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Incest फूफी और उसकी बेटी से शादी

मैं- "क्यों नहीं पहन सकती?"

रुखसाना - "क्योंकी ये पहली वाली नाइटी से भी ज्यादा छोटी है और कुछ ज्यादा ही ट्रॅन्स्परेंट है..."

मैं- "तो क्या हुआ ये तुम मेरे लिए ही तो पहन रही हो, किसी और के लिए थोड़ी ना... "

रुखसाना - पर मुझे बहुत शर्म आ रही है में ये नहीं पहन सकती ।

मैंने सोचा की ये बहुत नखरे दिखा रही है इसे थोड़ा छेड़ना पड़ेगा। मैं गुस्सा होने की आक्टिंग करने लगा- “ठीक है, ना पहनना। मैं तुम्हारे लिए इतनी महंगी नाइटी लाया था पर तुम्हें नहीं चाहिए तो कोई बात नहीं। मैं इसे शाजिया को किसी बहाने से दे दूंगा और वो मुझे तुमसे ज्यादा प्यार करती है। मैं ही तुम्हारे चक्कर में उसे अस नहीं डाल रहा था। वो बिना कुछ पूछे ये नाइटी ले लेगी..."

रुखसाना ने ये सुनकर वो नाइटी मेरे हाथ से छीन ली और कहने लगी- “आप उसे ये नाइटी बिल्कुल ना दीजिएगा, नहीं तो मैं आपसे कभी बात नहीं करूँगी। वो तो मुझे शर्म आ रही थी इसलिए मैंने मना कर दिया था। पर आपको बुरा लग रहा है, इसलिए मैं आपके लिए ये पहन लूँगी। लगता है आपके दिल में शाजिया के लिए प्यार कुछ ज्यादा ही बढ़ रहा है, तभी तो आप मेरे मना करने के बाद ही इतना जल्दी उसे ये नाइटी देने को तैयार हो गये..."

मैं- "नहीं मेरी जान ऐसा कुछ भी नहीं है..." बात कहीं और जाने लगी थी तो मैंने उसे पलटने की कोशिश की, और कहा- “अब जाओ जल्दी इसे पहन के आओ। मुझे तुम्हें इस नीली नाइटी में देखना है..."

रुखसाना को थोड़ा समझाया तो वो नाइटी ट्राई करने चली गई। हम लोग किचेन में थे क्योंकी शाजिया बेडरूम में सो रही थी। 5 मिनट के बाद रुखसाना नाइटी पहन के आई तो उसे देखकर मेरा मुँह खुला का खुला रह गया। वो क्यामत लग रही थी। रुखसाना का चेहरा शर्म के मारे लाल हो रहा था।

मैंने कहा- “एकदम जन्नत की परी लग रही हो..." और मैं उसे चारों तरफ से घूम-घूम के देखने लगा। उसकी गाण्ड देखकर मन में लड्डू फूटने लगे, और मैंने कहा- "मैं बहुत खुश नसीब हूँ की मुझे तुम जैसी औरत मिली। तुम्हारे लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ...

रुखसाना ये सुनकर हँसने लगी। मैंने टाइम ना बरबाद करते हुए तुरंत उसको बाहों में पकड़ा और पागलों की तरह किस करने लगा। कभी उसके होठों पे तो कभी उसकी गर्दन पे। फिर उसकी नाइटी उठाकर अपना हाथ उसकी गाण्ड पे ले गया और कस कस के दबाने लगा। मैं इतने जोर से दबा रहा था की उसकी अया अया अया करके चीखें निकल रही थी।

रुखसाना बार-बार कह रही थी- "छोड़ दीजिए... छोड़ दीजिए मुझे..."

पर मैं उसे किस किए जा रहा था और उसकी गाण्ड को मसले जा रहा था। वो मुझसे छूटने की बहुत कोशिश कर रही थी, उसकी चीखें भी तेज हो रही थी। मुझे अचानक एहसास हुआ की मैं आपे से बाहर जा रहा हूँ और कहीं शाजिया उठ ना जाए तो में रुक गया।

रुखसाना मुझसे अलग हुई, और गुस्से से कहा- “मैंने आपसे पहले भी कहा था की आप अपने आप पे कंट्रोल रखना...'

मैंने तुरंत कहा- “सारी जानू तुम इतनी कामुक हो की मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ। अच्छा मुझे एक किस दो और उसके बाद तुम सोने चले जाना.." फिर उसे 10 मिनट तक किस किया और फिर वो सोने चली गई।

मैंने अपने को मन में गाली दी- “साला अगर थोड़ा कंट्रोल किया होता तो आज फूफी के साथ कुछ बात आगे बढ़ा सकता था.” और मेरा मूड खराब हो गया था तो में तुरंत सोने चला गया।
 
अगली सुबह मैं देर से उठा। शाजिया तैयार हो रही थी स्कूल के लिए। फूफी छत पे थी। मैंने शाजिया को देखा तो मुझे पिक्चर हाल की किस याद आ गई।

मैंने कहा- "शाजिया इधर आओ..." और उसे मैंने अपने बगल में बैठाया और कहा- “कल तुम्हारे लिए मैंने एक ड्रेस खरीदी थी, तुम्हें वो पसंद तो आई थी ना?"

उसने कहा- "हाँ बहुत पसंद आई थी..."

मैं- “मैंने तुम्हारे लिए वो ड्रेस खरीदी तो मुझे कुछ नहीं दोगी ?"

शाजिया- "उसके बदले क्या चाहिए आपको?"

मैं- “अपने होठों पे किस...

शाजिया शर्माकर उठ गई और कहने लगी- "कल ही तो आपने किस किया था। आज फिर से चाहिए? मुझे लेट हो रहा है स्कूल के लिए, मैं जा रही हूँ..” और वो हँसते-हँसते चली गई।

मुझे रात वाली बात याद आ गई। मैंने धीमे से कहा- “साला ये माँ बेटी के तो नखरे बहुत बढ़ गये हैं। ऐसे तो मैं इन लोगों के साथ कुछ नहीं कर पाऊँगा.." थोड़ी देर बाद मैं बाथरूम में फ्रेश होने चला गया।

मैं जब बाहर निकला तो मेडम का फोन आ गया। मैंने उनसे बात की तो पता चला की गवर्नमेंट ने कल शाम को अपना डिसिशन चेंज कर दिया है। अब अल्कोहल पे कोई बैन नहीं होगा और हड़ताल भी खत्म हो चुकी है। तो मुझे आज से आफिस जाना पड़ेगा। मैं फटाफट तैयार होकर आफिस के लिए निकल गया । होटेल जाकर मैं अपने दोस्तों से मिलने लगा।

मैंने आप लोगों को अभी तक अपने होटेल के दोस्तों के बारे में नहीं बताया। वहां पर मेरे बहुत से दोस्त बन चुके थे जैसे विमल, राहुल, मनीष, अमित और बहुत से पर ये मेरे खास दोस्त हैं। मैं उनसे बात कर रहा था ।

विमल ने कहा- “यार तूने अभी तक अपनी यूनिफार्म क्यों नहीं पहनी?"

बाकी लोग भी कहने लगे- "जाओ जाकर पहन लो। मेडम आती ही होगी..."

मैं- "अब मैं आज से वो वेटर की यूनिफार्म नहीं पहनूंगा...'

राहुल और अमित पूछने लगे- "क्यों नहीं पहनोगे? आखिर क्या हो गया अचानक?"

मैंने कहा- "क्योंकी आज से मैं मैडम का पी.ए. हूँ। मैडम ने मुझे प्रमोशन दिया है.-."

सब लोग चौंक गये और पूछने लगे- “ये कब हुआ?"

