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Incest परिवार बिना कुछ नहीं

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राम्या के गाल गुलाबी हो जाते हैं और वो आपके दोनो हाथो की उंगलियां आपस में आपस में घिसने लगती हैं। करण ये सब देख कर करण गाड़ी को रोड के किनारे पर रोक देता है । बाहर अभी पूरी तरह से अंधेरा हो चुका था और और उनकी गाड़ी अभी जंगल के बीच में थी जिस कारण गाड़ी के अंदर का कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। सिर्फ आने जाने वाली गाड़ियों की लाइट पड़ने से गाड़ी के अंदर रोशनी आ रही थी जिसे राम्या और खूबसूरत लग रही थी मानो बादलों में से चांद निकला हुआ हो।

करण जैसे ही गाड़ी रोकता है राम्या का दिल और तेजी से धड़कने लगता है। फिर वो गाड़ी से बाहर निकलता है और पीछे की खिड़की खोल कर अंदर बैठी हुई राम्या के पास बैठ जाता हूं जो अपने आप में सिमटी हुई जा रही थी।

करण: बताओ राम्या फिर आज किस मिलेगी क्या ?

राम्या शर्म के कारण कुछ नहीं बोलती और आंखे फिर से नीची कर लेती हैं। दिल तो उसका भी मचल रहा था लेकिन नारी सुलभ स्वभाव के करण उसके शर्म कुछ ज्यादा ही थी जिस करण उसके लब उसका साथ नहीं दे पा रहे थे।

करण समझ जाता हैं कि पहल उसे है करनी होगी इसलिए वो धीरे से अपना हाथ राम्या की गर्दन पर रखता हैं तो राम्या का बदन कांप जाता है और वो जोर जोर से हाथो कि उंगली आपस में रगड़ने लगी थी।अब करण धीरे से उसका चेहरा उपर की ओर उठाता हैं तो राम्या की आंखे शर्म के मारे बंद हो जाती हैं ।उसके होंठ खुल और बंद हो रहे थे मानो करण को आमंत्रण दे रहे हो कि आओ और हमे चूस लो।

करण उसकी हालत का मजा लेते हुए: बताइए ना राम्या , किस दोगी क्या ?

राम्या का रोम रोम तड़प रहा था , उसके होंठ जैसे जल रहे थे बस उसका जुबान उसका साथ नहीं दे पा रही थी। करण धीरे से आगे बढ़ता हैं और अपने होठ उसके होठों के बिल्कुल पास ले आता हैं जो राम्या महसूस करती है और अब उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था , उसके होठ मानो खुद ही जुड़ जाना चाह रहे थे करण के होंठो से।

करण अपना एक हाथ आगे बढ़ाते हुए राम्या के सिर के पीछे ले जाता हैं और अपने होठ राम्या के होंठो से टच करते हुए उसके गालों पर रख देता हैं और एक जोरदार किस करता है।

राम्या को एक सुखद अनुभूति हुई और उसके होठ थोड़े से और खुल गए मानो उन्हें बुरा लगा कि हमे प्यार क्यार क्यों नहीं किया ?

करण उसके गाल पर से अपने होठ हटा लेता है जिससे राम्या की आंखे खुल गई थी और अब वो पहली बार उससे नजर मिलाते हुए अपने होंठो को जीब से गीला करके पूरा उपर की ओर उभार कर अपनी आंखे फिर से बंद कर लेती हैं मानो अब उसने उसे खुला आमंत्रण दे दिया हो , ये सब करने से उसकी चूत में नमी आ गई थी। करण भी अब जोश में आ चुका था और वो अपने लिप्स को आगे करके राम्या के होंठो पर से टच करके जैसे ही गाल पर रखता हैं तो राम्या को इस बार बुरा लगा कि क्यों करण उसके लिप्स पर ध्यान नहीं दे रहा है। अच्छे से उसका गाल चूसने के बाद वो राम्या की आंखो में देखते हुए वो एक बार फिर से अपने होंठ राम्या के होंठो के पास लाते हुए उस तड़पने के लिए जैसे ही पीछे करने लगता है राम्या का धैर्य जवाब दे जाता हैं और वो गुस्से और जोश की वजह से वहीं सीट पर करण को एक धक्का देती हैं और उसके उपर आते हुए अपने होंठो को उसके होठों से जोड़ देती हैं और किस करने लगती हैं। करण का प्लान कामयाब हो गया था।

अब वो भी अपने हाथ उसकी कमर पर रखकर उसके किस करने लगता है । दोनो की आंखे बंद हो चुकी थीं। राम्या उसके होंठो को ऐसे चूस रही थी मानो कोई आइस क्रीम चूस रही हो।करण किस करते करते अपने एक हाथ को उसके सूट के अंदर घुसा देता है और उसकी नंगी कमर को सहलाने लगता हैं। जैसे ही करण की उंगलियां उसकी नंगी कमर पर पड़ती है उसे एक झटका सा लगता है और उसके होठ करण के होंठो से अलग हो जाते हैं। करण आंखे खुल कर एक बार फिर से उसकी तरह देखता हैं और उसके होंठ को देखकर अपने होंठो को गीला करके आंखे बंद कर लेता हैं राम्या उसकी तड़प समझते हुए फिर से उसके होंठ चूसने लगती हैं । दोनो का मजे के कारण बुरा हाल था। फिर दोनो एक लम्बी किस करने के बाद दोनो के होंठ अलग हो जाते हैं और राम्या को जैसा होश आ गया हो । ये भगवान मैं ये क्या कर रही थी अपने है पापा से किस ।

राम्या: पापा हम लेट हो रहे हैं और जल्दी से घर चलिए।

करण उसकी बात मानते हुए आगे आकर गाड़ी स्टार्ट करते हुए घर की तरफ चल देता हैं।

राम्या को यकीन करना मुश्किल हो रहा था कि को अभी उसने अपने पापा को किस किया वो कहीं कोई सपना तो नहीं था । शर्म के मारे वो गड़ी जा रही थी और उसकी हालत देख कर करण के होठ मुस्करा रहे थे।

उधर घर पर एक लम्बी नींद के बाद समर और माही दोनो उठ जाते हैं और एक दूसरे को किस करते हैं ।

काम्या के आने का टाइम हो गया था इसलिए को दोनो फ्रेश होने चले जाते है । थोड़ी देर बाद काम्या भी आ गई थी और वो खाना भी पैक करा कर लाई थी जिस कारण अब रात के खाने की नहीं फिक्र नहीं थी।

और वो तीनो हाल में बैठे हुए गप्पे मर रहे थे। तभी करण और रम्या भी घर आ चुके थे।

काम्या: क्या बात आज पूरा दिन ही लगा दिया ! एडमिन का क्या हुआ ?

राम्या: मम्मी सीट फूल हो गई थी लेकिन पापा ने करा दिया ।

काम्या: अच्छी बात हैं ये तो । चलो आप दोनो जल्दी से फ्रेश होकर आ जाओ । फिर खाना खाना हैं ।

जल्दी ही वो दोनो फ्रेश होकर आ जाते हैं और डिनर शुर करते हैं
 
माही समर को इशारा करती हैं कि वो करण से शादी की बात करे। समर का तो डर से बुरा हाल हो गया। ये सब देख कर माही के होंठो पर स्माइल आ जाती है जिसे देखकर समर का खून जलने लगता है कि ये मेरा मजाक उड़ा रही हैं

वो गुस्से से माही की तरफ देखता हैं और फिर अपने आपको को नॉर्मल करने की कोशिश करता हैं ताकि वो करण से बात कर सके।

समर मुंह नीचे करते हुए बोलता हैं कि पापा मुझे आपसे कुछ जरूरी बात करनी हैं

सब समर की तरफ देखने लगते हैं तो माही का दिल तेजी से धड़कने लगा था कि अब क्या होगा।

करण: बोलो समर क्या बात हैं ? ।

समर के मुंह से जैसे आवाज नहीं निकाल पा रही थी। फिर वो हिम्मत करके बोलता हैं: पापा प पापा मैं ये कहना चाहता हूं कि मैं म म " और आगे नहीं बोल पाता है।

करण और राम्या मुस्कुरा उठे ये सब देखकर और राम्या को तो जैसे मोका मिल गया उसकी मजाक उड़ाने का ।

राम्या: हान हान बोल ना हीरो , दम नहीं है क्या?

