S
StoryPublisher
Guest
मैं शेविंग करके घर के लिए राशन लेने मार्केट चला गया। मार्केट से आने में एक घंटा लग गया। मैं कुछ ज्यादा ही सामान ले आया था। मार्केट जाते वक़्त ही मैंने फूफी को बता दिया था की आने में टाइम लग जायेगा तो आप सो जाना, मेरे पास घर की दूसरी चाभी है। मैं घर पहुँचा और सारा राशन किचेन में रखने चला गया। थोड़ी देर बाद जब मैं कमरे में आया तो फूफी को बिस्तर पर सोते हुआ देखा। वो सोते समय कोई हाट सी अप्सरा लग रही थी। उनके ब्लाउज़ के दो बटन खुल गये थे, और उनकी चिकनी कमर भी साफ नजर आ रही थी।
मैंने सोचा फूफी आज से पहले तो कभी इस तरह से नहीं सोई। वो हमेशा से अच्छे तरह से सोती थी, शायद ये सब बी ग्रेड मूवीस का असर था।
मैं धीरे से उनके पास गया और उनकी चूचियों पे हाथ रख दिया और उसे धीरे-धीरे दबाने लगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, फूफी भी सिड्यूसिंग पोजीशन में सो रही थी। टाइम ना वेस्ट करते हुए मैंने उनकी कमर पर हाथ रख दिया और उसे सहलाने लगा, और फिर अपना हाथ उनके पेट पर रखकर उनकी नाभि से खेलने लगा,
और उनकी नाभि पे किस करने लगा।
किस करते वक़्त फूफी थोड़ी से हिली और उनका शरीर अकड़ने लगा। मुझे लगा शायद फूफी उठ चुकी थी। लेकिन वो कुछ कह नहीं रही थी। इसका मतलब फूफी को अच्छा लग रहा था ये सब मैंने सोचा इन्हें सिड्यूस करना काम आ गया। लेकिन मैंने ये नहीं सोचा था की फूफी इतनी जल्दी सिड्यूस हो जाएंगी। शायद इतने सालों से फूफी जो विधवा धर्म निभा रही थी, लखनऊं आकर उन्होंने वो धर्म तोड़ने का फैसला ले लिया होगा। जो भी हो मैं तो एंजाय कर रहा था।
अब मैं धीरे से फूफी के ऊपर चला गया और उनके पेट पर किस करने लगा। फूफी की सांसें मुझे सुनाई दे रही थीं। क्योंकी वो तेज हो गई थीं। मैं धीरे से उनके चूचियां पे आया और ब्लाउज़ के ऊपर से ही उन्हें किस करने लगा। किस करते-करते उनके चेहरे को पकड़ा और उनके होठों पे कस के किस करने लगा। करीब 6-7 मिनट के बाद मैंने उनके होठों की छोड़ा। अब मैंने अपनी हिम्मत बढ़ाई और फूफी का ब्लाउज़ खोलने लगा।
फूफी पूरी अकड़ चुकी थी और अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़कर रोकने की नाकाम कोशिश कर रही थी। उनकी आँखें बंद थी। मैंने उनका ब्लाउज़ खोल दिया। उनकी चूचियां देखकर मेरी आँखों में चमक आ गई। उनकी चूचियां काफी बड़ी-बड़ी थीं। अब मैं उन्हें चूसने लगा।
फूफी के मुँह से आवाजें आना शुरू हो गई। मैं बहुत बुरी तरह से उनकी चूचियां चूस रहा था, जैसे कोई छोटा बच्चा लालिपोप चूस रहा हो। करीब 15 मिनट बाद मैं रुका, मैंने उनके होठों को फिर से किस किया और अब अपने हाथ से उनकी साड़ी उठाने लगा। जैसे ही मेरी नजर उनकी पैंटी पे गई वैसे ही किसी ने दरवाजा खटखटाया।
कौन होगा यार मूड खराब कर रहा है? मैं अपने कपड़े ठीक करके दरवाजा खोलने जा ही रहा था की अचानक मेरी नजर घड़ी पर पड़ी, तो 3:30 बज रहे थे। तब मुझे याद आया की शाजिया आई होगी। फूफी अभी भी आँख बंद करके लेटी हुई थीं, पर वो जाग रहीं थी।
मैंने कहा- "फूफी, शायद शाजिया होगी। अपनी साड़ी ठीक कर लो...”
मैं दरवाजा खोलने गया वो शाजिया ही थी। शाजिया घर के अंदर आई और कुर्सी पे बैठकर आराम करने लगी।
मैंने पूछा- "शाजिया कैसा रहा दिन?"
शाजिया बोली - "बहुत अच्छा... उन तीन लड़कों की पिटाई की खबर सारे स्कूल में फैला दी। सब लोग खुश हो रहे थे..." फिर उसने पूछा- “अम्मी कहा हैं?"
मैं- “वो सो रही हैं। तुम जाकर फ्रेश हो जाओ। मैं तुम्हारा खाना निकालता हूँ"
शाजिया फ्रेश होने चली गई। खाना निकाल के टेबल पे रखा हुआ था। मैंने टीवी ओन कर दी और अपना खाना खाने लगा।
शाजिया आई और बोली- "अपने अपना खाना अभी तक नहीं खाया क्यों?"
मैं मन में- “अब तुम्हें क्या बताऊँ मैं क्या खा रहा था?"
मैंने कहा- "मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा था। तुम भूखी हो और में खाना खा लूँ, ऐसा नहीं हो सकता। आखिर मैं तुमसे प्यार जो करता हूँ...
"
शाजिया के चेहरे पे स्माइल थी। हम दोनों खाना खा चुके थे। फूफी अब सो चुकी थी।
शाजिया ने कहा- “भैया मुझे सुबह के लिए आपको थैंक्यू कहना है..."
