझे कब नींद लगी पता ही नहीं चला.
 
मेरी तब नींद खुली जब आंटी मुझे खाने के लिए बुलाने आई, मैं समझ गया कि रेस्तराँ से खाना आ गया है, आंटी ने खाना लगा लिया है.

मैंने कपड़े पहने, आया तो देखा कि आंटी ने संतरे का जूस भी बना लिया था जो मुझे बहुत पसंद है.

हमने खाना खाया, मैं कमरे में आकर टीवी देखने लगा और आंटी भी मेरे पास ही आकर मुझ से चिपक कर लेट गई.

खाना मैंने ज्यादा खा लिया था और दिन भर में कई बार होने के साथ साथ थोड़ी देर पहले ही इतना सब किया था तो मैं थोड़ा आराम चाहता था तो मैं टीवी देखने लगा और आंटी मुझ से चिपक कर लेटी रही. इस बार नींद आंटी को लग चुकी थी और मैं जाग ही रहा था लेकिन मेरा पेट और मन अभी के लिए भर चुका था तो मैंने भी कुछ करने की सोचने के बजाय थोड़ी देर टीवी देखा और फिर आंटी को चिपका कर उनको बाँहों में जकड़ कर सो गया.

सुबह कब हुई पता ही नहीं चला और सुबह जब आंटी ने मुझे चाय के लिए जगाया तो पता चला कि सुबह के आठ बज गए हैं.

रात भर की अच्छी नींद के बाद मैं पूरी तरह से तरोताज़ा हो चुका था तो मैंने आंटी को मेरे पास ही बिस्तर में खींच लिया जैसे आंटी आंटी ना होकर मेरी बीवी हो, और उन्हें नीचे पटक कर कम्बल में लपेटते हुए उनके ऊपर आ गया.

आंटी बोली- क्या इरादे हैं जनाब? अभी तो जागे हो, रात में तो कुछ किया नहीं अब सुबह सुबह शुरू हो गए.

मैंने कहा- रात को पहले मैं सोया था या आप? और जब आप सो गई थी तो कैसे करता?

मेरी बात सुन कर बोली- रात में कुछ करने की हालात नहीं रह गई थी यार ! चूत तो एकदम सूज गई है तुम्हारी मार के कारण और दर्द अलग कर रही है, अभी भी मेरी हालत नहीं है और चुदवाने की.

मैंने शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा- मत चुदवाओ, वैसे भी अब मेरा मन तुम्हें चोदने का है भी नहीं !

आंटी मेरी बात समझ गई थी और बोली- नहीं मैंने आज तक गाण्ड नहीं मरवाई है और मरवाऊँगी भी नहीं. बहुद दर्द होगा.

उनकी बात सुन कर मैंने कहा- जब मरवाई ही नहीं है तो पता कैसे है कि दर्द होता है या मजा आता है? और देखो आप नाटक करो या प्यार से मरवा लो, गाण्ड तो मैं आपकी मार कर रहूँगा, यह आप भी जानती हो कि मैं कितना कमीना हूँ.

यह कहते हुए मैंने आंटी को बैठा कर उनका गाऊन एक झटके में निकाल दिया, और साथ साथ अपने कपड़े भी निकाल दिए.

अब तक आंटी भी गर्म हो चुकी थी और वो भी गाण्ड मरवाने के लिए पहले से ही शायद तैयार थी तो उन्होंने कहा- अच्छा ठीक है.

मैंने उनकी ड्रेसिंग टेबल से तेल की शीशी उठाई, लंड पर अच्छे से तेल लगाया और थोड़ा तेल हाथ में लेकर आंटी को उल्टा करके उनकी चिकनी गाण्ड पर भी मसल दिया और थोड़ा तेल आंटी की गाण्ड को चौड़ा कर के उनके छेद में भी डाल दिया.

जैसे ही तेल आंटी के छेद में गया आंटी कुलबुलाने लगी और बोली- रहने दे ना, चूत को ही चोद ले, गाण्ड को छोड़ दे.

पर उनकी छोड़ दे में भी चोद दे ही था.

मैंने लंड को अच्छे से तेल लगाने के बाद आंटी को घोड़ी बना कर उनकी गाण्ड पर रखा और जैसे ही धक्का मारा आंटी आगे खसक गई.

मैंने एक बार और कोशिश की और इस बार भी नतीजा वही निकला.

वैसे इस बात की मुझे पहले ही उम्मीद थी क्योंकि पहली बार गाण्ड मरवाने पर महिलाएँ यही करती हैं. अत: मैंने आंटी को कहा- सीधे ही लेट जाओ, इससे आंटी को एक बारगी लगा कि मैं अंदर नहीं डाल पा रहा हूँ इसलिए अब चूत में ही डालने वाला हूँ लेकिन यह आंटी का भ्रम ही था.

जब आंटी सीधी लेट गई तो मैंने उनकी दोनों टांगों को पूरी तरह से हवा में उठा दिया जिससे उनकी गाण्ड का छेद बहुत अच्छे से खुल गया और फिर थोड़ा सा हाथों से और खोल कर मैंने मेरे लंड को उनकी गाण्ड पर रखा और एक झटके में मेरा सुपारा उनकी गाण्ड के अंदर सरका दिया.

जैसे ही सुपारा अंदर गया, आंटी तड़पने लगी, कहने लगी- निकाल ले इसे, बहुत जलन हो रही है, मेरी गाण्ड फट गई है, मैं मर जाऊँगी.

लेकिन ये तो हर औरत का ही कहना होता है पहली बार चुदवाने या गाण्ड मरवाने के समय तो मैंने एक झटका और मार कर मेरा आधा लंड अंदर घुसा दिया और जब तक आंटी कुछ कहती मैंने उनके दर्द की परवाह किये बिना पूरा लंड आंटी की गाण्ड के अंदर घुसा दिया.

आंटी दर्द में तड़पती रही और मैं उस दर्द के मजे लेता रहा, मुझे बहुत मजा आता है औरतों के इस दर्द को देखने में, यूँ भी सिर्फ थोड़ी देर की बात होती है उसके बाद तो खुद ही इस दर्द के लिए कहती रहती हैं.

आंटी थोड़ी देर दर्द में तड़पती रही और कहती रही- निकाल ले !

और मैं उनके दर्द में भी उनकी गाण्ड को धीरे धीरे धक्के मारता रहा, मारता रहा.