राम्या को अपनी मजाक बनाते देख कर उससे नहीं रहा जाता और वो पूरी ताकत इकट्ठी करके बोलता हैं:पापा दरसअल ये बात मुझे करना शोभा नहीं देती लेकिन मजबूरी हैं।

पापा मैं माही बुआ से शादी करना चाहता हूं " वो एक ही सांस में सब बोल देता है।

जैसे ही उसकी बात खत्म होती हैं करण का एक जोरदार थप्पड़ उसके मुंह पर पड़ता है।

करण गुस्से से पागल हो जाता हैं : कुत्ते तुझे पता भी हैं तू क्या बोल रहा है ? शर्म नहीं आती तुम्हे

समर का अब डर खत्म हो चुका था। वो करण की आंखो में देखते हुए बोलता हैं : हान में माही से प्यार करता हूं और शादी करना चाहता हूं।

करण: हरामजादे जा निकल जा मेरे घर से । और फिर कभी मत आना ।

समर गुस्से से उठता है और एक बार माही की तरफ देखता हैं और बाहर निकल जाता है।

जैसे ही वो घर से बाहर निकलता हैं माही बेहोश हो गई। सब अवाक थे। ये सब क्या हुआ ? किसी को भी समर से ये उम्मीद नहीं थी । तभी राम्या का ध्यान माही की तरफ जाता है जो बेहोश ही चुकी थी।

करण डाक्टर को कॉल करता है। उसे लगता है कि माही समर के मुंह से ये सब सुनने के कारण बेहोश हुई हैं । डाक्टर माही को दवा देकर चला जाता हैं तो थोड़ी देर बाद उसे होश आता है और वो रोने लगती है। अभी उसके पास सिर्फ काम्या थी।

काम्या: माही मत रो , समर को शर्म आनी चाहिए थी उसने ठीक नहीं किया।

माही को लगता है कि सब कुछ उसकी वजह से हुआ है ना वो समर को उसका हाथ मांगने को बोलती और ना ही ये सब होता।

ये सब सोचकर माही जोर जोर से रोने लगती हैं तो काम्या उसे चुप कराने लगती हैं।

माही : भाभी प्लीज समर को ढूंढ लाओ , ये सब मेरी वजह से हुआ है मैं भी उससे प्यार करती हूं।

काम्या को जैसे यकीन ही नहीं हो रहा था । वो उसकी समझती की रात बहुत हो गई हैं। अब आराम से सो जाओ।

दुखी तो घर में सभी थे क्योंकि वो सब समर से बहुत प्यार करते थे। किसी को नींद नहीं आ रही थी , करण को लग रहा था कि उसे अपने बेटे को समझाना चाहिए था मार पीट नहीं करनी चाहिए थी।

उधर समर अपने दौड़ के मैदान में जाता हैं और उधर ही लेट जाता है । उससे अपने पापा से है उम्मीद नहीं थी। बेशक उसने अपनी बुआ से प्यार किया है लेकिन वो शादी करने की भी हिम्मत रखता हैं ।

धीरे धीरे रात जैसे तैसे करके गुज़र जाती हैं और सुबह होते ही करण और राम्या समर को खोज में निकल जाते हैं । वो मैदान में पड़ा हुआ करण को मिलता है तो वो उसे घर चलने को कहता हैं ।

समर : आपको मेरी बात माननी हो तो मैं घर चलने के लिए तैयार हूं
 
करण अपने गुस्से को काबू में करते हुए: चल घर चलकर आराम से बात करेंगे । ये जगह ठीक नहीं हैं ये सब बात करने के लिए।

समर: नहीं पहले आप वादा करो कि मेरी शादी माही से होगी

करण: बेटा समझने की कोशिश करो । अब पहले घर चलो माही रात से रोए जा रही है।

समर जैसे ही ये सब सुनता हैं उसका दिल भर आता हैं और वो घर की तरफ चल दिया।

घर जाकर वो सीधे माही के रूम में जाता हैं तो माही उससे देखते ही पागलों की तरह उससे लिपट कर रोने लगती हैं । काम्या उनका इतना प्यार देख कर हैरान हो जाती हैं ।

तभी नीचे हॉल में किसी के आने की आवाज आती है तो काम्या नीचे आ जाती हैं तो वो देखती हैं कि एक बहुत ही तगड़ा पहलवान जैसा कोई आदमी जिसकी उमर ३४ साल के आस पास रही होगी वो आया हुआ हैं। तब तक करण और राम्या भी नीचे आ चुके थे।

करण : बैठिए भाई साहब।

आदमी: मैं यहां बैठने नहीं आया हूं बल्कि आपको कुछ याद दिलाने आया हूं। पहचाना मुझे कौन हूं मैं?

सभी उसे ध्यान से देखते हैं लेकिन किसी को याद नहीं आता ।

आदमी काम्या की तरफ देखते हुए: तुमने भी नहीं पहचाना काम्या?

काम्या हैरान होती हैं कि वो उसका नाम कैसे जानता हैं ।

काम्या: जी माफ करना भाई साहब नहीं पहचाना।

आदमी गुस्से से काम्या की तरफ देखते हुए: मैं भीमा हूं तुम्हारा छोटा भाई जंगावर काबिले से। याद करो वो दिन जब करण ने कुश्ती में कालू भाई को हरा दिया था तो दुख के मारे पिताजी जी की मौत हों गई थी और कालू भी मर गया था। लेकिन उसने मरते मरते मुझसे वचन लिया था कि मैं एक दिन उस हार का बदला जरूर लूंगा क्योंकि पहली बार हमारे परिवार का कुश्ती में कोई हारा था जिससे हमारा पूरा परिवार तबाह हो गया था और ये सब उस करण की वजह से हुआ था।

और कबीले के नियमो के हिसाब से क्योंकि इसने कालू को हराया था इसलिए तुम्हारी शादी इससे हो गई थी । वैसे तो कबीले में कोबी बाबा के श्राप की वजह से कुश्ती मै हारी लड़कियों को एक महीने तक रोज अलग अलग लोगो के साथ सोना पड़ता है। लेकिन ये तुम्हारी सुन्दरता पर मोहित हो गया था इसलिए इसने कबीले का नियम मानने से इनकार कर दिया कि ये तुम्हे अलग अलग लोगो के साथ नहीं सोने देगा जिस कारण इसे नियम तोड़ने के कारण कबीले से निकाल दिया गया था । ये इसका एहसान हैं हम पर कि इसने हमारी इज्जत की रुसवा होने से बचाया था।

भीमा सांस लेने के लिए रुकता हैं और फिर बोलना शुरू करता है , :

लेकिन ये सब होने से पहले ही पापा और कालू भाई दोनो मर चुके थे उन्होंने मुझसे वचन लिया था कि जब तक मैं उसकी बहन को 30 लोगो की रंडि नहीं बनाऊंगा उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।

काम्या और करण के आंखो के आगे गुज़रा हुआ कल घूमने लगता है और एक एक करके उन्हें सारी बाते याद आ जाती हैं।

उधर जैसे ही समर उसके मुंह से माही के लिए रण्डी शब्द सुनता हैं उसका खून खौल जाता हैं और वो नीचे आकर गुस्से से कालू को एक थप्पड़ मारता हैं। कालू की आंखे गुस्से लाल हो जाती हैं और वो किसी खिलौने की तरह समर को हाथो में उठा लेता हैं ।

करण: मेरे बेटे को छोड़ दो तुम्हारी दुश्मनी मेरे साथ हैं ।

भीमा जोर जोर से हंसता हैं और उसे छोड़ देता है।

माही और राम्या को तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है।

भीमा: जा बच्चे अभी दूध पी।उसके बाद बात करना ।

भीमा: सुन करण मैं तुझे चैलेंज करने आया हूं क्योंकि परसो काल उत्सव होने जा रहा हैं और तुझे मुझसे कुश्ती करनी होगी ।ध्यान रखना कि अगर तू हर गया तो मैं तेरी बहन माही को जीत जाऊंगा और तुझे 2 महीने का टाइम मिलेगा इसको वापिस बचाने के लिए जैसा की कबीले का नियम हैं ।लेकिन दो महीने तुम नहीं तुम्हारे कबीले का दूसरा पहलवान मुझसे कुश्ती लड़ेगा और अगर वो जीत गया तो माही उसकी हो जाएगी । और अगर हार गया तो हा हा हा हा!!

और वो पागलों की तरह जोर जोर से हंसने लगता हैं । करण का मन किया कि उसका मुंह तोड़ दे लेकिन वो घर मेहमान का अपमान नहीं करना चाहता था और कबीले के नियमो के चलते मजबूर था।

भीमा ये कहकर जाने लगता हैं और फिर उसकी और देखते हुए बोलता हैं: अगर तुम नहीं आए तो समझ जाना की तुम किसी हिजड़े कि औलाद हो और तुम्हारा कबीला हमेशा की लिए हमारा गुलाम हो जाएगा।

और ऐसा कहकर वो चला जाता है। माही तो ये सब सुनकर डर के मारे कांपने लगी ।

माही: भाई पागल कोन था और क्या उल्टा सीधा बोला रहा था।
 
फिर करण इन्हे सारी बाते बताता हैं कि वो दिलावर सीवाना कबीले का रहने वाला है और माही का जन्म भी वहीं हुआ था।

( सीवान और जंगावर दोनो कबीले कभी आपस में बहुत प्यार से रहते थे। दोनो कबीले के सरदार एक दूसरे की बहुत इज्जत करते थे । जांगावर कबीले की एक लड़की जिसका नाम चांद था वो सीवान कबीले के एक लड़के वीर से प्यार करती थी। लेकिन एक दिन शिकार करने को लेकर दोनो कबीले के सरदार आपस में लड़ पड़े और उसी दिन से दोस्ती दुश्मनी में बदल गई। अब चांद और वीर का मिलना बंद हो गया था । एक दिन वो दोनो घर से भाग निकले और दोनो कबीले के कुल देवता कोबी बाबा के आश्रम में छुप गए। एक दिन दोनो से बर्दाश्त नहीं हुआ और वो दोनो प्यार करने लगे जो धीरे धीरे सेक्स में बदलने वाला था। फिर दोनो कबीले कि कुछ लड़कियां आश्रम में माथा टेकने अाई हुई थी ।

उनमें से एक लड़की हिंबा ने उसे देख लिया और गुस्से में आकर दोनो को जलाकर मार डाला जिससे उनका प्यार अधूरा रह गया । कोबी बाबा ये सब देखकर क्रोधित हो उठे और उन्होंने उन लड़कियों को श्राप दे दिया कि आज के बाद जो भी कबीले कि सबसे खूबसूरत लड़की होगी उससे वो ही शादी करेगा जो उसके भाई को कुश्ती मैं हरा देगा और फिर उस लड़की के कबीले को दो महीने का टाइम मिलेगा ताकि वो उसे बचा सके और अगर नहीं बचा पाए तो उसे 30 दिन तक अलग अलग लोगो के साथ सोना पड़ेगा और ऐसा तब तक चलता रहेगा तब तक की वीर और चांद दोबारा जन्म लेकर ना आ जाए।

