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फुलवा को आज Peter uncle ने कुछ खिलाया ही नहीं था। डरा हुआ Peter uncle घर में डरा हुआ घूम रहा था।
फुलवा बेबसी से बेड पर हाथ जोड़ कर बैठी अगले हमले का इंतजार कर रही थी। बाहर से आवाजें आने लगी तो फुलवा की आंखें भर आईं।
दरवाजा खुला और अंदर आते आदमी को देख फुलवा भी चौंक गई। Peter uncle जिस से बुरी तरह डरा हुआ था वह तो एक आकर्षक लड़का था।
लड़का मुश्किल से फुलवा से बड़ा होगा पर फुलवा अब तक जान चुकी थी कि बेरहम और बुरा होने के लिए बुरा दिखना जरूरी नहीं। फुलवा का बदन सिसकियों से हिलने लगा। फुलवा अपने जोड़े हुए हाथों में रो रही थी।
लड़का, “Peter uncle ने कहा कि तुम कुंवारी हो। क्या यह सच है?”
फुलवा कुछ कह नहीं पाई और रोती रही। लड़का हंस पड़ा।
लड़का, “चलो तुम ने झूठ तो नही कहा! (प्यार से) बताओ क्या Peter uncle ने मेरे बारे में कुछ बताया?”
फुलवा ने रोते हुए अपने सर को हिलाकर ना कहा। फुलवा के पेट में से आवाज आई और लड़का चौंक गया। लड़के ने दरवाजा खोल कर Peter uncle को बुलाया और फुलवा को भूखा रखने के लिए डांटा।
Peter uncle दौड़ते हुए अपनी थाली फुलवा के लिए ले आया। Peter uncle ने दूध के बारे में पूछा पर लड़के को एक नज़र देख कर मुरझाकर चला गया।
लड़के ने फुलवा के आंसू पोंछे। फुलवा लड़के की इस हमदर्दी से डर गई। लड़का सिर्फ मुस्कुराता रहा और उसने फुलवा के लिए खाना लाया।
फुलवा को अपने हाथों से खिलाते हुए लड़का अपने बारे में बताने लगा।
लड़का, “मेरा नाम लाला ठाकुर है। मैं इन बदनाम गलियों में किसी ऐसे को ढूंढ रहा हूं जो आज से कुछ 10 साल पहले इसी रास्ते गए थे। Peter uncle मुझसे डरता है क्योंकि मेरे पास वह हथियार है जो किसी के पास नही। (फुलवा ने डर कर लड़के को देखा) जानकारी!!… बेहद कारगर और खतरनाक हथियार।“
फुलवा को खाना खिलाकर पानी पिलाते हुए लाला, “मैं तुम्हें यहां से नही छुड़ा सकता। मुझे Peter uncle की जरूरत है। मैने तुम्हारे लिए कोई कीमत नहीं चुकाई। Peter uncle ने डर कर तुम्हें नजराने के तौर पर मुझे दिया है। मैने आज तक किसी के साथ रात गुजारने की कीमत नही चुकाई। आज तुम्हारे लिए मैं कीमत चुकाऊंगा!”
फुलवा ने अपने सर को झुका लिया पर लाला ठाकुर ने फुलवा का चेहरा अपने हाथों में लिया।
लाला ठाकुर, “बोलो, आजादी के अलावा मैं तुम्हें क्या दे सकता हूं?”
फुलवा, “आप मुझे कुछ देंगे?”
लाला ठाकुर, “आज़ादी छोड़ कुछ भी!”