उनकी गाण्ड बहुत कसी हुई थी मैं धीरे धीरे ही आंटी की गाण्ड मार रहा था और गाण्डमारने के साथ ही साथ उनकी चूत को भी सहलाते जा रहा था.

मैंने थोड़ी देर आंटी की गाण्ड इसी तरह से मारी थी कि आंटी को भी मजा आने लगा और बोली- थोड़ा जोर से करो ना !

मैं समझ गया था कि अब मैं जो चाहूँ वो कर सकता हूँ तो मैंने आंटी की गाण्ड के नीचे दो तकिये रखे और उनकी गाण्ड को ऊँचा कर दिया.

उसके बाद मैंने जोर जोर से आंटी की गाण्ड मारना शुरू कर दिया और चूंकि मैं आंटी को सीधा लेटा कर ही उनकी गाण्ड मार रहा था तो मेरे सारे धक्के उनकी चूत पर भी टकरा ही रहे थे.

मैं आंटी की गाण्ड मार रहा था और इससे चट चट की आवाज निकल रही थी दूसरी तरफ आंटी के मुँह से भी आह आह की आवाजे निकलती ही जा रही थी. मुझे लगा कि अब मैं झड़ने वाला ही हूँ तभी आंटी आनन्द की अधिकता से झड़ गई और उसके बाद भी मैं लगातार आंटी की गांड मारता रहा अब आंटी के गांड में मेरा लंड आराम से जा रहा था फिर मैंने आंटी को घोड़ी बना दिया और उनके गांड़ में लंड एक ही शॉट में डाल दिया आंटी की चीख निकल गयी आंटी के दोनों बॉब्स हवा में झूल रहे थे उन्हें हाथ मे पकड़कर जोर जोरसे शॉट मारने लगा साथ मे उनके बॉब्स भी मसलता जा रहा था क्या मजा आ रहा था लगातार आधे घंटे तक जाम कर उनकी गांड मारी साथ साथ उनकी चुत में उंगली कर रहा था जिससे वह फिर झड़ गयी साथ मैं भी झड़ गया और मैंने मेरा सारा वीर्य इस बार आंटी की गाण्ड में भर दिया.

अब हम दोनों की सांसें धौंकनी की तरह चल रही थी और जब सांसों का तूफ़ान थोड़ा थमा तब हम दोनों एक दूसरे से अलग हुए.

अलग होने के बाद मैंने चाय पी, नहाया और जब ईशा आ गई तो मेरे कपड़े पहन कर मैं घर से बाहर चला गया ईशा को आंटी की हालत का जायजा लेने के लिए छोड़ कर.
 
कॉलेज से आने के बाद मैं फ्रेश होकर टीवी देखने बैठा था माँ किचन में खाना बना रही थी.थोड़ि देर मे ही शिप्रा आ जाती है, उसने एक वाइट टी-शर्ट पहनी हुई और निचे काप्री पहनी हुई थी ब्लू कलर की.... वो टी-शर्ट उसके उरोजों पर काफी टाइट थी जिससे उसके उरोजों का आकार साफ़ पता चल रहा था, और तभी मेरी नजर उसके उरोजों पर टिक जाती है. उस टी-शर्ट मे से उसके निप्पल्स साफ़ झलक रहे थे.... शायद उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी और ये सोचते ही मेरा लंड शॉर्ट मे अपना सर उठाने लगता है....

मेरी नज़रे तो जैसे उसके वक्ष-स्थल पर ही जम गई थी.... क्या चूचियां थी उसकी ३२ साइज की एकदम टाइट, ऐसा लग रहा था जैसे वो टी-शर्ट को फाड़ कर बाहर निकल आयेंगी..... मेरी आँखें उसे देख तो टी-शर्ट मेसे देख रही थी. पर मेरी इमेजिनेशन मे उसकी चूचियां बिलकुल नंगी मेरी आँखों के सामने थी..... में उसे बिना पलक झपकाये देखे जा रहा था, और में उसकी चूचियां देखने मे इतना खो गया की में ये भी भूल गया की में अपनी छोटी बहन की चूचियों को ही अपनी खा जाने वाली आँखों से देख रहा हु.....

शिप्रा ने भी सतीश को अपनी चूचियों को घुरते हुए देख लिया, और उसका सफ़ेद चेहरा शर्म से लाल हो गया....

शिप्रा अपने मन मैं – “हाय कैसे घुर घुर कर देख रहे हैं भैया मेरी चूचियों को, ऐसा लग रहा है जैसे की अभी अपने हाथो से पकड़ कर अभी मसल देंगे..... कैसे खा जाने वाली नजरो से देख रहे अपनी ही बहन की चूचियों को जरा सी शर्म नहीं है इन्हें....

ओर ये सोचते ही उसके निप्पल तन जाते हैं और टी-शर्ट मेसे उनका उभार साफ़ दिखाइ दे रहा था, शिप्रा की आँखों मे गुलाबी डोरे आ गये थे....

शिप्रा सतीश का ध्यान तोड़ने के लिए- “ऐसे क्या घुर रहे हो भैय्या....?

उसकी बात से सतीश एकदम से होश मे आता है और जब शिप्रा की तरफ देखता है. तो वो मुस्कुरा रही थी....

शिप्रा- “बताया नहीं भैया आपने....

सतीश- “क्या..क्या नहीं बताया मैने”?

शिप्रा- “यही की आप घुर घुर कर क्या देख रहे थे...?

सतीश एकदम से झेप जाता है, उसकी समझ आ जाता है की शिप्रा ने उसे अपनी चूचियों को घुरता हुआ देख लिया है....

सतीश को कुछ सूझ ही नहीं रहा था, वो हड़बड़ाहट मे- “ओ...वो में तेरे टी-शर्ट पर बने डिज़ाइन को देख रहा था काफी अच्छी डिज़ाइन है...

शिप्रा- “कोण सी डिज़ाइन भैय्या इस पर तो कोई डिज़ाइन नहीं है.....?

अब तो सतीश के दिमाग का फ्यूज ही उड़ जाता है. वो उसकी टी-शर्ट को देखता है. उसपर वाक़ई मे कोई डिज़ाइन नहीं था.... वो शिप्रा की तरफ देखता है जोकि मुस्कुराती हुई उसी को देख रही थि, सतीश की चोरी पकड़ी गई थी.... वो अपनी नजरे चुरा लेता है और टीवी देखने लगता है....

शिप्रा उसकी इस कंडीशन का मजा ले रही थि.

