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Incest क्या ये गलत है ? (completed)

जय को अब महसूस हुआ कि वो भावनाओं में बह गया था, और बड़ी जल्दी ही सबकुछ कर बैठा। पहले उसने अपना आठ इंच का लौड़े को बॉक्सर में वापिस घुसा दिया। फिर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करते हुए, ममता की ओर बढ़ा। ममता बेड से बांये सात आठ कदम दूर ड्रेसिंग टेबल के पास खड़ी थी, जय की तरफ घूमी थी, पर फर्श की ओर देख रही थी। जैसे ही जय उसकी ओर बढ़ा वो दीवार की ओर मुंह करके खड़ी हो गयी। ममता के करीब पहुंचकर उसने उसके कंधे पर हाथ रखना चाहा, की तभी ममता बोली," ये क्या करने वाले थे हम और तुम ? तुमको कोई अंदाज़ा भी है कि हम दोनों कितना बड़ा पाप करने जा रहे थे? और हम भी बहक रहे थे। पूरी दुनिया में तुमको कोई और नहीं, अपनी माँ ही मिली थी क्या, ये सब कुछ करने के लिए? आज हम माँ बेटे के पवित्र रिश्ते को धूमिल करने जा रहे थे?
जय- माँ, जरा.... एक मिनट सुनो तो।
ममता की आंखों में आंसू थे, अपने आंसू पोछते हुए बोली," हम कितनी गिरी हुई औरत हैं जो अपने बेटे के साथ ही.... और तुमको भी ख्याल नहीं रहा।
जय ममता के कंधों पर हाथ रखता है, और कुछ बोलने ही वाला था, की ममता ने घूमकर उसको एक चाटा मारा। जय ने ममता के दोनों हाथ पकड़ लिए और अपने गालों पर तीन चार थप्पड़ और मारे और बोला," मारो और मारो हमको, हम तुम्हारे गुनहगार हैं। दुनिया की हर माँ अपने बेटे का हर गलती माफ कर सकती है, पर शायद ये कोई भी माँ बर्दाश्त नहीं करेगी कि उसका बेटा उसके साथ ही वो सब करे, जो बन्द कमरे में वो उसके पिता के साथ करती है। तुम ने बिल्कुल सही किया, हमको सज़ा मिलनी चाहिए। लेकिन तुम ये बताओ, कि तुम रो क्यों रही हो? तुम तो कोई गलती नहीं कि हो, जो किये हैं हम किये हैं। हमारी वजह से तुम बहकी हो। तुम तो अपनी ओर से बिल्कुल पवित्र हो, और तुमको अपवित्र करने की कोशिश हमने की है। हमारी नज़रों में तुम जैसी पावन स्त्री, संसार में कोई नहीं है।" उसने ममता को वहीं कुर्सी पर बैठा दिया, जो अपनी नज़रें झुकाये उसके हाथों को अपने कंधों से लगातार हटाने का प्रयास कर रही थी। पर फिर जय ने ममता को शांत होने को कहा, और उसके लिए पानी लेके आया। ममता ने वो पानी का गिलास झटका देकर गिरा दिया। जय के दूसरे हाथ मे जग था, उसने फिर से गिलास में पानी भरकर दिया। जय," माँ, पानी पियो, तुम शांत हो जाओ।
ममता ने उसकी ओर, देखा और लगभग पछताते हुए बोली," थोड़ा ज़हर डाल दो और फिर दो।"
जय- माँ, तुमको ज़हर देने से पहले हम, अपने को मार डालेंगे। तुम्हारी तकलीफ देखकर हमको ऐसा लग रहा है, जैसे कि हमने तुमको खो दिया है। हम तुमको खोना नहीं चाहते हैं।
ममता को ऐसा लगा कि जय को अफसोश है, इसलिए उसके हाथों से गिलास का पानी ले ली और घूँट मारकर बोली," चाहते क्या हो तुम?
जय- हम तुमसे कुछ पूछना चाहते हैं ?
 
