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फुलवा के लिए वह रात बड़ी डरावनी रही। हर आहट हर आवाज उसे उठाती। फुलवा को समझ नहीं आ रहा था कि वह किससे डर रही थी।
पुलिस या राज नर्तकी!
सुबह बंटी ने फुलवा को पानी लाकर दिया और फुलवा सड़क किनारे झाड़ियों में नहाकर साफ कपड़े पहन कर गाड़ी में बैठ गई।
फुलवा ने बंटी को देखा। 21 वर्ष का आकर्षक मर्द जो बबलू की तरह उससे सिर्फ 3 साल बड़ा था। शेखर सबसे बड़ा 24 साल का जो उम्र के नौवें साल से उनका मां और बाप था।
सुबह पौ फटते हुए बबलू लौट आया था और उसने बताया कि शेखर भैया माल को ठिकाने लगाकर ट्रक को बेचेंगे। दोपहर के करीब शेखर आया और उसके हाथ में एक बड़ी बैग थी।
शेखर ने बताया कि उसने स्मगलिंग का माल जला दिया था ताकि कोई उन्हें ढूंढ ना पाए और ट्रक को पुर्जों में तोड़ कर बेच दिया जिस से उन्हें 1 लाख रुपए मिले थे!
फुलवा को याद आया की वह भी इतने में ही बिकी थी।
पैसों के चार हिस्से किए गए। बबलू और बंटी अपने हिस्से के पैसे उड़ाकर मौज करना चाहते थे लेकिन फुलवा अपने पैसे बचा कर रखना चाहती थी। इसी वजह से सब लोग शहर पहुंचे और शेखर ने फुलवा के लिए बैंक खाता खोला।
फुलवा और शेखर के साझे खाते में 25 हजार जमा हो गए। उस दिन सब ने जम कर खाया और तीनों भाइयों ने खूब शराब पी।
रात को फुलवा को अच्छे से चोदते हुए तीनों भाइयों ने एक साथ उसका हर छेद चोदा। सबेरे तक हर भाई ने फुलवा के हर छेद को दो बार भर दिया था और फुलवा गाड़ी के बीच झड़ कर अधमरी पड़ी थी। फुलवा के हर छेद में से बाहर बहता वीर्य कल रात की दास्तान बयान कर रहा था।
फुलवा सबेरे के करीब थक कर सोई और खाने की महक से जाग गई। किसी तरह अपनी कुटे हुए यौन अंगों को ढक कर फुलवा ने बाहर झांका तो शेखर को अखबार पढ़ता पाया।
फुलवा कपड़े पहन कर बाहर आई।
फुलवा, “भैया आप पढ़ना सीख गए?”
शेखर मुस्कुराकर, “यही हमारी सफलता का राज़ है। सबको लगता है की मैं अनपढ़ हूं और मुझे पता चल जाता है की माल कब और कैसे जा रहा है।“
फुलवा डरकर, “क्या हमारा जिक्र किया गया है?”
शेखर ने अजीब नजर से फुलवा को देखते हुए, “यही की एक ट्रक रास्ते से लापता है और पुलिस ट्रक को ढूंढने की कोशिश कर रही है। डरो मत! हमने कोई सबूत नहीं छोड़ा!”
फुलवा, “पर वहां इस्तमाल किए हुए कंडोम पड़े थे!”
शेखर, “इन लोगों के इस्तमाल किए कंडोम पड़े रहते हैं! कोई बड़ी बात नहीं!”
फुलवा, “भैय्या! आप सच कह रहे हो ना?”
शेखर, “अरे मेरी फुलू रानी मैं झूठ क्यों बोलूं?”
फुलवा, “तो इतना क्या पढ़ रहे थे?”
शेखर हंसते हुए, “मजेदार किस्सा आया है। लखनऊ का कौडीमल सेठ बच्चा ना होने की वजह से दिल्ली के डॉक्टर से मिला। डॉक्टर ने कहा कि वह कभी बाप नही बन सकता। जब वह यह बात बताने घर पहुंचा तो उसकी बीवी ने बताया की वह गर्भवती हो गई है। कौडीमल सेठ ने पूछताछ की तो उसे पता चला की उसकी बीवी के जनाना बीमारी वाले डॉक्टर ने उसकी बीवी को नींद का इंजेक्शन लगाकर अपना इंजेक्शन चलाया था। गुस्से से पागल कौडीमल ने शेरा पठान नाम के नामी गुंडे को डॉक्टर को मारने को कहा। डॉक्टर का कत्ल कर बाहर निकलता शेरा पठान डॉक्टर की दूसरी मरीज़ से टकराया जो की पुलिस कमिश्नर की बीवी थी।“
हैरानी से फुलवा सुन रही थी जब शेखर ने आगे पढ़ना जारी रखा।
शेखर, “कमिश्नर के अंगरक्षकों ने शेरा पठान को गिरफ्तार कर लिया और जल्द ही सारा खुलासा हो गया। कौडीमल ने डर कर खुदकुशी कर ली और अब डॉक्टर की होने वाली औलाद उसके पूरे जायदाद की वारिस है। शेरा पठान ने कई कत्ल किए हैं और जेल में उसके दुश्मनों के हाथों उसका मरना तय है।“
फुलवा को अचानक एहसास हुआ कि उसकी इज्जत लूटने के लिए जिम्मेदार लोगों में से उसका बापू और पीटर अंकल छोड़ सब लोग मर चुके हैं। क्या यह इंसाफ है या फुलवा की मनहुसी का असर?