फुलवा ने लाला ठाकुर की आंखों में सच्चाई देख कर, “मेरे गांव में मेरे भाई मुझे ढूंढ रहे होंगे तो उन्हें बताना की अब फुलवा को भूल जाओ! मैने तुम्हारी बात नही मानी और बापू ने मुझे अब लौटने लायक नही छोड़ा! उन से… उन से कहना की वह खुद को संभालें और मुझे भूल जाएं।“
फुलवा रोने लगी और लाला ठाकुर ने उसे अपनी बाहों में ले लिया। फुलवा ने लाला ठाकुर की गर्मी में खुद को भुलाते हुए दिल में भरे सारे दर्द को आंसुओं के साथ बाहर निकाल दिया।
फुलवा जानती थी कि आज उसे कोई नशा नहीं दिया गया। लेकिन फुलवा को इस आकर्षक लड़के की बाहों में सुकून के साथ उत्तेजना भी महसूस हो रही थी।
फुलवा शरमाकर, “ठाकुरजी, मेरी जिंदगी अब बस एक मर्द से दूसरे मर्द तक बन चुकी है। अगर आप बुरा ना माने तो मुझे दिखाइए की मर्द संग अच्छा भी लग सकता है।“
लाला ठाकुर ने मुस्कुराते हुए फुलवा के बालों में अपनी उंगलियां फेरते हुए उसके माथे को चूमा। फुलवा को आज तक किसी मर्द ने प्यार से सहलाया नही था। फुलवा इस एहसास को सोखते हुए गरमाने लगी। लाला ठाकुर ने फुलवा के बदन पर अपने हाथ को हल्के से घुमाते हुए उसे उसके बदन को गरमाने का एहसास दिया।
फुलवा सिसक उठी। लाला ठाकुर ने फुलवा के बालों को चूमते हुए अपनी उंगलियों से फुलवा के तलवों पर गुदगुदी की। फुलवा हंस पड़ी तो लाला ठाकुर ने फुलवा के गालों को चूमते हुए उसके पैरों की उंगलियों को छेड़ा।
फुलवा की लूटी हुई जवानी नैसर्गिक उत्तेजना से खिलने लगी। लाला ठाकुर ने फुलवा के गले और फिर कंधों को चूमते हुए उसके पेट को चूमा। फुलवा की नाभी में लाला ठाकुर की जीभ ने डुबकी लगाई और वह किकिया उठी।
लाला ठाकुर फुलवा की हालत पर मुस्कुराता उसके घुटनों और ऐड़ियों को चूमते हुए फुलवा की सबसे छोटी उंगलियों को सहलाते हुए चूमने लगा। फुलवा की धड़कनें तेज हो गई और वह उतावली हो कर लाला ठाकुर को कुछ करने को कहने लगी।
लाला ठाकुर ने फुलवा के बुलावे को इशारा मानते हुए ऊपर उठना शुरू किया और अपना क्रम दोहराते हुए फुलवा के होठों तक पहुंचा। लाला ठाकुर फुलवा के थरथराते होठों से एक सांस की दूरी पर रुक गया और फुलवा ने अधीर हो कर लाला ठाकुर को चूम लिया।
एक मासूम कुंवारी का यौन उत्तेजना में जलता भोलापन उस चुंबन में उतर आया था। एक ऐसी सौगात जिसके लिए कौडीमल और शेरा पठान ने बहुत बड़ी कीमत चुकाई थी वह फुलवा ने बिना किसी हिचकिचाहट के लाला ठाकुर को से दिया।
लाला ठाकुर ने भी फुलवा के इस तोहफे का आदर करते हुए उसे अपने अनुभवी होठों से सिखाना शुरू किया। फुलवा ने लाला ठाकुर को अपनी बाहों में लेते हुए उस से सीखना शुरू किया।
होंठ खुले और जीभें एक दूसरे से भिड़ गईं। फुलवा की तीखी कट्यार ने लाला ठाकुर की तेज तलवार से भिड़ते हुए जवानी की चिंगारियां उड़ाई।
फुलवा की चुचियों ने सक्त हो कर लाला ठाकुर के सीने पर रगड़ते हुए उसे अपना स्वाद चखने का न्योता दिया। फुलवा की जवानी ने काम रसों की धारा बहाते हुए अपने प्रेमी को अपने अंदर आने का न्योता दिया। फुलवा की उंगलियों ने अपने नाखूनों से लाला ठाकुर की पीठ पर निशान बनाते हुए उसे अपने ऊपर राज करने का न्योता दिया।