जय के चेहरे पर कामुकता और वासना पूरी तरीके से चमक रहे थे। ममता ने फौरन अपनी अर्ध नग्न शरीर को नाइटी के मुड़े हुए हिस्से से ढका, और जय को आश्चर्य भरी नजरों से देखती रही। जय बिस्तर पर बॉक्सर से लण्ड निकालकर बैठा था। जय ममता के करीब पहुंचा और उसके चेहरे को अपने हाथों से पकड़ा और उसके होंठों को चूमने लगा। ममता को कुछ समझ नहीं आया कि वो क्या करे ? उसका अपना बेटा उसके होंठों को चूस रहा था। ममता सपने की वजह से अभी कामुक थी। उसे भी ये चुम्मा अच्छा लग रहा था। जय उसको चूमे जा रहा था, और फिर ममता ने भी उसको बाहों में भर लिया। दोनों खो गए थे, फिर जय ने ममता की नाइटी उतारनी चाही। ममता के कंधों से नाइटी उतर चुकी थी। तभी जय उसके गर्दन और गले को चूम रहा था। जय और ममता आगे निकलते जा रहे थे। तभी ममता की आंखे खुली और उसने देखा कि वो और किसीके साथ नहीं अपने बेटे के साथ ये सब कर रही थी। ममता उसे दूर करना चाही लेकिन जय उससे अलग नहीं होना चाहता था।
ममता- जय, छोड़ो हमको, ये गलत है। हमको जाने दो।
जय कुछ नहीं बोला, उसने ममता की आंखों में देखा, और उसके होंठों को फिर चूम लिया।
ममता ने उसको धक्का दिया, बिस्तर से उठी और खड़ी हो गयी। वो अचंभित, और डरी हुई थी। जय बिस्तर से उठा और ममता को बाहों में पकड़ लिया। वो ममता की नाइटी उतारने पर उतारू था। उसने ममता के बाल पकड़ लिए, और उसकी आँखों में देखकर कहा," तुम कितनी सुन्दर हो। तुम खुद की इच्छा को क्यों मार रही हो? हम जानते हैं कि तुम्हारे अंदर काम वासना भड़क रही है। तुम्हारी आँखे कह रही है, कि तुमको अपने बुर में लण्ड चाहिए। देखो ये लण्ड, माँ जिसे तुमने ही जना है।" उसने ममता का हाथ पकड़के अपने लण्ड पर रखा।
ममता उसके लण्ड को हाथ मे पकड़ी तो, उसे उसके लण्ड की लंबाई का अनुमान हुआ, वो अचंभित हुई कि एक 21 साल के लड़के का लण्ड इतना बड़ा और मोटा कैसे हो सकता है। ममता लण्ड पकड़े खड़ी थी। जय ममता की नाइटी को फिर उतारने लगा। पर ममता ने उसे झटका दे दिया। जय ने उसको बोला," तुमने हमको तो बहुत बार नंगा देखा होगा, आज अपने बेटे के सामने तुम एकदम नंगी हो जाओ।"
ममता अब तक उसका लण्ड पकड़के खड़ी थी। पर जब जय ने माँ और बेटे के रिश्ते का जिक्र किया, तो उसको समझ आया कि वो क्या कर रही थी। ममता जैसे नींद से जागते हुए, सब छोरकर ड्रेसिंग टेबल के पास भाग गई।
 
फिर दोनों के बीच करीब आधे घंटे बात हुई। जय सब सुनने के बाद अचंभित था। फिर उसने कविता को फोन रखने को कहा। उसने अपनी सोई हुई माँ को देखा, तभी ममता ने अपनी चूतड़ को खुजलाते हुए, चूतड़ आधे नंगे कर दिए। ममता ने अंदर कुछ भी नहीं पहनी थी, पेटीकोट तो दूर कच्छी भी नहीं थी। उसकी गाँड़ एकदम चिकनी, गोरी, सुडौल थी। गाँड़ की दरार के बीच साँवलापन था। गाँड़ चौड़ी भी बहुत थी। जय ममता के गाँड़ के करीब पहुंचा और उसको छूना चाहता था, पर कुछ सोचकर रुक गया। उसने ममता के खूबसूरत चुत्तरों के पास अपनी नाक ले आयी, और उसको निहारते हुए सूंघने लगा। फिर ममता के गाँड़ की ओर सर रखके लेट गया। जैसे ही वो लेटा उसको ममता की जांघों में फंसी अधनंगी बुर दिखने लगी। उसकी बुर हल्के झाँठ थे। बुर चुदने की वजह से उसकी पत्तियां, बाहर झांक रही थी। जय ये जानते हुए की ममता उसकी माँ है, और जग सकती है, ये की जगने के बाद ममता क्या करेगी, अपनी जन्मद्वार को छुआ। उसे ऐसा लगा कि वो जैसे स्वर्ग की चौखट को छू रहा है। इतना कोमल, इतनी सुंदर और इतना कामुक दृश्य वो शायद पहली बार देख रहा था और महसूस कर रहा था। उसने ममता की ओर देखा, वो अभी भी सो रही थी। उसने ममता के बुर को फैलाया, और एक चुम्मा ले लिया। उसकी बुर की मादक गंध उसको कब मदमस्त कर गयी, पता ही नही चला। वो उसकी बुर को चूसना शुरू कर दिया। ममता की बुर धीरे से गीली होने लगी। वो इस एहसास को सोच रही थी, की वो सपने में है और जय उसकी बुर चूस रहा है। सपने में किसका बस होता है, सपने में तो कुछ भी हो जाता है। उसके बुर में इस वक़्त उस मधुर कामुक सपने की वजह से ही पानी निकल रहा था। सपने में वो मंदिर के प्रांगण में नंगी लेटी थी, और जय उसकी बुर को चूसे जा रहा था। चारों तरफ वो कामुक नंगी प्रतिमाएं, सजीव होकर काम क्रीड़ा का आनंद ले रही थी। ममता का ये सपना बहुत मीठा था। जब जय उसके स्वप्न में अपना लौड़ा उसकी बुर में डालने वाला था, की तभी उसे कुछ अजीब एहसास हुआ और उसकी नींद खुल गयी। उसकी आंखें खुली तो, जय सच में उसके बुर में लण्ड घुसाने का प्रयास कर रहा था। ममता की आँखें खुली की खुली रह गयी। उसका बेटा सच में वो सब कर रहा था।

ममता और जय के बीच क्या सच में कुछ हो पायेगा? क्या ममता जय को माफ करेगी?
 
