जय को अब महसूस हुआ कि वो भावनाओं में बह गया था, और बड़ी जल्दी ही सबकुछ कर बैठा। पहले उसने अपना आठ इंच का लौड़े को बॉक्सर में वापिस घुसा दिया। फिर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करते हुए, ममता की ओर बढ़ा। ममता बेड से बांये सात आठ कदम दूर ड्रेसिंग टेबल के पास खड़ी थी, जय की तरफ घूमी थी, पर फर्श की ओर देख रही थी। जैसे ही जय उसकी ओर बढ़ा वो दीवार की ओर मुंह करके खड़ी हो गयी। ममता के करीब पहुंचकर उसने उसके कंधे पर हाथ रखना चाहा, की तभी ममता बोली," ये क्या करने वाले थे हम और तुम ? तुमको कोई अंदाज़ा भी है कि हम दोनों कितना बड़ा पाप करने जा रहे थे? और हम भी बहक रहे थे। पूरी दुनिया में तुमको कोई और नहीं, अपनी माँ ही मिली थी क्या, ये सब कुछ करने के लिए? आज हम माँ बेटे के पवित्र रिश्ते को धूमिल करने जा रहे थे?
जय- माँ, जरा.... एक मिनट सुनो तो।
ममता की आंखों में आंसू थे, अपने आंसू पोछते हुए बोली," हम कितनी गिरी हुई औरत हैं जो अपने बेटे के साथ ही.... और तुमको भी ख्याल नहीं रहा।
जय ममता के कंधों पर हाथ रखता है, और कुछ बोलने ही वाला था, की ममता ने घूमकर उसको एक चाटा मारा। जय ने ममता के दोनों हाथ पकड़ लिए और अपने गालों पर तीन चार थप्पड़ और मारे और बोला," मारो और मारो हमको, हम तुम्हारे गुनहगार हैं। दुनिया की हर माँ अपने बेटे का हर गलती माफ कर सकती है, पर शायद ये कोई भी माँ बर्दाश्त नहीं करेगी कि उसका बेटा उसके साथ ही वो सब करे, जो बन्द कमरे में वो उसके पिता के साथ करती है। तुम ने बिल्कुल सही किया, हमको सज़ा मिलनी चाहिए। लेकिन तुम ये बताओ, कि तुम रो क्यों रही हो? तुम तो कोई गलती नहीं कि हो, जो किये हैं हम किये हैं। हमारी वजह से तुम बहकी हो। तुम तो अपनी ओर से बिल्कुल पवित्र हो, और तुमको अपवित्र करने की कोशिश हमने की है। हमारी नज़रों में तुम जैसी पावन स्त्री, संसार में कोई नहीं है।" उसने ममता को वहीं कुर्सी पर बैठा दिया, जो अपनी नज़रें झुकाये उसके हाथों को अपने कंधों से लगातार हटाने का प्रयास कर रही थी। पर फिर जय ने ममता को शांत होने को कहा, और उसके लिए पानी लेके आया। ममता ने वो पानी का गिलास झटका देकर गिरा दिया। जय के दूसरे हाथ मे जग था, उसने फिर से गिलास में पानी भरकर दिया। जय," माँ, पानी पियो, तुम शांत हो जाओ।
ममता ने उसकी ओर, देखा और लगभग पछताते हुए बोली," थोड़ा ज़हर डाल दो और फिर दो।"
जय- माँ, तुमको ज़हर देने से पहले हम, अपने को मार डालेंगे। तुम्हारी तकलीफ देखकर हमको ऐसा लग रहा है, जैसे कि हमने तुमको खो दिया है। हम तुमको खोना नहीं चाहते हैं।
ममता को ऐसा लगा कि जय को अफसोश है, इसलिए उसके हाथों से गिलास का पानी ले ली और घूँट मारकर बोली," चाहते क्या हो तुम?
जय- हम तुमसे कुछ पूछना चाहते हैं ?
जय- माँ, जरा.... एक मिनट सुनो तो।
ममता की आंखों में आंसू थे, अपने आंसू पोछते हुए बोली," हम कितनी गिरी हुई औरत हैं जो अपने बेटे के साथ ही.... और तुमको भी ख्याल नहीं रहा।
जय ममता के कंधों पर हाथ रखता है, और कुछ बोलने ही वाला था, की ममता ने घूमकर उसको एक चाटा मारा। जय ने ममता के दोनों हाथ पकड़ लिए और अपने गालों पर तीन चार थप्पड़ और मारे और बोला," मारो और मारो हमको, हम तुम्हारे गुनहगार हैं। दुनिया की हर माँ अपने बेटे का हर गलती माफ कर सकती है, पर शायद ये कोई भी माँ बर्दाश्त नहीं करेगी कि उसका बेटा उसके साथ ही वो सब करे, जो बन्द कमरे में वो उसके पिता के साथ करती है। तुम ने बिल्कुल सही किया, हमको सज़ा मिलनी चाहिए। लेकिन तुम ये बताओ, कि तुम रो क्यों रही हो? तुम तो कोई गलती नहीं कि हो, जो किये हैं हम किये हैं। हमारी वजह से तुम बहकी हो। तुम तो अपनी ओर से बिल्कुल पवित्र हो, और तुमको अपवित्र करने की कोशिश हमने की है। हमारी नज़रों में तुम जैसी पावन स्त्री, संसार में कोई नहीं है।" उसने ममता को वहीं कुर्सी पर बैठा दिया, जो अपनी नज़रें झुकाये उसके हाथों को अपने कंधों से लगातार हटाने का प्रयास कर रही थी। पर फिर जय ने ममता को शांत होने को कहा, और उसके लिए पानी लेके आया। ममता ने वो पानी का गिलास झटका देकर गिरा दिया। जय के दूसरे हाथ मे जग था, उसने फिर से गिलास में पानी भरकर दिया। जय," माँ, पानी पियो, तुम शांत हो जाओ।
ममता ने उसकी ओर, देखा और लगभग पछताते हुए बोली," थोड़ा ज़हर डाल दो और फिर दो।"
जय- माँ, तुमको ज़हर देने से पहले हम, अपने को मार डालेंगे। तुम्हारी तकलीफ देखकर हमको ऐसा लग रहा है, जैसे कि हमने तुमको खो दिया है। हम तुमको खोना नहीं चाहते हैं।
ममता को ऐसा लगा कि जय को अफसोश है, इसलिए उसके हाथों से गिलास का पानी ले ली और घूँट मारकर बोली," चाहते क्या हो तुम?
जय- हम तुमसे कुछ पूछना चाहते हैं ?