लाला ठाकुर अनुभवी भी था और होशियार भी। लाला ठाकुर ने फुलवा की बाहों में से निकलते हुए उसके कपड़े खोल दिए। इस बार फुलवा न केवल तयार थी पर लाला ठाकुर को अपने बदन से कपड़े उतारने को मदद भी कर रही थी। लाला ठाकुर ने फुलवा की चोली उतार कर उसके मम्मों को चूमते हुए उसकी चूचियों को चूस कर अंदर न बने दूध को पिया। फुलवा झड़ने की कगार पर रोते हुए चीख पड़ी।
लाला ठाकुर ने फुलवा को अधर में लटका कर उसके कसे हुए पेट को चूमते हुए उसका घाघरा खोला। फुलवा अब लाला ठाकुर के सामने नंगी पड़ी थी। लाला ठाकुर अपने कपड़े उतारते हुए नीचे सरकता हुआ फुलवा की चूत पर पहुंचा।
फुलवा ने भागने की कोशिश करते हुए, “ई!!… गंदा!!…”
लाला ठाकुर ने फुलवा की एक न सुनी और उसके पैरों को फैला कर फुलवा के यौन होठों को चूमने लगा। फुलवा इस तरह के सुख पाने को बेखबर चीख पड़ी।
लाला ठाकुर ने फुलवा की भीगी हुई पंखुड़ियों को चूमना शुरू कर और फुलवा ने लाला ठाकुर को रोकना बंद कर दिया। फुलवा की चूत में से बहती धारा की उगम पर लाला ने अपने होठों को लगाकर पीना शुरू किया तो फुलवा ने अपने बालों को खींच कर तड़पना शुरू किया।
लाला ठाकुर की जीभ ने फुलवा की गरम जवानी में डुबकी लगाई और फुलवा चीखते हुए झड़ गई। लाला ठाकुर ने फुलवा को झड़ते रखा जब वह बारी बारी उसकी रसीली पंखुड़ियां, बहती हुई चूत और इनपर चमकते यौन मोती को चूमते हुए चूसता।
लाला ठाकुर ने असहाय हो कर फुलवा को चोदने के लिए उस पर चढ़ने लगा तब फुलवा झड़ कर लगभग बेसुध हो चुकी थी। फुलवा की चूत पर लाला ठाकुर के 7 इंच लंबे 3 इंच मोटे औजार ने दस्तक दी तो फुलवा ने अपनी एड़ियों को लाला ठाकुर के कमर पर बांध लिया।
लाला ठाकुर ने फुलवा की आंखें में देखते हुए गोता लगाया और फुलवा चीखते हुए झड़ गई। फुलवा को अपने अंदर धंसे हुए लाला ठाकुर के औजार पर प्यार आ रहा था पर वह नहीं जानती थी कि वह क्या करे।
लाला ठाकुर ने फुलवा को प्यार का तरीका सिखाते हुए अपनी कमर को हिलाकर उसकी आत्मा तक को हिलाना शुरू कर दिया। फुलवा नादान जवानी में जलती लाला ठाकुर को साथ देने लगी।
लाला ठाकुर ने फुलवा को चूमते हुए उसकी चीखें निगल ली। लाला फुलवा की कुंवारी जवानी को असली तरह से इस्तमाल कर रहा था। फुलवा ने लाला ठाकुर से लिपटकर झड़ते हुए उस से चुधाना जारी रखा।
फुलवा की गर्मी शिखर पर पहुंच कर टूटते हुए बिखर गई। फुलवा ने लाला ठाकुर को कस कर पकड़ लिया। लाला ठाकुर का लौड़ा बुरी तरह निचोड़ लिया गया। लाला ठाकुर ने फुलवा को चोदना जारी रखा पर जैसे ही फुलवा छूट गई फुलवा की रसों से भरी चूत ढीली पड़ गई।
लाला ठाकुर के सबर का बांध टूटा और वह फुलवा को अपनी बाहों में भर कर उसकी गर्मी में खाली हो गया।
फुलवा जानती थी कि वह एक रण्डी थी। अच्छा प्रेमी भी उसके नसीब में सिर्फ एक रात रहेगा। फुलवा इस रात को अपनी पूरी जिंदगी के लिए संजो कर रखना चाहती थी। एक ऐसी रात जब उसने अपनी मर्जी से अपना बदन किसी को दिया हो।
लाला ठाकुर बेहद हुनरमंद प्रेमी था जिस ने फुलवा को हर तरह सुख दिया। पर सबेरे फुलवा ने लाला ठाकुर से सोने का झूठा नाटक करते हुए उसे जाने से नही रोका।