हिम्बा आज भी आश्रम के नीचे एक गुफा में कैद हैं जो सदियों से वीर और चांद की प्रतीक्षा कर रही हैं कि कब वो आएंगे और उसे मुक्ति मिलेगी।

करण ये सब बोलकर चुप हो जाता हैं सब लोग ध्यान से उसकी बात सुन रहे थे।

करण फिर आगे बोलता हैं : हमारे कबीले के लोग आज भी इस बात को मानते हैं और हमें भी ये परम्परा निभानी होगी । आप सब लोग सीवान कबीला चलने की तैयारी करो । अगर हम आज रात को निकल गए तो कल सुबह तक पहुंच जाएंगे।

माही: भैया मैं नहीं मानती इन बातो को और में कहीं नहीं जाऊंगी।

करण: मैं भी नहीं मानता था इसलिए मैंने खुद नियम तोड़ दिया था काम्या को 30 लोगो के पास ना भेजकर। उसका नतीजा ये हुआ कि कोबी बाबा के श्राप के कारण मेरे मम्मी पापा की मौत हो गई थी क्योंकि जो भी ये नियम तोड़ता हैं उसके परिवार में जो दो सबसे सीनियर लोग होते हैं उनकी मौत हो जाती हैं और हमारा हो कि में और काम्या ज़िंदा रहे तो तुम्हे हमारे साथ चलना ही होगा।
 
माही अजीब मुश्किल में पड़ गई थी। आखिरकार वो उन दोनों की वजह से मान गई ।

करण: अपने भाई पर भरोसा रखो माही तुम्हे कुछ नहीं होगा। मुझे हराने वाला अभी तक पैदा नहीं हुआ

राम्या: हान बुआ मैंने भी कल देखा । मैं अखाड़े गई थी पापा उसे आराम से हरा देंगे

माही को कुछ सुकून मिलता है और फिर सो सब निकल पड़ते हैं सीवाना कबीले की ओर जहां से उनका जन्म जन्मतार का रिश्ता रहा है ।

अगले सुबह वो सब सीवाना कबीला आ चुके थे। लकड़ी के बने हुए घर, कच्ची सड़के, ऐसा लगता है मानो वो कई हजार साल पीछे आ गई है। करण सीवाना कबीले के सरदार का बेटा था और नियम तोड़ने के कारण उसे निकाल दिया गया था लेकिन अब वो वापिस कबीले में भीमा का चैलेंज पूरा करने आया था और वो सिर्फ वहां २दिन रुक सकता था।

जैसे ही लोग उसे देखते हैं तो लोगो में उसके लिए नफरत और गुस्सा साफ दिखाई पड़ रहा था ।

वो अपने पुराने घर में जाता हैं जो बंद पड़ा हुआ था । सभी लोग मिलकर घर की सफाई करते हैं ताकि वहां आराम से रह सके क्योंकि कबीले में ना तो कोई उनसे बात करने वाला था और ना ही उसकी मदद करने वाला।

जब करण ने काम्या को कुश्ती में जीता था तो सीवाना कबीले के लोग का लंड खड़ा हो गया था कि अब काम्या को चोदने को मिलेगा लेकिन करण ने साफ मना कर दिया था जिस कारण उसे निकाल दिया गया था।

उन सबकी मेहनत रंग लाती हैं और जल्दी ही घर चमक रहा था। माही जब से यहां अाई थी लोग उसे घुरे जा रहे थे जो उसे अच्छा नहीं लग रहा था। उसका दिल डर रहा था कि अगर करण हार गया तो ????

नहीं उसका भाई हार नहीं सकता। डर फिर से उसके उपर हावी हो जाता हैं कि अगर वो हार गया तो माही अपनी जान दे देगी लेकिन समर के अलावा किसी और को अपने उपर हाथ नहीं लगाने देगी।

शाम को खाना खाकर सब लोग लेट जाते हैं और करण कुश्ती की प्रैक्टिस में लग जाता हैं मानो उसे हर हाल में जीतना था। किसी को भी नींद नहीं आ रही थी। और सबसे ज्यादा परेशान माही थी । समर रात को चुपके से उसके पास जाता हैं और उसे अपने गले लगा लेता है। माही भी इससे चिपट सी जाती हैं।

माही: समर मुझे बहुत डर लग रहा है । कहीं ऐसा ना हो कि करण भाई हार जाए । मैं मर जाऊंगी लेकिन किसी को अपने जिस्म को हाथ भी नहीं लगाने दूंगी

समर उसके होठों पर उंगली रख देता है और बोलता हुई कि पापा पर भरोसा रखो। कुछ नहीं होगा। ।और फिर वो दोनो ऐसे ही सारी रात लेते रहते हैं।

अगले दिन सुबह कुश्ती का दिन था । लोग बहुत उत्सुक थे कुश्ती को लेकर । खास तौर से भीमा के कबीले के लोग क्योंकि वो जानते थे कि भीमा आराम से करण को हरा देगा और उनको पहले माही को चोदने को मिलेगा

अखाड़ा पूरी तरह से भर चुका था । कुश्ती की तैयारी पूरी हो चुकी थीं। दोनो पहलवान मैदान में आमने सामने थे और माही को किसी दुल्हन की तरह से सजाया गया था जो कि स्टेज पर बैठी हुई थी और गजब कि सुंदर लग रही थी जिसे देख कर पूरा भीमा का पूरा कबीला आन्हे भर रहा था।माही पूरी तरह से डरी हुई थी उसकी दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था।

भीमा जैसे ही अपने कपड़े निकाल कर अंडर वियर में आ जाता है उसे देखकर ऐसा लग रहा मानो कोई वहशी दरिंदा हो। एक दम सांड जैसा चौड़ा शरीर , सारे शरीर पर बाल , आंखे लाल सुर्ख

माही तो ये सब देख कर बुरी तरह से डर गई थी।

कुश्ती शुरू हो चुकी थी हर कोई दम साधे देख रहा था। कभी करण भारी पड़ रहा था तो कभी भीमा । हर कोई अपनी जीतने की पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल रहा था। जैसे ही बीच में कभी भीमा भारी पड़ता तो माही की हालत खराब होने लगती ।

भीमा जहां अपने बाप और भाई को दिए हुए बचन की खातिर लड़ रहा था तो करण अपनी बहन को बचाने की खातिर।

आखिरकार वो जी हुआ जिसका डर था । भीमा के आगे करण की एक ना चली और वो हार गया और मैदान मैं गिरकर रो पड़ा । उसकी आंखों में आंसू थे। और इसके साथ ही काम्या, राम्या भी रो पड़े।

माही तो बेहोश ही हो गई थी।

वहीं भीमा के कबीले के लोग तालियां बजा रहे थे, ढोल बजने लगा, लोग पागलों कि तरह नाचने लगे।

समर को तो जैसे यकीन ही नहीं हो रहा था। थोड़ी देर बाद माही को होश आ जाता है और वो रोते हुए समर की तरफ देखती हैं।

समर उसके पास जाने लगता लेकिन भीमा बीच में ही रोक देता हैं।

भीमा: अब इससे कोई बात नहीं कर सकता। ये अगले दो महीने तक हमारे कबीले में रहेगी। अगर तुम में दम हैं तो दो महीने बाद मुझे हरा देना और इस पर तुम्हारा हक होगा।

और ऐसा कह कर वो जोर जोर से हंसने लगा था जैसे उसका मजाक उड़ा रहा हो, लोग खुशी में पागल हो रहे थे ।

भीमा के कबीले के लोग लंड हाथ में निकाल कर माही को दिखा दिखा कर मुठ मार रहे थे मानो उसे बता रहे हो कि दो महीने बाद उन्हें इन्हीं लोडो के नीचे आना होगा।

काम्या और राम्या तो जैसे यकीन ही नहीं कर पा रहे थे कि जो यहां हो रहा है वो सच है। है भगवान ये कैसे जंगली लोग हैं, ये तो माही को नोच नोच कर खा जाएंगे।

समर की आंखो गुस्से से फटी जा रही थी। वो एक बार माही को की तरफ देखता हैं और बोलता हैं माही मेरा इंतजार करना , मैं दो महीने बाद आऊंगा और तुम्हे लेकर जाऊंगा अपने साथ।

माही समर की और देखती हैं और इशारा करती हैं कि वो इसका रास्ता देखेगी। तभी कुछ औरतें आती हैं और वो माही को अपने साथ ले जाती हैं ,माही जाते हुए बस समर की तरफ देख रही थी मानो उसे कह रही हो कि बचा लो मुझे।

करण के आंसू आज थम नहीं रहे थे । फिर उन सबको कबीले से बाहर निकाल दिया गया और वो सब उदास होकर लौट पड़े । माही के बिना समर जैसे पागल सा हो रहा था।
 
समर: पापा अपने आपको संभालो, और मुझे बताओ मुझे क्या करना हैं , कैसे करना हैं, मै माही को वापिस लाऊंगा चाहे मेरी जान ही क्यों ना चली जाए।

करण: बेटा अब ये मुमकिन नहीं है । भीमा को सब हराना आसान नहीं होगा।

समर: लेकिन असंभव तो नहीं हैं

मै अपनी आखिरी सांस तक लगा दूंगा अपनी माही को बचाने के लिए।

करण: तो सुनो फिर, तुम्हे कुश्ती की तैयारी करनी होगी उसके लिए में तुम्हे दुनिया से सबसे बड़े कुश्ती गुरु अखंडा बाबा क्रे पास भेज दूंगा वो तुम्हारी मदद करेंगे।

लेकिन ध्यान रखे उनसे सीखने का मतलब हैं अपनी ज़िन्दगी दांव पर लगा देना।

समर: मेरी ज़िन्दगी तो माही हैं और वो पहले से ही दांव पर लगी हुई है।

करण: ठीक है । घर जाते ही तुम्हे वहां के लिए निकलना होगा।

समर: आप मुझे रास्ता बताओ । मैं अभी निकाल जाऊंगा ।मुझे टाइम बिल्कुल भी खराब नहीं करना हैं

करण उसे रास्ता बताता हैं और समर उन्हें कबिलाई इलाकों से बाहर लाकर बस में बिठा देता हैं और चल पड़ता हैं अखांडा बाबा के आश्रम की तरफ।

समर करण के बताए हुए रास्ते पर चलता हुआ एक काली पहाड़ी नाम की जगह पर पहुंच जाता हैं जहां पर अखंडा बाबा का आश्रम था। बहुत ही खौफनाक जगह थी ये काली पहाड़ी। एक दम ऊंचाई पर स्थित । समर जैसे ही आश्रम के अंदर प्रवेश करता है वो उसे बाबा के चेले घेर लेते हैं । एक चेला जिसका नाम शेरा था उससे पूछता है : कौन हो तुम और यहां क्यों आए हो?