सतीश अपने मन मे- “ये क्या कर दिया मैने, पता नहीं क्या सोच रही होगी शिप्रा मेरे बारे मे....?

तभी उन्हें सोनाली की आवाज सुनाई देती है वो उन्हें खाने के लिए बुला रही थि, सभी लोग साथ बैठकर खाना खाते है, खाना खाते समय भी शिप्रा सतीश को ही देख रही थी जो उसके सामने सोनाली के साथ बैठा हुआ था और सतीश उससे नजरे बचा कर चुपचाप खाना खाता है...

खाना ख़तम करके सतीश अपने कमरे मे चला जाता है, क्युकी रात और दिन मे करी हुई मस्ती से उसके शरीर मे थकन हो गई थी और अब वो थोड़ा आराम करना चाह रहा था....

अभी उसे अपने बेड पर लेटे थोड़ा ही टाइम हुआ था की उसके डोर पर नॉक होता है.... वो उठ कर गेट खोलता है, बाहर शिप्रा खड़ी हुई थी...

इससे पहले में कुछ कहता वो मुझे धकेलते हुये अंदर घुस आती है और जाकर बेड पर बैठ जाती है....

मै गेट बंद करके बेड की तरफ बढ जाता हूँ मेरे दिमाग मे बहोत से विचार आ रहे थे... में अपनी सोचो को दरकिनार करते हुए बेड पर आकर शिप्रा के पास बैठ जाता हु....

थोड़ि देर तक हम दोनों ही कुछ नहीं बोलते शायद दोनों ही बोलने के लिए शब्दो को ढूंढ रहे थे, एक ख़ामोशी सी छायी हुई थी रूम में..

सतीश ख़ामोशी को तोड़ते हुये- “तू किसी काम से आई थी क्या?

शिप्रा- “क्यों में किसी काम से ही आ सकती हु, बिना काम के नहीं आ सकती तेरे पास क्या?

सतीश- “नहीं ऐसी बात नहीं है, तू तो जब चाहे आ सकती है... वो तो मैंने ऐसे ही पूछ लिया की शायद तुझे कोई काम हो....?

थोड़ि देर तक फिर से रूम मे ख़ामोशी छा जाती है... और सतीश बेड पर जाकर लेट जाता है...

शिप्रा भी बेड पर उसके पास लेट जाती है, दोनों पीठ के बल लेते हुए थे और छत को निहार रहे थे....

शिप्रा- “भाई...

सतीश- “हूं...

शिप्रा- “भाई... आपने बताया नही, आप उस समय मुझे ऐसे क्यों घुर रहे थे...?

सतीश उसके इस सवाल से सकपका जाता है...

ओर वो करवट बदल कर उसकी तरफ मुह करके लेट जाता है, जिससे उसकी आँखों के सामने फिर से उसके चूचियां आ जाती है, उस टाइट टी-शर्ट मे से उसके उभार काफी तन गये थे...

ओर सतीश भी अब इस खेल को और ज्यादा नहीं खेलना चाहता था..... वो शिप्रा पर ट्राय करने की सोचते हुये...

सतीश- “तुझे नहीं पता की में क्या देख रहा था....?
 
शिप्रा को सतीश से ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी वो भी सतीश की तरफ करवट करके लेट जाती है, अब दोनों के मुह आमने सामने थे और दोनों मे बस ५ इंच का गैप था...

शिप्रा- “मुझे नहीं पता तभी तो में आपसे पूछ रही हु...?

सतीश शिप्रा की आँखों मे देखते हुये- “में तेरी इन मस्त चूचियों को देख रहा था....

शिप्रा- “क्यों आज से पहले किसी के बॉब्स नहीं देखे क्या?

सतीश- “देखे तो बहोत हैं पर इतने वेल शेप्ड और सुडौल मम्मे आज तक नहीं देखे...

शिप्रा अपने मम्मों की तारीफ सुनकर खुश हो जाती है, पर वो अपनी ख़ुशी को जाहिर नहीं करति.....

शिप्रा- “क्या भाईया अपनी बहन की झूटी तारीफ करते तुम्हे शर्म नहीं आती...?

सतीश- “में सच कह रहा हूँ कसम से तुम्हारी चूचियां बहोत सुन्दर है....

शिप्रा- “अच्छा तो आज ही तुम्हे इनकी सुंदरता क्यों दिखाइ दी, आज से पहले भी तो में आपके सामने ही रहती थि, तब तो कभी आपने इनकी तरफ ध्यान नहीं दिया....?

सतीश- “वहि तो आज से पहले मैंने कभी इनपर ध्यान नहीं दिया पर जब आज ध्यान दिया तो पता चला की मेरी छोटी बहन इतना मस्त माल हो गई है.... अब तो रोज ही इन पर ध्यान देना पडेगा...

शिप्रा सतीश के छाती पर हलके से घूँसा मारते हुये- “क्या भाईया आपको बिलकुल भी शर्म नहीं आती अपनी बहन को माल कहते हुये...?

सतीश उसकी कमर मे हाथ दाल कर उसको अपनी तरफ खिंच लेता है और अपनी छाती से लगा लेता है, शिप्रा के दूध अब सतीश की छाती मे घुस गए थे... और सतीश अब अपना हाथ उसकी पीठ पर चलाने लगता है....

सतीश- “अब तुझ जैसे माल को माल नहीं कहु तो क्या कहु....?

शिप्रा- “आअह्ह्ह्हह भाईया क्या कर रहे हो.....? छोड़ो मुझे....

शिप्रा अपने मुह से तो सतीश को छोड़ने को कह रही थी पर वो उससे अलग होने की कोई कोशिश नहीं करति....

सतीश शिप्रा की गरम साँसों को अपने चेहरे पर महसूश कर रहा था... उसे तो यकीन ही नहीं हो रहा था की उसकी इतनी सेक्सी बहन इतनी जल्दी उसकी बाँहों मे आ जायेगी.....

अब सतीश का हाथ शिप्रा के चूतडो पर आ जाता है और वो काप्री के ऊपर से उसकी गांड को मसलने लगता है....

शिप्रा तो उसकी बाँहों मे जल बिन मछलि की तरह तड़प रही थी....

सतीश का खड़ा लंड शिप्रा के पेट् पर टच हो रहा था और अपने भाई के लंड को महसूश करके शिप्रा की साँसे और तेज हो जाती है... उसकी चुत से निकल रहे रस ने उसकी पेन्टी को पूरा भिगा दिया था, शिप्रा की आँखें मस्ती मे बंद हो जाती है....