मैं- "अभी 3 दिन पहले ही मेडम ने मुझे प्रोमोट किया है और कहा मेरी तुम्हारी अंडरस्टैंडिंग अच्छी है इसलिए तुमको ये प्रमोशन मिल रहा है..."

तभी विमल बीच में बोल पड़ा- "अंडरस्टैंडिंग अच्छी है या फिर मेडम और तुम्हारे बीच कुछ चल रहा है?"

मैंने कहा- "ऐसी कोई बात नहीं है। मैडम की मैं बहुत रेस्पेक्ट करता हूँ और वो मुझे अपना दोस्त जैसा मानती है और कोई बात नहीं है..."

वो लोग मुझे बधाई दे रहे थे।

थोड़ी देर बाद सुरभि मेडम भी आ गई। उन्हें आता हुआ देखकर सब लोग अपना काम करने लगे। मैडम ने मुझे देखकर अपने केबिन में आने को कहा

मेडम ने केबिन में बुलाया और मुझे मेरा सारा काम समझाने लगी। उन्होंने मुझे अपने बारे में होटेल की फाइलों सबके बारे में बताया। मैं उनका पर्सनल असिस्टेंट हूँ इसलिए उन्होंने मुझे अपने पर्सनल सामान के बारे में भी बताया। क्योंकी जब भी उनको किसी चीज की जरूरत हो तो मैं उन तक वो सामान पहुँचा सकूं। वो मुझे मेरा काम समझाने लगी। समझाते समझाते उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे कहीं ले जाने लगी।
 
मेडम ने अपने ही केबिन के अंदर मेरे लिए एक अच्छी सी दिखने वाली डेस्क और चेयर लगवा दी थी। ताकी मैं अच्छे से उनका काम कर सकूं। मैं अपनी खुद की डेस्क देखकर खुश हो गया। अब मैं उनके सामने ही रहकर काम करूँगा। मैंने मैडम को थैंक्यू कहा ।

मैडम- “थैंक्यू कहने की कोई जरूरत नहीं है। तुम्हें मैंने 'अपने लिए रखा है।

तभी मेडम घबरा के अपनी बात बदलने लगी- 'अपने लिए' मतलब अपने काम के लिए रखा है।

मैंने कहा- "जी मेडम जी..."

मैडम "नहीं, अब से तुम मुझे सुरभि मेम कहकर बुलाओगे। ठीक है?"

मैं- "मेम आप जैसा कहेंगी मैं वैसा ही करूँगा..."

मेडम “तो अब से अपना काम शुरू कर दो। ये कुछ फाइलें है जो हमारे की डिपार्टमेंट्स से आई है इन्हें चेक करो और फिर मुझे देना। तुम्हें धीरे-धीरे अपना काम समझ में आ जाएगा...'

मैं- "ठीक है मेम मैं चेक करता हूँ." और मैं मेम के केबिन में बैठकर काम करने लगा।

इसलिए घर जाने में देर हो गई।

मैडम बीच-बीच में मुझसे मेरे परिवार और मेरे गाँव के बारे में बातें करने लगी। पहला दिन तो अपना काम समझने में ही निकल गया। मेडम ने भी पूरे दिन बीच-बीच में काम समझाया। क्योंकी आज पहला दिन था

रात के 9:00 बज रहे थे। मैंने सोचा इतनी देर हो गई फिर भी रुखसाना और शाजिया का फोन नहीं आया। शायद उन दोनों को मेरी अब ज्यादा फिकर नहीं है। इस बात को लेकर मेरे मन में थोड़ा सा गुस्सा था। मैं 10:00 बजे तक घर पहुँचा ।

शाजिया ने दरवाजा खोला।

इतने में दरवाजे पे फूफी भी आ गई और कहने लगी- "कहा थे तुम? हम दोनों कितना परेशान हो गये थे... क्योंकी रुखसाना शाजिया के सामने फूफी बनकर ही बात करती थीं।

मेरे मन में थोड़ा सा गुस्सा था इसलिए मैं उन दोनों के सवाल का जवाब दिए बिना ही घर के अंदर चला गया। अपना सामान रखने के बाद मैं बाथरूम में फ्रेश होने चला गया। थोड़ी देर बाद जब मैं निकला तो फूफी और शाजिया बेड के पास खड़ी होकर मेरा बाथरूम से निकलने का इंतजार कर रही थी।

फूफी- "क्या हुआ वसीम कुछ परेशान लग रहे हो? क्या बात है? हमें बताओ..."

मैंने गुस्से से बोला- “ज्यादा आक्टिंग करने की जरूरत नहीं है। तुम दोनों को मेरी कितनी फिकर है ये मुझे पता है..." फूफी और शाजिया ये बातें सुनकर थोड़ा हैरान हो गये की अचानक से मुझे क्या हो गया है?

फूफी ने पूछा- “क्या हुआ बेटा, ऐसा क्यों बोल रहे हो?"

इतने में शाजिया भी बोल पड़ी- "क्या हुआ है भैया?"

मैं- “ज्यादा आक्टिंग ना करो। अगर मेरी चिंता होती तो मुझे एक बार फोन करके पूछते की मैं कहा हूँ?"

फूफी- "लेकिन बेटा ....

मैंने उन्हें बीच में ही रोक दिया- "मुझे कोई एक्सप्लानेशन नहीं चाहिए..."

फूफी- “बेटा मेरी बात तो सुन लो..."

शाजिया- "हाँ भैया, एक बार अम्मी की बात तो सुन लो.."

मैंने कहा- "मुझे अब कुछ नहीं सुनना। मैं दिन भर काम करके थक गया हूँ और मुझे बहस करके टाइम नहीं वेस्ट करना है। जाओ मेरा खाना लेकर आओ मुझे सुबह उठकर वापस होटेल भी जाना है...."

शाजिया- "लेकिन भैया, एक बार बात सुन लो.."

मैंने कहा- “अब मुझे किसी की कोई बात नहीं सुननी है। मैंने खाना माँगा था अब वो भी नहीं दोगी क्या? मैं बिना खाना खाए सो जाऊँ?"

फूफी- "नहीं नहीं बेटा, मैं खाना लाती हूँ-- शाजिया चल मेरे साथ भैया का खाना निकालते है..” और उन दोनों के मुँह लटक गये थे। मेरा ऐसा बर्ताव देखकर वो चुपचाप किचेन में चली गई खाना निकालने ।

खाना खाने के बाद में सोने चला गया।
 
अगले दिन सुबह उठा तो उन दोनों के उदास चेहरे देखे। मुझे लगा की मैं कुछ ज्यादा ही नाराज हो गया कल रात। पर मेरे मन में थोड़ा-थोड़ा गुस्सा अभी बाकी था। मैं फ्रेश होने चला गया और थोड़ी देर बाद निकल के तैयार होने लगा होटेल के लिए मैंने देखा फूफी और शाजिया मेरी तरफ धीमे-धीमे चल के आ रहे थे। शायद मुझसे डर रहे थे की मैं फिर से किसी बात पे गुस्सा ना हो जाऊँ ।

फूफी- "वसीम बेटा, मुझे तुमसे कुछ कहना है...."

मैं- “हाँ बोलिए क्या कहना है?"

फूफी- “वो बेटा कल हम लोग तुम्हें फोन करने जा रहे थे पर मेरे फोन में बैलेन्स नहीं था इसलिए फोन नहीं कर पाए। काफी रात हो चुकी थी और तुमने कहा था की रात में घर से बाहर ना निकलना इसलिए मैंने शाजिया को भी बाहर नहीं भेजा बैलेन्स डलवाने..." और ये सब कहते वक़्त फूफी और शाजिया के मुँह बहुत उदास थे और उनकी आँखों में आँसू भी आ गये थे।

मैंने मन में कहा- “यार इसका मतलब मैंने इन दोनों को फिजूल में डाँट दिया..” फिर मैंने उन दोनों की आँखों से पानी पोछा और गले लगा लिया, और कहा- “सारी... मैंने तुम लोगों की बात भी नहीं सुनी कल रात सारी..."