Peter uncle फुलवा पर खुश था की उसने लाला ठाकुर को खुश कर दिया था। Peter uncle ने फुलवा को बताया की अब वह फुलवा को दुबारा कुंवारी नहीं बनाएगा और साथ ही वह फुलवा को 3 दिनों के लिए घुमाने ले जायेगा।
फुलवा ने बुझे हुए स्वर में हां कहा।
Peter uncle फुलवा को अपनी गाड़ी में बिठाकर लखनऊ से कुछ दूरी पर एक बंगले में ले आया। फुलवा को Peter uncle ने ऊपर के कमरे में जाने को कहा और खुद सारे दरवाजे ताले लगाकर बंद करने लगा।
फुलवा को ऊपर के कमरे में से आवाजें आ रही थी तो उसने अंदर झांक कर देखा। फुलवा देख कर चौंक गई की डॉक्टर बेड में नंगा बैठा सेक्स करते लोगों की फिल्म देख रहा था। फुलवा भागने को मुड़ रही थी जब Peter uncle ने उसे पकड़ कर अंदर लाया।
Peter uncle, “Doctor, ये बंगला बेहतरीन है। किसका है ये?”
डॉक्टर, “कौडीमल की बीवी मां बनने की कोशिश करने यहां आती है। अब तुम तो जानते हो की मैं कितना अच्छा इलाज करता हूं। बस समझ लो खुश होकर ये बंगला 3 दिन के लिए दे दिया है।“
फुलवा को डॉक्टर की ओर धकेल कर Peter uncle, “2 बार सिल देने के लिए ये 3 दिन के लिए तुम्हारी है और साथ ही ये कीमती घड़ी भी!”
डॉक्टर भूखी नजरों से फुलवा की ओर बढ़ा। फुलवा अपनी किस्मत से हार कर वहीं खड़ी रही।
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दरवाजा खुला और अंदर आते आदमी को देख फुलवा भी चौंक गई। Peter uncle जिस से बुरी तरह डरा हुआ था वह तो एक आकर्षक लड़का था।
लड़का मुश्किल से फुलवा से बड़ा होगा पर फुलवा अब तक जान चुकी थी कि बेरहम और बुरा होने के लिए बुरा दिखना जरूरी नहीं। फुलवा का बदन सिसकियों से हिलने लगा। फुलवा अपने जोड़े हुए हाथों में रो रही थी।
लड़का, “Peter uncle ने कहा कि तुम कुंवारी हो। क्या यह सच है?”
फुलवा कुछ कह नहीं पाई और रोती रही। लड़का हंस पड़ा।
लड़का, “चलो तुम ने झूठ तो नही कहा! (प्यार से) बताओ क्या Peter uncle ने मेरे बारे में कुछ बताया?”
फुलवा ने रोते हुए अपने सर को हिलाकर ना कहा। फुलवा के पेट में से आवाज आई और लड़का चौंक गया। लड़के ने दरवाजा खोल कर Peter uncle को बुलाया और फुलवा को भूखा रखने के लिए डांटा।
Peter uncle दौड़ते हुए अपनी थाली फुलवा के लिए ले आया। Peter uncle ने दूध के बारे में पूछा पर लड़के को एक नज़र देख कर मुरझाकर चला गया।
लड़के ने फुलवा के आंसू पोंछे। फुलवा लड़के की इस हमदर्दी से डर गई। लड़का सिर्फ मुस्कुराता रहा और उसने फुलवा के लिए खाना लाया।
फुलवा को अपने हाथों से खिलाते हुए लड़का अपने बारे में बताने लगा।
लड़का, “मेरा नाम लाला ठाकुर है। मैं इन बदनाम गलियों में किसी ऐसे को ढूंढ रहा हूं जो आज से कुछ 10 साल पहले इसी रास्ते गए थे। Peter uncle मुझसे डरता है क्योंकि मेरे पास वह हथियार है जो किसी के पास नही। (फुलवा ने डर कर लड़के को देखा) जानकारी!!… बेहद कारगर और खतरनाक हथियार।“
फुलवा को खाना खिलाकर पानी पिलाते हुए लाला, “मैं तुम्हें यहां से नही छुड़ा सकता। मुझे Peter uncle की जरूरत है। मैने तुम्हारे लिए कोई कीमत नहीं चुकाई। Peter uncle ने डर कर तुम्हें नजराने के तौर पर मुझे दिया है। मैने आज तक किसी के साथ रात गुजारने की कीमत नही चुकाई। आज तुम्हारे लिए मैं कीमत चुकाऊंगा!”