अब सतीश अपने होंठ आगे बढा कर शिप्रा के तपते होंठो पर रख देता है, और उसके गुलाब की पंखडियों से रसीले होंठो को चुस्ने लगता है....

अपणे होंठो पर सतीश के होंठो को फील करते ही शिप्रा की आँखे चौड़ी हो जाती है....

ओर फिर उसे जैसे होश आता है और वो सतीश को धक्का देकर उसे अपने से अलग कर देती है और बेड से उठ कर गेट की तरफ भाग जाती है....

सतीश की तो कुछ समझ ही नहि आता की एकदम से शिप्रा को क्या हुआ और वो अचानक से भाग क्यों गयी.... कही वो नाराज तो नहि हो गयी?

गेट पर पहुच कर शिप्रा पीछे मुडती है.

शिप्रा मुस्कुराते हुये- “आप ना बहोत नॉटी हो गये हो भइया...?

ओर इतना कह कर शिप्रा गेट बंद करके बाहर चलि जाती है....

ओर सतीश एक सुकून की सांस लेता है क्युकी शिप्रा उससे गुस्सा होकर नहीं गई थी....

सतीश अपने खड़े लंड को मसलने लगता है,

सतीश- “चिड़िया ने दाना चुग लिया है, बेटा बस थोड़ा नखरा कर रही है, पर अब जल्द ही तू उसकी चुत की सैर करेगा...
 
सतीश एक सुकून की सांस लेता है क्युकी शिप्रा उससे गुस्सा होकर नहीं गई थी....

सतीश अपने खड़े लंड को मसलने लगता है,

सतीश- “चिड़िया ने दाना चुग लिया है, बेटा बस थोड़ा नखरा कर रही है, पर अब जल्द ही तू उसकी चुत की सैर करेगा...

जबकि दूसरी तरफ शिप्रा अपने रूम मे आकर गेट लॉक करके एक एक करके अपने सारे कपडे अपने शरीर से अलग करके नंगी हो जाती है....

उसका संगेमरमर सा बदन अब रोशनी मे चमकने लगा था, उसका खूबसूरत चेहरा उसके निचे सुराहि दार गर्दन और उसकी सुडौल चूचियां जिन पर पिंक निप्पल्स थे जोकि पुरे तने हुये थे और निचे चिकना सपाट पेट, गहरी नाभि, पतली सी कमर और फिर निचे उसका मेन पार्ट यानी की उसकी चुत एकदम क्लीन और चिकनी उसकी गुलाबी चुत की फांके आपस मे चिपटी हुई थी जोकि चीख चीख कर इस बात का क़बूल कर रही थी की वो अभी तक अनचुदी है....

ओर निचे उसकी चिकनी मांसल जाँघे और उसकी भारी मख़मली चिकनी गांड... कुल मिला कर वो एकदम पटाखा थी.... एक सेक्सी माल जिसे पाने का सपना हर जवान लड़का और हर उम्र का आदमी देखता है....

अब शिप्रा नंगी होकर बेड पर लेट जाती है, वो अपने ख्यालो मे सतीश और उसकी हरक़तों के बारे मे ही सोच रही थी....

शिप्रा अपने एक हाथ से अपना दूध पकड़ लेती है और दूसरा हाथ निचे अपनी चुत पर ले जाकर उसे मसलने लगती है.....

“आह, भाईया कितने अच्छे हो तुम्.... आअह्ह्ह्ह और जोर से मसलो भेया..... आआअह्ह्ह्हह……

अब शिप्रा अपनी एक ऊँगली चुत मे करके उसे अंदर बाहर करने लगती है.... शिप्रा ऊँगली की जगह सतीश के लंड को इमेजिन कर रही थी....

“आह.... भाईया ये कैसी आग लगा दी है, तुमणे, आअह्ह्ह्ह मेरा तो पुर शरीर जल रहा है.... हा दाल दो अपना और बुजा दो मेरी आगग्ग्ग्ग.... आआअह्ह्ह्ह मे गयी....

ओर इसी के साथ शिप्रा की चुत अपना सारा रस बहा देती है.....

ओर उसके चेहरे पर सैटिस्फैक्शन के भाव नजर आ रहे थे.....

शिप्रा अपनी चुत से रस निकाल कर काफी हल्का फील कर रही थि, और आज उसकी ख़ुशी डबल थी क्युकी आज उसके भाई ने उसके साथ वो सब किया जो वो न जाने कब से उसके साथ करना चाहती थि, शिप्रा मन ही मन सतीश को बहोत चाहती थी और चाहे भी क्यों न वो था ही इतना केयरिंग एंड फन लविंग पर्सन की कोई भी जवान लड़की उसे अपना दिल देदे. और शिप्रा की बहोत सी फ्रेंड तो सतीश पर जान छिडकती थी. और शिप्रा से भी काफी कहती थी की वो अपने भाई से उनकी सेटिंग करा दे.... और फिर शिप्रा तो उसके साथ ही रहती थी हर समय, दोनों मे जितना लड़ाई झगड़ा होता था, उतने ही दोनों एक दूसरे को चाहते भी थे. पर कब शिप्रा की चाहत मोहब्बत मे बदल गई ये उसे भी पता न चला....

ओर ये सब हुआ तब से जब से उसे अपनी सहेलियों से राज शर्मा सेक्स स्टोरीज का पता चला, फिर वो अक्सर अपने कंप्यूटर पर राज शर्मा सेक्स स्टोरीज पड़ने लगी और अपनी चुत को ठण्डा करने लगी और फिर एक दिन उसे भाई बहन के ऊपर सेक्स स्टोरी मिलि, उसे बहोत अजीब लगा की लोग ऐसी स्टोरीज भी लिखते है, भला ये भी कही पॉसिबल हो सकता है...

ओर अगले दिन ही उसने अपनी सहेलियों से ये डिस्कस किया और जो उसे पता चला उसे सुन कर तो वो शॉकड ही रह गयी....

उसकी सहेलियों ने उसे बताया की आज कल ये सब होता है और नेट पर बहोत सी कहानी तो सच्ची भी होती है...

आज कल बहोत से लोग बाहर मुह मारने से अच्छा अपने घर और रिलेशनशिप मे ही सेक्स कर लेते है... आज कल भाई- बहन, माँ- बेटा और बाप-बेटी आपस मे ही सेक्स कर लेते है....