ममता ने उससे चाय ले ली, और दरवाज़ा बंद कर दिया। ममता ने चाय बनाई और जय को उठाया। जय उठा तो ममता ने उसे चाय दी। जय फ्रेश होकर आया तो, उसने ममता को अपने साथ बाहर चलने को कहा। मार्केट घूमने और शॉपिंग करने। जय ने हमेशा की तरह, टी शर्ट और जीन्स डाली और ममता ने नीली रंग की साड़ी। उस ब्लाउज में पीछे से पूरी पीठ नंगी थी और सिर्फ दो धागों से बंधी थी साथ ही ममता की चुच्चियाँ ऊपर से काफी हक़द तक दिख रही थी। ममता को कविता ने ही ऐसी ब्लाउज सिलवाने को कहा था, ताकि ममता देहाती बनकर ना रह जाये। ममता ने साड़ी भी काफी नीचे बांधी थी, और गाँड़ की शेप भी काफी मस्त निकलके आ रही थी। जय उसको अपनी माँ कम और बीवी की तरह ज़्यादा घुमा रहा था। ममता ने कपड़े लिए और जय कविता दोनों के लिए कपड़े लिया। अब तो पैसों की तंगी भी नही थी। ममता और जय ने लगभग बीस हज़ार की शॉपिंग की। रात के नौ बजे चुके थे। और दोनों काफी थक चुके थे। वापिस होटल किसी तरह पहुंचकर दोनों ने कमरे में ही खाना मंगा लिया।
दोनों ने खाना खाया। फिर ममता बोली- जय कल कहां जाना है?
जय- कल हम शहर से दूर वॉटरफॉल है वहां जाएंगे। और भी कई ऐतिहासिक क़िले और जगहें है। वहाँ जाएंगे।
ममता- अच्छा है।
जय- आज तुमको कैसा लगा माँ, अच्छा लगा मंदिर?
ममता- हाँ, बेटा बड़ा अच्छा था, भगवान के दर्शन हो गए। हम तो धन्य हो गए।
जय- हम जानते थे कि तुमको बहुत मज़ा आएगा। तुम आज कितना खुश लग रही हो?

ममता- हाँ, हमको आजतक कोई ऐसे घुमाने कोई नहीं लाया है। तुम पहले हो जो लेके आये हो। सच आज बड़ा अच्छा लगा।
जय- माँ अब देखना, तुमको कहाँ कहाँ घुमाते हैं। अब हम करोड़पति हैं। तुमको हमेशा ऐसे ही खुश देखना चाहते हैं।
ममता- चल अच्छा सो जाओ। रात बहुत हो गयी है और सुबह छः बजे ही निकलना है।
जय- हहम्मम्म, सही कह रही हो। तुम भी सो जाओ।
ममता- हाँ, हम कपड़ा बदल लेते हैं।
ममता ने नाइटी पहन ली और जय ने बॉक्सर।जय सिर्फ बॉक्सर में ही था। ऊपर गंजी भी नहीं पहनता था। जानबूझकर अपना लण्ड खड़ा करके, बॉक्सर में तंबू बनाके घूमता था। ताकि ममता की नज़र उसपर बराबर बनी रहे और उसके चेहरे के भाव देख पाए।
फिर दोनों अपनी अपनी साइड पकड़के सोने की कोशिश करने लगे। ममता ने गुलाबी नाइटी पहनी हुई थी। ममता की आदत थी कि सोते समय वो अपनी टांगे हाथें इधर उधर फेंकती थी।
ममता सो चुकी थी, पर जय की आँखों में नींद नहीं थी। वो करवट लेकर ममता की ओर मुड़ा। ममता की पीठ और भारी गाँड़ जय की ओर थी। जय ममता के बदन को पकड़ना चाहता था। उसका हाथ, ममता की कमर पर जाना चाहता था, पर दिमाग ने उसे रोक लिया।
ममता, तभी नींद में उसकी ओर मुड़ी, उसकी जुल्फ़े, खुल गयी थी। साथ ही उसके नाइटी के ऊपर के बटन, खुल गए थे। उसकी दांयी चुच्ची के निप्पल बस ढके थे। साथ ही उसकी बांयी टांग खड़ी थी, जिससे नाइटी बिल्कुल चिकनी और कोमल जांघों की जड़ों में लग गया था। जय को समझ नही आ रहा था कि वो अपनी माँ ममता के कपड़े संभाल दे या, ममता एक औरत को नग्न करके अपनी बना ले। तभी उसे, ममता कामोत्तेजक, अर्धनग्न नृत्यांगना सी लगने लगी, जो मंदिर की मूर्तियों पर बनी थी। उसे अब खुद को रोक पाना मुश्किल था। पता नहीं कहां से उसमे हिम्मत आयी, वो पहले थोड़ा खिसकके ममता के करीब आया। और ममता के उलझे बालों को उसके बांये कान के पीछे, लगा दिया। उसने फिर उसकी सूनी मांग को हल्के से चूम लिया। और मन ही मन निश्चय किया, की ममता की मांग, अगर कोई भरेगा तो वो ही भरेगा।
इससे पहले की वो और कुछ करता, ममता ने दूसरी ओर फिर करवट ले ली। वो मन मसोस रहा था, कि तभी उसका फोन बजा। फोन साइलेंट मोड पर था, उसने देखा कि कविता का फोन है। उसने फोन उठाया तो कविता बोली,
कविता- क्यों कुछ मामला बढ़ा कि नहीं?
जय- नहीं, अभी तक कुछ नहीं। वो धीरे से बोला।
कविता- हम तुमको कुछ बताना चाहते हैं। माँ को पटाने में तुमको मदद मिलेगा।
जय- वो क्या?
 