मैंने कहा- "थैंक्यू किसलिए? तुम तो अपनी हो और मैं अपनों के लिए कुछ भी कर सकता हूँ.
शाजिया थकी हुई थी तो फूफी के बगल में जाकर सो गई। फूफी और शाजिया बेड पे सो चुकी थी तो मैं नीचे बिस्तर बिछाकर सो गया।
मैंने सोचा फूफी आज से पहले तो कभी इस तरह से नहीं सोई। वो हमेशा से अच्छे तरह से सोती थी, शायद ये सब बी ग्रेड मूवीस का असर था।
मैं धीरे से उनके पास गया और उनकी चूचियों पे हाथ रख दिया और उसे धीरे-धीरे दबाने लगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, फूफी भी सिड्यूसिंग पोजीशन में सो रही थी। टाइम ना वेस्ट करते हुए मैंने उनकी कमर पर हाथ रख दिया और उसे सहलाने लगा, और फिर अपना हाथ उनके पेट पर रखकर उनकी नाभि से खेलने लगा,
और उनकी नाभि पे किस करने लगा।
किस करते वक़्त फूफी थोड़ी से हिली और उनका शरीर अकड़ने लगा। मुझे लगा शायद फूफी उठ चुकी थी। लेकिन वो कुछ कह नहीं रही थी। इसका मतलब फूफी को अच्छा लग रहा था ये सब मैंने सोचा इन्हें सिड्यूस करना काम आ गया। लेकिन मैंने ये नहीं सोचा था की फूफी इतनी जल्दी सिड्यूस हो जाएंगी। शायद इतने सालों से फूफी जो विधवा धर्म निभा रही थी, लखनऊं आकर उन्होंने वो धर्म तोड़ने का फैसला ले लिया होगा। जो भी हो मैं तो एंजाय कर रहा था।
अब मैं धीरे से फूफी के ऊपर चला गया और उनके पेट पर किस करने लगा। फूफी की सांसें मुझे सुनाई दे रही थीं। क्योंकी वो तेज हो गई थीं। मैं धीरे से उनके चूचियां पे आया और ब्लाउज़ के ऊपर से ही उन्हें किस करने लगा। किस करते-करते उनके चेहरे को पकड़ा और उनके होठों पे कस के किस करने लगा। करीब 6-7 मिनट के बाद मैंने उनके होठों की छोड़ा। अब मैंने अपनी हिम्मत बढ़ाई और फूफी का ब्लाउज़ खोलने लगा।
फूफी पूरी अकड़ चुकी थी और अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़कर रोकने की नाकाम कोशिश कर रही थी। उनकी आँखें बंद थी। मैंने उनका ब्लाउज़ खोल दिया। उनकी चूचियां देखकर मेरी आँखों में चमक आ गई। उनकी चूचियां काफी बड़ी-बड़ी थीं। अब मैं उन्हें चूसने लगा।
फूफी के मुँह से आवाजें आना शुरू हो गई। मैं बहुत बुरी तरह से उनकी चूचियां चूस रहा था, जैसे कोई छोटा बच्चा लालिपोप चूस रहा हो। करीब 15 मिनट बाद मैं रुका, मैंने उनके होठों को फिर से किस किया और अब अपने हाथ से उनकी साड़ी उठाने लगा। जैसे ही मेरी नजर उनकी पैंटी पे गई वैसे ही किसी ने दरवाजा खटखटाया।
कौन होगा यार मूड खराब कर रहा है? मैं अपने कपड़े ठीक करके दरवाजा खोलने जा ही रहा था की अचानक मेरी नजर घड़ी पर पड़ी, तो 3:30 बज रहे थे। तब मुझे याद आया की शाजिया आई होगी। फूफी अभी भी आँख बंद करके लेटी हुई थीं, पर वो जाग रहीं थी।
मैंने कहा- "फूफी, शायद शाजिया होगी। अपनी साड़ी ठीक कर लो...”
मैं दरवाजा खोलने गया वो शाजिया ही थी। शाजिया घर के अंदर आई और कुर्सी पे बैठकर आराम करने लगी।
मैंने पूछा- "शाजिया कैसा रहा दिन?"
शाजिया बोली - "बहुत अच्छा... उन तीन लड़कों की पिटाई की खबर सारे स्कूल में फैला दी। सब लोग खुश हो रहे थे..." फिर उसने पूछा- “अम्मी कहा हैं?"
मैं- “वो सो रही हैं। तुम जाकर फ्रेश हो जाओ। मैं तुम्हारा खाना निकालता हूँ"
शाजिया फ्रेश होने चली गई। खाना निकाल के टेबल पे रखा हुआ था। मैंने टीवी ओन कर दी और अपना खाना खाने लगा।
शाजिया आई और बोली- "अपने अपना खाना अभी तक नहीं खाया क्यों?"
मैं मन में- “अब तुम्हें क्या बताऊँ मैं क्या खा रहा था?"
मैंने कहा- "मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा था। तुम भूखी हो और में खाना खा लूँ, ऐसा नहीं हो सकता। आखिर मैं तुमसे प्यार जो करता हूँ...
"
शाजिया के चेहरे पे स्माइल थी। हम दोनों खाना खा चुके थे। फूफी अब सो चुकी थी।
शाजिया ने कहा- “भैया मुझे सुबह के लिए आपको थैंक्यू कहना है..."
मैंने कहा- "थैंक्यू किसलिए? तुम तो अपनी हो और मैं अपनों के लिए कुछ भी कर सकता हूँ.
शाजिया थकी हुई थी तो फूफी के बगल में जाकर सो गई। फूफी और शाजिया बेड पे सो चुकी थी तो मैं नीचे बिस्तर बिछाकर सो गया।