फुलवा ने अपने सर को झुका लिया पर लाला ठाकुर ने फुलवा का चेहरा अपने हाथों में लिया।
लाला ठाकुर, “बोलो, आजादी के अलावा मैं तुम्हें क्या दे सकता हूं?”
फुलवा, “आप मुझे कुछ देंगे?”
लाला ठाकुर, “आज़ादी छोड़ कुछ भी!”
फुलवा ने लाला ठाकुर की आंखों में सच्चाई देख कर, “मेरे गांव में मेरे भाई मुझे ढूंढ रहे होंगे तो उन्हें बताना की अब फुलवा को भूल जाओ! मैने तुम्हारी बात नही मानी और बापू ने मुझे अब लौटने लायक नही छोड़ा! उन से… उन से कहना की वह खुद को संभालें और मुझे भूल जाएं।“
फुलवा रोने लगी और लाला ठाकुर ने उसे अपनी बाहों में ले लिया। फुलवा ने लाला ठाकुर की गर्मी में खुद को भुलाते हुए दिल में भरे सारे दर्द को आंसुओं के साथ बाहर निकाल दिया।
फुलवा जानती थी कि आज उसे कोई नशा नहीं दिया गया। लेकिन फुलवा को इस आकर्षक लड़के की बाहों में सुकून के साथ उत्तेजना भी महसूस हो रही थी।
फुलवा शरमाकर, “ठाकुरजी, मेरी जिंदगी अब बस एक मर्द से दूसरे मर्द तक बन चुकी है। अगर आप बुरा ना माने तो मुझे दिखाइए की मर्द संग अच्छा भी लग सकता है।“
लाला ठाकुर ने मुस्कुराते हुए फुलवा के बालों में अपनी उंगलियां फेरते हुए उसके माथे को चूमा। फुलवा को आज तक किसी मर्द ने प्यार से सहलाया नही था। फुलवा इस एहसास को सोखते हुए गरमाने लगी। लाला ठाकुर ने फुलवा के बदन पर अपने हाथ को हल्के से घुमाते हुए उसे उसके बदन को गरमाने का एहसास दिया।
फुलवा सिसक उठी। लाला ठाकुर ने फुलवा के बालों को चूमते हुए अपनी उंगलियों से फुलवा के तलवों पर गुदगुदी की। फुलवा हंस पड़ी तो लाला ठाकुर ने फुलवा के गालों को चूमते हुए उसके पैरों की उंगलियों को छेड़ा।
फुलवा की लूटी हुई जवानी नैसर्गिक उत्तेजना से खिलने लगी। लाला ठाकुर ने फुलवा के गले और फिर कंधों को चूमते हुए उसके पेट को चूमा। फुलवा की नाभी में लाला ठाकुर की जीभ ने डुबकी लगाई और वह किकिया उठी।
लाला ठाकुर फुलवा की हालत पर मुस्कुराता उसके घुटनों और ऐड़ियों को चूमते हुए फुलवा की सबसे छोटी उंगलियों को सहलाते हुए चूमने लगा। फुलवा की धड़कनें तेज हो गई और वह उतावली हो कर लाला ठाकुर को कुछ करने को कहने लगी।
लाला ठाकुर ने फुलवा के बुलावे को इशारा मानते हुए ऊपर उठना शुरू किया और अपना क्रम दोहराते हुए फुलवा के होठों तक पहुंचा। लाला ठाकुर फुलवा के थरथराते होठों से एक सांस की दूरी पर रुक गया और फुलवा ने अधीर हो कर लाला ठाकुर को चूम लिया।
एक मासूम कुंवारी का यौन उत्तेजना में जलता भोलापन उस चुंबन में उतर आया था। एक ऐसी सौगात जिसके लिए कौडीमल और शेरा पठान ने बहुत बड़ी कीमत चुकाई थी वह फुलवा ने बिना किसी हिचकिचाहट के लाला ठाकुर को से दिया।