दोनों वहां से सीधे होटल रिसेप्शन में पहुंचे, और चाबी जमा की। फिर जय ने बाहर निकलकर, ऑटो ले ली। ममता और जय दोनों मंदिर की ओर निकल पड़े। मंदिर वहां से कोई 6 कि मी दूर था। ऑटो दोनों को वहाँ पहुंचाकर, चला गया। वहां बाहर में उन्होंने फूल और प्रसाद लिए और मंदिर की ओर चल दिये। थोड़ी दूर चलने पर उन्हें लोगों की एक कतार दिखाई दी। वो दोनों लाइन में खड़े हो गए। थोड़ी देर बाद लाइन में बढ़ते हुए, वो उस द्वार के पार पहुंच गए जहां मंदिर के ऊपर बनी अश्लील और कामुक मूर्तियां तराशी हुई थी। वहां बेहद नंगी कामोत्तेजक चुदाई के आसनों में महिला और पुरुषों की कामवर्धक मूर्तियां थी। पुरुषों का लण्ड चूसते हुए, उनके साथ खड़े होक, गोद में चढ़कर चुदते हुए, एक साथ दो पुरुषों के साथ महिलाओं की यौन क्रियाएं इत्यादि सबकी तस्वीरें साफ थी। जय यही सब दिखाने लाया था, ममता को। उसने ममता की ओर देखा, तो ममता का मुंह खुला था और सर उठाये हुए वो उन सजीव प्रतिमाओं को निहार रही थी। उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि किसी मंदिरों के बाहर, ऐसी तस्वीरें और प्रतिमाएं भी हो सकती है। जय और ममता धीरे धीरे आगे बढ़ते गए, और कोई डेढ़ घंटे बाद उनकी बारी आई, फिर वहां पूजा करके, वो दोनों बाहर आ गए। ममता ने जय के माथे पर तिलक लगा दिया। तो जय ने ममता के पैर छू लिए। ममता ने उसे आशीर्वाद दिया, तुम्हारी हर इच्छा पूरी हो। खुश रहो।
फिर वो दोनों आसपास के और मंदिर घूमे। वहां कुछ और मंदिरों में भी वैसे ही कारीगिरी की गई थी। ममता उनको खूब गौर से देख रही थी। जय को गाइड ने बताया कि चंदेल राजाओं ने इन मंदिरों का निर्माण करवाया था, जब लोगों में ब्रह्मचर्य बढ़ने लगा, तब गृहस्थ जीवन से भी मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है, ये बताने के लिए। ये मंदिर इसीलिए प्रसिद्ध हैं। दोनों मा बेटे ने सारी बातें चाव से सुनी। अब चुकी दोपहर के डेढ़ बजे चुके थे, ममता ने जय से कहा कि बेटा, हमको भूख लग रही है। चलो कुछ खा लेते हैं।

जय- ठीक है, चलो हमको भी भूख लगी है। वहां सामने वाली रेस्टोरेंट में चलते हैं।
जय ममता को लेकर होटल में घुस गया। वहां दोनों एक टेबल पर बैठ गए। और खाना भी आर्डर कर दिया। ममता पानी पी रही थी, की जय के पीछे देखकर उसके मुंह से पानी निकाल गया और खांसने लगी। जय ने पीछे मुड़के देखा तो होटल की दीवारों पर वही मंदिरों पर बनी काम क्रीड़ा वाली मूर्तियों की बड़ी तस्वीरें लगी हुई थी। जय और ममता ने एक दूसरे से चुराके चारों ओर देखा तो वहां उनको हर तरफ वैसी ही तस्वीरें थी। पर ना तो जय ने कुछ कहा ना ही ममता ने। दोनों वैसे ही बैठे रहे और खाना का इंतज़ार कर रहे थे। थोड़ी देर में, खाना आया। दोनों ने जमकर पेट पूजा की और वापिस होटल आ गए।
होटल जाकर सीधा रूम गए, क्योंकि दोनों थक चुके थे। तो रेस्ट करने लगे। करीब 2 घंटे बाद ममता की आँखे खुली तो, देखा जय अभी भी सो रहा है। वो उठके बाथरूम गयी। वहां उसने साड़ी उठाके मूतने लगी। सीटी की आवाज़ के साथ मूत की धार निकलने लगी। मूतने के बाद उसने अपनी बुर को धोया, उसे एहसास हुआ कि बुर उसकी पनिया गयी थी, उन मूर्तियों को देखके। वो बुर को पकड़े हुए ही, उन प्रतिमाओं को याद करने लगी। उन नग्न नर्तकियों के काम क्रीड़ाओं और काया को याद कर, उसकी बुर पनिया गयी थी। वहीं जय का अंडरवियर रखा था, इस कामाग्नि की जलन ऐसी चढ़ी की वो अपने बेटे के अंडरवियर को अपनी बुर पर रगड़ने लगी। उसे एक लण्ड की ज़रूरत महसूस हो रही थी, पर बेचारी प्यासी औरत क्या करती? उसके नसीब में फिलहाल लण्ड नही था। थोड़ी देर में वो झड़ गयी और जय के अंडरवियर को पानी में, खंगालकर लटका दी। उसे अंदर से ग्लानि होने लगी।जब वो बाहर आई तो जय सोया हुआ था, पर उसके बरमूडा में तंबू बना हुआ था। ममता ने बहुत कोशिश की कि उसकी नज़र उसपर से हट जाए। शायद ये पहली बार था कि वो जय को एक पूर्ण पुरुष के रूप में देख रही थी।
पर तभी, रूम की घंटी बजी। ममता हड़बड़ा गयी, उसने देखा कि 5 बज चुके थे। उसने दरवाज़ा खोल तो सामने रूम सर्विस वाला था, वो चाय लेकर आया था।
 