फूफी- "वसीम बेटा आगे से कभी भी नहीं कहना की मुझे तुम्हारी कोई चिंता नहीं है। मेरे लिए तो तुम ही मेरे सब कुछ हो...."

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शाजिया- "हाँ भैया, दुनियां में सबसे ज्यादा प्यार मुझे तुमसे ही है। इसलिए ये कभी ना कहना की मैं तुमसे प्यार नहीं करती...'

अब वो दोनों मेरी बाहों में थी। मैं उन दोनों के मुँह से ये सुनकर बहुत खुश हो गया। मैंने दोनों के गालों पे किस किया। फूफी और शाजिया को शांत करने के बाद मैं होटेल के लिए चला गया। मुझे होटेल मेम के पहुँचने से पहले पहुँचना था। इसलिए मैंने रुखसाना और शाजिया को जल्दी से समझा बुझा के मना लिया और तुरंत होटेल पहुँच गया।

हमारा होटेल-कम-रेस्टोरेंट है जो की 7 मंजिल का है। मैं जब वहां पहुँचा तो मुझे अमित और राहुल मिल गर्मी में मेम के केबिन की तरफ जाने लगा। केबिन के पास पहुँच के दरवाजा खोलने की कोशिश की, पर दरवाजा नहीं खुला। शायद मेम ने कल घर जाते समय दरवाजा लाक कर दिया था, तो मैं नीचे ग्राउंड फ्लोर पे चला गया।

वही रेस्टोरेंट था, अपने दोस्तों से बातें करने क्योंकी मेम अभी तक नहीं आई थी। जब मैं नीचे गया तो देखा मेम आ रही थी। उन्हें देखकर मेरी आँखें खुली की खुली रह गई उन्होंने आज अलग ड्रेस पहनी हुई थी।

मेम फार्मल आफिस सूट ही पहनती थी। पर आज मैम ने शार्ट स्कर्ट वाला फार्मल ड्रेस पहना था। ये ड्रेस भी लड़कियां आफिस में पहनती हैं। पर मेम ने आज तक ऐसी ड्रेस नहीं पहनी थी। वहां पे मौजूद सभी लड़के मेम को घूरने लगे थे। मेरा भी कुछ यही हाल था। यूँ तो मेम की उमर 27 साल थी, पर वो आज कोई कालेज गर्ल लग रही थी।

मैम ने मुझे देखा और कहा- "वसीम यहां क्या कर रहे हो? केबिन में चलो मेरे साथ...

मेम जब मुझसे बात कर रही थी तब वो लड़के मुझे घूरने लगे थे। शायद वो ये सोच रहे होंगे की इस लड़के की किश्मत कितनी अच्छी है की इसके पास ऐसी दोस्त है। अब उन्हें कौन बताए की ये मेरी कोई दोस्त नहीं, बल्कि मेरी बास है। उन लड़कों को जलता हुआ देखकर मुझे अच्छा महसूस हो रहा था। अब मैं मेम के साथ 5वें फ्लोर पे बने मेम के केबिन की तरफ जाने लगा।

मेम- "तुम नीचे क्या कर रहे थे? तुम्हें केबिन के अंदर जाकर बैठ जाना चाहिये था...."

मैं- "मेम पहले मैं वहीं गया था। पर केबिन लाक था। इसलिए मैंमें नीचे आ गया...

मेम- अच्छा हाँ सारी... मैं भूल गई थी। वो रोज में जाने से पहले केबिन लाक कर देती हूँ..

केबिन में पहुँच के मेम ने कहा- “ये लो केबिन की चाभी। आज से तुम ही केबिन की चाभी रखोगे। क्योंकी तुम मुझसे पहले आते हो और तुम्हें काफी काम भी होंगे। मैं तुम पे बहुत भरोसा करती हूँ." फिर मैम मुझे कुछ फाइलों के बारे में बताने लगी।

पर मेरा तो पूरा ध्यान उनकी टांगों की तरफ था, जो एकदम चिकनी थीं। मैं यही सोच रहा था की मेम ने आज ऐसे ड्रेस क्यों पहनी है?

शायद उन्हें भी अंदाजा हो गया था की मैं भी बार-बार उनकी ड्रेस को घूर रहा हूँ। क्योंकी वो कभी-कभी मेरी आँखों की तरफ देख रही थी, जो उनकी ड्रेस पे अटक गई थी। उनके देखने पर मैं अपनी आँखें उनमें से हटा लेता था। लेकिन उनको पता तो चल ही गया था।

मैं अपनी डेस्क पे जाकर बैठ गया और अपना काम करने लगा। मैंने गौर किया की मेम बीच-बीच में उठकर मेरे पास आती और मुझे काम समझाती ।

मैं सोचने लगा- "मेम को पता चल गया होगा की मैं उनकी ड्रेस को बार-बार घूर रहा हूँ। फिर भी वो उठ उठकर मेरे पास आ रही हैं, अपनी टांगें दिखाने.." मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की मेम ऐसा क्यों कर रही हैं? पर जो भी हो मैं तो उनकी टांगों को देखकर एंजाय कर रहा था, और वो भी उठ उठकर मुझे दिखा रही हैं ।
 
तीन घंटे बाद लंच ब्रेक हुआ। लंच ब्रेक में मैं अपने दोस्तों के साथ लंच करने जा रहा था की सुरभि मेम ने मुझे पीछे से आवाज दी और कहा- "लंच करने जा रहे हो?"

मैं- "जी मेम..."

मेम "तो आओ साथ में कैबिन में बैठकर करते हैं। तुम अब मेरे पी. ए. हो लंच तो अब साथ में कर ही सकते हैं...'

मैं बहुत खुश हुआ की मेम मुझे अपने साथ लंच करने को कह रही हैं। मैं जाकर अपने टेबल पे बैठ गया।

मेम कहने लगी- "अरे वहां नहीं, इधर मेरे डेस्क पे आकर करो। हम लोग तो दोस्त जैसे ही हैं..."

मैं उनकी डेस्क के पास चेयर पे बैठकर उनके साथ लंच करने लगा। हम लोग लंच के साथ काफी बातें भी कर रहे थे। वो फिर से मेरी परिवार के बारे में पूछ रही थी तो मैं उन्हें फूफी और शाजिया के बारे में बताने लगा फिर

मैंने उनसे पूछा- "मेम आपने कभी अपनी परिवार के बारे में नहीं बताया...”

मैडम- "मेरी फेमिली में पापा मम्मी ही हैं। मैं उनकी एकलौती औलाद हूँ। मेरा कोई भी भाई बहन नहीं है...'

बस यही सब बातें करते-करते लंच ओवर हो गया। हम लोग फिर से काम में जुट गये। शाम को मेम को घर जल्दी जाना था, क्योंकी उनके कुछ रिलेटिव आए थे तो मेम निकल गई।

मैंने सोचा की अब मेम ही नहीं है तो मैं यहां क्या करूँगा? तो मैं भी घर चल दिया। घर पहुँचा तो फूफी और शाजिया बहुत खुश हो गये की मैं इतनी जल्दी आ गया होटेल से

मैं हाथ पैर धोने चला गया। फूफी किचेन में मेरे लिए चाय और कुछ नाश्ता बनाने लगी और शाजिया पढ़ाई कर रही थी। मैं किचेन में गया पानी पीने तो वहां फूफी ने मुझे देखकर मेरा हाथ पकड़ लिया और सारी कहने लगी।

फूफी- "वसीम मुझे माफ कर दो उस रात के लिए, जिस दिन तुम मेरे लिए नाइटी लाए थे। मुझे तुमसे ऐसे बात नहीं करना चाहिए था। मैं समझ सकती हूँ की तुम कल गुस्सा क्यों कर रहे थे? क्योंकी तुम मुझसे नाराज थे..."