लाला ठाकुर ने भी फुलवा के इस तोहफे का आदर करते हुए उसे अपने अनुभवी होठों से सिखाना शुरू किया। फुलवा ने लाला ठाकुर को अपनी बाहों में लेते हुए उस से सीखना शुरू किया।
होंठ खुले और जीभें एक दूसरे से भिड़ गईं। फुलवा की तीखी कट्यार ने लाला ठाकुर की तेज तलवार से भिड़ते हुए जवानी की चिंगारियां उड़ाई।
फुलवा की चुचियों ने सक्त हो कर लाला ठाकुर के सीने पर रगड़ते हुए उसे अपना स्वाद चखने का न्योता दिया। फुलवा की जवानी ने काम रसों की धारा बहाते हुए अपने प्रेमी को अपने अंदर आने का न्योता दिया। फुलवा की उंगलियों ने अपने नाखूनों से लाला ठाकुर की पीठ पर निशान बनाते हुए उसे अपने ऊपर राज करने का न्योता दिया।
लाला ठाकुर अनुभवी भी था और होशियार भी। लाला ठाकुर ने फुलवा की बाहों में से निकलते हुए उसके कपड़े खोल दिए। इस बार फुलवा न केवल तयार थी पर लाला ठाकुर को अपने बदन से कपड़े उतारने को मदद भी कर रही थी। लाला ठाकुर ने फुलवा की चोली उतार कर उसके मम्मों को चूमते हुए उसकी चूचियों को चूस कर अंदर न बने दूध को पिया। फुलवा झड़ने की कगार पर रोते हुए चीख पड़ी।
लाला ठाकुर ने फुलवा को अधर में लटका कर उसके कसे हुए पेट को चूमते हुए उसका घाघरा खोला। फुलवा अब लाला ठाकुर के सामने नंगी पड़ी थी। लाला ठाकुर अपने कपड़े उतारते हुए नीचे सरकता हुआ फुलवा की चूत पर पहुंचा।
फुलवा ने भागने की कोशिश करते हुए, “ई!!… गंदा!!…”
लाला ठाकुर ने फुलवा की एक न सुनी और उसके पैरों को फैला कर फुलवा के यौन होठों को चूमने लगा। फुलवा इस तरह के सुख पाने को बेखबर चीख पड़ी।
लाला ठाकुर ने फुलवा की भीगी हुई पंखुड़ियों को चूमना शुरू कर और फुलवा ने लाला ठाकुर को रोकना बंद कर दिया। फुलवा की चूत में से बहती धारा की उगम पर लाला ने अपने होठों को लगाकर पीना शुरू किया तो फुलवा ने अपने बालों को खींच कर तड़पना शुरू किया।
लाला ठाकुर की जीभ ने फुलवा की गरम जवानी में डुबकी लगाई और फुलवा चीखते हुए झड़ गई। लाला ठाकुर ने फुलवा को झड़ते रखा जब वह बारी बारी उसकी रसीली पंखुड़ियां, बहती हुई चूत और इनपर चमकते यौन मोती को चूमते हुए चूसता।
लाला ठाकुर ने असहाय हो कर फुलवा को चोदने के लिए उस पर चढ़ने लगा तब फुलवा झड़ कर लगभग बेसुध हो चुकी थी। फुलवा की चूत पर लाला ठाकुर के 7 इंच लंबे 3 इंच मोटे औजार ने दस्तक दी तो फुलवा ने अपनी एड़ियों को लाला ठाकुर के कमर पर बांध लिया।
लाला ठाकुर ने फुलवा की आंखें में देखते हुए गोता लगाया और फुलवा चीखते हुए झड़ गई। फुलवा को अपने अंदर धंसे हुए लाला ठाकुर के औजार पर प्यार आ रहा था पर वह नहीं जानती थी कि वह क्या करे।