जय ने ममता की ओर देखा वो बेहद हल्के खर्राटे लेकर चैन से सो रही थी। उसने कंबल के अंदर अपना सर घुसा लिया और मोबाइल की टोर्च जला ली।ममता के कोमल तलवे बहुत सुंदर लग रहे थे। जय ने उसके तलवों को हल्के से छुवा और धड़कते दिल से अपने होंठों से चूम लिया। ममता की गुलाबी रंग की साड़ी उसके घुटनो से हल्के ऊपर तक उठ गई थी। जिससे उसकी चिकनी जांघों का पिछला हिस्सा बाहर झांक रहा था। जय उन दृश्यों को बड़े कामुक नज़रों से देख रहा था, वो दृश्य थे भी कामुक। तभी ममता ने एडजस्ट करते हुए करवट ले ली, जिससे उसकी साड़ी और ऊपर उठ गई और उसकी जांघो के बीच फंसी पैंटी का निचला हिस्सा दिखने लगा। जय ने लाइट को थोड़ा करीब लाया, ममता ने सफेद रंग की पैंटी पहनी हुई थी। जय ने उस हिस्से को गौड़ से देखा जहां पैंटी उसकी बुर से चिपकी हुई थी। जय का मन तो हो रहा था कि ममता की पैंटी उतार दे और उस जगह के दर्शन कर ले जहां से उसने इस दुनिया में क़दम रखा था, ममता की बुर से। जय ने अपने पर काबू रखा और बस उसकी नंगी जांघों का दर्शन करता रहा। वो अपना लण्ड मसलने के अलावे कुछ कर भी नहीं सकता था। जब उससे बर्दाश्त नहीं हुआ तब वो उठके बाथरूम चला गया और वहां जाकर ममता को खयालों में नंगी कर दिया, जहाँ ममता उसको अपने खूबसूरत नंगी चुचियों पर मूठ गिराने को बोल रही थी। थोड़ी ही देर में वो अपना मूठ गिराके वापिस आकर सो गया। दोनों अगले दिन दोपहर तीन बजे तक खजुराहो पहुंच गए। दोनों ने होटल ले लिया, और कमरे में चले गए। ममता सीधे नहाने चली गयी। दोनों बारी बारी फ्रेश हो गए और उस दिन आराम करने की सोच ली। अगले दिन ममता सुबह जल्दी उठी और तैयार हो गयी। वो जय को उठाने गयी तो जय उठ ही नही रहा था, वो करीब 10 मिनट बाद उठा और अपनी माँ को देखता ही रह गया। ममता ने सफेद रंग की साड़ी पहन रखी थी, जिसमे लाल रंग का चौड़ा बॉर्डर था।

उसकी सफेद ब्लाउज बिना बाहों वाली थी, जिसमें उसकी काँखें और कामुक लग रही थी। उसकी कमर और पेट पूरी खुली थी। लंबी और गहरी ढोंडी बहुत उत्तेजक लग रही थी। जय को लगा क्यों ना ममता के कमर पर चूमते हुए उसकी ढोंडी को छेड़े। ममता की नज़र पहली बार जय की नज़रों पर पड़ी जो उसकी हुस्न की डकैती कर रही थी। ममता ने ये देखा तो, उसे अजीब लगा कि उसका बेटा उसकी कमर ऐसे देख रहा है।
ममता- क्या हुआ, कुछ लगा है क्या? उसने अपने आँचल को हटा दिया। और अपने पेट को हाथ से साफ करने लगी।
जय- हाँ, इधर आओ हमारे पास हम देखते हैं।
ममता उसके पास आ गयी, जय ये मौका कैसे जाने देता। जय उसके पेट के करीब आया और ममता को हाथ अपने कंधों पर रखने को कहा। ममता ने वैसे ही किया। जय ममता के पेट को हल्के हाथों से सहलाने लगा। ममता की ढोड़ी ठीक उसके सामने थी। उसका मन तो उसे चाटने, का हो गया। उसके कमर को और पेट को वो मज़े लेके सहला रहा था। ममता की गोरी चिकनी हल्की चर्बीदार नंगी कमर उसकी उत्तेजना दुगनी कर रही थी। पेट पर हल्की चर्बी साड़ी के कसके बांधने से हल्की लटकी थी। क्या मस्त लग रही थी दिखने में।
जय मस्ती ममता की आवाज़ के साथ टूटी," साफ हो गया क्या था बेटा?
जय- आँ.... आ कुछ नहीं माँ, ये तो पाउडर है, जो कि लग गयी है।
ममता- अच्छा... वो है। ओह्ह हम लगाए थे, लग गया होगा। जाओ तुम नहा लो। ममता की नज़र उसके पैंट में बनी तंबू पर थी। जय ने उसे देखते हुए देखा तो उसने नज़र हटा ली और, वहां से चली गयी।
जय के मन में उम्मीद की किरण जागी, शायद ममता भी वैसे सोच रही हो। पर फिर उसने सोचा कि, ममता उसकी माँ है वो ऐसा क्यों सोचेगी? क्या वो भी सेक्स की प्यासी है, हाँ हो भी सकता है, क्योंकि उसे भी तो लण्ड नहीं मिलता। अगर ऐसा होगा तो ये काम आसान हो सकता है। ये सब सोचते हुए, वो नहाके बाहर आ गया। उसने देखा उसकी मां तैयार थी। वो उसको जल्दी चलने के लिए बोली। जब जय बाहर आया तो ममता उसे ही देख रही थी। जय का गठीला बदन उसको अपने बेटे की ही ओर आकर्षित कर रहा था। उसने सिर्फ एक तौलिया लपेटा हुआ था।जय ने सफेद कुर्ता पायजामा पहना और ममता की ओर मुस्कुराके बोला कि," माँ, चलें क्या?
ममता- हाँ, बेटा चल ना।
 