समर :मेरा नाम समर हैं और मुझे अखंडा बाबा से मिलना है।

शेरा उसे देख कर हंसता हैं और कहता हैं: लड़के अखंडा बाबा से मिलना कोई आसान काम नहीं हैं , पहले तुम्हे एक टेस्ट पास करना होगा। बोलो तैयार हो ?

समर: मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूं। बताओ क्या करना होगा मुझे ?

शेरा: तुम्हे सबसे पहले पवन को काबू में करना होगा , अगर कर लिया तो बाबा से मिलन हो जाएगा नहीं तो पवन तुम्हे चलने लायक नही छोड़ेगा।

समर: ठीक है , मैं तैयार हूं।

पवन एक जंगली सांड था जो कि बहुत खूंखार था जिसे आज तक कोई काबू में नहीं कर पाया था।

समर को एक मैदान में लाकर खड़ा कर दिया गया और सांड के दरवाजे का गेट जैसे ही खुला वो पागलों की तरह से दोड़ता हुए समर की तरफ आया । उसकी स्पीड इतनी तेज थी कि समर को कुछ सोचने का मोका मिलता उससे पहले ही वो एक ठोकर जड़ चुका था। समर दूर जाकर गिरा और दर्द से तड़प उठा, जैसे ही अगली बार सांड उसकी तरफ आया समर सावधान था। जैसे ही उसने मारने के लिए सिर उठाया समर बिजली की गति से बचा गया ।

सांड को और भी गुस्सा आया और वो इस बार और भी गुस्से से आया, लेकिन समर फिर से बच गया। लेकिन एक कब तक बचेगा और इसे काबू में कैसे करना है ये बड़ी बात थी।

तभी समर एक प्लान बनाता हैं और सीधा भागना शुरू कर देता हैं सांड उसके पीछे भागता हुआ आता हैं, रोज दौड़ने के कारण समर की गति बहुत अच्छी थी जिस कारण सांड उस तक नहीं पहुंच पा रहा था । समर ऐसे ही उसे चक्कर लगवा रहा था पूरे मैदान के । नतीजा ये हुआ कि सांड बुरी तरह से थक चुका था लेकिन अभी भी उसका पीछा नहीं छोड़ रहा था। इस बार समर भागते भागते मुड़ता नहीं हैं और जैसे ही वो मैदान कि दीवार के पास पहुंचता हैं वो एक दम नजदीक जाकर तेजी से हट जाता है और सांड अब तक गुस्से से पागल हो चुका था । वो एक जोरदार टक्कर समर को मारता हैं लेकिन सही वक़्त पर समर के हट जाने के कारण वो टक्कर दीवार पर पड़ती है जिससे सांड को आंखो के आगे तारे नाच गए थे। वो जोर से दर्द से बिलबिलाते हुए गिर जाता हैं और उसके गिरते ही समर उसके गले में एक पट्टा बांध देता हैं और उसके उपर बैठ जाता है। ये सब देख कर शेरा की आंखे आश्चर्य से खुल जाती हैं और वो ताली बजाकर समर का सम्मान करता है ।

शेरा: शाबाश नौजवान,

समर: अब तो मुझे बाबा से मिलवा दो मेरे पास वक़्त बहुत कम हैं

शेरा उसे लेकर अखंडा बाबा के पास जाता है जो ध्यान की मुद्रा में बैठे हुए होते थे।

शेरा: बाबा ये समर हैं और इसने पवन को काबू में कर लिया है और आपसे कुश्ती सीखने यहां आया हैं।

बाबा पहले बार अपनी आंखे खोलते हैं और ध्यान से समर को उपर से नीचे तक देखा।

बाबा: क्यों सीखना चाहते हो ये सब ?

समर: बाबा मैं एक लड़की से प्यार करता हूं और उसकी ज़िंदगी खतरे में हैं बस उसे बचाना है।

बाबा: पिछले कुछ सालों से एक भीमा नाम का लड़का भी हमारे यहां सीख कर गया था और अब सुनने में आया है कि वो शिक्षा का गलत उपयोग कर रहा हैं और उसने एक लड़की को बंधक बना लिया है और अब उसे लोगो की रखैल बनाने की कोशिश में है

समर जैसे ही भीमा का नाम सुनता है उसके जबड़े भींच जाते हैं और गुस्से से उसकी आंखे लाल होकर किसी अंगारे की तरफ दहकने लगती हैं।

बाबा: जब से हमे भीमा की करतूत का पता चला हैं हमने पर्ण किया हैं अब हम किसी को भी शिक्षा नहीं देंगे।

समर का चेहरे का रंग फीका पड़ जाता है । समर बोलता है: बाबा मैं उसी भीमा को हराने के लिए ये कुश्ती सीखना चाहता हूं क्योंकि उसने जिस लड़की माही को उठाया हैं मैं उसी से प्यार करता हु।और में आपको वचन देता हूं कि अगर आप मुझे सिखाएंगे तो में कभी भी आपकी शिक्षा का अपमान नहीं होने दूंगा। ये मेरा वचन हैं।

बाबा जैसे ही सुनते हैं कि ये भीमा को हराना चाहता है तो उनकी आंखे चमक उठी थी।

बाबा: ठीक है बेटा मैं तुम्हे सिखाऊंगा लेकिन टीम ज़िन्दगी में सिर्फ एक ही कुश्ती करोगे और वो भी उस लड़की को बचाने के लिए। उसके बाद तुम सारी शिक्षा भूल जाओगे और तुम्हे चाहकर भी कुछ याद नहीं रहेगा। ये मेरा श्राप होगा।

समर : धन्यवाद बाबा जी, मैं खुद भी नहीं लड़ूंगा क्योंकि मैं सिर्फ माही को बचाने के लिए सीख रहा हूं

बाबा: शेरा बेटा आज से तुम इसकी शिक्षा शुरू करो।

शेरा: जैसी आपकी आज्ञा बाबा जी।

अब समर की ट्रेनिंग शुर हो चुकी थीं। उसके शरीर में फुर्ती लाने के लिए उसके पीछे कभी जंगली कुत्ते छोड़ दिए जाते तो कभी आदमखोर जानवर , कभी उसके शरीर को मजबूत बनाने के लिए डंडों से पीटा जाता तो कभी उसे उपर पहाड़ी से फेंक दिया जाता । बहुत ही खतरनाक ट्रेनिंग थी ये

रोज सुबह शाम उसे जंगल की दुर्लभ जड़ी बूटियां पिलाई जाती और उससे योग कराया जाता ।

धीरे धीरे समर एक अच्छा पहलवान बनता जा रहा था।

उधर माही को जैसे ही वो औरते कमरे में ले जाती हैं माही डर जाती हैं। वो औरतें हसने लगती है ।

एक औरत: खूबसूरती वैसे तो औरत का गहना मानी जाती हैं लेकिन यहां कबीले में औरत का खूबसूरत होना उसके लिए किसी अभिशाप से कम नहीं होता। अब देखना भीमा को हरा पाना मुश्किल होगा और फिर दो महीने बाद तुम्हारी सुहागरात होगी वो भी सबके सामने । जहां तुम मैदान के बीच में नीचे पड़ी हुई चुद रही होगी और सभी लोग तुम्हे देख रहे होंगे।

दूसरी औरत:मैंने सुना है कि अभी कुछ दिन पहले भीमा ने एक औरत को इतना बेदर्दी से चोदा कि उसकी मौत हो गई और ये तो हैं ही इतनी नाजुक । पता नहीं इसका क्या हाल होगा।

माही का दिल बैठता जा रहा था उनकी बाते सुनकर और इसकी आंखो से आंसू निकल पड़ते हैं।

वो औरतें हसने लगती हैं उनका रंग बिल्कुल काला था और वो सब माही से मन ही मन जल रही थी।

एक औरत: अभी से आंसू मत निकाल इन्हे सुहाग रात के लिए बचा कर रख।

दूसरी औरत: कमाल करती हैं तू भी । सुहाग रात को इसके आंसू नीचे से निकलेंगे ।

और वो दोनो जोर जोर से हंसने लगती हैं।

माही और जोर जोर से रोने लगती हैं , उसे समर की बहुत याद आ रही थी।उसे पूरा यकीन था कि वो उसे जरूर बचा लेगा ।इसलिए वो सब डर छोड़कर स्माइल करती हैं और बोलती हैं: देखना तुम दोनो, समर आएगा और मुझे इस दलदल से निकाल कर ले जाएगा।