मैंने उन्हें अपनी बाहों में पकड़कर कहा- "कोई बात नहीं मेरी जान, मैंने तुम्हें माफ किया..” और उन्हें किस करने लगा।

फूफी भी मुझे अच्छा रेस्पान्स दे रही थी तो मैं अब उनकी गर्दन पे किस करने लगा। मैं ऐसे किस कर रहा था की उनकी गर्दन में लोव बाइट्स पड़ गई थी। वो भी जोश में थी तो मैं उनकी चूचियों पे हाथ रखकर उन्हें दबाने लगा। दस मिनट के बाद हम लोग अलग हुए। रुखसाना बहुत खुश लग रही थी, क्योंकी मैं अब उससे गुस्सा नहीं था।

रुखसाना ने कहा- "मैं अब आपके साथ अपना रिलेशन थोड़ा आगे बढ़ाना चाहती हूँ..."

मैं ये सुनकर बहुत खुश हो गया की मेरा और रुखसाना का रिश्ता थोड़ा आगे बढ़ने लगा है।

मैंने कहा- “तुमने ये कहकर मेरा दिल खुश कर दिया है रुखसाना..."

वो शर्मा रही थी।

मैं- “आज रात शाजिया के सोने के बाद तुम मेरे बेड पे आ जाना। हम लोग अपना रिश्ता थोड़ा आगे बढ़ाएंगे..."* मेरे दिल में लड्डू फूट रहे थे। अब में बेडरूम में जाकर टीवी देखने लगा ।

टीवी की आवाज सुनकर शाजिया भी टीवी देखने आ गई। वो थोड़ी डारी हुई थी मुझसे अभी भी शाजिया जाकर कुर्सी पे बैठ गई।

मैं- “अरे शाजिया, वहां क्यों बैठी हो? यहां आओ मेरे पास बेड पे..."

शाजिया को अच्छा लगा की मैं अब गुस्सा नहीं हूँ। वो बोली- “सारी भैया, मुझे पता है कल सुबह मैंने आपको किस नहीं दिया था। इसीलिए आप मुझसे गुस्सा हैं ना... मुझे माफ कर दीजिए...

मैं- “अरे पगली तू उदास मत हो मैं तुझसे ज्यादा देर गुस्सा नहीं कर सकता। क्योंकी मैं तुझसे बहुत प्यार करता हूँ...

शाजिया- मुझे पता है भैया आप मुझसे बहुत प्यार करते हैं। इसीलिए अब से आप जब भी मुझसे किस माँगेंगे तो मैं आपको किस करुँगी...."

मैंने सोचा- "यार ये तो सोने पे सुहागा हो गया। एक तरफ रुखसाना मान गई और दूसरी तरफ शाजिया भी थोड़ी खुल रही है...."

मैं- “अच्छा ऐसी बात है तो मुझे अभी किस करो..."

शाजिया- अभी?

मैं- हाँ अभी दो। फूफी तो किचेन में है तो क्यों डर रही हो ठीक है?

शाजिया- "तो आप ही ले लीजिये..."

मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और किस करने लगा। इस बार मैंने उसे जबरदस्त किस किया कई बार तो मैंने अपनी जबान उसकी जबान से टच कराई। किस करने में हम लोग काफी खो गये थे।
 
अचानक मुझे रुखसाना के पायल की आवाज आई तो मैं होश में आया और शाजिया को अपने से अलग किया। शाजिया बहुत खुश लग रही थी और मैं भी बहुत खुश था इस किस से रात होने लगी। हम तीनों खाना खाकर सोने लगे पर मैं और रुखसाना जागे हुए थे। क्योंकी आज रुखसाना ने मुझसे वादा किया था की वो हमारा रिश्ता आगे बढ़ाएगी।

रात के 12:30 बज रहे थे। मैं धीरे से उठकर शाजिया के पास गया ये देखने की वो कही जाग तो नहीं रही है। उसे दो-तीन बार हिलाया पर उसने कोई रेस्पान्स नहीं दिया। रुखसाना उसके बगल में ही आँख बंद करके लेटी हुई थी। शाजिया के रेस्पान्स ना देने के बाद मैंने रुखसाना के कंधे पे हाथ रखकर उसे उठाया रुखसाना ने स्माइल करते हुए अपनी आँखें खोली। क्योंकी वो जान रही थी की मैं उसे किसलिए उठा रहा हूँ।

मैंने कहा- "आ जाओ मेरी रानी... बहुत इंतजार के बाद ये मौका आया है। आज तुमको नहीं छोडूंगा” और रुखसाना का हाथ पकड़कर उसे बेड पे ले गया। उसको बेड पे लेटा दिया और पागलों की तरह किस करने लगा।

रुखसाना ने मेरी दी हुई फुल नाइटी पहन रखी थी।

15 मिनट किस करने बाद मैंने कहा- "अपनी नाइटी खोलो..” पर मैंने उसे उस नाइटी में देखा तो मुझे लगा की कुछ मजा नहीं आ रहा है, तो कहा- "रुखसाना तुम जाकर वो ट्रान्स्परेंट नाइटी पहन के आओ..."

रुखसाना- क्यों इसमें क्या हुआ?

मैं- "मैं तुम्हें वो सेक्सी नाइटी पहने हुए देखना चाहता हूँ..."

रुखसाना- "ठीक है। मैं अभी लाती हूँ” और वो अलमारी से नाइटी लेने चली गई।

मैंने सोचा- "रुखसाना ने कहा था की बात थोड़ी आगे बढ़ाते हैं पर मेरा तो मन आज ही सब कुछ करने का है। यार इसको आज ही इतना सिड्यूस कर दो की ये मुझे सब कुछ करने दे.." मुझे एक आइडिया आया मैंने अपना फोन उठाया जिसकी स्क्रीन 5 इंच की थी।

इतने में रुखसाना आ गई नाइटी लेकर ।

मैंने कहा- “अब बाथरूम में मत जाना, यही बदल लो...

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उसका चेहरा शुरुवात से लाल हो रखा था, ऊपर से वो और शर्माने लगी। क्योंकी लगभग उसे 7 साल हो गये थे किसी मर्द के साथ सोए हुए। कमरे में अंधेरा था बस एक छोटा सा नाइट बल्ब जल रहा था। अगर हम लोग लाइट जला देते तो शाजिया उठ भी सकती थी। इसलिए हम लोगों ने अंधेरे में ही मस्ती करने को सोचा। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो मैं खुद उठकर उसकी वो फुल नाइटी खोलने लगा ।

रुखसाना थोड़ा हिम्मत देने के बाद वो खुद ही खोलने लगी। मैंने लाइफ में पहली बार किसी औरत को पूरा नंगी देखा था। अब उसने वो ट्रॅन्स्परेंट नाइटी पहन ली और मेरे पास बेड पे आ गई। उसे उस नाइटी में देखकर मुझसे तो कंट्रोल नहीं हो पा रहा था। पर मैंने सोचा कुछ पल का इंतजार और बड़ा फल खाने को मिल सकता है।

मैंने अब अपना फोन निकाला और रुखसाना से कहा- "एक पिक्चर देखोगी मेरी जान? तुम्हारा मूड बन जाएगा....'