अगले दिन खाते समय जय ने ममता से कहा," माँ, क्यों ना कहीं घूमने चलें। हमारी परीक्षाएं भी खत्म हो गयी हैं और दिल्ली में रहकर हम काफी बोर हो रहे हैं।" ममता उस वक़्त पूजा कर रही थी और घर में धूप दिखा रही थी। वो एक कॉटन की पीली साड़ी में थी और भीगे बाल खुले हुए थे। उसकी पेट आगे से साफ नंगी थी और ढोड़ी झलक रही थी।
कविता निवाला खाते हुए," ये अच्छा आईडिया है। मूड भी फ्रेश हो जाएगा, परीक्षा से थकान भी मिट जाएगी।
ममता," ठीक है, सब साथ जाएंगे, जहां भी जाएंगे। लेकिन जाएंगे कहाँ?
जय- खजुराहो। जय का ये बोलना था कि कविता सरक उठी क्योंकि वो जानती थी कि खजुराहो क्यों प्रसिद्ध है और खांसने लगी। ममता ने उसे पानी का गिलास दिया," आराम से खाओ कविता।"
ममता- अच्छा खजुराहो में क्या क्या है घूमने लायक ?
जय- माँ वहाँ भव्य मंदिर हैं और पर्यटन स्थल भी है। वो विश्व धरोहरों में से एक है।
ममता मंदिरों के बारे में सुनकर उत्साहित हो गयी और बोली, अच्छा है, फिर तो चलना चाहिए। अगले सप्ताह चलते हैं। आज तुम टिकट करा लो, तीनों की।
कविता- हम नहीं आ पाएंगे, क्योंकि हम पहले ही एक हफ्ता छुट्टी ले चुके हैं और बहुत काम बाकी है। आप दोनों जाइये।
जय- कविता दीदी तुम भी चलो ना और मज़ा आएगा। छुट्टी ले लो ना, मिलेगी नहीं क्या?
कविता- बोले ना कि बहुत काम बाकी है, और आरिफ सर अगले हफ़्ते हमको बहुत बिजी रखने वाले हैं, क्योंकि रिटर्न फ़ाइल होने शुरू हो गए हैं, और काम हद से ज्यादा है।
ममता- फिर ठीक है, बाद में जाएंगे। जब तुम खाली रहोगी तब।
कविता- अरे नहीं माँजई, जय और आप दोनों चले जाइये। अभी जय की परीक्षा खत्म हुई है, अच्छा रहेगा।
ममता- फिर ठीक है, जय हम और तुम चलेंगे।
फिर सब खाना खाके, उठ गए और ममता अपने रूम में चली गयी। जय ने कविता को कमर से पकड़ लिया और गुस्से में बोला," तुम साथ क्यों नहीं चल रही हो? तुम नही रहोगी तो मज़ा नहीं आएगा?
उसपर कविता उसके माथे पर हाथ से हल्का धक्का मारके बोली," अरे बुद्धूराम ले जाओ ना माँ को अकेले तब ना तुमको उसको पटाने का मौका मिलेगा। अकेले तुम दोनों रहोगे तभी कुछ होगा ना। UPSC कैसे करेगा रे तुम। औरत को कैसे पटाते हैं पता नहीं क्या? जब तुम माँ को वापिस लेके आना, तो ममता हमारी माँ और सासू माँ से सौतन बन जानी चाहिए।
जय उसको देखके हसने लगा।
जय ने टिकट्स बुक कर लिए ममता और उसका। और फिर वो दिन आ गया जब ममता और जय खजुराहो के लिए निकल पड़े। उनकी टिकट ऐसी थर्ड में आर ए सी में थी। उनको अगले दिन शाम तक पहुंचना था। दिन तो माँ बेटे ने काट लिया, फिर वो समय आया जिसका जय को इंतज़ार था, जब वो अपनी सपनों की रानी अपनी माँ ममता के साथ चिपक के सोएगा। ममता और जय खाना खाने के बाद एक दूसरे की ओर पैर करके सो गए। ममता तो तुरंत सो गई पर जय को नींद कहाँ आ रही थी। रात के करीब 11 बज चुके थे। और पूरे बोगी की रोशनी बंद थी।
 