ये सब सुनकर वो दोनो हंसने लगती है , उनकी हंसी देख कर माही भी जोर जोर से हंसने लगती हैं।

तभी एक बूढ़ी औरत अंदर आती हैं और वो साथ में खाना लाई थी ।माही को समर का इंतजार करना था इसलिए वो खाना खा लेती हैं और और सो जाती हैं।

अगली सुबह उसे चंदन और गुलाब के फूलों के जल से नहलाया गया , हल्दी का लेप उसके सारे शरीर पर लगाया गया , एक से बढ़कर एक जंगली पत्ते इस्तेमाल किए गए । उसके बदन को मल मल कर साफ़ किया गया , उसे ऐसे सजाया गया मानो उसकी सुहागरात हो।

माही का रोम रोम खिल रहा था मानो स्वर्ग से कोई अप्सरा उतार अाई हो।

उधर करण, काम्या और राम्या का घर पर बुरा हाल था । काम्या जानती थी कि ये सब उसकी वजह से हुआ है इसलिए वो सदमे में चली जाती हैं। और किसी से कुछ भी बोलने या सुनने की हालत में नहीं होती । करण तो ऐसी पागल सा हो गया था , और ऐसे में पूरे घर का सहारा बनी राम्या । उसने ना केवल अपनी मा का ध्यान रखा बल्कि अपन बाप को भी बिखरने से बचा रही थी। और धीरे धीरे राम्या और करण नजदीक आते जा रहे थे । दोनो एक दूसरे का पूरा ख्याल रखते , और पूरे दिन घर में ही रहते , करण ने ऑफिस जाना बंद कर दिया था ।
 
उधर रोज माही को उसकी सार्वजनिक सुहागरात के लिए रोज दुल्हन की तरह सजाया जाता हैं जिससे उसका रूप निखरता जा रहा था और जंगली खान पान का असर उस पर आता जा रहा था जिस कारण उसका जिस्म अपने पहले से और ज्यादा आकर्षक लगने लगा था।

उधर समर भी कुश्ती के नए दांव पेंच सीख रहा था । और जल्दी ही वो एक। तगड़ा पहलवान बन चुका था उसका जिस्म किसी लोहे की तरह से ठोस हो चुका था , पहले से ही चोड़ी छाती अब और ज्यादा चोड़ी हो गई थी ।और लगातार योग और कसरत के कारण उसके जिस्म पर कट पड़ गए थे और माथे पर सुन्दर रेखाएं।

अब बस दो दिन का टाइम और बचा था उसके पास ।

बाबा उसे अंदर अपने पास बुलाते है और कहते की आज शाम को तुम्हे जाना होगा ताकि कल तक पहुंच जाओ। मैं आज तुम्हे वो विद्या बताऊंगा जो मेरे अलावा और की नहीं जानता यहीं तक की भीमा भी नहीं । लेकिन तुम इसका इस्तेमाल सिर्फ एक ही बार कर पाओगे ध्यान रखना उसके बाद तुम भूल जाओगे।

और फिर बाबा उसे वो विद्या सिखाते हैं और बोलते हैं कि जाओ तुम्हे ट्रेनिंग खत्म हुई। अब तुम्हे कोई नहीं हरा सकता , ।

समर पैर छू कर उनका आशीर्वाद लेता हैं ।

बाबा: विजयी भव ।

मेरा आशिर्वाद तुम्हारे साथ हैं।

समर वहां से निकल जाता हैं और कबीले की तरफ चल देता हैं और अगले दिन वहां पहुंच जाता हैं। कुश्ती का मैदान लग चुका था ।करण , काम्या और राम्या सब आ चुके थे। भीमा मैदान में किसी पागल सांड की तरह घूम रहा था मानो वो समर को आज जान से मार देगा

माही उपर की तरफ बैठी हुई थी । पिछले दो महीने से हुई मालिश, मेक अप , के कारण उसका चेहरा किसी गुलाब की तरह चमक रहा था, गाल बिल्कुल सुर्ख हो चुके थे, और होंठ इतने नाजुक और प्यारे लग रहे थे मानो दो गुलाब की पत्तियां जोड़ दी गई हो ।उसका चेहरा चांद की तरह चमक रहा था , हर कोई उसे देख कर तड़प रहा था, मचल रहा था। माही के हाथ में जहर की एक शीशी थी , और जो जानती थी कि अगर समर हार गया तो वो अपनी जान दे देगी ।

मैदान में समर भी आ चुका था । वो एक बार माही की तरफ देखता है तो देखता ही रह गया। वो उसे इतनी खूबसूरत कभी नहीं लगी थीं । उसका मन कर रहा था कि अब जाकर बांहों में भर ले ।

माही उसकी तरफ स्माइल करती हैं मानो उसे बेस्ट ऑफ लक बोल रही हो।

कुश्ती अब बस शुरू होने वाली थी। समर अपने कपड़े निकाल कर सिर्फ अंडर वियर में आ गया था और सब लोग इसे जैसे देख रहे थे मानो कोई अजूबा देख लिया हो।

अब बस दो दिन का टाइम और बचा था उसके पास ।

बाबा उसे अंदर अपने पास बुलाते है और कहते की आज शाम को तुम्हे जाना होगा ताकि कल तक पहुंच जाओ। मैं आज तुम्हे वो विद्या बताऊंगा जो मेरे अलावा और की नहीं जानता यहीं तक की भीमा भी नहीं । लेकिन तुम इसका इस्तेमाल सिर्फ एक ही बार कर पाओगे ध्यान रखना उसके बाद तुम भूल जाओगे।

और फिर बाबा उसे वो विद्या सिखाते हैं और बोलते हैं कि जाओ तुम्हे ट्रेनिंग खत्म हुई। अब तुम्हे कोई नहीं हरा सकता , ।

समर पैर छू कर उनका आशीर्वाद लेता हैं ।

बाबा: विजयी भव ।

मेरा आशिर्वाद तुम्हारे साथ हैं।

समर वहां से निकल जाता हैं और कबीले के तरफ चल देता हैं और अगले दिन वहां पहुंच जाता हैं। कुश्ती का मैदान लग चुका था ।करण , काम्या और राम्या सब सा चुके थे। भीमा मैदान में किसी पागल सांड की तरह घूम रहा था मानो वो समर को आज जान से मार देगा

माही उपर की तरफ बैठी हुई थी । पिछले दो महीने से हुई मालिश, मेक अप , के कारण उसका चेहरा किसी गुलाब कि तरह चमक रहा था, गाल बिल्कुल सुख हो चुके थे, और होंठ इतने नाजुक और प्यारे लग रहे थे मानो दो गुलाब के पत्तियां जोड़ दी गई हो ।उसका चेहरा चांद की तरह चमक रहा था , हर कोई इस देख कर तड़प रहा था, मचल रहा था। माही के हाथ में जहर की एक शीशी थी , और जो जानती थी कि अगर समर हार गया तो वो अपनी जान दे देगी ।

मैदान में समर भी आ चुका था । वो एक बार माही की तरफ देखता है तो देखता ही रह गया। वो उसे इतनी खूबसूरत कभी नहीं लगी थीं । उसका मन कर रहा था कि अब जाकर बांहों में भर ले ।

माही उसकी तरफ स्माइल करती हैं मानो उसे बेस्ट ऑफ लक बोल रही हो।

कुश्ती अब बस शुरू होने वाली थी।

भीमा आज बहुत जोश में था । माही की सुंदरता देख कर वो पगलाया हुआ था।

भीमा जोर जोर से चिल्ला रहा था कि आज मैं जब माही के साथ खुले आम सेक्स करूंगा और ये दर्द से तड़पेगी तो मेरे भाई और बाप की आत्मा को बहुत सुकून मिलेगा।

समर अब अपने कपड़े निकाल कर अखाड़े में उतर चुका था। उसका चोड़ी और ठोस छाती सब के सामने आ गई थी । एक दम किसी मॉडर्न पहलवान के जैसा लग रहा था । लड़कियां उसे देखकर तड़प रही थी। वो एक दम फिल्मों के हीरो की तरह से चिकना था। ट्रेनिंग के कारण उसका जिस्म सुडौल बन गया था और बहुत ही आकर्षक लग रहा था जिसे देख कर माही सबसे ज्यादा खुश हुई।

भीमा के सांड जैसे शरीर के आगे समर का जिस्म हल्का ही लग रहा था ।

कुश्ती शुरू हो चुकी थीं ।भीमा पहला दांव चलता हैं और अपने दोनो हाथ से समर के दोनो हाथ पकड़ लेंता हैं और किसी जंगली सांड की तरह समर की सिर्फ हाथो से पकड़कर उपर उठा लेता हैं और फिर जोर से जमीन पर दे मारता हैं जिस कारण समर के मुंह से दर्द भारी चींखं निकाल पड़ती हैं । ये सब देखकर माही का दिल रों उठा।

भीमा फिर से आगे बढ़ता है और जैसे ही समर को उठाने के लिए झुकता हैं समर फुर्ती से उठते हुए उसकी टांग पकड़ लेता है और जोर से खींच देता हैं जिस कारण भीमा जमीन पर गिर पड़ता है और समर उसके उपर चढ जाता हैं और उसे चित करने की कोशिश करता है तो भीमा पूरी ताकत लगाकर पलटा खाता है और समर नीचे आ जाता है और भीमा उसका कंधा पकड़कर जमीन से मिलाने की कोशिश करता हैं। समर अपने दोनो पैरो को पीछे उसकी कमर पर लाता है और जोर लगाते हुए उसे अपने सिर के उपर से पीछे फेंक देता हैं और फुर्ती के साथ खड़ा हो जाता हैं। लोगो को बहुत जबर्दश्त मुकाबला देखने को मिल रहा था। जब जब समर भारी पड़ता तो माही की आंखो में चमक आ जाती है जिसे है भीमा भारी पड़ता तो चारो तरफ शोर गुजं उठता ।