रुखसाना- कैसी पिक्चर ? क्या वैसे ही जैसी सिनेमा हाल में देखी थी और हाँ कहा देखेंगे

मैंने कहा- "मेरे मोबाइल पे देखेंगे..." और अब मैंने अपने मोबाइल पे बी ग्रेड नहीं बल्कि ब्लू-फिल्म लगा दी जो की मेरे एक दोस्त ने दी थी बहुत पहले मोबाइल रुखसाना को दे दिया और उसके एक कान में लीड लगा दी आवाज के लिए, और दूसरी लीड मेरे कान में थी।

अब रुखसाना सिड्यूस होगी और मेरे साथ चुदाई करने को तैयार भी हो जाएंगी। वो ब्लू-फिल्म एक इंडियन कपल की थी जो अपने बेड पे सेक्स कर रहे थे।

रुखसाना ब्लू-फिल्म देखकर गरम होने लगी और मुझसे पूछने लगी- “पिक्चर आपके पास कैसे आई?"

मैंने कहा- "ये वीडियो मेरे एक दोस्त ने इंटरनेट से लिया है..." और हम दोनों चिपक के एक दूसरे के साथ वो वीडियो देख रहे थे।

रुखसाना को उस वीडियो में बहुत सी नई पोजिशन्स देखकर मजा आ रहा था। वो धीरे-धीरे अंगड़ाई लेने लगी । उसे तो आज के जमाने के नये सेक्स पोजिशन्स के बारे में कुछ नहीं पता था। क्योंकी उसे सेक्स किए हुए तो जमाना हो गया। यही अच्छा समय था इसे और सिड्यूस करने का तो मैंने अपने एक हाथ से उसकी नाइटी थोड़ी सी उठाई और उसकी चूत पे हाथ रख दिया।

उसकी चूत बहुत चिकनी थी, शायद उसने आज ही उसे शेव किया था। रुखसाना अभी भी वीडियो देख रही थी। मैं अब अपने हाथ से उसकी चूत को सहलाने लगा। वो अपना चेहरा घुमाकर मेरी तरफ देखती है और शर्माकर एक स्माइल देती है। मैं समझ गया की उसे भी मजा आ रहा है उसकी चूत पे थोड़ा-थोड़ा पानी आ गया था। करीब और 10 मिनट के बाद वो वीडियो खतम हो गया।

रुखसाना पूरी गरम हो चुकी थी उसकी चूत मैं पागलों की तरह रगड़ रहा था। उसके मुँह से “अया अया अया वसीम आअह्ह... धीरे-धीरे करो..." कह रही थी, और उसकी आवाजें तेज होती जा रही थीं।

मैंने ये सुनकर अपना हाथ हटा लिया। क्योंकी शाजिया भी वहीं सो रही थी। मैंने सोचा- “अगर रुखसाना ऐसे चिल्लाएगी तो काम बिगड़ सकता है, तो मैंने अलमारी से एक चादर उठाई और उसे लेकर छत पर चला गया। वहां जाकर चादर जमीन पे बिछचाया और रुखसाना के साथ चालू हो गया।

पहले उसकी नाइटी उतारी, तो उसे नंगी देखकर मेरा लण्ड मचलने लगा। फिर अपने कपड़े उतार के मैं भी पूरा नंगा हो गया। मुझे बहुत जल्दी थी हर चीज की। क्योंकी अगर देर होने की वजह से कही रुखसाना का मूड चेंज हो गया तो मजा खराब हो जाएगा।

इसलिए सबसे पहले मैं रुखसाना के ऊपर चढ़ गया और उसे किस करने लगा। किस करते-करते मैं उसकी चूचियों तक पहुँचा और उसे दबा-दबा के चूसने लगा। लेटकर उसकी चूचियों को चूसने में दिक्कत हो रही थी तो मैंने उसे बैठने को कहा और फिर उसकी चूचियों को मसल मसल के दबाने लगा और उसे चूसने लगा। उसकी चूचियां लगभग मैंने 15 मिनट तक चूसी। अब मैं धीरे-धीरे उसकी नाभि तक पहुँच गया। उसके पूरे बदन को में किस कर रहा था। उसकी आवाजें बहुत तेज हो चुकी थी।

आखिरकार, 7 साल बाद उसकी वासना जागी थी। अब रुखसाना की चूत पे मेरा मुँह आया और मैं उसे किस करने लगा।

रुखसाना- “ये क्या कर रहे हो, तुम्हें घिन नहीं आती?"

मैं- "अरे मेरी जान... तुमने अभी जो वीडियो देखा उसमें कैसे वो लड़का उस लड़की की चूत चाटता है वो तो तुम मजे ले लेकर देख रही थी। अब क्या हुआ? एक बार करवा के तो देखो बहुत मजा आता है...

रुखसाना- "ठीक है। आपको जैसे करना है वैसे कीजिए... "

मैं- “वाह मेरी जान... आखीरकार तुमने अपने मुँह से बोल ही दिया जो करना है कर लीजिए" उसकी चूत पहले से ही बहुत पानी छोड़ रही थी तो मैंने चादर के कोने से उसकी चूत पोंछी और चाटना शुरू हो गया।
 
मैं चूत पे मुँह रखकर जब उसे चाटने लगा तब वो सातवें आसामान पे चली गई। उसका बदन एकदम से अकड़ गया और वो बड़ी तेज-तेज आवाजें निकालने लगी- “अया अया छोड़ दो आअह्ह... अम्म्म ना करो वसीम..."

चाटते चाटते मैंने एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। अब वो और भी पागल हो गई। अब उसकी आवाजें और तेज होने लगीं। मुझे लगा ये आवाजें तो नीचे सो रही शाजिया भी सुन सकती है, तो मैंने कहा- "इस तरह आवाज ना करो, अपने मुँह पे हाथ रख लो..."

रुखसाना ने अपने मुँह पे हाथ रख लिया। करीब 20 मिनट तक उसकी चूत में उंगली करने और चाटने के बाद मैंने अपना मुँह उसकी चूत से हटाया। रुखसाना तेजी से हाँफ रही थी। अब मैंने उसे उल्टा किया और उसकी गाण्ड को मसलने लगा, और उसकी पीठ को चाट चाट के किस करने लगा।

थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद मैंने उससे कहा- “अब तुम मेरे लण्ड को चूसो..."

रुखसाना- "ये क्या कह रहे हो तुम? मैं ऐसा नहीं करूँगी..."

मैं- "क्यों नहीं करोगी मेरी जान? मैंने तुम्हारी चूत चाट के तुम्हें इतना मजा दिया अब तुम भी तो मुझे मजा दो। तुमने वीडियो में तो देखा ही था की वो लड़की कैसे लण्ड चूस रही थी, तो तुम क्यों नहीं कर सकती? तुम क्या उससे कोई कम हो?"

रुखसाना ये सुनकर शर्माने लगी। मेरा तना हुआ 7" इंच का लण्ड देखकर वो हँसने लगी- "अरे... ये तो उस वीडियो के लड़के से भी बड़ा है..."

मैं खड़ा हो गया और अपना लण्ड उसके मुँह के सामने कर दिया। वो शर्माकर धीरे-धीरे लण्ड को हाथ में लेकर चूसने लगी। मेरा लण्ड किसी और ने पहली बार पकड़कर चूसा था। मैं तो कंट्रोल से बाहर हो रहा था। मैंने उसके बाल पकड़े और अपना लण्ड उसके मुँह में धीरे-धीरे डालने लगा। मुझे तो बहुत मजा आ रहा था ।

थोड़ी देर तक चूसने के बाद रुखसाना कहने लगी- “अब नहीं हो पाएगा...."