ममता और जय फिर सोने की कोशिश करने लगे। रात में पर दोनों को नींद कहाँ आ रही थी। जय ने आज दिनभर ममता की हरकतों को याद किया, उसका साया बांध के बाथरूम से आना, यूं खुले आम लड़कियों के बारे में बात करना, फिर मूतते समय अपनी चिकनी गाँड़ दिखाना, उसने मन में सोचा कि शायद उसकी तरफ से ग्रीन सिग्नल है।
जय ने ममता की ओर देखा ममता दूसरी तरफ करवट लेकर, उसकी आधी पीठ नंगी थी। और उस नाइटी की बांहें घिसकने की वजह से कंधे भी नंगे थे। उसका लण्ड ये देखकर खड़ा था।जय ने इस बार पहले ममता को पूरी तरह उत्तेजित करने की सोची। वो उसके करीब आ गया। और उसकी नंगी पीठ पर हल्के से छुआ। ममता के कंधे पर अपने होंठों से छुआ। फिर उसके बाल को हटाकर उसके कान के पीछे चूम लिया। ममता कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी। जय ने देखा कि ममता, वैसे ही लेटी रही। जय ने उसकी गर्दन को चूमा।
जय ने ममता की गाँड़ पर हाथ रखा, और उसके चुत्तरों को सहलाया। फिर उसकी नाइटी, को खींचकर उसकी जांघों तक ले आया। और अंदर हाथ घुसा दिया। ममता ने ब्रा पैंटी कुछ नहीं पहनी थी। उसका एक हाथ ममता की चुच्चियों को और दूसरा उसकी बुर को टटोल रहा था।
पर ममता कुछ नहीं बोली। जय ने उसके बाद उसके चेहरे को पकड़के अपनी ओर घुमाया। ममता जैसे जबरदस्ती आंख बंद की हुई थी, वो आहिस्ते से थूक घोंट रही थी।
जय," आंखे खोलो ना माँ।
ममता," जय हमको ये नहीं करना चाहिए, ये सही नहीं है।
जय," एक औरत मर्द का मिलन तुमको सही नहीं लगता माँ। तुम एक औरत हो और तुम खुद की प्यास को मत मारो। अपनी इच्छाओं को मारना भी अपराध है। हम तुम्हारी हर इच्छा पूरी करेंगे।
ममता- पर ये रिश्ता अपने बेटे के साथ कैसे बनाऊंगी। औरत और मर्द का रिश्ता तो तुम्हारे बाप के साथ है। क्या तुम अपने बाप की जगह लेना चाहते हो ?
जय- तुमने ही कहा था कि अब तुम और कविता हमारी जिम्मेदारी हो। इसलिए तुम दोनों को हम बाबूजी की तरह संभालेंगे। तुम भी यही चाहती हो ना।
ममता नज़रें झुकाये हुए- जय लेकिन तुम्हारे साथ ये करके, हम कैसे खुद से नज़रें मिलाएंगे और क्या तुमको बुरा नहीं लगेगा।
जय उसके हाथों को पकड़ लिया और बोला," माँ ये रिश्ता समाज ने हमको दिया है ना, ये कहाँ लिखा है कि बेटा और माँ में ये रिश्ता कायम नहीं हो सकता। अगर तुम्हारे अंदर की औरत प्यासी है, तो क्या उसको शांत नही करोगी। अगर समाज के बनाये बंधन इतने मज़बूत होते तो, तुम्हारी बुर कल रात पनियाती नहीं, जो अभी भी हो रही होगी। ना तुमको देखके हमारा लौड़ा खड़ा होता।" ममता का हाथ पकड़के लण्ड पे डाल दिया।

कल रात तुम सपने में हमारा नाम लेकर चुदवाने को बोल रही थी। मतलब तुम्हारे सपने में हम तुमको चोद रहे थे। जब तुम सपने में हमसे चुदवा रही थी, तो असली में क्यों नहीं ?
ममता- कल रात हम तुम्हारा नाम ले रहे थे..... क्योंकि सपने में मंदिर की नंगी प्रतिमायें सजीव हो उठी थी, और तुम ही एक मर्द थे तो जो हमको मंदिर के प्रांगण में नंगी लिटाकर करने वाले थे। पर वो तो सपना था ना।
जय ने उसको बोला," उस सपने को सच करने का समय आ गया है। और ममता के होंठों को चूमने लगा। ममता ने ना तो उसका सहयोग दिया और नाहीं विरोध किया। बस उसके चुम्बन का एहसास कर रही थी। चुम्मा खत्म करने पर ममता बोली, ये गलत है, पर कितना अच्छा लग रहा है।
जय- कभी कभी गलती भी हसीन होती है।
ममता- किसीको पता चल गया तो? कितनी बदनामी होगी।
जय- किसीको पता नहीं चलेगा, इस कमरे में तुम और हम हैं। और कोई नही है। तुम खुद को स्वच्छंद हो जाने दो माँ।
 
