S
StoryPublisher
Guest
सतीश – “यू आर अ गुड स्लट”. (तुम एक अच्छी चुदक्कड़ हो)
श्वेता- “थैंक्स मास्टर …
उसने झुकी नजरों वाली इमोजी के साथ भेजा.
सतीश – “ह्म्म्म”!
सतीश – “व्हाट आर यू वेयरिंग”? (क्या पहन रखा है तुमने)
श्वेता- “गाउन मास्टर”.
सतीश – “आई मीन इनसाइड”? (मतलब अंदर क्या पहन रखा है)
सतीश ने गुस्से वाले इमोंजी के साथ भेजा.
श्वेता- “सॉरी मास्टर! आई ऍम रियली सॉरी, ईट्स ब्रा एंड पैंटी मास्टर” (मुझ को माफ़ कर दीजिए मालिक, मैं ने ब्रा और पैंटी पहन रखी है)
सतीश – “ह्म्म्म! व्हिच कलर”? (किस रंग की?)
श्वेता- “ईट्स रेड मास्टर” (लाल रंग की)
श्वेता- “सॉरी टू डिस्पोइंट यू मास्टर” (आपको गुस्सा दिलाने के लिए माफी चाहती हूँ)
सतीश – “ओके”!
सतीश हॉल में बैठे हुए बगल में बैठी अपनी बहन के साथ सेक्स चैट कर रहा था. इस बात को सोच कर सतीश थोड़ा गर्म होने लगा था. श्वेता के चेहरे पर एक अजीब सा उमंग भरा भाव था. यह सतीश के लिए बिल्कुल नया था. हॉल के अँधेरे में ऐसे बात करने में सतीश को बड़ा मजा आ रहा था.
सतीश ने करीब 5 मिनट बाद उसे फिर से मैसेज किया. श्वेता फिल्म देखने में मशगूल थी. फोन के वाइब्रेट होते ही उसका ध्यान फोन पर गया. झट से मैसेज खोला.
सतीश – “टेक ऑफ यॉर पैंटीज नाउ”! (अपनी पैंटी उतारो अभी)
श्वेता आश्चर्य से मेरी तरफ देखने लगी. वह मेरी तरफ ऐसे देख रही थी जैसे उसे मैसेज पर विश्वास नहीं हुआ हो.
सतीश ने उसे फोन की तरफ देखने का इशारा किया.
श्वेता नीचे देख कर कुछ सोचने लगी, फिर कुछ देर बाद टाइप किया- “ओके मास्टर”!
और फोन साइड में रख कर पैंटी निकालने लगी. श्वेता थोड़ा ऊपर हुई. उसने आस-पास देखा, सब फिल्म देखने में मशगूल थे. श्वेता झुकी और एक ही झटके में पैंटी को निकाल दिया. हाथों में पैंटी को लेकर सीधी हुई और आस-पास देखा कि किसी ने देखा तो नहीं.
फिर उसने मोबाइल उठाया- “ईट्स रेडी मास्टर” (यह तैयार है)
सतीश – “गुड … गिव इट टू मी”! (इसे मुझको दे दो)
श्वेता के हाथों से सतीश ने पैंटी ली और नाक पर रख कर लम्बी साँस ली. उसकी चूत की खुशबू को अपने जहन में समा लिया. उसकी पैंटी हल्की गीली हो चुकी थी श्वेता के चूत के रस से. खुशबू अनोखी थी. सतीश ने उसकी पैंटी को जैकेट के पॉकेट में रखा और फिल्म देखने लगा.
कुछ देर में इंटरवल हुआ, दोनों बाहर कुछ खाने के लिए गये.
फिर से फिल्म शुरू हुई. अब सतीश ने कुछ नहीं किया. अब हम बस फिल्म देख रहे थे. फिल्म ख़त्म हुई. हम हॉल से बाहर आये. श्वेता वाशरूम गयी, फिर उसी काम्प्लेक्स के मॉल में शॉपिंग करने गए. दोनों पति-पत्नी की तरह हाथ में हाथ डाले चल रहे थे जैसे श्वेता सतीश के साथ डेट पे आयी हो.
वहाँ पर उन्होंने कुछ शॉपिंग की. श्वेता ने सतीश के लिए 2 टी-शर्ट ली, अपने लिए उसने कुछ नहीं लिया क्योंकि उसे अगले 2 दिनों तक कुछ पहनना ही नहीं था. सिर्फ 5-6 जोड़े ब्रा और पैंटी ली क्योंकि अभी तो उसकी कई बार और पैंटी फटने वाली थी.