मैंने कहा- "ठीक है मेरी जान... रहने दो, तुम्हें बाद में धीरे-धीरे चूसना आ जाएगा। अब आओ मेरे पास.." फिर उसे लेटा दिया और उसके ऊपर चढ़ के अपना लण्ड उसकी चूत पे सेट किया और रगड़ने लगा। उसे मैं थोड़ा तड़पाना चाहता था। रगड़ते रगड़ते मैंने धीरे से अपना थोड़ा लण्ड उसकी चूत में डाल दिया।

रुखसाना तड़प उठी और चीखने लगी- "धीरे करो मेरी जान धीरे..."

मैंने धीरे-धीरे धक्के तेज कर दिए वो और वो चिल्लाने लगी। पर मैं नहीं रुका। मैं अपने घुटनों के बल आकर उसे चोदने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लण्ड किसी गरम भट्ठी में घुसेड़ दिया हो। पर बहुत मजा आ रहा था।

मैंने रफ़्तार तेज कर दी। 20 मिनट के बाद उसकी चूत में ही झड़ गया। उसका बदन मेरे झड़ने के बाद एकदम से ढीला हो गया। क्योंकी उसका भी काम हो गया था। झड़ते ही मैं उसके ऊपर गिर गया और उसे किस करने लगा। करीब 10 मिनट बाद मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से निकाला और उसके ऊपर से हट गया।

उसके चेहरे पे बहुत बड़ी स्माइल थी। आखिर इतने सालों बाद उसकी चूत ने चुदाई का सुख पाया था।

मैंने कहा- "मेरी जान, अगर मुझे कल होटेल नहीं जाना होता तो मैं आज रात भर तुम्हारी चुदाई करता...'

रुखसाना- कोई बात नहीं जानू, मैं कही नहीं जा रही हूँ हमेशा तुम्हारे साथ ही रहूंगी। और वैसे भी इतने सालों बाद मेरे साथ कोई सोया है। मैं एक ही रात में बार-बार ये करके आगे का मजा खराब नहीं करना चाहती..."

हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और चादर लेकर नीचे चले गये। वहां मैंने उसे किस किया और हम लोग सोने चले गये। बेड पे सोते हुए मैं सोच रहा था की ये रात में कभी नहीं भूल सकता। कुछ देर बाद मेरी आँख लग गई और में सो गया। इतनी जबरदस्त चुदाई के बाद बहुत अच्छी नींद आई।
 
सुबह मेरी आँख जल्दी खुल गई। मैंने देखा शाजिया अभी भी सो रही थी, पर फूफी वहां नहीं थी। मैंने सोचा एक बार फूफी को देख आऊँ। मैं किचेन में गया तो फूफी नीचे बैठकर बर्तन धो रही थी। धोते समय उसकी पीठ मेरी तरफ थी। उसकी नंगी पीठ देखकर मुझे रात की पूरी घट ना याद आने लगी।

मैंने सोचा- "चलो थोड़ी और मस्ती हो जाए." मैं नीचे बैठ गया और उसकी कमर में हाथ डाल दिया तो वो एकदम से चौंक गई।

मैंने कहा- "डर क्यों रही हो मेरी रानी? यहां पर मेरे सिवाए और कौन है जो तुम्हें इस तरह पकड़ेगा..."

फूफी हँसने लगी।

मैं- “कल रात मेरी जिंदगी की सबसे हसीन रात थी..."

फूफी- हाँ मेरी भी। मुझे आज तक ऐसा मजा कभी नहीं आया था।

मैंने फूफी को खड़ा किया, और कहा मैं आज से अपने दिन की शुरुवात तुम्हारे किस से करना चाहता हूँ"-

रुखसाना- “तो रोका किसने है? करो, मैं भी तो यही चाहती हूँ की तुम सिर्फ मेरे रहो। कोई भी तुम्हें मुझसे छीनकर ना ले जाने पाए..."

मैंने मस्ती में कहा- “ऐसा थोड़ी ना हो सकता है? मैं भी तो एक दिन किसी लड़की से शादी करूँगा, तब हम लोगों थोड़ी ना प्यार कर पाएंगे..."

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फूफी नहीं, ऐसा मैं नहीं होने दूँगी। तुम किसी से भी शादी नहीं कर सकते। हम दोनों जिंदगी भर एक दूसरे से प्यार करेगे...."

मैं- "अच्छा.. तुम मेरी शादी किसी से भी नहीं होने दोगी तो मैं शादी किससे करूँगा तुमसे? वैसे अच्छा आइडिया है मैं तुमसे ही शादी कर लेता हूँ, मैं भी खुश और तुम भी खुश. "

फूफी ये क्या कह रहे हो? ऐसा थोड़ी ना हो सकता है। मैं तो रिश्ते में तुम्हारी फूफी लगती हूँ और फूफी के साथ शादी? समाज नहीं मानेगा...

मैं- कैसा समाज ? यहां कौन जानता है की यहां कौन जानता है की तुम मेरी फूफी हो?

फूफी- शाजिया तो है ना?

मैं- तुम शाजिया की चिंता ना करो, मैं उसे धीरे-धीरे पटा लूँगा, तुम बस हाँ करो।

फूफी नहीं बेटा ऐसा नहीं हो सकता। अगर गाँव में किसी को पता लग गया तो हमारे खानदान का नाम मिट्टी में मिल जाएगा।

मैं- "फूफी तुम कितना डरती हो? गाँव के लोगों को कैसे पता चलेगा? हम लोगों को अब गाँव से कुछ लेने देना ही नहीं है बस मुझे साल में एक बार गाँव जाना होगा खेत का किराया लेने..."

फूफी- लेकिन ?

मैं- “लेकिन वेकीन कुछ नहीं। तुम मुझे सोचकर बताना आज रात जब में होटेल से आऊँगा। ठीक है..." ये सब बातों के वक्त फूफी मेरी बाहों में थी और मेरा लण्ड खड़ा हो रहा था। मैंने कहा- "फूफी तुमने अभी तक नहाया तो नहीं है ना?"

फूफी- "नहीं। बस बर्तन धोकर जा रही थी। तुम ये क्यों पूछ रहे हो?"

मैं- “बाद में बताऊँगा। तुम पहले बर्तन धो लो.." और मेरे दिमाग में मेरे लण्ड को शांत करने का एक आइडिया था

दस मिनट के बाद फूफी कपड़ा लेकर बाथरूम में जाने लगी।

तभी मैंने उन्हें रोक लिया, और कहा- “फूफी मुझे भी नहाना है।

फूफी- हाँ तो जाओ नहा लो मैं बाद में नहा लूँगी।

मैं- नहीं फूफी, मुझे आपके साथ नहाना है।

फूफी- अर्रे बदमाश... तेरे साथ मैं कैसे नहा सकती हूँ? और शाजिया उठ जाएगी तो क्या होगा?

मैं इतनी सुबह शाजिया कहां उठेगी। तुम्हारा बदन छूकर मेरा लण्ड खड़ा हो गया है, इसे तुम नहीं शांत करोगी तो कौन करेगा? या फिर शाजिया को उठा दो और उसके साथ नहाने चला जाऊँ..."

फूफी ने मुझे कस के चुटकी काटी और कहा- “अच्छा चलो बाथरूम में। मैं तुम्हें आज नहलाती हूँ..."

मैंने मन में कहा- “आज तो सुबह-सुबह ही मजा आ गया....