ओर इससे लड़कियों को ही फायदा होता है क्युकी अगर वो किसी गैर मर्द के साथ सेक्स करती है, तो वो उसे ब्लैकमेल भी कर सकता है, और आज कल तो ज्यदातर बॉय फ्रेंड अपनी गर्ल फ्रेंड की सेक्स करते टाइम की वीडियो बना लेते हैं, और फिर उन्हें ब्लैकमेल करते है.... तो इससे अच्छा है की घर मे ही सेक्स कर लिया जाये जिससे घर की इज्जत घर मे ही रह जायेगी..

उस दिन शिप्रा को बहोत अजीब लगा ये जानकार की भला कैसे कोई भाई अपनी ही बहन के साथ कोई बेटा अपनी माँ के साथ और कोई बाप अपनी ही बेटी के साथ ये सब कर सकता है...?

पर तुरंत ही उसका दूसरा दिमाग उसका विरोध करता है, की कही बाहर जाकर घर की इज्जत उछालने से अच्छा है की घर मे ही अपनी आग बुजाने का इन्तजाम करलो, जिससे घर की इज्जत घर मे ही रह जायेगी...

ओर फिर उस दिन से शिप्रा ने भाई बहन की सेक्स स्टोरीज पढना सुरु कर दीया, और अब वो सतीश को भाई की तरह नहीं बल्कि एक मर्द की तरह देखने लगी थि, अब जब उसकी फ्रेंड्स उसके भाई के बारे मे नॉटी टॉक करती तो उसे बहोत गुस्सा आता, अब उसने अपना ड्रेसिंग स्टाइल भी चेंज कर दिया था और अब वो सतीश के सामने ज्यादा खुले और ज्यादा टाइट कपड़ो मे आती और अपने जिस्म की नुमाईश करती पर कभी भी सतीश ने उस पर ध्यान ही नहीं दिया...

ओर धीरे धीरे शिप्रा के मन मे सतीश के लिए लगाव और भी बढ़ गया और अब वो केवल सेक्स के लिए उसका लगाव नहीं था, बल्कि अब वो मन ही मन उसे चाहने भी लगी थी.. पर उसकी कभी हिम्मत नहीं हुई की वो उसके सामने कभी अपने जज्बात भी बयां कर सके...

पर आज तो जैसे उसे उसकी मन मांगी मुराद उसे मिल गई थी... आज उसके भाई ने उसको अपनी बाँहों मे लेकर उसके चूतडो को सहलाया और उसे किस भी किया, आज वो बहोत खुश थी और अपने आने वाले दिनों के बारे मे सोच कर वो गहरी नींद के आग़ोश मे चलि जाती है...

जबकि सतीश शिप्रा के जाते ही अपना खड़ा लंड लिये अपनी माँ के पास चल देता है....
 
सतीश शिप्रा के जाते ही अपना खड़ा लंड लिये अपनी माँ के पास चल देता है....

सोनाली भी इस समय अपने बिस्तर पर लेटे हुये अब तक सतीश के साथ हुये इंसिडेंट के बारे मे सोच रही थि, कैसे अब सब कुछ बदल गया है...

जो औरत अब तक अपनी मर्यादाओ मे रहती थि, आज उसने अपनी सभी मर्यादाएं को लांघ कर अपने ही सगे बेटे के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना लिए थे... और अब तो उसने अपनी नौकरानी के साथ मिलकर अपने बेटे के साथ थ्रीसम भी किया....

पर कही न कही वो बहोत खुश थी और उसे अब इस सब मे बहोत मजा आ रहा था, वो अपने बेटे की दीवानी हो गई थी... अपने बेटे के बारे मे सोचते ही उसकी चुत रस बहाने लगती है, वो अपनी साड़ी पर से ही अपनी चुत को सहलाने लगती है,

सोनाली की आँखे मस्ती मे बंद हो जाती है, उसी समय सतीश कमरे मे एंटर होता है और अपने सामने का सिन देख कर उसके उसके होंठो पर स्माइल आ जाती है,

सतीश आहिस्ता से गेट को बंद कर देता है, और अपनी माँ की तरफ बढ जाता है, जो अपनी चुत को मसल रही थी... सतीश बेड पर बैठ कर उसके हाथ के ऊपर से उसकी चुत को अपने हाथ से मसलने लगता है...

सतीश के हाथ के लगते ही सोनाली अपनी आँखे खोल कर उसे देखति है...

सतीश उसकी नशीली आँखों मे झाकते हुये...

सतीश- “किसके बारे मे सोच कर अपनी मुनिया को रगड रही हो माँ...?

सोनाली उसकी तरफ देख कर मुस्कुराते हुये- “है मेरा एक रंगीला यार, पर तुझे इससे क्या....?

सतीश उसकी चुत को अपनी मुट्ठि मे भिंच लेता है....

सतीश- “हमें भी तो बताओ अपने इस यार के बारे में...

सोनाली- “आह्हः.... है मेरा एक यार, बहोत ही स्मार्ट और डैशिंग बॉय है... और सबसे ख़ास बात है उसमे उसका मुसल जैसा लंड, जब वो अपना मुसल मेरी ओखली मे डालता है, तो बड़ा मजा आता है.... और अब तो मन करता है की २४ घंटे उसके लंड से चुदती रहु....

सतीश उसकी बातों से काफी एक्ससायटेड हो जाता है और वो उसकी साड़ी को उठा कर उसकी कमर तक कर देता है जिसमे सोनाली भी अपनी गांड उठा कर उसकी मदद करती है,

अंदर सोनाली ने पेन्टी नहीं पहनी थी और अब उसकी रस बहाती चुत सतीश की आँखों के सामने थी....

सतीश उसकी गिली चुत पर अपना हाथ रख देता है....

सतीश- “देख माँ तेरी चुत अपने यार के बारे मे सोंच कर कैसे आँसु बहा रही है.....?

सोनाली- “हा रे ये तो हर टाइम उसे याद कर अपने आँसु बहाती रहती है...

सतीश- “कसम से माँ तू बहोत गरम माल है, तेरी चुत हर टाइम लंड लेने को तैयार रहती है....

ओर इतना कह कर सतीश अपनी दो उंगलिया उसकी चुत मे घुसेड देता है...

सोनाली- “आआह्ह्ह्ह.... इस आग को लगाने वाला भी तो तू ही मेरे सय्या.... अब इसको बुजाना भी तेरी ही जिम्मेदारी है...

सतीश- “कसम से माँ अब तू पक्की रंडी हो गई है....?