सतीश ने तब तक श्वेता के लिए एक सरप्राइज डेट प्लान कर लिया था. सतीश ने एक टेबल बुक कर ली थी. वहां से सतीश उसे सीधे उस रेस्टोरेंट में ले गया जहाँ उनकी डेट थी.
यह एक ओपन रेस्टोरेंट था; 9 बज रहे होंगे; हल्की-हल्की चाँद की रोशनी में यह नजारा काफी सुन्दर लग रहा था.
सतीश के डेट के प्लान से श्वेता काफी खुश हुई. दोनों अपने टेबल की ओर बढे, सतीश ने चेयर खींची, श्वेता सतीश के सामने बैठ गयी.
चाँद की हल्की रोशनी में टेबल पर लगी कैंडल की रोशनी में सतीश श्वेता के चेहरे को देख पा रहा था.
उसकी आँखों में चमक थी.
कुछ भी हो सतीश श्वेता से प्यार बहुत करता था; सतीश ने हाथ आगे ले जाकर श्वेता के हाथों को पकड़ा और चूम लिया.
तब तक वेटर आ गया आर्डर लेकर. उन्होंने एक दूसरे से बात करते हुए डिनर किया. श्वेता बार-बार डांस फ्लोर की तरफ देख रही थी जहाँ कपल्स डांस कर रहे थे. सतीश उठा और रोमांटिक अंदाज में उसका हाथ पकड़ के डांस फ्लोर पर ले गया.
उन्होंने थोड़ा डांस किया. श्वेता बहुत खुश थी. फिर दोनों वहाँ से निकल गए.
सतीश श्वेता के साथ पार्किंग की तरफ बढ़ा. श्वेता आगे-आगे चल रही थी, सतीश श्वेता के पीछे-पीछे. ताकि सतीश श्वेता की मटकती गांड को देख सके. अरे हाँ, हॉल से लेकर अभी तक श्वेता नीचे से नंगी थी. उसने पैंटी नहीं पहनी थी. ये पता कर पाना थोड़ा मुश्किल था लेकिन किसी मंझे हुए खिलाड़ी के लिए ये बाएं हाथ का खेल था.
श्वेता- “थैंक्स मास्टर …
उसने झुकी नजरों वाली इमोजी के साथ भेजा.
सतीश – “ह्म्म्म”!
सतीश – “व्हाट आर यू वेयरिंग”? (क्या पहन रखा है तुमने)
श्वेता- “गाउन मास्टर”.
सतीश – “आई मीन इनसाइड”? (मतलब अंदर क्या पहन रखा है)
सतीश ने गुस्से वाले इमोंजी के साथ भेजा.
श्वेता- “सॉरी मास्टर! आई ऍम रियली सॉरी, ईट्स ब्रा एंड पैंटी मास्टर” (मुझ को माफ़ कर दीजिए मालिक, मैं ने ब्रा और पैंटी पहन रखी है)
सतीश – “ह्म्म्म! व्हिच कलर”? (किस रंग की?)
श्वेता- “ईट्स रेड मास्टर” (लाल रंग की)
श्वेता- “सॉरी टू डिस्पोइंट यू मास्टर” (आपको गुस्सा दिलाने के लिए माफी चाहती हूँ)
सतीश – “ओके”!
सतीश हॉल में बैठे हुए बगल में बैठी अपनी बहन के साथ सेक्स चैट कर रहा था. इस बात को सोच कर सतीश थोड़ा गर्म होने लगा था. श्वेता के चेहरे पर एक अजीब सा उमंग भरा भाव था. यह सतीश के लिए बिल्कुल नया था. हॉल के अँधेरे में ऐसे बात करने में सतीश को बड़ा मजा आ रहा था.
सतीश ने करीब 5 मिनट बाद उसे फिर से मैसेज किया. श्वेता फिल्म देखने में मशगूल थी. फोन के वाइब्रेट होते ही उसका ध्यान फोन पर गया. झट से मैसेज खोला.
सतीश – “टेक ऑफ यॉर पैंटीज नाउ”! (अपनी पैंटी उतारो अभी)
श्वेता आश्चर्य से मेरी तरफ देखने लगी. वह मेरी तरफ ऐसे देख रही थी जैसे उसे मैसेज पर विश्वास नहीं हुआ हो.