सिर्फ करण के परिवार को छोड़ कर वहां आए दोनो कबीले के लोग भीमा को सपोर्ट कर रहे थे।

समर जानता था कि उसे बस भीमा को थका देना हैं और उसके बाद वो उसे आराम से हरा देगा। अब समर भीमा के सामने जाता और जैसे ही वो हमला करता समर फुर्ती से बच जाता और भीमा और गुस्से में आकर जंगली सांड की तरफ पूरी ताकत से अगली बार हमला करता।

जहां एक तरफ समर माही को बचाने के लिए लड़ रहा था वहीं दूसरी तरफ भीमा उसका बलात्कार करने और उसे लोगो की रखैल बनाने के लिए लड़ रहा था।

एक घंटे से ज्यादा हो चुका था , दोनो के शरीर पसीने पसीने जो चुके थे। अब तक भीमा भी समर का प्लान समझ चुका था । अगली बार जैसे ही वो हमला करता है आखिरी टाइम पर अपने आपको रोक लेता है और जैसे ही समर बाई तरफ फुर्ती से बचता है तो भीमा उसके उपर कूदते हुए उसे दबोच लेता है ।

और पूरे मैदान में भीमा भीमा के नारे लोग लगाने लगे थे। अब भीमा उसके कंधे को पकड़ता हैं और और पूरी ताकत के साथ उसे जमीन से मिलाने लगता हैं और समर पूरी ताकत लगा रहा था लेकिन उसका कंधा लगातार झुकता जा रहा था । ये सब देखकर माही की आंखो में आंसू आ गए और वो जहर की शीशी को खोलने लगती हैं।

जब समर का कंधा जमीन से बिल्कुल मिलने वाला था तो उस अखंडा बाबा का गुरु मंत्र याद आ जाता है और समर उन्हें याद करते हुए अपना दांव चल देता है । उधर माही जहर की शीशी खोल चुकी थी और वो मरने से पहले आखिरी बार समर को देखने के लिए जैसे ही नजरे उठाती हैं तो देखती है कि सब कुछ उल्टा हो चुका था अब समर उपर था और वो भीमा के कंधे को जमीन से मिलाने की कोशिश कर रहा था।

फिर आखिर कार वहीं हुआ को हमेशा से होता आया हैं । आज फिर से अच्छाई बुराई पर हावी हुई और समर ने भीमा को चित कर दिया।

जैसे ही समर खड़ा हुआ करण , काम्या ,राम्या सब के चेहरे खुशी से खिल उठे और माही तो जैसे खुशी से झूम उठी थी । वो पागलों की तरह से भागती हुई अखाड़े में घुस जाती हैं और समर के गले लग जाती हैं ।

भीमा अभी तक यकीन नहीं कर पा रहा था कि वो सच मुच हार चुका है।

और अब लोग जोर जोर से समर के नाम के नारे लगा रहे थे। किसी ने सच ही कहा है कि लोग उगते सूरज को सलाम करते हैं।

भीमा शर्म से मुंह झुकाए मैदान में ही पड़ा हुआ था जबकि माही और समर दोनो बाहर जा चुके थे।

माही जैसे ही काम्या के पास पहुंचती हैं वो उससे बुरी तरह से लिपट जाती हैं और साथ में खड़ी हुई राम्या भी उनसे लिपट जाती हैं। फिर समर करण के सामने पहुंचकर उसके पैर छूता हैं तो करण उसे अपने गले लगा लेता हैं।

करण: शाबाश बेटा । आज तुमने सीवाना कबीले का नाम फिर से रोशन कर दिया। मुझे तुम पर गर्व है और ऐसा बोलते हुए उसका माथा चूम लेता है।

समर आप बहुत खुश था क्योंकि उसके बाप ने आज पहली बार उसे इतनी खुशी से गले लगाया था और उसके माथा चूमा था।

अब सीवाना कबीले के लोग समर के साथ हो चुके थे क्योंकि समर ने उनके कबीले की इज्जत बचाई थी और उसे अपना नया सरदार घोषित कर देते हैं । हान करण से वो अभी भी नाराज थे लेकिन काल उत्सव खत्म होने तक वो उसे कबीले से नहीं निकाल सकते थे।

समर: पापा मैं माही से बहुत प्यार करता हूं और उसके बिना नहीं जी पाऊंगा।

माही भी वहां आ चुकी थी और वो भी बोलती की भाई प्लीज़ मुझे मेरा प्यार दे दो
 
समर जानता था कि कबीले के नियमो के हिसाब से माही उसकी हो चुकी है लेकिन फिर भी वो अपने बाप की खुशी से शादी करना चाहता था।

दूसरी तरफ करण भी समझ गया था कि अब उसके मना करने से भी कुछ फर्क पड़ने वाला नहीं है और वो साथ ही साथ उनका इतना गहरा अटूट प्यार देखकर पिघल चुका था।

करण कबीले वालो से बोलता हैं: जाओ उत्सव की तैयारी करो , आज ही माही और समर की शादी होगी जैसे की कबीले का नियम है।

समर और माही ये बात सुनते ही खुशी से खिल उठे। और एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुरा दिए।

सारा कबीला जश्न में डूबा हुआ था और माही को दुल्हन बना दिया गया । उफ्फ लाल रंग के जोड़े में वो कितनी खूबसूरत लग रही थी ।

उसके बालो में चमेली के फूलों का जूडा,उसकी बड़ी बड़ी खूबसूरत आंखो में लगा गहरा काला काजल उसकी आंखो को और भी खूबसूरत बना रहा था , उसके गाल आज बिल्कुल सेब की तरह से लाल सुर्ख हो चुके थे और उसके होंठ आज गहरे लाल रंग की लिपस्टिक में कहर ढा रहे थे। उसके होठ आज बिल्कुल ताजे गुलाब की पंखुड़ियों की तरह से लग रहे थे । उसकी शर्म के मारे झुकी हुई नजरे उसके चेहरे को और खूबसूरत बना रही थी। उसका जिस्म एक मादक खुशबू से महक रहा था, ऐसा लग रहा था मानो स्वर्ग से साक्षात कोई सेक्स की देवी उतार अाई हो।

उधर समर भी कम खूबसूरत नहीं लग रहा था , उसके गोरे चिट्टे रंग पर हल्का गुलाबी रंग का सूट गजब लग रहा था । माही की ख्वाहिश थी कि जब समर उसका दूल्हा बने तो गुलाबी रंग का सूट पहने।

माही और समर दोनो शादी के मंडप में आ चुके थे और जैसे ही समर माही को देखता है उसे देखता ही रह जाता हैं। उफ्फ कितनी प्यारी है उसकी दुल्हन ।

उधर माही भी एक बार हिम्मत करके अपनी नजरे उपर उठाती है और जैसे ही समर को देखती है उसका दिल खुशी से छलांगे मारने लगा था। गुलाबी रंग के सूट में वो सचमुच बहुत खूबसूरत लग रहा था । जैसे ही उसकी नजरे समर की नजरो से मिली दोनो के दिल जोर से धड़क उठे और दोनो एक साथ मुस्कुरा दिए।

दोनो मंडप में बैठ चुके थे और रीति रिवाज के अनुसार उनकी शादी का कार्यक्रम शुरू हो चुका था । माही तो शर्म से सिमटी जा रही थी , उसकी धड़कन बहुत तेज हो रही थी।

करण ने माही का कन्यादान खुद किया और जैसे जी उसने माही का हाथ समर के हाथो में दिया तो समर के उसका हाथ चूमते हुए थाम लिया जिस कारण सभी वहां मौजूद सभी लोगो की हंसी गूंज उठी । इसी हंसी खुशी के माहौल में उनकी शादी की सारी रस्में पूर्ण हुई । अब वो दोनो एक दूसरे के पति पत्नी बन चुके थे।

अब नियमो के हिसाब से पहले इन दोनों को आशीर्वाद लेने अपने कुल गुरु कोबी बाबा के मंदिर जाना था।

अब दूल्हा और दुल्हन दोनों को एक अच्छे से सजी हुई पालकी मैं बिठा दिया गया और लोग पालकी उठाकर मंदिर की तरफ चल दिए ।

पालकी में अंदर माही और समर बैठे हुए थे । दोनो एक दूसरे की आंखों में देख रहे है मानो पूरी तरह से खो जाना चाहते हो। फिर समर उसकी आंखो में देखते हुए अपने लिप्स पर जीभ घुमाता हैं तो शर्म के मारे माही का चेहरा पूरा लाल पड़ गया और उसके नजरे झुक गई।

समर: मेरी जान अब इतना क्यों शरमा रही हो ? अपने दूल्हे की तरफ देखो।

माही नजरे नीची किए हुए ही जवाब देती है: जाओ बेशर्म कहीं के और मुस्कुरा देती हैं

समर: ओए होए मेरी शर्म की गुड़िया , अगर इतना शरमाओगी तो सुहागरात कैसे मनाओगी।

सुहागरात सुनते ही माही की आंखे लाल हो जाती हैं और होठ लरजते हुए अपने आप रस से गीले हो जाते हैं और चूचियां उपर नीचे होने लगती हैं जिससे उसकी चूत में नमी आ गई थी।

अब जैसे ही वो सब भीमा के कबीले के गुजरते है तो नियमो के हिसाब से अब इसके कबीले के लोगो को पालकी उठाकर मंदिर तक ले जाना था और सबसे पहले सरदार यानी भीमा आगे आया और उसने पालकी को उठा लिया और फिर सब मंदिर की तरफ चल दिए ।