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पुलिस या राज नर्तकी!
सुबह बंटी ने फुलवा को पानी लाकर दिया और फुलवा सड़क किनारे झाड़ियों में नहाकर साफ कपड़े पहन कर गाड़ी में बैठ गई।
फुलवा ने बंटी को देखा। 21 वर्ष का आकर्षक मर्द जो बबलू की तरह उससे सिर्फ 3 साल बड़ा था। शेखर सबसे बड़ा 24 साल का जो उम्र के नौवें साल से उनका मां और बाप था।
सुबह पौ फटते हुए बबलू लौट आया था और उसने बताया कि शेखर भैया माल को ठिकाने लगाकर ट्रक को बेचेंगे। दोपहर के करीब शेखर आया और उसके हाथ में एक बड़ी बैग थी।
शेखर ने बताया कि उसने स्मगलिंग का माल जला दिया था ताकि कोई उन्हें ढूंढ ना पाए और ट्रक को पुर्जों में तोड़ कर बेच दिया जिस से उन्हें 1 लाख रुपए मिले थे!
फुलवा को याद आया की वह भी इतने में ही बिकी थी।
पैसों के चार हिस्से किए गए। बबलू और बंटी अपने हिस्से के पैसे उड़ाकर मौज करना चाहते थे लेकिन फुलवा अपने पैसे बचा कर रखना चाहती थी। इसी वजह से सब लोग शहर पहुंचे और शेखर ने फुलवा के लिए बैंक खाता खोला।
फुलवा और शेखर के साझे खाते में 25 हजार जमा हो गए। उस दिन सब ने जम कर खाया और तीनों भाइयों ने खूब शराब पी।
रात को फुलवा को अच्छे से चोदते हुए तीनों भाइयों ने एक साथ उसका हर छेद चोदा। सबेरे तक हर भाई ने फुलवा के हर छेद को दो बार भर दिया था और फुलवा गाड़ी के बीच झड़ कर अधमरी पड़ी थी। फुलवा के हर छेद में से बाहर बहता वीर्य कल रात की दास्तान बयान कर रहा था।
फुलवा सबेरे के करीब थक कर सोई और खाने की महक से जाग गई। किसी तरह अपनी कुटे हुए यौन अंगों को ढक कर फुलवा ने बाहर झांका तो शेखर को अखबार पढ़ता पाया।
फुलवा कपड़े पहन कर बाहर आई।
फुलवा, “भैया आप पढ़ना सीख गए?”
शेखर मुस्कुराकर, “यही हमारी सफलता का राज़ है। सबको लगता है की मैं अनपढ़ हूं और मुझे पता चल जाता है की माल कब और कैसे जा रहा है।“
फुलवा डरकर, “क्या हमारा जिक्र किया गया है?”
शेखर ने अजीब नजर से फुलवा को देखते हुए, “यही की एक ट्रक रास्ते से लापता है और पुलिस ट्रक को ढूंढने की कोशिश कर रही है। डरो मत! हमने कोई सबूत नहीं छोड़ा!”
फुलवा, “पर वहां इस्तमाल किए हुए कंडोम पड़े थे!”
शेखर, “इन लोगों के इस्तमाल किए कंडोम पड़े रहते हैं! कोई बड़ी बात नहीं!”
फुलवा, “भैय्या! आप सच कह रहे हो ना?”
शेखर, “अरे मेरी फुलू रानी मैं झूठ क्यों बोलूं?”
फुलवा, “तो इतना क्या पढ़ रहे थे?”
शेखर हंसते हुए, “मजेदार किस्सा आया है। लखनऊ का कौडीमल सेठ बच्चा ना होने की वजह से दिल्ली के डॉक्टर से मिला। डॉक्टर ने कहा कि वह कभी बाप नही बन सकता। जब वह यह बात बताने घर पहुंचा तो उसकी बीवी ने बताया की वह गर्भवती हो गई है। कौडीमल सेठ ने पूछताछ की तो उसे पता चला की उसकी बीवी के जनाना बीमारी वाले डॉक्टर ने उसकी बीवी को नींद का इंजेक्शन लगाकर अपना इंजेक्शन चलाया था। गुस्से से पागल कौडीमल ने शेरा पठान नाम के नामी गुंडे को डॉक्टर को मारने को कहा। डॉक्टर का कत्ल कर बाहर निकलता शेरा पठान डॉक्टर की दूसरी मरीज़ से टकराया जो की पुलिस कमिश्नर की बीवी थी।“
हैरानी से फुलवा सुन रही थी जब शेखर ने आगे पढ़ना जारी रखा।
शेखर, “कमिश्नर के अंगरक्षकों ने शेरा पठान को गिरफ्तार कर लिया और जल्द ही सारा खुलासा हो गया। कौडीमल ने डर कर खुदकुशी कर ली और अब डॉक्टर की होने वाली औलाद उसके पूरे जायदाद की वारिस है। शेरा पठान ने कई कत्ल किए हैं और जेल में उसके दुश्मनों के हाथों उसका मरना तय है।“
फुलवा को अचानक एहसास हुआ कि उसकी इज्जत लूटने के लिए जिम्मेदार लोगों में से उसका बापू और पीटर अंकल छोड़ सब लोग मर चुके हैं। क्या यह इंसाफ है या फुलवा की मनहुसी का असर?
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