फूफी पहले बाथरूम में घुसी उसके बाद मैं उनके पीछे-पीछे अंदर घुस गया। मैं अपने कपड़े खोलने लगा, वो खड़े होकर मुझे देख रही थी।

मैं- अरे फूफी कपड़े तो खोलो।

फूफी- धीरे-धीरे कपड़े खोलने लगी ।

मैं- अरे इतना टाइम नहीं है मेरी जान... शाजिया उठ भी सकती है..." कहकर मैंने उन्हें पकड़ा और उनके कपड़े खोलने लगा। 5 मिनट में हम दोनों नंगे हो गये।

मैंने कहा- "तुम पहले नहाओ, मुझे तुम्हें नहाते हुए देखना है..."

फूफी शर्मा शर्माकर नहाने लगी।
 
मुझसे से अब बर्दाश्त नहीं हुआ, और मैं उनपे टूट पड़ा। उन्हें पहले बाहों में पकड़कर किस करने लगा, किस करते वक़्त मैं उनके पूरे शरीर को छू रहा था, आगे-पीछे दोनों तरफ। बाद में उनकी गाण्ड को पकड़-पकड़कर दबाने लगा। वो जोश में आ गई और उसने मेरे लण्ड को पकड़ लिया।

हम दोनों एक दूसरे को बाहों में कसकर लिपटे थे। मैं उसकी गाण्ड को दबा रहा था और उसे किस भी किए जा रहा था। फूफी भी मेरे लण्ड को आगे-पीछे कर रही थी। 10 मिनट किस करने बाद मो लण्ड पूरा खड़ा हो चुका था।

मैं- "फूफी, हम लोग आज कुछ नया करते हैं..."

रुखसाना- “तुमने फिर से मुझे फूफी बुलाना शुरू कर दिया... रुखसाना कहो रुखसाना..."

मैं- “अच्छा ठीक है रुखसाना मेरी रानी... तुम बिना कोई सवाल पूछे पीछे घूम जाओ...'

रुखसाना पीछे घूम गई, तो उसकी नंगी गाण्ड मेरी आँखों के सामने थी। मैं तुरंत उसे दबाने लगा और फिर अपना मुँह उसकी गाण्ड में घुसेड़ दिया, उसकी चूत को चाटने के लिए पीछे से।

रुखसाना ये एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी की मैं ऐसा करूँगा। उसके मुँह से हल्की से चीख निकल गई- “आअह्ह... ये क्या कर रहे हो?"

मैंने कोई जवाब नहीं दिया और उसकी चूत को चाटता रहा।

रुखसाना अब आवाजें निकालने लगी- “उह्ह... उह्ह... अह्ह... उह्ह... उहह उहह... उहह.. आअहह...

मुझे उसकी चूत का स्वाद आज कुछ अलग लग रहा था, शायद हम बाथरूम में भीगे थे इसलिए थोड़ी देर बाद मैंने उसे पकड़कर सीधा किया और खड़े-खड़े उसकी चूत चाटने लगा। मैं बहुत जोश में था। चूत चाटते वक़्त मेरे हाथ उसकी गाण्ड में थे और मैं उन्हें कसकर दबा रहा था। अपना मुँह उसकी चूत में दबा दबा के चाट रहा था।

अपनी जबान चूत में घुसेड़ने की कोशिश कर रहा था। हम लोगों को बाथरूम में आए आधा घंटा हो चुका था । अभी भी हम लोग चालू थे। थोड़ी देर बाद रुखसाना झड़ गई और तेजी से सांसें लेने लगी।

तभी अचानक शाजिया की आवाज आई- “अम्मी अम्मी कहां हो तुम?"

हम दोनों की तो हवा टाइट हो गई। पर मैंने अपना होश संभाला और रुखसाना से कहा- कह दो की तुम बाथरूम में हो..."

रुखसाना- हाँ बेटा। मैं बाथरूम में हूँ।

शाजिया- भैया कहां है?

अब मैंने कहा- "कह दो की मैं बाहर दूध लेने गया हूँ...

रुखसाना- “वो दूध लेने गया है अभी आ जाएगा। तुम जाकर गार्डेन में पौधो को पानी दे दो.. "

शाजिया गार्डेन में चली गई।

रुखसाना- “अब रहने दो, शाजिया जाग गई है..."

मैंने कहा- "अच्छा तुम्हारा तो हो गया पर मेरा क्या होगा? मेरा लण्ड चूसो तभी जा पाओगी। नहीं तो मैं नहीं जाने दूँगा "

रुखसाना - वसीम क्या कह रहे हो? शाजिया बाहर ही है। अगर उसे पता चल गया तो?

मैं- “उसे नहीं पता चलेगा, तुम बस इसे चूसो..” कहकर रुखसाना को नीचे बैठा दिया और अपना लण्ड उसके मुँह में घुसेड़ दिया।

रुखसाना अब धीरे-धीरे मेरे लण्ड को चूसने लगी।

मुझे ऐसा एहसास हो रहा था जैसे कोई परी मेरा लण्ड चूस रही हो। करीब 15 मिनट के बाद में झड़ने वाला था तो मैंने कहा- "इस सफेद पानी को अपने मुँह में ले लो..."

रुखसाना मना करने लगी।

मैंने कहा- "ठीक है, तो अपनी चूचियों पे गिरा लो...” कहते-कहते मैं झड़ने लगा। सारा माल उसकी चूचियों पे गिरा दिया। पर आखिरी झटके वाला माल उसके होंठों के पास जाकर गिरा - "रुखसाना इसे एक बार चख के तो देखो, अच्छा स्वाद है...."

रुखसाना 'नहीं' में सिर हिलाने गली। पर मेरे जोर देने पर वो उसे चखने लगी।

मैं- कैसा लगा?

रुखसाना- अच्छा था। \

हम दोनों हँसने लगे और फिर जल्दी-जल्दी नहाने लगे। क्योंकी शाजिया बाहर ही थी ।

नहाने के बाद मैंने कहा- “पहले तुम बाहर जाओगी...."

रुखसाना ने धीरे से दरवाजा खोला और चारों तरफ देखने लगी। शाजिया नहीं थी वहां, वो शायद टायलेट में थी जो बेडरूम से अटैच था और हमारा बाथरूम किचेन के पास था। बाथरूम से निकलने के बाद हम दोनों कपड़े पहनने लगे। रुखसाना किचेन के काम में लग गई और मैं आफिस के लिए तैयार होने लगा।
 
सुबह की ऐसी शुरुवात से मैं बहुत खुश था। मैंने नाश्ता किया और थोड़ी देर बाद होटेल चला गया । होटेल में अपने टाइम पे पहुँचा। मैडम अभी तक नहीं आई थी तो मैं सीधा केबिन में जाकर उनका इंतजार करने लगा। क्योंकी उनको मेरा नीचे खड़ा होना पसंद नहीं था। मैंने नार्मल शर्ट और जीन्स पहना हुआ था। मेडम भी अपने टाइम पे पहुँची। वो सीधा केबिन में आई।

मैंने मेम को गुड मार्निंग कहा ।

उन्होंने भी गुड मार्निंग में जवाब दिया। जब मेम मुझे जवाब कर रही थी तब वो मेरे ड्रेस को बड़े ध्यान से देख रही थी।

मैंने कहा- क्या हुआ मेम, आप मुझे ऐसे क्यों देख रही हैं? मेरी ड्रेस ठीक नहीं है क्या?

मैडम- "नहीं तुम्हारी ड्रेस तो ठीक है पर तुम अब मेरे असिस्टेंट हो तो तुम्हें मेरी तरह सुंदर और स्मार्ट दिखना होगा। क्योंकी अब तुम मेरे साथ हमेशा रहोगे मीटिंग्स में, टूर में, और भी कई जगह...."

मैं- “आपकी बात तो ठीक है मेम तो मुझे आपकी तरह स्मार्ट दिखने के लिए क्या करना होगा?”