लाला ठाकुर ने फुलवा को प्यार का तरीका सिखाते हुए अपनी कमर को हिलाकर उसकी आत्मा तक को हिलाना शुरू कर दिया। फुलवा नादान जवानी में जलती लाला ठाकुर को साथ देने लगी।
लाला ठाकुर ने फुलवा को चूमते हुए उसकी चीखें निगल ली। लाला फुलवा की कुंवारी जवानी को असली तरह से इस्तमाल कर रहा था। फुलवा ने लाला ठाकुर से लिपटकर झड़ते हुए उस से चुधाना जारी रखा।
फुलवा की गर्मी शिखर पर पहुंच कर टूटते हुए बिखर गई। फुलवा ने लाला ठाकुर को कस कर पकड़ लिया। लाला ठाकुर का लौड़ा बुरी तरह निचोड़ लिया गया। लाला ठाकुर ने फुलवा को चोदना जारी रखा पर जैसे ही फुलवा छूट गई फुलवा की रसों से भरी चूत ढीली पड़ गई।
लाला ठाकुर के सबर का बांध टूटा और वह फुलवा को अपनी बाहों में भर कर उसकी गर्मी में खाली हो गया।
फुलवा जानती थी कि वह एक रण्डी थी। अच्छा प्रेमी भी उसके नसीब में सिर्फ एक रात रहेगा। फुलवा इस रात को अपनी पूरी जिंदगी के लिए संजो कर रखना चाहती थी। एक ऐसी रात जब उसने अपनी मर्जी से अपना बदन किसी को दिया हो।
लाला ठाकुर बेहद हुनरमंद प्रेमी था जिस ने फुलवा को हर तरह सुख दिया। पर सबेरे फुलवा ने लाला ठाकुर से सोने का झूठा नाटक करते हुए उसे जाने से नही रोका।
Peter uncle फुलवा पर खुश था की उसने लाला ठाकुर को खुश कर दिया था। Peter uncle ने फुलवा को बताया की अब वह फुलवा को दुबारा कुंवारी नहीं बनाएगा और साथ ही वह फुलवा को 3 दिनों के लिए घुमाने ले जायेगा।
फुलवा ने बुझे हुए स्वर में हां कहा।
Peter uncle फुलवा को अपनी गाड़ी में बिठाकर लखनऊ से कुछ दूरी पर एक बंगले में ले आया। फुलवा को Peter uncle ने ऊपर के कमरे में जाने को कहा और खुद सारे दरवाजे ताले लगाकर बंद करने लगा।
फुलवा को ऊपर के कमरे में से आवाजें आ रही थी तो उसने अंदर झांक कर देखा। फुलवा देख कर चौंक गई की डॉक्टर बेड में नंगा बैठा सेक्स करते लोगों की फिल्म देख रहा था। फुलवा भागने को मुड़ रही थी जब Peter uncle ने उसे पकड़ कर अंदर लाया।
Peter uncle, “Doctor, ये बंगला बेहतरीन है। किसका है ये?”
डॉक्टर, “कौडीमल की बीवी मां बनने की कोशिश करने यहां आती है। अब तुम तो जानते हो की मैं कितना अच्छा इलाज करता हूं। बस समझ लो खुश होकर ये बंगला 3 दिन के लिए दे दिया है।“
फुलवा को डॉक्टर की ओर धकेल कर Peter uncle, “2 बार सिल देने के लिए ये 3 दिन के लिए तुम्हारी है और साथ ही ये कीमती घड़ी भी!”
डॉक्टर भूखी नजरों से फुलवा की ओर बढ़ा। फुलवा अपनी किस्मत से हार कर वहीं खड़ी रही।
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