पालकी के अंदर समर की शरारतें चालू थी । कभी वो माही के होंठो को देखकर अपने होठों पर जीभ घुआंता तो कभी माही की उपर नीचे हो रही चूचियों को देख कर जीभ निकालता और माही को छेड़ता । माही भी उसकी प्यार भरी छेड़ छाड़ का मजा ले रही थी और बीच बीच में नजरे उठा कर समर की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी मानो उसे बता रही हो कि उसे भी ये सब अच्छा लग रहा है।

भीमा को ऐसा लग रहा था मानो सारी दुनिया का बोझ उसके कंधो पर डाल दिया गया था। लेकिन नियमो के चलते मजबूर था और ना चाहते हुए भी आगे बढ़ रहा था।

कोबी बाबा का आश्रम आ चुका था।

वो पालकी को अंदर रख देते हैं और समर और माही पूरे परिवार के साथ विधिपूर्वक पूजा अर्चना करते हैं और कोबी बाबा का आशीर्वाद लेते हैं । आज बाहर बहुत तेज हवाएं चल रही थी जो आमतौर पर नहीं चलती थी

ऐसा लग रहा था मानो कोई तूफान आने वाला हो।

फिर वो सब माही और समर को लेकर आश्रम के अंदर बनी उस गुफा में जाते हैं जहां हिमबा आज भी चांद और वीर की प्रतीक्षा कर रही है कि कब वो आएंगे और उसे अपने पापा से मुक्ति मिलेगी।
 
( जब भी कोई शादी होती थी तो उन्हें गुफा के सामने से जाना पड़ता था कि कहीं अगर वो वीर और चांद हुए तो गुफा खुल जाएगी और अंदर इनकी प्रतीक्षा कर रही हिमबा को मुक्ति मिलेगी। लेकिन इनकी सबसे बड़ी विशेषता ये होगी कि वो दोनो अभी तक कुंवारे होंगे क्योंकि वो कुंवारे ही मरे थे)

जैसे ही समर और माही गुफा के सामने पहुंचते हैं एक जोरदार आवाज के साथ तेज प्रकाश होता है और गुफा का मुंह खुल जाता हैं और इससे पहले कि कोई ज्यादा कुछ समझ पाता एक अजीब सी ताकत समर और माही को गुफा के अंदर खींच लेती है और गुफा का मुंह बंद हो जाता है ।

बाहर खड़े लोग जैसे होश में आते है और हर किसी के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ जाती हैं क्योंकि हिमबा को मुक्ति मिल जाएगी और कुश्ती वाली ये परम्परा हमेशा के लिए बंद हो

जाएगी।

खास तौर से लडकीयां सबसे ज्यादा खुश थी क्योंकि दांव पर उन्हें है लगाया जाता था।

उधर जैसे ही गुफा का मुंह बंद होता है तो माही डर के मारे समर से चिपक जाती हैं और तभी उन्हें एक बहुत कमजोर और धीमी सी आवाज सुनाई देती हैं कि आ जाओ डरो मत चांद और वीर में हींबा यहां सदियों से तुम्हारी ही प्रतीक्षा कर रही हूं ।

दोनो डरते हुए अन्दर जाते हैं पूरी गुफा एक तेज प्रकाश से चमक रही थी जो ना जाने कहां से आ रहा था।

फिर इनकी नजर सामने बैठी हुई एक औरत पर पड़ी जो पूरी तरह से कमजोर हो गई थी । शरीर पर मांस जैसे नाम मात्र थी और उसकी हड्डियां साफ दिखाई पड़ रही थी । माही बहुत डर गई थी।

औरत: डरने की कोई जरूरत नहीं है चांद । गौर से मुझे देखो में हिबां हूं ।

माही और समर ध्यान से उसकी तरफ देखते हैं लेकिन उन्हें कुछ याद नहीं आता।

समर: मैं आपको नहीं जानता । बताओ कौन हूं आप।

औरत: अरे गलती मेरी ही हैं तुम्हे अब कहां याद रहा होगा क्योंकि आदमी नए जन्म में सब पुरानी बाते भूल जाता है रुको में याद दिलाती हूं।

ऐसा कहकर वो औरत एक मंत्र बुदबुदाती हैं और वहां एक तेज प्रकाश होता है जिससे माही और समर दोनो की आंखे मूंद जाती हैं और उनका सिर घूमने लगता हैं।

फिर जैसे ही वो नॉर्मल होते हैं तो दोनो एक दूसरे के तरफ देखते हुए खुशी से आपस में चिपक जाते हैं जैसे उन्हें सबकुछ याद आ गया हो।

चांद: वीर में आपसे बहुत प्यार करती हूं ।अब कभी मुझे छोड़ कर मत जाना

वीर: मैं भी चांद। अभी कभी कहीं नहीं जाऊंगा तुम्हे छोड़कर

तभी उन्हें हिंबा की आवाज सुनाई देती हैं : अच्छा हुआ तुम्हे सब कुछ याद आ गया।

चांद: वीर भागो यहां से ये हमे जला देगी।

औरत: मैं ऐसा कुछ नहीं कर पाऊंगी। एक बार मैंने अपने अंधे प्यार के लालच में तुम दोनो को जलाकर जो पाप किया था उसकी सजा अब तक काट रही हूं और सदीयो से तुम दोनो की प्रतीक्षा कर रही हूं। मैं वीर से प्यार करती थी और जब मैंने तुम्हे प्यार करते देखा तो मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई और अपनी सहेलियों के साथ मिलकर तुम दोनो का जला दिया था । और उस हादसे कि वजह से कोबी बाबा ने सब लड़कियों को श्राप दे दिया था।

लेकिन अब तुम दोनो आ गए हो तो मुझे भी मुक्ति मिलेगी और साथ ही साथ दोनो कबीले इस श्राप से मुक्त हों जाएंगे।

चांद और वीर को सब कुछ याद आता जा रहा था ।

हिम्बा: मेरे कारण तुम दोनो की दर्दनाक चींखें यहां गूंजी थी जिस करण ये गुफा शापित हो गई थी ।

हिंबा आगे बोलती हैं कि मैं जानती हूं कि तुम दोनो ने जब भी एक होना चाहा बीच में कोई ना कोई अड़चन आती रही वो सब मेरी वजह से ही रहा था क्योंकि अगर ऐसा हो जाता तो गुफा का द्वार कभी नहीं खुलता ( वीर को सब बाते याद आने लगती की उसके लंड कि गांठ की वजह से लंड सुपाड़े से आगे नहीं घुसा, तो कभी बिना टाइम माही को पीरियड हो गए। )

हिंबा उसे अपने पास बुलाती हैं तो

वीर आगे बढ़ता है तो वो एक मंत्रित पानी की बॉटल उसे देती हैं और बोलती हैं कि ये मेरी बरसों की तपस्या का फल हैं, इसे पीने के बाद तुम्हारे शरीर में एक अद्भुत ताकत आ जाएगी और अब जब तुम दोनो की प्यार भरी सिसकियां यहां गूंजेगी तो ये जगह भी श्राप से मुक्त हो जाएगी।

मुझे जाना होगा मेरी मुक्ति का टाइम आ गया है और ऐसा बोलकर वो आसमान की तरफ उड़ती हुई चली जाती हैं। वीर एक बार उस बॉटल की तरफ देखता हैं और उसे एक ही सांस में पूरी पी जाता है

जैसे ही वो गई चांद और वीर को सब कुछ याद आ गया था लेकिन उसके जाते ही वो सब सब भूल गए थे।

फिर समर माही को साथ में लेकर गुफा में अंदर गया तो एक दरवाजा लगा हुआ था जी की बंद था।

समर ने जैसे ही दरवाजे को हाथ लगाया वो अपने आप ही खुलता चला गया।

जैसे ही दरवाजा खुला दोनो की आंखे खुशी और हैरानी से खुलती चली गई। बाहर एक शानदार खूबसूरत मैदान था जिसके बीच से एक सुंदर सी नदी बह रही थी और उसकी कल कल करती हुई पानी की आवाज उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रही थी। मैदान चारो तरफ से खुशबूदार पेड़ो से घिरा हुआ था जिस कारण वहां पेड़ो की एक दीवार सी बन गई थी और मैदान के बीचों बीच एक गोल डबल बेड पड़ा हुआ था जो कि गुलाब और केशु के फूलों से सजाया हुआ था बेड पर एक सफेद रंग की साफ सुथरी चादर बिछी हुई थी और 4 सफेद रंग के खूबसूरती तकिए पड़े हुए थे जिनके बीच में एक सफेद रंग का टॉवेल पड़ा हुआ था। मैदान के बीचों बीच उपर आसमान में तारे चमक रहे थे और चांद तो आज अपने पूरे शवाब पर था जिसकी हल्की हल्की चांदनी पूरे मैदान को रोशन कर रही थी मानो चांद भी उनके इस मधुर मिलन का साक्षी बनना चाहता हो।
 
इस मैदान में ना कोई उन्हें देखने वाला था और ना ही कोई उनकी आवाज सुनने वाला। समर और माही का चेहरा खुशी से खिल उठा क्योंकि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनका पहला मिलन इतनी खूबसूरत जगह पर होगा ।

अब दोनो से बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था इसलिए माही ने समर की तरफ देखते हुए अपने दोनों हाथ ऊपर उठा दिए मानो उसे कह रही हो कि मुझे अपनी बांहों में भरकर सुहाग सेज पर ले चलो ।