सतीश ने उसे फोन की तरफ देखने का इशारा किया.
श्वेता नीचे देख कर कुछ सोचने लगी, फिर कुछ देर बाद टाइप किया- “ओके मास्टर”!
और फोन साइड में रख कर पैंटी निकालने लगी. श्वेता थोड़ा ऊपर हुई. उसने आस-पास देखा, सब फिल्म देखने में मशगूल थे. श्वेता झुकी और एक ही झटके में पैंटी को निकाल दिया. हाथों में पैंटी को लेकर सीधी हुई और आस-पास देखा कि किसी ने देखा तो नहीं.
फिर उसने मोबाइल उठाया- “ईट्स रेडी मास्टर” (यह तैयार है)
सतीश – “गुड … गिव इट टू मी”! (इसे मुझको दे दो)
श्वेता के हाथों से सतीश ने पैंटी ली और नाक पर रख कर लम्बी साँस ली. उसकी चूत की खुशबू को अपने जहन में समा लिया. उसकी पैंटी हल्की गीली हो चुकी थी श्वेता के चूत के रस से. खुशबू अनोखी थी. सतीश ने उसकी पैंटी को जैकेट के पॉकेट में रखा और फिल्म देखने लगा.
कुछ देर में इंटरवल हुआ, दोनों बाहर कुछ खाने के लिए गये.
फिर से फिल्म शुरू हुई. अब सतीश ने कुछ नहीं किया. अब हम बस फिल्म देख रहे थे. फिल्म ख़त्म हुई. हम हॉल से बाहर आये. श्वेता वाशरूम गयी, फिर उसी काम्प्लेक्स के मॉल में शॉपिंग करने गए. दोनों पति-पत्नी की तरह हाथ में हाथ डाले चल रहे थे जैसे श्वेता सतीश के साथ डेट पे आयी हो.
वहाँ पर उन्होंने कुछ शॉपिंग की. श्वेता ने सतीश के लिए 2 टी-शर्ट ली, अपने लिए उसने कुछ नहीं लिया क्योंकि उसे अगले 2 दिनों तक कुछ पहनना ही नहीं था. सिर्फ 5-6 जोड़े ब्रा और पैंटी ली क्योंकि अभी तो उसकी कई बार और पैंटी फटने वाली थी.
सतीश ने तब तक श्वेता के लिए एक सरप्राइज डेट प्लान कर लिया था. सतीश ने एक टेबल बुक कर ली थी. वहां से सतीश उसे सीधे उस रेस्टोरेंट में ले गया जहाँ उनकी डेट थी.
यह एक ओपन रेस्टोरेंट था; 9 बज रहे होंगे; हल्की-हल्की चाँद की रोशनी में यह नजारा काफी सुन्दर लग रहा था.
सतीश के डेट के प्लान से श्वेता काफी खुश हुई. दोनों अपने टेबल की ओर बढे, सतीश ने चेयर खींची, श्वेता सतीश के सामने बैठ गयी.
चाँद की हल्की रोशनी में टेबल पर लगी कैंडल की रोशनी में सतीश श्वेता के चेहरे को देख पा रहा था.
उसकी आँखों में चमक थी.
कुछ भी हो सतीश श्वेता से प्यार बहुत करता था; सतीश ने हाथ आगे ले जाकर श्वेता के हाथों को पकड़ा और चूम लिया.
तब तक वेटर आ गया आर्डर लेकर. उन्होंने एक दूसरे से बात करते हुए डिनर किया. श्वेता बार-बार डांस फ्लोर की तरफ देख रही थी जहाँ कपल्स डांस कर रहे थे. सतीश उठा और रोमांटिक अंदाज में उसका हाथ पकड़ के डांस फ्लोर पर ले गया.
उन्होंने थोड़ा डांस किया. श्वेता बहुत खुश थी. फिर दोनों वहाँ से निकल गए.
सतीश श्वेता के साथ पार्किंग की तरफ बढ़ा. श्वेता आगे-आगे चल रही थी, सतीश श्वेता के पीछे-पीछे. ताकि सतीश श्वेता की मटकती गांड को देख सके. अरे हाँ, हॉल से लेकर अभी तक श्वेता नीचे से नंगी थी. उसने पैंटी नहीं पहनी थी. ये पता कर पाना थोड़ा मुश्किल था लेकिन किसी मंझे हुए खिलाड़ी के लिए ये बाएं हाथ का खेल था.