सोनाली- “हाँ हूँ मैं रंडी, अपने ही बेटे की रंडी हूँ मैं.... तो तू चोदता क्यों नहीं अपनी इस रंडी माँ को...? चोद ले.... ले ले मजा अपनी माँ की जवानी का....

सतीश तुरंत अपना शार्ट उतारता है और शार्ट के उतारते ही उसका लंड फनफ़नाता हुआ बाहर आ जाता है...

सतीश सोनाली के पैरों के बीच बैठ कर अपने लंड को उसकी चुत पर सेट करके एक जोर का झटका मारता है.....

उसका आधा लंड सोनाली की चुत को फैलाता हुआ अंदर चला गया था....

सोनाली- “आआअह्ह्ह्हह्ह्, कमीने लंड को चिकना तो कर लेता, सुखा लंड ही दाल दिया मेरी चुत में.... आआह्ह्ह्ह”

सतीश- “अभी तुमने कहा ना की तू मेरी रंडी है, तो में तो रण्डियों को ऐसे ही चोदता हु.....?

ओर इतना कह कर सतीश अपना पूरा लंड उसकी चुत मे दाल देता है....

सोनाली- “आअह्ह्ह्हह..... फाड़ दी रे मेरी चुत....

सतीश- “बहोत शौक है ना तुझे मेरे लंड से चुदने का... ले चुद और ले....

ओर सतीश अब उसके ऊपर मिशनरी पोजीशन मे आकर एक के बाद एक धक्के लगाने लगता है...

सोनाली- “आअह्ह्ह्हह.... चोद कुत्ते और तेजी से मार धक्केः..... आअह्ह्ह्ह क्या लंड है तेरा....?

सतीश- “आज तेरी चुत मार मारकर इसका भोसडा बना दूँगा...?

सतीश और सोनाली दोनों को ही ऐसी डर्टी टॉक करते हुए सेक्स करने मे बहोत मजा आ रहा था...

सतीश के हर धक्के पर सोनाली अपनी कमर उठा कर उससे ताल से ताल मिला रही थी...

पुरा कमरा सोनाली की सिसकारियों से गुंज रहा था.

ओर फिर एक दमदार चुदाई का सेशन सुरु हो जाता है जोकि सतीश के झड़ने पर ख़तम होता है.... और इस दौरान सोनाली भी दो बार झड चुकी थी....

सतीश, सोनाली के ऊपर लेटे ही अपनी साँसों को कण्ट्रोल करने लगता है और सोनाली अपने हाथ उसके बालों मे फेरने लगती है....

थोड़ी देर बाद सतीश सोनाली के साइड मे लेट जाता है, सोनाली सतीश के हाथ को तकिया बनाकर उस पर अपना सर रख कर लेट जाती है....

सतीश- “कैसा लगा माँ?

सोनाली उसकी तरफ देख कर एक प्यारी सी स्माइल देते हुये- “माइंड ब्लोइंग....

सतीश मुस्कुरा देता है....

सोनाली- “तुझे मजा आया....

सतीश- “बहोत ज्यादा, सच कह रहा हूँ माँ जो मजा आपके साथ मिला है, वो आजतक किसी के साथ नहि मिला.... कसम से आप को नहीं मालूम की आप कितना सेक्सी माल हो....?

सोनाली उसकी बात सुनकर शर्मा जाती है, फिर खुद को सँभालते हुये- “तू झुट बोल रहा है ना? मुझे मालूम है की मुझ जैसी औरत के साथ तुझे उतना मजा आ ही नहीं सकता जितना की एक यंग लड़की तुझे दे सकती है....?

सतीश- “क्या बात कर रही हो माँ, आपमें जो मजा है वो यंग लड़कियों मे कहा, और वैसे भी वो सभी आपकी खुबसुरती के सामने कुछ नहि है.... और वैसे भी आपको पाकर अब मुझे अब किसी और की चाहत नहि है...

सोनाली उसकी बात सुनकर ख़ुशी से उसके गले लग जाती है...

सोनाली- “आह बेटे तूने मुझे पागल कर दिया है, मे पागल हो गई हूँ तेरे प्यार मे, अब तू मुझे कभी छोड़ कर मत जाना, आई रियली लव यु”.

सतीश उसको अपनी बाँहों मे और कस कर भर लेता है- “आई लव यु टू मोम...

थोड़ी देर तक वो एक दूसरे की बाँहों मे लेटे रहे, फिर सतीश सोनाली को अपने से अलग करता है...

सतीश- “अब आप आराम करलो क्युकी आज रात तो मे आपको सोने नहि दूँगा...?

सोनाली सतीश की बात सुन मुस्कुरा उठती है, सतीश सोनाली के होंठो को चूमकर बिस्तर से उठ कर अपना शार्ट पहनता है और बाहर की तरफ चल देता है और अपने रूम मे जाकर बेड पर लेट जाता है, और थकान के कारन थोड़ी ही देर मे वो गहरी नींद मे सो जाता है...
 
शाम को शिप्रा की आँख खुलती है वो उठ कर टाइम देखती है, ६:३० बज गये थे, वो तुरंत बेड से उठ कर फ्रेश होने लगती है, उसके दिमाग मे दिन मे सतीश के साथ घटि घटना चल रही थी.... टॉयलेट करने के बाद शिप्रा अपनी चिकनी चुत पर हाथ फिराती हुई उसे अपने हाथ से मसल देती है, जिससे उसके मुह से एक सिसकारी निकल जाती है...

शिप्रा- “आअह्ह्ह्ह भाईया ये क्या कर दिया है तुमने, ये कैसी आग लगा दी है आपने मेरे अंदर, अब आपको ही इस आग को बुजाना पडेगा....?

ओर वो फ्रेश होकर अपने रूम से बाहर निकल कर निचे जाने लगती है की तभी सतीश के रूम के सामने से निकलते हुए उसके कदम ठहर जाते है....

शिप्रा- “देखति हूँ की भाईया क्या कर रहे हैं, अपने रूम में, हो सकता है की उनके साथ दोबारा वो सब करने का मौका मिल जाये...?

ओर ये सोचते ही उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ जाती है, और वो उसके रूम को खोलती है और उसकी अच्छी किस्मत की डोर लॉक नहि था, शिप्रा अहिस्ते से डोर खोलकर उसे वापस बंद करके अंदर आ जाती है... अंदर सतीश शार्ट मे सो रहा था और उसका लंड पूरा खड़ा उसके शार्ट मे तम्बू बनाये हुये था.....