बिस्तर पर ममता बिल्कुल नंगी लेटी थी। उसे विश्वास ही नही हो रहा था कि अपने बेटे के साथ इस अवस्था में चिपकी हुई है। हालांकि वो इस खेल की पुरानी खिलाड़ी थी पर बेटे के सामने शर्म से आंखे बंद हो रही थी या फिर उसकी तरफ नहीं देख रही थी। जय ने इस बात को समझ लिया। उसने ममता के माथे को चूमा और उसके गालों को सहलाते हुए कहा," तुमको शर्म आ रहा है, है ना?
ममता," हहम्मम,। ममता दूसरी ओर देखते हुए बोली।
जय- शशिकांत जब तुमको चोदता है, तब शर्म आती है?
ममता ने उसकी ओर चौंकते हुए देखा," तुम्हें किसने कहा?
जय- ये सब बातें छुपती नहीं है, हमारी भोली माँ। कभी ना कभी तो पता चल ही जाता है। ममता हम चाहते तो कल रात ही तुमको ये सब बताकर तुमको ब्लैकमेल कर सकते थे और चोदते तुमको। पर हम चाहते हैं कि जब तुम हमसे चुदो तो खुलकर चुदवाओ। तुमने तो हमको पागल कर दिया है माँ। और उसने ममता के होंठों का रसास्वादन शुरू कर दिया। ममता ने उसको रोका नहीं।
थोड़ी देर बाद ममता साँस उखड़ने की वजह से उससे अलग हुई। फिर ममता ने जय की ओर देखा और मुस्कुराते हुए बोली कि," शर्म तो औरत का गहना होता है। इसी शर्म को जब हम औरतें बंद कमरों में धीरे धीरे उतारती हैं तभी मर्दों को मज़ा आता है। हमारा ये गहना तुमने उतार दिया।
जय- माँ....
ममता - माँ नहीं ममता कहो। बिस्तर में जो औरत नंगी पड़ी हो तो वो माँ नहीं होती। अभी हम तुम्हारी माँ नहीं बल्कि एक औरत हैं।
जय- ठीक है ममता। पर इस वक़्त हम खुद को रोक नहीं पा रहें हैं। हमको वो जगह देखना है जहां से हम पैदा हुए थे। जय ने उसकी जांघों को सहलाते हुए कहा। जय उसकी जांघों के पास आ गया। उसकी जाँघे थोड़ी थुलथुली थी। एक दम चिकनी और गोरी। जय जांघों को चूम रहा था और ममता गुदगुदी की वजह से हंस रही थी। फिर जय ने ममता की जांघों को अलग किया और जांघों के अंदरूनी हिस्से को चूमते हुए उसकी बुर को छुआ। ममता सिहर उठी। ममता की बुर पर बेहद हल्के बाल थे जिससे ये पता चलता था कि उसने चार पांच दिन पहले ही बाल काटे थे। बुर की फाँके मोटी और गहरी सावली थी। बुर की पत्तियां बाहर की ओर निकली थी। उससे काफी लसलसा पारदर्शी चिपचिपा पदार्थ निकल रहा था, जो उसकी बुर को चिकना बना रहा था और ममता की कामुकता का प्रमाण था। जय को उसकी खुशबू अपने नथुनों को सुगंधित करती हुई महसूस हुआ। जय ने अपने हाथों में लगे ममता के बुर के रस को चाटा। ममता उसे देख मुस्कुराई और बोली," यहीं से पैदा हुए थे तुम, देख लो।
जय उसकी टांगों के बीच आ गया था और उसने उसके बुर को चूम लिया। जय ने बुर की फाँकों को अलग किया अंदर गुलाबी सा दिखने लगा। बुर के पत्तियों के बीच बुर से निकला चिपचिपा पदार्थ लाड़ की तरह लटक रहा था।जय ने जीभ से उसको मुंह मे ले लिया। फिर ममता के बुर को अच्छे से चाटने लगा।
 
पहले तो उसने चाटकर पूरे बुर के रस को चूस लिया, बल्कि यूँ कहें कि बुर की जीभ से सफाई की। ममता को ऐसा आनंद पहली बार मिला था, क्योंकि शशिकांत ने कभी बुर को चूसा नहीं था। ममता को ऐसा असीम सुख का अनुभव खुद अपने बेटे से मिल रहा था। ममता अपने दोनों हाथों से खुद को सहला रही थी। जय ममता के बुर के दाने को मुंह मे रखके चूसता कभी जीभ बुर में घुसाके चोदने लगता। बुर के अंदर का भी स्वाद ले रहा था। बुर अगर सूखने लगती तो उस पर थूक देता और फिर चाटने लगता। ममता की सीत्कारें उस कमरे में गूंजने लगी। ममता को बुर चुसवाने में असीम आनंद मिल रहा था। जय ने ममता के बुर के किसी हिस्से को नहीं छोड़ा। ममता छटपटाने लगी। उसको अब लण्ड की जरूरत थी। उसने जय को बोला," बुर में अब लण्ड चाहिए बेटा। हमको अब बहुत बेचैनी हो रही है। दो ना लण्ड।
जय ने ममता को तड़पते हुए देखा तो बोला," माँ ओह्ह सॉरी ममता तुमको लण्ड चाहिए ना। अपने बेटे का लण्ड लोगी? बोलो
ममता- हाँ जय हमको लंड चाहिए। दे दो प्लीज।
जय ने ममता से कहा," ऐसे नहीं मिलेगा लण्ड समझी। इसके लिए तुमको हमको खुश करना पड़ेगा। जय ममता की बुर को छेड़ते हुए बोला।
ममता बोली तड़पाओ मत बस हमको चोदो ना। बुर में लण्ड घुसाके।
जय- ऐसे नहीं तुमको भी कुछ करना होगा।
ममता- हम सब करेंगे, पर तुम अभी बस चोद दो। ममता बिन पानी की मछली की तरह तड़पते हुए बोली।
जय- नहीं ऐसे नहीं पहले हमको भी तो मज़ा आना चाहिए।
ममता- बोलो क्या करूं? तुम जीते हम हारे।
जय- ये हुई ना बात। बिस्तर से उतरो और कुतिया बन जाओ।
ममता ने वैसा ही किया और जय उसके सामने लण्ड लहराते हुए खड़ा हो गया । फिर ममता को लण्ड चूसने का इशारा किया और बोला," बिना हाथ लगाए चूसना है तुमको। ममता बिल्कुल एक पालतू कुतिया की तरह चूसने के लिए आगे बढ़ी। ममता जय के लण्ड को चूमने लगी। उस लण्ड की भूखी माँ ने अपने बेटे के साथ वो काम कर रही थी जो उसने उसके बाप के साथ किया था। जय ममता के चेहरे पर लण्ड रगड़ने लगा और ममता अपना मुंह खोले हुए जीभ लटकाई हुई थी। कुछ देर तक यूँ करने के बाद ममता ने अपना काम शुरू किया और उसके लण्ड को चूसने लगी। जय उसके मुँह में लण्ड घुसाकर बाकी सब ममता पर छोड़ दिया। ममता चुदाई के खेल की अनुभवी खिलाड़ी थी इसलिए उसने अपने अनुभव का फायदा उठाते हुए बहुत शानदार तरीके से लण्ड चूस रही थी। जैसा कि जय ने बोला था, बिना हाथ लगाए वो अपने मुँह का उपयोग कर रही थी।
 
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