समर आगे बढ़ कर माही को किसी नाजुक गुड़िया की तरह से अपनी गोद में उठा लेता है। जैसे ही उसने माही को उठाया तो माही को उसके जिस्म की कठोरता का एहसास हुआ कि उसका जिस्म एक दम पत्थर जैसा बन गया था । माही खुशी से झूम उठती हैं क्योंकि आज उसे पता चला था कि समर ने पहलवान बनने के लिए कितना पसीना बहाया हैं।

समर जैसे ही उसकी आंखो में देखता है दोनो खो से जाते हैं ।समर जैसे ही अपने होठ आगे बढ़ाता है तो माही उसके होंठों पर एक उंगली रख देती हैं और बेड की तरफ इशारा करती हैं मानो बात रही हो कि सुहाग रात बेड पर होती है ।

माही की गांड़ समर की गोद में होने के कारण उसके लंड से छू रही थी जिससे उसे एहसास हुआ कि उसका लन्ड आज जितना टाइट पहले कभी नहीं हुआ था।

माही सोच रही थी एक तो पहले से इतना बड़ा और मोटा था, उपर से मोटी मोटी गांठ, अब पहलवान बनने के कारण और उपर से मंत्रित जल से मिली ताकत , उफ्फ कैसे झेल पायेगी वो इस खौफनाक लंड को । ये सब सोचते ही उसकी चूत गीली होने लगी थी

समर उसे बेड पर बिठा देता हैं तो माही को सुहाग सेज पर बैठकर शर्म महसूस हुई और उसकी नजरे शर्म से झुक गई थी। समर उसके पास बैठकर अपने हाथ से उसके सुंदर मुखड़े को देखता हैं तो उसके होश उड़ जाते हैं।

वो धीरे से उसके चेहरे को उपर उठाता हैं तो माही की आंखे बंद हो गई थी । होंठ खुल और बंद हो रहे थे और एक मस्त रस उसके होंठो पर चमक रहा था ।

समर:बिल्कुल चांद की तरह खूबसूरत लग रही है मेरी जान।

अपनी आंखे खोलो माही ।

माही धीरे धीरे अपने पलके उठाते हुए अपनी आंखे खोल देती हैं और समर की तरफ देखती है और फिर जैसे ही समर अपने होंठ आगे बढ़ाकर उसके होंठो के पास लाता हैं वो आंखे बंद करते हुए अपने होंठो को आगे बढ़ा देती हैं । समर अपने जलते हुए होंठो को उसके प्यासे होंठो पर रख देता हैं और चूसने लगता हैं। माही भी जोश में आते हुए उसके होठ चूसने लगती हैं । आज उन्हें किस मैं अजीब सा मजा आ रहा था , समर उसके होठों को जोर जोर से ऐसे चूस रहा था मानो उनमें से कोई रस निकाल रहा हो।

माही अपने हाथ उसके सिर के पीछे ले आती हैं और उसके बालों को सहलाते हुए उसके होठ चूस रही थी।

समर अपन एक हाथ उसकी कमर पर रख देता हैं और हल्के हल्के सहलाने लगा था।

तभी समर अपनी जीभ बाहर निकालता हैं तो माही अपना मुंह खोल देती हैं और उसकी जीभ माही के मुंह में प्रवेश कर गई।

दोनो के दूसरे की जीभ चूस रहे थे , दोनो जैसे जोश से भर रहे थे ।

एक लंबा किस होने को बाद जब दोनो की सांसे उखड़ने लगी तो दोनो सांस लेने के लिए रुकते हैं और फिर से उनके होठ जुड़ जाते हैं।

फिर समर माही को बेड पर लिटा देता हैं और खुद उसके उपर लेटते हुए किस करने लगता हैं और माही के दोनो हाथ अपने हाथों में भरकर मसलने लगता हैं ।

उपर आ जाने के कारण अब उसका खड़ा हुआ लंड माही की चूत पर कपड़ों के उपर से दबाव डाल रहा था जिससे माही की चूत में नमी आने लगी थी और वो भी नीचे से अपनी मोटी भारी गांड़ उठा कर उसके लंड पर रगड़ रही थी। मस्ती के कारण उसकी आंखे बंद हो चुकी थी

किस करते करते समर अपने सूट के बटन खोल कर उसे अलग कर देता हैं और अपना बनियान भी निकाल देता हैं तो उसकी चोड़ी ठोस छाती अब उपर से पूरी नंगी हो चुकी थी । किस करते करते माही जैसे ही अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर लाती हैं तो उसे एहसास हुआ कि समर की छाती नंगी हो चुकी हैं और उसकी आंखे खुल जाती हैं और ध्यान से उसकी छाती को देखती हैं तो उसे एहसास हुआ कि पहली से ज्यादा चौड़ी हो गई है । तो क्या लंड भी चौड़ा हो गया होगा ये ख्याल जैसे ही उसके मन में आता हैं उसकी चूत से रस निकलना शुरू हो गया था जिससे उसकी कच्छी गीली होने लगी थी।

वो अपने हाथ आगे लेट हुए उसकी छाती पर रख देती हैं तो उसे एहसास हुआ कि उसकी छाती बिल्कुल ठोस और कठोर बन चुकी है तो क्या लंड भी कठोर??

जैसे ही ये ख्याल मन में आता है तो उसकी गीली चूत में खुजली बढ़ जाती हैं । वो धीरे धीरे अपना हाथ समर की छाती पर घुमाती रहती हैं जिससे समर को बहुत सुकून मिल रहा था। अब समर आगे बढ़ते हुए माही की आंखो में देखते हुए उसके हाथ उपर की ओर उठाने लगता हैं तो माही उसका इशारा समझते हुए अपने दोनो हाथ उपर उठा देती हैं और समर प्यार से उसका सूट उपर उठा कर निकाल देता हैं तो अब माही उपर से सिर्फ काले रंग की एक ब्रा में थी। शर्म के एहसास से माही की आंखे बंद हो गई। समर को एहसास हुआ कि उसकी चूचियां पहले से ज्यादा गोल और भर सी गई हैं और पूरी तरस से उसकी ब्रा में नहीं समा रही थी । ब्रा इस कदर टाइट लग रही थी कि चूचियां दब रही थी और अकड़ती जा रहीं थीं। समर ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचियों को हाथ में भर लेता हैं और दाबने लगता हैं तो माही का मजा बढ़ जाता है और उसका मुंह खुल जाता है और वो सिसकी लेने लगती हैं तो समर जोश में आते हुए जोर जोर से उसकी चूचियां दबाने लगता हैं और फिर दोनो हाथ पीछे ले जाते हुए उसकी ब्रा का हुक खोल देता हैं और उसके ब्रा को एक झटके के साथ उसके जिस्म से अलग कर देता हैं । माही की तो सांसे बढ़ गई थी और ब्रा के हटते ही उसकी चूचियां उछल कर बाहर आ गई जो पूरी ठोस थी।जोर जोर से सांस लेने के कारण उसकी चूचियां उपर नीचे हो रही थी । वो हिम्मत करके एक बार अपनी आंखे खोलती हैं तो पाया कि समर बहुत ही प्यार से उसकी चूचियां देख रहा हैं ।चूचियां पूरी टाइट थी और कठोरता से खड़ी हुई थी और निपल्स तो और भी टाईट होकर उपर की और तने हुए थे मानो समर का मुंह चिढ़ा रहे हो।

समर को समझ नहीं आ रहा था कि वो इतनी खूबसूरत चूचियों को पहले चूसे या दबाए । फिर वो एक को हाथ में भर लेता है और दूसरी को चूसने लगा ।

जैसे ही माही को अपने दोनो चुचियों पर एक साथ हमले का एहसास हुआ मजे से उसका मुंह खुल गया और वो सिसकने लगी। उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी और अब कच्छी से रस बाहर निकल रहा था ।

समर उसकी एक चूची को पूरा हाथ में भरकर दबा रहा था तो दूसरी को चूस रहा था।

माही : आह समर, बहुत अच्छा लग रहा है , और जोर से चूसो , पूरी मुंह में लो मेरी जान।

समर उसकी पूरी चूची को मुंह में भर लेता हैं और जोर जोर से चूसने लगता हैं।

माही अब पूरे जोश में आ चुकी थी । सदियों की प्यास उस पर हावी हो रही थी और वो सिसकियां लेते हुए अपनी चूत को उसके लंड पर कपड़ों के उपर से ही रगड़ रहीं थीं। समर उसकी दूसरी चूची को पूरी ताकत से दबा रहा था ।और जितनी वो अंदर दबती इतनी ही तेजी से उपर आती । उफ्फ समर भी पागल होता जा रहा था। अब माही से सब्र नहीं होता और वो नीचे हाथ ले जाकर समर की पेंट को खोल देती है और साथ ही उसका अंडर वियर भी बाहर खीच देती हैं तो लंड फुदक कर बाहर आ जाता हैं ।माही जैसे ही उसे अपने हाथ से पकड़ती है तो उसका रोम रोम सुलग उठता हैं । उफ्फ कितना टाइट हो गया हैं बिल्कुल पत्थर को तरह । कितना बड़ा और मोटा हो गया हैं पहले से । लंड उसके एक हाथ में पूरा नहीं आ रहा था इसलिए वो उसे दोनो हाथो से पकड़ लेती हैं और जैसे ही उसकी उंगलियां लंड की गांठ पर पड़ी उसकी चूत से आह निकल पड़ी । इतनी मोटी गांठ कैसे अंदर घुसेगी ये ख्याल मन में आते ही उसकी चूत और ज्यादा काम रस छोड़ने लगी मानो आज चूत खुद को पूरी तरह से गीला कर लेना चाहती हो।

समर अब उसकी दूसरी चूची को मुंह में भर लेता हैं और चूसने लगता हैं । माही की मादक सिसकियां अब पूरे मैदान में गूंज रही थी।
 
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