ओर जब शिप्रा की नजर उस टेंट पर पड़ती है तो उसकी आँखे उसी पर जम जाती है, आज पहली बार शिप्रा ने अपने भाई के लंड को इतने ध्यान से देखा था और देखने मे वो बहोत ही बड़ा लग रहा था....

शिप्रा अपने मन मे- “हाय कितना बड़ा है भाईया का हथियार बिलकुल पोर्न फिल्म के स्टार की तरह....

ओर वो मधहोशी मे ही सतीश के बेड की तरफ बढ जाती है... और बेड पर उसके पैरों की तरफ बढ जाती है, उसकी नजरे तो बस उसके टेंट पर ही टीकी हुई थी...

बेड पर बैठ कर वो डरते हुए सतीश के लंड पर शार्ट के ऊपर से ही अपना हाथ रख देती है, और उस पर हाथ फिराते हुये उसके लंड की लम्बाई और मोटाई का जायजा लेने लगती है.... और जब उसे सतीश के लंड के साइज का अनुमान होता है तो उसकी चुत से काफी पानी छूट जाता है...

शिप्रा अपने मन मे- “आह भाईया कितना बड़ा है तुम्हारा, इसे छूकर ही मेरी चुत ने इतना पानी बहा दिया जब ये अंदर जायेगा तब मेरी चुत का क्या हाल होगा हे...ह...ह.....”

ओर बेखयाली मे वो सतीश के लंड को पकड़ कर मसल देती है, लंड के मसले जाने से सतीश की नींद खुल जाती है और वो आँखे खोल कर सामने देखता है तो उसकी आँखे खुली की खुली रह जाती है...... सामने उसकी बहन शिप्रा उसके लंड को अपने हाथ मे लिये बैठि थी.... अपनी बहन को अपना लंड पकड़ा देख उसका लंड झटके मारने लगता है...

शिप्रा का ध्यान सतीश के लंड की और था इस्लिये उसे ये पता नहि चला था, की उसका भाई उसकी हरक़तों की वजह से जाग चुका है, और अब उसी की हरक़तों को देख रहा है...

सतीश अपनी आँखे बंद करके लेट जाता है और हलकी खुली आँखों से अपनी बहन की हरकतों को देख रहा था, वो देखना चाहता था की उसकी बहन उसे सोता देख कितना आगे बढ़ती है...

शिप्रा भी जैसे भूल ही गई थी की उसका भाई जाग भी सकता है, और वो हिम्मत करते हुए उसके शार्ट मे अपनी ऊँगली फसा कर उसे निचे खिसका देती है, शार्ट के खिसकते ही सतीश का लंड फन-फनाता हुआ उसकी आँखों के सामने आ जाता है और झटके खाने लगता है....

सतीश के लंड को देख कर शिप्रा के हाथ उसके मुह पर चले जाते है, शिप्रा एकदम शॉकड थी रियल मे उसका लंड काफी भयंकर लग रहा था,

शिप्रा अपने मन मे- “हाय ये मेरे अनुमान से काफी बड़ा और मोटा निकला इतना मोटा तो आजतक मैंने किसी पोर्नस्टार का भी नहीं देखा, कितना भयंकर लंड है भाईया का, ये तो मेरी चुत का बुरा हाल कर देगा, पता नहि ये मेरी छोटी सी चुत मे पूरा जायेगा भी या नही...?

सतीश अपनी थोड़ी खुली आँखों से शिप्रा के चेहरे पर आ रहे एक्सप्रेशन को देख कर मन ही मन खुश हो रहा था... उसके लंड को फर्स्ट टाइम देख कर लड़की हो या औरत हर किसी के चेहरे के एक्सप्रेशन बदल जाते है...

थोड़ि देर उसके लंड को देखने के बाद शिप्रा अपने हाथ आगे बढ़ा कर उसके लंड को अपने हाथो मे पकड़ लेती है, और धीरे धीरे उस पर अपना हाथ फेरने लगती है, और फिर उसके हाथो की स्पीड बध जाती है, और अब शिप्रा सतीश के लंड को मुठिया रही थी....

सतीश बहोत मुस्किल से अपनी सिसकारी को रोक रहा था... और सही समय का वेट कर रहा था....

जब्कि दूसरी तरफ शिप्रा पर पता नहि कितनी हवस सवार थी की वो पूरी तरह से आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो चुकी थि, और उसके लंड को थोड़ी देर तक मुठियाने के बाद वो अपना मुह आगे बड़ा कर उसके लंड को अपने मुह मे भर कर चुस्ने लगती है, सतीश के थोड़े से लंड को मुह मे लेकर चुस्ने मे ही उसे बहोत परेशानी हो रही थी पर वो उसके लंड को मुह से नहि निकालती है...

सतीश की तो साँसे ही अटक जाती है ये सिन देख कर, उसे तो अपनी आँखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था, ये सब उसे किसी सपने की तरह लग रहा था... पर अच्छी बात ये थी की ये सब हक़ीक़त थी और अपने बहन के चुसने के तरीके को देख कर सतीश समझ जाता है की ये उसका फर्स्ट टाइम है लंड चुसने का....

अब सतीश से बरदाश्त करना मुस्किल था और उसके हिसाब से उसके जागने का ये ही सबसे सही समय है...
 
शिप्रा मस्ती मे अभी भी उसका लंड चुस रही थी... सतीश जागने की झूटी एक्टिंग करते हुए उठ कर बैठ जाता है....

सतीश- शिप्रा तुम यहाँ और.. और ये क्या कर रही हो तुम्...

सतीश की आवाज से शिप्रा होश मे आती है और तुरंत उठ कर बैठ जाती है...

शिप्रा एकदम शॉकेड थी और अब उसे आभास हुआ था की उससे कितनी बड़ी ग़लती हो गई है, उसकी आँखे शर्म से झुक गई थि, उसको सतीश से नजरे मिलाने की हिम्मत नहि हो रही थी क्युकी सतीश ने उसको रंगे हाथो पकड़ लिया था...

सतीश थोड़ी आवाज ऊँची करके- सुना नहि तुमने मैंने क्या पुछा, ये क्या कर रही थी तुम्....?

शिप्रा- ओ..वो भाईया में...

शिप्रा इससे ज्यादा कुछ नहीं बोल पायी और बोलती भी क्या की आप सो रहे थे और में आपके सोने का फायदा उठाकर आपका खड़ा हुआ लंड चुस रही थी...