मैडम- वसीम तुम्हें तुम्हारा ड्रेसिंग सेन्स बदलना होगा। तुम्हें सूट पैंट पहनना पड़ेगा ।

मैं- पर मेम मेरे पास अभी तो कोई सूट नहीं है और सूट मैंने कभी खरीदा भी नहीं है।

मैडम- अच्छा कोई बात नहीं। मैं तुम्हें शाम को सूट खरीदने ले जाऊँगी।

मैं- अरे नहीं मेम, आप क्यों तकलीफ कर रही हैं। आप मुझे बस अच्छे सूट की दुकान बता दीजिए। मैं वहां से ले लूँगा "

मैडम- तकलीफ की ? मैं खरीद दूँगी तुम्हें।

मैं- "नहीं मेम आपको कोई जरूरत नहीं है। मैं खरीद लूँगा..." और मेरे और उनके बीच थोड़ी बहस होने लगी।

मेडम - "वसीम, तुम ये क्या कह रहे हो? क्या तुम पे मेरा इतना भी हक नहीं है?" और मेम हड़बड़ा गई- 'हक' मतलब तुम मेरे दोस्त हो।

मैं इस हक से आपका तो मुझ पे पूरा हक है। आप मेरी बास के साथ-साथ मेरी दोस्त भी हैं। ठीक है मैं आपके साथ ही जाऊँगा सूट लेने।

मेडम - "गुड... अब चलो जल्दी से काम पे लग जाओ। तुम्हें मेरे साथ एक मीटिंग में जाना है...."

मैं- “ओके मेम..."

मेम ने आज टाइट सूट पहना था, उसमें वो बहुत सेक्सी लग रही थी। उनकी चूचियां मीडियम साइज थी पर उस सूट में वो बहुत बड़ी लग रही थी। मेरी नजरें बार-बार उनकी चूचियों पे जा रही थीं। कई बार तो मेम ने मुझे उनकी चूचियों को देखते देख लिया था। मुझे तो डर लग रहा था की कहीं मैम को ये बुरा ना लग जाए । पर ऐसा हुआ नहीं। उल्टा मेम मुझे कई बार अपने पास बुला रही थी फाइलों में करेक्सन ढूँढ़ने के लिए।

उस दिन मुझे लगा की मेम मुझे कोई भी गलती पे कुछ नहीं कहती। अगर उनकी जगह कोई और बास होता वो मुझे इन गलतियों पे बहुत डाँटता । पर मैम ऐसा कुछ नहीं करती।

काम करते-करते शाम हो गई। हमारी एक मीटिंग थी। वो खतम करके हम लोग सीधा उस शाप पे गये, जहां से मेम सूट खरीदती हैं। मेम मेरे लिए सूट देखने लगी। क्योंकी उन्होंने मीटिंग के खतम होने के बाद कहा था- "चलो आज मैं तुम्हारे लिए सूट खरीदूंगी..." \

हम सूट खरीदने लगे। मुझे मेम का बर्ताव कुछ ठीक नहीं लग रहा था। वो मेरे लिए सूट खरीदते वक़्त कुछ ज्यादा ही खुश और उत्तेजित लग रही थी, जैसे कोई लड़की अपने पति या फिर बायफ्रेंड के लिए कुछ खरीद रही हो। उन्होंने मेरे लिए एक सूट पसंद किया और मुझे ट्राई करने को कहा। मैं ट्रायल रूम में सूट पहन के मेम के सामने आया तो वो मुझे देखती ही रह गई।

मेडम - “वाउ... वसीम इस सूट में तुम हीरो लग रहे हो ...

मैं- “थैंक्यू मेम क्या सच में मैं अच्छा लग रहा हूँ?"

मैडम- हाँ बहुत हैंडसम लग रहे हो, तुम्हारे जितना कोई हैंडसम लड़का मेरा दोस्त नहीं। अगर मेरी दोस्तों ने तुम्हें मेरे साथ देख लिया तो बहुत ईर्ष्या महसूस करेगी।

मैंने कहा- मतलब ?

मेम घबराकर- "मेरा मतलब... यहां दुकान में तुम्हें कोई लड़की मेरे साथ देखेगी तो ईर्ष्या महसूस करेगी..."

मैं- अगर आपको ये सूट पसंद आया तो इसका मतलब ये सूट अच्छा ही होगा। यहीं ले लेता

मैडम- "हाँ वसीम, ये सूट अच्छा है पर एक सूट से क्या होगा? मैं तुम्हारे लिए और दो सूट खरीदती हूँ...

मैं- "नहीं मेम, एक काफी है...."

मैडम- "वसीम, तुम एक ही सूट तो रोज पहन के होटेल नहीं आओगे तुम्हें और सूट की जरूरत पड़ेगी..." फिर वो सूट्स देखने लगी ।

थोड़ी देर बाद दो और सूट्स ट्राई करके दिखाया वो भी अच्छे थे। सूट्स पैक करने के बाद मैं बिल पेमेंट करने गया तो मेम ने मुझे रोक लिया।

मेडम "नहीं ये सूट्स मेरी तरफ से हैं तो मैं इन सबका पैसे दूंगी..."

मैं- लेकिन मेम?

मैडम- "लेकिन वैकिन कुछ नहीं। तुम जाओ, मैं बिल पेमेंट करके आती हूँ" और वो पेमेंट करने लगी।

मैं पीछे खड़े होकर उनका इंतजार कर रहा था की तभी मेरी नजर एक शार्ट ड्रेस वाली सूट में पड़ी जो की मेम एक बार पहन के होटेल आई थी। मैंने सोचा मेम ने मेरे लिए 3 सूट खरीदे हैं तो मुझे भी उनके लिए कुछ लेना होगा, तो तुरंत जाकर वो सूट उठाया। मेम बिल पे कर चुकी थी। मैंने वो सूट अपने हाथों में पीछे छुपाकर रखा था।

मेम मेरे पास आई और कहा- “अब चलें वसीम?"

मैं- "अभी नहीं मेम आपने मेरे लिए इतने सूट्स खरीदे तो मेरा भी फर्ज बनता है की मैं आपके लिए कुछ लूँ.. और मैंने वो सूट अपने पीछे से निकाला और मैम के सामने रख दिया।

मेडम ये क्या है वसीम?

मैं- "मेम मेरी तरफ से आपके लिए और आप मना मत करना। एक दोस्त की तरफ से दूसरे दोस्त के लिए है ये...."

"

मैडम- “थैंक्यू वसीम। बहुत ब्यूटिफुल है ये ड्रेस.." और मेम उसे ट्राई करने चली गई। थोड़ी देर बाद वो ड्रेस पहन के आई। उस सूट में वो बहुत सुंदर और हाट लग रही थी।

मुझे शाजिया की शार्ट स्कर्ट याद आ गई। पहली बार मेम के लिए मेरे दिल में गंदे विचार आ रहे थे। वो ड्रेस कुछ इस तरह की थी की मैं उन्हें देखे जा रहा था।

मैडम- वसीम मैंमें कैसी लग रही हूँ?

मैं- “बहुत हाट लग रही है आप " फिर मैं तुरंत होश में आया, और कहा- "मेम मेरा मतलब वो नहीं था." मैं एकदम से घबरा गया।

मेडम - अच्छा हाट बोलकर कह रहे हो तुम्हारा मतलब वो नहीं था." और मेम हँसने लगी- "कोई बात नहीं वसीम, हम लोग दोस्त है और दोस्तों में ये सब चलता है..."

फिर हम दोनों हँसने लगे। मैंने उस ड्रेस की पेमेंट की और हम लोग होटेल चले गये। वहां पर थोड़ी देर काम करने के बाद मेम घर चली गई, और उनके जाने के बाद में भी घर चला गया।
 
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