सतीश- बोलती क्यों नही, या फिर में माँ को जाकर ये सब बताऊ...?

सतीश शिप्रा को दाँट तो रहा था पर उसने अपने लंड को ढकने की कोई भी कोशिश नहि की थी...

शिप्रा को तो यकीन ही नहीं हुआ उसने तो सोचा था की उसका भाई भी यही सब चाहता है जो वो चाहती है....

शिप्रा सतीश की बात से डर गई थि, और उसकी आँखों से आँसु आ गये....

शिप्रा आँसु बहाते हुये उसकी तरफ देखति है- व्...वो भइया.... ओ... में...

सतीश- हाँ तुम क्या…?

शिप्रा को सतीश का रुखा बर्ताव बहोत हर्ट कर रहा था- आई लव यु भैया,आई लव यु वेरी मच... और आपको अगर माँ से कहना है तो कह दो पर मुझे अपने किये पर कोई शर्मिंदगी नहि है...

ओर ये कह कर वो रोने लगी... सतीश शिप्रा को डराना तो चाहता था पर उसका ईरादा उसको हर्ट करने का नहि था और शिप्रा की आँखों मे आँसु तो उसे बिलकुल बरदास्त नहि थे...

सतीश उसके करीब जाकर उसे अपने गले से लगा लेता है और उसकी पीठ को सहलाता हुआ....

सतीश- अरे पगली में तो मजाक कर रहा था, मुझे क्या पता था की तू रो देगी..

ओर वो उससे अलग होकर उसके चेहरे को अपने हाथो मे लेकर उसे ऊपर उठाता है और अपने हाथो से उसके आँसु पोंछने लगता है....

सतीश- अब तो चुप हो जा... आई एम रियली सोर्री... मुझे नहीं पता था की तू इतना डर जायेगी....

शिप्रा- में डरी नहीं भैया मुझे आपका रूखे बीहेवियर ने हर्ट कर दिया था.... आप नहीं जानते में आपसे कितना प्यार करती हु...

सतीश- वॉव, मेरी बहन मुझसे इतना प्यार करती है और मुझे पता भी नही....

शिप्रा- छोड़ो मुझे, मुझे आपसे बात नहीं करनी....

सतीश- नाराज हो गई मुझसे मेरी गुडिया...

पर शिप्रा अपना मुह फेर कर बैठ जाती है... सतीश उसे मानाने की बहोत कोशिश करता है पर सब नाकाम रहती है...

सतीश- आई लव यु टू शिप्रा...

शिप्रा ख़ुशी से पलटते हुये- सच्...

सतीश-मुछ...

शिप्रा सतीश के गले लग जाती है और सतीश भी उसे अपनी बाँहों मे कस लेता है...

अब सतीश शिप्रा को अपनी बाँहों मे भरे उसकी पीठ पर अपने हाथ फिरा रहा था...

सतीश शिप्रा से अलग होता है और उसके चेहरे को अपने हाथो से पकड़ कर उसके गुलाबी होंठो पर अपने होंठ रख देता है और उन्हें चुसना सुरु कर देता है, शिप्रा की आँखे मस्ती मे बंद हो जाती है....

शिप्रा के होंठो को चुसते हुये सतीश अपने हाथ उसके दूध पर रख देता है...

अपने अनछुये बोब्स पर सतीश का हाथ रखते ही शिप्रा की बॉडी मे करंट सा दौड जाता है...

अब सतीश टी-शर्ट के ऊपर से ही शिप्रा की बोब्सओं को मसलने लगता है... उसकी सॉफ्ट सॉफ्ट बोब्स को टी-शर्ट के ऊपर से ही मसलने मे सतीश को बहोत मजा आ रहा था... सतीश समझ जाता है की उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी है...

५ मिनट की किस के बाद सतीश शिप्रा के होंठो को छोड़ देता है, शिप्रा गहरी गहरी साँसे लेने लगती है... उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया था...

सतीश शिप्रा की टी-शर्ट को पकड़ कर निकाल देता है और उसकी बोब्स अब सतीश के सामने नंगी थी...

सतीश की तो नजरे तो जैसे उन पर से हट ही नहीं रही थि, क्या बोब्स थी उसकी एक दम गोल शेप मे बिलकुल सफ़ेद और उनपर पिंक निप्पल जोकि उसके सफ़ेद बोब्स की सुंदरता को और बड़ा रहा था...

सतीश को अपनी बोब्स की तरफ घुरता देख शिप्रा के चेहरे पर स्माइल आ जाती है क्युकी उसे पता था की उसके बोब्स है ही इतनी सुन्दर की जो भी देखे वो देखता ही रह जाये और यही हाल सतीश का था...

शिप्रा- क्या हुआ भाईया पसंद नहीं आई क्या?

सतीश- क्या?

शिप्रा- वहि जो आप इतनी देर से देख रहे हो... पसंद नहि आई

सतीश- अरे पगली में तो शॉकेड हूँ की इतना अच्छा माल मेरे घर मे है और में बाहर भटक रहा था....

ओर इतना कह कर वो अपने हाथ बड़ा कर उसके बोब्स को अपने हाथो मे भर लेता है...

शिप्रा- अच्छा अब में आपको माल लगणे लगी.... आप सभी लड़के एक जैसे होते हो, मतलब इतने दिनों से आपको लाइन दे रही थी तब आपको दिखाइ नहीं दिया ये माल और आज जब कपडे उतार कर बैठि हूँ तो पता चला की घर मे ही एक अच्छा माल है...

सतीश शिप्रा के बोब्स को मसलते हुये- अरे तो में भी तो कब से चाह रहा था की एक बार तू मिल जाए पर क्या करू डरता था की कही तुझे बुरा न लगे....

शिप्रा अपनी बोब्स को मसलवाने से मदहोश हो रही थी- आह्हः भाई पहले कभी आपकी किसी बात का बुरा माना है क्या, आप एक बार कहकर तो देखते, आपकी ये बहन आपके लिए कुछ भी कर देती....

सतीश- कोई बात नहीं अब तो तू मुझे मिल ही गई है ना अब मे तुझे इतना प्यार करूँगा की तेरी सारी शीकायत दुर हो जाएगी...
 
देरी के लिये माफी चाहता हु वक्त की कमी के कारण कुछ कहानियों के अपडेट नही दे पा रहा था पर अब अपडेट जल्द से जल्द देने की कोशिश करूंगा
 
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